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  • पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    पीएम मोदी ने IIT दिल्ली के छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए किया तैयार, नई सोच और समाधान खोजने पर दिया जोर

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजधानी दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान यानी IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले तीन हजार से अधिक छात्रों को संबोधित किया और उन्हें जीवन की नई पारी के लिए शुभकामनाएं दीं। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में छात्रों को यह समझाने की कोशिश की कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके सामने वास्तविक दुनिया की ऐसी चुनौतियां आएंगी, जिनका सामना करने के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी सोच, मेहनत, रचनात्मकता और नए विचारों के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

    पीएम मोदी ने कहा कि कॉलेज और बाहर की दुनिया में काफी अंतर होता है। पढ़ाई के दौरान छात्रों को यह मालूम होता है कि उन्हें कौन सा विषय पढ़ना है और परीक्षा में किस तरह के सवाल सामने आ सकते हैं। लेकिन नौकरी, व्यवसाय या रोजमर्रा की जिंदगी में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं। कई बार अचानक कोई नई समस्या सामने आती है और उस समय यह भी स्पष्ट नहीं होता कि असल समस्या क्या है। ऐसे अवसरों पर व्यक्ति को खुद स्थिति को समझना पड़ता है और समाधान तलाशना होता है। प्रधानमंत्री ने छात्रों से कहा कि उन्हें भविष्य की ऐसी परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।

    उन्होंने छात्रों के भविष्य के सपनों का जिक्र करते हुए कहा कि आज समारोह में मौजूद हर विद्यार्थी के मन में आने वाले कल की अपनी अलग तस्वीर होगी। कोई पहली नौकरी और पहली सैलरी का इंतजार कर रहा होगा, तो कोई नए शहर में नई शुरुआत की तैयारी कर रहा होगा। कुछ विद्यार्थी अपना पहला स्टार्टअप शुरू करने का सपना भी देख रहे होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी का रास्ता और सपना अलग हो सकता है, लेकिन दीक्षांत समारोह का यह अवसर सभी के लिए समान रूप से विशेष है।

    समारोह में पीएम मोदी ने IIT दिल्ली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी नई पहलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने इन पहलों के लिए संस्थान और छात्रों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने संकेत दिया कि तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में विद्यार्थियों के लिए नई तकनीकों को समझना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ अपनी मौलिक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को मजबूत करना भी जरूरी है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों के साथ हल्के-फुल्के अंदाज में संवाद करते हुए उनके मन में चल रहे विचारों का जिक्र किया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह बाबा बागेश्वर नहीं हैं, लेकिन कुछ तो पता चलता होगा कि विद्यार्थियों के मन में क्या चल रहा है। उन्होंने IIT दिल्ली में छात्रों के पहले दिन से लेकर दीक्षांत समारोह तक के सफर का उल्लेख करते हुए कहा कि ओरिएंटेशन से कनवोकेशन तक की यात्रा पूरी करना उनके लिए संतोष का विषय होगा।

    पीएम मोदी ने कहा कि IIT दिल्ली से निकलने वाले छात्र केवल डिग्री लेकर आगे नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि देश के लिए कुछ बड़ा करने का सपना भी लेकर जा रहे हैं। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनकी नई यात्रा के लिए बधाई दी और उम्मीद जताई कि वे अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल समाज तथा देश की प्रगति में करेंगे। उन्होंने छात्रों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने और हर चुनौती को सीखने तथा आगे बढ़ने के अवसर के रूप में देखने का संदेश दिया।

  • मेरठ में कांवड़ियों पर CM योगी ने बरसाए फूल, शिवभक्तों ने लगाए ‘बोल बम’ के जयकारे

    मेरठ में कांवड़ियों पर CM योगी ने बरसाए फूल, शिवभक्तों ने लगाए ‘बोल बम’ के जयकारे


    मेरठ। कांवड़ यात्रा के दौरान शनिवार को मेरठ में शिवभक्तों का भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दुल्हैडा चुंगी पहुंचे और हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा कर उनका अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही कांवड़ मार्ग पर उत्साह का माहौल बन गया और शिवभक्तों ने ‘बोल बम’ के जयकारे लगाए।

    भगवा रंग में सजे कांवड़ मार्ग पर जब फूलों की बारिश हुई तो पूरा माहौल भक्तिमय नजर आया। मुख्यमंत्री करीब 30 मिनट तक कार्यक्रम स्थल पर मौजूद रहे।

    पुष्पवर्षा के बाद हिंडन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए CM
    कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार से शोभित विश्वविद्यालय स्थित हेलीपैड के लिए रवाना हुए। यहां से उनका हेलिकॉप्टर गाजियाबाद के हिंडन एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ। मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी। कांवड़ियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर यातायात, सुरक्षा और मार्गों की निगरानी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती गई।

    कांवड़ मार्ग पर चाक-चौबंद रही सुरक्षा
    मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए शोभित विश्वविद्यालय के हेलीपैड से लेकर दुल्हैडा चुंगी तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पूरे मार्ग में जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के साथ कांवड़ मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को भी लगातार मॉनिटर किया गया। कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा एजेंसियां भी सक्रिय रहीं। मुख्यमंत्री की मौजूदगी को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने किसी भी तरह की चूक रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती।

    मंच के सामने काफी देर उड़ता रहा ड्रोन, पुलिस में मचा हड़कंप
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यक्रम के दौरान उस समय सुरक्षा को लेकर हलचल मच गई, जब मंच के सामने आसमान में एक ड्रोन काफी देर तक उड़ता दिखाई दिया। कार्यक्रम स्थल पर ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं थी।

    ड्रोन नजर आने के बाद पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने उसके संचालक की तलाश शुरू कर दी। आसपास मौजूद लोगों से पूछताछ की गई और ड्रोन ऑपरेटर की पहचान करने का प्रयास किया गया। इसी दौरान कार्यक्रम स्थल पर लगे माइक से घोषणा कराई गई कि ड्रोन उड़ाने वाला व्यक्ति तत्काल उसे नीचे उतार ले। घोषणा के कुछ देर बाद ड्रोन को नीचे उतार लिया गया।

  • पेजेशकियान ने 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की कथित योजना का किया खुलासा, मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील

    पेजेशकियान ने 48 घंटे में ईरान पर कब्जे की कथित योजना का किया खुलासा, मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील

    नई दिल्ली । ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव और सैन्य संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान ने यह लड़ाई शुरू नहीं की थी, बल्कि उसके खिलाफ पहले सैन्य कार्रवाई की गई। पेजेशकियान के अनुसार, ईरान पर लगातार दबाव बनाया गया और उसे कमजोर करने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बावजूद देश अपनी स्थिति पर मजबूती से कायम है। उन्होंने कहा कि ईरानी नेतृत्व ने संकट के बीच देश की एकता और मजबूती बनाए रखने पर जोर दिया है।

    पेजेशकियान ने बताया कि संघर्ष शुरू होने से पहले उनकी सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहती थी। उनका कहना है कि ईरान युद्ध नहीं चाहता था और तनाव को कूटनीतिक माध्यमों से कम करने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, उनके मुताबिक दूसरी ओर से सैन्य कार्रवाई की गई, जिसके बाद हालात तेजी से बदल गए। राष्ट्रपति ने कहा कि ईरान पर सैन्य और राजनीतिक दबाव के बावजूद देश ने अपने फैसलों से पीछे हटने के बजाय राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। उनके बयान में ईरान की ओर से संघर्ष को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश दिखाई देती है।

    ईरानी राष्ट्रपति ने विरोधियों की कथित रणनीति का जिक्र करते हुए कहा कि यह अनुमान लगाया गया था कि ईरान ज्यादा समय तक दबाव का सामना नहीं कर पाएगा। उनके अनुसार, सीरिया जैसे हालात पैदा करके 48 घंटे के भीतर ईरान पर कब्जा करने या उसे कमजोर करने की योजना बनाई गई थी। पेजेशकियान ने दावा किया कि यह आकलन गलत साबित हुआ। उन्होंने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों के दौरान ईरान ने अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया और देश को टूटने नहीं दिया। राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि ईरान आने वाले समय में भी अपने फैसलों और राष्ट्रीय हितों पर कायम रहेगा।

    पेजेशकियान ने मुस्लिम देशों से एकजुट होने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि अगर मुस्लिम देश एक साथ खड़े होते हैं तो बाहरी दबाव और चुनौतियों का सामना करना कम मुश्किल हो सकता है। उनके इस आह्वान को मौजूदा क्षेत्रीय संकट के बीच समर्थन जुटाने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय देशों की एकजुटता से बाहरी दबाव का प्रभाव कम किया जा सकता है। ऐसे में पेजेशकियान का संदेश केवल घरेलू जनता तक सीमित नहीं है, बल्कि मुस्लिम देशों के लिए भी राजनीतिक संकेत देता है।

    ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर भी पेजेशकियान ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उनसे संपर्क करना आसान नहीं है। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने खामेनेई की मौजूदगी को देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। राष्ट्रपति की यह टिप्पणी ईरान के मौजूदा नेतृत्व और संकट के दौरान निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खामेनेई की भूमिका को लेकर ईरानी नेतृत्व की प्राथमिकता भी इस बयान में दिखाई देती है।

    पेजेशकियान के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है। ईरानी राष्ट्रपति एक तरफ बातचीत की कोशिशों और युद्ध शुरू नहीं करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ किसी भी दबाव के सामने मजबूती से खड़े रहने का संदेश दे रहे हैं। आने वाले समय में सैन्य गतिविधियों के साथ कूटनीतिक प्रयास भी महत्वपूर्ण होंगे। यदि बातचीत का रास्ता खुलता है तो तनाव कम करने की संभावना बन सकती है, लेकिन सैन्य टकराव बढ़ने की स्थिति में इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।

  • UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    UP बीजेपी में संगठनात्मक फेरबदल, क्षेत्रीय और मोर्चा प्रभारियों की नियुक्ति

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठन को और सक्रिय करने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने क्षेत्र और विभिन्न मोर्चों के प्रभारियों की नियुक्ति कर दी है। पार्टी की ओर से जारी सूची में छह नेताओं को प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दिलीप पटेल को अवध क्षेत्र का प्रभारी बनाया गया है।

    पार्टी के फैसले के मुताबिक रामप्रताप सिंह चौहान को पश्चिम, गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर, दिलीप पटेल को अवध, रमेश सिंह को काशी और अभिजात मिश्रा को गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी नियुक्त किया गया है।

    मोर्चों की जिम्मेदारी भी तय
    भाजपा ने अलग-अलग मोर्चों के लिए भी प्रभारियों के नाम घोषित किए हैं। सूची के अनुसार राजेश चौधरी को युवा मोर्चा प्रभारी, संजय राय को पिछड़ा मोर्चा प्रभारी, डॉ. धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित मोर्चा प्रभारी, कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा प्रभारी, डॉ. प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा प्रभारी, देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी, शंकर गिरी को किसान मोर्चा प्रभारी बनाया है।

    संगठन के अन्य पदों पर भी नियुक्तियां
    पार्टी ने संगठन से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण दायित्व भी तय किए हैं। गोविंद नारायण शुक्ला को मुख्यालय प्रभारी बनाया गया है। वहीं प्रदेश मंत्री नरेंद्र शर्मा को मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारी मिली है।

    इसके अलावा प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रज बहादुर को विस्तारक योजना का संयोजक बनाया गया है। अर्चना मिश्रा को ‘मन की बात’ का संयोजक और राहुल वाल्मीकि को सह-संयोजक नियुक्त किया गया है। भाजपा की इन नियुक्तियों को प्रदेश में संगठनात्मक गतिविधियों को तेज करने और अलग-अलग क्षेत्रों व मोर्चों के बीच समन्वय मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • खलनायक से नायक बनने की कहानी, शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन पर बन रही बड़ी डॉक्यूमेंट्री।

    खलनायक से नायक बनने की कहानी, शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन पर बन रही बड़ी डॉक्यूमेंट्री।

    मुंबई ।हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा के जीवन पर आधारित एक भव्य डॉक्यूमेंट्री की शूटिंग अपनी पूर्णता की ओर अग्रसर है। फिल्म और टेलीविजन संस्थान पुणे के छात्र रहे शत्रुघ्न सिन्हा के भारतीय सिनेमा और सार्वजनिक जीवन में तय किए गए लंबे सफर को इस नॉन-फिक्शन फीचर में विस्तार से दिखाया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऑस्कर विजेता लघु फिल्म की संपादक संचारी दास इस प्रोजेक्ट के संपादन से जुड़ी हुई हैं, जबकि इसका निर्देशन शशि रंजन कर रहे हैं। व्यापक ऐतिहासिक शोध के बाद तैयार की जा रही इस डॉक्यूमेंट्री का नब्बे प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

    यह डॉक्यूमेंट्री एक अखिल भारतीय स्तर का प्रोजेक्ट है, जिसमें भारतीय फिल्म जगत की कई जानी-मानी हस्तियां शामिल हो रही हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दक्षिण और हिंदी सिनेमा के दिग्गज कलाकार जैसे रजनीकांत, चिरंजीवी, मोहन बाबू, सलमान खान, आमिर खान और अनिल कपूर इस डॉक्यूमेंट्री में नजर आएंगे। ये सभी सितारे शत्रुघ्न सिन्हा के साथ अपने अनुभवों और उनके अभिनय सफर के प्रभाव को दर्शकों के सामने साझा करते हुए दिखाई देंगे।

    सिनेमा में शत्रुघ्न सिन्हा का सफर बेहद अनोखा रहा है। उन्होंने वर्ष 1969 में अपने करियर की शुरुआत की और शुरुआत में एक सशक्त खलनायक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी कड़क आवाज, संवाद अदायगी और शैली ने उन्हें हिंदी सिनेमा का सबसे लोकप्रिय एंटी-हीरो बना दिया। वर्ष 1976 में आई ब्लॉकबस्टर फिल्म कालीचरण के बाद उनके करियर को नई दिशा मिली और वे भारतीय सिनेमा के स्थापित एक्शन हीरो के रूप में उभरे।

    इसके बाद उन्होंने विश्वनाथ, दोस्ताना, काला पत्थर और नसीब जैसी कई क्लासिक फिल्मों के जरिए दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी। अभिनय के बाद उन्होंने राजनीति के क्षेत्र में भी सफल कदम बढ़ाए और लोक सेवा में अपनी नई पहचान बनाई। यह डॉक्यूमेंट्री उनके शुरुआती संघर्षों, स्टारडम के दौर और राजनीतिक जीवन के विभिन्न पड़ावों को दर्शकों के सामने प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास करेगी।

  • बांग्लादेशी राजनीति में नया बवाल, बीएनपी सांसद ने शेख हसीना की अवामी लीग के विलय का किया समर्थन।

    बांग्लादेशी राजनीति में नया बवाल, बीएनपी सांसद ने शेख हसीना की अवामी लीग के विलय का किया समर्थन।

    नई दिल्ली ।बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत से दिए गए बयान और दिसंबर में स्वदेश वापसी की घोषणा के बीच देश की राजनीति में एक नया विवाद गहरा गया है। सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने पूर्व प्रधानमंत्री की पार्टी अवामी लीग को अपना राजनीतिक सहयोगी बताते हुए दोनों दलों के भविष्य में विलय का सुझाव दिया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली पार्टी के सांसद के इस अप्रत्याशित बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है, क्योंकि दोनों दलों के बीच ऐतिहासिक रूप से गहरा राजनीतिक विरोध रहा है।

    सुनामगंज-2 संसदीय क्षेत्र से सांसद नासिर उद्दीन चौधरी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि अवामी लीग को दुश्मन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वे एक सहयोगी की भूमिका में हैं। उन्होंने 1971 के मुक्ति संग्राम के साझा इतिहास का हवाला देते हुए दावा किया कि आने वाले समय में अवामी लीग का विलय बीएनपी में हो सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश की अंतरिम व्यवस्था और वर्तमान सरकार शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है तथा अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं।

    सांसद के इस बयान के तुरंत बाद बीएनपी के शीर्ष नेतृत्व और सरकारी प्रवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह विचार पूरी तरह से व्यक्तिगत है और इसका पार्टी की आधिकारिक नीति से कोई संबंध नहीं है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि पूर्ववर्ती शासन के दौरान हुए घटनाक्रमों और राजनीतिक दमन के कारण दोनों दलों के बीच किसी भी प्रकार के तालमेल या विलय का प्रश्न ही नहीं उठता। सरकारी प्रतिनिधियों ने शेख हसीना के हालिया बयानों पर भी आपत्ति जताते हुए इसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे और राजनीतिक स्थिरता के प्रतिकूल बताया है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वर्ष 2024 के घटनाक्रमों के बाद से बांग्लादेश की राजनीति अत्यंत संवेदनशील दौर से गुजर रही है। एक तरफ जहां सरकार पूर्व प्रधानमंत्री को वापस लाने और उन पर कानूनी प्रक्रिया चलाने के प्रयास में जुटी है, वहीं पार्टी के भीतर से आने वाले इस तरह के बयानों से संगठन की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सांसद के इस विवादित बयान से आम जनता और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है कि आगामी चुनावों से पहले देश के राजनीतिक समीकरण क्या मोड़ लेंगे।

  • तुर्किए और पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के रक्षा समझौते पर भड़का ईरान, बताया कागजी समझौता।

    तुर्किए और पाकिस्तान के साथ सऊदी अरब के रक्षा समझौते पर भड़का ईरान, बताया कागजी समझौता।

    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया के कूटनीतिक और सामरिक परिदृश्य में उस समय नया मोड़ आ गया जब सऊदी अरब, तुर्किए और पाकिस्तान ने मक्का में एक ऐतिहासिक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस त्रिपक्षीय समझौते के मुख्य प्रावधान के अनुसार, तीनों में से किसी भी एक देश पर होने वाले किसी भी सैन्य हमले को तीनों देशों पर सामूहिक हमला माना जाएगा। इस उच्चस्तरीय बैठक में सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किए के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शामिल हुए। हालांकि, इस समझौते के सामने आते ही पड़ोसी देश ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की गई है।

    ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति आयोग के वरिष्ठ सदस्य इब्राहिम रजाई ने इस समझौते पर तीखा हमला बोलते हुए इसे बेअसर करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि तुर्किए और पाकिस्तान के साथ केवल कागजी समझौते कर लेने से सऊदी अरब को वास्तविक सुरक्षा हासिल नहीं हो सकती। उन्होंने अतीत का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि जिस प्रकार दशकों तक पश्चिमी देशों पर निर्भर रहने के बाद भी स्थायी सुरक्षा नहीं मिल सकी, उसी प्रकार यह समझौता भी निष्प्रभावी साबित होगा। ईरान ने सुझाव दिया कि सुरक्षा की तलाश करने के बजाय अपनी क्षेत्रीय नीतियों में बुनियादी बदलाव लाने की आवश्यकता है।

    दूसरी ओर, समझौते में शामिल तीनों देशों ने इस रक्षा तंत्र को पूरी तरह से रक्षात्मक और संतुलित बताया है। सऊदी अरब के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी विशेष सैन्य गुट या सांप्रदायिक समूह के निर्माण के उद्देश्य से नहीं उठाया गया है और न ही यह उनके अन्य अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करेगा। तुर्किए के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह समझौता किसी एक देश के खिलाफ केंद्रित नहीं है और भविष्य में अन्य क्षेत्रीय देशों के शामिल होने का मार्ग भी खुला रखा गया है।

    सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता तीनों देशों की अलग-अलग क्षमताओं के एकत्रीकरण का परिणाम है। इसमें पाकिस्तान का विशाल सैन्य अनुभव, सऊदी अरब की मजबूत आर्थिक क्षमता और तुर्किए की आधुनिक रक्षा तकनीक शामिल है। जहां एक तरफ यह गठबंधन तीनों देशों के बीच दशकों पुराने संबंधों को संस्थागत रूप देने का प्रयास है, वहीं ईरान की तीखी आपत्ति से स्पष्ट है कि इस रक्षा सौदे ने खाड़ी और दक्षिण एशियाई क्षेत्र की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

  • ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।

    ई20 पेट्रोल पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, कहा- 'दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली है'।


    नई दिल्ली ।
    देश में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित यानी ई20 पेट्रोल को लेकर राजनीतिक घमासान काफी तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक विशेष वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार की इस नीति की नीयत और निष्पादन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि आमतौर पर कहावत है कि दाल में कुछ काला है, लेकिन ई20 पेट्रोल के मामले में तो पूरी दाल ही काली नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस निर्णय से देश की आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है और यह सीधे तौर पर लोगों की जेब काटने जैसा है।

    राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी किए गए वीडियो में स्पष्ट किया कि ई20 ईंधन का मुद्दा सीधे तौर पर देश के करोड़ों वाहन चालकों और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल से चारपहिया वाहनों, मोटरसाइकिलों और स्कूटरों के इंजन पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही वाहनों का माइलेज घटने के कारण लोगों को ईंधन पर अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। विपक्षी नेता ने आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को शांत नहीं होने देगी और इसके खिलाफ आने वाले दिनों में व्यापक स्तर पर जन-अभियान चलाया जाएगा।

    मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है कि ई20 लागू करते समय सरकार ने उपभोक्ताओं को सस्ता ईंधन देने का जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया गया है। पार्टी के अनुसार, अधिकांश पेट्रोल पंपों पर केवल ई20 ईंधन उपलब्ध कराए जाने के कारण वाहन मालिकों के पास अन्य कोई विकल्प नहीं बचा है। विपक्ष का आरोप है कि माइलेज कम होने से उपभोक्ताओं पर अरबों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है, जबकि इसका सबसे अधिक वित्तीय लाभ केवल इथेनॉल उत्पादन से जुड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को ही मिल रहा है।

    दूसरी ओर, केंद्र सरकार इस नीति को देशहित और पर्यावरण के अनुकूल बताकर इसका बचाव कर रही है। सरकार का तर्क है कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता को कम करना और कीमती विदेशी मुद्रा बचाना है। इसके साथ ही, इथेनॉल उत्पादन से देश के गन्ना किसानों और कृषि क्षेत्र को बेहतर मूल्य मिलने की बात कही गई है। हालांकि, विपक्ष अब इस मुद्दे को आम जनता के आर्थिक नुकसान से जोड़कर बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहा है, जिससे इस विषय पर आने वाले समय में राजनीतिक पारा और चढ़ने की पूरी संभावना है।

  • श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए मथुरा पहुंचे भरतपुर के गुलाबी पत्थर, नौ अगस्त से कारसेवा का एलान।

    मथुरा । श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति और मंदिर निर्माण अभियान को लेकर मथुरा में हलचल काफी तेज हो गई है। राधाकुंड क्षेत्र के जुल्हैंदी स्थित चित्रगुप्त पीठ में भव्य मंदिर निर्माण के उद्देश्य से मंगाए गए गुलाबी पत्थरों की पहली खेप देर रात पहुंच गई है। ये विशेष पत्थर राजस्थान के भरतपुर स्थित बंसीपहाड़पुर से मंगवाए गए हैं। उल्लेखनीय है कि इन्हीं प्रसिद्ध पत्थरों का उपयोग अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण में भी किया गया है। चित्रगुप्त पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज के नेतृत्व में पत्थरों के आगमन के साथ ही नौ अगस्त से विधिवत कारसेवा और पत्थर तराशने का काम शुरू करने का ऐलान किया गया है।

    स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए नौ अगस्त को आश्रम से शंखनाद किया जाएगा। इसके लिए एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें देश भर के 13 अखाड़ों के साधु-संतों और प्रमुख धर्माचार्यों को आमंत्रित किया गया है। महाराज ने स्पष्ट किया कि जन्मस्थान पर भव्य मंदिर के निर्माण हेतु कुल पांच हजार मीट्रिक टन गुलाबी पत्थरों का ऑर्डर दिया गया है। पत्थरों की पहली खेप पहुंचने से यह साफ हो गया है कि पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार कार्य को गति दी जाएगी।

    इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए जुलाई माह से ही गतिविधियां जारी थीं। स्वामी सच्चिदानंद महाराज ने पूर्व में अयोध्या आंदोलन की तर्ज पर कारसेवा का आह्वान किया था, जिसके समर्थन में उन्होंने हरिद्वार जाकर वरिष्ठ संतों से मुलाकात भी की थी। इस पहल को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और निर्मोही अखाड़े सहित कई प्रमुख धार्मिक संगठनों का समर्थन प्राप्त हो चुका है। संतों के इस रुख और पत्थरों के आगमन के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस व्यवस्था पूरी तरह से सतर्क हो गई है।

    प्रशासनिक अधिकारियों ने शांति व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति की समीक्षा के लिए कई बार आयोजकों से बातचीत की थी। हालांकि, आश्रम परिसर में पत्थरों के पहुंचने के बाद संतों का रुख पूरी तरह से स्पष्ट दिखाई दे रहा है। नौ अगस्त से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में संतों का बड़ा जमावड़ा होने की उम्मीद है, जहां से आगामी रूपरेखा पर निर्णय लिया जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने मथुरा और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक व धार्मिक सरगर्मियों को और बढ़ा दिया है।

  • दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    नई दिल्ली ।दक्षिण अफ्रीका की सेडरबर्ग पहाड़ियों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला विशेष पौधा रूइबोस इन दिनों अपनी विशिष्टताओं के कारण वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ‘लाल झाड़ी’ के नाम से मशहूर यह पौधा केवल दक्षिण अफ्रीका के लगभग साठ हजार हेक्टेयर के सीमित भौगोलिक क्षेत्र में ही पैदा होता है। इसकी पत्तियों से तैयार की जाने वाली लाल चाय की मांग दुनिया के पचास से अधिक देशों में तेजी से बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इसके अंतरराष्ट्रीय निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह हर्बल पेय पदार्थों के बाजार में एक प्रमुख स्थान हासिल कर रहा है।

    इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से कैफीन-मुक्त होना है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। जो लोग सामान्य चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन के सेवन से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बनकर उभरा है। अब इस पौधे का उपयोग केवल पारंपरिक चाय बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के हर्बल पेय पदार्थों और स्किन केयर उत्पादों में भी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है।

    भौगोलिक दृष्टि से यह पौधा अत्यंत संवेदनशील है और इसे पनपने के लिए विशिष्ट प्रकार की मिट्टी, कम बारिश और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। इन्हीं कठोर प्राकृतिक शर्तों के कारण दुनिया के अन्य हिस्सों में इसकी व्यावसायिक खेती कर पाना लगभग असंभव रहा है। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जापान इसके कुल वैश्विक निर्यात का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अतिरिक्त अमरीका और यूरोपीय देशों में भी इसकी खपत में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।

    हालांकि, वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम इस अनोखे पौधे की खेती के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्षेत्र में हुई कम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण इसके कुल वार्षिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम का यही रुख बना रहा, तो आने वाले समय में इस सीमित प्राकृतिक संसाधन की आपूर्ति को बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।