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  • टाटा संस में नेतृत्व बदलाव की आहट से निवेशक सतर्क, टाटा मोटर्स, टाइटन और टाटा स्टील के शेयर फिसले

    टाटा संस में नेतृत्व बदलाव की आहट से निवेशक सतर्क, टाटा मोटर्स, टाइटन और टाटा स्टील के शेयर फिसले

    नई दिल्ली ।टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल के लिए खुद को उपलब्ध नहीं कराने की घोषणा के बाद बुधवार को टाटा समूह की कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। निवेशकों ने नेतृत्व परिवर्तन की खबर पर सतर्क प्रतिक्रिया दी और समूह की प्रमुख कंपनियों में बिकवाली बढ़ गई। कारोबार के दौरान कुछ शेयरों में करीब छह प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    सबसे अधिक दबाव टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस के शेयरों पर दिखाई दिया। कारोबार के दौरान टीसीएस का शेयर करीब 5.9 प्रतिशत तक टूटकर 2,300.10 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार हुआ और यह लगभग 4.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,328 रुपये के आसपास कारोबार करता नजर आया।

    टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के शेयरों में भी करीब चार प्रतिशत तक कमजोरी रही। सत्र के दौरान यह 334.20 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया, जो लगभग 3.85 प्रतिशत की गिरावट थी। टाटा स्टील के शेयर भी दो प्रतिशत से अधिक फिसले और एक समय 2.4 प्रतिशत गिरकर 183.60 रुपये के स्तर तक पहुंच गए।

    टाइटन के शेयरों में भी बिकवाली देखने को मिली और यह करीब 2.65 प्रतिशत गिरकर 4,992 रुपये के दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के शेयर भी लगभग दो प्रतिशत कमजोर रहे। समूह की अन्य कंपनियों में टाटा एलेक्सी, टाटा कम्युनिकेशंस, टाटा टेक्नोलॉजीज, टाटा पावर और ट्रेंट के शेयरों में भी करीब दो प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई।

    टाटा मोटर्स के कमर्शियल व्हीकल कारोबार से जुड़े शेयर, टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और तेजस नेटवर्क्स भी दबाव में रहे। हालांकि कारोबार आगे बढ़ने के साथ कुछ कंपनियों के शेयरों में निचले स्तर से सुधार देखने को मिला। दूसरी ओर टाटा केमिकल्स ने इस कमजोर माहौल में मजबूती दिखाई और उसके शेयरों में करीब दो प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

    चंद्रशेखरन ने बुधवार को घोषणा की कि वह टाटा संस के चेयरमैन पद पर दोबारा नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। हालांकि वह अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। उनका यह फैसला टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक से पहले सामने आया है।

    इस घोषणा के साथ टाटा समूह में करीब नौ वर्षों से चले आ रहे चंद्रशेखरन के शीर्ष नेतृत्व के अगले वर्ष समाप्त होने की स्थिति स्पष्ट हो गई है। चंद्रशेखरन वर्ष 1987 में टाटा समूह से जुड़े थे और करीब तीन दशक तक टीसीएस में विभिन्न भूमिकाओं में काम किया। वर्ष 2009 में वह टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। जनवरी 2017 में उन्हें टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया।

    टाटा संस टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। समूह की विभिन्न कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, धातु, ऊर्जा, विमानन और एफएमसीजी समेत कई क्षेत्रों में कारोबार करती हैं। टीसीएस, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टाइटन जैसी बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के प्रदर्शन पर समूह के नेतृत्व से जुड़े फैसलों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ता है।

    अब बाजार की नजर टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन और नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पर रहेगी। निवेशक यह भी देखेंगे कि नया नेतृत्व समूह की मौजूदा कारोबारी रणनीति, निवेश प्राथमिकताओं और विभिन्न कंपनियों के विकास को किस दिशा में आगे बढ़ाता है। फिलहाल चंद्रशेखरन के कार्यकाल से जुड़े इस फैसले ने टाटा समूह के शेयरों में निकट अवधि की अनिश्चितता बढ़ा दी है।

  • साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    साइबर अपराध जांच में बैंक खाते फ्रीज होने से पेट्रोल पंप डीलरों की चिंता बढ़ी, डिजिटल भुगतान रोकने की चेतावनी

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में पेट्रोल पंप संचालकों ने डिजिटल भुगतान से जुड़ी एक गंभीर समस्या को लेकर राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। डीलरों का आरोप है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों की जांच के दौरान उनके बैंक खाते फ्रीज कर दिए जाते हैं, जबकि संबंधित संदिग्ध लेनदेन में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती। समस्या का समाधान नहीं होने पर उन्होंने यूपीआई और अन्य कैशलेस भुगतान स्वीकार करना बंद करने की चेतावनी दी है।

    तमिलनाडु पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन राज्य के करीब 5 हजार पेट्रोल पंपों का प्रतिनिधित्व करती है। एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि पेट्रोल पंप संचालक ग्राहकों से ईंधन बिक्री के बदले सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत डिजिटल भुगतान स्वीकार करते हैं।

    डीलरों के अनुसार किसी ग्राहक के यूपीआई भुगतान की पूरी पृष्ठभूमि की जांच करना उनके लिए संभव नहीं है। पेट्रोल पंप पर भुगतान प्राप्त करते समय कारोबारी के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होती जिससे यह पता लगाया जा सके कि ग्राहक के बैंक खाते या उससे पहले हुए किसी लेनदेन का संबंध किसी साइबर अपराध की जांच से है या नहीं।

    डीलरों ने बताया कि डिजिटल भुगतान अब उनके कारोबार का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। एक औसत पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन करीब 200 से 500 डिजिटल लेनदेन होने का दावा किया गया है। कई पेट्रोल पंपों पर कुल कारोबार का आधे से अधिक हिस्सा यूपीआई और दूसरे कैशलेस माध्यमों से आने की बात कही गई है।

    समस्या तब गंभीर हो जाती है जब किसी ग्राहक का भुगतान बाद में साइबर अपराध की जांच में शामिल पाया जाता है। डीलरों का कहना है कि ऐसी स्थिति में जांच एजेंसियों के निर्देश पर बैंक संबंधित राशि पर रोक लगा सकते हैं या कई मामलों में पूरे बैंक खाते को फ्रीज कर देते हैं।

    पेट्रोल पंप संचालकों का तर्क है कि एक विवादित लेनदेन के कारण पूरे कारोबारी खाते को रोक देना उनके लिए गंभीर वित्तीय परेशानी पैदा करता है। पेट्रोल पंप का दैनिक संचालन लगातार बैंकिंग सुविधाओं पर निर्भर रहता है। ईंधन की खरीद, कर्मचारियों का वेतन, बिजली और अन्य कारोबारी खर्चों के लिए बैंक खाते का सुचारू रूप से काम करना आवश्यक होता है।

    एसोसिएशन ने पुलिस कार्रवाई के तरीके को लेकर भी चिंता जताई है। संगठन का आरोप है कि कुछ मामलों में पेट्रोल पंप संचालकों को पूछताछ के लिए सुबह के समय ले जाया गया, जबकि शुरुआत में उन्हें कथित तौर पर यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि किस लेनदेन को जांच के दायरे में रखा गया है।

    डीलरों का कहना है कि अधिकृत डिजिटल भुगतान प्रणाली के जरिए ग्राहक से पैसा स्वीकार करने वाले व्यापारी को केवल इसलिए संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि बाद में उस भुगतान को किसी साइबर अपराध की जांच से जोड़ दिया गया है। उनका कहना है कि कारोबारी और संदिग्ध अपराधी के बीच अंतर स्पष्ट करने के लिए अलग व्यवस्था होनी चाहिए।

    एसोसिएशन ने राज्य सरकार से ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिसमें वैध कारोबारियों के बैंक खातों को पर्याप्त आधार और स्पष्ट प्रक्रिया के बिना फ्रीज न किया जाए। संगठन चाहता है कि जांच एजेंसियां विवादित राशि और पूरे कारोबारी खाते के बीच अंतर करें, ताकि जांच भी जारी रहे और सामान्य कारोबार भी प्रभावित न हो।

    डीलरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का व्यावहारिक समाधान नहीं निकला तो राज्य के पेट्रोल पंप यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान स्वीकार करना बंद कर सकते हैं। ऐसा होने पर ग्राहक फिर से नकद भुगतान पर निर्भर हो सकते हैं। इससे तमिलनाडु में तेजी से बढ़े डिजिटल भुगतान के इस्तेमाल पर भी असर पड़ने की आशंका है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी चमके, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतें उछलीं

    अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सोना-चांदी चमके, सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से घरेलू बाजार में कीमतें उछलीं

    नई दिल्ली ।अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा वैश्विक बाजारों में सुरक्षित निवेश की मांग के बीच बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती देखने को मिली। घरेलू व अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं में खरीदारी बढ़ी, जबकि निवेशकों की नजर अमेरिका के महंगाई आंकड़ों पर बनी हुई है। इन आंकड़ों से आगे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर संकेत मिलने की उम्मीद है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी एमसीएक्स पर अक्टूबर डिलीवरी वाला गोल्ड फ्यूचर्स पिछले बंद भाव 1,53,765 रुपये की तुलना में 1,182 रुपये की बढ़त के साथ 1,54,947 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान सोना 1,54,950 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। इसका निचला स्तर 1,54,323 रुपये रहा।

    कारोबार के दौरान सोने में 0.77 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज की गई। खबर लिखे जाने तक सोना 895 रुपये यानी 0.58 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,54,660 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था। हालांकि सोना इस वर्ष के 1,80,779 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्च स्तर से अभी काफी नीचे है।

    चांदी में भी मजबूत तेजी देखने को मिली। एमसीएक्स पर सितंबर डिलीवरी वाला सिल्वर फ्यूचर्स 2,35,659 रुपये के पिछले बंद भाव के मुकाबले 2,314 रुपये की बढ़त के साथ 2,37,973 रुपये प्रति किलोग्राम पर खुला। कारोबार के दौरान चांदी 2,38,271 रुपये के उच्चतम स्तर तक पहुंची।

    चांदी का इंट्रा-डे उच्च स्तर पिछले बंद भाव से 1.10 प्रतिशत यानी 2,612 रुपये अधिक रहा। इसका निचला स्तर 2,36,500 रुपये दर्ज किया गया। खबर लिखे जाने तक चांदी 1,241 रुपये यानी 0.53 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,36,900 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी कीमती धातुओं में मजबूती रही। कॉमेक्स पर सोना 4,430 डॉलर प्रति औंस पर खुलने के बाद 4,473.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 32.40 डॉलर की बढ़त को दर्शाता है।

    कॉमेक्स पर चांदी 64.87 डॉलर प्रति औंस पर खुली और कारोबार के दौरान 65.90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। वैश्विक बाजार में चांदी में करीब 0.97 डॉलर प्रति औंस की बढ़त दर्ज हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार की इस मजबूती का असर भारतीय वायदा बाजार में भी दिखाई दिया।

    बाजार में इस समय अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महंगाई के आंकड़े फेडरल रिजर्व की आगामी ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकते हैं। यदि महंगाई में नरमी के संकेत मिलते हैं तो ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों में बदलाव आ सकता है।

    हाल के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर बढ़ाने की संभावना घटकर 48 प्रतिशत रह गई है। हालांकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के बीच महंगाई को लेकर मतभेद बने हुए हैं। शिकागो फेड के अध्यक्ष ऑस्टन गूल्सबी ने भी महंगाई को चिंता का विषय बताया है।

    सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित करने वाले अन्य प्रमुख कारकों में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी शामिल हैं। अमेरिका-ईरान तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य में अनिश्चितता और समुद्री जहाजों से जुड़ी घटनाओं ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम से बचने के लिए कीमती धातुओं की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों को सहारा मिल रहा है।

  • पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए के निवेश से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति

    पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए के निवेश से औद्योगिक विकास को मिलेगी गति


    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि गुजरात के साथ मध्यप्रदेश के संबंधों को और प्रगाढ़ करते हुए अरविंद समूह द्वारा मध्यप्रदेश में भी अपनी इकाई स्थापित की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की परिकल्पना के अनुरूप पीएम मित्र पार्क में अगले वर्ष तक उत्पादन प्रारंभ करने का लक्ष्य है। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अरविंद समूह द्वारा 3 स्थानों पर अपनी इकाइयां स्थापित की जा रही हैं। इनमें देवास के निकट बरलाई, धार स्थित पीएम मित्र पार्क और इंदौर का बेटमा शामिल हैं। कंपनी इन स्थानों के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी कार्य कर रही है। इन औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से प्रदेश में युवाओं के लिये रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात बुधवार को गुजरात के अहमदाबाद में अरविंद लिमिटेड के वाइस चेयरमैन श्री कुलीन लालभाई से चर्चा के बाद कही।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुजरात और मध्यप्रदेश के बीच सहयोग से दोनों राज्यों के संबंध और अधिक प्रगाढ़ होंगे। औद्योगिक निवेश से एक ओर जहां प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उद्योगों से प्राप्त होने वाले कर राजस्व से राज्य के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे प्रदेश के विकास को और गति मिलेगी। उन्होंने इस पहल के लिए अरविंद समूह को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

    मध्यप्रदेश में कंपनी के प्रस्तावित निवेश, पीएम मित्र पार्क में उद्योग की स्थापना, रोजगार सृजन, वस्त्र एवं परिधान (टेक्सटाइल) क्षेत्र में निवेश, औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग तथा सिंहस्थ-2028 के लिए आधुनिक संचार व्यवस्था सहित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान अपर मुख्य सचिव, उद्योग श्री नीरज मंडलोई, सचिव, उद्योग श्री जॉन किंसले तथा एमडी, एमपीआईडीसी श्री चंद्रमौली शुक्ला उपस्थित रहे।

    पीएम मित्र पार्क में 1200 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित

    अरविंद लिमिटेड द्वारा पीएम मित्र पार्क में लगभग 1200 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इसके लिए कंपनी को 105 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इंदौर में संचालित पेपकोन प्रायवेट लिमिटेड के साथ कंपनी के अनुबंध के तहत प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख परिधानों का निर्माण किया जाता है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पीएम मित्र पार्क में उद्योग की स्थापना और निवेश प्रक्रिया को गति देने पर चर्चा की। सीसीआईपी के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करने तथा शासन स्तर पर प्रस्ताव के त्वरित परीक्षण एवं अनुमोदन की दिशा में आवश्यक कार्यवाही पर भी विचार-विमर्श हुआ। वस्त्र एवं परिधान उद्योगों के लिए उपलब्ध निवेश प्रोत्साहनों की जानकारी भी दी गई। इनमें पूंजी अनुदान, ब्याज अनुदान, स्टॉम्प एवं पंजीयन शुल्क की प्रतिपूर्ति, ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन तथा अनुसंधान एवं विकास सुविधाओं के लिए सहायता सहित अन्य प्रावधान शामिल हैं।

    औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग को मिलेगा बढ़ावा

    औद्योगिक क्षेत्रों में जल के पुनः उपयोग के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज समाधान की संभावनाओं पर भी विचार हुआ। मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे 90 से अधिक औद्योगिक पार्कों में टेक्सटाइल, फार्मा एवं अन्य औद्योगिक क्लस्टरों में कॉमन जेडएलडी प्रणालियों की स्थापना की संभावनाओं पर चर्चा की गई। औद्योगिक पार्कों को निकटवर्ती नगर निगमों के एसटीपी से जोड़कर सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी’ मॉडल विकसित करने के सुझाव पर भी विचार हुआ।

    सिंहस्थ-2028 में आधुनिक संचार व्यवस्था के उपयोग की तैयारी

    सिंहस्थ-2028 में मिशन-क्रिटिकल कम्युनिकेशन नेटवर्क के उपयोग की संभावनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। अरविंद लिमिटेड एवं जेएम बक्सी समूह के संयुक्त उद्यम आर्य ऑम्निटॉक सॉल्यूशंस द्वारा मिशन-क्रिटिकल वायरलेस कम्युनिकेशन, वॉकी-टॉकी नेटवर्क, पीएमआरटी तथा सार्वजनिक सुरक्षा संचार समाधान उपलब्ध कराए जाते हैं।सिंहस्थ-2028 में पुलिस, सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं एवं आयोजन प्रबंधन के लिए इस प्रकार के मिशन-क्रिटिकल कम्युनिकेशन नेटवर्क के उपयोग की संभावनाओं पर विचार किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जीआईएस-2027 के लिए किया आमंत्रित

    मुख्यमंत्री डॉ. न्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस)-2027 में सहभागिता के लिए भी आमंत्रित किया।

    अरविंद लिमिटेड देश के प्रमुख टेक्सटाइल समूहों में शामिल है। वर्ष 1931 में स्थापित कंपनी का मुख्यालय अहमदाबाद में है। कंपनी डेनिम, परिधान, फैब्रिक्स एवं टेक्सटाइल वैल्यू चेन के क्षेत्र में कार्यरत है। समूह की विभिन्न औद्योगिक इकाइयों में 60 हजार से अधिक व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त है तथा कंपनी एक लाख से अधिक कपास उत्पादन करने वाले कृषकों से कच्चे माल की खरीद करती है।

  • उज्जैन में महाकाल का भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ शृंगार, राजा स्वरूप में सजे

    उज्जैन में महाकाल का भांग-चंदन और रजत आभूषणों से हुआ शृंगार, राजा स्वरूप में सजे

    उज्जैन । श्रावण मास की अमावस्या यानी हरियाली अमावस्या के पावन अवसर पर आज तड़के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की भस्म आरती विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और दिव्य शृंगार के साथ संपन्न हुई।


    बुधवार तड़के करीब 2ः30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया। उनकी आज्ञा प्राप्त करने के बाद चांदी का द्वार खोला गया और गर्भगृह में भगवान महाकाल सहित अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद पुजारियों ने भगवान का  उतारकर विधि-विधान से पूजन-अभिषेक की प्रक्रिया शुरू की।

    भगवान महाकाल का पहले पवित्र जल से अभिषेक किया गया। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक और पूजन किया गया। अभिषेक के पश्चात बाबा महाकाल का भांग, चंदन और विभिन्न आभूषणों से आकर्षक  किया गया। भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल राजा स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते नजर आए। भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला तथा सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। पुष्पों और आभूषणों से सजे बाबा महाकाल का दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

    भस्म अर्पण की परंपरा के तहत प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद कपूर आरती हुई। ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर विधि-विधान के साथ भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती की इस परंपरा के बाद बाबा महाकाल के साकार स्वरूप के दर्शन श्रद्धालुओं को हुए। भस्म आरती के दौरान नंदी हॉल में नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कहकर बाबा महाकाल से मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की।


    महाकाल मंदिर की परंपरा के अनुसार, महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को महाकाल की दैनिक पूजा परंपरा में विशेष महत्व प्राप्त है। भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति का अद्भुत दृश्य दिखाई दिया। बाबा महाकाल के दर्शन होते ही श्रद्धालु ‘जय श्री महाकाल’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाने लगे। जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य राजा स्वरूप के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

  • जेवर एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद जलभराव, पार्किंग में भरा पानी देख उठे सवाल; 30 मिनट में संभाली गई स्थिति

    जेवर एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद जलभराव, पार्किंग में भरा पानी देख उठे सवाल; 30 मिनट में संभाली गई स्थिति


    नई दिल्ली। ग्रेटर नोएडा के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तेज बारिश के बाद कुछ समय के लिए जलभराव की स्थिति बन गई। एयरपोर्ट के पार्किंग कंपाउंड के पास बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया और टर्मिनल से पार्किंग एरिया की ओर जाने वाले रास्ते पर भी पानी भर गया। जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पार्किंग क्षेत्र के पास पानी जमा दिखाई दे रहा है, जबकि एयरपोर्ट से जुड़े कर्मचारी जल निकासी की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद एयरपोर्ट परिसर में बारिश के पानी की निकासी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    बताया जा रहा है कि दिन के समय अचानक हुई तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग को जोड़ने वाले मार्ग पर पानी जमा हो गया। कुछ समय के लिए यात्रियों और एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन को जलभराव की जानकारी मिलते ही टीमों को सक्रिय किया गया और पानी निकालने का काम शुरू कर दिया गया।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रबंधन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि तेज बारिश के कारण टर्मिनल से पार्किंग एरिया को जोड़ने वाले रास्ते पर कुछ समय के लिए पानी जमा हुआ था। एयरपोर्ट की टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए करीब 30 मिनट के भीतर जलभराव को पूरी तरह खत्म कर दिया। प्रबंधन के मुताबिक इस दौरान उड़ानों के संचालन पर कोई असर नहीं पड़ा और एयरपोर्ट की अन्य व्यवस्थाएं भी सामान्य रूप से चलती रहीं।

    एयरपोर्ट प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की आवाजाही को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम तुरंत उठाए गए। जलभराव वाले हिस्से में स्थिति सामान्य होने के बाद आवागमन भी सुचारु हो गया। साथ ही मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि बारिश के दौरान किसी तरह की परेशानी होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने एयरपोर्ट की जल निकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी है। यात्रियों और सोशल मीडिया यूजर्स की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं कि आधुनिक सुविधाओं से लैस एयरपोर्ट परिसर में तेज बारिश के बाद पानी जमा होने की स्थिति क्यों बनी। खास तौर पर टर्मिनल और पार्किंग के बीच के मार्ग में पानी भरने को लेकर लोग व्यवस्था की क्षमता पर सवाल कर रहे हैं।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का पहला चरण 28 मार्च 2026 को उद्घाटित हुआ था और 15 जून से यहां कमर्शियल उड़ान संचालन शुरू हुआ। ऐसे में शुरुआती बारिश के दौरान सामने आई जलभराव की तस्वीरों ने एयरपोर्ट की आधारभूत सुविधाओं और ड्रेनेज सिस्टम को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि जलभराव अस्थायी था और महज 30 मिनट में पानी निकाल दिया गया था।

    फिलहाल एयरपोर्ट प्रशासन की प्राथमिकता बारिश के दौरान यात्रियों की आवाजाही को सुचारु बनाए रखना और जलभराव की स्थिति दोबारा बनने पर तत्काल कार्रवाई करना है। वायरल वीडियो के बाद उठे सवालों के बीच आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि भारी बारिश के दौरान एयरपोर्ट परिसर की जल निकासी व्यवस्था किस तरह काम करती है।

  • चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर 18 अगस्त को मतदान, टाटा ट्रस्ट्स से मतभेदों की खबरों के बीच बढ़ी अनिश्चितता

    चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति प्रस्ताव पर 18 अगस्त को मतदान, टाटा ट्रस्ट्स से मतभेदों की खबरों के बीच बढ़ी अनिश्चितता


    नई दिल्ली ।
    टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर नेतृत्व को लेकर बुधवार को अटकलें तेज हो गईं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन वार्षिक आम बैठक यानी एजीएम से पहले अपने पद से हटने की संभावना पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में टाटा संस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन चेयरमैन के रूप में बने रहने के लिए उनका टाटा संस के निदेशक के तौर पर पुनर्नियुक्त होना जरूरी है। कंपनी की 18 अगस्त को होने वाली एजीएम में उनके निदेशक पद पर पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर शेयरधारकों को मतदान करना है।

    रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चंद्रशेखरन अपने करीबी सहयोगियों के साथ इस विकल्प पर चर्चा कर चुके हैं कि वह शेयरधारकों के संभावित विवादास्पद मतदान का सामना करने के बजाय स्वयं पद छोड़ दें। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि वह वास्तव में इस्तीफा देने जा रहे हैं या नहीं।

    नेतृत्व को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता को टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और चंद्रशेखरन के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेदों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस का सबसे बड़ा शेयरधारक है और समूह की रणनीतिक दिशा में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

    बताया गया है कि इस वर्ष फरवरी में टाटा संस के बोर्ड ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति से जुड़े फैसले को टाल दिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय नोएल टाटा ने समूह के कुछ नए कारोबारों के प्रदर्शन को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद पुनर्नियुक्ति के मामले में अंतिम निर्णय आगे बढ़ा दिया गया।

    हालांकि, इन घटनाक्रमों को लेकर टाटा समूह की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। इसलिए चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की खबर को फिलहाल अटकल के तौर पर ही देखा जा रहा है। अंतिम स्थिति एजीएम से पहले या शेयरधारकों के मतदान के बाद अधिक स्पष्ट हो सकती है।

    एन. चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ करीब चार दशक का जुड़ाव रहा है। उन्होंने 1987 में समूह में अपने करियर की शुरुआत की थी। आगे चलकर उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं और कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। उनके नेतृत्व में टीसीएस ने वैश्विक आईटी सेवा बाजार में अपनी स्थिति मजबूत की।

    वर्ष 2017 में चंद्रशेखरन को टाटा संस का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्होंने समूह की विभिन्न कंपनियों और कारोबारों से जुड़े रणनीतिक फैसलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऐसे में उनके भविष्य को लेकर सामने आई खबरों ने निवेशकों और बाजार में भी ध्यान खींचा है।

    बुधवार सुबह कारोबार के दौरान टाटा समूह की कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स का शेयर एनएसई पर एक प्रतिशत से अधिक गिरकर करीब 1,066 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखा। टीसीएस में भी लगभग एक प्रतिशत की गिरावट रही और शेयर करीब 2,424.50 रुपये तक पहुंचा।

    टाइटन कंपनी का शेयर लगभग 1.03 प्रतिशत गिरकर 5,075.10 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं टाटा पावर में करीब 0.9 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई और शेयर लगभग 376.60 रुपये के स्तर पर रहा।

    टाटा संस के नेतृत्व से जुड़ी स्थिति पर अब 18 अगस्त की एजीएम महत्वपूर्ण होगी। शेयरधारकों के मतदान और कंपनी की ओर से किसी आधिकारिक घोषणा के बाद ही चंद्रशेखरन के पद पर बने रहने या संभावित बदलाव की तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

  • निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    निर्मला सीतारमण आज जयपुर में BRICS वित्त मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगी, वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर होगा मंथन

    नई दिल्ली ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बुधवार को जयपुर में आयोजित BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की दो दिवसीय बैठक में शामिल होंगी। भारत की BRICS अध्यक्षता के तहत हो रही यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में समूह के सभी 11 सदस्य देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर हिस्सा लेंगे।

    जयपुर के रामबाग पैलेस में आयोजित होने वाली बैठक का उद्घाटन सत्र बुधवार सुबह 11:15 बजे शुरू होगा। इसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। आर्थिक विकास, वित्तीय उदारीकरण, जोखिम प्रबंधन और वैश्विक वित्तीय स्थिरता जैसे मुद्दे चर्चा के प्रमुख केंद्र में रहेंगे।

    भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा भी बैठक में हिस्सा लेने के लिए जयपुर पहुंच चुके हैं। उद्घाटन सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और आरबीआई गवर्नर सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं तथा केंद्रीय बैंकिंग से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार साझा करेंगे।

    बैठक में प्रतिनिधि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सामने आ रही चुनौतियों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के सामने मौजूद अवसरों पर भी चर्चा करेंगे। निवेश बढ़ाने, वित्तीय सहयोग मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक स्थिर बनाने से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होगा।

    जयपुर पहुंचने पर वित्त मंत्री का स्वागत राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने किया। बैठक के आयोजन को देखते हुए जयपुर में विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष कार्यक्रम भी तैयार किए गए हैं।

    दो दिवसीय बैठक गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक चलेगी। इस दौरान BRICS सदस्य देशों के प्रतिनिधि आर्थिक और वित्तीय क्षेत्र में आपसी सहयोग के संभावित रास्तों पर चर्चा करेंगे। बदलते वैश्विक आर्थिक माहौल में निवेश, वित्तीय जोखिम और आर्थिक स्थिरता जैसे विषयों का महत्व लगातार बढ़ा है, ऐसे में बैठक को महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है।

    विदेशी प्रतिनिधियों को राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराने के लिए भी विशेष कार्यक्रम रखा गया है। बुधवार शाम पांच बजे सभी प्रतिनिधि जयपुर सिटी पैलेस का दौरा करेंगे। इस दौरान राजस्थान की संस्कृति, परंपराओं और विरासत को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

    BRICS वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की वार्षिक बैठक की शुरुआत करीब 18 वर्ष पहले वैश्विक वित्तीय संकट के दौर में हुई थी। समय के साथ यह बैठक वैश्विक आर्थिक और वित्तीय मामलों पर सदस्य देशों के बीच संवाद और सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बन गई है।

    जयपुर दूसरी बार इस बैठक की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले वर्ष 2021 में कोविड-19 महामारी के दौरान भी जयपुर में इस बैठक का आयोजन हुआ था। उस समय आर्थिक पुनरुद्धार, टीकाकरण, डिजिटल स्वास्थ्य, सामाजिक अवसंरचना और वित्तीय समावेशन जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में रहे थे।

    2021 की बैठक में यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म से जुड़े विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ था। इस बार बदलती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच वित्तीय स्थिरता, निवेश और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों की प्राथमिकताएं चर्चा के केंद्र में रहने की उम्मीद है।

    भारत की अध्यक्षता में हो रही यह बैठक ऐसे समय आयोजित हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में BRICS देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों के बीच समन्वय बढ़ाने की कोशिशों पर बैठक का विशेष ध्यान रहेगा।

  • विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    विमानन सुरक्षा पर मंडराया नशीले पदार्थों का खतरा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के क्रू मेंबर्स की डोप टेस्टिंग बढ़ाने की मांग

    नई दिल्ली । फुकेत से दिल्ली आ रही एयर इंडिया की उड़ान में हुई हालिया घटना के बाद देश के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में सुरक्षा और जांच मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विमान के पायलट के नशीले पदार्थों के शुरुआती डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद विमानन नियामक ने सख्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।

    विमानन विशेषज्ञों के अनुसार थाईलैंड और नीदरलैंड जैसे देशों में कुछ पदार्थों की कानूनी सुलभता एयरलाइंस कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। शराब की उपस्थिति जांचने के लिए नियमित ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट उपलब्ध हैं, लेकिन अन्य साइकोएक्टिव पदार्थों का परीक्षण अपेक्षाकृत जटिल प्रक्रिया माना जाता है।

    अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी नशीले पदार्थ के प्रभाव में विमान का संचालन यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकता है। ऐसे पदार्थों का असर शरीर में लंबे समय तक बना रहता है जिससे चालक दल की निर्णय क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    वर्तमान में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय के नियमों के तहत सभी अनुसूचित वाणिज्यिक एयरलाइंस को अपने कम से कम 10 प्रतिशत क्रू मेंबर्स और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स का वार्षिक रूप से रैंडम डोप टेस्ट कराना अनिवार्य है। मध्य प्रदेश सहित देश भर के प्रमुख हवाई अड्डों पर अब इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।

    विमानन अधिकारियों का मानना है कि केवल स्व-घोषणा या नशामुक्ति अभियानों के भरोसे इस समस्या से नहीं निपटा जा सकता। इसके लिए रैंडम डोप जांच की आवृत्ति बढ़ाने और नियमों को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता जताई जा रही है ताकि उड़ानों के दौरान यात्रियों की सुरक्षा पूरी तरह से सुनिश्चित की जा सके।

    नियामक संस्थाएं अब चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं को और अधिक सटीक बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। संदिग्ध मामलों में कानूनी कार्रवाई और लाइसेंस निलंबन जैसे कड़े प्रावधान लागू करने पर भी विचार किया जा रहा है।

  • पेट की अंदरूनी चर्बी विसरल फैट बढ़ा सकती है मेटाबॉलिक बीमारियां जानिए बचाव के तरीके

    पेट की अंदरूनी चर्बी विसरल फैट बढ़ा सकती है मेटाबॉलिक बीमारियां जानिए बचाव के तरीके

    नई दिल्ली ।स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने पेट की गहराई में जमा होने वाली आंतरिक चर्बी यानी विसरल फैट को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है। चिकित्सीय अध्ययनों के अनुसार यह चर्बी त्वचा के ठीक नीचे जमा होने वाले सामान्य फैट से पूरी तरह भिन्न होती है और शरीर के आंतरिक अंगों जैसे लिवर, आंत और अग्न्याशय के आसपास जमा होती है।

    चिकित्सकों के मुताबिक देखने में सामान्य या पतले नजर आने वाले व्यक्तियों में भी विसरल फैट की समस्या हो सकती है। चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को थिन आउटसाइड-फैट इनसाइड कहा जाता है। कमर का घेरा बढ़ना और पेट का बाहर निकलना इस समस्या का प्रमुख प्राथमिक संकेत हो सकता है।

    शोधकर्ताओं ने पाया है कि शरीर में विसरल फैट की अत्यधिक मात्रा इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देती है। इससे शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील हो जाती हैं जिसके परिणामस्वरूप ब्लड शुगर का स्तर अनियंत्रित होने लगता है और व्यक्ति टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो सकता है।

    इसके अतिरिक्त यह आंतरिक चर्बी शरीर में पुरानी सूजन और मेटाबॉलिक सिंड्रोम का कारण बनती है। इससे हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने का जोखिम काफी हद तक बढ़ जाता है जो आगे चलकर गंभीर हृदय रोगों में बदल सकता है।

    असंतुलित खानपान, बहुत ज्यादा कैलोरी युक्त भोजन, मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन और शारीरिक गतिविधि की कमी को विसरल फैट बढ़ने का मुख्य कारण माना गया है। घंटों बैठकर काम करने की आधुनिक जीवनशैली के कारण दिल्ली और मध्य प्रदेश सहित देश भर के शहरी इलाकों में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस समस्या से निपटने के लिए नियमित शारीरिक व्यायाम जैसे वॉक, साइकिलिंग और एरोबिक्स बेहद जरूरी हैं। साथ ही आहार में फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों, फलों, हरी सब्जियों और साबुत अनाज को शामिल कर तथा मीठे पेय पदार्थों से परहेज रखकर इस जोखिम से बचा जा सकता है।