Blog

  • कर्नाटक सरकार ने तंबाकू सेवन पर लगाम कसने के लिए गुटखा और प्रतिबंधित निकोटिन उत्पादों के निर्माण-बिक्री पर लगाई पाबंदी

    कर्नाटक सरकार ने तंबाकू सेवन पर लगाम कसने के लिए गुटखा और प्रतिबंधित निकोटिन उत्पादों के निर्माण-बिक्री पर लगाई पाबंदी


    नई दिल्ली ।कर्नाटक सरकार ने राज्य में गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकोटिन युक्त प्रतिबंधित उत्पादों के खिलाफ बड़ा कदम उठाते हुए एक साल के लिए रोक लगा दी है। सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इस संबंध में 10 अगस्त 2026 को अधिसूचना जारी की। अधिसूचना जारी होने के साथ ही पूरे राज्य में यह प्रतिबंध प्रभावी हो गया है और अगले एक साल तक लागू रहेगा।

    नए आदेश के तहत तंबाकू और या निकोटिन वाले गुटखा, पान मसाला तथा अन्य प्रतिबंधित उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी। इसका मतलब है कि ऐसे उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अलग-अलग स्तरों पर कार्रवाई की जा सकेगी। सरकार ने इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य से जोड़ते हुए राज्य में तंबाकू की लत को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।

    कर्नाटक सरकार ने प्रतिबंध को प्रभावी बनाने के लिए विशेष निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान भी शुरू किया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में गठित टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में प्रतिबंधित तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की उपलब्धता तथा बिक्री पर नजर रखेंगी। दुकानों और अन्य स्थानों पर जांच के दौरान यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

    सरकार की अधिसूचना खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) और खाद्य सुरक्षा और मानक नियमों के तहत निर्धारित प्रावधानों के आधार पर जारी की गई है। संबंधित विभाग को खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए ऐसे उत्पादों की बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार प्राप्त है।

    राज्य सरकार के इस फैसले का एक प्रमुख उद्देश्य तंबाकू और निकोटिन की लत को नियंत्रित करना है। गुटखा और तंबाकू उत्पादों का लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। सरकार का मानना है कि इन उत्पादों की उपलब्धता सीमित करने से इनके इस्तेमाल को रोकने और लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद मिल सकती है।

    प्रतिबंध के साथ ही प्रशासन ने आम लोगों से भी सहयोग की अपील की है। विभाग ने कहा है कि यदि किसी स्थान पर प्रतिबंधित तंबाकू या निकोटिन उत्पादों के निर्माण, भंडारण, बिक्री या वितरण की जानकारी मिलती है तो इसकी सूचना संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जानी चाहिए। इससे प्रवर्तन अभियान को प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    कर्नाटक में लागू यह पाबंदी ऐसे समय में आई है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य के स्तर पर तंबाकू सेवन को नियंत्रित करना सरकारों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है। अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की निगरानी और जांच अभियान यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि प्रतिबंधित उत्पाद बाजार में दोबारा उपलब्ध न हों।

    सरकार ने इस फैसले को स्वस्थ और नशा-मुक्त कर्नाटक की दिशा में उठाया गया कदम बताया है। आने वाले महीनों में प्रतिबंध के पालन को लेकर बाजारों, दुकानों और आपूर्ति से जुड़े स्थानों पर निरीक्षण जारी रहने की संभावना है। एक साल की अवधि में प्रशासन की कार्रवाई और आम लोगों की भागीदारी इस प्रतिबंध को प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण होगी।

  • संसद में नीट मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, रिजिजू ने तत्काल बहस की पेशकश की, हंगामे से सदन स्थगित

    संसद में नीट मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने, रिजिजू ने तत्काल बहस की पेशकश की, हंगामे से सदन स्थगित

    नई दिल्ली ।संसद के मॉनसून सत्र में बुधवार को नीट के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध खत्म करने की कोशिश हुई, लेकिन सदन में जारी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से अपनी सीटों पर लौटने और शांतिपूर्वक चर्चा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि सरकार नीट के मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।

    रिजिजू ने सदन में कहा कि सरकार चर्चा से पीछे नहीं हट रही है और गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। उन्होंने विपक्षी सांसदों से सदन के वेल से हटने का आग्रह किया और कहा कि यदि सदस्य अपनी सीटों पर लौट आते हैं तो चर्चा तत्काल शुरू की जा सकती है।

    संसदीय कार्यमंत्री ने कहा कि मॉनसून सत्र के अब केवल दो दिन शेष हैं और इन दिनों का उपयोग संसदीय कामकाज के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने विपक्ष के विरोध के तरीके पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि अनुशासन के साथ सदन में मुद्दे उठाए जाने चाहिए। सरकार की ओर से चर्चा की तैयारी होने के बावजूद हंगामा जारी रहने से कार्यवाही प्रभावित हुई।

    इस दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन के वेल में पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया। सांसदों की ओर से नीट सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की जा रही थी। विरोध के कारण सदन का सामान्य कामकाज आगे नहीं बढ़ सका। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी जारी रहा।

    पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने विपक्षी सांसदों से सदन का वेल खाली करने और अपनी सीटों पर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और गृहमंत्री अमित शाह जवाब देने को तैयार हैं। ऐसे में विपक्ष को सदन की कार्यवाही सामान्य बनाने में सहयोग करना चाहिए।

    जगदंबिका पाल ने यह भी कहा कि लगातार सदन बाधित करने से लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति आने वाली पीढ़ी को गलत संदेश जा सकता है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वह चर्चा में शामिल हो और संबंधित मुद्दों को सदन के भीतर उठाए, ताकि सरकार की ओर से उनका जवाब दिया जा सके।

    सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस के लिए संसदीय प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। रिजिजू ने विपक्ष को भरोसा दिलाने की कोशिश की कि सरकार नीट के विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और संबंधित सवालों पर जवाब देने की प्रक्रिया सदन में आगे बढ़ाई जा सकती है।

    इस बीच भाजपा सांसद नितिन नबीन ने विपक्ष के लगातार व्यवधान पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा से बच रहा है और संसद की कार्यवाही रोक रहा है। उनके मुताबिक सरकार की ओर से चर्चा के लिए बार-बार प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी है।

    हालांकि, सदन में हंगामा कम नहीं हुआ और अंततः लोकसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। अब सदन की अगली बैठक 13 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे होगी। मॉनसून सत्र के अंतिम दिनों में नीट के मुद्दे पर चर्चा और सरकार के जवाब को लेकर दोनों पक्षों के रुख पर नजर रहेगी। गतिरोध समाप्त करने के लिए सदन में संवाद और चर्चा की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • मानसून में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, जानिए किन लोगों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है और कब लें चिकित्सा मदद

    मानसून में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, जानिए किन लोगों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है और कब लें चिकित्सा मदद

    नई दिल्ली ।देश के कुछ हिस्सों में मानसून और बदलते मौसम के बीच इन्फ्लूएंजा ए H1N1, जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है, के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। दिल्ली में भी इस साल संक्रमण के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 6 अगस्त 2026 तक राजधानी में H1N1 के 1,349 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे। इसके बाद कुछ अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

    स्वाइन फ्लू एक वायरल श्वसन संक्रमण है, जिसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई दे सकते हैं। मानसून के दौरान मौसम में बदलाव, तापमान में उतार-चढ़ाव और लोगों के बीच संपर्क बढ़ने जैसी परिस्थितियां श्वसन संक्रमण के फैलाव के लिए अनुकूल वातावरण बना सकती हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में बीमारी हल्की रहती है और उचित आराम, निगरानी तथा चिकित्सकीय सलाह से मरीज ठीक हो जाते हैं।

    स्वाइन फ्लू का खतरा सभी लोगों को हो सकता है, लेकिन कुछ समूहों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग विशेष सावधानी की श्रेणी में आते हैं। इनके अलावा पहले से फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, डायबिटीज या किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या वाले मरीजों में भी जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।

    H1N1 संक्रमण होने पर अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक से संबंधित परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। कुछ मरीजों में लक्षण अपेक्षाकृत हल्के होते हैं, जबकि जोखिम वाले लोगों में बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है। इसलिए लगातार बने रहने वाले या बढ़ते लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    विशेष रूप से सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, सीने में बेचैनी, अत्यधिक कमजोरी, असामान्य रूप से ज्यादा नींद आना या तेजी से बिगड़ती तबीयत गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी वाले मरीजों में लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    स्वाइन फ्लू के उपचार में मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर चिकित्सा प्रबंधन किया जाता है। कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर शुरुआती चरण में ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवा की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, दवा की जरूरत, उसकी मात्रा और उपचार की अवधि मरीज की स्थिति देखकर चिकित्सक तय करते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर खुद से एंटीवायरल या अन्य दवाएं लेना उचित नहीं है।

    संक्रमण से बचाव के लिए हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा बीमार व्यक्ति के संपर्क में अनावश्यक रूप से आने से बचना महत्वपूर्ण है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। संक्रमित व्यक्ति को भी दूसरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके।

    फ्लू से बचाव के लिए टीकाकरण भी एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे लेकर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बदलते मौसम के दौरान सावधानी, शुरुआती लक्षणों पर निगरानी और जोखिम वाले लोगों की समय पर चिकित्सकीय जांच संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकती है।

  • MP में एनालॉग पनीर पर सरकार की सख्ती, CM मोहन यादव बोले- अब चलेगा सिर्फ प्राकृतिक दूध का पनीर

    MP में एनालॉग पनीर पर सरकार की सख्ती, CM मोहन यादव बोले- अब चलेगा सिर्फ प्राकृतिक दूध का पनीर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर को लेकर मोहन यादव सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री को प्रतिबंधित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा है कि मध्य प्रदेश में प्राकृतिक दूध से तैयार होने वाले पनीर और दूसरे दुग्ध उत्पादों को ही प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार का जोर दूध उत्पादन बढ़ाने और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों के जरिए प्रदेश की अलग पहचान बनाने पर है। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के बाद एनालॉग पनीर के निर्माण और बिक्री से जुड़े कारोबार पर कार्रवाई का रास्ता भी साफ हो गया है।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री जैसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाएगा। सरकार इस तरह के उत्पादों को हतोत्साहित करेगी और प्राकृतिक दूध से बने पनीर को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करेगी। उनका कहना है कि प्रदेश में दूध उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी सरकार आगे बढ़ रही है। प्राकृतिक दूध से तैयार उत्पादों को बढ़ावा देकर राज्य की अपनी पहचान बनाई जा सकती है।

    एनालॉग पनीर को लेकर देश के कई हिस्सों में पिछले कुछ समय से चर्चा चल रही है। सामान्य पनीर दूध से तैयार किया जाता है, जबकि एनालॉग पनीर में दूध के साथ या उसकी जगह वनस्पति वसा, प्रोटीन और दूसरे खाद्य घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पादों की संरचना और इस्तेमाल किए गए घटक सामान्य दूध से बने पनीर से अलग हो सकते हैं। इसी वजह से खाद्य गुणवत्ता और लेबलिंग को लेकर भी इस तरह के उत्पादों पर लगातार चर्चा होती रही है।

    मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले को प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों को बढ़ावा देने की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्राकृतिक दूध से बने उत्पादों की मजबूत संभावनाएं हैं और सरकार इन्हीं उत्पादों के आधार पर राज्य की पहचान को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए दूध उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों और दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा सकता है।

    एनालॉग पनीर को लेकर हाल में मध्य प्रदेश से जुड़ा एक मामला भी सामने आया था। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश की एक कंपनी के उत्पाद को रायपुर में जब्त किया गया था और उस पर एनालॉग पनीर होने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में जांच रिपोर्ट में कंपनी को क्लीन चिट मिलने की बात सामने आई। इसके बावजूद एनालॉग पनीर को लेकर देशभर में बहस तेज हुई और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता तथा उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने का मुद्दा सामने आया।

    सरकार के फैसले के बाद अब सबसे अहम सवाल यह है कि प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री और निर्माण पर प्रतिबंध को किस तरह लागू किया जाएगा। खाद्य सुरक्षा विभाग और संबंधित एजेंसियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बाजारों में बिकने वाले पनीर की जांच और उत्पादों की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाई जा सकती है। कारोबारियों के लिए भी यह जरूरी होगा कि वे उत्पाद की प्रकृति और उसमें इस्तेमाल सामग्री से जुड़े नियमों का पालन करें।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह भी संकेत दिया है कि सरकार प्राकृतिक दूध के उत्पादन को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे किसानों और पशुपालकों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। अगर दूध उत्पादन बढ़ता है और प्राकृतिक दुग्ध उत्पादों की मांग को मजबूत बाजार मिलता है तो इसका फायदा ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है। फिलहाल एनालॉग पनीर पर सरकार के फैसले ने खाद्य बाजार में नई चर्चा छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसके क्रियान्वयन को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

  • तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, 543 लोकसभा सीटें बनाए रखने और महिला आरक्षण की मांग

    तमिलनाडु विधानसभा में सीएम विजय ने परिसीमन के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, 543 लोकसभा सीटें बनाए रखने और महिला आरक्षण की मांग

    नई दिल्ली ।तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने बुधवार को विधानसभा में परिसीमन के मुद्दे पर प्रस्ताव पेश करते हुए लोकसभा सीटों की मौजूदा संख्या और राज्यों के बीच सीटों के वर्तमान अनुपात को बनाए रखने की मांग की। प्रस्ताव में केंद्र से लोकसभा की कुल 543 सीटों को बरकरार रखने और इनके आधार पर महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की अपील की गई है।

    मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया के कारण राज्यों के प्रतिनिधित्व में बदलाव की आशंका को देखते हुए मौजूदा सीट व्यवस्था को बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र से मांग की कि लोकसभा की 543 सीटों की वर्तमान संख्या को स्थायी रूप से बरकरार रखा जाए और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा अनुपात भी सुरक्षित रखा जाए।

    विजय ने महिला आरक्षण को लेकर भी अपनी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार महिला आरक्षण को परिसीमन की प्रक्रिया से जोड़ने पर इसके लागू होने में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसलिए मौजूदा 543 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाना चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने महिला आरक्षण को किसी प्रकार की रियायत मानने के बजाय संवैधानिक अधिकार बताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए आरक्षण को जल्द लागू किया जाना आवश्यक है। विजय ने तमिलनाडु में महिलाओं की चुनावी भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में पुरुषों की तुलना में अधिक महिलाओं ने मतदान किया है।

    विधानसभा में पेश प्रस्ताव का एक प्रमुख हिस्सा परिसीमन के संभावित प्रभावों से जुड़ा है। तमिलनाडु की ओर से यह मांग रखी गई है कि राज्यों के बीच लोकसभा सीटों का वर्तमान अनुपात प्रभावित नहीं होना चाहिए। प्रस्ताव में कहा गया है कि 543 सीटों की मौजूदा व्यवस्था को बरकरार रखते हुए ही भविष्य में प्रतिनिधित्व से जुड़े बदलावों पर विचार किया जाना चाहिए।

    विजय की इस मांग के बीच विपक्षी दल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेता ईपीएस ने परिसीमन के मुद्दे पर अलग रुख रखा। उन्होंने कहा कि परिसीमन में अपने आप में कुछ गलत नहीं है, लेकिन तमिलनाडु का लोकसभा में मौजूदा 7.18 प्रतिशत हिस्सा किसी भी स्थिति में कम नहीं होना चाहिए।

    इस तरह विधानसभा में परिसीमन को लेकर राज्य के प्रतिनिधित्व और महिला आरक्षण दोनों मुद्दे एक साथ सामने आए। मुख्यमंत्री विजय के प्रस्ताव में मौजूदा 543 लोकसभा सीटों को बनाए रखने, राज्यों के बीच वर्तमान सीट अनुपात को सुरक्षित रखने और महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को जल्द लागू करने की मांग शामिल है।

    विजय ने विशेष रूप से 2029 के लोकसभा चुनाव को महिला आरक्षण लागू करने की समयसीमा के रूप में सामने रखा। उनका तर्क है कि यदि महिला आरक्षण को परिसीमन के साथ जोड़कर आगे बढ़ाया गया तो इसके प्रभावी होने में देरी हो सकती है। इसलिए मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों के आधार पर ही इसे लागू किया जाना चाहिए।

    प्रस्ताव के जरिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र के सामने परिसीमन को लेकर अपनी राजनीतिक और संवैधानिक चिंताएं रखी हैं। अब इस मुद्दे पर केंद्र और अन्य राज्यों के रुख के साथ आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। साथ ही महिला आरक्षण को 2029 के चुनाव से लागू करने की मांग राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व और चुनावी व्यवस्था से जुड़े विमर्श को भी प्रभावित कर सकती है।

  • नर्सिंग छात्रों का हल्ला बोल! भोपाल में बिल्डिंग पर चढ़े छात्र, रिजल्ट और स्कॉलरशिप समेत 7 मांगों पर अड़े

    नर्सिंग छात्रों का हल्ला बोल! भोपाल में बिल्डिंग पर चढ़े छात्र, रिजल्ट और स्कॉलरशिप समेत 7 मांगों पर अड़े


    भोपाल। भोपाल में नर्सिंग छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर नर्सिंग स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन NSO की ओर से 8 अगस्त से नर्सिंग काउंसिल के सामने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। बुधवार को प्रदर्शन के दौरान उस समय हंगामा बढ़ गया जब तीन छात्र पास की एक खाली बिल्डिंग पर चढ़ गए। छात्रों की प्रमुख मांग तत्काल रिजल्ट जारी करने की थी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रों को समझाने का प्रयास किया। काफी देर की समझाइश के बाद तीनों छात्र नीचे उतर आए।

    छात्रों का कहना है कि GNM और बीएससी नर्सिंग के परिणाम लंबे समय से लंबित हैं और इसकी वजह से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। संगठन ने मांग की है कि सभी लंबित रिजल्ट जल्द से जल्द घोषित किए जाएं और इसके बाद आगामी परीक्षाओं का कार्यक्रम भी जारी किया जाए। छात्रों का आरोप है कि परीक्षा और परिणाम में देरी के कारण उनकी आगे की पढ़ाई और करियर से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

    प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में नर्सिंग छात्र नर्सिंग काउंसिल के सामने मौजूद रहे। छात्र नेता रवि परमार ने बताया कि तीन छात्र मांगों को लेकर पास की बिल्डिंग पर चढ़ गए थे। पुलिस और अन्य लोगों ने उन्हें समझाकर नीचे उतारा। इसके बाद भी छात्रों का धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक आंदोलन जारी रखने की बात कही जा रही है।

    छात्रों की मांगों में केवल रिजल्ट और परीक्षाएं ही शामिल नहीं हैं। संगठन ने SC ST और OBC वर्ग के GNM बीएससी नर्सिंग पोस्ट बेसिक नर्सिंग MSc नर्सिंग और पैरामेडिकल छात्रों को स्कॉलरशिप देने की मांग की है। इसके साथ ही EWS आरक्षण के दायरे में आने वाले सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी पढ़ाई से जुड़ी स्कॉलरशिप योजना शुरू करने की मांग उठाई गई है। छात्रों का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए शिक्षा जारी रखना मुश्किल होता है इसलिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था जरूरी है।

    NSO ने नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों को क्षेत्रीय यूनिवर्सिटीज से हटाकर दोबारा मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर से जोड़ने की मांग भी रखी है। संगठन का कहना है कि नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता और व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इस दिशा में फैसला लिया जाना चाहिए। इसके अलावा नर्सिंग शिक्षा में कथित भ्रष्टाचार को खत्म करने और फैकल्टी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने की मांग भी की गई है। छात्रों का तर्क है कि पारदर्शी व्यवस्था से भविष्य में शिक्षा और परीक्षा से जुड़े विवादों को कम किया जा सकता है।

    आंदोलन से जुड़े पोस्टर में छात्रों ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री और रजिस्ट्रार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। संगठन ने आंदोलन को भूख हड़ताल से जोड़ने की बात भी कही है। छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और परिणाम तथा परीक्षाओं में देरी का सीधा असर उनके भविष्य पर पड़ रहा है। ऐसे में अब वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन को और तेज करने की तैयारी में हैं।

    फिलहाल बिल्डिंग पर चढ़े तीनों छात्रों के सुरक्षित नीचे उतरने के बाद स्थिति सामान्य है लेकिन नर्सिंग छात्रों का धरना जारी है। अब नजर इस बात पर है कि सरकार और संबंधित विभाग छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाते हैं और लंबित परिणामों तथा परीक्षाओं को लेकर कब तक कोई ठोस फैसला सामने आता है।

  • पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ बने रूस के आर्बिट्रेटर, यूक्रेनी सरकारी बैंक के निवेश विवाद में करेंगे कानूनी पक्ष का प्रतिनिधित्व

    पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ बने रूस के आर्बिट्रेटर, यूक्रेनी सरकारी बैंक के निवेश विवाद में करेंगे कानूनी पक्ष का प्रतिनिधित्व

    नई दिल्ली । भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ को रूस और यूक्रेन के सरकारी बैंक ओशचाडबैंक के बीच चल रहे निवेश विवाद में रूस की ओर से आर्बिट्रेटर नियुक्त किया गया है। यह मामला रूस-यूक्रेन निवेश संधि के तहत शुरू हुई अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता कार्यवाही से जुड़ा है और इसमें यूक्रेन के चार क्षेत्रों में बैंक की संपत्तियों तथा कारोबारी गतिविधियों को हुए कथित नुकसान की भरपाई का दावा किया गया है।

    विवाद की सुनवाई तीन सदस्यीय अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल करेगा। इसमें कोस्टा रिका की डियाला जिमेनेज को दोनों पक्षों की सहमति से अध्यक्ष चुना गया है। ओशचाडबैंक ने ग्रीस के स्टावरोस ब्रेकोलाकिस को अपना आर्बिट्रेटर नियुक्त किया है, जबकि रूस की ओर से पूर्व CJI डीवाई चंद्रचूड़ को चुना गया है। इस नियुक्ति के साथ अंतरराष्ट्रीय निवेश विवाद में भारत के पूर्व शीर्ष न्यायिक अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।

    ओशचाडबैंक यूक्रेन का सरकारी स्वामित्व वाला प्रमुख बैंक है। बैंक का आरोप है कि वर्ष 2022 के बाद रूस की सैन्य कार्रवाई के कारण डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों में उसकी संपत्तियों और कारोबार को नुकसान पहुंचा। बैंक इसी नुकसान के लिए रूस से मुआवजे की मांग कर रहा है। विवाद के समाधान के लिए बैंक ने जुलाई 2025 में रूस को औपचारिक विवाद नोटिस भेजा था।

    बताया गया है कि रूस की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद ओशचाडबैंक ने अप्रैल 2026 में अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद मामले की सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय ट्रिब्यूनल के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ी। अब दोनों पक्षों ने अपने-अपने आर्बिट्रेटर नियुक्त कर दिए हैं और अध्यक्ष के तौर पर डियाला जिमेनेज की नियुक्ति पर सहमति बनी है।

    पूर्व CJI चंद्रचूड़ की नियुक्ति इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रूस इससे पहले भी उन्हें दो अन्य निवेश विवादों में आर्बिट्रेटर बनाने का प्रस्ताव दे चुका था। हालांकि, उन प्रस्तावों को उन्होंने स्वीकार नहीं किया था। इस बार उन्होंने रूस की ओर से इस मामले में आर्बिट्रेटर की भूमिका स्वीकार की है।

    यह विवाद ओशचाडबैंक और रूस के बीच पहले हुए क्रीमिया से जुड़े मामले से अलग है। क्रीमिया में बैंक की संपत्तियों से संबंधित पुराने विवाद में ओशचाडबैंक को करीब 1.1 अरब डॉलर का मुआवजा मिला था। मौजूदा मामला वर्ष 2022 के बाद डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया में कथित नुकसान से संबंधित है।

    अंतरराष्ट्रीय निवेश मध्यस्थता में आर्बिट्रेटर की भूमिका किसी पक्ष की ओर से मामले की सुनवाई करने वाले न्यायाधीश जैसी नहीं होती, बल्कि वह संबंधित ट्रिब्यूनल का सदस्य होता है और विवाद के कानूनी तथा तथ्यात्मक पहलुओं पर विचार करता है। इस मामले में भी तीनों सदस्य मिलकर संबंधित दावों, आपत्तियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करेंगे।

    रूस और यूक्रेन के बीच जारी व्यापक संघर्ष की पृष्ठभूमि में यह निवेश विवाद अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ओशचाडबैंक जिन संपत्तियों और कारोबारी हितों को नुकसान पहुंचने का दावा कर रहा है, उनके आधार पर मुआवजे की मांग की गई है। अब ट्रिब्यूनल दोनों पक्षों की दलीलों और साक्ष्यों पर विचार करते हुए मामले में आगे की कार्यवाही करेगा।

  • करोंद चौराहे पर तेज रफ्तार का तांडव! कई वाहनों को टक्कर के बाद जमकर बवाल, 4 B.Tech छात्र हिरासत में

    करोंद चौराहे पर तेज रफ्तार का तांडव! कई वाहनों को टक्कर के बाद जमकर बवाल, 4 B.Tech छात्र हिरासत में

    भोपाल। भोपाल के करोंद चौराहे पर बुधवार सुबह तेज रफ्तार कारों से जुड़े रोड रैश के बाद जमकर हंगामा हो गया। आरोप है कि तीन कारों में सवार युवक-युवतियों ने तेज गति से वाहन चलाते हुए रास्ते में कई गाड़ियों को टक्कर मार दी। हादसे में स्कूल स्टाफ की गाड़ियां भी चपेट में आ गईं। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों और कार सवारों के बीच विवाद बढ़ गया और देखते ही देखते मारपीट शुरू हो गई। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है।

    घटना सुबह करीब सात बजे की बताई जा रही है। छुट्टियों के बीच सागर पब्लिक स्कूल का स्टाफ बस और निजी वाहनों से स्कूल की ओर जा रहा था। इसी दौरान पीछे से तेज रफ्तार में तीन कारें आती दिखाई दीं। इनमें SUV, Verna और Fronx शामिल थीं। आरोप है कि कारों की रफ्तार इतनी अधिक थी कि रास्ते में कई वाहनों को टक्कर लगती चली गई। सबसे पहले एक बैटरी ऑटो समेत दो वाहनों को टक्कर लगी। इसके बाद स्कूल स्टाफ की गाड़ियां भी इसकी चपेट में आ गईं।

    बताया जा रहा है कि एक वाहन में महिला स्टाफ मौजूद थी। आरोप है कि टक्कर के बाद कार में सवार युवकों ने महिला स्टाफ के साथ अभद्रता की। इस दौरान पीछे से आ रहे स्कूल के पुरुष कर्मचारियों ने विरोध किया तो उनकी गाड़ी को भी टक्कर मार दी गई। लगातार हो रहे विवाद और तेज रफ्तार वाहनों की वजह से करोंद चौराहे पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    रोड रैश के दौरान एक कार डिवाइडर से टकराकर रुक गई, जबकि दूसरी कार भी कुछ दूरी पर जाकर रुक गई। इसके बाद एक वाहन से तीन युवक और एक युवती बाहर निकले। आरोप है कि सड़क पर ही स्कूल स्टाफ से उनका विवाद फिर शुरू हो गया। इसी दौरान एक युवती द्वारा दूसरी कार के शीशे तोड़े जाने की बात भी सामने आई है। मामला बढ़ने पर आसपास मौजूद लोगों ने एक युवक और युवती को पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट कर दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस ने इसकी भी जांच शुरू कर दी है।

    पीड़ित स्कूल स्टाफ ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि घटना के तुरंत बाद डायल-112 पर सूचना दी गई थी, लेकिन पुलिसकर्मी करीब एक घंटे तक मौके पर नहीं पहुंचे। स्टाफ का कहना है कि इस दौरान थाने से फोन कर लगातार घटना की लोकेशन पूछी जाती रही। बाद में करीब एक दर्जन लोग निशातपुरा थाने पहुंचे, जहां पुलिस ने उनके बयान दर्ज किए। हादसे में तीन लोगों को मामूली चोट आने की जानकारी सामने आई है।

    निशातपुरा थाना पुलिस के मुताबिक मामले में एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने चार आरोपियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सभी आरोपी छात्र हैं और रायसेन रोड स्थित दो अलग-अलग कॉलेजों में बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं। पुलिस ने घटना में इस्तेमाल कार को जब्त कर लिया है।

    अब पुलिस सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। जांच का अहम बिंदु यह भी है कि हादसे के समय कार कौन चला रहा था और तेज रफ्तार से वाहन चलाने, टक्कर मारने और बाद में हुए विवाद में किसकी क्या भूमिका थी। फिलहाल पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होने की बात कह रही है।

  • पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की अटकलों पर विवाद बढ़ा, सैन्य प्रवक्ता के खंडन के बाद PTI का अलग दावा

    पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की अटकलों पर विवाद बढ़ा, सैन्य प्रवक्ता के खंडन के बाद PTI का अलग दावा

    नई दिल्ली । पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान की जेल में मौत की खबर सामने आने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिका में रह रहे पत्रकार वजाहत एस. खान ने सैन्य सूत्रों के हवाले से इमरान खान की मौत को लेकर आशंका जताने का दावा किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके सूत्रों ने इमरान खान को मृत अवस्था में नहीं देखा है।

    इमरान खान की मौत से जुड़े इस दावे के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस यानी ISPR ने इन खबरों को मनगढ़ंत और झूठा करार दिया है। इसलिए फिलहाल इमरान खान की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद से उनकी पार्टी PTI और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में जेल में उनकी स्थिति को लेकर सामने आई किसी भी खबर का राजनीतिक असर काफी व्यापक माना जा रहा है।

    इस बीच PTI ने इमरान खान की स्थिति को लेकर अलग दावा किया है। पार्टी के अनुसार, उनके परिवार के सदस्यों ने जेल की CCTV लाइव फीड में इमरान खान को देखा है। पार्टी का यह दावा सेना की ओर से मौत की खबरों को झूठा बताए जाने के बाद सामने आया है।

    PTI लंबे समय से इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति और जेल में उनके परिवार, वकीलों तथा चिकित्सकों से मुलाकात को लेकर सवाल उठाती रही है। पार्टी का आरोप है कि इमरान खान से मिलने पर प्रतिबंधों के कारण उनके स्वास्थ्य की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं हो पा रही है।

    इमरान खान की बहन डॉ. उजमा और पार्टी नेताओं ने भी उनकी सुरक्षा तथा स्वास्थ्य को लेकर चिंता व्यक्त की है। PTI की ओर से उनकी आंखों की रोशनी और इलाज से जुड़े मुद्दों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना है कि परिवार और चिकित्सकों को उनसे नियमित मुलाकात की अनुमति मिलनी चाहिए।

    इमरान खान की जेल में स्थिति को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान में PTI समर्थक उनकी रिहाई की मांग लगातार उठाते रहे हैं। हाल के दिनों में उनकी रिहाई और राजनीतिक अधिकारों को लेकर समर्थकों की गतिविधियां भी चर्चा में रही हैं।

    इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान की राजनीति में PTI और सैन्य प्रतिष्ठान के बीच टकराव लगातार बना हुआ है। ऐसे माहौल में उनकी मौत की अपुष्ट खबर ने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। हालांकि, किसी भी दावे की पुष्टि के लिए आधिकारिक जानकारी और विश्वसनीय प्रत्यक्ष प्रमाण जरूरी हैं।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में इमरान खान की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तान सेना के मीडिया विंग ने मौत से जुड़ी खबरों को झूठा बताया है, जबकि PTI ने CCTV के आधार पर उनके जीवित होने का दावा किया है। इन विरोधाभासी दावों के बीच इमरान खान की वास्तविक स्थिति को लेकर आधिकारिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी का इंतजार बना हुआ है।

    ऐसे में सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से सामने आ रही अपुष्ट खबरों को लेकर सावधानी बरतना जरूरी है। इमरान खान की स्थिति से जुड़ी कोई निर्णायक जानकारी सामने आने पर ही उनकी मौत या स्वास्थ्य को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

  • मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप

    मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच लगातार बारिश ने कई इलाकों में हालात बिगाड़ दिए हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं, वहीं निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है। कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और नदी किनारे स्थित मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों में भी पानी पहुंचने की तस्वीरें सामने आई हैं। बारिश के बढ़ते असर को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

    विदिशा समेत कई जिलों में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। बेतवा नदी में पानी बढ़ने के बाद नदी किनारे के घाट और आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचने की स्थिति बनी। कई धार्मिक स्थलों और मंदिरों के आसपास भी जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई। नदी के उफान को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका बनी रहती है इसलिए स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। कई जगह सड़क और पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ। ग्रामीण इलाकों में बारिश का पानी खेतों और बस्तियों तक पहुंचने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए टीमों को तैयार रखना पड़ रहा है। जलभराव वाले स्थानों पर बिजली व्यवस्था और यातायात को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

    प्रदेश में बारिश के साथ बाढ़ का खतरा इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कई नदियों का जलस्तर आसपास के जिलों में होने वाली बारिश और बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर भी निर्भर करता है। ऐसे में किसी एक इलाके में बारिश कम होने के बावजूद नदी का पानी बढ़ सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को पुलों पर पानी होने की स्थिति में उसे पार नहीं करने और नदी किनारे पिकनिक या धार्मिक गतिविधियों के लिए जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे स्थानों से दूर रखना जरूरी है।

    मौसम विभाग की बारिश संबंधी चेतावनियों के बीच आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर ध्यान देने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की जरूरत है। फिलहाल मध्य प्रदेश में बारिश ने जहां किसानों को राहत दी है वहीं नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरे की स्थिति भी पैदा कर दी है। प्रशासन की निगरानी और लोगों की सतर्कता ही संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।