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वास्तु शास्त्र के इन नियमों का रखें ध्यान, घर की दिशा से लेकर मुख्य द्वार तक जानिए सुख शांति और खुशहाली के खास उपाय
नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को घर और आसपास के वातावरण को व्यवस्थित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। मान्यता है कि घर की बनावट दिशा और वस्तुओं की सही व्यवस्था से वातावरण में संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। बहुत से लोग नया घर बनवाते समय या पुराने घर में बदलाव करते समय वास्तु के नियमों का ध्यान रखते हैं। वास्तु से जुड़े कुछ आसान सुझाव घर को साफ सुथरा व्यवस्थित और आरामदायक बनाने में भी उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि वास्तु संबंधी मान्यताओं को वैज्ञानिक रूप से सिद्ध परिणाम नहीं समझना चाहिए।वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी रास्ते से परिवार के सदस्य और मेहमान घर में प्रवेश करते हैं। इसलिए मुख्य द्वार को साफ रखना चाहिए और उसके आसपास अनावश्यक सामान जमा नहीं होने देना चाहिए। दरवाजे के सामने कूड़ा या टूटे हुए सामान का ढेर रखने से बचना चाहिए। पर्याप्त रोशनी और हवा आने की व्यवस्था घर के वातावरण को बेहतर बना सकती है। दरवाजे और उसके आसपास की जगह व्यवस्थित रहने से घर का प्रवेश हिस्सा आकर्षक दिखाई देता है।घर में पूजा स्थल को लेकर भी वास्तु शास्त्र में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। परंपरा के अनुसार पूजा घर को शांत और साफ जगह पर बनाना अच्छा माना जाता है। पूजा स्थल पर नियमित सफाई करें और वहां अनावश्यक वस्तुएं जमा न होने दें। दीपक जलाते समय आग से सुरक्षा का ध्यान रखें और उसे ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें। पूजा के लिए ऐसा स्थान चुनें जहां परिवार के सदस्य शांति से बैठकर प्रार्थना कर सकें।वास्तु से जुड़े सुझावों में रसोई की व्यवस्था को भी महत्व दिया जाता है। रसोई में साफ सफाई बनाए रखना और खाद्य सामग्री को सही तरीके से रखना जरूरी है। गैस चूल्हे और बिजली के उपकरणों के आसपास अनावश्यक सामान नहीं रखना चाहिए। पानी और आग से जुड़े उपकरणों का सुरक्षित उपयोग करना चाहिए। रसोई में पर्याप्त रोशनी और हवा की व्यवस्था रहने से खाना बनाने का काम सुविधाजनक बनता है। भोजन बनाने और खाने की जगह को साफ रखना स्वास्थ्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।घर के बेडरूम में आरामदायक वातावरण बनाए रखना भी जरूरी है। बिस्तर के आसपास कपड़े और दूसरे सामान बिखरे नहीं रहने चाहिए। कमरे में जरूरत के अनुसार रोशनी और हवा आने की व्यवस्था होनी चाहिए। टूटे हुए फर्नीचर और अनुपयोगी सामान को लंबे समय तक जमा रखने के बजाय उनकी मरम्मत करें या जरूरत न होने पर हटा दें। हल्के और सुकून देने वाले रंगों का इस्तेमाल कमरे को आरामदायक बना सकता है। सोने की जगह पर शोर और तेज रोशनी कम रखने से बेहतर नींद लेने में मदद मिल सकती है।वास्तु की मान्यताओं में घर में पौधे रखने को भी सकारात्मक वातावरण से जोड़ा जाता है। पौधे लगाने से पहले यह देखना चाहिए कि उन्हें पर्याप्त रोशनी और पानी मिल सके। सूखे या खराब पौधों की देखभाल करें और घर में ऐसे पौधे लगाएं जिनका रखरखाव आसानी से किया जा सके। घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा आने के रास्ते खुले रखना भी उपयोगी है।वास्तु टिप्स अपनाते समय सबसे जरूरी बात यह है कि घर की व्यवस्था परिवार की जरूरतों और सुरक्षा के अनुरूप होनी चाहिए। केवल वास्तु दोष के डर से बड़े बदलाव या अनावश्यक खर्च करने की जरूरत नहीं है। साफ सफाई व्यवस्थित सामान पर्याप्त रोशनी सुरक्षित बिजली व्यवस्था और परिवार के सदस्यों के बीच अच्छा व्यवहार घर के माहौल को बेहतर बनाने में वास्तविक भूमिका निभाते हैं। वास्तु को सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यता के रूप में देखते हुए ऐसे उपाय चुनें जो व्यावहारिक हों और रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाएं। -

महाराष्ट्र: MPSC में सुधार के लिए तुकाराम मुंढे को मिली बड़ी जिम्मेदारी, बनाया गया समिति का सचिव
मुंबई। महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच राज्य सरकार ने सुधार की दिशा में कदम उठाया है। पुणे में भर्ती अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार 10 दिनों से जारी था। इसी बीच सरकार ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की व्यवस्था में बदलाव के सुझाव देने के लिए एक समिति बनाई है। इसमें प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारियों और न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को शामिल किया गया है।राज्य सरकार में मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने रविवार को पुणे के एसएम जोशी पुल पर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद समिति के गठन की घोषणा की। बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश दिलीप भोसले को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे समिति के सचिव की जिम्मेदारी संभालेंगे।
समिति के अन्य सदस्यों में आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम, पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल और सेवानिवृत्त न्यायाधीश पीडी नाइक शामिल हैं। समिति से एमपीएससी की भर्ती व्यवस्था में सुधार के लिए सुझाव देने की अपेक्षा है।
तीन साल में 70 हजार पदों पर भर्ती की मांग
अभ्यर्थियों का आंदोलन केवल एमपीएससी के कामकाज में बदलाव तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी अगले तीन वर्षों में सरकारी विभागों के 70 हजार पदों पर भर्ती करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को गति देने के साथ परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।इसके अलावा, अभ्यर्थियों ने जनवरी में प्रस्तावित समूह-सी की परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने की मांग उठाई है। उनका जोर भर्ती के अधिक अवसर उपलब्ध कराने पर है, ताकि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को राहत मिल सके।
आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन से जुड़े कुछ प्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी रखी है। मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले ने आश्वासन दिया कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार के अलावा अभ्यर्थियों की अन्य मांगों पर भी ध्यान दिया जाएगा।
MPSC अध्यक्ष को हटाने की भी मांग
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सचिव की नियुक्ति से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने आयोग के मौजूदा अध्यक्ष विवेक भीमनवार को पद से हटाने की मांग भी उठाई है।हालांकि, अध्यक्ष को हटाने के संबंध में सरकार ने कोई निर्णय लिया है या नहीं, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका। समिति का गठन भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांगों के बीच हुआ है, लेकिन अभ्यर्थियों की सभी मांगों पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है।
रोहित पवार ने किया मुंढे की नियुक्ति का स्वागत
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार भी अभ्यर्थियों के आंदोलन में शामिल हैं। उन्होंने तुकाराम मुंढे को समिति का सचिव बनाए जाने का स्वागत किया।पवार ने उम्मीद जताई कि समिति को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर मिलेगा, जिससे भर्ती प्रक्रिया में जरूरी सुधारों का रास्ता साफ हो सकेगा।
अब समिति की कार्यवाही और उससे सामने आने वाले सुझावों पर नजर रहेगी। अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगों में भर्ती कैलेंडर को प्रभावी बनाना, पर्याप्त पदों पर नियुक्तियां करना और आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करना शामिल है। सरकार की ओर से समिति गठित किए जाने के बाद आंदोलनकारी अपनी बाकी मांगों पर होने वाली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
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नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की होती है पूजा, जानिए पूजन विधि, प्रिय भोग, मंत्र और व्रत का धार्मिक महत्व
नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां ब्रह्मचारिणी तपस्या संयम और साधना की प्रतीक हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों को धैर्य आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है। नवरात्रि के इस दिन श्रद्धालु विधि विधान से माता की पूजा करते हैं और जीवन में सुख शांति तथा सफलता की कामना करते हैं। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर से हुआ है। इस क्रम में नवरात्रि का दूसरा दिन 12 अक्टूबर को मनाया जाएगा।मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत शांत और तेजस्वी माना जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। माता के एक हाथ में जप की माला और दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित रहता है। उनका यह स्वरूप साधना दृढ़ संकल्प और आत्मसंयम का संदेश देता है। मान्यता है कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से भक्तों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और मुश्किल समय में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा मिलती है।नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां दुर्गा और मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण करें। माता के सामने दीपक जलाएं और पुष्प अक्षत चंदन तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा के साथ मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करें और उनके मंत्र का जाप करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखते हुए माता से परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने की प्रार्थना करें। इसके बाद आरती करें और प्रसाद वितरित करें।
मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के लिए यह मंत्र विशेष रूप से प्रचलित है।मंत्र:
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।
मान्यता के अनुसार इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मन को एकाग्र करने और साधना के प्रति समर्पण बढ़ाने में मदद मिलती है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मंत्र जाप कर सकते हैं। पूजा के दौरान माता के स्वरूप का ध्यान करना और अच्छे विचारों को अपनाने का संकल्प लेना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर और मिश्री का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। कुछ भक्त माता को फल और दूध से बनी मिठाइयां भी अर्पित करते हैं। भोग लगाते समय स्वच्छता और श्रद्धा का ध्यान रखना चाहिए। इसके बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और अन्य भक्तों में बांटा जा सकता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी स्वास्थ्य स्थिति और परंपरा के अनुसार फलाहार करते हैं। व्रत के दौरान शरीर को पर्याप्त पानी देना और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार लेना भी जरूरी है।धार्मिक मान्यताओं में मां ब्रह्मचारिणी को तपस्या और त्याग की देवी माना जाता है। उनकी पूजा भक्तों को यह संदेश देती है कि जीवन में सफलता पाने के लिए धैर्य अनुशासन और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन श्रद्धालु पूजा पाठ के साथ जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखने का संकल्प भी ले सकते हैं।इस प्रकार नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना के साथ आत्मसंयम और दृढ़ इच्छाशक्ति को अपनाने का अवसर है। भक्त श्रद्धा से माता की पूजा कर सकारात्मक जीवन की कामना करते हैं। ध्यान रखें कि पूजा की विधि और भोग की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों तथा परिवारों में भिन्न हो सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण है श्रद्धा स्वच्छता और सच्चे मन से माता का स्मरण करना। -

रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट पर हूतियों का हमला, सऊदी अरब में हवाई सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
नई दिल्ली। सऊदी अरब में हवाई अड्डों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। रियाद के किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले की खबरों के बाद रविवार देर शाम पूर्वी प्रांत के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, दम्माम को भी निशाना बनाए जाने की सूचना सामने आई। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है।सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण ने दम्माम एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की पुष्टि की है। अधिकारियों के मुताबिक, हवाई अड्डे की सुविधाओं को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है और सुरक्षा जांच जारी है। हालांकि, नुकसान की वास्तविक स्थिति, किसी के हताहत होने और उड़ानों के संचालन पर पड़े प्रभाव के बारे में विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
रियाद एयरपोर्ट हमले में भारतीय नागरिक की भी मौत
इससे पहले शनिवार को रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले के बाद सऊदी अधिकारियों ने शुरुआत में एक अमेरिकी नागरिक समेत 12 लोगों की मौत और 300 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी दी थी। बाद में भारतीय दूतावास ने बताया कि हमले में घायल एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या 13 बताई गई, जबकि घायलों की संख्या 300 से अधिक रही।रविवार को रियाद एयरपोर्ट के टर्मिनल-4 को भी एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के मुताबिक, इस घटना के बाद आग लग गई। अधिकारियों ने नुकसान का आकलन शुरू किया। गठबंधन ने एयरपोर्ट के आसपास एक क्रूज मिसाइल को रोकने का दावा भी किया।
हूतियों की चेतावनी- हमले और तेज हो सकते हैं
हूती सैन्य प्रवक्ता याहिया सारे ने टेलीविजन संबोधन में रियाद पर हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा करते हुए चेतावनी दी थी कि जब तक सऊदी अरब यमन में अपनी कथित ‘आक्रामकता’ बंद नहीं करता, तब तक हालात और बिगड़ सकते हैं।समाचार एजेंसी अनादोलु की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने दम्माम और रियाद एयरपोर्ट के अलावा सऊदी अरब की प्रमुख ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाने का दावा भी किया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पूरी पुष्टि होना अभी बाकी है।
हवाई अड्डों पर हमलों की खबरें ऐसे समय सामने आई हैं, जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच सैन्य तनाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने हाल के हफ्तों में यमन में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज की है और वहां की सरकारी सेनाओं को समर्थन दिया है।
यमन पर 124 हवाई हमलों का हूतियों का दावा
हूती-नियंत्रित विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि यदि सऊदी अरब ने यमन में सैन्य कार्रवाई और हस्तक्षेप बंद नहीं किया, तो जवाबी हमले और तेज किए जा सकते हैं। हूती पक्ष ने पिछले 24 घंटों में यमन पर 124 हवाई हमले किए जाने का आरोप भी लगाया है। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और सैन्य कार्रवाई के दावों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। हवाई अड्डों और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की खबरें इस तनाव के व्यापक असर की आशंका बढ़ाती हैं।
तेल उद्योग के लिहाज से अहम है दम्माम
दम्माम सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत का प्रमुख शहर है और तेल एवं गैस उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां स्थित किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा क्षेत्र का प्रमुख हवाई संपर्क केंद्र है।रियाद के बाद दम्माम एयरपोर्ट को निशाना बनाए जाने की खबर से सऊदी अरब के नागरिक विमानन ढांचे की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल हवाई अड्डे पर नुकसान, संभावित हताहतों और उड़ानों के संचालन पर प्रभाव के संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि इस घटना का हवाई यातायात पर कितना असर पड़ा है।
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MP में 20 अक्टूबर से बढ़ेगी रात की ठंड, इंदौर में पारा 15.8 डिग्री पर पहुंचा, दिन में गर्मी बरकरार
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। कहीं दिन में तेज धूप और गर्मी परेशान कर रही है, तो कहीं रात का तापमान गिरने से ठंडक महसूस होने लगी है। रविवार को ग्वालियर-चंबल और रीवा संभाग के कई इलाकों में मौसम बदला रहा। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हुई, जबकि कई जगह बादल छाए रहे।मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, सोमवार से सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण का प्रभाव खत्म होने की संभावना है। इसके बाद रात के तापमान में गिरावट का दौर शुरू हो सकता है। मौसम विभाग ने 20 अक्टूबर से रात में ठंड बढ़ने का अनुमान जताया है। हालांकि, अक्टूबर के दौरान दिन में गर्मी का असर बना रह सकता है।
इंदौर सबसे ठंडा, भोपाल में 17.8 डिग्री रहा पारा
रविवार-सोमवार की रात प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इंदौर में रात का पारा 15.8 डिग्री सेल्सियस रहा। इसके अलावा शाजापुर में 16.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 16.9 डिग्री, पचमढ़ी में 17.5 डिग्री और भोपाल में 17.8 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।दूसरी ओर, दिन के तापमान में अभी खास गिरावट नहीं आई है। ग्वालियर और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। ऐसे में प्रदेश में फिलहाल दिन और रात के मौसम में अंतर देखने को मिल रहा है।
रविवार को ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज और सतना में मौसम में बदलाव देखा गया। कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई, जबकि अन्य स्थानों पर बादलों की आवाजाही रही।
पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम पर नजर
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इसके साथ ही चक्रवाती परिसंचरण भी सक्रिय है। आने वाले दिनों में यदि इन मौसम प्रणालियों का असर मध्य प्रदेश तक पहुंचता है, तो कुछ क्षेत्रों में बारिश हो सकती है।हालांकि, फिलहाल अगले चार दिनों तक प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं जताई गई है। मौसम प्रणालियों की गतिविधियों के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
3 अक्टूबर को मानसून की विदाई, फिर भी हुई बारिश
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो गया था। इसके बावजूद सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में दोबारा बारिश का दौर देखने को मिला।मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की स्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने और तेज धूप निकलने के साथ दिन गर्म रहे, जबकि रात में अपेक्षाकृत ठंडक महसूस हुई। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।
सामान्य से 1.5 इंच कम हुई बारिश
जून से सितंबर के मानसूनी सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य बारिश 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।क्षेत्रवार आंकड़ों में अंतर रहा। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम पानी गिरा। पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा।
इन जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के कई जिलों में मानसूनी बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा। पूर्वी हिस्से में बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।
25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
प्रदेश के 25 जिलों में बारिश सामान्य के आंकड़े तक पहुंच गई। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।इसके विपरीत, 30 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
फिलहाल प्रदेश में मौसम का दोहरा मिजाज बना हुआ है। दिन में गर्मी से राहत मिलने के आसार कम हैं, जबकि आने वाले दिनों में रातें ठंडी होने की संभावना है।
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12 अक्टूबर का राशिफल, सोमवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, करियर में तरक्की और धन लाभ के बनेंगे योग
नई दिल्ली। 12 अक्टूबर 2026 का राशिफल: सोमवार का दिन धार्मिक आस्था और नई शुरुआत के लिहाज से खास माना जाता है। नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना के साथ भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है। आज का दिन कुछ राशियों के लिए कामकाज में आगे बढ़ने और रिश्तों में मधुरता लाने का अवसर दे सकता है। वहीं कुछ राशि के जातकों को आर्थिक फैसले लेते समय सावधानी रखने और जल्दबाजी से बचने की जरूरत होगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के मनोभावों और निर्णय लेने की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकती है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों के लिए सोमवार का दिन कैसा रह सकता है।मेष राशि के जातकों के लिए सोमवार कामकाज में सक्रियता बनाए रखने का दिन हो सकता है। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और पुराने काम पूरे करने का अवसर मिलेगा। आर्थिक मामलों में किसी के साथ लेनदेन करते समय शर्तों को अच्छी तरह समझें। परिवार में बातचीत के दौरान संयम रखें और गुस्से में कोई निर्णय न लें।वृषभ राशि वालों को कार्यक्षेत्र में सहयोग मिलने की संभावना है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए विचारों पर काम करने का मौका मिल सकता है। धन के मामले में बजट बनाकर चलना फायदेमंद रहेगा। प्रेम संबंधों में अपनी बात स्पष्ट रूप से रखें और दूसरों की भावनाओं को भी समझने का प्रयास करें।मिथुन राशि के जातकों के लिए दिन नई योजनाएं बनाने और अधूरे काम पूरे करने का हो सकता है। नौकरी में सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखें। किसी जरूरी काम में सलाह लेने से फायदा मिल सकता है। अनावश्यक खर्च से बचें और अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित रखने का प्रयास करें।कर्क राशि वालों के लिए परिवार और निजी संबंध महत्वपूर्ण रह सकते हैं। घर में किसी विषय को लेकर चर्चा हो सकती है। कार्यक्षेत्र में रचनात्मक विचारों से लाभ मिलने की संभावना है। भावनाओं में बहकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचें और स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त आराम को महत्व दें।सिंह राशि के जातकों को अपने काम और परिवार के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। नौकरी में किसी काम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। कारोबार में सोच समझकर आगे बढ़ें। परिवार के सदस्यों के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रह सकता है।कन्या राशि वालों के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी रहेगा। नौकरी में आपकी कार्यशैली पर ध्यान दिया जा सकता है। आर्थिक मामलों में बचत पर जोर दें और किसी भी निवेश से पहले पूरी जानकारी जुटाएं। स्वास्थ्य के लिहाज से खानपान और आराम का ध्यान रखें।तुला राशि के जातकों के लिए बातचीत और साझेदारी से जुड़े मामले महत्वपूर्ण रह सकते हैं। कारोबार में नए संपर्क बनाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि पैसों या किसी पुराने समझौते को लेकर असहमति होने पर जल्दबाजी न करें। रिश्तों में स्पष्टता और धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा।वृश्चिक राशि वालों को आर्थिक और व्यक्तिगत मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए। किसी पुराने मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। नौकरी में अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाएं और गोपनीय जानकारी साझा करने से बचें। परिवार के साथ बातचीत करते समय शब्दों का चयन सोच समझकर करें।धनु राशि के जातकों के लिए सोमवार नई योजनाओं पर विचार करने का अवसर दे सकता है। पढ़ाई और करियर से जुड़े लोगों को अपनी तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। किसी यात्रा की योजना बन सकती है। आर्थिक मामलों में अपनी क्षमता के अनुसार खर्च करें और अधूरे कामों को प्राथमिकता दें।मकर राशि वालों को कामकाज में धैर्य और अनुशासन बनाए रखने की जरूरत होगी। किसी महत्वपूर्ण काम में देरी होने पर परेशान होने के बजाय समाधान खोजें। परिवार की जिम्मेदारियों पर ध्यान दें। धन से जुड़े फैसले लेने से पहले भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।कुंभ राशि के जातकों के लिए नए लोगों से संपर्क और विचारों का आदान प्रदान उपयोगी हो सकता है। नौकरी या कारोबार में किसी योजना पर चर्चा आगे बढ़ सकती है। हालांकि किसी की बात पर तुरंत भरोसा करने के बजाय तथ्यों की जांच करें। मानसिक शांति के लिए कुछ समय अपने लिए निकालें।मीन राशि वालों के लिए दिन जिम्मेदारियों को व्यवस्थित करने और खुद पर ध्यान देने का हो सकता है। कार्यक्षेत्र में धैर्य से काम लें और जरूरी निर्णय सोच समझकर करें। परिवार के साथ समय बिताने से भावनात्मक सहारा मिल सकता है। स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या बनाए रखें।कुल मिलाकर 12 अक्टूबर का दिन सभी राशियों के लिए धैर्य समझदारी और संतुलन के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। सोमवार को भगवान शिव और मां दुर्गा की आराधना कर सकारात्मक सोच के साथ दिन की शुरुआत कर सकते हैं। ध्यान रखें कि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लें और धन स्वास्थ्य तथा करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले व्यावहारिक जानकारी के आधार पर करें। -

पीएम मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को दिया केंद्र की मदद का भरोसा, 13 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
नई दिल्ली ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र पूरी प्रतिबद्धता के साथ तमिलनाडु के साथ खड़ा है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु के विकास और देश को विकसित बनाने के साझा लक्ष्य पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों मिलकर विकसित तमिलनाडु के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार कर सकते हैं।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य को केंद्र से जिस भी सहायता की जरूरत होगी, उसे उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, तमिलनाडु के विकास को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य के लोगों को विकास परियोजनाओं से जुड़े इस अवसर पर बधाई भी दी।
चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे तमिलनाडु के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत कुछ ऐसी परियोजनाएं जनता को समर्पित की जा रही हैं, जिनका काम पूरा हो चुका है, जबकि कई नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी जा रही है। इन योजनाओं का संबंध परिवहन, उद्योग, व्यापार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है।
मोदी ने कहा कि विकास परियोजनाओं में से कुछ लोगों की रोजमर्रा की यात्रा को आसान बनाएंगी। वहीं, दूसरी परियोजनाओं से उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इन पहलों का संयुक्त उद्देश्य तमिलनाडु के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास में बुनियादी ढांचे की भूमिका को भी रेखांकित किया।
अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने चेन्नई मेट्रो के एक अन्य चरण को जनता को समर्पित करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में ब्रेन रिसर्च सेंटर जाने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस क्षेत्र में होने वाला अनुसंधान सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई नए अवसर पैदा कर सकता है। इस तरह उनके कार्यक्रम में आधुनिक परिवहन व्यवस्था के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य से जुड़े विषय भी शामिल रहे।
प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संबंध पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मंदिरों से लेकर मेट्रो तक राज्य के अनुभव आज के भारत की भावना को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान में प्रगति कर रहा है और आधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से नए अवसर तैयार कर रहा है। उन्होंने विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
प्रधानमंत्री का यह संबोधन तमिलनाडु में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के अवसर पर हुआ। उन्होंने राज्य के विकास के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार तमिलनाडु को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहायता देने को तैयार है। 13 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं के जरिए परिवहन, उद्योग, व्यापार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विकास को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मुख्यमंत्री विजय की ओर से इस प्रस्ताव पर किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।
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आजमगढ़ में ओवैसी की जनसभा से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी तेज, एआईएमआईएम ने एक लाख लोगों के जुटने का किया दावा
नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। इसी क्रम में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी 11 अक्टूबर को आजमगढ़ में एक जनसभा को संबोधित करने वाले हैं। इस कार्यक्रम के जरिए पार्टी पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। जनसभा के लिए आजमगढ़ के कोटिला के पास स्थित सिरसल क्लब ग्राउंड को चुना गया है। पार्टी की ओर से कार्यक्रम में एक लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है।कार्यक्रम की तैयारियों को लगभग पूरा बताया गया है। एआईएमआईएम के जिला अध्यक्ष नदीम अहमद के अनुसार, जनसभा शाम चार बजे से शुरू होगी, जबकि असदुद्दीन ओवैसी के शाम करीब छह बजे कार्यक्रम में पहुंचने का कार्यक्रम है। नदीम अहमद ने कहा कि ओवैसी अल्लामा शिब्ली नोमानी की ऐतिहासिक धरती से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के अभियान की शुरुआत करेंगे। हालांकि, जनसभा में वास्तविक रूप से कितने लोग शामिल होते हैं, यह कार्यक्रम के बाद ही स्पष्ट होगा।
आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एआईएमआईएम ने राज्य में अलग राजनीतिक गठबंधन बनाने का संकेत दिया है। जिला अध्यक्ष नदीम अहमद ने कहा कि उनकी पार्टी ने खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाले दलों से भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने का अनुरोध किया था। उनके मुताबिक, इन दलों ने एआईएमआईएम को अपने साथ शामिल करने में रुचि नहीं दिखाई। ऐसे में पार्टी अब तीसरा मोर्चा बनाकर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है। उनके बयान के अनुसार, पार्टी चुनाव में गठबंधन के विकल्प पर आगे बढ़ रही है।
आजमगढ़ की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी नदीम अहमद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी अब जिले में पहले जैसी मजबूत स्थिति में नहीं है। उनका कहना था कि आजमगढ़ को समाजवादी पार्टी का गढ़ मानना उचित नहीं है और पार्टी नेतृत्व ने जिले के विकास की अपेक्षा अपने गृह क्षेत्र सैफई पर अधिक ध्यान दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में आजमगढ़ के विकास के लिए पर्याप्त काम नहीं हुआ। नदीम अहमद के मुताबिक, जिले के लोग अब इन मुद्दों को समझ रहे हैं।
नदीम अहमद ने यह भी दावा किया कि आगामी विधानसभा चुनाव के लिए ओवैसी के नेतृत्व में एक मजबूत गठबंधन तैयार हो चुका है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह गठबंधन आजमगढ़ की अधिकतर विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करेगा। हालांकि, यह पार्टी पदाधिकारी का चुनावी दावा है और इसके परिणाम का आकलन मतदान के बाद ही किया जा सकेगा।
आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। वर्ष 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी आजमगढ़ सदर और लालगंज, दोनों लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में एआईएमआईएम की जनसभा और तीसरा मोर्चा बनाने की घोषणा आगामी चुनाव से पहले जिले में पार्टी की रणनीति को सामने लाती है।
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रुपये की गिरावट रोकने के लिए RBI के नए कदम, तेल कंपनियों को सीधे डॉलर और फॉरेक्स सौदों पर सख्ती
नई दिल्ली ।डॉलर के मुकाबले रुपये में जारी कमजोरी को थामने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार से जुड़े कई कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य डॉलर की अतिरिक्त मांग कम करना और रुपये पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित करना है। इसके तहत सरकारी तेल कंपनियों को सीधे डॉलर उपलब्ध कराने की व्यवस्था के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों के नियम भी सख्त किए गए हैं। इन उपायों से रुपये को राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि इसकी मजबूती की गारंटी नहीं दी जा सकती।रुपये पर दबाव बढ़ने के पीछे महंगे कच्चे तेल, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार से पैसा निकालने जैसे कारण बताए गए हैं। भारत को विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर की जरूरत होती है। ऐसे में तेल कंपनियों की डॉलर मांग का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है। RBI की नई व्यवस्था इसी मांग को सीधे पूरा करने और बाजार में अतिरिक्त दबाव घटाने की कोशिश है।
इस व्यवस्था के तहत इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियां अपनी रोजाना की डॉलर जरूरत सीधे RBI से पूरी कर सकेंगी। यह व्यवस्था 12 अक्टूबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। अब तक तेल कंपनियां विदेशों से कच्चा तेल खरीदने के भुगतान के लिए बाजार से डॉलर खरीदती थीं। बड़ी कंपनियों की एक साथ बढ़ी मांग से डॉलर की उपलब्धता और रुपये की विनिमय दर पर दबाव पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक से सीधे डॉलर मिलने पर बाजार में उनकी खरीद की जरूरत कम हो सकती है।
RBI ने विदेशी मुद्रा से जुड़े डेरिवेटिव सौदों पर भी सीमाएं सख्त की हैं। जिन सौदों के पीछे वास्तविक लेनदेन या जरूरत नहीं होती, उनमें डॉलर से जुड़ी पोजिशन लेने की सीमा 100 मिलियन डॉलर से घटाकर 5 मिलियन डॉलर कर दी गई है। इसके अलावा, रुपये से संबंधित कुछ रद्द किए गए विदेशी मुद्रा अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर रोक लगाने का फैसला भी किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य बाजार में अनावश्यक गतिविधियों को सीमित करना है।
विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव के कुछ सौदों के लिए बैंकों को 20 प्रतिशत राशि रिजर्व के रूप में रखने का नियम भी लागू किया गया है। यह व्यवस्था पात्र विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों पर लागू होगी। दो मिलियन डॉलर से अधिक के कुछ हेजिंग सौदे इससे प्रभावित हो सकते हैं। इससे कंपनियों के लिए विदेशी मुद्रा में होने वाले उतार-चढ़ाव से बचाव की लागत बढ़ने की आशंका है। स्टील, ऑटोमोबाइल, केमिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों की कंपनियों पर इसका असर पड़ सकता है।
रुपये की आगे की चाल को लेकर कुछ बैंकर्स ने डॉलर के मुकाबले 95 से 95.50 के स्तर का अनुमान जताया है। हालांकि, यह बाजार का अनुमान है, निश्चित परिणाम नहीं। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और डॉलर की मांग पर दबाव बना रह सकता है। इसी तरह, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने या वहां निवेश पर बेहतर रिटर्न मिलने से विदेशी निवेशक भारतीय बाजारों से पैसा निकाल सकते हैं। इसके विपरीत, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बढ़ने पर डॉलर की आवक को समर्थन मिल सकता है।
RBI रुपये को स्थिर रखने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार पर भी प्रतिकूल असर नहीं पड़ने देना चाहता। ब्याज दरों में बड़ी बढ़ोतरी से होम लोन, कार लोन और कारोबारी कर्ज महंगे हो सकते हैं। इससे कंपनियों की लागत और लोगों के खर्च पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इसलिए केंद्रीय बैंक ने फिलहाल डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी को नियंत्रित करने वाले उपायों पर जोर दिया है। रुपये को स्थायी राहत कितनी मिलेगी, यह कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों के फैसलों पर निर्भर करेगा।
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11 अक्टूबर को पेट्रोल-डीजल के दाम में राहत या बदलाव, दिल्ली, मुंबई, नोएडा, पटना और लखनऊ समेत 10 शहरों के ताजा रेट
नई दिल्ली ।रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर वाहन चालकों की नजर अपने शहर के ताजा भाव पर है। रोजाना वाहन से सफर करने वाले लोगों से लेकर लंबी दूरी की यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए ईंधन की कीमतें खर्च का अहम हिस्सा होती हैं। उपलब्ध दरों के अनुसार, अलग-अलग शहरों में पेट्रोल और डीजल के भाव में अंतर बना हुआ है। दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है।नोएडा में पेट्रोल की कीमत 101.96 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.44 रुपये प्रति लीटर है। मुंबई में पेट्रोल 111.31 रुपये और डीजल 97.97 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। वहीं, कोलकाता में पेट्रोल का भाव 113.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल का दाम 99.82 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रमुख शहरों में दोनों ईंधनों की कीमतें एक समान नहीं हैं।
चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की दर 99.55 रुपये प्रति लीटर है। गुरुग्राम में पेट्रोल 102.97 रुपये और डीजल 95.64 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पेट्रोल का भाव 101.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 95.36 रुपये प्रति लीटर है। इन शहरों में ईंधन खरीदने वाले वाहन चालकों को अपने स्थानीय पंप पर लागू दर के अनुसार भुगतान करना होता है।
बिहार की राजधानी पटना में पेट्रोल 113.37 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.36 रुपये प्रति लीटर की दर से मिल रहा है। जयपुर में पेट्रोल का भाव 112.66 रुपये और डीजल का दाम 98.25 रुपये प्रति लीटर है। बेंगलुरु में पेट्रोल 111.68 रुपये प्रति लीटर और डीजल 99.56 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। इस तरह दिल्ली, नोएडा, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गुरुग्राम, लखनऊ, पटना, जयपुर और बेंगलुरु में ईंधन के अलग-अलग भाव सामने आए हैं।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अंतर के पीछे कई कारण होते हैं। केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से लगाए जाने वाले कर अंतिम खुदरा कीमत को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा डीलर का कमीशन और ईंधन की आपूर्ति से जुड़ी लागत भी कीमत तय करने में शामिल होती है। यही वजह है कि अलग-अलग राज्यों और शहरों में एक ही ईंधन के लिए ग्राहकों को अलग-अलग रकम चुकानी पड़ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का भी पेट्रोल और डीजल की लागत पर असर पड़ता है। हालांकि, कच्चे तेल के भाव में बदलाव का घरेलू खुदरा कीमतों पर कितना और कब असर होगा, यह कई कारकों पर निर्भर करता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव और पेट्रोल पंप पर मिलने वाली कीमतों के बीच सीधा और तत्काल संबंध होना जरूरी नहीं है।
ईंधन की कीमतें बढ़ने पर आम लोगों के परिवहन खर्च पर असर पड़ सकता है। पेट्रोल महंगा होने से बाइक और कार चलाने वालों का बजट प्रभावित होता है, जबकि डीजल की कीमतें ट्रक, बस और माल ढुलाई की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। ईंधन की खपत कम रखने के लिए वाहन की नियमित सर्विस कराना, टायरों में उचित हवा बनाए रखना और लंबे समय तक इंजन चालू रखकर वाहन खड़ा करने से बचना उपयोगी हो सकता है।