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  • 8 अक्टूबर को शिव पूजा और पितृ श्राद्ध का विशेष संयोग, गुरु प्रदोष और मासिक शिवरात्रि एक साथ

    8 अक्टूबर को शिव पूजा और पितृ श्राद्ध का विशेष संयोग, गुरु प्रदोष और मासिक शिवरात्रि एक साथ

    नई दिल्ली । 8 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। गुरुवार को गुरु प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। इसी दिन पितृ पक्ष का त्रयोदशी श्राद्ध भी किया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा शुक्ल योग, ब्रह्म योग और गुरुवार व्रत भी इसी दिन पड़ रहे हैं। इस तरह 8 अक्टूबर को कई धार्मिक संयोग एक साथ बन रहे हैं, जिसके कारण यह दिन शिव भक्तों और पितरों के लिए किए जाने वाले श्राद्ध कर्म की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    8 अक्टूबर को आश्विन माह का पहला प्रदोष व्रत होगा। आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि 7 अक्टूबर की रात 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट तक रहेगी। गुरु प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ समय शाम 5 बजकर 59 मिनट से रात 8 बजकर 27 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होने का फल मिलता है। इस दिन शिव उपासना करने वाले भक्त व्रत रखकर विशेष पूजा कर सकते हैं।

    इसी दिन मासिक शिवरात्रि का भी संयोग बन रहा है। आश्विन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 8 अक्टूबर की रात 10 बजकर 15 मिनट से शुरू होकर 9 अक्टूबर की रात 9 बजकर 35 मिनट तक रहेगी। निशिता मुहूर्त के आधार पर मासिक शिवरात्रि 8 अक्टूबर को मानी जाएगी। शिवरात्रि की निशिता पूजा का समय रात 11 बजकर 44 मिनट से देर रात 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। शिव भक्त इस अवधि में भगवान शिव की पूजा और आराधना कर सकते हैं।

    8 अक्टूबर को पितृ पक्ष का त्रयोदशी श्राद्ध भी किया जाएगा। इस दिन त्रयोदशी की उदयातिथि मिलने के कारण उन पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण किया जाएगा, जिनका निधन किसी भी महीने की त्रयोदशी तिथि को हुआ हो। श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसके बाद रौहिण मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 32 मिनट से 1 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। अपराह्न काल दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 39 मिनट तक बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्राद्ध और तर्पण से पितरों की तृप्ति होती है और पिशाच योनि में फंसे पितरों के उद्धार की मान्यता है।

    इस दिन शुक्ल योग भी रहेगा। शुक्ल योग सुबह से देर रात 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इसके बाद ब्रह्म योग शुरू होगा, जिसे भी शुभ योग माना गया है। इसके साथ ही 8 अक्टूबर को इस महीने का दूसरा गुरुवार व्रत भी रखा जाएगा। इस व्रत में भगवान विष्णु की पूजा और उपवास करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु की कृपा से दांपत्य जीवन सुखमय होता है, विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और कुंडली में गुरु दोष से मुक्ति मिलने की मान्यता है।

    8 अक्टूबर की रात भद्रा लगने की बात भी बताई गई है, लेकिन इसे लेकर इस दिन होने वाले धार्मिक कर्मों पर कोई विशेष अहित नहीं माना गया है। गुरु प्रदोष, मासिक शिवरात्रि, त्रयोदशी श्राद्ध, शुक्ल योग, ब्रह्म योग और गुरुवार व्रत के कारण यह दिन धार्मिक गतिविधियों के लिहाज से खास माना जा रहा है। शिव भक्त इस दिन व्रत और पूजा कर भगवान शिव की आराधना कर सकते हैं, जबकि पितृ पक्ष के नियमों के अनुसार त्रयोदशी श्राद्ध और तर्पण भी किया जा सकता है।

  • पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    पितृ पक्ष में क्यों टालते हैं प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री? जानिए राजपाल यादव से जुड़े मामले में क्या आया सामने

    नई दिल्ली ।अभिनेता राजपाल यादव से जुड़े एक मामले में पितृ पक्ष के दौरान संपत्ति की रजिस्ट्री रुकने का जिक्र सामने आया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके वकील ने अदालत में बताया कि जिस संपत्ति को बेचकर रकम जुटाई जानी है, उसकी रजिस्ट्री पितृ पक्ष के कारण रुकी हुई है और नवरात्र की शुरुआत में सौदा पूरा होने की उम्मीद है। इस बात के बाद पितृ पक्ष के दौरान जमीन, मकान या दूसरी बड़ी संपत्ति की खरीद और रजिस्ट्री को टालने की धार्मिक परंपरा एक बार फिर चर्चा में आ गई है। कई हिंदू परिवार इस अवधि में नई संपत्ति खरीदने या बड़े शुभ कार्य शुरू करने से बचते हैं।

    हिंदू धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण, श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के लिए विशेष समय माना जाता है। इस दौरान परिवार अपने पितरों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। धार्मिक परंपरा के अनुसार, इन दिनों ध्यान नए उत्सव या सांसारिक शुभ कार्यों की बजाय पूर्वजों से जुड़े धार्मिक कर्मों पर रखा जाता है। इसी वजह से कई परिवार नई जमीन या मकान खरीदने, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री कराने और बड़े निवेश की शुरुआत जैसे कामों को आगे के शुभ समय तक टालना पसंद करते हैं।

    पितृ पक्ष में प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री रोकने की मान्यता मुख्य रूप से धार्मिक और पारंपरिक विश्वास से जुड़ी है। इस अवधि को आमतौर पर मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय नहीं माना जाता। इसलिए कुछ परिवार नई शुरुआत से जुड़े काम नवरात्र, दीपावली या किसी अन्य शुभ मुहूर्त तक स्थगित कर देते हैं। हालांकि, केवल पितृ पक्ष होने के कारण संपत्ति की खरीद या रजिस्ट्री पर कोई कानूनी रोक नहीं होती। कोई व्यक्ति अपने कानूनी, व्यावहारिक या आर्थिक कारणों के आधार पर इस अवधि में संपत्ति खरीद या रजिस्ट्री करा सकता है। यह फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परंपरा से जुड़ा विषय है।

    पितृ पक्ष के दौरान हर तरह की खरीदारी को अशुभ नहीं माना जाता। रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं खरीदी जा सकती हैं। भोजन, कपड़े, दवाएं, घर की जरूरी सामग्री और कामकाज से संबंधित सामान की खरीद पर सामान्य रूप से ऐसी रोक नहीं मानी जाती, जो सभी लोगों पर लागू हो। श्राद्ध और पितरों से जुड़े धार्मिक कर्मों के लिए अनाज, फल, सब्जियां, घी, दूध और भोजन सामग्री खरीदना भी इसी अवधि की जरूरतों का हिस्सा हो सकता है। कई परिवार इस दौरान ब्राह्मण भोजन, जरूरतमंदों को दान और पितरों की पसंद की वस्तुओं का दान भी करते हैं।

    वहीं नई जमीन या मकान खरीदने, नई प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, गृह प्रवेश, विवाह और अन्य बड़े मांगलिक कार्यों को कई परिवार पितृ पक्ष में करने से बचते हैं। कुछ लोग नया वाहन खरीदने, महंगे आभूषण लेने या बड़े निवेश की शुरुआत को भी इस अवधि के बाद करना पसंद करते हैं। इसके पीछे मुख्य आधार धार्मिक मान्यता है, न कि कोई कानूनी नियम। इसलिए अलग-अलग परिवार अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार निर्णय लेते हैं।

    पहले से तय संपत्ति की रजिस्ट्री के मामले में भी परिवारों की प्राथमिकता अलग हो सकती है। यदि संपत्ति का सौदा पहले ही तय हो चुका है और रजिस्ट्री की तारीख पितृ पक्ष में पड़ती है, तो धार्मिक मान्यता मानने वाले लोग तारीख आगे बढ़ाना पसंद कर सकते हैं। दूसरी ओर, जिन लोगों के लिए कानूनी प्रक्रिया, समय या आर्थिक कारण महत्वपूर्ण हैं, वे तय तारीख पर रजिस्ट्री करा सकते हैं। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री को लेकर फैसला धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

  • नयागांव रेलवे पुल पर दर्दनाक हादसा, दोस्तों के साथ पिकनिक से लौट रहे नमकीन कारोबारी ने तोड़ा दम, कार चालक फरार

    नयागांव रेलवे पुल पर दर्दनाक हादसा, दोस्तों के साथ पिकनिक से लौट रहे नमकीन कारोबारी ने तोड़ा दम, कार चालक फरार

    ग्वालियर । ग्वालियर में तेज रफ्तार का कहर एक परिवार की खुशियां मातम में बदल गया। मंगलवार शाम नयागांव इलाके में रेलवे पुल के पास हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 38 वर्षीय नमकीन कारोबारी गौरव जैन की मौत हो गई। हादसे के समय गौरव अपने दो दोस्तों मनीष राजौरिया और कुशल कुशवाहा के साथ एक्टिवा पर सवार होकर पनिहार से ग्वालियर लौट रहे थे। इसी दौरान सामने से आई तेज रफ्तार कार ने उनकी एक्टिवा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि तीनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने राहगीरों की मदद से तीनों घायलों को तत्काल ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया। वहां इलाज शुरू होने के कुछ ही देर बाद गौरव जैन ने दम तोड़ दिया। वहीं उनके दोनों दोस्तों का इलाज जारी है और डॉक्टर उनकी हालत पर नजर बनाए हुए हैं।

    गौरव जैन ग्वालियर के भाऊ साहब का बाजार इलाके में रहते थे और नमकीन का कारोबार करते थे। बताया गया है कि उन्होंने हाल ही में अपना कारोबार व्यवस्थित किया था और काम अच्छी तरह चलने लगा था। परिवार की जिम्मेदारियां भी गौरव के कंधों पर थीं। वह अभी अविवाहित थे और परिवार में उनकी शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। मंगलवार को अवकाश होने के कारण उन्होंने दोस्तों के साथ कुछ समय बाहर बिताने का फैसला किया था। गौरव अपने दोस्त मनीष राजौरिया और कुशल कुशवाहा के साथ बरई पनिहार की वादियों और पहाड़ी झरनों की ओर पिकनिक मनाने गए थे। दिनभर दोस्तों के साथ समय बिताने के बाद शाम को तीनों एक ही एक्टिवा से ग्वालियर वापस लौट रहे थे लेकिन नयागांव रेलवे पुल के पास उनकी यह यात्रा दर्दनाक हादसे में बदल गई।

    पुलिस के मुताबिक सामने से आ रही कार काफी तेज रफ्तार में थी। कार चालक ने कथित तौर पर लापरवाही से वाहन चलाते हुए एक्टिवा को टक्कर मार दी। हादसे के बाद कार चालक मौके पर नहीं रुका बल्कि वाहन लेकर फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच शुरू कर दी है। इसके साथ ही पुलिस टोल नाकों के फुटेज भी खंगाल रही है ताकि दुर्घटना के बाद फरार हुई कार और उसके चालक का पता लगाया जा सके।

    एएसपी जयराज कुबेर ने बताया कि गौरव अपने दोनों दोस्तों के साथ पनिहार में नदी किनारे पिकनिक मनाने गए थे। शाम को तीनों एक्टिवा से ग्वालियर लौट रहे थे। नयागांव रेलवे पुल के पास तेज रफ्तार कार ने उनकी एक्टिवा में टक्कर मार दी। हादसे में गौरव को गंभीर चोटें आईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वहीं मनीष और कुशल भी गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस फरार कार चालक की तलाश में जुटी है। बुधवार को गौरव के शव का पोस्टमार्टम कराया गया। हादसे की खबर के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है और जिस युवक के घर में शादी की तैयारियों को लेकर बातचीत चल रही थी वहां अब अचानक दुख का माहौल है।

  • न्यायिक आयोग की रिपोर्ट लेकर पीड़ितों के घर पहुंची कांग्रेस, परिजनों ने महापौर से अफसरों तक पर कार्रवाई की उठाई मांग

    न्यायिक आयोग की रिपोर्ट लेकर पीड़ितों के घर पहुंची कांग्रेस, परिजनों ने महापौर से अफसरों तक पर कार्रवाई की उठाई मांग


    इंदौर । इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी हादसे को लेकर सियासत एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से असंतुष्ट कांग्रेस अब पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सामने ला रही है। इसी क्रम में बुधवार को इंदौर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चिंटू चौकसे कार्यकर्ताओं के साथ हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के घर पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में सामने आई बातों की जानकारी दी। रिपोर्ट की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई।

    पीड़ित परिवारों ने कांग्रेस नेताओं के सामने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि कई परिवारों ने अपना इकलौता कमाने वाला सदस्य खो दिया है। परिवार के जिस व्यक्ति पर घर की आर्थिक जिम्मेदारी थी उसकी मौत के बाद उनके सामने रोजमर्रा का खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया। परिजनों का कहना था कि हादसे के बाद उन्हें उम्मीद थी कि सरकार और प्रशासन उनकी मदद के लिए आगे आएंगे लेकिन उनकी परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। कई परिवारों का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें वह राहत नहीं मिल पाई जिसकी उनसे उम्मीद की गई थी।

    परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। उनका कहना है कि हादसे के बाद बीमार हुए लोगों के इलाज का खर्च सरकार द्वारा उठाने की बात कही गई थी लेकिन कुछ परिवारों को इलाज के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ा। यहां तक कि मृतक का शव अस्पताल से घर तक लाने में भी परिवारों को खर्च उठाना पड़ा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और ज्यादा परेशानी का कारण बना।

    कांग्रेस नेताओं के सामने परिजनों ने हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि महापौर पार्षद विधायक नगर निगम आयुक्त या किसी अन्य जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। पीड़ित परिवारों ने कहा कि हादसे में अपने लोगों को खोने के बाद वे अब न्याय चाहते हैं। उनका कहना है कि केवल जांच रिपोर्ट सामने आने से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि जिम्मेदारी तय कर दोषियों पर कार्रवाई भी जरूरी है।

    शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने कहा कि कांग्रेस न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों की स्थिति और उनकी भावनाओं को देखते हुए पार्टी एक बार फिर इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को उचित राहत दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन किया जाएगा।

    चौकसे ने कहा कि न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए राहत और मुआवजे से जुड़ी जो अनुशंसाएं की हैं उन्हें सरकार को तत्काल लागू करना चाहिए। उनका कहना है कि प्रभावित परिवार लंबे समय से राहत की उम्मीद कर रहे हैं और अब उन्हें जल्द सहायता मिलना जरूरी है। कांग्रेस नेताओं ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान उनकी समस्याओं को सुना और आगे भी उनके साथ खड़े रहने की बात कही।

    भागीरथपुरा हादसे के बाद अब न्यायिक आयोग की रिपोर्ट और पीड़ित परिवारों को राहत का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कांग्रेस जहां रिपोर्ट को लेकर सवाल उठा रही है वहीं पीड़ित परिवार दोषियों पर कार्रवाई और आर्थिक मदद की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कांग्रेस के आंदोलन के साथ यह मामला एक बार फिर इंदौर की राजनीति में प्रमुख मुद्दा बन सकता है।

  • चुनाव आयोग से मुलाकात पर EC का बयान, बोला- किसी दल से मिलने में आपत्ति नहीं, तय प्रक्रिया के तहत मांगा जाए समय

    चुनाव आयोग से मुलाकात पर EC का बयान, बोला- किसी दल से मिलने में आपत्ति नहीं, तय प्रक्रिया के तहत मांगा जाए समय

    नई दिल्ली । चुनाव आयोग और विपक्षी नेताओं के बीच मुलाकात को लेकर मंगलवार को गतिरोध की स्थिति बनी रही। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत विपक्षी नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी बात रखने की मांग कर रहे थे। इसी बीच चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसे किसी भी राजनीतिक दल के सदस्यों से मिलने में कोई आपत्ति नहीं है। आयोग के मुताबिक, राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए वर्ष 2025 में एक निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल बनाया गया है, जिसके तहत बैठक के लिए पहले समय मांगा जाना और उसका उद्देश्य बताना जरूरी है।

    आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम चार बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था। आयोग के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान उसे जानकारी मिली थी कि कुछ सांसद चुनाव आयोग से मिलना चाहते हैं। इसके बाद करीब चार बजे दिल्ली पुलिस के माध्यम से सूचना मिली कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने इस अनुरोध पर विचार किया।

    चुनाव आयोग के मुताबिक, वर्ष 2025 में राजनीतिक दलों और उनके प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक के लिए प्रक्रिया तय की गई थी। इसके अनुसार किसी राजनीतिक दल या कई दलों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को आयोग से मिलने के लिए उसके अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए समय लेना होता है। बैठक का समय दोनों पक्षों की सहमति से तय किया जाता है। आयोग ने कहा कि यह नियमित प्रक्रिया है और सभी राजनीतिक दलों को इसके बारे में जानकारी दी गई है।

    आयोग ने बताया कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के संबंध में बाद में दिल्ली पुलिस की ओर से जानकारी दी गई कि करीब 240 सांसद बैठक करना चाहते हैं। आयोग के अनुसार, प्रस्तावित बैठक का स्थान संसद भवन एनेक्सी बताया गया। यह व्यवस्था तय प्रोटोकॉल के अनुरूप नहीं थी, क्योंकि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठक के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। आयोग ने इस अनुरोध को असामान्य मानते हुए स्वीकार नहीं किया।

    इसके साथ ही चुनाव आयोग ने सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था भी सुझाई। आयोग की ओर से कहा गया कि उसका सबसे वरिष्ठ अधिकारी बैठक स्थल पर जाकर सांसदों से ज्ञापन प्राप्त कर सकता है। हालांकि, प्रदर्शनकारी सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि वह राजनीतिक दलों के साथ बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन बैठक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होनी चाहिए।

    विपक्षी नेताओं का कहना था कि वे चुनाव आयोग से मिलकर अपनी बात रखना चाहते हैं और जब तक मुलाकात के लिए बुलावा नहीं आता, तब तक प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी ओर आयोग ने बैठक के लिए औपचारिक प्रक्रिया और तय प्रोटोकॉल का हवाला दिया। इस घटनाक्रम में मुख्य विवाद बैठक की इच्छा को लेकर नहीं, बल्कि समय मांगने की प्रक्रिया और प्रस्तावित बैठक स्थल को लेकर सामने आया। आयोग ने दोहराया कि किसी भी राजनीतिक दल से मुलाकात पर उसे कोई आपत्ति नहीं है और तय नियमों के तहत बैठक का अनुरोध किया जा सकता है।

  • सेवा ज्योति कार्यक्रम के बाहर सफाईकर्मियों का विरोध, मंत्री-विधायक से मिलने के लिए घंटों इंतजार, सड़कों पर दिखा कचरे का ढेर

    सेवा ज्योति कार्यक्रम के बाहर सफाईकर्मियों का विरोध, मंत्री-विधायक से मिलने के लिए घंटों इंतजार, सड़कों पर दिखा कचरे का ढेर


    इंदौर । स्वच्छता के मामले में देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने वाले इंदौर में बुधवार को तस्वीर कुछ बदली नजर आई। एक तरफ विजय नगर चौराहे के पास आईडीए ग्राउंड में भाजपा का सेवा ज्योति संकल्प यात्रा कार्यक्रम चल रहा था तो दूसरी तरफ कार्यक्रम स्थल के बाहर बड़ी संख्या में सफाई कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। सफाई कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें नियमित किया जाए और वेतन समेत दूसरी समस्याओं का समाधान किया जाए। प्रदर्शन के बीच शहर के कुछ इलाकों में सफाई व्यवस्था भी प्रभावित हुई और सड़कों पर गीला तथा सूखा कचरा फैला दिखाई दिया।

    सफाई कर्मचारी मुख्यमंत्री से मुलाकात करना चाहते थे। हालांकि जब उन्हें पता चला कि मुख्यमंत्री कार्यक्रम में नहीं आ रहे हैं तो उन्होंने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से मिलने की मांग रखी। पुलिस ने कर्मचारियों को कार्यक्रम स्थल के अंदर जाने से रोक दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी रस्सी और बैरिकेड के पीछे खड़े होकर करीब दो घंटे तक मंत्री का इंतजार करते रहे। इस दौरान उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी भी की।

    कार्यक्रम खत्म होने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय विधायक रमेश मेंदोला और अन्य जनप्रतिनिधि मशाल लेकर बाहर निकले तो सफाई कर्मचारियों ने उनसे मिलने की कोशिश की। कुछ महिला सफाई कर्मचारियों ने जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्याएं रखीं। इसी दौरान एक महिला सफाईकर्मी ने विधायक रमेश मेंदोला के सामने हाथ जोड़कर अपनी मांगें पूरी कराने की गुहार लगाई। मौके पर धक्का मुक्की जैसी स्थिति भी बनी। जनप्रतिनिधियों ने सेवा ज्योति प्रज्ज्वलित करने के बाद वहां से रवाना हुए।

    इसके बाद सांसद शंकर लालवानी जब कार्यक्रम स्थल से बाहर निकले तो सफाई कर्मचारियों ने उन्हें रोक लिया और अपनी समस्याएं बताईं। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की मांग रखी। सांसद ने उनकी बात सुनी और कर्मचारियों से पांच लोगों का प्रतिनिधिमंडल तैयार करने को कहा। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रतिनिधिमंडल की बात मुख्यमंत्री तक पहुंचाई जाएगी। शहर में जगह जगह कचरा फैलने के सवाल पर सांसद ने भी कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए।

    सफाई कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें नई नहीं हैं। वाल्मीकि सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर संतोष कल्याणे के मुताबिक कर्मचारी करीब 23 वर्षों से नियमितीकरण समेत दूसरी मांगों को लेकर आंदोलन ज्ञापन और भूख हड़ताल जैसे तरीके अपना चुके हैं। उनका कहना है कि करीब 10 हजार रुपये के वेतन में परिवार चलाना बेहद मुश्किल है। बच्चों की पढ़ाई घर का खर्च और इलाज जैसी जरूरतें पूरी करना चुनौती बन जाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और गुरुवार से कचरा गाड़ियों को रोकने का फैसला लिया जा सकता है।

    प्रदर्शन में शामिल सफाई मित्रों ने भी अपनी परेशानियां बताईं। कृष्णा बाई डागर ने नियमित किए जाने की मांग रखते हुए कहा कि कम वेतन में घर का खर्च चलाना मुश्किल है। माया पथरोड ने कहा कि सफाई कर्मचारी पूरे शहर को साफ रखने का काम करते हैं लेकिन उनकी समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा। रेखा बाई ने बताया कि वे सुबह करीब पांच बजे काम के लिए निकलती हैं और दोपहर में घर लौटती हैं। उनके मुताबिक वे लड़ाई करने नहीं बल्कि अपनी बात रखने के लिए प्रदर्शन कर रही हैं। संगीता सोलंकी ने भी नियमितीकरण और वेतन बढ़ाने की मांग रखी।

    प्रदर्शन के दौरान एक अन्य विवाद भी सामने आया। आरोप है कि एक महिला ने सफाई मित्रों के सामने झाड़ू लगाने को लेकर टिप्पणी कर दी। इसके बाद सफाई कर्मचारियों ने महिला को घेर लिया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने हस्तक्षेप किया और महिला को थाने ले गई। इस घटनाक्रम के बाद थाने के बाहर भी कुछ देर हंगामे की स्थिति बनी रही।

    इस बीच इंदौर की सड़कों पर कचरा फैले होने के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आए। बुधवार सुबह इंडस्ट्री हाउस से जंजीरवाला चौराहे की ओर जाने वाले मार्ग के कुछ हिस्सों में गीला और सूखा कचरा बिखरा दिखाई दिया। इससे लोगों को आवाजाही में परेशानी हुई। सफाई व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहने पर शहर की स्वच्छता व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। अब कर्मचारियों और प्रशासन के बीच बातचीत से समाधान निकलने पर ही स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।

  • जिस इंदौर की सफाई की मिसाल देश देता है वहां सड़कों पर बिखरा कचरा, सफाईकर्मियों की मांगों के बीच बढ़ी निगम की चिंता

    जिस इंदौर की सफाई की मिसाल देश देता है वहां सड़कों पर बिखरा कचरा, सफाईकर्मियों की मांगों के बीच बढ़ी निगम की चिंता


    इंदौर । देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुके इंदौर में मंगलवार शाम से सफाई व्यवस्था पर असर दिखाई देने लगा। नियमितीकरण समेत अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सफाईकर्मी लगातार आंदोलन कर रहे हैं और इसका सीधा असर शहर की सड़कों पर नजर आने लगा है। शहर के कई इलाकों में गीला और सूखा कचरा समय पर नहीं उठने के कारण सड़कों के किनारे और कई जगह सड़क पर ही जमा हो गया। एमआईजी थाने के सामने नेहरू नगर विकास नगर अमर टेकरी और रुस्तम का बगीचा समेत आसपास के क्षेत्रों में शाम होते होते कचरे के ढेर दिखाई देने लगे। देर रात तक कुछ स्थानों पर हालात ऐसे हो गए कि सड़कों पर गीला और सूखा कचरा बिखरा पड़ा था।

    कचरा सड़कों पर जमा होने से स्थानीय रहवासियों के साथ राहगीरों और वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई स्थानों पर सड़क के किनारे जमा कचरा इतना ज्यादा था कि लोगों को वाहन निकालने में दिक्कत हुई। इंदौर जैसे शहर में जहां स्वच्छता को लेकर देशभर में उदाहरण दिया जाता है वहां सड़कों पर फैली गंदगी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की मांगों को लेकर प्रशासन को गंभीरता से बातचीत करनी चाहिए लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था बाधित होने से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

    सफाईकर्मी नियमितीकरण सहित दूसरी मांगों को लेकर लगातार दूसरे दिन नगर निगम मुख्यालय पर प्रदर्शन कर रहे हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारी निगम मुख्यालय पहुंचकर अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी कर चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि दो से चार दिन के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं हुआ तो वे हड़ताल का फैसला ले सकते हैं। ऐसी स्थिति में शहर की सफाई व्यवस्था पर और व्यापक असर पड़ने की आशंका है।

    मंगलवार शाम को कई इलाकों में कचरा नहीं उठने से आंदोलन के असर के शुरुआती संकेत दिखाई देने लगे। नियमित रूप से घरों और दुकानों से निकलने वाला कचरा समय पर नहीं उठ पाया तो कई जगह लोग कचरा सड़क किनारे रखने को मजबूर हुए। कुछ इलाकों में यह कचरा धीरे धीरे बढ़ता गया और सड़क के आसपास गंदगी फैलने लगी। यदि सफाई व्यवस्था लंबे समय तक प्रभावित रहती है तो नगर निगम के सामने शहर को साफ रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

    शहर में फैली गंदगी को लेकर स्थानीय लोगों की अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों का कहना है कि सफाईकर्मियों की मांगें अपनी जगह उचित हो सकती हैं लेकिन विरोध का ऐसा तरीका नहीं होना चाहिए जिससे आम लोगों को परेशानी हो। लोगों ने यह भी चिंता जताई कि खुले में कचरा पड़ा रहने से बदबू के साथ संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। कुछ लोगों ने सड़कों पर कचरा फैलने के पीछे इसे योजनाबद्ध तरीके से डाले जाने की आशंका भी जताई है हालांकि इसकी पुष्टि नहीं हुई है।

    इंदौर की स्वच्छता पहचान के लिहाज से यह स्थिति नगर निगम के लिए बड़ी चिंता का विषय है। शहर लगातार आठ बार स्वच्छता सर्वेक्षण में शीर्ष स्थान हासिल कर चुका है। ऐसे में सफाई व्यवस्था में किसी भी तरह की बड़ी बाधा शहर की इस उपलब्धि और छवि दोनों के लिए चुनौती बन सकती है। अब नजर इस बात पर है कि नगर निगम और सफाईकर्मियों के बीच बातचीत से कब समाधान निकलता है और शहर की नियमित सफाई व्यवस्था कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है।

  • इंदौर में दिखा भाजपा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन, तिरंगे के साथ जुटे हजारों लोग, मशाल लेकर अपनी विधानसभाओं के लिए निकले

    इंदौर में दिखा भाजपा कार्यकर्ताओं का शक्ति प्रदर्शन, तिरंगे के साथ जुटे हजारों लोग, मशाल लेकर अपनी विधानसभाओं के लिए निकले


    इंदौर । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की जनसेवा जनकल्याण और सुशासन के प्रति आभार व्यक्त करने के उद्देश्य से बुधवार को इंदौर में सेवा ज्योति संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विजय नगर स्थित आईडीए ग्राउंड पर आयोजित कार्यक्रम में शहर के अलग अलग विधानसभा क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और आम लोग पहुंचे। कार्यकर्ता हाथों में तिरंगा और पार्टी के झंडे लेकर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इसके बाद सभी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वर्चुअल संबोधन सुना। कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में खासा उत्साह नजर आया।

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ मंत्री तुलसी सिलावट सांसद शंकर लालवानी प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर सहित कई विधायक और पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे। विधायक रमेश मेंदोला गोलू शुक्ला मालिनी गौड़ उषा ठाकुर महेंद्र हार्डिया और मधु वर्मा समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा और जिला अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा सहित बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता आईडीए ग्राउंड पहुंचे।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मौजूद जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं को विकसित भारत के निर्माण का संकल्प दिलाया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन किया गया और सेवा ज्योति के प्रतीक के रूप में मशाल जलाई गई। विजयवर्गीय स्वयं मशाल लेकर विजय नगर थाने के सामने नवनिर्मित मशाल स्थल तक पहुंचे। यहां उन्होंने सेवा ज्योति प्रज्ज्वलित की। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारे लगाए और मशाल लेकर अपनी अपनी विधानसभा के लिए सेवा ज्योति यात्रा की शुरुआत की।

    भाजपा नेताओं के मुताबिक इस यात्रा में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र का रथ सबसे आगे रखा गया। उसके पीछे कार्यकर्ता मशाल लेकर आगे बढ़े। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बाइक से अपनी संबंधित विधानसभा क्षेत्रों की ओर रवाना हुए। यात्रा के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश दिया गया। इससे पहले प्रत्येक बूथ से कार्यकर्ता लाभार्थियों को साथ लेकर आईडीए ग्राउंड पहुंचे थे। कार्यक्रम स्थल पर सभी विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के लिए अलग अलग ब्लॉक बनाए गए थे ताकि व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित की जा सके।

    सेवा ज्योति यात्रा को भाजपा नेताओं ने जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के कश्मीर आंदोलन से भी जोड़ा। भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर में धारा 370 के विरोध में आंदोलन किया था। भाजपा नेताओं ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने को उनके संकल्प की पूर्ति के रूप में प्रस्तुत किया। इसी भावना के साथ आईडीए ग्राउंड से मशाल को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा स्थल तक ले जाया गया जहां विशाल सेवा ज्योति मशाल स्थापित की गई।

    कार्यक्रम के दौरान एक अन्य घटनाक्रम भी सामने आया। अपनी मांगों को लेकर सफाईकर्मी आईडीए ग्राउंड पहुंचे और प्रदर्शन करने लगे। प्रदर्शनकारियों ने कार्यक्रम स्थल के अंदर प्रवेश करने का प्रयास भी किया। इस दौरान कुछ देर के लिए वहां हलचल की स्थिति बनी रही।

    आईडीए ग्राउंड पर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार कार्यकर्ताओं के बैठने की व्यवस्था की गई थी। अलग अलग ब्लॉक में विधानसभा एक विधानसभा पांच विधानसभा तीन देपालपुर और महू के कार्यकर्ताओं के लिए स्थान निर्धारित किया गया था। दूसरी ओर विधानसभा दो राऊ विधानसभा चार और सांवेर के कार्यकर्ताओं के लिए अलग ब्लॉक बनाए गए थे। पूरे आयोजन के बाद कार्यकर्ता मशाल लेकर अपने अपने विधानसभा क्षेत्रों की ओर रवाना हुए।

  • शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    शेयर बाजार में फिर बढ़ा दबाव, सेंसेक्स 429 अंक गिरा; मेटल और रियल्टी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी दिखी

    नई दिल्ली:  भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 72,638.70 पर रहा। वहीं निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत गिरकर 22,603.05 पर बंद हुआ। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव मेटल और रियल्टी शेयरों में देखने को मिला।

    सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी मेटल 2.33 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी 1.77 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। इसके अलावा निफ्टी ऑटो में 1.58 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज में 1.43 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस में 1.41 प्रतिशत, निफ्टी आईटी में 1.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई में 1.22 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई। इन क्षेत्रों में बिकवाली ने बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।

    बुधवार को कुछ सेक्टरों ने बाजार की व्यापक कमजोरी के बीच बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी पीएसयू बैंक 1 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुआ। निफ्टी मीडिया में 0.69 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.08 प्रतिशत की बढ़त रही। इस तरह बैंकिंग क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मजबूती दिखाई दी, जबकि ज्यादातर प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे।

    मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में कारोबार एक जैसा नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 378.60 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 59,382.60 पर बंद हुआ। इसके विपरीत निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 58.25 अंक यानी 0.30 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,506.95 पर बंद हुआ। इससे बाजार के अलग-अलग हिस्सों में निवेशकों की गतिविधि में अंतर देखने को मिला।

    सेंसेक्स में शामिल शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस बढ़त के साथ बंद हुए। दूसरी ओर टाइटन, बीईएल, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, एलएंडटी, टाटा स्टील, एमएंडएम, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, इंडिगो, एचयूएल, सन फार्मा, मारुति सुजुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टेक महिंद्रा में गिरावट रही।

    बाजार में गिरावट को लेकर जानकारों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से उम्मीद के मुताबिक ब्याज दर बढ़ाए जाने के बाद घरेलू बाजार ने मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव पर तेजी से प्रतिक्रिया दी। नीति रुख के न्यूट्रल से कैलिब्रेटेड टाइटनिंग की ओर जाने को ब्याज दर चक्र में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया, जिसका असर निवेशकों की धारणा पर पड़ा।

    इसके अलावा अमेरिकी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले अमेरिकी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती के बीच रुपया भी दबाव में रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया। इन वैश्विक और घरेलू कारकों के बीच बुधवार को शेयर बाजार में बिकवाली का रुख हावी रहा।

    ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बैंकिंग शेयरों को मार्जिन से संभावित लाभ की उम्मीद का फायदा मिला और इस क्षेत्र के कुछ शेयरों ने बाजार की कमजोरी के विपरीत प्रदर्शन किया। हालांकि, बाजार के अधिकांश हिस्सों में बिकवाली का दबाव बना रहा और इसके चलते सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों गिरावट के साथ बंद हुए।

  • मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती को पद से नहीं बल्कि विश्वास से बना रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के पद बदलते रहे, लेकिन उनकी मित्रता कायम रही। वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की जनसेवा यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन आबे की स्मृति को समर्पित गलियारे का उद्घाटन विशेष संयोग है।

    मुख्यमंत्री योगी ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को स्थायी रूप से संजो रही है।

    योगी ने दोनों नेताओं की पहली मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। उसी साल आबे ने भारत की संसद में भारत और जापान की मजबूती को एक-दूसरे के हित से जोड़ा था। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी में गंगा आरती में हिस्सा लिया। 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया, जबकि 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो देशों के विश्वास में बदलती है तो उसके व्यापक प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे और भारत में राष्ट्रीय शोक रखा गया। योगी ने इसे प्रोटोकॉल के बजाय व्यक्तिगत रिश्ते से जुड़ा कदम बताया।

    उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित बताते हुए कहा कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। दोनों देशों का सहयोग अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है।

    योगी ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी जापान यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए। उन्होंने जापान में मैग्लेव ट्रेन की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखने की बात कही। यामानाशी को उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर बताया गया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है और इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे तथा एयरपोर्ट का बड़ा नेटवर्क है। उन्होंने बताया कि 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अवसर की शुरुआती भेंट है। उन्होंने काशी और क्योटो को अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहर विरासत के संरक्षण के साथ विकास का संदेश देते हैं।

    योगी ने कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया। अकी आबे ने शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय संबंधों को याद किया और कहा कि 2015 में काशी आने के बाद उनके पति उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे। उन्होंने कहा कि आबे जीवित होते तो अपने नाम पर बने स्मारक को देखकर खुश होते। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर लगे 108 रुद्राक्षों की भी प्रशंसा की और बताया कि जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है।