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  • KBC 18 के मंच पर खुली सारा अली खान की दिल की बात, अमिताभ के साथ काम कर चुके आयुष्मान से क्यों हुई जलन

    KBC 18 के मंच पर खुली सारा अली खान की दिल की बात, अमिताभ के साथ काम कर चुके आयुष्मान से क्यों हुई जलन


    नई दिल्ली। कौन बनेगा करोड़पति 18 का मंच इन दिनों सितारों की मौजूदगी और मजेदार किस्सों को लेकर लगातार चर्चा में है। हालिया एपिसोड में आयुष्मान खुराना और सारा अली खान अमिताभ बच्चन के सामने नजर आए। दोनों कलाकार अपनी आने वाली फिल्म उड़ता तीर के प्रमोशन के लिए शो में पहुंचे थे। इस दौरान अमिताभ बच्चन और आयुष्मान खुराना ने अपनी पुरानी फिल्म गुलाबो सिताबो की यादें भी ताजा कीं। बातचीत के दौरान आयुष्मान ने अमिताभ बच्चन से कुछ ऐसा कहा कि पूरा माहौल हंसी मजाक में बदल गया।

    आयुष्मान खुराना और अमिताभ बच्चन ने साल 2019 में रिलीज हुई फिल्म गुलाबो सिताबो में पहली बार साथ काम किया था। फिल्म में आयुष्मान के किरदार ने अमिताभ बच्चन के किरदार को बुढ़ऊ कहकर संबोधित किया था। KBC 18 के मंच पर इसी पुराने सीन को याद करते हुए दोनों कलाकारों ने इसे दोबारा एक्ट किया। इसके बाद आयुष्मान ने मजाकिया अंदाज में अमिताभ बच्चन से माफी मांगते हुए कहा कि फिल्म में उन्हें बुढ़ऊ कहने के लिए माफ कर दीजिए। उन्होंने अमिताभ की उम्र को लेकर भी मजेदार अंदाज में उनकी तारीफ की और कहा कि अमिताभ 84 की हरकतें नहीं करते बल्कि 28 साल के जैसे हैं।

    आयुष्मान की बात सुनकर अमिताभ बच्चन भी मुस्कुराने लगे और उन्होंने मजाक को आगे बढ़ाते हुए पूछ लिया कि 84 साल वाली हरकतें आखिर होती कैसी हैं। इसके बाद सेट पर मौजूद सभी लोग हंस पड़े। दोनों कलाकारों की यह बातचीत शो के सबसे दिलचस्प पलों में शामिल हो गई। अमिताभ और आयुष्मान की बॉन्डिंग ने एक बार फिर गुलाबो सिताबो की यादें दर्शकों के सामने ला दीं।

    इसी बातचीत के दौरान सारा अली खान ने भी अपने दिल की बात सामने रख दी। सारा ने बताया कि उन्हें इस बात की जलन होती है कि आयुष्मान खुराना अमिताभ बच्चन के साथ पहले ही फिल्म में काम कर चुके हैं। सारा ने कहा कि उनके परिवार के कई बड़े कलाकार अमिताभ बच्चन के साथ काम कर चुके हैं लेकिन अभी तक उन्हें महानायक के साथ स्क्रीन शेयर करने का अवसर नहीं मिला है।

    सारा अली खान का परिवार फिल्म और अभिनय की दुनिया से लंबे समय से जुड़ा रहा है। उनकी मां अमृता सिंह और दादी शर्मिला टैगोर समेत परिवार के कई कलाकार अमिताभ बच्चन के साथ काम कर चुके हैं। ऐसे में सारा के लिए अमिताभ के साथ काम करना एक खास सपना माना जा सकता है। शो पर उन्होंने इसी भावना को मजाकिया अंदाज में जाहिर किया।

    अमिताभ बच्चन ने भी सारा अली खान के परिवार की तारीफ की। उन्होंने पटौदी परिवार के लोगों की खूबसूरत आंखों का जिक्र किया और सारा के दादा तथा पूर्व भारतीय क्रिकेटर मंसूर अली खान पटौदी से जुड़ी एक पुरानी याद भी साझा की। उन्होंने दिल्ली में उनकी मां को खुले जैगुआर में गाड़ी चलाते हुए देखने का किस्सा सुनाया।

    KBC के इस एपिसोड में आयुष्मान खुराना ने अमिताभ बच्चन को खास अंदाज में सम्मान भी दिया। उन्होंने KBC रेडियो एपिसोड के एक सेगमेंट में अमिताभ की फिल्मों के मशहूर डायलॉग बोलकर उन्हें समर्पित किया। इस तरह शो में फिल्मी यादों हास्य और भावनात्मक किस्सों का ऐसा मेल देखने को मिला जिसने एपिसोड को खास बना दिया।

  • दुनिया में बजा भारतीय मूल की बेटी का डंका, हेली पिसाडी ने जीता मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब

    दुनिया में बजा भारतीय मूल की बेटी का डंका, हेली पिसाडी ने जीता मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब


    नई दिल्ली। भारतीय मूल की 19 वर्षीय हेली पिसाडी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। त्रिनिदाद और टोबैगो का प्रतिनिधित्व करने वाली हेली ने दुनिया के अलग अलग देशों से पहुंची भारतीय मूल की प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए यह प्रतिष्ठित ताज हासिल किया। हेली फिलहाल कानून की पढ़ाई कर रही हैं और इतनी कम उम्र में मिली इस सफलता ने उन्हें भारतीय प्रवासी समुदाय के बीच चर्चा का प्रमुख चेहरा बना दिया है। यह प्रतियोगिता भारत के बाहर आयोजित होने वाली सबसे लंबे समय से चल रही भारतीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं में शामिल है और इस वर्ष इसका 33वां संस्करण आयोजित किया गया।

    मिस इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का आयोजन त्रिनिदाद और टोबैगो के नेशनल एकेडमी फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में किया गया। इसी कार्यक्रम के दौरान वर्ल्डवाइड पेजेंट्स की को चेयरपर्सन नीलम सरन ने हेली पिसाडी को मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का ताज पहनाया। जीत के बाद हेली को ताज और सैश के साथ देखा गया। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मूल के लोगों के लिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि प्रतियोगिता भारतीय संस्कृति और विरासत से जुड़े प्रतिभागियों को वैश्विक मंच प्रदान करती है।

    हेली पिसाडी की खासियत केवल उनकी खूबसूरती नहीं बल्कि उनकी शिक्षा और आत्मविश्वास भी है। वह कानून की पढ़ाई कर रही हैं और पढ़ाई के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। त्रिनिदाद और टोबैगो जैसे देश से भारतीय मूल की प्रतिनिधि के तौर पर इस मंच पर पहुंचना भी अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। प्रतियोगिता में अलग अलग देशों में रहने वाली भारतीय मूल की महिलाओं ने हिस्सा लिया और अपनी प्रतिभा तथा व्यक्तित्व का प्रदर्शन किया।

    इस आयोजन में केवल मिस इंडिया वर्ल्डवाइड का खिताब ही नहीं दिया गया बल्कि दो अन्य प्रमुख श्रेणियों में भी विजेताओं का चयन हुआ। अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने वाली डॉ. श्रीदेवी मंगिनानी ने मिसेज इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 का खिताब अपने नाम किया। वहीं नीदरलैंड्स की लूना जयराम मिस टीन इंडिया वर्ल्डवाइड 2026 चुनी गईं। इस तरह तीन अलग अलग देशों की भारतीय मूल की महिलाओं ने प्रतियोगिता के तीन प्रमुख खिताब अपने नाम किए।

    मिस इंडिया वर्ल्डवाइड प्रतियोगिता की शुरुआत तीन दशक से भी अधिक समय पहले हुई थी। इसका उद्देश्य दुनिया के अलग अलग हिस्सों में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान से जोड़ना भी है। समय के साथ यह प्रतियोगिता भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। प्रतियोगिता में शामिल होने वाली प्रतिभागियां अपनी भारतीय विरासत के साथ उस देश का भी प्रतिनिधित्व करती हैं जहां वे रहती हैं।

    हेली पिसाडी की जीत इसी वैश्विक भारतीय समुदाय की बढ़ती पहचान को दर्शाती है। त्रिनिदाद और टोबैगो में आयोजित इस आयोजन ने भारतीय मूल की प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने का काम किया। 19 साल की हेली के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि वह अभी कानून की पढ़ाई कर रही हैं और शिक्षा के साथ उन्होंने सौंदर्य प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल की है। उनकी जीत ने भारतीय मूल की युवा प्रतिभाओं के लिए एक नई मिसाल कायम की है।

  • श्मशान घाट नदियों के किनारे ही क्यों होते हैं, हिंदू धर्म की इस परंपरा के पीछे छिपा है गहरा रहस्य

    श्मशान घाट नदियों के किनारे ही क्यों होते हैं, हिंदू धर्म की इस परंपरा के पीछे छिपा है गहरा रहस्य


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक जल का विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक परंपराओं में नदियों को केवल पानी का स्रोत नहीं बल्कि पवित्रता और जीवन का प्रतीक माना जाता है। यही वजह है कि भारत में पुराने समय के कई प्रमुख श्मशान घाट नदियों के किनारे देखने को मिलते हैं। वाराणसी का मणिकर्णिका घाट हरिद्वार के घाट और प्रयागराज का संगम क्षेत्र इसके प्रमुख उदाहरण हैं। आज भी इन स्थानों पर अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराएं निभाई जाती हैं।

    दरअसल श्मशान घाटों का नदियों के पास होना केवल धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा विषय नहीं है। इसके पीछे पुराने समय की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियां भी बड़ी वजह रही हैं। प्राचीन भारत में अधिकांश नगर और बस्तियां नदियों के आसपास ही विकसित होती थीं। नदियां पीने के पानी खेती आवागमन और दैनिक जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण थीं। नदी किनारे खुले स्थान भी अपेक्षाकृत आसानी से उपलब्ध होते थे। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए नदी के किनारे स्थान का चयन करना व्यावहारिक भी था। समय के साथ इन्हीं स्थानों पर घाट विकसित हुए और वे धार्मिक तथा सामाजिक जीवन का हिस्सा बन गए।

    हिंदू दर्शन में शरीर को पंचतत्वों से बना माना गया है। ये पंचतत्व पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मृत्यु के बाद शरीर इन्हीं तत्वों में वापस विलीन होता है। दाह संस्कार में अग्नि शरीर के स्थूल रूप को प्रकृति में वापस लौटाने का माध्यम मानी जाती है। इसके बाद बची राख और अस्थियों को जल में विसर्जित करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। इसे प्रकृति के चक्र में शरीर की वापसी के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

    जल को हिंदू परंपरा में शुद्धि और पवित्रता से भी जोड़ा गया है। यही कारण है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में जल का इस्तेमाल कई स्तरों पर दिखाई देता है। दाह संस्कार के बाद अस्थि और राख को जल में प्रवाहित करने की परंपरा कई परिवारों में आज भी निभाई जाती है। धार्मिक दृष्टि से इसे दिवंगत व्यक्ति के प्रति अंतिम कर्तव्य से जोड़ा जाता है। वहीं वैज्ञानिक दृष्टि से दाह संस्कार के बाद बचे अवशेषों में विभिन्न खनिज तत्व होते हैं जिनमें कुछ पानी में घुल सकते हैं जबकि कुछ तलछट का हिस्सा बन सकते हैं।

    पुराने समय में नदी किनारे श्मशान होने का एक और व्यावहारिक लाभ यह था कि अंतिम संस्कार के बाद जरूरी धार्मिक क्रियाएं उसी क्षेत्र में पूरी की जा सकती थीं। नदी तक पहुंच आसान होने के कारण अस्थि विसर्जन जैसी परंपराओं को पूरा करना भी सुविधाजनक था। इतिहास से जुड़े शोध भी बताते हैं कि भारत में परंपरागत दाह संस्कार स्थल अक्सर नदी या समुद्र के करीब बनाए जाते थे ताकि राख और अस्थियों को जल में विसर्जित किया जा सके।

    हालांकि समय के साथ शहरों का विस्तार हुआ और आबादी तेजी से बढ़ी। कई जगह पुराने नदी किनारे वाले श्मशान घाट शहरों के बीच आ गए जबकि नई जगहों पर आबादी से दूर श्मशान घाट बनाए जाने लगे। इसके बावजूद नदियों और श्मशान घाटों का यह संबंध आज भी हिंदू संस्कृति में गहराई से दिखाई देता है। इसलिए श्मशान घाटों का नदियों के किनारे होना केवल किसी एक धार्मिक रहस्य का परिणाम नहीं बल्कि आस्था परंपरा भूगोल और प्राचीन जीवन व्यवस्था के लंबे मेल का परिणाम माना जा सकता है।

  • सूर्य गोचर 2026 से इन 4 राशियों की बढ़ेगी चिंता, खर्च से करियर और सेहत तक सामने आ सकती हैं चुनौतियां

    सूर्य गोचर 2026 से इन 4 राशियों की बढ़ेगी चिंता, खर्च से करियर और सेहत तक सामने आ सकती हैं चुनौतियां


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास मान सम्मान पद प्रतिष्ठा और नेतृत्व क्षमता का कारक ग्रह माना जाता है। सूर्य का राशि परिवर्तन सभी 12 राशियों के जीवन पर अलग अलग प्रभाव डालता है। अक्टूबर 2026 में सूर्य एक बार फिर अपनी राशि बदलने जा रहे हैं। 17 अक्टूबर को सूर्य कन्या राशि से निकलकर तुला राशि में प्रवेश करेंगे और 16 नवंबर तक इसी राशि में रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार तुला राशि में सूर्य नीच के माने जाते हैं। ऐसे में इस गोचर का कुछ राशियों पर चुनौतीपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है। खासतौर पर मिथुन कन्या धनु और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में आर्थिक मामलों से लेकर नौकरी स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन तक सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

    मिथुन राशि के जातकों के लिए सूर्य का तुला राशि में गोचर बहुत अनुकूल नहीं माना जा रहा है। इस दौरान कई योजनाएं उम्मीद के मुताबिक पूरी नहीं हो पाएंगी। किसी काम में बार बार रुकावट आने से मन परेशान हो सकता है। आर्थिक मामलों में भी सावधानी रखना जरूरी होगा। गैर जरूरी चीजों पर खर्च बढ़ सकता है। ऐसे में बजट बनाकर चलना आपके लिए बेहतर रहेगा। किसी भी निवेश या बड़े आर्थिक फैसले में जल्दबाजी करने से बचना चाहिए। परिस्थितियां मन के अनुसार नहीं होने पर धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा।

    कन्या राशि वालों के लिए भी सूर्य का यह गोचर आर्थिक और पारिवारिक मोर्चे पर चिंता बढ़ा सकता है। पैसों से जुड़ी परेशानियां सामने आ सकती हैं। अचानक कोई ऐसी खबर मिल सकती है जिससे मन दुखी हो। अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। परिवार में किसी बात को लेकर तनाव या मतभेद की स्थिति बन सकती है। सरकारी विभाग या सरकारी कामकाज से जुड़े मामलों में भी अड़चन आने की संभावना जताई गई है। ऐसे में दस्तावेजों और जरूरी प्रक्रियाओं को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

    धनु राशि के जातकों के लिए अक्टूबर का यह समय कुछ उलझनों वाला रह सकता है। स्वास्थ्य को लेकर परेशानी महसूस हो सकती है। कोई महत्वपूर्ण काम पूरा होते होते अटक सकता है। बार बार काम रुकने के कारण तनाव बढ़ सकता है और ऐसा लग सकता है कि परिस्थितियां साथ नहीं दे रही हैं। नौकरी करने वालों को कार्यक्षेत्र में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। काम का दबाव बढ़ने के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ सकती हैं। धन से जुड़े मामलों में किसी तरह की जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है इसलिए हर फैसला सोच समझकर लेना बेहतर होगा।

    कुंभ राशि के जातकों को भी सूर्य के तुला राशि में प्रवेश के बाद सतर्क रहने की जरूरत होगी। इस दौरान लग्जरी और गैर जरूरी चीजों पर खर्च बढ़ सकता है। आमदनी के मुकाबले खर्च अधिक होने से बचत प्रभावित हो सकती है। प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में अधिक भागदौड़ करनी पड़ सकती है। किसी काम में देरी के कारण मानसिक तनाव भी बढ़ सकता है। इसके अलावा विरोधी पक्ष आपकी परेशानी बढ़ाने की कोशिश कर सकता है। ऐसे में विवादों से दूर रहना और हर परिस्थिति में संयम बनाए रखना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

    हालांकि ज्योतिषीय भविष्यवाणियां सामान्य राशि आधारित आकलन होती हैं। किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति के अनुसार परिणाम अलग हो सकते हैं। इसलिए इस गोचर को लेकर घबराने के बजाय सावधानी और संयम के साथ आगे बढ़ना बेहतर रहेगा। आर्थिक फैसलों में सोच समझकर कदम उठाना स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही नहीं करना और विवादों से बचना इस अवधि में लाभकारी हो सकता है।

  • फ्रांस से 10 मिराज भारत लाने वाले आशुतोष दीक्षित बने नए IAF चीफ, 3300 घंटे की उड़ान और 3 राष्ट्रपति पदकों का शानदार रिकॉर्ड

    फ्रांस से 10 मिराज भारत लाने वाले आशुतोष दीक्षित बने नए IAF चीफ, 3300 घंटे की उड़ान और 3 राष्ट्रपति पदकों का शानदार रिकॉर्ड


    नई दिल्ली। भारतीय वायु सेना को नया प्रमुख मिल गया है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने भारतीय वायु सेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में कमान संभाल ली है। करीब चार दशक लंबे सैन्य करियर में उन्होंने फाइटर पायलट से लेकर वायु सेना के शीर्ष पद तक का सफर तय किया है। उनके करियर में युद्ध अभियानों से लेकर फाइटर विमानों के परीक्षण और रणनीतिक योजना तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने के महत्वपूर्ण मिशन से लेकर कारगिल युद्ध के दौरान निभाई गई जिम्मेदारी तक उनका सैन्य सफर कई उपलब्धियों से भरा रहा है।

    आशुतोष दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। वह नेशनल डिफेंस एकेडमी की 69वीं कोर्स के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने बांग्लादेश से स्टाफ कोर्स किया और नई दिल्ली स्थित नेशनल डिफेंस कॉलेज से 57वें एनडीसी कोर्स के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया। सैन्य शिक्षा के साथ उनके पास विमान उड़ाने का भी लंबा अनुभव है।

    आशुतोष दीक्षित एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उन्होंने मिराज 2000 सहित कई फाइटर विमान ट्रेनर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ाए हैं। उनके नाम 3300 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव दर्ज है। लंबे फ्लाइंग करियर ने उन्हें भारतीय वायु सेना के ऑपरेशनल और तकनीकी दोनों पहलुओं की गहरी समझ दी।

    उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय जिम्मेदारियों में फ्रांस से मिराज 2000 विमानों को भारत लाने का मिशन भी शामिल है। विंग कमांडर के तौर पर उन्हें फ्रांस से 10 मिराज विमानों को सुरक्षित भारत लाने की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने दो बैच में इस मिशन को पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने पश्चिमी सीमा पर मिराज 2000 की 9वीं स्क्वाड्रन की कमान संभाली और उसे कम समय में कॉम्बैट रेडी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर और सीमा पर चले ऑपरेशन रक्षक में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में ग्रुप कैप्टन के रूप में उन्होंने छह बड़ी विदेशी कंपनियों के फाइटर जेट्स के फील्ड ट्रायल और तकनीकी मूल्यांकन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का नेतृत्व किया। इससे उनकी तकनीकी समझ और रणनीतिक क्षमता का पता चलता है।

    आशुतोष दीक्षित को उनकी सेवाओं के लिए कई महत्वपूर्ण सैन्य सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें 26 जनवरी 2006 को वायु सेना मेडल दिया गया। इसके बाद 26 जनवरी 2011 को विशिष्ट सेवा मेडल और 26 जनवरी 2023 को अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। ये सम्मान उनके लंबे सैन्य करियर में निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों और सेवाओं को दर्शाते हैं।

    अपने 38 साल से अधिक लंबे करियर में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर और कमान स्तर पर कई अहम पद संभाले। वह एएसटीई बेंगलुरु की फाइटर टेस्ट स्क्वाड्रन और ग्वालियर की 9वीं स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। उन्होंने डिप्टी चीफ ऑफ एयर स्टाफ के रूप में प्रोजेक्ट्स और प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद प्रयागराज स्थित सेंट्रल एयर कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वाइस चीफ ऑफ एयर स्टाफ के पद पर रहने के बाद अब उन्होंने भारतीय वायु सेना के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी संभाल ली है।

  • इमरान समर्थकों के लॉन्ग मार्च के बीच शहबाज शरीफ ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, रखी ये शर्त

    इमरान समर्थकों के लॉन्ग मार्च के बीच शहबाज शरीफ ने बढ़ाया बातचीत का हाथ, रखी ये शर्त


    लाहौर।
    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विपक्षी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) को बातचीत की सशर्त पेशकश की है। उन्होंने कहा कि अगर PTI इस्लामाबाद की ओर बढ़ रहे अपने लॉन्ग मार्च को तत्काल रोक देती है, तो सरकार बातचीत के लिए तैयार है। राजधानी में एक कार्यक्रम के दौरान शरीफ ने पार्टी नेतृत्व से प्रदर्शन की राजनीति छोड़कर बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की।

    शरीफ ने चेतावनी दी कि लगातार सड़क प्रदर्शनों से पाकिस्तान में फिर राजनीतिक अस्थिरता का दौर लौट सकता है। उन्होंने कहा कि देश पहले ही लंबे समय तक राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर चुका है और ऐसी स्थिति दोबारा पैदा नहीं होनी चाहिए।

    बातचीत टूटने के बाद आया बयान

    शहबाज शरीफ का यह बयान सरकार और PTI के बीच बातचीत बेनतीजा रहने के बाद आया है। हाल ही में नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के चैंबर में दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई थी, लेकिन किसी समझौते तक नहीं पहुंचा जा सका।

    शरीफ ने PTI नेतृत्व पर बातचीत में गंभीरता से आगे नहीं बढ़ने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि वार्ता के दौरान जिन मुद्दों पर शुरुआती सहमति बनी थी, PTI ने बाद में उनमें बदलाव कर दिया। सरकार के अनुसार, राजनीतिक तनाव कम करने और विवादों का समाधान निकालने के उद्देश्य से बातचीत शुरू की गई थी, लेकिन विपक्ष का रुख टकराव जारी रखने वाला रहा।

    अर्थव्यवस्था को लेकर जताई चिंता

    प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि करीब ढाई साल की आर्थिक स्थिरीकरण प्रक्रिया के बाद देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं।

    शरीफ के मुताबिक, मैन्युफैक्चरिंग, रेमिटेंस और निर्यात के क्षेत्र में सकारात्मक संकेत मिले हैं। ऐसे समय में लंबे धरने और राजनीतिक मार्च से कारोबारी गतिविधियां और आर्थिक विकास प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर विरोध प्रदर्शनों के कारण आर्थिक गतिविधियां बाधित होती हैं तो इसका सीधा नुकसान राष्ट्रीय हितों को होगा।

    बातचीत के साथ कार्रवाई का भी संकेत

    शहबाज शरीफ ने कहा कि संघीय सरकार PTI के साथ बैठकर संवैधानिक तरीके से राजनीतिक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सड़क पर मार्च जारी रखते हुए सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश के बीच नई बातचीत नहीं होगी।

    सरकार का कहना है कि राजनीतिक संवाद का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। शरीफ ने संकेत दिया कि अगर प्रदर्शन के कारण सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होती है या इस्लामाबाद को ठप करने की कोशिश की जाती है, तो कानून लागू कराने वाली एजेंसियां कार्रवाई कर सकती हैं।

  • फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा

    फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ छात्रों का उग्र प्रदर्शन, धमाके में 15 वर्षीय छात्र का हाथ उड़ा


    पेरिस। फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था की कथित खामियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। स्कूलों में बढ़ती छात्र संख्या, शिक्षकों की कमी, जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद हालात हिंसक हो गए। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान करीब 1,000 लोग घायल हुए हैं।

    धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर घायल

    रिपोर्ट्स के अनुसार, लेंस शहर में प्रदर्शन के दौरान हुए एक धमाके में 15 वर्षीय छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया। धमाके में उसका हाथ उड़ गया। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसके जबड़े की भी सर्जरी करनी पड़ी। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने 5,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें करीब 90 प्रतिशत नाबालिग छात्र बताए जा रहे हैं।

    पुलिस कार्रवाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच मंगलवार को देशभर में आंदोलन के समर्थन में रैलियां आयोजित होने की उम्मीद है, जिनमें हजारों लोगों के शामिल होने की संभावना है।

    प्रधानमंत्री ने छात्रों की मांगों को बताया जायज

    फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने देशव्यापी छात्र विरोध-प्रदर्शनों को शांत करने की कोशिश के तहत हड़ताल कर रहे स्कूली छात्रों की शिकायतों को “जायज” बताया है। ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने मंत्रियों को छात्रों की पांच प्रमुख मांगों पर काम करने और अक्टूबर 2026 के अंत तक प्रस्ताव तैयार कर पेश करने का निर्देश दिया है।

    400 से 500 स्कूलों में कक्षाएं प्रभावित

    फ्रांस के शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी नहीं होने के कारण करीब 400 से 500 उच्च विद्यालयों में कक्षाएं पूर्ण या आंशिक रूप से निलंबित कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन शुरू होने के बाद से 24 विद्यालयों में आगजनी या तोड़फोड़ की घटनाएं हुई हैं। हिंसा में शिक्षा विभाग के 85 कर्मचारी घायल हुए हैं। मंत्री ने मौजूदा स्थिति को अभूतपूर्व बताया।

    बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह पेरिस से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब मोंटपेलियर, नांत और मार्सिले सहित कई प्रमुख शहरों तक फैल चुका है। छात्र शिक्षा के गिरते स्तर में सुधार के साथ स्कूलों में बेहतर बुनियादी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं।

    फ्रांस के न्याय मंत्री गेराल्ड डारमानिन के अनुसार, देश के करीब 3,700 विद्यालयों में से लगभग 735 विद्यालय इस उग्र आंदोलन से किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं।

    प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुविधाओं में सुधार पर जोर

    प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सरकार छात्रों और शैक्षणिक कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए तेजी से कदम उठा रही है। इसमें कक्षाओं का सुचारू संचालन, स्कूलों में सुविधाओं का सुधार और विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे शामिल हैं। सरकार विद्यालयों में तोड़फोड़ करने वालों से ही हुए नुकसान की भरपाई कराने संबंधी विधेयक को भी जल्द आगे बढ़ाने की तैयारी में है।

  • हेलीकॉप्टर से उतरते समय गिरते-गिरते बचीं US सेकंड लेडी ऊषा वेंस, गोद में था 9 हफ्ते का बच्चा

    हेलीकॉप्टर से उतरते समय गिरते-गिरते बचीं US सेकंड लेडी ऊषा वेंस, गोद में था 9 हफ्ते का बच्चा


    वॉशिंगटन।
    अमेरिका की सेकंड लेडी ऊषा वेंस सोमवार को मैरीलैंड स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर हेलीकॉप्टर से उतरते समय अचानक लड़खड़ा गईं। उस समय उनका नौ सप्ताह का बेटा एलेक नील वेंस बेबी कैरियर में उनकी गोद से बंधा हुआ था। ऊषा ने तुरंत रेलिंग पकड़कर खुद को संभाल लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह चर्चा का विषय बना हुआ है।

    सीढ़ियों से उतरते समय छूटा कदम

    वीडियो में ऊषा वेंस हेलीकॉप्टर की सीढ़ियों से नीचे उतरती दिखाई दे रही हैं। उनके साथ उनका नौ सप्ताह का बेटा एलेक भी था। सीढ़ियों के निचले हिस्से के पास अचानक उनका कदम चूक गया और वह कुछ क्षण के लिए अपना संतुलन खोती नजर आईं।

    ऊषा ने तुरंत रेलिंग पकड़ ली और खुद को संभाल लिया। इसके बाद उन्होंने अपने बच्चे को देखा और सामान्य रूप से आगे बढ़ गईं। घटना में ऊषा वेंस या उनके बच्चे के घायल होने की कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

    पास खड़े सैन्यकर्मियों ने मदद क्यों नहीं की?

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि हेलीकॉप्टर के पास मौजूद कर्मचारियों या सैन्यकर्मियों ने ऊषा की मदद के लिए आगे कदम क्यों नहीं बढ़ाया। वीडियो में हेलीकॉप्टर के आसपास कई सैनिक नजर आ रहे हैं।

    हालांकि, फुटेज से यह स्पष्ट नहीं है कि सैन्यकर्मियों ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। यह भी स्पष्ट नहीं है कि उस समय उनके लिए किसी विशेष सुरक्षा या औपचारिक प्रोटोकॉल का पालन करना जरूरी था या नहीं।

    क्या सैन्य प्रोटोकॉल के कारण नहीं बढ़े आगे?

    मीडिया रिपोर्टों और सैन्य प्रोटोकॉल से जुड़ी जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या उनके परिवार के सदस्य के विमान या हेलीकॉप्टर से उतरने के दौरान तैनात सैन्यकर्मी अक्सर औपचारिक सलामी और ‘एटेंशन’ की स्थिति में रहते हैं। ऐसे में वीडियो में दिखाई देने वाले सैन्यकर्मियों की प्रतिक्रिया को इसी प्रोटोकॉल के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बेटी को लेकर बाद में उतरे जेडी वेंस

    अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी ऊषा वेंस के बाद हेलीकॉप्टर से नीचे उतरे। वह अपनी चार वर्षीय बेटी मिराबेल के साथ थे। रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्होंने ऊषा के लड़खड़ाने की घटना को नहीं देखा।

    इसके बाद पूरा परिवार उस विमान की ओर बढ़ गया, जिससे उन्हें एंकोरेज के लिए रवाना होना था।

    नवजात बच्चे के साथ 7.5 घंटे की यात्रा

    यह यात्रा जेडी वेंस के अलास्का दौरे का हिस्सा थी। वह मध्यावधि चुनाव से पहले प्रचार अभियान के लिए अलास्का जा रहे थे। वहां उन्हें रिपब्लिकन नेशनल कमेटी की एक रैली को संबोधित करना था। रैली में रिपब्लिकन सीनेटर डैन सुलिवन के दोबारा चुनाव लड़ने के प्रयास का समर्थन किया जाना था। सुलिवन का मुकाबला डेमोक्रेट मैरी पेल्टोला से है।

    एयर फोर्स टू में सवार होने से पहले वेंस ने बताया था कि ऊषा और उनके कुछ बच्चे भी उनके साथ यात्रा करेंगे। उन्होंने कहा था कि यह अलास्का यात्रा ऊषा का 50वां अमेरिकी राज्य दौरा होगा।

    जेडी वेंस ने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा था कि परिवार अपने नौ सप्ताह के बच्चे को करीब 7.5 घंटे की यात्रा पर साथ ले जा रहा है। उन्होंने कहा था कि अगर बाद में भाषण के दौरान वह थके या तनाव में नजर आएं तो इसकी वजह नवजात बच्चे के साथ की गई लंबी यात्रा हो सकती है।

  • इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल

    इंदौर में सड़क धंसने का सिलसिला जारी, परदेशीपुरा में फिर हुआ हादसा, ड्रेनेज लाइन और भराव की गुणवत्ता पर सवाल


    इंदौर । इंदौर में सड़क धंसने की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में मंगलवार को चैंबर के पास सड़क का एक हिस्सा अचानक धंस गया। सड़क की ऊपरी कांक्रीट परत टूटने के बाद जब मौके की जांच की गई तो उसके नीचे जमीन का बड़ा हिस्सा खोखला मिला। सड़क का एक स्लैब भी हवा में लटका हुआ दिखाई दिया। सूचना मिलने के बाद नगर निगम के जनकार्य विभाग ने इंजीनियर को मौके पर भेजा और सड़क धंसने के कारणों की जांच शुरू कराई। खास बात यह है कि इसी जगह करीब एक साल पहले भी सड़क धंस चुकी है। ऐसे में दोबारा उसी स्थान पर सड़क बैठने से निर्माण और मरम्मत कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

    परदेशीपुरा की गली नंबर 3 में सड़क के नीचे बने चैंबर के आसपास जमीन खोखली होने की जानकारी सामने आने के बाद निगम अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। शुरुआती तौर पर अधिकारियों को आशंका है कि पुराना ड्रेनेज चैंबर कमजोर होकर ढह गया होगा जिसके कारण सड़क के नीचे खाली जगह बनी और ऊपर का हिस्सा दबाव नहीं झेल सका। यहां ड्रेनेज लाइन पुरानी बताई जा रही है जबकि चैंबर का ढक्कन अपेक्षाकृत नया दिखाई दे रहा है। हालांकि सड़क के नीचे इतना बड़ा खोखलापन किस वजह से बना यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

    स्थानीय जानकारी के मुताबिक करीब एक साल पहले भी इसी स्थान पर सड़क धंस गई थी। उस समय चैंबर की मरम्मत कराने के बाद सड़क के नीचे मिट्टी का भराव किया गया था। अब एक बार फिर उसी जगह सड़क धंसने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पिछली मरम्मत के बाद समस्या पूरी तरह दूर क्यों नहीं हुई। क्या ड्रेनेज लाइन में लीकेज जारी रहा या फिर सड़क के नीचे मिट्टी का भराव पर्याप्त तरीके से नहीं किया गया था। इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी मानी जा रही है।

    तकनीकी जानकारों के अनुसार पुरानी भूमिगत ड्रेनेज लाइन में लीकेज होने पर पानी आसपास की मिट्टी को धीरे धीरे बहा सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर सड़क के नीचे खाली जगह बनती जाती है। ऊपर से सड़क पर लगातार वाहनों का दबाव पड़ता रहता है। जब जमीन का सहारा कमजोर हो जाता है तो कांक्रीट की परत टूटकर नीचे बैठ सकती है। इसी तरह किसी मरम्मत या निर्माण के बाद यदि मिट्टी का भराव ठीक तरीके से नहीं किया जाए तो भी समय के साथ जमीन बैठने की समस्या सामने आ सकती है।

    परदेशीपुरा की घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इंदौर में पिछले कुछ महीनों के दौरान सड़क धंसने की कई घटनाएं हो चुकी हैं। मेघदूत गार्डन गोराकुंड गाड़ी अड्डा नासिया रोड और पंढरीनाथ क्षेत्र में भी सड़क धंसने के मामले सामने आए हैं। शहर में लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने भूमिगत ड्रेनेज नेटवर्क चैंबर निर्माण कार्य और सड़क के नीचे किए जाने वाले भराव की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

    फिलहाल नगर निगम की टीम मौके की स्थिति का परीक्षण कर रही है। सड़क के नीचे बने खोखले हिस्से की वजह स्पष्ट होने के बाद जरूरी सुधार कार्य किया जाएगा। लेकिन एक ही जगह पर एक साल के भीतर दूसरी बार सड़क धंसने की घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या पिछली मरम्मत के दौरान समस्या की जड़ तक पहुंचने के बजाय केवल सतही सुधार किया गया था।

  • बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और बुखार से बढ़ी परेशानी, बच्चों से बुजुर्गों तक इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    बदलते मौसम में सर्दी-खांसी और बुखार से बढ़ी परेशानी, बच्चों से बुजुर्गों तक इन बातों का रखें विशेष ध्यान

    नई दिल्ली ।मौसम में बदलाव के साथ कई लोगों को सर्दी, खांसी, गले में दर्द, बुखार और वायरल संक्रमण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जब दिन और रात के तापमान में तेजी से अंतर आता है, तो शरीर को बदलते मौसम के अनुसार ढलने में समय लग सकता है। इसी दौरान वायरस और बैक्टीरिया तेजी से फैल सकते हैं, जिससे अचानक बीमार पड़ने का खतरा बढ़ सकता है।

    बदलते मौसम में हर व्यक्ति को समान स्तर की परेशानी नहीं होती। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को इस दौरान अधिक सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। इसके अलावा जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर है, उन्हें भी अपने स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्क रहना चाहिए। पहले से अस्थमा, एलर्जी या किसी अन्य बीमारी से जूझ रहे लोगों को मौसम में बदलाव के दौरान अतिरिक्त सावधानी रखने की जरूरत हो सकती है।

    दिनभर अलग-अलग तापमान वाले वातावरण में रहने वाले लोगों को भी परेशानी हो सकती है। बाहर आने-जाने वाले लोगों, ऑफिस जाने वालों और नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों को अचानक तापमान में बदलाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे में शरीर को बदलते वातावरण के अनुसार समायोजित होने में समय लग सकता है और स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।

    बदलते मौसम में खुद को सुरक्षित रखने के लिए कपड़ों का चयन मौसम के अनुसार करना जरूरी है। बहुत अधिक ठंडे या गर्म वातावरण में अचानक जाने से बचने की सलाह दी गई है। शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना भी जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त पानी पीना चाहिए और भोजन में ताजे तथा पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए।

    पर्याप्त नींद लेना भी इस दौरान महत्वपूर्ण माना गया है। रोजाना हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है। मौसम बदलने के दौरान साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है। बाहर से घर लौटने के बाद हाथ अच्छी तरह धोने की आदत संक्रमण से बचाव में मदद कर सकती है। व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ आसपास की साफ-सफाई का भी ध्यान रखना चाहिए।

    स्वास्थ्य से जुड़े लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि कई दिनों तक बुखार बना रहता है, लगातार खांसी बढ़ती जाती है, सांस लेने में परेशानी होती है या बहुत अधिक कमजोरी महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए। यदि दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिलती है, तब भी चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

    बदलते मौसम में बार-बार खुद से दवा लेना उचित नहीं माना गया है। खासकर जब लक्षण लगातार बने रहें या उनकी गंभीरता बढ़ती जाए, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। मौसम के अनुसार कपड़े पहनना, पर्याप्त पानी पीना, पौष्टिक भोजन लेना, पूरी नींद लेना, हल्की शारीरिक गतिविधि करना और स्वच्छता का ध्यान रखना इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी सावधानी के प्रमुख उपाय हैं।