Blog

  • दुनिया के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट्स में भारत का दबदबा, अडानी ग्रुप के नवी मुंबई और गुवाहाटी टर्मिनल को वैश्विक सम्मान

    दुनिया के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट्स में भारत का दबदबा, अडानी ग्रुप के नवी मुंबई और गुवाहाटी टर्मिनल को वैश्विक सम्मान

    नई दिल्ली । भारत की विमानन अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है। अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के अंतर्गत विकसित दो प्रमुख हवाई अड्डों को वर्ष 2026 की दुनिया के सबसे खूबसूरत एयरपोर्ट्स की प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया है। इस उपलब्धि ने न केवल भारतीय विमानन क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है, बल्कि आधुनिक वास्तुकला, यात्रियों के अनुभव और सतत विकास के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को भी वैश्विक मंच पर स्थापित किया है।

    दुनियाभर में वास्तुकला और डिजाइन उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध प्रिक्स वर्साय पुरस्कारों के तहत नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तथा गुवाहाटी स्थित लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-2 को इस विशेष सूची में स्थान मिला है। यह सम्मान उन परियोजनाओं को दिया जाता है जो वास्तु सौंदर्य, नवाचार, पर्यावरणीय संतुलन और यात्रियों को बेहतर अनुभव प्रदान करने के मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करती हैं।

    नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-1 को उसके अनूठे और भविष्यवादी डिजाइन के लिए सराहा गया है। इसका स्थापत्य स्वरूप भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतीक कमल के फूल से प्रेरित है। आधुनिक तकनीक, विशाल संरचना, ऊर्जा दक्षता और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया यह टर्मिनल भारत के उभरते बुनियादी ढांचे की नई पहचान बनकर सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना देश में आधुनिक विमानन केंद्रों के विकास का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।

    वहीं, गुवाहाटी एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 ने भी अपनी विशिष्ट डिजाइन अवधारणा के कारण वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। इसके निर्माण में असम की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संपदा और स्थानीय जैव विविधता को विशेष महत्व दिया गया है। टर्मिनल का डिजाइन बांस और ऑर्किड जैसे क्षेत्रीय प्राकृतिक तत्वों से प्रेरित है, जो पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट पहचान को दर्शाता है। पर्यावरण-अनुकूल निर्माण तकनीकों और स्थानीय सौंदर्य को आधुनिक सुविधाओं के साथ जोड़ने का प्रयास इसे अन्य परियोजनाओं से अलग बनाता है।

    इस वैश्विक सूची में दुनिया के कई प्रतिष्ठित हवाई अड्डों को भी स्थान मिला है। इनमें यूरोप, अमेरिका और एशिया के प्रमुख विमानन केंद्र शामिल हैं, जिन्हें उनकी उन्नत सुविधाओं और विशिष्ट डिजाइन के लिए जाना जाता है। ऐसे प्रतिस्पर्धी वैश्विक परिदृश्य में भारतीय परियोजनाओं का चयन देश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में तेजी से विकसित हो रहे विमानन क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार देखा है। बढ़ती हवाई यात्रा, आधुनिक हवाई अड्डों का निर्माण और यात्रियों की सुविधाओं में सुधार ने देश को वैश्विक विमानन मानचित्र पर नई पहचान दिलाई है। नवी मुंबई और गुवाहाटी की यह उपलब्धि उसी परिवर्तनशील यात्रा का हिस्सा मानी जा रही है।

    विमानन और अवसंरचना क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की अंतरराष्ट्रीय मान्यता भविष्य में भारत में निवेश आकर्षित करने, पर्यटन को बढ़ावा देने और विश्वस्तरीय हवाई अड्डों के विकास को नई गति देने में सहायक होगी। साथ ही यह उपलब्धि भारतीय डिजाइन, इंजीनियरिंग और निर्माण क्षमता के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को भी दर्शाती है।

    वर्ष 2026 के अंत में इन चयनित परियोजनाओं में से कुछ को सर्वोच्च वैश्विक खिताब प्रदान किए जाने की संभावना है। ऐसे में भारतीय हवाई अड्डों की यह उपलब्धि आने वाले महीनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकती है तथा देश के विमानन क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है।

  • बुजुर्ग और बाइक के ऊपर से गुजर गया कंटेनर, फिर भी बच गई जान; पैर में गंभीर चोट, लगे 20 टांके

    बुजुर्ग और बाइक के ऊपर से गुजर गया कंटेनर, फिर भी बच गई जान; पैर में गंभीर चोट, लगे 20 टांके


    देवास  देवास में मंगलवार दोपहर एक ऐसा सड़क हादसा हुआ, जिसने मौके पर मौजूद लोगों को स्तब्ध कर दिया। मक्सी बाईपास चौराहे पर एक तेज रफ्तार कंटेनर ने बाइक सवार बुजुर्ग को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद बुजुर्ग सड़क पर गिर गए और उनकी बाइक कंटेनर के नीचे फंस गई। इसके बावजूद सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि कंटेनर उनके और बाइक के ऊपर से गुजर गया, लेकिन बुजुर्ग की जान बच गई। हालांकि हादसे में उनके पैर में गंभीर चोट आई है और डॉक्टरों को लगभग 20 टांके लगाने पड़े।

    जानकारी के अनुसार अचपल मालवीय नामक बुजुर्ग किसी अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अपने गांव लौट रहे थे। वे अपनी बाइक से मक्सी बाईपास चौराहे के पास पहुंचे ही थे कि पीछे से आ रहे एक कंटेनर ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कंटेनर की रफ्तार काफी तेज थी, जिसके कारण बुजुर्ग को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

    टक्कर लगते ही अचपल मालवीय सड़क पर गिर पड़े और उनकी बाइक कंटेनर के पहियों के नीचे फंस गई। हादसे का दृश्य इतना भयावह था कि आसपास मौजूद लोगों को लगा कि बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई होगी। लेकिन कुछ ही क्षण बाद जब उन्होंने बुजुर्ग को हरकत करते देखा तो सभी हैरान रह गए। लोगों ने तत्काल मदद के लिए दौड़ लगाई और पुलिस को सूचना दी।

    घायल बुजुर्ग ने बताया कि वे अंतिम संस्कार से लौट रहे थे और सामान्य गति से बाइक चला रहे थे। इसी दौरान पीछे से आए कंटेनर ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे के बाद उन्हें पैर में असहनीय दर्द महसूस हुआ और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।

    सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल देवास जिला अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनके पैर में गहरे घाव होने की पुष्टि की। डॉक्टरों ने घायल पैर में करीब 20 टांके लगाए और उन्हें निगरानी में भर्ती कर लिया।

    प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है कि इतना बड़ा कंटेनर एक व्यक्ति और उसकी बाइक के ऊपर से गुजर गया और फिर भी उसकी जान बच गई। हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि व्यस्त चौराहों और बाईपास मार्गों पर यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

    फिलहाल बुजुर्ग का उपचार जारी है और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। वहीं पुलिस मामले की जांच कर रही है और कंटेनर चालक की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।

  • बकाया किराया मांगना पड़ा भारी, युवक पर चाकू से हमला; बचाव में आए परिजन भी घायल

    बकाया किराया मांगना पड़ा भारी, युवक पर चाकू से हमला; बचाव में आए परिजन भी घायल


    देवास  देवास में बकाया किराया मांगने को लेकर हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। औद्योगिक क्षेत्र थाना अंतर्गत बुद्धा पार्क कॉलोनी में एक युवक पर चाकू से हमला कर दिया गया। घटना में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि उसे बचाने पहुंचे परिवार के अन्य सदस्यों को भी चोटें आई हैं। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए फरार आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

    जानकारी के अनुसार फरियादी किशोर पिता विक्रमसिंह मालवीय ने पुलिस को शिकायत दर्ज कराई कि उसके पुराने किरायेदार के बकाया रुपए दिलाने को लेकर राजेश लाठिया से विवाद हो गया था। बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते गाली-गलौज और फिर मारपीट में बदल गई।

    आरोप है कि विवाद बढ़ने पर राजेश लाठिया ने अपना आपा खो दिया और चाकू निकालकर किशोर पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घायल युवक की चीख-पुकार सुनकर उसके परिजन मौके पर पहुंचे और बीच-बचाव करने का प्रयास किया, लेकिन आरोपी ने उनके साथ भी मारपीट की, जिससे उन्हें भी चोटें आईं।

    पीड़ित परिवार का आरोप है कि हमले के दौरान आरोपी ने जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद आसपास के लोगों ने घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को सूचना दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच शुरू कर दी।

    थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के निर्देशन में आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी जानकारी और मुखबिर तंत्र की मदद से फरार आरोपी की लोकेशन का पता लगाया। इसके बाद दबिश देकर आरोपी राजेश पिता कमलकिशोर लाठिया (29) को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मूल रूप से भयागांव, थाना पीपलरावां का निवासी है और वर्तमान में बुद्धा पार्क कॉलोनी में रह रहा था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं क्षेत्र के लोगों ने भी घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि मामूली आर्थिक विवाद का हिंसक रूप लेना समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। पुलिस अब मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है और घायलों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

  • बुध ग्रह की कृपा से चमक सकता है करियर और कारोबार, बुधवार के ये सरल उपाय बदल सकते हैं सफलता की दिशा

    बुध ग्रह की कृपा से चमक सकता है करियर और कारोबार, बुधवार के ये सरल उपाय बदल सकते हैं सफलता की दिशा

    नई दिल्ली । ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्कशक्ति, शिक्षा, व्यापार और संचार का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। मान्यता है कि व्यक्ति के जीवन में निर्णय लेने की क्षमता, संवाद कौशल, स्मरण शक्ति और व्यावसायिक सफलता पर बुध ग्रह का विशेष प्रभाव पड़ता है। यही कारण है कि कुंडली में बुध की स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब बुध ग्रह शुभ और मजबूत स्थिति में होता है, तब व्यक्ति को शिक्षा, करियर, व्यापार और आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं इसके कमजोर होने पर कई प्रकार की चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

    ज्योतिषीय दृष्टि से बुध ग्रह व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता और व्यवहार को प्रभावित करता है। लेखन, पत्रकारिता, बैंकिंग, अकाउंटिंग, मार्केटिंग, मीडिया और व्यापार जैसे क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए इसकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। बुध की अनुकूल स्थिति व्यक्ति को तार्किक सोच, प्रभावी अभिव्यक्ति और बेहतर निर्णय क्षमता प्रदान करने वाली मानी जाती है। इसके विपरीत अशुभ बुध कई बार भ्रम, एकाग्रता की कमी, पढ़ाई में बाधा, संवाद संबंधी समस्याएं और व्यापारिक नुकसान जैसी स्थितियों का कारण बन सकता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन बुध देव को समर्पित माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष उपायों को अपनाकर बुध ग्रह की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है। माना जाता है कि हरे रंग का बुध ग्रह से विशेष संबंध है, इसलिए बुधवार को हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है। यह उपाय मानसिक संतुलन और सकारात्मकता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

    बुध ग्रह की कृपा प्राप्त करने के लिए मंत्र जाप का भी विशेष महत्व बताया गया है। बुधवार की सुबह स्नान के बाद श्रद्धापूर्वक “ॐ बुधाय नमः” अथवा “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नियमित मंत्र जाप से मानसिक एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। सूर्योदय के बाद शांत वातावरण में किए गए जाप को विशेष फलदायी माना जाता है।

    दान को भी बुध ग्रह को प्रसन्न करने का प्रभावी माध्यम माना गया है। बुधवार के दिन हरी मूंग, हरी सब्जियां, हरे वस्त्र, फल अथवा कांस्य के बर्तनों का दान जरूरतमंद लोगों को करने की परंपरा बताई गई है। इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री प्रदान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ कार्यों में शामिल माना जाता है।

    ज्योतिष शास्त्र में भगवान गणेश और बुध ग्रह का विशेष संबंध बताया गया है। इसलिए बुधवार को भगवान गणेश की पूजा, दुर्वा अर्पित करना तथा गणेश मंत्रों का जाप करना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गणपति की आराधना से बुद्धि, विवेक और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।

    बुध ग्रह के रत्न के रूप में पन्ना का विशेष महत्व बताया गया है। इसे धारण करने से बुद्धि, संवाद कौशल और निर्णय क्षमता में सुधार होने की मान्यता है। हालांकि किसी भी रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से परामर्श लेना आवश्यक माना जाता है ताकि व्यक्ति की कुंडली के अनुसार उचित निर्णय लिया जा सके।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार बुध ग्रह को मजबूत बनाने के लिए मधुर वाणी का प्रयोग, माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान, सेवा कार्यों में भागीदारी तथा सकारात्मक सोच बनाए रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे उपाय व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास के साथ-साथ करियर और आर्थिक उन्नति के मार्ग को भी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं।

  • शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी

    शंकराचार्य सदानंद सरस्वती ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग, बोले- मंदिरों को पर्यटन स्थल समझ रहे अधिकारी


    अयोध्या  अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों को लेकर देशभर में चर्चा के बीच द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने मंदिरों के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। जबलपुर प्रवास के दौरान उन्होंने कहा कि मंदिरों को केवल प्रशासनिक दृष्टि से नहीं, बल्कि धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से संचालित किया जाना चाहिए। इसी के साथ उन्होंने सनातन धर्म बोर्ड या सनातन धर्म संरक्षण समिति के गठन की मांग भी रखी।

    परमहंसी गंगा आश्रम के लिए रवाना होने से पहले जबलपुर में पत्रकारों से चर्चा करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि जब किसी कार्य की जिम्मेदारी उन लोगों को सौंप दी जाती है, जिन्हें उस विषय का पर्याप्त ज्ञान और अनुभव नहीं होता, तब इस प्रकार की घटनाएं सामने आती हैं। उनका कहना था कि मंदिरों की देखरेख करने वाले कई अधिकारी और कर्मचारी मंदिरों को धार्मिक आस्था के केंद्र के बजाय पर्यटन स्थल के रूप में देखते हैं, जबकि करोड़ों श्रद्धालु वहां दर्शन, साधना और आध्यात्मिक शांति की प्राप्ति के लिए जाते हैं।

    उन्होंने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के अधिकांश मंदिर शासन के अधीन हैं और इनकी देखरेख करने वाले अधिकारियों का लगातार तबादला होता रहता है। ऐसे में उन्हें न तो धार्मिक परंपराओं की गहरी समझ होती है और न ही शास्त्रों, विधि-विधान तथा पाप-पुण्य की अवधारणा का पर्याप्त ज्ञान होता है। यही कारण है कि मंदिरों के संचालन और संरक्षण में अपेक्षित संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।

    अयोध्या में सामने आई कथित चोरी की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शंकराचार्य ने कहा कि यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि लोग अपनी मेहनत और विश्वास की कमाई मंदिरों में अर्पित करते हैं, इसलिए उस धन का उपयोग पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। यदि किसी ने इस प्रकार का अपराध किया है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक स्थल पर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    स्वामी सदानंद सरस्वती ने कहा कि मंदिरों की आय का उपयोग गौशालाओं, पाठशालाओं, यज्ञशालाओं, धर्मशालाओं और औषधालयों जैसे जनकल्याणकारी कार्यों में होना चाहिए। इसके साथ ही मंदिरों के आसपास के क्षेत्रों का भी समुचित विकास किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के केंद्र नहीं हैं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और सामाजिक जीवन के महत्वपूर्ण आधार हैं।

    उन्होंने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद यह अपेक्षा थी कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा पद्धति और परंपराओं को अधिक मजबूती मिलेगी, लेकिन कई क्षेत्रों में यह लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया। शंकराचार्य ने जोर देकर कहा कि धार्मिक स्थलों का संचालन ऐसे लोगों को सौंपा जाना चाहिए जिन्हें धर्म, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों की समझ हो। उन्होंने सरकारों से भी आग्रह किया कि वे मंदिरों की संपत्तियों और धरोहरों के संरक्षण की जिम्मेदारी निभाएं, लेकिन धार्मिक संस्थानों के धन और संचालन में अनावश्यक हस्तक्षेप से बचें।

  • जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा

    जबलपुर में नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा, आय से अधिक संपत्ति मामले में घर पर छापा


    जबलपुर जबलपुर में मंगलवार को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की टीम ने नगर निगम के प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी पोला राव के निवास पर छापामार कार्रवाई कर हड़कंप मचा दिया। आय से अधिक संपत्ति की शिकायत मिलने के बाद कोर्ट से सर्च वारंट प्राप्त कर यह कार्रवाई की गई। सुबह शुरू हुई जांच देर तक जारी रही, जिसमें अधिकारियों ने संपत्ति, बैंक खातों और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की पड़ताल की।

    जानकारी के अनुसार, पोला राव वर्तमान में जबलपुर नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग में प्रभारी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं। मूल रूप से आंध्रप्रदेश निवासी पोला राव का निवास विजय नगर क्षेत्र स्थित मुस्कान प्लाजा में है, जहां ईओडब्ल्यू की टीम ने पहुंचकर तलाशी अभियान शुरू किया। अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड, बीमा पॉलिसियों और अन्य वित्तीय अभिलेखों की जांच की।

    प्रारंभिक जांच में ईओडब्ल्यू को जबलपुर में पोला राव के नाम एक फ्लैट और लगभग 10 हजार वर्गफुट का प्लॉट होने की जानकारी मिली है। इसके अलावा आंध्रप्रदेश में करीब एक एकड़ कृषि भूमि से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दौरान सामने आए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इन संपत्तियों का वास्तविक मूल्य और उनकी खरीद के स्रोत की जांच करना आवश्यक है।

    ईओडब्ल्यू के अधिकारियों के अनुसार जांच में चार दोपहिया वाहन और एक चारपहिया वाहन की जानकारी भी मिली है, जिनकी अनुमानित कीमत 15 से 16 लाख रुपए बताई जा रही है। टीम ने इन वाहनों से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच शुरू कर दी है। साथ ही बैंक खातों में हुए लेन-देन, निवेश और बीमा योजनाओं से संबंधित अभिलेखों को भी जब्त किया गया है।

    जांच के दौरान अधिकारियों का ध्यान पोला राव के पारिवारिक संबंधों और उनसे जुड़े संपत्ति विवरणों पर भी गया है। ईओडब्ल्यू के अनुसार उनकी बहन और बहनोई भी जबलपुर में निवास करते हैं। उनके मकान और उससे संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि संबंधित संपत्ति नजूल भूमि पर बनी हुई है, इसलिए उसके वैधानिक पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।

    ईओडब्ल्यू के डीएसपी मनजीत सिंह ने बताया कि फिलहाल सभी दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि अधिकारी की घोषित आय और उनके नाम पर मौजूद संपत्तियों के बीच कितना अंतर है। यदि जांच में आय से अधिक संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं तो आगे नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    गौरतलब है कि पोला राव वर्तमान में नगर निगम के कई महत्वपूर्ण वार्डों का प्रभार संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ हुई यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बन गई है। देर शाम तक जारी जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनके पास कुल कितनी चल-अचल संपत्ति है और उसका स्रोत क्या है। फिलहाल ईओडब्ल्यू की कार्रवाई जारी है और अधिकारी पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

  • ‘पेपर लीक नहीं, सिर्फ कंप्रोमाइज हुआ था’, घनश्याम तिवाड़ी के बयान से नई बहस, धर्मेंद्र प्रधान को बताया बधाई का पात्र

    ‘पेपर लीक नहीं, सिर्फ कंप्रोमाइज हुआ था’, घनश्याम तिवाड़ी के बयान से नई बहस, धर्मेंद्र प्रधान को बताया बधाई का पात्र

    नई दिल्ली । राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा से जुड़े विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी का एक बयान राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। देशभर में परीक्षा की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर चल रही बहस के बीच तिवाड़ी ने दावा किया कि संबंधित परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ था, बल्कि वह केवल “कंप्रोमाइज” हुआ था। उनके इस बयान ने परीक्षा प्रक्रिया और उससे जुड़े घटनाक्रम को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    तिवाड़ी ने कहा कि किसी परीक्षा को पेपर लीक तभी माना जा सकता है जब प्रश्नपत्र के सभी या अधिकांश प्रश्न परीक्षा से पहले पूरी तरह बाहर आ जाएं और बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों तक पहुंच जाएं। उनके अनुसार संबंधित मामले में ऐसी स्थिति नहीं थी। उन्होंने कहा कि कुछ विद्यार्थियों द्वारा कुछ प्रश्नों को याद करके दूसरे स्थानों तक पहुंचाने की जानकारी सामने आई थी, जिसे पेपर लीक की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनके मुताबिक यह स्थिति पेपर के कंप्रोमाइज होने की थी, न कि पूर्ण रूप से लीक होने की।

    बीजेपी सांसद ने इस पूरे मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि जैसे ही परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए, सरकार ने गंभीरता दिखाते हुए पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की। उनके अनुसार परीक्षा को रद्द करने, दोबारा आयोजन सुनिश्चित करने और अभ्यर्थियों को राहत देने जैसे कदम सरकार की जवाबदेही को दर्शाते हैं। तिवाड़ी ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में संबंधित मंत्री की आलोचना के बजाय उनकी तत्परता की सराहना की जानी चाहिए।

    नीट विवाद को लेकर विपक्ष द्वारा लगातार सरकार पर हमले किए जा रहे हैं। इसी संदर्भ में तिवाड़ी ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्र संवाद कार्यक्रम पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस मामले को लेकर राजनीतिक अभियान चलाया जा रहा है, उसके तथ्यों को पहले पूरी तरह समझना आवश्यक है। उनका मानना है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक मंचों की बजाय संस्थागत और प्रशासनिक स्तर पर अधिक गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

    तिवाड़ी ने राजस्थान की राजनीति का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान राज्य में कई भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर विवाद सामने आए थे, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है और इसी दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परीक्षा संबंधी मामलों पर दिए गए ऐसे बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का केंद्र बने रह सकते हैं। एक ओर विपक्ष परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तापक्ष सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को पर्याप्त और प्रभावी बता रहा है। ऐसे में छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा जगत की नजरें अब उन सुधारात्मक उपायों पर टिकी हैं, जिनसे भविष्य में किसी भी परीक्षा की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर सवाल न उठें।

    नीट विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश की परीक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक विमर्श का महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। आने वाले समय में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष दोनों की रणनीतियां छात्रों और युवाओं के बीच व्यापक चर्चा का विषय बनी रह सकती हैं।

  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को जबलपुर दौरे पर, योग दिवस और दीक्षांत समारोह में लेंगी हिस्सा

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को जबलपुर दौरे पर, योग दिवस और दीक्षांत समारोह में लेंगी हिस्सा


    जबलपुर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून को मध्य प्रदेश के जबलपुर दौरे पर आ रही हैं। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर जिला प्रशासन, पुलिस और विभिन्न विभागों ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर कार्यक्रम स्थलों की व्यवस्थाओं तक हर पहलू पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए पूरे शहर में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और अधिकारियों द्वारा लगातार निरीक्षण किया जा रहा है।

    जिला कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 20 जून की शाम लगभग 6 बजे जबलपुर पहुंचेंगी। वह करीब 18 घंटे तक शहर में रहेंगी और इस दौरान दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शामिल होंगी। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर केंद्र सरकार की सुरक्षा गाइडलाइन और ब्लू बुक के अनुसार व्यापक इंतजाम किए जा रहे हैं। सभी विभागों को उनकी जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं और समन्वय के साथ तैयारियां पूरी की जा रही हैं।

    राष्ट्रपति के आगमन से पहले प्रशासन द्वारा 20 जून को फाइनल रिहर्सल भी आयोजित की जाएगी। इस रिहर्सल में सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, प्रोटोकॉल और कार्यक्रम संचालन से जुड़े सभी पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा। पुलिस विभाग ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं और संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर जबलपुर के गैरिसन ग्राउंड में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में शामिल होंगी। योग दिवस के इस विशेष आयोजन में बड़ी संख्या में नागरिकों, विद्यार्थियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना देगी।

    योग दिवस कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय पहुंचेंगी, जहां वह विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। समारोह के दौरान विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों को उपाधियां और सम्मान प्रदान किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी इस कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।

    दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के साथ मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राजेश कुमार वर्मा सहित कई गणमान्य अतिथि मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर उच्च शिक्षा, शोध और नवाचार से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश भी विद्यार्थियों को दिए जाने की संभावना है।

    प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रपति की छोटी बेटी के भी इस दौरे में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद राष्ट्रपति उसी दिन दिल्ली के लिए रवाना हो जाएंगी।

    राष्ट्रपति के दौरे को लेकर जबलपुर में उत्साह का माहौल है। प्रशासन का प्रयास है कि सभी कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हों और सुरक्षा व व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की कमी न रहे। राष्ट्रपति का यह दौरा शहर के लिए गौरव और महत्व का अवसर माना जा रहा है।

  • ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत

    ट्विशा शर्मा मौत केस में बढ़ी हलचल, गिरिबाला ने कोर्ट में रखीं कई मांगें; 30 जून तक बढ़ी न्यायिक हिरासत


    भोपाल भोपाल  के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मंगलवार को हुई अदालत की सुनवाई ने एक बार फिर इस बहुचर्चित प्रकरण को सुर्खियों में ला दिया। मामले में आरोपी पति समर्थ सिंह और उनकी मां, सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत 30 जून तक बढ़ा दी। इस दौरान गिरिबाला सिंह ने जेल में मिलने वाली सुविधाओं और जांच प्रक्रिया से जुड़े कई मुद्दे अदालत के समक्ष रखे।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला सिंह ने कहा कि जेल प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके मामले से संबंधित खबरों को काट दिया जाता है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि उन्हें बिना किसी कटौती के पूरा अखबार पढ़ने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपने मामले से जुड़ी खबरों और घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त कर सकें।

    इसके अलावा उन्होंने वकीलों से मुलाकात के लिए निर्धारित 20 मिनट की समय सीमा को अपर्याप्त बताते हुए इसे समाप्त करने या बढ़ाने की मांग की। गिरिबाला का कहना था कि मामला गंभीर और जटिल है, इसलिए प्रभावी कानूनी सलाह के लिए अधिक समय जरूरी है। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि उन्हें और उनके बेटे समर्थ सिंह को एक साथ अपने अधिवक्ताओं से मिलने की अनुमति दी जाए, जिससे कानूनी रणनीति पर बेहतर समन्वय किया जा सके।

    गिरिबाला सिंह ने अदालत के समक्ष यह भी आपत्ति दर्ज कराई कि ट्विशा शर्मा के परिजन और रिश्तेदार लगातार मीडिया में बयान दे रहे हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जांच के दौरान ट्विशा की जब्त की गई दवाइयों का जब्ती पंचनामा अभी तक बचाव पक्ष को उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसे उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

    सुनवाई के दौरान गिरिबाला ने सीबीआई द्वारा दाखिल न्यायिक हिरासत बढ़ाने संबंधी आवेदन की प्रति भी मांगी। अदालत के निर्देश पर संबंधित दस्तावेज उनके वकीलों को उपलब्ध करा दिए गए। वहीं ट्विशा पक्ष के अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने अदालत को बताया कि सीबीआई को अभी तक दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। यह रिपोर्ट जांच की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    इसके बाद सीबीआई ने दोनों आरोपियों की न्यायिक हिरासत बढ़ाने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए 30 जून तक बढ़ा दिया। एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और कई अहम पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    इधर, मामले में लीगल एड वकीलों की भूमिका को लेकर भी विवाद गहराता नजर आ रहा है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को शिकायत भेजकर कुछ लीगल एड वकीलों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि गिरिबाला सिंह के न्यायिक कार्यकाल के दौरान नियुक्त कुछ वकील आरोपी पक्ष से जुड़े दिखाई दिए। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

    अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में सभी की निगाहें सीबीआई की आगे की जांच, दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और 30 जून को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं। जांच में सामने आने वाले तथ्य ही इस मामले की आगामी दिशा तय करेंगे।

  • AI निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और एयरफोर्स से पेपर डिलीवरी पर विवाद, NEET री-टेस्ट से पहले अन्नामलाई और बीजेपी आमने-सामने

    AI निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और एयरफोर्स से पेपर डिलीवरी पर विवाद, NEET री-टेस्ट से पहले अन्नामलाई और बीजेपी आमने-सामने

    नई दिल्ली । देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल NEET री-टेस्ट से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक बहस तेज हो गई है। आगामी 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अभूतपूर्व सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। हालांकि इन व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न पक्षों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।

    हाल के वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल से जुड़े मामलों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इसी पृष्ठभूमि में इस बार NEET री-टेस्ट के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है। परीक्षा प्रश्नपत्रों को देशभर के विभिन्न केंद्रों तक पहुंचाने के लिए विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित फेस रिकग्निशन तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा।

    इन सुरक्षा उपायों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर ऐसी व्यवस्थाएं नहीं होनी चाहिएं जो छात्रों के लिए अतिरिक्त तनाव का कारण बन जाएं। उन्होंने कहा कि लंबी जांच प्रक्रियाएं, बढ़ी हुई निगरानी और अतिरिक्त सत्यापन छात्रों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकते हैं, विशेष रूप से तब जब वे पहले से ही एक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी परीक्षा की तैयारी कर रहे हों।

    अन्नामलाई ने यह भी तर्क दिया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रमुख उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा संबंधी दबाव कम करना था। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था इस लक्ष्य के विपरीत दिखाई देती है। उन्होंने परीक्षा से पहले एडमिट कार्ड डाउनलोड करने में आई तकनीकी समस्याओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मुद्दे छात्रों की चिंता को और बढ़ा सकते हैं।

    वहीं भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इन आलोचनाओं का जवाब देते हुए कहा है कि परीक्षा की विश्वसनीयता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि बायोमेट्रिक सत्यापन, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल पहचान जैसी व्यवस्थाएं आज दुनिया की कई प्रमुख परीक्षाओं में सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। उनका मानना है कि इन उपायों का उद्देश्य किसी पर दबाव बनाना नहीं बल्कि योग्य और मेहनती छात्रों के हितों की रक्षा करना है।

    परीक्षा एजेंसियों का भी कहना है कि हाल के वर्षों में सामने आए पेपर लीक नेटवर्क और संगठित नकल गिरोहों को देखते हुए सुरक्षा मानकों को मजबूत करना आवश्यक हो गया था। इसी क्रम में डिजिटल संचार माध्यमों की निगरानी और कुछ प्लेटफॉर्म्स की पहुंच पर अस्थायी नियंत्रण जैसे कदम भी उठाए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा की निष्पक्षता और छात्रों की सुविधा दोनों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है। जहां मजबूत सुरक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली में विश्वास बढ़ाती है, वहीं यह भी आवश्यक है कि छात्रों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक दबाव का सामना न करना पड़े। ऐसे में NEET री-टेस्ट केवल एक परीक्षा नहीं बल्कि परीक्षा प्रबंधन और सुरक्षा मॉडल की भी महत्वपूर्ण परीक्षा बन गया है, जिसके परिणाम भविष्य की राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की दिशा तय कर सकते हैं।