Blog

  • त्योहारों पर महंगाई का तड़का…. कीमतें बढ़ाने की जगह छोटे पैक… सामान की मात्रा भी घटी

    त्योहारों पर महंगाई का तड़का…. कीमतें बढ़ाने की जगह छोटे पैक… सामान की मात्रा भी घटी


    नई दिल्ली।
    दशहरा (Dussehra) और दिवाली (Diwali) से पहले रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान की बढ़ती कीमतों (Rising Prices) का असर अब अलग तरीके से दिखाई दे रहा है। कच्चे माल और उत्पादन से जुड़ी लागत बढ़ने के बीच कंपनियां हर पैकेट की कीमत सीधे बढ़ाने (Directly Increasing Price) से बच रही हैं। इसके बजाय छोटे पैक में सामान की मात्रा घटाई (Reduced Quantity Small packs) जा रही है। कई मामलों में मात्रा में 2 से 7 फीसदी तक की कमी की जा रही है। वहीं बड़े पैक की कीमत सीधे 5 से 6 फीसदी तक बढ़ाई जा रही है। इसका मतलब है कि ग्राहक को कई सामान पहले जितने ही रुपये में मिलेंगे, लेकिन पैकेट में सामान कुछ कम होगा।


    कंपनियां पैकेट में सामान कम क्यों कर रही हैं?

    एफएमसीजी कंपनियों के सामने इस समय लागत बढ़ने और ग्राहकों को कीमत का झटका देने से बचने की दोहरी चुनौती है। पाम ऑयल, पैकेजिंग, कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों और दूसरी जिंसों की कीमत बढ़ने से कंपनियों की लागत बढ़ रही है। दूसरी ओर ग्राहक रोजमर्रा की चीजों की कीमत को लेकर काफी सतर्क हैं। ऐसे में कंपनियां ऐसी कीमत बनाए रखना चाहती हैं, जिससे बिक्री की मात्रा पर ज्यादा असर न पड़े। इसलिए छोटे पैक में कीमत बढ़ाने के बजाय सामान की मात्रा कम करना आसान विकल्प माना जा रहा है। ग्राहक को पैकेट की कीमत पहले जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसमें मिलने वाला सामान कम हो जाता है।


    किन रोजमर्रा के सामान पर इसका असर दिख रहा है?

    यह बदलाव बिस्कुट, नमकीन, स्नैक्स, नूडल्स, हेयर ऑयल, साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, चीनी और चाय जैसी रोजमर्रा की चीजों में देखने को मिल रहा है। बिस्कुट, नमकीन और स्नैक्स बनाने वाली कई कंपनियों ने बढ़ी लागत से निपटने के लिए कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं। बीकाजी फूड्स के मनोज वर्मा के मुताबिक, पिछले छह-सात महीनों में औसत कच्चे माल की लागत करीब 7 फीसदी बढ़ी है। पाम ऑयल, पैकेजिंग और दूसरी जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है। यानी कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है और उसका असर किसी न किसी रूप में ग्राहकों तक पहुंच रहा है।


    दूध और घी की कीमतों पर कितना दबाव है?

    त्योहारी सीजन में डेयरी उत्पादों की लागत पर भी दबाव बढ़ रहा है। पारस डेयरी के विपणन अधिकारी वीपीएस मलिक के मुताबिक, त्योहारी सीजन में दूध की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकती है। घी की कीमत पहले ही 25 से 30 रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी है। इसके अलावा इतनी ही और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। इसका सीधा असर उन परिवारों के बजट पर पड़ सकता है, जिनके घर में दूध और घी की नियमित खपत होती है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों में डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ने से भी कीमतों पर नजर बनी हुई है।


    10, 20 और 50 रुपये के पैक पर कंपनियों की नजर क्यों है?

    डाटा रिसर्च फर्म नीलसन इंडिया के प्रीतम भादुड़ी के मुताबिक, कंपनियों के लिए 10, 20 और 50 रुपये कीमत वाले छोटे पैक काफी महत्वपूर्ण हैं। इन पैकों की कीमत बढ़ने पर ग्राहक को सामान तुरंत महंगा महसूस हो सकता है। इसलिए इन पैकों में मात्रा घटाना कंपनियों के लिए आसान रास्ता बन जाता है। दूसरी तरफ बड़े पैक में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश ज्यादा होती है। आधुनिक रिटेल और ई-कॉमर्स में बिकने वाले बड़े पैक पर कंपनियां बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा सीधे ग्राहक पर डाल सकती हैं। इस तरह कंपनियां छोटे पैक में कीमत को नियंत्रित रखने और बड़े पैक में दाम बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं। इसका असर ग्राहक की जेब पर सिर्फ कीमत बढ़ने से नहीं, बल्कि कम सामान मिलने के रूप में भी पड़ सकता है।

  • MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद

    MP में GIS से पहले निवेश जुटाने की बड़ी तैयारी… CM कल मुम्बई में निवेशकों से करेंगे संवाद


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जनवरी 2027 में होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) (Global Investors Summit – GIS) से पहले सरकार ने निवेशकों से सीधा संपर्क बढ़ा दिया है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) 8 अक्तूबर को मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। मुंबई के लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस होटल में होने वाले निवेश संवाद में मुख्यमंत्री उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। मुंबई देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी समूहों का प्रमुख केंद्र है। ऐसे में मुख्यमंत्री का उद्योगपतियों से सीधे संवाद का मकसद मध्य प्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी देने के साथ ही कंपनियों की जरूरत और उनके निवेश प्रस्तावों को समझना भी है।


    उद्योगपतियों के सामने रखेंगे एमपी का रोडमैप

    कार्यक्रम में मध्य प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के अवसर, औद्योगिक अधोसंरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी दी जाएगी। औद्योगिक नीति और निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई प्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर प्रस्तुतीकरण देंगे। सरकार की ओर से निवेशकों को प्रदेश की भौगोलिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स से जुड़े फायदे भी बताए जाएंगे। मध्यप्रदेश देश के मध्य में होने के कारण बड़े बाजारों तक पहुंच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा उद्योगों की जरूरत के मुताबिक अधोसंरचना और निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत करने की जानकारी भी साझा की जाएगी।


    वन-टू-वन बैठक में निवेशकों की जरूरत समझेंगे सीएम

    मुख्यमंत्री की उद्योगपतियों के साथ होने वाली व्यक्तिगत बैठकों को इस संवाद का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इन बैठकों में कंपनियों के निवेश प्रस्ताव, उनकी व्यावसायिक जरूरतें और प्रदेश में निवेश को लेकर आने वाली संभावित दिक्कतों पर सीधे चर्चा होगी। सरकार निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने, जरूरी अनुमतियों को सुगम करने और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने के अपने प्रयासों की जानकारी भी निवेशकों को देगी। अलग-अलग उद्योग क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा होगी।

  • यूनीसेफ की चेतावनी…. 100 देशों के 34 करोड़ से अधिक बच्चों पर गंभीर संकट

    यूनीसेफ की चेतावनी…. 100 देशों के 34 करोड़ से अधिक बच्चों पर गंभीर संकट


    न्यूयार्क। सं
    युक्त राष्ट्र बाल कोष (यूनिसेफ) (United Nations Children’s Fund – UNICEF) ने वैश्विक जलवायु संकट (Global Climate Crisis) को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। कहा है कि प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में तापमान बढ़ने से दुनिया भर का मौसम तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव से भारत समेत करीब 100 देशों के 34.7 करोड़ से अधिक बच्चों की जिंदगी, सेहत और पढ़ाई पर सीधा संकट गहरा गया है। एजेंसी ने चेतावनी दी है कि 2026-2027 का अल नीनो इतिहास के सबसे गंभीर दौर में से एक साबित हो सकता है।


    रिपोर्ट में यूनिसेफ ने क्या कहा है?

    यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार, अल नीनो के चलते अक्टूबर से दिसंबर के दौरान कई क्षेत्रों में भयंकर सूखा पड़ने, तो कई जगहों पर अप्रत्याशित बाढ़ आने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। इसका सीधा असर कमजोर परिवारों और मासूम बच्चों पर पड़ेगा। सूखाग्रस्त इलाकों में फसलों के नष्ट होने से भुखमरी और गंभीर कुपोषण का खतरा बढ़ेगा, जबकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया, हैजा और डेंगू जैसी जलजनित बीमारियां फैलने की आशंका है। इसके अलावा, प्राकृतिक आपदाओं के कारण लाखों बच्चों की पढ़ाई ठप होने और स्कूलों के बंद होने का अंदेशा है।


    पहले से तैयारी की अपील

    यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल के अनुसार, बच्चों के लिए अल नीनो सिर्फ मौसम में बदलाव नहीं है। इसका सीधा मतलब भुखमरी, कुपोषण, साफ पानी की कमी और गंभीर बीमारियों का फैलना है। एजेंसी ने प्रभावित देशों से स्वच्छ पेयजल, जीवनरक्षक पोषण किट, स्वास्थ्य सुविधाएं और आपातकालीन राहत तंत्र को तत्काल मजबूत करने की अपील की है, ताकि करोड़ों मासूमों के बचपन को इस मौसमी तबाही से सुरक्षित रखा जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्राथमिकता वाले देशों में 4.11 अरब डॉलर की जरूरत है, जिसमें से केवल 1.28 अरब डॉलर ही मिले हैं, यानी 69 फीसदी की कमी है।

    भारत समेत एशिया प्रशांत में 19 करोड़ बच्चे आ सकते हैं चपेट में
    रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे ज्यादा खतरा भारत समेत एशिया-प्रशांत क्षेत्र है, जहां सबसे अधिक लगभग 19 करोड़ बच्चे असामान्य सूखे या बाढ़ की चपेट में आ सकते हैं। पूर्वी व दक्षिणी अफ्रीका में 4.1 करोड़ और लातिन अमेरिका में करीब 4.1 करोड़ बच्चे इसके असर से जूझेंगे। फिलीपीन, कोलंबिया, फिजी और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों में गंभीर सूखे से खेती बर्बाद होने और पानी की भारी किल्लत होने का डर है। वहीं, सोमालिया और हॉर्न ऑफ अफ्रीका के क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने से नदियां उफान पर आ सकती हैं, जिससे पानी से फैलने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ेगा।

  • MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल

    MP: ₹450 करोड़ के स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसे इंतजाम, लेकिन प्लेटफॉर्म पर घूम रहीं भैंसें… उठे सवाल


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन (Rani Kamlapati Railway Station) को देश के वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशनों (World-class railway stations) में शुमार किया जाता है, जहां एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं का दावा किया जाता है, उसी स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर भैंसों के घूमने का वीडियो सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. प्लेटफॉर्म पर दो भैंसें ट्रेन के बिल्कुल बगल से गुजरती हुई दिखाई दे रही हैं. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

    वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दो भैंसें प्लेटफॉर्म पर आराम से टहल रही हैं और यात्रियों के बीच से होते हुए ट्रेन के पास तक पहुंच गईं. ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर भैंसें प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं?


    450 करोड़ के स्टेशन पर सुरक्षा के इंतजामों पर सवाल

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन का करीब 450 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्विकास किया गया है. इसे देश के पहले विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशनों में शामिल किया गया है। स्टेशन पर एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं, एस्केलेटर, लिफ्ट, एसी लाउंज, फूड कोर्ट और आधुनिक यात्री सुविधाएं मौजूद हैं. लेकिन प्लेटफॉर्म पर आवारा पशुओं के पहुंचने का वीडियो सामने आने के बाद करोड़ों रुपये की लागत से तैयार स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।


    रेलवे बोला- मामले को दिखवा रहे हैं

    मामले को लेकर जनसंपर्क अधिकारी शिव शंकर शाह ने कहा कि वह पूरे मामले को दिखवाएंगे. उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे और बंसल के पास है. सुरक्षा में कहीं कोई चूक सामने आती है तो रेलवे, बंसल के साथ मिलकर उसे सुधारने का काम करता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि कई बार आउटर की तरफ का हिस्सा खुला रह जाता है, जिसकी वजह से जानवर स्टेशन परिसर में प्रवेश कर सकते हैं. इसके अलावा रेलवे पटरी के आसपास लोग खाने-पीने का सामान भी फेंक देते हैं. खाने की तलाश में जानवर रेलवे ट्रैक और स्टेशन की तरफ आ जाते हैं।


    यात्रियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

    हालांकि रेलवे का तर्क अपनी जगह है, लेकिन सवाल यह है कि अगर एक भैंस प्लेटफॉर्म तक पहुंच सकती है तो सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत है? प्लेटफॉर्म पर ट्रेनें लगातार आती-जाती हैं और बड़ी संख्या में यात्री मौजूद रहते हैं. ऐसे में किसी आवारा पशु के अचानक ट्रेन की चपेट में आने या यात्रियों से टकराने की स्थिति में बड़ा हादसा हो सकता है।

    फिलहाल रेलवे ने मामले को संज्ञान में लेकर जांच कराने की बात कही है. अब देखना होगा कि भैंसें स्टेशन के प्लेटफॉर्म तक कैसे पहुंचीं और भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए रेलवे और स्टेशन प्रबंधन क्या कदम उठाता है।

  • NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी

    NZ Tour: टी-20 सीरीज के लिए टीम इंडिया का ऐलान… 4 साल बाद भुवनेश्वर कुमार की वापसी


    नई दिल्ली।
    भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Cricket Control Board of India- BCCI) की पुरुष चयन समिति ने आगामी न्यूजीलैंड दौरे (New Zealand Tour) के लिए टीम इंडिया (Team India) और इंडिया ‘ए’ के स्क्वाड का आधिकारिक ऐलान कर दिया है।

    इस दौरे पर भारतीय टीम मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की रोमांचक टी20 सीरीज खेलेगी, जबकि इंडिया ‘ए’ की टीम न्यूजीलैंड ‘ए’ के खिलाफ तीन मल्टी-डे (चार दिवसीय) मैच खेलेगी. वनडे और टेस्ट सीरीज के लिए टीमों की घोषणा फिलहाल बाद में की जाएगी।

    इस स्क्वाड की सबसे बड़ी खबर अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की भारतीय टीम में वापसी है, जिन्हें एक बार फिर नीली जर्सी में गेंदबाजी का जिम्मा सौंपा गया है. श्रेयस अय्यर को टीम की कमान सौंपी गई है, जबकि उपकप्तानी की जिम्मेदारी तिलक वर्मा को दी गई है।


    क्यों हुई भुवनेश्वर कुमार की वापसी?

    भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी टी20 मुकाबला नवंबर 2022 में एडिलेड ओवल में इंग्लैंड के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल खेला था. इसके बाद से वह टीम से बाहर चल रहे थे, लेकिन पिछले दो आईपीएल (IPL) सीजन में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के लिए उनके शानदार प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    पिछले दो संस्करणों में शानदार गेंदबाजी करते हुए उन्होंने कुल 45 विकेट झटके और टीम को खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई. नई गेंद से उनकी स्विंग और अनुभव को देखते हुए उन्हें एक बार फिर नेशनल टीम में मौका मिला है. हालांकि, इस चयन के चलते भुवनेश्वर कुमार को हांगकांग सिक्सेस से हटना होगा, जहां उन्हें हाल ही में कप्तान बनाया गया था।

    टी20 टीम: श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा (उप-कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन (विकेटकीपर), अक्षर पटेल, शिवम दुबे, नीतीश कुमार रेड्डी, नमन धीर, प्रिंस यादव, मयंक यादव, अर्शदीप सिंह, भुवनेश्वर कुमार, वरुण चक्रवर्ती और कुलदीप यादव.

    इंडिया ‘ए’ टीम: ध्रुव जुरेल (कप्तान/विकेटकीपर), यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल, देवदत्त पडिक्कल, रविचंद्रन स्मरण, ऋषभ पंत* (विकेटकीपर – फिटनेस के अधीन), वाशिंगटन सुंदर, आकिब नबी, आकाश दीप, अंशुल कंबोज, मानव सुथार, मुकेश चौधरी, साई सुदर्शन, यश राठौड़ और मुकेश कुमार।

  • UP से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में, 2 निर्दलीयों ने भी भरे पर्चे

    UP से राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 12 उम्मीदवार चुनाव मैदान में, 2 निर्दलीयों ने भी भरे पर्चे


    लखनऊ।
    यूपी (UP) से राज्यसभा चुनाव (Rajya Sabha Elections) में नामांकन (Enrollment) दाखिल करने का मंगलवार को आखिरी दिन था. इस दिन निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ओंकारनाथ चौरसिया ने पर्चा भरा. इसके साथ ही बीजेपी के 8 और एक निर्दलीय समेत 9 लोगों ने नामांकन दाखिल किया।

    अब तक कुल 12 राज्यसभा प्रत्याशियों ने पर्चा भरा है. 12वें प्रत्याशी के रूप में इंडिपेंडेंट कांते सायन्ना ने नामांकन दाखिल किया. अब तक बीजेपी के 8, समाजवादी पार्टी के 2 और 2 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किया है।

    बीजेपी के राज्यसभा प्रत्याशी धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार ने मंगलवार को अपना नामांकन पत्र दाखिल किया. इन सभी प्रत्याशियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के नेतृत्व में नामांकन दाखिल किया. इस दौरान प्रदेश सरकार के मंत्री, पार्टी पदाधिकारी और वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।


    सपा के दो उम्मीदवार मैदान में

    समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार हैं. इनमें पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस समूह के वरिष्ठ अधिकारी धनराज परिमल नथवानी शामिल हैं. प्रो. रामगोपाल यादव छठी बार उच्च सदन जाने की तैयारी में हैं. दोनों उम्मीदवारों ने 30 सितंबर को सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया था।


    क्या है जीत-हार की स्थिति

    उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है. विधानसभा की वर्तमान प्रभावी संख्या 397 विधायक है. इसके आधार पर प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत होगी. भाजपा के पास करीब 255 विधायक हैं. सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए की संख्या 285 से 290 के पार है. इस संख्या के आधार पर एनडीए सात सीटें आसानी से जीत सकता है. वहीं, आठवीं सीट जीतने के लिए उसे करीब 6 अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी. सपा के पास 100 से 101 विधायक हैं. चायल से विधायक पूजा पाल आधिकारिक रिकॉर्ड में सपा के खाते में हैं, हालांकि वे भाजपा के संपर्क में रही हैं. इसके अलावा सपा को कांग्रेस के 2 विधायकों का समर्थन हासिल है. इस संख्या के आधार पर सपा दो सीटें आसानी से जीत सकती है।

  • छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    छिंदवाड़ा में बंगाली समाज की अनोखी दुर्गा पूजा, पांच दिन होती है आराधना; चार महीने पहले पहुंचते हैं मूर्तिकार

    नई दिल्ली ।शारदीय नवरात्रि के दौरान आम तौर पर मां दुर्गा की आराधना नौ दिनों तक की जाती है, लेकिन छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की पूजा परंपरा इससे अलग है। यहां बंगाली पंचांग के अनुसार मां दुर्गा की स्थापना पंचमी के दिन की जाती है और पांच दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना होती है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है, जबकि बंगाली समाज 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना करेगा और 21 अक्टूबर को विसर्जन किया जाएगा।

    मोहन नगर में बंगाली समाज की ओर से दुर्गा पूजा का आयोजन पिछले करीब 40 वर्षों से किया जा रहा है। इस दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए दुर्गा पंडाल में एक साथ मां दुर्गा के साथ लक्ष्मी, सरस्वती, कार्तिक और गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इसके अलावा महिषासुर की मूर्ति भी स्थापित की जाती है। बंगाली समाज में दुर्गा पूजा के लिए अलग विधि-विधान का पालन किया जाता है और इसी परंपरा के अनुसार पांच दिनों तक मां की आराधना की जाती है।

    इस बार बंगाली पंचांग के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना होगी। पूजा का समापन 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ होगा। इस तरह यहां नवरात्रि के पूरे नौ दिनों के बजाय पंचमी से शुरू होकर पांच दिनों तक दुर्गा पूजा की विशेष परंपरा निभाई जाएगी। पूजा के दौरान अलग-अलग धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं और कई कार्यक्रम सुबह के समय आयोजित किए जाएंगे।

    बंगाली समाज की पूजा में अष्टमी और नवमी का भी विशेष महत्व है। दोनों तिथियों को मिलाकर एक विशेष पूजा की जाती है, जिसे संधी पूजा कहा जाता है। बंगाली दुर्गा पूजा की परंपरा में इसका खास महत्व माना जाता है। पांच दिनों की इस पूजा व्यवस्था में धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन बंगाली पंचांग और परंपरागत विधि-विधान के अनुसार किया जाता है।

    दुर्गा पूजा के लिए मूर्तियां तैयार करने का काम भी कई महीने पहले शुरू हो जाता है। पश्चिम बंगाल से आने वाले मूर्तिकार छिंदवाड़ा में करीब चार महीने पहले पहुंचते हैं। यहां वे बंगाली समाज की ओर से दिए गए ऑर्डर के अनुसार दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं तैयार करते हैं। मूर्तियों को पूजा के लिए निर्धारित समय तक पूरी तरह तैयार करने के लिए यह प्रक्रिया कई महीनों तक चलती है।

    मूर्तिकार अपने साथ पश्चिम बंगाल से मूर्ति बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष मिट्टी भी लेकर आते हैं। इसके अलावा मां दुर्गा की प्रतिमा के कपड़े और सजावट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बंगाल से ही लाई जाती है। छिंदवाड़ा पहुंचने के बाद मूर्तिकार इन सामग्रियों के साथ चार महीने तक प्रतिमाओं को तैयार करने और उन्हें सजाने का काम करते हैं। पूजा के लिए प्रतिमाओं की तैयारी और सजावट की यह प्रक्रिया पिछले करीब 40 वर्षों से इसी तरह चल रही है।

    छिंदवाड़ा के मोहन नगर में बंगाली समाज की यह दुर्गा पूजा स्थानीय स्तर पर अपनी अलग धार्मिक परंपरा के लिए जानी जाती है। यहां स्थापना का समय, पूजा की अवधि, प्रतिमाओं की संख्या और संधी पूजा जैसी परंपराएं बंगाली पंचांग के अनुसार तय होती हैं। इस वर्ष भी समाज इसी परंपरा के अनुसार 16 अक्टूबर को मां दुर्गा की स्थापना कर पांच दिनों तक पूजा-अर्चना करेगा और 21 अक्टूबर को प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा।

  • मथुरा में गूंजा श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश, जन्मभूमि पर विशेष पूजन के बाद उडुपी पीठाधीश्वर का बड़ा बयान

    मथुरा में गूंजा श्रीकृष्ण भक्ति का संदेश, जन्मभूमि पर विशेष पूजन के बाद उडुपी पीठाधीश्वर का बड़ा बयान


    नई दिल्ली। मथुरा में बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर धार्मिक और आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला। उडुपी के पेजावर अधोक्षज मठ के पीठाधीश्वर विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर में विशेष पूजा अर्चना की। द्वैत वेदांत परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रों के साथ हुए इस अनुष्ठान में उडुपी की उपासना परंपरा और ब्रज की भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। महाराजश्री अपने साथ करीब 800 वर्ष पुराने भगवान के चल विग्रह लेकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि पहुंचे थे। गर्भगृह में तुलसी दल और पुष्पों से भगवान का पूजन किया गया तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करते हुए पुष्प अर्पित किए गए।

    पूजा अर्चना के बाद विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर का भ्रमण किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने हरिनाम संकीर्तन किया। मृदंग झांझ और मजीरों की मंगल ध्वनि से पूरा परिसर भक्तिमय नजर आया। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने उनका तुलसी माला पुष्पमाला और अंगवस्त्र से स्वागत किया। इसके बाद महाराजश्री ने श्रीभागवत भवन में भगवान श्रीकृष्ण भगवान श्रीराम और भगवान हयग्रीव के श्रीविग्रह के समक्ष भी पूजा की।

    इस धार्मिक आयोजन की खास बात यह रही कि विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज अपने साथ जगद्गुरु माध्वाचार्य द्वारा पूजित करीब 800 वर्ष पुराने चल विग्रह भी लेकर आए थे। गर्भगृह में उन्होंने वैदिक परंपरा के अनुसार विधिवत पूजा की। तुलसी और पुष्प अर्पित करने के साथ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे और पूरे परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा।

    पूजन के बाद विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने मथुरा में श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण से जुड़े विषय पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सनातन के पवित्र स्थलों पर बने पुराने ढांचों से करोड़ों सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने अयोध्या और काशी का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या में रामलला भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं जबकि काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर अपने आध्यात्मिक स्वरूप को प्राप्त कर रहा है। उनके अनुसार अब मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीला निश्चित करेंगे।

    विश्वप्रसन्न तीर्थ महाराज ने इसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनरोत्थान के दौर के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि अन्याय और अत्याचार के प्रतीक हटेंगे तथा न्याय की बांसुरी बजेगी। उनका यह बयान श्रीकृष्ण जन्मभूमि को लेकर चल रही धार्मिक चर्चाओं के बीच सामने आया है। हालांकि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े विवाद का अंतिम स्वरूप कानूनी और संबंधित संस्थागत प्रक्रियाओं से तय होना है।

    श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में महाराजश्री के आगमन के दौरान श्रद्धालुओं में भी खास उत्साह दिखाई दिया। हरिनाम संकीर्तन के बीच मृदंग झांझ और मजीरों की धुन से वातावरण भक्तिमय बना रहा। द्वैत वेदांत परंपरा से जुड़े विशेष पूजन और ब्रज की भावमय भक्ति के इस संगम ने कार्यक्रम को खास बना दिया। मथुरा की धार्मिक पहचान और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की आस्था के बीच यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व वाला रहा।

  • यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ

    यूपी के 5 शहर बाढ़ की चपेट में, लखनऊ में 40 हजार मकान जलमग्न, सड़कों पर नाव और कॉलोनी में मगरमच्छ


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। प्रदेश के पांच जिले इस समय भीषण बाढ़ की चपेट में हैं और छह प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार नौवें दिन बढ़ रहा है जिसके चलते शहर के कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए हैं। नीम करोली तपोस्थली में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है जबकि खाटू श्याम और चंद्रिका देवी मंदिर भी जलमग्न हो गए हैं। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार मकानों में पानी भरने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई सरकारी और निजी स्कूल भी पानी में डूब गए हैं और गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक जलभराव की स्थिति बनी हुई है।

    फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ने के कारण स्थानीय लोगों के सामने खाने पीने के पानी और सुरक्षित स्थान पर पहुंचने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई परिवार अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाने को मजबूर हैं। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पानी घरों के अंदर तक पहुंच चुका है। कई जगह सामान्य आवाजाही पूरी तरह प्रभावित है और लोगों को आने जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है।

    शाहजहांपुर में बाढ़ के पानी के साथ एक विशाल मगरमच्छ आबादी वाले इलाके में पहुंच गया। मंगलवार सुबह करीब 10 बजे करीब छह से सात फीट लंबा मगरमच्छ एक मकान के मुख्य दरवाजे तक पहुंच गया। दरवाजे पर ताला लगा होने के कारण वह घर के अंदर नहीं जा सका। मगरमच्छ को देखकर आसपास के लोगों में अफरा तफरी मच गई। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद उसे पकड़ने की कोशिश शुरू की गई। आबादी के बीच मगरमच्छ पहुंचने की घटना ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

    सीतापुर में भी बाढ़ का असर कम नहीं हुआ है। सरायन और कठना नदियों का पानी अब भी रिहायशी इलाकों में बह रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों के घरों और रास्तों तक पानी पहुंच गया है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

    गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। तरबगंज और कर्नलगंज तहसील के करीब 10 गांव अब भी बाढ़ से प्रभावित हैं। ब्योन्दा माझा दत्तनगर और नकहरा समेत कई गांवों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। प्रशासन ने लोगों की आवाजाही के लिए 50 से अधिक नावें लगाई हैं। घाघरा और सरयू नदियों के कटान के कारण नवाबगंज क्षेत्र में बीते 24 घंटे के दौरान 20 बीघा से अधिक जमीन और फसल नदी में समा गई है।

    उन्नाव में गंगा का जलस्तर अब धीरे धीरे घटने लगा है लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नदी का पानी अभी भी चेतावनी बिंदु से ऊपर है। गोताखोर कर्बला हुसैन नगर तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड जैसे इलाकों में जलभराव बना हुआ है। सड़कों पर पानी होने के कारण मोहल्लों में नावों से आवागमन किया जा रहा है।

    यूपी में बाढ़ की यह स्थिति लगातार प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई है। नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ कई इलाकों में कटान और जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन राहत और बचाव व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सुरक्षित रहने के साथ भोजन पीने का पानी और सामान्य आवागमन की व्यवस्था है।

  • त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    त्योहारों से पहले मिठाई विक्रेताओं पर सख्ती की तैयारी, गाजियाबाद में हर डिब्बे पर Use By Date जरूरी होगी

    नई दिल्ली । गाजियाबाद में त्योहारों के मौसम को देखते हुए मिठाई और खाद्य पदार्थों के कारोबार से जुड़े विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार 15 अक्टूबर 2026 से जिले के सभी मिठाई विक्रेताओं के लिए मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना अनिवार्य होगा। नए प्रावधान को प्रभावी तरीके से लागू करने से पहले दुकानदारों को इसकी जानकारी देने के लिए विभाग की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।

    इस अभियान के लिए जिले में 18 खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में 18 टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों का कारोबार करने वाले व्यापारियों से व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं। व्यापारियों को नए नियम के बारे में जानकारी देने के साथ यह भी बताया जा रहा है कि मिठाई के डिब्बे पर ‘Use By Date’ लिखना क्यों जरूरी है और नए प्रावधान का पालन किस तरह किया जाना है।

    खाद्य सुरक्षा विभाग का जोर फिलहाल व्यापारियों को नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी देने पर है। अधिकारियों का मानना है कि त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले दुकानदारों को नए प्रावधान की जानकारी मिलने से उन्हें अपनी व्यवस्था उसके अनुसार तैयार करने का समय मिल जाएगा। विभाग का उद्देश्य जागरूकता के जरिए नियमों के पालन को बढ़ावा देना है, ताकि बाद में नियमों के उल्लंघन की स्थिति कम से कम हो।

    विभाग के मुताबिक त्योहारों को लेकर विशेष अभियान 15 अक्टूबर से शुरू किया जाएगा। हालांकि, इससे पहले ही गठित 18 टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर रही हैं। निरीक्षण के दौरान दुकानों और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में उपलब्ध खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों को तैयार करने की प्रक्रिया और प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई की स्थिति भी देखी जा रही है।

    जांच के दौरान खाद्य सामग्री को तैयार करने से लेकर उसके भंडारण तक निर्धारित नियमों के पालन की स्थिति भी देखी जा रही है। विभाग की टीमें यह जांच कर रही हैं कि खाद्य प्रतिष्ठानों में खाद्य पदार्थों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा जा रहा है या नहीं। इस दौरान खाद्य पदार्थों के नमूने भी लिए जा रहे हैं।

    निरीक्षण के दौरान लिए गए खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों की जानकारी भी दी जा रही है। विभाग की ओर से व्यापारियों को यह समझाने की कोशिश की जा रही है कि नए प्रावधान लागू होने से पहले वे अपनी व्यवस्था में जरूरी बदलाव कर सकें।

    सहायक खाद्य आयुक्त सुरेश मिश्रा के मुताबिक फिलहाल खाद्य प्रतिष्ठानों के संचालकों को नियमों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और 18 टीमों के माध्यम से नियमित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उनके अनुसार शासन से आदेश मिलने के बाद त्योहारों को लेकर विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। इस दौरान खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण, खाद्य सामग्री की जांच और नियमों के पालन पर विभाग की कार्रवाई जारी रहेगी।

    15 अक्टूबर से लागू होने वाले ‘Use By Date’ के प्रावधान को लेकर विभाग ने व्यापारियों तक जानकारी पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। त्योहारों से पहले चलाए जा रहे इस जागरूकता अभियान के साथ नियमित निरीक्षण और खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने की कार्रवाई भी जारी है। विभाग का प्रयास है कि मिठाई विक्रेता नए नियम को समझें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उसका पालन सुनिश्चित करें।