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  • हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान

    हजार कमल लेकर पहुंचे थे विष्णु जी, शिव ने छिपा दिया एक फूल तो चढ़ा दिया अपना कमलनयन, फिर मिला दिव्य वरदान



    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस दौरान महादेव की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। सावन के सोमवार पर श्रद्धालु शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और भगवान शिव से सुख शांति समृद्धि तथा मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। शिव पुराण में भगवान शिव से जुड़ी ऐसी अनेक कथाओं का वर्णन मिलता है जिनमें उनकी करुणा के साथ साथ भक्तों की परीक्षा लेने वाली लीलाओं का भी उल्लेख है। ऐसी ही एक कथा भगवान विष्णु से जुड़ी है जिसमें भगवान शिव ने उनकी भक्ति की कठिन परीक्षा ली और अंत में प्रसन्न होकर उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया।

    पौराणिक कथा के अनुसार एक समय दानवों और दैत्यों का अत्याचार बहुत बढ़ गया था। उनके बढ़ते प्रभाव से देवता चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान विष्णु से सहायता की प्रार्थना की। सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने भगवान शिव को प्रसन्न करने का संकल्प लिया। इसके बाद उन्होंने कैलाश पर्वत पर पहुंचकर महादेव की विधि विधान से आराधना शुरू की। भगवान विष्णु ने शिव की स्तुति करते हुए उनके एक हजार नामों का स्मरण किया और प्रत्येक नाम के साथ भगवान शिव को एक कमल पुष्प अर्पित करने का संकल्प लिया।

    कथा के अनुसार भगवान विष्णु की भक्ति और उनके संकल्प की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने एक लीला रची। उन्होंने भगवान विष्णु द्वारा पूजा के लिए लाए गए एक हजार कमल पुष्पों में से एक कमल को छिपा दिया। भगवान विष्णु को इसकी जानकारी नहीं थी। जब पूजा के दौरान उन्होंने कमल गिनने शुरू किए तो एक पुष्प कम मिला। उन्होंने काफी खोज की लेकिन वह कमल कहीं नहीं मिला।

    भगवान विष्णु को कमलनयन भी कहा जाता है। जब उन्हें लगा कि उनकी पूजा एक कमल के अभाव में अधूरी रह जाएगी तो उन्होंने अपनी भक्ति को पूरा करने के लिए अद्भुत त्याग का निर्णय लिया। उन्होंने अपने एक नेत्र को कमल के समान मानकर उसे भगवान शिव को अर्पित करने का संकल्प किया। जैसे ही भगवान विष्णु अपना नेत्र अर्पित करने के लिए आगे बढ़े उसी समय भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर प्रकट हो गए।

    भगवान शिव ने भगवान विष्णु को रोक दिया और उनकी आंख को पहले जैसा कर दिया। महादेव ने विष्णु जी की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान मांगने के लिए कहा। तब भगवान विष्णु ने किसी व्यक्तिगत सुख की मांग नहीं की बल्कि दानवों और दैत्यों के अत्याचार से सृष्टि की रक्षा करने के लिए एक ऐसे दिव्य और अजेय अस्त्र की इच्छा जताई जिससे अधर्म का नाश किया जा सके।

    भगवान शिव ने उनकी इच्छा पूरी करते हुए उन्हें दिव्य सुदर्शन चक्र प्रदान किया। यही सुदर्शन चक्र आगे चलकर भगवान विष्णु के प्रमुख अस्त्रों में शामिल हुआ। पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने इसी दिव्य अस्त्र की शक्ति से दैत्यों का संहार किया और सृष्टि की रक्षा की। इस तरह भगवान शिव और भगवान विष्णु के बीच भक्ति तथा आशीर्वाद का यह प्रसंग हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है।

    सावन में इस कथा का स्मरण भक्तों को भक्ति के साथ समर्पण और निस्वार्थ भाव का संदेश भी देता है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं। सावन के दौरान श्रद्धालु जलाभिषेक रुद्राभिषेक बेलपत्र अर्पित करने और शिव मंत्रों का जाप करने जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करते हैं। मान्यता के अनुसार सच्चे मन से की गई शिव आराधना से मन को शांति मिलती है और भक्त के भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि इन धार्मिक मान्यताओं को आस्था और पौराणिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।

    भगवान शिव और भगवान विष्णु की यह कथा इस बात का प्रतीक मानी जाती है कि सच्ची भक्ति में केवल पूजा की विधि नहीं बल्कि श्रद्धा त्याग और समर्पण का भाव भी महत्वपूर्ण होता है। सावन के पावन महीने में इस कथा का स्मरण भक्तों को अपनी आस्था को और मजबूत करने तथा जीवन में सत्य धर्म और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

  • ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    ट्रेकिंग पर गए इंदौर निवासी अद्वैत की तलाश में जुटी बेंगलुरु पुलिस, परिजनों ने जताई अनहोनी की आशंका

    नई दिल्ली । कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित शिवगंगे पहाड़ियों से मध्य प्रदेश के इंदौर निवासी एक युवक के अचानक लापता होने का मामला सामने आया है। लापता युवक की पहचान 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय के रूप में हुई है, जो बेंगलुरु के बेगुर क्षेत्र में रहकर एक निजी फाइनेंस कंपनी में कार्यरत है। घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों ने घने पहाड़ी इलाकों में बड़े पैमाने पर तलाशी और बचाव अभियान प्रारंभ कर दिया है।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, अद्वैत उपाध्याय ने शुक्रवार को सुबह ट्रेकिंग पर जाने से पूर्व अपनी मंगेतर को अपनी इस यात्रा की जानकारी दी थी। इसके बाद उसने आवागमन के लिए एक दुपहिया वाहन किराए पर लिया और शिवगंगे पहाड़ी की तलहटी में पहुंचा। सुबह लगभग साढ़े छह बजे उसने अपना वाहन पार्क किया और पहाड़ी की ओर चढ़ना शुरू किया। तलहटी के समीप स्थापित सीसीटीवी कैमरों में उसे अकेले पहाड़ी की ओर जाते हुए देखा गया है।

    पहाड़ी पर चढ़ने के कुछ समय बाद से ही अद्वैत का कोई संपर्क नहीं हो सका है और उसका मोबाइल फोन भी लगातार बंद आ रहा है। लंबे समय तक सुराग न मिलने पर परिजनों ने किसी अनहोनी या राहजनी की आशंका व्यक्त की है। परिजनों को संदेह है कि सुनसान इलाका होने के कारण किसी आपराधिक तत्व ने उसे निशाना बनाया हो सकता है।

    घटना के संबंध में कडुगोडी पुलिस थाने में औपचारिक गुमशुदगी का मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिवगंगे की कठिन और दुर्गम पहाड़ियों में पुलिसकर्मियों की विशेष टीमों के साथ डॉग स्क्वायड को भी तैनात किया गया है। पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दुर्घटना, राहजनी और अपहरण समेत सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर गहन छानबीन कर रही है।

    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से जुड़े इस मामले के सामने आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी कर्नाटक पुलिस के संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश में अद्वैत के परिवारजन और रिश्तेदार उसकी सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं। राज्य के गृह विभाग द्वारा भी इस संबंध में आवश्यक समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि तलाशी अभियान में तेजी लाई जा सके।

    बेंगलुरु पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों और पर्यटकों से भी पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सुराग जुटाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। प्रशासन ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने और युवक को सुरक्षित ढूंढ निकालने का आश्वासन दिया है।

  • मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश के गुना में भतीजे की करतूत की सजा मिलने और अपमानजनक होने से पीड़ित की मौत

    मध्य प्रदेश।  के गुना जिले से इंसानियत और सामाजिक ताने-बाने को तार-तार कर देने वाली एक दुखद घटना सामने आई है। जिले के राघौगढ़ क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादीशुदा महिला को भगा ले जाने के बाद पीड़ित परिवार और गांव के लोगों ने आरोपी युवक के चाचा को बंधक बनाकर अमानवीय यातनाएं दीं। करीब सवा महीने पुराने इस घटनाक्रम का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पीड़ित व्यक्ति गहरे मानसिक सदमे में चला गया, जिससे उसकी दुखद मृत्यु हो गई।

    घटना के संदर्भ में प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमरपुरा गांव निवासी 45 वर्षीय अजोड़ सिंह बंजारा के भतीजे पर आरोप था कि वह पड़ोसी गांव की एक विवाहित महिला को अपने साथ ले गया था। इस बात से आक्रोशित होकर महिला के ससुराल पक्ष के लोगों ने अजोड़ सिंह को धोखे से पकड़ लिया और उन्हें बंधक बना लिया। आरोपियों ने पीड़ित के हाथ-पैर बांधकर उनके साथ जमकर मारपीट की और सार्वजनिक रूप से अपमानित करने के लिए उनके गले में जूते-चप्पलों की माला डालकर गांव में घुमाया।

    उस समय घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित व्यक्ति को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया था। पीड़ित परिजनों का कहना है कि इस गंभीर और अपमानजनक घटना के संबंध में पुलिस प्रशासन और जनसुनवाई के माध्यम से उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायतें दी गई थीं। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते प्रशासनिक स्तर पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की गई होती, तो यह अनहोनी टाली जा सकती थी।

    घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब शुक्रवार को पीड़ित किसी कार्यवश समीपस्थ कस्बे में गए थे। वहां एक परिचित व्यक्ति ने उनके मोबाइल पर उसी पुरानी घटना का वायरल वीडियो दिखा दिया। वीडियो में खुद को बंधा हुआ और गले में जूतों की माला पहने देखकर पीड़ित बेहद आहत हुए। घर लौटने के बाद उन्होंने परिजनों से अपनी पीड़ा व्यक्त की कि लोग अब इस वीडियो के जरिए उनका उपहास उड़ा रहे हैं। इसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया।

    मृतक अपने पीछे पत्नी, पांच बेटियों और एक मासूम बेटे का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। इस घटना के बाद से पूरे अमरपुरा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में मातम का माहौल है। घटना की भयावहता को देखते हुए स्थानीय पुलिस चौकी और वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। पुलिस प्रशासन अब वायरल वीडियो, पूर्व में हुई मारपीट और पीड़ित की मृत्यु के कारणों की व्यापक स्तर पर जांच कर रहा है।

    कानूनी विशेषज्ञों और सामाजिक विचारकों का मानना है कि किसी अन्य व्यक्ति के अपराध की सजा किसी रिश्तेदार को देना और फिर सोशल मीडिया पर अपमानजनक सामग्री प्रसारित करना एक गंभीर अपराध है। गुना जिले की इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि साइबर अपराध और सामाजिक लिंचिंग के बढ़ते मामले किस प्रकार बेकसूर लोगों की जान ले रहे हैं।

  • कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम

    कहीं पाताल में समा जाता है जल तो कहीं बिजली गिरते ही टूट जाता है शिवलिंग, जानें महादेव के 5 रहस्यमयी धाम


    नई दिल्ली । सावन का दूसरा सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद खास माना जाता है। इस पावन अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। भारत में भगवान शिव को समर्पित हजारों मंदिर हैं लेकिन इनमें कुछ ऐसे धाम भी हैं जो अपनी अनोखी प्राकृतिक परिस्थितियों और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन मंदिरों के बारे में ऐसी कई कथाएं प्रचलित हैं जिन्हें सुनकर श्रद्धालु भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं। आइए जानते हैं भगवान शिव के ऐसे ही पांच अनोखे धामों के बारे में।

    गुजरात के कैंबे तट पर अरब सागर के बीच स्थित स्तम्भेश्वर महादेव मंदिर सबसे अनोखे शिव मंदिरों में गिना जाता है। इस मंदिर की खासियत यह है कि ज्वार आने पर समुद्र का पानी शिवलिंग को पूरी तरह ढक लेता है और मंदिर कुछ समय के लिए दिखाई देना बंद हो जाता है। ज्वार उतरने के बाद मंदिर फिर नजर आने लगता है। इसी वजह से श्रद्धालु यहां समुद्र के ज्वार भाटे के समय को ध्यान में रखकर दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार तारकासुर के वध के बाद भगवान कार्तिकेय ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी।

    गुजरात के भावनगर जिले में स्थित निष्कलंक महादेव मंदिर भी समुद्र के बीच अपनी अनोखी पहचान रखता है। कोलियाक तट से करीब तीन किलोमीटर अंदर स्थित यह मंदिर ज्वार आने पर पानी में डूब जाता है और केवल मंदिर का ध्वज दिखाई देता है। समुद्र का पानी उतरने के बाद श्रद्धालु पैदल चलकर यहां पहुंचते हैं। मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने यहां भगवान शिव की आराधना की थी। इसी धार्मिक विश्वास के कारण यह स्थान भक्तों के बीच विशेष महत्व रखता है।

    राजस्थान के धौलपुर में चंबल के बीहड़ों के बीच स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर भी अपने रहस्यमय स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। यहां शिवलिंग के रंग बदलने को लेकर मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि सुबह इसका रंग लाल दिखाई देता है जबकि दोपहर में केसरिया और शाम के समय काला नजर आता है। इसके अलावा शिवलिंग की गहराई को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है।

    छत्तीसगढ़ में स्थित लक्ष्मेश्वर महादेव मंदिर भी अपनी विशेष मान्यताओं के कारण प्रसिद्ध है। यहां मौजूद शिवलिंग को लक्ष्यलिंग कहा जाता है और इसमें हजारों छोटे छिद्र होने की बात कही जाती है। मान्यता है कि इनमें से एक छिद्र पाताल तक जाता है और उसमें चढ़ाया गया जल दिखाई नहीं देता। वहीं एक अन्य स्थान पर पानी हमेशा भरा रहने की मान्यता है जिसे अक्षय कुंड कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार इस स्थान का संबंध भगवान राम और लक्ष्मण से भी जोड़ा जाता है।

    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।
    हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में ऊंचे पहाड़ पर स्थित बिजली महादेव मंदिर भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि करीब 12 वर्ष के अंतराल पर यहां शिवलिंग पर आकाशीय बिजली गिरती है जिससे शिवलिंग खंडित हो जाता है। इसके बाद मंदिर के पुजारी मक्खन की सहायता से शिवलिंग के टुकड़ों को जोड़ते हैं और कुछ समय बाद वह दोबारा अपने पुराने स्वरूप में आ जाता है। इसी मान्यता ने इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दी है।

    भगवान शिव के इन पांचों धामों की खासियत सिर्फ इनके धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं है। समुद्र के ज्वार से मंदिर का डूबना हो या प्राकृतिक घटनाओं से जुड़ी मान्यताएं इन स्थानों का वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव देता है। हालांकि इनसे जुड़े चमत्कारों और मान्यताओं को धार्मिक विश्वास के रूप में देखा जाना चाहिए। सावन के पवित्र महीने में इन धामों की चर्चा और भी बढ़ जाती है और देशभर से श्रद्धालु महादेव के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।

  • सुपरस्टार सलमान खान से गोविंदा ने क्यों कहा था कि तुम हीरो जैसे नहीं दिखते, इंटरव्यू में सामने आया सच

    सुपरस्टार सलमान खान से गोविंदा ने क्यों कहा था कि तुम हीरो जैसे नहीं दिखते, इंटरव्यू में सामने आया सच

    नई दिल्ली । बॉलीवुड के दो दिग्गज अभिनेताओं गोविंदा और सलमान खान की जोड़ी ने वर्ष 2007 में प्रदर्शित फिल्म ‘पार्टनर’ के जरिए बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की थी। निर्देशक डेविड धवन के निर्देशन में बनी इस ब्लॉकबस्टर कॉमेडी फिल्म की शूटिंग के दौरान के अनुभवों को याद करते हुए गोविंदा ने एक बड़ा खुलासा किया है। एक हालिया साक्षात्कार में गोविंदा ने साझा किया कि उन्होंने उस समय सलमान खान को उनके व्यक्तिगत जीवन, शारीरिक फिटनेस और करियर के दृष्टिकोण से संबंधित कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे।

    गोविंदा ने बताया कि ‘पार्टनर’ की शूटिंग के समय सलमान खान एक कठिन दौर से गुजर रहे थे और काफी अंतर्मुखी हो गए थे। उस समय दोनों ने साथ बैठकर बातचीत की, जिसमें गोविंदा ने उन्हें जीवन की प्राथमिकताओं को समझने और अपने भीतर झांकने का परामर्श दिया। गोविंदा के अनुसार, उस दौर में सलमान खान का आभामंडल काफी उदास और नकारात्मकता से घिरा हुआ महसूस होता था, जिससे उबरने की उन्हें सख्त जरूरत थी।

    बातचीत के दौरान गोविंदा ने सलमान खान को स्पष्ट रूप से कहा था कि उन्हें अपनी फिटनेस पर ध्यान देकर वजन कम करना चाहिए, ताकि वे पर्दे पर दोबारा मुख्य अभिनेता यानी हीरो के रूप में प्रभावी दिख सकें। गोविंदा ने मजाकिया लेकिन व्यावहारिक अंदाज में कहा कि यदि समय रहते वजन नहीं घटाया गया तो उद्योग उन्हें चरित्र अभिनेता के रूप में देखने लगेगा। उन्होंने सलमान खान को सलाह दी कि वे उस दौर की नकारात्मक वाइब्स को पीछे छोड़कर अपने वास्तविक आकर्षण को पुनः प्राप्त करें।

    इंटरव्यू में गोविंदा ने सलमान खान के व्यक्तित्व और सिनेमाई प्रभाव की खुलकर सराहना भी की। उन्होंने कहा कि दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र के बाद सलमान खान ही हिंदी फिल्म उद्योग के ऐसे एकमात्र स्टार हैं, जिन्हें एक शानदार चेहरा, बेहतरीन व्यक्तित्व और स्वाभाविक आकर्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि उनमें आज भी वह प्रभाव छोड़ने की क्षमता है जिससे दर्शक उन्हें देखते ही सच्चा हीरो मानने लगें।

    फिल्म ‘पार्टनर’ के बाद से ही प्रशंसक इस हिट जोड़ी को दोबारा बड़े पर्दे पर साथ देखने का इंतजार कर रहे हैं। मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में भी इन दोनों कलाकारों की बड़ी प्रशंसक संख्या मौजूद है, जहां आज भी इस फिल्म की कॉमेडी को बेहद पसंद किया जाता है। राज्य के सिनेमाप्रेमियों के बीच दोनों अभिनेताओं के पुनर्मिलन और ‘पार्टनर 2’ के निर्माण को लेकर समय-समय पर उत्सुकता बनी रहती है।

    कलाकारों द्वारा एक-दूसरे को दिए जाने वाले इस प्रकार के पारस्परिक मार्गदर्शन और सहयोग को हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक सकारात्मक उदाहरण माना जाता है। गोविंदा के इस वक्तव्य से यह स्पष्ट होता है कि फिल्मों में प्रतिस्पर्धा के बावजूद अभिनेताओं के बीच व्यक्तिगत और सहयोगात्मक संबंध बने रहते हैं, जो संकट के समय में एक-दूसरे के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं।

  • ओटीटी पर इस हफ्ते आ रही हैं 11 नई फिल्में और वेब सीरीज, देखें पूरी लिस्ट और रिलीज डेट

    ओटीटी पर इस हफ्ते आ रही हैं 11 नई फिल्में और वेब सीरीज, देखें पूरी लिस्ट और रिलीज डेट


    नई दिल्ली ।
    डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर मनोरंजन का नया दौर शुरू होने जा रहा है। 10 अगस्त से 16 अगस्त के मध्य ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर एक्शन, थ्रिलर, रियलिटी शो और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़ी 11 नई फिल्में और वेब सीरीज प्रदर्शित की जाएंगी। इनमें हॉलीवुड के चर्चित शो के नए सीजन, बॉलीवुड की हालिया बॉक्स ऑफिस फिल्में और लोकप्रिय कोरियन ड्रामा शामिल हैं। बिंज-वॉच और डिजिटल मनोरंजन पसंद करने वाले दर्शकों के लिए यह हफ्ता बेहद खास रहने वाला है।

    साप्ताह की शुरुआत में खेल और अंतरराष्ट्रीय कंटेंट को प्राथमिकता दी गई है। 11 अगस्त को फुटबॉल के मशहूर मैनेजर होसे मोरिन्हो की जिंदगी पर आधारित स्पोर्ट्स डॉक्यूमेंट्री सीरीज मोरिन्हो नेटफ्लिक्स पर आ रही है। इसके अलावा अमेजन प्राइम वीडियो पर कोरियन ड्रामा द लीजेंड ऑफ किचन सोल्जर और ऑफिस लाइफ पर केंद्रित फिफ्टीज प्रोफेशनल्स को हिंदी, तमिल और तेलुगू भाषाओं में स्ट्रीम किया जाएगा।

    एक्शन और रियलिटी आधारित सामग्री की बात करें तो 12 अगस्त को अमेजन प्राइम वीडियो पर लोकप्रिय थ्रिलर शो रीचर का चौथा सीजन प्रदर्शित होगा। 13 अगस्त को करण जौहर का चर्चित रियलिटी गेम शो द ट्रेटर्स इंडिया का दूसरा सीजन अमेजन प्राइम वीडियो पर आ रहा है, जिसमें 21 सेलिब्रिटीज हिस्सा ले रहे हैं। उसी दिन गॉय रिची के निर्देशन में बनी एक्शन फिल्म इन द ग्रे, मलयालम ड्रामा कैटलन और इमोशनल मेक्सिकन फिल्म अ चाइल्ड ऑफ माय ओन भी रिलीज होगी।

    स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 14 अगस्त को बॉलीवुड की बड़ी फिल्में ओटीटी पर दस्तक देने जा रही हैं। सिनेमाघरों में सफल रही शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर रोमांटिक कॉमेडी फिल्म कॉकटेल 2 का नेटफ्लिक्स पर प्रीमियर होगा। इसके साथ ही कंगना रनौत की सर्वाइवल ड्रामा फिल्म भारत भाग्य विधाता को जी5 पर दर्शकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसी दिन इंडिपेंडेंट ड्रामा फिल्म डोन्ट से गुड लक भी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी।

    मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है, जहां युवा और परिवार वीकेंड पर ओटीटी स्ट्रीमिंग को प्राथमिकता देते हैं। प्रदेश में मल्टी-लिंगुअल और विविध शैलियों वाले कंटेंट की मांग को देखते हुए इन नई रिलीज को लेकर दर्शकों में अच्छा खासा उत्साह देखा जा रहा है।

    विभिन्न ओटीटी प्लेटफॉर्म्स द्वारा इस हफ्ते पेश किया जा रहा विविध सामग्री का यह बुके अलग-अलग आयु वर्ग के दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। आने वाले दिनों में इन फिल्मों और सीरीज की स्ट्रीमिंग के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर दर्शकों की व्यूअरशिप में बढ़ोतरी दर्ज किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

  • जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में दबाई, जगह भूला किसान तो दीमक खा गई 5 लाख की पूरी रकम

    जिंदगी भर की कमाई मिट्टी में दबाई, जगह भूला किसान तो दीमक खा गई 5 लाख की पूरी रकम


    नई दिल्ली । राजस्थान के बालोतरा जिले से सामने आई यह घटना जितनी हैरान करने वाली है उतनी ही बड़ी सीख भी देती है। पचपदरा थाना क्षेत्र के नेवाई गांव के रहने वाले किसान मांगीलाल मेघवाल ने चोरी और फिजूलखर्ची से बचाने के लिए अपने 5 लाख रुपये खेत में गाड़ दिए। रकम प्लॉट बेचने के बाद मिली थी और किसान इस पैसे से खेत में पक्का कमरा बनवाना चाहता था। लेकिन करीब एक साल बाद जब उसे अपनी छिपाई हुई रकम की याद आई तो उसे यह तक याद नहीं रहा कि आखिर उसने पैसे खेत में किस जगह दबाए थे। काफी तलाश के बाद जब रकम मिली तो ज्यादातर नोटों को दीमक बुरी तरह चट कर चुकी थी।

    मांगीलाल अपने परिवार के साथ खेत में बनी कच्ची ढाणी में रहता है। प्लॉट बेचने के बाद उसके पास 5 लाख रुपये आए थे। वह चाहता था कि यह रकम सुरक्षित रहे और चोरी या बेवजह खर्च न हो जाए। इसी सोच के साथ उसने नोटों को पॉलीथिन में रखा और खेत में गड्ढा खोदकर जमीन के अंदर दबा दिया। उसने इस बारे में अपनी पत्नी और बेटों को भी नहीं बताया। परिवार के मुताबिक किसान को नशे की लत है और वह अक्सर चीजें भूल जाता है। यही भूल बाद में उसके लिए भारी आर्थिक नुकसान की वजह बन गई।

    कुछ समय बाद जब कमरे के निर्माण के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो मांगीलाल को याद आया कि उसने रकम खेत में छिपाई थी। लेकिन तब तक वह उस जगह को भूल चुका था। करीब 10 बीघा में फैले खेत में उसने कई जगह खुदाई की लेकिन पैसे नहीं मिले। आखिरकार उसने अपनी पत्नी और बेटों को पूरी बात बताई। परिवार ने भी खेत में कई जगह तलाश की लेकिन रकम का कोई पता नहीं चला। धीरे धीरे सभी ने उम्मीद छोड़ दी।

    करीब एक साल बाद बारिश के मौसम में जब खेत में बुवाई की तैयारी चल रही थी तब एक रात जमीन से रुपयों वाली पॉलीथिन बाहर निकल आई। अगले दिन तारबंदी ठीक करते समय किसान की पत्नी और बेटे की नजर उस थैली पर पड़ी। थैली खोलते ही परिवार के होश उड़ गए। उसमें 500 रुपये के नोट मौजूद थे लेकिन उनकी हालत बेहद खराब थी। नोटों को दीमक ने जगह जगह से काट दिया था और कई नोट छोटे छोटे टुकड़ों में बदल चुके थे।

    परिवार ने बचे हुए नोटों को संभाला और उन्हें बदलवाने की उम्मीद में पचपदरा स्थित एसबीआई शाखा पहुंचा। वहां बैंक कर्मचारियों ने नोटों की स्थिति देखने के बाद उन्हें बदलने से इनकार कर दिया। इसके बाद परिवार बालोतरा स्थित एसबीआई की मुख्य शाखा भी पहुंचा लेकिन वहां भी शुरुआती तौर पर उन्हें निराशा हाथ लगी। इस तरह चोरी से बचाने के लिए खेत में छिपाई गई 5 लाख रुपये की रकम अब लगभग बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है।

    यह घटना सिर्फ एक किसान की आर्थिक परेशानी की कहानी नहीं बल्कि नकदी को असुरक्षित तरीके से छिपाकर रखने के जोखिम की भी मिसाल है। मेहनत से कमाई गई रकम को सुरक्षित रखने के लिए बैंक या अन्य औपचारिक माध्यमों का इस्तेमाल ज्यादा सुरक्षित माना जाता है। मांगीलाल ने पैसे बचाने के इरादे से जो तरीका अपनाया वही आखिरकार उसकी सबसे बड़ी मुसीबत बन गया। अब परिवार बची हुई रकम को लेकर बैंक से किसी समाधान की उम्मीद कर रहा है।

  • 17 फिल्मों के बाद क्यों टूटी गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी, अभिनेता ने इंटरव्यू में बताई वजह

    17 फिल्मों के बाद क्यों टूटी गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी, अभिनेता ने इंटरव्यू में बताई वजह

    नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा के 90 के दशक के चर्चित अभिनेता गोविंदा ने निर्देशक डेविड धवन के साथ अपनी सफल जोड़ी और उनके साथ काम बंद करने के कारणों पर खुलकर विचार व्यक्त किए हैं। एक हालिया साक्षात्कार में गोविंदा ने उस दौर को याद किया जब दोनों की जोड़ी बॉक्स ऑफिस पर एक के बाद एक कई सफल फिल्में दे रही थी। गोविंदा और डेविड धवन ने साथ मिलकर कुल 17 फिल्मों में काम किया था, जिनमें कुली नंबर 1, राजा बाबू, हीरो नंबर 1 और बड़े मियां छोटे मियां जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं।

    साक्षात्कार के दौरान गोविंदा ने स्पष्ट किया कि डेविड धवन के साथ उनका पेशेवर रिश्ता तब थमा जब निर्देशक को लगा कि इस साझेदारी को और आगे बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है। गोविंदा के अनुसार, वे उनके साथ 18वीं और 19वीं फिल्म भी बनाना चाहते थे, लेकिन डेविड धवन ने उस समय आगे न बढ़ने का फैसला किया। गोविंदा ने इसे निर्देशक का अपना निजी और व्यावहारिक फैसला माना और कहा कि इस संबंध में उनके मन में कभी कोई संशय नहीं रहा।

    दोनों के व्यक्तिगत संबंधों पर बात करते हुए अभिनेता ने स्वीकार किया कि कई बार उनके बीच नाराजगी भी होती थी, लेकिन उनका व्यक्तिगत जुड़ाव हमेशा बना रहा। उन्होंने बताया कि पेशेवर अलगाव के बाद भी जब भी उनकी बात होती है या कोई विषय आता है, तो उनके बीच वही पुराना सम्मान और आत्मीयता देखने को मिलती है। हाल ही में एक फिल्म की रिलीज के बाद भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी, जिसमें व्यक्तिगत कुशलक्षेम साझा की गई।

    इसी बातचीत में गोविंदा ने दिवंगत अभिनेता और संवाद लेखक कादर खान के साथ अपनी प्रसिद्ध केमिस्ट्री पर भी प्रकाश डाला। गोविंदा ने बताया कि कादर खान की उपस्थिति ने उनकी कॉमिक टाइमिंग और अभिनय शैली को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई। शुरुआत में एक-दूसरे की कार्यशैली को समझने में थोड़ा समय लगा, लेकिन बाद में दोनों के बीच एक बेहतरीन पेशेवर तालमेल स्थापित हो गया, जिसने पर्दे पर कई यादगार दृश्य दिए।

    मध्य प्रदेश के इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में 90 के दशक की इन कॉमेडी फिल्मों को काफी दर्शक मिले हैं और आज भी टीवी पर इन्हें बड़े चाव से देखा जाता है। प्रदेश के फिल्म प्रेमी और सांस्कृतिक विश्लेषक गोविंदा और डेविड धवन की जोड़ी को भारतीय सिनेमा के सबसे सफल दौरों में से एक मानते हैं। कादर खान के साथ गोविंदा के संवाद आज भी हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम काल का हिस्सा माने जाते हैं।

    गोविंदा और कादर खान ने दूल्हे राजा, साजन चले ससुराल, हसीना मान जाएगी और अनाड़ी नंबर 1 जैसी दर्जनों हिट फिल्मों में साथ काम किया। अभिनेता के अनुसार, वरिष्ठ कलाकारों और निर्देशकों के साथ काम करने के इन अनुभवों ने उनके पूरे फिल्मी सफर को आकार दिया। भले ही समय के साथ सिनेमा का स्वरूप बदला हो, लेकिन इस जोड़ी द्वारा निर्मित फिल्में आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।

  • केबीसी 18 के मंच पर अमिताभ बच्चन ने प्रीति जिंटा से मैसेज का जवाब न मिलने पर जताई नाराजगी

    केबीसी 18 के मंच पर अमिताभ बच्चन ने प्रीति जिंटा से मैसेज का जवाब न मिलने पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । टेलीविजन का लोकप्रिय गेम शो कौन बनेगा करोड़पति अपने नए सीजन के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच दस्तक दे रहा है। शो के 18वें सीजन के प्रीमियर एपिसोड में बॉलीवुड के कई दिग्गज कलाकार अपनी आगामी फिल्म बंटवारा 1947 के प्रचार के लिए पहुंचे। इस विशेष एपिसोड में अभिनेता सनी देओल, आमिर खान और अभिनेत्री प्रीति जिंटा शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान शो के संचालक और अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अभिनेत्री प्रीति जिंटा से जुड़ा एक पुराना मजेदार वाकया साझा किया।

    शो के आधिकारिक प्रोमो में अमिताभ बच्चन मंच पर प्रीति जिंटा से एक हल्की-फुल्की शिकायत दर्ज कराते नजर आए। उन्होंने बताया कि हर साल 31 जनवरी को अभिनेत्री के जन्मदिन पर उनकी ओर से शुभकामना संदेश भेजा जाता है, लेकिन उन्हें कभी इसका सीधा जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इस अप्रत्याशित बात को सुनकर मंच पर मौजूद अन्य कलाकार और दर्शक भी मुस्कुरा दिए, जबकि अभिनेत्री ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की।

    कार्यक्रम के दौरान अमिताभ बच्चन ने एक दशक से भी अधिक पुराना एक सार्वजनिक संदेश भी दिखाया, जिसमें उन्होंने मजाकिया लहजे में अभिनेत्री को जन्मदिन की बधाई देने का जिक्र किया था। अभिनेत्री ने अपनी सफाई में कहा कि संदेशों का उत्तर अक्सर देर से पहुंच पाता है। इस पूरे वाकये ने शो के शुरुआती एपिसोड में हल्का-फुल्का और मनोरंजक माहौल बना दिया, जिसे प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद किया जा रहा है।

    उल्लेखनीय है कि कौन बनेगा करोड़पति का यह नया सीजन तकनीक और फॉर्मेट के स्तर पर कई बदलावों के साथ प्रस्तुत किया जा रहा है। इस शो को भारत के विभिन्न हिस्सों में व्यापक लोकप्रियता हासिल है। मध्य प्रदेश सहित देश के कई राज्यों से प्रतियोगी इस मंच पर अपनी किस्मत और ज्ञान आजमाने पहुंचते हैं। प्रदेश के विभिन्न शहरों में इस कार्यक्रम को देखने वाले दर्शकों की बड़ी संख्या मौजूद है।

    प्रीमियर एपिसोड में पहुंची स्टारकास्ट की आगामी फिल्म बंटवारा 1947 आगामी 14 अगस्त को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही है। इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जबकि इसका निर्माण आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले हुआ है। फिल्म में सनी देओल, प्रीति जिंटा, अली फजल और शबाना आजमी जैसे वरिष्ठ कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे।

    गेम शो के इस विशेष प्रचारक एपिसोड से फिल्म और शो दोनों को लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता देखी जा रही है। मनोरंजन जगत के विश्लेषकों का मानना है कि टेलीविजन के सबसे बड़े मंच से फिल्मों का प्रचार दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में हमेशा से कारगर साबित होता रहा है।

  • नितेश तिवारी की फिल्म रामायण और आदिपुरुष की विजुअल प्रस्तुति के बीच दिखा बड़ा सिनेमाई अंतर

    नितेश तिवारी की फिल्म रामायण और आदिपुरुष की विजुअल प्रस्तुति के बीच दिखा बड़ा सिनेमाई अंतर


    नई दिल्ली ।
    भारतीय सिनेमा में पौराणिक महाकाव्य रामायण पर आधारित फिल्मों को लेकर दर्शकों के बीच हमेशा से भारी उत्सुकता रही है। आगामी समय में रिलीज के लिए प्रस्तावित निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म रामायण के टीजर और शुरुआती झलकियों के सामने आने के बाद से ही इसकी तुलना वर्ष 2023 में प्रदर्शित हुई फिल्म आदिपुरुष से की जा रही है। दोनों फिल्मों के दृश्यों, किरदारों के पहनावे और स्पेशल इफेक्ट्स के उपयोग में बड़ा सिनेमाई और कलात्मक अंतर देखने को मिल रहा है।

    पूर्व में प्रदर्शित आदिपुरुष को उसके अत्यधिक आधुनिक संवादों और एनीमेशन जैसे प्रतीत होने वाले विजुअल इफेक्ट्स के कारण दर्शकों की तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके विपरीत, नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रामायण के दृश्यों को भारतीय सांस्कृतिक परंपरा और पौराणिक विवरणों के अधिक निकट माना जा रहा है। तस्वीरों और वीडियो फुटेज के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि दोनों फिल्मों का दृश्य दृष्टिकोण एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न है।

    धार्मिक और पौराणिक संदर्भों के चित्रण में भी दोनों फिल्मों में स्पष्ट भिन्नता नजर आती है। भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप को दर्शाने वाले दृश्यों में नई फिल्म में शांत और प्रामाणिक आभा का प्रयोग किया गया है, जबकि पुरानी फिल्म में अंतरिक्ष और ग्रहों के बीच अत्यधिक एनिमेटेड संरचना दिखाई गई थी। इसी प्रकार, भगवान राम और माता सीता के भावनात्मक दृश्यों में सादगी और भारतीय मर्यादा का ध्यान रखा गया है, जबकि आदिपुरुष में इन दृश्यों को आधुनिक और नाटकीय मोड़ दिया गया था।

    लंकापति रावण के चरित्र चित्रण और उसके दरबार के विजुअल्स को लेकर भी बड़ा बदलाव देखा गया है। नई प्रस्तुति में रावण के किरदार को पारंपरिक भारतीय राजसी लुक और सुनहरी भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया है। दूसरी ओर, आदिपुरुष में इस किरदार को हॉलीवुड शैली का डार्क विलेन लुक दिया गया था, जिसे भारतीय दर्शकों ने स्वीकार नहीं किया था। युद्ध और राक्षसी चरित्रों के दृश्यों में भी नई फिल्म में जमीनी वास्तविकता और धूल-मिट्टी के प्रभाव को प्राथमिकता दी गई है।

    भारतीय पौराणिक कथाओं पर आधारित फिल्मों की मांग मध्य प्रदेश के सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों पर भी पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है। प्रदेश के सांस्कृतिक अध्ययन केंद्र और कला विशेषज्ञ इस प्रकार की फिल्मों में प्रामाणिकता बनाए रखने पर विशेष जोर देते रहे हैं। इस नई फिल्म के दृश्यों में रुद्राक्ष, सूती वस्त्रों और मिट्टी के आश्रमों का प्रयोग करके वनवास के समय की स्वाभाविकता को बनाए रखने का प्रयास किया गया है।

    फिल्म विशेषज्ञों का मानना है कि पौराणिक और ऐतिहासिक विषयों पर बनने वाली फिल्मों की सफलता उनके यथार्थवादी दृष्टिकोण और सांस्कृतिक संवेदनाओं पर निर्भर करती है। अत्यधिक डिजिटल इफेक्ट्स और पश्चिमी शैली का अंधानुकरण अक्सर दर्शकों से भावनात्मक जुड़ाव को कमजोर कर देता है। नई फिल्म के निर्माण में पौराणिक विवरणों और प्रामाणिक प्रस्तुतीकरण का संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया गया है, जिसकी प्रतिक्रिया आने वाले समय में बॉक्स ऑफिस पर दिखाई देगी।