Blog

  • दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    दक्षिण अफ्रीका के खास पौधे रूइबोस की दुनिया भर में बढ़ी मांग, कैफीन-फ्री चाय बनी पहली पसंद।

    नई दिल्ली ।दक्षिण अफ्रीका की सेडरबर्ग पहाड़ियों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला विशेष पौधा रूइबोस इन दिनों अपनी विशिष्टताओं के कारण वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। ‘लाल झाड़ी’ के नाम से मशहूर यह पौधा केवल दक्षिण अफ्रीका के लगभग साठ हजार हेक्टेयर के सीमित भौगोलिक क्षेत्र में ही पैदा होता है। इसकी पत्तियों से तैयार की जाने वाली लाल चाय की मांग दुनिया के पचास से अधिक देशों में तेजी से बढ़ रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, इसके अंतरराष्ट्रीय निर्यात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे यह हर्बल पेय पदार्थों के बाजार में एक प्रमुख स्थान हासिल कर रहा है।

    इस पौधे की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह से कैफीन-मुक्त होना है। इसके अलावा इसमें एंटीऑक्सीडेंट और पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। जो लोग सामान्य चाय या कॉफी में मौजूद कैफीन के सेवन से बचना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बनकर उभरा है। अब इस पौधे का उपयोग केवल पारंपरिक चाय बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के हर्बल पेय पदार्थों और स्किन केयर उत्पादों में भी बड़े पैमाने पर किया जाने लगा है।

    भौगोलिक दृष्टि से यह पौधा अत्यंत संवेदनशील है और इसे पनपने के लिए विशिष्ट प्रकार की मिट्टी, कम बारिश और शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है। इन्हीं कठोर प्राकृतिक शर्तों के कारण दुनिया के अन्य हिस्सों में इसकी व्यावसायिक खेती कर पाना लगभग असंभव रहा है। एशियाई और यूरोपीय बाजारों में इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अकेले जापान इसके कुल वैश्विक निर्यात का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसके अतिरिक्त अमरीका और यूरोपीय देशों में भी इसकी खपत में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है।

    हालांकि, वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग के बावजूद जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मौसम इस अनोखे पौधे की खेती के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों के दौरान क्षेत्र में हुई कम बारिश और बढ़ते तापमान के कारण इसके कुल वार्षिक उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम का यही रुख बना रहा, तो आने वाले समय में इस सीमित प्राकृतिक संसाधन की आपूर्ति को बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।

  • श्रीलंका बोर्ड इलेवन के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में भारतीय गेंदबाजों की खुली पोल, पहले दिन लुटाए 363 रन।

    श्रीलंका बोर्ड इलेवन के खिलाफ वॉर्म-अप मैच में भारतीय गेंदबाजों की खुली पोल, पहले दिन लुटाए 363 रन।

    नई दिल्ली ।आगामी टेस्ट श्रृंखला की तैयारियों के सिलसिले में कोलंबो में खेले जा रहे तीन दिवसीय अभ्यास मैच के पहले ही दिन भारतीय गेंदबाजी आक्रमण की कमजोरियां खुलकर सामने आ गईं। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों की ढीली गेंदों का पूरा फायदा उठाते हुए दिन का खेल खत्म होने तक 8 विकेट के नुकसान पर 363 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। इस मुकाबले में नियमित कप्तान की अनुपस्थिति के कारण टीम की कमान संभाल रहे अनुभवी बल्लेबाज के नेतृत्व में भारतीय गेंदबाजों को शुरुआती सफलता हासिल करने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

    मेजबान टीम के सलामी बल्लेबाजों ने भारतीय तेज गेंदबाजों और स्पिनरों पर दबाव बनाते हुए पहले विकेट के लिए शतकीय साझेदारी निभाई। निशान मदुष्का और रविंदु रसंथा के अर्धशतकों ने श्रीलंका इलेवन को मजबूत आधार प्रदान किया। इसके बाद मध्यक्रम में सोनल दिनुशा ने भी जिम्मेदारी से बल्लेबाजी करते हुए अर्धशतक जड़ा। भारतीय मुख्य गेंदबाजों की लाइन-लेंथ पूरी तरह से बिखरी हुई नजर आई, जिसके चलते श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने आसानी से चार रन प्रति ओवर से भी अधिक की औसत से रन बनाए।

    हालांकि, खेल के दूसरे और तीसरे सत्र में स्पिन गेंदबाजों ने वापसी का प्रयास किया। रवींद्र जडेजा, मानव सुथार और कुलदीप यादव ने आपस में विकेट बांटकर विपक्षी टीम की रन गति को रोकने की कोशिश की। इसके बावजूद, आगामी टेस्ट मैचों की तैयारियों के लिहाज से लगभग सभी प्रमुख गेंदबाज काफी महंगे साबित हुए। प्रसिद्ध कृष्णा, मोहम्मद सिराज और सारांश जैन जैसे गेंदबाज विकेट हासिल करने में नाकाम रहे और उन्होंने प्रति ओवर चार से अधिक रन लुटाए।

    उंगली की चोट के कारण टीम के नियमित कप्तान शुभमन गिल पहले दिन मैदान पर नहीं उतर सके, जिससे टीम प्रबंधन की चिंताएं थोड़ी और बढ़ गई हैं। टेस्ट श्रृंखला शुरू होने से पहले यह अभ्यास मैच खिलाड़ियों की फॉर्म और लय परखने का अहम अवसर माना जा रहा था। गेंदबाजी विभाग के इस प्रदर्शन ने टीम प्रबंधन को अपनी रणनीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है ताकि मुख्य मुकाबलों में इस तरह की गलतियों से बचा जा सके।

  • पेट्रोल-डीजल के दाम कब घटेंगे? हरदीप पुरी ने दिया जवाब, जानिए क्‍या कहा ?

    पेट्रोल-डीजल के दाम कब घटेंगे? हरदीप पुरी ने दिया जवाब, जानिए क्‍या कहा ?


    नई दिल्ली। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में पिछले दो महीनों में दो बार कटौती के बाद अब लोगों की नजर पेट्रोल और डीजल के दामों पर है। सवाल उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल सस्ता होगा? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने इस सवाल का जवाब देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों को काफी हद तक नियंत्रित रखा गया है।

    भारत में महज 4% बढ़ी कीमत

    हरदीप पुरी ने एक कार्यक्रम में पेट्रोल-डीजल की कीमतों की तुलना भारत और दूसरे देशों से करते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों में भारत में ईंधन की कीमतें लगभग स्थिर रही हैं। उनके मुताबिक, अगर पूरे चार साल की अवधि को देखा जाए तो कीमतों में कमी ही आई है।

    पेट्रोलियम मंत्री ने इसका श्रेय केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी में कटौती को दिया। उन्होंने बताया कि नवंबर 2021, अप्रैल 2024 और मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाई। इन फैसलों से देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली।

    पुरी के अनुसार, फ्रांस और जर्मनी में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में करीब 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में यह वृद्धि 40 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसके मुकाबले भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

    E20 विवाद पर भी बोले हरदीप पुरी

    पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रण यानी E20 को लेकर चल रहे विवाद पर भी पेट्रोलियम मंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर इस मुद्दे को विवाद का रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।

    पुरी ने कहा कि देश में हर दिन करीब 6 से 7 करोड़ उपभोक्ता पेट्रोल पंपों पर ईंधन भरवाते हैं। उन्होंने दावा किया कि 1.07 लाख पेट्रोल पंपों की जांच के दौरान केवल चार जगहों पर ईंधन में मिलावट पाई गई। तेल कंपनियों की ओर से रोजाना 2,000 से अधिक पेट्रोल पंपों की जांच की जा रही है।

    उन्होंने ईंधन में मिलावट की तुलना खाने-पीने की चीजों में होने वाली मिलावट और हवा में मौजूद प्रदूषण से करते हुए कहा कि भारत में बायोफ्यूल ब्लेंडिंग का कार्यक्रम अच्छी तरह आगे बढ़ रहा है।

    सरकार के सामने कीमतें घटाने की चुनौती

    सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी में कटौती के जरिए पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत, रुपये की विनिमय दर और टैक्स जैसे कई कारक घरेलू ईंधन कीमतों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अगली बड़ी कटौती को लेकर हरदीप पुरी ने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई है।

  • सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ बैरकपुर में लगे विवादित पोस्टर, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा तनाव।

    सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ बैरकपुर में लगे विवादित पोस्टर, पीएम मोदी से मुलाकात के बाद बढ़ा तनाव।

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब बैरकपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद पार्थ भौमिक के खिलाफ उनके अपने ही क्षेत्र में जगह-जगह विवादित पोस्टर देखने को मिले। तृणमूल कांग्रेस का दामन छोड़कर हाल ही में नई पार्टी में शामिल हुए भौमिक के खिलाफ लगाए गए इन पोस्टरों में उन्हें गद्दार करार दिया गया है और स्थानीय नागरिकों को उनसे सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है। यह घटनाक्रम नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ उनकी हुई उच्चस्तरीय बैठकों के तुरंत बाद सामने आया है।

    दीर्घकालिक राजनीतिक करियर वाले पार्थ भौमिक लंबे समय तक तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं। वे 2011 से 2021 के बीच तीन बार विधायक चुने गए और इसके बाद 2024 के आम चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर बैरकपुर से सांसद बने थे। हालांकि, राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद उन्होंने पार्टी और इंडिया गठबंधन से दूरी बना ली तथा नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया का हिस्सा बनकर बीजेपी को अपना समर्थन दे दिया। दिल्ली में शीर्ष नेताओं के साथ उनकी बैठकों और तस्वीरों के सार्वजनिक होने के बाद से ही उनके खिलाफ राजनीतिक विरोध मुखर होने लगा था।

    बैरकपुर क्षेत्र में दिखे इन पोस्टरों पर किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक नाम दर्ज नहीं है, बल्कि इन्हें स्थानीय नागरिकों के नाम से लगाया गया है। पोस्टरों में भौमिक की तस्वीर के साथ जनता से विश्वासघात करने के आरोप जड़े गए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य में तृणमूल कांग्रेस और बागी नेताओं के बीच की कड़वाहट को और अधिक गहरा कर दिया है। स्थानीय स्तर पर इन पोस्टरों के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी का दौर भी तेज हो गया है।

    स्थानीय नेताओं का कहना है कि पार्टी बदलने और गठबंधन बदलने के फैसले से क्षेत्र के उन लाखों मतदाताओं में भारी नाराजगी है, जिन्होंने उन्हें 2024 के चुनाव में अपना समर्थन दिया था। विरोधियों का दावा है कि यह आक्रोश आम जनता और मतदाताओं की भावना का परिणाम है जो खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वहीं, समर्थक इसे राजनीतिक द्वेष से प्रेरित और विरोधी दलों की हताशा का नतीजा बता रहे हैं।

    संसदीय क्षेत्र में पोस्टरों के जरिए शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन बंगाल की भावी राजनीति में बढ़ते तनाव का स्पष्ट संकेत दे रहा है। दिल्ली में बैठकों के बाद उभरे इस विवाद से बैरकपुर सहित आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ गई हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर विरोध और समर्थन की राजनीति और तीखी होने की संभावना जताई जा रही है।

  • महुआ मोइत्रा केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर CJP प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया, उठाए सवाल

    महुआ मोइत्रा केस पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर CJP प्रवक्ता ने दी प्रतिक्रिया, उठाए सवाल


    नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की एक आपराधिक मामले में पुलिस के सामने वर्चुअल पेशी की मांग सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में विवाद खड़ा हो गया है। अब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए जज की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

    अंडे फेंके जाने का दिया गया था हवाला

    महुआ मोइत्रा के खिलाफ फेसबुक पोस्ट से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज है। कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें 14 अगस्त को जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट में महुआ की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने मांग की थी कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से पुलिस के सामने जाने के बजाय वर्चुअली पेश होने की अनुमति दी जाए।

    वकील ने अदालत को बताया कि पिछली बार अपने निर्वाचन क्षेत्र के पुलिस स्टेशन जाने के दौरान महुआ पर अंडे फेंके गए थे। ऐसे में दोबारा वहां जाने पर भीड़ द्वारा उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका है।

    जस्टिस दीपांकर दत्ता की टिप्पणी पर विवाद

    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने वर्चुअल पेशी की मांग पर राहत देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस दत्ता ने टिप्पणी की कि राजनीति में आने के बाद महुआ को अंडों से डर क्यों लगता है, जबकि स्वतंत्रता सेनानियों ने गोलियां तक अपने सीने पर झेली थीं।

    सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद महुआ मोइत्रा की ओर से दायर याचिका वापस ले ली गई, जिसके बाद अदालत ने उसे खारिज कर दिया।

    CJP प्रवक्ता ने जज पर उठाए सवाल

    अदालत की टिप्पणी के बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के जज चाहते हैं कि महुआ मोइत्रा गोलियां खाएं। उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति और न्यायिक जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए।

    सौरव दास ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में यह टिप्पणी निंदनीय है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर महुआ मोइत्रा को कुछ होता है तो इसके लिए जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ जिम्मेदार होगी। उन्होंने न्यायिक जवाबदेही की जरूरत बताते हुए यहां तक कहा कि ऐसे मामलों में जजों को इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया जाना चाहिए या महाभियोग चलना चाहिए।

    CJP संस्थापक ने भी जताई आपत्ति

    CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब अदालत चाहती है कि हर कोई गोलियां खाए। उन्होंने कहा कि यदि संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश विपक्षी नेताओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी करते हैं, तो आम नागरिक के लिए क्या उम्मीद बचती है।

    मोइत्रा को पहले भी मिल चुकी है अंतरिम राहत

    इस मामले से जुड़े एक अन्य प्रकरण में कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को महुआ मोइत्रा को पांच अक्टूबर तक किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दी थी। यह मामला कथित तौर पर नफरत फैलाने वाले भाषण से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा ने आरोपों को मनगढ़ंत बताया है।

  • क्रिकेट इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय पूरा, वनडे फॉर्मेट ने हासिल किया 5000 मुकाबलों का ऐतिहासिक मुकाम।

    क्रिकेट इतिहास का एक और स्वर्णिम अध्याय पूरा, वनडे फॉर्मेट ने हासिल किया 5000 मुकाबलों का ऐतिहासिक मुकाम।


    नई दिल्ली । 
    अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सबसे लोकप्रिय प्रारूपों में से एक वनडे क्रिकेट ने हाल ही में 5000 मुकाबलों का एक ऐतिहासिक और गौरवशाली पड़ाव पार कर लिया है। स्कॉटलैंड और कनाडा के बीच खेला गया रोमांचक मैच इस फॉर्मेट के इतिहास का 5000वां मुकाबला बना, जिसमें स्कॉटलैंड ने 9 रन से जीत दर्ज की। टेस्ट क्रिकेट के बाद अस्तित्व में आए वनडे फॉर्मेट ने बीते दशकों में दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। हालांकि, मौजूदा दौर में टी20 फॉर्मेट के तेजी से बढ़ते प्रभाव और व्यस्त शेड्यूल के बीच वनडे के भविष्य और प्रासंगिकता को लेकर भी खेल जगत में नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

    सांख्यिकीय आंकड़ों के लिहाज से देखें तो तीनों प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में अब तक सबसे अधिक मुकाबले वनडे क्रिकेट में ही खेले गए हैं। टेस्ट क्रिकेट में जहां 2600 से अधिक मैच हुए हैं, वहीं टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की संख्या भी 4000 के पार पहुंच चुकी है। जिस गति से टी20 मैचों का आयोजन हो रहा है, उसे देखते हुए खेल विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में टी20 सबसे ज्यादा खेले जाने वाला फॉर्मेट बन सकता है। इसके बावजूद वनडे क्रिकेट का इतिहास कई ऐसे व्यक्तिगत और टीम रिकॉर्ड्स से समृद्ध है, जिन्हें तोड़ना आज भी किसी भी खिलाड़ी के लिए बेहद कठिन चुनौती है।

    इस 5000वें ऐतिहासिक मैच के अवसर पर वनडे क्रिकेट के सबसे यादगार और लंबे समय तक कायम रहने वाले रिकॉर्ड्स को याद किया गया। इनमें सबसे शीर्ष पर भारतीय बल्लेबाजी के आधार स्तंभ रहे सचिन तेंदुलकर के 18426 रनों का महारिकॉर्ड है। सचिन ने वर्ष 2012 में अपना अंतिम वनडे मुकाबला खेला था, लेकिन उनके संन्यास के इतने वर्षों बाद भी दुनिया का कोई भी बल्लेबाज उनके इस विशाल स्कोर तक नहीं पहुंच पाया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सचिन का प्रभुत्व इस फॉर्मेट पर किस स्तर का रहा था।

    सचिन के इस सबसे बड़े रिकॉर्ड के सबसे करीब वर्तमान समय के महान बल्लेबाज विराट कोहली हैं, जिनके नाम 14900 से अधिक वनडे रन दर्ज हैं। हालांकि, सचिन और कोहली के बीच अभी भी 3400 से अधिक रनों का बड़ा फासला है। कोहली भले ही वनडे प्रारूप पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहे हों, लेकिन मैचों की घटती संख्या और करियर के इस पड़ाव को देखते हुए सचिन का रिकॉर्ड तोड़ पाना आसान नहीं होगा। यही कारण है कि क्रिकेट विशेषज्ञ 18426 रनों के इस आंकड़े को खेल इतिहास के सबसे सुरक्षित रिकॉर्ड्स में से एक मानते हैं।

    इसके अलावा वनडे इतिहास में श्रीलंका का सबसे बड़ा टीम स्कोर, विव रिचर्ड्स की ऐतिहासिक पारियां, चमिंडा वास और मुथैया मुरलीधरन की घातक गेंदबाजी तथा सनथ जयसूर्या और शाहिद अफरीदी के सबसे तेज तूफानी शतक-अर्धशतक जैसे रिकॉर्ड्स ने भी दशकों तक प्रशंसकों को रोमांचित किया है। सचिन तेंदुलकर के नाम दर्ज सबसे ज्यादा शतकों और वकार यूनिस के सबसे ज्यादा पांच विकेट हॉल का रिकॉर्ड भी इस फॉर्मेट की शान रहा है। 5000 मैचों का यह सफर साबित करता है कि वनडे क्रिकेट का रोमांच और इसके ऐतिहासिक आंकड़े हमेशा खास बने रहेंगे।

  • FCRA बिल पर संसद में संग्राम के आसार, कांग्रेस ने 10-12 अगस्त के लिए जारी किया व्हिप

    FCRA बिल पर संसद में संग्राम के आसार, कांग्रेस ने 10-12 अगस्त के लिए जारी किया व्हिप


    नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम सप्ताह में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक यानी FCRA बिल को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। कांग्रेस ने शुक्रवार दोपहर लोकसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी कर 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। माना जा रहा है कि दूसरे विपक्षी दल भी इसी तरह के निर्देश जारी कर सकते हैं।

    10 अगस्त को बिल पेश होने की चर्चा

    संभावना जताई जा रही है कि FCRA संशोधन विधेयक 10 अगस्त को लोकसभा में पेश किया जा सकता है। चूंकि यह विधेयक गृह मंत्रालय से संबंधित है, इसलिए विपक्ष की नजर गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी पर भी है।

    शुक्रवार सुबह राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे के कार्यालय में हुई बैठक में कांग्रेस नेतृत्व ने सहयोगी दलों से भी सोमवार से अपने सांसदों की सदन में पर्याप्त मौजूदगी सुनिश्चित करने को कहा है।

    विपक्ष पहले से ही 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से सदन में बयान देने की मांग कर रहा है। इस मुद्दे को लेकर मॉनसून सत्र के दौरान कई बार सदन की कार्यवाही प्रभावित हुई है।

    कांग्रेस के लोकसभा व्हिप मणिकम टैगोर ने कहा कि पार्टी अगले सप्ताह परिसीमन और FCRA बिल के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमित शाह पिछले 12 दिनों से सदन में मौजूद नहीं हैं और सरकार छात्रों के विरोध प्रदर्शन से ध्यान भटकाने की कोशिश कर सकती है।

    SP और TMC भी विपक्ष के साथ

    FCRA बिल को लेकर इंडिया ब्लॉक के अन्य दल भी कांग्रेस के साथ नजर आ रहे हैं। समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी विपक्ष के सामूहिक एजेंडे का समर्थन करेगी। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सपा भी व्हिप जारी कर सकती है।

    सपा नेता ने यह आशंका भी जताई कि सरकार FCRA बिल पर चर्चा के दौरान अमित शाह की जगह गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय को सदन में भेज सकती है।

    वहीं, तृणमूल कांग्रेस के एक वरिष्ठ सांसद के मुताबिक, पार्टी ने भी अपने सभी सांसदों को सोमवार से सदन में मौजूद रहने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, सभी दलों की ओर से औपचारिक व्हिप जारी करना जरूरी नहीं है और कुछ पार्टियां अपने सांसदों को अनौपचारिक निर्देश भी देती हैं।

    FCRA बिल को लेकर क्या है विवाद?

    FCRA संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर पहले से विवाद है। खास तौर पर ईसाई संगठनों में उस प्रावधान को लेकर चिंता जताई जा रही है, जिसके तहत FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म होने वाले संगठनों की संपत्तियों पर सरकार द्वारा नामित प्राधिकरण को पूर्वव्यापी अधिकार मिलने की आशंका है।

    कई चर्च और ईसाई संस्थानों का निर्माण विदेशी चंदे से हुआ है और वे FCRA के दायरे में आते हैं। ऐसे में इस विधेयक को भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील माना जा रहा है, खासकर केरल जैसे राज्यों में जहां पार्टी ईसाई समुदाय के बीच अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

    हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने बुधवार को संकेत दिया था कि विधेयक में कोई दंडात्मक पूर्वव्यापी प्रावधान नहीं होगा। इसके बाद गुरुवार को मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी चिंताएं रखीं और ज्ञापन सौंपा। लालदुहोमा ने बताया कि शाह ने उन्हें आश्वासन दिया है कि विधेयक 12 अगस्त को लोकसभा में लाया जाएगा और इसमें कोई रेट्रोस्पेक्टिव क्लॉज नहीं होगा।

    13 अगस्त को खत्म होना है मॉनसून सत्र

    संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त होने वाला है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि फिलहाल सत्र की अवधि बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

    इस बीच राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने गुरुवार को किरेन रिजिजू से विपक्ष की भावनाओं से अमित शाह को अवगत कराने और सदन में उनकी मौजूदगी की मांग पर विचार करने को कहा था। ऐसे में सत्र के अंतिम तीन दिन सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • भारत के खिलाफ श्रीलंका इलेवन का बड़ा स्कोर, 363 रन पर घोषित की पारी; अर्धशतकों से बढ़ा दबाव

    भारत के खिलाफ श्रीलंका इलेवन का बड़ा स्कोर, 363 रन पर घोषित की पारी; अर्धशतकों से बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बीच नोंडेस्क्रिप्ट्स क्रिकेट क्लब मैदान पर खेला जा रहा तीन दिवसीय वॉर्मअप मुकाबला रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया है। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन ने पहली पारी में 8 विकेट के नुकसान पर 363 रन बनाकर पारी घोषित कर दी। दूसरे दिन श्रीलंकाई टीम बल्लेबाजी के लिए मैदान पर नहीं उतरी और पहले दिन के स्कोर को ही अपनी पारी का अंतिम स्कोर मानते हुए घोषणा कर दी। मुकाबले के पहले दिन श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों का दबदबा देखने को मिला और उन्होंने भारतीय गेंदबाजों के सामने मजबूती से बल्लेबाजी की।

    श्रीलंकाई पारी की शुरुआत निशान मदुश्का और रविंदु रसंता ने शानदार अंदाज में की। दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 110 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की और टीम को मजबूत आधार दिया। निशान मदुश्का ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए 65 गेंदों में 66 रन बनाए। उनकी पारी में 11 चौके और एक छक्का शामिल रहा। दूसरी ओर रविंदु रसंता ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी करते हुए 143 गेंदों में 71 रन की शानदार पारी खेली। उन्होंने अपनी पारी के दौरान 6 चौके और एक छक्का लगाया।

    सलामी जोड़ी के बाद भी श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को लगातार परेशान किया। पसिंदु सोरियाबंदरा ने 35 रन बनाए जबकि पवन रत्नायके ने 47 गेंदों में 39 रन की उपयोगी पारी खेली। हालांकि वह अपनी पारी को बड़ी पारी में बदलने में कामयाब नहीं हो सके और गुरनूर बरार का शिकार बने। अहान विक्रमसिंघे ने भी 31 रनों का योगदान दिया।

    टीम के कप्तान सोनल दिनुशा ने जिम्मेदारी संभालते हुए अर्धशतक लगाया। उन्होंने 71 गेंदों में 52 रन बनाए और टीम के स्कोर को मजबूत स्थिति में पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद रमेश मेंडिस ने 32 रन बनाए। केशरा नुवंता 9 रन और दिलुम सुदीरा एक रन बनाकर नाबाद रहे। श्रीलंका क्रिकेट इलेवन ने 8 विकेट खोकर 363 रन बनाए और इसके बाद पारी घोषित करने का फैसला किया।

    भारतीय गेंदबाजी की बात करें तो तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा पहले दिन श्रीलंका के किसी भी बल्लेबाज को आउट नहीं कर सके। गुरनूर बरार को सिर्फ एक विकेट मिला। भारतीय स्पिनरों ने हालांकि कुछ हद तक दबाव बनाने की कोशिश की। कुलदीप यादव ने 76 रन खर्च कर 2 विकेट हासिल किए जबकि मानव सुथार ने 33 रन देकर 2 विकेट चटकाए। रवींद्र जडेजा ने भी 64 रन देकर 2 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा।

    वॉर्मअप मैच के पहले दिन भारतीय टीम अपने नियमित कप्तान शुभमन गिल के बिना मैदान पर उतरी। गिल की उंगली में चोट है और एहतियात के तौर पर वह फील्डिंग के लिए मैदान पर नहीं आए। उनकी गैरमौजूदगी में केएल राहुल ने टीम की कप्तानी संभाली। अब श्रीलंका क्रिकेट इलेवन की पारी घोषित होने के बाद भारतीय बल्लेबाजों के सामने बड़ी चुनौती है। भारतीय टीम की कोशिश होगी कि वह मजबूत बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई टीम के 363 रनों के स्कोर का जवाब दे और मैच में अपनी स्थिति मजबूत करे।

  • फ्लिंटॉफ ने छोड़ा इंग्लैंड लायंस का हेड कोच पद, अब BBL में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी

    फ्लिंटॉफ ने छोड़ा इंग्लैंड लायंस का हेड कोच पद, अब BBL में नई जिम्मेदारी संभालने की तैयारी


    नई दिल्ली। इंग्लैंड क्रिकेट के दिग्गज ऑलराउंडर एंड्रयू फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड लायंस के हेड कोच पद से इस्तीफा दे दिया है। सितंबर 2024 में इंग्लैंड लायंस की जिम्मेदारी संभालने वाले फ्लिंटॉफ ने करीब दो साल तक युवा खिलाड़ियों के साथ काम करने के बाद अब अपने कोचिंग करियर में नई चुनौती स्वीकार करने का फैसला किया है। फ्लिंटॉफ इस साल के अंत में ऑस्ट्रेलिया की मशहूर बिग बैश लीग में सिडनी थंडर के साथ जुड़ेंगे। यह उनकी पहली फुल टाइम कोचिंग भूमिका होगी और उनके करियर के लिहाज से इसे एक अहम कदम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड लायंस के साथ अपने कार्यकाल को लेकर फ्लिंटॉफ ने कहा कि उन्होंने इस पद से हटने का फैसला काफी सोच विचार के बाद लिया है। उन्होंने इंग्लैंड की अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों के साथ काम करने को बेहद खास अनुभव बताया। फ्लिंटॉफ के मुताबिक युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ते हुए देखना उनके लिए गर्व की बात रही है। उन्होंने लायंस के कोचिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम का भी आभार जताया और उनके जुनून तथा लगातार मेहनत की सराहना की।

    फ्लिंटॉफ ने खास तौर पर एड बार्नी और रॉब का जिक्र करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस भूमिका ने उन्हें न केवल युवा क्रिकेटरों के साथ काम करने का मौका दिया बल्कि एक कोच के तौर पर खुद को आगे बढ़ाने का अवसर भी दिया। अब वह सिडनी थंडर के साथ काम शुरू करने को लेकर उत्साहित हैं और यह देखना चाहते हैं कि कोचिंग का उनका सफर आगे किस दिशा में जाता है।

    फ्लिंटॉफ के इंग्लैंड लायंस से अलग होने की घोषणा सिडनी थंडर द्वारा उन्हें आगामी बिग बैश लीग सीजन के लिए हेड कोच नियुक्त किए जाने के करीब दो महीने बाद हुई है। इंग्लैंड के लिए लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने वाले फ्लिंटॉफ अब ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी20 प्रतियोगिता में अपनी कोचिंग क्षमता का इस्तेमाल करते नजर आएंगे। उनके अनुभव और आक्रामक क्रिकेट की समझ को देखते हुए सिडनी थंडर के साथ उनकी नियुक्ति को अहम माना जा रहा है।

    इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड के मेंस परफॉर्मेंस डायरेक्टर एड बार्नी ने भी फ्लिंटॉफ के कार्यकाल की जमकर तारीफ की है। बार्नी के अनुसार फ्लिंटॉफ ने इंग्लैंड लायंस के माहौल को एक ऐसे मजबूत कार्यक्रम में बदलने में अहम भूमिका निभाई जिसका युवा खिलाड़ियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। उन्होंने ऐसा वातावरण तैयार किया जहां खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन करने के साथ अपनी क्षमता को भी लगातार विकसित कर सकें।

    बार्नी ने यह भी कहा कि फ्लिंटॉफ के साथ काम करते हुए युवा और अनुभवी दोनों तरह के कोचों को आगे बढ़ने का अवसर मिला। उन्होंने टीम के कोचिंग ग्रुप में मौजूद विशेषज्ञता का बेहतर इस्तेमाल किया और इंग्लैंड की अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ईसीबी ने फ्लिंटॉफ को उनके कोचिंग करियर के अगले चरण के लिए शुभकामनाएं दी हैं और भविष्य में इंग्लिश क्रिकेट में उनकी वापसी की उम्मीद भी जताई है।

    फ्लिंटॉफ के जाने के बाद ईसीबी ने आगामी चार दिवसीय मुकाबले के लिए अंतरिम व्यवस्था भी कर दी है। 12 अगस्त से बेकनहैम में प्रोफेशनल काउंटी क्लब सिलेक्ट इलेवन और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले में माइक यार्डी इंग्लैंड लायंस की ओर से कोचिंग जिम्मेदारी संभालेंगे। फ्लिंटॉफ की विदाई के साथ इंग्लैंड लायंस में एक दौर का अंत हुआ है लेकिन उनके लिए कोचिंग करियर में एक नई और रोमांचक शुरुआत होने जा रही है।

  • टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा

    टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा


    भोपाल । भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था से नाराज टैक्सी चालकों ने शनिवार को दोपहर 12 बजे लिंक रोड नंबर-1 स्थित चेनार पार्क में महाबैठक बुलाई है। भोपाल टैक्सी चालक संघ भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में शहरभर के ड्राइवर शामिल होंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संघ का कहना है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों ने किराया व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो आंदोलन को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाया जा सकता है और अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला भी लिया जा सकता है।

    टैक्सी चालक संघ के मुताबिक 23 से 25 जून तक एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के दौरान कंपनियों पर दबाव बना था और कुछ राइड के किराए में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार किया गया था। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद दोबारा पुराने किराए लागू कर दिए गए। ड्राइवरों का आरोप है कि अब कई छोटी राइड के लिए उन्हें महज 30 से 40 रुपये तक मिल रहे हैं जबकि पहले इसी तरह की बुकिंग पर 50 से 60 रुपये तक का भुगतान होता था। चालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत वाहन की सर्विसिंग बीमा परमिट और दूसरे खर्चों के बीच इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार शनिवार की बैठक में सभी ड्राइवरों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह बैठक केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी किराया प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर है। संघ के मुताबिक सरकार को ऐसी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जिसमें प्रत्येक राइड के लिए 50 से 60 रुपये का बेस फेयर तय हो। इसके साथ यात्रा के समय के आधार पर 1 से 1.50 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और वाहन की श्रेणी के अनुसार 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू की जानी चाहिए।

    ड्राइवरों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किराया बढ़ाने से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था में बेस फेयर टाइम चार्ज और दूरी के हिसाब से भुगतान शामिल था लेकिन अब कई मामलों में केवल तय दूरी के आधार पर किराया दिया जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने या यात्री का इंतजार करने के दौरान ड्राइवर को अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिलता।

    संघ के प्रस्तावित किराया मॉडल के अनुसार अरेरा हिल्स से राजा भोज एयरपोर्ट तक मौजूदा 246 से 282 रुपये का किराया बढ़कर करीब 416 से 552 रुपये तक हो सकता है। इसी तरह न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन का किराया 95 से 108 रुपये की जगह करीब 205 से 270 रुपये तक पहुंच सकता है। लालघाटी से एमपी नगर का किराया 152 से 167 रुपये से बढ़कर 302 से 401 रुपये और रातीबड़ थाना से भोपाल रेलवे स्टेशन का किराया 274 से 314 रुपये से बढ़कर 474 से 638 रुपये तक हो सकता है।

    टैक्सी चालकों की मांगों में निर्धारित किराया नीति लागू करने के अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर रोक निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर रोक और ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है। इससे पहले भी ड्राइवरों ने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रदर्शन कर अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    अब शनिवार की महाबैठक को आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो भोपाल से शुरू हुआ यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।