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  • टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा

    टैक्सी किराया बढ़ाने की मांग पर आर-पार की तैयारी, भोपाल में आज जुटेंगे चालक; कंपनियों के खिलाफ मोर्चा


    भोपाल । भोपाल में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर विवाद अब बड़े आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था से नाराज टैक्सी चालकों ने शनिवार को दोपहर 12 बजे लिंक रोड नंबर-1 स्थित चेनार पार्क में महाबैठक बुलाई है। भोपाल टैक्सी चालक संघ भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में शहरभर के ड्राइवर शामिल होंगे और उनकी समस्याओं व सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। संघ का कहना है कि यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों ने किराया व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो आंदोलन को पूरे मध्य प्रदेश में फैलाया जा सकता है और अनिश्चितकालीन हड़ताल का फैसला भी लिया जा सकता है।

    टैक्सी चालक संघ के मुताबिक 23 से 25 जून तक एयरपोर्ट राइड के बहिष्कार के दौरान कंपनियों पर दबाव बना था और कुछ राइड के किराए में करीब 5 से 10 प्रतिशत तक सुधार किया गया था। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बाद दोबारा पुराने किराए लागू कर दिए गए। ड्राइवरों का आरोप है कि अब कई छोटी राइड के लिए उन्हें महज 30 से 40 रुपये तक मिल रहे हैं जबकि पहले इसी तरह की बुकिंग पर 50 से 60 रुपये तक का भुगतान होता था। चालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती लागत वाहन की सर्विसिंग बीमा परमिट और दूसरे खर्चों के बीच इतनी कम कमाई में परिवार चलाना मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ के महामंत्री राजेश कुमार नागले के अनुसार शनिवार की बैठक में सभी ड्राइवरों को अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि यह बैठक केवल किराया बढ़ाने तक सीमित नहीं है बल्कि पूरी किराया प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर है। संघ के मुताबिक सरकार को ऐसी स्पष्ट नीति बनानी चाहिए जिसमें प्रत्येक राइड के लिए 50 से 60 रुपये का बेस फेयर तय हो। इसके साथ यात्रा के समय के आधार पर 1 से 1.50 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और वाहन की श्रेणी के अनुसार 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर की दर लागू की जानी चाहिए।

    ड्राइवरों का कहना है कि केवल प्रतिशत के आधार पर किराया बढ़ाने से उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। उनके मुताबिक वर्ष 2014 में एग्रीगेटर कंपनियों की किराया व्यवस्था में बेस फेयर टाइम चार्ज और दूरी के हिसाब से भुगतान शामिल था लेकिन अब कई मामलों में केवल तय दूरी के आधार पर किराया दिया जाता है। इससे ट्रैफिक में फंसने या यात्री का इंतजार करने के दौरान ड्राइवर को अतिरिक्त समय का भुगतान नहीं मिलता।

    संघ के प्रस्तावित किराया मॉडल के अनुसार अरेरा हिल्स से राजा भोज एयरपोर्ट तक मौजूदा 246 से 282 रुपये का किराया बढ़कर करीब 416 से 552 रुपये तक हो सकता है। इसी तरह न्यू मार्केट से रेलवे स्टेशन का किराया 95 से 108 रुपये की जगह करीब 205 से 270 रुपये तक पहुंच सकता है। लालघाटी से एमपी नगर का किराया 152 से 167 रुपये से बढ़कर 302 से 401 रुपये और रातीबड़ थाना से भोपाल रेलवे स्टेशन का किराया 274 से 314 रुपये से बढ़कर 474 से 638 रुपये तक हो सकता है।

    टैक्सी चालकों की मांगों में निर्धारित किराया नीति लागू करने के अलावा एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी पर रोक निजी नंबर वाले वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई अवैध बाइक टैक्सी संचालन पर रोक और ड्राइवरों के लिए सामाजिक सुरक्षा की व्यवस्था शामिल है। इससे पहले भी ड्राइवरों ने फटे कपड़े पहनकर और हाथों में कटोरा लेकर प्रदर्शन कर अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    अब शनिवार की महाबैठक को आंदोलन की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। संघ का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो भोपाल से शुरू हुआ यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में टैक्सी सेवाओं पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना है।

  • ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज

    ब्यूटी पार्लर से किराना और कोचिंग तक पर निगम की नजर, भोपाल में 1 लाख प्रॉपर्टी की होगी जांच; कार्रवाई की तैयारी तेज


    भोपाल भोपाल में अपने घर से कारोबार करने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यदि किसी रिहाइशी मकान में ब्यूटी पार्लर सैलून किराना दुकान कोचिंग सेंटर बुटीक क्लिनिक या किसी अन्य तरह की व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है तो अब वह नगर निगम की जांच के दायरे में आ सकती है। भोपाल नगर निगम ने ऐसे भवनों की पहचान के लिए पूरे शहर में व्यापक सर्वे की तैयारी शुरू कर दी है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक राजधानी में करीब एक लाख ऐसी प्रॉपर्टी हो सकती हैं जहां आवासीय भवनों का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। सर्वे के दौरान यदि भवन उपयोग और संबंधित नियमों का उल्लंघन पाया गया तो संपत्ति मालिकों को नोटिस दिया जाएगा और नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में सीलिंग जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

    नगर निगम ने शहर को 21 जोन में बांटकर विशेष सर्वे टीमों का गठन किया है। ये टीमें छोटे मोहल्लों से लेकर बड़ी कॉलोनियों और प्रमुख इलाकों तक रिहाइशी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों की जानकारी जुटाएंगी। जांच के दौरान संपत्ति कर रिकॉर्ड भवन के वास्तविक उपयोग सड़क की चौड़ाई और उपलब्ध दस्तावेजों का मिलान किया जाएगा। इसके अलावा वाटर बॉडी और ग्रीन बेल्ट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी भवनों के इस्तेमाल की स्थिति देखी जाएगी। निगम का लक्ष्य करीब 10 से 15 दिनों में सर्वे पूरा करने का है और जहां नियमों का उल्लंघन सामने आएगा वहां मौके पर ही नोटिस देने की तैयारी है।

    नगर निगम के रिकॉर्ड में करीब 65 हजार व्यावसायिक संपत्तियां दर्ज हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे मकान बताए जा रहे हैं जहां कारोबार तो चल रहा है लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए जरूरी अनुमति या निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है। यही वजह है कि निगम अब रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर को भी जांचने जा रहा है।

    इस पूरी कार्रवाई के पीछे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी अहम हैं। 5 अगस्त की सुनवाई में अदालत ने अवैध निर्माण और रिहाइशी भवनों के व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों में कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए। इसके बाद नगर निगम ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। निगम को 15 सितंबर तक कार्रवाई से संबंधित रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी है। ऐसे में सर्वे को समयसीमा के भीतर पूरा करने की तैयारी की जा रही है।

    हालांकि व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अचानक बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई से छोटे कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो सकता है। व्यापारियों का सुझाव है कि ब्यूटी पार्लर सैलून कोचिंग किराना जैसी छोटी गतिविधियों को राहत दी जाए और प्रमुख सड़कों पर मिक्स लैंड यूज की व्यवस्था लागू की जाए। इसके तहत तय शर्तों के साथ एक ही क्षेत्र में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। पार्किंग ट्रैफिक प्रबंधन और नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए चौड़ी सड़कों पर नियंत्रित व्यावसायिक उपयोग की व्यवस्था को भी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है।

    भोपाल में लंबे समय से मास्टर प्लान लागू नहीं होने को भी मौजूदा स्थिति की बड़ी वजह बताया जा रहा है। भोपाल की विकास योजना का अंतिम प्रकाशन वर्ष 2005 में हुआ था और इसके बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो सका। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि शहर के विस्तार और बढ़ती कारोबारी जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं होने के कारण कई लोगों ने आवासीय क्षेत्रों में ही कारोबार शुरू कर दिया।

    व्यापारियों का दावा है कि इन गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता है और कई कारोबारी व्यावसायिक दर से संपत्ति कर तथा अन्य शुल्क भी जमा करते हैं। अनुमान है कि व्यापक कार्रवाई होने पर करीब पांच लाख लोगों का रोजगार प्रभावित हो सकता है। ऐसे में अब नगर निगम के सर्वे पर शहर के हजारों कारोबारियों और मकान मालिकों की नजर है। आने वाले दिनों में सर्वे के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से साफ होगा कि कितनी संपत्तियां नियमों के दायरे में आती हैं और कितनों पर कार्रवाई की स्थिति बनती है।

  • विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला

    विजय-संगीता की कहानी में आया बड़ा ट्विस्ट, 27 साल बाद तलाक की नौबत और फिर अचानक बदल गया फैसला


    नई दिल्ली। साउथ सिनेमा के सुपरस्टार और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा निजी जिंदगी को लेकर सुर्खियों में हैं। उनकी पत्नी संगीता सोर्नलिंगम की ओर से तलाक की याचिका दायर किए जाने और फिर अचानक उसे वापस लिए जाने की खबर ने फैंस के बीच चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। करीब 27 साल पुराने इस रिश्ते की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक समय विजय की फैन बनकर उनसे मिलने पहुंचीं संगीता धीरे धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बनीं और दोनों ने परिवार की सहमति से शादी कर ली। लेकिन कई साल बाद रिश्ते में आई दरार और तलाक की कानूनी प्रक्रिया ने सबको हैरान कर दिया। अब याचिका वापस लिए जाने के बाद इस कहानी में एक नया मोड़ आ गया है।

    संगीता सोर्नलिंगम श्रीलंका के एक तमिल कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखती हैं और लंबे समय तक ब्रिटेन में रही हैं। बताया जाता है कि वह विजय की बड़ी प्रशंसक थीं। साल 1996 में विजय की फिल्म पूवे उनाक्कागा को जबरदस्त सफलता मिली तो संगीता उनसे मिलने भारत पहुंचीं। वह विजय की शूटिंग लोकेशन पर पहुंचीं और अभिनेता से मुलाकात कर उन्हें फिल्म की सफलता के लिए बधाई दी। विजय को संगीता का सहज स्वभाव और तमिल सिनेमा के प्रति उनका लगाव पसंद आया। इसके बाद विजय ने उन्हें अपने घर आने और परिवार से मिलने का न्योता दिया। यहीं से दोनों के रिश्ते की शुरुआत हुई और धीरे धीरे यह रिश्ता प्यार में बदल गया।

    विजय के माता पिता निर्देशक एसए चंद्रशेखर और गायिका शोभा चंद्रशेखर को भी संगीता पसंद आईं। इसके बाद दोनों परिवारों के बीच बातचीत आगे बढ़ी और शादी का फैसला हुआ। रिपोर्टों के अनुसार दोनों ने 1998 में लंदन में अपनी शादी रजिस्टर कराई। इसके बाद 1999 में चेन्नई के राजाह मुथैया हॉल में पारंपरिक रीति रिवाजों के साथ दोनों विवाह बंधन में बंधे। शादी के बाद दोनों ने परिवार और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के लिए रिसेप्शन भी आयोजित किया। विजय और संगीता के दो बच्चे हैं। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है।

    करीब ढाई दशक तक साथ रहने के बाद फरवरी 2026 में संगीता की ओर से विजय से तलाक लेने की याचिका दायर किए जाने की खबर सामने आई। रिपोर्टों में दावा किया गया कि याचिका में विजय पर विवाहेतर संबंधों से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे। बताया गया कि संगीता को कथित तौर पर अप्रैल 2021 में इस बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि इन निजी आरोपों को लेकर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी सीमित रही है। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों के बीच लंबे समय से दूरी बनी हुई थी और बाद में मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा।

    लेकिन इस पूरी कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट 7 अगस्त 2026 को आया जब संगीता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश होकर अपनी तलाक याचिका वापस ले ली। बताया गया कि अदालत में करीब 15 मिनट की कार्यवाही के बाद मामले को बंद कर दिया गया। तलाक की अर्जी वापस लेने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से अपने रिश्ते की मौजूदा स्थिति को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी शुरुआत एक फैन और सुपरस्टार की मुलाकात से हुई थी। एक छोटी सी मुलाकात प्यार में बदली और फिर दोनों ने परिवार की सहमति से जिंदगी साथ बिताने का फैसला किया। 27 साल बाद तलाक की अर्जी ने इस रिश्ते को फिर सुर्खियों में ला दिया लेकिन याचिका वापस लिए जाने के बाद कहानी एक बार फिर अधूरी तस्वीर जैसी नजर आ रही है। अब फैंस की नजर इस बात पर है कि विजय और संगीता आने वाले समय में अपने रिश्ते को लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

  • जब दंगल की शूटिंग में हो गई थी बड़ी गड़बड़, नितेश तिवारी ने VFX से ऐसा खेल रचा कि सब देखते रह गए

    जब दंगल की शूटिंग में हो गई थी बड़ी गड़बड़, नितेश तिवारी ने VFX से ऐसा खेल रचा कि सब देखते रह गए


    नई दिल्ली। रणबीर कपूर स्टारर रामायण का ट्रेलर रिलीज होने के बाद फिल्म के विजुअल्स और VFX को लेकर जबरदस्त चर्चा हो रही है। फिल्म के निर्देशक नितेश तिवारी को लेकर ट्रेलर रिलीज से पहले सोशल मीडिया पर कई तरह के सवाल भी उठाए गए थे। कुछ लोगों का मानना था कि दंगल और छिछोरे जैसी फिल्मों का निर्देशन कर चुके नितेश तिवारी इतने बड़े VFX प्रोजेक्ट के लिए सही चुनाव नहीं हैं। इसकी वजह यह बताई जा रही थी कि उनकी पिछली फिल्मों में बड़े स्तर पर VFX का इस्तेमाल देखने को नहीं मिला था। हालांकि दंगल से जुड़े उनके कुछ पुराने किस्से बताते हैं कि नितेश तिवारी शूटिंग और पोस्ट प्रोडक्शन के स्तर पर तकनीक का बेहद समझदारी से इस्तेमाल कर चुके हैं।

    नितेश तिवारी की फिल्म दंगल साल 2016 में रिलीज हुई थी और आमिर खान स्टारर इस फिल्म ने दर्शकों के साथ साथ बॉक्स ऑफिस पर भी शानदार सफलता हासिल की थी। फिल्म की कहानी और कलाकारों के अभिनय की जितनी चर्चा हुई उतनी ही दिलचस्प इसके निर्माण से जुड़ी कई बातें भी हैं। खास बात यह है कि फिल्म के कुछ ऐसे सीन भी थे जिनकी शूटिंग के दौरान खामियां सामने आने के बाद नितेश तिवारी ने VFX और क्रोमा तकनीक का सहारा लिया और दर्शकों को इसकी भनक तक नहीं लगने दी।

    दंगल के क्लाइमैक्स से जुड़ा एक सीन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। फिल्म में महावीर सिंह फोगाट को एक कमरे में बंद कर दिया जाता है। इस पूरे सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान टीम ने महसूस किया कि दरवाजा तोड़ने वाले हिस्से को जितना प्रभावी होना चाहिए था उतना शूट नहीं किया जा सका। एडिटिंग के दौरान जब नितेश तिवारी और उनकी टीम ने फुटेज देखा तो उन्हें महसूस हुआ कि सीन में जरूरी प्रभाव की कमी है। समस्या यह थी कि जिस कमरे में शूटिंग हुई थी वह लोकेशन अब दोबारा उपलब्ध नहीं थी।

    ऐसे में नितेश तिवारी ने दोबारा पूरी शूटिंग करने के बजाय तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने एक अलग दरवाजा तैयार करवाया और आमिर खान को उसके सामने खड़ा करके पीछे क्रोमा लगाया। इसके बाद जरूरी शॉट्स शूट किए गए और पोस्ट प्रोडक्शन में उन्हें पहले से मौजूद फुटेज के साथ इस तरह जोड़ा गया कि पूरा सीन स्वाभाविक दिखाई देने लगा। दर्शकों को फिल्म देखते समय यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि सीन के एक हिस्से को बाद में VFX की मदद से तैयार किया गया है।

    दंगल में एक और सीन ऐसा था जहां कहानी के भीतर एक तरह का विरोधाभास दिखाई दे रहा था। यह वह हिस्सा था जब महावीर फोगाट अपनी बेटियों को लड़कों के दंगल में उतारने के लिए ले जाते हैं। वहां मौजूद एक व्यक्ति लड़कियों को लड़कों के साथ मुकाबला कराने का विरोध करता है लेकिन बाद में एक अन्य व्यक्ति यह बात कहता है कि अगर लड़कियां लड़कों के साथ दंगल करेंगी तो मुकाबला देखने के लिए भीड़ जुटेगी और दंगल हिट हो जाएगा।

    इस सीन को भी नितेश तिवारी ने साधारण तरीके से दोबारा शूट करने के बजाय VFX और क्रोमा की मदद से ठीक किया। दूसरे कलाकार की मदद से जरूरी हिस्सा शूट किया गया और फिर उसे मौजूदा सीन में इस तरह शामिल किया गया कि कहानी की निरंतरता बनी रहे। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि फिल्म देखने वाले ज्यादातर दर्शक इस बदलाव को पहचान भी नहीं पाए।

    यही वजह है कि रामायण के बड़े VFX प्रोजेक्ट को लेकर नितेश तिवारी की क्षमता पर सवाल उठाने से पहले उनके पुराने काम को देखना जरूरी है। दंगल में उन्होंने सीमित परिस्थितियों के बावजूद तकनीक और कहानी के बीच ऐसा संतुलन बनाया था कि VFX पर्दे पर अलग से नजर नहीं आया बल्कि कहानी का हिस्सा बन गया। अब रामायण में उन्हें इससे कहीं बड़े स्तर पर यही काम करना है। फिल्म के ट्रेलर ने जिस तरह के भव्य विजुअल्स दिखाए हैं उससे साफ है कि नितेश तिवारी के सामने इस बार चुनौती बड़ी है लेकिन दंगल का उनका अनुभव उनके लिए निश्चित तौर पर मजबूत आधार साबित हो सकता है।

  • रणबीर कपूर की रामायण की रिलीज डेट बदली! पहले विदेशों में दिखेगी फिल्म, भारत में इस दिन होगी रिलीज

    रणबीर कपूर की रामायण की रिलीज डेट बदली! पहले विदेशों में दिखेगी फिल्म, भारत में इस दिन होगी रिलीज


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल रणबीर कपूर स्टारर रामायण को लेकर दर्शकों का इंतजार लगातार बढ़ता जा रहा है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर इसकी जबरदस्त चर्चा है। फिल्म के भव्य विजुअल्स और स्टारकास्ट ने दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ा दी है। अब रामायण की रिलीज डेट को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। पहले खबर थी कि फिल्म 6 नवंबर को सिनेमाघरों में दस्तक देगी लेकिन अब सामने आया है कि भारत में दर्शकों को फिल्म देखने के लिए दो दिन और इंतजार करना होगा।

    रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने फिल्म की रिलीज को लेकर स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने बताया है कि फिल्म को अंतरराष्ट्रीय बाजार में 6 नवंबर को रिलीज किया जाएगा जबकि भारत में इसका थिएट्रिकल रिलीज 8 नवंबर को होगा। यानी विदेशी दर्शक रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर इस फिल्म को पहले देख पाएंगे जबकि भारतीय दर्शकों के लिए फिल्म की रिलीज दिवाली के मौके पर रखी गई है।

    नमित मल्होत्रा के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय डिस्ट्रीब्यूशन का सिस्टम शुक्रवार की रिलीज को ध्यान में रखकर काम करता है। यही वजह है कि विदेशों में फिल्म 6 नवंबर को रिलीज होगी। वहीं भारत में मेकर्स का लक्ष्य दिवाली के मौके पर फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करना है। इस फैसले के साथ रामायण को एक तरफ भारत में त्योहार की छुट्टियों का फायदा मिलेगा तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी फिल्म को व्यापक दर्शकों तक पहुंचने का मौका मिलेगा।

    रामायण को लेकर मेकर्स की सबसे बड़ी महत्वाकांक्षा इसे सिर्फ भारतीय फिल्म तक सीमित रखने की नहीं बल्कि दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने की है। फिल्म के ट्रेलर को मिले शानदार रिस्पॉन्स ने भी मेकर्स का उत्साह बढ़ाया है। नमित मल्होत्रा पहले ही बता चुके हैं कि ट्रेलर को रिलीज के कुछ ही दिनों में जबरदस्त व्यूज मिले और दुनिया के अलग अलग हिस्सों से दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। ऐसे में मेकर्स अब फिल्म को ग्लोबल स्तर पर पेश करने की तैयारी में जुटे हैं।

    रामायण की ग्लोबल रिलीज के लिए सोनी पिक्चर्स के साथ साझेदारी भी की गई है। अंतरराष्ट्रीय डिस्ट्रीब्यूशन के जरिए फिल्म को विदेशों में बड़े स्तर पर रिलीज करने की योजना है। मेकर्स का मानना है कि भारतीय संस्कृति और भगवान राम की कथा से जुड़ी यह कहानी दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंच सकती है। इसी उद्देश्य के साथ फिल्म को तकनीकी और विजुअल स्तर पर भी बेहद बड़े पैमाने पर तैयार किया गया है।

    फिल्म की स्टारकास्ट भी इसकी सबसे बड़ी खासियतों में शामिल है। नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका निभा रहे हैं जबकि साई पल्लवी सीता के किरदार में नजर आएंगी। सनी देओल फिल्म में हनुमान की भूमिका निभा रहे हैं और यश रावण के किरदार में दिखाई देंगे। इसके अलावा रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म में रकुल प्रीत सिंह लारा दत्ता काजल अग्रवाल अरुण गोविल विवेक ओबेरॉय और इंदिरा कृष्णन जैसे कलाकार भी अहम भूमिकाओं में हैं।

    रामायण को दो हिस्सों में रिलीज करने की योजना है। इसका पहला पार्ट इस साल दिवाली के मौके पर सिनेमाघरों में आएगा जबकि दूसरा पार्ट अगले साल दिवाली पर रिलीज किया जाएगा। दोनों हिस्सों को मिलाकर फिल्म का बजट करीब 4000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। ऐसे में यह भारतीय सिनेमा की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक मानी जा रही है।

    अब भारतीय दर्शकों की नजर 8 नवंबर पर है जब दिवाली के मौके पर रामायण का पहला अध्याय बड़े पर्दे पर खुलेगा। वहीं दुनिया के दूसरे हिस्सों में रहने वाले दर्शक इसे 6 नवंबर से देख सकेंगे। रिलीज की यह रणनीति फिल्म को भारत के साथ साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी एक साथ बड़े स्तर पर स्थापित करने की मेकर्स की कोशिश को दिखाती है।

  • जब किशोर कुमार ने अपनी मोरिस माइनर को जमीन में दफना दिया, वजह थी जिंदगी का सबसे भावुक दौर

    जब किशोर कुमार ने अपनी मोरिस माइनर को जमीन में दफना दिया, वजह थी जिंदगी का सबसे भावुक दौर


    नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा के महान गायक और अभिनेता किशोर कुमार अपनी आवाज और अभिनय के लिए जितने मशहूर थे उतने ही अपने अनोखे और अलग मिजाज के लिए भी जाने जाते थे। उनकी जिंदगी से जुड़े कई किस्से आज भी लोगों को हैरान करते हैं। किशोर कुमार कब क्या कर दें इसका अंदाजा उनके करीब रहने वाले लोग भी नहीं लगा पाते थे। उनकी जिंदगी का एक ऐसा ही किस्सा उनकी पहली कार से जुड़ा है जिसे उन्होंने किसी गैराज में खड़ा करने या बेचने के बजाय अपने ही बंगले के अंदर दफना दिया था। इस घटना के पीछे की वजह जानेंगे तो शायद किशोर कुमार के भावुक व्यक्तित्व का एक अलग पहलू सामने आएगा।

    इस किस्से का खुलासा किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने किया था। अमित कुमार किशोर कुमार और उनकी पहली पत्नी रूमा गुहा ठाकुरता के बेटे हैं। रूमा खुद भी गायिका और अभिनेत्री थीं। किशोर कुमार और रूमा ने साल 1950 में शादी की थी। दोनों का रिश्ता करीब आठ साल चला और 1958 में उनका तलाक हो गया। इसी रिश्ते से जुड़ी एक भावुक याद किशोर कुमार की मोरिस माइनर कार थी।

    अमित कुमार के मुताबिक जब उनके माता पिता का तलाक हो रहा था उस समय किशोर कुमार ने अपनी मोरिस माइनर कार को अपने बंगले में ही दफन करवा दिया था। यह कोई साधारण कार नहीं थी बल्कि किशोर कुमार की जिंदगी के एक खास दौर की निशानी थी। उन्होंने यह गाड़ी अपनी पहली फिल्म आंदोलन के समय खरीदी थी। उस वक्त वह बतौर हीरो अपने फिल्मी करियर की शुरुआत कर रहे थे और इस कार का संबंध उनकी पत्नी रूमा से भी जुड़ा हुआ था।

    यही वजह थी कि तलाक के दौर में किशोर कुमार ने उस कार को अपने पास रखने के बजाय जमीन के अंदर दफन करवा दिया। यह फैसला उनके व्यक्तित्व और बीती यादों से खुद को अलग करने के उनके अनोखे तरीके को दिखाता है। जिस कार के साथ उनके जीवन के शुरुआती संघर्ष और परिवार की यादें जुड़ी थीं उसे उन्होंने अपने ही बंगले में हमेशा के लिए दफन कर दिया।

    किशोर कुमार की निजी जिंदगी की बात करें तो उन्होंने चार शादियां की थीं। उनकी पहली शादी रूमा गुहा ठाकुरता से हुई थी। इसके बाद उनका नाम मधुबाला सहित कई चर्चित अभिनेत्रियों से जुड़ा। हालांकि उनके बेटे अमित कुमार ने हमेशा अपने पिता की निजी जिंदगी को उनका व्यक्तिगत मामला बताया। उन्होंने कहा था कि किशोर कुमार परिवार को बेहद महत्व देते थे और वह एक फैमिली मैन थे लेकिन लोगों ने उन्हें कई बार गलत समझा।

    रूमा गुहा ठाकुरता भी अपने दौर की जानी मानी कलाकार थीं। उन्होंने कई फिल्मों में काम किया था। दोनों के रिश्ते में समय के साथ मतभेद बढ़ते गए और आखिरकार दोनों अलग हो गए। बताया जाता है कि किशोर कुमार चाहते थे कि रूमा अपना करियर छोड़कर परिवार पर ध्यान दें जबकि रूमा अपने अभिनय और गायन के करियर को जारी रखना चाहती थीं। यही मतभेद उनके रिश्ते में तनाव की एक वजह माना जाता है।

    किशोर कुमार और रूमा के रिश्ते से जुड़ा एक और चर्चित दावा फिल्म अभिमान को लेकर भी किया जाता है। कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की इस फिल्म की कहानी किशोर कुमार और रूमा के रिश्ते से प्रेरित थी। हालांकि इस तरह के दावों को लेकर अलग अलग बातें सामने आती रही हैं।

    रूमा ने किशोर कुमार से अलग होने के बाद दूसरी शादी की और उनके दो बच्चे हुए। साल 2019 में उनका निधन हो गया। वहीं किशोर कुमार की आवाज और उनकी जिंदगी से जुड़े अनगिनत किस्से आज भी उनके प्रशंसकों के बीच उन्हें एक बेहद अनोखा और यादगार कलाकार बनाए हुए हैं। अपनी पहली कार को दफन करने का यह किस्सा भी उनकी जिंदगी की उन घटनाओं में शामिल है जो बताते हैं कि किशोर कुमार सिर्फ एक महान कलाकार ही नहीं बल्कि बेहद भावुक और अपने ही अंदाज में जिंदगी जीने वाले इंसान भी थे।

  • ‘सकीना’ से अमीषा पटेल की तुलना पर आया बड़ा रिएक्शन, प्रीति जिंटा को लेकर कही खास बात

    ‘सकीना’ से अमीषा पटेल की तुलना पर आया बड़ा रिएक्शन, प्रीति जिंटा को लेकर कही खास बात


    नई दिल्ली। बॉलीवुड की चर्चित फिल्म बंटवारा 1947 इन दिनों लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद जहां सनी देओल और प्रीति जिंटा के किरदारों को लेकर दर्शकों के बीच चर्चा तेज हो गई है वहीं सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने प्रीति जिंटा के किरदार की तुलना अमीषा पटेल के गदर के आइकॉनिक किरदार सकीना से भी कर दी। इस तुलना पर अब अमीषा पटेल ने ऐसा जवाब दिया है जिसने फैंस का दिल जीत लिया है।

    दरअसल अमीषा पटेल ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आस्क एमी सेशन आयोजित किया था। इस दौरान फैंस ने उनसे कई तरह के सवाल पूछे और अभिनेत्री ने भी खुलकर जवाब दिए। इसी दौरान एक प्रशंसक ने बंटवारा 1947 के ट्रेलर का जिक्र करते हुए प्रीति जिंटा के किरदार की तुलना गदर एक प्रेम कथा की सकीना से कर दी। फैन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे प्रीति जिंटा अमीषा पटेल के यादगार किरदार सकीना को दोहराने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही फैन ने कहा कि अमीषा और सनी देओल ने गदर में जो जादू दिखाया था उसे दोबारा कोई नहीं बना सकता।

    इस टिप्पणी पर अमीषा पटेल ने जिस अंदाज में प्रतिक्रिया दी उसने पूरी चर्चा का रुख ही बदल दिया। अमीषा ने प्रीति जिंटा की आलोचना करने के बजाय बेहद सकारात्मक और सम्मानजनक जवाब दिया। उन्होंने प्रीति को बंटवारा 1947 के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह भी बहुत खूबसूरत हैं। इसके साथ ही अमीषा ने अपने किरदार सकीना के अंदाज में प्रीति के किरदार तारा को लेकर भी एक खास संदेश दिया। अमीषा के इस जवाब को सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है और फैंस उनके बड़े दिल की तारीफ कर रहे हैं।

    अमीषा पटेल के लिए सकीना का किरदार उनके फिल्मी करियर के सबसे यादगार किरदारों में शामिल है। गदर एक प्रेम कथा में उन्होंने सनी देओल के साथ सकीना का किरदार निभाया था जबकि सनी देओल तारा सिंह के रूप में नजर आए थे। फिल्म 1947 के बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित थी और तारा सिंह तथा सकीना की प्रेम कहानी ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्षों बाद भी इसके किरदार और संवाद लोगों के बीच चर्चा में रहते हैं।

    इसके बाद गदर 2 में भी सनी देओल और अमीषा पटेल की जोड़ी दोबारा पर्दे पर दिखाई दी और इस फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया। ऐसे में जब बंटवारा 1947 के ट्रेलर के बाद प्रीति जिंटा के किरदार की तुलना सकीना से की गई तो लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई।

    बंटवारा 1947 की कहानी भी भारत के विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। फिल्म में सनी देओल एक मुस्लिम व्यक्ति के किरदार में नजर आएंगे जो बंटवारे के समय पाकिस्तान चला जाता है। कहानी में उनके घर की ऊपरी मंजिल पर एक हिंदू महिला रहती है जिसका किरदार शबाना आजमी निभा रही हैं। वह महिला अपना घर छोड़ने के लिए तैयार नहीं होती। इसके बाद हालात बिगड़ते हैं और सांप्रदायिक तनाव के बीच सनी देओल का किरदार उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाता है।

    फिल्म के ट्रेलर के सामने आने के बाद दर्शकों के बीच इसके किरदारों और कहानी को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। वहीं अमीषा पटेल के सकारात्मक जवाब ने भी यह साफ कर दिया कि वह प्रीति जिंटा की तुलना को लेकर किसी तरह की नकारात्मकता नहीं रखतीं। सकीना की ओर से तारा का ध्यान रखने की बात कहकर अमीषा ने अपने पुराने किरदार को नए अंदाज में याद किया और साथ ही प्रीति के किरदार के लिए शुभकामनाएं भी दीं।

  • शेयर बाजार में कमाई के लिए क्या करना सही है? निवेश से पहले समझें ये जरूरी नियम और सावधानियां

    शेयर बाजार में कमाई के लिए क्या करना सही है? निवेश से पहले समझें ये जरूरी नियम और सावधानियां


    नई दिल्ली। शेयर मार्केट में निवेश आज के समय में पैसे को लंबे समय में बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जाता है लेकिन इसमें बिना जानकारी और बिना योजना के पैसा लगाना नुकसान का कारण भी बन सकता है। शेयर बाजार में कमाई का कोई ऐसा फॉर्मूला नहीं है जो हर व्यक्ति के लिए हमेशा काम करे। इसलिए निवेश शुरू करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश के उद्देश्य को समझना सबसे जरूरी है। अगर आप शेयर मार्केट में नए हैं तो सबसे पहले बाजार को समझने की कोशिश करें और किसी के कहने पर सिर्फ मुनाफे के लालच में पैसा न लगाएं।

    शेयर बाजार में निवेश करते समय सबसे जरूरी नियम यह है कि अपनी पूरी जमा पूंजी एक ही शेयर में न लगाएं। अलग अलग कंपनियों और क्षेत्रों में निवेश करके पोर्टफोलियो में विविधता रखना जोखिम को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। हालांकि विविधता का मतलब यह नहीं है कि बिना सोचे समझे बहुत सारे शेयर खरीद लिए जाएं। कंपनी का कारोबार उसकी वित्तीय स्थिति कर्ज मुनाफा प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को समझना भी जरूरी है। किसी कंपनी के शेयर की कीमत लगातार बढ़ रही है इसका मतलब यह नहीं कि वह हमेशा बढ़ती ही रहेगी।

    नए निवेशकों के लिए लंबे समय का नजरिया रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। शेयर बाजार में रोजाना होने वाले उतार चढ़ाव से घबराकर बार बार खरीद और बिक्री करने के बजाय अपने निवेश उद्देश्य के अनुसार रणनीति बनाना बेहतर हो सकता है। बाजार में गिरावट आने पर घबराहट में अच्छे निवेश को बेच देना और तेजी के समय बिना जानकारी के महंगे शेयर खरीद लेना नुकसान बढ़ा सकता है। इसलिए निवेश से पहले यह तय करें कि पैसा कितने समय के लिए लगाना है और कितनी गिरावट को आप आसानी से सह सकते हैं।

    अगर कोई निवेशक नियमित रूप से पैसा लगाना चाहता है तो वह अपनी आय और लक्ष्य के अनुसार व्यवस्थित निवेश की रणनीति पर विचार कर सकता है। म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश करने वाले लोग भी फंड के जोखिम स्तर खर्च और पिछले प्रदर्शन के साथ उसके निवेश उद्देश्य को समझें। केवल पुराने रिटर्न को देखकर किसी फंड या शेयर का चुनाव करना सही तरीका नहीं माना जाता क्योंकि पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं होता।

    शेयर बाजार में निवेश करते समय कर्ज लेकर पैसा लगाना या जरूरी खर्चों के लिए रखी रकम को जोखिम में डालना समझदारी नहीं है। पहले इमरजेंसी जरूरतों के लिए पर्याप्त रकम अलग रखना और उसके बाद निवेश की योजना बनाना बेहतर हो सकता है। इसी तरह सोशल मीडिया या मैसेजिंग ग्रुप में मिलने वाले शेयर टिप्स पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। कोई व्यक्ति निश्चित और तेज मुनाफे का दावा करे तो विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शेयर मार्केट में निवेश को जल्दी अमीर बनने का रास्ता न समझें। सही जानकारी धैर्य अनुशासन और जोखिम प्रबंधन के साथ निवेश करना ज्यादा महत्वपूर्ण है। निवेश करने से पहले कंपनी और उत्पाद से जुड़ी जानकारी आधिकारिक दस्तावेजों तथा विश्वसनीय स्रोतों से जांचें। जरूरत पड़ने पर पंजीकृत वित्तीय सलाहकार से सलाह लेना भी उपयोगी हो सकता है। शेयर बाजार में अवसर जरूर हैं लेकिन बेहतर निवेश वही है जो आपकी आर्थिक क्षमता और लंबे समय के लक्ष्यों के अनुरूप हो।

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स छोड़िए एवोकाडो से पाएं निखरी और मुलायम त्वचा जानें इस्तेमाल का सही तरीका

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स छोड़िए एवोकाडो से पाएं निखरी और मुलायम त्वचा जानें इस्तेमाल का सही तरीका


    नई दिल्ली। आजकल त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए लोग तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार साधारण और प्राकृतिक चीजें भी स्किन केयर रूटीन में उपयोगी साबित हो सकती हैं। एवोकाडो ऐसा ही एक फल है जो अपने पोषक तत्वों के कारण डाइट के साथ साथ त्वचा की देखभाल के लिए भी लोकप्रिय है। इसमें हेल्दी फैट्स विटामिन ई विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो त्वचा को मॉइस्चराइज रखने और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    अगर आपकी त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है तो एवोकाडो से बना फेस मास्क एक आसान घरेलू विकल्प हो सकता है। इसके लिए पके हुए एवोकाडो को अच्छी तरह मैश करके उसका मुलायम पेस्ट तैयार करें। इसे साफ चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। इसके बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है। एवोकाडो में मौजूद फैट्स त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं जिससे चेहरा अधिक मुलायम महसूस हो सकता है।

    एवोकाडो में मौजूद विटामिन ई को त्वचा के लिए उपयोगी एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। यह त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। वहीं विटामिन सी त्वचा की सामान्य कोलेजन निर्माण प्रक्रिया में भूमिका निभाता है। यही वजह है कि संतुलित डाइट में एवोकाडो को शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

    एवोकाडो का इस्तेमाल केवल फेस मास्क के तौर पर ही नहीं बल्कि स्किन केयर रूटीन में मॉइस्चराइजिंग सामग्री के रूप में भी किया जाता है। कुछ लोग एवोकाडो पल्प को एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है। अगर त्वचा पर जलन खुजली या लालिमा दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली या मुहांसों वाली है तो एवोकाडो आधारित हेवी मास्क का इस्तेमाल सावधानी से करें। किसी भी प्राकृतिक सामग्री का मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित या उपयुक्त होगी। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को नए उत्पाद या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

    स्किन केयर के साथ खानपान का भी त्वचा की सेहत पर असर पड़ता है। एवोकाडो को डाइट में शामिल करने से शरीर को हेल्दी फैट्स फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। इसे सलाद स्मूदी या टोस्ट के साथ लिया जा सकता है। हालांकि किसी एक फल को त्वचा की सभी समस्याओं का समाधान नहीं माना जा सकता। पर्याप्त पानी संतुलित आहार अच्छी नींद और नियमित स्किन केयर भी उतने ही जरूरी हैं।

    इस तरह एवोकाडो को अपनी स्किन केयर और डाइट का हिस्सा बनाकर त्वचा को नमी और पोषण देने में मदद मिल सकती है। लेकिन बेहतर परिणाम के लिए अपनी त्वचा के प्रकार को समझना और किसी भी नए घरेलू प्रयोग को सावधानी से शुरू करना जरूरी है।

  • एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    नई दिल्ली । बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां, रूखापन और चमक कम होने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। हालांकि सही खान-पान और संतुलित डाइट के जरिए उम्र बढ़ने के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एंटी-एजिंग डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।

    फ्री रेडिकल्स शरीर में बनने वाले ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं, जो प्रदूषण, तनाव और खराब जीवनशैली के कारण बढ़ सकते हैं। इनकी वजह से कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और चेहरे पर उम्र के निशान दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में डाइट में कुछ खास सुपरफूड्स को शामिल करके त्वचा की प्राकृतिक चमक और सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    टमाटर एंटी-एजिंग डाइट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसमें लाइकोपीन नामक तत्व पाया जाता है, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा गाजर और कद्दू में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन ए में बदलता है, जो त्वचा की मरम्मत प्रक्रिया के लिए जरूरी माना जाता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं। पालक, मेथी, ब्रोकली और अन्य हरी सब्जियों में विटामिन सी और विटामिन ई जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। वहीं संतरा, नींबू, आंवला और कीवी जैसे खट्टे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत होते हैं। विटामिन सी शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है, जिससे त्वचा की लचक बनी रह सकती है।

    ड्राई फ्रूट्स और सीड्स जैसे बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स भी एंटी-एजिंग डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई, जिंक और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा की नमी बनाए रखने और उसे स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इनका सेवन त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है।

    ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसमें मौजूद पॉलीफेनॉल त्वचा पर प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई दे सकती है।

    एवोकाडो में मौजूद हेल्दी फैट्स, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं। ब्लूबेरी में पाए जाने वाले एंथोसायनिन और विटामिन सी त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक हो सकते हैं। वहीं हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जानी जाती है, जो त्वचा की सूजन और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल किसी एक फूड को खाने से उम्र का असर पूरी तरह नहीं रुकता, बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इन सुपरफूड्स को डाइट में शामिल करने से त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद मिल सकती है।