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  • हरियाली अमावस्या पर इन 4 चीजों का दान दिला सकता है विशेष पुण्य, शिव जी शनि देव और पितरों की कृपा पाने का माना जाता है शुभ अवसर

    हरियाली अमावस्या पर इन 4 चीजों का दान दिला सकता है विशेष पुण्य, शिव जी शनि देव और पितरों की कृपा पाने का माना जाता है शुभ अवसर


    नई दिल्ली। सावन मास में पड़ने वाली हरियाली अमावस्या को धार्मिक मान्यताओं में विशेष महत्व दिया जाता है। यह तिथि भगवान शिव की उपासना, पितरों के स्मरण और दान पुण्य के लिए शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही शनि देव और पितरों का आशीर्वाद मिलने की भी धार्मिक मान्यता है। साल 2026 में हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को पड़ रही है। इस अवसर पर भक्त स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं और पूर्वजों की स्मृति में तर्पण तथा दान जैसे धार्मिक कार्य कर सकते हैं।

    धार्मिक परंपराओं के अनुसार हरियाली अमावस्या के दिन सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद श्रद्धा भाव से भगवान शिव की पूजा और स्मरण किया जाता है। पूर्वजों की शांति और उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए तर्पण आदि कर्म भी किए जाते हैं। इसके बाद जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि सच्चे मन और बिना किसी दिखावे के किया गया दान अधिक पुण्यदायी होता है।

    इस दिन छतरी का दान करना शुभ माना जाता है। सावन का मौसम वर्षा से जुड़ा होता है इसलिए जरूरतमंद व्यक्ति को छतरी देना सेवा का भी एक सुंदर माध्यम हो सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जूते या चप्पल का दान भी किया जा सकता है। कहा जाता है कि ऐसे दान से पितरों की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है और जीवन में आने वाली बाधाओं से राहत की कामना की जाती है।

    हरियाली अमावस्या पर दूध या दही का दान करने की भी परंपरा बताई गई है। दूध भगवान शिव की पूजा से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार किसी जरूरतमंद को दूध, दही, चावल, आटा या चीनी जैसी उपयोगी खाद्य सामग्री का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस तरह के दान से पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है और घर में सुख शांति तथा सकारात्मकता बनी रहती है।

    काली उड़द की दाल का दान भी इस दिन विशेष माना जाता है। ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताओं में काले रंग की कुछ वस्तुओं का संबंध शनि देव से जोड़ा जाता है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर काली उड़द का दान करने को शनि की कृपा प्राप्त करने से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि जीवन में लगातार आ रही बाधाओं और कार्यों में बनते बिगड़ते हालात के बीच श्रद्धा से किया गया दान मन को सकारात्मक भाव देता है।

    काले तिल का दान भी अमावस्या तिथि पर महत्वपूर्ण माना जाता है। पूर्वजों के नाम से काले तिल का दान करने और तर्पण में तिल के उपयोग की धार्मिक परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त होती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि दान करते समय मात्रा से अधिक भावना को महत्वपूर्ण माना जाना चाहिए। अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी जरूरतमंद व्यक्ति को उपयोगी वस्तु देना सबसे बड़ा उद्देश्य होना चाहिए।

    हरियाली अमावस्या का संदेश केवल धार्मिक कर्मकांड तक सीमित नहीं है बल्कि सेवा, दया और जरूरतमंदों की सहायता से भी जुड़ा है। इसलिए इस दिन शिव पूजा और पितरों के स्मरण के साथ भोजन, वस्त्र या दैनिक जरूरत की वस्तुओं का दान भी किया जा सकता है। श्रद्धा और निस्वार्थ भाव से किया गया दान मन में संतोष और सकारात्मकता का भाव पैदा करता है।

  • नसीरुद्दीन शाह पर कंगना का पलटवार, ‘लोमड़ी’ कहकर साधा निशाना, पीयूष मिश्रा के समर्थन में उतरीं

    नसीरुद्दीन शाह पर कंगना का पलटवार, ‘लोमड़ी’ कहकर साधा निशाना, पीयूष मिश्रा के समर्थन में उतरीं


    नई दिल्ली। नसीरुद्दीन शाह और पीयूष मिश्रा के बीच चल रहे बयानबाजी के विवाद में अब अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत भी कूद पड़ी हैं। कंगना ने पीयूष मिश्रा के बयान का समर्थन करते हुए नसीरुद्दीन शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह को लोमड़ी तक कह दिया और कहा कि उन्हें गर्व है कि वह जिस देश की रोटी खाती हैं उसके लिए आवाज उठाती हैं और जरूरत पड़ने पर उसके लिए लड़ती हैं। कंगना की इस टिप्पणी के बाद बॉलीवुड से जुड़े इस विवाद ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।

    दरअसल पूरा मामला छात्र आंदोलनों और फिल्म इंडस्ट्री की कथित चुप्पी से जुड़ा है। नसीरुद्दीन शाह ने छात्र प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड कलाकारों के छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने नहीं आने पर सवाल उठाया था। उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की तुलना ऐसे कुत्ते से की थी जिसके मुंह में हड्डी हो और वह भौंक नहीं सकता। नसीरुद्दीन शाह की इस टिप्पणी के बाद पीयूष मिश्रा ने भी उन पर पलटवार किया और झारखंड में छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी चुप्पी को लेकर सवाल खड़े किए।

    अब कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर पीयूष मिश्रा के रुख का समर्थन करते हुए नसीरुद्दीन शाह को निशाने पर लिया। कंगना ने कहा कि आज के समय में किसी को कुत्ता कहना भी तारीफ माना जा सकता है क्योंकि कुत्ते अपनी वफादारी और मासूमियत के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि हर कोई किसी न किसी का कुत्ता है, लेकिन उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह अपने देश के लिए बोलती हैं और उसकी रखवाली करती हैं।

    कंगना ने नसीरुद्दीन शाह पर निशाना साधते हुए आगे कहा कि नसीर साहब देश की रोटी खाते हैं लेकिन पड़ोसी देश के लिए लड़ते हैं। इसके बाद उन्होंने अपनी तुलना नसीरुद्दीन शाह से करते हुए कहा कि वह उनकी तरह लोमड़ी बनने के बजाय कुत्ता बनना पसंद करेंगी। कंगना की इस टिप्पणी को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस तेज होने की संभावना है और लोग अपने-अपने तरीके से इस विवाद पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    इससे पहले पीयूष मिश्रा ने भी नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी पर सवाल उठाए थे। उन्होंने झारखंड के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए पूछा था कि अगर फिल्म इंडस्ट्री के कुछ कलाकार छात्रों के समर्थन में आवाज नहीं उठा रहे थे तो दूसरे कलाकार कहां थे। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के कुत्ते और हड्डी वाले बयान को आधार बनाकर उनसे ही सवाल किया कि जब छात्र विरोध कर रहे थे तब वे आवाज उठाने के लिए आगे क्यों नहीं आए।

    पीयूष मिश्रा ने अपने बयान में छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की प्राथमिकताओं पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने दिल्ली और मुंबई में हुए छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ छात्र विरोध प्रदर्शन से ज्यादा पिज्जा और बर्गर पर ध्यान दे रहे थे। उनके इस बयान ने भी विवाद को और हवा दी।

    अब कंगना रनौत के नसीरुद्दीन शाह पर सीधे हमले के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक तथा व्यक्तिगत रंग लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ जहां कंगना ने देश और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट किया है, वहीं दूसरी ओर नसीरुद्दीन शाह की पुरानी टिप्पणी को लेकर बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस विवाद पर दोनों पक्षों की ओर से और बयान सामने आने की संभावना बनी हुई है।

  • श्रद्धा कपूर की ‘ईठा’ ने बदली रिलीज डेट, 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक; बॉक्स ऑफिस पर बनेगा ट्रिपल क्लैश

    श्रद्धा कपूर की ‘ईठा’ ने बदली रिलीज डेट, 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक; बॉक्स ऑफिस पर बनेगा ट्रिपल क्लैश


    नई दिल्ली। श्रद्धा कपूर की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘ईठा’ की रिलीज डेट में बड़ा बदलाव किया गया है। लक्ष्मण उतेकर के निर्देशन में बनी यह फिल्म पहले 28 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब मेकर्स ने इसकी रिलीज को आगे बढ़ाकर 4 दिसंबर 2026 कर दिया है। फिल्म की रिलीज डेट बदलने की सबसे बड़ी वजह बॉक्स ऑफिस पर होने वाली टक्कर को माना जा रहा है। दरअसल, साउथ सुपरस्टार यश की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘टॉक्सिक’ 26 अगस्त को रिलीज होने वाली है। ऐसे में महज दो दिन के अंतर पर ‘ईठा’ को रिलीज करने से दोनों फिल्मों के बीच सीधा मुकाबला होता। निर्माताओं ने इस संभावित क्लैश से बचने के लिए फिल्म को दिसंबर में रिलीज करने का फैसला किया है।

    हालांकि अगस्त की टक्कर टल गई है, लेकिन दिसंबर में ‘ईठा’ के सामने अब भी बड़ी चुनौती रहने वाली है। फिल्म 4 दिसंबर को सिनेमाघरों में पहुंचेगी और इसी दिन अक्षय कुमार तथा अनीस बज्मी की अनटाइटल्ड कॉमेडी फिल्म भी रिलीज होने की तैयारी में है। इसके अलावा प्रभास की बहुचर्चित फिल्म ‘फौजी’ एक दिन पहले यानी 3 दिसंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। ऐसे में दिसंबर के पहले सप्ताह में बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों के बीच जोरदार मुकाबला देखने को मिल सकता है। श्रद्धा कपूर की ‘ईठा’ को एक तरफ प्रभास की पैन इंडिया फिल्म से मुकाबला करना होगा, वहीं दूसरी तरफ अक्षय कुमार की कॉमेडी फिल्म भी दर्शकों को अपनी ओर खींचने की कोशिश करेगी।

    ‘ईठा’ को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी की एक बड़ी वजह इसकी कहानी और श्रद्धा कपूर का किरदार है। यह फिल्म मशहूर मराठी तमाशा और लावणी लोक कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर की जिंदगी पर आधारित बायोपिक बताई जा रही है। श्रद्धा कपूर इसमें मुख्य भूमिका निभा रही हैं और उनके लिए यह किरदार एक अलग तरह की चुनौती माना जा रहा है। फिल्म में उनके साथ रणदीप हुड्डा और मोहम्मद जीशान अय्यूब जैसे अनुभवी कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।

    फिल्म का निर्देशन लक्ष्मण उतेकर कर रहे हैं, जबकि इसका निर्माण मैडॉक फिल्म्स और कठपुतली क्रिएशंस के बैनर तले किया जा रहा है। श्रद्धा कपूर और लक्ष्मण उतेकर पहली बार इस फिल्म के लिए साथ आए हैं, ऐसे में दोनों की जोड़ी को लेकर भी दर्शकों में उत्सुकता है। मेकर्स अब दिसंबर की रिलीज को लेकर फिल्म के प्रमोशन की रणनीति तैयार कर सकते हैं।

    कुल मिलाकर ‘टॉक्सिक’ से टक्कर टालने के बावजूद ‘ईठा’ के लिए दिसंबर का रास्ता आसान नहीं है। प्रभास, अक्षय कुमार और श्रद्धा कपूर की फिल्मों के आसपास रिलीज होने से बॉक्स ऑफिस पर मुकाबला काफी दिलचस्प हो सकता है। अब देखना होगा कि इन बड़ी फिल्मों के बीच श्रद्धा कपूर की ‘ईठा’ दर्शकों का कितना ध्यान खींच पाती है।

  • ‘मैंने सब कुछ गंवा दिया था…’ ऋतिक ने सुनाया पिता राकेश रोशन के मुश्किल दौर का किस्सा, ऐसे मिला था एक्टिंग का पहला मौका

    ‘मैंने सब कुछ गंवा दिया था…’ ऋतिक ने सुनाया पिता राकेश रोशन के मुश्किल दौर का किस्सा, ऐसे मिला था एक्टिंग का पहला मौका


    नई दिल्ली। साल 1997 में रिलीज हुई शाहरुख खान और माधुरी दीक्षित की फिल्म कोयला भले ही आज अपने गानों और दमदार अंदाज के लिए याद की जाती हो लेकिन इस फिल्म की असफलता ने फिल्ममेकर राकेश रोशन को बेहद मुश्किल दौर में पहुंचा दिया था। फिल्म की कहानी लिखने से लेकर निर्देशन और निर्माण तक की जिम्मेदारी राकेश रोशन ने खुद संभाली थी और उन्हें इस प्रोजेक्ट से काफी उम्मीदें थीं। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और इसके बाद राकेश रोशन को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई साल बाद ऋतिक रोशन ने उस दौर को याद करते हुए बताया कि उनके पिता ने अपनी मेहनत से कमाई गई लगभग पूरी संपत्ति गंवा दी थी और परिवार के लिए वह समय बेहद कठिन था।

    ऋतिक रोशन के मुताबिक एक सुबह उन्होंने अपने पिता को बेहद परेशान देखा। राकेश रोशन ने उनसे कहा था कि उन्होंने जो कुछ कमाया था वह सब खत्म हो चुका है और अब मुश्किलें चारों तरफ से सामने आ रही हैं। ऋतिक ने बताया कि यह पहली बार था जब उन्होंने अपने पिता की आंखों में आंसू देखे थे। एक मजबूत और सफल फिल्ममेकर के रूप में पिता को देखने वाले ऋतिक के लिए यह पल बेहद भावुक करने वाला था। उस समय शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यही दौर आगे चलकर रोशन परिवार के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत बनेगा।

    कोयला से ऋतिक रोशन की भी खास यादें जुड़ी हुई हैं। अभिनेता बनने से पहले वह अपने पिता के साथ फिल्म के निर्माण में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें कैमरे के सामने आने का मौका भी मिला। ऋतिक को एक्टिंग में लाने के पीछे उनके नाना और अभिनेता ओम प्रकाश की भी अहम भूमिका बताई जाती है। राकेश रोशन ने बाद में बताया था कि उनके ससुर चाहते थे कि ऋतिक को फिल्म में एक भूमिका दी जाए। शुरुआत में राकेश रोशन को संदेह था कि ऋतिक कैमरे के सामने कैसे काम करेंगे क्योंकि वह ज्यादा बोलते नहीं थे। लेकिन जब ऋतिक ने सेट पर अपना पहला शॉट दिया तो राकेश रोशन खुद हैरान रह गए। उन्हें महसूस हुआ कि उनके बेटे के भीतर अभिनय की प्रतिभा मौजूद है।

    इसके बाद ऋतिक रोशन ने फिल्मी दुनिया में अपना अलग मुकाम बनाया। साल 2000 में कहो ना प्यार है से उन्होंने बतौर लीड अभिनेता शानदार शुरुआत की और देखते ही देखते बॉलीवुड के सबसे लोकप्रिय सितारों में शामिल हो गए। पिता और बेटे की जोड़ी ने आगे कोई मिल गया, कृष और कृष 3 जैसी फिल्मों में भी साथ काम किया और इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर मजबूत सफलता हासिल की। इस तरह जिस परिवार ने एक समय आर्थिक संकट और असफलता का सामना किया था, उसी परिवार ने आगे चलकर हिंदी सिनेमा में अपनी मजबूत पहचान बनाई। ऋतिक की कहानी यह भी दिखाती है कि मुश्किल दौर कई बार जिंदगी की सबसे बड़ी शुरुआत का कारण बन सकता है।

  • स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम

    स्कूल की सड़क से खराब खाना और शिक्षकों की कमी तक, बच्चों के प्रदर्शन पर अभिजीत दिपके बोले- हिम्मत को सलाम


    नई दिल्ली। देश की नई पीढ़ी अब सिर्फ पढ़ाई और भविष्य की चिंता तक सीमित नहीं रहना चाहती बल्कि अपने आसपास की समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाने लगी है। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर उत्तराखंड के खटीमा और राजस्थान के बांसवाड़ा में स्कूली बच्चों की ओर से किए गए विरोध प्रदर्शन ने इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा किया है। इन तीनों जगहों पर बच्चों ने सड़क स्कूल की व्यवस्था भोजन पानी और शिक्षकों की कमी जैसे मुद्दों को लेकर अपनी आवाज बुलंद की। बच्चों के इन प्रदर्शनों पर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने अपने भविष्य और बेहतर सुविधाओं के लिए आवाज उठाने वाले बच्चों की हिम्मत को सलाम किया है।
    हमीरपुर में बच्चों की सबसे बड़ी मांग स्कूल तक पक्की सड़क बनाने की थी। चंदूपुर के गंगवा का डेरा और बच्ची का डेरा क्षेत्र के छात्र लंबे समय से खराब रास्ते की परेशानी झेल रहे थे। बारिश के दौरान रास्ते में कीचड़ भर जाने से स्कूल पहुंचना मुश्किल और जोखिम भरा हो जाता था। इसी समस्या को लेकर छात्र ग्रामीणों के साथ हाथों में तिरंगा लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। बच्चों ने करीब पांच किलोमीटर की पैदल यात्रा की और जिलाधिकारी कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना दिया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिल चुका है और करीब एक करोड़ 81 लाख रुपये की लागत से पक्की सड़क का निर्माण कराया जाएगा।

    इसी तरह उत्तराखंड के खटीमा में सरकारी एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के करीब 400 छात्रों ने स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर विरोध जताया। छात्रों की शिकायत खराब भोजन दूषित पानी और शौचालयों में गंदगी को लेकर थी। बड़ी संख्या में छात्रों के धरने के बाद मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक पहुंचा। इसके बाद स्कूल की प्रिंसिपल भारती यादव को हटाने के निर्देश दिए गए। इस घटनाक्रम ने यह दिखाया कि छात्र अपनी रोजमर्रा की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी अब खुलकर सवाल पूछ रहे हैं।

    राजस्थान के बांसवाड़ा में भी छात्रों ने शिक्षकों की कमी को लेकर स्कूल के मुख्य गेट पर तालाबंदी कर दी। कुशलगढ़ के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बियापाड़ा में शिक्षकों के खाली पदों के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। छात्रों के विरोध को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिला। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च अधिकारियों से बातचीत की और छह शिक्षकों की डेप्युटेशन के आदेश जारी किए। इसके बाद छात्रों ने स्कूल का ताला खोल दिया।

    इन तीनों घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत दिपके ने कहा कि अपने भविष्य के लिए लड़ रहे इन बच्चों को उनका सलाम है। उन्होंने खास तौर पर सवाल उठाया कि आजादी के करीब 80 साल बाद भी बच्चों को अपने स्कूल तक सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आवाज क्यों उठानी पड़ रही है। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ग्रामीण भारत के बच्चों और स्कूलों के लिए काम करने का संकल्प लेने की अपील भी की।

    इन घटनाओं को व्यापक रूप से देखें तो यह केवल तीन स्थानीय विरोध प्रदर्शनों की कहानी नहीं है बल्कि नई पीढ़ी में बढ़ती जागरूकता का संकेत भी है। सड़क हो या स्कूल में शिक्षक भोजन हो या स्वच्छता बच्चे अब अपनी समस्याओं को सामने रखने और प्रशासन से जवाब मांगने का साहस दिखा रहे हैं। इनकी मांगें बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी हैं और यही वजह है कि इन प्रदर्शनों ने व्यापक ध्यान खींचा है। तीन अलग-अलग राज्यों में सामने आई इन घटनाओं ने यह संदेश जरूर दिया है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य को लेकर पहले से कहीं अधिक मुखर हो रही है।

  • Surya Grahan 2026 Timing: रात 9:04 बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा; जानें क्या होंगे नियम

    Surya Grahan 2026 Timing: रात 9:04 बजे से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, भारत में नहीं दिखेगा; जानें क्या होंगे नियम


    नई दिल्ली। साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात को लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना भारतीय समय के अनुसार रात 9 बजकर 4 मिनट से शुरू होगी और 13 अगस्त की मध्य रात्रि के बाद समाप्त होगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक ग्रहण का मध्य समय रात करीब 11 बजकर 16 मिनट रहेगा और इसकी कुल अवधि लगभग 4 घंटे 24 मिनट बताई जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों को इसे लेकर सूतक काल और धार्मिक नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

    सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। जब सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी लगभग एक सीध में आ जाते हैं और चंद्रमा सूर्य तथा पृथ्वी के बीच आ जाता है तब सूर्य की रोशनी का कुछ हिस्सा पृथ्वी तक पहुंचने से रुक जाता है। इसी दौरान पृथ्वी के कुछ हिस्सों से सूर्य ग्रहण दिखाई देता है। इस बार ग्रहण दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे जाम्बिया तंजानिया मॉरीशस अंटार्कटिका तथा दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में देखा जा सकेगा। अर्जेंटीना और चिली के कुछ क्षेत्रों में भी इसकी दृश्यता बताई गई है।

    भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि मंदिरों के कपाट बंद करने भोजन को लेकर विशेष प्रतिबंध लगाने या सामान्य दिनचर्या रोकने की जरूरत नहीं होगी। गर्भवती महिलाओं के लिए भी केवल ग्रहण के नाम पर किसी विशेष तरह की पाबंदी वैज्ञानिक रूप से जरूरी नहीं मानी जाती। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए बच्चे बुजुर्ग और मरीज अपनी जरूरत के अनुसार भोजन और पानी लेते रह सकते हैं।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस सूर्य ग्रहण को कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र से जोड़ा जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य को आत्मबल नेतृत्व प्रतिष्ठा प्रशासन और ऊर्जा का कारक माना जाता है। इसलिए ग्रहण को लेकर राजनीतिक प्रशासनिक और सार्वजनिक जीवन से जुड़े क्षेत्रों पर प्रभाव की चर्चाएं भी की जा रही हैं। हालांकि प्राकृतिक आपदाओं राजनीतिक बदलाव या दुर्घटनाओं जैसी घटनाओं की निश्चित भविष्यवाणी केवल ग्रहण के आधार पर वैज्ञानिक रूप से नहीं की जा सकती।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक आस्था रखने वाले लोग ध्यान मंत्र जाप और अपने इष्ट देव का स्मरण कर सकते हैं। ऊं घृणि सूर्याय नमः ऊं सूर्याय नमः या गायत्री मंत्र का जाप करने की परंपरा बताई जाती है। जरूरतमंदों को भोजन वस्त्र या आवश्यक सामग्री का दान भी धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है।

    जहां सूर्य ग्रहण दिखाई देगा वहां आंखों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना जरूरी होगा। सूर्य को बिना प्रमाणित सोलर व्यूइंग ग्लास या उचित फिल्टर के सीधे देखने से आंखों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा इसलिए यहां रहने वाले लोगों को इसे देखने के लिए किसी विशेष व्यवस्था की जरूरत नहीं होगी।

    ज्योतिषीय आकलन में कन्या तुला और कुंभ राशि के लिए ग्रहण को अपेक्षाकृत शुभ बताया जा रहा है जबकि कुछ अन्य राशियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। हालांकि किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव उसकी जन्म कुंडली से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर भय या चिंता करने के बजाय इसे एक खगोलीय घटना के रूप में समझना और धार्मिक मान्यताओं का पालन अपनी आस्था के अनुसार करना बेहतर है।

  • जेवर एयरपोर्ट की पहली भारी बारिश में जलभराव से मचा हड़कंप, AAP ने उठाए निर्माण और भ्रष्टाचार पर सवाल

    जेवर एयरपोर्ट की पहली भारी बारिश में जलभराव से मचा हड़कंप, AAP ने उठाए निर्माण और भ्रष्टाचार पर सवाल


    उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग पर जलभराव की स्थिति बन गई। अचानक बड़ी मात्रा में पानी जमा होने के बाद एयरपोर्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया और इसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई। हालांकि एयरपोर्ट प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई करते हुए करीब 30 मिनट के भीतर जलभराव को दूर कर दिया और यात्री तथा वाहनों की आवाजाही को सामान्य बनाए रखा। एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक जलभराव के दौरान वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से निकाला गया था, जिससे उड़ानों के संचालन पर किसी तरह का असर नहीं पड़ा।

    नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की ओर से बताया गया कि मंगलवार को अचानक हुई भारी बारिश के कारण टर्मिनल और पार्किंग के बीच के रास्ते पर पानी जमा हो गया था। स्थिति की जानकारी मिलते ही एयरपोर्ट की टीमों ने मौके पर पहुंचकर पानी निकालने का काम शुरू किया। आधे घंटे से भी कम समय में जलभराव को साफ कर दिया गया। प्रशासन के अनुसार इस दौरान यात्रियों के पिकअप और ड्रॉप की व्यवस्था भी जारी रही तथा किसी उड़ान को प्रभावित नहीं होना पड़ा। पानी निकलने के बाद टर्मिनल और पार्किंग के बीच वाहनों और यात्रियों की आवाजाही पहले की तरह सामान्य हो गई।

    एयरपोर्ट प्रशासन ने यह भी कहा कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बारिश के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए संबंधित टीमें अलर्ट पर हैं। एयरपोर्ट की ओर से दावा किया गया कि जलभराव के बावजूद परिचालन व्यवस्था सुचारु रही और यात्रियों को किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।

    हालांकि जलभराव का वीडियो सामने आने के बाद आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर सरकार और एयरपोर्ट के निर्माण पर सवाल खड़े कर दिए। AAP ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए एयरपोर्ट की पहली ही भारी बारिश में जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। पार्टी ने इसे कथित तौर पर घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा है। हालांकि AAP के इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

    जेवर एयरपोर्ट को उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। करीब 11,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ था। इसके बाद 15 जून से इंडिगो की उड़ानों के साथ यहां व्यावसायिक परिचालन शुरू हुआ। एयरपोर्ट से जुड़ी सुविधाओं और कनेक्टिविटी को लेकर इसे दिल्ली एनसीआर के लिए महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है।

    ऐसे में एयरपोर्ट परिसर में भारी बारिश के बाद जलभराव की घटना ने निर्माण गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। फिलहाल प्रशासन की ओर से पानी समय रहते निकाल दिया गया और उड़ानों का संचालन प्रभावित नहीं हुआ। आने वाले दिनों में बारिश के दौरान जलनिकासी व्यवस्था किस तरह काम करती है और क्या ऐसी स्थिति दोबारा सामने आती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

  • द ट्रेटर्स 2 में मल्लिका शेरावत का चौंकाने वाला खुलासा, टॉम क्रूज को लेकर कही ये बात

    द ट्रेटर्स 2 में मल्लिका शेरावत का चौंकाने वाला खुलासा, टॉम क्रूज को लेकर कही ये बात


    नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस मल्लिका शेरावत इन दिनों रियलिटी शो द ट्रेटर्स 2 को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। शो से सामने आए एक वीडियो में मल्लिका शेरावत ने हॉलीवुड के मशहूर अभिनेता टॉम क्रूज को लेकर ऐसा दावा किया है जिसने वहां मौजूद बाकी कंटेस्टेंट्स को भी हैरान कर दिया। मल्लिका ने बातचीत के दौरान कहा कि टॉम क्रूज को उन पर क्रश है। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी दावा किया कि हॉलीवुड स्टार उन्हें वीडियोज भेजते हैं। मल्लिका की यह बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर खूब चर्चा हो रही है।

    दरअसल शो में कंटेस्टेंट्स के बीच बातचीत चल रही थी। इसी दौरान आदित्य कुलश्रेष्ठ ने मल्लिका से पूछा कि क्या उन्हें कभी किसी पर क्रश हुआ है। इस सवाल पर मल्लिका ने कहा कि नहीं। इसके बाद आदित्य ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या सिर्फ दूसरे लोगों को ही उन पर क्रश होता है। इस पर मल्लिका ने जवाब देते हुए कहा कि सभी को उन पर क्रश होता है। इसके बाद उन्होंने टॉम क्रूज का जिक्र करते हुए कहा कि हाल ही में टॉम क्रूज को भी उन पर क्रश हुआ है।

    मल्लिका के इस जवाब के बाद वहां बैठे दूसरे कंटेस्टेंट्स चौंक जाते हैं। हालांकि मल्लिका अपनी बात पर कायम रहती हैं और कहती हैं कि वह झूठ नहीं बोल रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर उनके पास फोन होता तो वह सभी को टॉम क्रूज के भेजे हुए वीडियोज दिखा सकती थीं। मल्लिका के इस दावे ने बातचीत को और दिलचस्प बना दिया।

    जब उनसे पूछा गया कि टॉम क्रूज किस तरह के वीडियोज भेजते हैं तो मल्लिका ने बात को स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसा कुछ खास नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने और टॉम क्रूज ने साथ में पार्टी की थी और उसी से जुड़े वीडियोज की बात हो रही है। मल्लिका ने टॉम क्रूज की तारीफ करते हुए उन्हें काफी अच्छा इंसान भी बताया।

    मल्लिका शेरावत के इस बयान का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद यूजर्स अलग अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग मल्लिका की बात को मजाकिया अंदाज में ले रहे हैं तो कुछ लोग उनके दावे पर विश्वास नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि मल्लिका ने बातचीत के दौरान जिस आत्मविश्वास के साथ यह बात कही उससे शो का यह हिस्सा काफी चर्चा में आ गया है।

    मल्लिका शेरावत की बात करें तो वह द ट्रेटर्स 2 के जरिए लंबे समय बाद एक अलग तरह के रियलिटी फॉर्मेट में नजर आने वाली हैं। शो में उनके साथ रिया चक्रवर्ती अभिषेक मल्हान शालिनी पस्सी श्वेता तिवारी दलीप ताहिल इक्का सिंह क्रिस्टल डिसूजा मुनव्वर फारूकी पारुल गुलाटी रणवीर बरार और आदित्य कुलश्रेष्ठ समेत कई चर्चित चेहरे शामिल हैं। शो में सभी कंटेस्टेंट्स के बीच रणनीति विश्वास और धोखे का खेल देखने को मिलेगा।

    द ट्रेटर्स 2 का प्रीमियर 13 अगस्त 2026 से प्राइम वीडियो पर होने जा रहा है। शो का नया एपिसोड हर गुरुवार रिलीज किया जाएगा। वहीं शो शुरू होने से पहले श्वेता तिवारी की तबीयत खराब होने की खबर भी सामने आई है। उन्हें डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। फैंस उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहे हैं।

  • सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच इन कामों से रहें दूर, ब्रह्म मुहूर्त को लेकर शास्त्रों में बताई गई खास मान्यताएं

    सुबह 4 से 5:30 बजे के बीच इन कामों से रहें दूर, ब्रह्म मुहूर्त को लेकर शास्त्रों में बताई गई खास मान्यताएं


    नई दिल्ली। सनातन धर्म और ज्योतिषीय मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को दिन का बेहद पवित्र और शुभ समय माना गया है। मान्यता है कि इस दौरान वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा रहती है और व्यक्ति का मन भी अपेक्षाकृत शांत रहता है। यही वजह है कि इस समय पूजा पाठ ध्यान और मंत्र जाप करने को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में दिन की शुरुआत जिस तरह के विचारों और कार्यों से होती है उसका प्रभाव पूरे दिन की मानसिक स्थिति और व्यवहार पर पड़ सकता है। हालांकि कुछ ऐसे कार्य भी बताए गए हैं जिन्हें इस समय करने से बचना चाहिए।

    आम तौर पर ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह करीब 4 बजे से 5:30 बजे के बीच माना जाता है। हालांकि सूर्योदय के समय में होने वाले बदलाव के कारण इसका वास्तविक समय स्थान और मौसम के अनुसार अलग हो सकता है। धार्मिक परंपराओं में इसे जागने ध्यान करने और ईश्वर का स्मरण करने के लिए उपयुक्त समय माना गया है। ऐसे में इस दौरान मन को शांत रखने और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

    ब्रह्म मुहूर्त में भोजन से बचने की मान्यता

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठने के तुरंत बाद भोजन करने से बचना चाहिए। इस समय को पूजा ध्यान और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। परंपरा के अनुसार व्यक्ति को पहले दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर ध्यान और ईश्वर स्मरण करना चाहिए। हालांकि स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों में व्यक्तिगत परिस्थिति को प्राथमिकता देना जरूरी है।

    किसी के साथ बुरा व्यवहार न करें

    ब्रह्म मुहूर्त में किसी का अपमान करने या कटु व्यवहार करने से भी बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि सुबह का समय मन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर होता है। इसलिए इस दौरान क्रोध विवाद और नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर रखना बेहतर माना जाता है। शांत मन से दिन की शुरुआत करने से व्यक्ति पूरे दिन अधिक संतुलित रहने की कोशिश कर सकता है।

    प्रणय संबंध से जुड़ी धार्मिक मान्यता

    कुछ धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के ध्यान के लिए समर्पित समय माना गया है। इसी कारण इस समय प्रणय संबंध बनाने से बचने की बात कही गई है। परंपरा में सलाह दी जाती है कि नींद खुलने के बाद सबसे पहले भगवान का स्मरण और अपने दिन की सकारात्मक शुरुआत पर ध्यान दिया जाए।

    हथेलियों के दर्शन के साथ मंत्र जाप

    ब्रह्म मुहूर्त में जागने के बाद हथेलियों के दर्शन करते हुए एक पारंपरिक मंत्र का जाप करने की मान्यता है। मंत्र है ओम कराग्रे वसते लक्ष्मी करमध्ये सरस्वती करमूले तु गोविंद प्रभाते कर दर्शनम्। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंत्र के माध्यम से व्यक्ति अपने दिन की शुरुआत लक्ष्मी सरस्वती और भगवान विष्णु के स्मरण से करता है। इसे शुभ और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

    हनुमान चालीसा का पाठ भी माना जाता है शुभ

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिलती है। हनुमान जी को संकटमोचक और भय का नाश करने वाला माना जाता है। परंपरा में हनुमान जी की आराधना से पहले भगवान राम का नाम लेने को भी विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि राम नाम के स्मरण के साथ हनुमान जी की पूजा करने से भक्त के मन में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

  • जब बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को चौंकाया था, शाकिब ने बल्ले से 89 रन और गेंद से झटके 10 विकेट

    जब बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया को चौंकाया था, शाकिब ने बल्ले से 89 रन और गेंद से झटके 10 विकेट


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला 13 अगस्त से शुरू होने जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर बांग्लादेश के लिए यह सीरीज बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। हाल ही में खेले गए वॉर्मअप मुकाबले में बांग्लादेश को क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया इलेवन के खिलाफ पारी से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद बांग्लादेश के पास ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट क्रिकेट में एक ऐसी जीत है जिसे वह इस सीरीज से पहले जरूर याद करना चाहेगा। साल 2017 में बांग्लादेश ने घरेलू मैदान पर ऑस्ट्रेलिया को हराकर बड़ा उलटफेर किया था और इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े नायक शाकिब अल हसन रहे थे।

    दोनों टीमों के बीच 2017 में दो टेस्ट मैचों की सीरीज के लिए ऑस्ट्रेलिया बांग्लादेश के दौरे पर आया था। ढाका के शेरे बांग्ला नेशनल स्टेडियम में खेले गए पहले टेस्ट में बांग्लादेश ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 260 रन बनाए। तमीम इकबाल ने 71 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली जबकि शाकिब अल हसन ने 84 रन बनाकर टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाने में अहम योगदान दिया।

    इसके जवाब में बांग्लादेश के गेंदबाजों ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। पूरी ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी में 217 रन पर सिमट गई और बांग्लादेश को 43 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल हुई। ऑस्ट्रेलिया की ओर से रेनशॉ ने 45 और एस्टन एगर ने 41 रन बनाए। बांग्लादेश के लिए शाकिब अल हसन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए पांच विकेट झटके जबकि मेहदी हसन ने तीन विकेट लेकर उनका अच्छा साथ दिया।

    दूसरी पारी में बांग्लादेश की टीम 221 रन पर ऑलआउट हो गई। तमीम इकबाल ने एक बार फिर बल्ले से योगदान दिया और 78 रन की पारी खेली। हालांकि ऑस्ट्रेलिया के नाथन लियोन ने शानदार गेंदबाजी करते हुए छह विकेट हासिल किए। बांग्लादेश की दूसरी पारी जल्दी सिमटने के बावजूद पहली पारी की बढ़त उसके लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।

    बांग्लादेश ने ऑस्ट्रेलिया के सामने जीत के लिए 265 रन का लक्ष्य रखा। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी क्रम में डेविड वॉर्नर ने शानदार शतक लगाते हुए 112 रन बनाए और ऐसा लगा कि मेहमान टीम मुकाबला अपने नाम कर लेगी। लेकिन बांग्लादेश के गेंदबाजों ने आखिरी समय में पूरा खेल पलट दिया। ऑस्ट्रेलियाई टीम 244 रन पर सिमट गई और बांग्लादेश ने यह मुकाबला 20 रन से अपने नाम कर लिया।

    इस ऐतिहासिक जीत में शाकिब अल हसन का योगदान सबसे खास रहा। उन्होंने पहली पारी में पांच विकेट लेने के बाद दूसरी पारी में भी पांच बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। इस तरह पूरे मुकाबले में उनके नाम 10 विकेट रहे। इसके अलावा उन्होंने बल्ले से भी 84 और पांच रन की पारियां खेलते हुए कुल 89 रन बनाए। उनके शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ बांग्लादेश की यह टेस्ट क्रिकेट में अब तक की एकमात्र जीत है। दोनों टीमों के बीच खेले गए छह टेस्ट मैचों में बांग्लादेश को पांच मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा है जबकि एक मैच में उसने ऐतिहासिक जीत हासिल की। अब जब दोनों टीमें फिर टेस्ट सीरीज में आमने सामने हैं तो बांग्लादेश इस पुराने प्रदर्शन से आत्मविश्वास हासिल करना चाहेगा।

    हालांकि इस बार परिस्थितियां अलग हैं और मुकाबला ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर होना है। बांग्लादेश के सामने ऑस्ट्रेलिया के मजबूत बल्लेबाजी और गेंदबाजी आक्रमण की बड़ी चुनौती होगी। फिर भी 2017 की जीत उसे यह भरोसा जरूर देगी कि मजबूत ऑस्ट्रेलियाई टीम के खिलाफ भी टेस्ट क्रिकेट में बड़ा उलटफेर किया जा सकता है।