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  • भोपाल में युवती से मारपीट का आरोप: मदरसे के सामने स्कूटी खड़ी करने पर विवाद, भाई को सिर में गंभीर चोट

    भोपाल में युवती से मारपीट का आरोप: मदरसे के सामने स्कूटी खड़ी करने पर विवाद, भाई को सिर में गंभीर चोट


    भोपाल । राजधानी भोपाल से सामने आए एक वायरल वीडियो ने सनसनी मचा दी है, जिसमें एक हिंदू युवती अपने साथ हुई मारपीट और अपमान का आरोप लगा रही है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और घटना को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। वीडियो में युवती खुद को भोपाल के कल्पना नगर इलाके की निवासी बता रही है। उसका कहना है कि घर के सामने स्थित एक मदरसे के बाहर स्कूटी खड़ी करने को लेकर विवाद हुआ था।
    युवती के अनुसार, इसी बात को लेकर कुछ लोगों ने पहले बहस की और फिर देखते ही देखते मामला मारपीट में बदल गया। युवती का आरोप है कि उसके साथ न सिर्फ गाली-गलौज की गई, बल्कि उसके बाल भी उखाड़े गए। युवती ने वीडियो में यह भी बताया कि जब उसके भाई और दोस्त ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो उन पर भी हमला किया गया। आरोप है कि युवती के भाई के सिर पर गंभीर चोट आई है, जिससे उसे काफी खून बहा और इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। वहीं, युवती के दोस्त के साथ भी मारपीट किए जाने की बात कही जा रही है। घटना के बाद से पीड़ित परिवार दहशत में है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है।

    यह पूरा मामला जिस स्थान का बताया जा रहा है, वहां एक मदरसा स्थित है। इसी कारण से सोशल मीडिया पर इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशें भी देखी जा रही हैं। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और वीडियो व अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। भोपाल पुलिस का कहना है कि यदि जांच में यह सामने आता है कि मामला सांप्रदायिक है या किसी समुदाय विशेष को निशाना बनाकर हिंसा की गई है, तो संबंधित धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि यह सामान्य विवाद का मामला पाया जाता है, तो भी मारपीट और चोट पहुंचाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी।

    घटना का वीडियो सामने आने के बाद से राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कुछ संगठनों ने पीड़ित युवती के समर्थन में कार्रवाई की मांग की है, जबकि प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर फैल रहे किसी भी भ्रामक या भड़काऊ संदेश पर भी नजर रखी जा रही है। फिलहाल यह मामला जांच के अधीन है और पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा भी प्रशासन की ओर से दिया गया है।

  • ट्रंप से पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति कर चुके हैं ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश…

    ट्रंप से पहले भी कई अमेरिकी राष्ट्रपति कर चुके हैं ग्रीनलैंड को खरीदने की कोशिश…

    वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहे हैं। वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो (Venezuelan President Maduro) को उनके किले से उठाकर न्यूयॉर्क की अदालत में पेश करवाने वाले ट्रंप का अगला सपना ग्रीनलैंड को अमेरिकी आधिपत्य में लाने का है। यूरोप समेत पूरी दुनिया इसका विरोध कर रही है, लेकिन ट्रंप अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। उनका तर्क है कि आर्कटिक क्षेत्र और अमेरिकी धरती की रक्षा के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जा होना बहुत जरूरी है। इस कब्जे के लिए वह साम, दाम, दंड भेद सभी प्रकार की नीति अपनाने के लिए भी तैयार हैं। लेकिन इतिहास उठाने पर पता चलता है कि ग्रीनलैंड का ख्वाब सजाने वाले ट्रंप पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं हैं। इसके पहले भी कई राष्ट्रपतियों का मन इसको लेकर ललचा चुका है। हालांकि, किसी को भी यह हासिल नहीं हुआ।

    ग्रीन लैंड की जमीन का आधुनिक अमेरिका द्वारा दिखाया गया लालच का पहला उदाहरण वर्ष 1867 में सामने आता है। यह वह समय था, जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूस से अलास्का को खरीदा था। ऐसे में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री विलियम एच. सिवार्ड ने डेनमार्क को भी लगे हाथ आइसलैंड और ग्रीनलैंड खरीदने का ऑफर दे डाला। अलास्का डील में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले तत्कालीन अमेरिकी ट्रेजरी सचिव रॉबर्ट जे वॉकर ने कहा था कि ग्रीनलैंड अगर अमेरिका के हिस्से में आ जाता है, तो यह बहुत ही ज्यादा फायदेमंद होगा। इससे अमेरिका व्यापारिक दुनिया पर नियंत्रण हासिल कर पाएगा। हालांकि, इस समय पर भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड को लोगों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और यह आगे नहीं बढ़ पाया।


    1946 में 100 मिलियन डॉलर का दिया था ऑफर

    लगभग 9 दशक तक अमेरिका ग्रीनलैंड को हासिल करने का सपना मन में दबाए रखा। इस बीच पहला विश्व युद्ध भी समाप्त हो गया। अब बारी आई दूसरे विश्वयुद्ध की। इसमें नाजी जर्मनी ने डेनमार्क पर हमला बोल दिया। ग्रीनलैंड की रक्षा करने की जिम्मेदारी अमेरिका के कंधों पर आ गई। इसी दौर में अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपनी सैन्य उपस्थिति को बढ़ाया और इस आर्कटिक द्वीप की रक्षा की। इसके बाद युद्ध समाप्त हुआ, लेकिन अमेरिका का ग्रीनलैंड प्यार एक बार फिर से जाग गया। वर्ष1946 में जब इस द्वीप को खाली करने की बारी आई, तो अमेरिका ने अपने पैसे की ताकत को दिखाना चाहा। दूसरे विश्वयुद्ध में बर्बाद हो चुके डेनमार्क के लिए 100 मिलियन डॉलर की राशि एक बड़ी बात थी, हालांकि इसके बाद भी डेनमार्क ने इस पेशकश को ठुकरा दिया और अमेरिका को मायूस होकर यहां से हटना पड़ा।


    सैन्य बेस बनाने में कामयाब रहा अमेरिका

    इसके बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड अमेरिका की छत्र छाया में नाटो के तहत शामिल हो गए। अमेरिका को अपनी मनचाही मुराद भी मिल गई। कोल्ड वॉर के समय से ही अमेरिका ने रूस को काउंटर करने के लिए ग्रीनलैंड का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। डेनमार्क ने भले ही ग्रीनलैंड अमेरिका को देने से इनकार कर दिया हो, लेकिन नाटो में शामिल होने के नाते वह अमेरिकी सेना को इसके इस्तेमाल से नहीं रोक सकती थी। ऐसे में अमेरिका ने यहां पर 1943 से संचालित पिटफिक स्पेस बेस को और भी ज्यादा मजबूत कर लिया और यहां पर अपनी सैन्य उपस्तिथि को बढ़ा दिया।

    तमाम कोशिशों के बाद भी अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने में नाकामयाब रहा। हाालंकि, सैन्य बेस स्थापित करने से उसके मनसूबे कुछ हद तक कामयाब होते हुए भी नजर आए। इसके बाद आई 21वीं सदी। अमेरिका के राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रंप, अपने पहले कार्यकाल के आखिर में ट्रंप ने खुले तौर पर ग्रीनलैंड को खरीदने की पेशकश की। उनकी यह पेशकश, अमेरिकी सुरक्षा से ज्यादा ग्रीनलैंड की जमीन के नीचे दबी अपार खनिज संपदा को लेकर थी। हालांकि, उस समय पर भी डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों ने ही इस प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया कि उनका यह क्षेत्र बिकाऊ नहीं है।

    इसके बाद ट्रंप को सत्ता से जाना पड़ा और बात आई-गई हो गई। लेकिन 2025 में ट्रंप एक बार फिर से सत्ता में लौटे। इस बार ज्यादा आक्रामक होकर। आते ही उन्होंने ऐलान कर दिया कि अब ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनना ही होगा। 2025 में अमेरिकी कांग्रेस के एक संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि हम इसे (ग्रीनलैंड) को किसी तरह हासिल कर ही लेंगे। किसी न किसी तरह हम इसे जरूर हासिल करेंगे।”

    अमेरिका पैसे की दम पर पिछली दो सदी से ग्रीनलैंड को अपना हिस्सा बनाने की बात कर रहा है। लेकिन हर बार डेनमार्क और ग्रीनलैंड इससे इनकार कर देते हैं। इसबार भी ट्रंप के लिए ग्रीनलैंड को खरीदना आसान नहीं होगा। हालांकि, ट्रंप इस मामले में थोड़ा अलग रुख भी अपना रहे हैं, अभी तक किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड हासिल करने के लिए सैन्य अभियान चलाने की बात नहीं कही है, लेकिन ट्रंप ने यह विकल्प भी खुला रखा है।

    आपको बता दें, ग्रीनलैंड की सरकार और डेनमार्क को दरकिनार करते हुएस अमेरिका ने सीधे ग्रीनलैंड की जनता को ही पैसा देने की पेशकश की थी,हालांकि उन्होंने भी इससे इनकार कर दिया। रॉयटर्स के मुताबिक ग्रीनलैंड के लोगों ने इस बात को अपमानजनक माना और पूरी तरह से खारिज कर दिया।

    राष्ट्रपति ट्रंप भले ही ग्रीनलैंड को जीतने के लिए कुछ भी कर जाने के तैयार दिख रहे हों, लेकिन ग्रीनलैंड की जनता और यूरोपीय देश इस पर राजी नहीं दिखते। ट्रंप के ग्रीनलैंड प्रस्ताव के विरोध में यूरोपीय देश खड़े हुए हैं। प्रतीकात्मक रूप से ही सही लेकिन जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन जैसे देशों ने अपनी सेना को ग्रीनलैंड में भेजा है। इससे नाराज ट्रंप ने इन देशों के ऊपर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ का ऐलान किया है। इतना ही नहीं, यह भी कहा कि अगर यह देश नहीं मानते तो जून से यह टैरिफ 25 फीसदी हो जाएगा।

  • बजट 2026 को लेकर नई चर्चा… पति-पत्नी को मिल सकती है एक साथ ITR भरने की सुविधा

    बजट 2026 को लेकर नई चर्चा… पति-पत्नी को मिल सकती है एक साथ ITR भरने की सुविधा


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय बजट 2026 (Union Budget 2026) से पहले टैक्स को लेकर एक नई चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि सरकार शादीशुदा लोगों के लिए ‘संयुक्त कराधान’ यानी ज्वाइंट टैक्सेशन (Joint taxation) का विकल्प पेश कर सकती है। अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो पति और पत्नी (Husband and wife) मिलकर एक साथ आयकर रिटर्न (Income tax return) भर सकेंगे। इससे खासकर उन परिवारों को राहत मिल सकती है, जहां कमाई का जिम्मा एक ही व्यक्ति पर है। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो खासकर एकल कमाई वाले परिवारों को Tax में लाखों रुपये की बचत हो सकती है।

    बजट से पहले इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने वित्त मंत्रालय को बजट को लेकर एक खास सलाह दी है। उसने पति-पत्नी को संयुक्त रिटर्न फाइल का विकल्प देने की सलाह दी है। अभी पति और पत्नी को अलग-अलग रिटर्न फाइल करना पड़ता है।

    फिलहाल नई कर व्यवस्था ही आयकर रिटर्न के लिए डिफॉल्ट व्यवस्था है। हालांकि, करदाता पुरानी कर व्यवस्था को भी चुन सकते हैं। दोनों में ही टैक्स की अलग-अलग स्लैब हैं जहां आमदनी बढ़ने के साथ-साथ कर की दर बढ़ती हैं। नई टैक्स व्यवस्था के तहत जहां तीन लाख रुपये सालाना आय पर कोई टैक्स नहीं है, वहीं पुरानी टैक्स व्यवस्था में यह 2.5 लाख रुपये सालाना के लिए लागू है। दोनों में ही यह सीमा परिवार के हर एक सदस्य पर अलग-अलग लागू है।


    विवाहितों पर बढ़ता है बोझ

    बहुत से घर ऐसे होते हैं जहां एक ही व्यक्ति नौकरी या काम करता है। दूसरा जीवनसाथी घर, बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल करता है। यह काम भले ही बहुत अहम हो, लेकिन कर प्रणाली में इसकी कोई कीमत नहीं मानी जाती है। नतीजा यह होता है कि ऐसे परिवारों पर कर का बोझ ज्यादा पड़ता है।

    मौजूदा समय में भारत में हर व्यक्ति को अपनी आय पर अलग-अलग कर देना होता है। चाहे वह शादीशुदा ही क्यों न हो। पति-पत्नी दोनों को अलग-अलग बेसिक छूट, स्लैब और कटौतियां मिलते हैं। इस वजह से शादीशुदा होने के बावजूद दूसरे जीवनसाथी को कर छूट का पूरा फायदा नहीं मिल पाता है।


    क्या है ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम

    इसका मतलब है कि शादीशुदा जोड़े अपनी कमाई को जोड़कर एक साथ आयकर रिटर्न फाइल करें। इसके लिए दोनों के पास पैन कार्ड होना जरूरी होगा। माना जा रहा है कि बुनियादी छूट सीमा को भी बढ़ाया जा सकता है।

    जैसे अभी अगर एक व्यक्ति को तीन लाख रुपये तक टैक्स छूट मिलती है, तो जॉइंट फाइलिंग में यह सीमा छह लाख रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है। इससे मध्यम वर्गीय परिवार को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा होम लोन ब्याज, हेल्थ इंश्योरेंस और दूसरी कटौतियों को भी बेहतर तरीके से समायोजित किया जा सकेगा। अगर दोनों पति-पत्नी कमाते हैं, तो भी उन्हें अलग-अलग मानक कटौती मिलने की बात कही जा रही है।


    सरचार्ज पर भी राहत संभव

    साथ ही, सरचार्ज को लेकर भी राहत मिल सकती है। अभी 50 लाख रुपये से ज्यादा आय पर सरचार्ज लगता है, लेकिन संयुक्त कराधान में इसकी सीमा 75 लाख रुपये या उससे ज्यादा की जा सकती है। इससे उच्च कर दायरे में आने वाले परिवारों को भी राहत मिलेगी। अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह भारत के टैक्स सिस्टम में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जाएगा। इससे कुल करयोग्य आय कम हो जाएगी और परिवार के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे बचेंगे।


    इन देशों में है ज्वाइंट टैक्सेशन सिस्टम

    अमेरिका, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल जैसे कई देशों में शादीशुदा जोड़ों को संयुक्त कर रिटर्न दाखिल करने की सुविधा मिलती है। वहां परिवार को एक आर्थिक इकाई माना जाता है। भारत भी ऐसी प्रणाली अपनाकर अपने कर कानूनों को आसान और आधुनिक बना सकता है।

  • स्पेन में भीषण रेल हादसा… दो ट्रेनों की जोरदार भिड़ंत में 21 लोगों की मौत, 75 घायल

    स्पेन में भीषण रेल हादसा… दो ट्रेनों की जोरदार भिड़ंत में 21 लोगों की मौत, 75 घायल


    मैड्रिड।
    स्पेन (Spain) में भीषण रेल हादसे (Terrible ऊrain Accident) में 21 लोगों की मौत हो गई और 75 घायल हैं। कोर्डोबा (Cordoba) के पास एडमुज गांव के नजदीक यह दुर्घटना हुई। मलागा से मैड्रिड जा रही निजी कंपनी इर्यो की हाई-स्पीड ट्रेन का पिछला हिस्सा अचानक पटरी से उतर गया। इसके बाद यह दूसरी दिशा से आ रही ट्रेन से टकरा गई। हादसा रविवार शाम 7:45 बजे हुआ, जिसमें पहली ट्रेन में लगभग 300 और दूसरी में 200 यात्री सवार थे। स्पेन के परिवहन मंत्री ऑस्कर पुएंटे (Transport Minister Oscar Puente) ने मौतों की संख्या 21 बताई। उन्होंने कहा कि सभी जीवित बचे लोगों को निकाल लिया गया है, हालांकि कुछ और शव बाकी हो सकते हैं।

    आंदालूसिया के क्षेत्रीय अध्यक्ष जुआनमा मोरेनो ने बताया कि 75 यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें 15 की हालत गंभीर है। बचावकर्मी पूरी रात मलबे से शव निकालने में जुटे रहे। यह हादसा बेहद असामान्य बताया जा रहा है क्योंकि यह सपाट और हाल ही में मई में नवीनीकृत ट्रैक पर हुआ। पटरी से उतरने वाली ट्रेन चार साल से कम पुरानी थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि रेनफे ट्रेन के पहले दो डिब्बे पटरी से उतरकर 4 मीटर नीचे ढलान पर जा गिरे, जिससे उसके आगे के हिस्से को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा।

    ‘ऐसा लगा जैसे भूकंप आया हो’
    एक यात्री और पत्रकार साल्वाडोर जिमेनेज ने बताया कि क्षण भर में ऐसा लगा जैसे भूकंप आ गया हो। यात्रियों ने इमरजेंसी हैमर से खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। घटनास्थल दूरदराज होने के कारण पहुंचना मुश्किल था, फिर भी स्थानीय लोग कंबल और पानी लेकर मदद के लिए पहुंचे। स्पेनिश सेना, रेड क्रॉस और अन्य एजेंसियों ने बचाव अभियान में हिस्सा लिया।

    सदी का स्पेन का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा
    स्पेन में यूरोप का सबसे बड़ा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है, जिसमें 3100 किलोमीटर से अधिक ट्रैक हैं। यह काफी सुरक्षित माना जाता है। 2024 में रेनफे की हाई-स्पीड ट्रेनों में 2.5 करोड़ से अधिक यात्रियों ने सफर किया। प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज, राजा फेलिप VI और रानी लेटिजिया ने शोक व्यक्त किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने भी संवेदना जताई। जांच में एक महीने तक लग सकता है। सोमवार को मैड्रिड और आंदालूसिया के बीच ट्रेन सेवाएं रद्द कर दी गई हैं। यह इस सदी का स्पेन का सबसे बड़ा ट्रेन हादसा है।

  • Bihar: RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

    Bihar: RJD की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की अहम बैठक 25 जनवरी को, तेजस्वी को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी


    पटना।
    राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) (Rashtriya Janata Dal – RJD) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की महत्वपूर्ण बैठक (National Executive Important meeting) 25 जनवरी को पटना (Patna) में बुलाई गई है. यह बैठक पटना के एक बड़े होटल में आयोजित होगी, जिसमें पार्टी के भविष्य और संगठनात्मक बदलावों को लेकर अहम फैसले लिए जा सकते हैं।

    आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को पार्टी का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर विचार हो सकता है. अगर यह फैसला होता है तो तेजस्वी यादव को पार्टी के सभी बड़े और अहम निर्णय लेने का अधिकार मिल जाएगा।


    लालू यादव की उम्र और स्वास्थ्य बना वजह

    बताया जा रहा है कि पार्टी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बढ़ती उम्र और खराब स्वास्थ्य को देखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है, ताकि संगठन की जिम्मेदारी युवा नेतृत्व के हाथों में सौंपी जा सके।


    चुनावी हार के बाद संगठन में बदलाव की तैयारी

    विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तेजस्वी यादव और उनकी टीम के फैसलों पर सवाल उठे थे. इसी पृष्ठभूमि में उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव सामने आया है, ताकि संगठन को नए सिरे से मजबूत किया जा सके।


    तेज प्रताप की वापसी की संभावना होगी खत्म

    अगर तेजस्वी यादव राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनते हैं, तो पार्टी में तेज प्रताप यादव की वापसी की अटकलों पर भी विराम लग सकता है.


    सितंबर 2025 के बाद पहली बैठक

    सितंबर 2025 में आरजेडी की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद यह पहली बैठक होगी. बैठक की अध्यक्षता खुद लालू प्रसाद यादव करेंगे।


    करीब 200 नेता होंगे शामिल

    इस बैठक में 85 स्थायी सदस्यों को बुलाया गया है. इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों को मिलाकर करीब 200 नेता राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होंगे. बिहार के अलावा दूसरे राज्यों से भी डेलीगेट्स के आने की संभावना है।

  • SIR में धांधली का डर: MP कांग्रेस अलर्ट मोड में, 19 से 22 जनवरी तक रोज दावे-आपत्ति पर नजर रखने के निर्देश

    SIR में धांधली का डर: MP कांग्रेस अलर्ट मोड में, 19 से 22 जनवरी तक रोज दावे-आपत्ति पर नजर रखने के निर्देश


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन–SIR को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान संभावित गड़बड़ियों को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने गंभीर आशंका जताई है और पार्टी संगठन को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश जारी किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा इस प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में हेरफेर कर वोट चोरी की कोशिश कर सकती है, इसलिए हर स्तर पर सतर्कता बेहद जरूरी है।

    प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी निर्देशों में साफ कहा गया है कि 19 जनवरी से 22 जनवरी तक दावे-आपत्ति की प्रक्रिया पर रोजाना नजर रखी जाए। पार्टी ने सभी जिला, ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर के पदाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फॉर्म भरने की स्थिति, नाम जोड़ने या काटने की गतिविधियों की प्रतिदिन जानकारी जुटाएं और उसे संगठन के वरिष्ठ स्तर तक पहुंचाएं। कांग्रेस का कहना है कि किसी भी कीमत पर यह सुनिश्चित किया जाए कि न तो कोई गलत नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाए और न ही किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया जाए।

    कांग्रेस ने विशेष रूप से फॉर्म-7 को लेकर सतर्क रहने को कहा है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक फॉर्म-7 ही मान्य है। यदि कहीं भी बाहर छपे हुए या अनधिकृत फॉर्म-7 का इस्तेमाल होता दिखाई दे, तो उस पर तत्काल आपत्ति दर्ज कराई जाए और इसकी सूचना संबंधित निर्वाचन अधिकारी के साथ-साथ पार्टी संगठन को भी दी जाए। कांग्रेस का आरोप है कि पूर्व में भी इसी तरह के फॉर्म का दुरुपयोग कर मतदाता सूची से नाम हटाने के प्रयास किए गए हैं। पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे बूथ स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाएं और आम मतदाताओं, खासकर कमजोर, वंचित और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों की मदद करें। यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से काटा गया हो या काटने का प्रयास हो रहा हो, तो तुरंत दावे-आपत्ति की प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कराई जाए। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।

    ये निर्देश ऐसे समय जारी किए गए हैं, जब SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में लाखों नाम कटने को लेकर प्रदेशभर में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा हमला बता रही है, जबकि चुनाव आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी है और नियमों के तहत की जा रही है। बावजूद इसके कांग्रेस का मानना है कि सतर्कता में ही सुरक्षा है और किसी भी स्तर पर ढिलाई भारी पड़ सकती है। कांग्रेस ने साफ किया है कि 22 जनवरी 2026 दावे-आपत्ति की अंतिम तिथि है। इसके बाद अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि इस दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो वह सड़क से लेकर आयोग तक हर स्तर पर आवाज उठाएगी।

  • वसंत पंचमी शुक्रवार को, भोजशाला में पूजा होगा या फिर नमाज…. सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद

    वसंत पंचमी शुक्रवार को, भोजशाला में पूजा होगा या फिर नमाज…. सुप्रीम कोर्ट पहुंचा विवाद


    नई दिल्ली।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के धार (Dhar) स्थित भोजशाला (Bhojshala) से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है. इस बार विवाद की वजह यह है कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी (Vasant Panchami) शुक्रवार के दिन पड़ रही है, जबकि भोजशाला परिसर में हर शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय की जुमे की नमाज अदा होती है

    इसको लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. याचिका में मांग की गई है कि 23 जनवरी को भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए और उस दिन केवल हिंदुओं को सरस्वती पूजा करने की अनुमति दी जाए. याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि याचिका में यह भी मांग की गई है कि वसंत पंचमी के दिन ASI और राज्य सरकार कड़ी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि किसी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने.

    याचिका में समय की कमी का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई करने का आग्रह भी किया गया है. हिंदू पक्ष का कहना है कि वसंत पंचमी बेहद नजदीक है और स्थिति को लेकर पहले से स्पष्ट आदेश जरूरी है. हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से दाखिल अर्जी में कहा गया है कि भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी यानी ज्ञान, संगीत और कला की देवी सरस्वती का मंदिर है, जिसका निर्माण 11वीं सदी में परमार राजाओं ने करवाया था. ऐतिहासिक रूप से यहां हिंदू पूजा-अर्चना करते रहे हैं.

    याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश का जिक्र किया गया है. इस आदेश के तहत हिंदुओं को हर मंगलवार और वसंत पंचमी के दिन पूजा की अनुमति दी गई. मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे तक जुमे की नमाज़ अदा करने की अनुमति दी गई. हालांकि, याचिका में यह सवाल उठाया गया है कि ASI का यह आदेश इस स्थिति पर पूरी तरह मौन है, जब वसंत पंचमी शुक्रवार को ही पड़ जाए.


    इस बार क्यों बढ़ा विवाद?

    हिंदू पक्ष का कहना है कि 23 जनवरी को वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे पूजा और नमाज़ दोनों के समय टकराव की स्थिति बन रही है. इसी कारण सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि किसी तरह का विवाद या तनाव न हो.

  • J&K में गणतंत्र दिवस से पहले आतंकियों के खिलाफ बड़ा अभियान, 8 जवान घयाल

    J&K में गणतंत्र दिवस से पहले आतंकियों के खिलाफ बड़ा अभियान, 8 जवान घयाल

    जम्मू। जम्मू कश्मीर (Jammu and Kashmir) में किश्तवाड़ जिले (Kishtwar district) के एक सुदूर वन क्षेत्र में रविवार को सुरक्षाबलों (Security forces) और आतंकवादियों (Terrorists) के बीच छिड़ी मुठभेड़ में आठ जवान घायल हो गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच घंटों तक भीषण गोलीबारी हुई। उन्होंने बताया कि फिलहाल गोलीबारी बंद है। अधिकारियों के मुताबिक, घेराबंदी को मजबूत करने और आतंकवादियों को मार गिराने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं। सेना की जम्मू आधारित व्हाइट नाइट कोर द्वारा ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ नाम से शुरू किया गया यह अभियान दोपहर के समय शुरू हुआ।

    ‘व्हाइट नाइट कोर’ ने ‘एक्स’ पर बताया कि जम्मू कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर चलाए जा रहे संयुक्त आतंकवाद रोधी अभियान के तहत तलाशी के दौरान सुरक्षाबलों का चतरू के उत्तर-पूर्व में सोननार क्षेत्र में आतंकवादियों से सामना हुआ।

    सेना ने कहा, ‘‘घेराबंदी को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया है तथा नागरिक प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ घनिष्ठ समन्वय के साथ अभियान जारी है।’’ सेना ने चुनौतीपूर्ण भौगोलिक स्थिति और परिस्थितियों में गोलीबारी का जवाब देते हुए असाधारण पेशेवर अंदाज एवं दृढ़ रुख प्रदर्शित करने पर जवानों की सराहना की।


    रुक-रुककर होती रही गोलीबारी

    अधिकारियों ने कहा कि एक तलाशी दल का सामना दो- तीन विदेशी आतंकवादियों से हुआ, जो कथित तौर पर पाकिस्तान आधारित जैश-ए-मोहम्मद से संबंधित हैं। उन्होंने कहा कि इन आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की और घेराबंदी तोड़कर भागने की कोशिश के तहत हथगोले फेंके। उन्होंने बताया कि सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई की तथा घेराबंदी को और कड़ा करने के लिए सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और पुलिस के अतिरिक्त जवान मौके पर भेजे गए। उन्होंने बताया कि शाम 5.40 बजे तक दोनों पक्षों के बीच रुक-रुककर गोलीबारी होती रही।


    तीसरी मुठभेड़

    अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ के दौरान आठ सैनिक घायल हो गए और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने कहा कि घायलों में अधिकतर को हथगोले में धमाके से निकले छर्रे लगने से चोटें आई हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभियान में तेजी लाने के लिए ड्रोन सहित उन्नत निगरानी उपकरण और खोजी कुत्तों को तैनात किया गया है। जम्मू क्षेत्र में इस साल सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच यह तीसरी मुठभेड़ है। इससे पहले कठुआ जिले के बिलवार क्षेत्र के कहोग और नजोते जंगलों में 7 और 13 जनवरी को मुठभेड़ हुई थी।


    गणतंत्र दिवस से पहले घुसपैठ की फिराक में आतंकी

    पिछले साल 15 दिसंबर को उधमपुर जिले के माजलता क्षेत्र के सोआन गांव में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में एक पुलिस अधिकारी की जान गई थी जबकि घने जंगल और अंधेरे का फायदा उठाकर आतंकवादी फरार होने में सफल रहे थे।

    अधिकारियों ने बताया कि ये मुठभेड़ पिछले साल दिसंबर में जम्मू क्षेत्र के वन क्षेत्र में छिपे लगभग तीन दर्जन आतंकवादियों को खदेड़ने के लिए शुरू किए गए एक बड़े आतंकवाद रोधी अभियान के बाद हुई है। उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस से पहले शांतिपूर्ण समारोह सुनिश्चित करने के लिए अभियान को तेज किया गया है, क्योंकि खुफिया जानकारी मिली है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका और अधिक आतंकवादियों को भेजने की फिराक में हैं।

  • स्वर्ण मंदिर के सरोवर को अपवित्र करने पर बवाल… मुस्लिम शख्स ने हाथ-पैर धोए… कुल्ला किया

    स्वर्ण मंदिर के सरोवर को अपवित्र करने पर बवाल… मुस्लिम शख्स ने हाथ-पैर धोए… कुल्ला किया


    अमृतसर।
    पंजाब के अमृतसर (Amritsar) शहर के प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर (Famous Golden Temple) में एक मुस्लिम युवक (Muslim youth) न पवित्र सरोवर के पानी से वुजू किया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में युवक को सरोवर में पैर डुबोए, मुंह कुल्ला करते और नाक साफ करते देखा जा सकता है, जिससे कई लोगों ने इसे सरोवर को गंदा करने और सिख मर्यादा का उल्लंघन बताया। सिख समुदाय और सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इसे पवित्र स्थल के प्रति अपमान करार दिया, क्योंकि सरोवर केवल स्नान और धार्मिक डुबकी के लिए है, जबकि वुजू के लिए अलग से बहते पानी की व्यवस्था मौजूद है।

    शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के मुख्य सचिव कुलवंत सिंह मानन ने कहा कि हिंदू और सिख समुदाय मर्यादा जानते हैं, लेकिन अन्य धर्मों के लोग कभी-कभी गलती कर बैठते हैं। एसजीपीसी ने वीडियो की जांच शुरू कर दी है और ऐसे मामलों पर पहले भी चर्चा की जा चुकी है। आरोपी युवक की पहचान दिल्ली निवासी सुभान रंगरेज के रूप में हुई, जो खुद को मुस्लिम शेर कहता है। विवाद बढ़ने के बाद उसने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली। उसने वीडियो जारी कर कहा कि उसे स्वर्ण मंदिर की मर्यादा के बारे में जानकारी नहीं थी और न ही वहां मौजूद किसी ने उसे रोका या बताया।


    वीडियो वायरल होने पर क्या बोला आरोपी

    आरोपी ने बताया कि वह लंबे समय से स्वर्ण मंदिर घूमना चाहता था और सिख धर्म के प्रति गहरा सम्मान रखता है। एक अन्य वीडियो में उसने स्वर्ण मंदिर को भारत की एकता का प्रतीक बताया, जहां सिख, हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सब भाई-भाई की तरह रहते हैं। उसने टोपी पहनने के बावजूद किसी की ओर से आपत्ति न करने की बात कही और कहा कि वह दोबारा जाकर व्यक्तिगत रूप से माफी मांगेगा। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे भक्ति का प्रदर्शन बताया, लेकिन अधिकांश ने इसे अनजान होने के बावजूद गलत करार दिया। एसजीपीसी ने सभी से अपील की है कि वे मर्यादा का पालन करें और स्थल को पर्यटन स्थल की तरह न इस्तेमाल करें।

  • बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव आज: नामांकन में मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत मप्र के 20 दिग्गज नेता बनेंगे प्रस्तावक-समर्थक

    बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव आज: नामांकन में मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत मप्र के 20 दिग्गज नेता बनेंगे प्रस्तावक-समर्थक


    भोपाल । भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनावी प्रक्रिया के तहत आज नई दिल्ली में नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जिसमें मध्य प्रदेश की भूमिका अहम रहने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत राज्य के 20 वरिष्ठ नेता राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रस्तावक और समर्थक के रूप में भाग लेंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार मौजूदा कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को ही सर्वसम्मति से पार्टी की कमान सौंपी जा सकती है।

    बीजेपी के संगठनात्मक चुनावों की यह प्रक्रिया पार्टी के संविधान के तहत संपन्न की जा रही है। आज होने वाले नामांकन कार्यक्रम में देशभर से वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। मध्य प्रदेश से दिल्ली पहुंचे नेताओं का दल इस चुनावी प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएगा और राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए प्रस्ताव पेश करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, जो प्रदेश के लिए संगठनात्मक दृष्टि से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

    मध्य प्रदेश से दिल्ली जाने वाले नेताओं में 5 मंत्री, 5 केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य, 4 सांसद—जिनमें दो राज्यसभा सांसद शामिल हैं—और 5 अन्य वरिष्ठ पार्टी नेता शामिल हैं। यह दल न केवल नामांकन प्रक्रिया में शामिल होगा, बल्कि आगामी दो दिनों तक दिल्ली में रहकर पार्टी के केंद्रीय कार्यक्रमों में भी भाग लेगा। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ इन नेताओं की मौजूदगी को आगामी राजनीतिक रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ल भी नामांकन प्रक्रिया में शामिल होंगे। इसके अलावा वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री प्रहलाद पटेल और मंत्री राकेश सिंह भी दिल्ली पहुंचे हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्यों में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र कुमार खटीक, दुर्गादास उईके और सावित्री ठाकुर शामिल हैं। इन सभी नेताओं की मौजूदगी से यह संकेत मिल रहा है कि पार्टी नेतृत्व इस चुनाव को पूरी तरह सर्वसम्मति और संगठनात्मक एकजुटता के साथ संपन्न करना चाहता है।

    सांसदों की बात करें तो फग्गन सिंह कुलस्ते, विष्णुदत्त शर्मा, सुमित्रा बाल्मीकि, कविता पाटीदार के साथ-साथ वरिष्ठ नेता जयभान सिंह पवैया, लाल सिंह आर्य, डॉ. नरोत्तम मिश्रा, गोपाल भार्गव और ओमप्रकाश धुर्वे भी दिल्ली में मौजूद हैं। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी पहले से ही दिल्ली में रहकर पार्टी गतिविधियों में भाग ले रहे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यदि नामांकन प्रक्रिया में एक ही उम्मीदवार का नाम सामने आता है, तो औपचारिक चुनाव की जरूरत नहीं पड़ेगी और नितिन नवीन को सर्वसम्मति से राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया जा सकता है। यह चुनाव न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती का संदेश देगा, बल्कि आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति तय करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।