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  • तेलंगाना में फर्जी Form 7 मामले में पहली FIR, BJP बूथ एजेंट पर 30 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप

    तेलंगाना में फर्जी Form 7 मामले में पहली FIR, BJP बूथ एजेंट पर 30 मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश का आरोप

    नई दिल्ली: तेलंगाना में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान कथित तौर पर फर्जी Form 7 जमा करने के मामले में पहली FIR दर्ज की गई है। हैदराबाद के चिक्कड़पल्ली थाने में भाजपा के बूथ लेवल एजेंट एस. बालचंदर के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि उन्होंने मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र के 30 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने की मांग वाले प्री-प्रिंटेड Form 7 जमा करने की कोशिश की। उपलब्ध शिकायत और जांच के अनुसार, इन 30 मतदाताओं के नाम वाले फॉर्म पहले से तैयार थे और बाद में उन्हें बूथ लेवल ऑफिसर के पास जमा करने का प्रयास किया गया।

    FIR के अनुसार, 28 सितंबर 2026 को बालचंदर मतदान केंद्र संख्या 210 के बूथ लेवल ऑफिसर के पास 30 प्री-प्रिंटेड Form 7 लेकर पहुंचे थे। Form 7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम को हटाने या उसके नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। आरोप है कि इन फॉर्म में उन मतदाताओं के नाम पहले से दर्ज थे, जिनसे बालचंदर का कोई संबंध नहीं था। BLO और BLO सुपरवाइजर ने कथित तौर पर फॉर्म का यह सामूहिक सेट स्वीकार करने से इनकार कर दिया। बार-बार अनुरोध के बावजूद फॉर्म स्वीकार नहीं किए गए, जिसके बाद बालचंदर उन्हें परिसर में छोड़कर चले गए।

    इसके बाद चुनाव अधिकारियों ने संबंधित मतदाताओं की वास्तविक स्थिति की जांच की। 30 सितंबर को BLO और सुपरवाइजर ने फील्ड वेरिफिकेशन किया और 1 अक्टूबर को सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी तथा निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी ने भी सत्यापन में हिस्सा लिया। जांच में सभी 30 मतदाता अपने मतदाता रिकॉर्ड में दर्ज पते पर रहते हुए पाए गए। अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से 14 मतदाता एक पते पर और बाकी 16 दूसरे पते पर दर्ज थे। इन 30 लोगों में एक कांग्रेस बूथ लेवल एजेंट भी शामिल बताया गया है। सत्यापन के आधार पर संबंधित Form 7 को स्वीकार करने योग्य नहीं माना गया और उन्हें खारिज किए जाने की बात कही गई।

    पुलिस ने यह कार्रवाई मुशीराबाद विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी टी. प्रवीण कुमार रेड्डी की शिकायत के आधार पर की है। बालचंदर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 217 और 318(2) के साथ जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत मामला दर्ज किया गया है। धारा 217 गलत जानकारी देकर सरकारी अधिकारी की कानूनी शक्ति के इस्तेमाल को प्रभावित करने से संबंधित है, जबकि धारा 318(2) धोखाधड़ी से जुड़ी है। मामले में प्री-प्रिंटेड फॉर्म तैयार करने और जमा करने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    यह मामला तेलंगाना में मतदाता सूची के SIR के दौरान Form 7 के कथित दुरुपयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है। मुशीराबाद के अलावा हैदराबाद के बहादुरपुरा और गोशामहल विधानसभा क्षेत्रों से भी पहले से भरी हुई जानकारी वाले Form 7 सामने आने की बात सामने आई है। चुनाव अधिकारियों ने ऐसे मामलों में जानबूझकर गलत जानकारी या घोषणा देने वालों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, कांग्रेस ने इस मामले में व्यापक जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि मतदाताओं का डेटा जुटाने तथा फॉर्म तैयार करने में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। दूसरी ओर, भाजपा ने पार्टी स्तर पर मतदाता सूची से नाम हटाने के अभियान के आरोपों को खारिज किया है।

  • जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता की ‘तुम रहे ना तुम’ का टोरंटो में वर्ल्ड प्रीमियर, बेटी के भविष्य पर छिड़ेगा परिवार में संघर्ष

    जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता की ‘तुम रहे ना तुम’ का टोरंटो में वर्ल्ड प्रीमियर, बेटी के भविष्य पर छिड़ेगा परिवार में संघर्ष

    नई दिल्ली: जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता की फिल्म ‘तुम रहे ना तुम’ इन दिनों चर्चा में है। साइकोलॉजिकल फैमिली ड्रामा फिल्म का 10 अक्टूबर को टोरंटो में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ साउथ एशिया में वर्ल्ड प्रीमियर होगा। फिल्म को गाला प्रीमियर के तौर पर प्रदर्शित किया जाएगा। यह फिल्म स्वीडिश नाटककार ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग के मशहूर नाटक ‘द फादर’ पर आधारित है। कहानी के साइकोलॉजिकल और भावनात्मक पहलुओं को आज के भारतीय परिवार के माहौल के अनुसार नए रूप में पेश किया गया है।

    फिल्म की कहानी उत्तराखंड के एक पहाड़ी शहर की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। इसमें एक पति-पत्नी के बीच अपनी बेटी के भविष्य को लेकर शुरू हुई बहस धीरे-धीरे गंभीर पारिवारिक संघर्ष में बदल जाती है। बेटी के भविष्य को लेकर दोनों की सोच और फैसले अलग हैं, जिसके कारण परिवार के भीतर तनाव बढ़ता जाता है। फिल्म इसी संघर्ष के जरिए यह सवाल उठाती है कि बच्चे के भविष्य को तय करने का अधिकार किसके पास होना चाहिए और परिवार में शक्ति, अधिकार तथा विरासत जैसे मुद्दे किस तरह रिश्तों को प्रभावित कर सकते हैं।

    ‘तुम रहे ना तुम’ में पारिवारिक रिश्तों के साथ पितृसत्ता, असुरक्षा और भावनात्मक घाव जैसे विषयों को भी प्रमुखता से दिखाया गया है। कहानी यह बताने की कोशिश करती है कि परिवार के भीतर मौजूद असुरक्षा और पुराने भावनात्मक अनुभव किस तरह रिश्तों और फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं। बेटी के भविष्य को लेकर शुरू हुआ विवाद केवल माता-पिता के बीच मतभेद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि धीरे-धीरे परिवार के भीतर मौजूद कई गहरे सवालों को सामने लाता है। फिल्म में मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक पहलुओं को कहानी के केंद्र में रखा गया है।

    फिल्म का निर्देशन प्रेम मोदी ने किया है। जिमी शेरगिल और दिव्या दत्ता मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। इनके अलावा तनिष्का तिवारी, हर्ष छाया, जरीना वहाब और राजेश जैस भी महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। फिल्म का निर्माण विन्नी चावला, वृंदा चावला और सोनू कात्याल ने किया है। इसे फैनेटिकली फिल्मी प्राइवेट लिमिटेड के बैनर तले बनाया गया है। फिल्म की पटकथा राकेश कुमार त्रिपाठी ने लिखी है, जबकि विक्रमजीत रॉय इसके एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर हैं।

    दीपांकर ‘जोजो’ चाकी फिल्म के एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर होने के साथ इसके साउंड डिजाइनर भी हैं। फिल्म का टोरंटो में वर्ल्ड प्रीमियर इसके सफर की महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। जिमी शेरगिल ने फिल्म के प्रीमियर को खास बताते हुए कहा कि कहानी एक भारतीय परिवार पर आधारित है, लेकिन इसकी भावनाएं सभी के लिए समान हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि फिल्म भाषा और भूगोल की सीमाओं से आगे जाकर दर्शकों से जुड़ सकेगी।

    फिल्म की कहानी में परिवार, रिश्तों, अधिकार और बेटी के भविष्य से जुड़े सवालों को मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक नजरिए से पेश किया गया है। उत्तराखंड के पहाड़ी शहर की पृष्ठभूमि में पति-पत्नी के बीच बढ़ता संघर्ष कहानी को आगे ले जाता है। ‘तुम रहे ना तुम’ के जरिए एक भारतीय परिवार के भीतर के तनाव और भावनात्मक जटिलताओं को सामने लाने की कोशिश की गई है। टोरंटो में होने वाला इसका वर्ल्ड प्रीमियर फिल्म को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के सामने पेश करने का पहला बड़ा अवसर होगा।

  • अर्जेंटीना की जर्सी में मेसी का आखिरी मैच, 21 साल के करियर में 125 गोल, 4 बड़े खिताब और रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त

    अर्जेंटीना की जर्सी में मेसी का आखिरी मैच, 21 साल के करियर में 125 गोल, 4 बड़े खिताब और रिकॉर्ड्स की लंबी फेहरिस्त

    नई दिल्ली: लियोनल मेसी ने अर्जेंटीना की जर्सी में अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेल लिया। ब्यूनस आयर्स के एस्टाडियो मोनुमेंटल में बेनिन के खिलाफ खेले गए दोस्ताना मैच में अर्जेंटीना ने 3-0 से जीत दर्ज की। इस मुकाबले में मेसी ने एक गोल किया और टीम के तीनों गोल में अहम भूमिका निभाई। 39 वर्षीय मेसी अगस्त में ही राष्ट्रीय टीम से संन्यास का एलान कर चुके थे। इसके साथ अर्जेंटीना की नीली-सफेद जर्सी में उनका 21 साल से ज्यादा लंबा सफर समाप्त हो गया, जिसमें उन्होंने टीम को विश्व कप और कोपा अमेरिका समेत चार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    मेसी ने 2005 में अर्जेंटीना की सीनियर टीम के लिए पदार्पण किया था। इससे पहले वह उसी साल अर्जेंटीना को अंडर-20 विश्व कप जिताने में अहम भूमिका निभा चुके थे और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी तथा शीर्ष स्कोरर बने थे। 2008 बीजिंग ओलंपिक में भी उन्होंने अर्जेंटीना के साथ स्वर्ण पदक जीता। हालांकि सीनियर टीम के शुरुआती वर्षों में उन्हें कई निराशाओं का सामना करना पड़ा। 2014 विश्व कप फाइनल में जर्मनी से हार और 2015 तथा 2016 कोपा अमेरिका फाइनल में चिली के खिलाफ हार के बाद मेसी पर सवाल उठे। 2016 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल से संन्यास का एलान भी किया, लेकिन बाद में टीम में वापसी की।

    वापसी के बाद मेसी और अर्जेंटीना की कहानी पूरी तरह बदल गई। 2021 में अर्जेंटीना ने ब्राजील को हराकर कोपा अमेरिका का खिताब जीता और मेसी ने अपना पहला बड़ा सीनियर अंतरराष्ट्रीय खिताब हासिल किया। 2022 में इटली के खिलाफ फाइनलिसिमा जीतने के बाद कतर विश्व कप में अर्जेंटीना ने फ्रांस को फाइनल में हराकर खिताब जीता। मेसी ने उस फाइनल में दो गोल किए और पेनल्टी शूटआउट में अर्जेंटीना की जीत के बाद विश्व कप ट्रॉफी अपने नाम की। उन्हें टूर्नामेंट का गोल्डन बॉल पुरस्कार भी मिला। 2024 में अर्जेंटीना ने कोलंबिया को हराकर लगातार दूसरी बार कोपा अमेरिका जीता। इस तरह मेसी के नेतृत्व में टीम ने चार बड़े अंतरराष्ट्रीय खिताब हासिल किए।

    2026 विश्व कप में भी मेसी ने कई नए रिकॉर्ड बनाए। अल्जीरिया के खिलाफ मुकाबले में मैदान पर उतरते ही वह पुरुष फुटबॉल इतिहास में छह अलग-अलग विश्व कप खेलने वाले पहले खिलाड़ी बने। उसी मैच में उन्होंने विश्व कप करियर की पहली हैट्रिक लगाई। इसके बाद ऑस्ट्रिया के खिलाफ दो गोल करके उन्होंने विश्व कप में अपने गोल की संख्या 18 पहुंचाई और मिरोस्लाव क्लोज को पीछे छोड़ दिया। 2026 विश्व कप के अंत तक मेसी के नाम 21 गोल हो गए। उन्होंने टूर्नामेंट में आठ गोल और चार असिस्ट के साथ अर्जेंटीना को फाइनल तक पहुंचाया, जहां स्पेन से अतिरिक्त समय में 0-1 की हार के बाद टीम उपविजेता रही।

    मेसी के नाम विश्व कप में 23 जीत और 12 असिस्ट का रिकॉर्ड भी दर्ज है। वह तीन विश्व कप फाइनल में शुरुआती एकादश का हिस्सा रहने वाले खिलाड़ियों में शामिल हैं। 2026 में उन्होंने लगातार नौ विश्व कप मैचों में गोल करने का रिकॉर्ड बनाया और नॉकआउट चरण में लगातार छह मैचों में गोल करने का रिकॉर्ड भी कायम किया। कतर विश्व कप में वह ग्रुप चरण से लेकर फाइनल तक हर चरण में गोल करने वाले खिलाड़ी बने थे। अर्जेंटीना के लिए अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में मेसी ने 207 मैच खेले और 125 गोल के साथ टीम के सबसे ज्यादा मैच खेलने तथा सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी के रूप में विदाई ली। उन्होंने 68 असिस्ट भी किए।

    मेसी की उपलब्धियां सिर्फ अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल तक सीमित नहीं रहीं। बार्सिलोना के साथ उन्होंने 17 सीजन बिताए और 778 मैचों में 672 गोल किए। क्लब के साथ उन्होंने 35 खिताब जीते, जिनमें चार चैंपियंस लीग और 10 ला लीगा खिताब शामिल हैं। 2012 में एक कैलेंडर वर्ष में 91 गोल करने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। वह आठ बार बैलन डी’ओर जीत चुके हैं और छह बार यूरोपीय गोल्डन शू हासिल कर चुके हैं। 2023 में इंटर मियामी पहुंचने के बाद भी उनका रिकॉर्ड कायम रहा और 2026 में क्लब के लिए 100 गोल पूरे करने वाले पहले खिलाड़ी बने। अब अर्जेंटीना के साथ उनका अंतरराष्ट्रीय अध्याय समाप्त हो चुका है, लेकिन उनके रिकॉर्ड और उपलब्धियां फुटबॉल इतिहास का अहम हिस्सा बनी रहेंगी।

  • बर्फ के नीचे छिपे मायावी न्यूट्रिनो से ब्रह्मांड के रहस्य खोलने वाले फ्रांसिस हाल्जन को भौतिकी का नोबेल

    बर्फ के नीचे छिपे मायावी न्यूट्रिनो से ब्रह्मांड के रहस्य खोलने वाले फ्रांसिस हाल्जन को भौतिकी का नोबेल

    नई दिल्ली: रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने 2026 का भौतिकी नोबेल पुरस्कार फ्रांसिस हाल्जन को देने का फैसला किया है। उन्हें यह सम्मान आइसक्यूब न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी में योगदान और खगोलीय मूल के हाई एनर्जी न्यूट्रिनो की खोज के लिए दिया गया है। हाल्जन ने दक्षिण ध्रुव की बर्फ का इस्तेमाल न्यूट्रिनो नामक बेहद मायावी कणों को पकड़ने और ट्रैक करने के लिए करने का दृष्टिकोण विकसित किया। उनके वैज्ञानिक नेतृत्व और विचारों ने ऐसी वेधशाला के निर्माण का रास्ता तैयार किया, जिसके जरिए दूर ब्रह्मांड से आने वाले अत्यधिक ऊर्जावान न्यूट्रिनो का अध्ययन संभव हुआ।

    आइसक्यूब ऑब्जर्वेटरी एक घन किलोमीटर बर्फ में लगाए गए प्रकाश सेंसरों का विशाल नेटवर्क है। जब कोई न्यूट्रिनो किसी परमाणु नाभिक से टकराता है तो प्रकाश की चमक पैदा होती है। साफ ग्लेशियर बर्फ में लगाए गए सेंसर इस चमक को दर्ज कर सकते हैं और उसके आधार पर न्यूट्रिनो के बारे में जानकारी हासिल की जाती है। दक्षिण ध्रुव की बर्फ इस प्रयोग के लिए कई फायदे देती है। यह क्षेत्र भूगर्भीय रूप से स्थिर है और यहां प्रयोग के दौरान कई तरह के व्यवधान कम होते हैं। इसी आधार पर न्यूट्रिनो का पता लगाने की यह तकनीक आगे विकसित होती गई।

    फ्रांसिस हाल्जन ने वर्ष 1988 में दक्षिण ध्रुव पर न्यूट्रिनो पकड़ने का अपना दृष्टिकोण पहली बार प्रस्तुत किया था। उनके विचार को दूसरे शोधकर्ताओं का समर्थन मिला और कुछ वर्षों के भीतर बर्फ में सेंसर लगाने के शुरुआती परीक्षण शुरू हुए। समय के साथ यह परियोजना बड़े वैज्ञानिक प्रयास में बदलती गई और आइसक्यूब दुनिया की सबसे बड़ी न्यूट्रिनो ऑब्जर्वेटरी बन गई। इसके जरिए वैज्ञानिक उन कणों का अध्ययन कर पा रहे हैं, जो ब्रह्मांड की अत्यंत ऊर्जावान घटनाओं और दूरस्थ स्रोतों से पृथ्वी तक पहुंचते हैं।

    न्यूट्रिनो को ब्रह्मांड के सबसे मायावी कणों में गिना जाता है, क्योंकि वे पदार्थ के साथ बहुत कम प्रतिक्रिया करते हैं और आसानी से उसके आर-पार गुजर सकते हैं। अन्य कणों की तुलना में न्यूट्रिनो अपनी दिशा बदले बिना और ऊर्जा खोए बिना पृथ्वी तक पहुंच सकते हैं। इसी वजह से वे ब्रह्मांड के उन हिस्सों और घटनाओं की जानकारी दे सकते हैं, जिन्हें दूसरे तरीकों से समझना मुश्किल होता है। वैज्ञानिक लंबे समय से जानते हैं कि ब्रह्मांड में प्राकृतिक स्रोत ऐसे कण पैदा करते हैं जिनकी ऊर्जा पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में हासिल की जा सकने वाली ऊर्जा से लाखों गुना अधिक हो सकती है। इन स्रोतों की प्रकृति और उनके भीतर चलने वाली प्रक्रियाएं अब भी कई सवाल खड़े करती हैं।

    आइसक्यूब के जरिए हाई एनर्जी वाले खगोलीय न्यूट्रिनो की पुष्टि ने ब्रह्मांड के अध्ययन का नया क्षेत्र खोला है। ऐसे न्यूट्रिनो सुपरनोवा विस्फोट, ब्लैक होल के आसपास होने वाली प्रक्रियाओं और गामा रे बर्स्ट जैसी अत्यंत ऊर्जावान घटनाओं को समझने में मदद कर सकते हैं। न्यूट्रिनो खगोल विज्ञान के जरिए वैज्ञानिक दृश्य प्रकाश और अन्य तरंगों से अलग एक नए नजरिए से ब्रह्मांड को देख पा रहे हैं। दक्षिण ध्रुव की कठिन परिस्थितियों में इतनी विशाल ऑब्जर्वेटरी विकसित करने में हाल्जन के वैज्ञानिक नेतृत्व और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। यह सम्मान कण भौतिकी और खगोल भौतिकी के संगम में उनके योगदान को मान्यता देता है।

  • बृहस्पति का नक्षत्र परिवर्तन लाएगा बड़ा बदलाव, वृषभ कर्क और मकर वालों के शुरू होंगे अच्छे दिन, धन से लेकर करियर तक लाभ

    बृहस्पति का नक्षत्र परिवर्तन लाएगा बड़ा बदलाव, वृषभ कर्क और मकर वालों के शुरू होंगे अच्छे दिन, धन से लेकर करियर तक लाभ


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान सौभाग्य धर्म शिक्षा और समृद्धि से जुड़ा प्रमुख ग्रह माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार गुरु की राशि या नक्षत्र में होने वाला परिवर्तन सभी राशियों के जीवन पर किसी न किसी रूप में प्रभाव डाल सकता है। अक्टूबर 2026 में गुरु की स्थिति में एक महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहा है। 8 अक्टूबर को देवगुरु बृहस्पति अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश करेंगे। माना जा रहा है कि इस परिवर्तन का प्रभाव विशेष रूप से करियर धन संबंधों और मानसिक स्थिति से जुड़े मामलों पर दिखाई दे सकता है।

    इस समय बृहस्पति कर्क राशि में स्थित हैं और ज्योतिष में कर्क को गुरु की उच्च राशि माना जाता है। ऐसे में अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में गुरु का प्रवेश कुछ राशियों के लिए विशेष शुभ परिणाम देने वाला माना जा रहा है। लंबे समय से अटके कामों में गति आ सकती है और मेहनत का बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि ज्योतिषीय फल व्यक्ति की कुंडली और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग अलग हो सकते हैं।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस दौरान साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होने की संभावना है। जो लोग कारोबार में पार्टनरशिप के जरिए काम कर रहे हैं उनके बीच चल रहे मतभेद दूर हो सकते हैं। व्यापार में नए अवसर मिलने और लाभ बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं। परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा और मानसिक रूप से भी राहत महसूस हो सकती है। किसी महत्वपूर्ण फैसले को लेकर लंबे समय से चल रहा असमंजस दूर होने की संभावना है।

    कर्क राशि के लिए गुरु का यह परिवर्तन खास माना जा रहा है क्योंकि कर्क राशि में बृहस्पति को उच्च का माना जाता है। इस दौरान आत्मविश्वास बढ़ सकता है और कार्यक्षेत्र में आपके निर्णयों को महत्व मिलने की संभावना है। नौकरी करने वाले लोगों को नई जिम्मेदारी या प्रमोशन से जुड़ा अवसर मिल सकता है। शिक्षा मीडिया और वित्त जैसे क्षेत्रों से जुड़े लोगों के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं। अपनी क्षमता का सही इस्तेमाल करने वाले जातकों को इस अवधि में बेहतर परिणाम मिलने की उम्मीद की जा सकती है।

    मकर राशि वालों के लिए भी गुरु का यह नक्षत्र परिवर्तन करियर और रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अविवाहित जातकों के लिए विवाह से जुड़े अच्छे प्रस्ताव आ सकते हैं या किसी रिश्ते की बात आगे बढ़ सकती है। नौकरी और कारोबार में मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। कारोबारियों के लिए किसी बड़ी डील के फाइनल होने के योग बन सकते हैं। साथ ही समाज में मान सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर 8 अक्टूबर से होने वाला बृहस्पति का अश्लेषा नक्षत्र के चौथे चरण में प्रवेश ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वृषभ कर्क और मकर राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल रहने की संभावना बताई गई है। हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किसी भी ग्रह परिवर्तन का वास्तविक प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए इन संकेतों को सामान्य ज्योतिषीय आकलन के तौर पर ही देखना बेहतर होगा।

  • आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान

    आस्था और धर्म पर जावेद अख्तर का बड़ा सवाल, एलन मस्क के उदाहरण से समझाया क्यों नहीं मानते सभी धर्म समान


    नई दिल्ली। मशहूर लेखक और गीतकार जावेद अख्तर अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाते हैं। वह अक्सर उन मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं जिन पर लोग बिना ज्यादा सवाल किए विश्वास करते हैं। हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने धर्म आस्था भगवान और नास्तिकता को लेकर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में धर्म और आस्था इंसान को मानसिक सहारा दे सकते हैं लेकिन किसी चीज से सुकून मिलना इस बात का प्रमाण नहीं हो सकता कि वह चीज सच भी है।

    जावेद अख्तर के मुताबिक जब इंसान किसी परेशानी में होता है तो उसे किसी बड़ी शक्ति पर भरोसा करने से भावनात्मक राहत मिल सकती है। उसे लगता है कि कोई ऐसी ताकत मौजूद है जो उसकी देखभाल कर रही है और उसकी मुश्किल दूर कर देगी। उनका सवाल यह है कि केवल इस भरोसे से उस विश्वास को वास्तविक कैसे मान लिया जाए। उनके अनुसार मानसिक शांति और किसी चीज के सच होने के बीच अंतर समझना जरूरी है।

    अपनी बात समझाने के लिए जावेद अख्तर ने कारोबारी एलन मस्क का उदाहरण दिया। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति के जरिए समझाया कि अगर कोई व्यक्ति पूरे विश्वास के साथ यह मान ले कि एलन मस्क उसका भाई है और अगले महीने उसे अरबों रुपये मिलने वाले हैं तो इस सोच से उसे खुशी और सुरक्षा का एहसास हो सकता है। वह लगातार इसी उम्मीद में रह सकता है कि अगले महीने पैसा जरूर आएगा। लेकिन केवल विश्वास करने से यह साबित नहीं हो जाता कि एलन मस्क वास्तव में उसका भाई है या उसे पैसे मिलने वाले हैं। जावेद अख्तर ने इसी उदाहरण के जरिए आस्था और वास्तविकता के बीच अंतर को समझाने की कोशिश की।

    उन्होंने धर्म को लेकर भी एक सवाल उठाया। जावेद अख्तर ने कहा कि दुनिया में बड़ी संख्या में लोग उसी धर्म को मानते हैं जिसमें उनका जन्म हुआ होता है। उन्होंने दावा किया कि करीब 99 फीसदी लोग उसी धर्म में मरते हैं जिसमें उन्होंने जन्म लिया था। उनके मुताबिक यह सवाल खड़ा करता है कि क्या लोगों ने अपने धार्मिक विश्वासों को खुद तर्क और विचार के आधार पर चुना है या फिर उन्हें बचपन से परिवार और समाज के जरिए ये मान्यताएं मिली हैं।

    जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की बात को सिर्फ इसलिए सही नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि हम उस व्यक्ति पर विश्वास करते हैं। उनके अनुसार इंसान समय के साथ अपनी राय बदल सकता है इसलिए जरूरी है कि किसी व्यक्ति की पहचान के बजाय उसके विचार और तर्क को परखा जाए। उनका नजरिया यह है कि कौन बात कह रहा है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि कही गई बात के पीछे कितना मजबूत तर्क मौजूद है।

    धर्मों की समानता को लेकर भी जावेद अख्तर ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया के सभी धर्मों को सिर्फ इसलिए एक जैसा नहीं कहा जा सकता क्योंकि उनमें इंसान को बेहतर बनने की सीख मिलती है। उनके मुताबिक अलग अलग धर्मों की मान्यताएं विचार और सिद्धांत अलग हो सकते हैं। इसलिए सभी धर्म बिल्कुल एक ही बात कहते हैं ऐसा कहना सही नहीं है।

    जावेद अख्तर लंबे समय से धर्म तर्क और आस्था जैसे विषयों पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखते रहे हैं। उनके विचारों से जहां कुछ लोग सहमत नजर आते हैं वहीं कई बार उनके बयानों को लेकर असहमति भी सामने आती है। इस बार भी उनका बयान सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में बहस का विषय बना हुआ है।

  • संजू सैमसन की लगातार नाकामी से फैन्स नाराज, 4 टी20 में 29 रन के बाद वैभव सूर्यवंशी की एंट्री को लेकर बढ़ा दबाव

    संजू सैमसन की लगातार नाकामी से फैन्स नाराज, 4 टी20 में 29 रन के बाद वैभव सूर्यवंशी की एंट्री को लेकर बढ़ा दबाव


    नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ लखनऊ के इकाना स्टेडियम में खेले गए पहले टी20 मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की। भारत ने यह मैच 8 विकेट से अपने नाम किया। मुकाबले में कप्तान श्रेयस अय्यर ने तूफानी शतक जड़कर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। हालांकि इस शानदार जीत के बीच विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन का खराब फॉर्म एक बार फिर चर्चा में आ गया। संजू इस मुकाबले में भी बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे और महज 11 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।

    संजू सैमसन के लिए हालिया मुकाबले बेहद निराशाजनक रहे हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ 9 गेंदों पर 11 रन बनाने से पहले वह पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ 2 रन बनाकर आउट हुए थे। उससे पहले श्रीलंका के खिलाफ उनके बल्ले से 7 रन निकले थे जबकि जापान के खिलाफ वह 9 रन ही बना सके थे। इस तरह उनकी पिछली चार टी20 पारियों को देखें तो संजू के बल्ले से कुल 29 रन ही निकले हैं। लगातार चार मैचों में बड़ी पारी नहीं खेल पाने के कारण अब उनके प्रदर्शन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

    हालांकि इन खराब पारियों से पहले संजू ने अफगानिस्तान के खिलाफ 17 सितंबर को शानदार अर्धशतक लगाया था। उन्होंने 35 गेंदों पर 50 रन की पारी खेली थी। उस पारी के बाद उम्मीद थी कि संजू लगातार अपने बल्ले का दम दिखाएंगे लेकिन इसके बाद उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। लगातार छोटी पारियों ने टीम में उनकी जगह को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

    संजू की लगातार नाकामी के बाद सोशल मीडिया पर फैन्स का एक वर्ग अब युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका देने की मांग कर रहा है। 15 साल के वैभव भारतीय क्रिकेट में अपनी कम उम्र और आक्रामक बल्लेबाजी के कारण पहले ही काफी चर्चा बटोर चुके हैं। वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले टी20 में उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली और वह बाहर बैठकर मुकाबला देखते नजर आए। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई फैन्स ने टीम मैनेजमेंट के फैसले पर सवाल खड़े किए।

    कुछ यूजर्स का कहना है कि संजू को काफी मौके मिल चुके हैं और अगर उनका बल्ला लगातार खामोश है तो युवा खिलाड़ी को आजमाने पर विचार किया जाना चाहिए। एक यूजर ने कहा कि अब संजू से आगे बढ़ने का समय आ गया है। वहीं कुछ फैन्स ने मुख्य कोच गौतम गंभीर और चयनकर्ताओं पर भी सवाल उठाए और पूछा कि आखिर वैभव को प्लेइंग इलेवन में मौका कब मिलेगा।

    हालांकि सिर्फ चार पारियों के आधार पर किसी खिलाड़ी के भविष्य पर फैसला करना आसान नहीं होता। संजू के पास अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव है और वह कई मौकों पर अपनी बल्लेबाजी से टीम को मैच जिता चुके हैं। ऐसे में टीम मैनेजमेंट उनके अनुभव पर भरोसा जारी रखता है या युवा वैभव को मौका देकर भविष्य की तैयारी शुरू करता है यह आने वाले मुकाबलों में साफ होगा।

    फिलहाल भारत ने सीरीज में जीत के साथ शुरुआत कर दी है और अब नजर अगले मुकाबले पर है। एक तरफ संजू सैमसन के बल्ले से बड़ी पारी की उम्मीद होगी तो दूसरी तरफ फैन्स की निगाहें 15 साल के वैभव सूर्यवंशी पर रहेंगी। अगर टीम मैनेजमेंट प्लेइंग इलेवन में बदलाव करता है तो वैभव को मौका मिलना इस सीरीज की सबसे बड़ी चर्चाओं में से एक हो सकता है।

  • पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल

    पाप का हिस्सा बनने से बचिए… हाथ जोड़कर शोभिनव सत्य ने की थी अपील अब इसी बयान पर जमकर हो रहे ट्रोल


    नई दिल्ली। ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन को लेकर लगातार चर्चा में बनी हुई है। महज 2 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म की कमाई 300 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है। फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है लेकिन इसी बीच फिल्म के लीड एक्टर शोभिनव सत्य का एक पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो गया है। इस वीडियो में अभिनेता दर्शकों से फिल्म का पाइरेटेड वर्जन ऑनलाइन नहीं देखने की अपील करते नजर आ रहे हैं। हालांकि उनकी इस अपील में इस्तेमाल की गई पाप वाली बात कुछ यूजर्स को पसंद नहीं आई और इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल किया जाने लगा।

    दरअसल शोभिनव सत्य ने इसी साल अगस्त में अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर यह वीडियो शेयर किया था। वीडियो में उन्होंने सबसे पहले फिल्म को मिल रहे प्यार के लिए दर्शकों का शुक्रिया अदा किया। इसके बाद उन्होंने फिल्म की पाइरेसी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। अभिनेता ने बताया कि फिल्म के पाइरेटेड वर्जन को बड़ी संख्या में लोग मोबाइल फोन और टीवी पर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेकर्स ने फिल्म को इंटरनेट पर रिलीज नहीं किया है। इसके बावजूद कुछ लोग चोरी छिपे फिल्म को ऑनलाइन उपलब्ध करा रहे हैं और दर्शक उसे देख रहे हैं।

    शोभिनव ने अपनी बात समझाते हुए कहा था कि अगर कोई व्यक्ति इस तरह चोरी से फिल्म देखता है तो वह अनजाने में किसी दूसरे के पाप का हिस्सा बन रहा है। अभिनेता ने हाथ जोड़कर लोगों से पाइरेटेड कॉपी नहीं देखने की अपील की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी ने मोबाइल पर फिल्म देख भी ली है तो उसे यह समझ आ गया होगा कि यह ऐसी फिल्म नहीं है जिसे अकेले मोबाइल की छोटी स्क्रीन पर देखने का वही अनुभव मिले जो थिएटर में मिलता है। उनके मुताबिक फिल्म को पूरे परिवार के साथ सिनेमाघर में देखने का अनुभव अलग है।

    वीडियो में शोभिनव ने यह भी जानकारी दी थी कि फिल्म की टीम अब तक करीब 600 से 700 पाइरेटेड लिंक हटवा चुकी है। रिलीज के बाद से ही मेकर्स ऑनलाइन लीक को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। हालांकि अब जब यह पुराना वीडियो दोबारा वायरल हुआ तो फिल्म की पाइरेसी से ज्यादा अभिनेता के बयान पर चर्चा शुरू हो गई।

    सोशल मीडिया और रेडिट पर कुछ यूजर्स ने शोभिनव के पाप वाले बयान को लेकर सवाल उठाए। एक यूजर ने धार्मिक भावनाओं और फिल्म से जुड़े बिजनेस को लेकर अपनी नाराजगी जताई। वहीं दूसरे यूजर ने कहा कि पाइरेसी के खिलाफ अपील करना सही है लेकिन इसे पाप से जोड़ना उसे समझ नहीं आया। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि फिल्म की पाइरेसी रोकने की बात अपनी जगह ठीक है लेकिन धार्मिक शब्दों के इस्तेमाल से मामला अनावश्यक रूप से विवादित हो गया।

    हालांकि शोभिनव की मूल अपील का केंद्र फिल्म की पाइरेसी रोकना ही था। फिल्म की टीम का कहना है कि ऑनलाइन लीक से फिल्म के आधिकारिक कारोबार पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि टीम लगातार ऐसे लिंक हटाने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 60 दिनों में ‘हनुमान अंश’ ने भारत में करीब 325.48 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन किया है जबकि इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन करीब 424.24 करोड़ रुपये बताया गया है। ऐसे में फिल्म की कमाई के साथ अब शोभिनव सत्य का पुराना वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का बड़ा कारण बन गया है।

  • फिल्म बेचने के लिए डर का ऐसा खेल, प्रमोशन देखकर सहम गए लोग, जानिए सिनेमा के 5 सबसे खौफनाक कैंपेन

    फिल्म बेचने के लिए डर का ऐसा खेल, प्रमोशन देखकर सहम गए लोग, जानिए सिनेमा के 5 सबसे खौफनाक कैंपेन


    नई दिल्ली। फिल्मों की कहानी और कलाकारों के अलावा उनका प्रमोशन भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में अहम भूमिका निभाता है। आमतौर पर फिल्म निर्माता पोस्टर ट्रेलर इवेंट और सोशल मीडिया कैंपेन के जरिए अपनी फिल्मों को दर्शकों तक पहुंचाते हैं। लेकिन हॉरर फिल्मों के मेकर्स ने कई बार प्रमोशन का ऐसा तरीका अपनाया जिसने फिल्म देखने से पहले ही लोगों के बीच डर का माहौल बना दिया। कुछ प्रमोशन इतने वास्तविक लगे कि लोगों को समझ ही नहीं आया कि वे किसी फिल्म के प्रचार का हिस्सा हैं या सचमुच किसी खतरनाक घटना के बीच फंस गए हैं। सिनेमा इतिहास में ऐसे कई प्रमोशन दर्ज हैं जिन्हें आज भी बेहद यादगार माना जाता है।

    साल 1960 में रिलीज हुई अल्फ्रेड हिचकॉक की फिल्म साइको के प्रमोशन को इस तरह के प्रयोगों की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। फिल्म को लेकर दर्शकों में डर का माहौल बनाने के लिए सिनेमाघरों के बाहर डॉक्टरों और नर्सों जैसी वेशभूषा में लोगों को तैनात किया गया था। दर्शकों को फिल्म की भयावहता को लेकर चेतावनी दी जाती थी। इसके साथ ही फिल्म शुरू होने के बाद देर से आने वाले दर्शकों को प्रवेश नहीं देने का नियम भी प्रचार का हिस्सा बना। इस माहौल ने लोगों की उत्सुकता के साथ डर भी बढ़ा दिया।

    इसके बाद साल 1999 में आई द ब्लेयर विच प्रोजेक्ट ने गुरिल्ला मार्केटिंग का बेहद अलग तरीका अपनाया। फिल्म के निर्माताओं ने इंटरनेट पर ऐसा माहौल तैयार किया जिससे लोगों को लगा कि फिल्म में दिखाई गई घटनाएं वास्तविक हैं। कॉलेज कैंपस और सिनेमाघरों के आसपास फिल्म के कलाकारों के लापता होने वाले पोस्टर लगाए गए। वेबसाइट पर भी कहानी को इस तरह पेश किया गया कि कई लोगों को शुरुआत में यह फिल्म नहीं बल्कि वास्तविक घटना लगी। इस अभियान ने फिल्म को लेकर जबरदस्त चर्चा पैदा की।

    साल 2006 में मिशन इम्पॉसिबल 3 के प्रमोशन के दौरान भी एक ऐसा मामला सामने आया जिसने लोगों को डरा दिया। फिल्म की थीम ट्यून बजाने वाले छोटे डिजिटल म्यूजिक प्लेयर अखबारों के बॉक्स के अंदर लगाए गए थे। बॉक्स खोलते ही अचानक आवाज आने लगी। अंदर दिखाई देने वाले तारों और अचानक बजने वाली धुन से कुछ लोगों को लगा कि वहां कोई संदिग्ध उपकरण रखा गया है। मामला इतना गंभीर हो गया कि कुछ स्थानों पर सुरक्षा एजेंसियों को बुलाना पड़ा और बम निरोधक दस्ते तक को सक्रिय करना पड़ा।

    साल 2013 में आई एक हॉरर फिल्म के प्रमोशन के लिए न्यूयॉर्क की एक कॉफी शॉप में भी डरावना प्रैंक किया गया। वहां छिपे हुए तारों रिमोट से चलने वाली कुर्सियों और नकली दीवारों की मदद से ऐसा माहौल तैयार किया गया कि आम ग्राहक अचानक डर गए। एक अभिनेत्री ने अपनी कथित मानसिक शक्ति से चीजों को हिलाने का अभिनय किया। टेबल और कुर्सियों के अचानक हिलने से वहां मौजूद लोग चीखते हुए बाहर निकल गए।

    इसके बाद स्माइल और स्माइल 2 के प्रमोशन ने भी लोगों का ध्यान खींचा। इन फिल्मों के प्रचार के दौरान लाइव बेसबॉल मैचों और टीवी कार्यक्रमों में डरावनी मुस्कान वाले लोगों को दर्शकों के बीच बैठाया गया। वे लंबे समय तक कैमरे की तरफ बिना पलक झपकाए देखते रहे। टीवी पर यह दृश्य देखकर लोगों को कुछ पल के लिए समझ नहीं आया कि यह किसी फिल्म का प्रमोशन है या वास्तविक घटना। इन सभी उदाहरणों से साफ है कि फिल्म प्रमोशन अब केवल पोस्टर और ट्रेलर तक सीमित नहीं रहा। मेकर्स दर्शकों को कहानी का अनुभव पहले ही कराने के लिए डर और रोमांच को प्रचार का हिस्सा बना चुके हैं।

  • कृति सेनन ने खोला रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का राज, करीना कपूर से बोलीं मेरी चोली पर हुई थी घंटों बहस

    कृति सेनन ने खोला रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का राज, करीना कपूर से बोलीं मेरी चोली पर हुई थी घंटों बहस

    नई दिल्ली। करीना कपूर एक बार फिर अपने चर्चित टॉक शो व्हाट वीमेन वांट के नए सीजन के साथ दर्शकों के बीच लौटने वाली हैं। शो के सीजन 6 का ट्रेलर सामने आ चुका है और इसमें बॉलीवुड की कई चर्चित हस्तियां नजर आ रही हैं। ट्रेलर में कृति सेनन भी करीना कपूर के साथ बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। इस दौरान कृति ने रक्षाबंधन के दौरान सामने आए अपने एक विज्ञापन विवाद को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि किस तरह उनके कपड़ों को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि उनकी चोली तक प्राइम टाइम टीवी डिबेट का विषय बन गई।

    करीना कपूर से बातचीत के दौरान कृति सेनन ने कहा कि उन्हें यकीन नहीं हुआ था कि उनके कपड़े इतने बड़े मुद्दे में बदल जाएंगे। उन्होंने मजाकिया लेकिन हैरान करने वाले अंदाज में बताया कि उनकी चोली प्राइम टाइम न्यूज पर छह लोगों के पैनल डिस्कशन का विषय बन गई थी। कृति की बात सुनकर करीना कपूर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वह इस बात से परिचित हैं। बातचीत का यह हिस्सा शो के ट्रेलर में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले हिस्सों में शामिल है।

    दरअसल रक्षाबंधन के दौरान कृति सेनन ने ज्वेलरी ब्रांड जीवा के लिए एक विज्ञापन किया था। विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके पहनावे को लेकर काफी विवाद हुआ। कृति इस विज्ञापन में सफेद रंग के इंडो वेस्टर्न लहंगे के साथ डीप नेक ब्रालेट स्टाइल टॉप में नजर आई थीं। कुछ लोगों ने उनके कपड़ों को लेकर आपत्ति जताई और इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर सवाल उठाए। विवाद बढ़ने के बाद विज्ञापन को लेकर कंपनी को भी आलोचना का सामना करना पड़ा और बाद में इसे वापस ले लिया गया।

    इस पूरे मामले पर कृति सेनन ने उस समय सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि आखिर महिलाओं के कपड़ों को ही उनकी संस्कृति और सम्मान का पैमाना क्यों बनाया जाता है। कृति का कहना था कि पिछले कुछ वर्षों में एथनिक फैशन में काफी बदलाव आया है लेकिन आज भी महिलाओं के पहनावे को लेकर उनकी संस्कृति पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि संस्कृति और परंपराएं किसी महिला के दिल और सोच में होती हैं न कि उसके पहनावे में।

    कृति की इसी बेबाक सोच की झलक अब करीना कपूर के शो के ट्रेलर में भी दिखाई दे रही है। दोनों अभिनेत्रियों के बीच बातचीत के दौरान रक्षाबंधन विज्ञापन विवाद का जिक्र होने से यह एपिसोड पहले ही चर्चा में आ गया है। व्हाट वीमेन वांट के नए सीजन में करीना कपूर एक बार फिर सेलिब्रिटीज से उनकी निजी जिंदगी करियर और समाज से जुड़े मुद्दों पर खुलकर सवाल करती नजर आएंगी।

    शो के ट्रेलर में कृति सेनन के अलावा पंकज त्रिपाठी मीरा राजपूत कपूर अली फजल सुहानी शाह नीतू कपूर नेहा कक्कड़ ताहिरा कश्यप महीप कपूर और गुनीत मोंगा समेत कई चर्चित चेहरे दिखाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर दर्शक खासतौर पर कृति और करीना के एपिसोड को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं।

    कृति सेनन के वर्कफ्रंट की बात करें तो हाल ही में उनकी फिल्म कॉकटेल 2 रिलीज हुई थी। फिल्म में उनके साथ रश्मिका मंदाना और शाहिद कपूर नजर आए थे। यह फिल्म 2012 में आई कॉकटेल का सीक्वल थी। हालांकि बॉक्स ऑफिस पर फिल्म को उम्मीद के मुताबिक सफलता नहीं मिल सकी। अब कृति एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज और आने वाले प्रोजेक्ट्स को लेकर सुर्खियों में हैं।