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  • लीप इंडिया लिटिडेट का ईपीओ 8.38 गुना हुआ सब्सक्राइब

    लीप इंडिया लिटिडेट का ईपीओ 8.38 गुना हुआ सब्सक्राइब


    नई दिल्ली।
    लीप इंडिया लिमिटेड के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को बोली के आखिरी दिन मंगलवार को 8.38 गुना सब्सक्रिप्शन किया गया है। आपूर्ति श्रृंखला एसेट पूलिंग कंपनी की योजना इस आईपीओ से 2,480 करोड़ रुपये जुटाने की है। कंपनी के शेयरों को बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।

    नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के आंकड़ों के अनुसार आईपीओ के तहत ऑफर की गई 11,49,91,735 शेयरों की पेशकश के मुकाबले 96,32,60,770 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं है। वहीं, पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए आरक्षित हिस्से को 16.84 गुना अभिदान मिला। इसी तरह गैर-संस्थागत निवेशकों के हिस्से को 12.64 गुना बोलियां मिलीं, जबकि खुदरा निवेशकों की श्रेणी को 1.71 गुना बोलियां प्राप्त हुई है।

    लीप इंडिया लिमिटेड ने गरुवार को कई संस्थागत निवेशकों से 743.62 करोड़ रुपये जुटाए हैं। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए मूल्य का दायरा 151-159 रुपये प्रति शेयर तय किया हुआ है। आईपीओ में 480 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें 2,000 करोड़ रुपये तक की बिक्री पेशकश (ओएफएस) भी शामिल है।

    कंपनी इस नए निर्गम से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपने कुछ कर्ज़ों को चुकाने या पूर्व-भुगतान करने में करेगी, जबकि बाकी रकम का इस्तेमाल कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में होगा। मूल्य का दायरे के ऊपरी स्तर पर कंपनी का निर्गम के बाद बाजार पूंजीकरण लगभग 7,005 करोड़ रुपये होगा।

    उल्लेखनीय है कि 2013 में बनी ये कंपनी अपने ‘शेयर और रीयूज’ (साझा करने और दोबारा इस्तेमाल करने) वाले बिजनेस मॉडल का इस्तेमाल करती है, जिसे ‘पूलिंग’ कहा जाता है। एफएंडएस रिपोर्ट के मुताबिक यह भारत के सप्लाई चेन मैनेजमेंट सेक्टर में ऑन-डिमांड एसेट पूलिंग सर्विस देने वाली सबसे बड़ी कंपनी है।

  • शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 10 अगस्त तक 23 फीसदी बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये

    शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 10 अगस्त तक 23 फीसदी बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    देश में वित्त वर्ष 2026-27 में प्रत्यक्ष कर संग्रह में तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई है। चालू वित्त वर्ष में 10 अगस्त तक शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 23.09 फीसदी बढ़कर 8.11 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

    आयकर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 19.83 फीसदी बढ़कर करीब 2.70 लाख करोड़ रुपये रहा है। व्यक्तिगत आयकर समेत गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह 23 फीसदी बढ़कर 5.07 लाख करोड़ रुपये हो गया। विभाग के मुताबिक इस दौरान प्रतिभूतियों के लेनदेन पर लगने वाले कर एसटीटी से राजस्व 51 फीसदी बढ़कर 33,824 करोड़ रुपये हो गया। इसी तरह 1 अप्रैल से लेकर 10 अगस्त के बीच 1.43 लाख करोड़ रुपये के कर रिफंड जारी किए गए, जो एक साल पहले की समान अवधि से 3.8 फीसदी अधिक है।

    आयकर विभाग के मुताबिक सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 19.75 फीसदी बढ़कर लगभग 9.55 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसमें कॉरपोरेट कर, व्यक्तिगत आयकर और एसटीटी शामिल हैं। आयकर विभाग ने कहा कि 10 अगस्त तक चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए सकल प्रत्यक्ष कर (डीटी) संग्रह, रिफंड और शुद्ध प्रत्यक्ष कर (डीटी) संग्रह के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं।

    सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में प्रत्यक्ष करों से 26.97 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह वित्त वर्ष 2025-26 में जुटाए गए 23.40 लाख करोड़ रुपये कर राजस्व से करीब 15 फीसदी अधिक है।

  • रावलपिंडी में पाक सेना मुख्यालय के बाहर गोलीबारी, एक सैनिक की मौत, दो घायल

    रावलपिंडी में पाक सेना मुख्यालय के बाहर गोलीबारी, एक सैनिक की मौत, दो घायल

    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय (GHQ) के बाहर सोमवार को एक हथियारबंद व्यक्ति ने गोलीबारी कर दी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में हमलावर मारा गया। घटना में पाकिस्तान सेना का एक जवान भी मारा गया, जबकि दो सुरक्षाकर्मी घायल बताए गए हैं।

    स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार हथियारबंद व्यक्ति GHQ के मुख्य प्रवेश द्वार के निकट पहुंच गया था। इसके बाद उसने सुरक्षाकर्मियों पर गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की और हमलावर को मार गिराया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है।

    GHQ परिसर के आसपास बढ़ाई गई सुरक्षा

    घटना के बाद रावलपिंडी कैंट क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। GHQ के आसपास के मार्गों पर आवाजाही प्रतिबंधित करते हुए सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमलावर किस उद्देश्य से सैन्य मुख्यालय के प्रवेश द्वार तक पहुंचा और उसके पीछे कौन लोग या संगठन थे।

    प्रारंभिक रिपोर्टों में हमलावर के पास विस्फोटक होने की बात भी सामने आई है, हालांकि इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां मौके से मिले हथियार और अन्य सामग्री की जांच कर रही हैं।

    हमले की जांच जारी

    घटना के बाद सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां हमलावर की पहचान, उसके संभावित सहयोगियों और घटना के पीछे की वजह का पता लगाने में जुटी हैं। फिलहाल किसी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

    रावलपिंडी स्थित GHQ पाकिस्तान सेना का प्रमुख मुख्यालय है और यहां सेना के शीर्ष अधिकारी काम करते हैं। घटना के बाद आसपास के इलाके में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

  • भोपाल मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र के विकास को मिली रफ्तार, भोपाल-विदिशा 4-लेन मार्ग के लिए 1,757 करोड़ से अधिक मंजूर

    भोपाल मेट्रोपॉलिटिन क्षेत्र के विकास को मिली रफ्तार, भोपाल-विदिशा 4-लेन मार्ग के लिए 1,757 करोड़ से अधिक मंजूर

    भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद ने भोपाल को मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने की दिशा में ठोस पहल करते हुए भोपाल-विदिशा मार्ग के 2-लेन से 4-लेन उन्नयन एवं निर्माण के लिए 1757.57 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस मार्ग के निर्माण से तेजी से औद्योगिक निवेश बढ़ेगा और अधोसंरसचना का भी व्यवस्थित विकास हो पायेगा। सांची स्तूप और कर्क रेखा जैसे प्रमुख स्थलों से गुजरने वाला यह मार्ग प्रादेशिक कनेक्टिविटी को नई मजबूती देगा। मंत्रि-परिषद ने भोपाल बायपास को 6-लेन बनाने के दृष्टिगत भोपाल बायपास- टोल टैक्स शुल्क संग्रहण की अनुमति 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में मंत्रि-परिषद ने स्थानीय मजदूरों और क्षेत्र के रहवासियों को लाभांश वितरण के लिए वन विभाग द्वारा संचालित संयुक्त वन प्रबंध समितियों को लाभांश का प्रदाय योजना के तहत वर्ष 2030-31 तक निरंतर रखे जाने की 918 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।

    मंत्रि-परिषद ने किसान कल्याण वर्ष में किसानों को बड़ी सौगात देते हुए भारत सरकार के अंतर्गत गठित उपक्रम नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए सीहोर जिले की इछावर तहसील के गांव भाउखेड़ी में 20 हैक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित किये जाने का निर्णय लिया है। प्रदेश के सर्वांगीण विकास, जन-स्वास्थ्य सुदृढ़ीकरण, बुनियादी ढांचे के विस्तार और महिला सशक्तिकरण को गति देने के लिए 47 हजार 990 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की है। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत योजना के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रुपये शामिल हैं।

    मंत्रि-परिषद ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए हर तरह की परिस्थितियों में समाज सेवा करने वाली महिलाओं के लिए ‘रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार’ की राशि भी 2 लाख रुपये करने की स्वीकृति दी है और ‘रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार’ की राशि को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने की मंजूरी दी है। इसी तरह जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के आगामी 5 वर्षों के संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रुपये की मंजूरी दी गई। देवास पटाखा फैक्ट्री दुर्घटना जांच आयोग की अवधि 3 माह बढ़ाने तथा एम.पी.पी.एस.सी के वार्षिक प्रतिवेदनों को विधानसभा के पटल पर रखने का अनुमोदन भी बैठक में किया गया।

    भोपाल-विदिशा मार्ग का 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर निर्माण किये जाने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने भोपाल को मेट्रो-पोलिटिन सिटी के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हाईब्रिड एन्यूटी मोडल (एचएएम) के लिए बनाए गए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट के आधार पर, भोपाल-विदिशा मार्ग लंबाई 44.830 कि.मी. का 4-लेन मय पेव्हड शोल्डर निर्माण किये जाने के लिए 1,757 करोड़ 55 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। इससे अब औद्योगिक निवेश बढ़ाने के साथ अधोसंरचनात्मक विकास होगा।

    कुल परियोजना निर्माण लागत का 40 प्रतिशत हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल (एच.ए.एम) अंतर्गत मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा राज्य राजमार्ग निधि से परियोजना क्रियान्वयन के दौरान जीएसटी सहित वहन किया जायेगा। कुल परियोजना निर्माण लागत की शेष 60 प्रतिशत राशि संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छः माही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट के माध्यम से किया जायेगा। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व कार्यकलाप (भू-अर्जन एवं अन्य कार्य) तथा सुपरविजन चार्जेस की राशि रूपये 364 करोड़ 41 लाख रूपये का भुगतान भी राज्य बजट के माध्यम से किया जायेगा।

    भोपाल विदिशा (राज्य मार्ग-28) मार्ग, अयोध्या बायपास के भानपुर टी-जंक्शन से प्रारंभ होकर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक-146 पर साँची-सलामतपुर जंक्शन पर समाप्त होता है। यह मार्ग भानपुर, चोपड़ाकला, सूखी सेवनिया, डोब, बालमपुर, दीवानगंज और सलामतपुर से गुजरते हुए भोपाल और विदिशा जिलों को जोड़ता है। रायसेन जिले में सांची स्तूप सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थस्थलों में से एक है, जो कि यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल भी है। कर्क रेखा भी भोपाल-विदिशा मार्ग के कि.मी. 24.550 से गुजरती है। भौगोलिक दृष्टि से भी यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग पर वर्ष 2031 तक उपभोक्ता शुल्क संग्रहण की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम अंतर्गत भोपाल बायपास 4-लेन को 6-लेन बनाने के दृष्टिगत मार्ग लम्बाई 51.963 कि.मी. पर 19 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2031 तक उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण की अनुमति प्रदाय की है। साथ ही इसकी अवधि अतिरिक्त 5 वर्ष तक बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग को अधिकृत किया है। भोपाल बायपास पर उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण, पूर्व में जारी अधिसूचना के प्रावधानों के अनुसार यथावत् रखा गया है। उपयोगकर्ता शुल्क संग्रहण का कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड अथवा निगम द्वारा चयनित संग्रहण एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा।

    भोपाल बायपास 4-लेन मार्ग की कुल लंबाई 51.963 कि.मी. है, जो कि भोपाल शहर से इन्दौर, रायसेन, विदिशा एवं नर्मदापुरम् जिलों को जोड़ता है। इससे भोपाल शहरी क्षेत्र का यातायात दबाव कम होने के साथ-साथ यात्रियों को निर्बाद्ध रूप से सुगमतापूर्वक मार्ग उपलब्ध होता है। इसका नियमित संचालन, अनुरक्षण एवं रख-रखाव निगम द्वारा किया जाता है। संग्रहित टोल राशि मध्यप्रदेश राजमार्ग निधि अधिनियम 2012 अंतर्गत स्थापित राज्य राजमार्ग निधि में जमा कराई जाती है, जिसका व्यय निगम द्वारा राज्य मार्गों के विकास एवं संधारण सहित अन्य कार्यों में किया जाता है।

    संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को लाभांश प्रदाय करने के लिए 918 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    अब श्रमिकों के साथ रहवासियों को भी मिलेगा लाभांश

    मंत्रि-परिषद ने वन विभाग अंतर्गत संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को लाभांश प्रदाय से संबंधित योजना को वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 918 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। इस योजना का उद्देश्य संयुक्त वन प्रबंधन अंतर्गत वनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन के लिए श्रमिकों के साथ रहवासियों की जन-भागीदारी प्राप्त करना है। प्रदेश में संयुक्त वन प्रबंधन समितियां वनों के संरक्षण एवं संवर्द्धन में वन विभाग को समुचित सहयोग प्रदान कर रही है। प्रावधानों के अनुरूप काष्ठ के अंतिम पातन से प्राप्त काष्ठ की बिक्री से प्राप्त राजस्व की 20 प्रतिशत राशि संयुक्त वन प्रबंधन समिति को दी जाती है। साथ ही बांस के विदोहन से प्राप्त शुद्ध लाभ का शत-प्रतिशत, कटाई में संलग्न श्रमिकों को प्रदाय किया जाता है।इस योजना के तहत अब श्रमिकों के साथ ही समिति से जुड़े क्षेत्रों के रहवासियों को भी लाभांश दिया जाएगा।

    रानी दुर्गावती राज्य स्तरीय पुरस्कार राशि 2 लाख रुपये और रानी अवन्ती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार राशि को एक से बढ़ाकर 2 लाख रूपये करने की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने हर परिस्थिति में संघर्ष करते हुये समाज सेवा करने वाली एक महिला को प्रतिवर्ष राज्य स्तरीय रानी दुर्गावती पुरस्कार राशि 2 लाख रूपये प्रदाय करने और वर्ष 2006 से प्रदाय किए जा रहे रानी अवन्ती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार की राशि को भी एक लाख रूपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किये जाने की स्वीकृति दी है।

    पुरस्कार प्रदान करने से अत्यन्त गरीब, विकलांग 40 प्रतिशत से अधिक एकल महिला, किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त, एसिड, दहेज, घरेलू हिंसा से पीड़ित अथवा अन्य कोई विपरीत स्थिति में संघर्ष करते हुए समाज सेवा के कार्य कर रही महिलाओं की सेवाओं, कार्यों और योगदान को प्रोत्साहन व पहचान मिलेगी। अन्य महिलाएं भी प्रेरणा लेकर महिलाओं और बच्चों के क्षेत्र में समाजसेवा कार्य करने आगे आएंगी।

    वर्तमान में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुल 6 पुरस्कार यथा रानी अवंती बाई राज्य स्तरीय वीरता पुरस्कार, राजमाता विजयाराजे सिंधिया समाज सेवा पुरस्कार, श्री विष्णु कुमार महिला बाल कल्याण समाज सेवा सम्मान पुरस्कार, मुख्यमंत्री नारी सम्मान रक्षा पुरस्कार, अरुणा शानबाग वीरता पुरस्कार और राष्ट्रमाता प‌द्मावती पुरस्कार प्रदाय किये जा रहे हैं।

    किसान वर्ष में सौगात-नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापना के लिए 20 हैक्टेयर भूमि आवंटन को मंजूरी

    मंत्रि-परिषद ने किसान वर्ष में सोयाबीन किसानों को भी सौगात दी है। इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च भारत सरकार के अंतर्गत गठित उपक्रम नेशनल सोयाबीन रिसर्च इंस्टीट्यूट के लिए ग्राम भाऊखेड़ी तहसील इछावर जिला सीहोर में 20 हैक्टेयर भूमि स्थायी पट्टे पर आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।

    भारतीय कृषि अनुसंधान के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है, जिसे केन्द्र सरकार द्वारा पूर्ण रूप से वित्त पोषित किया जाता है। यह संस्थान सोयाबीन अनुसंधान एवं विकास के माध्यम से देश के लगभग 50 लाख सोयाबीन किसानों के हितों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करता है। प्रस्तावित भूमि का उपयोग विशुद्ध रूप से कृषि विज्ञान केन्द्र स्थापित करने के लिये किया जाएगा। इस केंद्र की स्थापना से मध्यप्रदेश में सोयाबीन की खेती में चहुँमुखी प्रगति की उम्मीद है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और आयुष्मान भारत सहित स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए 44 हजार 515.13 करोड़ रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य और आयुष्मान भारत (नॉन एस. ई. सी. सी. हितग्राही), बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम, स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था, जिला स्तरीय अमला से संबंधित योजनाओं के 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर संचालन के लिए कुल 44 हजार 515.13 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है।

    राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 28,083.47 करोड़ रूपये स्वीकृत किए गए है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन भारत सरकार से 60:40 के अनुपात में संचालित है। यह योजना केन्द्र प्रवर्तित है एवं प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम जैसे मातृ स्वास्थ्य, शिशु स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, टीकाकरण, टी.बी. उन्मूलन, शिशु स्वास्थ्य पोषण, सिकल सेल, किशोर स्वास्थ्य, आयुष्मान आरोग्य मंदिर, गैर-संचारी कार्यक्रम, अंधत्व निवारण, कुष्ठ उन्मूलन, प्रधानमंत्री डायलिसिस सेवा, निःशुल्क दवा एवं जांच इत्यादि स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है।

    स्वीकृति अनुसार आयुष्मान भारत- प्रधानमंत्री जन आरोग्य और आयुष्मान भारत (नॉन एस. ई. सी. सी. हितग्राही) के संचालन के लिए 12 हजार 123 करोड़ 81 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना अंतर्गत गरीब एवं कमजोर वर्ग को गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जाती है। स्वास्थ्य व्यय के कारण होने वाली आर्थिक हानि को रोकते हुए सरकारी एवं सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण उपचार कैशलेस रूप में उपलब्ध कराना आवश्यक है। सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के लक्ष्य की पूर्ति, उपचार तक सहज पहुँच तथा सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना ही इस योजना का प्रमुख आधार है। स्वास्थ्य संस्थाओं की सुरक्षा एवं सफाई व्यवस्था के लिए 1,159 करोड़ 58 लाख रूपये स्वीकृत किए गये है। जिला स्तरीय अमला योजना के लिए 654 करोड़ 84 लाख रूपये स्वीकृत किए गए हैं। जिला स्तरीय अमला योजना लगभग 40-50 वर्ष से संचालित है।

    कृषि विश्वविद्यालय के निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय को वेतन भत्तों मानदेय आदि के लिए ब्लाक ग्राण्ट योजना के आगामी 05 वर्षो वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 795 करोड़ 59 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। वर्तमान में विश्वविद्यालय के अधीन 11 महाविद्यालय और 8 अनुसंधान केन्द्र संचालित हैं, जिनके माध्यम से कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं कृषि विस्तार संबंधी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में कार्यरत अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों के अतिरिक्त लगभग 500 ओल्ड पेंशनरों के वेतन, भत्तों, मानदेय एवं पेंशन संबंधी वित्तीय दायित्वों के साथ-साथ संस्थानों के आवश्यक प्रशासनिक एवं आकस्मिक व्ययों की पूर्ति राज्य शासन द्वारा ब्लॉक ग्रांट के माध्यम से की जाती है।

    खनिज साधन विभाग की परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 2 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति

    मंत्रि-परिषद ने खनिज साधन विभाग अंतर्गत विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना के वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 2 करोड़ 50 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। खनिज साधन विभाग में कुल 54 खनिज भवन है। खनिज भवनों को निर्मित हुए 10 वर्ष से अधिक की अवधि हो चुकी है इसलिए योजना अंतर्गत भवनों में मरम्मत तथा संधारण का कार्य निरंतर रूप से कराया जा रहा है।

    देवास की पटाखा फैक्ट्री में अग्नि दुर्घटना जाँच के लिए गठित एकल सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग का अनुमोदन

    मंत्रि-परिषद द्वारा देवास जिले में 14 मई 2026 को टोकंकला में स्थित पटाखा फैक्ट्री में घटित दुखद अग्नि दुर्घटना की न्यायिक जाँच के लिए श्री सुभाष काकड़े सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति, उच्च न्यायालय जबलपुर की अध्यक्षता में एकल सदस्यीय न्यायिक जाँच आयोग गठित किये जाने और जॉच आयोग के कार्यकाल में तीन माह 14 अगस्त 2026 तक की वृद्धि किये जाने के संबंध में जारी अधिसूचना का अनुसमर्थन किया गया।

    मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन को विधान सभा के पटल पर रखने का अनुमोदन

    मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग के 63वें, 64वें और 68वें वार्षिक प्रतिवेदन एवं जिन प्रकरणों में आयोग की सलाह स्वीकार नहीं की गई है, उनके संबंध में ज्ञापन के साथ विधान सभा के पटल पर रखे जाने का अनुमोदन दिया है।

  • चेहरे की खूबसूरती के लिए नीम का ऐसे करें इस्तेमाल: दाग-धब्बे और पिंपल्स से राहत पाने में मिल सकती है मदद

    चेहरे की खूबसूरती के लिए नीम का ऐसे करें इस्तेमाल: दाग-धब्बे और पिंपल्स से राहत पाने में मिल सकती है मदद


    नई दिल्ली । नीम को भारतीय घरों में लंबे समय से त्वचा और बालों की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। नीम की पत्तियों में प्राकृतिक रूप से कई ऐसे गुण पाए जाते हैं जिन्हें त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। खासतौर पर ऑयली स्किन और मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के बीच नीम का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय है। हालांकि त्वचा पर किसी भी प्राकृतिक चीज का इस्तेमाल करने से पहले यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है और किसी भी घरेलू उपाय का असर सभी पर एक जैसा नहीं होता।

    अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली है और चेहरे पर बार बार पिंपल्स निकलते हैं तो नीम का इस्तेमाल त्वचा की सफाई के लिए किया जा सकता है। नीम की कुछ साफ पत्तियों को पानी में उबालकर उस पानी को ठंडा करने के बाद चेहरे को धोने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे त्वचा की सफाई में मदद मिल सकती है। नीम में पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक यौगिकों में एंटीमाइक्रोबियल गुण बताए जाते हैं जो त्वचा पर मौजूद कुछ सूक्ष्मजीवों के खिलाफ काम कर सकते हैं। यही वजह है कि पारंपरिक रूप से नीम को मुंहासे और त्वचा संबंधी परेशानियों के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है।

    नीम की पत्तियों का पेस्ट भी त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए ताजी और साफ नीम की पत्तियों को पीसकर हल्का पेस्ट बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ की त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। अगर जलन लालिमा खुजली या किसी तरह की एलर्जी दिखाई दे तो इसे चेहरे पर नहीं लगाना चाहिए। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि प्राकृतिक चीजें भी कुछ लोगों की त्वचा पर प्रतिक्रिया पैदा कर सकती हैं।

    मुंहासों के अलावा नीम को अत्यधिक तैलीय त्वचा के लिए भी उपयोगी माना जाता है। कई बार त्वचा में अतिरिक्त तेल जमा होने के कारण चेहरे पर चिपचिपाहट और बंद रोमछिद्रों की समस्या बढ़ सकती है। ऐसे में त्वचा की नियमित सफाई के साथ हल्के और त्वचा के अनुकूल उत्पादों का इस्तेमाल ज्यादा जरूरी है। नीम को इसका विकल्प नहीं माना जाना चाहिए बल्कि जरूरत के अनुसार अतिरिक्त देखभाल के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

    अगर चेहरे पर दाग धब्बे या पुराने मुंहासों के निशान हैं तो केवल नीम लगाने से इनके पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। ऐसे मामलों में सनस्क्रीन का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और त्वचा को बार बार छूने से बचना भी जरूरी है। पिंपल्स को दबाने या फोड़ने से बचना चाहिए क्योंकि इससे सूजन और दाग बढ़ सकते हैं।

    नीम का इस्तेमाल करते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि नीम का गाढ़ा पेस्ट या तेल हर किसी की त्वचा के लिए उपयुक्त नहीं होता। चेहरे पर नीम का तेल सीधे लगाने से कुछ लोगों को जलन या एलर्जी हो सकती है। अगर मुंहासे बहुत ज्यादा हैं दर्दनाक हैं बार बार हो रहे हैं या त्वचा पर लगातार लालिमा और खुजली बनी हुई है तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर नीम त्वचा की देखभाल में एक पारंपरिक और उपयोगी प्राकृतिक विकल्प हो सकता है। खासकर त्वचा की सफाई और ऑयली स्किन से जुड़ी समस्याओं में इसका इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन बेहतर परिणाम के लिए इसे सावधानी से इस्तेमाल करना जरूरी है। साफ सफाई मॉइस्चराइजर और सनस्क्रीन के साथ संतुलित स्किन केयर रूटीन अपनाना त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ रखने में ज्यादा मददगार हो सकता है।

  • चीन के स्पेस मिशन को बड़ा झटका, लॉन्च के कुछ ही देर बाद रॉकेट में विस्फोट; संचार उपग्रह नष्ट

    चीन के स्पेस मिशन को बड़ा झटका, लॉन्च के कुछ ही देर बाद रॉकेट में विस्फोट; संचार उपग्रह नष्ट


    नई दिल्ली। चीन के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम को सोमवार रात बड़ा झटका लगा जब लॉन्ग मार्च 7A रॉकेट लॉन्च के कुछ ही समय बाद हवा में विस्फोट का शिकार हो गया। रॉकेट अपने साथ झोंगशिंग 4B यानी चाइनासैट 4B संचार उपग्रह लेकर उड़ान भर रहा था लेकिन मिशन के शुरुआती चरण में ही रॉकेट में गंभीर तकनीकी असामान्यता सामने आई और करीब 85 सेकंड बाद वह आसमान में टूटकर आग के विशाल गोले में बदल गया। इस दुर्घटना के साथ ही रॉकेट में मौजूद संचार उपग्रह भी नष्ट हो गया और चीन का यह अंतरिक्ष मिशन पूरी तरह विफल हो गया।

    यह प्रक्षेपण चीन के हैनान द्वीप स्थित वेनचांग स्पेस लॉन्च सेंटर से किया गया था। लॉन्च के बाद शुरुआती कुछ सेकंड तक रॉकेट सामान्य तरीके से आगे बढ़ता दिखाई दिया लेकिन करीब डेढ़ मिनट से भी कम समय बाद उसमें गड़बड़ी सामने आ गई। घटना से जुड़े वीडियो में रॉकेट को उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद बिखरते और तेज आग की लपटों के बीच नष्ट होते देखा जा सकता है। हादसे के बाद मिशन से जुड़े अधिकारियों के बीच भी हलचल बढ़ गई। चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने घटना के करीब तीन घंटे बाद मिशन की विफलता की पुष्टि करते हुए बताया कि उड़ान के दौरान रॉकेट में तकनीकी असामान्यता उत्पन्न हुई थी।

    इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चाइनासैट 4B संचार उपग्रह था। इसे पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया जाना था और इसके जरिए रेडियो टेलीविजन तथा अन्य संचार सेवाओं को मजबूत करने की योजना थी। लेकिन रॉकेट के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण उपग्रह भी मिशन के साथ नष्ट हो गया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रॉकेट में तकनीकी समस्या किस स्तर पर उत्पन्न हुई और आखिर ऐसी कौन सी गड़बड़ी थी जिसके कारण उड़ान के शुरुआती चरण में ही पूरा मिशन असफल हो गया।

    चीन ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी में तकनीकी असामान्यता को दुर्घटना की वजह बताया गया है लेकिन विस्तृत जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि समस्या रॉकेट के इंजन ईंधन प्रणाली नियंत्रण प्रणाली या किसी अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में थी। चीन के सरकारी मीडिया में हादसे को लेकर सीमित जानकारी सामने आई है। वहीं चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सामने आए कुछ वीडियो की उपलब्धता भी सीमित दिखाई दी। ऐसे में हादसे की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर फिलहाल आधिकारिक जांच के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।

    लॉन्ग मार्च 7A को चीन के महत्वपूर्ण प्रक्षेपण वाहनों में गिना जाता है और इसे उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम का वर्कहॉर्स भी कहा जाता है। इसका विकास चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी ने किया है जो चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी कॉरपोरेशन की सहायक इकाई है। यह लॉन्ग मार्च 7A का 18वां मिशन था। इससे पहले वर्ष 2020 में अपनी पहली उड़ान के दौरान इसे असफलता का सामना करना पड़ा था लेकिन उसके बाद रॉकेट ने कई सफल मिशन पूरे किए थे। ऐसे में ताजा दुर्घटना चीन के लिए तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    चीन इस समय अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने में जुटा है। अमेरिका के साथ पुनः प्रयोज्य रॉकेट तकनीक उपग्रह प्रक्षेपण चंद्र मिशन और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने वर्ष 2050 तक देश को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी शक्ति बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे समय में एक महत्वपूर्ण रॉकेट और संचार उपग्रह का एक साथ नष्ट होना उसके अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए बड़ा झटका है। अब जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी क्योंकि उनसे भविष्य के लॉन्ग मार्च मिशनों की सुरक्षा और विश्वसनीयता को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिल सकते हैं।

  • AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक

    AI से आसान होगा बैंकिंग का काम, बिना क्रेडिट हिस्ट्री वालों को भी मिलेगा कर्ज; RBI गवर्नर ने बताया नया प्लेबुक


    नई दिल्ली। भारतीय बैंकिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की वजह से बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मंगलवार को कहा कि AI क्रेडिट डिलीवरी को बदलने ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने और वित्तीय समावेशन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बैंकों से इस तकनीक को जिम्मेदारी और सोच समझकर अपनाने की अपील की। RBI गवर्नर के मुताबिक बैंकों को AI को केवल एक नई तकनीक या सीमित अवधि वाले प्रोजेक्ट के रूप में नहीं देखना चाहिए बल्कि इसे बैंकिंग के कामकाज और निर्णय लेने के नए तरीके के तौर पर अपनाना चाहिए।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित FIBAC 2026 कॉन्फ्रेंस में उद्घाटन भाषण देते हुए मल्होत्रा ने AI को भारतीय बैंकिंग के लिए निर्णायक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि जिस तरह 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था और बैंकिंग व्यवस्था की दिशा बदली थी और 2010 के दशक में डिजिटलाइजेशन ने वित्तीय सेवाओं का चेहरा बदल दिया था उसी तरह AI मौजूदा दशक में भारतीय बैंकिंग को नई दिशा दे सकता है। उनके मुताबिक AI का प्रभाव बैंकिंग के लगभग हर महत्वपूर्ण हिस्से पर पड़ने वाला है।

    RBI गवर्नर ने कहा कि AI को ऐसी तकनीक नहीं माना जाना चाहिए जिसे खरीदकर किसी एक परियोजना की तरह लागू कर दिया जाए और फिर काम खत्म समझ लिया जाए। इसके बजाय बैंकों को AI के इस्तेमाल की स्पष्ट रणनीति तैयार करनी होगी। जोखिम का आकलन करने से लेकर ग्राहकों को सेवाएं देने तक पूंजी की कीमत तय करने से लेकर संस्थानों के संचालन तक AI बैंकिंग के पारंपरिक तरीकों में बदलाव ला सकता है। यही वजह है कि बैंकों को इस तकनीक को अपनाने से पहले उसकी क्षमता और जोखिम दोनों को समझना होगा।

    AI का सबसे बड़ा असर क्रेडिट डिलीवरी के क्षेत्र में देखने को मिल सकता है। मौजूदा व्यवस्था में जिन ग्राहकों की औपचारिक क्रेडिट हिस्ट्री नहीं होती उनके लिए बैंक से कर्ज हासिल करना कई बार मुश्किल हो जाता है। AI विभिन्न प्रकार के उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण करके ऐसे संभावित उधारकर्ताओं की वित्तीय स्थिति और कर्ज चुकाने की क्षमता का बेहतर आकलन करने में बैंकों की मदद कर सकता है। इससे उन लोगों तक भी औपचारिक बैंकिंग और ऋण सुविधाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है जो अब तक वित्तीय व्यवस्था से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।

    ग्राहक अनुभव के स्तर पर भी AI बैंकिंग सेवाओं को तेज और अधिक व्यक्तिगत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ग्राहकों की जरूरतों को समझकर सेवाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने और बैंकिंग प्रक्रियाओं को आसान बनाने में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है। इससे बैंकिंग संस्थानों के लिए कामकाज की दक्षता बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सेवा उपलब्ध कराने के नए रास्ते खुलेंगे।

    हालांकि RBI गवर्नर ने यह भी स्पष्ट किया कि AI को अपनाने की प्रक्रिया जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ानी होगी। बैंकों को यह तय करना होगा कि वे AI की दिशा खुद तय करते हैं या तकनीक को अपने हिसाब से बैंकिंग व्यवस्था को बदलने देते हैं। उन्होंने कहा कि कई बैंक पहले से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि अन्य संस्थान इसकी संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में AI को लेकर बैंकिंग सेक्टर में प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है।

    कुल मिलाकर RBI की ओर से दिया गया संदेश साफ है कि AI भारतीय बैंकिंग के भविष्य का अहम हिस्सा बनने जा रहा है। यदि इसे पारदर्शिता सुरक्षा और जिम्मेदारी के साथ लागू किया जाता है तो यह कर्ज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को आसान बनाने ग्राहक सेवाओं को बेहतर करने और देश में वित्तीय समावेशन को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • आयात पर निर्भरता घटाएगी सरकार की नई योजना, देश में बनेंगे कंटेनर और 53 हजार से ज्यादा नौकरियां

    आयात पर निर्भरता घटाएगी सरकार की नई योजना, देश में बनेंगे कंटेनर और 53 हजार से ज्यादा नौकरियां


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में बड़ी तैयारी कर रही है। प्रस्तावित कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग असिस्टेंस स्कीम यानी सीएमएएस के जरिए भारत में कंटेनर बनाने की क्षमता को मजबूत किया जाएगा। सरकार का अनुमान है कि इस योजना से देश में 53 हजार से अधिक रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। इनमें करीब 3000 प्रत्यक्ष रोजगार और 50000 से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। इस योजना का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इससे भारत के समुद्री परिवहन लॉजिस्टिक्स और निर्यात आयात से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    सरकार के मुताबिक 10000 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली सीएमएएस योजना कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में निवेश तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित होगी। इसके तहत अलग अलग आकार के कंटेनर जहाजों के बेड़े के विकास और घरेलू स्तर पर कंटेनरों की खरीद को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। सरकार का अनुमान है कि इससे करीब 99149 करोड़ रुपये के निवेश को बढ़ावा मिल सकता है। इससे देश में कंटेनर निर्माण के साथ साथ इससे जुड़े सहायक उद्योगों को भी फायदा होगा। कॉर्नर कास्टिंग लकड़ी के फ्रेम और कॉर्टेन स्टील जैसे उत्पाद बनाने वाले उद्योगों में भी मांग बढ़ सकती है।

    भारत के लिए इस योजना की जरूरत इसलिए भी अहम है क्योंकि देश हर साल बड़ी संख्या में खाली कंटेनरों का आयात करता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत अपनी जरूरतों और कंटेनरों की पुनःस्थिति के लिए हर साल करीब 20 लाख खाली कंटेनर आयात करता है। घरेलू स्तर पर उत्पादन बढ़ने से इस आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत के साथ साथ देश में विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा और लॉजिस्टिक्स की लागत तथा उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

    वैश्विक व्यापार में समुद्री परिवहन की भूमिका को देखते हुए कंटेनर किसी भी देश की सप्लाई चेन का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन के अनुसार दुनिया के कुल माल व्यापार का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है। ऐसे में कंटेनरों की पर्याप्त उपलब्धता वैश्विक व्यापार की गति बनाए रखने के लिए जरूरी है। हाल के वर्षों में भू राजनीतिक तनावों के कारण समुद्री मार्गों पर दबाव और माल ढुलाई की लागत में उतार चढ़ाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में भारत का घरेलू कंटेनर निर्माण पर जोर रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सरकार का कहना है कि सीएमएएस भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार करने में मदद करेगी। यह योजना मेक इन इंडिया और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 जैसी पहलों के अनुरूप है। इसके जरिए देश की सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। सरकार पहले ही जहाज निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 70000 करोड़ रुपये के शिपबिल्डिंग फाइनेंशियल असिस्टेंस पैकेज की घोषणा कर चुकी है। अब कंटेनर निर्माण को प्रोत्साहन मिलने से भारत के समुद्री विनिर्माण क्षेत्र को और व्यापक आधार मिलने की उम्मीद है। लंबे समय में यह कदम रोजगार बढ़ाने के साथ भारत को समुद्री निर्माण और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

  • कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला

    कच्चे तेल के उछाल और महंगाई की चिंता से बाजार में बिकवाली, सेंसेक्स 78,154 पर बंद; निफ्टी भी फिसला


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल और बढ़ती महंगाई की चिंता के बीच दबाव में नजर आया। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 388.19 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 78,154.25 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 112.10 अंक यानी 0.46 प्रतिशत फिसलकर 24,471.70 के स्तर पर पहुंच गया। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा लेकिन कारोबारी सत्र के आखिरी हिस्से में बिकवाली का दबाव बढ़ गया। निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों के साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों और आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रही। कच्चे तेल में तेजी को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ने के साथ महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है और यही चिंता बाजार के सेंटीमेंट पर हावी रही।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो एफएमसीजी और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स 1.17 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 0.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ दिन के प्रमुख कमजोर सेक्टर रहे। इसके अलावा निफ्टी मेटल में 0.95 प्रतिशत निफ्टी इन्फ्रा में 0.86 प्रतिशत निफ्टी कमोडिटीज में 0.84 प्रतिशत निफ्टी कंजप्शन में 0.63 प्रतिशत निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.56 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो में 0.55 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स भी 0.44 प्रतिशत कमजोर रहा। इन सेक्टरों में बिकवाली ने बाजार की कुल कमजोरी को और बढ़ाया।

    हालांकि बाजार में कुछ ऐसे सेक्टर भी रहे जिन्होंने गिरावट को सीमित करने का काम किया। निफ्टी फार्मा 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रमुख इंडेक्स में रहा। निफ्टी आईटी में 0.61 प्रतिशत निफ्टी हेल्थकेयर में 0.32 प्रतिशत और निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इससे संकेत मिला कि निवेशकों ने बाजार में जोखिम बढ़ने के बावजूद चुनिंदा रक्षात्मक और मजबूत कंपनियों में खरीदारी बनाए रखी।

    लार्जकैप शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप में भी कारोबार मिला-जुला रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 11.85 अंक यानी 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 63,843.85 पर बंद हुआ जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 43.20 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,857.15 पर पहुंच गया। सेंसेक्स में इटरनल इन्फोसिस टाइटन एचसीएल टेक और टीसीएस बढ़त के साथ बंद होने वाले प्रमुख शेयरों में रहे। इसके विपरीत अल्ट्राटेक सीमेंट एक्सिस बैंक इंडिगो भारती एयरटेल बजाज फाइनेंस पावर ग्रिड आईटीसी एमएंडएम टाटा स्टील एचयूएल एशियन पेंट्स बजाज फिनसर्व एलएंडटी सन फार्मा मारुति सुजुकी एसबीआई ट्रेंट एचडीएफसी बैंक टेक महिंद्रा एनटीपीसी आईसीआईसीआई बैंक कोटक महिंद्रा बैंक और बीईएल समेत कई दिग्गज शेयरों में गिरावट रही।

    बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को एक बार फिर महंगाई और ब्याज दरों के संभावित जोखिमों को लेकर सतर्क कर दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान और अमेरिका ईरान बातचीत को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। निवेशकों की नजर अब भारत और अमेरिका में आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर है क्योंकि इनके आधार पर आगे की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार नई दिशा तय कर सकता है। हालांकि विदेशी निवेश की मजबूत आवक और कंपनियों की बेहतर कमाई बाजार के लिए राहत देने वाले संकेत बने हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में वैश्विक घटनाक्रम कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई के आंकड़े भारतीय शेयर बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

  • Fitch का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम, BBB- रेटिंग बरकरार; FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान

    Fitch का भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम, BBB- रेटिंग बरकरार; FY27 में 6.4% GDP ग्रोथ का अनुमान


    नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों और ऊर्जा संकट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने भारत की दीर्घकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को BBB- पर स्थिर आउटलुक के साथ बरकरार रखा है। इसके साथ ही भारत की अल्पकालिक जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग F3 पर भी कायम रखी गई है। फिच का यह आकलन ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और भू राजनीतिक तनाव का असर कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर रेटिंग एजेंसी का भरोसा बना हुआ है।

    फिच के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत विकास क्षमता मौजूद है और पिछले कुछ वर्षों में देश ने अलग अलग आर्थिक झटकों का जिस तरह सामना किया है उससे इसकी लचीलापन क्षमता साबित हुई है। एजेंसी का मानना है कि व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने का भारत का रिकॉर्ड और नीतिगत विश्वसनीयता में सुधार आगे भी आर्थिक वृद्धि का आधार बनेगा। हालांकि ऊर्जा संकट के कारण निकट अवधि में कुछ चुनौतियां जरूर बनी हुई हैं लेकिन इनसे भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक विकास क्षमता पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

    फिच ने मार्च 2027 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष यानी FY27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। यह पिछले तीन वर्षों में दर्ज 7.4 प्रतिशत की औसत विकास दर से कम है लेकिन इसके बावजूद BBB रेटिंग वाले देशों की औसत विकास दर 2 प्रतिशत के मुकाबले भारत की अनुमानित वृद्धि तीन गुना से भी अधिक है। यही अंतर भारत की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान देता है। एजेंसी का कहना है कि हाल के वर्षों में भारत ने कई तरह के आर्थिक और बाहरी झटकों के बावजूद अपनी मजबूती बनाए रखी है और आगे भी यही रुझान जारी रहने की उम्मीद है।

    हालांकि भारत के सामने कुछ जोखिम भी मौजूद हैं। फिच ने अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष से जुड़ी अनिश्चितता को प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है। भारत दुनिया का एक बड़ा शुद्ध ऊर्जा आयातक है ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों की कीमतों में तेजी का असर देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है। इसके बावजूद फिच को उम्मीद है कि ऊर्जा संकट से जुड़े जोखिम लंबे समय तक भारत की विकास संभावनाओं को प्रभावित नहीं करेंगे।

    महंगाई के मोर्चे पर भी फिच ने भारत को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक अनुमान दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में औसत महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रह सकती है जबकि FY26 में यह 2.1 प्रतिशत थी। ऊर्जा संकट के कारण महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका जरूर है लेकिन फिच के मुताबिक यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रहने की उम्मीद है। मुख्य महंगाई दर भी करीब 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी हुई है जिससे कीमतों के दबाव को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता नहीं दिखाई दे रही है।
    महंगाई के मोर्चे पर भी फिच ने भारत को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक अनुमान दिया है। एजेंसी का अनुमान है कि FY27 में औसत महंगाई दर 4.1 प्रतिशत रह सकती है जबकि FY26 में यह 2.1 प्रतिशत थी। ऊर्जा संकट के कारण महंगाई में बढ़ोतरी की आशंका जरूर है लेकिन फिच के मुताबिक यह भारतीय रिजर्व बैंक की 2 से 6 प्रतिशत की निर्धारित सीमा के भीतर रहने की उम्मीद है। मुख्य महंगाई दर भी करीब 4 प्रतिशत के आसपास स्थिर बनी हुई है जिससे कीमतों के दबाव को लेकर फिलहाल बड़ी चिंता नहीं दिखाई दे रही है।

    फिच ने यह भी माना कि राजकोषीय नीति ने ऊर्जा संकट से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को सीमित करने में मदद की है। इससे भारतीय रिजर्व बैंक पर तत्काल दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि एजेंसी का अनुमान है कि ऊर्जा संकट के दूसरे दौर के प्रभाव और अल नीनो से जुड़े जोखिमों को देखते हुए आरबीआई साल के अंत में अपनी नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसी स्थिति में रेपो रेट 5.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है।

    कुल मिलाकर फिच की ताजा रेटिंग भारत की आर्थिक मजबूती पर वैश्विक भरोसे को दर्शाती है। विकास दर में कुछ कमी का अनुमान होने के बावजूद भारत की वृद्धि क्षमता अभी भी दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और समान रेटिंग वाले देशों से काफी बेहतर बनी हुई है। ऊर्जा कीमतों और वैश्विक तनाव जैसी चुनौतियों के बीच आर्थिक स्थिरता बनाए रखना आने वाले समय में भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।