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  • MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप

    MP में आज रीवा संभाग के 4 जिलों में बारिश के आसार, भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन के असर से मौसम में उतार-चढ़ाव जारी है। शनिवार को रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित प्रदेश के कई हिस्सों में धूप खिली रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, अगले तीन दिन तक प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। इस बीच रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। पचमढ़ी में प्रदेश की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई।

    अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रात में बढ़ी ठंडक

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में मौसमी सिस्टम का असर देखा जा रहा है। हाल के दिनों में अमरकंटक में करीब डेढ़ इंच यानी 37.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है।

    पचमढ़ी में न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। अमरकंटक और इंदौर में न्यूनतम तापमान 17.9 डिग्री, छिंदवाड़ा में 18.1 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18.8 डिग्री और शाजापुर में 19 डिग्री सेल्सियस रहा।

    रात में ठंडक बढ़ने के बावजूद दिन में गर्मी का असर बना हुआ है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। बड़वानी के तालुन में पारा 37 डिग्री तक पहुंच गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक रहा।

    3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर भी क्यों हो रही बारिश?

    मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस बार प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा। इसके बावजूद अक्टूबर में बारिश का दौर देखने को मिल रहा है। इसकी वजह चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ लाइन जैसे मौसमी सिस्टम का सक्रिय होना है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी मानसूनी सिस्टम की सक्रियता के चलते कुछ इलाकों में बारिश हुई है। हालांकि, शनिवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में हल्की बारिश के आसार हैं, जबकि अगले तीन दिन प्रदेश में मौसम साफ रहने का अनुमान है।

    जून की कम बारिश से सीजन का आंकड़ा 4% नीचे

    इस साल जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसतन 35.8 इंच यानी 908.4 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच से करीब 4 प्रतिशत कम है।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत तक कम पानी गिरा।

    कम बारिश की प्रमुख वजह जून में बारिश का कोटा पूरा नहीं होना रहा। इस महीने सामान्य के मुकाबले 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से इसकी भरपाई की कोशिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी के कारण पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा।

    25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

    प्रदेश के 55 जिलों में से 25 में मानसून सीजन की सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया, जबकि 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।

    इन 25 जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज हुई: भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।

    कम बारिश वाले प्रमुख जिले: इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, छिंदवाड़ा, देवास, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नीमच, मंदसौर और धार।

    इस तरह मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश हो रही है। वहीं, रात के तापमान में गिरावट और दिन में तेज धूप के चलते मौसम में गर्मी और ठंडक का मिला-जुला असर बना हुआ है।

  • Shani Dev Puja: शनिवार को तेल चढ़ाने की परंपरा क्यों है खास, जानिए शनिदेव की पूजा विधि और इससे जुड़ी मान्यताएं

    Shani Dev Puja: शनिवार को तेल चढ़ाने की परंपरा क्यों है खास, जानिए शनिदेव की पूजा विधि और इससे जुड़ी मान्यताएं


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन शनिदेव की पूजा और आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को न्याय का देवता कहा जाता है और वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शनिदेव के मंदिरों में पहुंचते हैं और उन्हें सरसों का तेल चढ़ाकर सुख समृद्धि तथा जीवन की परेशानियों से मुक्ति की प्रार्थना करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर शनिदेव पर तेल चढ़ाने की परंपरा कैसे शुरू हुई और इसके पीछे कौन सी पौराणिक कथा प्रचलित है।

    धार्मिक मान्यताओं में शनिदेव को तेल अर्पित करने के पीछे एक प्रचलित कथा का उल्लेख मिलता है। कथा के अनुसार एक बार शनिदेव और भगवान हनुमान के बीच युद्ध हुआ था। इस युद्ध में शनिदेव को चोट लगी और उन्हें पीड़ा होने लगी। भगवान हनुमान ने उनकी पीड़ा कम करने के लिए उनके शरीर पर तेल लगाया। मान्यता है कि इससे शनिदेव को राहत मिली और तभी से उन्हें तेल अर्पित करने की परंपरा प्रचलित हुई। हालांकि इस कथा के अलग-अलग रूप विभिन्न धार्मिक परंपराओं में मिलते हैं और इसे आस्था से जुड़ी मान्यता के रूप में देखा जाता है।

    शनिवार को सरसों का तेल चढ़ाने का संबंध शनि ग्रह की पूजा और उससे जुड़ी धार्मिक धारणाओं से भी है। ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्म अनुशासन धैर्य और न्याय का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि श्रद्धा के साथ शनिदेव की पूजा करने से व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और वह अपने कर्मों के प्रति अधिक सजग बनता है। कई श्रद्धालु शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के दौरान भी विशेष पूजा करते हैं। हालांकि किसी ग्रह की स्थिति के कारण जीवन में आने वाली परेशानियों या उनके समाधान के बारे में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    शनिवार को शनिदेव की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें। इसके बाद शनिदेव का स्मरण करें और अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में जाकर पूजा करें। परंपरा के अनुसार शनिदेव की प्रतिमा या शिला पर सरसों का तेल अर्पित किया जाता है। कुछ मंदिरों में तेल चढ़ाने के विशेष नियम होते हैं इसलिए वहां के पुजारी या मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए। पूजा के दौरान काले तिल और फूल अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। श्रद्धालु शनि मंत्र का जाप कर सकते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी कर सकते हैं।

    शनिदेव की पूजा में केवल धार्मिक कर्मकांड ही नहीं बल्कि अच्छे आचरण का महत्व भी बताया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार दूसरों के साथ न्याय करना मेहनत से काम करना कमजोर लोगों की सहायता करना और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना शनिदेव की कृपा पाने के महत्वपूर्ण तरीके माने जाते हैं। इसलिए शनिवार को पूजा करने के साथ अपने व्यवहार और कर्मों पर भी ध्यान देना चाहिए।

    एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि पूजा में तेल चढ़ाना श्रद्धा का विषय है और इसे किसी समस्या के समाधान की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए। मंदिर में तेल का उपयोग करते समय स्वच्छता और सुरक्षा का ध्यान रखें। तेल को जमीन पर न फैलाएं और मंदिर के नियमों का पालन करें। सच्ची आस्था के साथ सद्कर्म और जिम्मेदारी से जीवन जीना ही इस परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण संदेश माना जा सकता है।

  • शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता

    शेयर बाजार 9 अक्टूबर, सेंसेक्स और निफ्टी में फिर हलचल के संकेत, RBI की सख्ती कच्चा तेल और FII बिकवाली से बढ़ी चिंता


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 9 अक्टूबर को कारोबार की शुरुआत निवेशकों के लिए बेहद अहम रहने वाली है। लगातार दबाव के बीच सेंसेक्स और निफ्टी के सामने अब बाजार को संभालने की चुनौती है। 8 अक्टूबर को घरेलू शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स 1045 अंक से ज्यादा टूटकर 71593.24 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में करीब 1.64 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 22231.80 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी का यह स्तर करीब 18 महीने का निचला स्तर माना जा रहा है।

    बाजार में आई इस बड़ी गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी के बाद मौद्रिक नीति का रुख भी सख्त किया गया है। रेपो रेट बढ़कर 5.5 प्रतिशत हो गया है। महंगाई के दबाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच RBI का यह फैसला बाजार के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से कंपनियों के लिए कर्ज महंगा होने की आशंका रहती है जिसका असर निवेश और मुनाफे की उम्मीदों पर पड़ सकता है।

    दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है। पश्चिम एशिया में तनाव और सप्लाई को लेकर चिंता के कारण तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है इसलिए महंगा तेल देश के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है। इसका असर रुपये और शेयर बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ा दबाव बनी हुई है। विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय शेयरों से पैसा निकाल रहे हैं। इसके साथ ही कमजोर रुपया बढ़ती बॉन्ड यील्ड और वैश्विक बाजारों में उतार चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 8 अक्टूबर की गिरावट में लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे जबकि मेटल रियल्टी और ऑयल एंड गैस जैसे सेक्टरों में ज्यादा कमजोरी देखने को मिली।

    अब 9 अक्टूबर को निवेशकों की नजर कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी रहेगी। सितंबर तिमाही के नतीजों का दौर शुरू हो चुका है और TCS के नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अगर कंपनियों के नतीजे उम्मीद से बेहतर आते हैं तो बाजार में कुछ राहत देखने को मिल सकती है लेकिन कमजोर नतीजे मौजूदा दबाव को और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए जल्दबाजी से बचना जरूरी है। बाजार में भारी उतार चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में केवल गिरावट देखकर खरीदारी करना जोखिम भरा हो सकता है। 9 अक्टूबर को कच्चे तेल की चाल रुपये की स्थिति विदेशी निवेशकों की गतिविधियां RBI की नीति और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक रहेंगे। फिलहाल बाजार में सावधानी का माहौल है और निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में रिकवरी आती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से रात 8 बजे मिलेंगे INDIA ब्लॉक के 10 सांसद, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त पर रखेंगे अपना पक्ष

    नई दिल्ली । मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी विवाद के बीच राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के प्रतिनिधिमंडल को शुक्रवार, 9 अक्टूबर की रात 8 बजे मुलाकात का समय दिया है। विपक्षी सांसद इस बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में संशोधन और मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मुद्दों पर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखेंगे। दिल्ली में पिछले चार दिनों से विपक्षी दलों का प्रदर्शन जारी है।

    मुलाकात के लिए शुरुआत में 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का समय मांगा गया था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति से मिलने के लिए 10 सांसदों को समय दिया गया है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बताया कि राष्ट्रपति से मुलाकात का पहला अनुरोध 2 अक्टूबर को भेजा गया था। विपक्षी दल चाहते हैं कि SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों पर राष्ट्रपति को अपनी बात बताई जाए। शुक्रवार रात होने वाली बैठक में प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों और चिंताओं को सामने रखेगा।

    INDIA ब्लॉक के दल SIR प्रक्रिया पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में संशोधन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं, जिससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची में किए गए बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भाजपा ने चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

    विपक्ष का प्रदर्शन 6 अक्टूबर को उस समय तेज हुआ, जब INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोका। इस दौरान राहुल गांधी समेत कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया गया। अगले दिन, 7 अक्टूबर को भी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इन घटनाओं के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी सांसदों के बीच तनाव की स्थिति बनी।

    8 अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान भी SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए गए। प्रदर्शन के साथ-साथ विपक्षी दलों के नेताओं ने अपनी आगे की रणनीति पर भी चर्चा की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने लगातार दो दिनों तक विपक्षी सांसदों के लिए दिल्ली में दोपहर के भोजन की बैठक आयोजित की। 7 अक्टूबर को सांसद जनपथ स्थित सागर रत्ना रेस्टोरेंट में जुटे, जबकि 8 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के मोएट्स रेस्टोरेंट में बैठक हुई। इन बैठकों के बाद सांसद प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे।

    7 अक्टूबर की बैठक में समाजवादी पार्टी के सांसद शामिल नहीं हुए थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सपा की ओर से समय पर सूचना नहीं मिलने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने कहा था कि सभी विपक्षी दलों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन कम समय मिलने के कारण कुछ दल अपने प्रतिनिधि नहीं भेज सके। अगले दिन समाजवादी पार्टी के सांसद भी बैठक और प्रदर्शन में शामिल हुए।

    प्रदर्शन के दौरान पुलिस और विपक्षी सांसदों के बीच हुए टकराव से जुड़े मामलों में प्राथमिकी दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इनमें राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कुछ नेताओं पर पुलिसकर्मियों के साथ कथित मारपीट और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन मामलों की जांच जारी है। प्राथमिकी दर्ज होना आरोपों के साबित होने का प्रमाण नहीं है। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ होने वाली बैठक पर नजरें टिकी हैं। विपक्षी सांसदों की कोशिश होगी कि वे मतदाता सूची, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े अपने सवाल राष्ट्रपति के समक्ष रखें।

  • 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सार्वजनिक परिवहन बंद करने पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानी दूर करने के लिए संतुलित कदम उठाने को कहा

    नई दिल्ली । दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और कुछ रेल सेवाएं रद्द किए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मेट्रो स्टेशन और रेलवे सेवाओं पर पूरी तरह रोक लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करने की जरूरत है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल प्रदर्शन की अनुमति देने के सवाल पर विचार नहीं कर रही, क्योंकि सुनवाई के दौरान कोई आयोजक उसके सामने उपस्थित नहीं हुआ। इस सुनवाई का मुख्य मुद्दा सार्वजनिक परिवहन पर पाबंदियों से आम लोगों को होने वाली परेशानी रहा। अदालत ने केंद्र सरकार से ऐसे कदम उठाने को कहा, जिनसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जरूरतों के साथ-साथ लोगों की आवाजाही भी प्रभावित न हो।

    यह याचिका भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के महासचिव और पूर्व राज्यसभा सांसद एमए बेबी ने दाखिल की थी। इसमें मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर कुछ ट्रेनों को रद्द करने के फैसले को चुनौती दी गई। याचिका के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को पत्र लिखकर 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने को कहा था। यह व्यवस्था 9 अक्टूबर की रात 9 बजे से लागू किए जाने और हालात सामान्य होने तक जारी रखने की बात कही गई थी। याचिका में कहा गया कि इस कदम का असर केवल प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों पर नहीं, बल्कि रोजाना काम, पढ़ाई, इलाज और अन्य जरूरी कामों के लिए यात्रा करने वाले नागरिकों पर भी पड़ सकता है।

    याचिका में जिन स्टेशनों का उल्लेख किया गया, उनमें सुप्रीम कोर्ट, हौज खास, लाजपत नगर, कश्मीरी गेट, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, शाहदरा और रोहिणी सहित कई स्टेशन शामिल बताए गए। याचिकाकर्ता का कहना था कि इनमें से कई स्टेशन अस्पतालों, कॉलेजों, अदालतों और रिहायशी इलाकों तक पहुंचने के लिए महत्वपूर्ण हैं। याचिका में 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशनों पर सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच पहुंचने वाली कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों को रद्द करने पर भी सवाल उठाया गया। इनमें हावड़ा-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस और सियालदह-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस का जिक्र किया गया। याचिका में मरीजों, विद्यार्थियों, यात्रियों और दूसरे नागरिकों को संभावित परेशानी का मुद्दा उठाया गया। साथ ही, दावा किया गया कि प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे कुछ लोगों को दूसरे राज्यों में रोका गया या हिरासत में लिया गया।

    याचिकाकर्ता ने अदालत से मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का फैसला रोकने, सेवाएं सामान्य करने और रद्द ट्रेनों को जहां तक संभव हो दोबारा चलाने का निर्देश देने की मांग की थी। प्रभावित यात्रियों को पूरा रिफंड और वैकल्पिक यात्रा व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग भी की गई। याचिका में जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने और प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आने वाले लोगों को केवल इसी कारण रोकने से बचने का अनुरोध किया गया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मेट्रो सेवाओं पर पाबंदियों से लाखों लोगों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि वकीलों के पास निजी वाहन हो सकते हैं, लेकिन अदालतों में काम करने वाले कई कर्मचारी मेट्रो से आते हैं। पीठ ने अधिकारियों से बैरिकेडिंग की जानकारी सार्वजनिक करने और लोगों को वैकल्पिक सड़कों के बारे में बताने की जरूरत पर भी जोर दिया।

    सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार लोगों को होने वाली असुविधा के मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से चर्चा करेगी। उन्होंने दलील दी कि सुरक्षा संबंधी कदम सभी की सुरक्षा को ध्यान में रखकर उठाए जा रहे हैं। उन्होंने पिछली एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि 20 जून को प्रदर्शन की एक दिन की अनुमति मांगी गई थी, लेकिन प्रदर्शन 17 दिनों तक चला और संसद की ओर जाने की कोशिश भी हुई। उनके अनुसार, उस दौरान 200 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। उन्होंने यह भी कहा कि इंटरनेट पर पाबंदी सीमित क्षेत्र में है और महिला पुलिसकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं हुई थीं। अदालत ने प्रदर्शन की अनुमति के सवाल पर विचार करने से इनकार करते हुए सार्वजनिक परिवहन और नागरिकों की परेशानी पर ध्यान केंद्रित रखा।

    सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति और सीमित जगह को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जगह की कमी के कारण प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन, स्वच्छता और एंबुलेंस जैसी व्यवस्थाओं में समस्याएं पैदा हो सकती हैं और उनके अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि मेट्रो, ट्रेन और सड़क परिवहन को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता तथा कदम हालात के अनुरूप होने चाहिए। अदालत ने लोगों को यह स्पष्ट जानकारी देने की जरूरत बताई कि कौन-सी सेवाएं कब उपलब्ध होंगी और किन रास्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है। केंद्र की ओर से आश्वासन दिया गया कि अधिकारियों से बातचीत के बाद संतुलित कदम उठाए जाएंगे, यातायात का प्रवाह बनाए रखने की कोशिश होगी और लोगों की सुविधा के लिए सलाह जारी की जाएगी।

  • झांसी-शिवपुरी हाईवे पर भीषण हादसा, मां-बाप की मौत से अनाथ हुए तीन बच्चे, 4 साल के मासूम पर टूटा दुखों का पहाड़

    झांसी-शिवपुरी हाईवे पर भीषण हादसा, मां-बाप की मौत से अनाथ हुए तीन बच्चे, 4 साल के मासूम पर टूटा दुखों का पहाड़


    शिवपुरी । मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में झांसी-शिवपुरी हाईवे पर तेज रफ्तार कार की टक्कर से एक दंपती की मौत हो गई। दोनों सड़क की साफ-सफाई और रखरखाव के काम में लगे मजदूर थे। हादसे में पत्नी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि गंभीर रूप से घायल पति की ग्वालियर में इलाज के दौरान मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। दंपती अपने पीछे चार साल के बेटे और 10 तथा 13 साल की दो बेटियों को छोड़ गए हैं। माता-पिता की मौत के बाद तीनों बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ गया है।

    यह हादसा गुरुवार दोपहर करीब दो बजे दिनारा थाना क्षेत्र के ग्राम रामनगर में ऋषभ ढाबे के पास हुआ। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार सिरसौद निवासी बलबीर लोधी हाईवे पर मेंटेनेंस और साफ-सफाई का काम करता है। घटना के समय उसके साथ सुपरवाइजर रमाकांत यादव समेत करीब दस मजदूर सड़क पर काम कर रहे थे। इसी दौरान दिनारा की ओर से एक अर्टिगा कार तेज रफ्तार से आई और सड़क किनारे काम कर रहे मजदूरों को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से रामश्री बंशकार उनके पति धर्मेंद्र बंशकार और सीता देवी घायल हो गए।

    हादसा इतना गंभीर था कि रामश्री बंशकार की मौके पर ही मौत हो गई। उनके पति धर्मेंद्र के दोनों पैरों में गंभीर चोटें आईं। वहीं सीता देवी के पैरों में भी चोट लगी। घटना के बाद मौके पर मौजूद मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। साथियों ने घायलों की मदद की और एंबुलेंस के जरिए उन्हें उपचार के लिए भेजा गया। धर्मेंद्र की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें पहले झांसी ले जाया गया। बाद में उनकी स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने ग्वालियर रेफर कर दिया। वहां रात में उपचार के दौरान उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

    दंपती की मौत की खबर से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। रामश्री और धर्मेंद्र के तीन छोटे बच्चे हैं। इनमें सबसे छोटा बेटा महज चार साल का है जबकि दोनों बेटियों की उम्र 10 और 13 साल बताई गई है। हादसे ने इन बच्चों से उनके माता-पिता दोनों छीन लिए। परिवार की रोजी-रोटी के लिए मेहनत करने वाले माता-पिता की असमय मौत के बाद बच्चों के भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। गांव और आसपास के क्षेत्र में घटना को लेकर शोक का माहौल है।

    टक्कर के कारण घटनास्थल पर खड़ी कंपनी की महिंद्रा कैंपर गाड़ी और एक हीरो सीडी डीलक्स बाइक भी क्षतिग्रस्त हो गईं। हादसे के समय गोमा विश्वकर्मा और रमाकांत यादव सहित अन्य मजदूर मौके पर मौजूद थे। उन्होंने दुर्घटना को होते देखा। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लिया। रामश्री के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए करैरा अस्पताल भेजा गया। मामले में फरियादी बलबीर लोधी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है।

    इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा का सवाल खड़ा कर दिया है। सड़क पर सफाई और रखरखाव के दौरान मजदूरों को तेज रफ्तार वाहनों से खतरा बना रहता है। ऐसे स्थानों पर वाहन चालकों की सावधानी और सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं। फिलहाल पुलिस दुर्घटना से जुड़े तथ्यों की जांच कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।

  • 51 शक्तिपीठों में शामिल उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख धाम, कहीं मां विशालाक्षी तो कहीं कात्यायनी रूप में होती हैं पूजा

    51 शक्तिपीठों में शामिल उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख धाम, कहीं मां विशालाक्षी तो कहीं कात्यायनी रूप में होती हैं पूजा

    नई दिल्ली । नवरात्रि का पर्व शुरू होते ही देशभर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। उत्तर प्रदेश में भी माता रानी के कई प्रसिद्ध मंदिर और शक्तिधाम स्थित हैं, जिनसे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं भक्तों की आस्था का प्रमुख आधार हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सती के शरीर के अंग या आभूषण जहां-जहां गिरे, उन स्थानों को शक्तिपीठ कहा जाता है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूट, वृंदावन और बलरामपुर में स्थित देवी मंदिरों को इसी परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में विशेष पूजा होती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

    वाराणसी को भगवान शिव की नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां मणिकर्णिका घाट के पास मां विशालाक्षी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में विशेष स्थान प्राप्त है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के कुंडल या मणिकर्णिका से संबंधित अंग गिरने की कथा प्रचलित है। मां विशालाक्षी को देवी शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। नवरात्रि के दिनों में मंदिर में भक्तों की संख्या बढ़ जाती है। काशी की धार्मिक पहचान और मां विशालाक्षी से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह मंदिर देवी उपासना के प्रमुख केंद्रों में गिना जाता है।

    प्रयागराज में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी शहर में मां ललिता देवी का मंदिर स्थित है, जिसे प्रसिद्ध शक्तिधामों में शामिल माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती की अंगुली गिरी थी। प्रयागराज में मां कल्याणी देवी और अलोपी देवी के मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्र हैं। इन मंदिरों में नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त देवी के दर्शन करने और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के लिए यहां पहुंचते हैं। प्रयागराज के ये तीनों देवी मंदिर शहर की धार्मिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं और पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।

    चित्रकूट भगवान श्रीराम से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां रामगिरि क्षेत्र में स्थित शक्तिपीठ को लेकर मान्यता है कि माता सती का वक्ष इस स्थान पर गिरा था। यहां देवी को मां शिवानी के रूप में भी पूजा जाता है। नवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालु मां शिवानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना करते हैं। चित्रकूट की धार्मिक पहचान भगवान राम से जुड़ी परंपराओं के साथ-साथ देवी उपासना से भी संबंधित है। यहां स्थित देवी धाम भक्तों के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। नवरात्रि के दौरान पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होती है।

    वृंदावन भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, लेकिन यहां देवी उपासना की भी महत्वपूर्ण परंपरा है। यहां मां कात्यायनी का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है, जिसे शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्थान पर माता सती के केश या चूड़ामणि गिरे थे। नवरात्रि में श्रद्धालु मां कात्यायनी के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में स्थित देवीपाटन मंदिर मां पाटेश्वरी को समर्पित है। भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित यह मंदिर प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। मान्यता है कि यहां माता सती का स्कंध यानी कंधा गिरा था। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजा होती है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन धामों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं उत्तर प्रदेश में देवी उपासना की विविध परंपराओं को दर्शाती हैं।

  • इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल

    इंदौर में मैदान के किराये पर सियासी संग्राम, कांग्रेस से लिए 14 लाख तो भाजपा को मुफ्त जमीन क्यों, उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर में मैदान आवंटन और किराया निर्धारण को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। शुक्रवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदौर विकास प्राधिकरण यानी IDA के कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया और अधिकारियों से अलग-अलग आयोजनों के लिए जमीन देने की प्रक्रिया का हिसाब मांगा। कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी के छात्र संवाद कार्यक्रम के लिए मैदान उपलब्ध कराने के बदले 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया जबकि विजय नगर में भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन मुफ्त उपलब्ध कराई गई। इसी कथित अंतर को लेकर कांग्रेस ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और शुल्क से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कार्यकर्ता IDA कार्यालय पहुंचे और सीईओ का घेराव किया। चौकसे ने कहा कि जब तक मैदान पर हुए कार्यक्रमों की अनुमति और भुगतान से संबंधित रसीदें उपलब्ध नहीं कराई जातीं तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। कांग्रेस का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीन का आवंटन पारदर्शी तरीके से होना चाहिए और सभी आयोजकों पर समान नियम लागू होने चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि दोनों कार्यक्रमों के लिए जारी अनुमति पत्रों और किराए की राशि का विवरण सार्वजनिक किया जाए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शुल्क किस आधार पर तय किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान पार्षद राजू भदौरिया ने भी IDA के अधिकारियों पर निशाना साधा। उन्होंने प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को नियमों के अनुसार काम करना चाहिए। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यदि एक राजनीतिक दल से मैदान के इस्तेमाल के लिए बड़ी रकम ली गई है तो दूसरे दल को जमीन उपलब्ध कराने के दौरान भी नियमों और शुल्क की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। हालांकि भाजपा के कार्यक्रम के लिए जमीन पूरी तरह मुफ्त दिए जाने के आरोप की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    विवाद का एक दूसरा पहलू पिपल्याराव स्थित रीजनल पार्क के सामने भारत जोड़ो मैदान में प्रस्तावित थोक पटाखा बाजार भी है। यहां करीब 40 दिनों के बाजार के लिए 41 अस्थायी दुकानें बनाई जा रही हैं। दुकानों के अलावा जनरेटर रूम लाइट टावर और पार्किंग जैसी व्यवस्थाएं भी प्रस्तावित हैं। जानकारी के मुताबिक दुकानों का निर्माण शुरू हो चुका है लेकिन IDA की ओर से किराए की अंतिम राशि तय किए जाने और आधिकारिक डिमांड नोट जारी किए जाने की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस बीच बाजार के लिए पांच से सात लाख रुपये तक किराया होने की चर्चा है।

    पटाखा व्यापारी एसोसिएशन ने फिलहाल प्रत्येक दुकान लगाने वाले व्यापारी से एक लाख रुपये जुटाने को कहा है। बताया जा रहा है कि इस राशि में दुकान निर्माण मैदान का किराया बिजली सुरक्षा और अन्य खर्च शामिल हैं। कांग्रेस ने इस व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि तीन से चार दिन के राजनीतिक कार्यक्रम के लिए 14 लाख रुपये से अधिक शुल्क लिया गया तो करीब 40 दिन चलने वाले व्यावसायिक बाजार का किराया किस आधार पर तय होगा। पार्टी ने पिछले साल और इस साल के पटाखा बाजार के आवंटन और खर्च का विवरण भी मांगा है।

    कांग्रेस की मुख्य मांग है कि IDA मैदान आवंटन के नियम किराए की गणना और शुल्क में छूट से जुड़ी शर्तों को सार्वजनिक करे। पार्टी का कहना है कि पारदर्शिता से ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि अलग-अलग आयोजनों के लिए राशि में अंतर क्यों है और कहीं सरकारी राजस्व को नुकसान तो नहीं हो रहा। अब इस मामले में IDA का आधिकारिक जवाब महत्वपूर्ण होगा। प्राधिकरण की ओर से आवंटन की शर्तें और शुल्क निर्धारण का आधार सामने आने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    शेयर बाजार में दो दिन की गिरावट के बाद लौटी तेजी, सेंसेक्स 879 अंक चढ़ा और निफ्टी में 288 अंकों की बढ़त दर्ज

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार, 9 अक्टूबर को लगातार दो कारोबारी दिनों की गिरावट के बाद तेजी लौटी। कारोबार समाप्त होने पर सेंसेक्स 879.09 अंक यानी 1.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72,472.33 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 288.65 अंक यानी 1.30 प्रतिशत मजबूत होकर 22,520.45 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार में आई इस तेजी के पीछे आईटी शेयरों में खरीदारी की प्रमुख भूमिका रही। इसके साथ ही लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी दिखाई दी। हाल की गिरावट के बाद शेयरों के आकर्षक मूल्य स्तर पर खरीदारी और शॉर्ट कवरिंग से बाजार को सहारा मिला।

    शुक्रवार के कारोबार में निफ्टी आईटी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला क्षेत्रीय सूचकांक रहा। इसमें लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी मेटल, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी कमोडिटीज भी बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार के प्रमुख क्षेत्रीय सूचकांकों में केवल निफ्टी ऑयल एंड गैस लाल निशान में रहा। इससे संकेत मिला कि तेजी का दायरा आईटी शेयरों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य क्षेत्रों में भी खरीदारी देखने को मिली।

    बाजार में मजबूती का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 सूचकांक 904.80 अंक यानी 1.56 प्रतिशत चढ़कर 58,787.30 पर बंद हुआ। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक में 103.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई और यह 19,153.70 पर बंद हुआ। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी व्यापक खरीदारी हुई। सेंसेक्स में शामिल आईटीसी, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, इन्फोसिस, एचसीएल टेक, एलएंडटी, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एसबीआई, बजाज फिनसर्व और पावर ग्रिड बढ़त के साथ बंद हुए। मारुति सुजुकी, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाटा स्टील, एचयूएल, टाइटन, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स, एमएंडएम, इंडिगो, एनटीपीसी, भारती एयरटेल और बजाज फाइनेंस के शेयरों में भी तेजी रही। सेंसेक्स पैक में केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर गिरावट के साथ बंद हुआ।

    बाजार के जानकारों के अनुसार, हाल में आई तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने कुछ शेयरों में वैल्यू बाइंग की, जबकि शॉर्ट पोजिशन बंद किए जाने से भी बाजार को मजबूती मिली। दूसरी तिमाही के नतीजों के शुरुआती संकेतों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई से जुड़ी आय की संभावनाओं को लेकर बढ़ते भरोसे ने आईटी कंपनियों के शेयरों को समर्थन दिया। आईटी क्षेत्र में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों की तेजी में अहम योगदान दिया। दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीदों ने भी बाजार के माहौल को बेहतर बनाने में मदद की। ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका कम होने के संकेतों से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। इससे निवेशकों की चिंताओं को कुछ राहत मिली।

    हालांकि, बाजार में आई तेजी के बावजूद कई चुनौतियां बनी हुई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली और वैश्विक बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर घरेलू शेयर बाजार की रिकवरी पर दबाव डाल रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक के कैलिब्रेटेड टाइटनिंग यानी चरणबद्ध सख्ती वाले रुख के बाद निवेशक ब्याज दरों की आगे की दिशा को लेकर अधिक संकेतों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इस संदर्भ में सोमवार को जारी होने वाले घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी सीपीआई के आंकड़ों पर बाजार की नजर रहेगी। महंगाई के ये आंकड़े निवेशकों की उम्मीदों और ब्याज दरों को लेकर बाजार की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। आने वाले दिनों में दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे भी अहम रहेंगे। कंपनियों का वास्तविक प्रदर्शन तय करेगा कि शुक्रवार को आई तेजी आगे भी कायम रह पाती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव बढ़ता है।

  • रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन

    रोइंग में देश के लिए पदक जीतने वाले मनजीत सिंह की प्रेरक कहानी, अब नई प्रतिभाओं को तराशकर तैयार कर रहे चैंपियन


    नई दिल्ली। भारतीय नौकायन यानी रोइंग की दुनिया में मनजीत सिंह का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है। अपने कठिन परिश्रम और खेल के प्रति समर्पण के दम पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और देश के लिए पदक जीतकर अपनी पहचान बनाई। एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने से लेकर ओलंपिक खेलों में भारतीय टीम का हिस्सा बनने तक उनका सफर कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है। खेल में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित ध्यानचंद पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया। अब मनजीत सिंह खुद नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षित कर भारतीय नौकायन का भविष्य मजबूत बनाने में जुटे हैं।

    मनजीत सिंह का जन्म 10 अक्टूबर 1988 को हुआ था। उन्हें कम उम्र से ही नौकायन में दिलचस्पी थी। भारत में रोइंग ऐसा खेल रहा है जिसे क्रिकेट और हॉकी जैसे लोकप्रिय खेलों की तुलना में सीमित पहचान मिली है। इसके बावजूद मनजीत ने इस चुनौतीपूर्ण खेल को अपना करियर बनाने का फैसला किया। उन्होंने 17 साल की उम्र में रोइंग की शुरुआत की और लगातार अभ्यास के जरिए अपनी क्षमता को निखारा। इस दौरान उन्हें इस्माइल बेग और बजरंग लाल जैसे प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन मिला। मनजीत अपने करियर में कोच इस्माइल बेग को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक मानते हैं।

    उनकी प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जूनियर नेशनल प्रतियोगिताओं में सिल्वर मेडल जीतने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला। वह हैदराबाद में आयोजित प्रशिक्षण शिविर में एशियन जूनियर चैंपियनशिप की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें राष्ट्रीय टीम से बुलावा मिला। यह उनके करियर का अहम पड़ाव था जिसने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का रास्ता खोला। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत की और भारतीय रोइंग टीम में अपनी जगह मजबूत की।

    मनजीत सिंह ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक और 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पुरुषों की लाइटवेट डबल स्कल्स स्पर्धा में उन्होंने भारतीय टीम के लिए हिस्सा लिया। इस स्पर्धा में उनके साथी देवेंद्र खंडवाल और संदीप कुमार रहे। ओलंपिक जैसे बड़े मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना किसी भी खिलाड़ी के लिए बड़ी उपलब्धि होती है। मनजीत ने अपनी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया और भारतीय नौकायन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दिया।

    उनके करियर में 2010 के ग्वांग्झू एशियन गेम्स का भी खास महत्व रहा। इन खेलों में उन्होंने दो अलग-अलग स्पर्धाओं में भारत के लिए पदक जीते। रोइंग में सफलता हासिल करने के लिए ताकत के साथ संतुलन और तालमेल की भी जरूरत होती है। खिलाड़ियों को पानी की परिस्थितियों के अनुसार अपनी गति बनाए रखनी पड़ती है और पूरी टीम को एक लय में प्रदर्शन करना होता है। मनजीत ने अपने अनुभव और निरंतर अभ्यास के जरिए इन चुनौतियों का सामना किया।

    खेल के क्षेत्र में उनके लंबे योगदान को देखते हुए अगस्त 2020 में उन्हें ध्यानचंद पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार खेलों में आजीवन योगदान के लिए दिया जाता है। सम्मान मिलने पर मनजीत ने इसे अपने लिए बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया था। उनके लिए यह पुरस्कार वर्षों की मेहनत और इंतजार का परिणाम था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के बाद अब उनका ध्यान युवा खिलाड़ियों को तैयार करने पर है। वह नई प्रतिभाओं को प्रशिक्षण देकर उनमें देश के लिए पदक जीतने का जज्बा पैदा कर रहे हैं। उनका सफर बताता है कि किसी कम चर्चित खेल में भी लगन और अनुशासन के दम पर बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।