Blog

  • दिल्ली से पटना तक पेट्रोल 110 के पार, गोल्ड-सिल्वर खरीदने वालों को मिली राहत

    दिल्ली से पटना तक पेट्रोल 110 के पार, गोल्ड-सिल्वर खरीदने वालों को मिली राहत



    नई दिल्ली। देशभर में आम जनता इस समय भीषण महंगाई के चक्रव्यूह में फंस चुकी है। एक तरफ जहां पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम आदमी के मासिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है, वहीं दूसरी तरफ सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दाम सर्वकालिक उच्च स्तर के आसपास बने हुए हैं। आज यानी 28 मई 2026 को भी देश के अधिकांश हिस्सों में ईंधन की कीमतें अपने उच्चतम स्तर पर बनी हुई हैं, जिससे ट्रांसपोर्टेशन से लेकर रोजमर्रा की जरूरी चीजों के महंगे होने का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर, रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने के बाद आज सोने और चांदी की कीमतों में बेहद मामूली नरमी देखी गई है, लेकिन यह गिरावट इतनी कम है कि इससे उपभोक्ताओं को कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही है।

    अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर अब सीधे भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में गहराते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण घरेलू तेल कंपनियों ने पिछले 13 दिनों में चार बार ईंधन के दाम बढ़ाए हैं। इस अल्पावधि में पेट्रोल और डीजल करीब 7 से 8 रुपये प्रति लीटर तक महंगे हो चुके हैं। इसका सबसे बड़ा असर दिल्ली-NCR और मुंबई जैसे महानगरों में देखा जा रहा है। दिल्ली में जो पेट्रोल कुछ समय पहले तक 95 रुपये के आसपास था, वह अब 102 रुपये के पार चला गया है। वहीं मुंबई और पटना जैसे शहरों में तो पेट्रोल की कीमतें 110 रुपये प्रति लीटर के आंकड़े को भी पार कर चुकी हैं। इस बढ़ोतरी ने न केवल निजी वाहन चालकों बल्कि ऑटो, कैब और माल ढुलाई करने वाले कमर्शियल वाहनों की कमर तोड़ दी है।

    ईंधन की इस चौतरफा मार के बीच सर्राफा बाजार से आज हल्की गिरावट की खबर आई है। पिछले काफी समय से आसमान छू रहे सोने के भाव में आज थोड़ी सुस्ती रही, जिसके बाद 24 कैरेट सोना बाजार में ₹1,59,000 प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट सोना ₹1,46,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसी तरह चांदी की कीमतों में भी मामूली गिरावट आई है और यह ₹2,84,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है। हालांकि, इस मामूली गिरावट के बावजूद मई के महीने में चांदी अब तक 11 प्रतिशत से ज्यादा महंगी हो चुकी है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितता और रुपये की कमजोरी के कारण निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने-चांदी को तरजीह दे रहे हैं, जिससे लंबी अवधि में इनमें तेजी का रुख बना रहेगा। ऐसे में जानकारों की सलाह है कि इस उच्च स्तर पर एकमुश्त निवेश करने के बजाय छोटी-छोटी किश्तों में खरीदारी करना ही समझदारी होगी।

  • मंगल पर एपीएक्सएस का कमाल, 1761 नमूनों की जांच कर भेजीं 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट

    मंगल पर एपीएक्सएस का कमाल, 1761 नमूनों की जांच कर भेजीं 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट


    नई दिल्ली। मंगल ग्रह की सतह पर लगातार वैज्ञानिक खोजों में जुटा नासा का क्यूरियोसिटी रोवर एक बार फिर चर्चा में है। इस रोवर पर लगा कनाडा का अत्याधुनिक अल्फा पार्टिकल एक्स-रे स्पेक्ट्रोमीटर (APXS) अब तक 1761 नमूनों की जांच कर 3943 वैज्ञानिक रिपोर्ट पृथ्वी तक भेज चुका है। यह हाईटेक उपकरण मंगल की मिट्टी और चट्टानों के रहस्यों को समझने में वैज्ञानिकों की बड़ी मदद कर रहा है।

    कनाडाई स्पेस एजेंसी के अनुसार, APXS का मुख्य उद्देश्य मंगल ग्रह की सतह पर मौजूद रासायनिक तत्वों की पहचान करना और यह पता लगाना है कि क्या कभी वहां जीवन के अनुकूल परिस्थितियां मौजूद थीं।

    आकार में रूबिक क्यूब जैसा दिखने वाला यह उपकरण क्यूरियोसिटी रोवर की रोबोटिक भुजा के सिरे पर लगा है। जब रोवर किसी चट्टान या मिट्टी के नमूने के करीब पहुंचता है, तब APXS उस पर एक्स-रे और अल्फा कणों की बौछार करता है। इसके बाद नमूने से निकलने वाली ऊर्जा का विश्लेषण कर उसकी रासायनिक संरचना का पता लगाया जाता है।

    वैज्ञानिकों के मुताबिक यह उपकरण बेहद सूक्ष्म तत्वों की भी पहचान करने में सक्षम है। किसी नमूने की विस्तृत जांच में लगभग दो से तीन घंटे का समय लगता है, जबकि त्वरित विश्लेषण करीब 10 मिनट में पूरा हो जाता है।

    APXS ने साल 2024 में एक अहम खोज में भी बड़ी भूमिका निभाई थी। क्यूरियोसिटी रोवर के गुजरने के दौरान एक चट्टान टूट गई थी, जिसके अंदर शुद्ध सल्फर के क्रिस्टल मिले थे। मंगल ग्रह पर पहली बार इस तरह के क्रिस्टल मिलने से वैज्ञानिकों में उत्साह बढ़ गया था। माना जा रहा है कि इससे मंगल के प्राचीन वातावरण और वहां की प्राकृतिक परिस्थितियों को समझने में मदद मिलेगी।

    कनाडाई स्पेस एजेंसी ने बताया कि APXS दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है। यह उपकरण थर्मोइलेक्ट्रिक जनरेटर से संचालित होता है, जिससे रोवर को सौर ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। यही वजह है कि क्यूरियोसिटी रोवर मंगल की कड़ाके की सर्दी में भी सक्रिय बना रहता है।

    1 फरवरी 2026 तक क्यूरियोसिटी रोवर मंगल ग्रह पर 36.2 किलोमीटर की दूरी तय कर चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि APXS से मिलने वाले आंकड़े भविष्य में मानव मिशनों और मंगल पर जीवन की संभावनाओं को समझने में बेहद अहम साबित होंगे।

  • भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, अप्रैल में 10.4 अरब डॉलर का कारोबार

    भारत के इंजीनियरिंग निर्यात ने पकड़ी रफ्तार, अप्रैल में 10.4 अरब डॉलर का कारोबार


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में लॉजिस्टिक चुनौतियों के बावजूद भारत के इंजीनियरिंग गुड्स निर्यात ने वित्त वर्ष 2026-27 की मजबूत शुरुआत की है। अप्रैल 2026 में देश का इंजीनियरिंग निर्यात सालाना आधार पर करीब 9 प्रतिशत बढ़कर 10.35 अरब डॉलर पहुंच गया।

    इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (EEPC) इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल में यह निर्यात 9.52 अरब डॉलर था। इस बार कई प्रमुख सेक्टर्स में मजबूत मांग और बेहतर प्रदर्शन के कारण निर्यात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    डेटा के मुताबिक एल्युमीनियम और उससे जुड़े उत्पादों के निर्यात में 38 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि तांबा और उससे संबंधित उत्पादों में 80 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल मशीनरी और उपकरणों के निर्यात में 9.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

    ऑटोमोबाइल सेक्टर ने भी निर्यात वृद्धि में अहम योगदान दिया। दोपहिया और तिपहिया वाहनों के निर्यात में 36 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि ऑटो कंपोनेंट्स और पार्ट्स के निर्यात में 7.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

    EEPC इंडिया के अनुसार, इंजीनियरिंग गुड्स के कुल 34 पैनलों में से 28 ने अप्रैल महीने में सकारात्मक निर्यात वृद्धि दर्ज की, जो सेक्टर की व्यापक मजबूती को दर्शाता है।

    ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी तनाव और आपूर्ति संबंधी चुनौतियों के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों और बाजारों में भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत-ओमान व्यापार समझौते के कारण ओमान को निर्यात में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    हालांकि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका (WANA) क्षेत्र में संघर्ष के कारण निर्यात पर दबाव बना हुआ है। वहीं आसियान देशों में भी मांग कमजोर रहने और ऑटोमोबाइल शिपमेंट में गिरावट के चलते निर्यात अपेक्षाकृत धीमा रहा।

    अप्रैल में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों के प्रमुख बाजार रहे। वहीं चीन को होने वाला निर्यात 81.7 प्रतिशत बढ़कर 301 मिलियन डॉलर से अधिक पहुंच गया।

    क्षेत्रीय स्तर पर उत्तरी अमेरिका में 7.1 प्रतिशत और यूरोपीय संघ में 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि यूएई, सिंगापुर और सऊदी अरब को होने वाले निर्यात में गिरावट देखने को मिली।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में देश के कुल व्यापारिक निर्यात में इंजीनियरिंग गुड्स की हिस्सेदारी 23.8 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 24.9 प्रतिशत थी।

  • अमेरिका-इजरायल एकजुटता पर ईरान का सवाल, युद्धविराम को लेकर नई बहस तेज

    अमेरिका-इजरायल एकजुटता पर ईरान का सवाल, युद्धविराम को लेकर नई बहस तेज


    नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और युद्धविराम की चर्चाओं के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका और इजरायल के संबंधों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहमति को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

    अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत सामने आ रहे हैं, जबकि इसी दौरान हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व की ओर तैनात किए जा रहे हैं।

    उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी युद्धविराम को सफल बनाने में कामयाब भी हो जाते हैं, तो क्या अमेरिका और इजरायल संघर्ष के अंतिम परिणाम पर सहमत होंगे?

    एक अन्य पोस्ट में ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका-इजरायल संघर्ष को एक महीना बीत चुका है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की सरकारें इस टकराव के दीर्घकालिक परिणामों का आकलन कर रही हैं।

    अराघची के अनुसार, स्थिति का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कितने समय तक चलता है और ईरान होर्मुज स्ट्रेट से ईंधन और अन्य मालवाहक जहाजों की आवाजाही पर कितनी देर तक नियंत्रण बनाए रखता है।

    इस बीच ईरान ने अमेरिका पर संघर्षविराम नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए इसे दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई बताया है। तेहरान ने कहा है कि यह कदम संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है और इसका जवाब दिया जाएगा।

    उधर अमेरिका की ओर से 26 मई को होर्मुज क्षेत्र में की गई सैन्य कार्रवाई को आत्मरक्षा बताया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों की सुरक्षा के लिए की गई थी, जिसमें कथित तौर पर बारूदी सुरंग बिछा रही बोट्स और एक मिसाइल साइट को निशाना बनाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट और मध्य-पूर्व में तनाव को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।

  • अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा टकराव, होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई का दावा

    अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ा टकराव, होर्मुज स्ट्रेट में ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई का दावा


    होर्मुज। होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया है कि उसने ईरान के चार ड्रोन को मार गिराया है और एक सैन्य ठिकाने पर भी कार्रवाई की है, जहां ड्रोन लॉन्च की तैयारी की जा रही थी।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उस समय की गई जब ड्रोन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों और अमेरिकी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। बताया जा रहा है कि निशाना बनाया गया ठिकाना दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में एक ड्रोन नियंत्रण केंद्र था।

    यह एक सप्ताह के भीतर ईरान पर अमेरिका की दूसरी बड़ी सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और गहरा गया है। सेंटकॉम ने इसे आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री मार्गों की रक्षा करना है।

    दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के इन दावों की कड़ी निंदा की है और इसे संघर्षविराम का उल्लंघन बताया है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका जानबूझकर क्षेत्र में तनाव बढ़ा रहा है और उसकी सैन्य कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है।

    ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बंदर अब्बास के पास मंगलवार सुबह कई धमाकों की आवाज सुनी गई, जिसके बाद अस्थायी रूप से एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए।

    इसके साथ ही ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने एक अमेरिकी एयरबेस पर जवाबी हमला किया है। IRGC के मुताबिक यह कार्रवाई बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास हुए अमेरिकी हमले के जवाब में की गई।

    हालांकि ईरान ने उस एयरबेस की लोकेशन स्पष्ट नहीं की है, लेकिन इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता भी गहरा दी है।

  • मोबिलिटी सेक्टर में नया रिकॉर्ड, भारत टैक्सी बनी सबसे बड़ी कोऑपरेटिव

    मोबिलिटी सेक्टर में नया रिकॉर्ड, भारत टैक्सी बनी सबसे बड़ी कोऑपरेटिव


    नई दिल्ली। गांधीनगर में शुरू हुई “भारत टैक्सी” देश की सबसे बड़ी मोबिलिटी कोऑपरेटिव के रूप में तेजी से उभर रही है। इस प्लेटफॉर्म से अब तक 35 लाख से अधिक यूजर्स और 6 लाख से ज्यादा ड्राइवर, जिन्हें यहां ‘सारथी’ कहा जाता है, जुड़ चुके हैं।

    5 फरवरी को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह द्वारा लॉन्च की गई यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ विजन का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। इस मॉडल को तकनीक और सहकारिता के अनोखे संगम के रूप में देखा जा रहा है, जहां ड्राइवर केवल सेवा प्रदाता नहीं बल्कि प्लेटफॉर्म के सह-मालिक हैं।

    भारत टैक्सी का सबसे बड़ा आकर्षण इसका जीरो कमीशन मॉडल है। कंपनी के अनुसार, राइड से होने वाली 100 प्रतिशत कमाई सीधे ड्राइवरों के खाते में जाती है, जिससे उनकी मासिक आय में 25 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    प्लेटफॉर्म से जुड़े ड्राइवरों का कहना है कि पारंपरिक एग्रीगेटर मॉडल की तुलना में यहां कमाई अधिक पारदर्शी और स्थिर है। वहीं यात्रियों को भी फायदा मिल रहा है क्योंकि किराया औसतन 15 प्रतिशत तक कम है और डायनेमिक प्राइसिंग जैसी अनिश्चितताओं से राहत मिली है।

    अहमदाबाद रिक्शा चालक एकता यूनियन के प्रतिनिधियों के अनुसार, इस मॉडल ने ड्राइवरों के आत्मसम्मान और आर्थिक स्थिति दोनों को मजबूत किया है। आवेदन प्रक्रिया भी सरल बताई जा रही है, जिसमें 12 घंटे के भीतर अप्रूवल मिलने का दावा किया गया है।

    कंपनी ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए गुजरात पुलिस के साथ SOS इंटीग्रेशन लागू किया है, जिससे आपात स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। इसके अलावा सोमनाथ और द्वारकाधीश जैसे तीर्थ स्थलों के लिए विशेष रूट कनेक्टिविटी भी शुरू की गई है।

    भारत टैक्सी ने अब तक 10,000 से अधिक ड्राइवरों को डिजिटल और सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण दिया है और मेट्रो, एयरपोर्ट तथा ट्रांजिट सिस्टम के साथ इंटीग्रेशन के जरिए अपने नेटवर्क को लगातार विस्तार दे रही है।

  • छत्तीसगढ़ की शान तीजन बाई की तबीयत नाजुक, एम्स रायपुर में डॉक्टरों की निगरानी

    छत्तीसगढ़ की शान तीजन बाई की तबीयत नाजुक, एम्स रायपुर में डॉक्टरों की निगरानी


    नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध पंडवानी लोक गायिका और पद्मविभूषण सम्मानित डॉ. तीजन बाई की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया है। गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें तत्काल इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में स्थानांतरित किया है।

    परिवार के अनुसार, बुधवार देर रात उनकी स्थिति अधिक बिगड़ने पर उन्हें एम्स लाया गया, जहां प्रारंभिक जांच में फेफड़ों में पानी भरने (पल्मोनरी कंजेशन) और निमोनिया की पुष्टि हुई। साथ ही उनका ब्लड प्रेशर भी काफी कम पाया गया, जिससे उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई थी।

    तीजन बाई की बहू वेणु देशमुख ने बताया कि समय पर एम्बुलेंस और चिकित्सा सहायता मिलने से अब उनकी स्थिति में पहले की तुलना में सुधार हुआ है और वे खतरे से बाहर बताई जा रही हैं। डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर बनाए हुए है।

    अस्पताल प्रशासन के अनुसार, उम्र और पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थितियों को देखते हुए तीजन बाई का उपचार बेहद सतर्कता के साथ किया जा रहा है।

    छत्तीसगढ़ की इस महान लोक कलाकार को देश-विदेश में पंडवानी गायन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय जाता है। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी विशिष्ट शैली में प्रस्तुत कर इस लोककला को नई पहचान दी है।

    तीजन बाई ने 1980 में कई देशों की सांस्कृतिक राजदूत के रूप में यात्राएं कीं, जिनमें इंग्लैंड, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, टर्की, माल्टा, साइप्रस, रोमानिया और मॉरीशस शामिल हैं। उन्हें 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और 2019 में पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था।

    उनकी तबीयत बिगड़ने की खबर से उनके प्रशंसकों में चिंता का माहौल है और देशभर से उनके जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं की जा रही हैं।

  • SAI Recruitment 2026: 100 असिस्टेंट कोच पदों पर वैकेंसी, जानें योग्यता और आवेदन प्रक्रिया

    SAI Recruitment 2026: 100 असिस्टेंट कोच पदों पर वैकेंसी, जानें योग्यता और आवेदन प्रक्रिया


    नई दिल्ली। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने बड़ा अवसर जारी किया है। संस्थान ने असिस्टेंट कोच के कुल 100 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति (डेप्यूटेशन) के आधार पर की जाएगी।

    जारी अधिसूचना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 26 मई 2026 से शुरू हो चुकी है और इच्छुक उम्मीदवार 27 जून 2026 शाम 5 बजे तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन ऑफलाइन माध्यम से भेजना होगा।

    इन पदों पर चयनित उम्मीदवारों की नियुक्ति प्रारंभ में 3 वर्षों के लिए की जाएगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर अधिकतम 7 वर्षों तक बढ़ाया जा सकता है।

    योग्यता के रूप में उम्मीदवार के पास एसएआई/एनएस-एनआईएस पटियाला से कोचिंग डिप्लोमा या समकक्ष योग्यता होनी चाहिए। इसके अलावा ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों या विश्व चैंपियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी, द्रोणाचार्य पुरस्कार विजेता या संबंधित खेल कोटा के अंतर्गत योग्य उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं।

    सरकारी विभागों में कार्यरत वे अधिकारी भी पात्र हैं जिनके पास समान पद पर अनुभव या लेवल-5 में कम से कम 6 वर्ष की नियमित सेवा हो।

    अधिकतम आयु सीमा 56 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसकी गणना 26 मई 2026 के आधार पर की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में पात्रता जांच, इंटरव्यू और मेरिट सूची शामिल होगी। चयनित उम्मीदवारों को 35,400 रुपये से लेकर 1,12,400 रुपये प्रतिमाह तक वेतन दिया जाएगा, साथ ही अन्य भत्तों का लाभ भी मिलेगा।

    आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को SAI की आधिकारिक वेबसाइट से आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर उसे भरना होगा। सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ फॉर्म को निर्धारित पते पर डाक के माध्यम से भेजना अनिवार्य है।

  • सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी

    सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’, मुर्मु ने कहा– जनता के साथ भरोसा बढ़ाना जरूरी


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को सिक्किम की राजधानी गंगटोक में सिक्किम पुलिस को ‘राष्ट्रपति का निशान’ प्रदान किया। इस अवसर पर उन्होंने पुलिस बल से जुड़े सभी वर्तमान और पूर्व अधिकारियों व कर्मियों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की।

    राष्ट्रपति ने कहा कि सिक्किम पुलिस ने वर्ष 1897 में अपनी स्थापना के बाद से राज्य में शांति, सुरक्षा और न्याय बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने इसे एक अनुशासित और जनसेवा से जुड़ा हुआ पुलिस बल बताया।

    अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत की पुलिस व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए कहा कि औपनिवेशिक काल की व्यवस्था में पुलिस का मुख्य उद्देश्य जनता की सेवा नहीं बल्कि नियंत्रण और आदेशों का सख्ती से पालन कराना था। उन्होंने कहा कि इसी कारण पुलिस व्यवस्था में एक समय ‘गुलामी की मानसिकता’ विकसित हो गई थी, जिसे अब बदलने की आवश्यकता है।

    राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाने के लिए इस सोच से पूरी तरह मुक्त होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण हैं, ताकि नागरिकों का भरोसा मजबूत हो सके।

    उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को अधिक नागरिक-हितैषी बनना चाहिए, जिससे लोग बिना भय के अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील व्यवहार को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने बल दिया।

    राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि पुलिस को केवल कानून लागू करने वाली संस्था नहीं, बल्कि समाज की सहयोगी और मार्गदर्शक की भूमिका निभानी चाहिए। इससे पुलिस और जनता के बीच विश्वास बढ़ेगा और समाज में सुरक्षा तथा कानून के प्रति सम्मान मजबूत होगा।

    उन्होंने सिक्किम पुलिस की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में शांति और भाईचारे को बनाए रखने में इस बल का योगदान उल्लेखनीय रहा है। सिक्किम पुलिस ने अपने व्यवहार और पेशेवर कार्यशैली के जरिए जनता का विश्वास और सम्मान अर्जित किया है।

  • देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, विकास कार्यों पर लिया मार्गदर्शन

    देवेंद्र फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से की मुलाकात, विकास कार्यों पर लिया मार्गदर्शन


    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए दी गई, जिसमें दोनों नेताओं की तस्वीर भी साझा की गई।

    PMO ने अपने पोस्ट में बताया कि मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रधानमंत्री मोदी से शिष्टाचार भेंट की। वहीं, मुख्यमंत्री ने भी इस मुलाकात को महाराष्ट्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया और इसे प्रेरणादायक अनुभव कहा।

    मुलाकात के बाद सीएम फडणवीस ने ‘एक्स’ पर लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को महाराष्ट्र में चल रहे विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी दी। साथ ही राज्य के विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर प्रधानमंत्री का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

    फडणवीस ने कहा कि प्रधानमंत्री से हर मुलाकात उन्हें नई ऊर्जा और सकारात्मक दिशा देती है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    हालांकि, राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस मुलाकात को केवल औपचारिक नहीं माना जा रहा है। चर्चा है कि बैठक में महाराष्ट्र के विकास कार्यों के अलावा किसानों से जुड़े मुद्दों, विशेषकर प्याज उत्पादक किसानों की स्थिति और सहकारी चीनी उद्योग से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई।

    इससे पहले मुख्यमंत्री फडणवीस ने नई दिल्ली में स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर की जयंती के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी थी।

    यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब महाराष्ट्र में कई विकास परियोजनाओं और कृषि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर केंद्र और राज्य के बीच समन्वय की आवश्यकता मानी जा रही है।