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  • मुफ्त बस से स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बदल सकते हैं नियम, कलेक्टर तय कर सकेंगे किराया, आज कैबिनेट में हो सकता है फैसला

    मुफ्त बस से स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए बदल सकते हैं नियम, कलेक्टर तय कर सकेंगे किराया, आज कैबिनेट में हो सकता है फैसला


    भोपाल। मध्य प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए परिवहन सुविधा से जुड़ा बड़ा बदलाव हो सकता है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में संचालित बस सेवा के लिए किराया निर्धारित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव पर 12 अक्टूबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में चर्चा के बाद मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है। यदि सरकार प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो अब तक मुफ्त बस सेवा का लाभ ले रहे बच्चों के अभिभावकों को आने वाले समय में किराया देना पड़ सकता है। इससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका है।
    विभाग के प्रस्ताव के मुताबिक जिले में संचालित सांदीपनि विद्यालयों की बसों का किराया निर्धारित करने की जिम्मेदारी कलेक्टरों को दी जा सकती है। कलेक्टर अपने जिले की परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किराया तय कर सकेंगे। इसके बाद अभिभावकों से निर्धारित शुल्क वसूलने की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि किराया कितना होगा और इसे सभी विद्यार्थियों पर लागू किया जाएगा या कुछ विशेष श्रेणियों के बच्चों को इससे छूट मिलेगी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत का कोई प्रावधान होगा या नहीं इस पर भी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
    प्रदेश में वर्तमान में 370 सांदीपनि विद्यालयों में बच्चों को बसों के जरिए घर से स्कूल लाने और स्कूल से घर पहुंचाने की व्यवस्था संचालित है। इस सुविधा का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में मदद देना और उनकी पढ़ाई को सुगम बनाना है। अब सरकार इस व्यवस्था पर होने वाले खर्च की भरपाई के लिए मौजूदा नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रही है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नई व्यवस्था किस तरह लागू होगी और अभिभावकों को कितना भुगतान करना पड़ेगा।
    इस प्रस्ताव के बीच बसों की उपलब्धता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार प्रदेश के 19 जिलों में सांदीपनि विद्यालयों के करीब डेढ़ लाख बच्चों को बस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई विद्यालयों में बसें उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थी इस सुविधा से वंचित हैं। ऐसे में सरकार के सामने केवल किराया तय करने का ही नहीं बल्कि सभी पात्र बच्चों तक परिवहन सुविधा पहुंचाने का सवाल भी है। अभिभावकों के लिए यह जानना जरूरी होगा कि जिन स्कूलों में अभी बसें उपलब्ध नहीं हैं वहां पहले परिवहन व्यवस्था शुरू की जाएगी या नई शुल्क व्यवस्था लागू करने पर प्राथमिकता दी जाएगी।
    यदि प्रस्ताव मंजूर होता है तो इसके क्रियान्वयन से जुड़े नियम और शर्तें भी अहम होंगी। अभिभावकों को राहत देने के लिए जरूरतमंद परिवारों को छूट मिलेगी या नहीं और बस सेवा की गुणवत्ता तथा उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे इस पर फैसले के बाद स्थिति साफ हो सकती है। फिलहाल सभी की नजर कैबिनेट के निर्णय पर है।
    इसके अलावा बैठक में मैहर पांढुर्णा निवाड़ी और मऊगंज जिलों में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यालय खोलने तथा जिला स्तर पर पद सृजित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है। साथ ही 17 सितंबर से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान की प्रगति और अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा भी मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ कर सकते हैं। कैबिनेट के फैसलों से प्रदेश में शिक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।

  • रतलाम ने नम आंखों से दी तेजकुंवरबाई काश्यप को अंतिम विदाई, अहिंसा ग्राम में बसाए 100 परिवार, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर

    रतलाम ने नम आंखों से दी तेजकुंवरबाई काश्यप को अंतिम विदाई, अहिंसा ग्राम में बसाए 100 परिवार, महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम में सोमवार को तेजकुंवरबाई काश्यप का अंतिम संस्कार किया गया। मध्य प्रदेश सरकार के सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री और रतलाम शहर के विधायक चेतन्य काश्यप ने अपनी मां को मुखाग्नि देकर अंतिम विदाई दी। स्टेशन रोड स्थित वीसाजी मेंशन से सुबह करीब 10:30 बजे उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई। शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई यात्रा त्रिवेणी मुक्तिधाम पहुंची जहां धार्मिक रीति रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके निधन से काश्यप परिवार के साथ ही उनसे जुड़े लोगों में शोक का माहौल है।
    अंतिम यात्रा से पहले तेजकुंवरबाई काश्यप का पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। इस दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी और शुभचिंतक उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री निर्मला भूरिया और पूर्व मंत्री हिम्मत कोठारी सहित भाजपा के कई नेता और पदाधिकारी भी अंतिम दर्शन के लिए उपस्थित रहे। व्यापारियों के साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। त्रिवेणी मुक्तिधाम में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उनके जीवन और सामाजिक योगदान को याद किया गया।
    तेजकुंवरबाई काश्यप का रविवार को 83 वर्ष की उम्र में मुंबई में निधन हो गया था। वह पिछले कई दिनों से बीमार थीं। उनके निधन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी शोक व्यक्त किया। परिवार और परिचितों के लिए उनका जाना एक बड़ी क्षति है। उनके जीवन की कहानी संघर्ष और जिम्मेदारी निभाने के साथ धर्म और समाजसेवा के प्रति समर्पण से जुड़ी रही।
    तेजकुंवरबाई का जन्म 17 मार्च 1943 को मध्य प्रदेश के कुक्षी में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय चंपालाल खूंटवाला ने पालिताना तीर्थ में त्रिस्तुतिक जैन समाज की पहली धर्मशाला चंपा निवास का निर्माण करवाया था। वर्ष 1958 में उनका विवाह रतलाम के अशोक कुमार काश्यप से हुआ। लेकिन वर्ष 1964 में पति के आकस्मिक निधन के बाद उनके जीवन की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं। उस समय उनकी उम्र महज 21 वर्ष थी। कम उम्र में पति को खोने के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारी संभाली और पारिवारिक दायित्वों के साथ धार्मिक गतिविधियों तथा तपस्या और साधना के प्रति अपना समर्पण बनाए रखा।
    उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष जरूरतमंद परिवारों और महिलाओं के लिए किए गए प्रयास भी रहे। वर्ष 2005 में चेतन्य काश्यप फाउंडेशन ने रतलाम में अहिंसा ग्राम की स्थापना की थी। यहां करीब 100 जरूरतमंद परिवारों को बसाने और उनके संस्कार निर्माण से जुड़े प्रयासों में तेजकुंवरबाई ने सक्रिय भूमिका निभाई। उनका योगदान केवल परिवारों को बसाने तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने की दिशा में भी काम किया।
    महिलाओं को सिलाई बुनाई कढ़ाई और दूसरे उपयोगी कौशलों का प्रशिक्षण दिलाने के प्रयासों के जरिए उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने में उन्होंने सहयोग किया। स्वसहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की पहल भी उनके सामाजिक योगदान का हिस्सा रही। उनके कार्यों का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को सहारा देना और महिलाओं को अपनी आजीविका के लिए सक्षम बनाना था।
    सोमवार को अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ और लोगों की श्रद्धांजलि उनके प्रति सम्मान को दर्शाती रही। तेजकुंवरबाई काश्यप अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन परिवार की जिम्मेदारियां संभालने से लेकर जरूरतमंदों के लिए काम करने तक का उनका जीवन परिचितों और समाज से जुड़े लोगों की स्मृतियों में बना रहेगा।

  • महाकाल लोक के बाद अब गढ़कालिका लोक की तैयारी, 18.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, नवरात्रि के बाद शुरू हो सकता है निर्माण

    महाकाल लोक के बाद अब गढ़कालिका लोक की तैयारी, 18.50 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार, नवरात्रि के बाद शुरू हो सकता है निर्माण


    उज्जैन । मध्य प्रदेश के धार्मिक शहर उज्जैन में मां गढ़कालिका के भक्तों को जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य मंदिर परिसर की सौगात मिल सकती है। महाकाल लोक की तर्ज पर अब गढ़कालिका माता मंदिर को गढ़कालिका लोक के रूप में विकसित करने की तैयारी की जा रही है। उज्जैन विकास प्राधिकरण ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 18.50 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। करीब डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित होने वाले इस लोक के निर्माण के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। तकनीकी बिड खुलने और निर्माण एजेंसी का चयन होने के बाद परियोजना का काम शुरू होने की उम्मीद है। योजना का उद्देश्य मंदिर परिसर को व्यवस्थित और सुविधाजनक बनाना है ताकि देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान बेहतर अनुभव मिल सके।
    गढ़कालिका माता मंदिर उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। वर्तमान में मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार मुख्य सड़क पर स्थित है और यह अपेक्षाकृत संकरा है। भीड़ बढ़ने पर श्रद्धालुओं के आवागमन में परेशानी होने की आशंका रहती है। गढ़कालिका लोक परियोजना के तहत प्रवेश व्यवस्था को नए सिरे से विकसित करने की योजना बनाई गई है। इससे मंदिर परिसर में आने वाले भक्तों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हो सकेगी और भीड़ को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी।
    परियोजना की खास बात यह है कि आम श्रद्धालुओं और वीआईपी आगंतुकों के लिए प्रवेश की अलग-अलग व्यवस्था प्रस्तावित है। मौजूदा मुख्य द्वार को वीआईपी प्रवेश के रूप में इस्तेमाल करने की योजना है। इसके सामने वीआईपी पार्किंग भी विकसित की जाएगी। वहीं आम श्रद्धालुओं के लिए पश्चिम दिशा में ओखलेश्वर रोड की तरफ से करीब नौ मीटर दूर नया प्रवेश मार्ग प्रस्तावित है। यहां जिगजैग कतार व्यवस्था बनाई जाएगी ताकि दर्शन के लिए आने वाले लोगों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सके। इस व्यवस्था से एक साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर भी प्रवेश द्वार के आसपास भीड़ का दबाव कम करने में सहायता मिल सकती है।
    गढ़कालिका लोक के विकास के साथ आसपास की सड़कों को बेहतर बनाने की योजना भी महत्वपूर्ण है। मंदिर के सामने वाली सड़क और ओखलेश्वर श्मशान से होते हुए कालभैरव की दिशा में जाने वाली सड़क का चौड़ीकरण कर उन्हें फोरलेन बनाने का काम किया जा रहा है। सड़कें चौड़ी होने से मंदिर तक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से त्योहारों और विशेष धार्मिक अवसरों पर बढ़ने वाले यातायात के दबाव को संभालना भी आसान हो सकता है। हालांकि परियोजना की वास्तविक समयसीमा और सुविधाओं का अंतिम स्वरूप निर्माण एजेंसी के चयन तथा आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
    गढ़कालिका मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि महाकवि कालिदास ने इसी मंदिर में मां कालिका की आराधना कर दिव्य ज्ञान प्राप्त किया था। उज्जैन में आयोजित होने वाले कालिदास समारोह की शुरुआत भी परंपरागत रूप से इस मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ होती है। मंदिर का जीर्णोद्धार छठी शताब्दी में राजा हर्षवर्धन द्वारा कराए जाने की मान्यता है जबकि इसका वर्तमान स्वरूप ग्वालियर के महाराजा से जुड़ा बताया जाता है। साधना और तांत्रिक परंपराओं में भी इस स्थान का विशेष महत्व माना जाता है।
    महाकाल लोक के विकास के बाद उज्जैन में धार्मिक पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। गढ़कालिका लोक परियोजना भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। यदि योजना के अनुसार निर्माण पूरा होता है तो मंदिर परिसर में प्रवेश व्यवस्था पार्किंग और श्रद्धालुओं की कतारों का प्रबंधन पहले से बेहतर हो सकेगा। इससे न केवल भक्तों को सुविधा मिलने की उम्मीद है बल्कि उज्जैन के धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल सकता है। फिलहाल सभी की नजर टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और निर्माण कार्य शुरू होने पर है।

  • IND vs WI: इंदौर में भारत की जीत के बीच वेस्टइंडीज ने बनाया महारिकॉर्ड, T20I में छक्कों का दोहरा हजार पूरा, जानें किस नंबर पर है टीम इंडिया

    IND vs WI: इंदौर में भारत की जीत के बीच वेस्टइंडीज ने बनाया महारिकॉर्ड, T20I में छक्कों का दोहरा हजार पूरा, जानें किस नंबर पर है टीम इंडिया


    नई दिल्ली । भारत और वेस्टइंडीज के बीच इंदौर में खेले गए तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में टीम इंडिया ने 14 रन से जीत दर्ज कर पांच मैचों की सीरीज में 2-1 की बढ़त बना ली। हालांकि इस हार के बावजूद वेस्टइंडीज की टीम ने ऐसा विश्व रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया जो टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब तक कोई दूसरी टीम हासिल नहीं कर सकी थी। वेस्टइंडीज टी20 इंटरनेशनल में 2000 छक्के लगाने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है। भारतीय टीम भी इस रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुकी है और आने वाले मुकाबलों में उसके पास इस आंकड़े को पार करने का मौका होगा।
    वेस्टइंडीज की टीम ने भारत के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में कुल 13 छक्के लगाए। इसी के साथ उसके टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छक्कों की संख्या 2000 के पार पहुंच गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक वेस्टइंडीज के नाम 2010 छक्के दर्ज हैं और वह इस सूची में पहले स्थान पर है। दूसरी ओर भारतीय टीम 1997 छक्कों के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद है। इंदौर में खेले गए मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने आठ छक्के लगाए थे। इस तरह दोनों टीमों के बीच छक्कों के मामले में अंतर बेहद कम रह गया है। भारत को वेस्टइंडीज के आंकड़े से आगे निकलने के लिए अब ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ सकता।
    टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में छक्के लगाने के मामले में भारत और वेस्टइंडीज का दबदबा साफ दिखाई देता है। दोनों टीमों में कई ऐसे बल्लेबाज हैं जो तेजी से रन बनाने और बड़े शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं। इस सूची में न्यूजीलैंड तीसरे स्थान पर है जिसके नाम 1585 छक्के दर्ज हैं। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 412 छक्कों का बड़ा अंतर है। पाकिस्तान 1500 छक्कों के साथ चौथे स्थान पर है जबकि दक्षिण अफ्रीका 1407 छक्कों के साथ पांचवें नंबर पर मौजूद है। इंग्लैंड के खाते में 1406 और ऑस्ट्रेलिया के नाम 1400 छक्के दर्ज हैं। श्रीलंका 1045 छक्कों के साथ आठवें स्थान पर है। अफगानिस्तान के 1014 बांग्लादेश के 986 और जिम्बाब्वे के 931 छक्के हैं। ये आंकड़े टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी के लिहाज से टीमों के प्रदर्शन को दर्शाते हैं।
    इंदौर में खेले गए तीसरे टी20 मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए बड़ा स्कोर खड़ा किया। सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने तूफानी अर्धशतक लगाकर टीम को तेज शुरुआत दिलाई और भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 223 रन बनाए। इसके जवाब में वेस्टइंडीज की टीम सात विकेट के नुकसान पर 209 रन ही बना सकी। शिमरोन हेटमायर ने 26 गेंदों में 43 रन बनाए जिसमें छह चौके और दो छक्के शामिल रहे। कामिल पूरन ने भी 27 गेंदों पर 42 रन की उपयोगी पारी खेली। हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने दबाव बनाए रखा और मेहमान टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी।
    वेस्टइंडीज की ओर से पारी के अंतिम ओवरों में शमार स्प्रिंगर ने तेजी से रन बनाकर मुकाबले में रोमांच पैदा किया। उन्होंने केवल 11 गेंदों पर नाबाद 35 रन ठोक दिए जिसमें चार छक्के और दो चौके शामिल थे। इसके बावजूद टीम को जीत नहीं मिल सकी। भारत की तरफ से अर्शदीप सिंह ने 44 रन देकर तीन विकेट हासिल किए जबकि नमन धीर ने 39 रन देकर दो बल्लेबाजों को आउट किया। गेंदबाजों के इस प्रदर्शन ने भारत की जीत सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई।
    इस जीत के साथ भारत ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 2-1 की बढ़त हासिल कर ली। मुकाबले की खास बात यह भी रही कि मौजूदा भारत दौरे में पहली बार किसी टीम ने लक्ष्य का सफलतापूर्वक बचाव किया। एक तरफ भारतीय टीम सीरीज में बढ़त बनाकर उत्साहित है तो दूसरी तरफ वेस्टइंडीज ने हार के बावजूद छक्कों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया है। अब क्रिकेट प्रशंसकों की नजर भारतीय टीम पर रहेगी कि वह कितनी जल्दी 2000 छक्कों का आंकड़ा पार कर इस उपलब्धि को हासिल करती है।

  • ‘द डर्टी पिक्चर 2’ को लेकर एकता कपूर का बड़ा ऐलान, 15 साल बाद फिर पर्दे पर दिखेगी बोल्ड कहानी, जानिए क्या होगा खास

    ‘द डर्टी पिक्चर 2’ को लेकर एकता कपूर का बड़ा ऐलान, 15 साल बाद फिर पर्दे पर दिखेगी बोल्ड कहानी, जानिए क्या होगा खास


    नई दिल्ली । बॉलीवुड की चर्चित फिल्मों में शामिल द डर्टी पिक्चर एक बार फिर सुर्खियों में है। साल 2011 में रिलीज हुई विद्या बालन की इस फिल्म के सीक्वल को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी लेकिन अब निर्माता एकता कपूर ने इस प्रोजेक्ट की पुष्टि कर दी है। उन्होंने बताया है कि द डर्टी पिक्चर 2 बनाने की योजना पर आगे बढ़ने का फैसला कर लिया गया है क्योंकि उन्हें ऐसी कहानी मिल गई है जिसे वह दर्शकों तक पहुंचाना चाहती हैं। हालांकि फिल्म में कौन से कलाकार नजर आएंगे और इसकी शूटिंग कब शुरू होगी इस बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में सीक्वल को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है।
    एकता कपूर ने रणवीर इलाहाबादिया के साथ बातचीत के दौरान फिल्म के दूसरे भाग को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह लंबे समय से इस फिल्म के सीक्वल के बारे में सोच रही थीं लेकिन किसी ऐसी कहानी की तलाश में थीं जो पहले भाग की तरह प्रभावशाली हो और दर्शकों के सामने एक नया नजरिया रख सके। अब उन्हें लगता है कि उनके पास ऐसी कहानी है जिसे बड़े पर्दे पर लाया जा सकता है। एकता के मुताबिक द डर्टी पिक्चर 2 की कहानी भी पहले भाग की तरह किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमेगी। हालांकि इस बार कहानी का केंद्र कौन होगा और फिल्म में किस तरह के किरदार देखने को मिलेंगे इसका खुलासा नहीं किया गया है।
    द डर्टी पिक्चर साल 2011 में रिलीज हुई थी और इसमें विद्या बालन ने दक्षिण भारतीय अभिनेत्री सिल्क स्मिता से प्रेरित किरदार निभाया था। फिल्म में एक ऐसी महिला की जिंदगी और संघर्ष को दिखाया गया था जो अपनी पहचान और इच्छाओं को खुलकर स्वीकार करती है लेकिन समाज की सोच और आलोचनाओं का सामना भी करती है। एकता कपूर ने बातचीत में कहा कि उन्होंने इस किरदार को कभी केवल पीड़ित महिला के रूप में नहीं देखा बल्कि ऐसी महिला के तौर पर समझा जिसने अपनी पसंद और व्यक्तित्व को स्वीकार करने का साहस दिखाया। फिल्म की कहानी ने उस समय मनोरंजन जगत में महिला की छवि और उसकी स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा को जन्म दिया था।
    फिल्म में विद्या बालन के अभिनय को खूब सराहा गया था। उनके साथ नसीरुद्दीन शाह इमरान हाशमी और तुषार कपूर सहित कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए थे। मिलन लुथरिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा प्रदर्शन किया था। उपलब्ध बॉक्स ऑफिस आंकड़ों के अनुसार फिल्म का बजट करीब 31 करोड़ रुपये था जबकि भारत में इसकी कमाई 100 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई थी। फिल्म की लोकप्रियता और विद्या बालन के दमदार अभिनय ने इसे उनके करियर की यादगार फिल्मों में शामिल कर दिया।
    सिल्क स्मिता का असली नाम वदलपति विजयलक्ष्मी था। वह दक्षिण भारतीय सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री और डांसर थीं। उन्होंने तमिल तेलुगु कन्नड़ मलयालम और हिंदी फिल्मों में काम किया। अपने करीब 18 साल के करियर में उन्होंने सैकड़ों फिल्मों में अभिनय किया और अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी जिंदगी से जुड़े कई पहलुओं ने फिल्म द डर्टी पिक्चर की कहानी को चर्चा का विषय बनाया था। हालांकि फिल्म को उनकी जिंदगी से प्रेरित माना जाता है लेकिन इसे पूरी तरह उनकी वास्तविक जीवनी नहीं कहा जा सकता।
    अब द डर्टी पिक्चर 2 की घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विद्या बालन एक बार फिर इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा बनेंगी या एकता कपूर इस बार किसी नए कलाकार को मौका देंगी। फिलहाल निर्माता ने कास्ट कहानी के विस्तृत विवरण और रिलीज डेट को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है। इतना जरूर है कि सीक्वल को लेकर एकता कपूर की पुष्टि ने फिल्मी दर्शकों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि फिल्म की अगली घोषणा कब होती है और इस बार पर्दे पर किसकी कहानी दिखाई जाएगी।

  • ‘दृश्यम 3’ के राजवीर सिंह तोमर बनकर छाए जयदीप अहलावत, ब्लॉकबस्टर के बाद बदलेगी किस्मत, अब बड़े रोल पर नजर

    ‘दृश्यम 3’ के राजवीर सिंह तोमर बनकर छाए जयदीप अहलावत, ब्लॉकबस्टर के बाद बदलेगी किस्मत, अब बड़े रोल पर नजर


    नई दिल्ली । बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन की फिल्म दृश्यम: द कन्क्लूजन को मिल रही सफलता के बीच अभिनेता जयदीप अहलावत ने अपने अगले करियर प्लान को लेकर अहम बात कही है। फिल्म में राजवीर सिंह तोमर का किरदार निभाकर दर्शकों का ध्यान खींचने वाले जयदीप अब बार-बार पुलिस अधिकारी की भूमिका नहीं निभाना चाहते। अभिनेता की इच्छा है कि उन्हें ऐसे किरदार मिलें जो उनकी अभिनय क्षमता को नई दिशा दें और उन्हें कुछ अलग करने का मौका दें। जयदीप ने फिल्म की सफलता पर खुशी जताते हुए उम्मीद जाहिर की है कि इस फिल्म के बाद उनके पास चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के प्रस्ताव आएंगे।
    जयदीप अहलावत ने हाल ही में वैरायटी इंडिया के साथ बातचीत में फिल्म और अपने किरदार को लेकर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि किसी ब्लॉकबस्टर फिल्म का हिस्सा बनना हर अभिनेता का सपना होता है और वह इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं। हालांकि उन्हें अभी यह नहीं पता कि दृश्यम 3 की सफलता उनके करियर को किस तरह आगे बढ़ाएगी लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इसका सकारात्मक असर जरूर देखने को मिलेगा। अभिनेता चाहते हैं कि निर्माता और निर्देशक अब उन्हें एक ही तरह की भूमिकाओं में सीमित रखने के बजाय नए और चुनौतीपूर्ण किरदारों में आजमाएं।
    जयदीप का कहना है कि वह अच्छे स्क्रीनप्ले और मजबूत कहानी वाले प्रोजेक्ट करना चाहते हैं। उनके लिए किसी फिल्म में किरदार की अहमियत और उसे निभाने की चुनौती काफी मायने रखती है। वह ऐसे रोल की तलाश में हैं जिनमें अभिनय के नए पहलुओं को सामने लाने का अवसर मिले। पुलिस अधिकारी के किरदारों में दर्शकों ने उन्हें पहले भी पसंद किया है लेकिन अब वह इस छवि से आगे निकलकर अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाना चाहते हैं। उनका मानना है कि एक अभिनेता के तौर पर लगातार नए प्रयोग करना जरूरी है ताकि दर्शकों को हर बार उनका अलग रूप देखने को मिले।
    दृश्यम 3 में जयदीप के किरदार राजवीर सिंह तोमर की कहानी में अहम भूमिका है। फिल्म में अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर के रूप में अपने परिवार को बचाने की कोशिश करते नजर आते हैं। जयदीप ने बातचीत के दौरान अजय देवगन की अभिनय शैली और कहानी को लेकर उनके नजरिए की भी तारीफ की। जब उनसे पूछा गया कि कुछ दृश्यों में अजय ने अपने किरदार को पीछे रखकर जयदीप के किरदार को प्रभावी होने का मौका दिया तो उन्होंने कहा कि अजय कहानी की जरूरत को समझते हैं। उनके मुताबिक फिल्म में यह जरूरी था कि विजय सलगांवकर को राजवीर सिंह तोमर से डर महसूस हो। अजय देवगन ने इसी जरूरत के अनुसार अपने किरदार को निभाया और कहानी को प्राथमिकता दी।
    अभिनेता ने यह भी बताया कि दृश्यम 3 का हिस्सा बनना उनके लिए अचानक लिया गया फैसला था। पहले से तय काम और व्यस्त शेड्यूल के बीच इस फिल्म के लिए समय निकालना आसान नहीं था। शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह अपनी तारीखों को कैसे व्यवस्थित करेंगे लेकिन निर्माताओं के साथ बातचीत के बाद इसका समाधान निकल आया। जयदीप इस फिल्म को करना चाहते थे और अपने किरदार से संतुष्ट भी थे इसलिए आखिरकार उन्होंने इसके लिए हामी भर दी। अब फिल्म का हिस्सा बनने के फैसले से वह खुश हैं।
    जयदीप अहलावत इससे पहले वेब सीरीज पाताल लोक में पुलिस अधिकारी हाथीराम चौधरी की भूमिका निभाकर काफी लोकप्रियता हासिल कर चुके हैं। फिल्म राजी में भी उनका गंभीर और प्रभावशाली अंदाज देखने को मिला था। अब उनकी अगली बड़ी फिल्म किंग है जिसमें वह शाहरुख खान के साथ नजर आएंगे। ऐसे में दृश्यम 3 की सफलता के बाद दर्शकों की नजर उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स पर रहेगी। जयदीप की कोशिश अब अपनी स्थापित छवि से आगे बढ़ते हुए ऐसे किरदार चुनने की है जो उनके अभिनय के नए रंग सामने ला सकें।

  • जिबूती के पास प्रवासियों की नाव पलटी, 139 की मौत; 15 बच्चों ने भी गंवाई जान, 84 से अधिक लापता

    जिबूती के पास प्रवासियों की नाव पलटी, 139 की मौत; 15 बच्चों ने भी गंवाई जान, 84 से अधिक लापता

    नई दिल्ली। अफ्रीका से यमन की ओर जा रहे प्रवासियों के लिए समुद्री सफर जानलेवा साबित हुआ। जिबूती के पास प्रवासियों से भरी एक नाव पलटने से कम से कम 139 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 15 बच्चे भी शामिल हैं, जबकि 84 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। यह दर्दनाक हादसा गुरुवार और शुक्रवार की मध्यरात्रि के बीच हुआ। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) ने रविवार को इसकी जानकारी दी। हादसे के बाद स्थानीय अधिकारियों ने लापता लोगों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया है।

    80 से अधिक लोग बचाए गए

    आईओएम के अनुसार, हादसे के बाद बरामद किए गए शवों में 52 पुरुष, 42 महिलाएं और 15 बच्चे शामिल हैं। दुर्घटना में 80 से अधिक लोग जीवित बचने में सफल रहे। ये सभी इथियोपियाई नागरिक बताए गए हैं।

    संगठन की टीमें स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर जीवित बचे लोगों को आपातकालीन सहायता और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रही हैं। इसके साथ ही मृतकों के सम्मानजनक अंतिम संस्कार की व्यवस्था भी की जा रही है। लापता लोगों की तलाश जारी है, हालांकि समुद्र में खराब परिस्थितियों के कारण बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

    यमन से लौटाए जाने के बाद फिर समुद्र में उतरे प्रवासी

    जिबूती में आईओएम के मिशन प्रमुख एलेक्जेंड्रे कॉयसाक ने हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि यह जान-माल का बेहद भयावह और विनाशकारी नुकसान है। उनकी संवेदनाएं उन लोगों और परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया है या जिनके परिजनों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

    कॉयसाक के मुताबिक, नाव में सवार करीब 150 लोगों को पहले यमन से वापस भेज दिया गया था। इसके बावजूद उन्होंने दोबारा समुद्र पार करने की कोशिश की। इसी दौरान यह भीषण दुर्घटना हो गई।

    यमन जाने वाले समुद्री मार्ग पर बढ़ रहा खतरा

    आईओएम के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में यमन जाने वाले समुद्री मार्ग पर 900 से अधिक प्रवासियों की मौत हो गई या वे लापता हो गए। इस दौरान इस रास्ते से यात्रा करने की कोशिश करने वाले लोगों की संख्या में 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    मार्च 2026 में भी एक जहाज डूबने की घटना सामने आई थी, जिसमें नौ लोगों की मौत हो गई थी और 45 लोग लापता हो गए थे। लगातार हो रहे हादसे इस समुद्री मार्ग पर प्रवासियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर रहे हैं।

    बेहतर भविष्य की तलाश में जोखिम उठा रहे लोग

    आईओएम के प्रवक्ता केनेडी ओमोंडी ओकोथ ने बताया कि इस समुद्री मार्ग से यात्रा करने वाले अधिकांश लोग इथियोपिया या सोमालिया से आते हैं। इनमें से कई प्रवासी जिबूती में फंस जाते हैं और बेहतर भविष्य की उम्मीद में जोखिम भरी समुद्री यात्रा करने का प्रयास करते हैं।

    संगठन ने दानदाताओं और सहयोगी संस्थाओं से जिबूती में खोज एवं बचाव अभियानों और अन्य जीवनरक्षक कार्यों के लिए अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं बताती हैं कि सुरक्षित रास्तों के अभाव में प्रवासियों को अपनी जान जोखिम में डालकर समुद्र पार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

  • ‘इमरान खान विदेशी हैं, देश से बाहर निकालो’, CJP के प्रदर्शन में शामिल होने पर भाजपा नेता की मांग

    ‘इमरान खान विदेशी हैं, देश से बाहर निकालो’, CJP के प्रदर्शन में शामिल होने पर भाजपा नेता की मांग


    मुंबई।
    कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान विवादों में घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने मुंबई पुलिस से अभिनेता के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें देश से निर्वासित करने की मांग की है। सोमैया का आरोप है कि इमरान खान विदेशी नागरिक हैं और उन्हें भारत में राजनीतिक प्रदर्शनों में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है।

    मुंबई पुलिस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग

    किरीट सोमैया ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इस मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर मनोज कुमार शर्मा को पत्र लिखा है। सोमैया ने अपने पत्र की प्रति भी सोशल मीडिया पर साझा की।

    पत्र में भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि विदेशी नागरिक होने के कारण इमरान खान को भारतीय नागरिकों के समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं हैं। उन्होंने अभिनेता के राजनीतिक आंदोलन में शामिल होने को गैरकानूनी बताते हुए पुलिस से कार्रवाई करने की मांग की। अपनी एक अन्य पोस्ट में सोमैया ने अभिनेता को तत्काल देश से बाहर निकालने की मांग भी की।

    अगस्त क्रांति मैदान से हिरासत में लिए गए थे इमरान खान

    यह विवाद 10 अक्टूबर को उस समय सामने आया, जब मुंबई पुलिस ने अगस्त क्रांति मैदान से अभिनेता इमरान खान को हिरासत में लिया। यहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया था।

    हिरासत में लिए जाने के बाद अभिनेता ने पुलिस वैन के अंदर से एक सेल्फी इंस्टाग्राम पर साझा की थी। इसके साथ उन्होंने लिखा, “ऐसा लगता है कि मैं ड्राइव पर जा रहा हूं।”

    इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें इमरान खान पुलिस अधिकारियों से सवाल करते दिखाई दिए। वीडियो में उन्होंने पूछा, “मैंने क्या किया है? मेरे साथ धक्का-मुक्की क्यों की जा रही है?”

    ‘मैं एक नागरिक के तौर पर अपनी आवाज उठाने आया था’

    हिरासत की घटना के बाद शनिवार को मीडिया से बातचीत में इमरान खान ने अपने प्रदर्शन में शामिल होने की वजह बताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी विशेष मांग को लेकर वहां नहीं पहुंचे थे, बल्कि एक नागरिक के तौर पर अपनी आवाज उठाने आए थे।

    अभिनेता ने कहा, “मेरी कोई मांग नहीं है। मैं यहां एक नागरिक के रूप में, इस शहर में रहने वाले व्यक्ति के रूप में आया हूं। मैं यह देखने आया हूं कि लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध क्यों लगाया जा रहा है और लोगों की आवाज क्यों दबाई जा रही है।”

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी संगठन या राजनीतिक पार्टी का हिस्सा बनकर प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए थे।

    400 से अधिक लोगों को हिरासत में लेने का दावा

    मुंबई पुलिस के मुताबिक, अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन में बिना अनुमति विरोध प्रदर्शन करने के आरोप में 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया था।

    पुलिस ने बताया कि बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार विरोध प्रदर्शन के लिए आजाद मैदान निर्धारित था। इसी वजह से अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।

    इस कार्रवाई के दौरान महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को भी हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

    इमरान खान के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद अब मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। जहां अभिनेता ने इसे एक नागरिक के तौर पर अपनी आवाज उठाने का मामला बताया है, वहीं किरीट सोमैया ने उनकी नागरिकता और राजनीतिक प्रदर्शन में भागीदारी को लेकर सवाल उठाते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है।

  • बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    बंगला साहिब गुरुद्वारे में हंगामे पर विवाद, केजरीवाल समेत ‘आप’ नेताओं के खिलाफ DSGMC ने दी शिकायत

    नई दिल्ली। दिल्ली के बंगला साहिब गुरुद्वारे में कथित हंगामे और घटना से जुड़े भ्रामक वीडियो प्रसारित करने के मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के अन्य नेताओं के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी ने आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों ने गुरुद्वारे के पवित्र परिसर में राजनीतिक नारे लगाए, जिससे धार्मिक माहौल प्रभावित हुआ। उसने पुलिस से मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका के नेतृत्व में कमेटी के पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रविवार को नई दिल्ली जिला के पुलिस उपायुक्त कार्यालय में शिकायत सौंपी। कमेटी ने पुलिस को घटना से संबंधित वीडियो भी उपलब्ध कराए हैं।

    गुरुद्वारे की मर्यादा भंग करने का आरोप

    दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अपनी शिकायत में कहा कि प्रदर्शनकारियों ने पवित्र परिसर के भीतर राजनीतिक नारे लगाए। कमेटी के मुताबिक, इस तरह की गतिविधियों से गुरुद्वारे का धार्मिक वातावरण प्रभावित हुआ और गुरु घर की पवित्रता एवं मर्यादा का उल्लंघन हुआ।

    कमेटी ने मामले में दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इसके साथ ही घटना से जुड़े वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले की भी जांच की मांग उठाई गई है।

    पुलिस के गुरुद्वारे में प्रवेश पर ‘आप’ ने उठाए सवाल

    इस विवाद को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने गुरुद्वारे में पुलिस के प्रवेश की निंदा की थी। उन्होंने कहा था कि गुरुद्वारों के दरवाजे जरूरतमंद लोगों को आश्रय देने के लिए हमेशा खुले रहते हैं।

    वहीं, आम आदमी पार्टी के नेताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए गुरुद्वारे के भीतर दाखिल हुई थी। इस मुद्दे पर रविवार शाम आप कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज और विधायक जरनैल सिंह ने प्रेस वार्ता की। इस दौरान उन्होंने DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका पर भाजपा का पक्ष लेने का आरोप लगाया।

    कालका बोले- मुख्य दरबार हॉल में नहीं गई थी पुलिस

    DSGMC अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने पुलिस के प्रवेश को लेकर अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने पहुंचे पुलिसकर्मियों ने गुरुद्वारे के मुख्य दरबार हॉल में प्रवेश नहीं किया था। उनके मुताबिक, पुलिस ने परिसर के भीतर से गुजरने वाले रास्ते का इस्तेमाल किया था।

    हालांकि, कालका ने यह भी कहा कि पुलिसकर्मियों को वर्दी में गुरुद्वारा परिसर के भीतर प्रवेश नहीं करना चाहिए था। इस तरह उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को लेकर अपनी आपत्ति भी जाहिर की।

    पुलिस ने वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित करने की बात कही

    नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस मामले में स्पष्टीकरण दिया था। उन्होंने कहा था कि पुलिसकर्मी उस साझा रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने के स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं।

    पुलिस उपायुक्त ने आरोप लगाया कि घटना से संबंधित वीडियो दुर्भावनापूर्ण मंशा से प्रसारित किए गए। उन्होंने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया।

    फिलहाल, बंगला साहिब गुरुद्वारे की घटना को लेकर DSGMC और आम आदमी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। कमेटी की शिकायत के बाद अब मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

  • मोहन यादव ने नरसिंहपुर से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे पार्टी

    मोहन यादव ने नरसिंहपुर से कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपना इतिहास देखे पार्टी


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधा है। नरसिंहपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा था। मुख्यमंत्री ने इस पुराने राजनीतिक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए कांग्रेस को अपने इतिहास पर नजर डालने की नसीहत दी। उनके बयान के बाद SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज हो गई है।
    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कांग्रेस जब चुनाव में सफलता हासिल करती है तो उसे चुनावी प्रक्रिया में कोई खामी नजर नहीं आती लेकिन जब परिणाम उसके पक्ष में नहीं आते तो वह चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने लगती है। उन्होंने केरल और हिमाचल प्रदेश का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस अलग-अलग परिस्थितियों में अलग रुख अपनाती है। मुख्यमंत्री के मुताबिक चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पहले राजनीतिक दलों को अपने पुराने फैसलों और व्यवहार पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के खिलाफ लगाए जाने वाले गंभीर आरोपों के लिए ठोस तथ्यों और प्रमाणों की जरूरत पर भी जोर दिया।
    अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने टीएन शेषन और लालकृष्ण आडवाणी के बीच हुए चुनाव का जिक्र किया। दरअसल पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन ने 1999 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर गुजरात की गांधीनगर सीट से चुनाव लड़ा था। इस सीट पर उनका मुकाबला भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से हुआ था। मुख्यमंत्री ने इसी घटनाक्रम को आधार बनाकर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करने वाली पार्टी को अपने पुराने राजनीतिक निर्णयों को भी याद रखना चाहिए।
    मोहन यादव ने अपने भाषण में पूर्व आईपीएस अधिकारी केपीएस गिल का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक हितों के लिए अधिकारियों और संवैधानिक पदों से जुड़े लोगों को राजनीति में अवसर दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नेहरू-गांधी परिवार पर परिवारवाद को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश की करीब 600 रियासतों ने अपने अधिकार सौंपे थे लेकिन उनके मुताबिक कांग्रेस ने राजनीतिक नेतृत्व को एक परिवार तक सीमित रखने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक संबोधन के दौरान लगाए।
    गौरतलब है कि कांग्रेस SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी कर रही है। इसी मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस के विरोध को उसके राजनीतिक रुख से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर SIR को लेकर कांग्रेस की आपत्तियां चुनावी मतदाता सूची की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता से संबंधित हैं।
    नरसिंहपुर में मुख्यमंत्री का कार्यक्रम केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उन्होंने संदीपनी एक्सीलेंस स्कूल के नए भवन का उद्घाटन किया और विद्यार्थियों के लिए बस सेवा को हरी झंडी दिखाई। कार्यक्रम में सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करने और विकास परियोजनाओं से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल रहे। इस तरह शिक्षा और विकास कार्यों के बीच मुख्यमंत्री ने SIR विवाद को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर चल रही बहस में पार्टी के पुराने राजनीतिक इतिहास का हवाला दिया।