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  • ADR रिपोर्ट में खुलासा: BSP को 19 साल से नहीं मिला बड़ा चंदा, BJP को मिला भारी फंड

    ADR रिपोर्ट में खुलासा: BSP को 19 साल से नहीं मिला बड़ा चंदा, BJP को मिला भारी फंड

     
    नई दिल्ली। देश की राजनीति में फंडिंग को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। Association for Democratic Reforms (ADR) की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, जिसमें बताया गया है कि Bahujan Samaj Party (बसपा) ने पिछले 19 वर्षों से 20,000 रुपये से अधिक का कोई चंदा मिलने की जानकारी नहीं दी है। यह लगातार एक जैसा दावा अब पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।

    19 साल से एक जैसा दावा, चर्चा तेज

    रिपोर्ट के मुताबिक, बसपा ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी यही बताया कि उसे 20,000 रुपये से अधिक का कोई दान नहीं मिला। पिछले करीब दो दशकों से पार्टी का यह रुख बना हुआ है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा और जांच का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने लंबे समय तक ऐसा दावा होना असामान्य है और इससे फंडिंग की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

    कुल चंदे में 161% की बड़ी बढ़ोतरी

     रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में राष्ट्रीय दलों को मिलने वाले कुल चंदे में 161% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस दौरान 11,343 दानदाताओं से कुल 6,648.56 करोड़ रुपये का योगदान मिला। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 4,104.28 करोड़ रुपये ज्यादा है, जो राजनीतिक फंडिंग में तेजी को दर्शाता है।

    बीजेपी सबसे आगे, रिकॉर्ड फंडिंग

    Bharatiya Janata Party (बीजेपी) को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। पार्टी को 5,522 दानदाताओं से 6,074.01 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जो अन्य सभी राष्ट्रीय दलों के कुल चंदे से करीब 10 गुना ज्यादा है। यह बढ़त भारतीय राजनीति में बीजेपी की मजबूत फंडिंग स्थिति को दिखाती है।

    कांग्रेस और अन्य दलों में भी उछाल

    Indian National Congress (कांग्रेस) को भी चंदे में बड़ा इजाफा देखने को मिला है। 2023-24 में जहां पार्टी को 281.48 करोड़ रुपये मिले थे, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 517.39 करोड़ रुपये हो गया यानी करीब 84% की वृद्धि। वहीं Aam Aadmi Party (आप) को 27.04 करोड़ रुपये (244% वृद्धि) और National People’s Party (एनपीपी) को 1.94 करोड़ रुपये (1313% वृद्धि) का चंदा मिला है, जो छोटे दलों के लिए उल्लेखनीय उछाल है।

    पारदर्शिता पर उठे सवाल

    रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बीजेपी का चंदा अन्य प्रमुख दलों—कांग्रेस, आप, माकपा और एनपीपी—के संयुक्त चंदे से भी कई गुना ज्यादा है। वहीं, बसपा द्वारा लगातार 19 वर्षों से 20,000 रुपये से अधिक का चंदा न दिखाना राजनीतिक फंडिंग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मुद्दा सिर्फ एक पार्टी तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राजनीतिक फंडिंग सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को उजागर करता है।

    बहस का बना मुद्दा

    राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। ADR की यह रिपोर्ट एक बार फिर इस मुद्दे को केंद्र में ले आई है। आने वाले समय में इस पर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर बहस तेज होने की संभावना है।

  • सिनेमाघरों में पहले पहुंचेगी वाल्मिकी रामायण फर्स्ट लुक ने जगाई भक्ति और भव्यता की लहर

    सिनेमाघरों में पहले पहुंचेगी वाल्मिकी रामायण फर्स्ट लुक ने जगाई भक्ति और भव्यता की लहर


    नई दिल्ली । राम नवमी के पावन अवसर पर भारतीय सिनेमा को एक और भव्य पौराणिक प्रस्तुति की झलक देखने को मिली जब फिल्म वाल्मिकी रामायण का पहला लुक जारी किया गया। इस खास मौके पर सामने आए पोस्टर ने दर्शकों के मन में श्रद्धा और उत्सुकता दोनों को एक साथ जगा दिया। पोस्टर में भगवान राम के चरणों की झलक दिखाई गई है जो फिल्म की आध्यात्मिक गहराई और उसके भावनात्मक पक्ष को उजागर करती है। इस फिल्म को Bhavna Talwar निर्देशित कर रही हैं और यह 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    यह फिल्म इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि यह Ranbir Kapoor की बहुचर्चित फिल्म रामायण से पहले बड़े पर्दे पर दस्तक देगी। जहां एक ओर रणबीर कपूर की फिल्म को लेकर पहले से ही जबरदस्त बज बना हुआ है वहीं वाल्मिकी रामायण की एंट्री ने इस प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बना दिया है। दर्शकों को अब एक ही साल में रामायण की दो अलग अलग व्याख्याएं देखने का मौका मिलने वाला है।

    वाल्मिकी रामायण की टीम भी इसे खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है। फिल्म से जुड़े नाम इसकी भव्यता का अंदाजा खुद ही दे देते हैं। मशहूर प्रोडक्शन डिजाइनर Sabu Cyril जो बाहुबली जैसी फिल्मों में अपनी कला का लोहा मनवा चुके हैं इस प्रोजेक्ट का हिस्सा हैं। इसके अलावा सिनेमैटोग्राफी की जिम्मेदारी Binod Pradhan संभाल रहे हैं जबकि साउंड डिजाइन के लिए ऑस्कर विजेता Resul Pookutty जुड़े हुए हैं। फिल्म का स्क्रीनप्ले Anand Neelakantan ने लिखा है और डायलॉग्स Chandraprakash Dwivedi द्वारा तैयार किए गए हैं। इस मजबूत टीम के चलते फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं।

    हालांकि फिल्म के ऐलान के साथ ही सोशल मीडिया पर मिली जुली प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिली हैं। कुछ यूजर्स ने फिल्म के लुक की तारीफ की और इसे भव्य और आध्यात्मिक बताया वहीं कुछ ने सवाल उठाए कि क्या यह फिल्म एनिमेशन आधारित होगी या इसमें एआई का इस्तेमाल किया गया है। कई लोगों ने यह भी कहा कि लगातार बन रही रामायण फिल्मों के बीच कहीं कहानी की मौलिकता प्रभावित न हो जाए।

    दूसरी ओर Nitesh Tiwari द्वारा निर्देशित रणबीर कपूर की रामायण भी लगातार चर्चा में बनी हुई है। इस फिल्म को दो भागों में रिलीज किया जाएगा और इसका पहला पार्ट दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में आने की तैयारी में है। इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम के किरदार में नजर आएंगे जबकि साउथ की लोकप्रिय अभिनेत्री साई पल्लवी माता सीता की भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा Sunny Deol Yash और Lara Dutta जैसे बड़े नाम भी इसमें शामिल हैं।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो साल 2026 भारतीय सिनेमा में रामायण की कहानियों के नाम रहने वाला है। एक तरफ वाल्मिकी रामायण अपनी पारंपरिक और शास्त्रीय प्रस्तुति के साथ दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश करेगी वहीं दूसरी तरफ रणबीर कपूर की फिल्म आधुनिक तकनीक और बड़े स्टारकास्ट के साथ नई पीढ़ी को लुभाने का प्रयास करेगी। अब देखना यह होगा कि दर्शक किस प्रस्तुति को ज्यादा पसंद करते हैं और कौन सी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बाजी मारती है।

  • योगी सरकार का बड़ा फैसला: 25 हजार करोड़ का MoU रद्द, Puch AI डील पर ब्रेक

    योगी सरकार का बड़ा फैसला: 25 हजार करोड़ का MoU रद्द, Puch AI डील पर ब्रेक


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बड़े निवेश के दावों को उस वक्त झटका लगा, जब राज्य सरकार ने ‘Puch AI’ कंपनी के साथ हुआ 25,000 करोड़ रुपये का समझौता (MoU) महज चार दिनों के भीतर रद्द कर दिया। जांच में कंपनी की वित्तीय स्थिति और दस्तावेज संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया।

    जांच में खुली कंपनी की सच्चाई
    Invest UP के CEO विजय किरन आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर MoU की समीक्षा की गई। कंपनी को नोटिस भेजकर उसका बिजनेस प्लान, वित्तीय स्थिति और DPR (Detailed Project Report) मांगी गई थी। जवाब देने के लिए 3 दिन का समय दिया गया, लेकिन कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

    समय पर नहीं दिए जरूरी दस्तावेज
    सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार, 23 मार्च 2026 को समझौते के बाद जब कंपनी की गहराई से जांच की गई तो कई खामियां सामने आईं। कंपनी जरूरी दस्तावेज समय पर जमा नहीं कर सकी वित्तीय स्थिति कमजोर पाई गई निवेश के लिए फंड का स्रोत स्पष्ट नहीं था इन वजहों से सरकार को MoU रद्द करना पड़ा। इस निवेश को लेकर पहले से ही सवाल उठ रहे थे। अखिलेश यादव ने 25,000 करोड़ रुपये के इस निवेश पर सरकार को घेरा था और इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।

    सरकार ने क्यों लिया फैसला
    सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना के लिए कंपनी के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही भरोसेमंद दस्तावेज। सभी पहलुओं की जांच के बाद राज्य सरकार ने फिलहाल इस समझौते को रद्द कर दिया है, ताकि किसी भी तरह के जोखिम से बचा जा सके।

    क्या है पूरा मामला
    उत्तर प्रदेश सरकार निवेश बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े समझौते कर रही है। इसी कड़ी में ‘Puch AI’ के साथ 25,000 करोड़ रुपये का MoU किया गया था। लेकिन शुरुआती जांच में ही कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठ गए, जिसके चलते यह बड़ा निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही रद्द हो गया।

  • मध्य प्रदेश में बिश्नोई गैंग के नेटवर्क का खुलासा, अशोकनगर से कई शहरों तक फैली साजिश

    मध्य प्रदेश में बिश्नोई गैंग के नेटवर्क का खुलासा, अशोकनगर से कई शहरों तक फैली साजिश


    अशोकनगर । मध्य प्रदेश में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम पर रंगदारी और दहशत फैलाने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अशोकनगर से शुरू हुआ यह मामला अब इंदौर, भोपाल और अन्य शहरों तक फैल चुका है, जिससे पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर जांच एसटीएफ को सौंप दी है।

    आईपीएस राहुल लोढ़ा को सौंपी गई जिम्मेदारी

    इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच के लिए आईपीएस अधिकारी राहुल कुमार लोढ़ा को एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है। उनके नेतृत्व में 4 पुलिस अधीक्षक (एसपी) और 4 डीएसपी स्तर के अधिकारियों की टीम गठित की गई है। टीम का उद्देश्य अंतरराज्यीय संगठित अपराध नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचकर उसे खत्म करना है।

    अशोकनगर से हुई थी शुरुआत

    मामले की शुरुआत 12 फरवरी को अशोकनगर में हुई थी, जब व्यापारी अंकित अग्रवाल से ‘हैरी बॉक्सर’ नाम से व्हाट्सएप और वीडियो कॉल के जरिए 10 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की।

    गिरफ्तारी के बाद चौंकाने वाले खुलासे

    जांच के दौरान पुलिस ने जयपुर के 19 वर्षीय आरोपी मनीष जांगिड़ को गिरफ्तार किया। उसके पास से शहर के अहम स्थानों की रेकी के वीडियो बरामद हुए, जिन्हें विदेश भेजा जा रहा था। आरोपी के कब्जे से 6 पेट्रोल बम, मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई, जिससे किसी बड़ी साजिश की आशंका जताई जा रही है।

    कई शहरों तक फैला गिरोह

    पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क सिर्फ अशोकनगर तक सीमित नहीं है, बल्कि इंदौर, भोपाल और खरगोन जैसे शहरों में भी इसके तार जुड़े हैं। इन सभी मामलों को अब एसआईटी को सौंप दिया गया है ताकि एकीकृत तरीके से जांच की जा सके।

    दर्ज मामले (अपराध क्रमांक और धाराएं)

    अशोकनगर कोतवाली: 101/2026, 308(1), 308(2), 351(2)
    इंदौर (किशनगंज): 112/2026, 308(5), 351(4)
    इंदौर (तुकोगंज): 155/2026, 308(5), 351(4)
    भोपाल (कोलार रोड): 183/2026, 351(4)
    खरगोन (कसरावद): 94/2026, 308(4), 351(3)
    इंदौर क्राइम ब्रांच: 22/2026, 308(5), 351(4)

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एसआईटी इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और जल्द ही अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावना है।

  • “मां का सम” में मां-बेटे का अनोखा रिश्ता, ट्रेलर में दिखा इमोशन और ह्यूमर का संगम

    “मां का सम” में मां-बेटे का अनोखा रिश्ता, ट्रेलर में दिखा इमोशन और ह्यूमर का संगम


    नई दिल्ली:ओटीटी प्लेटफॉर्म पर दर्शकों को अब ऐसी कहानियां पसंद आ रही हैं जिनमें रिश्तों की गहराई, भावनाओं और हल्का-फुल्का ह्यूमर तीनों का शानदार मेल हो। इसी कड़ी में नई वेब सीरीज “मां का सम” काफी चर्चा में है। इस सीरीज में मां-बेटे के रिश्ते को बेहद अनोखे और दिल छू लेने वाले अंदाज में पेश किया गया है। मुख्य भूमिका में मोना सिंह और मिहिर आहूजा नजर आएंगे।

    ट्रेलर की शुरुआत 19 साल के गणितीय जीनियस अगस्त्य मिहिर आहूजा से होती है। वह हर चीज को फार्मूला और लॉजिक से समझता है और कहता है -मैथ्स हो या प्यार, दोनों एक ही इक्वेशन हैं। अपनी मां विनिता मोना सिंह की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए अगस्त्य एक अनोखा मिशन शुरू करता है जिसे वह प्रोजेक्ट मॉम कहता है। इस मिशन के तहत वह अपनी सिंगल मदर के लिए परफेक्ट पार्टनर खोजने की पूरी कोशिश करता है।

    ट्रेलर में दिखाया गया है कि अगस्त्य अलग-अलग लोगों के व्यवहार और स्वभाव को समझकर अपनी मां के लिए सही साथी चुनने की कोशिश करता है। लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह साफ हो जाता है कि प्यार को किसी फार्मूले में नहीं बांधा जा सकता। इस दौरान कई मजेदार और भावनात्मक पल सामने आते हैं, जहां अगस्त्य की पूरी प्लानिंग उलझ जाती है और जिंदगी उसे नए सबक सिखाती है।

    मोना सिंह ने अपने किरदार के बारे में कहा, यह रोल मेरे लिए बेहद खास है। विनिता अपनी भावनाओं को खुलकर जीती हैं और अपने बेटे के साथ दोस्त जैसा रिश्ता रखती हैं। कहानी में मां का अपने बेटे पर भरोसा और बेटे का अपनी मां के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। यह रोल हंसी और इमोशन का बेहतरीन संतुलन पेश करता है।

    मिहिर आहूजा ने अगस्त्य के किरदार पर कहा, बाहर से वह जितना समझदार और आत्मविश्वासी दिखता है, अंदर से उतना ही भावुक बेटा है। वह अपनी मां से बहुत प्यार करता है और चाहता है कि उनकी जिंदगी खुशहाल रहे। मां-बेटे का दोस्ताना रिश्ता और अपनापन ही इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत है।

    वेब सीरीज “मां का सम” 3 अप्रैल से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होगी। यह कहानी दर्शकों को हंसी, भावनाओं और रिश्तों की सच्चाई का अनोखा मिश्रण अनुभव कराएगी।

  • पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार

    पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार


    नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा, बल्कि इसका उपयोग सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

    तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं। मौजूदा हालात में पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर, ये कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

    एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मकसद

    सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। इस कदम से तेल कंपनियों के नुकसान में आंशिक राहत मिलेगी। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रति लीटर करीब 10 रुपए तक की भरपाई हो सकेगी, जिससे कंपनियां बिना किसी बाधा के ईंधन की सप्लाई जारी रख पाएंगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेल की कीमतें चार हफ्तों में लगभग 75% बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल से 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है—दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 30-50%, उत्तरी अमेरिका में करीब 30% और यूरोप में लगभग 20% तक।

    भारत ने रखा स्थिर रुख

    इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को महंगाई के झटके से बचाया जा सकता है। हालांकि, इस स्थिरता की कीमत सरकार और तेल कंपनियों को उठानी पड़ रही है, जिसे एक्साइज कटौती और अन्य उपायों से संतुलित किया जा रहा है।

    वित्त मंत्री का बयान

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गई है।

    निर्यात पर भी लगाया गया शुल्क

    सरकार ने डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। डीजल पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क तय किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    आम लोगों के लिए क्या मायने?

    आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। हालांकि, एक्साइज कटौती का सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलेगा। यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और ईंधन की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

  • संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट, 50 फीसदी फ्लाइट्स में तकनीकी खामियां

    संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट, 50 फीसदी फ्लाइट्स में तकनीकी खामियां


    नई दिल्ली। हवाई यात्रा करने वालों के लिए एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। संसदीय समिति की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि देश की लगभग 50 प्रतिशत कमर्शियल फ्लाइट्स तकनीकी समस्याओं से जूझ रही हैं। पिछले साल हुए ऑडिट के दौरान 754 विमानों में से 377 में बार-बार तकनीकी खराबी पाई गई।

    रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा ऑडिट इंडिगो एयरलाइन की उड़ानों का किया गया, और तकनीकी खराबी के मामलों में भी यह सबसे आगे रही। 3 फरवरी तक इंडिगो की 405 फ्लाइट्स की जांच हुई, जिनमें से 148 में खामियां सामने आईं।

    इसके अलावा, एअर इंडिया और एअर इंडिया एक्सप्रेस भी इस सूची में पीछे नहीं हैं। एअर इंडिया की 166 उड़ानों में से 137 में बार-बार तकनीकी दिक्कतें दर्ज की गईं, जबकि एअर इंडिया एक्सप्रेस की 101 में से 54 उड़ानों में खराबी पाई गई।

    रिपोर्ट में 12 जून को हुए अहमदाबाद एअर इंडिया हादसे का भी उल्लेख किया गया है, जिसके बाद डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने 1 से 4 जुलाई 2025 के बीच कई विमानों का विशेष ऑडिट किया था। इसमें बोइंग 787 और 777 विमानों के पायलटों की ट्रेनिंग में खामियां सामने आईं। साथ ही कम से कम चार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में पर्याप्त केबिन क्रू की कमी भी पाई गई।

    संसदीय समिति ने फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन के उल्लंघन पर भी गंभीर चिंता जताई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि नियामक कार्रवाई के तहत एअर इंडिया को सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के लिए डीजीसीए की ओर से नौ कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

    इसके अलावा, 2025 के अंत तक एयरलाइंस को कुल 19 नोटिस दिए गए, जिनमें ड्यूटी नियमों का उल्लंघन, कॉकपिट में अनधिकृत प्रवेश और एक्सपायर्ड इमरजेंसी उपकरणों के साथ उड़ान भरने जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।

  • 1 अप्रैल से बदलेंगे नियम: इनकम टैक्स से लेकर ट्रेन टिकट रिफंड तक नए अपडेट लागू

    1 अप्रैल से बदलेंगे नियम: इनकम टैक्स से लेकर ट्रेन टिकट रिफंड तक नए अपडेट लागू


    नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ 1 अप्रैल से कई बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। सरकार हर साल की तरह इस बार भी टैक्स सिस्टम को आसान बनाने और नियमों में पारदर्शिता लाने के लिए कई अहम बदलाव कर रही है। आइए जानते हैं, कौन-कौन से नए नियम लागू होंगे और उनका आप पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

    नया इनकम टैक्स एक्ट करेगा शुरुआत

    सबसे बड़ा बदलाव नया इनकम टैक्स एक्ट, 2025 है, जो 1 अप्रैल से पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। सरकार का उद्देश्य टैक्स से जुड़े नियमों और भाषा को सरल बनाना है, ताकि आम लोगों को समझने में आसानी हो। इसके तहत कई जटिल शब्दों को हटाया गया है और पूरी प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट बनाने की कोशिश की गई है।

    ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’

    नए कानून के तहत अब ‘असेसमेंट ईयर’ जैसे जटिल शब्दों को हटाकर ‘टैक्स ईयर’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया को समझना आसान होगा और आम करदाताओं को कम भ्रम का सामना करना पड़ेगा।

    12 लाख तक की आय पर टैक्स राहत

    नए वित्त वर्ष में न्यू टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपए तक की आय पर टैक्स छूट का फायदा मिलेगा। सेक्शन 87A के तहत इस सीमा तक आने वाले करदाताओं की टैक्स देनदारी शून्य हो सकती है। यह मध्यम वर्ग के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, जिससे उनकी बचत बढ़ेगी।

    फॉर्म 16-16A की जगह नए फॉर्म

    1 अप्रैल से फॉर्म 16 और फॉर्म 16A की जगह क्रमशः फॉर्म 130 और फॉर्म 131 लागू किए जाएंगे। इसका उद्देश्य टैक्स डॉक्यूमेंटेशन को और व्यवस्थित करना और रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है। साथ ही, इनके जारी करने की समयसीमा में भी बदलाव संभव है।

    पैन कार्ड के लिए नए नियम

    अब पैन कार्ड बनवाने के लिए केवल आधार कार्ड पर्याप्त नहीं होगा। इनकम टैक्स विभाग जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में कक्षा 10 का सर्टिफिकेट, पासपोर्ट जैसे अन्य दस्तावेज भी अनिवार्य करेगा। इससे पहचान प्रक्रिया और अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी।

    रेलवे टिकट रिफंड के नियम बदले

    1 अप्रैल से भारतीय रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन और रिफंड के नियमों में भी बदलाव किया है। नए नियमों के अनुसार:

    ट्रेन चलने से 8 से 24 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर 50% रिफंड मिलेगा।
    24 से 72 घंटे पहले रद्द करने पर 25% रिफंड मिलेगा।
    72 घंटे से पहले रद्द करने पर अधिकतम कैंसिलेशन शुल्क लागू होगा और रिफंड रेलवे के नियमों पर निर्भर करेगा।
    इन बदलावों का उद्देश्य टिकट कैंसिलेशन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है।

    आम लोगों के लिए क्या मायने?

    इन सभी बदलावों का असर सीधे आम लोगों की वित्तीय योजना पर पड़ेगा। जहां एक ओर टैक्स में राहत से बचत बढ़ेगी, वहीं नए नियमों को समझना और समय पर उनका पालन करना जरूरी होगा। रेलवे के नए नियम भी यात्रा की योजना बनाते समय ध्यान में रखने होंगे।

  • निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द

    निवेश का बड़ा झटका: Puch AI का 25,000 करोड़ का MoU यूपी में सिर्फ चार दिन में रद्द


    नई दिल्ली:उत्तर प्रदेश में निवेशकों और सरकार के बीच बड़े समझौतों को लेकर जो उम्मीदें थीं, उन्हें उस वक्त झटका लगा जब राज्य सरकार ने ‘Puch AI’ कंपनी के साथ हुए 25,000 करोड़ रुपये के निवेश समझौते यानी MoU को महज चार दिनों में रद्द कर दिया। यह फैसला तब आया जब कंपनी की वित्तीय स्थिति और दस्तावेजों की गहन जांच में कई संदिग्ध पहलू सामने आए।

    Invest UP के CEO विजय किरन आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर MoU की समीक्षा की गई थी। कंपनी को नोटिस भेजकर उसका बिजनेस प्लान, वित्तीय स्थिति और Detailed Project Report (DPR) मांगी गई। जवाब देने के लिए कंपनी को केवल तीन दिन का समय दिया गया, लेकिन इस दौरान कंपनी की तरफ से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।

    सरकार की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कंपनी समय पर जरूरी दस्तावेज नहीं जमा कर सकी। वित्तीय स्थिति कमजोर पाई गई और निवेश के लिए फंड का स्रोत भी स्पष्ट नहीं था। इस वजह से यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही जोखिम भरा साबित हुआ।

    योगी सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि इतनी बड़ी परियोजना के लिए Puch AI कंपनी के पास न तो पर्याप्त वित्तीय क्षमता थी और न ही भरोसेमंद दस्तावेज। निवेश में किसी भी तरह के संभावित जोखिम से बचने के लिए सरकार ने MoU रद्द कर दिया।

    इस मामले ने राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर ध्यान आकर्षित किया। विपक्ष के नेताओं ने भी इस पर सवाल उठाए थे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने 25,000 करोड़ रुपये के इस निवेश को लेकर सरकार को घेरा था।

    उत्तर प्रदेश सरकार लगातार राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए बड़े-बड़े समझौते कर रही है। इसी कड़ी में Puch AI के साथ यह महत्त्वाकांक्षी निवेश प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि शुरुआती जांच में ही कंपनी की विश्वसनीयता पर सवाल उठे, जिसके चलते यह निवेश प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही रद्द कर दिया गया।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी किसी भी निवेश प्रोजेक्ट में पारदर्शिता और वित्तीय क्षमता को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि राज्य में आने वाले निवेश सुरक्षित और प्रभावी हों और किसी तरह का वित्तीय या कानूनी जोखिम राज्य को प्रभावित न करे।

    इस फैसले से यह संदेश गया कि यूपी सरकार बड़े निवेश प्रोजेक्ट्स में केवल भरोसेमंद और सक्षम कंपनियों के साथ ही आगे बढ़ेगी। Puch AI का मामला एक चेतावनी भी है कि वित्तीय और प्रबंधन संबंधी कमजोरियों वाले निवेश समझौतों को राज्य सरकार बढ़ावा नहीं देगी।

    अंततः, चार दिन में रद्द किया गया यह 25,000 करोड़ का MoU यह दिखाता है कि यूपी सरकार निवेशकों की विश्वसनीयता और परियोजनाओं की पारदर्शिता पर पूरी तरह ध्यान देती है और किसी भी तरह के जोखिम से राज्य को बचाने के लिए त्वरित और निर्णायक कदम उठाती है।

  • जापान का भारत को बड़ा तोहफा: 16,420 करोड़ का ODA लोन, मेट्रो-हेल्थ और कृषि को मिलेगा बढ़ावा

    जापान का भारत को बड़ा तोहफा: 16,420 करोड़ का ODA लोन, मेट्रो-हेल्थ और कृषि को मिलेगा बढ़ावा


    नई दिल्ली। भारत के विकास को गति देने के लिए जापान ने एक बड़ा कदम उठाया है। जापान सरकार ने भारत को 275.858 बिलियन येन (करीब 16,420 करोड़ रुपए) का आधिकारिक विकास सहायता (ODA) लोन देने का ऐलान किया है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह फंड देश के शहरी परिवहन, स्वास्थ्य और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों में बड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इस फैसले से भारत-जापान के बीच दशकों पुराने आर्थिक रिश्ते और मजबूत होने की उम्मीद है।

    मेट्रो प्रोजेक्ट्स को मिलेगा बड़ा सहारा

    इस लोन का सबसे बड़ा हिस्सा शहरी परिवहन, खासकर मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार पर खर्च किया जाएगा। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मेट्रो रेल फेज-3 परियोजना के लिए 102.480 बिलियन येन दिए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट से शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और लोगों को बेहतर व तेज कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

    इसी तरह, महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में मेट्रो लाइन-11 परियोजना के लिए 92.400 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इस परियोजना से मुंबई में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने, यात्रा को आसान बनाने और प्रदूषण घटाने में मदद मिलेगी। यह पहल शहरी जीवन को अधिक सुगम और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

    स्वास्थ्य सेवाओं में होगा सुधार

    जापान की इस आर्थिक सहायता का एक बड़ा हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास पर भी खर्च किया जाएगा। महाराष्ट्र में आधुनिक अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग संस्थानों के निर्माण के लिए 62.294 बिलियन येन का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य आम लोगों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस निवेश से स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती मिलेगी और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच भी बढ़ेगी।

    कृषि क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावा

    कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए भी इस लोन का उपयोग किया जाएगा। पंजाब में टिकाऊ बागवानी (हॉर्टिकल्चर) को बढ़ावा देने के लिए 18.684 बिलियन येन की सहायता दी जाएगी। इससे किसानों को पारंपरिक खेती से हटकर ज्यादा लाभ देने वाली फसलों की ओर बढ़ने का मौका मिलेगा। साथ ही, कृषि से जुड़ी सप्लाई चेन और इंफ्रास्ट्रक्चर भी मजबूत होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    1958 से मजबूत हो रहे रिश्ते

    भारत और जापान के बीच विकास सहयोग का रिश्ता नया नहीं है। यह साझेदारी 1958 से लगातार मजबूत होती आ रही है। जापान लंबे समय से भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश करता रहा है। मौजूदा फंडिंग पैकेज इस रिश्ते को और गहराई देगा और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

    विकास को मिलेगी नई रफ्तार

    विशेषज्ञों का मानना है कि यह निवेश भारत के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्रों में व्यापक सुधार लाने में सहायक होगा। मेट्रो प्रोजेक्ट्स से शहरी परिवहन बेहतर होगा, स्वास्थ्य निवेश से चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होंगी और कृषि क्षेत्र में बदलाव से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार आ सकता है। कुल मिलाकर, यह लोन भारत के समग्र विकास को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।