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  • आज का राशिफल 11 अक्टूबर 2026, किसी को करियर में मिलेगी नई राह तो किसी को धन के मामले में बरतनी होगी सावधानी, पढ़ें अपना दैनिक भविष्यफल

    आज का राशिफल 11 अक्टूबर 2026, किसी को करियर में मिलेगी नई राह तो किसी को धन के मामले में बरतनी होगी सावधानी, पढ़ें अपना दैनिक भविष्यफल


    नई दिल्ली । 11 अक्टूबर 2026 का दिन रविवार है और धार्मिक मान्यताओं में रविवार सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है। आज का दिन कई राशियों के लिए नई योजनाएं बनाने और अधूरे काम पूरे करने का अवसर लेकर आ सकता है। वहीं कुछ राशि के जातकों को आर्थिक मामलों में सतर्क रहने और रिश्तों में धैर्य बनाए रखने की जरूरत होगी। नौकरी व्यापार परिवार प्रेम और स्वास्थ्य के लिहाज से दिन कैसा रह सकता है आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का दैनिक राशिफल। ये ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित सामान्य संकेत हैं।
    मेष राशि के जातकों के लिए दिन उत्साह से भरा रह सकता है। कामकाज में नई जिम्मेदारी मिल सकती है और पुराने प्रयासों का लाभ मिलने की उम्मीद रहेगी। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। आर्थिक फैसले जल्दबाजी में न लें।
    वृषभ राशि वालों को रिश्तों में तालमेल बनाए रखने की जरूरत होगी। जीवनसाथी या करीबी व्यक्ति के साथ किसी विषय पर मतभेद हो सकता है। धैर्य से बात करने पर स्थिति संभल सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखें और जरूरी कामों को प्राथमिकता दें।
    मिथुन राशि के जातकों के लिए बातचीत और संपर्क लाभकारी हो सकते हैं। किसी पुराने मित्र से बात होने या उपयोगी जानकारी मिलने की संभावना है। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को प्रयास जारी रखने चाहिए। एक साथ कई काम हाथ में लेने से बचें।
    कर्क राशि वालों का ध्यान परिवार और घरेलू मामलों पर रह सकता है। घर से जुड़ा कोई फैसला लेने की जरूरत पड़ सकती है। भावनाओं में बहकर प्रतिक्रिया देने के बजाय सोच समझकर बात करें। सेहत के लिए आराम और नियमित दिनचर्या जरूरी रहेगी।
    सिंह राशि के जातकों में आत्मविश्वास बना रह सकता है। अपने विचार सामने रखने और रचनात्मक कामों में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। हालांकि परिवार में किसी बात पर बहस से बचें। दूसरों की राय सुनने से भी फायदा हो सकता है।
    कन्या राशि वालों के लिए आर्थिक योजना बनाने का दिन रह सकता है। आय और खर्च का हिसाब व्यवस्थित करने से भविष्य की चिंताएं कम हो सकती हैं। कामकाज में छोटी गलतियों से बचने के लिए जरूरी दस्तावेज ध्यान से जांचें। रिश्तेदारों से बातचीत में संयम रखें।
    तुला राशि के जातकों को अपनी जरूरतों और दूसरों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना होगा। निजी जीवन में कोई महत्वपूर्ण बातचीत हो सकती है। कामकाज में सहयोग मिलने की संभावना है। धन से जुड़े मामलों में स्पष्टता रखें और बिना जांचे किसी पर भरोसा न करें।
    वृश्चिक राशि वालों को धैर्य के साथ आगे बढ़ने की सलाह है। किसी पुरानी बात को लेकर मन में उलझन रह सकती है। जरूरी निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें। अनावश्यक विवाद से दूर रहना बेहतर रहेगा।
    धनु राशि के जातकों के लिए मित्रों और सामाजिक संपर्कों से लाभकारी जानकारी मिल सकती है। भविष्य की योजनाओं पर काम शुरू करने का विचार बन सकता है। हालांकि किसी भी योजना को अमल में लाने से पहले समय और बजट का आकलन करें।
    मकर राशि वालों का ध्यान करियर और जिम्मेदारियों पर रह सकता है। किसी काम को पूरा करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ सकता है। वरिष्ठों या अनुभवी लोगों की सलाह उपयोगी हो सकती है। परिवार के लिए भी समय निकालें।
    कुंभ राशि के जातकों के लिए नई जानकारी हासिल करने और कुछ अलग सीखने का अवसर बन सकता है। यात्रा या भविष्य की योजना पर चर्चा हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति से बातचीत करते समय अपनी बात स्पष्ट रखें और जल्दबाजी में वादा न करें।
    मीन राशि वालों को भावनात्मक और आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। परिवार के किसी सदस्य की सलाह उपयोगी साबित हो सकती है। खर्च करते समय जरूरत और इच्छा के बीच अंतर समझें। नियमित दिनचर्या और पर्याप्त आराम पर ध्यान दें।
    कुल मिलाकर 11 अक्टूबर का दिन धैर्य समझदारी और संतुलित व्यवहार के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। रविवार को सूर्यदेव की पूजा करना और अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करना धार्मिक आस्था से जुड़ा उपाय माना जाता है। किसी भी बड़े आर्थिक या व्यक्तिगत निर्णय में केवल राशिफल के आधार पर निर्भर रहने के बजाय वास्तविक परिस्थितियों और सही जानकारी को महत्व देना चाहिए।
  • सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम

    सोनम वांगचुक आज कर सकते हैं बड़ा ऐलान, गिरफ्तार CJP नेताओं के विरोध में उठाएंगे कदम


    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आज कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी के विरोध में अगला कदम उठाने का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने सरकार से प्रदर्शनकारियों को रिहा करने और गिरफ्तारियों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। यह समयसीमा पूरी होने पर वांगचुक धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे शांतिपूर्ण विरोध के विकल्पों पर विचार कर सकते हैं।

    वांगचुक ने दिल्ली में छात्र और युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों तथा सांसदों को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन की अनुमति होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि गिरफ्तारियों को वापस लेकर संबंधित मामलों का समाधान बातचीत के जरिए किया जाए।

    वांगचुक बोले- देश में अघोषित आपातकाल जैसे हालात

    सोनम वांगचुक ने कहा कि दिल्ली में छात्र नेताओं, युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों और यहां तक कि सांसदों को भी हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान शांति और एकता बनाए रखने की अपील करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध की अनुमति दी जाएगी।

    वांगचुक ने आरोप लगाया कि देशभर में अघोषित आपातकाल जैसे हालात दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि दिन खत्म होने से पहले गिरफ्तारियों को समाप्त किया जाए और विवाद का समाधान निकाला जाए।

    उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले 24 घंटे में गिरफ्तारियों को वापस नहीं लिया गया, तो उन्हें लेह या दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने पर विचार करना पड़ेगा। इसके लिए धरना, अनशन या पदयात्रा जैसे विकल्प अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बातचीत के जरिए ही मामले को सुलझा लेगी और उन्हें आंदोलन का अगला कदम उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    7 हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने का दावा

    दिल्ली में ‘जंतर-मंतर 2.0’ आंदोलन के दौरान पुलिस की भारी तैनाती और बैरिकेडिंग के बीच प्रदर्शन सीमित हो गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सात हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। इनमें सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके और चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल बताए गए हैं।

    सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विमान से ही हिरासत में ले लिया। जंतर-मंतर की ओर जा रहे आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, माकपा नेता पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित कई विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई।

    इसके अलावा, ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाट से हिरासत में लिया गया।

    सीजेपी का ऐलान- मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे तक जारी रहेगा आंदोलन

    सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प जताया है। पार्टी ने रविवार सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन करने की घोषणा की।

    प्रेस वार्ता में सीजेपी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी और आंदोलन की कमान संभाल रहे अजिंक्य शिंदे ने कहा कि दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बावजूद संगठन पीछे नहीं हटेगा। पार्टी ने अपने आंदोलन को जारी रखने की बात दोहराते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।

    सुप्रीम कोर्ट में आज अवमानना याचिका पर सुनवाई

    इस मामले से जुड़ा एक कानूनी घटनाक्रम भी सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट रविवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें आरोप लगाया गया है कि 10 अक्टूबर को मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाने संबंधी अदालत के आदेश का उल्लंघन हुआ।

    अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने यह अवमानना याचिका दाखिल की है। इसमें संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी नजर रहेगी।

  • सोना-चांदी के आयात पर IGST छूट खत्म, क्या अब बढ़ेंगे दाम? जानिए खरीदारों पर कितना होगा असर

    सोना-चांदी के आयात पर IGST छूट खत्म, क्या अब बढ़ेंगे दाम? जानिए खरीदारों पर कितना होगा असर


    नई दिल्ली। सोना, चांदी और प्लैटिनम खरीदने वालों के लिए कीमती धातुओं के आयात से जुड़े टैक्स नियमों में बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने बैंकों और अधिकृत एजेंसियों को आयात के समय मिलने वाली अग्रिम IGST छूट समाप्त कर दी है। अब कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) का भुगतान करना होगा। राजस्व सचिव अरविंद श्रीवास्तव के मुताबिक, बैंक 1 अप्रैल 2026 से ही इस टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इस बदलाव की जानकारी दी। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि बाजार में सोना-चांदी सीधे 3% महंगा हो जाएगा। कीमतों पर वास्तविक असर आयात लागत और कारोबारियों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

    पहले क्या था नियम, अब क्या बदला?

    साल 2017 में सरकार ने सोने के आयात पर बैंकों को अग्रिम IGST भुगतान से छूट दी थी। बाद में इस सुविधा का दायरा बढ़ाकर अन्य कीमती धातुओं को भी इसमें शामिल किया गया। इसके तहत बैंक और अधिकृत एजेंसियां आयात के समय IGST का अग्रिम भुगतान किए बिना सोना, चांदी और प्लैटिनम मंगा सकती थीं।

    अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। इसके बाद आयात करने वाले बैंकों और संबंधित एजेंसियों को कस्टम्स क्लीयरेंस के समय 3% IGST का भुगतान करना होगा। यानी आयात के वक्त ही टैक्स चुकाने के लिए पर्याप्त रकम की व्यवस्था करनी पड़ेगी।

    राजस्व सचिव के अनुसार, बैंक 1 अप्रैल 2026 से इस व्यवस्था के तहत टैक्स चुका रहे हैं। सरकार ने 8 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल को भी इसकी जानकारी दी।

    सरकार ने क्यों खत्म की टैक्स छूट?

    सरकार के इस कदम का उद्देश्य अलग-अलग माध्यमों से होने वाले कीमती धातुओं के आयात में टैक्स व्यवस्था को समान बनाना है। पहले बैंकों के माध्यम से आयात करने वालों को अग्रिम टैक्स भुगतान के मामले में विशेष सुविधा मिलती थी। अब इस अंतर को समाप्त करने की कोशिश की गई है।

    गुजरात की GIFT सिटी स्थित इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) जैसे संगठित प्लेटफॉर्म भी कीमती धातुओं के कारोबार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार चाहती है कि टैक्स नियमों के कारण किसी एक आयात माध्यम को अनुचित लाभ न मिले और सभी माध्यमों के लिए व्यवस्था अधिक समान हो।

    बैंकों और आयातकों पर क्या पड़ेगा असर?

    इस बदलाव का सबसे प्रत्यक्ष असर बैंकों और आयातकों की नकदी व्यवस्था पर पड़ सकता है। पहले अग्रिम IGST भुगतान से मिलने वाली राहत के कारण आयात के समय उतनी रकम की व्यवस्था नहीं करनी पड़ती थी। अब टैक्स का भुगतान कस्टम्स क्लीयरेंस के दौरान करना होगा।

    हालांकि, पात्र कारोबारियों को लागू नियमों के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से चुकाए गए टैक्स का लाभ मिल सकता है। लेकिन टैक्स पहले जमा करना होगा और उसका समायोजन बाद में हो सकता है। इससे कारोबारियों की कुछ रकम अस्थायी रूप से फंस सकती है।

    बड़े पैमाने पर सोना-चांदी आयात करने वाले बैंकों को अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरत पड़ सकती है। यदि इसके लिए उन्हें अतिरिक्त फंड जुटाना पड़ता है, तो उनकी वित्तीय लागत भी बढ़ सकती है। इस लागत का कितना हिस्सा आगे ग्राहकों तक पहुंचेगा, यह कारोबारियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।

    क्या ग्राहकों को सोना-चांदी 3% महंगा मिलेगा?

    नहीं, केवल अग्रिम IGST छूट खत्म होने का मतलब यह नहीं है कि सोना-चांदी की खुदरा कीमत सीधे 3% बढ़ जाएगी। यह बदलाव आयात के समय टैक्स भुगतान की व्यवस्था से जुड़ा है। अंतिम कीमत कई दूसरे कारकों से भी तय होती है।

    सोने-चांदी के दाम पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, आयात पर लागू अन्य शुल्कों और घरेलू मांग का असर पड़ता है। यदि आयातकों की लागत या वित्तीय खर्च बढ़ता है, तो उसका कुछ हिस्सा बाजार की कीमतों में शामिल किया जा सकता है। लेकिन यह अपने आप में तय नहीं है कि पूरी अतिरिक्त लागत ग्राहकों से ही वसूली जाएगी।

    इसलिए खरीदारों को कीमतों में संभावित बदलाव का आकलन करते समय केवल इस टैक्स संबंधी फैसले को आधार नहीं बनाना चाहिए।

    त्योहार और शादी के सीजन में क्यों अहम है बदलाव?

    भारत में त्योहारों और शादी-ब्याह के दौरान सोने-चांदी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय कीमतों और आयात लागत में होने वाला बदलाव घरेलू बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है।

    कीमती धातुओं का आयात देश के विदेशी मुद्रा खर्च और व्यापार घाटे से भी जुड़ा है। ऐसे में सरकार की ओर से आयात के अलग-अलग माध्यमों पर समान टैक्स व्यवस्था लागू करने का कदम कारोबारियों की लागत और बाजार की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है।

    आम खरीदार क्या ध्यान रखें?

    सोना या चांदी खरीदने से पहले ग्राहक इन बातों पर ध्यान दें:

    बाजार भाव: खरीदारी के दिन सोने या चांदी का ताजा भाव जांचें।
    मेकिंग चार्ज: आभूषणों पर लगने वाले मेकिंग चार्ज की जानकारी लें।
    लागू टैक्स: बिल में दर्ज टैक्स और अन्य शुल्कों की जांच करें।
    अंतिम कीमत: केवल 3% IGST से जुड़ी खबर के आधार पर कीमतों में समान अनुपात में बढ़ोतरी मानकर न चलें।

    कुल मिलाकर, अग्रिम IGST छूट समाप्त होने से बैंकों और आयातकों की नकदी जरूरत बढ़ सकती है, लेकिन आम खरीदारों के लिए सोना-चांदी कितना महंगा होगा, यह बाजार की परिस्थितियों और कारोबारियों की प्रतिक्रिया से तय होगा।

  • MP में ग्वालियर-चंबल में 2 दिन बारिश की संभावना, 15 अक्टूबर से करवट बदलेगा मौसम

    MP में ग्वालियर-चंबल में 2 दिन बारिश की संभावना, 15 अक्टूबर से करवट बदलेगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसमी सिस्टम सक्रिय रहने से बारिश का दौर पूरी तरह थमा नहीं है। प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण के असर से रविवार और सोमवार को ग्वालियर-चंबल संभाग के पांच जिलों में बारिश और तेज आंधी की संभावना है। वहीं, बंगाल की खाड़ी में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने से 15 अक्टूबर के बाद प्रदेश में फिर बारिश का दौर शुरू हो सकता है। दूसरी ओर, रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ रही है। इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश के प्रमुख शहरों में सबसे कम रहा।

    ग्वालियर-चंबल के पांच जिलों में बारिश के आसार

    मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, मध्य प्रदेश के ऊपरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं। इनके प्रभाव से रविवार और सोमवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया और श्योपुर में बारिश होने का अनुमान है। इन इलाकों में तेज आंधी के साथ पानी गिरने की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में भी एक कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से 15 अक्टूबर के बाद मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में दोबारा बारिश हो सकती है। इससे पहले 13 और 14 अक्टूबर को मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    इससे पहले शनिवार को सिंगरौली, रीवा, मऊगंज और सीधी जिलों में हल्की बारिश हुई। इन क्षेत्रों में बादल छाए रहे और कुछ स्थानों पर आंधी का असर भी देखने को मिला।

    इंदौर में सबसे ठंडी रात, भोपाल-पचमढ़ी में पारा 16.8 डिग्री

    बारिश और मौसमी बदलाव के बीच प्रदेश में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीती रात इंदौर में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहा। अमरकंटक में 16.6 डिग्री, भोपाल और पचमढ़ी में 16.8 डिग्री, शाजापुर में 17 डिग्री तथा कटनी के करौंदी में 17.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन के समय तेज धूप और गर्मी का असर बना हुआ है। बड़वानी, ग्वालियर, राजगढ़, खजुराहो, धार और उज्जैन में अधिकतम तापमान 36 डिग्री सेल्सियस या इससे अधिक दर्ज किया गया।

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में इसी तरह का मिला-जुला मौसम बना रह सकता है। दिन में धूप निकलेगी, जबकि रात के तापमान में गिरावट के कारण ठंडक महसूस होगी।

    3 अक्टूबर को लौट चुका है मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो चुका है। इसके बावजूद चक्रवाती परिसंचरण और अन्य मौसमी सिस्टम सक्रिय होने के कारण कुछ जिलों में बारिश हो रही है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह के मौसम का रुझान देखा गया है। इस बार भी अक्टूबर की शुरुआत में दिन के समय धूप और गर्मी रही, जबकि रात में ठंडक बढ़ी है। साथ ही, कुछ जिलों में बारिश भी दर्ज की जा रही है।

    इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। हालांकि, पूरे सीजन में हुई बारिश सामान्य औसत से कम रही।

    मानसून सीजन में सामान्य से 4% कम बारिश

    जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है। प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम दर्ज की गई।

    पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत के मुकाबले 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।

    वहीं, पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो चुका है, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    कम बारिश वाले 30 जिले: नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर।

    कुल मिलाकर, मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण कहीं हल्की बारिश तो कहीं तेज धूप का दौर जारी है। फिलहाल उत्तरी मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना है, जबकि 15 अक्टूबर के बाद बंगाल की खाड़ी से आने वाला नया सिस्टम मौसम में फिर बदलाव ला सकता है।

  • अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    अजिंक्य शिंदे कौन हैं, सीजेपी नेताओं की हिरासत के बाद जंतर-मंतर प्रदर्शन की जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई उन्हें

    नई दिल्ली ।कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, प्रवक्ता आशुतोष रांका और सह-संयोजक सौरव दास को दिल्ली एयरपोर्ट पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शन के नेतृत्व को लेकर सवाल उठने लगे। इसी बीच अभिजीत दीपके का पहले से रिकॉर्ड किया गया एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनकी गैरमौजूदगी में पार्टी के राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे आंदोलन का नेतृत्व करेंगे। इसके बाद शिंदे की राजनीतिक पृष्ठभूमि, पार्टी में उनकी भूमिका और आम आदमी पार्टी से उनके पुराने संबंधों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    अजिंक्य शिंदे मूल रूप से महाराष्ट्र के अलिबाग के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता खेती-किसानी करते हैं। उनकी उम्र 35 वर्ष बताई गई है और उनका संबंध महाराष्ट्र के लातूर से भी बताया गया है। शिंदे ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी, लोनेरे से बीटेक की पढ़ाई पूरी की है। राजनीति में आने से पहले वह पुणे की एक सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी में नौकरी करते थे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 2016 में नौकरी छोड़कर पूर्णकालिक सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में काम करना शुरू किया था। तकनीकी शिक्षा के बाद राजनीति में उनकी सक्रियता ने उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियों तक पहुंचाया।

    अजिंक्य शिंदे का आम आदमी पार्टी से भी जुड़ाव रहा है। वह महाराष्ट्र में पार्टी की युवा इकाई के प्रदेश संयोजक के तौर पर काम कर चुके हैं। इसके अलावा, उन्हें गोवा में आम आदमी पार्टी का सह-प्रभारी भी बनाया गया था। उनके सोशल मीडिया खातों पर वर्ष 2024 तक आम आदमी पार्टी के समर्थन में की गई पोस्ट मौजूद होने की जानकारी दी गई है। सीजेपी में उनकी मौजूदा भूमिका और आम आदमी पार्टी में पहले निभाई गई जिम्मेदारियों के कारण दोनों संगठनों के बीच संभावित राजनीतिक संबंधों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को अपने आप में दोनों दलों के बीच सीधे संबंध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

    सीजेपी में अजिंक्य शिंदे को 6 अगस्त 2026 को घोषित राष्ट्रीय कार्यसमिति के दौरान राष्ट्रीय संगठन प्रभारी नियुक्त किया गया था। यह पद पार्टी के संगठनात्मक कामकाज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सार्वजनिक रूप से शिंदे को दीपके का मार्गदर्शक बताया है। इससे पार्टी के भीतर उनके प्रभाव और नेतृत्व से जुड़े संबंधों का संकेत मिलता है। संगठन में उनकी जिम्मेदारी केवल पद तक सीमित नहीं रही। जून से 25 जुलाई 2026 के बीच दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी के प्रदर्शनों में भीड़ प्रबंधन, स्वयंसेवकों के समन्वय और पर्दे के पीछे की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी उनके पास होने की जानकारी सामने आई है।

    10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले तीन प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद शिंदे की भूमिका और अहम हो गई। अभिजीत दीपके ने अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो में कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि उनकी अनुपस्थिति में आंदोलन को अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में आगे बढ़ाया जाए। इस घोषणा के बाद शिंदे को प्रदर्शन की कमान संभालने वाले नेता के रूप में देखा जा रहा है। संगठनात्मक प्रबंधन और पहले के प्रदर्शनों में उनकी भूमिका को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी है।

    अब जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में अजिंक्य शिंदे की भूमिका पर नजर रहेगी। सीजेपी के शीर्ष नेताओं की हिरासत के बीच उन्हें कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करने और आंदोलन की व्यवस्थाएं संभालने की जिम्मेदारी दी गई है। दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियों के बीच पार्टी अपने कार्यक्रम को किस तरह आगे बढ़ाती है, यह आगे की गतिविधियों से स्पष्ट होगा।

  • दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    दिल्ली एयरपोर्ट पर सीजेपी नेताओं को हिरासत में लेने के दौरान विमान में महिला यात्री और सौरव दास के बीच तीखी बहस, वीडियो वायरल

    नई दिल्ली । दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं को विमान के भीतर से हिरासत में लिए जाने के दौरान विवाद सामने आया। इस कार्रवाई के समय पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और एक महिला यात्री के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। सीजेपी के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के विरोध में जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचे थे।

    विमान के एयरपोर्ट पर उतरने के बाद दिल्ली पुलिस की टीम उसके भीतर पहुंची। पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया। इसी दौरान विमान में मौजूद यात्रियों और पार्टी नेताओं के बीच बहस की स्थिति बनी। सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों को सौरव दास को विमान से बाहर ले जाते हुए देखा जा सकता है। उसी समय एक महिला यात्री उनसे कुछ कहती दिखाई देती है, जिसके बाद दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो जाती है।

    वीडियो में महिला यात्री सौरव दास से नाराजगी जताते हुए उन्हें “शर्म करो” कहती सुनाई देती है। इससे पहले दास भी तल्ख लहजे में प्रतिक्रिया देते नजर आते हैं। इसके बाद महिला यात्री की नाराजगी और बढ़ जाती है। फुटेज के एक हिस्से में पुलिस अधिकारियों के विमान में दाखिल होने के दौरान महिला यात्री को हंसते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध वीडियो से यह स्पष्ट नहीं होता कि महिला और सौरव दास के बीच बहस किस बात को लेकर शुरू हुई थी। इस विवाद के कारणों की पुष्टि नहीं हुई है।

    इस घटनाक्रम के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके भी पुलिस की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते दिखाई देते हैं। उनके इंस्टाग्राम लाइव से सामने आए वीडियो में महिला पुलिसकर्मियों समेत पुलिस टीम को विमान के भीतर उनकी ओर बढ़ते देखा जा सकता है। दीपके कहते सुनाई देते हैं कि दिल्ली पुलिस विमान में आ गई है और उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। इसके बाद वह कहते हैं कि वे गिरफ्तार होने के लिए ही आए हैं और पुलिस को उन्हें गिरफ्तार कर लेना चाहिए।

    वीडियो में अभिजीत दीपके पुलिसकर्मियों के सामने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते भी सुनाई देते हैं। उनका यह बयान और विमान के भीतर पुलिस की कार्रवाई से जुड़े दृश्य घटना के प्रमुख हिस्से के रूप में सामने आए हैं। इस दौरान पार्टी के अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। पूरी कार्रवाई उस समय हुई, जब सीजेपी के नेता चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के एसआईआर से जुड़े मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए राजधानी पहुंचे थे।

    प्रदर्शन को लेकर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पुलिस ने बिना पूर्व अनुमति प्रदर्शन या अनधिकृत सभा आयोजित करने पर रोक से संबंधित सुरक्षा कारणों का हवाला दिया। इसी के तहत नेताओं को एयरपोर्ट पर ही रोककर हिरासत में लिया गया। हालांकि, इस मामले में पुलिस कार्रवाई से संबंधित विस्तृत कानूनी जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए हिरासत के आधार और आगे की प्रक्रिया को लेकर इससे अधिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

    विमान के भीतर हुई बहस और सीजेपी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं। सीजेपी समर्थक पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि कुछ प्रतिक्रियाओं में विमान के भीतर हुए विवाद और सह-यात्रियों को हुई संभावित असुविधा पर चर्चा की जा रही है। महिला यात्री और सौरव दास के बीच बहस की वजह स्पष्ट नहीं होने के कारण विवाद के मूल कारण को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है।

  • भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    भारतीय शेयर बाजार में फिर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद, अगले वित्त वर्ष में कॉरपोरेट आय 17 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार इस साल डॉलर के लिहाज से 15.6 प्रतिशत गिरावट के बावजूद अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। अगले वित्त वर्ष में कंपनियों की आय में 17 प्रतिशत तक वृद्धि होने का अनुमान है। बाजार में गिरावट के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि, बैंक ऋण, कॉरपोरेट कर्ज और मशीनरी आयात से जुड़े आंकड़े आर्थिक गतिविधियों में मजबूती के संकेत दे रहे हैं। इन संकेतकों के आधार पर भारतीय बाजार की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक अनुमान जताया गया है।

    एक वैश्विक इक्विटी रणनीति रिपोर्ट में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के बाजारों में भारत को अपेक्षाकृत अधिक हिस्सेदारी देने की सिफारिश की गई है। रिपोर्ट तैयार करने वाले जेफरीज के इक्विटी रणनीति विभाग के ग्लोबल प्रमुख क्रिस वुड ने एमएससीआई एशिया पैसिफिक, जापान को छोड़कर, इंडेक्स में भारत के लिए 12 प्रतिशत आवंटन की सिफारिश की। इस इंडेक्स में भारत का भार 10.5 प्रतिशत है। रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय बाजार में गिरावट के बावजूद देश की दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं बनी हुई हैं और उपलब्ध आर्थिक आंकड़े भी मजबूत स्थिति दर्शाते हैं।

    स्थानीय मुद्रा में निफ्टी इस साल 13.4 प्रतिशत नीचे है। इस प्रदर्शन के आधार पर इंडोनेशिया के बाद भारतीय बाजार क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन करने वाले बाजारों में दूसरे स्थान पर है। इंडोनेशिया के बाजार में इस अवधि के दौरान 42.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। डॉलर के आधार पर भारतीय बाजार की गिरावट 15.6 प्रतिशत बताई गई है। इसके बावजूद रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की संरचनात्मक विकास की कहानी बरकरार है। इस आकलन में आर्थिक वृद्धि और कंपनियों की आय में संभावित बढ़ोतरी को महत्वपूर्ण माना गया है।

    रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। वहीं, नाममात्र जीडीपी वृद्धि दर 11 से 12 प्रतिशत रहने की संभावना बताई गई है। कॉरपोरेट आय के मामले में चालू वित्त वर्ष के दौरान 14 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है, जबकि अगले वित्त वर्ष में यह दर बढ़कर 17 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। कंपनियों की आय में संभावित तेजी शेयर बाजार के प्रदर्शन के लिए अहम संकेतक मानी जा रही है। हालांकि, ये आंकड़े अनुमान हैं और वास्तविक वृद्धि आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

    बैंकिंग क्षेत्र के आंकड़ों में भी ऋण गतिविधियों में बढ़ोतरी दिखाई गई है। सितंबर के मध्य तक बैंक ऋण में सालाना आधार पर 18.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अगस्त में कॉरपोरेट ऋण 21.6 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों यानी एमएसएमई को दिए गए कर्ज में 25.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ। इसी अवधि में जमा राशि 17.3 प्रतिशत बढ़ी। रिपोर्ट के अनुसार, कॉरपोरेट ऋण में यह वृद्धि इस संभावना की ओर संकेत करती है कि निजी क्षेत्र में लंबे समय से प्रतीक्षित पूंजीगत व्यय का चक्र शुरू हो सकता है।

    मशीनरी आयात के आंकड़े भी निवेश गतिविधियों में बदलाव का संकेत देते हैं। अगस्त में समाप्त 12 महीनों के दौरान भारत का मशीनरी आयात 66 अरब डॉलर रहा। वित्त वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 29 अरब डॉलर था। इसके अलावा, रिपोर्ट में भारतीय रुपये को लेकर भी आकलन प्रस्तुत किया गया है। क्रिस वुड के मुताबिक, वर्ष 2025 की शुरुआत से 10.7 प्रतिशत गिरावट के बाद रुपया संभवतः अपने निचले स्तर पर पहुंच गया है। इन आर्थिक संकेतकों के आधार पर रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के लिए अन्य क्षेत्रीय बाजारों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई गई है।

  • हैदराबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण की मांग नहीं, केंद्र ने किसानों के विरोध के बीच जारी किया स्पष्टीकरण

    हैदराबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए जमीन अधिग्रहण की मांग नहीं, केंद्र ने किसानों के विरोध के बीच जारी किया स्पष्टीकरण

    नई दिल्ली ।केंद्र सरकार ने हैदराबाद से जुड़ी प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं को लेकर स्पष्ट किया है कि फिलहाल इनके लिए जमीन अधिग्रहण की कोई मांग नहीं की गई है। हैदराबाद-चेन्नई, हैदराबाद-बेंगलुरु और हैदराबाद-पुणे हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की अलाइनमेंट स्टडी अभी चल रही है। केंद्र के अनुसार, इन कॉरिडोर का मार्ग निर्धारित होने के बाद ही संबंधित राज्य सरकारों और किसानों के साथ आवश्यक जानकारी साझा की जाएगी।

    केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने राष्ट्रीय राजधानी में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात के बाद यह जानकारी दी। दोनों मंत्रियों के बीच हैदराबाद को चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे से जोड़ने वाली प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कनेक्टिविटी पर चर्चा हुई। बैठक के बाद रेड्डी ने बताया कि रेल मंत्री ने साफ किया है कि संबंधित राज्य सरकारों को जमीन अधिग्रहण के संबंध में कोई अनुरोध नहीं भेजा गया है।

    रेड्डी के अनुसार, रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के मौजूदा चरण में हाई-स्पीड रेल के नाम पर जमीन का अधिग्रहण करना गैर-कानूनी है। उन्होंने कहा कि तीनों प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए अलाइनमेंट संबंधी अध्ययन जारी है। मार्ग का निर्धारण पूरा होने के बाद संबंधित राज्य सरकारों और किसानों को इसके बारे में जानकारी दी जाएगी। इस स्पष्टीकरण से परियोजना के लिए जमीन लेने की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।

    यह बयान ऐसे समय आया है, जब तेलंगाना में रेल कॉरिडोर और अन्य परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की कोशिशों को लेकर किसानों का विरोध सामने आया है। हैदराबाद के बाहरी इलाकों में किसान जमीन अधिग्रहण के खिलाफ विरोध कर रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार ने प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के संबंध में मौजूदा स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि अभी जमीन अधिग्रहण के लिए संबंधित राज्य सरकारों को कोई मांग नहीं भेजी गई है। फिलहाल परियोजनाओं का मार्ग तय करने के लिए अध्ययन किया जा रहा है।

    प्रस्तावित रेल कनेक्टिविटी को लेकर पहले भी चर्चा हुई थी। दक्षिण मध्य रेलवे की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में अश्विनी वैष्णव और जी. किशन रेड्डी के बीच हैदराबाद को चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे से जोड़ने वाले हाई-स्पीड रेल मार्गों पर विस्तार से चर्चा होने की जानकारी दी गई थी। मौजूदा स्पष्टीकरण में केंद्र ने दोहराया है कि तीनों कॉरिडोर की अलाइनमेंट स्टडी पूरी होने और मार्ग निर्धारित किए जाने के बाद ही संबंधित पक्षों के साथ जानकारी साझा की जाएगी।

    रेलवे के बजट खर्च और सुरक्षा से जुड़े कार्यों के संबंध में भी जानकारी दी गई थी। अगस्त में सरकार ने बताया था कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित बजट में से जुलाई तक भारतीय रेलवे 1,14,973 करोड़ रुपये खर्च कर चुका था। यह राशि 2,93,030 करोड़ रुपये के कुल बजट का लगभग 39 प्रतिशत थी।

    रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी। उन्होंने बताया कि रेलवे में सुरक्षा से जुड़े कार्यों पर खर्च 2013-14 में 39,200 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बढ़कर 1,20,389 करोड़ रुपये हो गया। स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम कवच के संबंध में उन्होंने बताया कि 31 जुलाई तक इसके संस्करण 4.0 को 2,633 रूट किलोमीटर पर लागू किया जा चुका था। इसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे अधिक यातायात वाले रेल कॉरिडोर के महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं।

  • नवरात्रि में माता रानी के स्वागत के लिए प्लेलिस्ट में शामिल करें ये 12 भजन, पूजा से लेकर माता की चौकी तक छाएगा भक्तिमय माहौल

    नवरात्रि में माता रानी के स्वागत के लिए प्लेलिस्ट में शामिल करें ये 12 भजन, पूजा से लेकर माता की चौकी तक छाएगा भक्तिमय माहौल


    नई दिल्ली । नवरात्रि का पर्व आते ही घरों और मंदिरों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। भक्त माता की चौकी सजाते हैं, कलश स्थापना की तैयारी करते हैं और अखंड ज्योत जलाकर मां का स्वागत करते हैं। इस दौरान भक्ति संगीत का भी विशेष महत्व होता है। माता रानी के भजन पूजा के माहौल को भक्तिमय बनाने के साथ श्रद्धालुओं को अपनी आस्था व्यक्त करने का अवसर देते हैं। सुबह की पूजा से लेकर शाम की आरती और भजन संध्या तक, मां के गीत उत्सव की रौनक बढ़ा सकते हैं।

    नवरात्रि के लिए भजनों की प्लेलिस्ट तैयार करते समय ऐसे गीत चुने जा सकते हैं, जिनमें मां की ममता, भक्तों के प्रति विश्वास, देवी की महिमा और उनके दरबार की सुंदरता का वर्णन हो। कुछ भजन भक्त और माता के रिश्ते को भावनात्मक रूप से व्यक्त करते हैं, जबकि कुछ गीत नवरात्रि के आगमन और उत्सव की उमंग से जुड़े हैं। इस अवसर पर पुराने और नए भक्ति गीतों को एक साथ सुनने का विकल्प भी रखा जा सकता है।

    इस सूची में पहला भजन ‘माई है ना’ है। मां को अपना सहारा मानने वाले भक्तों के लिए यह गीत खास भाव रखता है। इसे सुबह की पूजा या दिन की शुरुआत के समय सुना जा सकता है। दूसरा भजन ‘मेरी मां के बराबर कोई नहीं’ है, जिसे पायल देव ने गाया है। यह गीत मां की ममता और उनके प्रति श्रद्धा की भावना को व्यक्त करता है। तीसरा भजन ‘मैं बालक तू माता’ है। इसके बोल भक्त और माता के बीच अटूट संबंध को दर्शाते हैं। इस गीत का आधुनिक संस्करण भी श्रोताओं के बीच लोकप्रिय है।

    चौथा गीत ‘मेरी माई जगदम्बा भवानी’ मां जगदम्बा की स्तुति से जुड़ा है। इसे प्लेलिस्ट में शामिल करके देवी के प्रति आस्था और श्रद्धा के भाव को स्थान दिया जा सकता है। पांचवां भजन ‘शेरावाली मां’ माता की स्तुति और उनके दरबार से जुड़ी भक्ति भावना को सामने लाता है। मां की सजावट, चुनरी और जयकारों के बीच इस तरह के गीत नवरात्रि के उत्सव के अनुकूल रहते हैं। छठा गीत ‘आई है नवरात्रि’ पर्व के आगमन की खुशी और उत्साह से जुड़ा है। इसे सुनकर पूजा की तैयारियों के दौरान उत्सवी माहौल बनाया जा सकता है।

    सातवां भजन ‘माई’ मां के दरबार में हाजिरी लगाने और उनके प्रति समर्पण व्यक्त करने की भावना से जुड़ा है। आठवां गीत ‘तेरे मंदिरों की शान निराली, री शेरावाली मां’ देवी के मंदिरों की सुंदरता, दरबार की रौनक और भक्तों की आस्था को केंद्र में रखता है। नौवां भजन ‘माता मेरी माता’ देवी के विभिन्न रूपों की महिमा का स्मरण कराने वाला गीत है। इन तीनों भजनों को माता की पूजा, भजन संध्या या घर में धार्मिक आयोजन के दौरान सुना जा सकता है।

    दसवां गीत ‘मैया का चोला है रंगला’ मां के श्रृंगार और रंग-बिरंगी चुनरी से जुड़े भावों को प्रस्तुत करता है। माता की चौकी सजाते समय या भजन संध्या में इसे शामिल किया जा सकता है। ग्यारहवां भजन ‘बिगड़ी मेरी बना दे’ मां के सामने अपनी परेशानियां रखने और उनसे सुख, शांति तथा साहस की कामना करने की भावना से जुड़ा है। बारहवां गीत ‘प्यारा सजा है तेरा द्वार’ माता के दरबार को सजाने और उनके स्वागत में भजन गाने की परंपरा से मेल खाता है। इसे कलश स्थापना, शाम की आरती या माता की चौकी से पहले सुना जा सकता है।

    नवरात्रि के नौ दिनों में इन 12 भजनों को अपनी पसंद के अनुसार प्लेलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। सुबह की आरती, पूजा की तैयारी, माता की चौकी और शाम के धार्मिक आयोजन के लिए अलग-अलग गीत चुने जा सकते हैं। मां दुर्गा की स्तुति से जुड़े इन भजनों के माध्यम से परिवार के लोग एक साथ भक्ति के पल बिता सकते हैं और पर्व के दौरान श्रद्धा तथा उत्साह से भरा माहौल बना सकते हैं।

  • CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    CJP नेताओं की हिरासत पर शशि थरूर ने उठाए सवाल, दिल्ली में 22 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।दिल्ली में 10 अक्टूबर को सिटिजन जस्टिस एंड पीस (CJP) के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने राजधानी में पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती को युद्ध जैसी स्थिति बताते हुए कहा कि शहर में जिस स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था की गई है, वैसी स्थिति उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। थरूर के अनुसार, वह रात दो बजे के बाद राष्ट्रीय राजधानी लौटे और इसके बाद उन्होंने शहर में व्यापक सुरक्षा बंदोबस्त तथा आवाजाही पर प्रतिबंध देखे।

    थरूर ने कहा कि दिल्ली में हर कुछ सौ मीटर की दूरी पर सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं। सड़कों पर कंक्रीट के बैरिकेड और स्पाइक स्ट्रिप्स लगाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे शहर में लगभग 22,000 पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। उनके बयान के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था के बीच 250 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशन भी बंद कर दिए गए। कांग्रेस सांसद ने इन व्यवस्थाओं को लेकर चिंता जताई और राजधानी में आम लोगों की आवाजाही पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया।

    थरूर ने दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में युवाओं को उनके घरों और सड़कों से हिरासत में लिए जाने की खबरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी चुनावों की निष्पक्षता पर शांतिपूर्ण तरीके से सवाल उठाना चाहते हैं, लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने राजधानी के मध्य हिस्से में इंटरनेट सेवाएं बंद किए जाने को भी दमनकारी कदम बताया। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में नागरिकों के लिए अपनी बात रखना और सार्वजनिक स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

    कांग्रेस सांसद ने जंतर-मंतर तक पहुंचने पर लगाई गई पाबंदियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को नागरिकों के लिए अपनी असहमति व्यक्त करने के उद्देश्य से निर्धारित किया गया था, लेकिन प्रदर्शन के दौरान वहां जाने वाली सड़कों पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए। थरूर ने इसे आवागमन की स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि जब राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत होती है, तब इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और ऐसी तत्परता क्यों दिखाई नहीं देती।

    थरूर ने हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। उन्होंने सवाल किया कि यदि प्रदर्शनकारी सोमवार को दोबारा राजधानी में एकत्र होते हैं, तो क्या प्रशासन फिर से इसी तरह प्रतिबंध लगाएगा। उन्होंने कहा कि चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने वाले नागरिकों के साथ सरकार का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, यदि सरकार चुनावी प्रक्रिया पर भरोसा रखती है, तो उसे सवाल उठाने वालों का स्वागत करना चाहिए। इसके विपरीत, राजधानी को किले में बदलने जैसी व्यवस्था लोगों के संदेह को कम करने के बजाय बढ़ा सकती है।

    कांग्रेस सांसद ने कहा कि केवल बैरिकेड लगाने से चुनाव आयोग के प्रति लोगों का विश्वास बहाल नहीं होगा। उनके मुताबिक, आयोग जितनी जल्दी जनता के सवालों का जवाब देगा, उतनी जल्दी शांति बहाल होने की संभावना बनेगी। उन्होंने लोकतंत्र की मजबूती को इस बात से जोड़कर देखा कि संस्थाएं अपने कामकाज पर सवाल उठाने वाले लोगों के साथ कैसा व्यवहार करती हैं। थरूर ने दिल्ली में दिखाई गई व्यवस्था को शर्मनाक और अमानवीय बताया। उनका कहना था कि शांतिपूर्ण असहमति और चुनावों की निष्पक्षता से जुड़े सवालों का जवाब देना जरूरी है। उन्होंने हिरासत, सुरक्षा प्रतिबंधों और सार्वजनिक आवाजाही से जुड़े मुद्दों पर सरकार तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए।