Blog

  • सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    सुप्रीम कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़िता के इलाज पर सर गंगा राम अस्पताल को दिए सख्त निर्देश, छुट्टी तक मुफ्त उपचार जारी रखने का आदेश

    नई दिल्ली । दिल्ली में एसिड अटैक की शिकार हुई महिला के इलाज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सर गंगा राम अस्पताल को निर्देश दिया कि पीड़िता को भर्ती रखकर सभी जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसमें दवाएं, प्लास्टिक सर्जरी और जरूरत के अनुसार अन्य उपचार भी शामिल हैं। पीठ ने स्पष्ट किया कि पीड़िता को तब तक अस्पताल से छुट्टी नहीं दी जाए, जब तक वह वहां से जाने के लिए चिकित्सकीय रूप से फिट न हो जाए और उसे केवल बाह्य रोगी विभाग यानी ओपीडी में उपचार की जरूरत न रह जाए। अदालत ने इलाज पर होने वाले खर्च की परवाह किए बिना उपचार जारी रखने और उसका बिल अदालत में जमा करने को भी कहा।

    मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने शुक्रवार को मामले पर तत्काल सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। अदालत ने याचिका में सामने आए तथ्यों को चिंताजनक बताया। यह मामला एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास और कल्याण के लिए काम करने वाले संगठन ब्रेव सोल्स फाउंडेशन की ओर से उठाया गया था। संगठन की प्रमुख शाहीन मलिक के मुताबिक, महिला पर छह अक्टूबर को दिल्ली के भजनपुरा इलाके में एसिड अटैक हुआ था। इस हमले में वह लगभग 45 प्रतिशत तक झुलस गई थी।

    शाहीन मलिक ने अदालत को बताया कि कानून के तहत मुफ्त इलाज का अधिकार होने के बावजूद महिला को दिल्ली के बड़े निजी अस्पतालों में पर्याप्त उपचार नहीं मिल पा रहा था। उनके आरोप के मुताबिक, सर गंगा राम अस्पताल और अपोलो अस्पताल ने बर्न वार्ड की सुविधा उपलब्ध नहीं होने का हवाला देकर इलाज से इनकार किया था। पीड़िता को इलाज के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ा। इस स्थिति के बाद संगठन ने मामले में हस्तक्षेप किया और पीड़िता के उपचार के लिए न्यायिक मदद मांगी।

    पीड़िता की मां के अनुसार, हमले के बाद पुलिस कंट्रोल रूम की मदद से उनकी बेटी को सबसे पहले जग प्रवेश चंद्र अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे गुरु तेग बहादुर अस्पताल भेज दिया गया। मां ने बताया कि बेटी को दर्द से जूझते देखना उनके लिए बेहद मुश्किल था और उन्हें लगा कि उसकी परेशानी पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनके मुताबिक, गुरुवार दोपहर बेटी को गुरु तेग बहादुर अस्पताल से छुट्टी दिलाकर सर गंगा राम अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद परिवार को उसके इलाज को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ा।

    मां ने आरोप लगाया कि शुक्रवार रात सर गंगा राम अस्पताल के कर्मचारियों ने परिवार से बाहर से दवाएं खरीदने को कहा। जब उन्होंने बताया कि उनके पास दवाएं खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं, तो शनिवार सुबह उन्हें बेटी को किसी दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया। हालांकि, गुरु तेग बहादुर अस्पताल के अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने वहां इलाज में लापरवाही के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि अस्पताल ने मरीज की जरूरत के अनुसार पूरा उपचार दिया था। उनके मुताबिक, परिवार अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराना चाहता था, इसलिए मरीज को वहां से छुट्टी दिलाई गई।

    याचिका में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 397 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों को एसिड अटैक पीड़ितों को तत्काल प्राथमिक चिकित्सा और मुफ्त उपचार उपलब्ध कराना होता है। शाहीन मलिक ने कहा कि पीड़िता और उसके परिवार को इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने चाहिए थे। उन्होंने एसिड पर प्रतिबंध के बावजूद राष्ट्रीय राजधानी में इसकी बिक्री जारी रहने पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि पीड़िता को इलाज दिलाने के लिए संगठन और वकीलों को हस्तक्षेप करना पड़ा तथा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

  • आज का राशिफल 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का हाल

    आज का राशिफल 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को इन राशियों की चमकेगी किस्मत, जानिए मेष से मीन तक सभी 12 राशियों का हाल


    नई दिल्ली। 10 अक्टूबर 2026 शनिवार का दिन है और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिवार का संबंध शनि देव से माना जाता है। इस दिन कई लोग पूजा पाठ और दान के माध्यम से शनि देव का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। दैनिक राशिफल के जरिए लोग अपने दिन की संभावित परिस्थितियों को समझने की कोशिश करते हैं। आज का दिन किसी के लिए कामकाज में नई जिम्मेदारियां लेकर आ सकता है तो किसी को आर्थिक मामलों में सोच समझकर निर्णय लेने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि राशिफल सामान्य ज्योतिषीय संकेत हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के बजाय मार्गदर्शन के रूप में देखना चाहिए।

    मेष राशि के जातकों को आज अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखने की जरूरत होगी। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें और महत्वपूर्ण मामलों में अनुभवी लोगों की सलाह लें। वृषभ राशि वालों के लिए आर्थिक योजना बनाने का दिन हो सकता है। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। मिथुन राशि के जातकों को बातचीत में संयम रखने की सलाह दी जाती है। कार्यस्थल पर अपनी बात स्पष्ट रखें और अधूरे काम पूरे करने की कोशिश करें।

    कर्क राशि के लोगों को पारिवारिक मामलों में धैर्य बनाए रखना चाहिए। किसी पुराने विषय पर चर्चा हो सकती है। सिंह राशि के जातकों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल सकता है। नौकरी और व्यवसाय से जुड़े मामलों में मेहनत जारी रखें। कन्या राशि वालों के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करना लाभकारी हो सकता है। खर्चों पर नजर रखें और जरूरी कामों को प्राथमिकता दें।

    तुला राशि के जातकों को रिश्तों में संतुलन बनाए रखने की जरूरत होगी। किसी करीबी के साथ बातचीत से गलतफहमी दूर हो सकती है। वृश्चिक राशि के लोगों को अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। कामकाज में दबाव महसूस हो तो जल्दबाजी के बजाय शांत रहकर रास्ता निकालें। धनु राशि के जातकों के लिए सीखने और नई योजनाओं पर विचार करने का समय हो सकता है। परिवार के सदस्यों की सलाह उपयोगी साबित हो सकती है।

    मकर राशि के जातकों को आज जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाना चाहिए। कार्यक्षेत्र में अनुशासन और निरंतर प्रयास से अच्छे परिणाम पाने की संभावना बन सकती है। कुंभ राशि वालों को नए विचारों पर काम करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि किसी भी योजना को आगे बढ़ाने से पहले उसके व्यावहारिक पहलुओं को समझना जरूरी होगा। मीन राशि के जातकों को भावनाओं में बहकर फैसला लेने से बचना चाहिए। परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत से मन हल्का हो सकता है।

    आज के दिन प्रेम और वैवाहिक जीवन में सभी राशियों के लोगों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ाने के बजाय बातचीत से समाधान निकालना बेहतर रहेगा। अविवाहित लोगों को रिश्तों के मामले में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए। आर्थिक मामलों में बजट बनाकर चलना और गैर जरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखना उपयोगी हो सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अपने काम की जिम्मेदारी निभानी चाहिए जबकि कारोबार करने वाले लोगों को किसी बड़े निवेश से पहले सभी जरूरी पहलुओं की जांच करनी चाहिए।

    स्वास्थ्य के मामले में आज नियमित दिनचर्या अपनाना फायदेमंद रहेगा। पर्याप्त नींद लें और खानपान पर ध्यान दें। काम के दबाव के बीच आराम के लिए भी समय निकालें। शनिवार के दिन शनि देव की पूजा करना जरूरतमंदों की सहायता करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना धार्मिक आस्था से जुड़े उपाय माने जाते हैं। इन उपायों को श्रद्धा और सद्भावना के साथ किया जा सकता है। याद रखें कि सफलता के लिए सकारात्मक सोच के साथ मेहनत और सही निर्णय भी जरूरी हैं। आज का दिन अपनी प्राथमिकताएं तय करने और आने वाले समय के लिए बेहतर योजना बनाने का अवसर हो सकता है।

  • रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी

    रूस से डीजल आपूर्ति पर ट्रंप ने दी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट, जेलेंस्की ने जताई नाराजगी, बोले- इससे पुतिन की युद्ध क्षमता बढ़ेगी


    नई दिल्ली । अमेरिका और रूस के बीच डीजल आपूर्ति को लेकर हुए कथित समझौते ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बातचीत के बाद रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर महत्वपूर्ण घोषणा की। इस फैसले के तहत रूसी डीजल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दिए जाने की बात कही गई है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस कदम पर नाराजगी जताई और इसे अनुचित बताया। उनका कहना है कि इससे रूस की युद्ध लड़ने की क्षमता मजबूत हो सकती है।

    ट्रंप ने दावा किया कि रूस तत्काल तीन लाख टन से अधिक डीजल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में उपलब्ध कराएगा। उन्होंने नवंबर में पांच लाख टन अतिरिक्त डीजल की आपूर्ति और इसके बाद मात्रा बढ़ाने की संभावना का भी उल्लेख किया। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय ने भी वैश्विक बाजारों में तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए तत्परता जताई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने रूसी डीजल की बिक्री के लिए अस्थायी छूट जारी की है। इससे अप्रैल 2027 तक आपूर्ति का रास्ता खुलने की बात कही गई है। हालांकि, समझौते की शर्तों और आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।

    अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच ट्रंप प्रशासन के इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.37 डॉलर प्रति गैलन और डीजल की कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन बताई गई है। फरवरी के अंत से पेट्रोल की कीमत में 46 प्रतिशत और डीजल की कीमत में 67 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने का दावा किया गया है। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई बाधाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ाया है। ट्रंप ने कहा कि किसानों, ट्रक चालकों और आम अमेरिकी नागरिकों के लिए ईंधन की कीमतें कम करना उनकी प्राथमिकता है।

    जेलेंस्की ने रूसी डीजल की बिक्री पर प्रतिबंधों में छूट देने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे रूस को आर्थिक लाभ मिल सकता है। उनके मुताबिक, अतिरिक्त आय से पुतिन युद्ध को लंबा खींचने और यूक्रेन पर अधिक आक्रामक हमले करने में सक्षम हो सकते हैं। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि इस फैसले से अधिक लोगों की जान जा सकती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान बढ़ सकता है। रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने मॉस्को पर कई प्रतिबंध लगाए थे। ऐसे में रूसी ईंधन की बिक्री को राहत देने का फैसला अमेरिकी नीति में बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

    ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस समझौते से ईंधन की कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सावधानी जताई है। विशेषज्ञ क्लेटन सीगल के अनुसार, इस फैसले से कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना सीमित है, जबकि रूस और पुतिन को लाभ मिल सकता है। विशेषज्ञ माइकल लिंच ने भी कीमतों पर इसके असर को लेकर संदेह जताया। उनका कहना है कि यदि अमेरिका रूस से डीजल खरीदता है, तो रूस के मौजूदा ग्राहक अन्य देशों से ईंधन खरीदने लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में बाजार में आपूर्ति का वितरण बदल सकता है, लेकिन कीमतों में उल्लेखनीय कमी होना निश्चित नहीं है।

    इस बीच, क्रेमलिन ने कहा कि ट्रंप ईरान से जुड़े संघर्ष का समाधान निकालने की कोशिशों में रूस की भूमिका का स्वागत करते हैं। ट्रंप ने भी कहा है कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त होने पर तेल की कीमतों में तेजी से गिरावट आ सकती है। उन्होंने शुक्रवार को न्यूयॉर्क के सिरैक्यूज में एक चुनावी रैली के दौरान यह बात कही। रूस से डीजल आपूर्ति पर राहत देने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब ऊर्जा की कीमतें और युद्ध से जुड़े घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं।

  • सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन पर भाजपा का हमला, संबित पात्रा बोले- दिल्ली में आगजनी और हिंसा की कोशिश की गई

    नई दिल्ली । दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर हो रही गतिविधियां भारत की वास्तविक तस्वीर पेश नहीं करतीं। उन्होंने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन का माहौल है, जबकि दिल्ली के एक हिस्से में कुछ अराजक तत्व अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पात्रा ने प्रदर्शन को फ्लॉप शो बताते हुए कहा कि इसका प्रभाव पूरी तरह विफल रहा।

    संबित पात्रा ने कहा कि जंतर-मंतर पर जो कुछ हो रहा है और टेलीविजन तथा सोशल मीडिया पर जो दिखाया जा रहा है, उसे भारत की पूरी कहानी नहीं माना जा सकता। उनके मुताबिक, देश में शांति बनी हुई है और सुशासन के साथ व्यवस्था आगे बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजधानी के एक कोने में अराजक तत्वों की ओर से अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश की जा रही है। भाजपा प्रवक्ता ने प्रदर्शन को लेकर कहा कि यह पूरी तरह फ्लॉप रहा और इसका उद्देश्य सफल नहीं हुआ।

    प्रदर्शन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया में पात्रा ने आरोप लगाया कि इसके जरिए देश और राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली में आगजनी कराने, मारपीट की स्थिति पैदा करने और सड़कों पर संघर्ष कराने का प्रयास किया गया था। हालांकि, ये सभी बातें भाजपा प्रवक्ता के आरोपों के रूप में सामने आईं। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों के समर्थन में किसी अलग जांच रिपोर्ट या आधिकारिक निष्कर्ष का उल्लेख नहीं है।

    भाजपा प्रवक्ता ने अपने बयान में लोकतंत्र और भीड़तंत्र के बीच अंतर पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान राजधानी को बंधक बनाने की कोशिश सफल नहीं हुई और इसे भीड़तंत्र पर लोकतंत्र की जीत के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, जिस तरह की स्थिति पैदा करने का प्रयास किया गया था, वह सफल नहीं हो सकी। उन्होंने प्रदर्शन के आयोजन और उसके प्रभाव को लेकर अपनी पार्टी का विरोध स्पष्ट किया।

    सीजेपी का यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित किया गया था। इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और उनके साथियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिए जाने की खबर भी सामने आई थी। प्रदर्शन को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया इसी घटनाक्रम के संदर्भ में आई है। संबित पात्रा ने अपने बयान में प्रदर्शन को देश की व्यापक स्थिति का प्रतिनिधि मानने से इनकार किया और कहा कि जंतर-मंतर पर दिखाई दे रही गतिविधियां भारत की कहानी नहीं हैं।

    भाजपा की ओर से जारी इस प्रतिक्रिया में प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा, व्यवस्था और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठाए गए। पात्रा ने दावा किया कि देश में शांति और सुशासन कायम है तथा राजधानी में कथित अराजक गतिविधियों के जरिए स्थिति बिगाड़ने की कोशिश की गई। उन्होंने दोहराया कि प्रदर्शन अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सका। इस तरह सीजेपी के जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर भाजपा ने राजनीतिक विरोध दर्ज कराया और आगजनी, मारपीट तथा राजधानी को बंधक बनाने की कथित कोशिशों का आरोप लगाया। इन आरोपों के संबंध में उपलब्ध विवरण में विपक्ष या प्रदर्शन आयोजकों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

  • कमलनाथ ने भाजपा पर ओबीसी का 27% आरक्षण खत्म करने का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून लाने की मांग

    कमलनाथ ने भाजपा पर ओबीसी का 27% आरक्षण खत्म करने का आरोप लगाया, सुप्रीम कोर्ट जाने और विधानसभा में नया कानून लाने की मांग

    मध्य प्रदेश । में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में हाई कोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में उनकी सरकार की ओर से दिया गया 27 प्रतिशत आरक्षण भाजपा सरकारों के कार्यकाल में समाप्त हो गया। कमलनाथ ने कहा कि आरक्षण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्ष 2020 से प्रदेश की सत्ता में रही भाजपा सरकारों ने इस मामले में अदालत के सामने ओबीसी वर्ग का पक्ष प्रभावी ढंग से नहीं रखा।

    मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शुक्रवार को ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दीं। साथ ही, जिन 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां रोककर रखी गई थीं, उन पर तीन महीने के भीतर नियुक्तियां करने के निर्देश दिए। इस फैसले के बाद कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई। कमलनाथ ने फैसले के संदर्भ में भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी सरकार ने ओबीसी वर्ग के हित में आरक्षण का प्रावधान किया था, लेकिन बाद की सरकारों ने इसे सुरक्षित रखने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए।

    कमलनाथ ने कहा कि वर्ष 2019 में उनकी सरकार ने मध्य प्रदेश विधानसभा में कानून पारित कर ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था। उनके मुताबिक, यह फैसला संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए लिया गया था। उन्होंने भाजपा नेताओं के उन बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें कांग्रेस सरकार पर जल्दबाजी में आरक्षण लागू करने का आरोप लगाया जा रहा है। कमलनाथ ने ऐसे बयानों को भ्रामक बताते हुए कहा कि इससे अदालत के आदेश की गलत व्याख्या होने की स्थिति बनती है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि वर्ष 2020 से प्रदेश में भाजपा की सरकारें हैं और पिछले छह वर्षों के दौरान ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या से जुड़े सही आंकड़े अदालत के सामने नहीं रखे गए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की जिम्मेदारी थी कि वह न्यायालय में इस मामले को मजबूती से प्रस्तुत करे। कमलनाथ के अनुसार, भाजपा नेताओं के बयानों से यह सवाल उठता है कि वर्ष 2019 में आरक्षण लागू होने के बाद उसके संरक्षण के लिए सरकार ने क्या प्रयास किए।

    कमलनाथ ने कहा कि यदि भाजपा नेताओं के दावों को सही मान लिया जाए, तो यह सवाल खड़ा होता है कि पिछले छह वर्षों में अदालत के समक्ष ओबीसी वर्ग का पक्ष रखने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने भाजपा पर आरक्षण के मुद्दे पर जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने का आरोप लगाया। हालांकि, अदालत में ओबीसी आरक्षण से संबंधित पक्ष रखने और आंकड़े प्रस्तुत करने को लेकर कमलनाथ ने जो आरोप लगाए, वे उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।

    कमलनाथ ने प्रदेश सरकार से मांग की कि वह ओबीसी वर्ग के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करे। उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा में नया कानून पारित करके 27 प्रतिशत आरक्षण बहाल किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आरक्षण को सुरक्षित रखने के लिए सरकार को न्यायिक और विधायी स्तर पर कदम उठाने चाहिए। हाई कोर्ट के फैसले के बाद कमलनाथ की यह मांग मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आई है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन पर नितिन नवीन का हमला, बोले- अर्बन नक्सल सोच वाले देश की शांति और स्थिरता बिगाड़ना चाहते हैं

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी प्रदर्शन पर नितिन नवीन का हमला, बोले- अर्बन नक्सल सोच वाले देश की शांति और स्थिरता बिगाड़ना चाहते हैं

    नई दिल्ली । मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेता देश में अशांति और अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नितिन नवीन ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और विपक्षी गठबंधन को निशाने पर लेते हुए कहा कि ‘अर्बन नक्सल’ सोच रखने वाले लोगों के इरादे सफल नहीं होंगे। उन्होंने इस पूरे मामले को देश की शांति, स्थिरता और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ते हुए विपक्ष की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए।

    नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश को भय के माहौल से बाहर निकालने और आतंकवाद तथा नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई करने के प्रयास किए गए हैं। उनके मुताबिक, इन प्रयासों के बावजूद कुछ लोग देश में अशांति और अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी नेताओं के बयानों और उनकी भाषा पर भी सवाल उठाए। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि राहुल गांधी सहित अन्य विपक्षी नेताओं की भाषा पर देश के युवा नजर रख रहे हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदारी निभाने की अपेक्षा जताई।

    भाजपा अध्यक्ष ने देश के 140 करोड़ नागरिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोग शांति और स्थिरता चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि भारत के युवा अपनी संस्कृति, लोकतंत्र और संविधान से जुड़े हुए हैं। नितिन नवीन के अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों को अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं और महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के प्रति जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर इन संस्थाओं और पदों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    नितिन नवीन ने विपक्ष पर विदेशी ताकतों के साथ मिलकर भारत को अस्थिर करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि देश की शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के प्रयासों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में दिए गए विवरण का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। उनका बयान ऐसे समय आया है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष विरोध कर रहा है। इस राजनीतिक विवाद में भाजपा अध्यक्ष ने विपक्ष के प्रदर्शन और उसके रुख को देश की स्थिरता से जोड़कर सवाल उठाए हैं।

    विपक्ष की ओर से चुनावी पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं। वहीं, भाजपा ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर विपक्ष पर निशाना साधा है। नितिन नवीन ने राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और विपक्षी गठबंधन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में शांति और स्थिरता बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है। उन्होंने विपक्षी नेताओं की भाषा और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनके रवैये पर सवाल उठाए। इस तरह मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विवाद ने भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है।

  • CEC विवाद पर NDA नेताओं का विपक्ष पर हमला, बोले आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अराजकता फैलाने की अनुमति किसी को नहीं

    CEC विवाद पर NDA नेताओं का विपक्ष पर हमला, बोले आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन अराजकता फैलाने की अनुमति किसी को नहीं

    नई दिल्ली ।मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से जुड़े विवाद और विपक्षी गठबंधन इंडिया तथा CJP के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना सभी का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर अराजकता फैलाना उचित नहीं है। नेताओं ने चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। इस मुद्दे पर भाजपा, जनता दल यूनाइटेड और बिहार सरकार के नेताओं ने अलग-अलग बयान देते हुए विपक्ष की रणनीति पर सवाल उठाए।

    भाजपा नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि भारतीय संविधान सभी को आंदोलन करने का अधिकार देता है, लेकिन किसी को भी अराजक स्थिति पैदा करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का अर्थ अराजकता नहीं हो सकता। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे किसी के दबाव में न आएं और न ही किसी के बहकावे में आकर कदम उठाएं। तिवारी ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि पेपर लीक की घटनाओं के बाद दो से तीन महीने के भीतर उसने नया राजनीतिक एजेंडा सामने रख दिया और अब चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। उनके अनुसार, इस तरह के आरोप लोकतंत्र और संविधान को बदनाम करने का प्रयास हैं।

    मृत्युंजय तिवारी ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर यह आरोप भी लगाया कि कुछ राजनीतिक समूह विदेशी शक्तियों के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष की गतिविधियों और उसके राजनीतिक उद्देश्यों पर सवाल उठाए। उनके बयान में आंदोलन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। NDA नेताओं का कहना है कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए और उसके जरिए अव्यवस्था पैदा करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

    जनता दल यूनाइटेड के नेता श्याम रजक ने कहा कि लोकतंत्र में आंदोलन करना गलत नहीं है। यदि किसी व्यक्ति या संगठन को विरोध दर्ज कराना है, तो वह लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर सकता है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आंदोलन के अधिकार का समर्थन करती है, लेकिन प्रशासन की भी जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनी रहे। रजक के मुताबिक, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन को कई तरह के फैसले लेने पड़ते हैं और दिल्ली में उठाए गए कदमों को इसी प्रशासनिक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति के समक्ष इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बारे में रजक ने कहा कि राष्ट्रपति ने साक्ष्य मांगे हैं और सुप्रीम कोर्ट भी प्रमाणों की अपेक्षा कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के पास अपने दावों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं और वह बिना प्रमाण के बातें कर रहा है। रजक ने कहा कि केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें साबित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत करना जरूरी है। उन्होंने विपक्ष पर जनता को भ्रमित करके सत्ता हासिल करने और परिवारवाद तथा भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया। उनके अनुसार, जनता ऐसे राजनीतिक प्रयासों को पहले ही खारिज कर चुकी है।

    बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने राहुल गांधी के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने वोट चोरी से जुड़े सबूत जमा करने की बात कही थी। श्रवण कुमार ने कहा कि राहुल गांधी कोई कागज जमा नहीं करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी चुनाव से पहले बिहार सहित देश के विभिन्न हिस्सों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक अभियान चलाते हैं। मंत्री ने कहा कि जहां विपक्ष की सरकार बनती है, वहां वह वोट चोरी का आरोप नहीं लगाता, जबकि बिहार में NDA की सरकार बनने पर ऐसे आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने विपक्ष के इस रुख पर सवाल उठाते हुए चुनाव संबंधी दावों के समर्थन में प्रमाण पेश करने की जरूरत दोहराई। इस तरह CEC विवाद को लेकर NDA और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।

  • ममता बनर्जी ने ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ के अंदाज में BJP और मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना, सुप्रिया सुले ने साझा किया वीडियो

    ममता बनर्जी ने ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ के अंदाज में BJP और मुख्य चुनाव आयुक्त पर साधा निशाना, सुप्रिया सुले ने साझा किया वीडियो

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। इसमें वह बच्चों की लोकप्रिय कविता ‘जॉनी-जॉनी यस पापा’ की तर्ज पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधती नजर आ रही हैं। वीडियो में ममता ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग की भूमिका और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को उठाया है। उनके इस अंदाज को चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है।

    वीडियो में ममता बनर्जी कविता की शैली में कहती हैं, “जॉनी-जॉनी यस पापा, एसआईआर नो पापा, ज्ञानेश कुमार यस पापा, रेजिग्नेश यस पापा, रिमूव यस पापा, अरेस्ट एस पापा, सेव डेमोक्रेसी यस पापा, सेव इंडिया यस पापा।” इस रचनात्मक प्रस्तुति के जरिए उन्होंने SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर अपनी आपत्ति जाहिर की। कविता के परिचित अंदाज का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने अपने राजनीतिक संदेश को सामने रखा। वीडियो में भाजपा सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर भी टिप्पणी की गई है।

    राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने यह वीडियो सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किया। उन्होंने ममता बनर्जी की तारीफ करते हुए लिखा कि ममता दीदी हमेशा की तरह कमाल हैं। सुले ने वीडियो के संदेश को हास्य के साथ लोकतंत्र बचाने की गंभीर अपील बताया। उन्होंने ‘लोकतंत्र बचाओ, भारत बचाओ’ के संदेश का उल्लेख किया। वीडियो साझा किए जाने के बाद SIR और चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे फिर चर्चा में आ गए।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। विपक्षी नेताओं की प्रमुख आपत्तियों में मतदाता सूची से संबंधित कथित अनियमितताएं और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता शामिल हैं। ममता बनर्जी ने भी अपने वीडियो के माध्यम से इन मुद्दों पर विरोध जताया है। हालांकि, वीडियो में लगाए गए राजनीतिक आरोप अपने आप में किसी अनियमितता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते।

    इससे पहले 9 अक्टूबर को विपक्षी गठबंधन INDIA के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा था। इस प्रतिनिधिमंडल में ममता बनर्जी भी शामिल थीं। मुलाकात का उद्देश्य विपक्ष की ओर से उठाई जा रही चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखना था।

    मुलाकात के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया था कि राष्ट्रपति ने विपक्ष की चिंताओं को सुना। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए थे। ये आरोप विपक्ष की ओर से लगाए गए थे और उनकी स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।

    विपक्ष लगातार SIR और चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे पर सवाल उठा रहा है। ममता बनर्जी का वायरल वीडियो इसी राजनीतिक विरोध की कड़ी के रूप में सामने आया है। बच्चों की कविता के अंदाज में दिए गए संदेश के जरिए उन्होंने चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ अपनी आपत्तियां जाहिर कीं। सुप्रिया सुले द्वारा वीडियो साझा किए जाने से यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा में और प्रमुखता से आया है। फिलहाल, चुनावी प्रक्रिया में कथित धांधली और अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

  • दिल्ली पहुंचते ही कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता हिरासत में, अभिजीत दीपके बोले- मैं गिरफ्तारी देने ही आया हूं

    दिल्ली पहुंचते ही कॉकरोच जनता पार्टी के तीन नेता हिरासत में, अभिजीत दीपके बोले- मैं गिरफ्तारी देने ही आया हूं

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके और पार्टी के दो अन्य नेताओं आशुतोष रांका तथा सौरभ दास को दिल्ली पहुंचते ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया। तीनों नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के इरादे से मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे। जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें हवाई अड्डे पर विमान के अंदर से ही हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के कारण तीनों नेता हवाई अड्डे से बाहर निकलकर प्रदर्शन स्थल तक भी नहीं पहुंच सके।

    हिरासत में लिए जाने के दौरान अभिजीत दीपके का बयान सामने आया। उन्होंने कहा, “मैं अरेस्ट होने के लिए ही आया हूं। कर लो अरेस्ट।” दीपके ने विमान के अंदर से एक वीडियो संदेश जारी कर पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार कर रही है। उन्होंने कहा, “आ जाओ, कर लो अरेस्ट। यह अराजकता है। ऐसा तो इंदिरा गांधी के समय में भी नहीं हुआ। मैं डरने वाला नहीं हूं।” उनके इस बयान के बाद हिरासत की कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में आ गया।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, तीनों नेताओं को हिरासत में लेने के लिए दिल्ली पुलिस की महिला पुलिसकर्मियों को विमान के अंदर भेजा गया था। उनकी मौजूदगी में पुलिस ने अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरभ दास को हिरासत में लिया। इसके बाद तीनों को एक वैन में बैठाकर वहां से ले जाया गया। हालांकि, उन्हें हिरासत में लेने के बाद पुलिस किस स्थान पर लेकर गई, इसकी जानकारी स्पष्ट नहीं हो सकी। उनकी हिरासत के स्थान और आगे की कार्रवाई को लेकर भी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई।

    कॉकरोच जनता पार्टी ने अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर विरोध जताया। पार्टी ने इस कार्रवाई से जुड़ा एक वीडियो साझा कर तीनों नेताओं को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी और पुलिस के कदम को शर्मनाक बताया। पार्टी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए। सीजेपी के नेता मुंबई से दिल्ली मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन पुलिस की कार्रवाई के कारण वे जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। हिरासत को लेकर पार्टी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया।

    इस मामले पर आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र सरकार की आलोचना की। पार्टी ने आरोप लगाया कि शनिवार को जंतर-मंतर पर सीजेपी के प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे कई लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए देश में ‘काला आपातकाल’ लागू होने का आरोप लगाया। पार्टी ने पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए।

    आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल राय ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए मेट्रो स्टेशन बंद किए और ट्रेनें रद्द कीं। उन्होंने इन कदमों को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में संबंधित मेट्रो स्टेशनों के नाम, ट्रेनों की संख्या और बंद रहने की अवधि का विवरण नहीं दिया गया है। इस तरह सीजेपी नेताओं की हिरासत का मामला राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। एक ओर अभिजीत दीपके ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर नाराजगी जताई, वहीं सीजेपी ने अपने नेताओं की हिरासत का विरोध किया और आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए।

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से पहले आजमाएं हल्दी वाला स्किन केयर, चेहरे पर लगाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स से पहले आजमाएं हल्दी वाला स्किन केयर, चेहरे पर लगाने से पहले जान लें ये जरूरी बातें


    नई दिल्ली। खूबसूरत और स्वस्थ त्वचा पाने के लिए लोग कई तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं में हल्दी को भी खास जगह दी जाती है। भारतीय घरों में हल्दी का इस्तेमाल लंबे समय से भोजन और पारंपरिक सौंदर्य देखभाल में होता आया है। हल्दी में करक्यूमिन नामक एक प्राकृतिक तत्व पाया जाता है जिस पर इसके एंटीऑक्सिडेंट और सूजन कम करने वाले गुणों को लेकर अध्ययन किए गए हैं। हालांकि चेहरे पर हल्दी लगाने से हर किसी को एक जैसा फायदा हो यह जरूरी नहीं है। त्वचा की प्रकृति को समझकर इसका इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।

    हल्दी को पारंपरिक रूप से त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कुछ लोग इसे बेसन या दही के साथ मिलाकर फेस पैक तैयार करते हैं। माना जाता है कि इससे त्वचा साफ और मुलायम महसूस हो सकती है। लेकिन हल्दी से चेहरे के दाग धब्बे पूरी तरह मिटने या रंग गोरा होने का दावा करना सही नहीं है। मुंहासों और त्वचा की अन्य समस्याओं पर हल्दी के घरेलू इस्तेमाल को लेकर पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे किसी त्वचा रोग के इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए।

    अगर आप हल्दी का फेस पैक आजमाना चाहते हैं तो बहुत कम मात्रा से शुरुआत करें। एक चुटकी हल्दी में थोड़ा सादा दही या पानी मिलाकर पतला मिश्रण तैयार किया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ के अंदरूनी हिस्से पर थोड़ी मात्रा लगाकर जांच करें। अगर खुजली जलन लालिमा या सूजन दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल न करें। चेहरे पर लगाने के बाद इसे थोड़े समय में पानी से अच्छी तरह धो लें। पहली बार इस्तेमाल करते समय लंबे समय तक पैक लगाकर रखने से बचें।

    हल्दी के साथ इस्तेमाल की जाने वाली दूसरी सामग्री भी त्वचा को प्रभावित कर सकती है। नींबू का रस चेहरे पर लगाने से जलन और धूप के प्रति संवेदनशीलता बढ़ सकती है इसलिए इसे घरेलू फेस पैक में मिलाने से बचना बेहतर है। इसी तरह बेकिंग सोडा और खुरदरे स्क्रब त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को नए घरेलू नुस्खे आजमाने से पहले विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। हल्दी का रंग त्वचा या कपड़ों पर पीले निशान भी छोड़ सकता है।

    अच्छी त्वचा के लिए केवल फेस पैक पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। रोजाना त्वचा के प्रकार के अनुसार सौम्य क्लींजर से चेहरा साफ करें और जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर लगाएं। दिन में बाहर निकलते समय ब्रॉड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें। धूप से बचाव त्वचा पर समय से पहले उम्र बढ़ने के संकेत और पिगमेंटेशन को कम करने में मदद कर सकता है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना और पूरी नींद लेना भी समग्र स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।

    अगर चेहरे पर लगातार मुंहासे निकल रहे हों या दाग धब्बे बढ़ रहे हों तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें। खुजली लालिमा और जलन जैसी समस्या होने पर घरेलू प्रयोग बंद कर दें। गर्भावस्था या किसी विशेष त्वचा समस्या के दौरान भी नए उत्पादों और नुस्खों के इस्तेमाल को लेकर डॉक्टर से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

    हल्दी को पारंपरिक स्किन केयर में जगह जरूर मिली है लेकिन प्राकृतिक होने का मतलब यह नहीं कि हर सामग्री हर त्वचा के लिए सुरक्षित होगी। कम मात्रा में इस्तेमाल करें त्वचा की प्रतिक्रिया पर ध्यान दें और नियमित देखभाल को प्राथमिकता दें। स्वस्थ त्वचा के लिए सही सफाई मॉइस्चराइजिंग और धूप से बचाव सबसे महत्वपूर्ण आदतों में शामिल हैं।