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  • आरबीआई 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों के लिए खोलेगा विशेष डॉलर विंडो, रुपए को समर्थन देने के साथ विदेशी मुद्रा नियम भी सख्त

    आरबीआई 12 अक्टूबर से सरकारी तेल कंपनियों के लिए खोलेगा विशेष डॉलर विंडो, रुपए को समर्थन देने के साथ विदेशी मुद्रा नियम भी सख्त

    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने रुपए को समर्थन देने और सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है। इसके तहत केंद्रीय बैंक 12 अक्टूबर 2026 से एक विशेष डॉलर विंडो खोलेगा। यह सुविधा अगले आदेश तक जारी रहेगी। आरबीआई ने मौजूदा बाजार परिस्थितियों का आकलन करने के बाद यह फैसला लिया है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य सरकारी तेल विपणन कंपनियों को उनकी दैनिक जरूरत के अनुसार डॉलर उपलब्ध कराना है।

    इस विशेष सुविधा के तहत तीन सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को डॉलर की आपूर्ति की जाएगी। इनमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन शामिल हैं। आरबीआई निर्धारित बैंकों के माध्यम से इन कंपनियों को डॉलर बेचेगा। केंद्रीय बैंक ने यह कदम ऐसे समय उठाया है, जब विदेशी मुद्रा बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकारी तेल कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई। हालांकि, इस सुविधा के तहत डॉलर की कुल मात्रा या प्रत्येक कंपनी के लिए निर्धारित सीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।

    विशेष डॉलर विंडो शुरू करने के साथ आरबीआई ने विदेशी मुद्रा हेजिंग सुविधाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी नियम कड़े किए हैं। केंद्रीय बैंक ने रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और एक ही जोखिम के लिए कई जगह हेजिंग करने की संभावना को रोकने के उद्देश्य से दस्तावेजीकरण संबंधी शर्तें लागू की हैं। नए नियमों के अनुसार, अधिकृत डीलरों को ऐसे उपयोगकर्ताओं से लिखित आश्वासन लेना होगा और उसे अपने रिकॉर्ड में सुरक्षित रखना होगा, जो भारतीय रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध करते हैं।

    इस लिखित आश्वासन में उपयोगकर्ता को पुष्टि करनी होगी कि संबंधित अंतर्निहित जोखिम के लिए किसी दूसरे अधिकृत डीलर के साथ हेजिंग नहीं की गई है। इस तरह एक ही जोखिम के आधार पर अलग-अलग अधिकृत डीलरों के माध्यम से हेजिंग करने पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि यह दस्तावेजीकरण अधिकृत डीलरों की जिम्मेदारी होगी। उन्हें उपयोगकर्ता से आश्वासन प्राप्त करने के साथ उसे अपने पास सुरक्षित भी रखना होगा।

    विदेशी मुद्रा बाजार के व्यवस्थित संचालन के लिए आरबीआई ने रद्द किए गए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों को दोबारा बुक करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। नए निर्देश जारी होने के बाद किसी अधिकृत डीलर के साथ रद्द किए गए रुपए से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंध को दोबारा बुक करने की अनुमति नहीं होगी। यह प्रतिबंध डिलीवरेबल और नॉन-डिलीवरेबल, दोनों प्रकार के अनुबंधों पर लागू होगा। अधिकृत डीलरों को अपने ग्राहकों को ऐसे अनुबंध फिर से बुक करने की अनुमति नहीं देनी होगी।

    केंद्रीय बैंक ने बिना अंतर्निहित जोखिम के किए जाने वाले विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा भी घटा दी है। अब सभी अधिकृत डीलरों के लिए ऐसे लेनदेन की सीमा पांच मिलियन डॉलर के बराबर निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, दो मिलियन डॉलर से अधिक की नोशनल वैल्यू वाले रुपए से जुड़े सभी विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव अनुबंधों के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान लागू किया गया है।

    ऐसे अनुबंधों के मामले में अधिकृत डीलरों को आरबीआई के पास विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व बनाए रखना होगा। इस रिजर्व की राशि प्रत्येक लेनदेन की नोशनल वैल्यू के भारतीय रुपए में बराबर मूल्य का 20 प्रतिशत होगी। यह राशि नकद के रूप में रखनी होगी। इन उपायों के जरिए आरबीआई ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतों को पूरा करने के साथ विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव बाजार में हेजिंग और लेनदेन से जुड़े नियमों को अधिक सख्त बनाया है।

  • सोने की कीमत में इस सप्ताह 1,292 रुपये की बढ़ोतरी, चांदी भी महंगी होकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंची

    सोने की कीमत में इस सप्ताह 1,292 रुपये की बढ़ोतरी, चांदी भी महंगी होकर 2.21 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंची

    नई दिल्ली । सोने की कीमतों में इस सप्ताह तेजी दर्ज की गई। 24 कैरेट सोने का भाव 1,292 रुपये प्रति 10 ग्राम बढ़कर 1,49,430 रुपये हो गया। सप्ताह की शुरुआत में इसका भाव 1,48,138 रुपये प्रति 10 ग्राम था। वहीं, चांदी की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई और यह 280 रुपये महंगी होकर 2,21,109 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। इससे पहले चांदी का भाव 2,20,829 रुपये प्रति किलोग्राम था। हालांकि, सप्ताह के दौरान दोनों कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव बना रहा।

    सोने की अलग-अलग शुद्धता वाली श्रेणियों में भी कीमतें बढ़ीं। 22 कैरेट सोने का भाव बढ़कर 1,36,878 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि इससे पहले यह 1,35,694 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इसी तरह 18 कैरेट सोने की कीमत 1,11,104 रुपये से बढ़कर 1,12,073 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। इन आंकड़ों के मुताबिक, सप्ताह के दौरान 24, 22 और 18 कैरेट सोने की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    सप्ताह के दौरान सोने के भाव में अलग-अलग सत्रों में बदलाव देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 6 अक्टूबर को सुबह के सत्र में सोने का भाव 1,47,278 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया, जिसे सप्ताह का उच्चतम भाव बताया गया है। वहीं, 9 अक्टूबर को सुबह के सत्र में इसका भाव 1,49,614 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा, जिसे न्यूनतम कीमत बताया गया है। हालांकि, इन दोनों तारीखों के साथ दिए गए भावों और उच्चतम तथा न्यूनतम स्तर के विवरण में विसंगति दिखाई देती है। इसलिए इन आंकड़ों के आधार पर सप्ताह के सबसे ऊंचे और सबसे नीचे भाव की स्थिति स्पष्ट नहीं होती।

    चांदी के भाव में भी सप्ताह के दौरान उतार-चढ़ाव रहा। इसका साप्ताहिक भाव 280 रुपये बढ़कर 2,21,109 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 5 अक्टूबर को शाम के सत्र में चांदी का भाव 2,24,157 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया, जिसे सप्ताह का उच्चतम स्तर बताया गया। वहीं, 7 अक्टूबर को शाम के सत्र में कीमत 2,20,866 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जिसे न्यूनतम स्तर बताया गया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि सप्ताह के अलग-अलग कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में अंतर रहा।

    सोने और चांदी के दैनिक भाव सुबह और शाम के सत्र में जारी किए जाते हैं। इस व्यवस्था के तहत दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में दिन के दौरान होने वाले बदलाव दर्ज किए जाते हैं। साप्ताहिक भाव में बढ़ोतरी के बावजूद, दोनों धातुओं की कीमतों में पूरे सप्ताह एक समान तेजी नहीं रही और अलग-अलग सत्रों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहीं। सोने का भाव 4,200 डॉलर प्रति औंस और चांदी का भाव 60 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस सप्ताह दोनों कीमती धातुओं की कीमतें एक सीमित दायरे में रहीं। बॉन्ड यील्ड का लगातार 5 प्रतिशत पर बने रहना और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहना इसके प्रमुख कारणों में शामिल रहे।

    विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत अमेरिकी डॉलर का दबाव भी सोने और चांदी की कीमतों पर बना हुआ है। इस तरह घरेलू बाजार में सप्ताह के दौरान दोनों धातुओं के भाव बढ़े, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल और डॉलर की स्थिति ने उनकी कीमतों को प्रभावित किया।

  • NEET UG में 70 साल से अधिक उम्र के उम्मीदवारों की भागीदारी के बीच आयु और प्रयासों की सीमा तय करने पर विचार

    NEET UG में 70 साल से अधिक उम्र के उम्मीदवारों की भागीदारी के बीच आयु और प्रयासों की सीमा तय करने पर विचार


    नई दिल्ली ।
    नीट यूजी परीक्षा में अधिकतम आयु सीमा और प्रयासों की संख्या निर्धारित करने पर विचार किया जा सकता है। संसदीय स्थायी समिति ने इस संबंध में शिक्षा मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर उचित सीमा तय करने की संभावनाओं पर विचार करने की सिफारिश की है। फिलहाल नीट यूजी में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु निर्धारित नहीं है और वे कितनी भी बार परीक्षा दे सकते हैं। इसी व्यवस्था के कारण 70 वर्ष से अधिक उम्र के उम्मीदवार भी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। वर्ष 2026 की नीट यूजी परीक्षा में 71 वर्षीय अशोक बहारा ने भी भाग लिया था।

    शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने शुक्रवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए में सुधारों से संबंधित अपनी 382वीं रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में नीट यूजी समेत प्रमुख परीक्षाओं के लिए आयु और प्रयासों की उचित सीमा तय करने की संभावनाओं पर विचार करने की जरूरत बताई गई है। समिति की अध्यक्षता राज्यसभा में कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, समिति को जानकारी दी गई कि नीट यूजी में न तो प्रयासों की अधिकतम संख्या निर्धारित है और न ही उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा लागू है।

    रिपोर्ट में नीट की पात्रता व्यवस्था की तुलना संयुक्त प्रवेश परीक्षा एडवांस्ड यानी जेईई एडवांस्ड से भी की गई है। जेईई एडवांस्ड में उम्र के आधार पर पात्रता तय होती है और उम्मीदवार लगातार दो वर्षों में अधिकतम दो बार परीक्षा दे सकते हैं। इसके विपरीत नीट यूजी में अधिकतम आयु और प्रयासों की कोई सीमा नहीं है। रिपोर्ट में इस व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संबंधित मंत्रालयों और अन्य पक्षों के साथ विचार-विमर्श करके बड़ी परीक्षाओं के लिए उचित नियम तय करने की संभावनाओं पर विचार करने की सिफारिश की गई है।

    नीट में आयु सीमा लागू करने की कोशिश पहले भी हो चुकी है। वर्ष 2017 में केंद्र सरकार ने परीक्षा में शामिल होने के लिए अधिकतम तीन प्रयासों की सीमा तय की थी। इसके साथ सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ऊपरी आयु सीमा 25 वर्ष और आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए 30 वर्ष निर्धारित की गई थी। हालांकि, उसी वर्ष सुप्रीम कोर्ट ने आयु सीमा के मामले में हस्तक्षेप किया। इसके बाद अदालत में कार्यवाही लंबित रहने के दौरान 25 वर्ष और उससे अधिक उम्र के उम्मीदवारों को नीट यूजी 2019 के लिए अस्थायी रूप से आवेदन करने की अनुमति दी गई। बाद में मार्च 2022 में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने अधिकतम आयु सीमा हटा दी।

    समिति ने नीट यूजी की परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव का सुझाव दिया है। उसने कलम और कागज से होने वाली परीक्षा के स्थान पर कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी सीबीटी प्रणाली अपनाने की सिफारिश की। इसके लिए परीक्षा केंद्रों को केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व और संचालन में रखने का सुझाव दिया गया है। समिति ने कहा कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले सुरक्षित सरकारी बुनियादी ढांचे में निवेश किया जाना चाहिए। खासतौर पर दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सुविधाओं का विस्तार करने पर जोर दिया गया है।

    परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए समिति ने प्रत्येक जिले में कम से कम एक केंद्र स्थापित करने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले उम्मीदवारों को परीक्षा व्यवस्था में बदलाव के कारण होने वाली असुविधा से बचाना और उनके यात्रा तथा ठहरने के खर्च को कम करना है। समिति ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था तैयार करते समय उम्मीदवारों की जरूरतों और परीक्षा तक उनकी पहुंच का ध्यान रखा जाना चाहिए।

    एनटीए की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर भी रिपोर्ट में कई सुझाव दिए गए हैं। नीट यूजी प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा रद्द होने जैसी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए समिति ने एजेंसी की संसद के दोनों सदनों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विधायी तंत्र बनाने की सिफारिश की। रिपोर्ट में परीक्षा व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखने को सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय अखंडता से जुड़ा विषय बताया गया है। इसके अतिरिक्त, प्रश्न बैंकों का व्यापक विस्तार करने और परीक्षा केंद्र पर देर से पहुंचने वाले विद्यार्थियों को लिखित वचन देने के बाद परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का सुझाव दिया गया है। समिति के अनुसार, प्रश्न बैंकों में निवेश प्रश्नपत्र लीक होने के जोखिम को लंबे समय तक कम करने का व्यावहारिक उपाय हो सकता है। एक ही प्रश्न समूह का बार-बार इस्तेमाल करना या हर वर्ष परीक्षकों से नए प्रश्नपत्र तैयार करवाना परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

  • रणवीर सिंह की धुरंधर: द रिवेंज के संगीत की ग्रैमी में दावेदारी, शाश्वत सचदेव और फिल्म के गानों की पूरी सूची

    रणवीर सिंह की धुरंधर: द रिवेंज के संगीत की ग्रैमी में दावेदारी, शाश्वत सचदेव और फिल्म के गानों की पूरी सूची

    नई दिल्ली । रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म धुरंधर: द रिवेंज के संगीत को ग्रैमी अवॉर्ड की विभिन्न श्रेणियों में विचार के लिए भेजा गया है। फिल्म के संगीत से जुड़े इस घटनाक्रम में इसके कई गाने अलग-अलग श्रेणियों के लिए शामिल किए गए हैं। फिल्म के निर्माताओं की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, संगीत निर्देशक शाश्वत सचदेव के काम और फिल्म के गीतों को अंतरराष्ट्रीय संगीत पुरस्कार की प्रक्रिया के तहत विचार के लिए प्रस्तुत किया गया है। हालांकि, इन गानों को भेजे जाने का अर्थ यह नहीं है कि उन्हें ग्रैमी के अंतिम नामांकन में जगह मिल गई है या किसी पुरस्कार पर उनकी जीत तय हो गई है।

    शाश्वत सचदेव को फिल्म के संगीत के लिए ‘विजुअल मीडिया के लिए सर्वश्रेष्ठ संकलन साउंडट्रैक’ श्रेणी में विचारार्थ प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा फिल्म के दो गाने ‘जान से गुजरते हैं’ और ‘कन्हैया’ को ‘सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत प्रदर्शन’ श्रेणी के लिए भेजा गया है। वहीं, ‘फिर से’ को ‘विजुअल मीडिया के लिए लिखे गए सर्वश्रेष्ठ गीत’ श्रेणी में शामिल किया गया है। इन प्रविष्टियों के जरिए फिल्म के संगीत और अलग-अलग गीतों को विभिन्न श्रेणियों में विचार के लिए रखा गया है।

    फिल्म के अन्य गानों को भी अलग-अलग संगीत श्रेणियों के लिए प्रस्तुत किया गया है। ‘आरी आरी’ को ‘सर्वश्रेष्ठ एशियाई पॉप संगीत प्रदर्शन’ श्रेणी में शामिल किया गया है। ‘वारी जावां’ को ‘सर्वश्रेष्ठ डांस/इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग’ श्रेणी के लिए भेजा गया है, जबकि ‘हम प्यार करने वाले’ को ‘सर्वश्रेष्ठ रीमिक्स रिकॉर्डिंग’ श्रेणी में विचारार्थ रखा गया है। इसके साथ ही ‘डेस्टिनी- मान अटकेया’ को ‘सर्वश्रेष्ठ रैप प्रदर्शन’ और ‘जाए सजना’ को ‘सर्वश्रेष्ठ पॉप युगल/समूह प्रदर्शन’ श्रेणी के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

    इन प्रविष्टियों के बाद फिल्म के संगीत से जुड़े कुल आठ गानों का उल्लेख अलग-अलग श्रेणियों के संदर्भ में सामने आया है। इसमें साउंडट्रैक के लिए शाश्वत सचदेव का नाम भी शामिल है। हर गीत को उसकी संबंधित श्रेणी के अंतर्गत विचार के लिए प्रस्तुत किया गया है। फिलहाल यह प्रक्रिया शुरुआती चरण में है, इसलिए इसे अंतिम नामांकन या पुरस्कार की उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता।

    ग्रैमी की प्रक्रिया में विचारार्थ भेजे गए गीतों को आगे पात्रता संबंधी शर्तों और मतदान के चरणों से गुजरना होता है। अंतिम नामांकन तक पहुंचने के लिए संबंधित प्रविष्टियों का निर्धारित मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इनमें से कौन-से गीत अंतिम सूची में जगह बना पाते हैं। इसलिए अभी फिल्म के गानों को ग्रैमी पुरस्कार मिलने या अंतिम नामांकन हासिल होने का दावा करना सही नहीं होगा।

    फिल्म धुरंधर: द रिवेंज का निर्देशन आदित्य धर ने किया है। इसमें रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर. माधवन और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकार नजर आए हैं। फिल्म ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई की थी, जबकि दुनियाभर में इसका कलेक्शन लगभग 1,852 करोड़ रुपये बताया गया है। अब इसके संगीत और गानों को ग्रैमी की विभिन्न श्रेणियों में विचार के लिए भेजे जाने से फिल्म से जुड़ी चर्चा का एक नया पहलू सामने आया है। हालांकि, पुरस्कार प्रक्रिया के अगले चरणों और अंतिम चयन को लेकर अभी कोई नतीजा सामने नहीं आया है।

  • शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और विजयादशमी की तारीख

    शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू, जानें घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और विजयादशमी की तारीख

    नई दिल्ली: मां दुर्गा की आराधना का प्रमुख पर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होने जा रहा है। हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और सुख, शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत होती है। इसके बाद नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। पर्व के अंतिम चरण में अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है। इसके अगले दिन विजयादशमी मनाई जाती है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होंगे।

    हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 18 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 11 अक्टूबर को रात 9 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्र का पहला दिन 11 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इसी दिन घरों और मंदिरों में कलश स्थापना की जाएगी और मां दुर्गा की पूजा शुरू होगी। नवरात्र के दौरान श्रद्धालु अपनी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार व्रत रखते हैं। कई भक्त पूरे नौ दिन उपवास करते हैं, जबकि कुछ लोग पहले और अंतिम दिन व्रत रखकर पूजा-अर्चना करते हैं। इन दिनों देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की जाती है।

    शारदीय नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना के लिए सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालु इन समयावधियों में अपनी परंपरा के अनुसार कलश स्थापना कर सकते हैं। घटस्थापना को नवरात्र पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, क्योंकि इसी के साथ देवी आराधना और नौ दिनों के धार्मिक अनुष्ठानों का आरंभ होता है। पूजा की तैयारी करते समय श्रद्धालु पूजा स्थल की सफाई करते हैं और आवश्यक सामग्री एकत्र करते हैं। मुहूर्त में कलश स्थापित करने के बाद मां दुर्गा का ध्यान करके परिवार के लिए सुख-शांति और मंगल की प्रार्थना की जाती है।

    नवरात्र के पहले दिन पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद घर के पूजा स्थल की सफाई करके वहां चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर रखें। पूजा आरंभ करने से पहले भगवान गणेश का स्मरण करें और फिर विधि-विधान से घटस्थापना करें। कलश स्थापित करने के लिए उसमें साफ जल भरें। परंपरा के अनुसार, कलश में अक्षत, सुपारी और सिक्का भी रखा जा सकता है। इसके बाद कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखें और लाल कपड़े में लपेटा हुआ नारियल उसके ऊपर स्थापित करें। कलश स्थापना करते समय मां दुर्गा का ध्यान करें और घर-परिवार की सुख-शांति तथा मंगल की कामना करें।

    घटस्थापना के बाद मां दुर्गा को रोली, अक्षत, सिंदूर, फूल, माला, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजा स्थल पर दीपक और धूप जलाएं। श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार दुर्गा सप्तशती, देवी मंत्र या दुर्गा चालीसा का पाठ कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां दुर्गा की आरती करें और प्रसाद वितरित करें। इसके बाद नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के अंतिम दिनों में अष्टमी या नवमी के अवसर पर कन्या पूजन करने की परंपरा भी प्रचलित है। इस दौरान कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनका पूजन किया जाता है। नौ दिनों की आराधना के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा, जिसके साथ शारदीय नवरात्र का समापन होगा।

  • शारदीय नवरात्र 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, घटस्थापना से कन्या पूजन तक नोट करें पूजा सामग्री की पूरी सूची

    शारदीय नवरात्र 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र, घटस्थापना से कन्या पूजन तक नोट करें पूजा सामग्री की पूरी सूची

    नई दिल्ली: शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में शामिल हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। नवरात्र के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ पूजा शुरू होती है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक अखंड ज्योति भी जलाते हैं। इस दौरान मां दुर्गा की नियमित पूजा, भोग, मंत्र जाप और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। पूजा के समय किसी सामग्री की कमी न हो, इसके लिए घटस्थापना से लेकर हवन और कन्या पूजन तक की तैयारियां पहले से करना उपयोगी रहता है।

    नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए जौ उगाने के लिए मिट्टी, जौ के बीज और मिट्टी, पीतल या तांबे का कलश रखा जाता है। कलश के लिए आम के पत्ते, ऊपर रखने के लिए छोटी कटोरी और उसमें रखने के लिए अनाज की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अलावा नारियल, लाल कपड़ा या चुनरी, मौली या कलावा, रोली, कुमकुम, सिंदूर, हल्दी और अक्षत यानी साबुत चावल की जरूरत होती है। कलश स्थापना के लिए साफ पानी और गंगाजल भी रखा जाता है। पूजा में एक सिक्का और सुपारी का इस्तेमाल भी किया जाता है। श्रद्धालु अपनी पूजा की परंपरा के अनुसार इन वस्तुओं को एक जगह एकत्र कर सकते हैं, ताकि अनुष्ठान के समय सभी जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध रहें।

    मां दुर्गा की पूजा के लिए देवी की मूर्ति या तस्वीर और लकड़ी की चौकी की व्यवस्था करनी चाहिए। चौकी पर बिछाने के लिए लाल कपड़ा रखा जाता है। पूजा में रोली, कुमकुम, सिंदूर, अक्षत, ताजे फूल और फूलों की माला का इस्तेमाल होता है। मां दुर्गा को अर्पित करने के लिए फल, मिठाई और नैवेद्य यानी भोग भी तैयार रखा जा सकता है। इसके साथ देवी के लिए सोलह श्रृंगार की सामग्री, कमलगट्टा, पंचमेवा, पान, सुपारी, लौंग और छोटी इलायची की जरूरत पड़ सकती है। बताशे या अन्य प्रसाद, घी या तेल का दीपक, शुद्ध घी, धूप, अगरबत्ती और कपूर भी पूजा सामग्री में शामिल हैं। इसके अलावा नारियल, जायफल, जावित्री और दक्षिणा रखने की भी परंपरा है। इन वस्तुओं को पूजा से पहले व्यवस्थित करने से नियमित आराधना में सुविधा रहती है।

    नवरात्र के दौरान कई घरों में अखंड ज्योति जलाने की परंपरा निभाई जाती है। इसके लिए सुरक्षित और उपयुक्त स्थान पर रखने वाला ज्योति पात्र, रुई की बत्ती या कलावे से बनी बत्ती और घी अथवा तेल की व्यवस्था करनी चाहिए। अखंड ज्योति जलाने वाले श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक उसकी देखभाल की व्यवस्था भी पहले से करें। नवरात्र के समापन से जुड़े अनुष्ठानों में हवन का भी महत्व होता है। हवन के लिए हवन कुंड, हवन सामग्री, कपूर और आम की लकड़ी रखी जाती है। नवग्रह हवन करने वाले श्रद्धालुओं को इसके लिए निर्धारित लकड़ी और अन्य सामग्री भी जुटानी चाहिए। हवन की सामग्री और विधि परिवार की परंपरा तथा पूजा कराने वाले पुरोहित के निर्देशों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    नवरात्र के दौरान कन्या पूजन भी कई परिवारों की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें कन्याओं की पूजा करके उन्हें भोजन और प्रसाद अर्पित किया जाता है। कन्या पूजन के लिए रोली या कुमकुम, अक्षत, फूल और मौली पहले से रखनी चाहिए। इसके साथ फल, मिठाई, हलवा-पूरी या अन्य प्रसाद और दक्षिणा की व्यवस्था की जाती है। कन्या पूजन की तैयारी करते समय भोजन और प्रसाद की मात्रा का ध्यान रखना उपयोगी रहता है। इस तरह घटस्थापना, देवी पूजन, अखंड ज्योति, हवन और कन्या पूजन की सामग्री एक साथ जुटाकर नवरात्र की तैयारियां व्यवस्थित की जा सकती हैं। श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा और पूजा पद्धति के अनुसार सामग्री में आवश्यक बदलाव कर सकते हैं।

  • राहु-केतु गोचर 2026: 5 दिसंबर से बदलेंगी ग्रहों की चाल, मेष, मिथुन और सिंह राशि वालों को मिल सकते हैं नए अवसर

    राहु-केतु गोचर 2026: 5 दिसंबर से बदलेंगी ग्रहों की चाल, मेष, मिथुन और सिंह राशि वालों को मिल सकते हैं नए अवसर

    नई दिल्ली: साल 2026 के अंत में राहु और केतु का राशि परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 5 दिसंबर 2026 को दोनों छाया ग्रह करीब 18 महीने बाद अपनी राशियां बदलेंगे। मान्यता है कि इस गोचर का प्रभाव करियर, कारोबार, आर्थिक स्थिति, रिश्तों और जीवन से जुड़े फैसलों पर पड़ सकता है। खास तौर पर मेष, मिथुन और सिंह राशि के जातकों के लिए यह अवधि नए अवसरों और बदलावों का संकेत दे सकती है। हालांकि, ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, किसी व्यक्ति पर गोचर का प्रभाव उसकी जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और संबंधित भावों पर भी निर्भर करता है।

    ज्योतिषीय गणना के मुताबिक, 5 दिसंबर 2026 की रात 10 बजकर 32 मिनट पर राहु कुंभ राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं, केतु सिंह राशि से निकलकर कर्क राशि में पहुंचेंगे। बताया गया है कि दोनों ग्रह लगभग 23 जून 2028 तक इन राशियों में रहेंगे। इस तरह उनका यह गोचर करीब 18 महीने की अवधि से जुड़ा होगा। ज्योतिष में राहु को महत्वाकांक्षा, भौतिक सुख-सुविधाओं और अचानक मिलने वाले अवसरों से जोड़ा जाता है। दूसरी ओर, केतु को आध्यात्मिकता, आत्मचिंतन और वैराग्य का कारक माना जाता है। इन्हीं मान्यताओं के आधार पर ग्रहों के राशि परिवर्तन को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव से जोड़कर देखा जाता है।

    मेष राशि के जातकों के लिए राहु का गोचर करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना जताई गई है। जिन लोगों के काम लंबे समय से अटके हुए हैं, उन्हें उन्हें आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। कारोबार करने वाले जातकों के लिए भी अपने काम का विस्तार करने और नए रास्ते तलाशने की संभावना बताई गई है। हालांकि, इस दौरान किसी भी बड़े निर्णय को जल्दबाजी में लेने के बजाय उसके संभावित फायदे और नुकसान पर विचार करना जरूरी होगा। नौकरी बदलने, नई जिम्मेदारी स्वीकार करने या कारोबार में विस्तार की योजना बनाने वाले लोगों को व्यावहारिक परिस्थितियों का आकलन करना चाहिए।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए यह गोचर कारोबार और विदेश से जुड़े मामलों में नए अनुभवों का संकेत दे सकता है। व्यापार करने वाले लोगों को नए संपर्क बनाने और अपने काम को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। जो लोग विदेश में पढ़ाई करने या विदेश से जुड़े कामकाज की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपनी योजनाओं पर आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सकती है। हालांकि, इस अवधि में किसी व्यक्ति पर बिना पूरी जानकारी के भरोसा करने और जल्दबाजी में निवेश करने से बचने की सलाह दी गई है। किसी भी कारोबारी समझौते या आर्थिक निर्णय से पहले उससे जुड़ी शर्तों और संभावित जोखिमों को समझना महत्वपूर्ण रहेगा।

    सिंह राशि के जातकों के लिए केतु का राशि परिवर्तन पढ़ाई, कौशल विकास और आर्थिक मामलों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने और पढ़ाई के प्रति अनुशासित रहने की जरूरत हो सकती है। डिजिटल क्षेत्र में काम करने वाले या नए कौशल सीखने की तैयारी कर रहे लोगों को अपनी क्षमताएं बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं। आर्थिक मामलों में भी सोच-समझकर फैसले लेने की सलाह दी गई है। अचानक लाभ की उम्मीद में जोखिम भरे निवेश करना नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए धन से जुड़े निर्णय लेते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राहु-केतु का गोचर सभी 12 राशियों पर अलग-अलग तरह से प्रभाव डाल सकता है। हालांकि, इसका परिणाम हर व्यक्ति के लिए एक जैसा होने की बात नहीं मानी जाती। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और संबंधित भावों को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए केवल राशि के आधार पर करियर, कारोबार, पढ़ाई या निवेश से जुड़े बड़े फैसले लेना उचित नहीं है। इन भविष्यवाणियों को ज्योतिषीय मान्यता के रूप में देखना चाहिए, न कि निश्चित परिणाम के रूप में।

  • कार्तिक मास 27 अक्टूबर से होगा शुरू, दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानें पूजा और नियमों का महत्व

    कार्तिक मास 27 अक्टूबर से होगा शुरू, दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए जानें पूजा और नियमों का महत्व

    नई दिल्ली: हिंदू धर्म में कार्तिक मास को बेहद शुभ और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस महीने में भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी, सूर्य देव और चंद्रमा की विशेष पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करना, तुलसी की पूजा करना और दीपक जलाना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इन परंपराओं का पालन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और जीवन में सौभाग्य बढ़ता है। इस साल कार्तिक मास 27 अक्टूबर से शुरू होकर 24 नवंबर तक चलेगा। दिवाली समेत कई प्रमुख त्योहारों के नजदीक होने के कारण इस अवधि को पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के लिए विशेष माना जा रहा है।

    कार्तिक मास शुरू होने से पहले आश्विन मास के शेष दिनों को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। सर्वपितृ अमावस्या के बाद आश्विन शुक्ल पक्ष की शुरुआत होती है। इसी पक्ष में शारदीय नवरात्र मनाए जाते हैं, जो मां दुर्गा की आराधना को समर्पित हैं। नवरात्र के नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा की पूजा करते हैं और इसके बाद दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, नवरात्र से ही खानपान और दैनिक दिनचर्या में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। इस दौरान घर की साफ-सफाई, सुबह जल्दी उठने और नियमित पूजा करने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इन परंपराओं को अपनाने का उद्देश्य धार्मिक अनुशासन बनाए रखना और त्योहारों की तैयारी करना है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्र और कार्तिक मास के दौरान सात्विक भोजन को प्राथमिकता देना चाहिए। इस अवधि में लहसुन, प्याज, मांसाहार और शराब जैसी तामसिक मानी जाने वाली चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में बैंगन और मूली का सेवन करने से भी बचने की मान्यता है। कार्तिक मास में विशेष रूप से मछली नहीं खाने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। मान्यता के अनुसार, इस महीने भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का स्मरण किया जाता है, इसलिए मछली के सेवन से परहेज करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये नियम धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित हैं, जिनका पालन श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार करते हैं।

    इस महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व बताया गया है। श्रद्धालु स्नान के बाद मां दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की आराधना कर सकते हैं। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी पूजन से घर में शुभता आती है। इसके साथ ही घर के मुख्य द्वार पर शाम को दीपक जलाने को भी शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि दीपदान से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। दिवाली से पहले घर की साफ-सफाई करने के साथ-साथ नवरात्र के दौरान भी घर को स्वच्छ रखने पर जोर दिया जाता है।

    कार्तिक मास में पूजा-पाठ के अलावा मंत्र जाप और ध्यान करने की परंपरा भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नियमित मंत्र जाप से मन एकाग्र होता है और ध्यान करने से मानसिक शांति प्राप्त करने में सहायता मिल सकती है। श्रद्धालु अपनी दिनचर्या में कुछ समय इन गतिविधियों के लिए निर्धारित कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठना, स्वच्छता बनाए रखना, सात्विक भोजन करना और शाम को दीपक जलाना इस अवधि की प्रमुख परंपराओं में शामिल हैं। दिवाली से पहले मां लक्ष्मी की पूजा की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। कार्तिक मास में इन धार्मिक परंपराओं का पालन करने वाले श्रद्धालु इसे भक्ति, संयम और सकारात्मकता बढ़ाने का अवसर मानते हैं। हालांकि, मां लक्ष्मी की कृपा और सुख-समृद्धि से जुड़ी मान्यताएं धार्मिक आस्था का हिस्सा हैं।

  • कटरीना कैफ ने बॉडी शेमिंग करने वालों को दिया जवाब, बोलीं- आलोचनाओं से डरती तो जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाती

    कटरीना कैफ ने बॉडी शेमिंग करने वालों को दिया जवाब, बोलीं- आलोचनाओं से डरती तो जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाती

    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग और बॉडी शेमिंग को लेकर अपनी बात रखी है। अभिनेत्री को हाल ही में डिलीवरी के बाद बढ़े वजन को लेकर सोशल मीडिया पर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। अब उन्होंने इस तरह की टिप्पणियों के प्रभाव और उनसे निपटने के तरीके पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कटरीना का कहना है कि सोशल मीडिया पर लोगों की राय को इतना महत्व नहीं देना चाहिए कि उसका असर व्यक्ति के फैसलों और जिंदगी में आगे बढ़ने की क्षमता पर पड़ने लगे। उनके मुताबिक, दूसरों की टिप्पणियों के आधार पर अपनी जिंदगी के फैसले लेना व्यक्ति के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

    कटरीना कैफ ने लंदन में अपने ब्यूटी ब्रांड के एक कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर बात की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति को लेकर कई तरह की धारणाएं और राय सामने आती हैं। ऐसे में यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन बातों का खुद पर नकारात्मक प्रभाव न पड़ने दिया जाए। अभिनेत्री के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति लगातार दूसरों की राय और टिप्पणियों पर ध्यान देता रहेगा, तो उसके लिए अपने हित में सही फैसले लेना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि अगर वह बार-बार मिलने वाली आलोचनाओं और टिप्पणियों के आधार पर काम करने लगतीं, तो डर के कारण आगे बढ़ना उनके लिए मुश्किल हो जाता। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में वह डर के मारे पैरालाइज हो जातीं और जिंदगी में कभी आगे नहीं बढ़ पातीं।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि जीवन में कई बार ऐसे दौर आते हैं, जब व्यक्ति को लगता है कि उसने सब कुछ सही किया है, लेकिन इसके बावजूद परिस्थितियां उसके मुताबिक नहीं चलतीं। कभी इंसान को लगता है कि वह अपना सर्वश्रेष्ठ कर रहा है, तो कभी उसे महसूस होता है कि वह अभी उस स्थिति तक पहुंचने की कोशिश में है, जहां वह होना चाहता है। कटरीना के मुताबिक, इन उतार-चढ़ावों को जीवन का हिस्सा मानना चाहिए और हर परिस्थिति में खुद पर अनावश्यक दबाव डालने के बजाय जिंदगी का आनंद लेना चाहिए। उनकी इस प्रतिक्रिया को सोशल मीडिया पर होने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियों और खासकर महिलाओं के शरीर को लेकर की जाने वाली आलोचना के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    दरअसल, कटरीना कैफ को कुछ समय पहले अपने पति विक्की कौशल के साथ अंबानी परिवार के गणपति समारोह में देखा गया था। इस दौरान उनके डिलीवरी के बाद बढ़े वजन को लेकर कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां की थीं। हालांकि, कई लोगों ने अभिनेत्री का समर्थन भी किया था। समर्थकों ने कहा था कि मां बनने के बाद शरीर में बदलाव आना सामान्य बात है और इस आधार पर किसी महिला का मजाक उड़ाना उचित नहीं है। इस मामले में सलमान खान ने भी कटरीना का समर्थन किया था। उन्होंने टेलीविजन कार्यक्रम ‘बिग बॉस’ के वीकेंड का वार एपिसोड में बॉडी शेमिंग करने वालों को फटकार लगाई थी।

    सलमान खान ने कहा था कि गर्भावस्था के बाद महिलाओं का वजन बढ़ना आम बात है। ऐसे समय में किसी महिला का मजाक उड़ाना या उसके शरीर को लेकर भद्दी टिप्पणियां करना गलत मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा था कि कटरीना जब फिल्मों में वापसी करेंगी, तो दोबारा फिट हो जाएंगी। फिलहाल वह अपने परिवार के साथ समय बिता रही हैं। सलमान की इस प्रतिक्रिया के बाद भी कटरीना के वजन को लेकर हुई टिप्पणियों का मुद्दा चर्चा में रहा।

    कटरीना कैफ की पेशेवर जिंदगी की बात करें तो वह आखिरी बार फिल्म ‘मैरी क्रिसमस’ में नजर आई थीं, जो वर्ष 2024 में रिलीज हुई थी। इसके बाद से वह फिल्मों से दूर हैं और उनके आगामी प्रोजेक्ट्स को लेकर कोई नई जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल अभिनेत्री अपने बच्चे और परिवार के साथ समय बिता रही हैं। वह सोशल मीडिया पर अपने ब्यूटी प्रोडक्ट्स से जुड़ी पोस्ट साझा करती रहती हैं और परिवार के साथ बिताए पलों की झलक भी प्रशंसकों के साथ साझा करती हैं।

  • सलमान खान ने लॉन्च किया अपना आधिकारिक यूट्यूब चैनल, बोले- ए से जेड तक सब कुछ यहीं मिलेगा

    सलमान खान ने लॉन्च किया अपना आधिकारिक यूट्यूब चैनल, बोले- ए से जेड तक सब कुछ यहीं मिलेगा

    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान ने अपने प्रशंसकों के लिए एक नई शुरुआत की है। उन्होंने अपना आधिकारिक यूट्यूब चैनल लॉन्च किया है। इस घोषणा के बाद उनके प्रशंसकों में उत्सुकता बढ़ गई है। अभिनेता ने अपने नए चैनल के बारे में जानकारी साझा करते हुए संकेत दिया कि यहां उन्हें उनसे जुड़ी विभिन्न अपडेट मिल सकेंगी। प्रशंसक अब यह जानने के लिए उत्साहित हैं कि इस मंच पर सलमान अपनी निजी जिंदगी और पेशेवर गतिविधियों से जुड़े कौन-कौन से पल साझा करेंगे।

    सलमान खान ने अपने नए यूट्यूब चैनल की घोषणा एक वीडियो के जरिए की। इस वीडियो में अभिनेता पुराने लुक में नजर आए। इसके साथ उन्होंने लिखा, ‘शुरू से शुरू करते हैं। मेरा ऑफिशियल यूट्यूब चैनल। ए से जेड तक सब यहां मिलेगा।’ उनके इस संदेश से स्पष्ट है कि वह अपने प्रशंसकों के साथ जुड़ने के लिए एक नया डिजिटल मंच शुरू कर रहे हैं। चैनल का नाम ‘बीइंग सलमान खान’ रखा गया है। इसकी शुरुआत के साथ ही प्रशंसकों की नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में यहां किस तरह की सामग्री देखने को मिलेगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में चैनल पर नियमित रूप से साझा की जाने वाली सामग्री का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया गया है।

    सलमान खान का यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब वह टेलीविजन पर भी सक्रिय हैं। अभिनेता इन दिनों ‘बिग बॉस 20’ को होस्ट कर रहे हैं। यह शो बतौर होस्ट उनका 15वां सीजन है। कार्यक्रम में सलमान की मौजूदगी को दर्शक पसंद करते हैं। उनके नए यूट्यूब चैनल की शुरुआत से प्रशंसकों को उनसे जुड़ने का एक और माध्यम मिल गया है। अब तक अभिनेता से संबंधित अपडेट के लिए प्रशंसक अलग-अलग मंचों पर निर्भर रहते थे, लेकिन आधिकारिक चैनल के जरिए उन्हें सलमान की ओर से साझा की जाने वाली सामग्री सीधे देखने का अवसर मिल सकता है।

    अभिनय के मोर्चे पर सलमान खान अपनी आगामी फिल्म ‘मातृभूमि’ को लेकर भी चर्चा में हैं। इस फिल्म में उनके साथ चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया कर रहे हैं, जबकि इसका निर्माण सलमा खान ने किया है। शुरुआत में इस परियोजना का नाम ‘बैटल ऑफ गलवान’ रखा गया था, लेकिन बाद में इसे बदलकर ‘मातृभूमि’ कर दिया गया। फिल्म की कहानी भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच हुई झड़प की पृष्ठभूमि से जुड़ी बताई गई है। इसी विषय को लेकर फिल्म की प्रस्तुति पर चर्चा हुई थी।

    फिल्म को लेकर पहले ऐसी अटकलें सामने आई थीं कि विषयवस्तु के कारण इसकी रिलीज में देरी हो सकती है या इसे रोक दिया गया है। हालांकि, बाद में फिल्म के नए संस्करण को लेकर सकारात्मक अपडेट सामने आया। जानकारी के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने नए संस्करण को अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया है। इसके बावजूद फिल्म की रिलीज की तारीख को लेकर अंतिम स्थिति सेंसर प्रक्रिया पर निर्भर बताई गई है। फिल्म के कई गाने पहले ही जारी किए जा चुके हैं, लेकिन इसकी रिलीज को लेकर आधिकारिक तारीख की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है।

    उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निर्माता फिल्म को 13 नवंबर को रिलीज करने की योजना बना रहे हैं। यह तारीख दिवाली के बाद की है। फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है और प्रमाणपत्र मिलने के बाद ही इसकी रिलीज की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सलमान खान के नए यूट्यूब चैनल की शुरुआत और ‘मातृभूमि’ को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच उनके प्रशंसक अभिनेता की आगामी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। इसके अलावा नयनतारा के साथ सलमान की एक अन्य फिल्म में काम करने की भी चर्चा है, लेकिन उस परियोजना के नाम की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।