Blog

  • जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर

    जेकेआरएलएम की पहल से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं उद्यमी, स्वयं सहायता समूहों के जरिए रोजगार और आय के बढ़े अवसर


    नई दिल्ली ।
    जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। अवंतीपोरा में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने मिशन के सहयोग से फूड सर्विस एंटरप्राइज स्थापित कर यह साबित किया है कि उचित प्रशिक्षण, संसाधन और संस्थागत सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं सफल उद्यम खड़ा कर सकती हैं। इस पहल के जरिए महिलाओं को सम्मानजनक आय का साधन मिलने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं।

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को जम्मू-कश्मीर में जम्मू-कश्मीर ग्रामीण आजीविका मिशन यानी जेकेआरएलएम के नाम से लागू किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है। अवंतीपोरा में शुरू किया गया फूड सर्विस उद्यम इसी प्रयास का एक उदाहरण है, जहां महिलाओं ने आजीविका के पारंपरिक साधनों से आगे बढ़कर कारोबार की दिशा में कदम रखा है।

    ग्रामीण विकास विभाग के सचिव एजाज असद ने बताया कि जेकेआरएलएम को ‘उम्मीद’ के नाम से भी जाना जाता है और इस पहल ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि पुलवामा जिले में फूड सर्विस एंटरप्राइज शुरू किया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय संसाधन संगठन ‘कुडुम्बश्री’ के साथ समझौता किया गया है। कुडुम्बश्री को फूड सर्विस से जुड़े उद्यमों को स्थापित करने और संचालित करने का अनुभव है।

    अधिकारियों के अनुसार पुलवामा सहित जम्मू-कश्मीर के 12 अन्य जिलों में भी इस तरह के उद्यम शुरू किए जा चुके हैं। योजना का लक्ष्य आने वाले समय में प्रदेश के सभी 20 जिलों तक इस मॉडल का विस्तार करना है। इन उद्यमों की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दी जाएगी। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल समूह आधारित गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें स्थायी आय और कारोबार के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ सकें।

    जेकेआरएलएम की महिला अधिकारी शाबरा शर्मा ने बताया कि मिशन का मुख्य उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। अवंतीपोरा में स्थापित फूड सर्विस एंटरप्राइज इसी सोच के तहत विकसित किया गया है। महिलाओं को उद्यम संचालन से जोड़कर उन्हें व्यावसायिक अनुभव हासिल करने और अपनी आय बढ़ाने का अवसर दिया जा रहा है।

    ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन की समस्या भी महिलाओं के आर्थिक अवसरों में बाधा बनती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना के तहत जरूरतमंद महिलाओं को वाहनों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में करीब 96 हजार स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लगभग साढ़े आठ लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के जरिए महिलाओं को सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें उद्यमिता की ओर ले जाने का प्रयास किया जा रहा है। अवंतीपोरा का फूड सर्विस उद्यम इसी बदलाव की तस्वीर पेश करता है, जहां ग्रामीण महिलाएं अब केवल आजीविका चलाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने कारोबार को आगे बढ़ाने और दूसरों के लिए रोजगार पैदा करने की दिशा में भी कदम बढ़ा रही हैं।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर 9 अगस्त से कारसेवा, मथुरा में जुटने लगे साधु-संत, पुलिस अलर्ट

    मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा में 9 अगस्त से प्रस्तावित कारसेवा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हेंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में 9 अगस्त को कारसेवा का शंखनाद किया जाएगा। आयोजन से पहले ही देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संतों का मथुरा पहुंचना शुरू हो गया है। कार्यक्रम में 13 अखाड़ों के महंतों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है। आयोजन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन भी सतर्क हो गया है।

    श्रीराम मंदिर में लगे पत्थरों की पहली खेप पहुंची
    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप शुक्रवार देर रात चित्रगुप्त पीठ पहुंच गई। ये पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगाए गए हैं। इसी क्षेत्र के गुलाबी पत्थरों का इस्तेमाल अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज की ओर से इन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। रविवार से शंखनाद कार्यक्रम के लिए पत्थरों को तराशने का काम शुरू किए जाने की तैयारी है।

    5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का दिया गया है ऑर्डर
    स्वामी सच्चिदानंद महाराज के अनुसार, 9 अगस्त को आश्रम से विधिवत कारसेवा की घोषणा की जाएगी। इसके लिए एक बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 13 अखाड़ों के साधु-संतों को आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प लिया गया है। इसके लिए गुलाबी रंग के करीब 5 हजार मीट्रिक टन पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। इनमें से एक खेप शुक्रवार देर रात पहुंच चुकी है।

    अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का ऐलान
    स्वामी सच्चिदानंद ने इससे पहले 4 जुलाई को अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए कारसेवा का ऐलान किया था। इसके बाद 12 जुलाई को उन्होंने हरिद्वार स्थित वात्सल्य गंगा आश्रम में साध्वी ऋतंभरा से मुलाकात कर इस अभियान के लिए समर्थन मांगा था।

    अब 9 अगस्त को चित्रगुप्त पीठ में होने वाले कार्यक्रम पर सभी की नजर है। साधु-संतों के जुटने और कारसेवा के ऐलान को देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ा दी है।

  • पीयूष गोयल बोले- मिथिला मखाना की बढ़ती विदेशी मांग से बिहार के किसानों को मिल रहे आय और रोजगार के नए अवसर

    पीयूष गोयल बोले- मिथिला मखाना की बढ़ती विदेशी मांग से बिहार के किसानों को मिल रहे आय और रोजगार के नए अवसर

    नई दिल्ली । बिहार के प्रसिद्ध जीआई टैग प्राप्त मिथिला मखाना ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को बताया कि बिहार से पहली बार 18 मीट्रिक टन मिथिला मखाना समुद्री मार्ग के जरिए ऑस्ट्रेलिया निर्यात किया गया है। इस उपलब्धि को राज्य के किसानों और कृषि निर्यात क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि विदेशी बाजारों में मिथिला मखाना की बढ़ती मांग से बिहार के किसानों के लिए आय बढ़ाने और नए कारोबारी अवसर पैदा होने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

    पीयूष गोयल ने बताया कि कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के सहयोग से जीआई टैग वाले मिथिला मखाना की खेप ऑस्ट्रेलिया भेजी गई। खास बात यह रही कि निर्यात के लिए मखाना सीधे दरभंगा के किसानों से खरीदा गया। इससे स्थानीय उत्पादकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ने का अवसर मिला। मंत्री के अनुसार, इस पहल में शामिल किसानों को सामान्य बाजार भाव की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत अधिक लाभ प्राप्त हुआ है। इससे मखाना उत्पादन से जुड़े किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं को बल मिला है।

    मिथिला मखाना बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। मिथिला क्षेत्र में उत्पादित यह कृषि उपज अपनी गुणवत्ता, स्वाद और पौष्टिकता के लिए देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों में भी पहचान बना रही है। बदलती खाद्य आदतों के बीच मखाना स्वास्थ्यवर्धक स्नैक के रूप में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। कम तेल में तैयार किए जाने वाले और विभिन्न स्वादों में उपलब्ध मखाने की मांग विशेष रूप से शहरी तथा अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ता बाजार में बढ़ी है।

    ऑस्ट्रेलिया को समुद्री मार्ग से हुआ यह निर्यात ऐसे समय में हुआ है, जब बिहार के मखाना उत्पाद लगातार नए विदेशी बाजारों में पहुंच बना रहे हैं। इससे पहले बिहार से पहली बार समुद्री मार्ग के जरिए कनाडा को भी मखाना निर्यात किया गया था। उस दौरान दरभंगा से सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाना कनाडा भेजा गया था। इस निर्यात को भी कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था।

    विदेशी बाजारों में बढ़ती मांग का असर केवल मखाना किसानों तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। निर्यात बढ़ने से मखाना की सफाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण और मूल्य संवर्धन से जुड़े कारोबार को भी प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे बिहार में कृषि आधारित छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं। यदि अंतरराष्ट्रीय मांग लगातार बनी रहती है तो स्थानीय स्तर पर मखाना प्रसंस्करण केंद्रों और आधुनिक पैकेजिंग सुविधाओं के विस्तार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

    ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे बाजारों में भारतीय मखाने की पहुंच बढ़ना बिहार के कृषि उत्पादों के लिए सकारात्मक संकेत है। समुद्री मार्ग से निर्यात होने से बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक नियमित आपूर्ति की संभावनाएं बढ़ती हैं और कृषि उत्पादों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में शामिल करने में मदद मिलती है। इससे किसानों को स्थानीय बाजार पर निर्भर रहने के बजाय व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।

    मिथिला मखाना का लगातार विदेशी बाजारों में पहुंचना बिहार के कृषि निर्यात के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है। बेहतर कीमत, बढ़ता निर्यात और प्रसंस्करण क्षेत्र में संभावित निवेश किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे सकता है। आने वाले समय में यदि अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी मिथिला मखाना की मांग बढ़ती है तो बिहार भारत के प्रमुख कृषि निर्यात केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।

  • वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल

    वृंदावन पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, ठाकुरजी के दर्शन कर विवेकानंद प्रतिमा पर चढ़ाए फूल


    वृंदावन।
    पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने तीन दिवसीय प्रवास के तहत शनिवार सुबह वृंदावन पहुंचे। यहां उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम हॉस्पिटल का दौरा किया। अस्पताल पहुंचने पर सेवाश्रम के सचिव स्वामी सुप्रकाशानंद और अस्पताल प्रभारी स्वामी काली कृष्णानंद ने पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया।

    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
    अस्पताल परिसर में पूर्व राष्ट्रपति ने स्वामी विवेकानंद की आदमकद प्रतिमा पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद वह रामकृष्ण मठ पहुंचे और मंदिर में ठाकुरजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

    ‘शारदा ब्लॉक’ का किया अवलोकन
    ठाकुरजी के दर्शन के बाद रामनाथ कोविंद ने अस्पताल के ‘शारदा ब्लॉक’ का भी अवलोकन किया। यह वही ब्लॉक है जिसका उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लोकार्पण हुआ था। इस दौरान उन्होंने रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के संतों से मुलाकात की और उनके साथ आत्मीय संवाद किया।

    सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम का किया उद्घाटन
    रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के कार्यक्रम पूरे करने के बाद पूर्व राष्ट्रपति रुकमणि विहार स्थित ‘सिग्नेचर वृंदावन धाम आश्रम’ पहुंचे। यहां उन्होंने आश्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर संतों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी में रामनाथ कोविंद ने आश्रम परिसर में पौधरोपण भी किया। पौधरोपण के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

  • पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    नई दिल्ली । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि बिहार की प्रतिभा और राज्य में तैयार होने वाले उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे नए मुक्त व्यापार समझौतों यानी एफटीए के माध्यम से बिहार के किसानों, छोटे उद्योगों, उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

    गोयल ने कहा कि बिहार के कृषि और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के साथ टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के लिए दुनिया के विभिन्न बाजारों के दरवाजे खुल रहे हैं। इससे राज्य के उत्पादों को घरेलू बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस बदलाव को बिहार की आर्थिक क्षमता और स्थानीय प्रतिभा के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।

    केंद्र सरकार के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया है। सरकार लगातार भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और मौजूदा बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों को विभिन्न देशों में व्यापार करने के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इससे निर्यात को अधिक विविध बनाने के साथ श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी मजबूत करने की उम्मीद है।

    सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक साझेदार देशों के साथ कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है। इनमें भारत-मॉरीशस सीईसीपीए, भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए, भारत-यूके सीईटीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए जैसे समझौते शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना है।

    एफटीए के तहत व्यापारिक साझेदार देशों के बीच शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में काम किया जाता है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ सकती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ऐसे समझौते रोजगार और उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    सरकार का कहना है कि व्यापार समझौतों को तैयार करते समय भारतीय उद्योग, किसानों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के हितों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी बाजारों में तकनीकी मानकों और नियमों से जुड़ी बाधाओं को कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों के मानकों को समझने और भारतीय उत्पादों को उनके अनुरूप तैयार करने से निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार निर्यात संवर्धन मिशन, विदेशों में भारतीय मिशनों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है। द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर लगातार बातचीत के जरिए भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में बिहार के कृषि, विनिर्माण और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

  • भारत का मेड-टेक इकोसिस्टम मजबूत, घरेलू विनिर्माण और सरकारी योजनाओं से वैश्विक बाजार में बढ़ रही देश की विश्वसनीयता

    भारत का मेड-टेक इकोसिस्टम मजबूत, घरेलू विनिर्माण और सरकारी योजनाओं से वैश्विक बाजार में बढ़ रही देश की विश्वसनीयता

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के तेजी से विकसित हो रहे मेडिकल टेक्नोलॉजी यानी मेड-टेक क्षेत्र की प्रगति को रेखांकित करते हुए कहा है कि घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने, आयात पर निर्भरता घटाने और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं के कारण भारत वैश्विक स्तर पर एक भरोसेमंद मेड-टेक साझेदार के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि देश में सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लक्ष्य को हासिल करने में मजबूत मेडिकल उपकरण उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

    प्रधानमंत्री के मुताबिक, भारत का मेड-टेक क्षेत्र घरेलू उत्पादन बढ़ने और विभिन्न सरकारी पहलों के कारण लगातार मजबूत हो रहा है। मेडिकल उपकरणों के निर्माण को बढ़ावा देने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी पीएलआई योजना, मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य देश में उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीकी विकास और निवेश को गति देना है।

    सरकार के अनुसार, पीएलआई योजना के तहत भारत में अब तक 50 से अधिक अत्याधुनिक मेडिकल उपकरणों का निर्माण शुरू हो चुका है। इसके साथ ही इस क्षेत्र में विदेशी निवेश में भी वृद्धि देखी जा रही है। निवेश बढ़ने को मेडिकल उपकरण निर्माण क्षेत्र में बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। घरेलू उत्पादन का विस्तार भारत को चिकित्सा उपकरणों के लिए केवल आयात आधारित बाजार के बजाय एक बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद कर सकता है।

    मेडिकल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होने से आपूर्ति शृंखला मजबूत होने और लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसका असर उन्नत डायग्नोस्टिक उपकरणों, इमेजिंग सिस्टम, इम्प्लांट्स और आईसीयू में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की उपलब्धता पर भी पड़ सकता है। घरेलू स्तर पर इन उपकरणों का उत्पादन बढ़ने से स्वास्थ्य क्षेत्र में जरूरी तकनीक की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

    मेड-टेक क्षेत्र में नई तकनीकों के लिए भी व्यापक संभावनाएं दिखाई दे रही हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सॉफ्टवेयर ऐज ए मेडिकल डिवाइस, कनेक्टेड मेडिकल डिवाइस, रोबोटिक्स और रिमोट डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है। इन तकनीकों का इस्तेमाल आने वाले समय में मरीजों की जांच, निगरानी और उपचार की प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, भारत का मेड-टेक बाजार करीब 15 से 16 अरब डॉलर का है और लगभग 12 प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ रहा है। भारत एशिया का चौथा सबसे बड़ा मेडिकल टेक्नोलॉजी बाजार है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष 20 बाजारों में शामिल है। बाजार के विस्तार से घरेलू कंपनियों, निवेशकों और तकनीकी क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

    सरकार नियामकीय ढांचे, परीक्षण सुविधाओं और क्लीनिकल डेटा से जुड़ी व्यवस्था को भी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है। इसका उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भारत में निर्मित मेडिकल उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाना है। बेहतर परीक्षण और गुणवत्ता व्यवस्था से भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में स्वीकार्यता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

    मेडिकल डिवाइस उद्योग के मजबूत होने से विनिर्माण और रोजगार के साथ निर्यात तथा तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालिया अनुमान के अनुसार, करीब 14 अरब डॉलर का भारतीय चिकित्सा उपकरण बाजार इस दशक के अंत तक 30 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2047 तक इसके 250 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। ऐसे में घरेलू उत्पादन, अनुसंधान, निवेश और नई तकनीकों का विस्तार भारत को वैश्विक मेड-टेक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में आगे ले जा सकता है।

  • Cancer का खतरा कम करने की नई रणनीति, समय पर जांच से बच सकती हैं हजारों जानें, जानें भारत का पूरा प्लान

    Cancer का खतरा कम करने की नई रणनीति, समय पर जांच से बच सकती हैं हजारों जानें, जानें भारत का पूरा प्लान


    नई दिल्ली। भारत में कैंसर का बढ़ता संकट केवल मरीजों की संख्या तक सीमित नहीं है बल्कि सबसे बड़ी चुनौती बीमारी की देर से पहचान है। अस्पतालों तक पहुंचने वाले बड़ी संख्या में मरीजों में कैंसर काफी आगे बढ़ चुका होता है। ऐसी स्थिति में इलाज मुश्किल होने के साथ महंगा भी हो जाता है और मरीज के ठीक होने की संभावना कम हो सकती है। यही वजह है कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में आधुनिक उपचार के साथ समय पर पहचान और बचाव पर सबसे ज्यादा जोर देने की जरूरत है।

    कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी के पीछे बढ़ती उम्र के साथ बदलती जीवनशैली धूम्रपान तंबाकू का सेवन असंतुलित खानपान शारीरिक गतिविधियों की कमी और पर्यावरणीय कारणों को महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर के कई जोखिम कारकों को जीवनशैली में बदलाव और समय पर जांच के जरिए कम किया जा सकता है। इसलिए कैंसर के खिलाफ जागरूकता की शुरुआत इलाज के बाद नहीं बल्कि बचपन से होनी चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को स्वस्थ जीवनशैली के बारे में जानकारी देना बेहद जरूरी है। खानपान शारीरिक गतिविधि मानसिक स्वास्थ्य नशे से दूरी टीकाकरण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जैसे विषयों को जीवन कौशल का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। बचपन से अच्छी आदतें विकसित होने पर भविष्य में कैंसर के साथ साथ हृदय रोग डायबिटीज और दूसरी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।

    कैंसर की शुरुआती पहचान के लिए एक आसान बात लोगों को हमेशा याद रखनी चाहिए। अगर शरीर में कोई असामान्य लक्षण लगातार तीन सप्ताह या उससे अधिक समय तक बना रहता है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार दर्द शरीर में असामान्य गांठ बिना वजह वजन कम होना लंबे समय तक रहने वाली खांसी निगलने में परेशानी असामान्य रक्तस्राव या लंबे समय से बनी कमजोरी जैसे लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। हालांकि ऐसे लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते लेकिन लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी हो जाती है।

    स्क्रीनिंग भी कैंसर से होने वाली मौतों को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है। कुछ कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में स्क्रीनिंग के जरिए की जा सकती है। यही वह समय होता है जब उपचार के विकल्प अपेक्षाकृत बेहतर हो सकते हैं। आने वाले समय में तकनीक इस क्षेत्र को और मजबूत कर सकती है। मल्टी कैंसर अर्ली डिटेक्शन जैसे रक्त आधारित परीक्षणों पर दुनियाभर में शोध जारी है। इनका उद्देश्य एक ही रक्त नमूने से कई प्रकार के कैंसर से जुड़े संकेतों की पहचान करना है। हालांकि ऐसे परीक्षणों को व्यापक स्तर पर अपनाने से पहले उनकी सटीकता उपयोगिता और चिकित्सकीय प्रभाव का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है।

    भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी कैंसर की पहचान और रिसर्च में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। मेडिकल इमेजिंग और पैथोलॉजी डेटा के बड़े डेटाबेस की मदद से AI आधारित सिस्टम को प्रशिक्षित किया जा सकता है। इससे संदिग्ध मामलों की पहचान में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को सहायता मिल सकती है और जरूरत पड़ने पर मरीजों को विशेषज्ञ केंद्र तक जल्दी पहुंचाया जा सकता है।

    भारत जैसे विशाल देश में कैंसर स्क्रीनिंग का एक ही मॉडल सभी क्षेत्रों के लिए प्रभावी नहीं हो सकता। गांवों और दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए कम्युनिटी हेल्थ वर्कर्स मोबाइल डायग्नोस्टिक सेवाएं डिजिटल रिस्क असेसमेंट और मजबूत रेफरल सिस्टम की जरूरत होगी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर बड़े कैंसर अस्पताल तक मरीजों को समय पर जोड़ना इस पूरी व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हो सकती है।

    कैंसर के खिलाफ भारत की असली सफलता केवल आधुनिक मशीनों अस्पतालों या महंगे उपचारों की संख्या से तय नहीं होगी। असली सफलता तब मानी जाएगी जब बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में होने लगे और कम मरीज गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचें। जागरूकता समय पर जांच स्वस्थ जीवनशैली AI आधारित तकनीक और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था मिलकर कैंसर के खिलाफ भारत की लड़ाई को नई दिशा दे सकते हैं।

  • UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    UP: हरिद्वार तक पहुंचेगा गंगा एक्सप्रेसवे, बिजनौर से होकर बनेगा करीब 30 किमी नया लिंक

    मेरठ। गंगा एक्सप्रेसवे को हरिद्वार से जोड़ने की परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड सरकार के बीच इस परियोजना को लेकर समझौता ज्ञापन (एमओयू) हो चुका है। समझौते में दोनों राज्यों की जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं। प्रस्तावित एक्सप्रेसवे बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक पहुंचेगा और इसकी लंबाई करीब 30 किलोमीटर होगी।

    गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के पास रहेगी। दोनों राज्यों के बीच इस परियोजना को लेकर पिछले महीने सहमति बनी थी।

    उत्तराखंड पर नहीं आएगा निर्माण का खर्च
    एमओयू के अनुसार हरिद्वार तक एक्सप्रेसवे के निर्माण में होने वाला वित्तीय खर्च उत्तराखंड सरकार को नहीं उठाना होगा। हालांकि, उत्तराखंड की ओर से भूमि अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में सहयोग किया जाएगा। शासन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार परियोजना से संबंधित दोनों एमओयू पिछले महीने ही अंतिम रूप ले चुके थे। समझौते को कैबिनेट की मंजूरी भी मिल चुकी है।

    बिजनौर के रास्ते हरिद्वार तक करीब 30 किमी का लिंक
    हरिद्वार को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए तैयार किए जा रहे प्रस्तावित मार्ग का एक हिस्सा बिजनौर से होकर गुजरेगा। करीब 30 किलोमीटर के इस लिंक से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच सड़क संपर्क पहले से बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच कई चरणों में बैठकें हो चुकी हैं। अब निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेजी मिलने की संभावना है।

    धार्मिक पर्यटन से लेकर कारोबार तक को फायदा
    गंगा एक्सप्रेसवे के हरिद्वार तक पहुंचने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। देश के अलग-अलग हिस्सों से हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवागमन आसान होगा।

    इसके अलावा बेहतर कनेक्टिविटी का असर औद्योगिक निवेश और व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। परियोजना के जरिए क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच लोगों और सामान की आवाजाही अधिक सुगम हो सकेगी।

  • UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल

    UP Election 2027 से पहले PDA की नई परिभाषा पर मायावती का हमला, अखिलेश यादव की रणनीति पर उठाए सवाल


    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राज्य की राजनीति में जातीय समीकरणों को लेकर बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की ओर से PDA फॉर्मूले में ‘P’ का अर्थ पंडित बताए जाने के बाद बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने आरोप लगाया कि सपा चुनावी परिस्थितियों और राजनीतिक जरूरतों के अनुसार अपने सामाजिक समीकरण की व्याख्या बदलती रहती है। उनके बयान के बाद उत्तर प्रदेश की सियासत में PDA को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

    मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले PDA में ‘P’ का अर्थ पिछड़ा बताती थी, जबकि इसके साथ दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को जोड़ा जाता था। अब अखिलेश यादव की ओर से ‘P’ को पंडित बताए जाने को उन्होंने चुनावी रणनीति से जोड़कर देखा है। मायावती का कहना है कि ब्राह्मण समाज के लोगों का बसपा की ओर बढ़ता जुड़ाव देखकर सपा ने अपने राजनीतिक संदेश में बदलाव किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव नजदीक आने पर अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने के लिए सपा अपनी राजनीतिक भाषा और समीकरण में परिवर्तन करती है।

    उत्तर प्रदेश में लंबे समय से जातीय और सामाजिक गठजोड़ चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दल अलग-अलग समुदायों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। अखिलेश यादव का PDA फॉर्मूला भी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक रूप से एकजुट करने की रणनीति के तौर पर सामने आया था। अब इसमें पंडित शब्द को शामिल किए जाने से सपा की रणनीति को लेकर विपक्षी दलों को हमला करने का नया मुद्दा मिल गया है।

    मायावती ने इस दौरान बसपा की राजनीतिक विचारधारा को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी एक जाति, समुदाय या वर्ग के हित तक सीमित नहीं है। बसपा ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर काम करने का दावा करती है और उसका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना है। मायावती ने अपनी पार्टी की पिछली सरकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बसपा की सरकारों के दौरान भी सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई गई थीं।

    बसपा प्रमुख ने लोगों से जाति आधारित राजनीतिक नारों और चुनावी समीकरणों को लेकर सतर्क रहने की अपील भी की। उनका कहना है कि चुनाव के समय अलग-अलग समुदायों को आकर्षित करने के लिए राजनीतिक दल अपनी भाषा और रणनीति बदल सकते हैं, लेकिन इससे समाज की मूल समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता। मायावती ने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनावी लाभ के लिए राजनीतिक समीकरण बदलने के बजाय सभी वर्गों के व्यापक हित पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए अखिलेश यादव के बयान और मायावती की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले जातीय संतुलन और सामाजिक गठबंधन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना है। आने वाले समय में PDA की परिभाषा और इसके दायरे को लेकर सपा, बसपा तथा अन्य दलों के बीच बयानबाजी और बढ़ सकती है। मायावती का ताजा हमला इसी व्यापक राजनीतिक मुकाबले का हिस्सा माना जा रहा है।

  • पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    पश्चिमी यूपी में ‘बम भोले’ की गूंज, डाक कांवड़ और पैदल जत्थों में दिखा जोश

    मेरठ। सावन के साथ कांवड़ यात्रा 2026 ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सड़कों को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया है। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे से लेकर मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर और बागपत तक हर तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम भोले’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। कंधों पर गंगाजल लेकर शिवभक्त अपने गंतव्य और शिवालयों की ओर लगातार बढ़ रहे हैं। दिन हो या रात, हाईवे पर कांवड़ियों की भीड़ कम नहीं हो रही। पैदल जत्थों के साथ डाक कांवड़िए भी तेज रफ्तार में आगे बढ़ते नजर आ रहे हैं।

    शिव भजनों पर झूमते कांवड़िए, डीजे-ढोल बना आकर्षण
    कांवड़ यात्रा के दौरान कई जत्थों में भक्ति का उत्साह देखते ही बन रहा है। शिवभक्त रास्ते में शिव भजनों पर नाचते-गाते आगे बढ़ रहे हैं। कई जत्थों के साथ डीजे, ढोल और भजन मंडलियां भी चल रही हैं। शाम ढलते ही कांवड़ मार्गों की रौनक और बढ़ जाती है। रोशनी से सजी कांवड़ें, डीजे की धुन और भगवा वस्त्रों में नजर आते शिवभक्त पूरे माहौल को मेले जैसा बना देते हैं।

    हाईवे पर डाक कांवड़िए तेजी से अपने गंतव्य की तरफ बढ़ रहे हैं। वहीं सामान्य कांवड़ लेकर पैदल चल रहे शिवभक्त भजनों और जयकारों के बीच अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं। कांवड़ियों का जोश राह से गुजरने वाले लोगों का भी ध्यान खींच रहा है। शहरों के लोग बड़ी संख्या में कांवड़ मार्गों तक पहुंचकर यात्रा का नजारा देख रहे हैं और कई जगह सेवा शिविरों में शिवभक्तों की मदद भी कर रहे हैं।

    सेवा शिविरों में भंडारे, जगह-जगह फूलों से स्वागत
    कांवड़ मार्गों पर शिवभक्तों के लिए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में भोजन, पानी, शरबत और आराम करने की व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में युवा और स्वयंसेवक दिन-रात कांवड़ियों की सेवा में जुटे हुए हैं। कई जगह शिवभक्तों का पुष्प वर्षा कर स्वागत भी किया जा रहा है। मुजफ्फरनगर में सीओ ऋषिका सिंह भी महिला कांवड़ियों की सेवा करती नजर आईं। महिला कांवड़ियों के पैर दबाते हुए उनका वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा में रहीं।

    11 अगस्त को महाशिवरात्रि, और बढ़ेगी कांवड़ियों की भीड़
    कांवड़ यात्रा के दौरान शाम और रात में हाईवे और कांवड़ मार्गों पर मेले जैसा दृश्य दिखाई दे रहा है। शिवभक्तों के साथ स्थानीय लोग भी इन रास्तों पर पहुंच रहे हैं। कुछ लोग कांवड़ यात्रा का भक्तिमय नजारा देखने आ रहे हैं तो कई सेवा शिविरों में पहुंचकर कांवड़ियों की सेवा कर रहे हैं। 11 अगस्त को महाशिवरात्रि के अवसर पर शिवालयों में कांवड़िए गंगाजल चढ़ाएंगे। इस वजह से कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ने की संभावना है।