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  • भारत के घरों में रखा ₹315 लाख करोड़ का सोना बनेगा अर्थव्यवस्था की ताकत, गोल्ड मार्केट में Gen Z का बड़ा रोल

    भारत के घरों में रखा ₹315 लाख करोड़ का सोना बनेगा अर्थव्यवस्था की ताकत, गोल्ड मार्केट में Gen Z का बड़ा रोल


    नई दिल्ली। भारत में सोने को लेकर निवेश का नजरिया तेजी से बदल रहा है। कभी परंपरा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाने वाला सोना अब डिजिटल निवेश और वित्तीय संपत्ति के रूप में भी देखा जाने लगा है। इस बदलाव में देश की Gen Z पीढ़ी की भूमिका अहम मानी जा रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की रिपोर्ट ‘स्वर्णिम उड़ान 2047’ के मुताबिक, युवा पीढ़ी पारंपरिक आभूषणों की तुलना में डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF जैसे विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रही है।

    Gen Z बदल रही गोल्ड में निवेश की परंपरा
    नई पीढ़ी सोने को केवल विरासत के तौर पर संभालकर रखने के बजाय इसे एक एसेट के रूप में देख रही है। डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ETF में निवेश के पीछे आसान खरीदारी, कम मात्रा में निवेश और जरूरत पड़ने पर उसे कैश में बदलने जैसी सुविधाएं प्रमुख वजह हैं।

    WGC के मुताबिक, वर्ष 2035 तक भारत की Gen Z की कुल खरीद क्षमता 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है। ऐसे में इस पीढ़ी की निवेश आदतों में बदलाव का असर देश के गोल्ड मार्केट के साथ-साथ व्यापक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

    घरों में 31 हजार टन से ज्यादा सोना
    भारत के घरों में 31 हजार टन से अधिक सोना मौजूद होने का अनुमान है। इसकी कीमत 315 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। इसके मुकाबले भारत के पास करीब 880 टन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व है। बड़ी मात्रा में घरेलू सोना अभी वित्तीय व्यवस्था का सक्रिय हिस्सा नहीं है।

    ASSOCHAM की एक रिपोर्ट में भी भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की विशाल मात्रा का जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, अगर घरेलू सोने का एक छोटा हिस्सा भी वित्तीय साधनों में लगाया जाता है तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त पूंजी मिल सकती है।

    सिर्फ 2% सोना अर्थव्यवस्था से जुड़ा तो बड़ा फायदा
    रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि घरेलू सोने का सिर्फ 2 प्रतिशत हिस्सा भी वित्तीय साधनों में स्थानांतरित होने पर वर्ष 2047 तक भारत की GDP में 7.5 ट्रिलियन डॉलर तक का अतिरिक्त योगदान हो सकता है। वहीं, अगर घरों में रखा 5 प्रतिशत सोना अर्थव्यवस्था से जुड़ता है तो भारत का आयात बिल करीब 90 अरब डॉलर तक कम हो सकता है।

    गोल्ड को उत्पादक संपत्ति में बदलने की तैयारी
    विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू सोने को वित्तीय व्यवस्था से जोड़ने पर मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और कृषि जैसे क्षेत्रों के लिए पूंजी उपलब्ध हो सकती है। गोल्ड मॉनिटाइजेशन, गोल्ड-लिंक्ड सेविंग स्कीम और गोल्ड लोन जैसे विकल्प इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गोल्ड लोन के बढ़ते आंकड़े भी इस बदलाव की ओर संकेत करते हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में नवंबर 2025 तक गोल्ड लोन का आंकड़ा 24.34 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है।

    अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक संपत्ति बन सकता है सोना
    देश में 38 करोड़ से अधिक Gen Z की बड़ी आबादी है। इस पीढ़ी की बदलती निवेश प्राथमिकताएं गोल्ड मार्केट का स्वरूप बदल सकती हैं। अगर घरेलू सोना बड़ी मात्रा में वित्तीय प्रणाली में आता है तो बाजार में पूंजी की उपलब्धता बढ़ सकती है, निवेश के लिए अधिक संसाधन मिल सकते हैं और सोने के आयात पर निर्भरता घट सकती है। इससे विदेशी मुद्रा की बचत और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की भी संभावना है। ऐसे में भारत के घरों में पड़ा पुस्तैनी सोना आने वाले वर्षों में सिर्फ आभूषण या विरासत नहीं, बल्कि देश की आर्थिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है।

  • Gen-Z के मुद्दे पर थरूर का BJP पर हमला, बोले- सत्ताधारी पार्टी को लगा बड़ा झटका

    Gen-Z के मुद्दे पर थरूर का BJP पर हमला, बोले- सत्ताधारी पार्टी को लगा बड़ा झटका


    नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने मुंबई में जेन-जी और जेन-अल्फा के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के संवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि हाल के घटनाक्रमों से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।

    थरूर ने कहा कि जंतर-मंतर पर हुए ‘कॉकरोच पार्टी’ के प्रदर्शन, एक मंत्री के इस्तीफे और उसके बाद जल्दबाजी में पारित किए गए बिल के अलावा हालिया दो उपचुनावों के नतीजे भी सत्तारूढ़ दल के लिए चिंता का विषय हैं।

    BJP की गढ़ मानी जाने वाली सीट हारने का किया जिक्र
    शशि थरूर ने प्रशांत किशोर की जीत का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने BJP की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली सीट पर जीत दर्ज की है। उनके मुताबिक, इस सीट पर BJP तीन दशक से ज्यादा समय से जीतती आ रही थी और पार्टी ने यहां नौ बार जीत हासिल की थी, लेकिन अब उसे हार का सामना करना पड़ा।

    उन्होंने मध्य प्रदेश की दतिया सीट का भी उल्लेख किया और कहा कि कांग्रेस इस सीट को बरकरार रखने में सफल रही है। थरूर ने कहा कि दोनों ही सीटें हिंदी भाषी राज्यों में आती हैं और इन नतीजों से आगे के चुनावों को लेकर उम्मीद नजर आती है।

    उन्होंने कहा कि अलग-अलग समय पर होने वाले चुनाव राजनीतिक दलों को अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका देते हैं। थरूर के मुताबिक, अगले मार्च में कुछ राज्यों में चुनाव होने हैं और कांग्रेस उन राज्यों में जीत हासिल करने की स्थिति में है।

    मोहन भागवत ने Gen-Z को लेकर क्या कहा था?
    मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha के साथ संवाद के दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि Gen-Z और Gen-Alpha पुरानी पीढ़ी की तुलना में भी अधिक देशभक्त और ईमानदार हैं और उनकी बात सुनी जानी चाहिए।

    भागवत ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी के साथ संवाद में कमी रही, जिसकी वजह से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन जैसी स्थिति सामने आई। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के कुछ दिनों बाद कहा था कि आज की युवा पीढ़ी बहुत से सवाल पूछती है।

    मोहन भागवत का यह संवाद ऐसे समय में हुआ है, जब युवा मुद्दों और Gen-Z की राजनीतिक भागीदारी को लेकर देश की राजनीति में चर्चा तेज है। इसी को लेकर शशि थरूर ने भी सत्ताधारी दल के लिए हालिया घटनाक्रमों को राजनीतिक चेतावनी के तौर पर पेश किया है।

  • शिव के नटराज रूप में छिपा ब्रह्मांड का रहस्य, पैरों तले दबा अपस्मार देता है बड़ा संदेश

    शिव के नटराज रूप में छिपा ब्रह्मांड का रहस्य, पैरों तले दबा अपस्मार देता है बड़ा संदेश


    नई दिल्ली। भगवान शिव के अनेक स्वरूपों में नटराज रूप सबसे रहस्यमयी और प्रतीकात्मक माना जाता है। सनातन परंपरा में शिव की हर मुद्रा और प्रतीक के पीछे आध्यात्मिक एवं दार्शनिक अर्थ बताए गए हैं। नटराज स्वरूप में भगवान शिव को नृत्य के अधिपति के रूप में दिखाया जाता है और उनकी प्रतिमा सृष्टि की उत्पत्ति, संचालन और विनाश के शाश्वत चक्र का संदेश देती है।

    नटराज की इसी प्रतीकात्मकता ने कलाकारों, दार्शनिकों और वैज्ञानिकों तक को आकर्षित किया है। ब्रह्मांड में लगातार होने वाली ऊर्जा और गति को नटराज के तांडव से जोड़ा जाता है। इसी विचार को दर्शाने वाली नटराज की विशाल प्रतिमा स्विट्जरलैंड के जिनेवा स्थित CERN परिसर में भी स्थापित है।

    नटराज के पैरों के नीचे कौन है अपस्मार?
    नटराज की प्रतिमा का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक उनके पैरों के नीचे दिखाई देने वाली बौने जैसी आकृति है। इसे अपस्मार या मुइला कहा जाता है। हिंदू पौराणिक मान्यताओं में अपस्मार को अज्ञानता, अहंकार, मूर्खता और मानसिक जड़ता का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव का अपस्मार को पैर के नीचे दबाना इस बात का संकेत माना जाता है कि मनुष्य को अपने भीतर मौजूद अज्ञान और अहंकार पर नियंत्रण रखना चाहिए। जब तक व्यक्ति अज्ञानता से ऊपर नहीं उठता, तब तक सच्चे ज्ञान और मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ना मुश्किल है।

    नटराज का तांडव क्या संदेश देता है?
    नटराज स्वरूप भगवान शिव के उस नृत्य को दर्शाता है, जिसे सृष्टि के निरंतर चक्र से जोड़ा जाता है। इसमें उत्पत्ति, स्थिति और संहार यानी निर्माण, संरक्षण और विनाश का भाव समाहित है। यह रूप यह संदेश भी देता है कि ब्रह्मांड में ऊर्जा और गति लगातार बनी रहती है। कुछ आध्यात्मिक व्याख्याओं में नटराज का नृत्य इसी सार्वभौमिक गति और परिवर्तन का प्रतीक माना जाता है।

    अग्नि के घेरे का क्या अर्थ है?
    नटराज की प्रतिमा के चारों ओर बना अग्नि का घेरा यानी प्रभा मंडल समय, भौतिक संसार और जन्म-मृत्यु के चक्र का प्रतीक माना जाता है। यह उस निरंतर परिवर्तन को दर्शाता है, जिससे संसार गुजरता रहता है।

    डमरू में छिपा है सृष्टि के आरंभ का संकेत
    भगवान शिव के दाहिने ऊपरी हाथ में मौजूद डमरू को सृष्टि की पहली ध्वनि और ब्रह्मांडीय स्पंदन का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, डमरू की ध्वनि सृजन और समय के आरंभ का संकेत देती है। वहीं, नटराज के बाएं ऊपरी हाथ में मौजूद अग्नि सृष्टि के संहार का प्रतीक मानी जाती है। इसका भाव यह है कि जिस संसार की उत्पत्ति हुई है, उसका एक दिन अंत भी निश्चित है।

    अभय मुद्रा देती है निर्भय रहने का संदेश
    नटराज की एक प्रमुख मुद्रा अभय मुद्रा है। इसमें भगवान शिव का हाथ ऊपर उठा हुआ दिखाई देता है। इसे भय से मुक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। इसका संदेश है कि धर्म, सत्य और आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति को भयभीत होने की जरूरत नहीं है। इस तरह नटराज की पूरी प्रतिमा जीवन के संतुलन, ज्ञान, परिवर्तन और आत्मचेतना का संदेश देती है।

  • अतीक के टूटे पुश्तैनी घर से कब्रिस्तान तक जाएगा अबान का शव, आज पिता की कब्र के बगल में होगा दफन

    अतीक के टूटे पुश्तैनी घर से कब्रिस्तान तक जाएगा अबान का शव, आज पिता की कब्र के बगल में होगा दफन


    प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद को शनिवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी स्थित पैतृक कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अबान का शव फिलहाल कसारी-मसारी के पास हटवा गांव में रखा गया है, जहां उसकी बुआ प्रवीन कुरैशी रहती हैं। शुक्रवार को आखिरी दीदार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

    झांसी में पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को अबान का शव हटवा गांव लाया गया था। अब शनिवार को अंतिम संस्कार से पहले शव को अतीक अहमद के उस पुश्तैनी घर की जगह पर भी रखा जाएगा, जो अब बुलडोजर कार्रवाई के बाद मलबे में तब्दील हो चुका है।

    मलबे में तब्दील घर में लगाया गया टेंट
    कसारी-मसारी स्थित अतीक अहमद का पुश्तैनी मकान कभी उसके परिवार की पहचान हुआ करता था। माफिया और बाहुबली के खिलाफ कार्रवाई के दौरान इस मकान को बुलडोजर से गिरा दिया गया था। अब यहां सिर्फ जमीन और मलबा बचा है।

    बताया जाता है कि अतीक परिवार में किसी सदस्य की मौत होने पर कब्रिस्तान ले जाने से पहले शव को इसी घर में रखा जाता रहा है। वर्ष 2023 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए अतीक के बेटे असद का शव भी अंतिम संस्कार से पहले यहां लाया गया था। अबान के शव को रखने के लिए मलबे के बीच बची जमीन पर टेंट लगाया गया है। यहां डीप फ्रीजर की व्यवस्था भी की गई है। अंतिम संस्कार के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस की तैनाती की गई है।

    अतीक की कब्र के ठीक बगल में खोदी गई कब्र
    अबान को कसारी-मसारी के खानदानी कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। इसी कब्रिस्तान में अतीक अहमद, उसके पिता हाजी फिरोज अहमद, मां, भाई अशरफ और बेटे असद अहमद की कब्रें हैं। अबान के लिए अतीक अहमद की कब्र के ठीक बगल में कब्र खोदी गई है।

    अंतिम संस्कार में शामिल होंगे अली और उमर
    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जेल में बंद अतीक के दोनों बेटों अली और उमर को छोटे भाई अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पैरोल दी। अली झांसी जेल में, जबकि उमर लखनऊ जेल में बंद है।

    अदालत ने निर्देश दिया है कि अंतिम संस्कार पूरा होने के बाद दोनों को पुलिस कस्टडी में संबंधित जेलों में वापस ले जाया जाएगा। दोनों भाइयों को किसी सार्वजनिक सभा को संबोधित करने और मीडिया, सोशल मीडिया या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बातचीत करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत के आदेश के अनुसार, वे केवल अंतिम संस्कार कराने वाले व्यक्ति, अपनी बुआ और भाई अहजम अहमद से बातचीत कर सकेंगे।

    झांसी में सड़क हादसे में हुई अबान की मौत
    अबान अहमद की मौत गुरुवार को झांसी-कानपुर हाईवे पर सड़क हादसे में हुई थी। पूंछ थाना क्षेत्र के खिल्ली गांव के पास तेज रफ्तार कार अचानक सड़क पर आए जानवर को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई थी। हादसे में अबान और उसके साथी सोनू की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कार में सवार तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। सभी को झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। अबान अतीक अहमद के पांच बेटों में सबसे छोटा था।

    असद की भी झांसी में हुई थी मौत
    अतीक अहमद का एक और बेटा असद अप्रैल 2023 में झांसी के पास पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। उमेश पाल हत्याकांड में वांछित असद पर पुलिस ने इनाम घोषित किया था। इसके दो दिन बाद 15 अप्रैल 2023 को प्रयागराज में अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी तीन हमलावरों ने उन पर हमला किया था।

  • शनिवार को क्या करें और क्या न करें? जानें शनिदेव को प्रसन्न करने के आसान उपाय और जरूरी नियम

    शनिवार को क्या करें और क्या न करें? जानें शनिदेव को प्रसन्न करने के आसान उपाय और जरूरी नियम


    नई दिल्ली। शनिवार का दिन हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। माना जाता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। यही वजह है कि शनिवार को लोग शनिदेव की पूजा करने के साथ साथ हनुमान जी का स्मरण भी करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से राहत मिल सकती है। वहीं कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं जिन्हें शनिवार के दिन करने से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि इन मान्यताओं को धार्मिक और ज्योतिषीय परंपराओं के रूप में ही देखना चाहिए।

    शनिवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर शनिदेव का ध्यान करना शुभ माना जाता है। भक्त शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करते हैं। कई जगहों पर शनिवार को शनि मंदिर में जाकर तेल चढ़ाने और दीपक जलाने की परंपरा है। इसके साथ ही शनिदेव के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ शनिदेव की आराधना करने से व्यक्ति को धैर्य रखने और कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है।

    शनिवार को हनुमान जी की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों पर शनिदेव की विशेष कृपा रहती है। ऐसे में शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करना और हनुमान जी के मंदिर में दर्शन करना शुभ माना जाता है। भक्त भगवान हनुमान को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं। जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता करना और गरीबों को भोजन या आवश्यक वस्तुएं दान करना भी इस दिन पुण्यदायक माना जाता है।

    शनिवार के दिन काले तिल काला कपड़ा सरसों का तेल और लोहे से जुड़ी वस्तुओं का दान करने की धार्मिक परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने से नकारात्मक प्रभाव कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा कौवे को भोजन कराने की परंपरा भी कई स्थानों पर निभाई जाती है। इसे पितरों के सम्मान से भी जोड़कर देखा जाता है।

    वहीं शनिवार के दिन कुछ कामों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किसी के साथ छल कपट झूठ या अन्याय करने से बचना चाहिए। किसी गरीब कमजोर या जरूरतमंद व्यक्ति का अपमान नहीं करना चाहिए। क्रोध में आकर किसी को अपशब्द कहना भी उचित नहीं माना जाता। शनिदेव को न्याय और कर्म का देवता माना जाता है इसलिए इस दिन विशेष रूप से अच्छे कर्म करने और दूसरों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करने पर जोर दिया जाता है।

    कई धार्मिक मान्यताओं में शनिवार को तेल नमक और लोहे जैसी वस्तुओं की खरीदारी को लेकर भी अलग अलग धारणाएं मिलती हैं। हालांकि इन मान्यताओं का पालन व्यक्ति अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार कर सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शनिवार को किसी अंधविश्वास के डर से नहीं बल्कि श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ पूजा और सेवा करनी चाहिए। शनिदेव की उपासना का मूल संदेश भी यही माना जाता है कि व्यक्ति अपने कर्मों को बेहतर बनाए और ईमानदारी तथा न्याय के रास्ते पर चले।

    इस तरह शनिवार को पूजा पाठ के साथ जरूरतमंदों की मदद करना हनुमान जी का स्मरण करना और अच्छे कर्म करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सच्ची श्रद्धा के साथ किए गए ऐसे कार्य व्यक्ति के मन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं। यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है।

  • बुधादित्य और त्रिग्रह योग से 10 से 16 अगस्त तक इन पांच राशियों को मिलेंगे नए अवसर

    बुधादित्य और त्रिग्रह योग से 10 से 16 अगस्त तक इन पांच राशियों को मिलेंगे नए अवसर

    नई दिल्ली । अगस्त के दूसरे सप्ताह यानी 10 से 16 अगस्त 2026 के दौरान कई राशियों के लिए ग्रहों की स्थिति अनुकूल रहने वाली है। इस अवधि में कर्क राशि में सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा। इसके साथ ही सूर्य, बुध और गुरु की युति से त्रिग्रह योग का प्रभाव भी रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन ग्रहों के संयोग का असर पांच राशियों के करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन पर सकारात्मक रूप से पड़ सकता है।

    मिथुन राशि वालों के लिए यह सप्ताह कार्यक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन का संकेत दे रहा है। राशि स्वामी बुध के प्रभाव से कामकाज में सक्रियता बढ़ेगी और अपनी योग्यता दिखाने के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि महत्वपूर्ण फैसले जल्दबाजी में लेने से बचना बेहतर रहेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रहने की संभावना है, जबकि स्वास्थ्य के लिहाज से सुधार देखने को मिल सकता है। किसी वरिष्ठ या पितृतुल्य व्यक्ति का मार्गदर्शन लाभकारी रहेगा। बुधवार को गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना शुभ माना गया है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए सप्ताह विशेष रूप से महत्वपूर्ण रह सकता है। त्रिग्रह योग के प्रभाव से पिछले समय में किए गए प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है। कामकाज में सफलता के साथ आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है और धन लाभ के अवसर भी बन सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी। किसी मातृतुल्य महिला की सलाह या सहयोग भी उपयोगी साबित हो सकता है। बुधवार को गणेश चालीसा का पाठ करना लाभकारी माना गया है।

    तुला राशि वालों के लिए करियर के क्षेत्र में नए अवसर सामने आ सकते हैं। इन अवसरों से भविष्य में प्रगति की राह मजबूत होने की संभावना है। प्रेम संबंधों में मधुरता बढ़ेगी और किसी महिला के सहयोग या सलाह से रिश्तों में सुधार आ सकता है। इस सप्ताह यात्राएं अधिक हो सकती हैं, जिसके कारण खर्च भी बढ़ने की संभावना है। इसलिए आर्थिक मामलों में संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा। सप्ताह के अंतिम दिनों में सुख और समृद्धि में बढ़ोतरी के संकेत हैं। बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाना शुभ उपाय माना गया है।

    वृश्चिक राशि के जातकों के लिए ग्रहों की स्थिति आर्थिक और व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है। इस सप्ताह की गई मेहनत भविष्य में अच्छे परिणाम दे सकती है। प्रेम जीवन में पार्टनर के साथ विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होगा। संतान से जुड़ी कोई अच्छी खबर मिलने की संभावना भी जताई गई है। इस दौरान आत्मविश्वास और ऊर्जा में वृद्धि महसूस हो सकती है। बुधवार को गणेश जी को बेसन के लड्डुओं का भोग लगाना शुभ माना गया है।

    मकर राशि वालों के लिए करियर में प्रगति और मान-सम्मान बढ़ने के योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है और आर्थिक स्थिति संतोषजनक बनी रहने की संभावना है। पार्टनर के साथ संबंधों में मजबूती और मधुरता आएगी। परिवार के साथ समय बिताने के साथ भविष्य की योजनाओं पर विचार करने का अवसर मिलेगा। सप्ताह के अंत में खरीदारी या घर की सजावट पर खर्च हो सकता है। बुधवार को गणेश चालीसा का पाठ करना शुभ माना गया है।

  • MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार

    MP में आज 3 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी, भोपाल-इंदौर समेत 52 जिलों में बूंदाबांदी के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की बेरुखी के बीच शनिवार को पन्ना, सतना और रीवा में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, इन तीनों जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान करीब 4 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर समेत प्रदेश के 52 जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने का अनुमान है।

    IMD के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसतन 16.8 इंच (426.6 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि तक 21 इंच (533.6 मिमी) पानी गिरना चाहिए था। इस तरह प्रदेश में 4.2 इंच यानी 20% बारिश कम हुई है। सीजन में अब तक हुई बारिश सामान्य कोटे की आधी भी नहीं है। प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है।

    दतिया में 24 घंटे में 3.5 इंच बारिश
    शुक्रवार को दतिया में बारिश ने जोरदार दस्तक दी। यहां सुबह महज 4 घंटे में करीब 1.57 इंच (40 मिमी) बारिश रिकॉर्ड हुई, जबकि 24 घंटे में कुल 3.5 इंच पानी बरसा। तेज बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया, जिसके बाद स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी।

    भांडेर और सेवढ़ा ब्लॉक में कक्षा 8वीं से ऊपर के स्कूलों को लेकर फैसला स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर संस्था प्रमुखों पर छोड़ दिया गया है। रायसेन में भी शुक्रवार सुबह करीब 15 मिनट तेज बारिश हुई। इसके बाद रुक-रुककर बारिश का दौर जारी रहा, जिससे कई सड़कों पर पानी भर गया।

    सीधी में सोन नदी के पुल पर पानी, 40 गांवों का संपर्क प्रभावित
    सीधी जिले के भंवरसेन घाट पर शुक्रवार सुबह हुई तेज बारिश के बाद सोन नदी के पुल पर पानी भर गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुल को बंद कर दिया गया, जिससे करीब 40 गांवों का मुख्यालय से संपर्क कट गया।

    भंवरसेन पहाड़ी से मिट्टी और पत्थर भी खिसककर सड़क पर आ रहे हैं। इससे मार्ग पर हादसे का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा खरगोन, सतना, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा और रायसेन समेत कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई।

    पूर्वी MP में 23% कम बारिश
    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में अब तक 23% कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला औसत से आगे नहीं है।

    अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 5% से 48% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पश्चिमी हिस्से में भी बारिश का आंकड़ा माइनस में
    भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग वाले पश्चिमी हिस्से में भी औसत से 17% कम बारिश हुई है। आगर-मालवा, अलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, भोपाल, दतिया, धार, गुना, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन, बड़वानी और विदिशा में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 6 जिलों में औसत से ज्यादा बारिश
    मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी हिस्से के सिर्फ ग्वालियर, भिंड, बुरहानपुर, देवास, खंडवा और खरगोन में अब तक औसत से ज्यादा बारिश हुई है। बाकी अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे बना हुआ है।

  • Aaj Ka Rashifal 8 August 2026: इन 7 राशियों पर मेहरबान रहेंगे ग्रह, भाग्य देगा पूरा साथ

    Aaj Ka Rashifal 8 August 2026: इन 7 राशियों पर मेहरबान रहेंगे ग्रह, भाग्य देगा पूरा साथ


    नई दिल्ली। 8 अगस्त 2026 शनिवार का दिन सभी 12 राशियों के लिए अलग अलग अनुभव लेकर आने वाला है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनिवार का दिन शनिदेव और हनुमान जी की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का प्रभाव अलग अलग राशियों के जीवन पर देखने को मिल सकता है। किसी राशि के जातकों को करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं तो किसी को आर्थिक मामलों में सावधानी बरतने की जरूरत होगी। वहीं कुछ राशियों के लिए प्रेम संबंधों और निजी जीवन के लिहाज से भी दिन सकारात्मक रह सकता है। आइए जानते हैं मेष से मीन तक सभी राशियों के लिए 8 अगस्त का दिन कैसा रहने वाला है।

    मेष राशि वालों के लिए खुद की क्षमता और अब तक के प्रदर्शन पर विचार करने का समय है। बीते अनुभवों से सीख लेकर भविष्य की दिशा तय करने में सफलता मिल सकती है। यह समय अपने लक्ष्यों को नए तरीके से देखने और कुछ महत्वपूर्ण बदलाव करने के लिए अच्छा हो सकता है।

    वृषभ राशि के जातकों को करियर को लेकर थोड़ा असमंजस महसूस हो सकता है। मन में वर्तमान नौकरी या करियर पथ को लेकर सवाल उठ सकते हैं। हालांकि किसी भी बड़े फैसले में जल्दबाजी करने के बजाय परिस्थितियों को समझना बेहतर रहेगा। धैर्य से काम लेने पर सही रास्ता स्पष्ट हो सकता है।

    मिथुन राशि के लिए दिन स्पष्टता और आगे बढ़ने के संकेत दे रहा है। आप अपने करियर और भविष्य को लेकर बेहतर निर्णय ले सकते हैं। आर्थिक स्थिति स्थिर रहने की संभावना है और योजनाओं को आगे बढ़ाने का अच्छा अवसर मिल सकता है।

    कर्क राशि के लिए दिन विशेष रूप से सकारात्मक रह सकता है। आपकी मेहनत और महत्वाकांक्षा पर वरिष्ठों की नजर पड़ सकती है। नौकरी में प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना बन सकती है। व्यापार से जुड़े लोगों को नए समझौते और अवसर लाभ दे सकते हैं।

    सिंह राशि वालों को निजी और पेशेवर जीवन के बीच संतुलन बनाकर चलना होगा। रिश्तों को समय देने के साथ करियर पर भी ध्यान देना जरूरी रहेगा। क्लाइंट्स या सहयोगियों के साथ अपने अनुभव साझा करने से नए प्रोजेक्ट मिलने के रास्ते खुल सकते हैं।

    कन्या राशि के लिए अपनी प्रतिभा और स्किल्स दिखाने का अच्छा मौका है। नौकरी में प्रमोशन या नई डील मिलने की संभावना बन सकती है। अविवाहित लोगों की किसी ऐसे व्यक्ति से मुलाकात हो सकती है जिसके साथ विचार और रुचियां मेल खाती हों। छोटी यात्राएं भी मन को बेहतर कर सकती हैं।

    तुला राशि के जातकों के लिए प्रेम और साझेदारी के लिहाज से दिन अच्छा रह सकता है। रिश्तों में नजदीकियां बढ़ेंगी। कारोबार में सही रणनीति के साथ की गई पार्टनरशिप बेहतर परिणाम दे सकती है। रचनात्मक सोच आपको आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

    वृश्चिक राशि वालों को अनावश्यक खरीदारी और खर्च से बचना चाहिए। कोई भी ऐसा खर्च न करें जो आपके लंबे समय के आर्थिक लक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। रिश्तों में अपनी जरूरतों और भावनाओं को समझना जरूरी रहेगा।

    धनु राशि के लिए नेतृत्व करने का अवसर मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारी बढ़ सकती है लेकिन एक साथ बहुत सारे काम अपने ऊपर लेने से बचें। निजी जीवन में रोमांस और उत्साह बना रह सकता है।

    मकर राशि के जातक अपनी स्किल्स के आधार पर नए फ्रीलांस अवसर तलाश सकते हैं। सामाजिक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिलेगा। अविवाहित लोगों के लिए किसी खास व्यक्ति से मुलाकात या डेट का अवसर बन सकता है।

    कुंभ राशि वालों का दिन सोशल कनेक्शन और व्यक्तिगत विकास से जुड़ा रहेगा। नई स्किल सीखने और नए प्रोजेक्ट शुरू करने की इच्छा मजबूत होगी। आपकी रचनात्मक सोच किसी महत्वपूर्ण काम को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती है।

    मीन राशि के लिए प्रेम जीवन में छोटी मोटी परेशानियां आ सकती हैं लेकिन पेशेवर जीवन उत्पादक रहने की संभावना है। आर्थिक रूप से भी कुछ सकारात्मक संकेत मिल सकते हैं। कुल मिलाकर दिन सामान्य से बेहतर रह सकता है। यह राशिफल ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है और इसे निश्चित भविष्यवाणी के बजाय सामान्य मार्गदर्शन के रूप में लेना चाहिए।

  • BJP-कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप: संसद में अगले हफ्ते क्या होगा? FCRA से परिसीमन तक हलचल तेज

    BJP-कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप: संसद में अगले हफ्ते क्या होगा? FCRA से परिसीमन तक हलचल तेज


    नई दिल्ली।
    संसद के मानसून सत्र का आखिरी चरण शुरू होने के साथ ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने अपने लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने का निर्देश दिया है। वहीं NDA के सांसदों को भी सोमवार से दिल्ली में रहने को कहा गया है। दोनों खेमों की इस सक्रियता से संसद में अगले सप्ताह किसी बड़े विधायी कदम की अटकलें तेज हो गई हैं।

    चर्चा है कि सरकार FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) में संशोधन या परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को सदन में ला सकती है। हालांकि, अगले सप्ताह के सरकारी कामकाज की सूची में इन दोनों प्रस्तावित विधेयकों का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। ऐसे में विपक्ष सरकार के संभावित अंतिम समय के कदम को लेकर सतर्क है।

    कांग्रेस ने तीन दिन के लिए जारी किया सख्त व्हिप

    कांग्रेस ने अपने सांसदों को 10 से 12 अगस्त तक सदन में मौजूद रहने के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने सांसदों से सुबह 11 बजे से लेकर सदन की कार्यवाही स्थगित होने तक उपस्थित रहने और पार्टी के रुख का समर्थन करने को कहा है।

    कांग्रेस के अलावा INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों ने भी अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की तैयारी शुरू कर दी है। दूसरी तरफ NDA सांसदों को सोमवार से दिल्ली में रहने का निर्देश दिए जाने की खबरों ने संसद में किसी बड़े घटनाक्रम की संभावना को और बढ़ा दिया है।

    सरकारी एजेंडे में अभी FCRA और परिसीमन का जिक्र नहीं

    संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की ओर से अगले सप्ताह के संभावित सरकारी कामकाज की जो सूची पेश की गई है, उसमें FCRA संशोधन विधेयक या परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक का सीधा उल्लेख नहीं है।

    हालांकि, संसदीय प्रक्रिया में सप्लीमेंट्री एजेंडे के जरिए अंतिम समय में किसी विधेयक को सदन के पटल पर लाने का विकल्प सरकार के पास रहता है। यही वजह है कि विपक्ष अपने सांसदों की उपस्थिति को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

    FCRA विधेयक आया तो क्या होगा?

    FCRA यानी फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट में संशोधन से जुड़ा विधेयक अगर संसद में आता है तो इसे पारित कराने के लिए साधारण बहुमत पर्याप्त होगा। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में सरकार के लिए इस तरह के विधेयक को पारित कराना अपेक्षाकृत आसान माना जा रहा है।

    यही कारण है कि विपक्ष सरकार की रणनीति पर नजर बनाए हुए है और अपने सांसदों को सदन में मौजूद रहने का निर्देश दिया गया है।

    परिसीमन वाला विधेयक क्यों ज्यादा अहम?

    अगर सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन से संबंधित कोई संविधान संशोधन विधेयक सदन में पेश करती है तो मामला ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा। संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत होती है। ऐसे में एक-एक सांसद की मौजूदगी और मतदान का महत्व बढ़ जाता है।

    परिसीमन का मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसका सीधा संबंध भविष्य में लोकसभा सीटों के पुनर्निर्धारण से है। इसे लेकर राजनीतिक दलों के बीच लंबे समय से अलग-अलग मत रहे हैं।

    2029 से पहले लागू करने की चुनौती

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि परिसीमन से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक इस मानसून सत्र में नहीं आता है, तो सरकार के पास इसे आगामी सत्रों में लाने का विकल्प रहेगा। 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले इसे लागू करने के लिए पर्याप्त समय बचा हुआ है।

    फिलहाल सरकार की ओर से FCRA या परिसीमन संबंधी विधेयक को अगले सप्ताह पेश करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन BJP और कांग्रेस दोनों की ओर से सांसदों को दिल्ली में रहने और सदन में मौजूद रहने के निर्देशों ने संसद के अगले सप्ताह के एजेंडे को लेकर सियासी अटकलें जरूर तेज कर दी हैं।

  • रूस ने चली क्रिप्टो वाली चाल, डॉलर के दबदबे को चुनौती; क्या ट्रंप की आर्थिक धमकियों का निकलेगा तोड़?

    रूस ने चली क्रिप्टो वाली चाल, डॉलर के दबदबे को चुनौती; क्या ट्रंप की आर्थिक धमकियों का निकलेगा तोड़?


    नई दिल्ली।
    दुनिया की आर्थिक ताकत सिर्फ हथियारों और सैन्य क्षमता से तय नहीं होती, बल्कि वैश्विक कारोबार में किस मुद्रा का दबदबा है, यह भी किसी देश की ताकत को तय करता है। पिछले कई दशकों से अमेरिकी डॉलर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भुगतान व्यवस्था का सबसे बड़ा आधार रहा है। तेल-गैस की खरीद से लेकर देशों के बीच बड़े कारोबारी लेनदेन तक, डॉलर की भूमिका बेहद अहम रही है। इसी वजह से अमेरिका को आर्थिक प्रतिबंधों के जरिए दूसरे देशों पर दबाव बनाने की ताकत भी मिलती है।

    अब रूस ने इसी व्यवस्था से अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में एक और कदम बढ़ाया है। रूस ने विदेशी व्यापार में क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल को कानूनी दायरे में लाने का रास्ता खोल दिया है। रूस का यह कदम पश्चिमी प्रतिबंधों और डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था के विकल्प तलाशने की उसकी लंबे समय से चल रही कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है।

    विदेशी व्यापार में क्रिप्टो का रास्ता खुला

    नए प्रावधानों के तहत रूसी कंपनियों को कुछ अंतरराष्ट्रीय लेनदेन में डिजिटल करेंसी के इस्तेमाल की अनुमति मिल सकती है। यानी रूस और किसी दूसरे देश की कंपनी आपसी सहमति से कुछ भुगतान डॉलर के बजाय क्रिप्टो के माध्यम से कर सकती हैं।

    रूस के लिए इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने उस पर कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। पश्चिमी बैंकिंग व्यवस्था और डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए रूस लगातार वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों की तलाश करता रहा है।

    डॉलर की ताकत सिर्फ मुद्रा नहीं, पूरा सिस्टम है

    अमेरिका की आर्थिक ताकत केवल डॉलर की वैश्विक मांग से नहीं आती। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था का भी बड़ा योगदान है। यदि किसी देश की इस व्यवस्था तक पहुंच सीमित कर दी जाए तो उसके लिए विदेशों से पैसा भेजना और प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है।

    रूस पिछले कुछ वर्षों में इसी चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में डिजिटल करेंसी उसके लिए एक वैकल्पिक भुगतान माध्यम बन सकती है। क्रिप्टो आधारित लेनदेन में पारंपरिक बैंकिंग चैनलों पर निर्भरता कुछ मामलों में कम हो सकती है।

    क्या इससे अमेरिका के आर्थिक दबदबे को चुनौती मिलेगी?

    अगर आने वाले समय में अधिक देश डॉलर के अलावा स्थानीय मुद्राओं, डिजिटल करेंसी या क्रिप्टो के जरिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार करने लगते हैं तो डॉलर की वैश्विक मांग पर असर पड़ सकता है। रूस के साथ चीन, ईरान और दूसरे देश भी वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं।

    हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि डॉलर का दबदबा तुरंत खत्म हो जाएगा। आज भी वैश्विक व्यापार और वित्तीय व्यवस्था में अमेरिकी मुद्रा की भूमिका बेहद मजबूत है। इसलिए क्रिप्टो या स्थानीय मुद्राओं के बढ़ते इस्तेमाल को डॉलर के लिए तत्काल खतरे के बजाय लंबी अवधि में उभरते विकल्प के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा।

    भारत के लिए क्या बदल सकता है?

    भारत भी कई देशों के साथ स्थानीय मुद्राओं में कारोबार बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। रूस के साथ रुपये और रूबल में व्यापार की व्यवस्था को लेकर भी प्रयास किए गए हैं।

    अगर भविष्य में डिजिटल करेंसी और वैकल्पिक भुगतान प्रणालियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा स्वीकार्य होती हैं, तो भारत के लिए भी डॉलर पर निर्भरता कम करने के कुछ नए रास्ते खुल सकते हैं। इससे कुछ लेनदेन में मुद्रा बदलने की लागत और भुगतान में लगने वाला समय कम करने की संभावना बन सकती है।

    लेकिन भारत की नीति निजी क्रिप्टोकरेंसी के बजाय अपने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी ई-रुपये पर ज्यादा केंद्रित है। भारत में क्रिप्टो को आधिकारिक मुद्रा का दर्जा नहीं मिला है और इसके इस्तेमाल पर कड़े टैक्स नियम लागू हैं।

    क्रिप्टो के साथ जोखिम भी कम नहीं

    क्रिप्टोकरेंसी को अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा माध्यम बनाने में सबसे बड़ी चुनौतियों में इसकी कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव भी शामिल है। बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत कम समय में काफी ऊपर-नीचे हो सकती है। ऐसे में अरबों डॉलर के व्यापार के लिए इसका इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है।

    इसी वजह से भविष्य में स्टेबलकॉइन या सरकार समर्थित डिजिटल करेंसी ज्यादा व्यावहारिक विकल्प बन सकती हैं। इसके लिए सिर्फ कानूनी मंजूरी पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियम, भरोसा, सुरक्षा और मजबूत तकनीकी ढांचा भी जरूरी होगा।

    दुनिया को रूस का क्या संदेश?

    रूस का कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते बदलाव की ओर इशारा करता है। चीन अपनी मुद्रा युआन के अंतरराष्ट्रीय इस्तेमाल को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। ब्रिक्स देशों के बीच भी वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों और स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को लेकर चर्चा होती रही है।

    ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल करेंसी और नई भुगतान तकनीकें आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक राजनीति का अहम हिस्सा बन सकती हैं। हालांकि, सिर्फ क्रिप्टो के इस्तेमाल से अमेरिकी आर्थिक दबदबा खत्म हो जाएगा, यह दावा फिलहाल जल्दबाजी होगा। लेकिन रूस का कदम यह जरूर दिखाता है कि दुनिया एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही है, जिसमें किसी एक देश की मुद्रा और भुगतान प्रणाली पर निर्भरता कम हो।