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  • मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद

    मध्य प्रदेश में बारिश का कहर: भोपाल में 7 इंच पानी से हाहाकार, विदिशा में 17 लोगों का रेस्क्यू; कई शहरों में रास्ते बंद


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव होने के बाद सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। राजधानी भोपाल समेत विदिशा सीहोर शाजापुर रायसेन राजगढ़ और कई अन्य जिलों में लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। विदिशा में बाढ़ के पानी में बच्चों समेत 17 लोग फंस गए जिन्हें पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहीं भोपाल में पिछले 24 घंटे के दौरान करीब 7 इंच बारिश दर्ज की गई जिसके बाद शहर के कई इलाकों में सड़कें जलमग्न हो गईं और घरों तक पानी पहुंच गया।

    भोपाल में बारिश का असर रेलवे स्टेशन से लेकर पुलिस थाने तक दिखाई दिया। भोपाल रेलवे स्टेशन के ट्रैक पर पानी भरने से रेल परिचालन प्रभावित होने की स्थिति बनी वहीं ईंटखेड़ी थाना परिसर में भी बारिश का पानी घुस गया। शहर की कई कॉलोनियों में जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। सेमरा इलाके में करीब 200 घरों के आसपास 5 से 6 फीट तक पानी भरने की सूचना है जिससे बड़ी संख्या में लोग अपने घरों में ही फंसकर रह गए। अपोलो अस्पताल के आसपास की कॉलोनियों कंफर्ट ग्रीन कॉलोनी और पुलिस हाउसिंग कॉलोनी में भी पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। पेड़ गिरने के कारण वीआईपी रोड पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

    बारिश का असर भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी देखने को मिला। भोपाल बैरसिया मार्ग पर ईंटखेड़ी पुल के आसपास पानी बढ़ने और कई नदियों नालों के उफान पर आने से आवागमन प्रभावित हुआ। बैरसिया और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव के कारण कई रास्तों पर आवाजाही रोकनी पड़ी। ब्यावरा में रेलवे अंडरपास में पानी भर जाने से करीब 25 गांवों का संपर्क टूट गया है। सीहोर में भी कई रास्तों पर पानी बहने लगा और श्यामपुर समेत कई इलाकों में मकानों के भीतर बारिश का पानी घुस गया। सेवनिया में मंदिर के डूबने की तस्वीरें भी सामने आई हैं।

    विदिशा में ग्राम बामनखेड़ा के लश्करपुर रोड पर बाढ़ का पानी भरने के बाद करीब 17 लोग फंस गए थे। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन और होमगार्ड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। लगातार बारिश के कारण जिले में नदी नालों का जलस्तर बढ़ा हुआ है और प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

    शाजापुर जिले के अकोदिया क्षेत्र में कालीसिंध नदी उफान पर है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण आसपास के निचले इलाकों में खतरा बढ़ गया है। प्रशासन ने लोगों से नदी के आसपास नहीं जाने और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। नलखेड़ा रोड की पड़ाव कॉलोनी में कई घरों और दुकानों में पानी घुस गया। वहीं उकावल जाने वाले मार्ग के रेलवे अंडरब्रिज में पानी भरने से आवाजाही प्रभावित हुई।

    रतलाम में भी सुबह से हो रही बारिश के कारण नदी नालों और जलस्रोतों का जलस्तर बढ़ गया है। सैलाना के आडवानिया स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर का झरना तेज धार के साथ बहने लगा। सावन के दूसरे सोमवार के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी पहुंची। सीहोर में उफनते नाले के बीच एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचाने का मामला भी सामने आया। वहीं कई गांवों में रास्ते पानी में डूब गए हैं।

    पिछले 24 घंटे के आंकड़ों पर नजर डालें तो भोपाल में करीब 7 इंच बारिश हुई। नर्मदापुरम में 5 इंच रायसेन में 4.9 इंच राजगढ़ और शाजापुर में करीब 4.5 इंच तथा सीहोर में लगभग 4 इंच बारिश दर्ज की गई। मंडला में नर्मदा का जलस्तर कुछ कम हुआ है लेकिन छोटा पुल अब भी पानी में डूबा हुआ है। उमरिया के जोहिला डैम के दो गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है।

    लगातार बारिश से जहां किसानों को फसलों के लिए राहत मिली है वहीं जलभराव और बाढ़ ने कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। प्रशासन की टीमें संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर बनाए हुए हैं और जहां भी लोग पानी में फंस रहे हैं वहां रेस्क्यू अभियान चलाया जा रहा है। मौसम विभाग के अलर्ट के बीच लोगों से नदी नालों पुलों और जलभराव वाले रास्तों से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।

  • कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात

    कर्नाटक कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी कांग्रेस की अंदरूनी नाराजगी, डीके शिवकुमार ने खड़गे और वेणुगोपाल से की मुलाकात


    नई दिल्ली । कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के हालिया कैबिनेट विस्तार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति सामने आने लगी है। मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने से कुछ कांग्रेस विधायक नाराज बताए जा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार को कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और संभावित छोटे बदलावों को लेकर चर्चा की।

    डीके शिवकुमार ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत होने की जानकारी सामने आई है। इससे पहले शिवकुमार ने कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल से भी चर्चा की। इन बैठकों को कर्नाटक मंत्रिमंडल में हालिया विस्तार के बाद बने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    कर्नाटक सरकार में इस महीने की शुरुआत में बड़ा कैबिनेट विस्तार किया गया था। इस विस्तार में 19 नए मंत्रियों को शामिल किया गया। इसके बाद मुख्यमंत्री समेत मंत्रियों की कुल संख्या 33 हो गई। हालांकि, नए मंत्रियों को अभी तक विभागों का आवंटन नहीं किया गया है। विभागों के बंटवारे में हो रही देरी के बीच पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं।

    मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले कुछ विधायक अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने इन नेताओं को साथ बनाए रखने की चुनौती है। वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं और कुछ मंत्रियों ने ऐसे विधायकों से बातचीत भी की है। इसका उद्देश्य नाराजगी को कम करना और संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखना बताया जा रहा है।

    विभागों के बंटवारे को लेकर मुख्यमंत्री की शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बातचीत को इसी प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। चर्चा है कि नाराज विधायकों को संतुष्ट करने के लिए कुछ मंत्रियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा एक या दो मौजूदा मंत्रियों को हटाने की संभावना पर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा है, हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।

    डीके शिवकुमार ने कैबिनेट में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर भी संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल में एक महिला को शामिल किया जाना चाहिए और इस दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जल्दबाजी से बचने की बात कही। इससे माना जा रहा है कि कैबिनेट में संभावित बदलाव केवल विभागों के पुनर्वितरण तक सीमित नहीं रह सकते हैं।

    कर्नाटक विधानसभा का मानसून सत्र 13 अगस्त से शुरू होना है। कांग्रेस नेतृत्व की कोशिश है कि विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले मंत्रियों के विभागों का बंटवारा और आवश्यक बदलाव पूरे कर लिए जाएं। इससे सरकार को सदन में एकजुटता के साथ काम करने में मदद मिल सकती है और मंत्रियों को भी अपनी जिम्मेदारियों के साथ काम शुरू करने का अवसर मिलेगा।

    उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने भी विभागों के बंटवारे को लेकर कहा है कि इसमें कोई बड़ी परेशानी नहीं है। उनके अनुसार, जल्द ही सभी मंत्रियों को जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगी। इससे संकेत मिलता है कि सरकार विभागों के आवंटन को लेकर अंतिम चरण की प्रक्रिया में है।

    कर्नाटक कांग्रेस के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। एक तरफ नए मंत्रियों को विभाग देकर सरकार के कामकाज को व्यवस्थित करना है, वहीं दूसरी तरफ मंत्रिमंडल से बाहर रह गए विधायकों की नाराजगी को संभालना है। ऐसे में खड़गे और वेणुगोपाल के साथ डीके शिवकुमार की बैठकों को पार्टी के भीतर समन्वय बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    हालांकि, संभावित फेरबदल को लेकर अभी अंतिम फैसला सामने नहीं आया है। विभागों के बंटवारे और मंत्रियों में बदलाव से जुड़ी तस्वीर विधानसभा के मानसून सत्र से पहले स्पष्ट होने की उम्मीद है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व विधायकों की नाराजगी दूर करने और सरकार के भीतर संतुलन बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान

    आईने में चेहरा गौर से देखिए, कहीं शरीर कोई खतरे का संकेत तो नहीं दे रहा? इन बदलावों पर तुरंत दें ध्यान


    नई दिल्ली । चेहरा सिर्फ हमारी पहचान और खूबसूरती का हिस्सा नहीं है बल्कि कई बार यह शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के संकेत भी दे सकता है। आंखों का रंग बदलना हो या त्वचा का असामान्य रूप से पीला पड़ना होंठों का नीला दिखना या आंखों के आसपास लगातार सूजन रहना इन बदलावों को हमेशा केवल कॉस्मेटिक समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में होने वाले कई बदलाव चेहरे और आंखों पर दिखाई देने लगते हैं। हालांकि केवल चेहरे के लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी की पुष्टि नहीं की जा सकती लेकिन ऐसे बदलाव लगातार बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो जाता है।

    सबसे पहले बात आंखों और त्वचा के पीले पड़ने की करें तो यह पीलिया का संकेत हो सकता है। शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने पर आंखों का सफेद हिस्सा और त्वचा पीली दिखाई देने लगती है। इसके पीछे हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी बीमारी पित्त की पथरी या पित्त की नलियों से जुड़ी समस्या समेत कई कारण हो सकते हैं। कई मामलों में इसके साथ पेशाब का रंग गहरा और मल का रंग सामान्य से हल्का भी दिखाई दे सकता है। इसलिए आंखों में अचानक पीलापन नजर आए तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना बेहतर है।

    इसी तरह चेहरे या त्वचा का रंग सामान्य से ज्यादा फीका या पीला नजर आना भी शरीर में आयरन की कमी से जुड़े एनीमिया का संकेत हो सकता है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है और हीमोग्लोबिन शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अगर त्वचा के रंग में बदलाव के साथ लगातार थकान कमजोरी या थोड़ी मेहनत में सांस फूलने जैसी समस्या हो रही है तो डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

    चेहरे और होंठों का नीला पड़ना भी गंभीर संकेत हो सकता है। होंठ जीभ या चेहरे का अचानक नीला दिखना सायनोसिस कहलाता है और यह रक्त में ऑक्सीजन की कमी या रक्त संचार से जुड़ी परेशानी की ओर इशारा कर सकता है। फेफड़ों की बीमारी वायुमार्ग में रुकावट कुछ हृदय संबंधी समस्याएं या रक्त प्रवाह में बाधा इसके संभावित कारणों में शामिल हो सकते हैं। ऐसा बदलाव अचानक दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।

    आंखों की पलकों के आसपास छोटे पीले या पीले-सफेद उभार भी ध्यान देने लायक होते हैं। इन्हें जैंथेलाज्मा कहा जाता है और ये कुछ लोगों में बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल से जुड़े हो सकते हैं। ऐसे संकेत दिखाई देने पर डॉक्टर की सलाह से लिपिड प्रोफाइल जैसी जांच कराई जा सकती है।

    चेहरे पर लगातार सूजन भी शरीर में किसी गड़बड़ी का संकेत हो सकती है। आंखों के आसपास सूजन कई कारणों से हो सकती है और कुछ मामलों में यह किडनी से जुड़ी समस्याओं में भी देखी जाती है। वहीं चेहरे का फूला हुआ दिखना अंडरएक्टिव थायरॉयड जैसी स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। दूसरी ओर एलर्जी या किसी दवा की प्रतिक्रिया के कारण भी चेहरे और आंखों के आसपास सूजन आ सकती है।

    खास बात यह है कि चेहरे में दिखने वाले हर बदलाव का मतलब किसी गंभीर बीमारी से नहीं होता। मौसम त्वचा की सामान्य स्थिति एलर्जी खानपान या दूसरी वजहों से भी बदलाव हो सकते हैं। लेकिन अगर कोई असामान्य बदलाव अचानक दिखाई दे लगातार बना रहे या उसके साथ कमजोरी सांस लेने में परेशानी दर्द अथवा अन्य लक्षण भी मौजूद हों तो खुद से बीमारी का अनुमान लगाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है। आईना बीमारी की पुष्टि नहीं करता लेकिन शरीर के संकेतों पर समय रहते ध्यान देने में जरूर मदद कर सकता है।

  • JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया

    JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन तेज, रांची में पुलिस ने कई बार बल प्रयोग किया


    नई दिल्ली । झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन सोमवार को विधानसभा मार्च तक पहुंच गया। राज्य के अलग अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में छात्र रांची पहुंचे और विधानसभा घेराव के लिए मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग के साथ वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया, लेकिन स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी।

    सुबह से ही विधानसभा की ओर जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। पुलिस की ओर से छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई स्तरों पर बैरिकेड लगाए गए थे। प्रदर्शनकारी लगातार अपनी मांगों को लेकर नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। छात्रों का कहना था कि उनका प्रदर्शन शांतिपूर्ण है और वे सरकार पर अपनी मांगों को लेकर दबाव बनाना चाहते हैं।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने पुलिस की बैरिकेडिंग को पार करने की कोशिश की। कुछ स्थानों पर बैरिकेड टूटने की स्थिति भी सामने आई। बताया गया कि प्रदर्शनकारियों ने कई बैरिकेड पार कर लिए और नई विधानसभा की दिशा में बढ़ने लगे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

    वॉटर कैनन के इस्तेमाल के दौरान भी कुछ छात्रों ने विरोध जारी रखा। मौके पर मौजूद प्रदर्शनकारियों ने नाचते और गाते हुए पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। कुछ समय बाद पुलिस और छात्रों के बीच तनाव बढ़ गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लाठीचार्ज किया।

    लाठीचार्ज के बाद छात्रों में नाराजगी दिखाई दी। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि वे शांतिपूर्वक आगे बढ़ रहे थे और इसके बावजूद उन पर लाठियां बरसाई गईं। कुछ छात्रों ने दावा किया कि चोटें हाथ, सिर और चेहरे पर भी लगी हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार से मामले को गंभीरता से लेने की मांग की।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। भारतीय जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्य सरकार पर निशाना साधा और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।

    इस बीच डुमरी के विधायक जयराम महतो भी विधानसभा से बाहर निकलकर प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच पहुंचे। उन्होंने छात्रों के समर्थन की बात कही और कहा कि उनकी आवाज को विधानसभा के भीतर और सड़क पर भी उठाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने जयराम महतो का समर्थन करते हुए उन्हें अपने बीच शामिल किया।

    छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो भी विधानसभा मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं और अब सरकार को उनकी शिकायतों पर स्पष्ट कार्रवाई करनी चाहिए। छात्रों ने यह भी कहा कि जब तक उनकी मांगों पर समाधान नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।

    प्रदर्शन के दौरान छात्रों की ओर से यह भी कहा गया कि यदि पुलिस उन्हें विधानसभा जाने से रोकती है तो वे शांतिपूर्वक वहीं रुकने के लिए तैयार हैं। उनका कहना था कि बल प्रयोग की जरूरत नहीं है और वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग उठा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री आवास के बाहर भी बीजेपी नेताओं ने कथित भर्ती अनियमितताओं को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कुछ बीजेपी नेताओं को हिरासत में लिया। इस तरह छात्रों के विधानसभा मार्च के साथ राजनीतिक विरोध भी तेज दिखाई दिया।

    फिलहाल रांची में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई को लेकर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। छात्रों की मुख्य मांग JPSC-JSSC भर्ती प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों पर कार्रवाई से जुड़ी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

  • रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा

    रात की अधूरी नींद दिनभर बिगाड़ सकती है दिमाग की चाल, बढ़ सकता है तनाव और कई बीमारियों का खतरा


    नई दिल्ली । नींद हमारे शरीर और दिमाग को आराम देने के साथ अगले दिन बेहतर तरीके से काम करने के लिए तैयार करती है। यही वजह है कि पर्याप्त नींद को स्वस्थ जीवनशैली का बेहद जरूरी हिस्सा माना जाता है। अगर रात की नींद बार-बार अधूरी रह रही है तो इसका असर सिर्फ सुबह की थकान या दिनभर की सुस्ती तक सीमित नहीं रहता बल्कि धीरे-धीरे व्यक्ति के व्यवहार याददाश्त एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगता है। गुस्सा जल्दी आना छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन महसूस होना किसी काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना और जरूरी बातें भूल जाना कई बार नींद पूरी न होने से भी जुड़ा हो सकता है।

    एक रात नींद कम होने पर अगले दिन थकान सिरदर्द सुस्ती और काम करने में परेशानी महसूस होना सामान्य हो सकता है। कभी-कभार ऐसा होने पर आमतौर पर ज्यादा चिंता की जरूरत नहीं होती लेकिन जब नींद की कमी लगातार बनी रहती है तो इसका असर रोजमर्रा की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। व्यक्ति को छोटे-छोटे फैसले लेने में भी परेशानी हो सकती है और पढ़ाई या काम के दौरान ध्यान भटकने की समस्या बढ़ सकती है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न मिलने की स्थिति में शरीर और दिमाग दोनों पर दबाव बढ़ता है।

    नींद की कमी का सीधा असर व्यवहार पर भी दिखाई दे सकता है। पर्याप्त आराम न मिलने पर व्यक्ति सामान्य परिस्थितियों में भी ज्यादा चिड़चिड़ा हो सकता है और छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है। भावनाओं को नियंत्रित करना भी मुश्किल महसूस हो सकता है। यही समस्या अगर लंबे समय तक जारी रहे तो तनाव और बेचैनी बढ़ सकती है। नींद और मानसिक स्वास्थ्य का संबंध काफी गहरा माना जाता है और लगातार नींद की समस्या रहने पर चिंता तथा अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    याददाश्त और एकाग्रता पर भी नींद की कमी का असर पड़ता है। रात में शरीर और दिमाग को पर्याप्त आराम नहीं मिलने पर अगले दिन किसी काम पर ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है। चीजें याद रखने में दिक्कत हो सकती है और काम या पढ़ाई का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। बच्चों और किशोरों के लिए पर्याप्त नींद विशेष रूप से जरूरी है क्योंकि नींद उनकी सीखने की क्षमता ध्यान याददाश्त और व्यवहार से जुड़ी होती है। इसलिए बच्चों में लगातार नींद की परेशानी को केवल आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    कम नींद का असर केवल मानसिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक पर्याप्त नींद न लेने को वजन बढ़ने मधुमेह और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों से भी जोड़ा जाता है। कुछ लोगों को रात में सोने में परेशानी होती है जबकि कुछ लोग पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बाद भी सुबह तरोताजा महसूस नहीं करते। कुछ नींद संबंधी विकारों में रात के समय सांस लेने में रुकावट या सांस के अनियमित होने जैसी समस्या भी हो सकती है। ऐसे मामलों में व्यक्ति को पर्याप्त समय सोने के बावजूद अच्छी गुणवत्ता वाली नींद नहीं मिल पाती।

    कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। अगर गाड़ी चलाते समय बार-बार झपकी आने लगे टीवी देखते या किताब पढ़ते समय थोड़ी देर में ही नींद आने लगे दिन के समय बहुत ज्यादा नींद महसूस हो काम या पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना मुश्किल हो जाए या चीजें याद रखने में पहले से ज्यादा परेशानी होने लगे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसी तरह छोटी-छोटी बातों पर भावनात्मक प्रतिक्रिया बढ़ना और काम करने की क्षमता में कमी आना भी लगातार खराब नींद के संकेत हो सकते हैं।

    इसलिए नींद को केवल आराम का समय समझने के बजाय स्वास्थ्य की बुनियादी जरूरत मानना जरूरी है। अगर रात में लगातार सोने में परेशानी हो रही है या पर्याप्त समय सोने के बाद भी दिनभर अत्यधिक नींद और थकान बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। समय रहते नींद से जुड़ी समस्या के कारणों की पहचान करने और जरूरी सुधार करने से रोजमर्रा की कार्यक्षमता मानसिक संतुलन और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजर रहा है पूरा दिन? सावधान! शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है ऐसी आदत

    कुर्सी पर बैठे-बैठे गुजर रहा है पूरा दिन? सावधान! शरीर को अंदर से नुकसान पहुंचा सकती है ऐसी आदत


    नई दिल्ली । अगर आपकी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा ऑफिस की कुर्सी या घर के सोफे पर बैठकर गुजरता है और दिनभर शरीर को पर्याप्त मेहनत नहीं मिलती तो अब सावधान होने का समय है। लंबे समय तक शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना सिर्फ वजन बढ़ने की वजह नहीं बनता बल्कि धीरे-धीरे शरीर की कई जरूरी प्रणालियों पर असर डाल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर के करीब 31 प्रतिशत वयस्क पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर रहे थे। विशेषज्ञों के मुताबिक पर्याप्त सक्रिय न रहने वाले लोगों में समय से पहले मृत्यु का जोखिम सक्रिय लोगों की तुलना में करीब 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक पाया गया है। ऐसे में रोजाना कुछ समय शरीर को सक्रिय रखना स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा बन जाता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए हर किसी के लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। रोजाना तेज कदमों से चलना, साइकिल चलाना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और घर के सामान्य कामों में सक्रिय रहना भी शरीर के लिए फायदेमंद हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 से 300 मिनट तक मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देता है। इसका मतलब है कि दिनभर लगातार बैठे रहने के बजाय काम के बीच छोटे ब्रेक लेकर कुछ देर चलना भी आपकी दिनचर्या को बेहतर बना सकता है।

    शारीरिक गतिविधि की कमी का असर सबसे पहले हृदय और मेटाबॉलिज्म पर दिखाई दे सकता है। नियमित व्यायाम शरीर को सक्रिय रखने के साथ हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद करता है। वहीं लगातार बैठे रहने और शरीर को पर्याप्त गतिविधि न मिलने से लंबे समय में कई गैर-संचारी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए अगर काम की वजह से घंटों कुर्सी पर बैठना मजबूरी है तो बीच बीच में उठकर कुछ कदम चलना और शरीर को स्ट्रेच करना उपयोगी आदत हो सकती है।

    निष्क्रिय जीवनशैली का एक बड़ा खतरा टाइप-2 डायबिटीज से भी जुड़ा है। नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर को ग्लूकोज का बेहतर इस्तेमाल करने और वजन नियंत्रित रखने में मदद करती है। इसके विपरीत लंबे समय तक बैठे रहने वाली दिनचर्या वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं की संभावना को बढ़ा सकती है। इसलिए डायबिटीज से बचाव के लिए केवल खानपान पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि रोजाना की शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    दिनभर कम चलने फिरने का सीधा असर वजन पर भी पड़ सकता है। जब शरीर कम ऊर्जा खर्च करता है और खानपान से मिलने वाली कैलोरी अधिक रहती है तो धीरे धीरे वजन बढ़ने लगता है। बढ़ता वजन आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर में गड़बड़ी और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। ऐसे में संतुलित आहार के साथ रोजमर्रा की गतिविधियों को बढ़ाना जरूरी है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि शारीरिक सक्रियता को किसी एक कठिन व्यायाम तक सीमित न समझें। छोटी दूरी के लिए पैदल जाना, लिफ्ट की जगह सीढ़ियां लेना, काम के बीच कुछ मिनट चलना और रोजाना वॉक की आदत बनाना शुरुआत के आसान तरीके हो सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या व्यायाम शुरू करने में परेशानी महसूस होती है तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। शरीर को सक्रिय रखना केवल फिट दिखने के लिए नहीं बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ और बेहतर जीवन जीने के लिए भी जरूरी है।

  • खाना खाते ही सुस्ती और नींद का कारण क्या है दोपहर में ज्यादा असर क्यों होता है जानें पूरी वजह

    खाना खाते ही सुस्ती और नींद का कारण क्या है दोपहर में ज्यादा असर क्यों होता है जानें पूरी वजह


    नई दिल्ली । दोपहर में खाना खाने के बाद अचानक आंखों का भारी होना और काम के दौरान सुस्ती महसूस करना बहुत से लोगों के लिए सामान्य अनुभव है। कई बार लंच खत्म करने के कुछ ही देर बाद ऐसा लगता है कि बस थोड़ी देर आंखें बंद कर ली जाएं। इस स्थिति को Post Meal Sleepiness कहा जाता है। आमतौर पर यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती बल्कि शरीर की प्राकृतिक घड़ी खाने की मात्रा और भोजन में मौजूद पोषक तत्वों के साथ कई शारीरिक प्रक्रियाओं के कारण ऐसा हो सकता है।

    सबसे पहले शरीर की प्राकृतिक घड़ी यानी Circadian Rhythm को समझना जरूरी है। हमारा शरीर लगभग 24 घंटे के एक चक्र के अनुसार नींद और जागने से जुड़े बदलाव करता है। दोपहर के समय शरीर में जागने और सतर्क रहने का संकेत कुछ कम हो सकता है। इसी वजह से बिना खाना खाए भी कई लोगों को दोपहर के वक्त हल्की सुस्ती महसूस होती है। जब इसी समय खाना खाया जाता है तो यह असर और अधिक महसूस हो सकता है।

    खाने की मात्रा भी दोपहर की नींद को प्रभावित करती है। अगर लंच बहुत ज्यादा मात्रा में किया गया है तो खाना खाने के बाद भारीपन और सुस्ती अधिक महसूस हो सकती है। बहुत ज्यादा कैलोरी वाला भोजन तली हुई चीजें अत्यधिक मीठा भोजन या रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से भरपूर खाना कुछ लोगों में खाने के बाद ऊर्जा और सतर्कता में बदलाव ला सकता है। वहीं संतुलित मात्रा में प्रोटीन फाइबर और अन्य पोषक तत्वों वाला भोजन लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    खाना खाने के बाद शरीर में पाचन की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान हार्मोन और तंत्रिका तंत्र से जुड़े कई संकेत बदलते हैं। भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज और अन्य पोषक तत्वों के स्तर में बदलाव होता है और शरीर पाचन से जुड़ी गतिविधियों को सक्रिय करता है। इन सभी प्रक्रियाओं का संयुक्त प्रभाव कुछ लोगों में नींद या सुस्ती जैसा एहसास पैदा कर सकता है।

    अक्सर यह कहा जाता है कि खाना खाने के बाद शरीर का पूरा खून पेट की ओर चला जाता है और इसी कारण दिमाग में खून कम पहुंचने से नींद आती है। हालांकि यह इस घटना की पूरी और सही व्याख्या नहीं मानी जाती। शरीर में रक्त का प्रवाह इस तरह अचानक दिमाग से हटकर केवल पाचन तंत्र की ओर नहीं चला जाता कि उससे सामान्य तौर पर दिमाग को पर्याप्त रक्त न मिले। खाने के बाद आने वाली नींद कई शारीरिक बदलावों के संयुक्त प्रभाव से जुड़ी होती है।

    दोपहर के भोजन के बाद नींद अधिक महसूस होने की एक बड़ी वजह रात की अधूरी नींद भी हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति ने पिछली रात पर्याप्त नींद नहीं ली है तो दिनभर जागे रहने के साथ शरीर में नींद की जरूरत बढ़ती जाती है। ऐसे में दोपहर का प्राकृतिक सुस्ती वाला समय आते ही थकान और नींद ज्यादा महसूस हो सकती है।

    लंच के बाद सुस्ती कम करने के लिए बहुत भारी भोजन करने से बचना उपयोगी हो सकता है। भोजन की मात्रा जरूरत के अनुसार रखें और खाने में प्रोटीन फाइबर तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करें। भोजन के बाद कुछ देर हल्की चाल से चलना भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। पर्याप्त पानी पीना और रात में नियमित रूप से अच्छी नींद लेना भी बेहद जरूरी है।

    हालांकि अगर रोजाना खाना खाने के बाद अत्यधिक नींद आती है और इसके साथ चक्कर कमजोरी या दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं या दिनभर की सामान्य गतिविधियां प्रभावित होने लगती हैं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है क्योंकि लगातार अत्यधिक नींद कभी कभी नींद से जुड़ी समस्या खून की कमी थायरॉइड या ब्लड शुगर से संबंधित परेशानी के साथ भी देखी जा सकती है।

  • सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    सावन शिवरात्रि के अगले दिन लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, रात 9:04 बजे शुरू होगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली । साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और खगोलीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। खास बात यह है कि यह सूर्य ग्रहण सावन शिवरात्रि के ठीक अगले दिन पड़ेगा। इसके साथ ही इसी दिन श्रावण मास की हरियाली अमावस्या भी रहेगी। ऐसे में धार्मिक और खगोलीय दोनों नजरिए से 12 अगस्त की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि भारत में रहने वाले लोगों को इस ग्रहण का प्रत्यक्ष नजारा देखने को नहीं मिलेगा क्योंकि ग्रहण के समय भारत में रात होगी।

    भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और इसका समापन 13 अगस्त की देर रात 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। ग्रहण अपने चरम यानी पीक पर रात करीब 11 बजकर 17 मिनट पर पहुंचेगा। चूंकि उस समय भारत के अधिकांश हिस्सों में रात होगी इसलिए यहां से सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणना के अनुसार पूर्ण सूर्य ग्रहण का मुख्य नजारा उत्तरी गोलार्ध के कई क्षेत्रों में देखने को मिलेगा। ग्रीनलैंड आइसलैंड स्पेन रूस और अटलांटिक महासागर के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण का प्रभाव देखा जा सकेगा। इसके अलावा यूरोप के अधिकांश हिस्सों उत्तरी अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और अफ्रीका के उत्तर पश्चिमी भागों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण के रूप में नजर आएगा।

    अब सवाल यह है कि जब भारत में सूर्य ग्रहण दिखाई ही नहीं देगा तो क्या यहां सूतक काल भी माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य ग्रहण से करीब 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू होता है लेकिन यह नियम सामान्य तौर पर उन्हीं स्थानों पर लागू माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि मंदिरों के कपाट बंद करने या धार्मिक और मांगलिक कार्य रोकने जैसी परंपराएं यहां लागू नहीं होंगी और सामान्य पूजा पाठ किया जा सकेगा।

    ज्योतिषीय नजरिए से भी इस सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ग्रहण के समय ग्रहों की विशेष स्थिति का प्रभाव अलग अलग राशियों पर पड़ सकता है। ज्योतिषियों के मुताबिक सिंह कुंभ मेष और मकर राशि के जातकों को वाणी निवेश और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। वहीं मिथुन तुला और धनु राशि के लिए यह समय करियर और आर्थिक मामलों में सकारात्मक बदलाव के संकेत देने वाला माना जा रहा है। हालांकि ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित होते हैं और इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाता।

    ग्रहण के दौरान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जाप करना शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या के संयोग को देखते हुए जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र तिल या धन का दान करने की परंपरा भी बताई गई है। इसके अलावा इस अवसर पर पौधारोपण करना भी शुभ माना जाता है। इस तरह 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण खगोलीय घटना होने के साथ धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय चर्चाओं के कारण भी लोगों के बीच खास आकर्षण का केंद्र बना रहेगा।

  • जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    जमशेदपुर के बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली पुलिस टीम को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

    नई दिल्ली । झारखंड के जमशेदपुर अंतर्गत पटमदा थाना क्षेत्र स्थित बाटालुका गांव में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों को स्थानीय ग्रामीणों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। शनिवार तड़के सर्च ऑपरेशन पर निकली पुलिस और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम को आक्रोशित ग्रामीणों ने लगभग पांच घंटे तक बंधक बनाए रखा। ग्रामीणों द्वारा एक परिवार के सदस्यों को हिरासत में लिए जाने का विरोध किया जा रहा था, जिसके बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हो सका।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, पटमदा थाना प्रभारी के नेतृत्व में पुलिस और कोबरा बटालियन के जवानों की टीम दलमा रेंज के तराई इलाकों में बड़े नक्सली कमांडरों की तलाश में उतरी थी। सुरक्षा बल एक करोड़ के इनामी भाकपा माओवादी आकाश और 15 लाख के इनामी रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन समेत अन्य संदिग्धों की तलाश में विभिन्न गांवों में सर्च ऑपरेशन चला रहे थे। इस दौरान पुलिस टीम जब बाटालुका गांव पहुंची तो एक स्थानीय निवासी और उसकी दो पत्नियों को पूछताछ के लिए साथ ले जाने लगी।

    संदेह के आधार पर की जा रही इस कार्रवाई के दौरान घर में मौजूद बालिका के रोने पर आसपास के ग्रामीण एकत्र हो गए। देखते ही देखते लाठी-डंडों से लैस सैकड़ों ग्रामीणों ने पुलिस टीम को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रामीणों की मांग थी कि हिरासत में लिए गए लोगों को तुरंत रिहा किया जाए और पूर्व से पुलिस हिरासत में रखे गए एक अन्य ग्रामीण को भी मुक्त किया जाए। बारिश के बीच सुबह पांच बजे से दस बजे तक सुरक्षा बल गांव में फंसे रहे और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का इंतजार करते रहे।

    घटना की सूचना मिलने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और राजनीतिक प्रयास शुरू हुए। स्थानीय जिला पार्षद के हस्तक्षेप और मध्यस्थता के बाद पूर्व में हिरासत में लिए गए व्यक्ति को मौके पर लाया गया। इसके पश्चात ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनी और हिरासत में लिए गए लोगों को छोड़ने के बाद ग्रामीणों ने सुरक्षा बलों को वहां से जाने दिया। लगभग पांच घंटे के भारी तनाव के बाद क्षेत्र में स्थिति सामान्य हो सकी।

    उल्लेखनीय है कि बाटालुका और आसपास के तराई क्षेत्र लंबे समय से नक्सल विरोधी अभियानों के केंद्र में रहे हैं। भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जिसका फायदा उठाकर असामाजिक तत्व आवाजाही करते रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस क्षेत्र में लगातार निगरानी बनाए रखती हैं ताकि नक्सली गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।

    झारखंड की इस घटना के बाद सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल इस प्रकार के अभियानों के दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद और प्रोटोकॉल को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं। पुलिस प्रशासन अब पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह के गतिरोध से बचा जा सके।

  • कौन बनेगा करोड़पति 18 में लागू हुए नए नियम, सोचना पड़ेगा थीम के साथ शुरू हुआ नया सीजन

    कौन बनेगा करोड़पति 18 में लागू हुए नए नियम, सोचना पड़ेगा थीम के साथ शुरू हुआ नया सीजन

    नई दिल्ली ।भारतीय टेलिविजन के सबसे लोकप्रिय क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ का 18वां सीजन कई नए और अनोखे बदलावों के साथ शुरू होने जा रहा है। तकनीक और सूचना के इस आधुनिक दौर को ध्यान में रखते हुए इस बार शो के गेमप्ले और प्रारूप में काफी फेरबदल किए गए हैं। अमर उजाला को दिए एक विशेष साक्षात्कार में शो के निर्देशक अरुण शेषकुमार ने बताया कि अब केवल सामान्य ज्ञान और सही उत्तर देना ही काफी नहीं होगा, बल्कि प्रतिभागियों को हर कदम पर ठोस रणनीति बनानी होगी।

    इस नए सीजन की मुख्य थीम ‘सोचना पड़ेगा’ रखी गई है, जो यह संदेश देती है कि जानकारी के इस दौर में ज्ञान के सही इस्तेमाल और सोच का महत्व सबसे अधिक है। निर्देशक के अनुसार, इस बार फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट राउंड में भी ट्विस्ट लाया गया है ताकि हॉट सीट तक पहुंचने का रास्ता पहले से थोड़ा सहज हो सके। हालांकि, मुख्य खेल में प्रवेश करने के बाद प्रतियोगियों को मिलने वाली लाइफलाइन्स पाने के लिए भी प्रतिस्पर्धा करनी होगी और उन्हें हासिल करना पड़ेगा।

    नियमों में बदलाव के बावजूद शो के मूल स्वरूप से कोई समझौता नहीं किया गया है। प्रतिभागियों के सामने पहले की तरह ही 16 सवाल रखे जाएंगे और अंतिम प्रश्न की धनराशि 7 करोड़ रुपये ही बनी रहेगी। शो में पहुंचने वाले प्रतियोगियों का चयन कई कठिन चरणों, लिखित परीक्षाओं और सामान्य ज्ञान के परीक्षण के बाद किया जाता है, जिससे केवल योग्य और प्रतिभाशाली लोग ही मुख्य मंच तक पहुंच पाते हैं।

    मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों और कस्बों से भी हर साल कई मेधावी प्रतियोगी अपनी प्रतिभा और ज्ञान के बल पर इस मंच तक पहुंचते रहे हैं। राज्य के युवाओं और छात्र-छात्राओं के बीच इस कार्यक्रम का खासा प्रभाव देखने को मिलता है, जहां लोग इसे न केवल मनोरंजन बल्कि प्रेरणा और ज्ञानवर्धन के एक प्रमुख माध्यम के रूप में देखते हैं।

    शो के निर्देशक ने अमिताभ बच्चन के समर्पण और कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें इस कार्यक्रम की वास्तविक आत्मा करार दिया। उन्होंने बताया कि शो की शुरुआत और अंत के अलावा अधिकांश बातचीत पूरी तरह से स्वाभाविक होती है। अमिताभ बच्चन प्रत्येक प्रतियोगी की पृष्ठभूमि को समझते हैं और उनके साथ संवेदनशीलता से संवाद स्थापित करते हैं, जिससे प्रतिभागियों को सहज महसूस होता है।

    डिजिटल युग और सोशल मीडिया के दौर में भी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ अपनी प्रासंगिकता और विश्वसनीयता बनाए रखने में सफल रहा है। हर नए सीजन के साथ इसमें किए जाने वाले बदलाव नई पीढ़ी को जोड़ने के साथ-साथ पुराने दर्शकों के अनुभव को भी नयापन प्रदान करते हैं।