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  • सोमवार व्रत से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, महादेव की आराधना के लिए अपनाएं ये पूजन विधि, जानिए व्रत का महत्व और जरूरी नियम

    सोमवार व्रत से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, महादेव की आराधना के लिए अपनाएं ये पूजन विधि, जानिए व्रत का महत्व और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से महादेव की पूजा और व्रत करने से भक्तों को सुख शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है क्योंकि वे अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न हो जाते हैं। सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने और विधि विधान से पूजा करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कई श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की खुशहाली के लिए सोमवार का व्रत रखते हैं।
    सोमवार व्रत रखने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में दीपक जलाकर भगवान शिव का ध्यान करें। यदि संभव हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान शिव को जल दूध बेलपत्र धतूरा और सफेद फूल अर्पित करने की परंपरा है। पूजा सामग्री चढ़ाते समय श्रद्धा और शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग पर सामग्री अर्पित करते समय स्थानीय मंदिर की परंपरा और पुजारी के निर्देशों का पालन करना उचित रहता है।
    भगवान शिव की पूजा में महामृत्युंजय मंत्र और पंचाक्षरी मंत्र का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त सोमवार के दिन ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। मान्यता है कि मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और व्यक्ति का ध्यान सकारात्मक विचारों की ओर जाता है। पूजा के दौरान शिव चालीसा का पाठ करना और सोमवार व्रत कथा सुनना भी शुभ माना जाता है। पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करके परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना की जाती है।
    सोमवार व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और परंपरा के अनुसार उपवास करते हैं। कुछ लोग पूरे दिन निराहार रहते हैं जबकि कुछ फलाहार लेकर व्रत करते हैं। व्रत के दौरान फल दूध और अन्य सात्विक खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर कठोर उपवास करने से बचना चाहिए। बच्चों बुजुर्गों और नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। व्रत का उद्देश्य शरीर को कष्ट देना नहीं बल्कि श्रद्धा और संयम के साथ भगवान का स्मरण करना है।
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार व्रत का संबंध वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति से भी जोड़ा जाता है। अविवाहित युवतियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की खुशहाली और दांपत्य जीवन में सुख शांति के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। हालांकि व्रत के फल को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में अलग मान्यताएं मिलती हैं।
    सोमवार के दिन पूजा के साथ अच्छे आचरण का पालन करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन क्रोध से बचने जरूरतमंदों की सहायता करने और दूसरों के प्रति सम्मान का भाव रखने की प्रेरणा दी जाती है। भगवान शिव की आराधना में दिखावे से अधिक सच्ची श्रद्धा और मन की पवित्रता को महत्व दिया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पूजा करके महादेव से जीवन में सुख शांति और सद्बुद्धि की प्रार्थना कर सकते हैं।

  • MP: गरीबों के घर तोड़ने पर भड़के शिवराज…. मुख्य सचिव को लगाया फोन, बोले- जुल्म की हो गई इंतहा

    MP: गरीबों के घर तोड़ने पर भड़के शिवराज…. मुख्य सचिव को लगाया फोन, बोले- जुल्म की हो गई इंतहा


    सीहोर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की हाई-प्रोफाइल बुधनी विधानसभा (Budhni Assembly ) इलाके के कोसमी गांव (Kosmi Village) में गरीब परिवारों के मकानों पर बुलडोजर चलाए जाने के मामले ने बड़ा राजनीतिक तूल पकड़ लिया है. घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) रविवार को खुद मौके पर पहुंचे. वहां उजाड़े गए गरीब परिवारों की आपबीती सुनकर और तबाही का मंजर देखकर शिवराज सिंह चौहान का गुस्सा फूट पड़ा।

    केंद्रीय मंत्री ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए साफ कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने, उनकी फसलें चौपट करने और पीने के पानी के कुएं को मिट्टी से भरने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।


    मुख्य सचिव और प्रदेशाध्यक्ष को लगाया फोन

    घटनास्थल पर निरीक्षण के दौरान वन विभाग और जिला प्रशासन का कोई भी वरिष्ठ अधिकारी मौजूद नहीं था, जिस पर केंद्रीय मंत्री ने गहरा आक्रोश जताया. उन्होंने मौके से ही मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर पूरी स्थिति से अवगत कराया. उन्होंने साफ किया कि वह इस संबंध में जल्द ही मुख्यमंत्री मोहन यादव से व्यक्तिगत रूप से बात कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

    प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर हुई तबाही का जिक्र करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”गरीबों के आशियाने उजाड़ने के साथ-साथ उनके खेतों में खड़ी मक्के और तुअर की फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. हद तो यह हो गई कि उनके सिंचाई और पीने के पानी के एकमात्र साधन कुएं को भी मिट्टी से भर दिया गया. यह बेहद शर्मनाक और अमानवीय कृत्य है.”

    केंद्रीय मंत्री शिवराज ने प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाते हुए ऐलान किया कि जिन गरीब परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उन्हें नया पक्का घर बनाकर दिया जाएगा. जब तक उनके रहने की स्थाई व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने का अस्थायी इंतजाम तुरंत किया जाएगा।


    ‘यह पार्टी को बदनाम करने की साजिश’

    पीड़ितों से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने अपनी ही सरकार के प्रशासनिक तंत्र और अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए। शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ”ये जो अन्याय हुआ है, उसकी पूरी जानकारी मुझे मुख्यमंत्री महोदय को देनी है. सिसकती हुई इनकी सिसकियां, इनकी आंखों के आंसू, इनके कुचले हुए खेत और इनका चौपट किया हुआ भविष्य… यह सब मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को बताऊंगा. मुझे तो यह मुख्यमंत्री जी को भी बदनाम करने की साजिश लगती है।

    अच्छा, ये वो लोग हैं जो हमेशा बीजेपी को ही वोट देते हैं. इन्होंने लोकसभा में भी वोट दिए और विधानसभा में भी दिए. यह तो पार्टी को बदनाम करने की कुछ अधिकारियों की साजिश है. इन्हीं के वोट से हम लोग जीतते हैं और इन्हीं के वोट से मोहन जी मुख्यमंत्री बने. यह सचमुच में मेरे लिए बहुत दुखद है. मैंने पहले भी निवेदन किया था कि वर्षों से इनका जमीन पर कब्जा है, इसलिए इन्हें तंग न किया जाए.”

  • MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा

    MP में सौ साल बाद जंगली भैंसों की वापसी…. CM ने काजीरंगा से लाए गए 8 भैंसों को कान्हा रिवर्ज में छोड़ा


    मंडला/बालाघाट।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में विलुप्त हो चुके जंगली भैंसों (Wild buffaloes) को उनके प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित करने की दिशा में रविवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) ने कान्हा टाइगर रिजर्व (Kanha Tiger Reserve) के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसा पुनर्स्थापना कार्यक्रम के अंतर्गत क्वारंटाइन अवधि पूरी कर चुके आठ जंगली भैंसों को एक हेक्टेयर के छोटे बाड़े से 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में निर्मित बड़े बाड़े में विमुक्त किया। इस पहल का उद्देश्य जंगली भैंसों को क्षेत्र की आबोहवा और पर्यावरण के अनुकूल बनाकर उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित करना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। लगभग सौ वर्षों बाद कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में जंगली भैंसों की पुनर्स्थापना का दूसरा चरण प्रारंभ हो रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के सहयोग से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय कर आठ जंगली भैंसों को मध्यप्रदेश लाया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद इन्हें प्राकृतिक आवास में बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा।

    दो चरणों में काजीरंगा से लाए गए आठ जंगली भैंसे

    जंगली भैंसा पुनर्स्थापना परियोजना के तहत असम के काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से दो चरणों में आठ जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व के सूपखार परिक्षेत्र में लाया गया था। प्रथम चरण में 28 अप्रैल 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को विशेष रूप से निर्मित एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के बाड़े में छोड़ा गया। इसके बाद 9 मई 2026 को तीन मादा और एक नर जंगली भैंसे को इसी बाड़े में रखा गया।

    कुल छह मादा और दो नर जंगली भैंसों को छोटे बाड़े में क्वारंटाइन कर रखा गया, ताकि वे यहां के वातावरण और जलवायु के अनुरूप स्वयं को ढाल सकें। क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद रविवार 11 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी आठ जंगली भैंसों को 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित कर विमुक्त किया।

    तीन वर्षों में 50 जंगली भैंसों को बसाने का लक्ष्य

    मध्यप्रदेश के वन क्षेत्रों से जंगली भैंसे लगभग सौ वर्ष पहले विलुप्त हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रेरणा से वन विभाग ने इस प्रजाति को पुनः स्थापित करने के लिए विशेष योजना तैयार की है। सूपखार क्षेत्र में पूर्व में जंगली भैंसों की उपस्थिति के प्रमाण मिलने के आधार पर यहां पुनर्स्थापना परियोजना क्रियान्वित की जा रही है। इस परियोजना के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में कुल 50 जंगली भैंसों को पुनः स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। यह पहल मध्यप्रदेश में जैव-विविधता के संरक्षण, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को मजबूत बनाने और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    वन्यजीव संरक्षण के साथ क्षेत्र के विकास पर जोर

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार विलुप्त हो चुके वन्यजीवों को पुनः स्थापित कर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि 7 अक्टूबर को नौरादेही में रानी दुर्गावती के नाम पर अभयारण्य बनाकर चीतों के लिए तीसरा ठिकाना विकसित करने की पहल की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश से नक्सलवाद के खात्मे के बाद इस क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं।

  • दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…

    दिल्ली में पुलिस का कड़ा पहरा….CJP नहीं जुटा पाई भीड़…. ठंडा पड़ा आंदोलन…


    नई दिल्ली।
    दिल्ली (Delhi) में जब पिछली बार कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party) यानी CJP का आंदोलन हुआ था. तब देश के तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को इस्तीफा देना पड़ा था. शायद यही वो बात थी जो सरकार और सीजेपी नेताओं दोनों को याद रही. सीजेपी इस बार 10 अक्टूबर को जुलाई जैसा ही कुछ करना चाहती थी. लेकिन सरकार किसी भी कीमत पर उसे रोकने में जुटी थी. दिल्ली पुलिस की तैयारी और राजधानी में लागू पाबंदियां इसकी गवाह हैं।

    एक तरफ कॉकरोच थे, जिनके साथ युवा और कुछ छात्र संगठन खड़े थे. दूसरी तरफ राजधानी में तैनात पुलिस और पैरामिलिट्री की फौज थी. इस बार सीजेपी के प्रदर्शन को आंदोलन बनने से रोक दिया गया। 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार (Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar) के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट का कॉल दिया था. लेकिन दिल्ली लैंड होते ही फ्लाइट से सीजेपी के तीनों बड़े नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत के बाद प्रदर्शन ठंडा पड़ गया।

    नई दिल्ली के इलाके में शनिवार को दिनभर पुलिस और सीजेपी समर्थकों के बीच चूहा-बिल्ली का खेल देखने को मिला. सीजेपी समर्थकों की जंतर-मंतर पर जुटने और वहां धरना देने की हर कोशिश नाकाम साबित हुई. दिपके ने अपने डिटेंशन से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था, जिसे बाद में जारी किया गया. सीजेपी के प्लान-B के तहत दिपके, रांका और सौरव दास के पकड़े जाने के बाद अंजिक्य शिंदे को प्रोटेस्ट लीड करने का जिम्मा दिया गया. लेकिन लीड करने के लिए समर्थकों की भीड़ को जमा ही नहीं होने दिया गया।

    अंजिक्य शिंदे ने समर्थकों से प्रोटेस्ट जारी रखने की अपील की और हर जगह को जंतर-मंतर बनाने का आह्वान भी किया. लेकिन रविवार आते-आते सीजेपी समर्थक हल्के पड़ गए. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों से ज्यादा पुलिस की मौजूदगी थी. प्रोटेस्ट के दूसरे दिन रविवार को सड़कों पर सन्नाटा रहा. कनॉट प्लेस के आसपास कुछ इलाके में छिटपुट लोग जमा हुए, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी खदेड़ दिया. सीजेपी के तीनों बड़े नेताओं की रिहाई भी हुई, लेकिन शर्त यह थी कि एक साल तक वे कोई प्रदर्शन नहीं करेंगे।

    पुलिस इस बार पहले से ज्यादा तैयार थी और तैयारी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत थी. जुलाई में हुए पेपर लीक प्रोटेस्ट से इस बार का प्रोटेस्ट एकदम अलग रहा. पेपर लीक के मुद्दे से वह आमजन भी जुड़े जिनका राजनीति से सीधे कोई सरोकार नहीं था. जंतर-मंतर पर लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर पहुंचे हुए थे. पिछली बार छात्रों का बड़ा हुजूम नजर आया, जिसे तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ भी मंजूर नहीं था।

    लेकिन इस बार के प्रदर्शन की वजह वोट चोरी, एक सियासी मुद्दा ज्यादा है. SIR के तहत लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, इसके पीछे चुनाव आयोग और सरकार के अपने तर्क हैं. विपक्ष खास तौर पर राहुल गांधी सालभर से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं. कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुके हैं. पिछले सप्ताह तीन दिन तक लगातार राहुल गांधी समेत समूचा विपक्ष ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली की सड़कों पर उतरा. आखिर में राष्ट्रपति से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी है. अब उसी मुद्दे के साथ दिपके की सीजेपी जब मैदान में आई तो उसे पहले जैसा जनसमर्थन नहीं मिल सका।

    वोट चोरी के मुद्दे को पहले से ही विपक्ष दल पूरे जोर-शोर से उठा रहे हैं और एक प्रेशर ग्रुप के तौर पर सीजेपी इसके जरिए युवाओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. 10 अक्टूबर के प्रोटेस्ट से यह बात साफ हो गई कि सीजेपी को इस बार पेपर लीक जैसा समर्थन नहीं मिला. दूसरी बात पुलिस ने इस बार पहले से ज्यादा सतर्कता बरती. दिल्ली को छावनी बना दिया गया. ट्रेनें, मेट्रो, बाजार, यहां तक कि इंटरनेट पर भी पाबंदी लगाई गई. सरकार को पता था कि अगर एक बार सीजेपी जंतर-मंतर डेरा डाल लेती तो उन्हें वहां से हटाना मुश्किल होगा. लेकिन पुलिस ने ऐसा होने ही नहीं दिया।

    रविवार को सीजेपी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है. आशुतोष रांका, सौरव दाव और रत्ना सिंह ने पुलिस और सरकार पर प्रदर्शनकारियों पर बर्बरता करने के आरोप लगाए. दिपके इस प्रेस वार्ता का हिस्सा नहीं थे. क्योंकि दादी के निधन के बाद वह वापस महाराष्ट्र अपने गांव लौट चुके हैं. उन्होंने कहा कि हमने कोर्ट में कोई बॉन्ड साइन नहीं किया है और फिर से सड़कों पर उतरेंगे. लेकिन अब तक सीजेपी की तरफ से आगे की रणनीति का खुलासा नहीं किया गया है।

  • जनगणना के आंकड़ों से सामने आएगी शहरों की असली तस्वीर…. संसदीय समिति ने की सिफारिश

    जनगणना के आंकड़ों से सामने आएगी शहरों की असली तस्वीर…. संसदीय समिति ने की सिफारिश


    नई दिल्ली।
    देश में जारी जनगणना (Census) के नतीजे आने के बाद शहरों की असली तस्वीर सामने आएगी। संसद की संसदीय समिति (Parliamentary Committee) ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय से कहा है कि वर्तमान में 3,000 से अधिक शहर या कस्बे शहरी विशेषताएं तो रखते हैं, लेकिन अब भी ग्रामीण स्थानीय निकायों (Rural Local Bodies) के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। यह स्थिति बदलनी चाहिए। शहर की मौजूदा परिभाषा पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। आजादी के सौवें वर्ष तक शहरी आबादी 87 करोड़ तक होने की उम्मीद है।

    मंत्रालय ने शहरीकरण की बदलती जरूरतों को देखते हुए बस्ती वर्गीकरण व्यवस्था में ‘संक्रमणकालीन क्षेत्र’ (ट्रांजिशनल एरिया) की नई श्रेणी बनाने का प्रस्ताव दिया है। इससे उन क्षेत्रों की पहचान और नियोजन आसान हो सकता है, जहां आबादी और आर्थिक गतिविधियां तो शहरी स्वरूप ले रही हैं, लेकिन उन्हें अभी शहर का दर्जा नहीं मिला है। भारत के महापंजीयक व जनगणना आयुक्त कार्यालय ने कहा है, मौजूदा जनगणना डिजिटल तरीके से हो रही है। आंकड़ों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद गांव व शहरों के आंकड़ों से सीमाओं का विश्लेषण कर अर्धशहरी या संक्रमणकालीन बस्तियों की पहचान की जा सकती है। लेकिन इस वक्त जनगणना के बीच अर्ध शहरी क्षेत्रों की नई श्रेणी शुरू करना संभव नहीं है।

    वर्ष 2025 में भारत की शहरी आवादी लगभग 45 से 50 करोड़ के बीच होने का अनुमान था। वहीं, 2047 तक इसके बढ़कर 85 से 87 करोड़ होने की संभावना है। मंत्रालय का कहना है कि नए शहरी क्षेत्रों का विकास हाई स्पीड रेल नेटवर्क, क्षेत्रीय तीव्र पारगमन प्रणाली और प्रमुख एक्सप्रेसवे जैसे परिवहन एवं आर्थिक गलियारों के आसपास होने की संभावना है।


    क्या होते हैं जनगणना नगर व वैधानिक नगर

    5,000 आबादी, 400 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या घनत्व वाला क्षेत्र जनगणना नगर कहलाता है। यहां मुख्य कामगारों में पुरुष के कम से कम 75 प्रतिशत गैर-कृषि गतिविधियों में शामिल रहना जरूरी शर्त है। वैधानिक नगर में नगर निगम, नगरपालिका, छावनी बोर्ड और अधिसूचित क्षेत्र समितियां शामिल हैं।


    संसदीय समिति की सिफारिशें

    संसदीय समिति ने कहा, शहर की परिभाषा में बदलाव की जरूरत है। सरकार लैंगिक पक्षपाती मानदंड में संशोधन के लिए एक केंद्रित अध्ययन कराए और शहरी क्षेत्रों की पहचान हेतु लैंगिक-समावेशी कार्यप्रणाली विकसित करे।

  • नेपाल में फिर बाढ़ और भूस्खलन से फिर भारी तबाही, बूढ़ी गंडकी नदी में समाए 45 मकान और छह पुल

    नेपाल में फिर बाढ़ और भूस्खलन से फिर भारी तबाही, बूढ़ी गंडकी नदी में समाए 45 मकान और छह पुल


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में बाढ़ (Flood) और भूस्खलन (Landslide) ने फिर से भारी तबाही मचाई है। गोरखा जिले (Gorkha District) में रविवार तड़के करीब 4:30 बजे आई बाढ़ में 45 मकान और छह पुल बूढ़ी गंडकी नदी (Budhi Gandak River) में समा गए। जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। सैलाब में 10 लापता हैं। सेना ने 9 विदेशी समेत 82 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वालों को ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने को कहा है।

    अचानक आए सैलाब से बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। ताजा आपदा ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी की विनाशकारी बाढ़ की याद ताजा कर दी है। गोरखा के मुख्य जिला अधिकारी धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि रविवार तड़के बाढ़ की सूचना मिली। फिर से आए सैलाब ने भारी तबाही मचाई है। अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की सूचना नहीं है। जानकारी के अनुसार, बाढ़ चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 क्षेत्र से नीचे की ओर आई और नदी किनारे की बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।

    राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के प्रवक्ता शांति महत के अनुसार, चुमनुब्री में लोकपा और चुम्लिंग के बीच जबर्दस्त भूस्खलन हुआ। इससे नदी का प्रवाह रुक गया और बाद में अवरुद्ध पानी के बहाव से बाढ़ आ गई। नेपाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बूढ़ी गंडक नदी में आई बाढ़ से सल्लेरी, पायूका और जगत में नदी किनारे स्थित मकान बह गए। बाढ़ में कई पुल बह गए हैं। नेपाल की सेना ने पोस्ट में लिखा, बूढ़ी गंडक नदी में बाढ़ आने के बाद नेपाली सेना की एक टुकड़ी को खोज और बचाव अभियान में लगाया गया है। इस टुकड़ी ने 6 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।


    भूस्खलन से प्रवाह रुकने के बाद अचानक आई बाढ़

    चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने बताया कि भूस्खलन के कारण चुमके खोला नामक जलधारा का प्रवाह बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव बढ़ा और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया।

    प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव से नदी के किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हो सकता है। बाढ़ में 341 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के मुख्य कैंप और निर्माण उपकरण भी बह गए। इसके अलावा दो टेलीफोन टावर और बिजली के 50 खंभे गिरने से संचार एवं विद्युत आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।


    437 सुरक्षाकर्मी और चार हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में जुटे

    घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 437 सुरक्षाकर्मियों और चार हेलिकॉप्टर को राहत और बचाव कार्य में उतारा गया है। इसके अलावा नेपाल पुलिस के 50 कर्मियों की एक टीम को तैयार रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 82 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।


    नदी किनारे रहने वालों को चेतावनी

    बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के करीब जाने से बचने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करना है।


    बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ा

    बिहार में भी खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह नदी आगे चलकर त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है और आगे गंगा में मिल जाती है। अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार के कई जिलों में बाढ़ आ सकती है।

  • US में सरकारी खजाने से ट्रंप का प्रचार…. जनता के पैसों से चल रहे थे विज्ञापन…कोर्ट ने लगाई रोक

    US में सरकारी खजाने से ट्रंप का प्रचार…. जनता के पैसों से चल रहे थे विज्ञापन…कोर्ट ने लगाई रोक


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) को अपने राजनीतिक संदेश के प्रचार के लिए सरकारी खजाने से चलाए जा रहे टीवी विज्ञापनों पर रोक लगानी होगी। न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत (Federal Court) ने रविवार रात प्रशासन को आदेश दिया कि ऐसे सभी विज्ञापन तुरंत बंद किए जाएं, जो अब भी प्रसारित होने बाकी हैं। खास बात यह है कि प्रशासन पहले ही कह चुका था कि विज्ञापन अभियान (Advertising campaign) जल्द खत्म होने वाला है। इसके बावजूद अदालत ने साफ कर दिया कि रविवार रात प्रसारित होने वाले विज्ञापनों समेत बाकी सभी विज्ञापनों को भी रद्द करना होगा।


    जनता के पैसे से राजनीतिक प्रचार पर उठे सवाल

    यह पूरा मामला उन टीवी विज्ञापनों से जुड़ा है, जिन पर करदाताओं के लाखों डॉलर खर्च किए गए। इन विज्ञापनों के जरिए ट्रंप के राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाया जा रहा था। इस खर्च पर सवाल उठाते हुए एक गठबंधन ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस गठबंधन में गैर-दलीय निगरानी संगठन कॉमन कॉज (Common Cause) भी शामिल था। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि सरकारी धन का इस तरह इस्तेमाल करना नियमों के खिलाफ है और इसे सार्वजनिक धन का अनुचित इस्तेमाल माना जाना चाहिए।


    प्रशासन को विज्ञापन रोकने के लिए मिला साफ आदेश

    न्यूयॉर्क की अमेरिकी जिला अदालत की जज जेनिफर एल. रोचोन ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर विचार करते हुए प्रशासन के खिलाफ फैसला सुनाया। उन्होंने अस्थायी रोक लगाने का आदेश जारी किया, जिसके तहत प्रशासन को बचे हुए सभी टीवी विज्ञापन रद्द करने होंगे। इस आदेश में उन विज्ञापनों को भी शामिल किया गया, जिनका प्रसारण रविवार रात होना था। यानी प्रशासन की ओर से विज्ञापन अभियान खत्म करने की घोषणा के बावजूद अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाया कि कोई भी बाकी विज्ञापन प्रसारित न हो।


    अब सरकारी खर्च और राजनीतिक संदेश के इस्तेमाल पर नजर

    इस मामले ने सरकारी धन के इस्तेमाल और राजनीतिक प्रचार के बीच की सीमा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत करने वाले संगठनों का कहना है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता, जिसे वे किसी राजनीतिक संदेश को बढ़ावा देने का अनुचित तरीका मानते हैं। अदालत के आदेश का तत्काल असर यह है कि प्रशासन को बचे हुए विज्ञापनों को रोकना होगा। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह आदेश अस्थायी रोक के तौर पर जारी किया गया है। मामले में आगे क्या होता है, यह न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरणों पर निर्भर करेगा।

  • राकेश अग्रवाल हत्याकांड में नए सुराग की तलाश, रेलवे स्टेशन के CCTV में कैद हुआ वरुण, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ के बाद भी पुलिस के हाथ खाली

    राकेश अग्रवाल हत्याकांड में नए सुराग की तलाश, रेलवे स्टेशन के CCTV में कैद हुआ वरुण, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ के बाद भी पुलिस के हाथ खाली


    भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या का मामला लगातार उलझता जा रहा है। 30 सितंबर को हुई इस वारदात के बाद से मेडिसिनल केयरटेकर वरुण कुमार फरार है और पुलिस अब तक उसका पता नहीं लगा सकी है। आरोपी की तलाश में मध्य प्रदेश समेत पंजाब उत्तर प्रदेश और हरियाणा में संभावित ठिकानों पर जांच की जा रही है। इस बीच भोपाल रेलवे स्टेशन के CCTV कैमरों में वरुण की गतिविधियां सामने आई हैं। फुटेज के मुताबिक वह 30 सितंबर की सुबह करीब 3 बजकर 51 मिनट पर रेलवे स्टेशन पर दिखाई दिया था। पुलिस अब इन तस्वीरों के आधार पर उसकी फरारी के रास्ते और संभावित यात्रा से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
    वरुण की तलाश को तेज करने के लिए पुलिस उसके रिश्तेदारों दोस्तों और परिचितों से लगातार पूछताछ कर रही है। अब तक 100 से अधिक लोगों से जानकारी जुटाई जा चुकी है। आरोपी के पिता ग्वालियर में बहन पटियाला में और कुछ दोस्त आगरा तथा मथुरा में रहते हैं। पुलिस इन लोगों से तीन से चार बार पूछताछ कर चुकी है। जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि वारदात के बाद वरुण किन लोगों के संपर्क में रहा और क्या उसे फरार होने के दौरान किसी ने मदद पहुंचाई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक किसी रिश्तेदार या दोस्त की संलिप्तता सामने नहीं आई है। पुलिस आगरा से वृंदावन जाने वाले मार्ग पर 80 से अधिक स्थानों पर आरोपी के पोस्टर भी चिपका चुकी है ताकि उसके बारे में सूचना मिलने की संभावना बढ़ सके।
    इस हत्याकांड की जांच में एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का पुराना मामला भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने पूर्व परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी में निवेश और अधिक रिटर्न का लालच देकर किस्तों में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ली गई लेकिन बाद में पैसे वापस नहीं किए गए। जांच के बाद अक्टूबर 2025 में अजीत के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और उसे गिरफ्तार भी किया गया था। अब पुलिस इस पुराने मामले से जुड़े लोगों दस्तावेजों अदालत की कार्यवाही और अग्रवाल की गवाही सहित सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। हालांकि धोखाधड़ी के मामले और हत्या के बीच किसी संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
    पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि वरुण कुमार को 27 सितंबर को वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के माध्यम से राकेश अग्रवाल के घर काम पर रखा गया था। एजेंसी से उसके दस्तावेज पुराने रोजगार और सत्यापन से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। वरुण का पंजाब के पटियाला एसपी कार्यालय से 1 मई 2025 को जारी चरित्र प्रमाण पत्र भी मिला है। यह प्रमाण पत्र उसने नौकरी के उद्देश्य से बनवाया था और इसमें उसे अच्छे चरित्र वाला तथा अपराधमुक्त बताया गया था। पुलिस अब इस दस्तावेज की पृष्ठभूमि और नौकरी पर रखे जाने से संबंधित प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।
    फिलहाल भोपाल रेलवे स्टेशन के CCTV फुटेज आरोपी की तलाश में महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं। पुलिस फुटेज और संभावित यात्रा रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्टेशन पर दिखाई देने के बाद वरुण किस दिशा में गया। चार राज्यों में तलाश और परिचितों से पूछताछ के बावजूद आरोपी का पता नहीं चल पाया है। ऐसे में जांच की दिशा अब उसके संभावित ठिकानों संपर्कों और पुराने मामलों से जुड़े तथ्यों पर केंद्रित है। पुलिस को उम्मीद है कि CCTV फुटेज और अन्य जानकारियों के मिलान से फरारी के रास्ते का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

  • 12 अक्टूबर को शेयर बाजार में बनेगा कमाई का मौका या बढ़ेगी बिकवाली की चिंता, सेंसेक्स निफ्टी से लेकर निवेश की रणनीति तक समझें पूरा गणित

    12 अक्टूबर को शेयर बाजार में बनेगा कमाई का मौका या बढ़ेगी बिकवाली की चिंता, सेंसेक्स निफ्टी से लेकर निवेश की रणनीति तक समझें पूरा गणित


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 12 अक्टूबर 2026 को नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत के साथ निवेशकों की नजर सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर रहेगी। बाजार में आगे तेजी जारी रहेगी या एक बार फिर बिकवाली का दबाव बढ़ेगा यह कई घरेलू और वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगा। पिछले सप्ताह बाजार में सुधार के संकेत दिखाई दिए थे। ऐसे में निवेशक सोमवार को बाजार खुलने के बाद शुरुआती रुझानों और कारोबार की दिशा पर विशेष ध्यान दे सकते हैं। हालांकि शेयर बाजार में उतार चढ़ाव सामान्य है और किसी भी तेजी को आगे जारी रहने की गारंटी नहीं माना जा सकता।

    इस सप्ताह कंपनियों के तिमाही नतीजे और कारोबारी अपडेट भी बाजार की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं। निवेशकों की नजर उन कंपनियों पर रहेगी जिनके राजस्व मुनाफे या ऑर्डर बुक में बदलाव की जानकारी सामने आई है। Avenue Supermarts यानी डीमार्ट के कारोबारी प्रदर्शन और Premier Energies तथा KEC International जैसे कारोबारियों से जुड़े अपडेट पर भी निवेशकों की दिलचस्पी रह सकती है। कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर रहने पर संबंधित शेयरों में खरीदारी बढ़ सकती है जबकि कमजोर प्रदर्शन या भविष्य को लेकर चिंता सामने आने पर दबाव भी बन सकता है। इसलिए किसी शेयर में निवेश करने से पहले केवल खबर देखना पर्याप्त नहीं है बल्कि कंपनी की वित्तीय स्थिति और शेयर के मौजूदा मूल्यांकन को समझना भी जरूरी है।

    वैश्विक बाजारों के संकेत भी सोमवार की कारोबारी दिशा के लिए अहम रहेंगे। अमेरिका और एशियाई बाजारों की चाल के साथ डॉलर की स्थिति और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव पर निवेशकों की नजर रह सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। तेल की कीमतों में तेजी आने से भारत के आयात खर्च और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा रुपये की चाल और विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली भी बाजार के रुख को प्रभावित कर सकती है। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ती है तो प्रमुख सूचकांकों पर दबाव देखने को मिल सकता है। वहीं घरेलू निवेशकों की खरीदारी बाजार को सहारा दे सकती है।

    निवेशकों के लिए सोमवार को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वे बाजार में जल्दबाजी से बचें। बाजार खुलते ही किसी शेयर में तेजी दिखाई देने पर तुरंत पैसा लगाने के बजाय कारोबार की दिशा और उपलब्ध जानकारी का आकलन करना बेहतर रहेगा। शेयर चुनते समय कंपनी की कमाई उसकी कर्ज स्थिति कारोबार की संभावनाओं और भविष्य की योजनाओं पर ध्यान देना चाहिए। केवल सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं या बिना पुष्टि वाली खबरों के आधार पर निवेश करने से नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है।

    नए निवेशकों को अपनी आर्थिक स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार निवेश की योजना बनानी चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों और कंपनी की बुनियादी मजबूती पर ध्यान दे सकते हैं जबकि इंट्राडे ट्रेडिंग करने वालों के लिए स्टॉप लॉस और पूंजी प्रबंधन महत्वपूर्ण है। किसी एक शेयर में पूरी रकम लगाने के बजाय निवेश में विविधता रखने पर भी विचार किया जा सकता है। बाजार में मुनाफे की संभावना हमेशा जोखिम के साथ जुड़ी रहती है इसलिए उधार लेकर या जरूरी खर्चों के लिए रखी रकम से शेयर बाजार में निवेश करना उचित नहीं है।

    कुल मिलाकर 12 अक्टूबर को बाजार की दिशा समझने के लिए सेंसेक्स और निफ्टी के शुरुआती रुझानों के साथ वैश्विक संकेतों कच्चे तेल की कीमतों विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के कारोबारी अपडेट पर नजर रखना जरूरी होगा। निवेश का फैसला अफवाहों के बजाय विश्वसनीय जानकारी और अपनी वित्तीय योजना के आधार पर लेना समझदारी होगी।

  • भोपाल के श्रमोदय विद्यालय में बच्चों को परोसी गई छिपकली वाली सब्जी! 13 विद्यार्थी बीमार, अस्पताल में भर्ती

    भोपाल के श्रमोदय विद्यालय में बच्चों को परोसी गई छिपकली वाली सब्जी! 13 विद्यार्थी बीमार, अस्पताल में भर्ती


    भोपाल । भोपाल के रातीबड़ स्थित श्रमोदय विद्यालय के हॉस्टल में भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि आलू की सब्जी में छिपकली मिलने के बावजूद वही सब्जी बच्चों को परोस दी गई, जिसके बाद 13 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई। सभी को जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों के मुताबिक उनकी हालत फिलहाल सामान्य है।

    घटना में बीमार हुए विद्यार्थी कक्षा छठवीं से नौवीं तक के हैं। जानकारी के अनुसार, हॉस्टल में खाना खाने के बाद बच्चों को उल्टी-दस्त की शिकायत होने लगी। उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें तत्काल जयप्रकाश (जेपी) अस्पताल ले जाया गया। यहां चिकित्सकों की टीम ने उपचार शुरू किया और सभी विद्यार्थियों को निगरानी में रखा गया।

    घटना सामने आने के बाद हॉस्टल में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और कैंटीन की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। भोजन तैयार करने से लेकर उसे परोसने तक बरती जाने वाली सावधानियों को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।

    परिजनों ने प्रबंधन की सूचना व्यवस्था पर उठाए सवाल

    बच्चों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उनका आरोप है कि प्रबंधन ने उन्हें घटना की सूचना समय पर नहीं दी। परिवारों को स्कूल के ग्रुप के माध्यम से मामले का पता चला, जिसके बाद वे अपने बच्चों की स्थिति जानने के लिए जेपी अस्पताल पहुंचे।

    परिजनों के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली थी कि बच्चों को ऐसी सब्जी परोसी गई, जिसमें छिपकली मिली थी। इस मामले ने हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा और भोजन की नियमित जांच की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    प्रिंसिपल ने कैंटीन संचालक को थमाया नोटिस

    श्रमोदय विद्यालय की प्रिंसिपल रत्ना दुबे ने बताया कि कैंटीन संचालक की गलती के कारण बच्चों को छिपकली वाली सब्जी परोसी गई। घटना में 13 विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ी थी, जिन्हें इलाज के लिए जेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्रिंसिपल ने अस्पताल पहुंचकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी भी ली।

    रत्ना दुबे के अनुसार, फिलहाल सभी विद्यार्थी स्वस्थ हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए कैंटीन संचालक को नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं, जेपी अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर रत्नेश जैन ने बताया कि उल्टी-दस्त की शिकायत के बाद बच्चों को अस्पताल लाया गया था। चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया। फिलहाल सभी की हालत सामान्य है और उन्हें चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

    पुलिस जांच में जुटी, तथ्यों के आधार पर होगी कार्रवाई

    मामले की जानकारी मिलने के बाद रातीबड़ थाना पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। थाना प्रभारी रामबाबू सिंह ने बताया कि परिजनों ने शिकायत की है कि बच्चों को छिपकली वाली सब्जी खिलाई गई। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कैंटीन संचालक के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    हॉस्टल में हुई इस घटना ने विद्यार्थियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, रसोई की साफ-सफाई और खाना बांटने से पहले उसकी जांच की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब यह देखना होगा कि स्कूल प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदारों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के क्या इंतजाम किए जाते हैं।