Blog

  • 20 साल बाद ईरान पर बड़ा एक्शन, IAEA ने परमाणु मामला UN सुरक्षा परिषद को भेजा

    20 साल बाद ईरान पर बड़ा एक्शन, IAEA ने परमाणु मामला UN सुरक्षा परिषद को भेजा


    नई दिल्ली। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने करीब 20 साल बाद पहली बार ईरान के मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक पहुंचाने का फैसला किया है। ईरान पर आरोप है कि उसने उन स्थानों पर मिले यूरेनियम के निशानों की जांच में पर्याप्त सहयोग नहीं किया, जिन्हें उसने परमाणु गतिविधियों के लिए घोषित नहीं किया था।

    पश्चिमी देशों के अधिकारियों को आशंका है कि इन स्थलों से मिले यूरेनियम के निशान इस बात का संकेत दे सकते हैं कि 2003 तक ईरान में एक गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम चल रहा था। हालांकि, ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता रहा है। उसका कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा।

    सुरक्षा परिषद पहुंचने से क्या होगा?
    ईरान का मामला सुरक्षा परिषद में जाने के बाद उस पर नए प्रतिबंध लगाने या उसकी संपत्तियां जब्त करने जैसे कदमों की संभावना बन सकती है। हालांकि, तत्काल कड़े दंडात्मक कदम उठाए जाने की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि ईरान के प्रमुख सहयोगी रूस और चीन सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति रखते हैं।

    प्रस्ताव के पक्ष में 23 देशों ने वोट किया
    वियना स्थित IAEA मुख्यालय में बुधवार को 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में प्रस्ताव पर मतदान हुआ। राजनयिकों के मुताबिक 23 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। चीन, रूस और नाइजर ने इसका विरोध किया, जबकि आठ देशों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। एक देश बकाया राशि के कारण वोट नहीं कर सका। यह प्रस्ताव अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने पेश किया था।

    जून 2025 से चल रही थी तैयारी
    ईरान को लेकर यह कूटनीतिक कदम जून 2025 से ही विचाराधीन था। उस समय IAEA बोर्ड ने पाया था कि जांच में सहयोग नहीं करने के कारण ईरान परमाणु प्रसार रोकने से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियों का पालन नहीं कर रहा है।

    अब मामला सुरक्षा परिषद में भेजे जाने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ा हुआ है। कॉपी के मुताबिक, इस सप्ताह अमेरिका ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को नष्ट किया और इसके जवाब में तेहरान ने जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया। इसे छह महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष में तनाव बढ़ने के नए दौर के तौर पर देखा जा रहा है।

    IAEA ने ईरान से फिर सहयोग मांगा
    प्रस्ताव के मसौदे में IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रोसी से कहा गया है कि वे प्रस्ताव और पहले पारित प्रस्तावों की जानकारी IAEA के सभी सदस्यों के साथ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा को दें। प्रस्ताव में ईरान से पिछले समझौतों के अनुपालन में हुई कमियों को जल्द से जल्द दूर करने और IAEA की जरूरी शर्तों को पूरा करने की मांग दोहराई गई है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान की परमाणु सामग्री का गलत इस्तेमाल न हो।

    इजरायल-अमेरिका के हमलों के बाद निरीक्षण रुका
    जून 2025 में 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान इजरायल और अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले किए थे। इसके बाद ईरान ने हमलों से प्रभावित परमाणु स्थलों तक IAEA निरीक्षकों की पहुंच रोक दी। बमबारी के बाद से IAEA ईरान के पास मौजूद उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार की स्थिति की भी पूरी तरह पुष्टि नहीं कर पाया है।

    ईरान के पास 60% तक संवर्धित 440.9 किलो यूरेनियम
    IAEA के अनुसार, ईरान के पास 60% शुद्धता तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम (972 पाउंड) यूरेनियम का भंडार है। यह हथियार बनाने के लिए जरूरी करीब 90% शुद्धता के स्तर से तकनीकी रूप से ज्यादा दूर नहीं है।

    IAEA प्रमुख राफेल ग्रोसी ने पिछले साल एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को हथियार बनाने की दिशा में ले जाने का फैसला करता है, तो इस मात्रा से 10 परमाणु बम तक बनाए जा सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि इसका मतलब यह नहीं है कि ईरान के पास फिलहाल कोई परमाणु हथियार मौजूद है।

  • ‘आप लड़िए, हम उम्मीदवार नहीं उतारेंगे’: नंदीग्राम से ममता बनर्जी को TMC के बागी गुट की खुली चुनौती

    ‘आप लड़िए, हम उम्मीदवार नहीं उतारेंगे’: नंदीग्राम से ममता बनर्जी को TMC के बागी गुट की खुली चुनौती


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रही सियासी लड़ाई अब नंदीग्राम उपचुनाव तक पहुंच गई है। टीएमसी के बागी खेमे ने बुधवार को पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी को नंदीग्राम से चुनाव लड़ने की खुली चुनौती दी। बागी गुट का कहना है कि यदि ममता बनर्जी इस सीट से मैदान में उतरती हैं तो वह उनके खिलाफ अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा।

    पश्चिम बंगाल विधानसभा के बाहर बागी टीएमसी के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा कि उनका गुट चाहता है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम से चुनाव लड़ें, जीतें और विधानसभा में वापस लौटें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ममता के सामने उनका गुट प्रत्याशी नहीं उतारेगा।

    ‘भाजपा विरोधी वोट नहीं बंटने देंगे’

    बागी टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला भाजपा विरोधी वोटों को विभाजित होने से रोकने के लिए लिया गया है।

    मदन मित्रा ने कहा कि अगर उनका गुट भाजपा की ‘बी टीम’ होता तो विपक्षी वोटों को बांटने के लिए दो के बजाय तीन या चार उम्मीदवार मैदान में उतार सकता था। उनके मुताबिक नंदीग्राम में ममता को वॉकओवर देने का फैसला यह दिखाएगा कि उनका गुट भाजपा के इशारे पर काम नहीं कर रहा है।

    नंदीग्राम में पहले हार चुकी हैं ममता

    नंदीग्राम ममता बनर्जी के राजनीतिक सफर में बेहद महत्वपूर्ण सीट रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने तत्कालीन करीबी सहयोगी और भाजपा उम्मीदवार शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ यहां से चुनाव लड़ा था। हालांकि, उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

    2026 के विधानसभा चुनाव में भी शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की। उन्होंने ममता बनर्जी को उनके गृह क्षेत्र भवानीपुर में भी हराया। इस चुनाव के बाद शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम विधानसभा सीट खाली कर दी। इसी वजह से अब नंदीग्राम में उपचुनाव कराया जा रहा है।

    पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर भी घमासान

    बागी गुट का यह ऐलान ऐसे समय हुआ है, जब टीएमसी के दोनों धड़ों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अधिकार को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने अभी फैसला नहीं किया है कि आधिकारिक नाम और चुनाव चिन्ह किस गुट को मिलेगा।

    रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला बागी गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर अपना दावा कर रहा है। उसका कहना है कि अगर नामांकन की अंतिम तारीख से पहले चुनाव आयोग उसके पक्ष में फैसला नहीं करता है तो वह निर्दलीय उम्मीदवारों के तौर पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी कर रहा है।

    6 अक्टूबर को नंदीग्राम में वोटिंग

    नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है। बुधवार से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 16 सितंबर है। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 19 सितंबर तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। मतगणना 9 अक्टूबर को होगी।

  • Crude $100 पार: पेट्रोल-डीजल महंगे होने का बढ़ा खतरा, तेल कंपनियों पर बढ़ रहा घाटे का बोझ

    Crude $100 पार: पेट्रोल-डीजल महंगे होने का बढ़ा खतरा, तेल कंपनियों पर बढ़ रहा घाटे का बोझ


    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। बेंचमार्क Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारतीय बास्केट में भी बुधवार को कच्चे तेल की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही। सितंबर का औसत भाव भी 100 डॉलर के पार निकल गया है। हालांकि इसका तत्काल असर घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर नहीं दिखा है, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों पर लागत का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

    पेट्रोल-डीजल बेचने में कंपनियों को घाटा

    महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड के बावजूद सरकारी तेल कंपनियां यानी OMCs घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई जारी रखे हुए हैं। ICRA के मुताबिक सितंबर में अब तक के औसत क्रूड भाव के आधार पर कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹23 प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।

    यानी अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की लागत बढ़ने के बावजूद घरेलू बाजार में ईंधन अपेक्षाकृत कम कीमत पर बिक रहा है। इससे कंपनियों के मार्जिन पर सीधा दबाव पड़ रहा है।

    LPG पर भी करीब ₹200 की अंडर रिकवरी

    OMCs के लिए सिर्फ पेट्रोल-डीजल ही चुनौती नहीं हैं। घरेलू LPG पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ICRA के अनुसार एक LPG सिलिंडर पर करीब ₹200 की अंडर रिकवरी हो रही है।

    अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं तो कंपनियों की कमाई और प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव और बढ़ सकता है। ऐसे में भविष्य में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता खुल सकता है।

    अभी तुरंत दाम बढ़ने की गारंटी नहीं

    फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम तुरंत बढ़ेंगे, यह कहना जल्दबाजी होगी। घरेलू ईंधन की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के भाव से तय नहीं होतीं। सरकार की प्राइसिंग पॉलिसी, टैक्स और तेल कंपनियों के मार्केटिंग मार्जिन की भी इसमें अहम भूमिका होती है।

    मई में सरकार ने चार किस्तों में पेट्रोल की कीमत कुल ₹7.35 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹7.53 प्रति लीटर बढ़ाई थी। इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव रहा है और कंपनियों ने तत्काल उसी अनुपात में घरेलू कीमतों में बदलाव नहीं किया।

    हालांकि, अगर कच्चा तेल लंबे समय तक 100 डॉलर के ऊपर रहता है और OMCs का घाटा लगातार बढ़ता है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का दबाव बन सकता है।

    भारत पर क्यों बढ़ेगा दबाव?

    भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 90% हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है।

    आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत का क्रूड आयात बिल 56.5% बढ़कर 63.4 अरब डॉलर पहुंच गया। खास बात यह रही कि इस दौरान कच्चे तेल के आयात की मात्रा लगभग स्थिर रही। यानी आयात बिल में हुई बड़ी बढ़ोतरी का प्रमुख कारण तेल की ऊंची कीमतें रहीं।

    अगर क्रूड की कीमतें आगे भी ऊंची बनी रहती हैं तो भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ सकता है। इससे रुपए पर दबाव आने की आशंका रहेगी और आगे चलकर महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है।

  • 10 सितंबर को किस्मत देगी साथ या बढ़ेंगी मुश्किलें? मेष से मीन तक जानें धन करियर और प्रेम जीवन का पूरा राशिफल

    10 सितंबर को किस्मत देगी साथ या बढ़ेंगी मुश्किलें? मेष से मीन तक जानें धन करियर और प्रेम जीवन का पूरा राशिफल


    नई दिल्ली । 10 सितंबर 2026 गुरुवार का दिन कई राशि के जातकों के लिए नए अवसर और बदलाव लेकर आ सकता है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आज ग्रहों की स्थिति में महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे जिसका असर व्यक्ति के करियर कारोबार धन परिवार और रिश्तों पर पड़ सकता है। 10 सितंबर को शुक्र वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा जबकि बुध तुला राशि में पहुंचेगा। इन ग्रहों के राशि परिवर्तन को रिश्तों में गहराई संवाद में संतुलन और जीवन की कई पुरानी उलझनों को नए तरीके से देखने का संकेत माना जा रहा है।

    मेष राशि वालों के लिए आज का दिन मेहनत और योजनाओं को आगे बढ़ाने वाला रह सकता है। कार्यक्षेत्र में किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति का सहयोग मिल सकता है और लंबे समय से अटका काम गति पकड़ सकता है। धन के मामले में जल्दबाजी से बचना जरूरी होगा। परिवार में आपकी बात का असर रहेगा लेकिन बोलते समय संयम रखना फायदेमंद रहेगा। वृषभ राशि वालों के लिए दिन भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रह सकता है। मन की स्थिति आपके फैसलों पर असर डाल सकती है इसलिए जरूरी निर्णय लेते समय केवल भावनाओं के बजाय व्यावहारिक पक्ष पर भी ध्यान दें। कारोबार से जुड़े लोगों को लाभ के अवसर मिल सकते हैं।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए आज का दिन सक्रियता और नई दिशा लेकर आ सकता है। जिन फैसलों को लेकर आप काफी समय से असमंजस में थे उनमें स्पष्टता आने के संकेत हैं। करियर में नई जिम्मेदारी या किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत हो सकती है। महत्वपूर्ण काम को टालने के बजाय समय पर पूरा करने की कोशिश करें। बातचीत और संपर्कों से फायदा मिल सकता है। कर्क राशि वालों को आज अपने खर्च और भविष्य की योजनाओं पर विशेष ध्यान देना चाहिए। परिवार से जुड़ा कोई विषय आपको भावुक कर सकता है लेकिन समझदारी से बात करने पर स्थिति संभल सकती है।

    सिंह राशि के लिए दिन मिलाजुला रह सकता है। कामकाज में अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलेगा लेकिन किसी भी बात को प्रतिष्ठा का मुद्दा बनाने से बचना बेहतर होगा। नौकरी करने वालों को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तालमेल बनाकर चलना चाहिए। कन्या राशि वालों के लिए आज का दिन सामान्य से थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। परिवार में किसी गंभीर विषय पर बातचीत हो सकती है। काम की जिम्मेदारियों के बीच तनाव बढ़ सकता है इसलिए एक समय में एक ही काम पर ध्यान देना बेहतर होगा।

    तुला राशि के जातकों के लिए बुध का प्रभाव बातचीत और समझदारी को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। आज किसी पुराने विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने का अवसर मिल सकता है। नौकरी और कारोबार में नई रणनीति बनाने के लिए दिन अच्छा रह सकता है। वृश्चिक राशि वालों के लिए आज रिश्तों और भावनाओं का दिन हो सकता है। ग्रहों की स्थिति आपको पुराने अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती है। शिक्षा और भविष्य की योजनाओं से जुड़े लोगों को सकारात्मक दिशा मिल सकती है।

    धनु राशि वालों के लिए आज सोच को स्पष्ट रखना बेहद जरूरी होगा। जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा और आर्थिक मामलों में पुराने कर्ज या देनदारी को व्यवस्थित करने की दिशा में कदम बढ़ सकता है। हालांकि बेचैनी और जल्दबाजी से बचना होगा। मकर राशि वालों के लिए दिन जिम्मेदारियों से भरा रह सकता है। कामकाज में अनुशासन बनाए रखने से फायदा होगा। आर्थिक मामलों में कोई अवसर सामने आ सकता है लेकिन फैसला लेने से पहले पूरी जानकारी जरूर लें।

    कुंभ राशि के जातकों को आज अपनी योजनाओं पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। किसी नए प्रोजेक्ट या संपर्क से भविष्य में लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि खर्च और निवेश के मामले में सावधानी जरूरी होगी। मीन राशि वालों के लिए आज घर परिवार और मानसिक सुकून महत्वपूर्ण रहेगा। काम के दबाव के बीच खुद को आराम देने का समय निकालना जरूरी होगा। परिवार के किसी सदस्य के साथ बातचीत से मन हल्का हो सकता है।

    कुल मिलाकर 10 सितंबर का दिन कई राशियों के लिए बदलाव आत्ममंथन और नई रणनीति बनाने का संकेत दे रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार आज जल्दबाजी के बजाय धैर्य से फैसले लेना अधिक फायदेमंद रहेगा। ग्रहों की बदलती स्थिति कुछ लोगों को करियर और आर्थिक मामलों में आगे बढ़ने का अवसर दे सकती है जबकि कुछ राशि वालों को रिश्तों और खर्चों के मामले में संयम बरतना होगा। ध्यान रखें कि राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है और इसे निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लेना चाहिए।

  • एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश

    एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फिलहाल मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। बुधवार को सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से बादल छंटे नजर आए और कहीं भी तेज बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन भी भारी बारिश से राहत रहेगी। IMD भोपाल ने गुरुवार को प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। शुक्रवार को उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस समय बारिश कराने वाला कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है। पश्चिमी क्षेत्र में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन जरूर बना हुआ है, लेकिन इसका प्रदेश पर खास असर नहीं पड़ रहा है।

    धूप तेज, कुछ जगह हल्की बारिश के आसार

    सिस्टम कमजोर होने के कारण बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज धूप निकली। भोपाल में भी अचानक बदले मौसम के कारण लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। गुरुवार को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही रहने का अनुमान है। ज्यादातर स्थानों पर धूप रहेगी, हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

    13 सितंबर से पश्चिमी एमपी में बढ़ेगा असर

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश की संभावना कम है। हालांकि 13 सितंबर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दिन पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी अब कम हुई

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा पिछले एक सप्ताह में काफी सुधरा है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 1% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 25% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने रहे। इससे बारिश के आंकड़ों में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी क्षेत्र की स्थिति बेहतर हुई। हालांकि बुधवार तक यहां बारिश सामान्य से करीब 1% कम रही।

    पश्चिमी एमपी के 21 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है। कॉपी में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • तमिलनाडु में नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने की योजना टली, मुख्यमंत्री विजय के विदेश दौरे से बदली शुरुआत की तारीख

    तमिलनाडु में नवजात बच्चों को सोने की अंगूठी देने की योजना टली, मुख्यमंत्री विजय के विदेश दौरे से बदली शुरुआत की तारीख

    नई दिल्ली । तमिलनाडु में नवजात शिशुओं के लिए शुरू की जाने वाली एक खास सरकारी योजना की शुरुआत फिलहाल टाल दी गई है। मुख्यमंत्री विजय थलापति की सरकार ने सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को सोने की अंगूठी देने की योजना बनाई थी। ‘थाइमामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ नाम की इस योजना को पहले 15 सितंबर 2026 से शुरू किया जाना था, लेकिन मुख्यमंत्री विजय के विदेश दौरे के कारण तय कार्यक्रम को आगे बढ़ा दिया गया है।

    सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि योजना को रद्द नहीं किया गया है। इसमें केवल शुरुआत की तारीख में बदलाव किया गया है। योजना की नई तारीख अभी घोषित नहीं की गई है। मुख्यमंत्री के विदेश दौरे को राज्य में नए निवेश लाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण बताया गया है। इसी वजह से वह 15 सितंबर को तमिलनाडु में मौजूद नहीं रहेंगे और योजना के निर्धारित कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे।

    इस योजना का लाभ 22 जून 2026 यानी मुख्यमंत्री विजय के जन्मदिन से सरकारी अस्पतालों में पैदा हुए नवजात बच्चों को देने का फैसला किया गया है। योजना के तहत पात्र बच्चों को एक ग्राम वजन की हॉलमार्क सोने की अंगूठी दी जाएगी। सरकार के अनुसार इस पहल का उद्देश्य नवजात बच्चों वाले परिवारों को सहायता देना है।

    इसके साथ ही योजना के पीछे सरकारी अस्पतालों को लेकर लोगों का भरोसा बढ़ाने का उद्देश्य भी बताया गया है। सरकार चाहती है कि अधिक संख्या में लोग बच्चों की डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पतालों का इस्तेमाल करें। इस पहल के जरिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करने की कोशिश की जाएगी।

    योजना में तारीख के अलावा किसी अन्य नियम में बदलाव नहीं किया गया है। यानी जिन बच्चों को निर्धारित अवधि के अनुसार योजना का लाभ मिलना है, उनके लिए एक ग्राम हॉलमार्क सोने की अंगूठी देने का प्रावधान पहले की तरह ही रहेगा। कार्यक्रम की नई तारीख तय होने के बाद योजना को उसी व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ाया जाएगा।

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री के. जी अरुणराज ने योजना के टलने की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विजय विदेश यात्रा पर जाने वाले हैं और यह दौरा राज्य में नए निवेश आकर्षित करने के लिए जरूरी है। इसी कारण 15 सितंबर को योजना की शुरुआत संभव नहीं होगी।

    मुख्यमंत्री के विदेश दौरे और योजना के कार्यक्रम की तारीख के बीच पैदा हुई स्थिति के कारण अब राज्य सरकार को नई तारीख तय करनी होगी। हालांकि अभी तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि कार्यक्रम किस दिन आयोजित किया जाएगा। सरकार ने यह जरूर साफ किया है कि योजना की मूल व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

    इस योजना को लेकर नवजात बच्चों के परिवारों के बीच भी उम्मीद बनी हुई है, क्योंकि पात्र बच्चों को एक ग्राम की हॉलमार्क सोने की अंगूठी देने का प्रावधान पहले से तय है। अब निगाहें सरकार की ओर से घोषित होने वाली नई शुरुआत की तारीख पर रहेंगी।

  • कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले KMC की बड़ी कार्रवाई, 592 प्रतिष्ठानों की जांच में 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में दुर्गा पूजा से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर नगर निगम ने बड़े स्तर पर कार्रवाई की है। कोलकाता नगर निगम की टीम ने शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े 592 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान कई जगहों पर खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, लाइसेंस और रसोई की स्वच्छता से संबंधित अनियमितताएं सामने आईं। कार्रवाई के बाद 40 रेस्टोरेंट और स्वीट शॉप के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।

    नगर निगम प्रशासन के अनुसार यह अभियान ‘फूड सेफ्टी वीक’ के तहत चलाया गया। इसका उद्देश्य दुर्गा पूजा से पहले शहर में खाद्य प्रतिष्ठानों की व्यवस्था और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच करना था। अभियान के दायरे में होटल, क्लब, रेस्टोरेंट, बाजार और बाजारों में संचालित अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों को शामिल किया गया। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान खाद्य सामग्री के भंडारण, निर्माण, बिक्री, गुणवत्ता और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई जैसे कई पहलुओं की जांच की।

    निरीक्षण के दौरान करीब 1,224 किलोग्राम खाद्य सामग्री को नष्ट किया गया। अधिकारियों को कई स्थानों पर ऐसी खाद्य सामग्री मिली, जिसे खाने के लिए उपयुक्त नहीं माना गया। कुछ प्रतिष्ठानों में भंडारित छेना में फफूंद पाई गई, जबकि कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में खराब मांस बरामद हुआ। एक बड़े स्वीट शॉप के रेफ्रिजरेटर के अंदर कॉकरोच मिलने की बात भी सामने आई। इन स्थितियों को देखते हुए संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    जांच में लाइसेंस से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आईं। कुछ प्रतिष्ठानों के पास खाद्य सामग्री बेचने के लिए रिटेल लाइसेंस मौजूद था, लेकिन जरूरी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस नहीं था। इसका मतलब था कि संबंधित प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की बिक्री के लिए अधिकृत थे, लेकिन उसके निर्माण से जुड़ी आवश्यक अनुमति उनके पास नहीं थी। अधिकारियों ने ऐसी कमियों को भी निरीक्षण और कार्रवाई का हिस्सा बनाया।

    नगर निगम प्रशासन की ओर से बताया गया कि निलंबित किए गए प्रतिष्ठानों को नियमों का पालन करना होगा। यदि संबंधित प्रतिष्ठान आवश्यक मानकों को पूरा करते हैं और कमियों को दूर करते हैं, तो उनके लाइसेंस की स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी। कार्रवाई का उद्देश्य खाद्य कारोबारियों को नियमों के पालन के लिए जिम्मेदार बनाना भी है।

    नगर निगम की म्यूनिसिपल एडमिनिस्ट्रेटर स्मिता पांडे ने कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि पहले लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई नियमित रूप से नहीं की जाती थी, लेकिन अब विभाग को ऐसी कार्रवाई करने की पूरी छूट है। उनके अनुसार शहर में खाद्य कारोबार से जुड़े लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों को अभियान में शामिल किया गया।

    दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता में बड़ी संख्या में लोग रेस्टोरेंट, मिठाई की दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों का रुख करते हैं। ऐसे में त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा को लेकर की गई यह कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नगर निगम को उम्मीद है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठान खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, भंडारण और रसोई की स्वच्छता को लेकर अधिक सावधानी बरतेंगे।

  • भारत से हजारों किलोमीटर दूर ज्वालामुखी के किनारे 700 साल पुरानी गणेश प्रतिमा, इंडोनेशिया में आज भी निभाई जाती है अनोखी आस्था

    भारत से हजारों किलोमीटर दूर ज्वालामुखी के किनारे 700 साल पुरानी गणेश प्रतिमा, इंडोनेशिया में आज भी निभाई जाती है अनोखी आस्था

    नई दिल्ली । गणेश चतुर्थी के अवसर पर भारत में भगवान गणेश की भक्ति का रंग दिखाई देता है, लेकिन गणपति बप्पा की आस्था केवल भारत तक सीमित नहीं है। भारत से हजारों किलोमीटर दूर इंडोनेशिया में भी भगवान गणेश को ज्ञान, बुद्धि और समृद्धि का प्रतीक मानकर पूजा जाता है। पूर्वी जावा में स्थित माउंट ब्रोमो पर गणेश जी की एक ऐसी प्रतिमा विराजमान है, जिसे स्थानीय लोग सदियों पुरानी आस्था और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में देखते हैं।

    माउंट ब्रोमो इंडोनेशिया के प्रमुख सक्रिय ज्वालामुखियों में शामिल है। प्राकृतिक सुंदरता, विशाल रेत के मैदान और सूर्योदय के आकर्षक दृश्य के लिए प्रसिद्ध यह क्षेत्र धार्मिक मान्यताओं के कारण भी विशेष महत्व रखता है। इसी ज्वालामुखी के किनारे भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह प्रतिमा करीब 700 साल पुरानी है और इसे क्षेत्र में रहने वाले तेंगर समुदाय के पूर्वजों ने स्थापित किया था।

    तेंगर समुदाय की धार्मिक परंपराओं में हिंदू मान्यताओं की गहरी छाप दिखाई देती है। पीढ़ियों से चली आ रही इस आस्था में भगवान गणेश को विशेष स्थान प्राप्त है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि गणेश जी आसपास के गांवों को ज्वालामुखी के खतरे से बचाते हैं। इसी वजह से प्रतिमा को केवल पूजा का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र के संरक्षक के रूप में भी देखा जाता है।

    माउंट ब्रोमो पर पहुंचने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश को फूल, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करते हैं। लोग इलाके की खुशहाली और सुरक्षा की कामना करते हैं। ज्वालामुखी के सक्रिय होने के बावजूद उसके समीप गणेश प्रतिमा का मौजूद होना स्थानीय धार्मिक विश्वास को और खास बनाता है। यह आस्था लंबे समय से समुदाय की परंपराओं का हिस्सा बनी हुई है।

    इंडोनेशिया में हिंदू संस्कृति की जड़ें काफी पुरानी हैं। आज देश की कुल आबादी में हिंदुओं की संख्या सीमित है, लेकिन बाली और जावा के कुछ हिस्सों में हिंदू धार्मिक परंपराओं, मंदिरों और देवी-देवताओं की पूजा का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। तेंगर समुदाय भी इसी ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने वाले समुदायों में शामिल है।

    माउंट ब्रोमो का क्षेत्र धार्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय हिंदू मान्यताओं में ब्रह्मा, विष्णु और शिव सहित कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। माउंट ब्रोमो करीब 800 वर्ग किलोमीटर में फैले क्षेत्र का हिस्सा है और इसकी ऊंचाई समुद्र तल से लगभग 2,392 मीटर बताई जाती है। यहां का ज्वालामुखीय परिदृश्य और प्राकृतिक वातावरण बड़ी संख्या में लोगों को आकर्षित करता है।

    इंडोनेशिया प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर क्षेत्र में स्थित है। इस वजह से यहां भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां लगातार देखी जाती हैं। ऐसे प्राकृतिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में भगवान गणेश की प्रतिमा का सदियों से मौजूद रहना स्थानीय लोगों के लिए धार्मिक विश्वास का महत्वपूर्ण प्रतीक है। तेंगर समुदाय के लिए यह प्रतिमा पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा, आस्था और संरक्षण की भावना को दर्शाती है।

  • सिंध के बंटवारे के प्रस्ताव पर भड़के बिलावल भुट्टो, मोहसिन नकवी को संसद में मुद्दा उठाने की दी चुनौती

    सिंध के बंटवारे के प्रस्ताव पर भड़के बिलावल भुट्टो, मोहसिन नकवी को संसद में मुद्दा उठाने की दी चुनौती


    नई दिल्ली ।
    पाकिस्तान में मौजूदा प्रांतों के विभाजन को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर सबसे तीखी प्रतिक्रिया सिंध से सामने आई है, जहां पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार है। पीपीपी के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने प्रांतों के बंटवारे की पैरवी कर रहे पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी पर निशाना साधते हुए उन्हें संसद में आकर इस मुद्दे पर बात रखने की चुनौती दी है।

    बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा कि मोहसिन नकवी को प्रांतों के विभाजन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर किसी बिजनेस फोरम में चर्चा करने के बजाय देश की संसद में अपनी बात रखनी चाहिए। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। बिलावल ने नकवी को सलाह देते हुए स्पष्ट किया कि यदि सरकार प्रांतों के पुनर्गठन का प्रस्ताव आगे बढ़ाना चाहती है, तो उसे संसद के सामने रखना चाहिए।

    बिलावल अपने पिता और पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ लंदन पहुंचे हैं। इसी दौरान उन्होंने प्रांतों के विभाजन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। मोहसिन नकवी अलग-अलग मंचों पर प्रांतों के बंटवारे के विचार के समर्थन में सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस प्रस्ताव को लेकर पाकिस्तान की राजनीति में अलग-अलग दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।

    पाकिस्तान में मौजूदा चार प्रांतों को विभाजित करके 12 से 15 नए छोटे प्रांत बनाए जाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इस योजना के तहत पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे चार बड़े प्रांतों को छोटे हिस्सों में बांटने का विचार है। प्रस्ताव के अनुसार प्रत्येक बड़े प्रांत को तीन छोटे हिस्सों में विभाजित किया जा सकता है, जिससे देश में कुल 12 से 15 नए प्रांत बनाए जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है।

    इसी प्रस्ताव को लेकर शहबाज शरीफ सरकार के कई मंत्री देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार और पाकिस्तानी सेना की ओर से इसके पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि मौजूदा प्रांत बहुत बड़े और केंद्रीयकृत हो गए हैं। उनका कहना है कि बड़े प्रांतों के कारण स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं का वितरण प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रहा है।

    प्रस्ताव के समर्थकों के अनुसार छोटे प्रांत बनने से प्रशासन को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इस विचार का राजनीतिक विरोध भी हो रहा है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम जैसी पार्टियां प्रांतों के विभाजन के प्रस्ताव के खिलाफ हैं।

    पीपीपी के विरोध के पीछे सिंध में उसके राजनीतिक आधार को लेकर चिंता भी बताई जा रही है। पार्टी को आशंका है कि सिंध के विभाजन से वहां उसका राजनीतिक आधार कमजोर हो सकता है। इसी वजह से बिलावल भुट्टो जरदारी ने इस प्रस्ताव पर खुलकर आपत्ति जताई है और इसे संसद में चर्चा के लिए लाने की बात कही है। सिंध के विभाजन को लेकर उनका रुख पाकिस्तान में चल रही प्रांतों के पुनर्गठन की बहस में महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आया है।

  • जीएफएफ 2026 में समीर निगम ने वित्तीय समावेशन के अगले दशक का विजन रखा, डिजिटल पहुंच बढ़ाने की रणनीति बताई

    जीएफएफ 2026 में समीर निगम ने वित्तीय समावेशन के अगले दशक का विजन रखा, डिजिटल पहुंच बढ़ाने की रणनीति बताई

    नई दिल्ली । फोनपे ने बुधवार को ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में अगले दशक के लिए अपने विजन को सामने रखा। कंपनी के संस्थापक और सीईओ समीर निगम ने मुख्य संबोधन में देशभर के लोगों, परिवारों और कारोबारों के लिए डिजिटल प्रगति को आगे बढ़ाने की रणनीतिक रूपरेखा साझा की। यह प्रस्तुति कंपनी की एक दशक लंबी तकनीकी नवाचार और बड़े स्तर पर विस्तार की यात्रा पर आधारित रही।

    सत्र की शुरुआत में समीर निगम ने फोनपे के मूल दर्शन और समावेशी विकास पर कंपनी के फोकस को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति का आकलन केवल इस आधार पर नहीं होना चाहिए कि शीर्ष 10 प्रतिशत लोग कितनी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि कहीं कोई पीछे तो नहीं छूट रहा। उनके मुताबिक फोनपे ने पिछले एक दशक में भारत की प्रगति को दिशा देने वाले तकनीकी अग्रणी के रूप में काम किया है और उसके पूरे इकोसिस्टम के उत्पादों को प्रगति की राह में आने वाली बाधाओं को कम करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

    समीर ने कहा कि वास्तविक वित्तीय समावेशन अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक वर्गों के लिए अलग उत्पाद तैयार करने तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार जरूरी यह है कि ऐसा सिस्टम बनाया जाए, जो हर भारतीय की जरूरत के अनुरूप लचीले तरीके से काम कर सके।

    उन्होंने बताया कि फोनपे ने एनपीसीआई के साथ मिलकर उन बाधाओं को व्यवस्थित रूप से दूर करने पर काम किया है, जिनके कारण लंबे समय से लोग डिजिटल अर्थव्यवस्था से बाहर रहे। इनमें स्मार्टफोन, बैंक खाते और सीमाओं से संबंधित अड़चनें शामिल हैं। हार्डवेयर से जुड़ी समस्या पर उन्होंने यूपीआई 123पे के विस्तार का उल्लेख किया। उनके मुताबिक 20 करोड़ से अधिक फीचर फोन यूजर्स डिजिटल अर्थव्यवस्था से बाहर थे। इंटरनेट के बिना एसएमएस, आईवीआर, मिस्ड कॉल और वॉयस तकनीक के जरिए यह सिस्टम यूपीआई की सुविधाएं फीचर फोन तक पहुंचाता है। प्रमुख कंपनियों के साथ साझेदारी में अब तक आठ लाख से अधिक ऐसे सक्षम डिवाइस भेजे जा चुके हैं।

    उन्होंने यूपीआई सर्किल का भी उल्लेख किया, जिसके जरिए मुख्य अकाउंट धारक अपने आश्रितों को सुरक्षित तरीके से खर्च करने की अनुमति दे सकते हैं। सीमा से जुड़ी बाधाओं को कम करने के लिए सिंगापुर, यूएई, फ्रांस और नेपाल में यात्रियों के लिए यूपीआई का विस्तार किया गया है। एनआरई और एनआरओ खातों के माध्यम से 3.5 करोड़ से अधिक एनआरआई के लिए डिजिटल भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

    धन और बचत को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए समीर ने ‘सैशेकरण की विचारधारा’ पेश की। इसके तहत बड़े वित्तीय निवेश को छोटी रोजमर्रा की आदतों में बदलने पर जोर है। फोनपे डेली एफडी के जरिए 100 रुपये प्रतिदिन से बैंक स्तर की एफडी शुरू की जा सकती है। डेली गोल्ड, सिल्वर और म्यूचुअल फंड एसआईपी की शुरुआत 10 रुपये से होती है।

    निवेश संबंधी मार्गदर्शन के लिए उन्होंने सीआरआईएसपी का जिक्र किया, जो रियल-टाइम बाजार की जानकारी उपलब्ध कराता है। उन्होंने बताया कि यह हाई नेटवर्थ यूजर्स की जरूरतों के अनुसार एकमुश्त निवेश और एफएंडओ ट्रेडिंग तक विस्तार कर सकता है।

    क्रेडिट की पहुंच बढ़ाने को लेकर समीर ने बताया कि फोनपे का एआई आधारित अंडरराइटिंग सिस्टम 2.5 मिनट में लोन वितरण संभव बना रहा है। उन्होंने कहा कि रोजाना के सेटलमेंट इतिहास को क्रेडिट स्कोर के तौर पर इस्तेमाल करते हुए ऑटोमेटेड डेली-रिपेमेंट मर्चेंट लोन के जरिए उन लोगों तक भी क्रेडिट पहुंचाया जा रहा है, जिनका पारंपरिक क्रेडिट स्कोर नहीं है। उन्होंने विश क्रेडिट कार्ड का भी उल्लेख किया, जो पहली बार कर्ज लेने वालों को साधारण एफडी के जरिए क्रेडिट हिस्ट्री बनाने में मदद करता है। एसबीआई और एचडीएफसी के साथ साझेदारी में यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

    मर्चेंट इकोसिस्टम के लिए फोनपे बिजनेस ऐप को नए रूप में पेश किया गया है। इसमें हाइपरलोकल ऑनलाइन विज्ञापन, व्यक्तिगत बाजार जानकारी और बिना कोडिंग पेमेंट सेटअप की सुविधा शामिल है। स्मार्टकनेक्ट, स्मार्टस्टोर और फोनपे पेमेंट गेटवे के साथ डेटा आधारित सीआरएम, लॉयल्टी इंजन, स्मार्ट स्पीकर और एआई ऑडियो अलर्ट जैसी सुविधाएं भी इकोसिस्टम का हिस्सा हैं।

    सत्र के अंत में समीर ने फोनपे प्लस प्रो पेश किया। यह हाइपरलोकल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म हर महीने होने वाले 11 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन से डेटा प्राप्त करता है और 40 वर्ग मीटर तक के छोटे भौगोलिक क्षेत्र के स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराता है। इसका उद्देश्य कारोबारियों और नीति निर्माताओं को रणनीतिक विकास संबंधी फैसलों में मदद करना है।