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  • असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    असम बाढ़ त्रासदी में मदद के लिए आगे आए अनुपम खेर, मुख्यमंत्री राहत कोष में दान किए 5 लाख रुपये

    नई दिल्ली । असम में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर आगे आए हैं। उन्होंने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे परिवारों की सहायता के लिए असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख रुपये का योगदान दिया है। अभिनेता ने यह राशि आरटीजीएस के माध्यम से राहत कोष में भेजी, ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चल रहे बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों को मजबूती मिल सके। अनुपम खेर का यह कदम आपदा के समय जरूरतमंद लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता को दर्शाता है।

    असम इन दिनों भीषण बाढ़ की समस्या से जूझ रहा है, जिसके कारण कई जिलों में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। लगातार बारिश और नदियों के जलस्तर बढ़ने से कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। ऐसे समय में सामाजिक संस्थाओं, आम नागरिकों और सार्वजनिक हस्तियों की ओर से मिल रही मदद प्रभावित परिवारों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

    अनुपम खेर ने बाढ़ प्रभावित लोगों के प्रति अपनी चिंता जताते हुए कुछ दिन पहले लोगों से असम की सहायता के लिए आगे आने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि आपदा के समय छोटी से छोटी मदद भी प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत बन सकती है। इसके बाद उन्होंने स्वयं पहल करते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में आर्थिक सहायता प्रदान की।

    अभिनेता का यह योगदान अनुपम खेर फाउंडेशन के माध्यम से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अनुपम खेर समय-समय पर जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए विभिन्न अभियानों से जुड़े रहे हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे क्षेत्रों में भी वह अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं।

    असम में बाढ़ से प्रभावित लोगों को भोजन, चिकित्सा सुविधा, रहने की व्यवस्था और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराने के लिए सरकार और विभिन्न संगठन लगातार काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष के जरिए जुटाई जा रही राशि का इस्तेमाल प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने और पुनर्वास कार्यों को गति देने में किया जा रहा है।

    अनुपम खेर ने अपने योगदान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्राकृतिक आपदा के समय समाज के हर वर्ग को एकजुट होकर प्रभावित लोगों की सहायता करनी चाहिए। उनका कहना है कि सामूहिक प्रयासों से ही बड़ी चुनौतियों का सामना किया जा सकता है। असम में जारी राहत अभियान के बीच अभिनेता की यह पहल कई लोगों को मदद के लिए प्रेरित कर सकती है।

    असम में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए लगातार राहत कार्य जारी हैं और देश के विभिन्न हिस्सों से लोग सहायता के लिए आगे आ रहे हैं। सरकार, स्वयंसेवी संगठन और आम नागरिक मिलकर प्रभावित परिवारों को इस कठिन समय से बाहर निकालने का प्रयास कर रहे हैं।

  • कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने दिया इस्तीफा, बोले- कांग्रेस ने क्यों हटाया इसकी जानकारी नहीं

    कर्नाटक विधान परिषद अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने दिया इस्तीफा, बोले- कांग्रेस ने क्यों हटाया इसकी जानकारी नहीं


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। कर्नाटक विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरत्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। होरत्ती ने कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया क्योंकि उनसे पद छोड़ने के लिए कहा गया था। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि कांग्रेस सरकार ने उनसे इस्तीफा क्यों मांगा। उनके बयान के बाद राज्य की राजनीति में इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    बसवराज होरत्ती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं पता कि कांग्रेस सरकार ने उनसे इस्तीफा देने के लिए क्यों कहा। उन्होंने बताया कि उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। होरत्ती ने कहा कि वह सम्मानपूर्वक अपने पद से हटना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बिना किसी विवाद के इस्तीफा दे दिया। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पूरे घटनाक्रम से उन्हें काफी दुख पहुंचा है।

    इससे पहले होरत्ती ने संकेत दिया था कि अगर उन्होंने पद छोड़ने से इनकार किया तो डीके शिवकुमार के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकती है। उन्होंने कहा था कि सत्ताधारी दल चाहता है कि वह पद से हट जाएं। मुख्यमंत्री की ओर से उन्हें इस संबंध में जानकारी दी गई थी। होरत्ती के मुताबिक मुख्यमंत्री ने उनसे फोन पर दो बार बातचीत की और व्यक्तिगत मुलाकात के दौरान बताया कि पार्टी आलाकमान ने उनसे इस्तीफा मांगने का निर्देश दिया है।

    होरत्ती ने कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने उन्हें बताया कि उन्हें हटाने का फैसला पार्टी हाईकमान का है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य नेताओं के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं और वे उनका सम्मान करते हैं। लेकिन जब यह राय बन गई कि उन्हें अब इस पद पर नहीं रहना चाहिए तो उन्होंने पद पर बने रहना उचित नहीं समझा।

    बसवराज होरत्ती ने कहा कि वह सदन में इस मुद्दे को उठाने के बाद इस्तीफा देना चाहते थे, लेकिन उन्होंने सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जब किसी पद को लेकर सहमति नहीं रहती तो जिम्मेदारी के साथ फैसला लेना जरूरी होता है।

    वहीं, इस घटनाक्रम के पीछे कांग्रेस संगठन की नई रणनीति को भी देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान ने कर्नाटक में विधान परिषद के चेयरमैन पद के लिए सलीम अहमद और डिप्टी चेयरमैन पद के लिए उमाश्री के नाम को मंजूरी दी है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए जीएस पाटिल और डिप्टी स्पीकर पद के लिए एएस पोन्नाना के नामों पर भी सहमति दी गई है।

    बसवराज होरत्ती लंबे समय से कर्नाटक की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और विधान परिषद में उनका लंबा अनुभव रहा है। उनके इस्तीफे के बाद अब परिषद के नए अध्यक्ष को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से इस बदलाव को लेकर अभी विस्तृत कारण सामने नहीं रखा गया है। दूसरी ओर, होरत्ती के बयान ने इस पूरे मामले को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में कर्नाटक की राजनीति में इस बदलाव का असर देखने को मिल सकता है।

  • राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर सरकारों से सुधार की मांग की

    राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, छात्रों के आंदोलन का समर्थन कर सरकारों से सुधार की मांग की

    नई दिल्ली । कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का शिक्षा तंत्र पूरी तरह से कमजोर हो चुका है और छात्रों को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि देशभर में छात्रों के बीच उठ रही आवाज मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है और सरकारों को उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनना चाहिए।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से Gen-Z और छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि शिक्षा अब काफी महंगी हो गई है, जिसके कारण बड़ी संख्या में छात्रों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि ठोस नीतियों और प्रभावी कदमों की जरूरत है।

    उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह छात्रों की समस्याओं को समझे और उनकी मांगों पर ध्यान दे। राहुल गांधी ने कहा कि चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो, छात्रों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।

    राहुल गांधी ने यह भी कहा कि उन्होंने पहले देहरादून और कोटा जैसे स्थानों पर छात्रों से जुड़े मुद्दे उठाए हैं और अब प्रयागराज में भी इसी विषय को लेकर बात करेंगे। उनके मुताबिक, देश के युवा भविष्य की दिशा तय करते हैं, इसलिए उनकी समस्याओं को समझना और समाधान निकालना जरूरी है।

    राहुल गांधी के बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने उन पर निशाना साधा है। भाजपा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी युवाओं और छात्रों के मुद्दों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष के नेता युवाओं के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और एक अलग राजनीतिक नैरेटिव तैयार करना चाहते हैं।

    भाजपा की ओर से कहा गया कि छात्रों से जुड़े मामलों पर सरकार लगातार काम कर रही है और शिक्षा क्षेत्र में कई सुधार किए जा रहे हैं। पार्टी ने राहुल गांधी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि युवाओं के मुद्दों को राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है।

    यह विवाद उस समय सामने आया है जब देश के कई हिस्सों में छात्र परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कर रहे हैं। छात्रों की ओर से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, रोजगार के अवसर और बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है।

    राहुल गांधी ने इससे पहले भी छात्र आंदोलनों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने छात्रों के साथ संवाद को जरूरी बताते हुए कहा है कि युवाओं की समस्याओं को समझे बिना शिक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं बनाया जा सकता।

    वहीं, भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। जहां कांग्रेस शिक्षा व्यवस्था की कमियों और छात्रों की परेशानियों को प्रमुख मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बता रही है। आने वाले दिनों में शिक्षा और छात्र मुद्दे उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों की राजनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

  • सरकारी नौकरी के नाम पर हाईटेक ठगी का खुलासा, ChatGPT और स्पाई डिवाइस से कराते थे परीक्षा में नकल

    सरकारी नौकरी के नाम पर हाईटेक ठगी का खुलासा, ChatGPT और स्पाई डिवाइस से कराते थे परीक्षा में नकल


    नई दिल्ली ।
    सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक हाईटेक नकल गिरोह का दिल्ली पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में उम्मीदवारों को नकल कराने का काम करता था।

    पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य ChatGPT, स्पाई कैमरा, GSM डिवाइस और नैनो ईयरबड जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करते थे। परीक्षा केंद्र में बैठे उम्मीदवारों को ऐसे उपकरण दिए जाते थे, जिनकी मदद से प्रश्न बाहर बैठे लोगों तक पहुंचाए जाते थे और फिर उनके जवाब उम्मीदवारों तक पहुंचाए जाते थे।

    मामले का खुलासा उस समय हुआ जब 26 जुलाई को सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटी की ओर से आयोजित एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान दो उम्मीदवारों को संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर पकड़ा गया। परीक्षा में नकल की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क तक पहुंच बनाई।

    जांच के दौरान पुलिस ने हेमंत शर्मा, आरती, सनी, दीपक, वेद प्रकाश, वीरेंद्र और सोनू कुमार को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इस गिरोह का मुख्य संचालक था। वह चंडीगढ़ में सरकारी विभाग में फायरमैन के पद पर कार्यरत बताया जा रहा है। आरोप है कि नौकरी के दौरान ही उसने परीक्षा में नकल कराने का नेटवर्क तैयार किया।

    पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह पहले सरकारी नौकरियों की भर्तियों पर नजर रखता था। इसके बाद नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं से संपर्क कर उन्हें परीक्षा पास कराने का भरोसा दिया जाता था। इसके लिए उम्मीदवारों से 8 से 12 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी।

    गिरोह की कार्यप्रणाली काफी आधुनिक थी। उम्मीदवारों को विशेष GSM डिवाइस, मॉडिफाइड मोबाइल फोन, शर्ट के बटन में छिपा कैमरा और छोटे आकार के ईयरबड उपलब्ध कराए जाते थे। परीक्षा के दौरान कैमरे की मदद से प्रश्नों की तस्वीरें बाहर बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थीं।

    पुलिस के मुताबिक, सोनू कुमार इन सवालों के जवाब तैयार करने के लिए ChatGPT की मदद लेता था। इसके बाद तैयार जवाबों को नैनो ईयरबड के जरिए परीक्षा दे रहे उम्मीदवारों तक पहुंचाया जाता था। पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए एक कार में विशेष तकनीकी व्यवस्था भी बनाई गई थी।

    जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी डिजिटल एप्लीकेशन की मदद से मोबाइल स्क्रीन और कैमरे से भेजी गई तस्वीरों को नियंत्रित करते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, GSM डिवाइस, नैनो ईयरबड, टैबलेट, कार और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।

    पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया है कि वे कई उम्मीदवारों को इस तरीके से परीक्षा पास कराने में मदद कर चुके हैं। पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह से जुड़े मामलों की संख्या अभी और बढ़ सकती है। जांच एजेंसियां बरामद डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही हैं, जिससे गिरोह के अन्य सदस्यों और इसके पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

    पुलिस के अनुसार, यह गिरोह केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके संपर्क अन्य राज्यों तक फैले होने की जानकारी मिली है। मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।

  • कम खर्च में रोमांस का पूरा मजा भारत की ये 5 बजट फ्रेंडली हनीमून डेस्टिनेशन जीत लेंगी आपका दिल

    कम खर्च में रोमांस का पूरा मजा भारत की ये 5 बजट फ्रेंडली हनीमून डेस्टिनेशन जीत लेंगी आपका दिल


    नई दिल्ली। शादी के बाद हर नवविवाहित जोड़ा चाहता है कि वह कुछ खास और यादगार पल एक दूसरे के साथ बिताए। हनीमून केवल घूमने का सफर नहीं बल्कि नई जिंदगी की खूबसूरत शुरुआत का अहम हिस्सा होता है। हालांकि शादी के भारी खर्च के बाद अक्सर बजट सीमित रह जाता है और कई कपल्स अपनी पसंदीदा जगहों पर जाने का सपना टाल देते हैं। लेकिन अगर आप भी कम खर्च में शानदार हनीमून की योजना बना रहे हैं तो भारत में ऐसी कई खूबसूरत जगहें मौजूद हैं जहां प्राकृतिक सौंदर्य रोमांच और सुकून का बेहतरीन संगम मिलता है और जेब पर भी ज्यादा बोझ नहीं पड़ता।

    मनाली लंबे समय से नवविवाहित जोड़ों की पहली पसंद रही है। बर्फ से ढकी चोटियां हरियाली ठंडी हवाएं और ब्यास नदी का मनमोहक नजारा इस जगह को बेहद रोमांटिक बनाते हैं। यहां सोलंग वैली रोहतांग पास और हिडिंबा मंदिर जैसी जगहों पर घूमने के साथ एडवेंचर गतिविधियों का भी आनंद लिया जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि यहां बजट होटल और स्थानीय भोजन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

    नैनीताल भी कम बजट में हनीमून के लिए शानदार विकल्प माना जाता है। नैनी झील में बोटिंग मॉल रोड पर शाम की सैर और आसपास की पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य कपल्स को बेहद पसंद आता है। शांत वातावरण और ठंडी जलवायु इस जगह को रोमांस के लिए खास बनाते हैं। यहां कम खर्च में आरामदायक होटल और स्थानीय स्वादिष्ट भोजन आसानी से मिल जाता है।

    यदि आप पहाड़ों की रानी कहलाने वाली मसूरी जाना चाहते हैं तो यह भी बेहतरीन विकल्प है। गन हिल केबल कार कंपनी गार्डन केम्प्टी फॉल और माल रोड जैसी जगहें आपकी यात्रा को यादगार बना देंगी। बादलों से घिरी वादियां और ठंडी हवा नवविवाहित जोड़ों को एक अलग ही सुकून का एहसास कराती हैं। यहां भी बजट के अनुसार ठहरने के कई विकल्प मौजूद हैं।

    अगर आप कुछ अलग अनुभव चाहते हैं तो सिक्किम की राजधानी गंगटोक का रुख कर सकते हैं। यहां की स्वच्छ वादियां त्सोमगो झील कंचनजंगा के मनमोहक दृश्य और स्थानीय संस्कृति इस यात्रा को खास बना देते हैं। गंगटोक का शांत वातावरण उन कपल्स के लिए आदर्श है जो भीड़भाड़ से दूर सुकून भरे पल बिताना चाहते हैं। यहां का छह दिन का ट्रिप भी सीमित बजट में आसानी से पूरा किया जा सकता है।

    प्राकृतिक खूबसूरती के साथ अनोखे अनुभव की तलाश है तो गुजरात का रण ऑफ कच्छ भी बेहतरीन विकल्प है। दूर तक फैला सफेद रेगिस्तान सूर्यास्त का अद्भुत नजारा और रण उत्सव की सांस्कृतिक झलकियां इस जगह को बेहद खास बनाती हैं। यहां लोक संगीत पारंपरिक नृत्य और स्थानीय व्यंजन आपकी यात्रा में यादगार रंग भर देते हैं। सीमित बजट में यह एक शानदार और अलग तरह का हनीमून अनुभव दे सकता है।

    यदि समुद्र तट पसंद हैं तो लक्षद्वीप भी आकर्षक विकल्प है। नीला समुद्र साफ पानी कोरल रीफ और शांत बीच कपल्स को एक अनोखा अनुभव देते हैं। यहां स्नॉर्कलिंग स्कूबा डाइविंग और बीच वॉक जैसी गतिविधियां रोमांच को और बढ़ा देती हैं। वहीं ऊटी और माउंट आबू भी हरियाली शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के कारण बजट हनीमून के लिए बेहतरीन जगहों में शामिल हैं।

    यात्रा की योजना बनाते समय पहले से होटल और टिकट बुक करने से खर्च काफी कम हो सकता है। ऑफ सीजन में यात्रा करने पर बेहतर होटल भी कम कीमत में मिल जाते हैं। सही प्लानिंग और सीमित बजट के साथ भारत की ये खूबसूरत जगहें आपके हनीमून को यादगार बना सकती हैं और जिंदगी की नई शुरुआत को हमेशा के लिए खास बना देंगी।

  • पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सस्ती लोकप्रियता

    पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ FIR मांग पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग और सस्ती लोकप्रियता


    नई दिल्ली ।
    पूर्व हाई कोर्ट जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई से इनकार करते हुए उसे खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया और कहा कि इस तरह की याचिकाएं सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के उद्देश्य से दाखिल की जा रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने याचिकाकर्ता अधिवक्ता को कड़ी टिप्पणी करते हुए मामले को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया।

    जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई की। याचिका में मांग की गई थी कि पूर्व जज यशवंत वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। याचिकाकर्ता का कहना था कि दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीश रहते हुए उनके आवास से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में जली हुई नकदी बरामद हुई थी और इस मामले में पुलिस कार्रवाई होनी चाहिए।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उन्होंने पुलिस को शिकायत दी थी, लेकिन इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पूर्व न्यायाधीश अब पद पर नहीं हैं और उन्हें किसी तरह की कानूनी छूट प्राप्त नहीं है। याचिकाकर्ता का कहना था कि मामले की जांच जरूरी है और कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए।

    हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि इससे पहले भी इसी तरह की एक याचिका अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी है। जब वकील ने कहा कि पिछली याचिका तकनीकी आधार पर खारिज हुई थी क्योंकि उस समय शिकायत दर्ज नहीं की गई थी, तो अदालत ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया को बार-बार दोहराना उचित नहीं है।

    जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता एक अधिवक्ता हैं और उन्हें न्यायिक प्रक्रिया की गंभीरता को समझना चाहिए। अदालत ने कहा कि इस तरह की याचिकाएं न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग हैं और केवल प्रचार हासिल करने के उद्देश्य से दाखिल की जा रही हैं। इसके बाद पीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।

    यशवंत वर्मा इससे पहले भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर चर्चा में आए थे। उनके खिलाफ पद से हटाने की प्रक्रिया के तहत महाभियोग की कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि, उन्होंने बाद में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद महाभियोग की प्रक्रिया प्रभावी नहीं रही। नियमों के अनुसार, संसद द्वारा हटाए जाने की प्रक्रिया से बचने के लिए संबंधित न्यायाधीश के पास इस्तीफा देने का विकल्प उपलब्ध होता है।

    मामला उस घटना से जुड़ा है, जब दिल्ली स्थित यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगने के बाद कथित रूप से जली हुई नकदी मिलने की बात सामने आई थी। घटना के बाद इस मामले ने काफी चर्चा बटोरी थी और जांच की मांग उठी थी। हालांकि, एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है।

    सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद स्पष्ट हो गया है कि अदालत किसी भी मामले में केवल आरोपों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया के इस्तेमाल को मंजूरी नहीं देगी। शीर्ष अदालत ने अपने रुख से यह संदेश दिया है कि न्यायिक व्यवस्था में दाखिल होने वाली याचिकाएं ठोस आधार और वास्तविक कानूनी जरूरतों पर आधारित होनी चाहिए।

  • NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल

    NEET-UG पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा, NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय याद कर लेते थे सवाल


    नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ा खुलासा किया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले ही शुरू हो गई थी। आरोप है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के पेपर तैयार करने वाले कुछ एक्सपर्ट्स ने सवालों को याद कर लिया और बाद में उन्हें पर्चियों के जरिए बाहर पहुंचाया।

    CBI ने 28 जुलाई को इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स समेत कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

    होटल लौटकर पर्चियों पर लिखते थे सवाल
    चार्जशीट के अनुसार, NTA कार्यालय में पेपर तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान एक्सपर्ट्स सवाल याद कर लेते थे। इसके बाद होटल लौटने पर याद किए गए प्रश्नों और उनके विकल्पों को पर्चियों पर लिखा जाता था। संबंधित प्रश्नों को व्यवस्थित करने के लिए NCERT की किताबों में अध्याय और पैराग्राफ तक चिन्हित किए जाते थे। CBI का दावा है कि NTA कार्यालय में आने-जाने के दौरान एक्सपर्ट्स की तलाशी नहीं होती थी। उन्हें रफ वर्क के लिए सादे कागज भी दिए जाते थे। आरोप है कि एक्सपर्ट पीवी कुलकर्णी ने इन कागजों पर केमिस्ट्री के 135 प्रश्न और उनके विकल्प नोट किए। उन्होंने केमिस्ट्री पेपर का मराठी से अंग्रेजी में बैक-ट्रांसलेशन भी किया।

    कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने बनाया नेटवर्क
    जांच एजेंसी के मुताबिक, यह किसी एक व्यक्ति की साजिश नहीं थी। परीक्षा से कई महीने पहले ही कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने NTA के तीनों एक्सपर्ट्स से संपर्क किया था। बातचीत, मुलाकात और कथित पैसों के लेन-देन के जरिए पेपर लीक का नेटवर्क तैयार किया गया। इसके बाद लीक हुए सवालों को वॉट्सऐप, टेलीग्राम, PDF और तस्वीरों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचाया गया। कुछ कोचिंग संस्थानों में छात्रों को हाथ से लिखे प्रश्नों के जरिए परीक्षा की तैयारी भी कराई गई। CBI के मुताबिक, डिजिटल सबूतों से बचने के लिए यह तरीका अपनाया गया था।

    इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और चैट से मिले सबूत
    CBI ने कहा है कि फोरेंसिक जांच, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, चैट रिकॉर्ड, बरामद दस्तावेजों और गवाहों के बयानों से पेपर लीक नेटवर्क की पुष्टि हुई। चार्जशीट में मनीषा संजय वाघमारे, धनंजय लोखंडे, शुभम मधुकर खैरनार और यश यादव को नेटवर्क की अहम कड़ी बताया गया है। जांच के दौरान एक आरोपी द्वारा कथित तौर पर लीक पेपर के बदले अपने 10वीं-12वीं के प्रमाणपत्र और ब्लैंक चेक सुरक्षा के तौर पर दिए जाने की बात भी सामने आई है।

    डॉक्टर और कोचिंग संचालक भी आरोपी
    CBI ने डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी, पुणे के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, रेणुकाई करियर सेंटर के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और सिद्धिविनायक हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे को भी आरोपी बनाया है। जांच एजेंसी के अनुसार, NTA के बाहर से नेटवर्क संचालित करने और लीक पेपर छात्रों तक पहुंचाने में इनकी भूमिका थी। CBI ने पेपर लीक के पीछे अवैध कमाई और कुछ कोचिंग संस्थानों के परिणाम बेहतर दिखाने का उद्देश्य बताया है।

    13 आरोपियों के खाते और लॉकर फ्रीज
    CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने 13 आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट फ्रीज किया है। तीनों NTA एक्सपर्ट्स पर पेपर लीक, भ्रष्टाचार और लोक सेवक के तौर पर विश्वासघात समेत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। चार्जशीट में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा और जुर्माने का उल्लेख किया गया है।

    पेपर लीक के बाद दोबारा हुई थी परीक्षा
    NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई गई। इस पूरे विवाद ने परीक्षा व्यवस्था और पेपर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    थलापति विजय और संगीता के तलाक मामले में नया मोड़, पत्नी ने वापस ली अलगाव की अर्जी

    नई दिल्ली । तमिल फिल्म जगत और तमिलनाडु की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। अभिनेता और नेता थलापति विजय के वैवाहिक जीवन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच अब नया अपडेट सामने आया है। उनकी पत्नी संगीता ने तलाक के लिए दायर की गई अर्जी वापस ले ली है। इसके बाद अदालत ने इस मामले को बंद कर दिया है। इस फैसले के साथ ही विजय और संगीता के अलग होने की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है।

    विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से कई तरह की खबरें सामने आ रही थीं। दोनों के बीच कथित मतभेद और अलगाव की चर्चाओं ने उनके प्रशंसकों का ध्यान खींचा था। अब तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद दोनों के रिश्ते को लेकर स्थिति बदलती नजर आ रही है।

    जानकारी के अनुसार, संगीता ने विजय से अलग होने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, जिसे बाद में उन्होंने वापस ले लिया। इसके बाद संबंधित अदालत ने तलाक की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय मामले को समाप्त कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद विजय के समर्थकों ने भी राहत महसूस की।

    इससे पहले दोनों के रिश्ते को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वैवाहिक विवाद की वजह से दोनों के बीच दूरी बढ़ी थी। विजय का नाम अभिनेत्री तृषा कृष्णन के साथ भी जोड़ा गया था, हालांकि इन चर्चाओं को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।

    विजय और संगीता की शादी वर्ष 1999 में हुई थी। दोनों करीब 27 वर्षों से साथ हैं। इस दौरान उनके दो बच्चे भी हुए। उनके बेटे का नाम जेसन संजय और बेटी का नाम दिव्या साशा है। परिवार और निजी जीवन को लेकर विजय हमेशा काफी निजी रवैया रखते रहे हैं।

    थलापति विजय ने अभिनय के क्षेत्र में लंबा सफर तय करने के बाद राजनीति में भी कदम रखा है। तमिलनाडु की राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ने के बाद उनके निजी जीवन से जुड़ी खबरों पर भी लोगों की नजर बनी हुई थी।

    तलाक की अर्जी वापस लिए जाने के बाद अब विजय और संगीता के रिश्ते को लेकर चल रही चर्चाएं एक नए मोड़ पर पहुंच गई हैं। हालांकि दोनों की ओर से इस पूरे मामले पर कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।

    विजय और संगीता की जोड़ी दक्षिण भारतीय सिनेमा जगत की चर्चित जोड़ियों में रही है। लंबे समय तक साथ रहने के बाद उनके अलग होने की खबरों ने प्रशंसकों को चिंता में डाल दिया था। अब अदालत में मामला खत्म होने के बाद उनके समर्थकों के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

    फिलहाल यह मामला कानूनी रूप से समाप्त हो चुका है और विजय-संगीता के वैवाहिक संबंधों को लेकर आगे की स्थिति उनके व्यक्तिगत फैसलों पर निर्भर करेगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखाया है कि फिल्मी सितारों के निजी जीवन से जुड़ी खबरें किस तरह लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बन जाती हैं।

  • सिंधु नदी के पानी पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, विशेषज्ञ बोले- अनिश्चितता बढ़ी तो कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

    सिंधु नदी के पानी पर बढ़ी पाकिस्तान की चिंता, विशेषज्ञ बोले- अनिश्चितता बढ़ी तो कृषि और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

    नई दिल्ली । सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का असर अब पाकिस्तान की जल सुरक्षा, कृषि और पर्यावरण को लेकर चिंता में दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान के विशेषज्ञ अली मेहर ने चेतावनी दी है कि सिंधु नदी प्रणाली से जुड़े प्रबंधन में अनिश्चितता बढ़ने पर देश के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उनका कहना है कि मामला केवल पानी के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, बाढ़ नियंत्रण, बिजली उत्पादन, पर्यावरण और करोड़ों लोगों की आजीविका से भी जुड़ा हुआ है।

    भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। लंबे समय तक दोनों देशों के बीच युद्ध और तनाव के बावजूद यह समझौता जल बंटवारे और नदी प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण व्यवस्था के रूप में काम करता रहा। हालांकि, पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने संधि को लेकर कड़ा रुख अपनाया और इसे निलंबित करने का फैसला किया। इसके बाद पाकिस्तान में इस कदम को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है।

    पाकिस्तानी विशेषज्ञ अली मेहर के अनुसार, संधि से जुड़ी पुरानी व्यवस्था ने दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद पानी से जुड़े मामलों में एक निश्चित प्रक्रिया बनाए रखी थी। उनके मुताबिक, इस व्यवस्था के कमजोर होने से पानी का प्रबंधन केवल तकनीकी और पर्यावरणीय विषय नहीं रहेगा, बल्कि इसे सुरक्षा और रणनीतिक दबाव के नजरिए से भी देखा जाने लगेगा।

    पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में सिंधु नदी प्रणाली की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। देश के बड़े कृषि क्षेत्रों की सिंचाई इसी नदी प्रणाली पर निर्भर है। किसानों की फसल, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और खाद्य सुरक्षा के लिए पानी की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। ऐसे में नदी के बहाव, जलाशयों के संचालन या पानी से जुड़ी जानकारी में लंबे समय तक अनिश्चितता रहने पर कृषि क्षेत्र प्रभावित हो सकता है।

    विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि सिंधु जल व्यवस्था में केवल पानी की मात्रा महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उससे संबंधित सूचनाओं का समय पर मिलना भी जरूरी है। नदी के बहाव, बारिश, जलाशयों के जलस्तर और पानी छोड़े जाने से जुड़ी जानकारी समय पर मिलने पर निचले इलाकों में प्रशासन बाढ़ से निपटने की तैयारी कर सकता है। जानकारी में देरी या कमी होने पर अचानक आने वाली बाढ़ से नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।

    सिंधु जल प्रणाली का प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ता है। नदी के प्रवाह में बदलाव से जल पारिस्थितिकी, कृषि भूमि और उन क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है जहां स्थानीय समुदाय पानी और नदी आधारित संसाधनों पर निर्भर हैं। बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के बीच पानी की मांग पहले ही बढ़ रही है, इसलिए सीमा पार जल प्रबंधन में स्थिरता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    इस पूरे विवाद का कानूनी पक्ष भी महत्वपूर्ण है। पाकिस्तानी विशेषज्ञ का मानना है कि पाकिस्तान को इस मामले में कानूनी और रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ना चाहिए। उनका कहना है कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने पक्ष को मजबूती से रखना चाहिए और साथ ही घरेलू स्तर पर जल प्रबंधन की कमियों को दूर करने पर भी ध्यान देना चाहिए।

    पाकिस्तान के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि देश में पानी के भंडारण, वितरण और उपयोग से जुड़ी कई समस्याएं पहले से मौजूद हैं। ऐसे में बाहरी जल स्रोतों को लेकर बढ़ती अनिश्चितता घरेलू जल प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। विशेषज्ञ के मुताबिक, भविष्य में सिंधु नदी का महत्व केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे दक्षिण एशिया की जल सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा विषय बन सकता है।

    बढ़ती आबादी, कृषि की जरूरतों, पर्यावरणीय दबाव और जलवायु परिवर्तन के बीच सिंधु नदी प्रणाली का स्थायी और पारदर्शी प्रबंधन दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है। मौजूदा तनाव के बीच पाकिस्तान में उठ रही चिंताएं इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत कर रही हैं।

  • UP : अतीक के दोनों बेटे अबान के जनाजे में होंगे शामिल, हाईकोर्ट ने दी पैरोल, सड़क हादसे में हुई थी मौत

    UP : अतीक के दोनों बेटे अबान के जनाजे में होंगे शामिल, हाईकोर्ट ने दी पैरोल, सड़क हादसे में हुई थी मौत

    प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद के छोटे बेटे अबान अहमद (21) को शुक्रवार को प्रयागराज के कसारी-मसारी स्थित खानदानी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अबान की कब्र उसके पिता अतीक अहमद की कब्र के बगल में तैयार की गई है। कब्रिस्तान में करीब 7 फीट गहरी कब्र खोदी गई है और सुरक्षा के मद्देनजर 70 से अधिक पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।

    अबान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जेल में बंद उसके दोनों बड़े भाइयों उमर और अली को इलाहाबाद हाईकोर्ट से पैरोल मिल गई है। शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे अदालत ने दोनों को पैरोल देने का आदेश दिया। उमर लखनऊ जेल और अली झांसी जेल में बंद है। दोनों के प्रयागराज पहुंचने में करीब 6 से 7 घंटे लगने की संभावना है।

    अतीक के परिवार की कब्रों के पास दफन होगा अबान
    अबान का शव शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे झांसी से प्रयागराज के हटवा गांव पहुंचा। उसे कसारी-मसारी स्थित परिवार के कब्रिस्तान में दफनाया जाएगा। इसी कब्रिस्तान में अतीक अहमद, उसके पिता फिरोज अहमद, भाई अशरफ और बेटे असद की कब्रें भी मौजूद हैं।

    मां शाइस्ता के पहुंचने पर निगाहें
    अबान की मां शाइस्ता परवीन वर्ष 2023 से फरार है। वह अतीक अहमद और बेटे असद के जनाजे में भी शामिल नहीं हुई थीं। ऐसे में अबान के अंतिम संस्कार में शाइस्ता के पहुंचने को लेकर भी लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।

    अबान की मौत पर सवाल पूछे जाने पर नाराज हुए डिप्टी सीएम
    अबान की सड़क हादसे में मौत को लेकर जब पत्रकारों ने उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से सवाल किया तो वह नाराज हो गए। उन्होंने कहा, “एक्सीडेंट रोज होते रहते हैं… ये कौन-सी बात है।”

    अली से मिलने जा रहा था अबान
    अबान गुरुवार सुबह अपने चार दोस्तों के साथ प्रयागराज से झांसी जा रहा था। उसका मकसद झांसी जेल में बंद अपने बड़े भाई अली अहमद से मुलाकात करना था। झांसी-कानपुर हाईवे पर अचानक एक जानवर सड़क पर आ गया। उसे बचाने के प्रयास में तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई।

    हादसे में अबान और उसके दोस्त सोनू की मौत हो गई। हादसे के बाद अबान का शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार तड़के उसका शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद उसे प्रयागराज लाया गया।