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शिवपुरी में सफाई व्यवस्था की खुली पोल, नालियां जाम और सीवर चैंबर उफनाए, त्योहार से पहले बढ़ी लोगों की चिंता
शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी में नवरात्र से पहले सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में नालियां जाम होने और सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने की शिकायतें सामने आई हैं। दुर्गा पंडालों और धार्मिक आयोजनों की तैयारियों के बीच साफ सफाई की स्थिति लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर पालिका में शिकायत करने के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। ऐसे में वार्ड 30 के लोगों को खुद ही सफाई की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। शनिवार को कॉलोनीवासियों ने झाड़ू उठाकर नालियों से कचरा निकालना शुरू कर दिया। इस घटना ने शहर की सफाई व्यवस्था और त्योहारों से पहले की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।जानकारी के मुताबिक कोलियों के मंदिर के पीछे स्थित नरिया क्षेत्र में लंबे समय से नालियों की सफाई नहीं हुई थी। नालियों में जमा कचरे और कीचड़ के कारण आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका में शिकायत भी की थी लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार परेशानी झेलने के बाद लोगों ने इंतजार करने के बजाय खुद ही सफाई शुरू कर दी। कॉलोनीवासियों ने नालियों से कचरा निकाला और आसपास के क्षेत्र को साफ करने का प्रयास किया। नवरात्र जैसे धार्मिक पर्व से पहले लोगों को इस तरह सफाई करनी पड़ना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।शहर के माधव चौक के पास स्थित मां वैष्णो दरबार की झांकी के आसपास भी गंदगी की समस्या सामने आई है। यहां सीवर चैंबर से गंदगी बाहर आने के कारण स्थानीय लोगों और आयोजन समिति के सदस्यों की परेशानी बढ़ गई है। धार्मिक आयोजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में सीवर की गंदगी और आसपास फैला कचरा लोगों के लिए असुविधा पैदा कर सकता है। समिति के सदस्यों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर नगर पालिका और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग यानी पीएचई से कई बार शिकायत की है। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो सका।आयोजन समिति के सदस्यों के मुताबिक उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर भी अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। वे अपर कलेक्टर से भी मिले थे ताकि सीवर चैंबर की समस्या का जल्द समाधान हो सके। हालांकि उनके अनुसार अब तक राहत नहीं मिली है। समिति के सदस्यों का कहना है कि सीवर चैंबर की सफाई सामान्य झाड़ू या घरेलू उपकरणों से करना संभव नहीं है। इसके लिए संबंधित विभाग की टीम और जरूरी संसाधनों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि जिम्मेदार विभाग समय रहते मौके पर पहुंचकर सफाई कराए।यह स्थिति तब सामने आई है जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्योहारों से पहले सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शहर के कुछ इलाकों में नालियों और सीवर चैंबर की समस्या बने रहने से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों की मांग है कि नगर पालिका और संबंधित विभाग केवल शिकायत मिलने के बाद ही नहीं बल्कि नियमित रूप से भी सफाई व्यवस्था की निगरानी करें।नवरात्र के दौरान दुर्गा पंडालों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। ऐसे में साफ सफाई और सीवर व्यवस्था दुरुस्त रखना जरूरी है। शिवपुरी के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द कार्रवाई कर जाम नालियों और सीवर चैंबर की समस्या दूर करेगा ताकि धार्मिक आयोजन स्वच्छ वातावरण में हो सकें। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग शिकायतों पर कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और त्योहार से पहले लोगों को राहत मिल पाती है या नहीं। -

गर्मी और उमस से चाहिए छुटकारा, मनाली की ठंडी वादियों में बिताएं यादगार छुट्टियां, घूमने से पहले जान लें ये जरूरी बातें
नई दिल्ली। गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए पहाड़ों की सैर किसी सुकून भरे अनुभव से कम नहीं होती। अगर मैदानी इलाकों की तपिश से राहत पाने के लिए आप भी छुट्टियों की योजना बना रहे हैं तो हिमाचल प्रदेश का मनाली एक शानदार विकल्प हो सकता है। यहां ऊंचे पहाड़ देवदार के घने जंगल बहती ब्यास नदी और खूबसूरत घाटियां पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। मनाली की प्राकृतिक सुंदरता के साथ यहां धार्मिक स्थलों पर दर्शन करने और रोमांचक गतिविधियों का आनंद लेने का अवसर भी मिलता है। हालांकि पहाड़ों का मौसम तेजी से बदल सकता है इसलिए यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है।मनाली की यात्रा शुरू करने के बाद सबसे पहले यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को अपनी सूची में शामिल कर सकते हैं। सोलंग वैली अपनी खूबसूरत वादियों और एडवेंचर गतिविधियों के लिए मशहूर है। मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार यहां पैराग्लाइडिंग और अन्य मनोरंजक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। सर्दियों में बर्फबारी होने पर इस क्षेत्र का नजारा बेहद आकर्षक हो जाता है। अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था और उम्र से संबंधित नियमों की जानकारी पहले ले लें।
प्राकृतिक सुंदरता के साथ धार्मिक आस्था का अनुभव करना चाहते हैं तो हिडिंबा देवी मंदिर जरूर जा सकते हैं। देवदार के पेड़ों से घिरा यह प्राचीन मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है। इसके बाद ओल्ड मनाली की गलियों में घूमना स्थानीय कैफे में समय बिताना और बाजारों में खरीदारी करना आपकी यात्रा को खास बना सकता है। ब्यास नदी के आसपास भी सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं लेकिन नदी के तेज बहाव से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
मनाली घूमने आने वाले कई पर्यटक रोहतांग पास जाने की योजना भी बनाते हैं। यह ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध पर्वतीय दर्रा बर्फीले नजारों और हिमालय की खूबसूरत चोटियों के लिए जाना जाता है। हालांकि यहां पहुंचना मौसम सड़क की स्थिति और प्रशासनिक अनुमति पर निर्भर करता है। यात्रा से पहले परमिट की जरूरत और मार्ग खुला होने की जानकारी जरूर जांच लें। खराब मौसम के दौरान अपनी योजना बदलने के लिए भी तैयार रहें।
मनाली पहुंचने के लिए सड़क मार्ग सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है। दिल्ली और चंडीगढ़ से बसों के जरिए यहां पहुंचा जा सकता है। हवाई यात्रा करने वाले पर्यटक भुंतर हवाई अड्डे तक पहुंचकर आगे टैक्सी या अन्य उपलब्ध परिवहन का सहारा ले सकते हैं। यात्रा का खर्च आपके शहर से दूरी होटल की श्रेणी और घूमने के साधनों पर निर्भर करेगा। कम बजट में यात्रा करना चाहते हैं तो बस से सफर करें होटल की बुकिंग पहले कर लें और स्थानीय परिवहन के विकल्पों की तुलना करें। छुट्टियों और व्यस्त पर्यटन सीजन में होटल तथा टैक्सी का किराया बढ़ सकता है।
मनाली की यात्रा पर जाते समय गर्म कपड़े हल्की जैकेट आरामदायक जूते और जरूरी दवाएं साथ रखें। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तापमान कम हो सकता है और मौसम अचानक बदल सकता है। बारिश के दौरान भूस्खलन या सड़क बंद होने की आशंका भी रहती है इसलिए स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें। यात्रा की योजना बनाते समय केवल तस्वीरों और सोशल मीडिया के नजारों पर भरोसा न करें बल्कि वास्तविक मौसम और सड़क की स्थिति को प्राथमिकता दें। सही तैयारी के साथ मनाली की यात्रा गर्मी से राहत पाने और प्रकृति के करीब कुछ यादगार पल बिताने का अच्छा अवसर बन सकती है।
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बालों का झड़ना नहीं हो रहा बंद, महंगे प्रोडक्ट्स से पहले अपनाएं ये 5 तरीके, सही तेल और डाइट से ऐसे करें बालों की देखभाल
नई दिल्ली। बालों का झड़ना आजकल एक आम समस्या बन गई है। महिला हो या पुरुष कई लोग बालों के पतले होने और लगातार गिरने से परेशान रहते हैं। मौसम में बदलाव तनाव खराब खानपान नींद की कमी और बालों की सही देखभाल न करने जैसी वजहों से बालों पर असर पड़ सकता है। सामान्य रूप से रोजाना कुछ बालों का झड़ना स्वाभाविक है लेकिन जब बाल असामान्य रूप से गिरने लगें या सिर में खाली जगह दिखाई देने लगे तो इस पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ आसान आदतों को अपनाकर बालों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।बालों की देखभाल के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान दें। बालों की मजबूती के लिए शरीर को पर्याप्त प्रोटीन आयरन जिंक और अन्य जरूरी पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसके लिए भोजन में दालें दूध दही अंडे पनीर हरी पत्तेदार सब्जियां फल और मेवे शामिल किए जा सकते हैं। यदि शरीर में आयरन या किसी अन्य पोषक तत्व की कमी है तो बालों का झड़ना बढ़ सकता है। इसलिए लगातार बाल गिरने पर बिना जांच के सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह से कमी का पता लगाना बेहतर होता है।
बालों को धोने और सुखाने का तरीका भी महत्वपूर्ण है। बालों को साफ रखने के लिए अपनी त्वचा और बालों के प्रकार के अनुसार हल्के शैंपू का इस्तेमाल करें। शैंपू करते समय सिर की त्वचा को नाखूनों से जोर से रगड़ने से बचें। गीले बाल अपेक्षाकृत नाजुक होते हैं इसलिए उन्हें जोर से तौलिए से रगड़ना या खींचकर कंघी करना नुकसान पहुंचा सकता है। बालों को धीरे से सुखाएं और उलझन दूर करने के लिए चौड़े दांतों वाली कंघी का इस्तेमाल करें।
बालों पर बार बार हीट स्टाइलिंग करने से भी नुकसान हो सकता है। हेयर ड्रायर स्ट्रेटनर और कर्लर का अधिक इस्तेमाल बालों को कमजोर और टूटने वाला बना सकता है। इसी तरह बार बार केमिकल ट्रीटमेंट हेयर कलर और बहुत कसकर बांधे गए हेयरस्टाइल से भी बाल टूट सकते हैं। जहां तक संभव हो बालों को आराम दें और गर्म उपकरणों का इस्तेमाल सीमित रखें। बालों में तेल लगाने से सिर की त्वचा को नमी मिल सकती है और मालिश से आराम महसूस हो सकता है लेकिन तेल लगाना हर प्रकार के हेयर फॉल का इलाज नहीं है। तेल से बाल झड़ना निश्चित रूप से बंद हो जाएगा ऐसा मानना सही नहीं है।
तनाव और नींद की कमी भी बालों की सेहत को प्रभावित कर सकती है। रोजाना पर्याप्त नींद लेने नियमित शारीरिक गतिविधि करने और तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान अपनाने से समग्र स्वास्थ्य को फायदा मिल सकता है। हालांकि यदि बाल झड़ने की वजह हार्मोन संबंधी समस्या आनुवंशिक कारण या कोई बीमारी है तो केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होंगे।
यदि बाल अचानक बहुत ज्यादा झड़ने लगें सिर में गोल खाली पैच बनें खुजली या पपड़ी के साथ समस्या हो या कई सप्ताह तक लगातार बाल गिरते रहें तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। तेज बुखार बीमारी प्रसव या अत्यधिक तनाव के कुछ समय बाद भी बाल झड़ सकते हैं। सही कारण की पहचान होने पर उचित उपचार चुना जा सकता है। बिना सलाह के दवाएं या महंगे हेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से बचें।
बालों को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका नियमित देखभाल पौष्टिक भोजन पर्याप्त नींद और सही उपचार है। घरेलू उपाय सहायक हो सकते हैं लेकिन हर व्यक्ति में उनका असर अलग हो सकता है। लगातार या असामान्य हेयर फॉल को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है।
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शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026, इन 5 राशियों पर बरसेगी शनिदेव की कृपा, नौकरी कारोबार और आर्थिक स्थिति में आ सकता है बड़ा बदलाव
नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मफल दाता और न्याय का देवता माना जाता है। मान्यता है कि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं और उनकी चाल में होने वाला बदलाव जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों पर प्रभाव डाल सकता है। वर्ष 2026 में शनि के नक्षत्र परिवर्तन को लेकर ज्योतिषीय चर्चाएं तेज हैं। इस परिवर्तन को कुछ राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि की स्थिति में बदलाव से नौकरी कारोबार आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन से जुड़े मामलों में नए अवसर मिल सकते हैं। कुछ राशियों के जातकों को लंबे समय से अटके कामों में प्रगति की उम्मीद हो सकती है। हालांकि इन प्रभावों को निश्चित भविष्यवाणी के बजाय पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यता के रूप में देखना चाहिए।शनि का नक्षत्र परिवर्तन समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि ज्योतिष में शनि को अनुशासन मेहनत धैर्य और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि शनि की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को मेहनत का फल दिलाने और जीवन में स्थिरता लाने में सहायक हो सकती है। वहीं प्रतिकूल स्थिति के दौरान लोगों को अधिक सावधानी और धैर्य रखने की सलाह दी जाती है। शनि का प्रभाव अचानक मिलने वाली सफलता से ज्यादा लगातार प्रयास और जिम्मेदारियों को निभाने से जोड़कर देखा जाता है। यही कारण है कि शनि के गोचर और नक्षत्र परिवर्तन को ज्योतिष में खास महत्व दिया जाता है।ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष राशि के जातकों के लिए यह समय कामकाज में नई जिम्मेदारियां मिलने और अपनी क्षमता साबित करने का अवसर बन सकता है। जो लोग लंबे समय से नौकरी में बदलाव या पदोन्नति की उम्मीद कर रहे हैं उन्हें अपने प्रयास जारी रखने की सलाह दी जाती है। वृषभ राशि के जातकों के लिए आर्थिक मामलों में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ना महत्वपूर्ण रह सकता है। बचत पर ध्यान देने और अनावश्यक खर्चों से बचने से भविष्य की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।मिथुन राशि के जातकों के लिए कार्यक्षेत्र में संपर्क बढ़ाने और नई योजनाओं पर काम करने का समय महत्वपूर्ण माना जा सकता है। कारोबार से जुड़े लोगों को नए अवसरों पर विचार करने का मौका मिल सकता है। हालांकि किसी भी बड़े निवेश या व्यावसायिक फैसले से पहले पूरी जानकारी जुटाना जरूरी होगा। सिंह राशि के जातकों को अपने काम में अनुशासन बनाए रखने और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल पर ध्यान देने की सलाह दी जा सकती है। लगातार मेहनत और जिम्मेदारियों को समय पर पूरा करना उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।कुंभ राशि के जातकों के लिए भी शनि का परिवर्तन ज्योतिषीय दृष्टि से चर्चा का विषय है। इस राशि के लोगों को योजनाओं की समीक्षा करने और लंबे समय के लक्ष्यों पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। पारिवारिक जिम्मेदारियों और काम के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी हो सकता है। हालांकि किसी राशि के लिए शुभ या चुनौतीपूर्ण समय होने का आकलन केवल राशि के नाम से नहीं किया जा सकता। पारंपरिक ज्योतिष में जन्म कुंडली में शनि की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव को भी महत्व दिया जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनि देव की कृपा पाने के लिए ईमानदारी से काम करना जरूरतमंदों की सहायता करना और अपने कर्तव्यों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। शनिवार को जरूरतमंद लोगों को भोजन या आवश्यक वस्तुएं दान करने की परंपरा भी प्रचलित है। कई लोग इस दिन शनिदेव की पूजा और मंत्र जाप करते हैं। इन उपायों को आस्था से जुड़ी परंपराओं के रूप में अपनाया जाता है।कुल मिलाकर शनि नक्षत्र परिवर्तन 2026 को लेकर पांच राशियों के लिए सकारात्मक संभावनाओं की चर्चा की जा रही है। लेकिन किसी विशेष नक्षत्र परिवर्तन की सटीक तारीख और उससे जुड़ी पांच राशियों की पुष्टि के बिना इसे निश्चित ज्योतिषीय परिणाम मानना उचित नहीं होगा। जीवन में तरक्की के लिए मेहनत सही योजना आर्थिक अनुशासन और सोच-समझकर लिए गए फैसले महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। -

अंटार्कटिका में पेंग्विन की आबादी में 63% की गिरावट, गर्म होता समुद्र और भोजन की कमी बढ़ा रही चिंता
नई दिल्ली । अंटार्कटिका की बर्फीली दुनिया से वन्यजीवों को लेकर एक चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां स्थित जावोडोवस्की द्वीप पर रहने वाले चिनस्ट्रैप पेंग्विन की आबादी में पिछले 14 वर्षों के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। कभी दुनिया की सबसे बड़ी चिनस्ट्रैप पेंग्विन कॉलोनी के रूप में पहचाने जाने वाले इस द्वीप पर अब इनकी संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है। एक नई वैज्ञानिक स्टडी के मुताबिक वर्ष 2011 से 2025 के बीच यहां पेंग्विन के घोंसलों की संख्या में करीब 63 प्रतिशत की कमी आई है। वैज्ञानिकों के अनुमान के अनुसार इस दौरान इनकी प्रजनन करने वाली आबादी लगभग 10.9 लाख से घटकर 4.02 लाख रह गई। यानी करीब 6.8 लाख पेंग्विन के बराबर आबादी कम हो गई है। इस बदलाव ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है और समुद्र के बदलते पर्यावरण पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।करंट बायोलॉजी नामक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में जलवायु परिवर्तन और समुद्र के बढ़ते तापमान को पेंग्विन की आबादी में गिरावट से जुड़े संभावित कारणों के रूप में देखा गया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक समुद्र का तापमान बदलने से वहां रहने वाले छोटे जीवों की उपलब्धता और उनके फैलाव पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव उन समुद्री पक्षियों पर पड़ता है जो भोजन के लिए इन्हीं जीवों पर निर्भर रहते हैं। चिनस्ट्रैप पेंग्विन के भोजन में अंटार्कटिक क्रिल की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। क्रिल समुद्र में पाए जाने वाले छोटे जीव हैं जो झींगे जैसे दिखाई देते हैं और पेंग्विन समेत कई समुद्री जीवों के लिए भोजन का प्रमुख स्रोत हैं।ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के वैज्ञानिकों ने पेंग्विन की आबादी और उनकी गतिविधियों का अध्ययन करने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया। इसके तहत ड्रोन से तस्वीरें ली गईं और हवाई तस्वीरों तथा सैटेलाइट रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। कुछ पेंग्विन पर ट्रैकिंग डिवाइस लगाकर यह समझने की कोशिश भी की गई कि वे भोजन की तलाश में किन इलाकों तक जाते हैं। अध्ययन में सामने आया कि ये पेंग्विन द्वीप के उत्तर-पश्चिम में मौजूद ठंडे पानी वाले क्षेत्रों में भोजन तलाशना पसंद करते हैं। वहां क्रिल मिलने की संभावना रहती है। लेकिन समुद्र के गर्म होने से क्रिल की उपलब्धता और उनके रहने के क्षेत्रों में बदलाव हो सकता है। ऐसी स्थिति में पेंग्विन को भोजन खोजने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है जिससे उनकी सेहत और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।शोधकर्ताओं ने वर्ष 2016 में जावोडोवस्की द्वीप पर हुए ज्वालामुखी विस्फोट को भी ध्यान में रखा। हालांकि पेंग्विन की आबादी में गिरावट इस घटना से पहले ही शुरू हो चुकी थी। इसलिए वैज्ञानिकों ने विस्फोट को इस लंबे समय से जारी गिरावट का मुख्य कारण नहीं माना है। अध्ययन में समुद्री परिस्थितियों में होने वाले बदलावों को अधिक गंभीरता से समझने की जरूरत पर जोर दिया गया है।पेंग्विन की संख्या में गिरावट के बाद जावोडोवस्की द्वीप अब दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी का दर्जा खो चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक अंटार्कटिका के रॉस सागर में स्थित केप अडारे अब दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी के रूप में पहचाना जा रहा है जहां बड़ी संख्या में अडेली पेंग्विन रहते हैं। अध्ययन यह भी संकेत देता है कि पर्यावरण में बदलाव का असर सभी पेंग्विन प्रजातियों पर एक जैसा नहीं पड़ रहा है।वैज्ञानिकों के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह समझना है कि जावोडोवस्की द्वीप पर पेंग्विन की आबादी में गिरावट कितनी तेजी से जारी रह सकती है। यदि समुद्र के तापमान और भोजन की उपलब्धता में बदलाव लंबे समय तक जारी रहते हैं तो इन पक्षियों के लिए अपने बच्चों का पालन-पोषण करना और जीवित रहना अधिक कठिन हो सकता है। यह अध्ययन बताता है कि जलवायु परिवर्तन का असर उन दूरस्थ इलाकों में भी दिखाई दे रहा है जहां मानवीय गतिविधियां बहुत सीमित हैं। पेंग्विन की घटती संख्या अंटार्कटिका के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र में हो रहे बदलावों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बन गई है। -

भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा
नई दिल्ली । करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। 36 साल की उम्र में टीम इंडिया के पेस अटैक में दोबारा जगह बनाने वाले भुवनेश्वर के लिए यह वापसी उनके अनुभव और शानदार प्रदर्शन का इनाम मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ ही भारतीय तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए भुवनेश्वर की वापसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जसप्रीत बुमराह के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाने के लिए भरोसेमंद विकल्प कौन है।भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। अब उसी टीम के विरुद्ध उनकी वापसी की कहानी दिलचस्प संयोग लेकर आई है। भुवनेश्वर ने अपने करियर में 21 टेस्ट 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 121 वनडे मुकाबले खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा वह सटीक यॉर्कर और नियंत्रित लाइन लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर हैं। पिछले दो आईपीएल सीजन में उनके प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। करीब आठ की इकॉनमी से 45 विकेट लेने वाले भुवनेश्वर ने साबित किया है कि अनुभव और कौशल के दम पर वह अब भी प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।भुवनेश्वर की वापसी को समझने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने उदाहरणों पर भी नजर डालना जरूरी है। पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी 2011 विश्व कप के बाद करीब पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2016 में टीम इंडिया में वापसी की थी। उस समय उनकी उम्र भी लगभग 36 साल थी। नेहरा ने इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की और 2017 में संन्यास लिया। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को उम्र के लिहाज से असामान्य नहीं कहा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी केवल उनके मौजूदा प्रदर्शन का परिणाम है या भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाजों की कमी भी महसूस हो रही है।जसप्रीत बुमराह भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में टीम को संतुलित रखने की चुनौती बनी रहती है। मोहम्मद शमी लंबे समय तक इस भूमिका को मजबूती से निभाते रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोहम्मद सिराज ने भी कई मुकाबलों में अपनी क्षमता दिखाई है लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका और निरंतरता को लेकर चर्चा जारी है। दूसरी ओर अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे गेंदबाजों ने अलग-अलग मौकों पर उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद किसी एक तेज गेंदबाज को तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक भरोसेमंद विकल्प मानना अभी आसान नहीं है।भारतीय क्रिकेट के पास बड़ा घरेलू ढांचा आईपीएल जैसा प्रतिस्पर्धी मंच और खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। बल्लेबाजी में हर दौर के बाद नई पीढ़ी सामने आती रही है। सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आए। अब युवा बल्लेबाज भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। तेज गेंदबाजी में हालांकि ऐसी निरंतरता उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। चोटें कार्यभार प्रबंधन और प्रदर्शन में उतार चढ़ाव तेज गेंदबाजों के करियर को प्रभावित करते रहे हैं।भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है। बुमराह जैसा गेंदबाज हर पीढ़ी में नहीं मिलता और किसी दूसरे खिलाड़ी से हूबहू उनकी जगह लेने की उम्मीद करना भी सही नहीं होगा। लेकिन टीम के पास ऐसे विकल्प जरूर होने चाहिए जो उनकी अनुपस्थिति में गेंदबाजी को मजबूती दे सकें। न्यूजीलैंड सीरीज भुवनेश्वर के लिए खुद को दोबारा साबित करने का मौका होगी। साथ ही यह चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा तेज गेंदबाजों को किस तरह तैयार करते हैं। आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुवी के बाद कौन और भविष्य में बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया की अगुवाई कौन करेगा। -

स्टारलिंक विवाद में कमल हासन की एंट्री, मस्क को सुनाई खरी-खरी, कंगना रनौत बोलीं- तीखा और सटीक जवाब
नई दिल्ली । भारत में स्टारलिंक की लॉन्चिंग और लाइसेंसिंग प्रक्रिया को लेकर छिड़ी बहस अब राजनीतिक और मनोरंजन जगत तक पहुंच गई है। दुनिया के चर्चित अरबपति एलन मस्क की ओर से भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा को मंजूरी मिलने में देरी पर सवाल उठाए जाने के बाद अभिनेता और राज्यसभा सांसद कमल हासन ने उन्हें दोटूक जवाब दिया है। हासन ने भारत की नियामक स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए साफ कहा कि किसी भी देश की नीतियां किसी अरबपति के दबाव में तय नहीं होनी चाहिए। उनकी इस टिप्पणी को अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत का भी समर्थन मिला है। कंगना ने हासन की बातों की तारीफ करते हुए उनके जवाब को तीखा सटीक और व्यंग्यात्मक बताया।कंगना रनौत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कमल हासन की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि यह बात चुभने वाली है और किसी भी अरबपति को भारत या अमेरिका जैसे देशों की नीतियां तय नहीं करनी चाहिए। कंगना ने हासन की बातों से सहमति जताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी बात बेहद प्रभावशाली तरीके से रखी है। इस प्रतिक्रिया के बाद स्टारलिंक लाइसेंसिंग विवाद में कंगना की एंट्री ने चर्चा को और तेज कर दिया है। आमतौर पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने वाली कंगना ने इस बार भारत के नीतिगत अधिकारों के समर्थन में कमल हासन का साथ दिया है।कमल हासन ने अपने बयान में भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय स्वायत्तता पर जोर दिया। उन्होंने एलन मस्क को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी अरबपति को किसी देश की नीति तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए फिर चाहे वह भारत हो या अमेरिका। हासन के मुताबिक भारत एक लोकतंत्र है और कोई कॉलोनी नहीं है। देश अपने भविष्य से जुड़े फैसले खुद लेने में सक्षम है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के लिए अपने दरवाजे खुले रखता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विदेशी कारोबारी हित या दूसरे देशों के दोहरे मापदंड भारत की नीतियों को प्रभावित करें।हासन ने सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं के मामले में प्रतिस्पर्धा और किफायती कनेक्टिविटी की जरूरत पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का स्वागत किया जाना चाहिए लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। भारत जैसे बड़े देश में दूरदराज के इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाना महत्वपूर्ण है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाओं का विस्तार सीमित है। ऐसे में नई तकनीक और कंपनियां लोगों के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं। हालांकि इसके लिए निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों का पालन करना भी जरूरी है।दरअसल एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया से गुजर रही है। मस्क ने लाइसेंस मिलने में हो रही देरी पर सवाल उठाए थे और दूसरे देशों में सेवा को मिली मंजूरी का हवाला दिया था। भारत में किसी भी दूरसंचार सेवा को शुरू करने के लिए संबंधित नियमों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। स्टारलिंक लो अर्थ ऑर्बिट में मौजूद उपग्रहों के जरिए इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराती है और इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक भी इंटरनेट पहुंचाना है जहां सामान्य नेटवर्क का विस्तार मुश्किल है।इस पूरे विवाद ने एक बार फिर तकनीकी निवेश विदेशी कंपनियों की भूमिका राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की नीतिगत स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बहस को सामने ला दिया है। कमल हासन के बयान और कंगना रनौत के समर्थन के बाद यह मुद्दा केवल इंटरनेट सेवा तक सीमित नहीं रहा बल्कि इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गई है कि वैश्विक कंपनियों के लिए बाजार खोलते समय राष्ट्रीय हितों की रक्षा कैसे की जाए। -

नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म को मिलेगा खास ट्रिब्यूट, अनीत पड्डा की ‘शक्ति शालिनी’ अब मार्च 2027 में हो सकती है रिलीज
नई दिल्ली । बॉलीवुड की आगामी हॉरर-कॉमेडी फिल्म शक्ति शालिनी अपनी रिलीज डेट में बदलाव को लेकर चर्चा में है। अनीत पड्डा की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म को पहले क्रिसमस 2026 के मौके पर सिनेमाघरों में उतारने की तैयारी थी लेकिन अब इसकी रिलीज 2027 तक टल गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिल्म के निर्माता दिनेश विजान और निर्देशक आदित्य सरपोतदार नई रिलीज डेट पर विचार कर रहे हैं। संभावना जताई जा रही है कि फिल्म मार्च 2027 में सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि इसकी अंतिम रिलीज डेट को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।फिल्म की रिलीज आगे बढ़ने की एक बड़ी वजह शाहरुख खान की आगामी फिल्म किंग के साथ बॉक्स ऑफिस पर होने वाली संभावित टक्कर को बताया जा रहा है। मेकर्स नहीं चाहते कि दोनों फिल्मों की रिलीज एक ही समय पर होने से किसी फिल्म के कारोबार पर असर पड़े। इसके अलावा सैयारा की सफलता के बाद अनीत पड्डा को एक और बड़ी फिल्म में दर्शकों के सामने पेश करने की रणनीति भी इस फैसले से जुड़ी बताई जा रही है। निर्माता चाहते हैं कि शक्ति शालिनी को सिनेमाघरों में पर्याप्त जगह मिले और दर्शकों का ध्यान फिल्म की कहानी तथा इसके नए किरदार पर केंद्रित रहे।शक्ति शालिनी मैडॉक फिल्म्स के हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स का हिस्सा है। इस फ्रेंचाइजी में पहले स्त्री और मुंज्या जैसी फिल्मों ने दर्शकों के बीच अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में नई फिल्म से भी काफी उम्मीदें लगाई जा रही हैं। अक्टूबर 2025 में फिल्म का टीजर जारी करते समय इसकी रिलीज क्रिसमस 2026 के लिए तय की गई थी। हालांकि पिछले कुछ महीनों से इसकी रिलीज डेट बदलने की चर्चाएं चल रही थीं। अब नाना पाटेकर के निधन के बाद इस फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है क्योंकि निर्देशक आदित्य सरपोतदार के मुताबिक यह दिग्गज अभिनेता की आखिरी फिल्म होगी।रिपोर्ट के अनुसार नाना पाटेकर ने मई 2026 में फिल्म की शूटिंग पूरी कर ली थी। निर्देशक आदित्य सरपोतदार ने अभिनेता के निधन पर दुख जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि यह फिल्म नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म साबित होगी। उन्होंने फिल्म के साथ अभिनेता के जुड़ाव को भी याद किया। नाना पाटेकर इस फिल्म को लेकर उत्साहित थे और इसके रिलीज होने का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में अब फिल्म उनके प्रशंसकों के लिए एक खास यादगार बन सकती है।शक्ति शालिनी में अनीत पड्डा के साथ नाना पाटेकर विशाल जेठवा विनीत कुमार सिंह और सीमा बिस्वास भी नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन आदित्य सरपोतदार ने किया है जबकि इसका निर्माण दिनेश विजान की मैडॉक फिल्म्स के बैनर तले हुआ है। फिल्म की कहानी और किरदारों को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है लेकिन इसे हॉरर-कॉमेडी यूनिवर्स की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। अब दर्शकों की निगाहें इसकी नई रिलीज डेट और फिल्म से जुड़े अगले अपडेट पर टिकी हैं। नाना पाटेकर की आखिरी फिल्म होने के कारण शक्ति शालिनी उनके चाहने वालों के लिए भावनात्मक महत्व भी रखेगी। -

उत्तराखंड में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश और ओलावृष्टि से भारी नुकसान, CM धामी ने हेलिकॉप्टर मोड़कर किया प्रभावित क्षेत्र का दौरा
नई दिल्ली । उत्तराखंड में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदला कि हरिद्वार से लेकर ऊधम सिंह नगर तक लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुक्रवार 9 अक्टूबर को तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि ने कई इलाकों में नुकसान पहुंचाया। आसमान से गिरे बड़े-बड़े ओलों की वजह से कई गाड़ियों और मकानों के शीशे टूट गए जबकि सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें और कृषि उपज प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। अचानक बदले मौसम के बाद तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण में ठंडक बढ़ गई। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को तत्काल सर्वे करने के निर्देश दिए।हरिद्वार में शुक्रवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में काले बादल छा गए और बिजली की कड़कड़ाहट के साथ बारिश शुरू हो गई। शुरुआत में बारिश की रफ्तार कम रही लेकिन कुछ ही देर में इसकी तीव्रता बढ़ने लगी। बारिश के साथ बड़े-बड़े ओले गिरने लगे। शहर से लेकर आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी ओलावृष्टि का असर देखने को मिला। अचानक हुई इस मौसमी घटना से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। कई जगह खड़े वाहनों के शीशे टूट गए जबकि मकानों की खिड़कियों और सोलर पैनलों को भी नुकसान पहुंचा। तेज बारिश और ओलों के कारण लोगों को काफी परेशानी हुई। मौसम में आए बदलाव के बाद तापमान नीचे जाने से ठंडक भी बढ़ गई।हरिद्वार के अलावा ऊधम सिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में भी तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। इसका असर कृषि क्षेत्र पर पड़ा है और किसानों की फसलों तथा कृषि उपज को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। अचानक हुई ओलावृष्टि के कारण खेतों में खड़ी फसलों को लेकर किसान चिंतित हैं। फसल को नुकसान होने से उनकी आमदनी पर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि प्रभावित खेतों और संपत्तियों को हुए कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही सामने आएगी। ऐसे में प्रशासन के सामने प्रभावित क्षेत्रों में जल्द से जल्द नुकसान का आकलन करने और जरूरतमंद लोगों तक राहत पहुंचाने की चुनौती है।ओलावृष्टि से नुकसान की सूचना मिलने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल प्रभावित क्षेत्र का रुख किया। मुख्यमंत्री शुक्रवार को हल्द्वानी से देहरादून लौट रहे थे। इसी दौरान उन्हें ऊधम सिंह नगर के बाजपुर में ओलावृष्टि और उससे हुए नुकसान की जानकारी मिली। इसके बाद उन्होंने अपना हेलिकॉप्टर प्रभावित क्षेत्र की ओर मोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने पहले हवाई सर्वेक्षण के जरिए हालात का जायजा लिया और फिर जमीन पर पहुंचकर प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वे जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने नुकसान का सही आकलन कर निर्धारित समय के भीतर किसानों तक राहत पहुंचाने की प्रक्रिया तेज करने को कहा। धामी ने भरोसा दिलाया कि प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार किसानों के साथ खड़ी है और प्रभावित लोगों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए कदम उठाए जाएंगे।दूसरी ओर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने भी ओलावृष्टि से हुए नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने हरिद्वार समेत प्रभावित क्षेत्रों में फसलों सब्जियों और संपत्तियों को हुए नुकसान का सही आकलन कराने की मांग की। साथ ही जिन लोगों को अधिक नुकसान हुआ है उन्हें उचित मुआवजा और सहायता देने की अपील की। अब प्रभावित लोगों की नजर प्रशासनिक सर्वेक्षण और राहत संबंधी फैसलों पर है। -

UPI से पेमेंट पर अभी नहीं कटेगा MDR…. जनवरी 2027 तक डेडलाइन बढ़ने की उम्मीद!
नई दिल्ली। डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) करने वाले लोगों और कारोबारियों (Businesspeople) के लिए UPI MDR को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। 9 अक्टूबर को होने वाली UPI स्टीयरिंग कमेटी की बैठक नहीं हो पाई। इसी बैठक में UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (Merchant Discount Rate- MDR) को लेकर फैसला होना था। अब यह साफ नहीं है कि अगली बैठक कब होगी और MDR को लागू करने पर अंतिम फैसला कब लिया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक सुबह होनी थी। इस बैठक में यूपीआई पर लगने वाले चार्ज को लेकर फैसला किया जाना था। फिलहाल यह साफ नहीं है कि बैठक अब कब होगी और MDR पर फैसला कब तक आएगा। पहले इसे 15 अक्टूबर से लागू करने की बात कही गई थी। इधर, MDR लागू होने में देरी की आशंका के बीच 9 अक्टूबर को पेटीएम, मोबिक्विक और पाइन लैब्स के शेयरों में करीब 5% तक गिरावट दर्ज की गई।
तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव
यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी यूपीआई से जुड़े अहम फैसले लेने वाली आधिकारिक समिति है। इसमें प्रमुख यूपीआई ऐप, बैंक और पेमेंट कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) देश में यूपीआई का ऑपरेट करता है। बता दें कि इससे पहले खबर आई थी कि 8 अक्टूबर को बताया था कि NPCI यूपीआई पर MDR लागू करने की तारीख बढ़ाकर जनवरी 2027 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।
क्या है UPI MDR और कितनी लगेगी फीस
बता दें कि MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले दुकानदारों और कारोबारियों से ट्रांजैक्शन प्रोसेस करने के बदले लिया जाता है। पिछले महीने UPI स्टीयरिंग कमेटी ने 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% यानी 40 बेसिस पॉइंट MDR तय किया था। उदाहरण के लिए, अगर कोई ग्राहक UPI से 10,000 रुपये का पेमेंट करता है, तो 0.4% के हिसाब से MDR 40 रुपये होगा। वहीं, 2,000 रुपये के पेमेंट पर यह शुल्क 8 रुपये बनता है। हालांकि, रियल चार्ज और लागू होने की शर्तें संबंधित नियमों पर निर्भर करेंगी।
MDR लागू करने में क्यों हो रही देरी
MDR को लेकर दुकानदारों के संगठन, फिनटेक कंपनियां और पेमेंट कंपनियां चिंताएं जता रही हैं। उनका कहना है कि त्योहारों के सीजन में इस तरह का शुल्क लागू करने से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। इसके अलावा, अलग-अलग तरह के UPI ट्रांजैक्शन पर अलग दरें लागू होने से भी कारोबारियों के बीच भ्रम की स्थिति बन सकती है। दूसरी तरफ, सरकार को भी चिंता है कि बढ़ती महंगाई के बीच MDR से कारोबारियों का खर्च बढ़ सकता है। आशंका यह भी है कि कुछ कारोबारी इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं। बता दें कि 8 अक्टूबर को वित्त मंत्री ने कहा था कि UPI ट्रांजैक्शन पर MDR का मामला रिलेटेड पार्टी के बीच तय किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी नजर NPCI और पेमेंट इंडस्ट्री के अगले फैसले पर है।
कार्ड और UPI के MDR में क्या है अंतर
कार्ड पेमेंट आमतौर पर तय मर्चेंट कैटेगरी और रिलेटिवली यूनिफॉर्म फी स्ट्रक्चर के तहत काम करते हैं। दूसरी ओर, UPI का इस्तेमाल छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक बड़े पैमाने पर होता है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्ड करीब 1.1 करोड़ टर्मिनल पर स्वीकार किए जाते हैं, जबकि UPI का नेटवर्क लगभग 10 करोड़ कारोबारियों तक फैला है। UPI में बिजली-पानी के बिल, लोन की किस्त और शेयर बाजार से जुड़े पेमेंट जैसे कई अलग-अलग तरह के ट्रांजैक्शन शामिल हैं। इन सभी पर एक जैसी फी स्ट्रक्चर लागू करना आसान नहीं है।