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  • किचन का बजट कैसे बचाएं? PNG और LPG में कौन है ज्यादा किफायती, जानिए पूरा गणित

    किचन का बजट कैसे बचाएं? PNG और LPG में कौन है ज्यादा किफायती, जानिए पूरा गणित


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान के रास्ते गैस और तेल की सप्लाई प्रभावित होने से भारत में भी गैस को लेकर चिंता बढ़ गई है। भारत में सरकार लोगों को राहत देने के लिए लगातार कदम उठा रही है। केंद्र सरकार ने लोगों से अपील की है कि जहां सुविधा उपलब्ध है, वहां PNG का इस्तेमाल करें।

    PNG और LPG क्या होते हैं?
    PNG पाइपलाइन के जरिए घर तक आने वाली गैस LPG सिलेंडर में मिलने वाली गैस दोनों का इस्तेमाल खाना बनाने में होता है, लेकिन इनका उपयोग और बिलिंग तरीका अलग-अलग है।

    1 किलो गैस में कितने दिन बनता है खाना?
    अगर सामान्य परिवार 4 सदस्य का हिसाब देखें रोजाना लगभग 0.5 SCM PNG की खपत होती है महीने में करीब 15 SCM PNG इस्तेमाल होता है इसे LPG में बदलें तो: यह लगभग 11–12 किलो LPG के बराबर है वहीं 14.2 किलो LPG सिलेंडर लगभग 25 से 35 दिन तक चलता है

    कौन है ज्यादा किफायती?
    PNG की कीमत लगभग 45 रुपये से लेकर 50 रुपये प्रति SCM महीने का PNG खर्च है करीब ₹700 LPG सिलेंडर की कीमत करीब 800 रुपये से लेकर 1100 रुपये यानी दोनों का खर्च लगभग बराबर है, लेकिन PNG में फायदा यह है कि आप जितनी गैस इस्तेमाल करते हैं, उतना ही भुगतान करते हैं।

    सुविधा के मामले में कौन बेहतर?
    PNG के फायदे 24 घंटे गैस की सप्लाई सिलेंडर खत्म होने की चिंता नहीं आसान और नियमित बिलिंग LPG की दिक्कतें बार-बार सिलेंडर बुक करना पड़ता है खत्म होने पर तुरंत परेशानी हो सकती है PNG सही है जिनके घर में पाइपलाइन कनेक्शन है। जो स्थायी रूप से एक ही जगह रहते हैं LPG सही है किराए के घर में रहने वाले जिनका ट्रांसफर होता रहता है PNG और LPG दोनों ही अपने-अपने तरीके से उपयोगी हैं। खर्च में ज्यादा फर्क नहीं है, लेकिन सुविधा और लगातार सप्लाई के कारण PNG थोड़ा बेहतर विकल्प माना जाता है। हालांकि, आपकी जरूरत और रहने की स्थिति के अनुसार सही विकल्प चुनना सबसे जरूरी है।

  • गर्मी में गुलकंद का कमाल: थकान और पाचन समस्याओं से दिलाए राहत, शरीर को रखे ठंडा

    गर्मी में गुलकंद का कमाल: थकान और पाचन समस्याओं से दिलाए राहत, शरीर को रखे ठंडा


    नई दिल्ली।गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडक देने वाले पारंपरिक और प्राकृतिक उपायों की याद आने लगती है। इन्हीं में से एक है गुलाब की ताजा पंखुड़ियों से बना गुलकंद, जो न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है बल्कि शरीर और मन दोनों को शीतल रखने में मदद करता है। बढ़ती गर्मी, थकान और पाचन संबंधी समस्याओं के बीच गुलकंद एक ऐसा घरेलू उपाय है, जो वर्षों से भारतीय रसोई का अहम हिस्सा रहा है।

    परंपरा और स्वाद का अनोखा संगम

    गुलकंद को बनाने की विधि जितनी सरल है, उतनी ही खास भी। ताजी गुलाब की पंखुड़ियों को चीनी या गुड़ के साथ मिलाकर धूप में धीरे-धीरे पकाया जाता है, जिससे इसकी प्राकृतिक मिठास और खुशबू बरकरार रहती है। यह सिर्फ एक खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और घरेलू नुस्खों की पहचान भी है। पहले के समय में दादी-नानी इसे घर पर बनाकर बच्चों को खिलाती थीं, जिससे उनका स्वास्थ्य भी अच्छा रहता था और शरीर को ठंडक भी मिलती थी।

    गर्मी से राहत दिलाने में कारगर

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, गुलकंद की तासीर ठंडी होती है, जो शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद करती है। गर्मियों में अक्सर थकान, चिड़चिड़ापन और बेचैनी महसूस होती है। ऐसे में गुलकंद का सेवन शरीर को भीतर से ठंडक देता है और मानसिक शांति भी प्रदान करता है। यह प्राकृतिक कूलेंट की तरह काम करता है, जिससे लू और अत्यधिक गर्मी के असर को कम किया जा सकता है।

    पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद

    गुलकंद का एक बड़ा फायदा इसका पाचन पर सकारात्मक असर है। गर्मियों में अक्सर गैस, एसिडिटी और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। रोजाना सीमित मात्रा में गुलकंद का सेवन पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है और पेट को ठंडा रखता है। यह भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है और पेट से जुड़ी असहजता को कम करता है।

    त्वचा और इम्यूनिटी को भी फायदा

    गुलकंद में एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाते हैं। गर्मी के कारण त्वचा पर पड़ने वाले असर-जैसे रूखापन, बेजानपन और जलन को कम करने में भी यह सहायक होता है। नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक निखार आता है और शरीर अंदर से तरोताजा महसूस करता है।

    सेवन के आसान और स्वादिष्ट तरीके

    गुलकंद को कई तरह से अपने आहार में शामिल किया जा सकता है। इसे सीधे चम्मच से खाया जा सकता है, ठंडे दूध या दही में मिलाकर शरबत बनाया जा सकता है या मिठाइयों जैसे हलवा, लड्डू और आइसक्रीम में इस्तेमाल किया जा सकता है। गर्मियों में गुलकंद वाला दूध या शरबत खासतौर पर लोगों का पसंदीदा पेय बन जाता है, जो स्वाद और सेहत दोनों का संतुलन बनाए रखता है।

    सावधानी भी है जरूरी

    हालांकि गुलकंद के कई फायदे हैं, लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। इसमें मिठास अधिक होती है, इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसे लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए। साथ ही, घर का बना शुद्ध गुलकंद बाजार के पैकेट वाले उत्पादों से अधिक लाभकारी होता है।

  • काले प्लास्टिक के डिब्बों में रखा खाना कितना सुरक्षित? जानिए क्‍या कहते हैं एक्सपर्ट

    काले प्लास्टिक के डिब्बों में रखा खाना कितना सुरक्षित? जानिए क्‍या कहते हैं एक्सपर्ट


    नई दिल्ली। बीते 25 मार्च 2026 को राज्यसभा में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद घनश्याम तिवाड़ी ने ढाबों, होटलों और अन्य जगहों पर इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक कंटेनरों को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये सामान्य प्लास्टिक नहीं होते, बल्कि इन्हें इलेक्ट्रॉनिक कचरे और अन्य बचे हुए प्लास्टिक से बनाया जाता है। उनका कहना था कि ऐसे डिब्बों में गर्म खाना रखने से माइक्रोप्लास्टिक कण भोजन में मिल सकते हैं। आइए जानते हैं इस पर विशेषज्ञों की राय।

    कैसे तैयार होता है यह प्लास्टिक

    रिपोर्ट्स के अनुसार, काले प्लास्टिक को बनाने में अक्सर ई-वेस्ट और इंडस्ट्रियल प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाता है। इसे आग से सुरक्षित बनाने के लिए डेकाबीडीई जैसे फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल मिलाए जाते हैं। समस्या यह है कि ये केमिकल पूरी तरह प्लास्टिक में स्थिर नहीं रहते और गर्म होने पर खाने में घुल सकते हैं, खासकर जब भोजन गरम या तैलीय हो। इसके अलावा, इसमें BPA और फ्थेलेट्स जैसे रसायन भी पाए जाते हैं, जिन्हें हार्मोन प्रभावित करने वाले तत्व माना जाता है। बार-बार इस्तेमाल या गर्म करने पर ये रसायन शरीर में जमा हो सकते हैं और लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ

    2024 में हुई एक स्टडी में 200 से अधिक ब्लैक प्लास्टिक प्रोडक्ट्स का परीक्षण किया गया, जिसमें करीब 85 प्रतिशत में टॉक्सिक फ्लेम रिटार्डेंट पाए गए। एक रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्‍टरों का कहना है कि लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। वहीं BPA और फ्थेलेट्स हार्मोनल असंतुलन के साथ-साथ दिल की बीमारी, डायबिटीज और प्रजनन संबंधी समस्याओं का भी जोखिम है। इसके अलावा ब्लैक प्लास्टिक से निकलने वाले माइक्रोप्लास्टिक शरीर में पहुंचकर टॉक्सिक लोड बढ़ा सकते हैं, जिससे भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।

    किन लोगों को अधिक खतरा

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों पर इसका प्रभाव ज्यादा गंभीर हो सकता है। हालांकि अभी तक इसका कैंसर से सीधा संबंध पूरी तरह साबित नहीं हुआ है, लेकिन इसके केमिकल्स को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि काले प्लास्टिक की जगह कांच, स्टील या लकड़ी के बर्तनों का इस्तेमाल करें। खासतौर पर गर्म भोजन रखने के लिए प्लास्टिक से बचना सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है।

  • बार-बार गैस बनना सिर्फ पाचन नहीं, लिवर की समस्या का भी संकेत हो सकता है

    बार-बार गैस बनना सिर्फ पाचन नहीं, लिवर की समस्या का भी संकेत हो सकता है


    नई दिल्ली।आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट से जुड़ी समस्याओं को लोग अक्सर हल्के में ले लेते हैं। खाना खाने के बाद गैस बनना, पेट फूलना या भारीपन महसूस होना आम बात मान ली जाती है, लेकिन बार-बार ऐसा होना शरीर के अंदर किसी गहरी समस्या का संकेत भी हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल पाचन तंत्र की गड़बड़ी नहीं बल्कि लिवर की कार्यप्रणाली में कमी का संकेत भी हो सकता है। इसलिए इन लक्षणों को नजरअंदाज करना भविष्य में बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है।

    पाचन और लिवर का गहरा संबंध

    बहुत से लोग यह नहीं जानते कि पाचन प्रक्रिया में लिवर की अहम भूमिका होती है। लिवर पित्त (बाइल) का निर्माण करता है, जो वसा को तोड़ने और भोजन को सही तरीके से पचाने में मदद करता है। जब लिवर सही मात्रा में पित्त नहीं बना पाता या उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो भोजन पूरी तरह नहीं पचता। इसका परिणाम गैस, अपच, पेट में भारीपन और ब्लोटिंग के रूप में सामने आता है। यही कारण है कि लंबे समय तक गैस की समस्या बने रहना लिवर की कमजोरी का संकेत हो सकता है।

    इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

    अगर आपको बार-बार गैस बनना, पेट फूलना, हल्का दर्द, भूख कम लगना या खाना खाने के बाद असहजता महसूस होती है, तो यह केवल सामान्य समस्या नहीं है। ये लक्षण बताते हैं कि आपका पाचन तंत्र और लिवर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। समय रहते इन संकेतों को पहचानना और सही कदम उठाना बेहद जरूरी है, ताकि समस्या गंभीर रूप न ले सके।

    खराब लाइफस्टाइल बन रही बड़ी वजह

    आजकल की अनियमित दिनचर्या और गलत खानपान भी इस समस्या को बढ़ावा दे रहे हैं। देर रात खाना खाना, जंक फूड का अधिक सेवन, तला-भुना भोजन और अत्यधिक मीठा खाना लिवर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं। इसके कारण लिवर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है और पाचन प्रक्रिया भी प्रभावित होती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर फैटी लिवर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय

    लिवर और पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने के लिए जीवनशैली में सुधार बेहद जरूरी है। सुबह खाली पेट गिलोय का रस पीना फायदेमंद माना जाता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ लिवर की कार्यप्रणाली को भी बेहतर बनाता है। इसके अलावा, आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करना चाहिए। रिफाइंड शुगर का सेवन कम करना भी जरूरी है, क्योंकि यह लिवर पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना और नियमित व्यायाम करना भी लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है।

    समय पर जांच और सावधानी है जरूरी

    यदि समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। केवल गैस की दवा लेने से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन मूल कारण को समझना और उसका इलाज करना अधिक महत्वपूर्ण है। समय पर जांच और सही उपचार से न केवल पाचन तंत्र बल्कि लिवर को भी स्वस्थ रखा जा सकता है।

  • 27 निजी स्कूलों की जांच में खुलासा, स्कूल शिक्षा विभाग ने नियम उल्लंघन पर दिए नोटिस

    27 निजी स्कूलों की जांच में खुलासा, स्कूल शिक्षा विभाग ने नियम उल्लंघन पर दिए नोटिस

    ग्वालियर । ग्वालियर में निजी स्कूलों की लापरवाही पर जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। अभिभावकों की शिकायत और स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त जांच दलों की रिपोर्ट के आधार पर 27 स्कूलों की जांच की गई, जिसमें बड़े पैमाने पर नियम उल्लंघन का खुलासा हुआ।

    जांच में पाया गया कि स्कूलों ने मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों का विनियमन) अधिनियम 2017 और नियम 2020 के नियम 6 (1) का पालन नहीं किया। इसके अलावा, उन्होंने धारा 163 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 का भी उल्लंघन किया। मुख्य रूप से यह उल्लंघन सूचना पटल पर पुस्तक विक्रेताओं और यूनिफॉर्म विक्रेताओं की सूची प्रदर्शित न करना था। जांच दलों की रिपोर्ट के आधार पर अब इन स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है, जिसमें सुधारात्मक कदम उठाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    नोटिस जारी किए गए स्कूलों में प्रमुख नाम हैं:

    जीडी गोयंनका स्कूल

    भारतीयम विद्या निकेतन

    मॉर्निंग स्टार स्कूल

    प्रगति विद्यापीठ

    किडीज कार्नर स्कूल

    मानवेंद्र ग्लोवल स्कूल

    आदित्य वर्ल्ड स्कूल

    नं0-1 एयर फोर्स स्कूल

    नारायण ई-टेक्नो स्कूल

    जयपुरिया स्कूल

    यह कार्रवाई यह संदेश देती है कि शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन निजी स्कूलों के नियम पालन पर सतर्क हैं और अभिभावकों की शिकायतों पर तुरंत कदम उठाया जा रहा है। आगे स्कूलों को निर्देश दिया गया है कि सूचना पटल पर सभी आवश्यक जानकारी सही और समय पर प्रदर्शित करें, ताकि अभिभावकों और छात्रों को पारदर्शी और उचित जानकारी मिल सके। इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है और भविष्य में ऐसे उल्लंघन को रोकने का प्रयास किया जाएगा।

  • बैटिंग-बॉलिंग दोनों में दमदार पंजाब किंग्स, IPL 2026 में ट्रॉफी जीतने का सुनहरा मौका

    बैटिंग-बॉलिंग दोनों में दमदार पंजाब किंग्स, IPL 2026 में ट्रॉफी जीतने का सुनहरा मौका


    नई दिल्ली।आईपीएल 2025 में फाइनल तक का सफर तय करने वाली Punjab Kings इस बार और ज्यादा मजबूत नजर आ रही है। टीम का संतुलन कागज पर बेहद शानदार दिख रहा है चाहे बात बल्लेबाजी की हो या गेंदबाजी की। कप्तान Shreyas Iyer की अगुवाई में टीम आईपीएल 2026 में अपना पहला खिताब जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी। पिछले सीजन की सफलता ने टीम का आत्मविश्वास बढ़ाया है और इस बार लक्ष्य साफ है-ट्रॉफी।

    मजबूत बल्लेबाजी, विस्फोटक शुरुआत की उम्मीद

    पंजाब किंग्स की बल्लेबाजी इस बार उसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। ओपनिंग में Prabhsimran Singh और Priyansh Arya की जोड़ी टीम को तेज शुरुआत देने में सक्षम है। दोनों ने पिछले सीजन में शानदार प्रदर्शन किया था और टीम को कई मैचों में मजबूत प्लेटफॉर्म दिया था। नंबर तीन पर कप्तान श्रेयस अय्यर की भूमिका बेहद अहम रहने वाली है, जो पारी को संभालने और गति देने दोनों में माहिर हैं। इसके अलावा Marcus Stoinis, Mitchell Owen और Cooper Connolly जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी टीम के बैटिंग ऑर्डर को और गहराई देती है। मिडिल ऑर्डर में Shashank Singh और Nehal Wadhera से इस सीजन बेहतर और लगातार प्रदर्शन की उम्मीद होगी।


    संतुलित गेंदबाजी, हर विभाग में विकल्प

    गेंदबाजी में भी पंजाब किंग्स काफी संतुलित नजर आ रही है। तेज आक्रमण की अगुवाई Arshdeep Singh और Marco Jansen करेंगे। इनके साथ Lockie Ferguson (शुरुआती मैचों में अनुपस्थित), Xavier Bartlett और Ben Dwarshuis जैसे विकल्प टीम को और मजबूत बनाते हैं। स्पिन विभाग में Yuzvendra Chahal की मौजूदगी टीम के लिए बड़ा प्लस पॉइंट है। उनके साथ Harpreet Brar और Praveen Dubey जैसे गेंदबाज भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं।

    मिडिल ऑर्डर बनी चिंता की वजह

    जहां टीम के ज्यादातर विभाग मजबूत नजर आते हैं, वहीं मिडिल ऑर्डर अब भी एक कमजोर कड़ी साबित हो सकता है। पिछले सीजन के फाइनल में यही कमजोरी टीम पर भारी पड़ी थी। स्टोइनिस, वढेरा और शशांक जैसे खिलाड़ियों में निरंतरता की कमी देखने को मिली थी।
    इसके अलावा इस बार Josh Inglis टीम का हिस्सा नहीं हैं, जिससे फिनिशिंग में थोड़ी कमी महसूस हो सकती है।

    क्या इस बार मिलेगा पहला खिताब?

    कुल मिलाकर देखा जाए तो पंजाब किंग्स के पास इस बार संतुलित स्क्वॉड, मजबूत ओपनिंग, अनुभवी कप्तान और विविध गेंदबाजी आक्रमण मौजूद है। अगर मिडिल ऑर्डर स्थिर प्रदर्शन करता है, तो टीम खिताब की प्रबल दावेदार बन सकती है। आईपीएल इतिहास में अब तक खिताब से दूर रही पंजाब किंग्स के लिए यह सीजन ‘करो या मरो’ जैसा हो सकता है।

  • रामनवमी पर अयोध्या में अद्भुत सूर्य तिलक से आलोकित हुआ रामलला का दरबार

    रामनवमी पर अयोध्या में अद्भुत सूर्य तिलक से आलोकित हुआ रामलला का दरबार


    नई दिल्ली:रामनगरी अयोध्या एक बार फिर भक्ति और आस्था के अद्भुत संगम की साक्षी बनी जब रामनवमी के पावन अवसर पर राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का भव्य और दिव्य आयोजन संपन्न हुआ दोपहर ठीक 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में जैसे ही सूर्य की किरणें मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचीं वैसे ही रामलला के ललाट पर सूर्य तिलक का अलौकिक दृश्य साकार हो उठा यह क्षण न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था बल्कि इसे देखने वाले श्रद्धालुओं के लिए जीवन भर की अविस्मरणीय अनुभूति बन गया

    सूर्य तिलक का यह अद्भुत दृश्य करीब नौ मिनट तक बना रहा जिसमें सूर्य की किरणें सटीक कोण से रामलला के मस्तक पर केंद्रित रहीं मंदिर परिसर इस दौरान दिव्य प्रकाश से आलोकित हो उठा और हर ओर जय श्रीराम के जयघोष गूंजने लगे इस विशेष आयोजन को भगवान श्रीराम के जन्म क्षण का प्रतीकात्मक पुनर्सृजन माना गया जिससे श्रद्धालुओं की आस्था और भी गहरी हो गई

    इस दिव्य क्षण को संभव बनाने के पीछे आधुनिक विज्ञान और प्राचीन आस्था का अद्भुत मेल देखने को मिला करीब 65 फीट लंबी विशेष प्रणाली के माध्यम से सूर्य की किरणों को गर्भगृह तक पहुंचाया गया इस प्रणाली में अष्टधातु के पाइप लेंस और दर्पणों का उपयोग किया गया जिनकी सहायता से सूर्य प्रकाश को परावर्तित कर सटीक स्थान तक लाया गया परिणामस्वरूप रामलला के ललाट पर लगभग 75 मिमी का तेजस्वी तिलक उभर कर सामने आया

    इससे पहले इस पूरी प्रक्रिया का लगातार तीन दिनों तक परीक्षण किया गया ताकि निर्धारित समय पर किसी भी प्रकार की त्रुटि न हो और सूर्य तिलक पूरी सटीकता के साथ संपन्न हो सके मंदिर प्रशासन और वैज्ञानिकों के संयुक्त प्रयास ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया

    धार्मिक अनुष्ठानों की बात करें तो गर्भगृह में 14 पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष पूजा अर्चना की और पंचामृत अभिषेक संपन्न कराया इसके बाद भगवान की भव्य आरती की गई और उन्हें स्वर्ण जड़ित पीतांबर मुकुट और आभूषणों से अलंकृत किया गया जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग भी अर्पित किया गया जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा

    रामनवमी के इस विशेष अवसर पर अयोध्या में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा राम पथ भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी कतारें देखी गईं श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जगह जगह एलईडी स्क्रीन लगाई गईं जिनके माध्यम से पूरे आयोजन का सीधा प्रसारण किया गया ताकि हर कोई इस दिव्य क्षण का साक्षी बन सके

    मंदिर प्रशासन ने भी विशेष व्यवस्था करते हुए दर्शन का समय बढ़ा दिया जिससे अधिक से अधिक श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर सकें सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक मंदिर के द्वार खुले रहे इस दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए

    इस बार की रामनवमी को धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत विशेष माना जा रहा है क्योंकि रवि योग और सर्वार्थसिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बना जिसने इस पर्व की महत्ता को और अधिक बढ़ा दिया पूरे आयोजन के दौरान अयोध्या नगरी भक्ति उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आई साधु संत और श्रद्धालु भजन कीर्तन में लीन रहे और हर ओर उत्सव का वातावरण छाया रहा इस प्रकार रामनवमी का यह पर्व अपने चरम उल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ

  • जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के

    जेफरीज का बड़ा फैसला: HDFC Bank को पोर्टफोलियो से हटाया, शेयर 3% तक लुढ़के


    नई दिल्ली। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के बड़े जज ने भारतीय फाइनेंसियल सेक्टर में हलचल मचा दी है। कंपनी ने देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक एचडीएफसी बैंक को अपना मुख्य पोर्टफोलियो से बाहर कर दिया है, जिसके बाद शुक्रवार के कारोबार में बैंक के स्टॉक पर दबाव साफ नजर आया। सूची पर बैंक का शेयर करीब 3 प्रतिशत तक जनसंख्या 758 रुपये के आसपास पहुंच गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब पहले से ही बैंक का स्टॉक पिछले एक महीने में 14.3 प्रतिशत और छह महीने में करीब 20 प्रतिशत तक टूट गया है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई है।

    ‘ग्रिड एंड फियर’ की रिपोर्ट में बड़ा बदलाव, एचएसबीसी को मिली जगह

    जेफरीज़ के रणनीतिकार क्रिस वुड ने अपनी नामांकन रिपोर्ट “ग्रिड एंड फियर” में इस बदलाव का ज़िक्र किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया (जापान को खत्म), ग्लोबल और इंटरनेशनल लॉन्ग-ओनली पोर्टफोलियो को हटा दिया गया है। हालाँकि, इस निर्णय के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन बाजार में इसे शामिल करने की घटना देखी जा रही है। खास बात यह है कि बैंक की जगह एचएसबीसी को 4 प्रतिशत वेटेज के साथ पोर्टफोलियो में शामिल किया गया है। इस बदलाव के चलते भारत का कुल वेटेज भी थोड़ा कम हो गया है, जो विदेशी निवेशकों के नजरिए में बदलाव का संकेत देता है।

    एशिया-पैसिफिक पोर्टफोलियो में भी स्टॉक, भारत का वेटेज कम हो गया

    जेफरीज ने सिर्फ ग्लोबल पोर्टफोलियो में ही नहीं, बल्कि एशिया-पैसिफिक (जापान को छोड़कर) पोर्टफोलियो में भी बदलाव किए हैं। भारत और ऑस्ट्रेलिया का वेस्टेज़ 2-2 प्रतिशत नीचे आया है, जबकि ताइवान का वेस्टेज़ 4 प्रतिशत नीचे आया है। इस पोर्टफोलियो में भारत की 13 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो अभी भी MSCI से थोड़ी अधिक बनी हुई है। इसके बावजूद वेस्टेज में यह टिप्पणी की गई है कि विदेशी ब्रोकरेज हाउस को भारत ले जाने से रोका गया है।

    शव के अवशेषों से लेकर गहनता तक की जांच, जांच की भी चर्चा

    यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब हाल ही में डिजिटल स्टॉक एक्सचेंज के शेयरधारक अतनु चक्रवर्ती ने ‘मूल्यों और संपत्तियों’ से जुड़े शेयरों की शपथ ली थी। इसके बाद बैंक ने केकी मिस्त्री को पोर्टफोलियो में नियुक्त कर दिया। बताया जा रहा है कि बैंक ने इस मामले की जांच के लिए लॉ फर्मों को भी नियुक्त किया है। वहीं, अन्यत्र में यह भी संकेत मिले हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) इस मामले की समीक्षा कर सकता है। इन घटनाओं में बैंक की संभावनाओं को लेकर सवाल पूछे गए हैं, जिससे किसी भी व्यक्ति का भरोसेमंद प्रभाव हो सकता है।

    युवाओं की धारणा पर असर, आगे भी रह सकता है दबाव

    विशेषज्ञ विशेषज्ञ का मानना ​​है कि भले ही अभी तक किसी भी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाओं की धारणा प्रभावित होती है। इससे शेयर पर शॉर्ट टर्म में प्रेशर बनाया जा सकता है। स्थिर स्थिति में बैंक का 52 ग्रेड का निचला स्तर 741.05 रुपये और उच्च स्तर 1,020.50 रुपये है, जबकि बैंक की बाजार पूंजी करीब 5.82 करोड़ लाख रुपये है। ऐसे में किसी भी निवेश के लिए यह समय अत्यावश्यक रहना होगा और किसी भी निवेश निर्णय से पहले स्थिति को भरना जरूरी होगा।

  • नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, बालेन्द्र शाह ने ली PM पद की शपथ

    नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, बालेन्द्र शाह ने ली PM पद की शपथ


    काठमांडू। नेपाल की राजनीति में शुक्रवार को एक नया इतिहास बना, जब रैपर और इंजीनियर से नेता बने बालेन्द्र शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 35 वर्ष की उम्र में वे देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बन गए हैं। इसके साथ ही वे मदेश क्षेत्र से इस पद तक पहुंचने वाले पहले नेता भी हैं।

    शपथ ग्रहण समारोह राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल की मौजूदगी में शीतल निवास में दोपहर 12:34 बजे शुभ मुहूर्त पर आयोजित हुआ। इस दौरान कार्यक्रम में हिंदू और बौद्ध परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिला। सात ब्राह्मणों ने शंखनाद किया, 108 युवा ब्राह्मणों ने स्वस्ति वाचन किया, जबकि 107 लामाओं ने बौद्ध मंत्रों का उच्चारण किया।

    भारी बहुमत के साथ सत्ता में एंट्री

    5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में पार्टी ने 182 सीटें हासिल कीं। बालेन्द्र शाह ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके केपी शर्मा ओली को उनके गढ़ झापा-5 सीट से बड़े अंतर से हराया।

    इस चुनाव में पारंपरिक दलों को बड़ा झटका लगा। नेपाली कांग्रेस को 38 सीटें, CPN-UML को 25 और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी को सिर्फ 17 सीटों पर संतोष करना पड़ा। इस नतीजे को युवाओं की Gen-Z लहर का प्रभाव माना जा रहा है।

    कौन हैं बालेन्द्र शाह

    बालेन्द्र शाह, जिन्हें बालेन के नाम से भी जाना जाता है, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख नेता हैं। करीब छह महीने पहले केपी शर्मा ओली की सरकार को युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद हटाया गया था। यह आंदोलन भ्रष्टाचार भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया प्रतिबंध के विरोध में हुआ था।

    बालेन इससे पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं। वे पेशे से इंजीनियर हैं और रैप संगीत के जरिए युवाओं के मुद्दों और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। शपथ लेने के बाद अब वे 15 से 18 मंत्रियों वाला छोटा मंत्रिमंडल बनाने की तैयारी में हैं। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरना और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होगा। नेपाल की राजनीति में यह बदलाव एक नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है, जहां युवा नेतृत्व से बड़े परिवर्तन की उम्मीद की जा रही है।

  • नई दिल्ली में मोदी धामी बैठक मार्गदर्शन के साथ भेंट हुई मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति

    नई दिल्ली में मोदी धामी बैठक मार्गदर्शन के साथ भेंट हुई मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति


    नई दिल्ली में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राजनीतिक संवाद के साथ सांस्कृतिक आस्था का भी सशक्त संदेश दिया। यह मुलाकात न केवल औपचारिक रही बल्कि इसमें मार्गदर्शन परंपरा और जनहित के विषयों पर भी सार्थक चर्चा हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इस बैठक की जानकारी साझा की गई जिससे यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र और राज्य के बीच समन्वय और संवाद लगातार मजबूत हो रहा है।

    मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ जो राज्य के विकास और जनकल्याण के कार्यों में दिशा देने वाला है। उन्होंने इस मुलाकात के दौरान रामनवमी की शुभकामनाएं भी प्रधानमंत्री को दी जिससे यह भेंट केवल राजनीतिक न रहकर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भावनाओं से भी जुड़ गई।

    इस खास अवसर पर मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री को मां सुरकंडा देवी की प्रतिकृति भेंट की जो उत्तराखंड की आस्था और परंपरा का प्रतीक मानी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने बद्री गाय का घी पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादित विभिन्न प्रकार के राजमा और शहद भी उपहार स्वरूप दिए। ये सभी उपहार उत्तराखंड की समृद्ध जैविक परंपरा और स्थानीय उत्पादों की पहचान को दर्शाते हैं।

    मुख्यमंत्री धामी ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने अपने संदेश में प्रधानमंत्री को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया जो देश को नई दिशा नई ऊर्जा और आत्मविश्वास प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का नेतृत्व सेवा समर्पण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प से प्रेरित है और वे गरीबों किसानों युवाओं और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

    इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री धामी ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में की गई कटौती को भी प्रधानमंत्री का दूरदर्शी और जनहितकारी निर्णय बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों विशेषकर मिडिल ईस्ट संकट के बीच लिया गया यह निर्णय आम जनता को राहत देने वाला है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी से जहां आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलेगा वहीं आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि जब भी देश ने किसी चुनौती का सामना किया है तब प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मजबूत नेतृत्व और प्रभावी निर्णयों से देशवासियों के हितों की रक्षा की है। डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क के माध्यम से देश में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाता है।