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  • राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त

    राफेल डील को लेकर पसोपेश में फ्रांस…. भारत ने रखी अपनी स्वदेशी हथियार प्रणाली लगाने की शर्त


    नई दिल्ली।
    भारत और फ्रांस (India and France) के बीच राफेल विमानों (Rafale Aircraft) की खरीद को लेकर बातचीत की प्रक्रिया जारी है। इस बीच भारत ने एक ऐसी शर्त रखी है, जिसे लेकर फ्रांस पसोपेश में है। भारत ने कहा है कि वह इन लड़ाकू विमानों में स्वदेशी हथियार (Indigenously Developed Weapons) प्रणाली लगाएगा। हालांकि, फ्रांस इसके लिए अब तक तैयार नहीं है। सूत्रों का कहना है कि भारत ने फ्रांस को दो टूक कह दिया है कि अगर यह शर्त नहीं मानी गई तो सौदा भी नहीं हो सकता।

    राफेल लड़ाकू विमान खरीद प्रक्रिया से जुड़े वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि समझौते के तहत 18 विमान फ्रांस से बनकर आने हैं, जबकि 96 विमान भारत में बनने हैं। भारत इन विमानों में स्वदेशी रक्षा प्रणाली यानी देश में निर्मित मिसाइल, राडार आदि स्थापित करना चाहता है।


    फ्रांस सहमत नहीं

    वहीं, फ्रांस का कहना है कि भारत को राफेल में जोड़ी जाने वाली रक्षा प्रणालियां भी फ्रांस से ही लेनी चाहिए। इसे लेकर जारी बातचीत में भारत ने स्पष्ट तौर पर यह संकेत दे दिए हैं कि भारत रक्षा क्षेत्र में लगातार आत्मनिर्भर हो रहा है और स्वदेशी हथियारों को तरजीह दे रहा है। ऐसे में फ्रांस को यह शर्त माननी ही होगी। इससे राफेल सौदे में नया मोड़ आ गया है।


    ऐतराज नहीं होना चाहिए

    वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा बिना सोर्स कोड दिए भारतीय हथियार प्रणाली राफेल में लगाने पर फ्रांस को कोई एतराज नहीं होना चाहिए।


    50% स्वदेशी सामग्री पर तैयार था फ्रांस

    इससे पूर्व भारत ने यह शर्त रखी थी कि जिन 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में होगा, उनमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया जाएगा। फ्रांस पहले इसके लिए भी तैयार नहीं था, लेकिन बाद में उसने यह बात मान ली थी। हाल ही में वायुसेना प्रमुख ए.पी. सिंह ने कहा है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल सौदे इस वित्त वर्ष के आखिर तक हो सकता है। इस पर जल्द फैसला लिए जाने की उम्मीद है।


    सोर्स कोड नहीं देना चाहती दसाल्ट एविएशन

    सूत्रों के अनुसार, राफेल विमानों का निर्माण करने वाली कंपनी दसाल्ट एविएशन भारत की शर्त मानने के लिए इसलिए भी तैयार नहीं है, क्योंकि इसके लिए उसे सोर्स कोड देना पड़ेगा। सोर्स कोड ऐसा सॉफ्टेवयर होता है, जो विमान के साथ-साथ उसमें लगी हर प्रणाली के संचालन के लिए जिम्मेदार है। अगर सोर्स कोड भारत को मिल गया, तो फिर भारत राफेल जैसा विमान खुद भी बना सकता है। इसीलिए दसाल्ट तैयार नहीं है।


    भारत बिना कोड के हथियार लगाने में सक्षम

    वायुसेना का मानना है कि कोई भी कंपनी क्रेता को कभी अपना सोर्स कोड नहीं देती है। ऐसे में दसाल्ट एविएशन का रुख स्वाभाविक है। वायुसेना के अनुसार, भारत दसाल्ट से सोर्स कोड की मांग कर भी नहीं रहा है। वायुसेना से जुड़े सूत्रों ने बताया, ‘हमने फ्रांस से कहा है कि हम सोर्स कोड के बिना भी राफेल में भारतीय हथियार प्रणाली स्थापित करने में सक्षम हैं। वायुसेना और डीआरडीओ ने इसका रास्ता निकाल लिया है।’

  • MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका

    MP: दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जा रहे थे युवा कांग्रेस नेता… पुलिस ने शहडोल स्टेशन पर रोका


    शहडोल।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar) के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे युवा कांग्रेस नेताओं (Youth Congress leaders) को शनिवार को शहडोल रेलवे स्टेशन (Shahdol Railway Station) पर पुलिस ने रोक लिया। इसके बाद युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम, प्रदेश सचिव अभिषेक शुक्ला, जिला महासचिव शेख आबिद, जयसिंहनगर विधानसभा अध्यक्ष शेख साजिल और सत्यम प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सभी को सिटी कोतवाली ले गई, जहां कुछ घंटे रखने के बाद देर रात उन्हें रिहा कर दिया गया।

    युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता दिल्ली में आयोजित आंदोलन में शामिल होने के लिए रवाना हो रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर उन्हें रोककर कार्रवाई की। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल रही। युवा कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि वे सरकार के दबाव में आने वाले नहीं हैं और आंदोलन में शामिल होने का प्रयास जारी रखेंगे।


    ‘कितनी बार गिरफ्तार करोगे, आंदोलन में जरूर जाएंगे’

    युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अनुपम गौतम ने कहा कि युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं और दमनकारी सरकार से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कुछ कार्यकर्ता दिल्ली जा रहे थे, जिन्हें पुलिस ने रोक लिया। उन्होंने सवाल उठाया कि उन्हें कितनी बार गिरफ्तार किया जाएगा। गौतम ने कहा कि कुछ कार्यकर्ता एक रास्ते से जाएंगे, तो दूसरे कार्यकर्ता अन्य रास्तों से दिल्ली पहुंचने का प्रयास करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आंदोलन में शामिल होकर रहेंगे।


    रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ भी अलर्ट

    दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए शहडोल रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) भी सतर्क नजर आया। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली की ओर जाने वाली ट्रेनों में आंदोलन में शामिल होने जा रहे लोगों की संख्या की जानकारी हर दो घंटे में मुख्यालय को भेजने के निर्देश मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

  • हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त तड़का, 9 एपिसोड की इस सीरीज ने राइटर्स को भी किया परेशान, जानिए कहां देखें ‘दहन-राकन का रहस्य’

    हॉरर और सस्पेंस का जबरदस्त तड़का, 9 एपिसोड की इस सीरीज ने राइटर्स को भी किया परेशान, जानिए कहां देखें ‘दहन-राकन का रहस्य’


    नई दिल्ली ।
    अगर आपको हॉरर और सस्पेंस से भरपूर कहानियां देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद दहन-राकन का रहस्य आपके लिए एक दिलचस्प विकल्प हो सकती है। इस सीरीज में डरावने रहस्य रहस्यमयी घटनाएं और एक ऐसे गांव की कहानी दिखाई गई है जिसे शापित माना जाता है। इसकी कहानी में लोककथाओं और अंधविश्वास के साथ वैज्ञानिक जांच का पहलू भी जुड़ा हुआ है। सीरीज की IMDb रेटिंग 7.1 बताई गई है। खास बात यह है कि इसकी कहानी लिखने वाले लेखकों के बीच राइटिंग के दौरान इतने मतभेद होते थे कि एक समय पर उन्हें थेरेपिस्ट की मदद तक लेनी पड़ी थी। यही वजह है कि इस सीरीज के पीछे की कहानी भी दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाती है।

    दहन-राकन का रहस्य की कहानी राजस्थान के शिलासपुर नाम के एक गांव के इर्दगिर्द घूमती है। यहां अवनी राउत नाम की आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग होती है। इस किरदार को अभिनेत्री टिस्का चोपड़ा ने निभाया है। अवनी अपने पति की मौत से जुड़े सदमे और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच अपनी जिंदगी को संभालने की कोशिश कर रही होती हैं। इसी दौरान उन्हें मैंगोन कॉर्पोरेशन की एक अहम दुर्लभ खनिज खनन परियोजना की जिम्मेदारी मिलती है। शुरुआत में यह काम एक प्रशासनिक चुनौती जैसा नजर आता है लेकिन जल्द ही मामला रहस्यमयी घटनाओं और गांव की पुरानी मान्यताओं से जुड़ने लगता है।

    गांव के मुखिया स्वरूप की भूमिका सौरभ शुक्ला ने निभाई है। वह जमीन की खुदाई का विरोध करते हैं और चेतावनी देते हैं कि अगर धरती को छेड़ा गया तो रिधियाकन नाम का राक्षस जाग सकता है। उनके मुताबिक इस रहस्यमयी शक्ति के जागने से गांव पर बड़ी मुसीबत आ सकती है। दूसरी ओर खनन परियोजना से जुड़े काम और प्रशासनिक जिम्मेदारियां अवनी के सामने कई सवाल खड़े करती हैं। गांव में मरे हुए पक्षियों का मिलना और रहस्यमयी हत्याओं जैसी घटनाएं कहानी को और डरावना बना देती हैं। अब यह पता लगाना जरूरी हो जाता है कि इन घटनाओं के पीछे कोई अलौकिक ताकत है या फिर इसके पीछे कोई ऐसा सच छिपा है जिसे सामने आने से रोका जा रहा है।

    सीरीज की खासियत यह है कि इसमें केवल डर पैदा करने पर जोर नहीं दिया गया है बल्कि रहस्य को धीरे-धीरे खोलने की कोशिश भी की गई है। अवनी एक डॉक्टर की मदद से घटनाओं के पीछे वैज्ञानिक कारण तलाशती हैं। इस दौरान गांव की मान्यताओं प्रशासनिक दबाव और खनन परियोजना से जुड़े सवाल कहानी को आगे बढ़ाते हैं। टिस्का चोपड़ा और सौरभ शुक्ला के अलावा इसमें राजेश तैलंग मुकेश तिवारी रोहन जोशी और लहर खान सहित कई कलाकार नजर आते हैं। सीरीज का निर्देशन विक्रांत पंवार और जय शर्मा ने किया है।

    इस सीरीज से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा इसकी लेखन प्रक्रिया का भी है। लेखक निसर्ग मेहता ने एक बातचीत में बताया था कि कहानी लिखते समय तीनों लेखकों के बीच काफी बहस होती थी। कई बार दो लेखक एक राय पर होते थे तो तीसरा उनसे असहमत रहता था। वहीं शिवा बाजपयी ने बताया कि उनके बीच बहस के दौरान रोना-धोना तक हुआ और कभी-कभी वे एक-दूसरे पर पेंसिल भी फेंक देते थे। हालात ऐसे हो गए थे कि एक समय पर उन्हें थेरेपिस्ट को भी हायर करना पड़ा। हालांकि लेखकों के मुताबिक असहमति ने कहानी को बेहतर बनाने में मदद की और निर्देशक ने उन्हें अपनी कल्पना के मुताबिक कहानी विकसित करने की पूरी स्वतंत्रता दी।

    अगर आप डरावनी कहानियों के साथ रहस्य और थ्रिलर का अनुभव लेना चाहते हैं तो दहन-राकन का रहस्य देख सकते हैं। यह सीरीज डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर उपलब्ध बताई गई है। शापित गांव की कहानी खनन से जुड़ा रहस्य और वैज्ञानिक जांच का मेल इसे हॉरर पसंद करने वाले दर्शकों के लिए एक विकल्प बनाता है।

  • भारतीय मूल की नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार… बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे दादा

    भारतीय मूल की नवी पिल्लई को शांति का नोबेल पुरस्कार… बंधुआ मजदूर बनकर दक्षिण अफ्रीका गए थे दादा


    नई दिल्ली।
    नवनेथम नवी पिल्लई (Navanethem Navi Pillay) को साल 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) दिया गया है। भारतीय मूल (Indian-origin) की नवी पिल्लई संयुक्त राष्ट्र की पूर्व मानवाधिकार प्रमुख (Former UN Human Rights Chief) रह चुकी हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की जज भी हैं। उन्हें यह सम्मान शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के प्रयासों के लिए मिला है। नवी पिल्लई का भारत से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नाता है, क्योंकि वे भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी नागरिक हैं। उनके दादा 1890 के दशक में ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान भारत से बंधुआ मजदूर के रूप में गन्ने के खेतों में काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे।

    नवी पिल्लई का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में एक प्रवासी तमिल हिंदू परिवार में हुआ। उनके पिता नारायणसामी बस ड्राइवर थे और उनकी मां शांतमा नायडू ने उन्हें पारंपरिक मूल्यों के साथ पाला, जिसने उनके जीवन को एक मजबूत आधार दिया। भारत की इस विरासत और पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ पिल्लई रंगभेद के कठोर दौर में भी आगे बढ़ीं और दक्षिण अफ्रीका में वकालत करने वाली भारतीय मूल की पहली महिलाओं में से एक बनकर उभरीं।


    नवनेथम नवी पिल्लई का संघर्ष भरा जीवन

    नवनेथम नवी पिल्लई का जीवन रंगभेद के दौर में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों के संघर्ष और न्याय के लिए उनकी लंबी लड़ाई से जुड़ा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा और कानून के शासन को मजबूत करने के लिए काम किया है। नोबेल समिति के मुताबिक, नवी पिल्लई का काम उन सभी लोगों के लिए उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत है, जो दुनिया को अधिक शांतिपूर्ण बनाना चाहते हैं। दुनिया में युद्ध और संघर्ष बढ़ रहे हैं। जजों और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ी संस्थाओं को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में यह पुरस्कार याद दिलाता है कि हिंसा के बिना विवादों को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान जरूरी है।

    नवनेथम नवी पिल्लई को पुरस्कार मिलने की सूचना देने के लिए समिति उनसे संपर्क नहीं कर पाई थी। इस साल नोबेल शांति पुरस्कार के लिए कुल 287 उम्मीदवारों के नामांकन मिले थे। इनमें एक चौथाई से कुछ अधिक नाम संस्थाओं के थे। पुरस्कार के लिए नामांकन करने का अधिकार राष्ट्राध्यक्षों, राष्ट्रीय स्तर के राजनेताओं, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों, विदेश नीति संस्थानों के प्रमुखों, पूर्व नोबेल विजेताओं और नोबेल समिति के सदस्यों समेत कुछ चुनिंदा लोगों और संस्थाओं को होता है।


    नोबेल शांति पुरस्कार के बारे में जानिए

    नोबेल शांति पुरस्कार की शुरुआत 1901 में हुई थी। अब तक यह 112 व्यक्तियों और 28 अलग-अलग संस्थाओं को दिया जा चुका है। रेड क्रॉस को यह सम्मान तीन बार, जबकि संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी को दो बार मिल चुका है। हालांकि, 19 बार ऐसा भी हुआ है, जब यह पुरस्कार नहीं दिया गया। इनमें से ज्यादातर मौके दोनों विश्व युद्धों के दौरान आए। साल 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद भी यह पुरस्कार किसी को नहीं दिया गया था। महात्मा गांधी को 12 बार नामांकित किया गया, लेकिन उन्हें कभी नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। इस साल पुरस्कार के तहत 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना की राशि दी जाएगी, जो करीब 12 लाख अमेरिकी डॉलर के बराबर है।

  • Ind vs WI: दूसरे टी20 में वेस्टइंडीज की धमाकेदार जीत….501 रन बने… छक्कों की बरसात, टूटे कई रिकॉर्ड

    Ind vs WI: दूसरे टी20 में वेस्टइंडीज की धमाकेदार जीत….501 रन बने… छक्कों की बरसात, टूटे कई रिकॉर्ड


    रांची।
    शुक्रवार को रांची (Ranchi) के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स (JSCA International Stadium Complex) में भारत और वेस्टइंडीज (India vs West Indies) के बीच टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला (T20 Series, Second Match) खेला गया. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने 6 विकेट से जीत हासिल की. मुकाबले में मेहमान टीम वेस्टइंडीज को जीत के लिए 250 रनों का टारगेट मिला था, जिसे उसने 9 गेंद बाकी रहते हासिल कर लिया. वेस्टइंडीज की जीत में कप्तान शाई होप (102* रन) और शेरफेन रदरफोर्ड (84 रन) की अहम भूमिका रही. दोनों ने चौथे विकेट के लिए 120 रनों की साझेदारी कर मैच का नक्शा पलट दिया।

    इस जीत के साथ ही वेस्टइंडीज ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 1-1 की बराबरी कर ली. भारत- वेस्टइंडीज के बीच रांची में हुए मुकाबले में रनों की बारिश हुई और दोनों टीमों के गेंदबाज बेबस दिखे. इस मुकाबले में कुछ खास रिकॉर्ड्स बने।

    मेन्स टी20 इंटरनेशनल के इतिहास का ये दूसरा सबसे सफल रनचेज रहा. इस मामले में साउथ अफ्रीका पहले नंबर पर है, जिसने साल 2023 में सेंचुरियन के मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ 259 रनों का टारगेट चेज कर लिया था. ये टी20 इंटरनेशनल में भारत के खिलाफ सबसे सफल रनचेज रहा. वहीं वेस्टइंडीज ने टी20 क्रिकेट में पहली बार इतना बड़ा टारगेट का सफलतापूर्वक पीछा किया है।


    मेन्स टी20 इंटरनेशनल में सबसे सफल रनचेज

    259- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023
    250- वेस्टइंडीज बनाम भारत, रांची, 2026
    244- ऑस्ट्रेलिया बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड, 2018
    244- बुल्गारिया बनाम जिब्राल्टर, सोफिया, 2025
    243- बुल्गारिया बनाम सर्बिया, सोफिया, 2022
    232- वेस्टइंडीज बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग, 2015
    230- इंग्लैंड बनाम साउथ अफ्रीका, मुंबई WS, 2016


    मेन्स टी20 में चेज किए 250 या उससे अधिक के लक्ष्य

    267- वॉशिंगटन फ्रीडम बनाम MI न्यूयॉर्क, ऑकलैंड, 2026
    265- पंजाब किंग्स बनाम दिल्ली कैपिटल्स, दिल्ली, 2026
    262- पंजाब किंग्स बनाम कोलकाता नाइट राइडर्स, कोलकाता, 2024
    259- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023
    258- ब्रिस्बेन हीट बनाम पर्थ स्कॉर्चर्स, ब्रिस्बेन, 2025
    253- मिडलसेक्स बनाम सरे, द ओवल, 2023
    250- वेस्टइंडीज बनाम भारत, रांची, 2026

    इस मुकाबले में कुल 501 रन बने. दूसरी बार ऐसा हुआ है जब किसी मेन्स टी20 इंटरनेशनल में 500 या उससे ज्यादा रन स्कोर किए गए. इस मामले में साउथ अफ्रीका और वेस्टइंडीज के बीच 2023 में सेंचुरियन के मैदान पर खेला गया मुकाबला टॉप पर है. उस मुकाबले में कुल 517 रन बने थे।


    मेन्स टी20 इंटरनेशनल मैच में सर्वाधिक रन

    517- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2009
    501- भारत बनाम वेस्टइंडीज, रांची, 2026
    499- भारत बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, T20 विश्व कप 2026
    496- भारत बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026
    489- वेस्टइंडीज बनाम भारत, लॉडरहिल, 2016

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच इस मुकाबले में कुल 81 बाउंड्रीज (46 चौके और 33 छक्के) लगे. इससे ज्यादा बाउंड्रीज टी20 इंटरनेशनल के इतिहास में केवल दो मौके पर लगे. भारत की पारी में 25 चौके और 13 छक्के लगे. वहीं वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने इस मैच में 21 चौके और 20 छक्के उड़ाए।


    टी20I मैचों में सर्वाधिक बाउंड्रीज

    81- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023 (चौके/छक्के: 46/35)
    80- जिब्राल्टर बनाम बुल्गारिया, सोफिया, 2025 (चौके/छक्के: 39/41)
    79- भारत बनाम वेस्टइंडीज, रांची, 2026 (चौके/छक्के: 46/33)
    73- भारत बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, 2026 (चौके/छक्के: 39/34)
    72- भारत बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026 (चौके/छक्के: 36/36)

    वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने इस मैच में सिर्फ 45 बॉल पर शतक जड़ दिया. होप ने 102* रन बनाए, जिसमें 9 छक्के और 6 चौके शामिल रहे. होप ने दूसरी बार टी20 इंटरनेशनल मैच में शतक लगाया है. यह गेंदों के लिहाज से वेस्टइंडीज के किसी बल्लेबाज का दूसरा सबसे तेज शतक रहा. होप अब भारत के खिलाफ सबसे तेज टी20 इंटरनेशनल शतक जड़ने के मामले में भी संयुक्त रूप से टॉप पर आ गए हैं. इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने भी टी20 विश्व कप 2026 के सेमीफाइनल में 45 गेंदों में यह उपलब्धि हासिल की थी।


    वेस्टइंडीज के लिए सबसे तेज टी20I शतक (गेंदों के हिसाब से)

    39- जॉनसन चार्ल्स बनाम साउथ अफ्रीका, सेंचुरियन, 2023
    45- शाई होप बनाम भारत, रांची, 2026
    47- क्रिस गेल बनाम इंग्लैंड, मुंबई WS, 2016
    48- इविन लुईस बनाम भारत, लॉडरहिल, 2016
    50- क्रिस गेल बनाम साउथ अफ्रीका, जोहानिसबर्ग, 2007


    वेस्टइंडीज के लिए टी20I में सर्वाधिक शतक

    2- क्रिस गेल,
    2 – इविन लुईस
    2- शाई होप

    दो फुल मेम्बर्स टीम के बीच हुए मेन्स टी20 इंटरनेशनल मैचों में अब तक 10 बार किसी टीम ने 20 या उससे अधिक छक्के लगाए हैं. वेस्टइंडीज और भारतीय टीम ने यह कारनामा चार-चार बार किया है. जबकि अफगानिस्तान और इंग्लैंड ने एक-एक बार ये मुकाम हासिल किया।

  • नाना पाटेकर के निधन से टूट गईं हेमा मालिनी, बोलीं एक हफ्ते पहले आया था फोन, उस वक्त बात नहीं कर पाने का रहेगा मलाल

    नाना पाटेकर के निधन से टूट गईं हेमा मालिनी, बोलीं एक हफ्ते पहले आया था फोन, उस वक्त बात नहीं कर पाने का रहेगा मलाल


    नई दिल्ली । हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर ने फिल्म इंडस्ट्री को गहरे सदमे में डाल दिया है। अपने दमदार अभिनय और अलग अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर के जाने से उनके प्रशंसक और फिल्मी दुनिया की कई हस्तियां भावुक हैं। इस बीच दिग्गज अभिनेत्री और सांसद हेमा मालिनी ने नाना से जुड़ी एक ऐसी याद साझा की है जिसने उनके दुख को और गहरा कर दिया। हेमा मालिनी ने बताया कि नाना पाटेकर ने निधन से करीब एक सप्ताह पहले उन्हें फोन किया था लेकिन उस समय वह यात्रा कर रही थीं और कॉल नहीं उठा सकीं। अब अभिनेता के निधन के बाद उन्हें इस बात का अफसोस है कि वह उनसे उस समय बात नहीं कर पाईं।
    हेमा मालिनी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में नाना पाटेकर को याद करते हुए बताया कि कुछ दिन पहले उनकी नाना से बातचीत हुई थी। इसके बाद करीब एक सप्ताह पहले भी उनका फोन आया था लेकिन यात्रा में व्यस्त होने के कारण वह कॉल रिसीव नहीं कर सकीं। हेमा ने कहा कि जब उन्होंने नाना के निधन की खबर सुनी तो उन्हें गहरा सदमा लगा। किसी परिचित और सहकर्मी से आखिरी बार बात करने का मौका हाथ से निकल जाना अक्सर मन में कसक छोड़ जाता है। हेमा मालिनी के लिए भी यह याद अब भावुक कर देने वाली बन गई है।
    नाना पाटेकर हिंदी और मराठी फिल्मों के उन कलाकारों में शामिल रहे जिन्होंने अपनी अभिनय क्षमता से अलग पहचान बनाई। उन्होंने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए और गंभीर भूमिकाओं से लेकर प्रभावशाली संवाद अदायगी तक दर्शकों के दिलों पर छाप छोड़ी। उनका अभिनय केवल लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्हें फिल्म जगत में एक विशिष्ट कलाकार के रूप में सम्मान मिला। हेमा मालिनी ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री ने एक बहुत बड़े अभिनेता को खो दिया है। उनके मुताबिक नाना खुद अभिनय की एक संस्था जैसे थे।
    नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं थी। सामाजिक कार्यों में उनकी सक्रियता भी उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी। खास तौर पर किसानों और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए किए गए उनके प्रयासों की चर्चा होती रही है। नाना पाटेकर नाम फाउंडेशन के माध्यम से किसानों की सहायता और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद परिवारों के लिए काम करने से जुड़े रहे। हेमा मालिनी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए उनके अभिनय के साथ समाज के लिए किए गए कामों को भी याद किया। उन्होंने कहा कि नाना ने अपनी प्रतिभा से फिल्म इंडस्ट्री में अलग मुकाम बनाया और जरूरतमंदों की मदद के लिए भी लगातार प्रयास किए।
    नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियां उन्हें अपने तरीके से याद कर रही हैं। उनके साथ काम कर चुके कलाकारों और प्रशंसकों के लिए यह केवल एक अभिनेता को खोने का दुख नहीं बल्कि एक ऐसी शख्सियत के जाने का दर्द है जिसने अपने काम से गहरी छाप छोड़ी। हेमा मालिनी की याद ने इस दुख को एक निजी भावनात्मक पहलू भी दिया है। एक फोन कॉल जिसे उस समय सामान्य व्यस्तता के कारण नहीं उठाया जा सका अब एक अधूरी बातचीत की याद बन गया है। नाना पाटेकर का अभिनय और सामाजिक योगदान उनके प्रशंसकों के बीच लंबे समय तक याद किया जाएगा।

  • MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा

    MP: OBC आरक्षण को लेकर HC के फैसले पर CM बोले- कांग्रेस सरकार का अध्यादेश त्रुटिपूर्ण था, खामियों की करेंगे समीक्षा


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण (27 Percent OBC reservation ) से जुड़े मामले में हाईकोर्ट (High Court) के फैसले पर मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी और इसके प्रावधानों में गंभीर कानूनी खामियां थीं। राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय का विधिक परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी। मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2019 से 2022 के बीच की गई नियुक्तियों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उनके मुताबिक, न्यायालय ने 13 प्रतिशत अतिरिक्त नियुक्तियों को संरक्षण देते हुए आगामी भर्ती में समायोजित करने का निर्देश दिया है। वहीं, वर्ष 2022 के बाद से फैसले की तारीख तक की गई भर्तियों में 13 प्रतिशत होल्ड पदों पर सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।


    कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

    सीएम मोहन यादव ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अध्यादेश के जरिए 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण लागू करने में जल्दबाजी की थी। उनके अनुसार, इस संबंध में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से भी परामर्श नहीं लिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से तत्कालीन सरकार की प्रक्रिया और आरक्षण लागू करने के तरीके पर सवाल उठे हैं।


    विधिक परीक्षण के बाद आगे की कार्रवाई

    मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का विधिक परीक्षण करेगी और इसके बाद आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। ओबीसी आरक्षण के मामले में फैसले के प्रभाव और राज्य सरकार के अगले कदम को लेकर अब कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

  • Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें

    Share Market Investment Tips, कौन सा शेयर दिला सकता है बेहतर रिटर्न, निवेश से पहले कंपनी के ये 5 संकेत जरूर जांचें


    नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करके लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की चाह रखने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि किस शेयर में पैसा लगाया जाए और कौन सी कंपनी भविष्य में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। बाजार में रोजाना शेयरों की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। ऐसे में कई निवेशक तेजी से मुनाफा कमाने की उम्मीद में बिना पूरी जानकारी के शेयर खरीद लेते हैं। हालांकि शेयर बाजार में कमाई की कोई गारंटी नहीं होती और गलत फैसले से पूंजी का नुकसान भी हो सकता है। इसलिए निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय स्थिति और कारोबार को समझना बेहद जरूरी है।

    अगर आप शेयर बाजार में निवेश की शुरुआत करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपनी निवेश अवधि और जोखिम सहने की क्षमता तय करें। कम समय में जरूरत पड़ने वाली रकम को शेयर बाजार में लगाना उचित नहीं माना जाता क्योंकि बाजार गिरने पर नुकसान में शेयर बेचने की नौबत आ सकती है। लंबी अवधि के निवेश के लिए ऐसी कंपनियों का अध्ययन किया जा सकता है जिनका कारोबार मजबूत हो और जिनकी कमाई बढ़ने की संभावनाएं हों। केवल किसी परिचित की सलाह या इंटरनेट पर मिलने वाले बड़े मुनाफे के दावों के आधार पर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है।

    निवेश के लिए बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं का क्षेत्र एक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा आईटी और सॉफ्टवेयर कंपनियों के साथ दवा और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की कंपनियों पर भी नजर रखी जा सकती है। रोजमर्रा की जरूरतों के उत्पाद बनाने वाली कंपनियां और बिजली तथा बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियां भी निवेशकों के अध्ययन में शामिल हो सकती हैं। लेकिन किसी सेक्टर का तेजी से बढ़ना इस बात की गारंटी नहीं है कि उससे जुड़ा हर शेयर अच्छा रिटर्न देगा। कंपनी की मौजूदा कीमत और भविष्य में कारोबार बढ़ाने की क्षमता का आकलन करना जरूरी है।

    किसी शेयर को खरीदने से पहले पांच महत्वपूर्ण संकेतों पर ध्यान देना चाहिए। पहला संकेत कंपनी की बिक्री और मुनाफे में लगातार बढ़ोतरी है। दूसरा संकेत कंपनी पर कर्ज की स्थिति और उसे चुकाने की क्षमता है। तीसरा संकेत कंपनी का प्रबंधन और कारोबार चलाने का तरीका है। चौथा संकेत कंपनी के पास भविष्य में विकास के अवसर होना है। पांचवां संकेत शेयर की मौजूदा कीमत का कंपनी की कमाई और वित्तीय स्थिति के मुकाबले उचित होना है। इन पहलुओं का अध्ययन करने से निवेशक को कंपनी की मजबूती और संभावित जोखिम समझने में मदद मिल सकती है।

    जो लोग खुद कंपनियों का विश्लेषण नहीं कर पाते वे म्यूचुअल फंड और इंडेक्स फंड के विकल्पों के बारे में जानकारी ले सकते हैं। निफ्टी 50 इंडेक्स देश की 50 प्रमुख कंपनियों के प्रदर्शन को दर्शाता है। इससे जुड़े इंडेक्स फंड के जरिए निवेशक एक साथ कई कंपनियों में हिस्सेदारी हासिल कर सकते हैं। इससे किसी एक कंपनी पर निर्भरता कम हो सकती है लेकिन बाजार में गिरावट आने पर ऐसे निवेश का मूल्य भी घट सकता है।

    निवेश करते समय पूरी रकम एक ही शेयर में लगाने से बचना चाहिए। अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार निवेश करें और आपातकालीन जरूरतों के लिए अलग बचत रखें। बिना पर्याप्त जानकारी के इंट्राडे ट्रेडिंग और फ्यूचर एंड ऑप्शन जैसे जोखिम वाले कारोबार में पैसा लगाना भारी पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर मिलने वाली शेयर खरीदने की सलाह और निश्चित मुनाफे के दावों की जांच किए बिना उन पर भरोसा न करें।

    शेयर बाजार में बेहतर निवेश का रास्ता जल्दबाजी के बजाय जानकारी और अनुशासन से होकर गुजरता है। किसी भी शेयर को खरीदने से पहले कंपनी के कारोबार और उसकी कीमत का आकलन करें तथा अपने वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखें। कोई भी शेयर निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं देता। बड़ी रकम निवेश करने से पहले जरूरत के अनुसार सेबी में पंजीकृत वित्तीय सलाहकार की मदद लेना समझदारी हो सकती है।

  • सर्दियों में बढ़ती डैंड्रफ से हैं परेशान, दही, एलोवेरा और मेथी समेत ये 5 घरेलू हेयर मास्क आजमाएं

    सर्दियों में बढ़ती डैंड्रफ से हैं परेशान, दही, एलोवेरा और मेथी समेत ये 5 घरेलू हेयर मास्क आजमाएं

    नई दिल्ली ।सर्दियों में बालों में रूसी और सिर की त्वचा यानी स्कैल्प में खुजली की समस्या बढ़ सकती है। काले या गहरे रंग के कपड़े पहनने पर कंधों पर सफेद परत दिखाई देने से कई लोग असहज महसूस करते हैं। डैंड्रफ की समस्या बालों की खूबसूरती और रोजमर्रा की देखभाल को प्रभावित कर सकती है। ठंड के मौसम में स्कैल्प का रूखापन और हेयर केयर रूटीन में बदलाव परेशानी को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में बालों को साफ रखने के साथ स्कैल्प की उचित देखभाल करना भी जरूरी है। कुछ घरेलू हेयर मास्क बालों को मुलायम बनाने और उनकी कंडीशनिंग में मदद कर सकते हैं। हालांकि, इन नुस्खों को डैंड्रफ का पक्का इलाज नहीं मानना चाहिए। लगातार रूसी या खुजली रहने पर उचित उपचार की जरूरत हो सकती है।

    दही और एलोवेरा से बना हेयर मास्क बालों की देखभाल के लिए एक विकल्प है। एलोवेरा त्वचा को ठंडक देने में मदद कर सकता है, जबकि दही बालों को कंडीशन करने में सहायक हो सकता है। इसे बनाने के लिए दो चम्मच सादे दही में एक चम्मच शुद्ध एलोवेरा जेल मिलाएं। तैयार मिश्रण को थोड़ी देर बालों और स्कैल्प पर लगाकर रखें। इसके बाद हल्के शैंपू से अच्छी तरह धो लें। अगर इस मिश्रण को लगाने के बाद खुजली या जलन बढ़ती है, तो इसे तुरंत धो देना चाहिए। दूसरा विकल्प मेथी और दही का हेयर पैक है। इसके लिए एक से दो चम्मच मेथी दानों को रातभर पानी में भिगो दें। सुबह दानों को पीसकर पेस्ट बना लें और उसमें थोड़ा दही मिलाएं। इस मिश्रण को कुछ देर बालों पर लगाकर रखें और फिर अच्छी तरह धो लें। यह पैक बालों को कंडीशन करने में मदद कर सकता है, लेकिन इसे डैंड्रफ का निश्चित उपचार नहीं माना जाना चाहिए।

    तीसरा विकल्प शुद्ध एलोवेरा जेल का इस्तेमाल है। स्कैल्प में रूखापन या हल्की खुजली महसूस होने पर कुछ लोग इसे आजमा सकते हैं, लेकिन इसका असर हर व्यक्ति और हर तरह की रूसी में समान नहीं होता। इस्तेमाल से पहले थोड़ी मात्रा में जेल स्कैल्प के छोटे हिस्से पर लगाकर जांच करना जरूरी है। अगर कोई परेशानी नहीं होती, तो इसे थोड़ी देर लगाकर बाद में धो सकते हैं। खुशबू या अल्कोहल वाले जेल से संवेदनशील त्वचा में जलन हो सकती है, इसलिए उत्पाद का चुनाव सावधानी से करना चाहिए। चौथा विकल्प केला और नारियल तेल का हेयर मास्क है। यह खास तौर पर बालों के रूखेपन को कम करने और उन्हें मुलायम बनाने के लिए उपयोगी हो सकता है। इसे तैयार करने के लिए आधे पके केले को अच्छी तरह मैश करें और उसमें एक छोटा चम्मच नारियल तेल मिलाएं। इस मिश्रण को बालों की लंबाई पर लगाएं और लगभग 15 से 20 मिनट बाद शैंपू से धो लें। इसे डैंड्रफ खत्म करने का प्रमाणित तरीका नहीं समझना चाहिए।

    पांचवां विकल्प अंडे और ऑलिव ऑयल से बना हेयर मास्क है। इस मिश्रण का इस्तेमाल बालों की लंबाई को मुलायम बनाने के लिए किया जाता है। इसे बनाने के लिए एक अंडे में एक चम्मच ऑलिव ऑयल मिलाकर मिश्रण तैयार करें। इसे बालों की लंबाई पर लगाएं और फिर ठंडे या हल्के गुनगुने पानी से अच्छी तरह धो लें। गर्म पानी का इस्तेमाल करने से अंडा बालों में जम सकता है और उसे निकालना मुश्किल हो सकता है। हालांकि, इस मास्क से डैंड्रफ खत्म होने के मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे मुख्य रूप से बालों की कंडीशनिंग के लिए ही देखना चाहिए। किसी भी नए घरेलू मिश्रण को इस्तेमाल करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर जांच करना बेहतर है। नींबू का रस, एसेंशियल ऑयल या अन्य घरेलू सामग्री सीधे स्कैल्प पर लगाने से जलन हो सकती है।

    डैंड्रफ बार-बार लौटता है, तो केवल घरेलू हेयर मास्क पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसे में स्कैल्प की स्थिति के अनुसार विशेष रूप से तैयार एंटी-डैंड्रफ शैंपू का इस्तेमाल अधिक उपयोगी हो सकता है। शैंपू चुनते समय उसके लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना चाहिए। अगर रूसी के साथ तेज खुजली, लालिमा, घाव या बाल झड़ने की समस्या हो, अथवा नियमित देखभाल के बावजूद डैंड्रफ ठीक न हो, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। घरेलू मास्क बालों को मुलायम बनाने और उनकी देखभाल में मदद कर सकते हैं, लेकिन लगातार बनी रहने वाली रूसी के लिए सही उपचार को प्राथमिकता देना जरूरी है।

  • बैंक से कर्ज लिया फिर भी मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा, मध्य प्रदेश सरकार की योजना पर क्यों मचा घमासान

    बैंक से कर्ज लिया फिर भी मुफ्त रजिस्ट्री का फायदा, मध्य प्रदेश सरकार की योजना पर क्यों मचा घमासान


    भोपाल। मध्य प्रदेश में आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सवालों के घेरे में आ गई है। प्रदेश के करीब 50 लाख लोगों को उनकी आबादी भूमि का मालिकाना हक दिलाने के लिए सरकार ने 3800 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। सरकार का तर्क है कि रजिस्ट्री होने से लोगों को अपनी संपत्ति के दस्तावेज मिलेंगे और बैंक से कर्ज लेने जैसी सुविधाओं का लाभ उठाना आसान होगा। लेकिन राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में सामने आए आंकड़े इस योजना की जरूरत और प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े कर रहे हैं। रिकॉर्ड के मुताबिक स्वामित्व योजना के तहत अधिकार अभिलेख प्राप्त करने वाले 2102 हितग्राही पहले ही बैंकों से कुल 175 करोड़ 57 लाख रुपये से अधिक का कर्ज ले चुके हैं। इनमें कुछ भूखंडों पर करीब 17 करोड़ रुपये तक का ऋण दर्ज है।

    इस जानकारी के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि जब आबादी भूमि के अधिकार अभिलेख के आधार पर बैंक पहले ही कर्ज दे रहे हैं और संबंधित भूखंडों को बंधक भी बनाया जा चुका है तो अब मुफ्त रजिस्ट्री की व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ रही है। हालांकि सरकार की योजना का उद्देश्य केवल बैंक ऋण उपलब्ध कराना नहीं बल्कि लोगों को भूमि का विधिवत पंजीकृत मालिकाना हक दिलाना भी है। ऐसे में अधिकार अभिलेख और पंजीकृत स्वामित्व के बीच कानूनी अंतर को समझना जरूरी है। बैंक से कर्ज मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया अनावश्यक है। लेकिन पहले से ऋण प्राप्त कर चुके हितग्राहियों के मामलों में नियमों और प्रक्रिया की स्पष्टता को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं।

    राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार रतलाम जिले की जावरा तहसील के टोलखेड़ी निवासी संजय के भूखंड पर 16 करोड़ 89 लाख रुपये से अधिक का कर्ज दर्ज है। खरगोन जिले के धनोरा में लक्ष्मीबाई और अन्य संबंधित हितग्राहियों के भूखंड पर भी करीब 16 करोड़ 81 लाख रुपये का ऋण दर्ज बताया गया है। इसके अलावा विदिशा जिले के गूलरखेड़ी में आकाश कटारे के भूखंड पर 96 लाख रुपये और देवास जिले के डबलचौकी में सुरेश अग्रवाल के भूखंड पर 52.20 लाख रुपये का कर्ज दर्ज है। इंदौर उज्जैन नीमच रतलाम मंदसौर सीहोर और कई अन्य जिलों में भी आबादी भूमि पर लाखों रुपये के ऋण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।

    दरअसल अप्रैल 2022 में तत्कालीन भू-अभिलेख आयुक्त की ओर से राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति को पत्र भेजा गया था। इसमें आबादी भूमि को बंधक रखने और बंधक हटाने की प्रक्रिया को कृषि भूमि के खसरे की तरह अपनाने की बात कही गई थी। पत्र के अनुसार कर्ज की अदायगी नहीं होने पर बैंक को संबंधित संपत्ति पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल सकता है। इसी व्यवस्था के आधार पर पिछले कुछ वर्षों में बैंकों ने आबादी भूमि पर ऋण देने की प्रक्रिया अपनाई। ऐसे में पहले से बंधक संपत्तियों की रजिस्ट्री के दौरान कानूनी प्रक्रिया और बैंक के हितों की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दे बन गए हैं।

    दूसरी ओर मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया पटवारियों के विरोध के कारण भी अटकी हुई है। विवाद की मुख्य वजह रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादक यानी एक्जीक्यूटर की भूमिका देना और उनकी व्यक्तिगत आईडी तथा कानूनी जिम्मेदारी से जुड़े सवाल हैं। सरकार ने पटवारियों को कानूनी संरक्षण देने और 17 सितंबर के बाद की गई कार्रवाई को शून्य करने पर सहमति जताई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद पटवारी संघ ने सोमवार से स्वामित्व योजना का काम शुरू करने की घोषणा की है।

    सरकार ने इस योजना के तहत करीब 50 लाख लोगों की आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 3800 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है और कई राजस्व तथा अन्य अधिकारियों को पंजीयन से जुड़े अधिकार दिए गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहले से अधिकार अभिलेख और बैंक ऋण वाले भूखंडों की रजिस्ट्री किस प्रक्रिया से होगी और योजना को कानूनी विवादों से बचाते हुए समय पर कैसे पूरा किया जाएगा। योजना का वास्तविक लाभ तभी सामने आएगा जब हितग्राहियों को स्पष्ट स्वामित्व मिलेगा और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी होगी।