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  • सोने-चांदी के भाव में 11 अक्टूबर को कितना बदलाव, जानें 24, 22 और 18 कैरेट गोल्ड के रेट और चांदी की कीमत

    सोने-चांदी के भाव में 11 अक्टूबर को कितना बदलाव, जानें 24, 22 और 18 कैरेट गोल्ड के रेट और चांदी की कीमत

    नई दिल्ली । रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को सोने और चांदी की कीमतों पर खरीदारी करने वालों और निवेशकों की नजर बनी हुई है। त्योहारों और शादी-ब्याह के लिए गहने खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के लिए 24, 22 और 18 कैरेट सोने के भाव जानना जरूरी है। अलग-अलग बाजारों और रेट ट्रैकर्स पर कीमतों में अंतर देखने को मिल सकता है। ऐसे में सोना या चांदी खरीदने से पहले संबंधित शहर के ताजा भाव की जानकारी लेना उपयोगी रहता है।

    11 अक्टूबर के बाजार आंकड़ों के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम बताई गई है। वहीं, 22 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.37 लाख रुपये और 18 कैरेट सोने की कीमत करीब 1.12 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई। ये कीमतें उपलब्ध बाजार जानकारी पर आधारित हैं। अलग-अलग कारोबारी स्रोतों पर सोने के भाव में अंतर होने के कारण खरीदारी से पहले स्थानीय जौहरी से दर की पुष्टि करना जरूरी है।

    सोने की शुद्धता के आधार पर उसके इस्तेमाल में भी अंतर होता है। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है। हालांकि, यह अपेक्षाकृत नरम होता है, इसलिए इससे सामान्य तौर पर रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले मजबूत आभूषण नहीं बनाए जाते। निवेश के लिए इस्तेमाल होने वाले सोने के सिक्कों और बार में आमतौर पर 24 कैरेट सोने का उपयोग किया जाता है। इसकी कीमत जानना उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जो सोने में निवेश करने की योजना बना रहे हैं।

    दूसरी ओर, 22 कैरेट सोने में थोड़ी मात्रा में अन्य धातुएं मिलाई जाती हैं। इससे सोना अधिक मजबूत बनता है और उससे गहने तैयार करना आसान होता है। इसी वजह से पारंपरिक आभूषणों और शादी-ब्याह में पहने जाने वाले गहनों के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल आम है। वहीं, 18 कैरेट सोने में भी दूसरी धातुओं का मिश्रण होता है। इसका उपयोग अलग-अलग डिजाइन के आभूषण बनाने में किया जाता है। इन तीनों श्रेणियों की कीमतों में शुद्धता के अंतर के कारण फर्क रहता है।

    चांदी की कीमतों की बात करें तो 11 अक्टूबर को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी का भाव 2,25,820 रुपये प्रति किलोग्राम बताया गया। पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 2,22,575 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था। वहीं, बुलियन बाजार के उपलब्ध आंकड़ों में चांदी की कीमत 2,26,100 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई। इन दरों में अंतर अलग-अलग बाजारों और मूल्य निर्धारण के आधार पर हो सकता है। इसलिए खरीदारी के समय संबंधित बाजार का भाव जांचना जरूरी है।

    सोना या चांदी खरीदते समय केवल घोषित बाजार भाव के आधार पर फैसला करना पर्याप्त नहीं है। गहने खरीदने वाले ग्राहकों को सोने की शुद्धता, हॉलमार्क और मेकिंग चार्ज की जानकारी भी लेनी चाहिए। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज में अंतर हो सकता है, जिसका असर अंतिम कीमत पर पड़ता है। इसके अलावा, दिन के दौरान कीमतों में बदलाव संभव है। इसलिए भुगतान करने से पहले जौहरी से उस समय लागू दर और पूरे बिल की जानकारी लेना बेहतर रहेगा।

  • इंदौर के तीन सरकारी कॉलेजों में वोटर रजिस्ट्रेशन कैंप, पहली बार मतदाता बनने के लिए 96 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन

    इंदौर के तीन सरकारी कॉलेजों में वोटर रजिस्ट्रेशन कैंप, पहली बार मतदाता बनने के लिए 96 विद्यार्थियों ने कराया पंजीयन

    मध्य प्रदेश। के इंदौर में युवाओं को मतदाता सूची से जोड़ने और मतदान के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से तीन सरकारी कॉलेजों में विशेष मतदाता पंजीयन शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के विद्यार्थियों को पहली बार मतदाता पहचान पत्र बनवाने और मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में सहायता दी गई। कॉलेज परिसरों में ही पंजीयन की सुविधा मिलने से विद्यार्थियों को आवेदन संबंधी जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।

    यह अभियान श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, शासकीय होलकर साइंस कॉलेज और शासकीय न्यू लॉ कॉलेज में चलाया गया। शिविरों का उद्देश्य ऐसे पात्र विद्यार्थियों को मतदाता सूची में शामिल करने में मदद करना था, जिन्होंने अभी तक अपना पंजीयन नहीं कराया है। इसके साथ ही युवाओं को मतदान के महत्व और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनकी भागीदारी के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।

    श्री अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में आयोजित शिविर के दौरान कुल 96 विद्यार्थियों ने मतदाता पंजीयन कराया। इनमें पहले दिन 39 विद्यार्थियों ने आवेदन किया, जबकि अंतिम दिन 57 विद्यार्थियों ने पंजीयन की प्रक्रिया पूरी की। इस तरह दोनों दिनों में पंजीयन कराने वाले विद्यार्थियों की कुल संख्या 96 रही। कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ममता चंद्रशेखर ने बताया कि मध्य प्रदेश के अन्य सरकारी कॉलेजों में भी इसी तरह के शिविर आयोजित किए गए हैं। इनका उद्देश्य पात्र विद्यार्थियों के नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने में सहायता करना है।

    शासकीय होलकर साइंस कॉलेज में भी विद्यार्थियों ने शिविर में हिस्सा लिया। कॉलेज के कर्मचारी राजेंद्र चौरसिया के अनुसार, यहां छात्र-छात्राओं ने उत्साह के साथ पंजीयन प्रक्रिया में भाग लिया। शिविर के दौरान लगभग 15 से 20 विद्यार्थी मतदाता पंजीयन के लिए शामिल हुए। इन शिविरों के माध्यम से विद्यार्थियों को आवेदन से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई गई और पंजीयन प्रक्रिया को समझने में मदद मिली।

    शासकीय न्यू लॉ कॉलेज में 5 और 9 अक्टूबर को विशेष मतदाता पंजीयन शिविर लगाए गए। दोनों दिन शिविर का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक निर्धारित था। विद्यार्थियों को आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेजों की जानकारी दी गई और फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी करने में सहायता की गई। उनसे कक्षा 10वीं की मार्कशीट, बिजली का बिल, आधार कार्ड, पासपोर्ट आकार की फोटो और माता-पिता के मतदाता पहचान पत्र जैसे दस्तावेज लाने को कहा गया था।

    न्यू लॉ कॉलेज की छात्रा डिंपल वर्मा ने बताया कि शिविर में अधिकारियों ने आवेदन प्रक्रिया को आसान बनाया। उनके अनुसार, दूसरे शहरों से आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मतदाता पहचान पत्र बनवाने और उससे जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में कॉलेज परिसर में आयोजित शिविर उनके लिए उपयोगी साबित होते हैं, क्योंकि यहां उन्हें पंजीयन की प्रक्रिया समझने और आवेदन पूरा करने में मदद मिलती है।

    इंदौर जिले में दो लोकसभा क्षेत्र, नौ विधानसभा क्षेत्र और कुल 3,210 मतदान केंद्र हैं। ऐसे में नए मतदाताओं को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए कॉलेजों में आयोजित शिविर महत्वपूर्ण गतिविधि के रूप में सामने आए हैं। 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नागरिक मतदाता बनने के पात्र होते हैं, लेकिन मतदान करने के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज होना आवश्यक है। कॉलेजों में चलाए जा रहे इस अभियान के जरिए विद्यार्थियों को पहली बार मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने और चुनावी प्रक्रिया में भाग लेने की दिशा में सहायता दी जा रही है।

  • सीजेपी आंदोलन और रेल परिचालन में बदलाव से भोपाल मंडल में 4500 टिकट रद्द, यात्रियों को 35 लाख रुपये का रिफंड मिलेगा

    सीजेपी आंदोलन और रेल परिचालन में बदलाव से भोपाल मंडल में 4500 टिकट रद्द, यात्रियों को 35 लाख रुपये का रिफंड मिलेगा

    मध्य प्रदेश। के भोपाल रेल मंडल में 9 और 10 अक्टूबर को करीब 4500 यात्रियों के टिकट रद्द हुए हैं। सीजेपी आंदोलन और रेल परिचालन में हुए बदलाव के बीच यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। रेलवे प्रशासन के अनुसार, टिकट रद्द होने से प्रभावित यात्रियों को कुल 35 लाख रुपये का रिफंड दिया जाएगा। यह राशि 24 से 48 घंटे के भीतर यात्रियों के खातों में वापस भेजने की व्यवस्था की गई है।

    रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ट्रेनें निरस्त होने से प्रभावित यात्रियों को नियमानुसार टिकट का पूरा रिफंड मिलेगा। इसके लिए करीब 35 लाख रुपये की राशि निर्धारित की गई है। रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. मधुर वर्मा ने यात्रियों को आश्वस्त किया है कि उन्हें रिफंड के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। निर्धारित समय सीमा के भीतर राशि उनके खातों में वापस कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से टिकट रद्द होने के कारण प्रभावित यात्रियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

    9 अक्टूबर को दिल्ली की ओर आने-जाने वाली कई प्रमुख ट्रेनें निरस्त रहीं। इनमें मुंबई-हजरत निजामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस, जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन एक्सप्रेस, महाकौशल एक्सप्रेस, एमपी संपर्क क्रांति एक्सप्रेस और शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस शामिल थीं। इन ट्रेनों के रद्द होने से दिल्ली जाने वाले और वहां से लौटने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जिन यात्रियों ने पहले से आरक्षण करा रखा था, उनकी यात्रा योजनाएं भी प्रभावित हुईं।

    10 अक्टूबर को भी रेल सेवाओं पर असर जारी रहा। दिल्ली से भोपाल आने वाली हजरत निजामुद्दीन-रानी कमलापति शान-ए-भोपाल एक्सप्रेस निर्धारित समय पर रवाना नहीं हो सकी। इसी दिन कोटा-हजरत निजामुद्दीन जनशताब्दी एक्सप्रेस भी निरस्त रही। लगातार दो दिनों तक ट्रेनों के रद्द होने और परिचालन में बदलाव के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा की योजनाओं में फेरबदल करना पड़ा। कुछ यात्रियों को यात्रा टालनी पड़ी, जबकि अन्य को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ा।

    भोपाल मंडल में रेल परिचालन से जुड़ा एक अन्य बदलाव बीना-आगासौद यार्ड में चल रहे रीमॉडलिंग कार्य के कारण किया गया है। इस काम के चलते 15 अक्टूबर तक करीब 17 ट्रेनों के मार्ग बदले गए हैं। यार्ड में चल रहे कार्य के कारण निर्धारित अवधि के दौरान संबंधित ट्रेनों का परिचालन बदले हुए मार्गों से किया जा रहा है। इससे यात्रियों के लिए अपनी ट्रेन की स्थिति और यात्रा मार्ग की जानकारी रखना जरूरी हो गया है।

    रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन के परिचालन की स्थिति और बदले हुए मार्ग की जानकारी जांचने की सलाह दी है। खासकर दिल्ली रूट पर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी ट्रेन के समय और परिचालन से संबंधित अपडेट की पुष्टि करनी चाहिए। टिकट रद्द होने की स्थिति में प्रभावित यात्रियों को नियमानुसार पूरा रिफंड देने और 24 से 48 घंटे के भीतर 35 लाख रुपये लौटाने की व्यवस्था की गई है। वहीं, बीना-आगासौद यार्ड में रीमॉडलिंग के कारण 15 अक्टूबर तक मार्ग परिवर्तन लागू रहने से यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनानी होगी।

  • योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    योगी आदित्यनाथ ने देवीपाटन मंदिर में कन्या पूजन कर बेटियों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन को राम राज्य का आधार बताया

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को शारदीय नवरात्रि की प्रतिपदा और अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर बलरामपुर स्थित देवीपाटन मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने नवदुर्गा के स्वरूप में नौ कन्याओं का पूजन किया। कन्याओं को तिलक लगाने के साथ चुनरी ओढ़ाई गई। मंदिर परिसर में आयोजित ‘शिक्षा की उड़ान’ पहल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों को स्टडी टेबल, आशीर्वाद पत्र और स्टेशनरी किट वितरित कीं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और स्वावलंबन देना राम राज्य की स्थापना का मूल आधार है।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए गए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले पांचवीं कक्षा तक पहुंचने से पहले ही हर पांचवीं बेटी स्कूल छोड़ देती थी। उस समय 60 से 70 प्रतिशत बच्चे नंगे पैर विद्यालय जाते थे। स्कूलों में शौचालय और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव था। उन्होंने कहा कि सरकार ने कार्यभार संभालने के बाद बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल और गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की।

    योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ के माध्यम से प्रदेश के 1.60 करोड़ परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को हर साल दो जोड़ी यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा रही हैं। कार्यक्रम में शिक्षा और बालिकाओं के विकास से जुड़े प्रयासों पर भी जोर दिया गया। ‘शिक्षा की उड़ान’ के तहत बच्चों को अध्ययन के लिए आवश्यक सामग्री देकर उनकी पढ़ाई को प्रोत्साहित किया गया।

    महिला सशक्तिकरण के विषय पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजनाओं में महिलाओं को संपत्ति का मालिकाना हक देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत मकानों की रजिस्ट्री तथा धनराशि परिवार की महिला मुखिया के नाम पर दी जा रही है। उन्होंने बताया कि एक करोड़ से अधिक परिवारों को वितरित की गई घरौनियों में भी महिलाओं को मालिकाना अधिकार मिला है। इसके अलावा उज्ज्वला योजना और तीन करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण को महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा से जुड़े प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके साथ ही विराट किसान मेले का शुभारंभ भी किया गया। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर की चाबियां और कीटनाशक छिड़काव करने वाले यंत्र वितरित किए गए। इन गतिविधियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र से जुड़े उपकरणों और सुविधाओं को किसानों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया गया।

    मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को ट्रैक सूट देकर सम्मानित किया। वहीं, बेसिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को स्टेशनरी किट प्रदान की गईं। कार्यक्रम में देवीपाटन मंदिर के महंत मिथिलेश नाथ, विधायक कैलाश नाथ शुक्ला, पल्टूराम और रामप्रताप वर्मा सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर कन्या पूजन, बालिका शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, किसानों को उपकरणों के वितरण और विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए।

  • बस्तर में आबकारी विभाग की कार्रवाई, 8.28 लाख रुपये की गोवा शराब और टाटा वाहन जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

    बस्तर में आबकारी विभाग की कार्रवाई, 8.28 लाख रुपये की गोवा शराब और टाटा वाहन जब्त, एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरा फरार

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में अवैध शराब के परिवहन और बिक्री के खिलाफ आबकारी विभाग ने कार्रवाई की है। इस दौरान विभाग की टीम ने मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित गोवा ब्रांड की विदेशी शराब की 20 पेटियां जब्त कीं। शराब को दूसरे राज्य से लाकर खपाने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि दूसरा आरोपी फरार बताया जा रहा है। कार्रवाई के दौरान शराब के परिवहन में इस्तेमाल किया जा रहा एक टाटा वाहन भी जब्त किया गया। शराब और वाहन की कुल अनुमानित कीमत 8 लाख 28 हजार रुपये बताई गई है।

    यह कार्रवाई जगदलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम सोनारपाल के पास जांच के दौरान की गई। आबकारी विभाग के जगदलपुर वृत्त की टीम ने वाहन की जांच की तो उसमें विदेशी शराब मिली। जब्त शराब की मात्रा 180 लीटर बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, शराब मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित थी, लेकिन उसे दूसरे राज्य में ले जाकर खपाने की आशंका के आधार पर कार्रवाई की गई। विभाग ने शराब की खेप और उसके परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन को अपने कब्जे में ले लिया है।

    जब्त की गई गोवा ब्रांड की विदेशी शराब की कीमत करीब 1 लाख 28 हजार रुपये आंकी गई है। वहीं, शराब ले जाने के लिए इस्तेमाल किए गए टाटा वाहन का अनुमानित मूल्य करीब 7 लाख रुपये बताया गया है। इस तरह शराब और वाहन दोनों को मिलाकर जब्त किए गए सामान की कुल कीमत 8 लाख 28 हजार रुपये है। आबकारी विभाग ने अवैध शराब के परिवहन से जुड़े मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    इस प्रकरण में दुर्ग जिले के सुपेला स्थित शास्त्री नगर निवासी 33 वर्षीय देवेंद्र कुमार जांगड़े को आरोपी बनाया गया है। कार्रवाई के बाद उसे गिरफ्तार किया गया। वहीं, जोगेन्दर कश्यप उर्फ जोगी फरार बताया जा रहा है। विभाग की टीम उसकी तलाश में जुटी है। मामले में दोनों आरोपियों की भूमिका और शराब के परिवहन से जुड़े तथ्यों को लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    आबकारी विभाग ने इस मामले में आबकारी अधिनियम, 1915 की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया है। जब्त शराब और वाहन को कार्रवाई का हिस्सा बनाया गया है। विभाग की टीम मामले की जांच आगे बढ़ा रही है। फरार आरोपी की तलाश के साथ ही अवैध शराब के परिवहन से जुड़े मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।

    बस्तर जिले में की गई इस कार्रवाई में खास तौर पर उस शराब की खेप को पकड़ा गया, जो मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए निर्धारित थी। जगदलपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनारपाल के पास हुई जांच के दौरान 20 पेटियां और 180 लीटर विदेशी शराब बरामद हुई। विभाग ने शराब के साथ वाहन भी जब्त किया है। इस कार्रवाई में एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई है, जबकि दूसरे आरोपी के फरार होने के कारण उसकी तलाश जारी है।

  • राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा

    राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने जारी किया संकल्प पत्र, गांवों में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाएं बढ़ाने का वादा


    नई दिल्ली । 
    राजस्थान में पंचायत चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश भाजपा कार्यालय के नए सभागार में इस दस्तावेज को जारी करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने का वादा किया। संकल्प पत्र में शिक्षा, चिकित्सा और खेल सुविधाओं को प्रमुखता दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य गांवों में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी सामान्य जरूरतों के लिए शहरों की ओर न जाना पड़े।

    संकल्प पत्र जारी करने के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ग्रामीण क्षेत्रों में शहरों जैसी सुविधाएं विकसित करने के पक्ष में है। उनका कहना था कि गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। इससे लोगों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए शहरों तक पहुंचने की मजबूरी कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाओं का विस्तार करने को पार्टी ने अपने विकास संबंधी वादों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।

    भजनलाल शर्मा ने गांवों से शहरों की ओर बढ़ते पलायन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में शहरों का विस्तार हुआ है और कई जगह उनका दायरा 40 से 50 किलोमीटर तक बढ़ गया है। ऐसे में शहरों के भीतर भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यदि गांवों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी, तो ग्रामीणों को 100 से 150 किलोमीटर की दूरी तय करके शहरों तक आने की जरूरत कम होगी। इससे वे अपने गांव में रहते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।

    संकल्प पत्र में शिक्षा और चिकित्सा सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने इन दोनों क्षेत्रों को ग्रामीण जीवन के लिए महत्वपूर्ण बताया। स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और बड़े अस्पतालों की उपलब्धता से जुड़े दूरी के मानकों पर काम करने की बात कही गई है। हालांकि, स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की संख्या, उनके बीच निर्धारित दूरी तथा स्थापना की समयसीमा का विस्तृत ब्योरा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ग्रामीण युवाओं के लिए खेल सुविधाओं का विस्तार भी भाजपा के प्रमुख वादों में शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत स्तर पर खेल मैदान विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य गांवों में युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए स्थान और सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इस घोषणा के जरिए पार्टी ने पंचायत स्तर पर खेल के अवसर बढ़ाने की बात रखी है।

    संकल्प पत्र जारी होने से पहले कार्यक्रम के मंच पर एक अप्रत्याशित घटना भी हुई। संगठन महामंत्री अजेय कुमार का स्वागत करने के लिए पहुंचे सोशल मीडिया संयोजक हीरेन कौशिक अचानक फिसलकर नीचे गिर गए। इस घटना से मंच पर मौजूद लोग कुछ समय के लिए चौंक गए। इसके बाद प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया और अन्य कार्यकर्ताओं ने उन्हें संभाला। घटना के बाद हीरेन कौशिक ने संगठन महामंत्री का स्वागत किया।

    कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार, प्रदेश प्रभारी संजय भाटिया, सह प्रभारी कुलदीप चहल और कविता पाटीदार सहित पार्टी के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। पंचायत चुनाव से पहले जारी संकल्प पत्र में ग्रामीण विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल सुविधाओं को केंद्र में रखा गया है। इन वादों के साथ गांवों में बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने और शहरों पर निर्भरता कम करने का लक्ष्य सामने रखा गया है। इन घोषणाओं को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा और समयसीमा की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।

  • गुरुग्राम में हिरासत से रिहाई के बाद ध्रुव राठी का आरोप, मां को धक्का देकर बेडरूम से उठाया और 23 घंटे रखा

    गुरुग्राम में हिरासत से रिहाई के बाद ध्रुव राठी का आरोप, मां को धक्का देकर बेडरूम से उठाया और 23 घंटे रखा


    नई दिल्ली । यूट्यूबर और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर ध्रुव राठी ने गुरुग्राम स्थित अपने आवास से हिरासत में लिए जाने और रिहाई के बाद पुलिस कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि शनिवार सुबह सिविल कपड़ों में पहुंचे करीब 20 लोग उनके घर में दाखिल हुए और उन्हें सोते समय बेडरूम से उठाकर अपने साथ ले गए। राठी के अनुसार, इस दौरान उनकी मां को भी रास्ते से हटाने के लिए धक्का दिया गया। उन्होंने पूरी कार्रवाई को कानूनी गिरफ्तारी के बजाय अपहरण करार दिया है।

    राठी ने वीडियो में बताया कि उन्हें करीब 22 से 23 घंटे तक हिरासत में रखा गया। उनका आरोप है कि इस दौरान उन्हें अपने कानूनी सलाहकार से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें जबरन ले जाने के दौरान उनके शरीर और हाथों पर अंदरूनी चोटें आईं। रिहाई के बाद सामने आए वीडियो में उन्होंने अपनी आपबीती साझा करते हुए संबंधित कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र पुष्टि या पुलिस का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

    वीडियो में ध्रुव राठी ने अपनी नागरिकता को लेकर उठाए जाने वाले सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने भारतीय पासपोर्ट कैमरे के सामने दिखाते हुए कहा कि वह भारतीय नागरिक थे, हैं और आगे भी रहेंगे। उन्होंने अपनी राष्ट्रीय पहचान पर सवाल उठाने वालों को संबोधित करते हुए कहा कि उनका जुड़ाव भारत से है और उन्हें सच बोलने से रोका नहीं जा सकता। विदेश में निवास को लेकर उनकी नागरिकता पर होने वाली चर्चाओं के संदर्भ में उन्होंने अपने पासपोर्ट को अपनी पहचान का प्रमाण बताया।

    राठी ने देश के मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक हालात पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति बन रही है और सरकार के खिलाफ बोलने वाले लोगों तथा स्वतंत्र आवाजों को डराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों की तुलना उत्तर कोरिया जैसे देशों से करते हुए दावा किया कि असहमति की आवाजों को दबाने की कोशिश हो रही है। ये टिप्पणियां उनके वीडियो में व्यक्त विचार और आरोप हैं।

    उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, ध्रुव राठी को गुरुग्राम के केंद्रीय विहार स्थित आवास से ले जाकर सेक्टर-39 के क्राइम ब्रांच थाने में रखा गया था। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया था, जिसमें नागरिकों से ‘सीजेपी प्रोटेस्ट’ में शामिल होने का आह्वान किया गया था। हालांकि, इस आह्वान और हिरासत की कार्रवाई के बीच संबंध को लेकर पुलिस का आधिकारिक बयान उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।

    अपने वीडियो के अंतिम हिस्से में राठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग, न्यायपालिका और निष्पक्ष मीडिया जैसे प्रमुख संस्थानों पर सत्ता का प्रभाव बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, ऐसी स्थिति लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने अपनी हिरासत की कार्रवाई को लेकर भी असहमति जताई और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े सवालों के संदर्भ में रखा। मामले में पुलिस का पक्ष और हिरासत से संबंधित आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन से 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित, बाजारों से होटल और पर्यटन उद्योग तक पड़ा असर


    नई दिल्ली ।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन और सुरक्षा पाबंदियों का व्यापक असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ा। व्यापारिक संगठन चेंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के अनुसार, एक दिन के दौरान दिल्ली में करीब 2000 करोड़ रुपये का कारोबार प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान प्रमुख बाजारों, मेट्रो स्टेशनों और सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था सख्त किए जाने से आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इसका असर त्योहारी सीजन की शुरुआत में व्यापारियों के कारोबार पर पड़ा।

    सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के मुताबिक, प्रदर्शन के कारण हुए आर्थिक नुकसान का असर केवल खुदरा कारोबार तक सीमित नहीं रहा। सेवा क्षेत्र, होटल और आतिथ्य उद्योग, परिवहन तथा पर्यटन सहित कई क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां प्रभावित हुईं। संगठन ने 10 अक्टूबर को हुए नुकसान का अनुमान करीब 2000 करोड़ रुपये लगाया है। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर ग्राहकों की आवाजाही कम रही। होटल, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, ब्यूटी पार्लर और सैलून में भी पहले से की गई बुकिंग बड़े स्तर पर रद्द होने की जानकारी सामने आई।

    दिल्ली के कई प्रमुख बाजारों में कारोबार सामान्य रूप से नहीं चल सका। सुरक्षा प्रतिबंधों और यातायात जाम की आशंका के कारण सदर बाजार, चांदनी चौक, चावड़ी बाजार, कनॉट प्लेस, करोल बाग और लाजपत राय मार्केट जैसे व्यावसायिक केंद्रों में गतिविधियां प्रभावित रहीं। इन बाजारों में दिल्ली के साथ-साथ आसपास के शहरों से भी बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए आते हैं। प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था के चलते इस बार उनकी आवाजाही पर असर पड़ा।

    सीटीआई के अनुसार, दिल्ली के बाहर से प्रतिदिन आने वाले करीब तीन से चार लाख खरीदार 10 अक्टूबर को राजधानी नहीं पहुंच सके। वहीं, सुरक्षा संबंधी आशंकाओं के कारण स्थानीय लोग भी घरों से निकलने से बचते रहे। मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से लोगों की आवाजाही और बाजारों तक पहुंचने में भी परेशानी हुई। ग्राहकों की संख्या घटने से खुदरा व्यापार के अलावा परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े कारोबार पर भी दबाव पड़ा।

    व्यापारियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए सीटीआई ने सीजेपी सहित सभी राजनीतिक दलों से दिवाली तक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन नहीं करने की अपील की है। संगठन ने इस संबंध में राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर मांग की है कि त्योहारों के दौरान राजधानी में विरोध कार्यक्रम आयोजित करने से बचा जाए। सीटीआई का कहना है कि नवरात्र और रामलीलाओं का आयोजन शुरू हो चुका है। यह अवधि दिल्ली के करीब 20 लाख व्यापारियों के लिए साल के सबसे महत्वपूर्ण कारोबारी समय में शामिल है।

    संगठन ने दिल्ली में आयोजित होने वाली करीब 650 रामलीलाओं का भी उल्लेख किया। इन आयोजनों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और त्योहारों के दौरान विभिन्न कारोबारों को ग्राहकों की बढ़ी हुई आवाजाही से लाभ होता है। सीटीआई के अनुसार, यदि सड़कों और मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंधों का असर जारी रहता है, तो त्योहारों से जुड़े व्यापार पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से संगठन ने राजनीतिक दलों को सुझाव दिया है कि यदि उन्हें प्रदर्शन करना है, तो दिवाली तक दिल्ली के बजाय किसी दूसरे शहर को आयोजन स्थल के रूप में चुना जाए। संगठन की अपील का उद्देश्य त्योहारों के दौरान व्यापारिक गतिविधियों और राजधानी की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA गठबंधन का आंदोलन तेज, सोमवार को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात और दिल्ली में विरोध मार्च का ऐलान

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी राजनीतिक विवाद के बीच INDIA गठबंधन ने अपने विरोध को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। विपक्षी दलों ने सोमवार को देश के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करने और दिल्ली में विरोध मार्च निकालने की योजना बनाई है। इस दौरान चुनाव आयोग के फैसलों, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाए जाने की बात कही गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक विरोध के साथ न्यायपालिका तक पहुंचाने की तैयारी में है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपने के बाद विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश से मिलने का फैसला किया है। इसके लिए विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मुलाकात करेगा। इस बैठक में चुनाव आयोग के हालिया फैसलों, प्रशासनिक पाबंदियों और नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से संबंधित चिंताओं को सामने रखने की योजना है। गठबंधन का उद्देश्य इन मुद्दों को न्यायपालिका के समक्ष प्रस्तुत करना है। हालांकि, प्रस्तावित मुलाकात के दौरान किन बिंदुओं पर चर्चा होगी, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    विपक्षी गठबंधन ने सोमवार को दिल्ली में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन और मार्च निकालने का भी ऐलान किया है। यह आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जारी विरोध और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच आयोजित किया जाएगा। विपक्षी दल चुनावी पारदर्शिता, निष्पक्षता और संविधान की रक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाना चाहते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रदर्शन में विभिन्न विपक्षी नेता और युवा भी शामिल हो सकते हैं। राजधानी में प्रस्तावित मार्च को लेकर सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है।

    इससे पहले INDIA गठबंधन के सांसदों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग के साथ संसद भवन से निर्वाचन आयोग के मुख्यालय तक मार्च निकाला था। इस विरोध प्रदर्शन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाद्रा समेत कई नेता शामिल हुए थे। मार्च के दौरान पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी और कुछ नेताओं को हिरासत में लिया गया था। इसके बाद विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट पर धरना दिया। विपक्ष ने इस दौरान चुनावी व्यवस्था से संबंधित अपनी मांगों को लेकर विरोध दर्ज कराया था।

    इसके बाद विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी। अब मुख्य न्यायाधीश से प्रस्तावित मुलाकात को इसी राजनीतिक अभियान के अगले कदम के तौर पर देखा जा रहा है। गठबंधन चुनाव आयोग के फैसलों और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखना चाहता है। मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी इस विरोध का प्रमुख हिस्सा बनी हुई है।

    कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल किसी एक पद या व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि संविधान और लोकतंत्र की रक्षा से जुड़ा है। उन्होंने कहा है कि प्रशासनिक दबाव या पुलिस कार्रवाई से विपक्ष की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता बहाल होने तक संघर्ष जारी रखने की बात कही है। सोमवार को प्रस्तावित मुलाकात और मार्च के जरिए INDIA गठबंधन इस मुद्दे पर अपना विरोध आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा कड़ी, पुलिस ने दर्ज कीं 20 एफआईआर, जंतर-मंतर पर विरोध के बीच कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का विरोध प्रदर्शन रविवार, 11 अक्टूबर को भी जारी रहने वाला है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुंचकर प्रदर्शन करने की योजना बनाई। प्रदर्शन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। पुलिस ने इस मामले में 20 एफआईआर दर्ज की हैं। वहीं, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 लागू की गई है। प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम के बीच दिल्ली के कई इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है।

    शनिवार को प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद रविवार को भी विरोध प्रदर्शन को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। नई दिल्ली और मध्य दिल्ली में यातायात प्रभावित होने की आशंका के मद्देनजर लोगों को रास्तों पर पाबंदियों के बारे में चेतावनी दी गई है। सुरक्षा प्रबंधों के तहत बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई है। प्रदर्शन के दौरान कनॉट प्लेस के इनर सर्कल में एकत्र हुए कुछ प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर तनाव की स्थिति बनी।

    प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके की रिहाई की भी जानकारी सामने आई। रिहा होने के बाद वह अपने घर लौट गए। वहीं, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की दिल्ली पुलिस के जवानों से बहस हो गई। पुलिस जब उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश कर रही थी, तब दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। प्रदर्शन को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है।

    आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय ने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई की आलोचना की। उन्होंने इसे भारत के राजनीतिक इतिहास का काला दिन बताते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश पर ‘काली इमरजेंसी’ थोप दी है। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने ट्रेनों के रद्द होने और दिल्ली मेट्रो के बड़े पैमाने पर बंद रहने का भी उल्लेख किया। गोपाल राय ने कहा कि दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती लोकतांत्रिक इतिहास के लिए बड़ा झटका है। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

    मेट्रो सेवाओं और इंटरनेट को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि मेट्रो सामान्य रूप से चले और इंटरनेट सेवाओं में कोई बाधा न आए। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क के कुल 303 स्टेशनों में से 45 पर ही प्रवेश और निकास पर रोक लगाई गई थी। मेट्रो संचालन को लेकर यह जानकारी अदालत के समक्ष रखी गई।

    इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त एक स्वतंत्र संस्था का हिस्सा हैं और उन्हें अपने फैसले स्वतंत्र रूप से लेने चाहिए। खड़गे के अनुसार, उन्हें फैसले लेने की पूरी आजादी नहीं मिल रही है। उन्होंने ‘वोट चोरी’ और लोकतंत्र के साथ धोखे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात भी कही। प्रदर्शन और उससे जुड़ी राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के बीच दिल्ली में सुरक्षा, यातायात और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।