Blog

  • महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स छोड़िए एवोकाडो से पाएं निखरी और मुलायम त्वचा जानें इस्तेमाल का सही तरीका

    महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स छोड़िए एवोकाडो से पाएं निखरी और मुलायम त्वचा जानें इस्तेमाल का सही तरीका


    नई दिल्ली। आजकल त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने के लिए लोग तरह तरह के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कई बार साधारण और प्राकृतिक चीजें भी स्किन केयर रूटीन में उपयोगी साबित हो सकती हैं। एवोकाडो ऐसा ही एक फल है जो अपने पोषक तत्वों के कारण डाइट के साथ साथ त्वचा की देखभाल के लिए भी लोकप्रिय है। इसमें हेल्दी फैट्स विटामिन ई विटामिन सी और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो त्वचा को मॉइस्चराइज रखने और रूखेपन को कम करने में मदद कर सकते हैं।

    अगर आपकी त्वचा रूखी और बेजान नजर आती है तो एवोकाडो से बना फेस मास्क एक आसान घरेलू विकल्प हो सकता है। इसके लिए पके हुए एवोकाडो को अच्छी तरह मैश करके उसका मुलायम पेस्ट तैयार करें। इसे साफ चेहरे पर हल्के हाथों से लगाएं और करीब 10 से 15 मिनट के बाद सामान्य पानी से चेहरा धो लें। इसके बाद त्वचा पर हल्का मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है। एवोकाडो में मौजूद फैट्स त्वचा को नमी देने में मदद कर सकते हैं जिससे चेहरा अधिक मुलायम महसूस हो सकता है।

    एवोकाडो में मौजूद विटामिन ई को त्वचा के लिए उपयोगी एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। यह त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। वहीं विटामिन सी त्वचा की सामान्य कोलेजन निर्माण प्रक्रिया में भूमिका निभाता है। यही वजह है कि संतुलित डाइट में एवोकाडो को शामिल करना त्वचा की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकता है।

    एवोकाडो का इस्तेमाल केवल फेस मास्क के तौर पर ही नहीं बल्कि स्किन केयर रूटीन में मॉइस्चराइजिंग सामग्री के रूप में भी किया जाता है। कुछ लोग एवोकाडो पल्प को एलोवेरा जेल के साथ मिलाकर फेस पैक बनाते हैं। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू नुस्खे को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर रहता है। अगर त्वचा पर जलन खुजली या लालिमा दिखाई दे तो इसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए।

    अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली या मुहांसों वाली है तो एवोकाडो आधारित हेवी मास्क का इस्तेमाल सावधानी से करें। किसी भी प्राकृतिक सामग्री का मतलब यह नहीं है कि वह हर व्यक्ति की त्वचा के लिए सुरक्षित या उपयुक्त होगी। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को नए उत्पाद या घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर हो सकता है।

    स्किन केयर के साथ खानपान का भी त्वचा की सेहत पर असर पड़ता है। एवोकाडो को डाइट में शामिल करने से शरीर को हेल्दी फैट्स फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। इसे सलाद स्मूदी या टोस्ट के साथ लिया जा सकता है। हालांकि किसी एक फल को त्वचा की सभी समस्याओं का समाधान नहीं माना जा सकता। पर्याप्त पानी संतुलित आहार अच्छी नींद और नियमित स्किन केयर भी उतने ही जरूरी हैं।

    इस तरह एवोकाडो को अपनी स्किन केयर और डाइट का हिस्सा बनाकर त्वचा को नमी और पोषण देने में मदद मिल सकती है। लेकिन बेहतर परिणाम के लिए अपनी त्वचा के प्रकार को समझना और किसी भी नए घरेलू प्रयोग को सावधानी से शुरू करना जरूरी है।

  • एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    एंटी एजिंग के लिए महंगे प्रोडक्ट्स नहीं, ये हेल्दी फूड्स बनाए रखेंगे त्वचा की चमक और खूबसूरती

    नई दिल्ली । बढ़ती उम्र के साथ त्वचा पर झुर्रियां, रूखापन और चमक कम होने जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। हालांकि सही खान-पान और संतुलित डाइट के जरिए उम्र बढ़ने के असर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। एंटी-एजिंग डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन, मिनरल्स और जरूरी पोषक तत्व भरपूर मात्रा में मौजूद होते हैं। ये तत्व शरीर में बनने वाले फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करते हैं और त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में भूमिका निभाते हैं।

    फ्री रेडिकल्स शरीर में बनने वाले ऐसे हानिकारक तत्व होते हैं, जो प्रदूषण, तनाव और खराब जीवनशैली के कारण बढ़ सकते हैं। इनकी वजह से कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है और चेहरे पर उम्र के निशान दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में डाइट में कुछ खास सुपरफूड्स को शामिल करके त्वचा की प्राकृतिक चमक और सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

    टमाटर एंटी-एजिंग डाइट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसमें लाइकोपीन नामक तत्व पाया जाता है, जो त्वचा को सूरज की हानिकारक किरणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा गाजर और कद्दू में मौजूद बीटा-कैरोटीन शरीर में जाकर विटामिन ए में बदलता है, जो त्वचा की मरम्मत प्रक्रिया के लिए जरूरी माना जाता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी त्वचा की सेहत के लिए फायदेमंद होती हैं। पालक, मेथी, ब्रोकली और अन्य हरी सब्जियों में विटामिन सी और विटामिन ई जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। वहीं संतरा, नींबू, आंवला और कीवी जैसे खट्टे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत होते हैं। विटामिन सी शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है, जिससे त्वचा की लचक बनी रह सकती है।

    ड्राई फ्रूट्स और सीड्स जैसे बादाम, अखरोट, अलसी और चिया सीड्स भी एंटी-एजिंग डाइट का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन ई, जिंक और अन्य पोषक तत्व होते हैं, जो त्वचा की नमी बनाए रखने और उसे स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। नियमित रूप से सीमित मात्रा में इनका सेवन त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है।

    ग्रीन टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट तत्व कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले फ्री रेडिकल्स से बचाने में मदद कर सकते हैं। इसमें मौजूद पॉलीफेनॉल त्वचा पर प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी त्वचा के लिए बेहद जरूरी है। शरीर में पानी की कमी होने पर त्वचा बेजान और रूखी दिखाई दे सकती है।

    एवोकाडो में मौजूद हेल्दी फैट्स, विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं। ब्लूबेरी में पाए जाने वाले एंथोसायनिन और विटामिन सी त्वचा को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक हो सकते हैं। वहीं हल्दी में मौजूद करक्यूमिन अपने एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जानी जाती है, जो त्वचा की सूजन और दाग-धब्बों को कम करने में मदद कर सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, केवल किसी एक फूड को खाने से उम्र का असर पूरी तरह नहीं रुकता, बल्कि संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, अच्छी नींद और स्वस्थ जीवनशैली के साथ इन सुपरफूड्स को डाइट में शामिल करने से त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ और चमकदार बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

  • 20 साल बाद लौट रही ‘मालामाल वीकली’, रवीना-परिणीति और परेश रावल लगाएंगे कॉमेडी का तड़का

    20 साल बाद लौट रही ‘मालामाल वीकली’, रवीना-परिणीति और परेश रावल लगाएंगे कॉमेडी का तड़का


    नई दिल्ली। साल 2006 में रिलीज हुई कॉमेडी फिल्म मालामाल वीकली ने दर्शकों को अपनी अनोखी कहानी और मजेदार किरदारों के जरिए खूब हंसाया था। फिल्म के कई सीन और संवाद आज भी दर्शकों को याद हैं। अब करीब दो दशक बाद इस चर्चित फ्रेंचाइजी की वापसी की खबर ने बॉलीवुड और कॉमेडी फिल्मों के प्रशंसकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक मालामाल वीकली 2 पर काम चल रहा है और इस बार फिल्म में परेश रावल के साथ रवीना टंडन और परिणीति चोपड़ा जैसे चर्चित नाम भी नजर आ सकते हैं। हालांकि अभी फिल्म को लेकर मेकर्स की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।

    मालामाल वीकली की सबसे बड़ी खूबियों में उसके किरदारों की कॉमिक टाइमिंग और कहानी में लगातार पैदा होने वाली उलझनें शामिल थीं। परेश रावल ने फिल्म में अपने अभिनय और हास्य अंदाज से दर्शकों का खास मनोरंजन किया था। यही वजह है कि सीक्वल में उनकी वापसी को लेकर फैंस काफी उत्साहित हैं। बताया जा रहा है कि नए पार्ट में पुराने अंदाज को बरकरार रखते हुए कहानी और किरदारों को नए तरीके से पेश किया जाएगा।

    फिल्म से जुड़ी सबसे चर्चित खबर रवीना टंडन और परिणीति चोपड़ा की संभावित एंट्री को लेकर है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों अभिनेत्रियों को कहानी और उनके किरदार पसंद आए हैं और उन्होंने प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने के लिए हामी भरी है। अगर यह कास्टिंग अंतिम रूप लेती है तो दोनों अभिनेत्रियां पहली बार इस कॉमेडी फ्रेंचाइजी में साथ नजर आएंगी। दोनों की मौजूदगी से फिल्म की स्टारकास्ट और मजबूत होने की उम्मीद है।

    रवीना टंडन लंबे समय से बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं और कॉमेडी से लेकर गंभीर भूमिकाओं तक कई तरह के किरदार निभा चुकी हैं। दूसरी ओर परिणीति चोपड़ा भी अलग-अलग तरह की भूमिकाओं के जरिए दर्शकों का ध्यान खींचती रही हैं। ऐसे में परेश रावल के साथ दोनों की कॉमिक केमिस्ट्री कैसी होगी यह फिल्म की सबसे दिलचस्प बातों में से एक हो सकती है।

    सीक्वल के निर्देशन को लेकर भी बदलाव की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार प्रियदर्शन फिल्म का निर्देशन नहीं करेंगे। उनकी जगह अमित जोशी को जिम्मेदारी मिलने की बात कही जा रही है। इससे फिल्म को पहले पार्ट से अलग और नया विजुअल तथा कॉमेडी ट्रीटमेंट मिलने की उम्मीद है।

    कहानी को लेकर भी यह दावा किया जा रहा है कि मालामाल वीकली 2 पहले पार्ट की कहानी को सीधे आगे नहीं बढ़ाएगी। नए पार्ट में नए किरदारों और अलग लोकेशन के साथ एक नई कहानी दिखाई जा सकती है। हालांकि फिल्म का मूल कॉमेडी फॉर्मूला लालच और पैसों की चाह के इर्द-गिर्द ही रहने की संभावना है। गांव के कुछ किरदार बड़ी रकम हासिल करने की कोशिश में ऐसे हालात में फंसेंगे जहां एक के बाद एक गलतफहमियां और हास्यास्पद परिस्थितियां पैदा होंगी।

    यही उलझनें फिल्म को मनोरंजन से भरने का काम करेंगी। अब फिल्म के प्रशंसकों को आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। यदि रिपोर्ट्स के मुताबिक परेश रावल के साथ रवीना टंडन और परिणीति चोपड़ा की जोड़ी बनती है तो यह कॉमेडी प्रेमियों के लिए एक दिलचस्प स्क्रीन कॉम्बिनेशन साबित हो सकता है। फिलहाल फिल्म की शूटिंग, रिलीज डेट और पूरी स्टारकास्ट को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने का इंतजार है।

  • 41 साल की उम्र में कांस्टेबल गणेश का निधन, ड्यूटी पर हुई मौत से पुलिस महकमे में पसरा मातम

    41 साल की उम्र में कांस्टेबल गणेश का निधन, ड्यूटी पर हुई मौत से पुलिस महकमे में पसरा मातम


    नई दिल्ली। मुंबई से एक दुखद घटना सामने आई है। बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान के बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर सुरक्षा ड्यूटी में तैनात 41 वर्षीय पुलिस कांस्टेबल की अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मी का नाम गणेश था और वह अभिनेता के घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था में तैनात था। ड्यूटी के दौरान अचानक उसकी तबीयत खराब हुई और वह जमीन पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने तत्काल उसे संभाला और इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। हालांकि डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।

    शुरुआती जानकारी के मुताबिक पुलिसकर्मी की मौत की वजह हार्ट अटैक बताई जा रही है। हालांकि मौत की वास्तविक वजह की पुष्टि संबंधित मेडिकल और आधिकारिक जांच के बाद ही पूरी तरह हो सकेगी। अचानक हुई इस घटना से वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों में शोक का माहौल बन गया। महज 41 वर्ष की उम्र में ड्यूटी के दौरान एक जवान की जान चले जाने की खबर ने हर किसी को झकझोर दिया।

    सलमान खान के घर के बाहर लंबे समय से सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रहती है। इसकी प्रमुख वजह अभिनेता को पिछले कुछ समय से मिल रही धमकियां हैं। सुरक्षा एजेंसियां और मुंबई पुलिस लगातार उनकी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहती हैं। ऐसे में गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर पुलिसकर्मियों की तैनाती भी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। गणेश भी इसी सुरक्षा व्यवस्था के तहत अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।

    सलमान खान को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह की ओर से कई बार धमकियां मिलने की खबरें सामने आ चुकी हैं। इसी वजह से अभिनेता की सुरक्षा बढ़ाई गई है। वर्ष 2024 में भी उनके बांद्रा स्थित घर के बाहर गोलीबारी की घटना हुई थी। मोटरसाइकिल पर आए हमलावरों ने गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर कई राउंड फायरिंग की थी। इस घटना के बाद सलमान खान की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने और ज्यादा सतर्कता बरतनी शुरू कर दी थी।

    सलमान खान खुद भी कई मौकों पर अपनी सुरक्षा को लेकर बात कर चुके हैं। उनका कहना रहा है कि लगातार सुरक्षा घेरे में रहना सामान्य जिंदगी को प्रभावित करता है। कई सुरक्षाकर्मियों के साथ चलना और हर जगह सुरक्षा इंतजाम के बीच रहना उनके लिए आसान नहीं है। इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सुरक्षा को नजरअंदाज करना संभव नहीं है।

    सलमान ने एक बातचीत में यह भी कहा था कि जिंदगी और मौत का फैसला ऊपर वाले के हाथ में है। हालांकि सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतना भी जरूरी है। अभिनेता की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी गणेश की अचानक हुई मौत ने एक बार फिर ड्यूटी पर तैनात जवानों की जिम्मेदारियों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों की ओर ध्यान खींचा है।

    फिलहाल इस घटना से जुड़े आधिकारिक विवरण और मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार है। पुलिसकर्मी की अचानक मौत से उनके साथी जवानों में शोक है और घटना के बाद गैलेक्सी अपार्टमेंट के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के बीच भी माहौल बेहद गंभीर नजर आया।

  • MP Weather Update: भोपाल में बारिश का दौर जारी, गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने किया अलर्ट

    MP Weather Update: भोपाल में बारिश का दौर जारी, गरज-चमक के साथ बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने किया अलर्ट


    भोपाल ।  भोपाल में शनिवार 8 अगस्त को मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलता नजर आ सकता है। मानसून की सक्रियता के बीच राजधानी में बादल छाए रहने और बारिश होने की संभावना बनी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के भोपाल केंद्र ने पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए 8 अगस्त को गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई है। ऐसे में भोपाल और आसपास के इलाकों में लोगों को मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है। शुक्रवार को भी राजधानी में मौसम नम रहा और वातावरण में नमी बनी रही। मौसम विभाग के अनुसार भोपाल क्षेत्र में बादलों की आवाजाही के बीच तापमान में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना नहीं है।

    8 अगस्त को भोपाल में सुबह से ही आसमान में बादल छाए रह सकते हैं। दिन के दौरान कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है जबकि कहीं कहीं गरज चमक के साथ तेज बौछारें भी पड़ सकती हैं। मानसून के दौरान स्थानीय स्तर पर बनने वाले बादल कई बार कुछ ही समय में मौसम का रुख बदल देते हैं। यही वजह है कि शहर के एक हिस्से में बारिश हो सकती है जबकि दूसरे हिस्से में कुछ समय तक केवल बादल छाए रह सकते हैं। राजधानी के निचले इलाकों में बारिश के बाद जलभराव की स्थिति बनने की संभावना को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

    मौसम विभाग की चेतावनी केवल 8 अगस्त तक सीमित नहीं है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में 9 अगस्त को भी गरज चमक और आकाशीय बिजली की संभावना जताई गई है जबकि 10 और 11 अगस्त को भारी बारिश के साथ गरज चमक को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इसका असर भोपाल सहित आसपास के क्षेत्रों के मौसम पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश का दौर और सक्रिय होने की संभावना बनी हुई है।

    बारिश के कारण भोपाल के तापमान में भी राहत बनी रह सकती है। राजधानी में इन दिनों उमस और बादलों के बीच मौसम का असर लगातार बदल रहा है। शुक्रवार को भोपाल के अरेरा हिल्स क्षेत्र में तापमान 26 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया जबकि हवा की रफ्तार और नमी भी बनी रही। मौसम में नमी अधिक होने के कारण बारिश के बाद वातावरण ठंडा और सुहाना महसूस हो सकता है। हालांकि बारिश रुकने के बाद उमस बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

    शनिवार को घर से बाहर निकलने वाले लोगों को मौसम पर नजर रखने की सलाह दी जाती है। खासकर गरज चमक के दौरान खुले मैदानों पेड़ के नीचे और बिजली के खंभों के आसपास खड़े होने से बचना चाहिए। दोपहिया वाहन चालकों को भी बारिश के दौरान सड़क पर अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी क्योंकि तेज बारिश के बाद सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है। वहीं बारिश के कारण यातायात की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

    कुल मिलाकर 8 अगस्त को भोपाल में मौसम सुहाना रहने के साथ बारिश के आसार हैं। बादलों की आवाजाही और गरज चमक राजधानी के मौसम को प्रभावित कर सकती है। मौसम विभाग की अगले कुछ दिनों की चेतावनी को देखते हुए यह साफ है कि भोपाल में मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय बना हुआ है और आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रह सकता है।

  • सूर्य ग्रहण में क्यों बंद कर दिए जाते हैं मंदिरों के कपाट? जानिए पूजा और मूर्ति स्पर्श से जुड़ी मान्यता

    सूर्य ग्रहण में क्यों बंद कर दिए जाते हैं मंदिरों के कपाट? जानिए पूजा और मूर्ति स्पर्श से जुड़ी मान्यता


    नई दिल्ली। सूर्य ग्रहण को लेकर भारतीय सनातन परंपरा में कई तरह की धार्मिक मान्यताएं और नियम बताए गए हैं। इनमें सबसे प्रमुख नियमों में ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखना और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श न करना शामिल है। धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण का समय सामान्य दिनों से अलग माना जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ से जुड़े कई कार्यों को रोक दिया जाता है। हालांकि इन नियमों का संबंध मुख्य रूप से धार्मिक परंपराओं और आस्था से है। वैज्ञानिक दृष्टि से ग्रहण एक खगोलीय घटना है जिसमें सूर्य चंद्रमा और पृथ्वी एक विशेष स्थिति में आ जाते हैं।

    वैदिक परंपरा में सूर्य ग्रहण को अमावस्या से जोड़कर देखा जाता है। ग्रहण के समय सूतक काल जैसी मान्यताओं का भी उल्लेख मिलता है। परंपरागत मान्यता के अनुसार ग्रहण से पहले मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और देवी-देवताओं की मूर्तियों को ढक दिया जाता है। इसके पीछे यह विश्वास माना जाता है कि ग्रहण का समय धार्मिक अनुष्ठानों के लिए सामान्य समय से अलग होता है और इस दौरान मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए विशेष सावधानियां बरती जानी चाहिए।

    भगवान की मूर्ति को स्पर्श न करने की परंपरा भी इसी धार्मिक मान्यता से जुड़ी हुई है। हिंदू धर्म में मंदिर में स्थापित मूर्तियों को केवल पत्थर या धातु की प्रतिमा नहीं माना जाता बल्कि विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठित किए जाने के बाद उन्हें देवस्वरूप माना जाता है। इसलिए ग्रहण जैसे विशेष समय में मूर्ति को स्पर्श करने से बचने की परंपरा विकसित हुई। कई धार्मिक मान्यताओं में इस अवधि को आध्यात्मिक साधना और आत्मसंयम का समय भी माना गया है।

    सूतक काल को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में नियम मिलते हैं। इसमें भोजन करने से लेकर पूजा-पाठ और धार्मिक वस्तुओं के स्पर्श तक कई तरह के प्रतिबंध बताए जाते हैं। हालांकि इन नियमों का पालन क्षेत्र और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि धार्मिक मान्यताओं को आस्था के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए।

    ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर और घर की साफ-सफाई करने की परंपरा भी कई स्थानों पर देखने को मिलती है। मान्यता के अनुसार ग्रहण के बाद स्नान किया जाता है और इसके बाद देवी-देवताओं को स्नान कराकर पूजा-अर्चना की जाती है। कई परिवारों में मंदिर और पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव भी किया जाता है। इसके बाद भगवान की नियमित पूजा शुरू करने की परंपरा है। कुछ लोग इस अवसर पर जरूरतमंद लोगों को भोजन कपड़े या अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान भी करते हैं।

    वर्ष 2026 के सूर्य ग्रहण को लेकर भी धार्मिक नियमों और मान्यताओं की चर्चा हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 12 अगस्त 2026 की रात से 13 अगस्त की सुबह तक ग्रहण की अवधि बताई गई है। लेकिन ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने की स्थिति में यहां सूतक मानने को लेकर भी धार्मिक पंचांगों में अलग-अलग मत हो सकते हैं। इसलिए किसी विशेष धार्मिक नियम का पालन करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग या संबंधित धार्मिक विद्वान की सलाह लेना उचित माना जाता है।

    कुल मिलाकर सूर्य ग्रहण में भगवान की मूर्ति को न छूने और मंदिर के कपाट बंद रखने की परंपरा धार्मिक आस्था और सदियों पुरानी मान्यताओं से जुड़ी हुई है। इन नियमों का उद्देश्य श्रद्धालुओं के लिए इस विशेष खगोलीय घटना को आध्यात्मिक अनुशासन और आत्मसंयम के अवसर के रूप में देखना भी रहा है। वहीं आधुनिक विज्ञान सूर्य ग्रहण को पूरी तरह एक खगोलीय घटना के रूप में समझता है। ऐसे में धार्मिक विश्वास और वैज्ञानिक तथ्य दोनों को उनके अपने संदर्भ में समझना जरूरी है।

  • IIT मद्रास के छह वैज्ञानिकों को जेसी बोस अनुदान: भारत के अत्याधुनिक अनुसंधान को मिली बड़ी राष्ट्रीय पहचान

    IIT मद्रास के छह वैज्ञानिकों को जेसी बोस अनुदान: भारत के अत्याधुनिक अनुसंधान को मिली बड़ी राष्ट्रीय पहचान

    चेन्नई। किसी देश की वैज्ञानिक शक्ति का वास्तविक आकलन इस बात से होता है कि उसके वैज्ञानिक कितने कठिन सवालों के समाधान खोज रहे हैं और उनका शोध समाज तथा राष्ट्र के भविष्य को कितना बदल सकता है। इसी कसौटी पर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT मद्रास) के छह वैज्ञानिकों की उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। संस्थान के छह वरिष्ठ संकाय सदस्यों को अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के प्रतिष्ठित जेसी बोस अनुदान के लिए चुना गया है।

    दरअसल, यह उपलब्धि इन छह वैज्ञानिकों के व्यक्तिगत शोध सम्मान तक सीमित नहीं है। यह भारत में उच्च स्तरीय, दीर्घकालिक और समस्या-समाधान आधारित अनुसंधान को मिल रही बढ़ती राष्ट्रीय प्राथमिकता का संकेत भी है। जिन छह प्रोफेसरों को यह अनुदान मिला है, उनका शोध कृत्रिम अंग और पुनर्वास तकनीक, स्वच्छ पेयजल, अगली पीढ़ी का ऑप्टिकल संचार, कार्बन कैप्चर, चिकित्सा उपकरण तथा अत्याधुनिक बोरॉन रसायन विज्ञान जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है।चयनित वैज्ञानिकों में प्रो. सुजाता श्रीनिवासन, प्रो. थलप्पिल प्रदीप, प्रो. दीपा वेंकटेश, प्रो. जितेंद्र एस. सांगवाई, प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन और प्रो. सुंदरगोपाल घोष शामिल हैं।

    छह वैज्ञानिक, छह अलग क्षेत्र- एक साझा लक्ष्य: भारत को ज्ञान और तकनीक में आगे ले जाना
    आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी ने चयनित वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि यह संस्थान में महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में हो रहे उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान एवं विकास को दर्शाता है। इन छह वैज्ञानिकों के शोध की विविधता आईआईटी मद्रास की अनुसंधान क्षमता की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करती है। एक ओर जहां प्रो. सुजाता श्रीनिवासन का काम दिव्यांगजनों और गतिशीलता संबंधी चुनौतियों से जूझ रहे लोगों के जीवन को आसान बनाने वाली तकनीकों पर केंद्रित है, वहीं प्रो. थलप्पिल प्रदीप का शोध देश के सामने मौजूद स्वच्छ पेयजल की चुनौती के तकनीकी समाधान खोज रहा है। दूसरी ओर प्रो. दीपा वेंकटेश भारत की उच्च क्षमता वाली ऑप्टिकल संचार व्यवस्था को नई दिशा दे रही हैं और प्रो. जितेंद्र एस. सांगवाई ऊर्जा तथा कार्बन प्रबंधन से जुड़ी जटिल चुनौतियों पर काम कर रहे हैं।

    इसी तरह प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन का शोध चिकित्सा उपकरणों और मानव शरीर के मस्तिष्क-मांसपेशी संबंधी कार्यों को समझने में मदद कर रहा है, जबकि प्रो. सुंदरगोपाल घोष का काम उन्नत बोरॉन रसायन विज्ञान और भविष्य की रासायनिक तकनीकों के लिए नए रास्ते खोल रहा है।

    कृत्रिम अंगों को भारतीय जरूरतों के अनुरूप बनाने वाली सुजाता श्रीनिवासन
    मैकेनिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर सुजाता श्रीनिवासन कृत्रिम अंग, सहायक प्रौद्योगिकी और पुनर्वास उपकरणों के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रही हैं। वे TTK सेंटर फॉर रिहैबिलिटेशन रिसर्च एंड डिवाइस डेवलपमेंट (R2D2) तथा नेशनल सेंटर फॉर असिस्टिव हेल्थ टेक्नोलॉजीज से जुड़ी हैं।

    उनकी टीम ने भारतीय परिस्थितियों और जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए अनेक किफायती सहायक उपकरण विकसित किए हैं। इनमें NeoFly-NeoBolt प्रणाली, स्टैंडिंग व्हीलचेयर, Kadam कृत्रिम घुटना और YD One हल्की व्हीलचेयर उल्लेखनीय हैं। उनके शोध का महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीक को वास्तविक उपयोग तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया है। उनके नाम कृत्रिम अंगों और सहायक प्रौद्योगिकी से जुड़े कई भारतीय, अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट भी हैं।

    करोड़ों लोगों तक सुरक्षित पानी पहुंचाने वाले शोध की पहचान
    रसायन विज्ञान के प्रोफेसर थलप्पिल प्रदीप भारत में स्वच्छ जल तकनीक के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम हैं। उनका शोध नैनोमटेरियल्स, माइक्रोड्रॉपलेट्स, आइस केमिस्ट्री और विशेष रूप से किफायती जल शोधन तकनीकों से जुड़ा है।

    उनके शोध का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव यह है कि प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। उन्हें पद्म श्री, विज्ञान श्री, एनी पुरस्कार और विनफ्यूचर पुरस्कार सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। उन्होंने आईआईटी मद्रास रिसर्च पार्क में इंटरनेशनल सेंटर फॉर क्लीन वाटर की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जेसी बोस अनुदान का यह उनका तीसरा पांच वर्षीय कार्यकाल है।

    ऑप्टिकल संचार में स्वदेशी क्षमता का निर्माण
    इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर दीपा वेंकटेश उच्च क्षमता वाले ऑप्टिकल कम्युनिकेशन, माइक्रोवेव फोटोनिक्स और ऑप्टिकल सिग्नल प्रोसेसिंग में विशेषज्ञता रखती हैं। वे एडवांस्ड ऑप्टिकल कम्युनिकेशन टेस्टबेड की प्रोजेक्ट लीड हैं।

    दूरसंचार विभाग के समर्थन से चल रही इस पहल के तहत आईआईटी मद्रास में मल्टीकोर फाइबर के साथ देश का पहला फील्ड टेस्टबेड स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य भारत में ऑप्टिकल संचार के क्षेत्र में स्वदेशी समाधान विकसित करने और तकनीकी मानकीकरण को आगे बढ़ाना है। वे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी नवाचार राष्ट्रीय फैलोशिप की प्राप्तकर्ता भी हैं।

    कार्बन कैप्चर से ऊर्जा सुरक्षा तक सांगवाई का शोध
    केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर जितेंद्र एस. सांगवाई का अनुसंधान वर्तमान वैश्विक ऊर्जा और जलवायु चुनौतियों से सीधे जुड़ा है। उनका प्रमुख शोध क्षेत्र कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड सीक्वेस्ट्रेशन (CCUS), गैस हाइड्रेट्स और अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस इंजीनियरिंग है।

    वे 200 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित कर चुके हैं और उनके शोध कार्यों को लगभग 11,000 उद्धरण प्राप्त हुए हैं। उनके नाम 43 पेटेंट भी हैं। वे भारतीय राष्ट्रीय अभियांत्रिकी अकादमी और राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत के फेलो हैं।

    चिकित्सा तकनीक में मानव शरीर को समझने का प्रयास
    प्रो. रामकृष्णन स्वामीनाथन का शोध बायोमेडिकल उपकरणों और मस्तिष्क तथा मांसपेशियों के कार्यों के विश्लेषण से जुड़ा है। उनका प्रयास चिकित्सा उपकरणों को अधिक वैज्ञानिक, सटीक और नैदानिक रूप से उपयोगी बनाने पर केंद्रित रहा है।

    उन्होंने अपने करियर में 50 से अधिक शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है और 550 से अधिक शोध लेख प्रकाशित किए हैं। चिकित्सा उपकरणों के नियमों और मानकों के वैश्विक सामंजस्य के वे प्रमुख समर्थक हैं और इस विषय से जुड़े अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर चुके हैं।

    बोरॉन रसायन विज्ञान में नई संभावनाओं की तलाश
    रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुंदरगोपाल घोष संक्रमण धातु-बोरॉन रसायन विज्ञान में अग्रणी अनुसंधान कर रहे हैं। उनका काम बोरॉन-युक्त आणविक प्रणालियों के संश्लेषण, संरचना, इलेक्ट्रॉनिक बंधन और रासायनिक प्रतिक्रियाशीलता को समझने पर केंद्रित है।

    उन्होंने 325 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और उनका शोध विशेष रूप से उत्प्रेरण तथा छोटे अणुओं के सक्रियण जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण माना जाता है। वे भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारतीय विज्ञान अकादमी तथा राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी, भारत के विशिष्ट फेलो हैं।

    पांच वर्षों तक शोध को मिलेगा मजबूत आधार
    ANRF जेसी बोस अनुदान वरिष्ठ वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को उनके उत्कृष्ट शोध प्रदर्शन के आधार पर प्रदान किया जाता है। चयन में शोध प्रकाशन, पेटेंट, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, शोध परिणाम, अनुदान और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के अन्य मानकों को ध्यान में रखा जाता है।

    इस अनुदान के तहत चयनित वैज्ञानिकों को पांच वर्षों तक प्रतिवर्ष 25 लाख रुपये की सहायता मिलती है। इसका उपयोग मानव संसाधन, उपकरण, उपभोग्य सामग्री, यात्रा, आकस्मिक खर्च और अन्य शोध आवश्यकताओं के लिए किया जा सकता है, साथ ही संस्थागत ओवरहेड सहायता भी उपलब्ध होती है।

    उल्‍लेखनीय है कि आईआईटी मद्रास के छह वैज्ञानिकों का एक साथ इस प्रतिष्ठित अनुदान के लिए चयन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि भारत का वैज्ञानिक अनुसंधान अब प्रयोगशालाओं और शोध पत्रों से निरंतर आगे बढ़ते हुए कृत्रिम अंगों से लेकर स्वच्छ जल, डिजिटल संचार से लेकर स्वच्छ ऊर्जा और चिकित्सा तकनीक से लेकर उन्नत रसायन विज्ञान तक, भारतीय वैज्ञानिक अनुसंधान तेजी से उन क्षेत्रों में अपनी छाप छोड़ रहा है, जोकि आने वाले दशकों में भारत की सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी शक्ति को निर्धारित करेंगे।

  • हरियाली अमावस्या पर राशि अनुसार करें दान, मेष से मीन तक जानें कौन सी चीज चढ़ाएगी पुण्य और सौभाग्य

    हरियाली अमावस्या पर राशि अनुसार करें दान, मेष से मीन तक जानें कौन सी चीज चढ़ाएगी पुण्य और सौभाग्य


    नई दिल्ली। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है और इसी पवित्र महीने में आने वाली अमावस्या का भी सनातन परंपरा में खास महत्व बताया गया है। सावन अमावस्या को कई जगह हरियाली अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों का स्मरण करने के साथ तर्पण और दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। माना जाता है कि जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान देने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और परिवार में सुख शांति तथा समृद्धि का वातावरण बना रहता है। इस साल हरियाली अमावस्या 12 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन राशि के अनुसार कुछ विशेष वस्तुओं का दान करने की परंपरा भी बताई गई है।

    मेष राशि के जातकों के लिए लाल रंग से जुड़ी वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है। इस दिन लाल वस्त्र मसूर की दाल या तांबे के बर्तन का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा मिलती है।

    वृषभ राशि के लोगों के लिए सफेद वस्तुओं का दान विशेष माना जाता है। ऐसे जातक सफेद चावल चीनी दूध या सफेद वस्त्र जरूरतमंद लोगों को दान कर सकते हैं। माना जाता है कि इससे घर में सुख शांति बनी रहती है और पारिवारिक संबंधों में मधुरता आती है।

    मिथुन राशि के जातक हरी वस्तुओं का दान कर सकते हैं। हरी मूंग हरे कपड़े और हरी सब्जियों का दान इस दिन किया जा सकता है। वहीं कर्क राशि वालों के लिए चांदी दूध चावल और सफेद मिठाई का दान शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इन वस्तुओं के दान से मानसिक शांति और पारिवारिक सुख की प्राप्ति हो सकती है।

    सिंह राशि के लोगों के लिए गेहूं गुड़ तांबा और लाल रंग के मौसमी फल का दान शुभ माना जाता है। कन्या राशि के जातक हरे पौधे मूंग की दाल और जरूरतमंद विद्यार्थियों को पढ़ाई से जुड़ी सामग्री दान कर सकते हैं। इसे सेवा और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़कर भी देखा जाता है।

    तुला राशि वालों के लिए सफेद वस्त्र इत्र चावल और शक्कर का दान शुभ माना गया है। वृश्चिक राशि के जातक लाल मसूर की दाल गुड़ या लाल कपड़े का दान कर सकते हैं। धनु राशि के लोगों के लिए पीले अनाज के साथ हल्दी पीले वस्त्र और किताबों का दान करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद विद्यार्थियों को किताबें देना शिक्षा के क्षेत्र में सेवा का अच्छा माध्यम भी हो सकता है।

    मकर राशि के जातकों के लिए काले तिल सरसों का तेल जूते चप्पल और कंबल का दान करने की परंपरा बताई गई है। कुंभ राशि के लोग काले तिल लोहे से बनी उपयोगी वस्तुएं छाता या काले कपड़े दान कर सकते हैं। वहीं मीन राशि के जातकों के लिए चने की दाल पीली मिठाई बेसन के लड्डू और धार्मिक पुस्तकों का दान शुभ माना जाता है।

    सावन अमावस्या पर दान करते समय सबसे जरूरी बात यह है कि वस्तु अपनी सामर्थ्य के अनुसार और जरूरतमंद व्यक्ति को दी जाए। धार्मिक मान्यताओं में दान का उद्देश्य केवल किसी विशेष वस्तु को देना नहीं बल्कि सेवा और परोपकार की भावना को महत्व देना भी माना गया है। पितरों के प्रति श्रद्धा रखते हुए इस दिन तर्पण पूजा और दान किया जाता है। हालांकि राशि के अनुसार दान से मिलने वाले फल धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें आस्था के रूप में ही देखना चाहिए।

    हरियाली अमावस्या के अवसर पर पौधरोपण करना भी कई परंपराओं में शुभ माना जाता है। इसलिए इस दिन जरूरतमंदों की सहायता करने के साथ पेड़ पौधे लगाकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प भी लिया जा सकता है। सावन अमावस्या का यह पर्व श्रद्धा सेवा और प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का अवसर माना जा सकता है।

  • सड़क के ऊपर हवा में कैसे टंगा घर? हॉलीवुड के इस अनोखे नजारे का सच जानकर चौंक जाएंगे

    सड़क के ऊपर हवा में कैसे टंगा घर? हॉलीवुड के इस अनोखे नजारे का सच जानकर चौंक जाएंगे


    नई दिल्ली। हॉलीवुड की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसा नजारा देखने को मिल रहा है जिसने राह चलते लोगों से लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तक सभी को हैरान कर दिया है। एक बड़े से बिलबोर्ड के अंदर करीब 30 फीट की ऊंचाई पर एक शख्स आराम से बैठा दिखाई दे रहा है। बाहर से देखने पर ऐसा लगता है जैसे सड़क के ऊपर हवा में ही किसी ने छोटा सा घर बना दिया हो और कोई व्यक्ति उसमें रहने लगा हो। वायरल वीडियो सामने आने के बाद लोगों के मन में सबसे पहला सवाल यही उठा कि आखिर यह शख्स इतनी ऊंचाई पर क्यों रह रहा है। हालांकि इस अजीबोगरीब नजारे के पीछे की कहानी सामने आने के बाद पूरा मामला काफी दिलचस्प हो जाता है।

    दरअसल यह कोई असली घर नहीं बल्कि हॉलीवुड की सनसेट स्ट्रिप पर फिल्म प्रमोशन के लिए तैयार किया गया एक खास सेट है। सनसेट बुलेवार्ड और सेल्मा एवेन्यू के व्यस्त इलाके में लगाए गए विशाल बिलबोर्ड के अंदर एक छोटे से लिविंग रूम जैसा सेट बनाया गया है। इसमें सोफा और फर्नीचर समेत घर में इस्तेमाल होने वाली कई चीजें रखी गई हैं। बिलबोर्ड जमीन से करीब 30 फीट ऊपर है और अंदर मौजूद शख्स को इस तरह रखा गया है कि नीचे सड़क से गुजरने वाले लोगों को वह आसानी से नजर आ सके।

    इस अनोखे प्रमोशनल कैंपेन का संबंध साइंस फिक्शन थ्रिलर फिल्म द लास्ट हाउस से है। फिल्म की कहानी में एक परिवार रहस्यमयी परिस्थितियों में अपने ही घर के अंदर फंस जाता है। उनके सामने बाहर निकलने की चुनौती होती है और समय बीतने के साथ खाने पीने जैसी जरूरी चीजों की कमी भी सामने आने लगती है। इसी कहानी को वास्तविक जिंदगी के अनुभव से जोड़ने के लिए फिल्म निर्माताओं ने बिलबोर्ड के अंदर एक इंसान को रखने का आइडिया तैयार किया।

    इस प्रमोशन के तहत एक परफॉर्मर को 6 अगस्त से 8 अगस्त तक बिलबोर्ड के अंदर बने कमरे में रहने के लिए रखा गया है। वायरल वीडियो में वह कभी सोफे पर आराम करता दिखाई देता है तो कभी नीचे सड़क से गुजर रहे लोगों की तरफ हाथ हिलाकर उनका अभिवादन करता है। इस पूरे सेटअप को इस तरह तैयार किया गया है कि देखने वालों को कुछ पलों के लिए सचमुच ऐसा महसूस हो कि कोई व्यक्ति जमीन से बहुत ऊपर एक अजीब जगह में फंस गया है।

    इस प्रमोशन की सबसे दिलचस्प बात यह है कि बिलबोर्ड के अंदर मौजूद शख्स नीचे मौजूद लोगों से बातचीत भी करता है। इसके लिए वह व्हाइटबोर्ड का इस्तेमाल करता है। वायरल तस्वीरों और वीडियो में वह व्हाइटबोर्ड पर मैसेज लिखकर लोगों को जवाब देता नजर आता है। कहीं वह पूछता दिखाई देता है कि आखिर क्या हो रहा है तो कहीं फंस जाने से जुड़ा संदेश लिखता है। इस वजह से पूरा नजारा किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं लगता।

    बिलबोर्ड के बाहर फिल्म की कहानी से जुड़ा एक सवाल भी लिखा गया है कि आप कितने दिन तक सर्वाइव कर सकते हैं। यही सवाल फिल्म की मूल कहानी से जुड़ा हुआ है। जब किसी व्यक्ति के लिए उसका घर ही कैदखाना बन जाए और बाहर निकलने का रास्ता बंद हो जाए तो वह कितने समय तक परिस्थितियों का सामना कर सकता है। प्रमोशनल कैंपेन इसी सवाल को लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा है।

    सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों के रिएक्शन भी काफी दिलचस्प हैं। कुछ लोगों ने कहा कि वे रोज इस रास्ते से गुजरते हैं और अब बिलबोर्ड में बैठे शख्स को देखकर हाथ हिलाते हैं। कुछ यूजर्स ने इस आइडिया की तारीफ करते हुए इसे फिल्म प्रमोशन का शानदार तरीका बताया। वहीं कई लोगों ने मजाकिया अंदाज में सवाल किया कि इतनी ऊंचाई पर बने इस कमरे में एसी और बाथरूम जैसी सुविधाएं कैसे होंगी।

    कुल मिलाकर जिस वीडियो को देखकर लोग समझ रहे थे कि किसी शख्स ने मजबूरी में बिलबोर्ड के अंदर अपना घर बना लिया है उसके पीछे असल में एक सोची समझी प्रमोशनल रणनीति है। फिल्म की कहानी को वास्तविक दुनिया के एक अनोखे अनुभव से जोड़कर तैयार किए गए इस कैंपेन ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सड़क से गुजरने वाले लोग रुककर इसे देख रहे हैं वीडियो बना रहे हैं और सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। इस तरह फिल्म की कहानी का एक हिस्सा जमीन से करीब 30 फीट ऊपर बिलबोर्ड के अंदर दिखाई देकर खुद एक वायरल कहानी बन गया है।

  • गिल फिट नहीं हुए तो किसे मिलेगा नंबर-4 का मौका? इन 3 खिलाड़ियों पर टिकी टीम इंडिया की नजर

    गिल फिट नहीं हुए तो किसे मिलेगा नंबर-4 का मौका? इन 3 खिलाड़ियों पर टिकी टीम इंडिया की नजर


    नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले टीम इंडिया के सामने शुभमन गिल की चोट ने नई चिंता खड़ी कर दी है। गिल भारतीय टेस्ट टीम के कप्तान होने के साथ बल्लेबाजी क्रम में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में अगर वह 15 अगस्त से शुरू होने वाले पहले टेस्ट तक पूरी तरह फिट नहीं हो पाते हैं तो भारतीय टीम को न सिर्फ कप्तानी बल्कि नंबर चार की बल्लेबाजी को लेकर भी बड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।

    शुभमन गिल को प्रैक्टिस के दौरान दाहिने हाथ की रिंग फिंगर में चोट लगी है। इसी वजह से वह इंडिया और श्रीलंका इलेवन के बीच खेले जा रहे अभ्यास मुकाबले के पहले दिन मैदान पर नहीं उतरे। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की मेडिकल टीम उनकी चोट पर लगातार नजर रख रही है। फिलहाल उनकी चोट कितनी गंभीर है और वह अभ्यास मैच में आगे हिस्सा लेंगे या नहीं इसे लेकर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। हालांकि अगर वह पहले टेस्ट से पहले फिट हो जाते हैं तो टीम इंडिया के लिए राहत की खबर होगी लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो नंबर चार पर उनकी जगह भरना आसान नहीं होगा।

    ऐसी स्थिति में रवींद्र जडेजा सबसे अनुभवी विकल्पों में से एक हो सकते हैं। जडेजा भले ही शुद्ध रूप से नंबर चार के बल्लेबाज नहीं हैं लेकिन टेस्ट क्रिकेट में उनका अनुभव और बल्लेबाजी क्षमता उन्हें इस भूमिका के लिए मजबूत दावेदार बनाती है। खासकर स्पिन के खिलाफ जडेजा की बल्लेबाजी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। वह पहले भी ऊपरी क्रम में बल्लेबाजी कर चुके हैं और एक टेस्ट के लिए उन्हें नंबर चार पर भेजना टीम के लिए व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। इसके अलावा उनकी मौजूदगी टीम को गेंदबाजी में भी अतिरिक्त विकल्प देती है।

    दूसरा नाम ध्रुव जुरेल का है। विकेटकीपर बल्लेबाज जुरेल ने अब तक टेस्ट क्रिकेट में मुश्किल परिस्थितियों में अपनी बल्लेबाजी क्षमता दिखाई है। उन्होंने नंबर चार से लेकर नंबर छह तक बल्लेबाजी की है और उनके टेस्ट आंकड़े बताते हैं कि वह केवल बैकअप विकेटकीपर नहीं बल्कि एक उपयोगी बल्लेबाज भी हैं। अगर टीम प्रबंधन ऋषभ पंत के साथ एक अतिरिक्त बल्लेबाज खिलाने का फैसला करता है तो जुरेल को नंबर चार पर मौका दिया जा सकता है। गिल की गैरमौजूदगी उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा अवसर भी बन सकती है।

    तीसरा और शायद सबसे स्वाभाविक विकल्प देवदत्त पडिक्कल हो सकते हैं। पडिक्कल विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर टीम के साथ हैं और नंबर चार पर बल्लेबाजी का अनुभव रखते हैं। घरेलू क्रिकेट में लगातार प्रदर्शन करने वाले पडिक्कल तकनीकी रूप से मजबूत बल्लेबाज माने जाते हैं। अगर टीम प्रबंधन सीधे गिल की जगह विशेषज्ञ बल्लेबाज उतारना चाहता है तो पडिक्कल को मौका मिल सकता है। हालांकि इससे भारतीय बल्लेबाजी क्रम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या बढ़ जाएगी लेकिन एक टेस्ट के लिए यह बड़ी समस्या नहीं मानी जाएगी।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल शुभमन गिल की फिटनेस को लेकर है। बीसीसीआई की मेडिकल टीम की रिपोर्ट के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि वह श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट में मैदान पर उतर पाएंगे या नहीं। अगर गिल फिट नहीं होते हैं तो टीम इंडिया के पास जडेजा का अनुभव जुरेल की युवा क्षमता और पडिक्कल की विशेषज्ञ बल्लेबाजी के रूप में तीन अलग-अलग विकल्प मौजूद हैं। अब फैसला टीम मैनेजमेंट को करना होगा कि वह अनुभव को प्राथमिकता देता है युवा खिलाड़ी पर भरोसा करता है या विशेषज्ञ बल्लेबाज को नंबर चार की जिम्मेदारी सौंपता है।