Blog

  • काला सागर में फंसे 3 भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी… जानिए क्या पूरा मामला?

    काला सागर में फंसे 3 भारतीयों की सुरक्षित स्वदेश वापसी… जानिए क्या पूरा मामला?


    बुखारेस्ट (रोमानिया)।
    काला सागर (Black Sea) में जहाज (Ship) से बचाए गए तीन भारतीय नागरिक अब स्वदेश लौट रहे हैं। भारतीय दूतावास (Embassy of India) ने रविवार को बताया कि साहिल संधू, अश्विनी कुमार और हरमन सिंह भारत (India) के लिए रवाना हो गए हैं। दूतावास ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए जरूरी मदद और सहायता उपलब्ध कराई। इससे पहले, तीनों को छह अक्तूबर को जहाज एमवी रॉयद मम्मादोव (Ship MV Roid Mammadov) से बचाया गया था। यह जहाज काला सागर में था।


    तीनों की वापसी के लिए क्या मदद दी गई?

    रोमानिया और मोल्दोवा में भारतीय दूतावास ने आज सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया। इसमें बताया गया कि तीनों भारतीय नागरिक आज भारत के लिए रवाना हो गए हैं। दूतावास ने उनकी वापसी आसान बनाने के लिए सभी जरूरी मदद और सहायता दी।

    दूतावास ने रोमानिया के अधिकारियों, कॉन्स्टांटा काउंटी अस्पताल और रोमानिया की बचाव टीमों का आभार जताया। उसने कहा कि इन सभी ने अहम मदद की। साथ ही, सहयोग और समर्थन दिया। इस पोस्ट में विदेश मंत्रालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, प्रधानमंत्री कार्यालय, विदेश मंत्री एस जयशंकर और भारतीय कूटनीति (इंडियन डिप्लोमेसी) को भी टैग कर आभार जताया गया।


    कहां रह रहे थे तीनों भारतीय?

    दूतावास ने सात अक्तूबर को जानकारी दी थी कि उसके एक प्रतिनिधि ने एक दिन पहले बचाए गए तीनों भारतीय नागरिकों से मुलाकात की थी। ये तीनों एमवी रॉयद मम्मादोव जहाज से बचाए गए थे। जहाज काला सागर में था। दूतावास ने बताया था कि इनमें से दो भारतीयों को एक होटल में ठहराया गया था। तीसरे भारतीय का रोमानिया के कॉन्स्टांटा स्थित काउंटी अस्पताल में इलाज चल रहा था। उस समय तीनों की हालत स्थिर थी।


    दूतावास ने क्या इंतजाम किए?

    दूतावास ने तीनों भारतीयों को भरोसा दिलाया था कि रोमानिया से उनकी सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए हर जरूरी सहायता दी जाएगी। उनकी जरूरत की चीजें भी उपलब्ध कराई गईं। इनमें मोबाइल फोन जैसी जरूरी वस्तुएं शामिल थीं। ये सामान शिपिंग कंपनी के स्थानीय एजेंट की मदद से दिलाए गए। उनके लिए भारतीय भोजन का भी इंतजाम किया गया। इसके लिए एक स्थानीय भारतीय रेस्तरां की मदद ली गई।

  • नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील

    नेपाल की बूढ़ी गंडक नदी में फिर भयंकर बाढ़ आने का अलर्ट… लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील


    काठमांडू।
    नेपाल (Nepal) में बुधी गंडक नदी (Budhi Gandak River) में बड़ी बाढ़ आने की चेतावनी जारी की गई है. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने लोगों को सतर्क रहने को कहा है. प्राधिकरण ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सुरक्षित जगहों पर जाने की अपील की है. साथ ही नदी के पास जाने से बचने की सलाह दी है।

    NDRRMA ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर यह जानकारी दी. पोस्ट के मुताबिक, चुमानुम्ब्री ग्रामीण नगरपालिका-6 की तरफ से बुधी गंडक नदी में बाढ़ का पानी आ रहा है. इसे देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने के लिए कहा गया है. अधिकारियों ने साफ कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के करीब न जाएं।


    त्रिशूली दोभान तक नदी के पास जाने से बचें

    NDRRMA ने त्रिशूली दोभान तक नदी के किनारे जाने से मना किया है. प्रशासन का कहना है कि बाढ़ का पानी आने के दौरान नदी के आसपास रहना खतरनाक हो सकता है. ऐसे में लोगों को नदी से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

    प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे चेतावनी को गंभीरता से लें. बाढ़ का पानी गुजरने तक नदी के पास जाने या वहां रुकने से बचें. खासकर नदी के किनारे रहने वाले लोगों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. प्राधिकरण ने लोगों को ऊंचाई वाली जगहों पर जाने की सलाह दी है. बाढ़ के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने का खतरा हो सकता है. ऐसे में सुरक्षित और ऊंची जगह पर रहना जरूरी है।

    NDRRMA ने कहा कि लोगों को प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करना चाहिए. नदी के पास जाने से बचना चाहिए और बाढ़ की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए. अगर आसपास पानी का स्तर बढ़ता दिखाई दे, तो सुरक्षित जगह पर जाना जरूरी है।


    ‘बाढ़ का पानी गुजरने तक सतर्क रहें’

    प्राधिकरण ने कहा है कि जब तक बाढ़ का पानी पूरी तरह गुजर नहीं जाता, तब तक नदी के आसपास जाने से बचें. लोगों को जल्दबाजी में नदी पार करने या किनारे के करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने लोगों से अपील की है कि वे अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दें. बाढ़ का खतरा टलने तक ऊंचाई वाली सुरक्षित जगहों पर रहें और नदी से दूर रहें।

    इससे पहले भी नेपाल की बुधी गंडक नदी में बाढ़ से भारी नुकसान हुआ था. सितंबर 2026 में गोरखा जिले के नामरुंग इलाके में बाढ़ के कारण मनास्लु ट्रेक का रास्ता बंद हो गया था. बाढ़ में दो पुल बह गए थे. इनमें बूढ़ी गंडकी नदी पर बना एक झूला पुल भी शामिल था. बाढ़ से दो जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा था।

  • उत्तर भारत में ओलावृष्टि और बर्फबारी से बदला मौसम… पूरब और दक्षिण में बारिश का दौर जारी

    उत्तर भारत में ओलावृष्टि और बर्फबारी से बदला मौसम… पूरब और दक्षिण में बारिश का दौर जारी


    नई दिल्ली।
    उत्तर भारत (North India) के पहाड़ी व मैदानी इलाकों में ओलावृष्टि (Hailstorms) और बर्फबारी (Snowfall) से मौसम (Weather Change) में अचानक बदलाव आया है, वहीं पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में जोरदार बारिश (Rain) का सिलसिला जारी है। पिछले 24 घंटों के दौरान बिहार में भारी दर्ज की गई है और कई क्षेत्रों में 12 से 20 सेमीटर तक पानी बरसने से फसलों को नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिमोत्तर उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चली हैं।

    मौसम विभाग के मुताबि, मौसम में यह बदलाव पश्चिमी विक्षोभ और वायुमंडलीय हलचल के प्रभाव से आया है। हिमाचल प्रदेश के मनाली सहित ऊझी घाटी में शनिवार दोपहर बाद बारिश हुई। रोहतांग सहित कुंजम दर्रा, बारालाचा व शिंकुला सहित ऊंची चोटियों पर बर्फबारी हुई है। यहां शुक्रवार रात को भी फाहे गिरे थे। बारिश और बर्फबारी से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है और जनजातीय क्षेत्र कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान गिरकर 1.9 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। राज्य में 16 अक्तूबर तक मौसम खराब रहने का अनुमान है। इस दौरान ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और मैदानी व मध्य पर्वतीय इलाकों में बारिश हो सकती है। 13 और 14 अक्तूबर को कुछ स्थानों पर अंधड़ का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    आदि कैलाश में फिर हुई बर्फबारी
    उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में शनिवार को भी ताजा हिमपात हुआ। बर्फबारी होने से कैलाश पर्वत के दर्शन नहीं हुए। इससे यात्रियों को निराश लौटना पड़ा। दोपहर बाद मौसम खुलने से 100 से अधिक यात्रियों ने आदि कैलाश के दर्शन किए। आदि कैलाश क्षेत्र में अब भी तीन से चार फीट बर्फ जमा है। लगातार हो रही बर्फबारी से आदि कैलाश में तापमान माइनस दो से माइनस तीन डिग्री पहुंच गया है। इससे कड़ाके की ठंड पड़ रही है।


    मलबा आने से तीन घंटे रुकी केदारनाथ यात्रा

    रुद्रप्रयाग में केदारनाथ पैदल मार्ग पर चीरबासा में मलबा और पत्थर आने से शनिवार सुबह छह बजे से नौ बजे तक यात्रियों की आवाजाही रोकनी पड़ी। सुरक्षा के मद्देनजर गौरीकुंड और सोनप्रयाग में यात्रियों को रोका गया। सुबह नौ बजे मार्ग खुलने के बाद आवाजाही सुचारु करा दी गई। बीते दिन हुई तेज बारिश के बाद रात में चीरबासा में मलबा आने से पैदल मार्ग अवरुद्ध हो गया था।


    अभी बदला रहेगा मौसम का मिजाज :

    उत्तर भारत के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में अगले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज बदला रहेगा। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सहित मैदानी राज्यों में 16 अक्तबर तक रुक-रुक कर बारिश, आंधी और बिजली गिरने का अनुमान है। वहीं, 11 अक्तूबर तथा 14-15 अक्तूबर को यहां कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजधानी दिल्ली में 16 अक्तूबर के बीच छिटपुट बारिश होगी।

  • मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से खुलेगा सुख समृद्धि का मार्ग, जानिए नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान

    मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा से खुलेगा सुख समृद्धि का मार्ग, जानिए नवरात्रि के पहले दिन क्या करें और किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । शारदीय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की उपासना और शक्ति की आराधना का विशेष अवसर माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के नौ स्वरूपों की विधि विधान से पूजा की जाती है। इस पावन पर्व के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं और उन्हें मां दुर्गा का प्रथम स्वरूप माना जाता है। नवरात्रि की शुरुआत में भक्त मां शैलपुत्री से सुख शांति साहस और समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिरों और घरों में पूजा की तैयारियां की जाती हैं और घटस्थापना के साथ देवी उपासना का शुभारंभ होता है। मान्यता है कि श्रद्धा और सच्चे मन से मां शैलपुत्री की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शक्ति और सकारात्मकता प्राप्त होती है।
    मां शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत दिव्य और कल्याणकारी माना जाता है। धार्मिक चित्रों में उन्हें वृषभ यानी बैल पर विराजमान दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का फूल होता है। मां शैलपुत्री को प्रकृति और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार वे पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं और भगवान शिव से उनका विवाह हुआ था। अगले जन्म में उन्होंने हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और शैलपुत्री कहलायीं। इसी कारण नवरात्रि के पहले दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व बताया जाता है। भक्त मां के इस स्वरूप की आराधना करके जीवन में स्थिरता और दृढ़ संकल्प की कामना करते हैं।
    नवरात्रि के पहले दिन पूजा की शुरुआत सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनने से की जाती है। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाया जाता है और मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले शुभ मुहूर्त में घटस्थापना की जाती है। इसके लिए मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और विधि के अनुसार जल से भरा कलश स्थापित किया जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर मां शैलपुत्री का ध्यान किया जाता है। उन्हें फूल अक्षत चंदन धूप दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। पूजा के दौरान मां शैलपुत्री के मंत्र का जाप किया जा सकता है। उनका प्रचलित मंत्र है ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः। भक्त अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार आरती करके पूजा संपन्न करते हैं।
    मां शैलपुत्री की पूजा में सफेद रंग का विशेष महत्व बताया जाता है। कई धार्मिक परंपराओं में उन्हें सफेद फूल और सफेद रंग से जुड़ी पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। भोग में शुद्ध घी अर्पित करने की मान्यता भी प्रचलित है। श्रद्धालु पूजा के समय परिवार की सुख समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं। हालांकि पूजा सामग्री और भोग की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं। घटस्थापना का शुभ समय भी स्थान और पंचांग के अनुसार अलग होता है इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में मुहूर्त की पुष्टि करना उचित है।
    नवरात्रि के पहले दिन कई भक्त उपवास भी रखते हैं। कुछ लोग पूरे नौ दिनों तक व्रत करते हैं जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन उपवास रखते हैं। व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन का सेवन किया जाता है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर अपनी क्षमता के अनुसार भोजन करना चाहिए और लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए। मां शैलपुत्री की आराधना के साथ नवरात्रि का शुभारंभ भक्तों को श्रद्धा अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश देता है। नौ दिनों तक चलने वाली यह उपासना मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों के प्रति भक्ति प्रकट करने का अवसर है।
  • ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क

    ‘पेपर लीक अब रोग बन चुका है’, शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी बोले- परीक्षाओं की सुरक्षा के लिए सरकारें सतर्क


    पटना। देश में प्रतियोगी और अन्य परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक की घटनाओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक अब एक रोग बन चुका है और इससे निपटने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारें लगातार सतर्कता बरत रही हैं। सरकारों का प्रयास है कि परीक्षाएं निष्पक्ष और सुरक्षित माहौल में आयोजित हों, ताकि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा की जा सके।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री पटना से दिल्ली रवाना होने के दौरान एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने पेपर लीक की समस्या के साथ बिहार की शिक्षा व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर भी अपनी बात रखी।

    छात्रों के खर्च की भरपाई पर क्या बोले शिक्षा मंत्री?

    परीक्षा में पेपर लीक होने की स्थिति में विद्यार्थियों के खर्च का भुगतान शिक्षा विभाग की ओर से किए जाने संबंधी सवाल पर प्रह्लाद जोशी ने कहा कि संबंधित अध्यक्ष ने इस बारे में क्या बयान दिया है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में जनता पर अनावश्यक खर्च का बोझ नहीं पड़ना चाहिए।

    पेपर लीक जैसी घटनाओं के कारण विद्यार्थियों को दोबारा परीक्षा देने, यात्रा करने और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च करना पड़ सकता है। ऐसे में परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना और गड़बड़ियों की आशंका कम करना महत्वपूर्ण है।

    बिहार की शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा

    प्रह्लाद जोशी ने बताया कि बिहार में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के साथ बैठक हुई है। इसमें प्राथमिक शिक्षा सहित शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा विभाग समेत विभिन्न क्षेत्रों में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

    शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख करते हुए उन्होंने परीक्षा संचालन में सतर्कता और पारदर्शिता की जरूरत पर भी जोर दिया।

    निष्पक्ष परीक्षा के लिए व्यवस्थाएं मजबूत करना जरूरी

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं गंभीर चुनौती बन चुकी हैं। केंद्र और राज्य सरकारें परीक्षाओं को पारदर्शी, निष्पक्ष और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए सावधानी बरत रही हैं। बिहार सरकार भी इस दिशा में जरूरी व्यवस्थाएं कर रही है।

    परीक्षा में गड़बड़ियों को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है। पेपर लीक की घटनाओं से छात्रों की मेहनत, समय और भविष्य प्रभावित हो सकता है। ऐसे में परीक्षा प्रणाली को भरोसेमंद बनाना और अनियमितताओं की गुंजाइश कम करना सरकारों के सामने अहम चुनौती है।

  • पेरू में ‘हिटलर मुसोलिनी’ बना मेयर, सिर्फ 25 वोटों से जीता चुनाव, नाम के कारण दुनिया भर में चर्चा

    पेरू में ‘हिटलर मुसोलिनी’ बना मेयर, सिर्फ 25 वोटों से जीता चुनाव, नाम के कारण दुनिया भर में चर्चा


    नई दिल्ली। चुनाव में जीत दर्ज करने वाले नेताओं की चर्चा आमतौर पर उनके राजनीतिक विचारों, वादों और कामकाज को लेकर होती है, लेकिन पेरू में एक नवनिर्वाचित मेयर अपने नाम की वजह से सुर्खियों में हैं। यहां हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस ने स्थानीय निकाय चुनाव में जीत हासिल की है। उनके नाम में शामिल ‘हिटलर’ और ‘मुसोलिनी’ शब्दों ने इस चुनाव को दुनिया भर में चर्चा का विषय बना दिया है।

    45 वर्षीय फ्लोरेस ने पेरू के हुआनुको विभाग के पहाड़ी इलाके में स्थित क्वेरोपाल्का जिले में मेयर पद का चुनाव लड़ा था। उन्होंने केंद्रीय-वामपंथी पार्टी ‘आहोरा नासियोन’ के टिकट पर मैदान में उतरकर जीत दर्ज की। चुनाव में उन्हें 229 वोट मिले, जो कुल 663 वैध मतों का 34.5 प्रतिशत है।

    फ्लोरेस ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी गैस्पर बेनिल्डे ओसोरियो ज़ाम्ब्रानो को केवल 25 वोटों के अंतर से हराया। दक्षिणपंथी पार्टी ‘पॉपुलर रिन्यूअल पेरू’ के उम्मीदवार ओसोरियो को 204 वोट मिले।

    730 से कुछ अधिक आबादी वाला जिला, लेकिन चर्चा पूरी दुनिया में

    क्वेरोपाल्का पेरू के लौरिकोचा प्रांत में स्थित एक छोटा-सा जिला है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में यहां की आबादी 730 से कुछ अधिक थी। यह इलाका राजधानी लीमा से करीब 360 किलोमीटर दूर है।

    इतनी कम आबादी वाले जिले में हुए स्थानीय चुनाव की चर्चा सामान्य तौर पर क्षेत्र तक सीमित रह सकती थी, लेकिन फ्लोरेस के नाम ने इसे अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। उनके नाम के दो हिस्से जर्मनी के एडोल्फ हिटलर और इटली के बेनिटो मुसोलिनी की याद दिलाते हैं। दोनों 20वीं सदी के कुख्यात तानाशाहों में गिने जाते हैं और फासीवादी विचारधारा तथा दमनकारी शासन से जुड़े रहे थे।

    हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम अपने आप में उसके राजनीतिक विचारों या विचारधारा का प्रमाण नहीं होता। फ्लोरेस की चुनावी जीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिलचस्पी की प्रमुख वजह भी उनके नाम और ऐतिहासिक तानाशाहों के नामों से उसकी समानता है।

    पेरू में पहले भी ‘हिटलर’ नाम वाले नेता बटोर चुके हैं सुर्खियां

    पेरू में यह पहला मामला नहीं है, जब किसी नेता के नाम में ‘हिटलर’ शब्द होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई हो। इससे पहले हिटलर ग्यूस्कलिन अल्बा सांचेज भी अपने नाम को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। वह केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी ‘वी आर पेरू’ से जुड़े थे और वर्ष 2011 से 2014 तक युंगार शहर के मेयर रहे थे।

    अल्बा ने वर्ष 2018 में भी मेयर का चुनाव जीता था। उस समय उनके प्रतिद्वंद्वी लेनिन व्लादिमीर रोड्रिगेज वाल्वरडे ने उनकी उम्मीदवारी की वैधता को चुनौती दी थी।

    रिपोर्टों के मुताबिक, अल्बा ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान ‘हिटलर रिटर्न्स’ और ‘हिटलर विद द पीपल’ जैसे नारे इस्तेमाल किए थे। उन्होंने खुद को ‘अच्छा हिटलर’ भी बताया था। अल्बा का कहना था कि उनके पिता ने उनका नाम रखते समय नाजी नेता एडोल्फ हिटलर के इतिहास और उसकी विरासत के बारे में जानकारी नहीं रखी थी।

    सांसद भी रहे हैं हिटलर नाम वाले नेता

    पेरू में हिटलर नाम के एक अन्य नेता भी चर्चा में रहे हैं। हिटलर सावेद्रा पेशे से सर्जन थे और ‘वी आर पेरू’ पार्टी से सांसद बने थे। उन्होंने वर्ष 2021 से 2024 में अपनी मृत्यु तक संसद में काम किया। उनका निधन 46 वर्ष की उम्र में हुआ था।

    इन मामलों ने पेरू के कुछ नेताओं के नामों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में बार-बार चर्चा का विषय बनाया है। अब हिटलर मुसोलिनी सिमेओन फ्लोरेस की जीत के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे ऐतिहासिक रूप से विवादास्पद नाम किसी स्थानीय चुनाव को किस तरह वैश्विक सुर्खियों तक पहुंचा सकते हैं।

  • कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार को करें ये उपाय, सूर्य देव की कृपा से मिलेगा मान सम्मान और तरक्की, जानिए पूजा के जरूरी नियम

    कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए रविवार को करें ये उपाय, सूर्य देव की कृपा से मिलेगा मान सम्मान और तरक्की, जानिए पूजा के जरूरी नियम


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता माना जाता है क्योंकि वे प्रतिदिन अपने प्रकाश से पूरी दुनिया को रोशन करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य देव ऊर्जा आत्मविश्वास स्वास्थ्य और मान सम्मान के कारक हैं। यही वजह है कि सनातन परंपरा में प्रतिदिन सुबह सूर्य को जल अर्पित करने और उनकी आराधना करने का विशेष महत्व बताया गया है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और उगते सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार की सुख समृद्धि और जीवन में सफलता की कामना करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियम के साथ सूर्य उपासना करने से मन में सकारात्मकता आती है और व्यक्ति को अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है।
    सूर्य देव की पूजा के लिए सुबह का समय विशेष शुभ माना जाता है। सूर्योदय के आसपास स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और सूर्य की ओर मुख करके तांबे के लोटे में साफ जल भरें। परंपरा के अनुसार इसमें लाल फूल और अक्षत डाल सकते हैं। इसके बाद दोनों हाथों से लोटा उठाकर धीरे धीरे सूर्य देव को जल अर्पित करें। इस दौरान जल की धारा के बीच से सूर्य के दर्शन करते हुए मन में श्रद्धा रखें और परिवार की खुशहाली की प्रार्थना करें। पूजा के समय सूर्य मंत्र का जाप भी किया जा सकता है। ॐ सूर्याय नमः और ॐ घृणि सूर्याय नमः जैसे मंत्रों का श्रद्धापूर्वक उच्चारण किया जाता है। अर्घ्य देते समय ध्यान रखें कि पानी सड़क या किसी के आने जाने वाले रास्ते पर न गिरे और पूजा के बाद उस स्थान को साफ रखा जाए।
    धार्मिक मान्यताओं में सूर्य देव को नवग्रहों का प्रमुख स्थान प्राप्त है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मबल नेतृत्व पिता सम्मान और प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता के अनुसार कुंडली में सूर्य की अनुकूल स्थिति व्यक्ति के आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता का प्रतीक मानी जाती है। इसी विश्वास के चलते कई लोग रविवार को विशेष पूजा पाठ करते हैं और सूर्य देव से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं। हालांकि ज्योतिषीय उपाय आस्था और परंपरा का विषय हैं इसलिए जीवन की समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक प्रयास करना भी जरूरी है।
    रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा के साथ दान पुण्य करने की परंपरा भी प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को भोजन कपड़े या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं। कुछ लोग इस दिन गेहूं गुड़ और तांबे से जुड़ी वस्तुओं का दान भी करते हैं। पूजा के दौरान स्वच्छता संयम और अच्छे व्यवहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। कई परिवार रविवार को सात्विक भोजन करते हैं और अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत भी रखते हैं। व्रत रखने वालों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए और जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी तथा पौष्टिक भोजन लेना चाहिए।
    सूर्य देव की उपासना का महत्व केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है। सुबह उठकर कुछ समय प्राकृतिक रोशनी में बिताना नियमित दिनचर्या बनाने और सक्रिय रहने की प्रेरणा भी देता है। सूर्य की रोशनी में आंखों से सीधे देखना उचित नहीं है क्योंकि इससे आंखों को नुकसान पहुंच सकता है। सूर्य नमस्कार जैसे योग अभ्यास भी स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं लेकिन इन्हें अपनी क्षमता के अनुसार करना चाहिए। इस प्रकार रविवार को सूर्य देव की पूजा श्रद्धा अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ की जा सकती है। भक्त इस दिन सूर्य को अर्घ्य देकर जीवन में ऊर्जा स्वास्थ्य सुख शांति और सफलता की कामना करते हैं।

  • रविवार को करें घर की इन जगहों में जरूरी बदलाव, वास्तु के अनुसार बढ़ेगी सकारात्मकता और दूर होगा नकारात्मक माहौल, जानिए सुख समृद्धि के खास टिप्स

    रविवार को करें घर की इन जगहों में जरूरी बदलाव, वास्तु के अनुसार बढ़ेगी सकारात्मकता और दूर होगा नकारात्मक माहौल, जानिए सुख समृद्धि के खास टिप्स


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन सूर्य उपासना के साथ घर की साफ सफाई और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। वास्तु शास्त्र में घर की दिशाओं और वस्तुओं की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में स्वच्छता और संतुलित व्यवस्था होने से सुख शांति का माहौल बनता है। यही वजह है कि कई लोग रविवार को घर की विशेष सफाई करते हैं और पूजा स्थल से लेकर मुख्य द्वार तक हर जगह को व्यवस्थित रखते हैं। यदि आप भी घर में सकारात्मकता और खुशहाली चाहते हैं तो रविवार के दिन कुछ आसान वास्तु टिप्स अपना सकते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े उपाय पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें जीवन की हर परेशानी का निश्चित समाधान नहीं मानना चाहिए।
    वास्तु मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया जाता है क्योंकि यही घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है। रविवार को मुख्य द्वार और उसके आसपास की अच्छी तरह सफाई करें। दरवाजे के सामने कचरा टूटे गमले या अनुपयोगी सामान जमा न होने दें। प्रवेश द्वार पर पर्याप्त रोशनी रखें और यह सुनिश्चित करें कि दरवाजा आसानी से खुल सके। धार्मिक आस्था रखने वाले लोग मुख्य द्वार पर स्वस्तिक या अन्य शुभ चिह्न बना सकते हैं। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार शुभता का प्रतीक होता है। व्यावहारिक रूप से भी इससे घर का वातावरण आकर्षक और सुविधाजनक बनता है।
    रविवार को सूर्य देव की पूजा करना भी विशेष फलदायी माना जाता है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनकर उगते सूर्य को जल अर्पित करें। इस दौरान सूर्य देव का स्मरण करते हुए परिवार की सुख शांति और समृद्धि की कामना की जा सकती है। घर में पूजा का स्थान साफ रखें और वहां बिखरी हुई पूजन सामग्री को व्यवस्थित करें। दीपक या अगरबत्ती जलाते समय आग से जुड़ी सावधानियां जरूर बरतें। वास्तु की कुछ मान्यताओं में उत्तर पूर्व दिशा को पूजा और ध्यान के लिए उपयुक्त बताया जाता है लेकिन घर में पहले से बने पूजा स्थल को केवल दिशा के कारण बदलना जरूरी नहीं है। ऐसा स्थान चुनना बेहतर है जहां शांति और स्वच्छता बनी रहे।
    रसोई घर की ऐसी जगह है जहां साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रविवार को रसोई के डिब्बों अलमारियों और काम करने वाले स्थान की सफाई करें। खराब हो चुके खाद्य पदार्थों को हटा दें और खाने पीने की वस्तुओं को सही तरीके से रखें। गैस चूल्हे के आसपास अनावश्यक सामान जमा न होने दें। वास्तु की पारंपरिक मान्यताओं में दक्षिण पूर्व दिशा को अग्नि तत्व से जोड़ा जाता है। हालांकि रसोई की दिशा बदलने से ज्यादा जरूरी है कि वहां पर्याप्त हवा और रोशनी हो तथा खाना बनाते समय सुरक्षा बनी रहे। इसी तरह घर के शयनकक्ष में बिस्तर और अलमारी के आसपास अनावश्यक सामान हटाने से जगह व्यवस्थित रहती है और आराम करने में सुविधा होती है।
    वास्तु टिप्स के अनुसार घर के कोनों में लंबे समय तक बेकार सामान जमा रखना उचित नहीं माना जाता। रविवार को ऐसे सामान की पहचान करें जिसकी अब जरूरत नहीं है और उसे व्यवस्थित तरीके से हटा दें। खिड़कियों को साफ रखें ताकि प्राकृतिक रोशनी घर में आ सके। यदि घर में पौधे लगाए हैं तो उनकी देखभाल करें और सूखी पत्तियों को हटा दें। घर में पानी का रिसाव हो रहा हो तो उसे ठीक करवाएं क्योंकि इससे दीवारों और फर्श को नुकसान हो सकता है। ये छोटे कदम घर को साफ सुरक्षित और रहने के लिहाज से अधिक आरामदायक बना सकते हैं।
    रविवार को वास्तु के उपाय अपनाते समय अपनी सुविधा और बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। केवल किसी दिशा या मान्यता के आधार पर महंगे बदलाव कराने की जरूरत नहीं है। घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए परिवार के सदस्यों के बीच अच्छा व्यवहार स्वच्छता और व्यवस्थित दिनचर्या भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सूर्य देव की पूजा और घर की सफाई को श्रद्धा के साथ अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। इस तरह रविवार का दिन आध्यात्मिक जुड़ाव के साथ घर को बेहतर और सकारात्मक बनाने का अवसर बन सकता है।
  • जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज

    जेलेंस्की पर भड़के ट्रंप, बोले- यूक्रेन को चुन लेना चाहिए नया राष्ट्रपति, रूस की रिफाइनरियों पर हमलों से नाराज


    नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के बीच मतभेद एक बार फिर सामने आए हैं। ट्रंप ने जेलेंस्की की आलोचना करते हुए कहा है कि यूक्रेन को अब नया राष्ट्रपति चुन लेना चाहिए। उनका आरोप है कि जेलेंस्की के पास रूस के साथ समझौता करने के कई अवसर थे, लेकिन उन्होंने इन मौकों का लाभ नहीं उठाया।

    ट्रंप की नाराजगी खास तौर पर रूस की तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के हमलों को लेकर है। उनका मानना है कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने से ईंधन की वैश्विक आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले जारी हैं और रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना भी विवाद का विषय बनी हुई है।

    ‘ऐसा नेता चाहिए, जो रूस से समझौता कर सके’

    ट्रंप पहले भी जेलेंस्की को रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमले रोकने की सलाह दे चुके हैं। उनका तर्क है कि ऐसे हमलों से युद्ध समाप्त करने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

    ट्रंप का आरोप है कि जेलेंस्की ने रूस के साथ समझौता करने के कई मौके गंवा दिए। अब उन्होंने यूक्रेन में ऐसे नेतृत्व की जरूरत बताई है, जो रूस के साथ बातचीत कर किसी समझौते तक पहुंच सके। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त कराने को लेकर अमेरिका की भूमिका और जेलेंस्की के नेतृत्व पर ट्रंप की नाराजगी फिर चर्चा में आ गई है।

    रूस के हमलों में 20 लोगों की मौत का दावा

    इस बीच यूक्रेन पर रूस के हमले लगातार जारी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को जापोरिज्जिया क्षेत्र में रूसी हवाई हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में तीन बच्चे भी शामिल बताए गए हैं, जबकि 18 लोग घायल हुए हैं।

    रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव को भी मिसाइल हमले से निशाना बनाया। इस हमले में चार लोगों के घायल होने की खबर है। रूस के हमलों में रिहायशी इलाकों और शहरों के साथ ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है। लगातार हो रहे हमलों के बीच युद्धविराम और बातचीत की संभावनाएं अब भी चुनौती बनी हुई हैं।

    रूस से डीजल खरीदने की अमेरिकी योजना पर विवाद

    ट्रंप ने शुक्रवार को रूस से डीजल खरीदने से जुड़े समझौते का ऐलान किया था। उनके मुताबिक, रूस अमेरिका को तीन लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे भी बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने की योजना बताई गई।

    इस फैसले को लेकर यूक्रेन ने चिंता जताई है। उसकी आशंका है कि रूस को ऊर्जा उत्पाद बेचकर मिलने वाली कमाई युद्ध जारी रखने के लिए इस्तेमाल की जा सकती है। इस वजह से अमेरिकी योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि अमेरिका पहले रूस पर आर्थिक दबाव बनाने और प्रतिबंधों के जरिए उसकी युद्ध क्षमता सीमित करने की नीति का समर्थन करता रहा है।

    यूरोपीय देशों को भी रूस की ऊर्जा कमाई पर चिंता

    रूस से डीजल खरीदने की योजना को लेकर यूरोप के कुछ देशों ने भी चिंता जताई है। स्वीडन ने कहा है कि ऊर्जा क्षेत्र से होने वाली कमाई रूस के युद्ध खर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वहीं, जर्मनी ने रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को जारी रखने की बात कही है।

    इस पूरे विवाद में ट्रंप का जोर रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराने पर है। इसके विपरीत, जेलेंस्की का रुख रहा है कि रूस पर दबाव कम करने से उसके हमले रुकने के बजाय और बढ़ सकते हैं। रूस की रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों, अमेरिकी डीजल खरीद योजना और युद्ध समाप्त करने के तरीके को लेकर दोनों पक्षों के बीच यही मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं।

  • मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, नौ दिनों तक होगी शक्ति की उपासना, घटस्थापना से कन्या पूजन तक जानिए नवरात्रि की पूरी परंपरा

    मां दुर्गा की भक्ति में डूबेगा देश, नौ दिनों तक होगी शक्ति की उपासना, घटस्थापना से कन्या पूजन तक जानिए नवरात्रि की पूरी परंपरा


    नई दिल्ली । देशभर में शारदीय नवरात्रि के आगमन के साथ ही मां दुर्गा की भक्ति और आराधना का विशेष पर्व शुरू हो रहा है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पावन उत्सव को लेकर भक्तों में उत्साह और श्रद्धा का माहौल है। घरों से लेकर मंदिरों तक पूजा की तैयारियां की जा रही हैं और देवी के स्वागत के लिए पूजा स्थल सजाए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करने पर सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का समापन 19 अक्टूबर को होगा जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा। इन नौ दिनों में भक्त पूजा पाठ व्रत और सेवा के माध्यम से मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करेंगे।
    नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसे कलश स्थापना भी कहा जाता है और इसी के साथ देवी उपासना की शुरुआत होती है। घटस्थापना से पहले घर के पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ सफाई करनी चाहिए। इसके बाद चौकी पर लाल या स्वच्छ कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा अथवा तस्वीर स्थापित की जाती है। परंपरा के अनुसार मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और निर्धारित विधि से कलश की स्थापना की जाती है। कलश को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद दीपक जलाकर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है और उन्हें फूल अक्षत फल तथा अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है इसलिए पूजा से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए समय की पुष्टि करना उचित है।
    नवरात्रि के प्रत्येक दिन मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूप की पूजा की जाती है। पहले दिन मां शैलपुत्री दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवें दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी और सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना होती है। आठवें दिन मां महागौरी और नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक परंपराओं और श्रद्धा के अनुसार नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। कुछ श्रद्धालु पूरे नौ दिन उपवास करते हैं जबकि कुछ पहले और अंतिम दिन व्रत रखकर देवी की उपासना करते हैं। व्रत के दौरान फलाहार और सात्विक भोजन को प्राथमिकता दी जाती है।
    धार्मिक मान्यताओं के साथ नवरात्रि का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी है। देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं दुर्गा पूजा के भव्य पंडाल सजाए जाते हैं तो कहीं गरबा और डांडिया के आयोजन भक्तों को आकर्षित करते हैं। मंदिरों में विशेष आरती भजन और कीर्तन होते हैं। अष्टमी और नवमी के अवसर पर कई परिवार कन्या पूजन करते हैं और छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर भोजन कराते हैं। जरूरतमंदों की सहायता और दान पुण्य को भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
    नवरात्रि के दौरान पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखना श्रद्धापूर्वक पूजा करना और अपनी क्षमता के अनुसार व्रत रखना जरूरी है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर लंबे समय तक भूखे रहने से बचना चाहिए और जरूरत के अनुसार पौष्टिक आहार लेना चाहिए। नवरात्रि केवल उपवास और धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं बल्कि आत्मसंयम सकारात्मकता और बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश भी देता है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा से परिवार की खुशहाली सुख शांति और जीवन में सफलता की कामना करते हैं। विजयादशमी के साथ इस पर्व का समापन होगा और श्रद्धालु धर्म की विजय तथा अधर्म के अंत का संदेश लेकर आगे बढ़ेंगे।