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  • घुंघराले बाल बार-बार क्यों उलझते और रूखे होते हैं? जानिए रोजमर्रा की ये गलतियां और आसान देखभाल के तरीके

    घुंघराले बाल बार-बार क्यों उलझते और रूखे होते हैं? जानिए रोजमर्रा की ये गलतियां और आसान देखभाल के तरीके

    नई दिल्ली । घुंघराले बाल देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन इन्हें संभालना सीधे बालों की तुलना में कई बार ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। कर्ली बालों में नमी की कमी होने पर रूखापन, उलझन और बालों के बेजान दिखने जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बार-बार कंघी करना, जरूरत से ज्यादा शैम्पू करना और गीले बालों को खींचना भी बालों को नुकसान पहुंचा सकता है। हालांकि, बालों की देखभाल की कुछ आसान आदतों को अपनाकर इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति के बालों की बनावट और सिर की त्वचा अलग होती है। इसलिए बालों की देखभाल के लिए एक ही नियम सभी पर लागू नहीं होता। शैम्पू कितनी बार करना है, यह सिर की त्वचा में तेल, पसीना, धूल और डैंड्रफ जैसी स्थितियों पर निर्भर करता है।

    घुंघराले बालों को रोजाना शैम्पू करने की जरूरत हर व्यक्ति को नहीं होती। अगर सिर की त्वचा बहुत ज्यादा तैलीय नहीं है, तो बार-बार बाल धोने से बचा जा सकता है। जरूरत से ज्यादा सफाई करने पर बालों में मौजूद प्राकृतिक तेल कम हो सकता है, जिससे वे ज्यादा रूखे और बेजान महसूस हो सकते हैं। इसलिए अपने बालों और स्कैल्प की जरूरत के अनुसार ही शैम्पू करना बेहतर रहता है।

    शैम्पू करते समय भी सही तकनीक अपनाना जरूरी है। शैम्पू को मुख्य रूप से सिर की त्वचा पर लगाकर धीरे-धीरे साफ करना चाहिए। बालों की पूरी लंबाई को जोर से रगड़ने की आवश्यकता नहीं होती। सिर की त्वचा से निकलने वाला झाग बालों की लंबाई तक पहुंचकर उन्हें साफ करने में मदद करता है। अगर बाल धोने के बाद काफी सूखे या उलझे हुए महसूस होते हैं, तो हल्का शैम्पू और उपयुक्त कंडीशनर उपयोगी हो सकता है।

    कंडीशनर घुंघराले बालों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसे बालों की लंबाई और सिरों पर लगाने से बालों की सतह अधिक चिकनी महसूस हो सकती है। इससे बालों के बीच घर्षण कम होता है और उन्हें सुलझाना आसान हो सकता है। शैम्पू के बाद कंडीशनर का इस्तेमाल बालों को संभालने में मदद कर सकता है।

    बाल धोने के बाद उन्हें सुखाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है। गीले बालों को तौलिये से जोर-जोर से रगड़ने के बजाय हल्के हाथ से पानी सोखना बेहतर है। ज्यादा रगड़ से बालों में घर्षण बढ़ सकता है और कर्ली बालों के टूटने या उलझने की समस्या बढ़ सकती है।

    गीले बालों को जोर से खींचकर कंघी करने से भी बचना चाहिए। जरूरत होने पर बालों को धीरे-धीरे सुलझाएं और ऐसी कंघी या तकनीक का इस्तेमाल करें जिससे बालों पर कम खिंचाव पड़े। बालों को संभालते समय बार-बार खींचने और रगड़ने से होने वाला नुकसान कम करना जरूरी है।

    बालों को अतिरिक्त नमी और मुलायम एहसास देने के लिए हेयर सीरम या लीव-इन कंडीशनर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बाल धोने के बाद हल्के गीले बालों पर थोड़ी मात्रा में इन्हें लगाने से बालों की सतह चिकनी महसूस हो सकती है और उलझन कम हो सकती है। हालांकि, बहुत ज्यादा प्रोडक्ट लगाने से बाल भारी या चिपचिपे दिख सकते हैं।

    घुंघराले बालों की बेहतर देखभाल के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि बालों की जरूरत को समझकर रूटीन तैयार किया जाए। जरूरत से ज्यादा शैम्पू, तेज रगड़, बार-बार कंघी और गीले बालों पर खिंचाव जैसी आदतों से बचना फायदेमंद हो सकता है। सही सफाई, पर्याप्त कंडीशनिंग और बालों को धीरे संभालने की आदत कर्ली बालों को अधिक व्यवस्थित और मुलायम बनाए रखने में मदद कर सकती है।

  • सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी

    सावन के दूसरे सोमवार पर फलाहार में बनाएं कुरकुरी कुट्टू की पकौड़ी, आसान है इसकी रेसिपी


    नई दिल्ली । 
    सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान आने वाले सोमवार को श्रद्धालु व्रत रखते हैं और पूरे दिन फलाहार करते हुए भगवान शिव की पूजा-अर्चना करते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। ऐसे में व्रत रखने वाले लोगों के सामने अक्सर यह सवाल रहता है कि फलाहार में ऐसा क्या बनाया जाए जो स्वादिष्ट होने के साथ आसानी से तैयार भी हो जाए।

    व्रत के दौरान कुट्टू का आटा कई घरों में इस्तेमाल किया जाता है। इससे पूरी, चीला, पराठा और पकौड़ी जैसे कई व्यंजन बनाए जा सकते हैं। अगर सोमवार के व्रत में कुछ अलग और स्वादिष्ट खाने का मन है, तो कुट्टू के आटे से बनने वाली आलू की पकौड़ी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।

    कुट्टू की पकौड़ी बनाने के लिए मुख्य रूप से कुट्टू का आटा और आलू की जरूरत होती है। इसके साथ स्वाद के लिए सेंधा नमक, हरी मिर्च, अदरक, धनिया और काली मिर्च का इस्तेमाल किया जा सकता है। व्रत के दौरान सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का ही प्रयोग किया जाता है।

    इस रेसिपी के लिए करीब एक कटोरी कुट्टू का आटा लिया जा सकता है। इसके साथ छह आलू, एक हरी मिर्च, एक चम्मच अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक की जरूरत होगी। सामग्री की मात्रा स्वाद और जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा की जा सकती है।

    सबसे पहले आलू को उबालकर ठंडा कर लें और फिर उन्हें अच्छी तरह मैश कर लें। इसके बाद इसमें बारीक कटी हरी मिर्च, अदरक, धनिया, काली मिर्च और सेंधा नमक मिलाएं। सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाने के बाद इसमें कुट्टू का आटा डालकर मिश्रण तैयार किया जा सकता है।

    कुट्टू का आटा मिलाते समय मिश्रण की स्थिरता का ध्यान रखना जरूरी है। इसे इस तरह तैयार किया जाना चाहिए कि पकौड़ी आसानी से आकार ले सके। जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर मिश्रण को तैयार किया जा सकता है। इसके बाद तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे हिस्से लेकर पकौड़ी का आकार दिया जा सकता है।

    अब एक कड़ाही में तेल गर्म करें। तेल पर्याप्त गर्म होने के बाद तैयार पकौड़ियों को सावधानी से डालें और उन्हें मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक पकाएं। पकौड़ियों को बीच-बीच में पलटते रहें, ताकि वे सभी तरफ से अच्छी तरह पक जाएं।

    तैयार होने के बाद पकौड़ियों को कड़ाही से निकालकर कुछ देर के लिए अतिरिक्त तेल निकलने दें। इसके बाद इन्हें व्रत में खाई जाने वाली चटनी या दही के साथ परोसा जा सकता है। अगर आप व्रत के दौरान तेल कम इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो पकौड़ी तैयार करने की अपनी पसंदीदा कम तेल वाली विधि भी अपना सकते हैं।

    कुट्टू की पकौड़ी सावन सोमवार के फलाहार में स्वाद में बदलाव लाने का आसान तरीका है। आलू और कुट्टू के आटे से तैयार यह व्यंजन कम सामग्री में बनाया जा सकता है और परिवार के अन्य सदस्य भी इसे पसंद कर सकते हैं। हालांकि व्रत में भोजन को लेकर अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए अपनी धार्मिक परंपरा के अनुसार ही सामग्री का इस्तेमाल करना उचित है।

  • भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग

    भोपाल में अगले कई दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के पूर्वानुमान से बढ़ी राहत लेकिन सतर्क रहें लोग


    भोपाल भोपाल में मानसून की सक्रियता के बीच मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। रविवार को शहर में बादल छाए रहने के बाद सोमवार से बारिश का दौर बढ़ने के आसार हैं। मौसम के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक 10 अगस्त को भोपाल में रुक रुककर बारिश हो सकती है। इसके बाद मंगलवार को भी बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि बुधवार को हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। यानी राजधानी में आने वाले कुछ दिनों तक मौसम पूरी तरह साफ रहने के बजाय बादलों और बारिश के बीच बदलता नजर आ सकता है।

    बारिश के कारण भोपाल के तापमान में भी बहुत ज्यादा बढ़ोतरी होने की संभावना नहीं है। दिन का तापमान करीब 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है जबकि रात में तापमान करीब 23 डिग्री सेल्सियस तक रहने के आसार हैं। ऐसे मौसम में सुबह और शाम के समय वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और सुहाना महसूस हो सकता है। हालांकि लगातार बादल और बारिश के कारण कई इलाकों में उमस की स्थिति भी बनी रह सकती है।

    सोमवार को बारिश का दौर रहने के कारण शहर में लोगों को आवाजाही के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत होगी। खासकर दोपहिया वाहन चालकों को गीली सड़कों पर अतिरिक्त सतर्कता रखनी चाहिए। बारिश के दौरान दृश्यता कम होने और सड़क पर पानी जमा होने से यातायात प्रभावित हो सकता है। निचले इलाकों और जलभराव वाले रास्तों पर लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    भोपाल में बारिश के साथ तापमान में राहत मिलने की संभावना है। गर्मी और तेज धूप से परेशान लोगों के लिए बादल और बारिश राहत लेकर आ सकते हैं। हालांकि लगातार बारिश होने पर शहर की सड़कों पर जलभराव और यातायात संबंधी परेशानी भी सामने आ सकती है। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की ओर से जल निकासी व्यवस्था पर नजर रखना जरूरी होगा।

    आने वाले दिनों में भी मौसम पूरी तरह स्थिर रहने की संभावना नहीं है। गुरुवार को बारिश की संभावना बनी रहेगी जबकि शुक्रवार को बारिश के साथ गरज चमक और तूफानी गतिविधि की आशंका भी जताई गई है। इसके बाद शनिवार को हल्की बारिश और रविवार को कुछ समय के लिए बारिश की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में अगले सप्ताह के दौरान भोपाल के मौसम में बादलों और बारिश का असर लगातार बना रहने की संभावना है।

    मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को जरूरी सावधानी बरतनी चाहिए। बारिश के दौरान खुले स्थानों पर अनावश्यक रूप से रुकने से बचें और गरज चमक के समय पेड़ या बिजली के खंभों के नीचे खड़े न हों। घर से बाहर निकलते समय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखकर ही यात्रा की योजना बनाना बेहतर रहेगा। किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए भी स्थानीय मौसम की जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।

    कुल मिलाकर भोपाल में अगले कुछ दिनों तक मानसून सक्रिय रहने के संकेत हैं। सोमवार से बारिश की संभावना बढ़ने के साथ तापमान में राहत बनी रह सकती है। हालांकि बारिश के कारण जलभराव और यातायात जैसी स्थानीय समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। इसलिए लोगों के लिए बारिश का आनंद लेने के साथ जरूरी सावधानी बरतना भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा।

  • शेयर बाजार में सोमवार को क्या होगा बड़ा उलटफेर तेजी लौटेगी या फिर जारी रहेगा दबाव जानें Nifty Sensex का हाल

    शेयर बाजार में सोमवार को क्या होगा बड़ा उलटफेर तेजी लौटेगी या फिर जारी रहेगा दबाव जानें Nifty Sensex का हाल


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 10 अगस्त को कारोबार की शुरुआत से पहले निवेशकों की नजर कई अहम संकेतों पर रहने वाली है। बीते कारोबारी सप्ताह के आखिरी दिन शुक्रवार को घरेलू बाजार में दबाव देखने को मिला था और Sensex 456 अंक टूटकर बंद हुआ जबकि Nifty भी 24600 के नीचे आ गया। वित्तीय शेयरों में कमजोरी ने बाजार पर दबाव बनाया था। इसके बावजूद पूरे सप्ताह बाजार में उतार चढ़ाव के बीच सकारात्मक रुझान बना रहा और अब निवेशकों की नजर नए सप्ताह में बाजार की अगली दिशा पर है।

    सोमवार के कारोबार में सबसे बड़ा असर वैश्विक बाजारों के संकेतों का देखने को मिल सकता है। अमेरिकी और एशियाई बाजारों की चाल के साथ विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी भारतीय बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार के लिए अहम संकेत रहेंगी। हाल में क्रूड की कीमतों में बढ़ोतरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है क्योंकि महंगा कच्चा तेल भारत की आयात लागत और महंगाई से जुड़े अनुमान को प्रभावित कर सकता है।

    निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण पहलू बाजार में लागू हुई नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था है। शुक्रवार के कारोबार में इस व्यवस्था के कारण Sensex और Nifty के अंतिम आंकड़ों में अंतर देखने को मिला और इससे ट्रेडिंग पैटर्न पर भी असर पड़ा। ऐसे में सोमवार को बाजार के शुरुआती रुझान के साथ अंतिम समय के कारोबार पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।

    तकनीकी नजरिए से बाजार में तेजी का सिलसिला कायम रहने के लिए Nifty का अहम स्तरों के ऊपर टिकना जरूरी होगा। दूसरी तरफ अगर शुरुआती कारोबार में बिकवाली बढ़ती है तो बाजार में मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है। ऐसे माहौल में बिना पूरी जानकारी के तेजी या गिरावट का अनुमान लगाकर ट्रेडिंग करना जोखिम भरा हो सकता है।

    नए सप्ताह में कंपनियों के तिमाही नतीजे भी कुछ शेयरों में हलचल बढ़ा सकते हैं। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली बाजार की दिशा के लिए अहम संकेत देगी। ऐसे में सोमवार को केवल Sensex और Nifty की चाल देखने के बजाय सेक्टर और व्यक्तिगत शेयरों की मजबूती पर भी नजर रखना जरूरी होगा।

    कुल मिलाकर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में उतार चढ़ाव के बीच कारोबार रहने की संभावना है। बाजार में तेजी के संकेत मौजूद हैं लेकिन वैश्विक संकेत कच्चे तेल की कीमतें विदेशी निवेशकों का रुख और वित्तीय शेयरों की चाल बाजार को प्रभावित कर सकती है। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय जोखिम प्रबंधन और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही कदम उठाना चाहिए। यह खबर बाजार की सामान्य जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।

  • रक्षाबंधन 2026 पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    रक्षाबंधन 2026 पर नहीं रहेगा भद्रा का साया, जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    नई दिल्ली । रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। सावन मास की पूर्णिमा पर मनाए जाने वाले इस त्योहार में बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई भी बहन की सुरक्षा और हर परिस्थिति में साथ देने का संकल्प लेते हैं। वर्ष 2026 में रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ समय को लेकर लोगों के बीच विशेष उत्सुकता बनी हुई है।

    ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगी। उदयकाल में पूर्णिमा तिथि होने के कारण रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। ऐसे में बहनों को 28 अगस्त को ही भाई की कलाई पर राखी बांधनी चाहिए।

    रक्षाबंधन 2026 की सबसे खास बात यह है कि इस बार राखी बांधने के समय भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता है और इसी वजह से रक्षाबंधन पर राखी बांधने के समय भद्रा की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस बार भद्रा 28 अगस्त को सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी।

    राखी बांधने के लिए इस वर्ष सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक का समय शुभ बताया गया है। इस अवधि में बहनें भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांध सकती हैं। इस शुभ मुहूर्त की कुल अवधि 3 घंटे 51 मिनट रहेगी। भद्रा समाप्त होने के कारण इस अवधि में राखी बांधने को लेकर कोई भद्रा बाधा नहीं बताई गई है।

    हालांकि, रक्षाबंधन के दिन राहुकाल का भी ध्यान रखना जरूरी होगा। 28 अगस्त को राहुकाल सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इसलिए शुभ कार्य करने वाले परिवार इस अवधि में राखी बांधने से बच सकते हैं। राखी बांधने की योजना बनाते समय शुभ मुहूर्त और राहुकाल दोनों को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा।

    रक्षाबंधन की पूजा के लिए राखी की थाली को भी विधि-विधान से तैयार किया जाता है। थाली में राखी के साथ रोली, अक्षत यानी चावल, दीपक और मिठाई रखी जाती है। सबसे पहले भाई को आसन पर बैठाकर उनके मस्तक पर रोली से तिलक लगाया जाता है और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।

    इसके बाद भाई की आरती उतारकर उनकी दाईं कलाई पर राखी बांधी जाती है। राखी बांधने के बाद भाई को मिठाई खिलाई जाती है। बहन अपने भाई की सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती है। भाई भी बहन को उपहार देकर उसके प्रति अपने स्नेह और जिम्मेदारी का भाव प्रकट करता है।

    इस तरह वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा। सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का शुभ समय रहेगा और इस दौरान भद्रा का प्रभाव नहीं होगा। परिवार शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखकर भाई-बहन के इस खास पर्व को विधि-विधान और उल्लास के साथ मना सकते हैं।

  • भगवान शिव का दिन सोमवार घर की ऊर्जा सुधारने के लिए अपनाएं ये असरदार वास्तु टिप्स

    भगवान शिव का दिन सोमवार घर की ऊर्जा सुधारने के लिए अपनाएं ये असरदार वास्तु टिप्स


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ वास्तु शास्त्र में भी सोमवार को घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए कुछ आसान उपाय किए जाते हैं। माना जाता है कि घर में साफ सफाई सकारात्मक सोच और सही दिशा का ध्यान रखने से वातावरण बेहतर बनाया जा सकता है। सोमवार के दिन किए जाने वाले कुछ वास्तु उपाय घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बनाने में सहायक माने जाते हैं। हालांकि इन उपायों को धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए।

    सोमवार के दिन सबसे पहले घर की साफ सफाई पर ध्यान देना चाहिए। खासतौर पर घर के मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या अनावश्यक सामान जमा नहीं होना चाहिए। वास्तु परंपरा में मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। इसलिए सोमवार की सुबह मुख्य द्वार को साफ करके वहां स्वच्छ पानी का छिड़काव किया जा सकता है। इसके बाद घर के पूजा स्थान की सफाई करें और भगवान शिव की पूजा करें। पूजा स्थल को व्यवस्थित और स्वच्छ रखना भी सकारात्मक वातावरण के लिए अच्छा माना जाता है।

    सोमवार को घर के पूजा स्थान में भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग की विधि अनुसार पूजा की जा सकती है। शिवलिंग पर जल अर्पित करना और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना धार्मिक रूप से शुभ माना जाता है। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो उसकी पूजा अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार ही करें। पूजा के दौरान मन को शांत रखें और घर परिवार की सुख शांति के लिए प्रार्थना करें।

    वास्तु से जुड़े पारंपरिक उपायों में सोमवार के दिन घर के उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण को साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि यह स्थान पूजा और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए उपयुक्त होता है। यहां बेकार सामान जूते चप्पल या गंदगी जमा करने से बचना चाहिए। अगर घर में पूजा का स्थान इसी दिशा में है तो उसे विशेष रूप से साफ रखना बेहतर माना जाता है।

    सोमवार को घर में सुगंधित वातावरण बनाए रखने के लिए धूप या दीपक जलाया जा सकता है। हालांकि धूप का इस्तेमाल करते समय कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन रखना जरूरी है। घर में प्राकृतिक रोशनी और हवा का प्रवेश भी वातावरण को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए दिन के समय पर्दे खोलकर घर में पर्याप्त प्राकृतिक रोशनी आने दें।

    धन और समृद्धि से जुड़े वास्तु उपायों में भी सोमवार को घर को अव्यवस्थित रखने से बचने की सलाह दी जाती है। घर में टूटे हुए सामान बेकार इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं या लंबे समय से इस्तेमाल नहीं होने वाली चीजों को जमा करके रखने के बजाय उन्हें व्यवस्थित करना बेहतर होता है। मान्यता है कि साफ और व्यवस्थित घर सकारात्मक सोच को बढ़ावा देता है और इससे घर का वातावरण भी बेहतर महसूस होता है।

    सोमवार के दिन परिवार के सदस्यों के साथ शांत व्यवहार करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन क्रोध विवाद और नकारात्मक बातचीत से बचकर भगवान शिव का स्मरण करना शुभ होता है। जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी पुण्यदायक माना जाता है। इस तरह सोमवार को पूजा के साथ घर की साफ सफाई और सकारात्मक व्यवहार पर ध्यान देकर दिन को बेहतर बनाया जा सकता है। वास्तु उपायों को अंधविश्वास के बजाय पारंपरिक मान्यताओं के रूप में समझना चाहिए और किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यावहारिक जरूरतों को प्राथमिकता देना बेहतर है।

  • आम के पत्ते फेंकने की गलती न करें, स्किन, बाल, गार्डन और घर के इन कामों में आ सकते हैं बेहद काम

    आम के पत्ते फेंकने की गलती न करें, स्किन, बाल, गार्डन और घर के इन कामों में आ सकते हैं बेहद काम

    नई दिल्ली । आम का फल गर्मियों में लगभग हर घर की पसंद होता है, लेकिन इसके साथ आने वाले आम के पत्तों को अक्सर लोग बेकार समझकर फेंक देते हैं। भारतीय संस्कृति में आम के पत्तों का इस्तेमाल पूजा-पाठ, शुभ कार्यों, गृह प्रवेश और त्योहारों के दौरान तोरण बनाने के लिए लंबे समय से किया जाता रहा है। हालांकि, इनका उपयोग केवल धार्मिक परंपराओं तक सीमित नहीं है। घर में सजावट से लेकर बागवानी और कुछ पारंपरिक घरेलू इस्तेमाल तक आम के पत्ते कई तरह से उपयोगी हो सकते हैं।

    आम के पत्तों में पॉलीफेनॉल्स और टेरपेनॉइड्स जैसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। इनमें एंटीऑक्सीडेंट और सूजन कम करने वाले गुणों की मौजूदगी का अध्ययन किया गया है। यही वजह है कि आम की पत्तियों और उनके अर्क को लेकर त्वचा, ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म से जुड़े संभावित फायदों पर भी शोध हुआ है। हालांकि, इनमें से कई दावे शुरुआती या पशु-अध्ययनों पर आधारित हैं, इसलिए इन्हें किसी बीमारी का इलाज मानना सही नहीं होगा।

    त्वचा की देखभाल के लिए भी आम के पत्तों का पारंपरिक इस्तेमाल देखने को मिलता है। इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिक त्वचा को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं। आम के पत्तों से बने पाउडर या अन्य घरेलू नुस्खों को त्वचा पर लगाने की सलाह कई जगह दी जाती है, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सीधे इस्तेमाल से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है। जलन, खुजली या लालिमा होने पर इसका इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    आम के पत्तों को ब्लड शुगर और पाचन के लिए भी पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। कुछ पशु अध्ययनों में आम की कोमल पत्तियों के अर्क में मौजूद यौगिकों के संभावित प्रभावों का अध्ययन किया गया है। इसी तरह आम के पत्तों के अर्क में मौजूद मैंगीफेरिन जैसे यौगिकों को मेटाबॉलिज्म और फैट से जुड़े प्रभावों के संदर्भ में भी शोधा गया है। लेकिन वजन घटाने या डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए आम के पत्तों की चाय या काढ़े पर निर्भर रहना वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार का विकल्प नहीं है। खासकर डायबिटीज की दवा लेने वाले लोगों को किसी भी हर्बल सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

    बालों के लिए भी आम के पत्तों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों को संभावित रूप से उपयोगी माना जाता है। हालांकि, बालों की ग्रोथ या झड़ना रोकने के संबंध में मजबूत मानव-आधारित प्रमाण सीमित हैं। इसलिए इसे घरेलू उपाय के तौर पर इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतना बेहतर है।

    घर के कामों में आम के पत्तों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत आसान है। ताजे पत्तों को फूलों के साथ पानी से भरे बड़े कटोरे में सजाकर प्राकृतिक डेकोरेशन तैयार की जा सकती है। त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में इनसे बना तोरण घर को पारंपरिक लुक देता है। वहीं, सूखे आम के पत्तों को सीधे कूड़े में फेंकने के बजाय कंपोस्ट में शामिल किया जा सकता है। इनके धीरे-धीरे सड़ने से जैविक खाद तैयार होती है, जिसका इस्तेमाल पौधों और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में किया जा सकता है।

    आम के पत्तों को लेकर यह भी पारंपरिक धारणा है कि इन्हें जलाने से निकलने वाला धुआं मच्छरों और छोटे कीट-पतंगों को दूर रख सकता है। हालांकि, घर के अंदर पत्ते जलाने से धुआं और सूक्ष्म कण पैदा होते हैं, जो सांस के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। इसलिए कीड़े भगाने के लिए धुआं करने के बजाय सुरक्षित और प्रमाणित उपायों को प्राथमिकता देना बेहतर है। इस तरह आम के पत्ते पूजा की सामग्री से आगे बढ़कर सजावट, बागवानी और कुछ पारंपरिक घरेलू उपयोगों में काम आ सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी दावों को सावधानी और वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ ही देखना चाहिए।

  • चेहरे की ड्राईनेस और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो दही आएगा काम स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल

    चेहरे की ड्राईनेस और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो दही आएगा काम स्किन केयर में ऐसे करें इस्तेमाल


    नई दिल्ली । खूबसूरत और निखरी त्वचा के लिए जरूरी नहीं कि हर बार महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स का ही सहारा लिया जाए। घर में मौजूद कुछ सामान्य चीजों का सही तरीके से इस्तेमाल भी त्वचा की देखभाल में मदद कर सकता है। इन्हीं चीजों में दही का नाम भी शामिल है। दही में लैक्टिक एसिड पाया जाता है जो त्वचा की ऊपरी सतह पर मौजूद मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा दही त्वचा को मुलायम बनाए रखने और रूखेपन को कम करने में भी सहायक हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए चेहरे पर दही लगाने से पहले सावधानी बरतना जरूरी है।

    अगर आपकी त्वचा सामान्य या रूखी है तो सादे और ताजे दही का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले चेहरे को हल्के फेस वॉश से साफ करें और फिर एक पतली परत में दही चेहरे पर लगाएं। इसे करीब दस से पंद्रह मिनट तक लगा रहने दें और इसके बाद सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। चेहरे को धोने के बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। इस तरह दही को स्किन केयर रूटीन में शामिल करने से त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद मिल सकती है।
    अगर आपकी त्वचा सामान्य या रूखी है तो सादे और ताजे दही का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले चेहरे को हल्के फेस वॉश से साफ करें और फिर एक पतली परत में दही चेहरे पर लगाएं। इसे करीब दस से पंद्रह मिनट तक लगा रहने दें और इसके बाद सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। चेहरे को धोने के बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर जरूर लगाएं। इस तरह दही को स्किन केयर रूटीन में शामिल करने से त्वचा को मुलायम महसूस कराने में मदद मिल सकती है।

    दही को कई लोग बेसन के साथ मिलाकर भी चेहरे पर लगाते हैं। इसके लिए एक चम्मच सादा दही और थोड़ी मात्रा में बेसन लेकर पेस्ट बनाया जा सकता है। इसे चेहरे पर लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें और सूखने के बाद बिना ज्यादा रगड़े पानी से धो लें। अगर त्वचा संवेदनशील है तो स्क्रब की तरह जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। ज्यादा रगड़ने से त्वचा में जलन या लालिमा हो सकती है।

    ऑयली स्किन वाले लोगों को दही का इस्तेमाल करते समय भी सावधानी रखनी चाहिए। चेहरे पर बहुत ज्यादा मात्रा में दही लगाने या लंबे समय तक लगाए रखने से बचें। वहीं मुंहासों वाली त्वचा पर किसी भी घरेलू नुस्खे को आजमाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर होता है। अगर दही लगाने के बाद जलन खुजली लालिमा या सूजन जैसी समस्या दिखाई दे तो तुरंत चेहरा धो लें और इसका इस्तेमाल बंद कर दें।

    दही को नींबू जैसी चीजों के साथ मिलाकर लगाने से भी बचना चाहिए। नींबू का रस कुछ लोगों की त्वचा में जलन और संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। खासकर अगर त्वचा पहले से संवेदनशील है तो ऐसे प्रयोग नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी तरह चेहरे पर कोई भी घरेलू मिश्रण रोजाना लगाने की जरूरत नहीं होती। त्वचा की जरूरत के अनुसार सीमित इस्तेमाल करना बेहतर है।

    स्किन केयर में दही को किसी जादुई उपचार की तरह नहीं देखना चाहिए। संतुलित खानपान पर्याप्त पानी अच्छी नींद चेहरे की नियमित सफाई और धूप से बचाव भी त्वचा को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर त्वचा पर लगातार मुंहासे दाने खुजली अत्यधिक रूखापन या अन्य समस्या बनी रहती है तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। इस तरह सही सावधानी के साथ दही को अपनी स्किन केयर दिनचर्या का एक आसान हिस्सा बनाया जा सकता है।

  • सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी

    सावन सोमवार व्रत रखने से पहले जान लें ये जरूरी नियम एक छोटी गलती पड़ सकती है भारी


    नई दिल्ली । सावन का महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय माना जाता है और इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन भगवान शिव की श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करने तथा व्रत रखने से महादेव की कृपा प्राप्त होती है। भक्त अपनी मनोकामना पूरी होने सुख समृद्धि पारिवारिक शांति और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से सावन सोमवार का व्रत रखते हैं। अविवाहित लोग अच्छे जीवनसाथी की कामना से भी यह व्रत करते हैं। हालांकि व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए केवल उपवास करना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि पूजा पाठ के साथ कुछ नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है।

    सावन सोमवार के दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और साफ कपड़े पहनने के बाद भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए। इसके बाद घर के मंदिर में या शिव मंदिर जाकर शिवलिंग का जलाभिषेक करना शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करने के बाद दूध दही शहद और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक किया जा सकता है। इसके बाद भगवान शिव को बेलपत्र धतूरा और पुष्प अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि वह साफ और साबुत हो। पूजा के दौरान ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना भी शुभ माना जाता है।

    सावन सोमवार व्रत में खानपान का भी विशेष महत्व माना जाता है। कई भक्त इस दिन निर्जल व्रत रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार करते हैं। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत का तरीका चुनना उचित होता है। फल दूध दही मखाना कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन और सेंधा नमक का सेवन व्रत के दौरान किया जा सकता है। सामान्य नमक अनाज और तामसिक भोजन से बचने की परंपरा है। यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है तो लंबे समय तक भूखे या निर्जल रहने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर होता है।

    व्रत के दौरान केवल भोजन से जुड़े नियमों का ही नहीं बल्कि व्यवहार से जुड़े नियमों का भी ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन सोमवार के दिन क्रोध झूठ निंदा और किसी को अपशब्द कहने से बचना चाहिए। मन को शांत रखते हुए भगवान शिव का स्मरण करना और जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना शुभ माना जाता है। इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीब या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तु का दान भी किया जा सकता है।

    सावन सोमवार की शाम भगवान शिव की दोबारा पूजा और आरती करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। व्रत खोलते समय सबसे पहले भगवान शिव को भोग अर्पित करें और फिर प्रसाद ग्रहण करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जा सकती है। हालांकि अलग अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत की परंपराएं अलग हो सकती हैं इसलिए अपने परिवार की धार्मिक परंपरा का भी ध्यान रखना चाहिए। सावन सोमवार व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम श्रद्धा संयम और सात्विक विचारों के साथ भगवान शिव की आराधना करना माना जाता है।

  • ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति

    ईरान पर ट्रंप का बदला रुख! सैन्य कार्रवाई से पीछे हटे अमेरिका, अब आर्थिक दबाव की रणनीति


    वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ किसी नए बड़े सैन्य अभियान की संभावना से फिलहाल दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। अमेरिका अब तेहरान पर सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने की रणनीति पर आगे बढ़ता दिख रहा है। रविवार को ‘एक्सियोस’ को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने ईरान को लेकर अपेक्षाकृत संयमित रुख अपनाया।

    ट्रंप ने किसी नई सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देने के बजाय कहा कि उनका प्रशासन फिलहाल कम आक्रामक रुख अपना रहा है। उन्होंने ईरान की खराब होती अर्थव्यवस्था और वहां बढ़ती महंगाई पर नजर रखने की बात कही।

    ट्रंप बोले- ईरान से आंशिक बातचीत जारी
    ट्रंप ने कहा कि ईरान में भारी महंगाई है और उसके पास पर्याप्त धन नहीं है। ऐसे में अमेरिका फिलहाल स्थिति को शांत रखते हुए तेहरान के साथ आंशिक बातचीत कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की आर्थिक हालत बेहद खराब है और उसके पास अपने सैनिकों को वेतन देने तक के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी ने भी ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।

    खाड़ी देशों ने सैन्य कार्रवाई से बचने की दी सलाह
    अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उनके खाड़ी सहयोगियों ने उन्हें बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान शुरू करने के बजाय आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखने की सलाह दी थी। इसके अलावा अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत करीब 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। इससे वाशिंगटन को तत्काल सैन्य कार्रवाई किए बिना ईरान पर दबाव बनाए रखने का अवसर मिल रहा है। ट्रंप ने पूरे घटनाक्रम की तुलना शतरंज के खेल से की और कहा कि मामला अंततः सुलझ ही जाता है।

    होर्मुज समझौते पर नई शर्तों से अटका मामला
    इस बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर अमेरिका, ईरान और ओमान के बीच प्रस्तावित समझौते पर भी पेच फंस गया है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख मोहम्मद बागेर जोलकद्र ने शनिवार को मांग रखी कि अमेरिका युद्ध को पूरी तरह समाप्त करे, नौसैनिक नाकेबंदी हटाए और अपनी सेना वापस बुलाए।

    उन्होंने प्रतिबंध हटाने, फ्रीज की गई संपत्तियां बहाल करने और युद्ध क्षतिपूर्ति देने की भी मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई रोकने और अमेरिकी धमकियों तथा ईरान के कथित अपमान को बंद करने की मांग रखी। वहीं, अमेरिका ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज किया है। इसमें वाणिज्यिक जहाजों से टोल वसूलने की किसी भी कोशिश का विरोध शामिल है।

    होर्मुज जलमार्ग खोलना बन सकता है ट्रंप की प्राथमिकता
    ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पूरी तरह बहाल कर देता है, तो ट्रंप नया परमाणु समझौता किए बिना भी पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते हैं। ऐसा हुआ तो यह अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव होगा। परमाणु मुद्दा पिछले कई महीनों से वाशिंगटन की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत लगातार मुश्किल बनी हुई है।

    ट्रंप का मानना है कि ईरान के परमाणु ठिकानों के नष्ट होने के बाद उसके लिए परमाणु क्षमताओं को दोबारा खड़ा करना बेहद कठिन होगा। अमेरिका का यह भी मानना है कि उसकी खुफिया एजेंसियां ईरान की किसी गुप्त परमाणु गतिविधि का पता लगाने में सक्षम होंगी।

    ईरान के यूरेनियम भंडार पर ट्रंप ने चिंता को किया खारिज
    राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के जमीन के नीचे मौजूद यूरेनियम भंडार को लेकर उठ रही चिंताओं को भी कमतर बताया। जुलाई में नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) के शिखर सम्मेलन के दौरान उन्होंने कहा था कि परमाणु सामग्री जमीन के बहुत नीचे है और दूसरे देशों के लिए उसे हासिल करना संभव नहीं होगा। ऐसे में मौजूदा हालात में ट्रंप प्रशासन व्यापक परमाणु समझौते की तुलना में होर्मुज जलमार्ग को दोबारा खोलने और ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकता है।