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  • IPL 2027 में नए अंदाज में उतरेगी CSK, बल्लेबाजी कोच माइकल हसी से टूटा रिश्ता, इंग्लैंड की टीम से जुड़ने की भी चर्चा

    IPL 2027 में नए अंदाज में उतरेगी CSK, बल्लेबाजी कोच माइकल हसी से टूटा रिश्ता, इंग्लैंड की टीम से जुड़ने की भी चर्चा


    नई दिल्ली। आईपीएल 2027 से पहले पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स में बदलावों का सिलसिला लगातार जारी है। फ्रेंचाइजी ने अपने कोचिंग स्टाफ में एक और बड़ा फेरबदल करते हुए अनुभवी बल्लेबाजी कोच माइकल हसी से अलग होने का फैसला किया है। हसी लंबे समय से चेन्नई की टीम से जुड़े हुए थे और उन्हें कोचिंग स्टाफ का अहम हिस्सा माना जाता था। उनके जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगामी सीजन में टीम का नया बल्लेबाजी कोच कौन होगा और चेन्नई सुपर किंग्स किस रणनीति के साथ मैदान पर उतरेगी।
    ऑस्ट्रेलिया के पूर्व बाएं हाथ के बल्लेबाज माइकल हसी का चेन्नई सुपर किंग्स के साथ पुराना नाता रहा है। उन्होंने पहले खिलाड़ी के रूप में टीम का प्रतिनिधित्व किया और कई यादगार पारियां खेलकर अपनी उपयोगिता साबित की। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्हें टीम का बल्लेबाजी कोच बनाया गया। तब से वह लगातार इस जिम्मेदारी को निभा रहे थे। उनके अनुभव और टीम के साथ लंबे जुड़ाव के कारण उन्हें चेन्नई के कोचिंग ढांचे का मजबूत स्तंभ माना जाता था। अब फ्रेंचाइजी ने कोचिंग स्टाफ में बदलाव की योजना के तहत उनसे रास्ते अलग कर लिए हैं।
    चेन्नई सुपर किंग्स में यह बदलाव किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है। इससे पहले टीम ने लंबे समय तक मुख्य कोच रहे स्टीफन फ्लेमिंग से भी नाता तोड़ लिया था। उनकी जगह पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज जहीर खान को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा गेंदबाजी कोच एरिक सिमंस को हटाकर उनकी जगह मोहित शर्मा को शामिल किया गया है। इस तरह टीम के कोचिंग स्टाफ में लगातार नए चेहरे लाए जा रहे हैं। फील्डिंग कोच जेम्स फास्टर के भविष्य को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं बताई गई है।
    माइकल हसी की विदाई के बाद उनके अगले कदम को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें इंग्लैंड की टेस्ट टीम के बल्लेबाजी कोच की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि इस संबंध में किसी अंतिम नियुक्ति की पुष्टि नहीं हुई है। हसी का इंग्लैंड क्रिकेट से पहले भी जुड़ाव रहा है। उन्होंने वर्ष 2022 में टी20 विश्व कप के दौरान इंग्लैंड की टीम के साथ सलाहकार के रूप में काम किया था। उस अभियान में इंग्लैंड ने खिताब जीता था। इसके अलावा हसी द हंड्रेड टूर्नामेंट में वेल्श फायर के मुख्य कोच भी हैं।
    चेन्नई सुपर किंग्स के लिए आगामी सीजन नई शुरुआत की तरह देखा जा रहा है। टीम अपने कोचिंग स्टाफ में बदलाव के जरिए नई रणनीति और नए दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। जहीर खान और मोहित शर्मा जैसे पूर्व भारतीय खिलाड़ियों को अहम जिम्मेदारी सौंपने के बाद अब बल्लेबाजी कोच का पद चर्चा में है। हसी के जाने से टीम को उनके अनुभव की कमी महसूस हो सकती है लेकिन फ्रेंचाइजी नए विकल्पों के साथ आगे बढ़ना चाहती है।
    आईपीएल 2027 से पहले चेन्नई के सामने कोचिंग स्टाफ को अंतिम रूप देने और खिलाड़ियों की तैयारी को मजबूत करने की चुनौती होगी। नए बल्लेबाजी कोच की नियुक्ति टीम की रणनीति के लिहाज से अहम साबित हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि हसी की जगह किसे जिम्मेदारी दी जाएगी। ऐसे में चेन्नई के प्रशंसकों की नजर फ्रेंचाइजी के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
  • टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं

    टीम इंडिया में चयन नहीं होने पर मोहम्मद शमी ने तोड़ी चुप्पी, चयनकर्ताओं पर साधा निशाना, बोले मौका नहीं मिला तो यह मेरा नुकसान नहीं


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम में अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वापसी के बाद मोहम्मद शमी के चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक तरफ भुवनेश्वर कुमार को लंबे इंतजार के बाद टी20 टीम में जगह मिली है तो दूसरी तरफ मोहम्मद शमी अब भी भारतीय टीम में वापसी का इंतजार कर रहे हैं। घरेलू क्रिकेट में बंगाल की ओर से खेलने जा रहे शमी ने टीम में चयन नहीं होने को लेकर अपनी बात रखी है। उनका कहना है कि पिछले दो से तीन साल से उनके साथ यही स्थिति बनी हुई है और लगातार प्रदर्शन करने के बावजूद उन्हें टीम इंडिया में मौका नहीं मिल रहा है।
    रेवस्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान जब शमी से भुवनेश्वर कुमार की वापसी और खुद के लंबे समय से टीम से बाहर रहने के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि भुवनेश्वर को भारत के लिए खेलने का मौका मिला है और यह उनके लिए अच्छी बात है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भुवनेश्वर के चयन से उनका कोई लेना देना नहीं है। शमी ने कहा कि उन्हें जहां भी खेलने का अवसर मिलेगा वह अपना शत प्रतिशत प्रदर्शन करेंगे। फिलहाल उनका पूरा ध्यान रणजी ट्रॉफी के मुकाबलों पर है।
    शमी ने अपने बयान में चयन को लेकर नाराजगी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पिछले दो से तीन वर्षों से उनके साथ ऐसा ही हो रहा है। वह लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और बंगाल के लिए खेलते हुए अपनी फिटनेस भी साबित कर चुके हैं। इसके बावजूद अगर उन्हें दोबारा भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिलता है तो यह उनका नुकसान नहीं होगा। उनके इस बयान के बाद अनुभवी तेज गेंदबाजों के चयन और टीम इंडिया में वापसी के अवसरों को लेकर बहस तेज हो गई है।
    36 वर्षीय मोहम्मद शमी ने भारत के लिए अपना आखिरी मुकाबला 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी में खेला था। इसके बाद से वह भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं। फिटनेस से जुड़ी समस्याओं और युवा खिलाड़ियों को प्राथमिकता दिए जाने को उनके टीम से बाहर रहने की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। हालांकि शमी घरेलू क्रिकेट में अपनी गेंदबाजी के दम पर वापसी की उम्मीद बनाए हुए हैं। रणजी ट्रॉफी में बंगाल की टीम का हिस्सा होने के कारण उनके पास एक बार फिर अपनी क्षमता दिखाने का अवसर है।
    दूसरी ओर भुवनेश्वर कुमार ने आईपीएल 2026 में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टी20 टीम में वापसी की है। उन्हें न्यूजीलैंड दौरे के लिए टीम में शामिल किया गया है। माना जा रहा है कि उन्हें 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप की योजनाओं के मद्देनजर भी परखा जा सकता है। भुवनेश्वर की वापसी ने अनुभवी गेंदबाजों की भूमिका को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
    वेस्टइंडीज के खिलाफ मौजूदा सीरीज में भारतीय गेंदबाजों के प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सपाट पिचों पर गेंदबाजों को मिल रही चुनौती के बीच क्रिकेट प्रशंसक और विशेषज्ञ अनुभवी खिलाड़ियों को मौका देने की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में शमी का बयान चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि टीम में चयन का अंतिम फैसला चयनकर्ताओं और टीम प्रबंधन की रणनीति पर निर्भर करता है। शमी के लिए फिलहाल रणजी ट्रॉफी में अच्छा प्रदर्शन करना और अपनी गेंदबाजी की लय बनाए रखना अहम होगा। उनका घरेलू क्रिकेट में प्रदर्शन आने वाले समय में टीम इंडिया में वापसी की संभावनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
  • जंजीर से कल्कि 2898 एडी तक अमिताभ बच्चन का जलवा बरकरार, जन्मदिन पर जानिए महानायक के वो रिकॉर्ड जो उन्हें बनाते हैं सबसे अलग

    जंजीर से कल्कि 2898 एडी तक अमिताभ बच्चन का जलवा बरकरार, जन्मदिन पर जानिए महानायक के वो रिकॉर्ड जो उन्हें बनाते हैं सबसे अलग


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर 2026 को अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं। पांच दशक से अधिक लंबे फिल्मी सफर में उन्होंने अपनी दमदार आवाज शानदार अभिनय और यादगार किरदारों के दम पर करोड़ों दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। अमिताभ बच्चन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने सिनेमा के साथ टेलीविजन पर भी अपनी अलग पहचान कायम की। उनके करियर में कई ऐसी उपलब्धियां दर्ज हैं जिन्होंने उन्हें भारतीय मनोरंजन जगत के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल किया है।
    अमिताभ बच्चन ने वर्ष 1969 में फिल्म सात हिंदुस्तानी से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर के बाद 1973 में रिलीज हुई फिल्म जंजीर ने उनके करियर को नई दिशा दी। इस फिल्म से उनकी एंग्री यंग मैन की छवि लोकप्रिय हुई। इसके बाद दीवार और शोले जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। 1975 की शोले लंबे समय तक भारतीय सिनेमा की सबसे चर्चित और सफल फिल्मों में शामिल रही। अमर अकबर एंथनी त्रिशूल मुकद्दर का सिकंदर डॉन और लावारिस जैसी फिल्मों ने भी उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 1978 उनके करियर का खास साल रहा जब डॉन त्रिशूल मुकद्दर का सिकंदर और कसमें वादे जैसी चर्चित फिल्में रिलीज हुईं।
    अमिताभ बच्चन ने केवल एक तरह के किरदारों तक खुद को सीमित नहीं रखा। अदालत डॉन और कसमें वादे जैसी फिल्मों में उन्होंने दोहरी भूमिकाएं निभाईं जबकि 1983 की फिल्म महान में वह तीन अलग-अलग किरदारों में दिखाई दिए। समय के साथ उन्होंने गंभीर पारिवारिक भूमिकाओं से लेकर सामाजिक संदेश देने वाली फिल्मों तक अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया। कभी खुशी कभी गम में पारिवारिक पिता की भूमिका हो या पीकू में एक जिद्दी लेकिन संवेदनशील बुजुर्ग का किरदार उन्होंने हर दौर में दर्शकों के साथ जुड़ाव बनाए रखा। पिंक और कल्कि 2898 एडी जैसी फिल्मों में भी उनके अभिनय को खास पहचान मिली।
    अमिताभ बच्चन के करियर की बड़ी उपलब्धियों में उनके पुरस्कार भी शामिल हैं। उन्हें अग्निपथ ब्लैक पा और पीकू में अभिनय के लिए चार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने का उल्लेख किया जाता है। इसके अलावा उनके नाम कुल 17 फिल्मफेयर पुरस्कार दर्ज हैं। फिल्मफेयर पुरस्कारों में उन्हें 42 नामांकन मिले जिनमें 34 सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में थे। भारतीय सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें 1984 में पद्मश्री 2001 में पद्म भूषण और 2015 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। वर्ष 2018 के लिए उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार भी प्रदान किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्ष 2007 में फ्रांस के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान ऑफिसर ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर से भी उन्हें नवाजा गया।
    बिग बी की उपलब्धियां फिल्मों और पुरस्कारों तक सीमित नहीं रहीं। वर्ष 1999 में बीबीसी के एक ऑनलाइन सर्वेक्षण में उन्हें एक्टर ऑफ द मिलेनियम चुने जाने की उपलब्धि भी उनके करियर से जुड़ी है। लंदन के मैडम तुसाद संग्रहालय में मोम की प्रतिमा पाने वाले पहले एशियाई अभिनेता के रूप में भी उनका उल्लेख किया जाता है। फिल्म पा में अमिताभ ने ऑरो नाम के बच्चे की भूमिका निभाई थी जबकि उनके वास्तविक जीवन के बेटे अभिषेक बच्चन ने फिल्म में उनके पिता का किरदार निभाया। यह भूमिका उनके अभिनय के सबसे अनोखे प्रयोगों में गिनी जाती है।
    टेलीविजन पर भी अमिताभ बच्चन ने अपनी लोकप्रियता का नया अध्याय लिखा। जुलाई 2000 में कौन बनेगा करोड़पति के साथ उन्होंने छोटे पर्दे पर कदम रखा। उनकी सहज मेजबानी सवाल पूछने के अंदाज और प्रतियोगियों के साथ संवाद ने इस कार्यक्रम को खास पहचान दिलाई। शो के 18वें सीजन तक उनका जुड़ाव दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अमिताभ बच्चन का सफर इस बात की मिसाल है कि बदलते दौर के साथ खुद को नया रूप देकर लोकप्रियता बनाए रखी जा सकती है। 84वें जन्मदिन पर उनके प्रशंसक उनके लंबे करियर यादगार फिल्मों और भारतीय सिनेमा में योगदान को याद कर रहे हैं।
  • होलकर स्टेडियम में आज बनेगा इतिहास? अभिषेक शर्मा तोड़ सकते हैं सूर्या के दो रिकॉर्ड, ईशान और श्रेयस के पास भी बड़ा मौका

    होलकर स्टेडियम में आज बनेगा इतिहास? अभिषेक शर्मा तोड़ सकते हैं सूर्या के दो रिकॉर्ड, ईशान और श्रेयस के पास भी बड़ा मौका


    नई दिल्ली। इंदौर के होलकर स्टेडियम में रविवार 11 अक्टूबर को भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला तीसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला भारतीय बल्लेबाजों के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है। टीम इंडिया के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा की नजरें सूर्यकुमार यादव के दो बड़े रिकॉर्ड पर टिकी हैं। वहीं ईशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर के पास भी भारतीय क्रिकेट के रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराने का मौका है। ऐसे में इस मुकाबले में रोमांचक क्रिकेट के साथ कई व्यक्तिगत उपलब्धियों पर भी दर्शकों की निगाहें रहेंगी।
    अभिषेक शर्मा इस समय शानदार बल्लेबाजी कर रहे हैं और उनके पास टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे कम गेंदों में 2000 रन पूरे करने का रिकॉर्ड अपने नाम करने का मौका है। अभिषेक अब तक 64 मुकाबलों की 63 पारियों में 1967 रन बना चुके हैं और इसके लिए उन्होंने 1009 गेंदों का सामना किया है। तीसरे टी20 में 33 रन बनाते ही वह 2000 रन के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे। फिलहाल यह रिकॉर्ड सूर्यकुमार यादव के नाम है जिन्होंने अपनी 1164वीं गेंद पर टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 2000 रन पूरे किए थे। अभिषेक को यह उपलब्धि हासिल करने के लिए सूर्यकुमार से कम गेंदों में यह आंकड़ा पार करना होगा। इस सूची में ऑस्ट्रेलिया के आरोन फिंच और ग्लेन मैक्सवेल भी शामिल हैं।
    अभिषेक के निशाने पर सूर्यकुमार का एक और बड़ा रिकॉर्ड है। एक कैलेंडर वर्ष में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाजों की सूची में सूर्यकुमार शीर्ष पर हैं। उन्होंने 2022 में 31 मुकाबलों में 68 छक्के लगाए थे। अभिषेक 2026 में अब तक 31 मैचों में 63 छक्के जड़ चुके हैं। उन्हें सूर्यकुमार का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तीसरे टी20 में कम से कम छह छक्के लगाने होंगे। अगर अभिषेक ऐसा करने में सफल रहते हैं तो वह एक कैलेंडर वर्ष में पूर्ण सदस्य देशों के बल्लेबाजों के बीच सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय छक्के लगाने वाले बल्लेबाज बन सकते हैं।
    अभिषेक के पास टी20 क्रिकेट के सभी मुकाबलों में भी अपना ही रिकॉर्ड बेहतर करने का मौका है। उन्होंने 2025 में 41 मैचों में 108 छक्के लगाए थे। इस साल वह 46 मुकाबलों में 106 छक्के लगा चुके हैं। यानी अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने के लिए उन्हें तीन और छक्कों की जरूरत है। इंदौर में उनकी आक्रामक बल्लेबाजी इस उपलब्धि को खास बना सकती है।
    ईशान किशन भी इस मुकाबले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकते हैं। उन्होंने 2026 में अब तक 31 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में 1085 रन बनाए हैं। भारत के लिए एक कैलेंडर वर्ष में सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने का रिकॉर्ड फिलहाल सूर्यकुमार यादव के नाम है जिन्होंने 2022 में 1164 रन बनाए थे। ईशान को इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए तीसरे टी20 में कम से कम 80 रन बनाने होंगे। ऐसे में उनकी बल्लेबाजी भी मैच का अहम आकर्षण रहेगी।
    भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर के पास भी रिकॉर्ड बनाने का अवसर है। उन्होंने 2026 में भारत की कप्तानी करते हुए 18 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 551 रन बनाए हैं। एक कैलेंडर वर्ष में भारतीय कप्तान के तौर पर सबसे ज्यादा टी20 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने का रिकॉर्ड रोहित शर्मा के नाम है। रोहित ने 2022 में 29 मैचों में 656 रन बनाए थे। श्रेयस को उनसे आगे निकलने के लिए 106 रन बनाने होंगे। कुल मिलाकर इंदौर में होने वाला यह मुकाबला भारतीय बल्लेबाजों के लिए उपलब्धियों के लिहाज से बेहद खास हो सकता है। अब देखना होगा कि अभिषेक ईशान और श्रेयस में से कौन अपने प्रदर्शन से नया इतिहास रचता है।
  • CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र

    CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटाने की आशंका के बीच सरकार ने ऐसे बनाया सुरक्षा चक्र


    नई दिल्ली। नई दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP और विपक्षी INDIA गठबंधन के दिल्ली मार्च को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क रहीं। शनिवार को प्रस्तावित प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने राजधानी के संवेदनशील इलाकों में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के आसपास बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर नजर रखी गई। सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को एक बड़ी भीड़ में एकजुट होने से रोकना और किसी भी संभावित हिंसक स्थिति से निपटना था। हालांकि हिंसा भड़काने की कथित साजिश को लेकर सामने आए दावे सुरक्षा एजेंसियों के आकलन पर आधारित हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
    रिपोर्ट के अनुसार खुफिया एजेंसियों को आशंका थी कि प्रदर्शन के आयोजक छात्रों और युवाओं को आगे रखकर सेंट्रल दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन कर सकते हैं। इससे कई स्थानों पर एक साथ भीड़ जुटने और कानून व्यवस्था की चुनौती पैदा होने की आशंका जताई गई थी। इसी इनपुट के आधार पर पुलिस ने जंतर-मंतर तक पहुंचने वाले रास्तों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी। 37 से अधिक स्थानों पर बैरिकेडिंग और अर्धसैनिक बलों की तैनाती किए जाने की जानकारी सामने आई। अधिकारियों की रणनीति यह थी कि अलग-अलग स्थानों पर मौजूद समूह एकजुट होकर बड़ी भीड़ नहीं बना सकें और स्थिति पर समय रहते नियंत्रण रखा जा सके।
    सुरक्षा एजेंसियों के लिए 20 जुलाई 2026 को जंतर-मंतर पर हुई झड़पों का अनुभव भी महत्वपूर्ण बताया गया है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उस दौरान प्रदर्शन की अनुमति सीमित अवधि के लिए होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने लंबे समय तक वहां डेरा जमाए रखा था। इसके बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने प्रदर्शन से जुड़े आयोजनों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिक सतर्कता बरती। रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों के बीच संवाद के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और बर्नर फोन के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई थी। हालांकि इन माध्यमों के इस्तेमाल से संबंधित सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
    इस बार दिल्ली पुलिस ने रियल टाइम सूचना और निगरानी व्यवस्था पर भी जोर दिया। रिपोर्ट में बताया गया है कि डिजिटल निगरानी और मैसेजिंग नेटवर्क से जुड़ी सूचनाओं के आधार पर पुलिस कमांड सेंटर को प्रदर्शनकारियों की संभावित आवाजाही और भीड़ के आकार पर नजर रखने में मदद मिली। इसके साथ ही अलग-अलग स्थानों पर पुलिस बल तैनात किए गए ताकि किसी क्षेत्र में अचानक भीड़ बढ़ने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके। प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों और विपक्षी नेताओं को अलग-अलग स्थानों से हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई। पुलिस की इस कार्रवाई से प्रदर्शनकारियों के एकजुट होने की संभावना प्रभावित हुई।
    इस पूरे घटनाक्रम के बीच केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विरोध प्रदर्शन और कानून व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और विरोध का अधिकार सभी को है लेकिन अराजकता के लिए कोई जगह नहीं है। संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जा सकता। CJP के प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों के बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में आगे की स्थिति पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन से जुड़े तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि पर निर्भर करेगी।
  • अयोध्या में योगी बनाम अखिलेश का मुकाबला हुआ तो कौन पड़ेगा भारी? पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं

    अयोध्या में योगी बनाम अखिलेश का मुकाबला हुआ तो कौन पड़ेगा भारी? पिछले चुनावों के आंकड़े क्या कहते हैं

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के साथ ही नेताओं के बीच जुबानी जंग भी बढ़ने लगी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की चुनौती ने सियासी चर्चा को और तेज कर दिया है। हालांकि, दोनों नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है, लेकिन इस बयानबाजी के बाद संभावित मुकाबले को लेकर कयास लगाए जाने लगे हैं।

    दरअसल, अयोध्या में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चुनौती देते हुए कहा कि वह पवन पांडेय के खिलाफ चुनाव लड़कर दिखाएं। इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि चेलों से मुकाबला करने के बजाय दोनों अयोध्या से नामांकन कर चुनाव लड़ें। इस बयान के बाद सवाल उठ रहा है कि यदि दोनों नेता वास्तव में अयोध्या विधानसभा सीट से आमने-सामने आते हैं, तो किसका पलड़ा भारी रह सकता है?

    फिलहाल यह मुकाबला काल्पनिक है। इसके संभावित नतीजे का अनुमान पिछले चुनावों, सामाजिक समीकरणों, स्थानीय मुद्दों और दोनों दलों के संगठनात्मक प्रभाव के आधार पर ही लगाया जा सकता है। यहां दिए गए जातीय आंकड़े विभिन्न मीडिया रिपोर्टों पर आधारित अनुमान हैं, आधिकारिक मतदाता आंकड़े नहीं। इसलिए इन्हें चुनाव परिणाम की निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

    अयोध्या में जातीय समीकरण की क्या है तस्वीर?

    अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के जातीय समीकरण को लेकर अलग-अलग चुनावी रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। वर्ष 2022 की एक रिपोर्ट में ब्राह्मण मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 22 प्रतिशत, यादव मतदाताओं की 12 प्रतिशत और दलित मतदाताओं की 15 प्रतिशत बताई गई थी। वहीं, दूसरी रिपोर्ट में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या करीब 40 हजार और दलित मतदाताओं की संख्या लगभग 65 हजार बताई गई थी।

    एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022 में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में करीब 45 हजार ब्राह्मण, 43 हजार अनुसूचित जाति और 36 हजार यादव मतदाता थे। इन आंकड़ों में अंतर होने के कारण जातीय समीकरण का आकलन करते समय सावधानी जरूरी है।

    अगड़ी जातियों का रुख किसके पक्ष में जा सकता है?

    अयोध्या विधानसभा सीट पर ब्राह्मण, ठाकुर, वैश्य, बनिया, अग्रवाल और कायस्थ जैसे समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। ब्राह्मण मतदाता भाजपा और सपा, दोनों के लिए अहम हो सकते हैं। उनका रुख संभावित मुकाबले की दिशा प्रभावित कर सकता है।

    ठाकुर मतदाताओं को भाजपा के परंपरागत समर्थक वर्गों में गिना जाता है, जबकि वैश्य, बनिया और अग्रवाल समुदाय का प्रभाव शहरी और कारोबारी मतदाताओं के बीच महत्वपूर्ण माना जाता है। इन वर्गों का झुकाव किस पार्टी की ओर रहता है, यह उम्मीदवारों की छवि, स्थानीय मुद्दों और चुनाव प्रचार पर भी निर्भर करेगा।

    पिछड़ी जातियों के वोट पर भी रहेगी नजर

    अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में यादव, कुर्मी, मौर्य, कुशवाहा, निषाद, केवट, राजभर, लोध और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता भी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    यादव समुदाय को समाजवादी पार्टी का पारंपरिक समर्थक वर्ग माना जाता है। अखिलेश यादव के लिए चुनौती यह होगी कि वह यादव मतदाताओं के साथ-साथ दूसरे पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं का कितना समर्थन हासिल कर पाते हैं।

    दूसरी ओर, कुर्मी, मौर्य, निषाद और राजभर जैसे समुदायों के बीच भाजपा की पकड़ संभावित मुकाबले में उसके लिए फायदेमंद हो सकती है। हालांकि, किसी समुदाय के सभी मतदाताओं के एक ही पार्टी को वोट देने की धारणा सही नहीं मानी जा सकती। स्थानीय उम्मीदवार, क्षेत्रीय समस्याएं और व्यक्तिगत पसंद भी मतदान को प्रभावित करते हैं।

    योगी के लिए राम मंदिर और विकास होंगे अहम मुद्दे

    यदि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या से चुनाव लड़ते हैं, तो राम मंदिर, धार्मिक पर्यटन, शहर का विकास, बुनियादी सुविधाएं और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे चुनाव प्रचार के केंद्र में रह सकते हैं। भाजपा के संगठन और स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता भी उनके लिए महत्वपूर्ण होगी।

    इसके साथ ही यह देखना होगा कि अगड़ी जातियों के अलावा पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं के बीच भाजपा कितना समर्थन बनाए रख पाती है। केवल राम मंदिर या विकास के मुद्दे के आधार पर नतीजे का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं होगा।

    अखिलेश के लिए पीडीए की कितनी होगी भूमिका?

    अखिलेश यादव की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक यानी पीडीए सामाजिक गठजोड़ को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन ने इस रणनीति को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था।

    अयोध्या विधानसभा सीट पर अखिलेश यादव के लिए अहम सवाल यह होगा कि यादव मतदाताओं के साथ दूसरे पिछड़े वर्गों और दलित समुदायों का कितना समर्थन मिल पाता है। इसके अलावा ब्राह्मणों और अन्य गैर-यादव मतदाताओं का रुख भी संभावित मुकाबले पर असर डाल सकता है।

    पिछले तीन विधानसभा चुनावों में क्या रहा परिणाम?

    अयोध्या विधानसभा सीट पर पिछले तीन चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबले का रुख समय के साथ बदला है।

    विधानसभा चुनाव विजेता पार्टी जीत का अंतर
    2012 तेज नारायण पांडेय (पवन पांडेय) सपा 5,405
    2017 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा 50,440
    2022 वेद प्रकाश गुप्ता भाजपा 19,990

    इन नतीजों से स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी वर्ष 2012 में अयोध्या सीट जीत चुकी है, जबकि भाजपा ने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। वर्ष 2022 में भाजपा की जीत का अंतर 2017 के मुकाबले कम रहा था।

    वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में फैजाबाद संसदीय सीट से समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने जीत दर्ज की थी। हालांकि, अयोध्या विधानसभा क्षेत्र के चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, इस हिस्से में भाजपा के लल्लू सिंह को सपा के अवधेश प्रसाद के मुकाबले करीब 4,667 मतों की बढ़त मिली थी। इससे पता चलता है कि लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदाताओं का रुख अलग-अलग हो सकता है।

    आखिर किसका पलड़ा रहेगा भारी?

    योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच अयोध्या से संभावित मुकाबले में किसी एक को अभी से विजेता घोषित करना जल्दबाजी होगी। योगी के पक्ष में भाजपा का संगठन, हिंदुत्व की राजनीति और अयोध्या के विकास से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो सकते हैं। वहीं, अखिलेश यादव के लिए पीडीए का सामाजिक समीकरण, पिछड़े वर्गों और दलित मतदाताओं का समर्थन तथा स्थानीय स्तर पर पार्टी की सक्रियता निर्णायक साबित हो सकती है।

    पिछले चुनावों के आंकड़े भाजपा की लगातार दो विधानसभा जीत और सपा की पुरानी जीत, दोनों को सामने रखते हैं। ऐसे में अंतिम नतीजा उम्मीदवारों की लोकप्रियता, चुनावी रणनीति, स्थानीय मुद्दों और विभिन्न समुदायों के मतदान व्यवहार पर निर्भर करेगा। जब तक दोनों नेताओं के अयोध्या से चुनाव लड़ने की औपचारिक घोषणा नहीं होती, तब तक यह चर्चा केवल संभावनाओं और उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित अनुमान ही रहेगी। वास्तविक तस्वीर चुनाव के नतीजे आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • भोपाल में नवरात्रि की धूम, घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना शुरू, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

    भोपाल में नवरात्रि की धूम, घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री की आराधना शुरू, मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़


    नई दिल्ली। शारदीय नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही राजधानी भोपाल में मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का माहौल बन गया है। नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति उपासना के इस पर्व के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा अर्चना की जा रही है। शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं और श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया है। तलैया स्थित काली माता मंदिर पीर गेट की कर्फ्यू वाली माता मंदिर और प्लेटिनम प्लाजा स्थित माता मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर भक्त मां के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं।
    ज्योतिष मठ संस्थान भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार इस वर्ष पूरे नौ दिनों की नवरात्रि का संयोग बना है। नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार माता रानी का आगमन हाथी पर माना गया है जिसे शुभता समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व है। पंडित गौतम के मुताबिक रविवार को घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के कारण अभिजीत काल में घटस्थापना को बेहतर माना गया है। प्रदोष काल में अखंड ज्योति स्थापित करने की परंपरा निभाई जाएगी जबकि तांत्रिक साधक मध्यरात्रि में विशेष पूजा करेंगे।
    नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूपों की पूजा के साथ विशेष भोग अर्पित करेंगे। घरों में कलश स्थापना के बाद दीप प्रज्ज्वलित कर मंत्र जाप दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ किया जाएगा। कई श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखेंगे और सात्विक भोजन के साथ संयमित दिनचर्या अपनाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों में झूठ बोलने क्रोध करने और परिवार में विवाद से बचना चाहिए। माता पिता की सेवा गुरुजनों का सम्मान और महिलाओं के प्रति आदर का भाव रखने पर भी विशेष जोर दिया जाता है। भक्त देवी मां के दर्शन के दौरान नारियल लाल चुनरी लाल फूल कुमकुम और अन्य पूजन सामग्री अर्पित कर सकते हैं। यदि पूजन सामग्री उपलब्ध न हो तो श्रद्धापूर्वक मंत्र जाप और मां के नामों का स्मरण भी किया जा सकता है।
    पंचांग के अनुसार नवरात्रि के दौरान 18 अक्टूबर को महाअष्टमी और 19 अक्टूबर को महानवमी मनाई जाएगी। इसके बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। अंतिम दिनों में मंदिरों में विशेष पूजा अनुष्ठान और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन अवसरों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने की उम्मीद है।
    नवरात्रि के उत्साह का असर मां दुर्गा की प्रतिमाओं के बाजार में भी दिखाई दे रहा है। हबीबगंज बंगाली कॉलोनी स्थित प्रतिबिंब दक्षिणेश्वर कालीबाड़ी कला केंद्र में इस बार मां दुर्गा की करीब 160 प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। केंद्र के मूर्तिकार उत्तम कुमार नंदी के मुताबिक मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री महंगी होने से लागत बढ़ गई है। पहले 35 रुपये में मिलने वाली सामग्री अब 45 रुपये में मिल रही है। इसके बावजूद प्रतिमाओं की मांग बनी हुई है। केंद्र में पिछले 10 से 12 वर्षों से प्रतिमाएं बनाई जा रही हैं और पश्चिम बंगाल तथा कोलकाता से आए करीब 12 से 13 कारीगर इस काम में जुटे हैं। यहां तैयार सबसे ऊंची प्रतिमा 12 फीट की है। प्रतिमाएं श्रद्धालुओं की पसंद के अनुसार बुक की जा रही हैं। नवरात्रि के आगमन के साथ भोपाल में आस्था उत्साह और भक्ति का माहौल है। श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना कर सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
  • MP: फसलें बचाने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू… पहले दिन पकड़े 97 कृष्ण मृग

    MP: फसलें बचाने के लिए कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का दूसरा चरण शुरू… पहले दिन पकड़े 97 कृष्ण मृग


    शाजापुर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के शाजापुर जिले (Shajapur district) में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए वन विभाग ने अनोखा तरीका अपनाया है. शुजालपुर, कालापीपल और उज्जैन जिले के सीमावर्ती इलाकों में कृष्णमृग और नीलगाय (Blackbuck and Nilgai) को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन (Rescue Operation) चलाया जा रहा है. अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी गांव में बोमा पद्धति से 97 कृष्णमृगों को पकड़ा गया.

    शाजापुर–शुजालपुर क्षेत्र में कृष्ण-मृगों (ब्लैकबक) को पकड़ने और स्थानांतरित करने के अभियान का दूसरे चरण का शनिवार को प्रारंभ किया गया। अभियान के पहले दिन हन्नूखेड़ी में 97 कृष्णमृगों को सफलतापूर्वक पकड़ा गया। इन्हें अनुकूल वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने के लिए कूनो राष्ट्रीय उद्यान रवाना किया गया। इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र में लंबे समय से फसलों को नुकसान पहुंचा रहे वन्य प्राणियों के कारण किसानों और ग्रामीणों को होने वाली परेशानियों को कम करना है।

    कृष्ण-मृगों को उनके अनुकूल वन क्षेत्रों में स्थानांतरित करने से मानव–वन्य प्राणी संघर्ष और फसल क्षति कम करने के साथ कृषि उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। दूसरे चरण में कुल 2 हजार कृष्ण-मृगों के स्थानांतरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल वन्य प्राणियों के संरक्षण और ग्रामीणों की आजीविका से जुड़ी चुनौतियों के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस अभियान में मध्य प्रदेश वन विभाग दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम का सहयोग ले रहा है. अभियान का उद्देश्य वन्यजीवों को सुरक्षित तरीके से निर्धारित क्षेत्रों में भेजना है, ताकि किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।


    हेलीकॉप्टर से हांका, बोमा तकनीक से पकड़े कृष्णमृग

    रेस्क्यू ऑपरेशन के पहले चरण में हेलीकॉप्टर की मदद से कृष्णमृगों को हांका देकर एक निर्धारित घेरे की ओर पहुंचाया गया. इसके बाद बोमा तकनीक से उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया. अभियान के दौरान दोपहर में तापमान 29 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर विशेषज्ञों की सलाह के बाद रेस्क्यू रोक दिया गया. अगले चरण को शनिवार देर शाम या रविवार सुबह शुरू करने की योजना बताई गई।

    आयोजकों के अनुसार, हेलीकॉप्टर की मदद से हांका लगाकर बोमा पद्धति के जरिए वन्यजीवों को रेस्क्यू करने की शुरुआत लगातार दूसरे वर्ष शुजालपुर क्षेत्र से की गई है. पिछले साल भी इसी इलाके में इस पद्धति का इस्तेमाल किया गया था।


    दक्षिण अफ्रीका के 14 विशेषज्ञ, करीब 200 कर्मचारी तैनात

    इस विशेष अभियान में दक्षिण अफ्रीका की कंजर्वेशन सॉल्यूशन टीम के 14 विशेषज्ञ शामिल हैं. इनके अलावा वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी भी तैनात हैं. भोपाल सहित दूसरे जिलों से पहुंचे कर्मचारियों को मिलाकर करीब 200 लोगों की टीम अभियान में जुटी है।

    इससे पहले ग्राम हन्नूखेड़ी में अभियान की तैयारियों का निरीक्षण वन विभाग के प्रमुख सचिव राघवेंद्र कुमार सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभांजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा, कलेक्टर ऋजु बाफना और अभियान की नोडल अधिकारी डॉ. किरण बिसेन समेत अन्य अधिकारियों ने किया. अधिकारियों ने दक्षिण अफ्रीका की विशेषज्ञ टीम से चर्चा कर तैयारियों और अभियान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।


    ग्रामीणों के लिए जारी किए गए सुरक्षा निर्देश

    वन विभाग और जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से अभियान के दौरान विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. अधिकारियों के मुताबिक, वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है। ग्रामीणों से कहा गया है कि अभियान की सूचना वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और ऑपरेशन समाप्त होने की सूचना मिलने तक खेतों में कृषि कार्य, सिंचाई या अन्य गतिविधियां न करें. बच्चों को खेतों, सड़कों और बोमा स्थल से दूर रखने तथा गाय, भैंस, बकरी और कुत्तों सहित पालतू पशुओं को खुले में नहीं छोड़ने की सलाह दी गई है।

    वन विभाग ने लोगों से यह भी अपील की है कि वे वन्यजीवों का पीछा न करें, उन्हें घेरने या भगाने की कोशिश न करें और हेलीकॉप्टर की आवाज सुनकर बाहर निकलकर भीड़ न लगाएं. निर्धारित सुरक्षा क्षेत्रों में अनधिकृत प्रवेश से बचने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।


    पहले चरण में 913 वन्यप्राणियों का हुआ था स्थानांतरण

    कृष्ण-मृग स्थानांतरण अभियान का पहला चरण पिछले वर्ष संचालित किया गया था। इस दौरान 846 कृष्ण-मृग और 67 नीलगाय सहित कुल 913 वन्य प्राणियों को पकड़ा गया था। पहले चरण से प्राप्त अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण को बेहतर समन्वय के साथ संचालित किया जा रहा है।

    किसानों की फसलों की सुरक्षा के लिए जनसहयोग की अपील

    अभियान में जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का सक्रिय सहयोग मिल रहा है। वन विभाग ने वन्य प्राणी संरक्षण और किसानों की फसलों की सुरक्षा के इस प्रयास को सफल बनाने के लिए आमजन से निरंतर सहयोग की अपील की है।

  • मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके

    मणिपुर में भड़की हिंसा…. नगा-कुकी समुदाय के बीच टकराव. 24 घंटे में 9 की हत्या, 14 घर फूंके


    इम्फाल। पू
    र्वोत्तर राज्य मणिपुर (Northeastern State of Manipur) में एक बार फिर से हिंसा हुई है. नगा और कुकी समुदाय (Naga and Kuki Communities) के बीच हुए हिंसक टकराव में पिछले 24 घंटे में 9 लोगों की मौत हुई है, जबकि 14 घरों में आग लगा दी गई है. इस घटना के बाद कुकी और नागा समुदायों के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है और कांगपोकपी ज़िले में शटडाउन करना पड़ा है।

    अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि हिंसा के शिकार लोगों में कामजोंग ज़िले में गोलीबारी के दौरान मारी गई एक कुकी महिला शामिल है. इसके अलावा कामजोंग और कांगपोकपी में अलग-अलग हमलों का शिकार बने नागा विलेज गार्ड और उखरुल ज़िले में घात लगाकर किए गए हमले में फंसे एक आम नागरिक की मौत हुई है।

    इस हिंसा के कारण कामजोंग ज़िला प्रशासन ने चसाड पुलिस स्टेशन के 400 मीटर के दायरे में लोगों के इकट्ठा होने पर रोक लगा दी. इस बीच, कुकी संगठन ‘कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी’ (CoTU) ने कांगपोकपी ज़िले में शनिवार शाम 6 बजे से 24 घंटे के बंद का आह्वान किया।

    यह हिंसा शुक्रवार रात तब भड़की जब चसाड पुलिस स्टेशन के पास गोलीबारी में 42 वर्षीय कुकी महिला और पांच बच्चों की मां, डोमखोनी टौथांग की मौत हो गई. पुलिस के अनुसार सिविल पुलिस, इंडिया रिज़र्व बटालियन और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सुरक्षाकर्मियों ने पुलिस स्टेशन के पास कथित अवैध बंकरों के निर्माण की खबरों के बाद उन्हें हटाने के लिए एक ऑपरेशन शुरू किया था।

    इस दौरान जब अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने सुरक्षाकर्मियों पर गोली चलाई और सुरक्षाकर्मियों ने जवाबी कार्रवाई की, तो कथित तौर पर स्थानीय महिलाओं ने इस ऑपरेशन में बाधा डालने की कोशिश की. पुलिस ने बताया कि टौथांग की गर्दन के पास बाईं ओर छाती के ऊपरी हिस्से में गोली लगी और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

    यह घटना 9 अक्टूबर को रात करीब 9.35 बजे हुई, जब चसाड गांव के वॉलंटियर्स की कथित मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहा था. इस हत्या के बाद आगजनी हुई और हथियारबंद समूहों और सुरक्षाकर्मियों के बीच फिर से गोलीबारी हुई. हिंसा के दौरान दोनों समुदायों के सदस्यों के कम से कम 14 घरों में आग लगा दी गई. अधिकारियों ने बताया कि उपद्रवियों ने चसाड पुलिस स्टेशन में भी आग लगाने की कोशिश की, जिससे उसके प्रवेश द्वार के पास बनी कुछ लकड़ी की दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं। शनिवार सुबह करीब 5 बजे फिर से गोलीबारी शुरू हुई और लगभग सुबह 7 बजे तक जारी रही।

    कुकी विमेन यूनियन के हेडक्वार्टर ने दावा किया कि 23 साल के माइकल न्गाममिनलेन हाओकिप की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई. आरोप है कि यह हत्या नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नागालिम (इसक-मुइवा) यानी NSCN-IM और उसके ईस्टर्न फ्लैंक गुट के लोगों ने की. इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी. एक और घटना में पुलिस ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे कामजोंग ज़िले के निंगचो चिंगडोंग गांव में हुए हमले में दो नागा विलेज गार्ड – 30 साल के न्गाचान्सो निंगशेन और 50 साल के लीशिशन हंग्यो मारे गए। यह गांव चसाड पुलिस स्टेशन से लगभग 17 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

    एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय हथियारबंद गुट इस हमले में शामिल हो सकते हैं. हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच चल रही है। कांगपोकपी जिले में, हथियारबंद कुकी उग्रवादियों के संदिग्ध गुट द्वारा किए गए घात लगाकर किए गए हमले में एक नागा विलेज वॉलंटियर की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. यह हमला सुबह करीब 6 बजे इम्फाल-तामेंगलोंग रोड पर मकुई और तापोक गांवों के बीच हुआ, जो चालवा पुलिस स्टेशन से लगभग 15 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है।

    पुलिस ने मृतक की पहचान तमेई सब-डिविजन के थालोन गांव के 35 वर्षीय माचुंगवांगबोउ के रूप में की. घायलों में एल पाब्रम गांव के 29 वर्षीय नहासोन और काडी गांव के 30 वर्षीय माथांगाम्बोउ शामिल थे।

    पुलिस के अनुसार, चार नागा विलेज वॉलंटियर यह जानकारी मिलने के बाद तापोन गांव से मकुई के लिए निकले थे कि मकुई गांव पर हमला हुआ है घात लगाकर बैठे हथियारबंद लोगों ने तापोन से लगभग 2 किलोमीटर दूर उन पर हमला कर दिया. माचुंगवांगबोउ की मौके पर ही मौत हो गई. नहासोन के दोनों पैरों में गोली लगी, जबकि माथांगाम्बोउ के दोनों पैरों और हाथों में चोटें आईं. घायलों को इलाज के लिए सेनापति ज़िला मुख्यालय ले जाया गया है।

    एक अलग घटना में 30 साल के संदीप राय की मौत हो गई. उन पर नेशनल हाईवे 202 पर कोंजांग गांव के पास अज्ञात हथियारबंद हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया. यह हाईवे इम्फाल को उखरुल होते हुए नागालैंड से जोड़ता है।

    पुलिस ने बताया कि यह हमला शनिवार सुबह करीब 5.30 बजे लिटन पुलिस स्टेशन से लगभग 12 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में हुआ. सेनापति ज़िला मुख्यालय के पास तापहोउ सेनापति नेपाली गांव में रहने वाले राय अपनी कार से जा रहे थे तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया.

    पुलिस ने शव बरामद कर मामला दर्ज कर लिया है. बाद में शव को पोस्टमार्टम के लिए इम्फाल के जवाहरलाल नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज की मोर्चरी में रखवाया गया. हत्या की वजह और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। बढ़ती हिंसा के बीच CoTU ने शनिवार शाम 6 बजे से कांगपोकपी ज़िले में 24 घंटे के पूर्ण बंद की घोषणा की।

  • सड़कें सूनी.. बाजार बंद…. CJP के प्रदर्शन से दिल्ली में लॉकडाउन जैसा हाल… एक दिन में 2000 करोड़ का नुकसान

    सड़कें सूनी.. बाजार बंद…. CJP के प्रदर्शन से दिल्ली में लॉकडाउन जैसा हाल… एक दिन में 2000 करोड़ का नुकसान


    नई दिल्ली।
    राजधानी नई दिल्ली (New Delhi) में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) (Cockroach Janata Party -CJP) के विरोध-प्रदर्शन के चलते सदर बाजार, चांदनी चौक, कनॉट प्लेस समेत एक दर्जन से ज्यादा बाजार बंद (Shops Closed ) रहे। इसकी वजह से शनिवार को तकरीबन दो हजार करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ। दिल्ली में वीकेंड पर ही बाजारों में सबसे ज्यादा खरीदारी होती है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी संख्या में बाजार बंद होने के कारण कारोबार ठप रहा। हालांकि, जिन इलाकों में बाजार खुले थे, वहां भी ग्राहकों की संख्या बेहद कम रही।


    लॉकडाउन जैसा दिखा मंजर

    राजधानी के थोक बाजार अब साप्ताहिक अवकाश के चलते रविवार को भी बंद रहेंगे। सोमवार से कामकाज सुचारू हो सकेगा। व्यापारियों का कहना है कि दिल्ली में त्योहारी सीजन में जहां बाजारों में रौनक बढ़ जाती थी, वहीं इस बार हालात विपरीत हैं। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि नवरात्रि और रामलीला मंचन के इस सीजन में दिल्ली में शनिवार को लॉकडाउन जैसे हालात बन गए। बाजार सूने पड़े थे। इसकी वजह से करीब 2000 करोड़ से ज्यादा के नुकसान का अनुमान है।

    पेट्रोल पंपों पर भी भीड़ कम रही। होटल, रेस्टोरेंट, ब्यूटी पार्लर, सैलून में बड़ी संख्या में बुकिंग कैंसिल हुई हैं। वहीं, फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश यादव ने कहा कि शनिवार को ज्यादा बिक्री की उम्मीद थी, लेकिन सुरक्षा के चलते बाजार बंदी का निर्णय लेना पड़ा। सदर बाजार के 40 हजार दुकानदारों को करोड़ों का नुकसान झेलना पड़ा।


    यूपीआई से पेमेंट में दिक्कत हुई, गूगल मैप भी नहीं चला

    जंतर-मंतर और इसके आसपास नई दिल्ली के कई इलाकों में शनिवार को सीजेपी के प्रदर्शन के चलते इंटरनेट सेवा बंद रही। इससे न तो कैब, ऑटो चालक और गिग वर्कर्स गूगल मैप से रास्ता खोज पाए और न ही लोग यूपीआई से भुगतान कर सके। इसकी वजह से लोगों को दिनभर परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    बाहरी शहरों से आए लोगों को वैकल्पिक रास्तों की जानकारी न होने की वजह से ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इंटरनेट सेवा बंद होने के कारण वे गूगल मैप से वैकल्पिक रास्तों की जानकारी नहीं कर पाए और सड़कों पर एक से दूसरी जगह भटकते रहे। वहीं, नई दिल्ली क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन और डीटीसी की बस सेवा बंद होने के कारण लोगों ने गंतव्य तक जाने के लिए ऑटो, बाइक कैब और टैक्सी बुक की, लेकिन यूपीआई से भुगतान नहीं हो सका। जेब में नकदी न होने के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।