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  • दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम

    दिल्ली-नोएडा की तर्ज पर पूरे यूपी में लागू होगा डबल हेलमेट नियम, जानें कितनी होगी जुर्माने की रकम


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए नया कदम उठाया है। अब सड़क पर बाइक और स्कूटी चलाने वाले सभी वाहन चालकों और उनके सवारों के लिए डबल हेलमेट पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। यह नियम दिल्ली और नोएडा में लागू डबल हेलमेट नियम की तर्ज पर राज्यव्यापी प्रभावी होगा।

    क्यों जरूरी है डबल हेलमेट?
    बाइक और स्कूटी पर सवार लोगों की सुरक्षा बढ़ाने और सिर की चोटों से बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    अधिकारियों के अनुसार, कई बार दुर्घटनाओं में सवार का सिर और चालक का सिर दोनों गंभीर रूप से घायल होते हैं, इसलिए केवल चालक के लिए हेलमेट पहनना पर्याप्त नहीं है।

    जुर्माना और दंड
    यदि कोई चालक या सवार डबल हेलमेट नहीं पहनता है, तो उसे 200 रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि नियम के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, और यह नियम सभी सड़क और हाईवे पर लागू रहेगा।

    सरकार का उद्देश्य
    उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि इस कदम से सड़क दुर्घटनाओं में मौत और गंभीर चोटों की संख्या में कमी आएगी। साथ ही यह सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी मदद करेगा।

  • डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स

    डॉक्टर भी हैरान, MP के रीवा में 50 साल से एक पल भी नहीं सोया ये शख्स


    रीवा। मध्‍य प्रदेश के रीवा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर अच्छे-अच्छे डॉक्टर भी हैरान रह जाते हैं. रीवा शहर की चाणक्यपुरी कॉलोनी में रहने वाले 75 वर्षीय मोहनलाल द्विवेदी का दावा है कि उन्होंने पिछले करीब 50 सालों से एक पल के लिए भी नींद नहीं ली. हैरानी की बात ये है कि इतने लंबे समय तक न सोने के बावजूद उन्हें कोई गंभीर बीमारी नहीं है और उनकी दिनचर्या बिल्कुल सामान्य लोगों जैसी है.

    जब मेडिकल साइंस भी रह गई जवाब ढूंढती
    मेडिकल साइंस के मुताबिक एक स्वस्थ इंसान को रोजाना 6 से 8 घंटे की नींद जरूरी होती है. नींद की कमी से शरीर और दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है. लेकिन मोहनलाल द्विवेदी इस सिद्धांत को पूरी तरह चुनौती देते नजर आते हैं.

    नका कहना है कि न सिर्फ उन्हें नींद नहीं आती, बल्कि चोट लगने पर भी उन्हें दर्द का एहसास नहीं होता.
    पहले झाड़-फूंक, फिर बड़े शहरों के डॉक्टर
    शुरुआत में मोहनलाल ने अपनी इस समस्या को किसी से साझा नहीं किया. पूरी रात जागते रहते थे, लेकिन न आंखों में जलन होती थी और न ही कामकाज पर असर. जब परिवार को बताया गया तो पहले झाड़-फूंक करवाई गई. इसके बाद दिल्ली और मुंबई के बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों को दिखाया गया. कई तरह की जांचें हुईं, लेकिन बीमारी का कारण आज तक सामने नहीं आ सका.

    शानदार करियर, फिर भी नींद गायब
    मोहनलाल द्विवेदी का करियर भी किसी आम व्यक्ति से कम नहीं रहा. 1973 में लेक्चरर बने, 1974 में एमपीपीएससी पास कर नायब तहसीलदार बने, 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर पद से रिटायर हुए. नींद की समस्या की शुरुआत 1973 के आसपास हुई और तब से आज तक उन्होंने सोने का अनुभव नहीं किया.
    किताबें, टहलना और शांत दिनचर्या
    मोहनलाल अपना ज्यादातर समय किताबें पढ़ने में बिताते हैं.

    रात के समय अक्सर छत पर टहलते नजर आते हैं. दिलचस्प बात ये भी है कि उनकी पत्नी भी दिन में सिर्फ 3 से 4 घंटे ही सोती हैं.
    डॉक्टर भी बोले-मामला अविश्वसनीय
    रीवा संजय गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉक्टर राहुल मिश्रा का कहना है कि यह मामला मेडिकल साइंस के लिए बेहद चौंकाने वाला है. उनके मुताबिक, बिना सोए रहना लगभग असंभव है. हालांकि स्लीप थैरेपी और साइकोलॉजी में लगातार नए शोध हो रहे हैं. उन्होंने सलाह दी कि मोहनलाल को एक बार फिर साइकोलॉजी विभाग से संपर्क करना चाहिएइस्लामिक नाटो को लेकर पाक, सऊदी और तुर्की के बीच पक रही खिचड़ी, भारत के लिए चिंता?
  • पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास

    पतंग, तिल-गुड़ और खिचड़ी की खुशबू से महका भोपाल, भोजपाल पतंग महोत्सव ने रचा इतिहास


    भोपाल। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर इस वर्ष भोपाल में एक नया और यादगार अध्याय जुड़ गया जब शहर में पहली बार भोजपाल पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया। भेल स्थित जम्बूरी मैदान में आयोजित इस भव्य आयोजन ने पूरे शहर को पारंपरिक उल्लास और सामूहिक आनंद से भर दिया। बुधवार को हुए इस महोत्सव में 10 हजार से अधिक लोग अपने परिवार बच्चों और मित्रों के साथ शामिल हुए और खुले आसमान के नीचे रंग-बिरंगी पतंगों के साथ पर्व की खुशियां मनाईं।सुबह 10 बजे से शुरू हुआ यह पतंग महोत्सव शाम 5 बजे तक पूरे उत्साह और उमंग के साथ चला। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया आसमान में उड़ती सैकड़ों पतंगों ने जम्बूरी मैदान को एक जीवंत कैनवास में बदल दिया। बच्चों की किलकारियां युवाओं का जोश महिलाओं की मुस्कान और बुजुर्गों की उत्सुक भागीदारी ने इस आयोजन को एक पारिवारिक उत्सव का रूप दे दिया।

    इस आयोजन का श्रेय भोजपाल महोत्सव मेला समिति को जाता है जिसने शहर की सांस्कृतिक परंपराओं को सहेजने और सामूहिक उत्सव की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से इस पहल की। समिति की ओर से लगभग 2000 पतंगें और माझा नि:शुल्क वितरित किया गया ताकि हर वर्ग के लोग बिना किसी आर्थिक या अन्य बाधा के इस पर्व का आनंद ले सकें। पतंगबाजी के साथ-साथ महाप्रसादी के रूप में दो क्विंटल तिल-गुड़ के लड्डू और करीब 10 हजार लोगों के लिए खिचड़ी की व्यवस्था की गई जिसने मकर संक्रांति की मिठास और भी बढ़ा दी।

    कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि सांसद आलोक शर्मा और विशिष्ट अतिथि भोपाल भाजपा जिला अध्यक्ष रविंद्र यति की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव संयोजक विकास वीरानी महामंत्री हरीश कुमार राम सहित समिति के अन्य पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने पूजा-अर्चना और दीप प्रज्वलन कर महोत्सव की औपचारिक शुरुआत की। इसके बाद अतिथियों ने स्वयं लोगों को पतंग और माझा वितरित कर आयोजन का उत्साह दोगुना कर दिया।सुरक्षा को लेकर आयोजन में विशेष सावधानी बरती गई। चाइनीज मांझे के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। आयोजन समिति के अध्यक्ष सुनील यादव ने स्पष्ट किया कि केवल सूती और सुरक्षित धागे की ही अनुमति दी गई ताकि किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए आयोजन स्थल पर समिति के सदस्य और पुलिस टीम लगातार तैनात रही।

    आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार भोजपाल पतंग महोत्सव केवल पतंग उड़ाने का कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह पारिवारिक मेल-जोल सामाजिक सौहार्द और पारंपरिक पर्वों की सामूहिक खुशी को साझा करने का एक मंच बना। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि शहरवासियों ने इस पहल को पूरे दिल से अपनाया है।समिति ने भविष्य में भी इस तरह के सांस्कृतिक और पारंपरिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प जताया है ताकि भोपाल की पहचान एक ऐसे शहर के रूप में और मजबूत हो सके जहां परंपरा उत्सव और सामाजिक सहभागिता एक साथ जीवंत रहती है।

  • पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका है मौनी अमावस्या, कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

    पितरों को प्रसन्न करने का खास मौका है मौनी अमावस्या, कृपा प्राप्ति के लिए करें ये काम

    नई दिल्ली माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या (Mauni Amavasya 2026) के नाम से जाना जाता है। यह तिथि हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, क्योंकि इसी दिन पर माघ मेले में तीसरा प्रमुख स्नान भी किया जाता है। इस दिन किए गए गंगा स्नान करने से साधक को पुण्य फलों की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही यह तिथि पितरों की कृपा प्राप्ति के लिए भी विशेष महत्व रखती है।

    नहीं सताएगा पितृ दोष
    हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन गंगा स्नान से साधक के जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में मौनी अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान के लिए जरूर जाएं। अगर आपके लिए ऐसा करना संभव नहीं है, तो आप घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।

    इससे भी विशेष लाभ मिल सकता है। इसके बाद पितरों के निमित्त तर्पण व दान पुण्य करें। आप इस दिन पर सफेद रंग के वस्त्रों या फिर गर्म कपड़ों का दान कर सकते हैं। जिससे आपको पितृ दोष से भी राहत मिल सकती है।

    जरूर करें ये काम
    मौनी अमावस्या के दिन स्नान के बाद एक पात्र में जल लेकर उसमें कुश, अक्षत और काले तिल मिलाएं। इसके बाद दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त जल अर्पित करें और इस दौरान ‘ॐ पितृभ्यो नमः’ मंत्र का जप करें। इस मंत्र का जप कम-से-कम 11 बार करना चाहिए। साथ ही इस दिन पर ब्राह्मणों को भोजन करवाएं और यदि संभव हो तो हरिद्वार, गया जैसे तीर्थ स्थलों पर जाकर दान करें। इन सभी कार्यों को करने से पितरों को शांति मिलती है।

    मिलेगी पितरों की कृपा
    हिंदू धर्म में यह माना जाता है कि पीपल के वृक्ष में पितरों का निवास होता है। ऐसे में माघ अमावस्या को शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जरूर जलाएं। इसके साथ ही दूध व गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद 7 बार पीपल की परिक्रमा करें। ऐसा करने से पितृ दोष शांत होता है और घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है

  • बिग बॉस 19 के बाद एंटरटेनमेंट का डोज़ डबल, टीवी-OTT पर आ रहे 3 नए रिएलिटी शोज

    बिग बॉस 19 के बाद एंटरटेनमेंट का डोज़ डबल, टीवी-OTT पर आ रहे 3 नए रिएलिटी शोज


    नई दिल्ली। अगर बिग बॉस 19 के खत्म होने के बाद आपका टीवी स्क्रीन थोड़ा सूना लग रहा है और एंटरटेनमेंट की कमी महसूस हो रही है तो अब खुश हो जाइए। दर्शकों के मनोरंजन के लिए टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर तीन बिल्कुल नए और दमदार रिएलिटी शोज शुरू होने जा रहे हैं। खास बात यह है कि इन शोज को होस्ट करने की जिम्मेदारी बॉलीवुड के बड़े सितारों-अक्षय कुमार फराह खान और सुनील शेट्टी-के हाथों में होगी।

    इनमें से पहला शो है दुनिया का मशहूर गेम शो व्हील ऑफ फॉर्च्यून जो अब भारतीय दर्शकों के लिए तैयार है। साल 1975 से दुनियाभर में लोकप्रिय रहा यह गेम शो पहली बार भारत में लॉन्च किया जा रहा है। सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन ने इसकी आधिकारिक घोषणा कर दी है और बताया है कि शो को बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार होस्ट करेंगे। अक्षय कुमार की एनर्जी और ह्यूमर इस शो को और भी मजेदार बनाने वाले हैं। हालांकि फिलहाल शो की लॉन्च डेट का खुलासा नहीं किया गया है।व्हील ऑफ फॉर्च्यून के फॉर्मेट की बात करें तो इसमें कंटेस्टेंट को हॉटसीट पर बैठकर एक बड़ा व्हील घुमाना होता है। व्हील जहां रुकता है वहां लिखी प्राइज मनी के अनुसार कंटेस्टेंट को एक पजल दिया जाता है। यह कोई साधारण सवाल नहीं होता बल्कि दिमाग लगाने वाला पजल होता है। जो कंटेस्टेंट पजल को सही तरीके से सॉल्व कर लेता है वही प्राइज मनी जीतता है। इस शो में दिमाग किस्मत और समझदारी-तीनों की परीक्षा होगी।

    दूसरा रिएलिटी शो है भारत के सुपर फाउंडर्स जिसे सुनील शेट्टी होस्ट करते नजर आएंगे। यह एक बिजनेस रिएलिटी शो है जो काफी हद तक शार्क टैंक इंडिया की तर्ज पर बनाया गया है। इस शो में ऐसे स्टार्टअप्स और इनोवेटिव आइडियाज को मंच मिलेगा जो भारत के भविष्य को नई दिशा दे सकते हैं। यहां उद्यमियों को न सिर्फ पहचान मिलेगी बल्कि उनके बिजनेस को आगे बढ़ाने के लिए फंडिंग का मौका भी मिलेगा। भारत के सुपर फाउंडर्स का प्रीमियर 16 जनवरी से एमएक्स प्लेयर पर किया जाएगा।

    तीसरा और सबसे अलग कॉन्सेप्ट वाला शो है द 50। इस शो को कोरियोग्राफर और फिल्ममेकर फराह खान होस्ट करेंगी। द 50 1 फरवरी से जियोहॉटस्टार पर रात 9 बजे और उसी दिन रात 10:30 बजे कलर्स टीवी पर टेलीकास्ट होगा। इस रिएलिटी शो में 50 सेलेब्रिटीज को 50 दिनों के लिए एक घर में बंद किया जाएगा। इस दौरान उन्हें कई तरह के टास्क दिए जाएंगे और 50 दिनों के बाद विनर की घोषणा की जाएगी।कुल मिलाकर बिग बॉस 19 के बाद दर्शकों के लिए एंटरटेनमेंट की कोई कमी नहीं रहने वाली है। गेम शो बिजनेस रिएलिटी और सेलेब्रिटी चैलेंज-तीनों शोज अपने-अपने अंदाज में दर्शकों को बांधे रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

  • पाकिस्तान में शुरू हुआ स्टेबलकॉइन का नया दौर… ट्रंप फैमिली की क्रिप्टो कंपनी ने की है बड़ी डील

    पाकिस्तान में शुरू हुआ स्टेबलकॉइन का नया दौर… ट्रंप फैमिली की क्रिप्टो कंपनी ने की है बड़ी डील


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) और पाकिस्तान (Pakistan) के बीच संबंध कैसा है, यह बताने की जरूरत नहीं। खासकर ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के बाद। अब तक अमेरिकी प्रशासन और पाकिस्तानी सरकार के बीच बात होती थी, लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) का परिवार भी पाकिस्तान से जुड़ रहा है। असल में ट्रंप परिवार से जुड़ी क्रिप्टोकरेंसी कंपनी वर्ल्ड लिबर्टी फाइनेंशियल ने पाकिस्तान के साथ एक समझौता किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह वर्ल्ड लिबर्टी का किसी राष्ट्रीय सरकार के साथ सार्वजनिक रूप से घोषित पहला बड़ा समझौता है। बता दें कि कंपनी की शुरुआत सितंबर 2024 में हुई थी।

    इस समझौते के तहत वर्ल्ड लिबर्टी की सहयोगी कंपनी एससी फाइनेंशियल टेक्नोलॉजीज पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के साथ मिलकर काम करेगी। यह MoU (समझौता) पिछले साल पाकिस्तानी अधिकारियों और अमेरिकी पक्ष के बीच हुई कई बैठकों के बाद हुआ है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्ल्ड लिबर्टी के USD1 स्टेबलकॉइन को एक नियंत्रित डिजिटल भुगतान व्यवस्था में शामिल करना है। इससे यह स्टेबलकॉइन पाकिस्तान के मौजूदा डिजिटल करेंसी सिस्टम के साथ काम कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में इस्तेमाल हो सकेगा। पाकिस्तान वर्चुअल एसेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (PVARA) ने बुधवार को इस MoU पर हस्ताक्षर किए।


    पाकिस्तान के लिए काफी अहम

    माना जा रहा है कि यह समझौता पाकिस्तान के लिए काफी अहम है। पाकिस्तान सरकार नकदी के इस्तेमाल को कम करना चाहती है और विदेशों से रेमिटेंस (पैसे भेजना) को आसान व सस्ता बनाना चाहती है। क्रिप्टोकरेंसी, खासकर स्टेबलकॉइन, इसमें बड़ी मदद कर सकते हैं। पाकिस्तान में लाखों लोग पहले से क्रिप्टो का इस्तेमाल करते हैं और हर साल बड़ी रकम रेमिटेंस के रूप में आती है। माना जा रहा है कि इस डील से पाकिस्तान नई डिजिटल तकनीक को समझ सकेगा, उसे नियमों के दायरे में लाएगा और राष्ट्रीय हित सुनिश्चित करेगा।

    बता दें कि स्टेबलकॉइन ऐसी डिजिटल मुद्रा होती है जिसकी कीमत अमेरिकी डॉलर जैसी स्थिर चीज से जुड़ी रहती है, इसलिए इसमें मूल्य में उतार-चढ़ाव का जोखिम बहुत कम होता है। वर्ल्ड लिबर्टी एक क्रिप्टो-आधारित फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म है, जो डिजिटल वॉलेट की तरह काम करता है और दुनिया भर में पैसे भेजने-पाने को आसान बनाता है। दुनिया की कई सरकारें अब स्टेबलकॉइन को भुगतान प्रणाली और बड़े वित्तीय सिस्टम में शामिल करने के तरीके तलाश रही हैं।


    समझौते के बाद उठ रहे सवाल

    ट्रंप की पाकिस्तान से निकटता पर अमेरिका में कुछ सवाल भी उठे हैं। कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि ट्रंप परिवार अपने व्यापारिक हितों को प्राथमिकता दे रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने ट्रंप पर निशाना साधते हुए कहा कि पाकिस्तान में परिवार के व्यापारिक सौदों के चलते भारत से संबंध प्रभावित हुए। ट्रंप परिवार के पाकिस्तान में क्रिप्टो कारोबार से जुड़े सवाल पर सुलिवन ने कहा कि यह ट्रंप की विदेश नीति की उन कहानियों में से एक है, जिन पर कम ध्यान दिया गया है।

  • अमेरिका-ईरान के बीच तनाव से पाकिस्तान टेंशन में, आसिम मुनीर ने बुलाई आपात बैठक

    अमेरिका-ईरान के बीच तनाव से पाकिस्तान टेंशन में, आसिम मुनीर ने बुलाई आपात बैठक


    इस्लामाबाद।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने ईरान (Iran) में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को यह कहकर और हवा दे दी है कि प्रदर्शनकारी संस्थाओं पर कब्जा करें, मदद पहुंच रही है। अब इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों को किस तरह की मदद पहुंचाने जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई का भी प्लान बना रहा है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका को दो टूक कहा है कि वह चुप बैठने वाला नहीं है और किसी भी सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा।

    इन सबके बीच, पाकिस्तान (Pakistan) टेंशन में आ गया है। वह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से परेशान है। पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को अब चिंता सता रही है कि अगर ईरान और अमेरिका के बीच जंग छिड़ी तो उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पहले से ही कई मोर्चों पर बदहाली झेल रहे पाकिस्तान में अब नए मोर्चों पर हालात बिगड़ने की आशंका के बीच पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने आपात बैठक की है।


    दो सीमाई मोर्चों पर दबाव

    सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हाई लेवेल मीटिंग में ISI प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल असीम मलिक, साउदर्न कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम, मिलिट्री इंटेलिजेंस प्रमुख, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ और अन्य वरिष्ठ जनरल शामिल हुए। इस बैठक में सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान–ईरान सीमा को लेकर जताई गई है। अधिकारियों ने चेताया कि पाकिस्तान पहले ही अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर तनाव झेल रहा है और ऐसे में ईरान सीमा पर नया संकट देश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।


    अमेरिका मांग सकता है पाकिस्तानी ठिकाने?

    सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस आशंका पर भी गंभीर चर्चा हुई कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह पाकिस्तान से हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मांग कर सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के लिए फैसला लेना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि इससे देश के भीतर राजनीतिक विरोध और क्षेत्रीय तनाव, दोनों बढ़ सकते हैं।


    पाक के अंदर अशांति और विद्रोह का डर

    पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान-अमेरिका जंग में अगर पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया तो उसे आंतरिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि देश की लगभग 30 फीसदी आबादी शिया है, जो ईरान के प्रति सहानुभूति रखती है। ऐसे में अगर ईरान पर अमेरिकी हमला होता है या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश होगी। इससे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर शियाओं का विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकता है। इसके अलावा, ईरान से शरणार्थियों के आने से सीमा पर दबाव और बढ़ सकता है।


    हाई अलर्ट पर पाक सेना

    सूत्रों के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर ने सभी वरिष्ठ कमांडरों को हाई अलर्ट पर रहने और हालात पर करीबी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं ISI प्रमुख को ईरान, तुर्की, कतर, यूएई, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ राजनयिक और सुरक्षा स्तर की बातचीत तेज करने को कहा गया है, ताकि हालात को बिगड़ने से रोका जा सके।


    क्षेत्रीय अस्थिरता की चेतावनी

    खुफिया आकलन में कहा गया है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की पहले ही अमेरिका को यह संदेश दे चुके हैं कि ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने मानना कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार आगे बढ़ती है और पाकिस्तान पर सहयोग का दबाव डालती है, तो इस्लामाबाद को गंभीर रणनीतिक और राजनीतिक नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।

    देश के भीतर एकजुटता की कोशिश
    ऐसे में बाहरी दबावों के बीच पाकिस्तान की सेना ने घरेलू मोर्चे पर भी तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, सेना मुख्यालय में नेशनल पैग़ाम-ए-अमन कमेटी के तहत धार्मिक विद्वानों का एक प्रतिनिधिमंडल बुलाया गया है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट संदेश देने पर ज़ोर दिया गया है। बैठक में यह भी कहा गया कि भारत और सीमा पार सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे कथित मनोवैज्ञानिक युद्ध का जवाब एक साझा राष्ट्रीय नैरेटिव से दिया जाना चाहिए।

  • युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज मतदान… दो दिन पहले से इंटरनेट पूरी तरह बंद

    युगांडा में राष्ट्रपति चुनाव के लिए आज मतदान… दो दिन पहले से इंटरनेट पूरी तरह बंद


    कंपाला।
    अफ्रीकी देश युगांडा (African country Uganda) में 15 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election.) होने जा रहे हैं, लेकिन निष्पक्ष और स्वतंत्र मतदान की उम्मीदें गंभीर चुनौती का सामना कर रही हैं। मतदान से महज दो दिन पहले (13 जनवरी को शाम 6 बजे से) पूरे देश में सार्वजनिक इंटरनेट सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई है। साथ ही सड़कों पर सैनिकों और सुरक्षा बलों की भारी मौजूदगी है, जिससे आम नागरिकों में डर और असुरक्षा का माहौल है। विपक्षी नेता बॉबी वाइन (रॉबर्ट क्यागुलानी) ने इसे चुनावी धांधली और दमन की साजिश बताया है।

    दरअसल, यह चुनाव 81 वर्षीय राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी के लिए सातवां कार्यकाल हासिल करने का मौका है, जो 1986 से लगातार सत्ता में हैं। उनका मुख्य मुकाबला 43 वर्षीय बॉबी वाइन से है, जो पूर्व पॉप स्टार से राजनेता बने हैं और युवा वर्ग में बदलाव की लहर पैदा कर रहे हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि मुसेवेनी की सत्ता में वापसी लगभग तय है, लेकिन वे अब सुरक्षा बलों और अपने बेटे जनरल मुहूज़ी कैनेरुगाबा (सेना के शीर्ष कमांडर) पर अधिक निर्भर हैं।

    गौरतलब है कि मुसेवेनी ने संविधान में दो बार बदलाव कर आयु और कार्यकाल की सीमा हटा दी है। विरोधियों को जेल, गायब किया जाना या दबाया जाना आम हो गया है। सत्तारूढ़ नेशनल रेजिस्टेंस मूवमेंट (एनआरएम) में कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं दिखता, जिससे वंशानुगत शासन की आशंका बढ़ गई है।


    इंटरनेट बंदी… लोकतंत्र पर बड़ा हमला

    युगांडा कम्युनिकेशंस कमीशन (यूसीसी) ने इंटरनेट बंद करने का फैसला ‘ऑनलाइन गलत सूचना, भ्रामक जानकारी, चुनावी धोखाधड़ी और हिंसा भड़काने के जोखिम’ रोकने के नाम पर लिया है। यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की सिफारिश पर हुआ। लेकिन आलोचक इसे विरोध प्रदर्शनों को रोकने और चुनावी अनियमितताओं (जैसे मतपत्र भरना, वोटों में हेराफेरी) की जानकारी साझा करने से रोकने का हथकंडा बताते हैं। 2021 के चुनाव में भी ऐसा ही ब्लैकआउट हुआ था, जो कई दिनों तक चला।


    विपक्ष की रणनीति: वोट की रक्षा

    बॉबी वाइन की नेशनल यूनिटी प्लेटफॉर्म (NUP) ने समर्थकों से मतदान केंद्रों के पास कानूनी 20 मीटर की दूरी पर रहने, सतर्क रहने और धांधली रोकने का आह्वान किया है। चुनाव आयोग ने लोगों से वोट डालकर घर लौटने और जरूरत पर मतगणना देखने की अपील की है। वाइन ने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि पहला कदम यह है कि हम सभी मतदान केंद्रों पर (20 मीटर की दूरी का पालन करते हुए) रहें और सुनिश्चित करें कि कोई आपराधिक घटना न हो। हम सभी से आग्रह करते हैं कि वे अपने कैमरों का उपयोग करें और किसी भी अनियमितता को रिकॉर्ड करें।

  • विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट

    विदेशियों को आकर्षित नहीं कर पा रहा भारत…. राजस्थान से भी छोटे देश वियतनाम पहुंचे 3 गुना से भी ज्यादा टूरिस्ट


    नई दिल्ली।
    साल 2025 के पहले नौ महीनों में भारत (India) सिर्फ 6.18 मिलियन विदेशी पर्यटकों (6.18 Million Foreign Tourists) को ही आकर्षित कर पाया. यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि अकेला पेरिस शहर (Paris city) एक साल में करीब 18 मिलियन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का स्वागत कर चुका है. भारत के बेहद करीब वियतनाम (Vietnam), जो क्षेत्रफल में राजस्थान से भी छोटा है, उसने 2025 में 20 मिलियन विदेशी पर्यटकों का रिकॉर्ड बनाया.


    क्या भारत अब बजट डेस्टिनेशन नहीं रहा?

    आज भारत न तो विदेशी टूरिस्ट के लिए सस्ता है और न ही अपने ही नागरिकों के लिए. घरेलू छुट्टी का खर्च कई बार श्रीलंका या थाईलैंड जैसे देशों की इंटरनेशनल ट्रिप से ज्यादा हो जाता है. घरेलू फ्लाइट्स महंगी हैं, होटल ओवरप्राइस्ड हैं और सर्विस क्वालिटी में लगातार गिरावट देखी जा रही है. वियतनाम में एक हफ्ते की अच्छी ट्रिप 50 से 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति में हो जाती है. वहीं गोवा की इसी तरह की यात्रा का खर्च इतना ही या उससे ज्यादा हो सकता है. यही वजह है कि कई भारतीयों को विदेशी यात्रा ज्यादा सस्ती और ज्यादा आकर्षक लगने लगी है।


    इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं में क्या कमी है?

    भारत में पब्लिक ट्रांसपोर्ट भरोसेमंद नहीं है. कई टूरिस्ट प्लेस पर कैब ड्राइवर मीटर से चलने से इनकार करते हैं और गैंग बनाकर मनमाना किराया वसूलते हैं. मेट्रो शहरों से आखिरी मील कनेक्टिविटी कमजोर है. इसके अलावा प्रदूषण भी एक बड़ा कारण है, राजधानी दिल्ली में AQI महीनों तक तीन अंकों में बना रहता है. सार्वजनिक स्थानों पर थूकना आम है. ऐतिहासिक स्मारकों पर लिखावट और नुकसान दिखाई देता है. शौचालय गंदे हैं और कई हेरिटेज साइट्स पर बदबू पर्यटकों का स्वागत करती है. ऐसी हालत में लोग ऊंची कीमत चुकाने से पहले सौ बार सोचते हैं।


    टूरिज्म में सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता क्यों?

    सुरक्षा भारत की सबसे कमजोर कड़ी बन चुकी है. महिला वर्ल्ड कप के दौरान ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों के साथ छेड़छाड़, राजस्थान में फ्रेंच टूरिस्ट के साथ रेप और कर्नाटक में इजरायली महिला के साथ गैंगरेप जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंचती हैं. ये घटनाएं भारत की वैश्विक छवि को गहराई से प्रभावित करती हैं. गोवा या केरल के बजट में लोग बाली, कुआलालंपुर या दुबई घूम लेते हैं. थाईलैंड में अलग से टूरिस्ट पुलिस है. वहां इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर, शहर साफ और सुरक्षा सिस्टम मजबूत है. ऐसे में सवाल उठता है कि कोई भारत क्यों चुने, जब खर्च ज्यादा और अनुभव कमजोर हो।


    भारत पर्यटन को मजबूत कैसे बना सकता है?

    भारत के पास प्राचीन मंदिर, जीवंत संस्कृति, रेगिस्तान, पहाड़, समुद्र तट और जंगल हैं. सबसे पहले सुरक्षा पर जीरो टॉलरेंस जरूरी है. साफ-सफाई को सख्ती से लागू करना होगा और नागरिकों को भी जिम्मेदारी निभानी होगी. कीमत और सुविधाओं में संतुलन, बेहतर सर्विस स्टैंडर्ड और प्रोफेशनल प्रमोशन जरूरी है. पर्यटन सिर्फ स्मारक नहीं, अनुभव है और वही तय करता है कि पर्यटक दोबारा लौटेगा या नहीं.

  • महाराष्ट्र: मरठवाड़ा में 5 साल में 5000 से किसानों ने की खुदकुशी, हर दिन 3 किसान ले रहे अपनी जान

    महाराष्ट्र: मरठवाड़ा में 5 साल में 5000 से किसानों ने की खुदकुशी, हर दिन 3 किसान ले रहे अपनी जान


    मुम्बई।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) के सूखाग्रस्त क्षेत्र (Drought-affected areas) के रूप में पहचाने जाने वाले मराठवाड़ा क्षेत्र (Marathwada region) में किसानों की हालत लगातार गंभीर बनी हुई है। एक आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पाँच सालों में 5,000 से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी कर ली है। हैरत की बात ये है कि 2025 में सबसे ज़्यादा आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए हैं। डिविजनल कमिश्नर कार्यालय द्वारा तैयार की गई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में कुल 1,129 किसानों ने आत्महत्या की है, जो एक साल पहले 948 थी, जबकि 2021 से अब तक कुल पांच वर्षों में कुल 5,075 आत्महत्याएं दर्ज की गई हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि वहां हर दिन औसतन तीन किसान अपनी जीवन लीला खत्म कर रहे हैं।

    मराठवाड़ा डिवीजन में छत्रपति संभाजीनगर, जालना, परभणी, नांदेड़, बीड, धाराशिव, हिंगोली और लातूर जिले शामिल हैं। डिवीजनल कमिश्नर कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में 887, 2022 में 1,023, 2023 में 1,088, 2024 में 948 और 2025 में 1,129 किसानों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली है। कुल मिलाकर 2021 से अब तक 5,075 किसानों की आत्महत्या हो चुकी है।


    बीड जिला सबसे ज़्यादा प्रभावित

    2025 में किसानों की आत्महत्या के सबसे ज़्यादा मामले बीड जिले से सामने आए, जहां 256 किसानों ने जान दे दी। इनमें से 193 परिवारों को अनुग्रह राशि दी गई है। 2025 में जिलेवार किसानों की आत्महत्याएं इस प्रकार रही हैं: छत्रपति संभाजीनगर- 224, जालना- 90, परभणी- 104, हिंगोली- 68, नांदेड़- 170, बीड- 256, लातूर- 76 और धाराशिव-141।


    बारिश और बाढ़ बनी बड़ी वजह

    अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल मराठवाड़ा के कई हिस्सों में असमय बारिश हुई। मई महीने में कुछ इलाकों में 125 से 150 प्रतिशत तक अधिक वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा सितंबर–अक्टूबर 2025 में आई बाढ़ ने क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में हुई कुल आत्महत्याओं में से 537 मौतें मई से अक्टूबर के बीच हुईं, जब बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।


    चिंता का विषय

    लगातार खराब मौसम, फसल नुकसान, बढ़ता कर्ज़ और आर्थिक दबाव मराठवाड़ा के किसानों को गहरे संकट में धकेल रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हालात से निपटने के लिए स्थायी और प्रभावी नीतियों की ज़रूरत है, ताकि किसानों को राहत मिल सके।