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  • कागजी नोटों की जगह आएगी प्लास्टिक आधारित करेंसी? ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मिली मंजूरी

    कागजी नोटों की जगह आएगी प्लास्टिक आधारित करेंसी? ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के ट्रायल को मिली मंजूरी

    नई दिल्ली। भारत की करेंसी व्यवस्था में आने वाले समय में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार ने 10 रुपये और 20 रुपये के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। संसद में मंगलवार को दी गई जानकारी के मुताबिक दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब यानी कुल 2 अरब पॉलीमर नोटों को ट्रायल के लिए जारी करने की योजना को स्वीकृति मिली है। अगर यह परीक्षण सफल रहता है तो आने वाले समय में इन नोटों को नियमित रूप से प्रचलन में लाने का रास्ता साफ हो सकता है। इस कदम का उद्देश्य भारतीय मुद्रा को ज्यादा टिकाऊ बनाने के साथ उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत करना है।

    राज्यसभा में लिखित जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक के केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश के आधार पर आरबीआई ने आरबीआई अधिनियम 1934 की धारा 25 के तहत पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के मुताबिक ट्रायल के दौरान 10 रुपये और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलीमर नोट तैयार किए जाएंगे। परीक्षण के नतीजे संतोषजनक रहने पर भविष्य में इन मूल्यवर्गों के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जा सकते हैं।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पॉलीमर नोट आने के बाद पुराने कागजी नोटों को तत्काल बंद करने की योजना नहीं है। आरबीआई के अनुसार पॉलीमर बैंक नोटों को मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से चलाने का प्रस्ताव है। यानी शुरुआती दौर में लोगों को कागजी और पॉलीमर दोनों तरह के 10 और 20 रुपये के नोट इस्तेमाल करने को मिल सकते हैं।

    पॉलीमर बैंक नोट खास तरह के प्लास्टिक आधारित पदार्थ से बनाए जाते हैं। इनकी सबसे बड़ी खासियत इनका ज्यादा टिकाऊ होना है। सामान्य कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट नमी, धूल और रोजमर्रा के इस्तेमाल से होने वाली घिसावट को बेहतर तरीके से सहन कर सकते हैं। यही कारण है कि दुनिया के कई देशों में पहले से पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन जैसे देशों में पॉलीमर बैंक नोट लंबे समय से प्रचलन में हैं।

    पॉलीमर नोटों की ज्यादा उम्र का सीधा फायदा करेंसी प्रबंधन पर भी पड़ सकता है। अगर नोट ज्यादा समय तक खराब हुए बिना चल सकें तो पुराने नोटों को बार-बार बदलने और नए नोट छापने की जरूरत कम हो सकती है। इसके अलावा पॉलीमर नोटों में आधुनिक सुरक्षा फीचर शामिल करना भी अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। इससे नकली नोटों की समस्या पर नियंत्रण करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    हालांकि सरकार ने अभी पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच बड़े स्तर पर जारी करने की तारीख तय नहीं की है। वित्त मंत्री ने बताया कि आरबीआई की ओर से आवश्यक खरीद प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। ऐसे में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि पॉलीमर नोट आम लोगों के हाथ में कब तक पहुंचेंगे और पूरी परियोजना पर कितना खर्च आएगा।

    आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि पॉलीमर नोटों को लेकर परीक्षण जारी है और बाजार में उतारने से पहले इनकी पूरी तरह जांच की जाएगी। केंद्रीय बैंक फील्ड ट्रायल के परिणामों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही बड़े स्तर पर पॉलीमर नोटों को जारी करने का अंतिम फैसला करेगा। आरबीआई का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाने का है।

    अगर फील्ड ट्रायल सफल रहता है और इसके बाद नियमित जारी करने की मंजूरी मिलती है तो भारत की मुद्रा व्यवस्था में यह एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। फिलहाल 10 और 20 रुपये के 2 अरब पॉलीमर नोटों का परीक्षण इस दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में ट्रायल के परिणाम यह तय करेंगे कि भारत में प्लास्टिक आधारित करेंसी का इस्तेमाल कितने बड़े स्तर तक बढ़ाया जाएगा।

  • डीयू में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 74 पदों पर भर्ती, 20 अगस्त तक करें आवेदन

    डीयू में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के 74 पदों पर भर्ती, 20 अगस्त तक करें आवेदन


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर नौकरी की तलाश कर रहे योग्य अभ्यर्थियों के लिए शानदार अवसर सामने आया है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने विभिन्न विभागों में कुल 74 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इनमें एसोसिएट प्रोफेसर के 48 और प्रोफेसर के 26 पद शामिल हैं। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 20 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    एसोसिएट प्रोफेसर के 48 पदों में रसायन विज्ञान के 4, पर्यावरण अध्ययन के 3, आनुवंशिकी के 2, भू-विज्ञान के 4, हिंदी के 4, भाषा-विज्ञान के 6, ऑपरेशनल रिसर्च के 3, दर्शनशास्त्र के 16 और प्राणी-विज्ञान के 6 पद शामिल हैं। वहीं प्रोफेसर के 26 पदों में रसायन विज्ञान के 6, पर्यावरण अध्ययन के 2, आनुवंशिकी का 1, भू-विज्ञान के 3, हिंदी के 3, भाषा-विज्ञान के 2, ऑपरेशनल रिसर्च का 1, दर्शनशास्त्र के 4 और प्राणी-विज्ञान के 4 पद हैं।

    एसोसिएट प्रोफेसर पद के लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में कम से कम 55 प्रतिशत अंकों के साथ मास्टर डिग्री और संबंधित या प्रासंगिक विषय में पीएचडी होनी चाहिए। इसके साथ ही अच्छा शैक्षणिक रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय, कॉलेज या मान्यता प्राप्त शोध संस्थान अथवा उद्योग में असिस्टेंट प्रोफेसर के समकक्ष पद पर कम से कम आठ वर्ष का शिक्षण या शोध अनुभव जरूरी है। उम्मीदवार के पास पीयर-रिव्यू या यूजीसी सूचीबद्ध जर्नल में कम से कम सात शोध प्रकाशन भी होने चाहिए।

    प्रोफेसर पद के लिए संबंधित या प्रासंगिक विषय में पीएचडी के साथ उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य का रिकॉर्ड जरूरी है। उम्मीदवार के पास पीयर-रिव्यू या यूजीसी सूचीबद्ध जर्नल में कम से कम 10 शोध प्रकाशन और विश्वविद्यालय या कॉलेज में शिक्षण अथवा राष्ट्रीय स्तर के संस्थान में शोध का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। डॉक्टरेट विद्यार्थियों को सफलतापूर्वक गाइड करने का अनुभव भी पात्रता का हिस्सा है। निर्धारित योग्यता रखने वाले संबंधित क्षेत्र के उत्कृष्ट प्रोफेशनल भी शर्तों के अनुसार आवेदन कर सकते हैं।

    इन पदों पर उम्मीदवारों का चयन आवेदन की स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग के बाद इंटरव्यू सहित निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर किया जाएगा। प्रोफेसर पद पर चयनित उम्मीदवारों को 7वें वेतन आयोग के वेतन मैट्रिक्स के लेवल-14 के अनुसार वेतन मिलेगा, जबकि एसोसिएट प्रोफेसर का वेतन लेवल-13ए के अनुसार निर्धारित होगा।

    आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपनी श्रेणी के अनुसार शुल्क भी जमा करना होगा। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 2,000 रुपये है। ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और महिला उम्मीदवारों के लिए 1,500 रुपये, एससी और एसटी अभ्यर्थियों के लिए 1,000 रुपये तथा पीडब्ल्यूबीडी श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 500 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।

    उम्मीदवारों को आवेदन करने से पहले संबंधित आधिकारिक नोटिफिकेशन में अपनी शैक्षणिक योग्यता, अनुभव, विषयवार पद और अन्य पात्रता शर्तों को ध्यान से जांच लेना चाहिए। आवेदन की अंतिम तारीख 20 अगस्त 2026 है, इसलिए योग्य उम्मीदवार अंतिम समय की तकनीकी परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

  • क्रिकेट जगत में मचा हड़कंप, अभिषेक पोरेल रेप के आरोप में गिरफ्तार; शादी का झांसा देने का है मामला

    क्रिकेट जगत में मचा हड़कंप, अभिषेक पोरेल रेप के आरोप में गिरफ्तार; शादी का झांसा देने का है मामला


    नई दिल्ली। आईपीएल में दिल्ली कैपिटल्स के लिए खेलने वाले विकेटकीपर-बल्लेबाज अभिषेक पोरेल को मंगलवार सुबह कर्नाटक के हुबली में पुलिस ने गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोप से जुड़े मामले में की गई है। पुलिस के अनुसार मामले की शिकायत एक युवती ने 23 जून को मोगरा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। युवती कर्नाटक में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और अब क्रिकेटर की गिरफ्तारी की गई है।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायतकर्ता और अभिषेक पोरेल के बीच तीन साल से ज्यादा समय तक संबंध रहे। आरोप है कि दोनों ने शादी करने की योजना भी बनाई थी और साथ में विदेश यात्रा भी की थी। हालांकि बाद में दोनों के रिश्ते में विवाद शुरू हो गया। बताया गया है कि करीब डेढ़ साल पहले दोनों के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा था। उस समय कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। बाद में युवती ने पुलिस के सामने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए हुगली ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कुंवर भूषण सिंह मोगरा पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। इसके बाद डीएसपी क्राइम अभिजीत सिन्हा महापात्रा ने स्थानीय थाना प्रभारी से मामले की जानकारी ली और जांच को लेकर जरूरी निर्देश दिए। पुलिस ने जांच के दौरान अभिषेक पोरेल से पूछताछ और उनकी तलाश के लिए चंदननगर स्थित उनके घर पर कई बार पहुंचने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के पहुंचने के समय क्रिकेटर वहां मौजूद नहीं मिले।

    इसके बाद शिकायतकर्ता ने मामले को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। रिपोर्ट के अनुसार हाईकोर्ट की ओर से पुलिस को अभिषेक पोरेल की गिरफ्तारी का निर्देश दिया गया। इसके बाद मोगरा पुलिस ने कार्रवाई करते हुए क्रिकेटर को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद अब उन्हें चिनसुराह कोर्ट में पेश किया जाएगा। मामले में पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

    अभिषेक पोरेल भारतीय घरेलू क्रिकेट के साथ आईपीएल में भी अपनी पहचान बना चुके हैं। वह वर्ष 2023 से दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के लिए अब तक 35 मैच खेले हैं और 25.63 की औसत से 769 रन बनाए हैं। उनके नाम चार अर्धशतक भी दर्ज हैं। घरेलू क्रिकेट में वह 32 फर्स्ट क्लास और 23 लिस्ट-ए मुकाबले भी खेल चुके हैं।

    फिलहाल पूरा मामला पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद ही मामले के सभी तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी। अभिषेक पोरेल को कोर्ट में पेश किए जाने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

  • विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ रचा बड़ा रिकॉर्ड, 610 रन के साथ टॉप पर; जयसूर्या 571 और सहवाग 491 रन

    विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ रचा बड़ा रिकॉर्ड, 610 रन के साथ टॉप पर; जयसूर्या 571 और सहवाग 491 रन


    नई दिल्ली।  भारत और श्रीलंका के बीच 2 टेस्ट मैचों की आगामी सीरीज को लेकर क्रिकेट फैंस की नजरें दोनों टीमों के स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हैं। भारतीय टीम श्रीलंका पहुंच चुकी है और सीरीज का पहला टेस्ट 15 अगस्त से खेला जाएगा, जबकि दूसरा मुकाबला 23 अगस्त से कोलंबो में होने वाला है। भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट क्रिकेट में हमेशा बल्लेबाजों का खास दबदबा रहा है और दोनों देशों के बीच किसी एक टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड भारतीय दिग्गज विराट कोहली के नाम दर्ज है। यही वजह है कि मौजूदा सीरीज शुरू होने से पहले एक बार फिर विराट के इस शानदार रिकॉर्ड की चर्चा तेज हो गई है।

    विराट कोहली ने श्रीलंका के खिलाफ भारत में खेली गई 2017-18 की तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में बल्ले से जबरदस्त प्रदर्शन किया था। उन्होंने सीरीज की पांच पारियों में तीन शतक और एक अर्धशतक की मदद से कुल 610 रन बनाए थे। इस दौरान विराट का बल्लेबाजी औसत 152.50 रहा था और उनका सर्वोच्च स्कोर 243 रन था। विराट की इस शानदार बल्लेबाजी के दम पर वह भारत और श्रीलंका के बीच किसी एक टेस्ट सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन गए। 610 रन का यह आंकड़ा आज भी दोनों देशों के बीच एक टेस्ट सीरीज में सर्वाधिक रन का रिकॉर्ड है।

    इस रिकॉर्ड लिस्ट में दूसरे नंबर पर श्रीलंका के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज सनथ जयसूर्या का नाम आता है। जयसूर्या ने 1997 में श्रीलंका की धरती पर भारत के खिलाफ खेली गई दो टेस्ट मैचों की सीरीज में तीन पारियों में कुल 571 रन बनाए थे। उन्होंने इस सीरीज में दो शानदार शतक लगाए थे और उनका बल्लेबाजी औसत 190.33 रहा था। जयसूर्या के प्रदर्शन की सबसे खास बात उनकी ऐतिहासिक 340 रन की पारी रही थी। यह उनके टेस्ट करियर का सर्वोच्च स्कोर भी रहा। इस पारी के दम पर जयसूर्या ने भारत के खिलाफ उस सीरीज में ऐसा प्रदर्शन किया था जिसे लंबे समय तक याद किया गया।

    वहीं इस सूची में तीसरे स्थाSanath Jayasuriya, Virender Sehwag, Shubman Gill, KL Rahul, Yashasvi Jaiswal, Cricket News, Test Cricketन पर भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग हैं। सहवाग ने भारत में 2009-10 के दौरान श्रीलंका के खिलाफ खेली गई तीन टेस्ट मैचों की सीरीज की चार पारियों में 491 रन बनाए थे। सहवाग ने इस सीरीज में दो शतक और एक अर्धशतक लगाया था। उनका बल्लेबाजी औसत 122.75 रहा था। सहवाग के लिए इस सीरीज का सबसे यादगार पल उनका 293 रन का स्कोर रहा, हालांकि वह तिहरा शतक पूरा करने से सिर्फ सात रन दूर रह गए थे।
    वहीं इस सूची में तीसरे स्थाSanath Jayasuriya, Virender Sehwag, Shubman Gill, KL Rahul, Yashasvi Jaiswal, Cricket News, Test Cricketन पर भारत के पूर्व विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग हैं। सहवाग ने भारत में 2009-10 के दौरान श्रीलंका के खिलाफ खेली गई तीन टेस्ट मैचों की सीरीज की चार पारियों में 491 रन बनाए थे। सहवाग ने इस सीरीज में दो शतक और एक अर्धशतक लगाया था। उनका बल्लेबाजी औसत 122.75 रहा था। सहवाग के लिए इस सीरीज का सबसे यादगार पल उनका 293 रन का स्कोर रहा, हालांकि वह तिहरा शतक पूरा करने से सिर्फ सात रन दूर रह गए थे।

    अब भारत और श्रीलंका के बीच एक और टेस्ट सीरीज होने जा रही है और इस बार भी बल्लेबाजों पर खास नजर रहेगी। भारतीय टीम की तरफ से शुभमन गिल, केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल जैसे बल्लेबाज बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। वहीं श्रीलंका की ओर से लाहिरू उदारा, कामिंदु मेंडिस, कप्तान धनंजय डी सिल्वा और कुसल मेंडिस भारतीय गेंदबाजों के सामने बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं।

    भारत-श्रीलंका टेस्ट मुकाबलों में बल्लेबाजों का इतिहास शानदार रहा है। अब देखना होगा कि आगामी सीरीज में कौन सा बल्लेबाज अपनी बल्लेबाजी से नया रिकॉर्ड बनाता है और क्या कोई खिलाड़ी विराट कोहली के 610 रन के आंकड़े के करीब पहुंच पाता है।

  • हज यात्रियों को बड़ी राहत, अग्रिम राशि जमा करने की तारीख बढ़ी; अब 17 अगस्त तक जमा होंगे ₹1.52 लाख

    हज यात्रियों को बड़ी राहत, अग्रिम राशि जमा करने की तारीख बढ़ी; अब 17 अगस्त तक जमा होंगे ₹1.52 लाख


    भोपाल  भोपाल सहित मध्य प्रदेश के हज यात्रियों के लिए अहम खबर सामने आई है। हज-2027 के लिए प्रोविजनल रूप से चयनित यात्रियों को अग्रिम हज राशि जमा करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है। हज कमेटी ऑफ इंडिया ने राशि जमा करने की अंतिम तारीख को बढ़ाकर अब 17 अगस्त 2026 कर दिया है। इससे उन यात्रियों को राहत मिली है जो निर्धारित समय तक भुगतान नहीं कर पाए थे। पहले अग्रिम हज राशि जमा करने की अंतिम तारीख 10 अगस्त 2026 तय की गई थी, जिसे अब एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी ने सभी चयनित यात्रियों से अपील की है कि वे नई समय सीमा का ध्यान रखते हुए निर्धारित राशि समय पर जमा कर दें, ताकि उनकी हज यात्रा की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।

    हज कमेटी ऑफ इंडिया के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय से प्राप्त पत्र के अनुसार हज-2027 के लिए प्रोविजनल रूप से चयनित प्रत्येक हज यात्री को अग्रिम हज राशि के रूप में 1 लाख 52 हजार 300 रुपये जमा करने होंगे। यात्रियों के लिए भुगतान की कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। चयनित यात्री क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग के माध्यम से हज कमेटी की वेबसाइट अथवा हज सुविधा ऐप पर जाकर राशि जमा कर सकते हैं। इसके अलावा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की किसी भी शाखा में निर्धारित पे-इन-स्लिप के जरिए भी भुगतान किया जा सकता है।

    बैंक के माध्यम से भुगतान करने वाले यात्रियों को एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया का ध्यान रखना होगा। राशि जमा करने के बाद बैंक रेफरेंस नंबर दर्ज करना जरूरी होगा। यात्रियों को सलाह दी गई है कि भुगतान के बाद मिलने वाली रसीद और संबंधित दस्तावेजों को सुरक्षित रखें, क्योंकि आगे की हज प्रक्रिया में इनकी जरूरत पड़ सकती है।

    राज्य हज कमेटी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन यात्रियों ने शॉर्ट हज पैकेज का विकल्प चुना है, उन्हें भी अग्रिम हज राशि जमा करने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। यानी शॉर्ट पैकेज चुनने वाले चयनित यात्रियों को भी 17 अगस्त 2026 तक 1 लाख 52 हजार 300 रुपये की राशि जमा करनी होगी। किसी भी श्रेणी के चयनित यात्री को भुगतान की अंतिम तारीख को लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं करने वाले यात्रियों की प्रोविजनल हज सीट रद्द की जा सकती है। हज कमेटी ने स्पष्ट किया है कि 17 अगस्त 2026 तक अग्रिम हज राशि जमा नहीं करने पर चयनित यात्री की सीट बिना किसी अतिरिक्त सूचना के रद्द की जा सकती है। ऐसे में चयनित यात्रियों को आखिरी तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते भुगतान पूरा करने की सलाह दी गई है।

    मध्य प्रदेश राज्य हज कमेटी के अनुसार राशि जमा करने और आगे की प्रक्रिया से संबंधित जरूरी दिशा-निर्देश समय-समय पर जारी किए जाएंगे। चयनित यात्री हज कमेटी ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट और हज सुविधा ऐप के माध्यम से भुगतान तथा हज यात्रा से जुड़ी नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। हज-2027 के लिए चयनित यात्रियों के लिए यह तारीख बढ़ना राहत की खबर जरूर है, लेकिन अब 17 अगस्त की समय सीमा का पालन करना बेहद जरूरी होगा।

  • भोपाल के होटल में पुलिसकर्मी बनकर घुसे चार लोग, युवक-युवती को केस में फंसाने की धमकी देकर ऐंठे 70 हजार

    भोपाल के होटल में पुलिसकर्मी बनकर घुसे चार लोग, युवक-युवती को केस में फंसाने की धमकी देकर ऐंठे 70 हजार


    नई दिल्ली। भोपाल के पिपलानी थाना क्षेत्र में एक होटल के कमरे में युवक और युवती से कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर पैसे वसूलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि चार लोग सामान्य कपड़ों में होटल के कमरे में पहुंचे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर युवक-युवती से पूछताछ शुरू कर दी। इसके बाद दोनों को केस में फंसाने और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया गया। इसी दबाव के बीच आरोपियों ने युवक से करीब 60 से 70 हजार रुपये ऐंठ लिए। घटना की शिकायत मिलने के बाद पिपलानी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है।

    पुलिस के मुताबिक घटना 3 अगस्त की शाम करीब 6 बजे की है। बरखेड़ी खुर्द निवासी युवक पिपलानी इलाके के एक होटल में युवती के साथ कमरे में मौजूद था। इसी दौरान चार लोग कमरे में पहुंचे। आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताया और युवक-युवती से पूछताछ करने लगे। अचानक कमरे में इस तरह पहुंचने और खुद को पुलिसकर्मी बताने के कारण दोनों घबरा गए। आरोपियों ने उन्हें कथित तौर पर कार्रवाई और केस में फंसाने की धमकी दी।

    पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने युवक पर दबाव बनाया। इसी दौरान उनमें से एक व्यक्ति ने खुद को मदद करने वाला बताते हुए मामले को खत्म कराने और युवक-युवती को कार्रवाई से बचाने की बात कही। आरोप है कि इसी बहाने युवक से करीब 60 से 70 हजार रुपये वसूल लिए गए। घटना के बाद युवक ने पिपलानी थाने पहुंचकर पुलिस को पूरे मामले की जानकारी दी। हालांकि शिकायत घटना के करीब चार से पांच दिन बाद दर्ज कराई गई।

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अबूजर, रघुवीर और करुणा शाही के रूप में हुई है। वहीं चौथा आरोपी यावर अभी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया गया था और मंगलवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया जाना है।

    इस मामले में पुलिस को केवल फर्जी पुलिसकर्मी बनकर वसूली किए जाने का शक ही नहीं है बल्कि पूरे घटनाक्रम के पीछे पहले से बनाई गई किसी साजिश की आशंका भी जांच के दायरे में है। प्रारंभिक जांच में पुलिस हनीट्रैप जैसी साजिश के एंगल से भी मामले को देख रही है। हालांकि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि युवक को होटल तक बुलाने या फिर आरोपियों के कमरे में पहुंचने के पीछे कोई सुनियोजित योजना थी।

    पुलिस उस युवती की भूमिका की भी जांच कर रही है जिसके साथ युवक होटल के कमरे में था। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह पता लगाया जा रहा है कि युवती की आरोपियों से पहले से कोई पहचान या संपर्क था या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या युवती को पूरे घटनाक्रम की जानकारी थी या वह भी इस कथित साजिश का हिस्सा थी। फिलहाल उसकी भूमिका को लेकर पुलिस ने कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला है।

    जांच के दौरान पुलिस होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन और उनके आपसी संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी अचानक होटल पहुंचे थे या पहले से युवक-युवती पर नजर रखी जा रही थी। आरोपियों ने सामान्य कपड़े पहन रखे थे और खुद को पुलिसकर्मी बताकर कार्रवाई का भय पैदा किया था।

    फिलहाल तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है। साथ ही युवती की भूमिका और कथित हनीट्रैप एंगल की भी जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

  • MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी

    MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी


    भोपाल मध्य प्रदेश में पिछले करीब 60 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में बारिश अब राहत के साथ आफत भी बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश की नर्मदा काली सिंध और बेतवा समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। कई जगह नदी नालों का जलस्तर बढ़ने से रास्ते प्रभावित हुए हैं तो कुछ इलाकों में पुल और सड़कें पानी में डूब गई हैं। दूसरी ओर लंबे समय से पानी की कमी और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे बांधों में तेजी से पानी पहुंचने लगा है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्रोतों में नई उम्मीद जगी है।

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 498.3 मिलीमीटर यानी करीब 19.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। हालांकि यह सामान्य बारिश के आंकड़े 579.7 मिलीमीटर यानी करीब 22.8 इंच से अभी 3.2 इंच कम है। प्रदेश में अब तक करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। इसके बावजूद पिछले दो दिनों से सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को जमकर भिगो दिया है।

    भोपाल में रुक रुककर हो रही बारिश से शहर का मौसम पूरी तरह बदल गया है। सुबह से बारिश और बादलों के कारण कई इलाकों में धुंध जैसा नजारा देखने को मिला। राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब में भी लगातार पानी की आवक बनी हुई है। पिछले दो दिनों में बड़े तालाब का जलस्तर करीब तीन फीट बढ़ा है और यह 1663 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल भराव क्षमता 1666.80 फीट बताई जा रही है। यानी तालाब को अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में अब करीब चार फीट पानी की जरूरत रह गई है। बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़े तालाब के जल्द लबालब होने की उम्मीद बढ़ गई है।

    भोपाल के कोलार केरवा और कलियासोत डैम में भी पानी का स्तर बढ़ा है। कोलार डैम का अधिकतम जलस्तर 1516.40 फीट है और मंगलवार दोपहर तक यहां 1496.65 फीट पानी दर्ज किया गया। केरवा डैम में जलस्तर 1652.52 फीट पहुंच चुका है जबकि इसकी क्षमता 1673 फीट है। दो दिनों में केरवा में करीब तीन फीट पानी बढ़ा है। वहीं कलियासोत डैम का जलस्तर 1650.09 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल क्षमता 1659 फीट है। आने वाले समय में कैचमेंट एरिया में तेज बारिश होने पर इन बांधों में पानी की आवक और बढ़ सकती है।

    बारिश का असर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी साफ नजर आया। रायसेन के सेमरा स्थित सरकारी स्कूल में कमर तक पानी भर गया। सांची रोड और भोपाल रोड पर बेतवा नदी के छोटे पुल पानी में डूब गए। शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक बारिश का पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। इसी जिले में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में स्कूल वैन फंस गई और बच्चों ने पत्थर डालकर उसे निकालने की कोशिश की।

    सीहोर में मूसलाधार बारिश के कारण एक मकान पानी से घिर गया और परिवार के फंसने की सूचना पर पुलिस तथा ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में मंदिर और दुकानों में पानी भर गया। वहीं इच्छावर में श्मशान घाट तक पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शव को कंधे पर लेकर नदी पार करनी पड़ी।

    नर्मदा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदी उफान पर है और नर्मदा से जुड़े बांधों में पानी की आवक बढ़ी है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम में भी जलस्तर बढ़ने की खबर है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। मऊगंज में सेलार नदी के बढ़े जलप्रवाह के कारण करीब 650 फीट की ऊंचाई से गिरती दूधिया जलधारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कुल मिलाकर दो दिन पहले तक सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे मध्य प्रदेश में बारिश ने तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। नदियों और बांधों में बढ़ता पानी जहां किसानों और जलस्रोतों के लिए राहत की खबर है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और नदी नालों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि प्रदेश में जल संकट की चिंता कितनी कम होती है और किन इलाकों में भारी बारिश नई चुनौती बनती है।

  • मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां

    मानसून में बुखार खांसी और कमजोरी से परेशान न हों, संक्रमण से बचने के लिए आज से अपनाएं ये जरूरी सावधानियां


    नई दिल्ली । मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है वहीं बदलता मौसम अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान तापमान में उतार चढ़ाव नमी बढ़ने और जगह जगह पानी जमा होने के कारण संक्रमण फैलाने वाले वायरस और बैक्टीरिया के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाती हैं। यही वजह है कि इन दिनों वायरल बुखार सर्दी जुकाम खांसी गले में खराश सिरदर्द और शरीर में दर्द जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। खासतौर पर बच्चे बुजुर्ग और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस मौसम में ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर को तापमान के साथ तालमेल बैठाने में परेशानी हो सकती है और संक्रमण होने का खतरा बढ़ सकता है।

    वायरल बुखार होने पर आमतौर पर शरीर का तापमान बढ़ना थकान कमजोरी सिरदर्द बदन दर्द ठंड लगना भूख कम लगना और गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में खांसी और नाक बहने की समस्या भी हो सकती है। हालांकि हर बुखार वायरल ही हो ऐसा जरूरी नहीं है। डेंगू मलेरिया टाइफाइड और अन्य संक्रमणों में भी बुखार हो सकता है इसलिए लगातार तेज बुखार रहने पर इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    बारिश के मौसम में वायरल संक्रमण से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। बाहर से घर लौटने के बाद हाथों को साबुन और साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। बिना हाथ धोए आंख नाक और मुंह को छूने से बचना चाहिए क्योंकि संक्रमण फैलाने वाले वायरस शरीर में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने के बाद हाथों की सफाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। घर में किसी व्यक्ति को सर्दी खांसी या बुखार हो तो उसके साथ बहुत नजदीकी संपर्क से बचना और जरूरत के अनुसार मास्क का इस्तेमाल करना भी संक्रमण के प्रसार को कम कर सकता है।

    बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहने से बचना चाहिए। गीले कपड़े तुरंत बदलकर शरीर को अच्छी तरह सुखाना बेहतर होता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। कूलर गमले छत और आसपास की खाली जगहों में जमा पानी को नियमित रूप से साफ करना जरूरी है। इससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।

    अगर बुखार हो जाए तो पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक या अन्य दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए क्योंकि हर बुखार का कारण बैक्टीरियल संक्रमण नहीं होता। यदि बुखार कई दिनों तक बना रहे बहुत तेज हो जाए या उसके साथ सांस लेने में परेशानी लगातार उल्टी अत्यधिक कमजोरी बेहोशी त्वचा पर दाने या खून आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

    कुल मिलाकर बारिश और बदलते मौसम में वायरल बुखार से बचाव के लिए साफ सफाई पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद सुरक्षित पानी और आसपास की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। थोड़ी सी सावधानी अपनाकर संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है और मानसून का मौसम स्वस्थ रहते हुए बिताया जा सकता है।

  • वास्तु के ये आसान उपाय घर में ला सकते हैं सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा जानें किन बातों का रखें ध्यान

    वास्तु के ये आसान उपाय घर में ला सकते हैं सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा जानें किन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में मौजूद सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का असर परिवार के सदस्यों के जीवन पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि लोग घर बनवाने से लेकर सामान रखने तक वास्तु के नियमों का ध्यान रखते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े उपाय धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इन्हें वैज्ञानिक तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिर भी कई लोग मानसिक शांति और घर के वातावरण को बेहतर बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन करते हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार सबसे महत्वपूर्ण स्थानों में से एक माना जाता है। मुख्य दरवाजे के आसपास साफ सफाई रखना शुभ माना जाता है। दरवाजे के सामने कूड़ा कबाड़ या अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित प्रवेश द्वार घर में सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को बढ़ाता है। सुबह के समय मुख्य द्वार और उसके आसपास की जगह को साफ रखना भी अच्छा माना जाता है।

    घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण को वास्तु में विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता के अनुसार इस दिशा को पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त माना जाता है। यदि घर में पूजा स्थान बनाया जा रहा है तो उसे साफ और शांत जगह पर रखना बेहतर माना जाता है। पूजा घर के आसपास भारी सामान जमा करने से बचने की सलाह दी जाती है।

    वास्तु में रसोई की दिशा को भी महत्वपूर्ण माना गया है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार दक्षिण पूर्व दिशा को रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है। रसोई में साफ सफाई रखने और गैस चूल्हे के आसपास अनावश्यक सामान नहीं रखने की सलाह दी जाती है। भोजन बनाने और रखने की जगह व्यवस्थित होने से घर का वातावरण भी साफ सुथरा बना रहता है।

    सोने के कमरे को लेकर भी कई वास्तु नियम बताए जाते हैं। मान्यता है कि सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना बेहतर होता है। वहीं कमरे में बहुत ज्यादा सामान रखने से बचना चाहिए। बिस्तर के आसपास अव्यवस्था रहने से मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है। इसलिए कमरे को साफ और व्यवस्थित रखना अच्छी आदत मानी जाती है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक संभालकर रखना भी वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता। बंद घड़ी टूटे शीशे खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान और बेकार वस्तुओं को घर से हटाने की सलाह दी जाती है। इससे घर व्यवस्थित रहता है और अनावश्यक सामान के कारण होने वाली अव्यवस्था भी कम होती है।

    वास्तु में पौधों को भी सकारात्मक वातावरण से जोड़कर देखा जाता है। घर में हरे पौधे लगाने से वातावरण सुंदर और ताजा दिखाई देता है। हालांकि पौधों को रखने की जगह का चुनाव करते समय उनकी धूप और पानी की जरूरत का ध्यान रखना भी जरूरी है।

    घर में पर्याप्त रोशनी और हवा का आना भी बेहद जरूरी है। खिड़कियां बंद रखने और घर में अंधेरा बनाए रखने के बजाय दिन के समय प्राकृतिक रोशनी और हवा को अंदर आने देना चाहिए। इससे घर का वातावरण अधिक आरामदायक और खुशनुमा बना रह सकता है।

    कुल मिलाकर वास्तु के नियमों का मुख्य उद्देश्य घर को व्यवस्थित शांत और सकारात्मक बनाए रखना माना जाता है। साफ सफाई सही दिशा में सामान की व्यवस्था पर्याप्त रोशनी और प्राकृतिक हवा जैसी अच्छी आदतें किसी भी घर के वातावरण को बेहतर बना सकती हैं। वास्तु उपायों को अपनाते समय अपनी सुविधा और व्यावहारिक जरूरतों का भी ध्यान रखना जरूरी है।

  • पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?

    पुतिन के बड़े सैन्य प्लान से मचा हड़कंप, 5 लाख सैनिकों की तैयारी के बीच यूक्रेन युद्ध में परमाणु हमले का खतरा?


    नई दिल्ली। यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध अब एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने खुफिया रिपोर्टों के हवाले से दावा किया है कि रूस बड़े पैमाने पर नए लड़ाकों को जुटाने की तैयारी कर रहा है। बताया जा रहा है कि आने वाले कुछ हफ्तों में करीब पांच लाख लोगों को सैन्य अभियान में शामिल करने की योजना बनाई जा सकती है। अगर यह दावा सही साबित होता है तो युद्ध की दिशा और उसकी तीव्रता दोनों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

    जेलेंस्की के मुताबिक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन युद्ध रोकने की तैयारी में नहीं हैं बल्कि संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर मोबिलाइजेशन की योजना बना रहे हैं। यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रक्रिया सितंबर में होने वाले रूसी संसदीय चुनावों के बाद शुरू की जा सकती है। जेलेंस्की का दावा है कि रूस इस बार खुले तौर पर बड़ी संख्या में लोगों की भर्ती करने से बच सकता है क्योंकि इससे रूसी समाज में असंतोष बढ़ने का खतरा है।

    यूक्रेनी राष्ट्रपति ने यह भी चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को कम समय में पर्याप्त सैन्य प्रशिक्षण देना मुश्किल होगा। ऐसे में बड़ी संख्या में कम प्रशिक्षित सैनिकों को युद्ध के मैदान में भेजे जाने की आशंका है। इससे संघर्ष और ज्यादा खूनी हो सकता है और दोनों पक्षों में जनहानि बढ़ सकती है। जेलेंस्की के अनुसार रूस की ऐसी तैयारी इस बात का संकेत है कि मॉस्को फिलहाल युद्ध को समाप्त करने के बजाय सैन्य दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    इसी बीच तुर्की के विदेश मंत्री हाकन फिदान ने भी यूक्रेन युद्ध को लेकर बेहद गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर यूक्रेन रूसी क्षेत्र के भीतर लंबी दूरी के हमलों को और प्रभावी बनाता है और युद्ध की पारंपरिक सीमाएं लगातार टूटती जाती हैं तो रूस अपने सबसे खतरनाक विकल्पों पर विचार कर सकता है। फिदान ने परमाणु हथियारों की आशंका का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है।

    रूस और यूक्रेन के बीच हाल के दिनों में लंबी दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमलों में भी तेजी देखी गई है। रूस के तातारस्तान क्षेत्र में हुए एक यूक्रेनी ड्रोन हमले में कई लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई है। इसे रूस के भीतर हुए गंभीर हमलों में से एक माना जा रहा है। दूसरी ओर यूक्रेन के खार्किव क्षेत्र में रूसी हमले में भी लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है।

    रूस और यूक्रेन दोनों ही एक दूसरे के इलाकों में लगातार ड्रोन हमले कर रहे हैं। रूसी रक्षा मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है जबकि यूक्रेन ने भी रूस की ओर से बड़ी संख्या में ड्रोन दागे जाने की बात कही है। दोनों पक्षों के इन दावों के बीच जमीन से लेकर आसमान तक संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है।

    अगर रूस वास्तव में पांच लाख नए लड़ाकों को जुटाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो इसका असर केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं रहेगा। इससे यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है और पश्चिमी देशों की सैन्य रणनीति में भी बदलाव की जरूरत पड़ सकती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि युद्ध और ज्यादा गहरा हुआ तो परमाणु हथियारों की आशंका भी अंतरराष्ट्रीय तनाव को खतरनाक स्तर तक पहुंचा सकती है। फिलहाल पांच लाख सैनिकों की संभावित लामबंदी का दावा यूक्रेनी खुफिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है लेकिन इस खबर ने रूस यूक्रेन युद्ध को लेकर पूरी दुनिया की चिंता जरूर बढ़ा दी है।