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  • नाना पाटेकर का गुस्सा पड़ा भारी, रोने के लिए ग्लिसरीन नहीं दी और जड़ दिया थप्पड़, एक्ट्रेस ने भी नहीं किया बर्दाश्त

    नाना पाटेकर का गुस्सा पड़ा भारी, रोने के लिए ग्लिसरीन नहीं दी और जड़ दिया थप्पड़, एक्ट्रेस ने भी नहीं किया बर्दाश्त


    नई दिल्ली। नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में गिने जाते हैं जिनकी दमदार और इंटेंस एक्टिंग ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। फिल्मों में उनके किरदार अक्सर बेहद आक्रामक और भावनात्मक नजर आते रहे हैं। उनके गुस्सैल स्वभाव को लेकर भी कई किस्से समय समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला किस्सा साल 1997 में रिलीज हुई फिल्म यशवंत से जुड़ा है। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने एक सीन में अपनी को स्टार मधु को कथित तौर पर सच में थप्पड़ मार दिया था। खास बात यह रही कि इसके बाद मधु ने भी बिना देर किए उन्हें पलटकर थप्पड़ मार दिया था।

    फिल्म यशवंत में नाना पाटेकर और मधु ने पति पत्नी का किरदार निभाया था। फिल्म का निर्देशन अनिल मट्टू ने किया था। हाल ही में एक इंटरव्यू में मधु ने इस पुराने किस्से को याद किया और बताया कि उस सीन में उन्हें रोना था। आमतौर पर फिल्मों में कलाकारों की आंखों में आंसू लाने के लिए ग्लिसरीन का इस्तेमाल किया जाता है। मधु भी इसी तरीके का इस्तेमाल करना चाहती थीं लेकिन नाना पाटेकर ने उन्हें ग्लिसरीन लगाने से रोक दिया।

    मधु के मुताबिक नाना चाहते थे कि वह आंसुओं के लिए किसी कृत्रिम तरीके का सहारा न लें बल्कि किरदार की भावनाओं को भीतर से महसूस करें। उन्होंने मधु से कहा कि उन्हें स्थिति को महसूस करना चाहिए ताकि आंखों से आंसू अपने आप निकलें। लेकिन मधु उस समय ऐसा नहीं कर पा रही थीं। इसी दौरान नाना ने उन्हें अचानक असली थप्पड़ मार दिया। थप्पड़ इतना जोरदार था कि मधु की आंखों से सच में आंसू निकल आए।

    इस घटना ने मधु को बुरी तरह चौंका दिया क्योंकि रिहर्सल के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ था। वह इसके लिए बिल्कुल तैयार नहीं थीं। अचानक थप्पड़ पड़ने के बाद उन्हें गुस्सा आ गया। मधु ने बताया कि उनका स्वभाव भी काफी गुस्सैल है इसलिए उन्होंने नाना पाटेकर को तुरंत पलटकर थप्पड़ मार दिया। सेट पर हुआ यह वाकया उनके लिए काफी हैरान करने वाला था लेकिन बाद में उन्होंने नाना के व्यवहार को लेकर एक अहम बात भी स्पष्ट की।

    मधु के अनुसार नाना पाटेकर उनके साथ सामान्य तौर पर रूड नहीं थे। उनका मानना था कि नाना तभी सख्ती दिखाते थे जब उन्हें लगता था कि सामने वाला कलाकार अपनी क्षमता के मुताबिक बेहतर प्रदर्शन कर सकता है। वह अभिनय को लेकर बेहद गंभीर रहते थे और अपने को स्टार से भी पूरी तरह भावनात्मक प्रदर्शन की उम्मीद करते थे।

    आज इतने वर्षों बाद यह किस्सा फिर चर्चा में है क्योंकि यह नाना पाटेकर की अभिनय शैली और सेट पर उनके काम करने के तरीके की एक अलग तस्वीर सामने लाता है। हालांकि किसी कलाकार को बिना पूर्व जानकारी के थप्पड़ मारना निश्चित तौर पर असहज स्थिति पैदा कर सकता है। मधु के मुताबिक उस समय उन्हें गुस्सा जरूर आया था लेकिन उन्होंने नाना के साथ काम करने के अनुभव को केवल इस एक घटना तक सीमित नहीं माना। यही वजह है कि फिल्म यशवंत से जुड़ा यह किस्सा आज भी बॉलीवुड के चर्चित शूटिंग किस्सों में याद किया जाता है।

  • टाटा ट्रस्ट में सत्ता की लड़ाई तेज, सात ट्रस्टों के 84 कैविएट से मचा हड़कंप, नोएल-नेविल टाटा पर क्यों बढ़ा दबाव

    टाटा ट्रस्ट में सत्ता की लड़ाई तेज, सात ट्रस्टों के 84 कैविएट से मचा हड़कंप, नोएल-नेविल टाटा पर क्यों बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। टाटा समूह से जुड़े ट्रस्टों के भीतर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आता दिखाई दे रहा है। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने सात ट्रस्टों की ओर से कुल 84 कैविएट दाखिल किए जाने के बाद इस पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है। इन कैविएट में नोएल टाटा और नेविल टाटा को कैविएटर बनाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रस्ट से जुड़े किसी मामले में चैरिटी कमिश्नर की ओर से कोई आदेश जारी करने से पहले संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए। बड़ी संख्या में कैविएट दाखिल होने को टाटा ट्रस्ट के भीतर बढ़ते मतभेदों का अहम संकेत माना जा रहा है।

    मामले का केंद्र सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी एसडीटीटी में शासन व्यवस्था और निर्णय लेने के अधिकारों से जुड़ा विवाद बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नोएल टाटा और नेविल टाटा के खिलाफ अलग-अलग मुद्दे उठाए गए हैं और इसी वजह से कानूनी स्तर पर पहले से अपनी स्थिति सुरक्षित करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल टाटा ट्रस्ट की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

    विवाद की एक अहम कड़ी नोएल टाटा की नियुक्ति और उनके स्थायी ट्रस्टी के रूप में बने रहने से जुड़ी है। श्रीनिवासन की ओर से नोएल टाटा की नियुक्ति की जांच की मांग उठाई गई है। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया है कि नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाने का आधार क्या था और वह इस पद पर किस प्रक्रिया के तहत बने हुए हैं। इन सवालों ने ट्रस्ट की आंतरिक व्यवस्था और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज कर दी है।

    मामला सिर्फ नियुक्ति तक सीमित नहीं है। एसडीटीटी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में नोएल टाटा की भागीदारी और उनके मतदान अधिकारों पर भी रोक लगाने की मांग की गई है। इसमें टाटा संस के निदेशकों प्रतिनिधियों या प्रॉक्सी की नियुक्ति और उन्हें किसी तरह के निर्देश देने से जुड़े मामले भी शामिल हैं। ऐसे में विवाद का असर टाटा समूह की शीर्ष स्तर की निर्णय प्रक्रिया पर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

    इस बीच सर रतन टाटा ट्रस्ट को लेकर भी पहले से स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं है। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की ओर से ट्रस्ट के कामकाज पर कुछ प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। इन प्रतिबंधों के चलते ट्रस्ट फिलहाल बैठक नहीं कर पा रहा है। जब तक यह रोक नहीं हटती तब तक बैठक आयोजित करने में भी अड़चन बनी रहेगी।

    टाटा ट्रस्ट की संरचना और टाटा संस में ट्रस्टों की भूमिका को देखते हुए यह विवाद काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रस्टों के फैसलों का असर समूह की कंपनियों और उसके प्रशासनिक ढांचे पर भी पड़ सकता है। ऐसे में 84 कैविएट दाखिल होने के बाद अब निगाहें महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि इन आपत्तियों और आरोपों पर क्या रुख अपनाया जाता है और नोएल टाटा तथा अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका को लेकर विवाद किस दिशा में आगे बढ़ता है।

  • गुलाब का पौधा घर पर तैयार करने का आसान तरीका, एक कटिंग से जड़ें बनने तक रखें इन बातों का खास ध्यान

    गुलाब का पौधा घर पर तैयार करने का आसान तरीका, एक कटिंग से जड़ें बनने तक रखें इन बातों का खास ध्यान

    नई दिल्ली ।घर में गुलाब का पौधा लगाने के लिए हर बार नर्सरी से नया पौधा खरीदना जरूरी नहीं है। पहले से मौजूद स्वस्थ गुलाब के पौधे की एक अच्छी कटिंग से भी नया पौधा तैयार किया जा सकता है। हालांकि, कटिंग से जड़ें बनने की प्रक्रिया कई बातों पर निर्भर करती है। तने की सेहत, मौसम, मिट्टी, नमी और रोशनी का इस प्रक्रिया पर असर पड़ता है। खास तौर पर कटिंग को जरूरत से ज्यादा पानी और शुरुआती दौर में तेज धूप से बचाना जरूरी होता है।

    गुलाब की कटिंग तैयार करने के लिए सबसे पहले स्वस्थ टहनी का चुनाव करना चाहिए। करीब 10 से 15 सेंटीमीटर लंबी ऐसी शाखा लें जो न तो बहुत कोमल हो और न ही पूरी तरह पुरानी और लकड़ी जैसी हो। तने पर किसी तरह के कीड़े, काले धब्बे, सड़न या बीमारी के निशान नहीं होने चाहिए। कटिंग काटने के लिए साफ कैंची या चाकू का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है, ताकि तने को अनावश्यक नुकसान न पहुंचे।

    कटिंग तैयार करने के बाद उसके निचले हिस्से की पत्तियां हटा दें और ऊपर केवल दो या तीन पत्तियां रहने दें। इसके बाद कटिंग के निचले सिरे को हल्का तिरछा काटा जा सकता है। इससे उसे मिट्टी में लगाने में आसानी होती है। कटिंग को तैयार करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि तना स्वस्थ और मजबूत हो, क्योंकि कमजोर या संक्रमित टहनी से पौधा तैयार होने की संभावना प्रभावित हो सकती है।

    अब कटिंग लगाने के लिए ऐसे गमले और मिट्टी की जरूरत होगी, जिसमें अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। सामान्य मिट्टी में कोकोपीट और रेत मिलाकर ऐसा पॉटिंग मिक्स तैयार किया जा सकता है, जिसमें नमी बनी रहे और पानी जमा न हो। गमले के नीचे ड्रेनेज होल होना जरूरी है। मिट्टी भरने के बाद बीच में कटिंग के निचले हिस्से को लगाने के लिए छोटा गड्ढा बनाएं। कटिंग रखने के बाद उसके आसपास की मिट्टी को हल्के हाथ से दबाएं और थोड़ी मात्रा में पानी दें।

    कटिंग लगाने के बाद सबसे ज्यादा ध्यान नमी पर देना होता है। मिट्टी पूरी तरह सूखने नहीं देनी चाहिए, लेकिन उसे लगातार पानी से भरा रखना भी ठीक नहीं है। अत्यधिक नमी के कारण कटिंग के सड़ने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए मिट्टी की स्थिति देखकर जरूरत के अनुसार पानी देना चाहिए। गमले में जल निकासी अच्छी होने से अतिरिक्त पानी बाहर निकल जाता है और कटिंग के आसपास उचित नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।

    शुरुआती समय में कटिंग को तेज सीधी धूप में रखने से बचना चाहिए। ऐसी जगह रखना बेहतर है जहां पर्याप्त रोशनी मिले, लेकिन सीधे तेज धूप का असर न हो। आसपास की नमी बनाए रखने के लिए पारदर्शी प्लास्टिक कवर का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि उसे पूरी तरह बंद नहीं करना चाहिए। हवा का आवागमन बना रहना जरूरी है। जड़ें बनने का समय निश्चित नहीं होता और मौसम, गुलाब की किस्म, कटिंग की स्थिति, मिट्टी तथा नमी के आधार पर इसमें अंतर हो सकता है। कुछ मामलों में कुछ हफ्तों में जड़ों की शुरुआत हो सकती है।

    कटिंग पर नई पत्तियां या नई बढ़त दिखाई देने लगे तो इसे सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन इससे यह निश्चित नहीं होता कि जड़ें पूरी तरह विकसित हो चुकी हैं। इसलिए नई पत्तियां निकलते ही कटिंग को गमले से निकालकर जांचने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जब जड़ें अच्छी तरह विकसित हो जाएं, तभी पौधे को सावधानी से बड़े गमले में स्थानांतरित किया जाना चाहिए। शुरुआती दौर में बहुत ज्यादा खाद या पानी देने के बजाय उचित नमी, जल निकासी और रोशनी का ध्यान रखना जरूरी है।

  • MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस

    MP: पटवारियों पर सरकार का बड़ा एक्शन…. 27 की सेवाएं समाप्त… कइयों को थमाए नोटिस


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में स्वामित्व योजना (SVAMITVA Scheme) के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों की रजिस्ट्री को लेकर सरकार (Government) और पटवारियों (Patwaris) के बीच टकराव बढ़ गया है। सरकार ने कार्रवाई तेज करते हुए देवास और आगर-मालवा (Dewas and Agar-Malwa) में 27 प्रोबेशनरी पटवारियों की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वहीं, अलग-अलग जिलों में कई पटवारियों को सेवा समाप्ति से पहले कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। ग्वालियर में भी बड़ी संख्या में पटवारियों को नोटिस मिलने की जानकारी सामने आई है। गुना में चार पटवारियों को सेवा समाप्ति के नोटिस दिए गए हैं, जबकि पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष समेत चार पटवारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई है। इसको लेकर अब पटवारी संघ ने भी नोटिस वापस नहीं लेने पर काम बंद करने की चेतावनी दी हैं।


    रजिस्ट्री में अड़ंगेबाजी का आरोप

    सरकार की कार्रवाई को स्वामित्व योजना के तहत संपत्तियों की रजिस्ट्री के काम में कथित देरी और अड़ंगेबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार की ओर से हालांकि कार्रवाई की वजह काम में लापरवाही और अनियमितता बताई जा रही है। कार्रवाई के विरोध में मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को प्रदेशभर में पटवारियों ने जिला मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपकर नोटिस और कार्रवाई वापस लेने की मांग की। संघ ने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं रुकी तो ऑनलाइन राजस्व कार्य से दूरी बनाकर आंदोलन को अनिश्चितकाल तक बढ़ाया जा सकता है।


    नामांतरण के लिए 8 हजार मांगने वाले पटवारी पर मुकदमे की मंजूरी

    इधर, सीहोर जिले की जावर तहसील में पदस्थ पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर के खिलाफ भी अभियोजन चलाने की मंजूरी दी गई है। उन पर भूमि नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। लोकायुक्त में शिकायत के अनुसार पटवारी ने नामांतरण के लिए 10 हजार रुपए की मांग की थी। शिकायत के सत्यापन के दौरान हुई बातचीत डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर में दर्ज की गई, जिसमें 8 हजार रुपए में बात तय होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद पंच साक्षियों की मौजूदगी में रिकॉर्डिंग का पंचनामा तैयार कर ट्रैप की कार्रवाई की गई। एफएसएल जांच में रिकॉर्ड की गई आवाज पटवारी धर्मेंद्र सिंह राठौर की होने की पुष्टि हुई। इन तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. ने अभियोजन की मंजूरी दी है।


    भोपाल में भी रिश्वत के आरोपी पटवारी पर कार्रवाई

    भोपाल में पटवारी मंगलेश खंडेलवाल के खिलाफ भी अभियोजन की स्वीकृति जारी की गई है। उन पर कोलार क्षेत्र में मकान के फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू कराने के बदले 8 हजार रुपए रिश्वत लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। एसडीएम के प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद भोपाल कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने पटवारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी दी है।

  • शिवराज सिंह चौहान के घर आया नन्हा मेहमान…. रिद्धि- कुणाल बने माता-पिता

    शिवराज सिंह चौहान के घर आया नन्हा मेहमान…. रिद्धि- कुणाल बने माता-पिता


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के घर एक बार फिर से किलकारी गूंजी है। उनके बेटे कुणाल (Son Kunal) की पत्नी रिद्धि (Wife Riddhi) ने बेटे को जन्म (Giving Birth Son) दिया है। इसकी जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करते हुए शिवराज सिंह ने अपनी खुशू जाहिर की है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, आज हमारे जीवन में एक बार फिर से सौभाग्य का सूर्योदय हुआ है।


    क्या रखा है नाम

    बहू रिद्धि के बच्चे के जन्म के बाद शिवराज सिंह ने बच्चे के नाम का भी खुलासा किया है। शिवराज सिंह चौहान ने पोस्ट करते हुए लिखा, “बेटे के रूप में ‘अहान’ हमारे घर अपार खुशियां लेकर आया है। कुणाल और रिद्धि माता-पिता बने है, मुझे और साधना को फिर से दादा-दादी बनने का सौभाग्य मिला है। कार्तिकेय-अमानत बड़े पापा-बड़ी मम्मी बन गए हैं और हमारी लाड़ली इला का भाई हमारे घर खुशियां लेकर आया है। बेटे ‘अहान’ की नन्ही-सी किलकारी ने पूरे घर को आनंद और प्रेम से भर दिया है। यह हमारे लिए ईश्वर का अनमोल आशीष है। संदीप जैन जी और स्वाति जैन जी को भी नाना-नानी बनने की बहुत-बहुत बधाई।


    2025 में हुई थी शादी

    शिवराज सिंह चौहान के छोटे बेटे कुणाल सिंह चौहान की शादी 14 फरवरी 2015 को भोपाल में हुई थी। भोपाल के वाना ग्रीन होटल में हुई शादी में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेता शामिल हुए थे। दोनों की सगाई 23 मई, 2024 को हुई थी। अब रिद्धि ने बेटे को जन्म दिया है। इस दौरान पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।


    इससे पहले भी गूंजी है किलकारी

    छोटे बेटे कुणाल की पत्नी से पहले बड़े बेटे कार्तिकेय की पत्नी अमानत बंसल ने बेटी को जन्म दिया था। 21 जनवरी, 2026 को दिल्ली के अस्पताल में जन्म होने के बाद बेटी का नाम इला रखा गया। पोती इला के जन्म के बाद भई शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए खुशी जताई थी। अब एक बार फिर से चौहान परिवार में किलकारी गूंजी है।

  • भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ने देश के वायुवीरों को किया नमन

    भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस पर राष्ट्रपति- प्रधानमंत्री ने देश के वायुवीरों को किया नमन


    नई दिल्ली।
    भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) के 94वें स्थापना दिवस (94th Foundation Day) पर देश के शीर्ष नेताओं ने वीर वायु योद्धाओं (Brave Air Warriors) के साहस, शौर्य और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को सलाम किया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu), प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi), केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्रालय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेशों के जरिए वायुसेना के जवानों और उनके परिवारों को बधाई दीं। राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि इस अभियान ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वायु योद्धाओं के साहस, सटीक कार्रवाई और अभियान संबंधी तैयारियों को प्रदर्शित किया। वहीं, पीएम मोदी ने कहा कि देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। अमित शाह ने जवानों की अदम्य वीरता और मारक क्षमता की तारीफ की, जबकि योगी आदित्यनाथ ने भारतीय वायुसेना को पूरे देश का गौरव बताया।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर का किया जिक्र
    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना दिवस पर सभी वायु योद्धाओं, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को बधाई दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना ने पेशेवर दक्षता, अनुशासन और हर परिस्थिति के लिए तैयार रहने की अपनी क्षमता के दम पर देश की शानदार सेवा की है। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में ऑपरेशन सिंदूर का खास तौर पर उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में वायुसेना के जवानों के साहस, सटीक कार्रवाई और अभियान संबंधी तैयारियों को साबित किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वायुसेना ने प्राकृतिक आपदाओं और मानवीय संकट के समय भी महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाई है। जवानों का समर्पण पूरे देश के लिए प्रेरणा और गर्व का स्रोत है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि भारतीय वायुसेना सेवा और उत्कृष्टता की अपनी गौरवशाली परंपरा को आगे भी कायम रखेगी।


    पीएम मोदी बोले- देश को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर वायु योद्धाओं को नमन किया। उन्होंने देश की हवाई सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के साहस, प्रतिबद्धता और सर्वोच्च बलिदान को याद किया। पीएम मोदी ने लिखा, ‘भारत को अपने वायु योद्धाओं पर गर्व है। वायुसेना दिवस पर हम अपने आसमान की रक्षा करने वाले उनके साहस और प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं!’ प्रधानमंत्री का यह संदेश उन जवानों के प्रति देश की कृतज्ञता जाहिर करता है, जो हर चुनौती का सामना करते हुए भारत की हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।


    ‘पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा वायु योद्धाओं का शौर्य’

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वायुसेना दिवस पर देश के वीर जवानों को सलाम करते हुए उनकी अदम्य वीरता, अचूक निशाने और दुश्मन के ठिकानों पर प्रभावी प्रहार करने की क्षमता की सराहना की। अमित शाह ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय वायुसेना के जवान वास्तविक जीवन के ऐसे बहादुर नायक हैं, जिनकी अद्वितीय वीरता, सटीक निशाने और जबरदस्त मारक क्षमता की गवाही धरती से लेकर दूर अंतरिक्ष में मौजूद उपग्रहों तक मिलती है। उन्होंने कहा कि वायु योद्धाओं की देशभक्ति और पेशेवर दक्षता आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी। देश के दुश्मनों के मंसूबे खत्म हो जाने के बाद भी इन जवानों के शौर्य और समर्पण की कहानियां लोगों को प्रेरणा देती रहेंगी। गृह मंत्री ने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को भी नमन किया। उनका संदेश भारतीय वायुसेना के जवानों के अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित करता है।

    ‘भारतीय वायुसेना के वीर योद्धाओं को सलाम’
    भारतीय वायुसेना दिवस के अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बधाई दी। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, ‘सभी साहसी वायु योद्धाओं और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारतीय वायुसेना साहस, शौर्य, अनुशासन और पेशेवर दक्षता का प्रतीक है। हमारे वायु योद्धाओं ने अटूट प्रतिबद्धता के साथ हमेशा देश के आसमान की रक्षा की है और जब भी देश के सामने कोई संकट आया, वे पूरी तत्परता के साथ राष्ट्र की सेवा में डटे रहे हैं। उनकी निष्ठा और समर्पण ने न केवल भारत की सुरक्षा को मजबूत किया है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सामूहिक संकल्प की भावना को भी मजबूती दी है। राष्ट्र के प्रति उनके साहस, प्रतिबद्धता और निस्वार्थ सेवा को नमन।’


    ‘देश की संप्रभुता की मजबूत प्रहरी है वायुसेना’

    रक्षा मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ पर सभी वीर वायु योद्धाओं को नमन किया। मंत्रालय ने कहा कि वायुसेना के जवान ‘अचूक, अभेद्य और सटीक’ की भावना के साथ साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा से देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। मंत्रालय ने अपने संदेश में वायुसेना के ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायुसेना ने आकाश की सीमाओं से आगे बढ़कर देश की संप्रभुता और सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय क्षमता और प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। रक्षा मंत्रालय का यह संदेश बताता है कि देश की हवाई सुरक्षा में वायुसेना की भूमिका कितनी अहम है। जवानों का अनुशासन, उनकी तैयारी और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में कार्रवाई करने की क्षमता भारत की रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।


    ‘भारतीय वायुसेना पूरे देश का गौरव’

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी भारतीय वायुसेना दिवस पर वायु योद्धाओं और उनके परिवारों को हार्दिक बधाई एवं बधाई दीं। योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में वायुसेना के ध्येय वाक्य ‘नभः स्पृशं दीप्तम्’ का उल्लेख करते हुए कहा कि आसमान की अनंत ऊंचाइयों से लेकर राष्ट्र की सीमाओं तक शौर्य, सामर्थ्य और संकल्प का पर्याय बनी भारतीय वायुसेना हम सभी का गौरव है। उन्होंने अपने संदेश का समापन ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ किया। मुख्यमंत्री का यह संदेश देश की रक्षा में जुटे वायु योद्धाओं के प्रति सम्मान और उनके योगदान पर गर्व की भावना को दर्शाता है।

  • कारोबारियों के लिए आसान होगा जीएसटी सिस्टम? रिफंड का दायरा बढ़ाने और पंजीकरण प्रक्रिया सरल करने पर मंथन

    कारोबारियों के लिए आसान होगा जीएसटी सिस्टम? रिफंड का दायरा बढ़ाने और पंजीकरण प्रक्रिया सरल करने पर मंथन


    नई दिल्ली। जीएसटी व्यवस्था को कारोबारियों के लिए आसान और अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में सरकार कई बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। जीएसटी काउंसिल की गुरुवार को होने वाली अहम बैठक में रिफंड पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने से जुड़े कई प्रस्तावों पर फैसला हो सकता है। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी। प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की स्थिति में कारोबारियों को जीएसटी से जुड़ी कई प्रक्रियाओं में राहत मिल सकती है और टैक्स व्यवस्था को पहले की तुलना में सरल बनाने की कोशिश की जा सकती है।

    बैठक में इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़े नियमों में भी बदलाव पर विचार होने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक आईटीसी पर लगी कुछ मौजूदा पाबंदियों में ढील दी जा सकती है। सामान्य कारोबारी खर्चों को भी इनपुट टैक्स क्रेडिट के दायरे में शामिल करने का प्रावधान किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो कारोबारियों के लिए टैक्स क्रेडिट का इस्तेमाल करने की गुंजाइश बढ़ सकती है और कारोबारी खर्चों पर कर का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।

    पंजीकरण को लेकर भी कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं। एक राज्य में जीएसटी पंजीकरण कराकर पूरे देश में कारोबार करने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। मौजूदा व्यवस्था में अलग अलग राज्यों में कारोबार करने वाले व्यवसायों के लिए पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रियाएं अधिक जटिल हो सकती हैं। ऐसे में एकीकृत पंजीकरण की व्यवस्था लागू होने पर कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया आसान हो सकती है।

    सरकार की ओर से जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को लेकर भी आंकड़े सामने रखे गए हैं। सरकार का कहना है कि 61 प्रतिशत करदाताओं का पंजीकरण बिना अधिकारी के हस्तक्षेप के तीन कार्यदिवस के भीतर किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल और कम हस्तक्षेप वाली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य भी कारोबारियों के लिए प्रक्रिया को सरल और तेज बनाना बताया जा रहा है।

    रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया में भी बदलाव की तैयारी है। प्रस्ताव के मुताबिक ऐसी व्यवस्था बनाई जा सकती है जिसमें खरीदार के लेजर में संबंधित बदलाव स्वतः दर्ज हो जाएं। इससे रिटर्न से जुड़ी प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और लेनदेन से संबंधित जानकारी को अधिक व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने में मदद मिल सकती है।

    जीएसटी से जुड़े नोटिस को लेकर भी कारोबारियों को राहत मिल सकती है। प्रस्ताव के तहत एक तय सीमा से कम मामलों में नोटिस जारी नहीं करने की व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। इससे छोटे मामलों में कारोबारियों को बार बार नोटिस और अनुपालन संबंधी प्रक्रिया से गुजरने की परेशानी कम हो सकती है। हालांकि किस सीमा तक के मामलों को इस प्रावधान में शामिल किया जाएगा यह काउंसिल के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा।

    रिफंड व्यवस्था में बदलाव भी बैठक के प्रमुख प्रस्तावों में शामिल है। रिफंड का दायरा सेवाओं के साथ साथ संयंत्र और मशीनरी पर चुकाए गए कर तक बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया है। अगर इसे मंजूरी मिलती है तो पात्र कारोबारियों के लिए रिफंड प्राप्त करने का दायरा बढ़ सकता है। इससे खास तौर पर ऐसे व्यवसायों को फायदा मिलने की उम्मीद है जिनमें मशीनरी और संयंत्र पर बड़ा निवेश किया जाता है।

    जीएसटी काउंसिल की बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें टैक्स व्यवस्था को सरल बनाने के साथ कारोबारियों की अनुपालन संबंधी परेशानियों को कम करने पर चर्चा होगी। हालांकि ये सभी प्रस्ताव फिलहाल बैठक में विचार के स्तर पर हैं। अंतिम तस्वीर काउंसिल के फैसले के बाद ही साफ होगी। यदि प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो रिफंड आईटीसी पंजीकरण और रिटर्न दाखिल करने जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जीएसटी व्यवस्था में बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • अमेरिका में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका…. पढ़ते हुए नौकरी करना पड़ेगा महंगा!

    अमेरिका में विदेशी छात्रों को बड़ा झटका…. पढ़ते हुए नौकरी करना पड़ेगा महंगा!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों (Foreign Students) के लिए साथ में नौकरी करना अब महंगा हो सकता है. ट्रंप प्रशासन ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (Optional Practical Training- OPT) कार्यक्रम में शामिल होने पर भारी भरकम फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, यह रकम छात्रों से सीधे नहीं, बल्कि संबंधित कॉलेज या यूनिवर्सिटी से ली जाएगी।

    दरअसल, होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने विदेशी छात्रों के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम में शुरुआती आवेदन पर 70,000 डॉलर (भारतीय ₹67.72 लाख रुपये) की भारी भरकम फीस लगाने का प्रस्ताव दिया है. हर नए छात्र के OPT कार्यक्रम में शुरुआती आवेदन के लिए स्कूल को 70,000 डॉलर देने होंगे. वहीं, कार्यक्रम को आगे बढ़ाने या नवीनीकरण के लिए 30,000 डॉलर फीस प्रस्तावित है।


    क्या है OPT कार्यक्रम?

    OPT के तहत विदेशी छात्रों को अपनी पढ़ाई से जुड़े क्षेत्र में अमेरिका में काम करने का मौका मिलता है. आम तौर पर छात्र ग्रेजुएशन के बाद एक साल तक काम कर सकते हैं. वहीं, साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स यानी STEM विषयों के छात्रों को अतिरिक्त दो साल तक काम करने का मौका मिल सकता है.

    इस प्रस्ताव से अमेरिकी कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि वे बड़ी संख्या में विदेशी छात्रों को दाखिला देते हैं. विदेशी छात्र इन संस्थानों के लिए फीस के एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं. इसके अलावा टेक कंपनियों और उन दूसरे उद्योगों पर भी असर पड़ सकता है, जहां विदेशी छात्रों की बड़ी संख्या में भर्ती होती है।


    सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

    होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इस शुल्क को वीजा कार्यक्रम में कथित धोखाधड़ी और दुरुपयोग रोकने की कोशिश बताया है. विभाग ने OPT को सस्ते विदेशी श्रम के लिए इस्तेमाल होने वाला माध्यम बताया है. वहीं, अंतरराष्ट्रीय शिक्षा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन NAFSA ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है. संगठन की CEO फांटा अव ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अमेरिका से दूर करने से अमेरिकी नवाचार, आर्थिक विकास, रोजगार और वैश्विक नेतृत्व पर असर पड़ सकता है।


    प्रस्ताव पर 60 दिन तक मांगी जाएगी राय

    यह अभी अंतिम फैसला नहीं है. प्रस्ताव पर जनता को 60 दिनों तक अपनी राय और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका मिलेगा. इसके बाद DHS इसे अंतिम रूप देकर लागू कर सकता है. हालांकि, उच्च शिक्षा संस्थानों और कारोबारी संगठनों की ओर से इस प्रस्ताव को अदालत में चुनौती दिए जाने की संभावना भी है. ऐसी कानूनी कार्रवाई से इसके लागू होने में देरी हो सकती है।

  • आम आदमी को झटका…. महंगाई पर लगाम कसने के बहाने बढ़ाया रेपो रेट… अब EMI करेगी जेब ढ़ीली!

    आम आदमी को झटका…. महंगाई पर लगाम कसने के बहाने बढ़ाया रेपो रेट… अब EMI करेगी जेब ढ़ीली!


    नई दिल्ली।
    तकनीकी रूप से बताया जाए तो रेपो रेट (Repo Rate) वह ब्याज दर होती है जिस पर रिजर्व बैंक (Reserve Bank) देश के कमर्शियल बैंकों (Commercial Banks) को उनके दैनिक कामकाज के लिए कर्ज देता है. देखने-सुनने में यह भले दो बैंकों के बीच की बात लगे, लेकिन जैसे ही रेप रेप बढ़ने की खबर आती है, आम आदमी की जेब पर इसका असर बेहद पेंचीदा और खर्चीला हो जाता है. साढ़े तीन साल बाद RBI ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है. इसके पीछे तर्क ये दिया गया है कि ईरान वॉर (Iran War) के कारण देश में बढ़ती महंगाई को 6 फीसदी के भीतर रोके रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।

    रिजर्व बैंक की दलील और उसके सामने के हालात अपनी जगह है, लेकिन आपकी और हमारी रसोई तक पहुंचने वाला यह एक बड़ा झटका भी है. बैंक को मिलने वाला महंगा कर्ज घूम-फिरकर आखिरकार आम इंसान की EMI, मकान के सपने और महीने के बजट पर ही भारी पड़ता है।

    रेपो रेट बढ़ने की पूरी कहानी को समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा. 2020 में जब कोविड महामारी की वजह से सब कुछ बंद पड़ गया था, तब बाजार में पैसे का बहाव बनाए रखने के लिए रिजर्व बैंक ने ब्याज दरें घटा दी थीं, ताकि लोग आसानी से लोन ले सकें और ठप पड़ी अर्थव्यवस्था में थोड़ी जान आए. लेकिन महामारी का दौर ढलते ही दुनिया में एक के बाद एक नए संकट शुरू हो गए।


    Repo Rate बढ़ा, अब 20, 30 और 50 लाख के लोन पर कितनी कटेगी EMI?

    पहले रूस-यूक्रेन का झगड़ा और अब ईरान-अमेरिका के बीच जारी जंग ने कच्चे तेल से लेकर दुनिया भर के बाजारों में आग लगा दी है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से मंगवाता है. जब दुनिया में तेल महंगा होता है, तो देश के भीतर माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिससे बाजार में हर चीज का भाव चढ़ जाता है. इस वैश्विक उथल-पुथल ने भारत में महंगाई को इस कदर भड़का दिया कि रिजर्व बैंक को साढ़े तीन साल बाद दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का फैसला लेना ही पड़ा.


    रिजर्व बैंक की नजरिया: महंगाई की आग बुझाने की मजबूरी

    रिजर्व बैंक की अपनी एक तय जिम्मेदारी है- बाजार में घूम रहे पैसे को इस तरह संभालना कि कीमतें काबू से बाहर न जाएं. जब बाजार में महंगाई का ग्राफ ऊपर भागने लगता है, तो रिजर्व बैंक का मानना होता है कि लोगों के पास खर्च करने के लिए पैसा थोड़ा कम किया जाए. ताकि डिमांड घटे और कीमतें स्थिर हों।

    अर्थशास्त्री इस पहलू पर सहमति देते हुए समझाते हैं कि जब महंगाई लंबी खिंच जाती है, तो वह आम परिवार की पूरी बचत को निगल जाती है. रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाकर एक तरह से ब्रेक लगाने की कोशिश की है. उसके लिए प्राथमिकता विकास की रफ्तार से ज्यादा इस बात की है कि रोजमर्रा के सामान इतने महंगे न हो जाएं कि आम इंसान की खरीदने की ताकत ही खत्म हो जाए।


    मोदी सरकार का नजरिया: भले राजनीतिक जोखिम हो, अर्थव्यवस्था का संतुलन जरूरी

    मोदी सरकार के लिए रिजर्व बैंक का यह फैसला एक कड़वी दवा जैसा है. एक तरफ सरकार चाहती है कि देश में नए उद्योग लगें, लोग कारोबार शुरू करें और युवाओं को नौकरियां मिलें, जिसके लिए सस्ते लोन की जरूरत होती है. कर्ज महंगा होने से व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ने का डर रहता है. इतना ही नहीं, सरकार यह अच्छी तरह जानती है कि रेपो रेट बढ़ने से जब EMI बढ़ेगी, तो भी लोग सरकार को ही कोसेंगे।

    लेकिन दूसरी तरफ, सरकार यह भी अच्छी तरह जानती है कि आम इंसान के लिए महंगाई से बड़ा कोई दर्द नहीं होता. अगर राशन, तेल और सब्जियों के दाम लगातार बढ़ते रहे, तो जनता का गुस्सा सीधे सरकार पर ही फूटता है. इसलिए सरकार के नजरिये से यह कदम भले ही थोड़े समय के लिए अप्रिय हो, लेकिन देश की आर्थिक साख बचाए रखने और रुपये को टूटने से रोकने के लिए यह कदम उठाना उसकी भी एक राजनीतिक मजबूरी बन गया है।


    आम नागरिक का संकट: बजट और सपनों पर टूटा पहाड़

    मध्यमवर्गीय और कामकाजी परिवारों के लिए इस फैसले का मतलब है हर महीने का गणित गड़बड़ा जाना. जब रिजर्व बैंक से बैंकों को महंगा कर्ज मिलेगा, तो बैंक बिना देर किए इसका बोझ अपने ग्राहकों पर डाल देंगे. इसका सबसे बड़ा थप्पड़ उन लोगों को लगेगा जिन्होंने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है।

  • बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें

    बागेश्वर धाम विवाद: बयान पर सवाल उठाने के बाद धमकी का दावा, साध्वी हर्षा बोलीं- मुझे डराने की कोशिश न करें


    भोपाल।
    बागेश्वर धाम को लेकर चल रहे विवाद के बीच साध्वी हर्षा रिछारिया उर्फ हर्षानंद गिरि ने एक नया वीडियो जारी कर लगातार धमकियां मिलने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें गंदे कमेंट, मैसेज, ई-मेल और धमकियां भेजी जा रही हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वह इन धमकियों से डरने वाली नहीं हैं और अपनी कही बात पर अब भी कायम हैं।

    साध्वी हर्षा ने कहा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो इसकी आशंका उन लोगों पर जाएगी, जिनके श्रद्धालुओं की ओर से उन्हें धमकियां दिए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, वीडियो में उन्होंने किसी व्यक्ति, संत, आश्रम या संस्था का नाम नहीं लिया है। धमकी मिलने के उनके दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर उठाया था सवाल

    विवाद की शुरुआत साध्वी हर्षा के उस वीडियो से हुई थी, जिसमें उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दिए गए बयान पर सवाल उठाए थे।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं, खासकर महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि कोई महिला अकेले धाम आती है तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। उनका कहना था कि धाम के मंदिर और हॉल की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली जा सकती है, लेकिन करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से लंबे समय तक धाम में नहीं रुकने तथा अपनी सुरक्षा और सामान का स्वयं ध्यान रखने की अपील भी की थी।

    हर्षा ने पूछा- फिर भरोसा किस पर करें?

    धीरेंद्र शास्त्री के इसी बयान पर साध्वी हर्षा ने सवाल उठाया था कि जब धाम के प्रमुख स्वयं अपने सेवादारों को लेकर श्रद्धालुओं को सावधान कर रहे हैं, तो परिवार अपने बच्चों और महिलाओं को वहां भेजते समय आखिर किस आधार पर भरोसा करें।

    उन्होंने लोगों से अपील की थी कि दर्शन के बाद ज्यादा समय तक धाम में न रुकें और वापस अपने घर लौट जाएं। नए वीडियो में हर्षा ने कहा कि वह अपनी इस सलाह से पीछे नहीं हटेंगी।

    कुंभ के दौरान भी धमकी मिलने का किया दावा

    साध्वी हर्षा ने नए वीडियो में कुंभ के दौरान भी धमकियां मिलने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय भी उन्होंने डरकर पीछे हटने के बजाय अपनी बात रखी थी। उनका कहना है कि अब भी धमकियों के बावजूद वह अपनी राय रखने से पीछे नहीं हटेंगी।

    उन्होंने कहा कि वह किसी के खिलाफ अपशब्द नहीं बोल रही हैं। किसी मुद्दे पर जो बात उन्हें सही या गलत लगती है, उस पर अपनी राय रखना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि धमकियों के जरिए उन्हें डराने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।