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  • पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, 100 की रफ्तार में ट्रक में घुसी अर्टिगा, 3 टेनिस खिलाड़ियों की मौत

    पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर दर्दनाक हादसा, 100 की रफ्तार में ट्रक में घुसी अर्टिगा, 3 टेनिस खिलाड़ियों की मौत


    सुल्तानपुर । सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर बुधवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में तीन टेनिस खिलाड़ियों की दर्दनाक मौत हो गई जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा बल्दीराय थाना क्षेत्र में सुबह करीब 5 बजे हुआ जब लखनऊ से देवरिया जा रही अर्टिगा कार आगे चल रहे ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें सवार लोग अंदर फंस गए। शुरुआती जांच में पुलिस ने हादसे की वजह चालक को झपकी आना बताया है। कार की रफ्तार करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटा होने की बात भी सामने आई है।

    हादसे के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर चीख पुकार मच गई। सड़क से गुजर रहे राहगीरों और यूपीडा के सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव का काम शुरू किया। कार के दरवाजे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे जिसके चलते अंदर फंसे लोगों को निकालना आसान नहीं था। सुरक्षाकर्मियों और राहगीरों ने काफी मशक्कत के बाद कार के गेट तोड़कर घायलों और अन्य यात्रियों को बाहर निकाला। इसके बाद सभी को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया।

    अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान देवरिया निवासी नित्या प्रजापति उम्र 22 वर्ष इरफान अंसारी उम्र 20 वर्ष और भागलपुर निवासी अनिकेत उम्र 24 वर्ष के रूप में हुई है। तीन अन्य लोग घायल हुए हैं जिनमें देवरिया निवासी आनंद यादव उम्र 23 वर्ष राजू उम्र 22 वर्ष और पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के रहने वाले जयंतो शर्मा उम्र 30 वर्ष शामिल हैं। सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए अयोध्या मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

    घटना के समय कार में सवार लोग सफर के दौरान सो रहे थे। घायल जयंतो शर्मा ने बताया कि टक्कर के बाद अचानक उनकी नींद खुली। उन्होंने देखा कि कार ट्रक के पिछले हिस्से में घुस चुकी थी। कुछ साथी गंभीर रूप से घायल अवस्था में फंसे हुए थे। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया था और यात्रियों को बाहर निकालने के लिए दरवाजे तोड़ने पड़े।

    प्रारंभिक जांच के मुताबिक कार की रफ्तार काफी तेज थी और चालक को संभवतः नींद या झपकी आने के कारण आगे चल रहे ट्रक का समय रहते अंदाजा नहीं हो सका। तेज रफ्तार में चल रही कार सीधे ट्रक के पिछले हिस्से से जा टकराई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दुर्घटना की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों को लेकर अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर लंबी दूरी की यात्रा के दौरान नींद और तेज रफ्तार के खतरनाक मेल को सामने ला दिया है। खासकर देर रात और सुबह के समय वाहन चलाते वक्त चालक की थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। तीन युवा टेनिस खिलाड़ियों की अचानक हुई मौत से उनके परिवारों और परिचितों में शोक की लहर है। पुलिस ने मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

  • आधार कार्ड में नाम बदलने के नियम बदले, छोटी स्पेलिंग गलती से लेकर शादी और पूरे नाम के बदलाव तक जानें नई प्रक्रिया

    आधार कार्ड में नाम बदलने के नियम बदले, छोटी स्पेलिंग गलती से लेकर शादी और पूरे नाम के बदलाव तक जानें नई प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग ठीक कराने, शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलने और पूरा नाम बदलने के लिए अब बदलाव की श्रेणी के अनुसार प्रक्रिया अपनानी होगी। UIDAI की नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP 18 सितंबर 2026 से लागू है। इसमें नाम में होने वाले अलग-अलग बदलावों के लिए अलग नियम और दस्तावेज तय किए गए हैं। इसलिए हर तरह के नाम सुधार के लिए एक जैसे कागजात लेकर आधार केंद्र जाना जरूरी नहीं है।

    नाम में मामूली गलती को माइनर नेम चेंज की श्रेणी में रखा गया है। इसमें नाम की छोटी स्पेलिंग गलती सुधारना, नाम के शुरुआती अक्षर या छोटे रूप को पूरा लिखना, बीच या आखिरी नाम जोड़ना अथवा हटाना और नाम के क्रम में बदलाव करना शामिल है। यदि नाम का उच्चारण लगभग समान है, लेकिन उसकी स्पेलिंग में मामूली अंतर है, तो उसे भी छोटे बदलाव के रूप में देखा जा सकता है। इसके अलावा नाम में गलत जगह लगाए गए डॉट और बड़े या छोटे अक्षरों से जुड़ी गड़बड़ी को भी ठीक कराया जा सकता है।

    शादी या तलाक के बाद सरनेम बदलने के लिए नई SOP में अलग व्यवस्था है। ऐसे मामलों में तय प्रारूप का Annexure-D शपथ पत्र और पहचान का प्रमाण देना होगा। शपथ पत्र में यह स्पष्ट किया जाता है कि नाम में बदलाव शादी या तलाक के कारण किया जा रहा है और इससे संबंधित व्यक्ति की पहचान नहीं बदल रही है।

    कुछ मामलों में आधार बनवाते समय ही नाम गलत दर्ज हो जाता है। ऐसा तब हो सकता है जब व्यक्ति द्वारा दिए गए दस्तावेज में नाम सही हो, लेकिन आधार में जानकारी दर्ज करते समय डेटा एंट्री की गलती हो जाए। UIDAI ऐसे मामलों को डेटा एंट्री की त्रुटि के रूप में मानता है। वयस्कों के मामले में Annexure-B के तहत शपथ पत्र के साथ पहचान या रिश्ते का प्रमाण मांगा जा सकता है। नाबालिगों के लिए Annexure-C और संबंधित दस्तावेज लागू होंगे। यदि आधार में अंग्रेजी में नाम सही है, लेकिन स्थानीय भाषा में गलत दर्ज है, तो उसे भी सुधरवाने की व्यवस्था है।

    पूरे नाम में बदलाव के लिए नियम अलग हैं। यदि कोई व्यक्ति अपना पूरा नाम बदलना चाहता है या बदलाव इतना बड़ा है कि उसकी पहचान में परिवर्तन माना जाए, तो इसे मेजर नेम चेंज की श्रेणी में रखा जाता है। ऐसे मामलों में गजट नोटिफिकेशन की जरूरत पड़ सकती है। मौजूदा व्यवस्था के अनुसार पूरे नाम में बदलाव के लिए राज्य या केंद्र सरकार का गजट नोटिफिकेशन और पुराने नाम वाला पहचान प्रमाण जरूरी होता है।

    आधार में नाम अपडेट कराने के लिए सबसे पहले यह तय करना होगा कि बदलाव किस श्रेणी में आता है। इसके बाद संबंधित श्रेणी में जरूरी दस्तावेज जुटाने होंगे। जहां आवश्यक हो, वहां निर्धारित शपथ पत्र या घोषणा तैयार करनी होगी। इसके बाद आधार एनरोलमेंट या अपडेट सेंटर पर जाकर सहायक दस्तावेजों के साथ नाम अपडेट करने का अनुरोध जमा करना होगा।

    रिक्वेस्ट जमा करने के बाद जरूरी वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी करनी होगी और उसका एक्नॉलेजमेंट लेना होगा। इसी एक्नॉलेजमेंट में उपलब्ध जानकारी के जरिए आधार अपडेट रिक्वेस्ट का स्टेटस ट्रैक किया जा सकता है। इस तरह नाम में छोटे सुधार से लेकर बड़े बदलाव तक प्रक्रिया संबंधित श्रेणी और उसके लिए निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर पूरी होगी।

  • वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा

    वृंदावन गुरुकुल में जहरीली गैस का कहर, टैंक में उतरे 4 छात्रों की मौत, साथी को बचाने की कोशिश बनी जानलेवा


    वृंदावन । वृंदावन के एक गुरुकुल में मंगलवार रात दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। महर्षि पाणिनि संस्कृत गुरुकुलम में पानी के टैंक की सफाई करने उतरे चार छात्रों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। इस हादसे में एक अन्य छात्र भी बेहोश हो गया जिसे गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। घटना के बाद पूरे गुरुकुल परिसर में अफरा तफरी मच गई और छात्रों तथा कर्मचारियों में दहशत फैल गई।

    जानकारी के मुताबिक हादसा रात करीब 10 बजे हुआ। गुरुकुल में मौजूद छात्र पानी के एक गहरे टैंक की सफाई कर रहे थे। बताया जा रहा है कि टैंक से पहले मोटर के जरिए पानी बाहर निकाला गया और इसके बाद बचा हुआ पानी बाल्टी से निकाला गया। पानी लगभग खत्म होने के बाद एक छात्र टैंक के अंदर सफाई के लिए उतरा लेकिन कुछ ही देर में वह बेहोश होकर गिर गया। ऊपर मौजूद छात्रों ने उसे आवाज लगाई लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला तो उसे बचाने के लिए दूसरे छात्र भी एक के बाद एक टैंक में उतरते चले गए।

    बताया जा रहा है कि टैंक के भीतर जहरीली गैस मौजूद थी जिसकी चपेट में आने से सभी छात्र बेहोश हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू अभियान चलाकर सभी छात्रों को टैंक से बाहर निकाला गया और तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने मनु कटारे उम्र 20 वर्ष देवांश उम्र 17 वर्ष विशु उम्र 18 वर्ष और आर्यन उम्र 18 वर्ष को मृत घोषित कर दिया। वहीं रुद्राक्ष उम्र 18 वर्ष की हालत गंभीर बताई गई।

    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।
    मृत छात्रों में मनु कटारे और देवांश मध्य प्रदेश के जबलपुर और विदिशा के रहने वाले थे जबकि आर्यन कौशांबी और विशु मेरठ का निवासी था। हादसे की सूचना मिलते ही छात्रों के परिवारों में मातम पसर गया। गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य छात्र भी इस घटना से सदमे में हैं।

    वृंदावन के चैतन्य विहार स्थित इस गुरुकुल में करीब 120 छात्र पढ़ते हैं। तीन मंजिला इमारत में 43 कमरे हैं और यह संस्थान पिछले करीब तीन वर्षों से संचालित बताया जा रहा है। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह भी मौके पर पहुंचे और गुरुकुल से जुड़े लोगों तथा छात्रों से घटना की जानकारी ली।

    डीएम ने बताया कि टैंक करीब 12 फीट गहरा था और उसमें बदबू आने के बाद उसकी सफाई की जा रही थी। प्रारंभिक तौर पर जहरीली गैस के कारण छात्रों के बेहोश होने और चार छात्रों की मौत की आशंका जताई गई है। प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि टैंक में जहरीली गैस कैसे बनी और सफाई के दौरान सुरक्षा के जरूरी इंतजाम क्यों नहीं किए गए।

    हादसे के बाद गुरुकुल के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री ने भी घटना का संज्ञान लिया है और पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया गया है। हादसे ने एक बार फिर बंद टैंकों और गहरे जलाशयों की सफाई के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी के खतरनाक परिणाम सामने ला दिए हैं।

  • डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर, एक्सपेंस रेशियो और निवेशक की जरूरत से समझें सही प्लान

    डायरेक्ट और रेगुलर म्यूचुअल फंड में क्या अंतर, एक्सपेंस रेशियो और निवेशक की जरूरत से समझें सही प्लान

    नई दिल्ली: म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय एक ही स्कीम के तहत डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का विकल्प मिलता है। दोनों प्लान में फंड मैनेजर और निवेश का पोर्टफोलियो समान हो सकता है, लेकिन इनके खर्च और मिलने वाले रिटर्न में अंतर हो सकता है। इसका प्रमुख कारण एक्सपेंस रेशियो है। डायरेक्ट प्लान में निवेशक म्यूचुअल फंड कंपनी या डायरेक्ट प्लान की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे निवेश करता है और बीच में डिस्ट्रीब्यूटर नहीं होता। वहीं, रेगुलर प्लान में निवेश डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट के माध्यम से किया जाता है।

    डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के बीच सबसे बड़ा अंतर डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़े खर्च का है। डायरेक्ट प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन शामिल नहीं होता, इसलिए इसका एक्सपेंस रेशियो आमतौर पर रेगुलर प्लान से कम रहता है। रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर से जुड़ा खर्च शामिल होने के कारण उसका एक्सपेंस रेशियो अधिक हो सकता है। इसी वजह से दोनों प्लान की एनएवी अलग-अलग होती है। लंबे समय तक निवेश करने पर खर्च में छोटा अंतर भी कंपाउंडिंग के कारण कुल निवेश राशि पर असर डाल सकता है। हालांकि, हर स्कीम में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के खर्च का अंतर समान नहीं होता। इसलिए निवेश से पहले संबंधित स्कीम का वास्तविक टोटल एक्सपेंस रेशियो यानी TER देखना जरूरी है।

    रेगुलर प्लान को केवल इसलिए खराब विकल्प नहीं माना जा सकता कि इसमें खर्च अधिक होता है। पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले ऐसे लोगों के लिए यह उपयोगी हो सकता है, जिन्हें खुद स्कीम चुनने, जोखिम समझने या पोर्टफोलियो संभालने में परेशानी होती है। ऐसे निवेशकों को डिस्ट्रीब्यूटर या एजेंट से निवेश संबंधी मदद और मार्गदर्शन मिल सकता है। इस सुविधा की लागत निवेशक को अधिक एक्सपेंस रेशियो के रूप में चुकानी पड़ती है। इसलिए रेगुलर प्लान चुनने का मतलब केवल अधिक खर्च करना नहीं है, बल्कि इसके साथ मिलने वाली निवेश संबंधी सहायता को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

    वहीं, डायरेक्ट प्लान उन निवेशकों के लिए उपयोगी हो सकता है जो अलग-अलग म्यूचुअल फंड की तुलना कर सकते हैं, जोखिम को समझते हैं और अपने निवेश की नियमित निगरानी के लिए समय निकाल सकते हैं। इसमें निवेशक को स्कीम चुनने से लेकर निवेश करने और पोर्टफोलियो पर नजर रखने तक की जिम्मेदारी खुद निभानी होती है। केवल इस आधार पर डायरेक्ट प्लान चुनना सही नहीं होगा कि इसमें रिटर्न अधिक दिखाई देता है। कम खर्च इसका एक प्रमुख लाभ है, लेकिन निवेश से जुड़े फैसले और उनकी जिम्मेदारी भी निवेशक की ही होती है।

    इसलिए डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के बीच चुनाव केवल एक्सपेंस रेशियो देखकर नहीं करना चाहिए। निवेशक को अपनी जानकारी, जोखिम समझने की क्षमता और निवेश को संभालने के लिए उपलब्ध समय को भी ध्यान में रखना चाहिए। अगर निवेशक खुद रिसर्च करके फंड चुन सकता है और पोर्टफोलियो की निगरानी कर सकता है तो डायरेक्ट प्लान पर विचार किया जा सकता है। वहीं, निवेश के फैसलों में लगातार सहायता और मार्गदर्शन की जरूरत होने पर रेगुलर प्लान उपयोगी हो सकता है। दोनों विकल्पों में चुनाव निवेशक की अपनी जरूरत और निवेश संभालने की क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।

  • घर में धन नहीं टिकता और बढ़ते रहते हैं विवाद, 7 अक्टूबर को वास्तु के इन उपायों से बदलें माहौल

    घर में धन नहीं टिकता और बढ़ते रहते हैं विवाद, 7 अक्टूबर को वास्तु के इन उपायों से बदलें माहौल


    नई दिल्ली। घर हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और वास्तु शास्त्र में घर की दिशा और वहां रखी वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में वास्तु से जुड़े नियमों की अनदेखी होने पर नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ सकता है। इसका असर परिवार के सदस्यों के मानसिक तनाव आर्थिक स्थिति और आपसी संबंधों पर पड़ने की धार्मिक मान्यता है। अगर घर में बार बार बिना किसी स्पष्ट कारण के तनाव बना रहता है या धन संबंधी परेशानियां बढ़ रही हैं तो वास्तु के कुछ आसान उपाय किए जा सकते हैं। 7 अक्टूबर को भी घर के वातावरण को सकारात्मक बनाने के लिए कुछ सामान्य वास्तु उपाय किए जा सकते हैं।

    वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि मुख्य द्वार से ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इसलिए घर के प्रवेश द्वार को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखना चाहिए। दरवाजे के आसपास अनावश्यक सामान या कूड़ा जमा नहीं होने देना चाहिए। सुबह घर की साफ सफाई करने के बाद मुख्य द्वार पर पानी का छिड़काव करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इससे घर के वातावरण में सकारात्मकता बढ़ती है।

    घर में टूटे हुए सामान को लंबे समय तक रखने से भी बचना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में खराब घड़ी टूटे बर्तन बंद पड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बेकार सामान को नकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे सामान को घर से हटाने से स्थान व्यवस्थित होता है और वातावरण भी बेहतर महसूस हो सकता है। विशेष रूप से घर के उत्तर पूर्व दिशा वाले हिस्से को साफ और हल्का रखने की सलाह वास्तु में दी जाती है। इस स्थान पर भारी सामान जमा करने से बचना चाहिए।

    रसोई को भी घर की ऊर्जा का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। वास्तु के अनुसार रसोई में गैस चूल्हे और पानी के स्थान को व्यवस्थित रखना चाहिए। सिंक में लंबे समय तक गंदे बर्तन जमा करके नहीं रखने चाहिए। घर में भोजन बनाते समय स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि साफ रसोई घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में मदद करती है। इसी तरह सोने के कमरे में अनावश्यक सामान और बहुत अधिक अव्यवस्था रखने से बचना चाहिए।

    वास्तु से जुड़े उपायों में पौधों का भी विशेष महत्व बताया गया है। घर में ऐसे पौधे लगाए जा सकते हैं जिन्हें वहां की रोशनी और मौसम के अनुसार आसानी से संभाला जा सके। सूखे या मुरझाए हुए पौधों को घर में लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। पूजा स्थान को भी साफ रखना जरूरी माना जाता है। रोजाना दीपक जलाना और प्रार्थना करना धार्मिक रूप से सकारात्मक माना जाता है। हालांकि वास्तु उपाय आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक उपचार या आर्थिक समस्या के निश्चित समाधान के रूप में नहीं देखना चाहिए। घर को स्वच्छ व्यवस्थित और शांतिपूर्ण रखना सबसे महत्वपूर्ण है। 7 अक्टूबर को इन छोटे उपायों के साथ अगर परिवार के लोग आपसी सहयोग और सकारात्मक सोच बनाए रखें तो घर का माहौल अधिक सुखद और शांत महसूस हो सकता है।

  • शेयर बाजार में आज बन सकती है तेजी की तस्वीर, इन सेक्टर्स और शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर

    शेयर बाजार में आज बन सकती है तेजी की तस्वीर, इन सेक्टर्स और शेयरों पर रहेगी निवेशकों की नजर


    नई दिल्ली। आज शेयर बाजार में कारोबार के दौरान निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ घरेलू बाजार की दिशा पर रहेगी। बीते कारोबारी सत्रों में बाजार में उतार चढ़ाव देखने को मिला है ऐसे में आज भी सेंसेक्स और निफ्टी की चाल पर निवेशकों की खास नजर रहने वाली है। बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक शेयर बाजारों का रुख विदेशी निवेशकों की गतिविधियां कच्चे तेल की कीमतें रुपये की चाल और आर्थिक आंकड़ों की भूमिका अहम रह सकती है। निवेशकों के लिए जरूरी होगा कि वे केवल बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करने के बजाय कंपनियों के प्रदर्शन और बाजार की मौजूदा स्थिति को समझकर फैसला लें।

    आज के कारोबार में बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और मेटल जैसे प्रमुख सेक्टर चर्चा में रह सकते हैं। इन सेक्टरों में होने वाली खरीदारी या बिकवाली का सीधा असर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दिखाई दे सकता है। खासतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकती है। अगर घरेलू बाजार को वैश्विक संकेतों से समर्थन मिलता है और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव कम होता है तो बाजार में खरीदारी लौट सकती है। दूसरी ओर कमजोर वैश्विक संकेत और ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली बाजार में दबाव बढ़ा सकती है।

    निवेशकों की नजर आज विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों के रुख पर भी रहेगी। विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी बाजार के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है जबकि भारी बिकवाली से बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी आईटी और निर्यात से जुड़ी कंपनियों के शेयरों को प्रभावित कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर भारत की अर्थव्यवस्था और कुछ प्रमुख कंपनियों पर पड़ सकता है इसलिए कमोडिटी बाजार के संकेत भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

    बाजार में कारोबार करने वाले निवेशकों के लिए आज सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर भी अहम रहेंगे। अगर निफ्टी अपने महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर मजबूती बनाए रखता है तो खरीदारी का भरोसा बढ़ सकता है जबकि अहम सपोर्ट स्तर टूटने पर बिकवाली का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। सेंसेक्स में भी इसी तरह ऊपरी और निचले स्तरों पर बाजार की प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों को बाजार में अचानक आने वाली तेजी या गिरावट के आधार पर भावनात्मक फैसला लेने से बचना चाहिए।

    शेयर बाजार में हमेशा जोखिम बना रहता है और किसी भी शेयर की पिछली तेजी इस बात की गारंटी नहीं होती कि आगे भी उसमें वैसा ही प्रदर्शन देखने को मिलेगा। इसलिए निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स कमाई कारोबार की स्थिति कर्ज और भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखकर निवेश का निर्णय लेना चाहिए। आज के कारोबार में बाजार की शुरुआत भले ही सकारात्मक या नकारात्मक संकेतों के साथ हो लेकिन पूरे दिन वैश्विक संकेतों और संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों के कारण तस्वीर बदल सकती है। ऐसे में सतर्क रणनीति अपनाना और जोखिम के अनुसार निवेश करना ही बेहतर विकल्प माना जा सकता है।

  • बुधवार व्रत की पूरी विधि जानिए, पूजा के इस खास तरीके से बुध ग्रह होंगे मजबूत और मिलेगी सफलता

    बुधवार व्रत की पूरी विधि जानिए, पूजा के इस खास तरीके से बुध ग्रह होंगे मजबूत और मिलेगी सफलता


    नई दिल्ली। बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध ग्रह को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि वाणी तर्क क्षमता कारोबार शिक्षा और संचार का कारक माना गया है। मान्यता है कि बुधवार के दिन विधि विधान से व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को भगवान गणेश का आशीर्वाद मिलता है और कुंडली में कमजोर बुध की स्थिति को मजबूत करने में सहायता मिल सकती है। बुधवार व्रत उन लोगों के लिए विशेष माना जाता है जो शिक्षा के क्षेत्र में सफलता चाहते हैं या व्यापार नौकरी और करियर में लगातार आने वाली परेशानियों से चिंतित रहते हैं। इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा करने से मानसिक एकाग्रता बढ़ने और निर्णय लेने की क्षमता बेहतर होने की धार्मिक मान्यता है।

    बुधवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद भगवान गणेश का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद पूजा स्थल की साफ सफाई करके भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। गणेश जी को दूर्वा अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है। इसके साथ ही उन्हें सिंदूर अक्षत फूल और मोदक या लड्डू का भोग लगाया जा सकता है। पूजा के दौरान भगवान गणेश के मंत्र का जाप करना चाहिए। गणेश जी की आराधना के साथ बुध ग्रह को प्रसन्न करने के लिए बुध देव का भी ध्यान किया जा सकता है। इस दौरान मन को शांत रखते हुए अपनी मनोकामना भगवान के सामने रखनी चाहिए।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार के दिन हरे रंग का विशेष महत्व माना जाता है। इसलिए इस दिन हरे वस्त्र पहनना या हरे रंग की वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद व्यक्ति को हरी मूंग हरी सब्जियां या अन्य उपयोगी सामग्री का दान किया जा सकता है। माना जाता है कि इससे बुध ग्रह से जुड़े शुभ प्रभाव बढ़ते हैं। व्रत रखने वाला व्यक्ति अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार कर सकता है। पूरे दिन सात्विक विचार रखते हुए किसी के प्रति गलत भावना नहीं रखनी चाहिए और संभव हो तो क्रोध व विवाद से बचना चाहिए।

    बुधवार व्रत में भगवान गणेश की पूजा के बाद गणेश आरती करनी चाहिए। दिनभर भगवान का स्मरण करते हुए शाम के समय दोबारा पूजा की जा सकती है। इसके बाद फलाहार या सात्विक भोजन से व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि लगातार श्रद्धा और नियम के साथ बुधवार का व्रत करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और बुद्धि तथा विवेक से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है। हालांकि धार्मिक उपायों का प्रभाव व्यक्ति की आस्था और मान्यताओं से जुड़ा होता है। इसलिए व्रत करते समय दिखावे के बजाय श्रद्धा और संयम को महत्व देना चाहिए। बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा के साथ जरूरतमंदों की सहायता करना भी शुभ माना जाता है। इससे व्यक्ति के भीतर सेवा और सकारात्मकता की भावना बढ़ती है और यही बुधवार व्रत की साधना को अधिक सार्थक बनाती है।

  • ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें

    ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में नहीं पहुंचे ओवैसी, बोले- मेरा क्या काम, बताईं 2 बड़ी मांगें


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंगलवार को INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AIMIM प्रमुख और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी शामिल नहीं हुए। ओवैसी ने इसकी वजह साफ करते हुए कहा कि उनकी पार्टी INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। हालांकि, उन्होंने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया में बदलाव और SIR को लेकर अपनी अलग मांगें सामने रखीं।

    ‘मैं INDIA का हिस्सा नहीं, तो मेरा क्या काम’
    ओवैसी से जब पूछा गया कि वह ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के प्रदर्शन में क्यों शामिल नहीं हुए, तो उन्होंने कहा कि AIMIM INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “मैं उसका हिस्सा नहीं हूं, तो किस्सा ही खत्म। मैं उसका हिस्सा नहीं हूं। बेगानी शादी में मेरा क्या काम।”

    हालांकि, प्रदर्शन में शामिल नहीं होने के बावजूद ओवैसी ने चुनाव आयोग की व्यवस्था और SIR को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। उनका कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में सबसे बड़ी समस्या मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया है।

    CEC के चयन में CJI को शामिल करने की मांग
    ओवैसी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनने की मौजूदा प्रक्रिया कार्यपालिका के पक्ष में है और इसमें बदलाव होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि CEC की नियुक्ति करने वाले पैनल में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को शामिल किया जाए।

    मौजूदा कानून के तहत CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति में लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। ओवैसी लंबे समय से इस व्यवस्था में CJI को शामिल किए जाने की मांग करते रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव जरूरी है।

    SIR को लेकर भी विरोध
    ओवैसी ने दूसरी बड़ी आपत्ति मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जताई। उन्होंने कहा कि बिहार में SIR शुरू होने के समय AIMIM ने भी इसका विरोध किया था और पार्टी की ओर से मतदाताओं से संबंधित दस्तावेज जमा किए गए थे।

    ओवैसी ने SIR की तुलना NRC से करते हुए इसे लेकर अपनी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इसे स्वीकार नहीं करती और इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है।

    यह भी ध्यान देने वाली बात है कि SIR को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां और चुनाव आयोग का पक्ष अलग-अलग हैं। विपक्षी दल प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के तौर पर इसका बचाव करता रहा है।

    AAP और DMK भी मंगलवार के प्रदर्शन से दूर
    मंगलवार को दिल्ली में हुए INDIA गठबंधन के प्रदर्शन में AAP और DMK भी शामिल नहीं हुए। हालांकि, AAP ने चुनाव आयोग के खिलाफ आगे होने वाले विरोध प्रदर्शन से दूरी नहीं बनाई है। पार्टी नेता सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर होने वाले प्रदर्शन में AAP शामिल होगी।

    उन्होंने कहा कि जब भी सड़क पर विरोध प्रदर्शन होगा, AAP के कार्यकर्ता उसमें शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कांग्रेस और वाम दलों के साथ AAP भी इस प्रदर्शन में हिस्सा लेगी।

    राहुल-प्रियंका ने आकाशवाणी भवन परिसर में दिया धरना
    मंगलवार को INDIA गठबंधन के सांसदों ने संसद से चुनाव आयोग की ओर मार्च किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR को रोकना और मतदाता सूची से हटाए गए नामों को बहाल करना शामिल था।

    मार्च को पुलिस ने रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में धरना शुरू कर दिया। करीब आठ-नौ घंटे तक चले इस विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।

    चुनाव आयोग बोला- शाम 4 बजे तक नहीं मांगा था समय
    विपक्ष के प्रदर्शन के बाद चुनाव आयोग ने मंगलवार रात अपने पक्ष में स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने अपने अधिकृत प्रतिनिधि के जरिए बैठक के लिए औपचारिक समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस ने उसे बताया कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों से बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया पहले से लागू है और सभी दल इससे अवगत हैं।

    आयोग के अनुसार, जब बैठक की जगह को लेकर जानकारी मिली तो संसद भवन परिसर में बैठक का प्रस्ताव सामने आया। आयोग ने कहा कि उसके प्रोटोकॉल के मुताबिक राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल से बैठक निर्वाचन आयोग परिसर में ही होती है। उसने ज्ञापन लेने के लिए वरिष्ठ अधिकारी भेजने का प्रस्ताव भी दिया था।

    इस तरह एक तरफ INDIA गठबंधन CEC के इस्तीफे और SIR को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, वहीं ओवैसी ने गठबंधन के प्रदर्शन से अलग रहते हुए नियुक्ति प्रक्रिया में CJI को शामिल करने और SIR को खत्म करने की अपनी मांग दोहराई है।

  • 2015 में यमन युद्ध से दूर रहा था पाकिस्तान, अब सऊदी के साथ हूतियों के खिलाफ कितना कारगर होगा गठजोड़?

    2015 में यमन युद्ध से दूर रहा था पाकिस्तान, अब सऊदी के साथ हूतियों के खिलाफ कितना कारगर होगा गठजोड़?


    नई दिल्ली। 2015 में सऊदी अरब के आग्रह के बावजूद पाकिस्तान ने यमन में हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया था। अब 11 साल बाद सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच बने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते को लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या यह गठजोड़ हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य ताकत को निर्णायक बढ़त दिला पाएगा?

    2015 में संसद ने युद्ध से दूर रहने का फैसला किया था
    मार्च 2015 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान से यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अभियान के लिए लड़ाकू विमान, नौसैनिक जहाज और सैनिक उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इस मुद्दे पर पाकिस्तान की संसद में पांच दिन तक बहस हुई। 10 अप्रैल 2015 को संसद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यमन संघर्ष में पाकिस्तान को तटस्थ रखने का फैसला किया।

    हालांकि, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के समर्थन को स्पष्ट रखा था। संसद के प्रस्ताव में कहा गया था कि सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता या मक्का-मदीना के पवित्र स्थलों को खतरा होने की स्थिति में पाकिस्तान उसके साथ खड़ा रहेगा। उस समय पाकिस्तान ने संघर्ष का सैन्य हिस्सा बनने के बजाय राजनयिक भूमिका निभाने पर जोर दिया था।

    11 साल बाद बदले हालात, लागू हुआ मक्का रक्षा समझौता
    7 अगस्त 2026 को सऊदी अरब के मक्का में सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये ने संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के मुताबिक, तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला बाकी दोनों पर हमले के तौर पर माना जाएगा और रक्षा सहयोग को मजबूत किया जाएगा।

    यमन में हूतियों के हमले बढ़ने के बीच 5 अक्टूबर को रियाद में समझौते की रणनीतिक समिति की आपात बैठक हुई। इसके बाद तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा प्रतिबद्धताओं को लागू करने और सऊदी अरब में आवश्यक सैन्य बलों तथा क्षमताओं की तेजी से तैनाती की दिशा में कदम उठाने पर सहमति जताई। हालांकि, कितने सैनिक भेजे जाएंगे और उनकी सटीक भूमिका क्या होगी, इसका पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    कागज पर बड़ी सैन्य ताकत, लेकिन यमन में चुनौती अलग
    सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये की संयुक्त सैन्य क्षमता हूतियों की तुलना में काफी बड़ी है। सऊदी अरब के पास आधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइल और एयर डिफेंस सिस्टम हैं। पाकिस्तान बड़ी थल सेना और वायुसेना के साथ सैन्य अभियान का अनुभव रखता है। वहीं तुर्किये के पास ड्रोन, मिसाइल और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसी क्षमताएं हैं।

    लेकिन यमन का भूगोल किसी भी बड़ी सैन्य ताकत के लिए चुनौती पैदा करता है। उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाके, गुफाएं और सुरंगें हूतियों को छिपकर हमला करने की क्षमता देते हैं। उनके पास मोबाइल मिसाइल लॉन्चर और अपेक्षाकृत बिखरी हुई सैन्य संरचना भी है। ऐसे में सिर्फ हवाई हमलों या बड़ी सैन्य ताकत के दम पर उन्हें पूरी तरह पराजित करना आसान नहीं होगा।

    सऊदी अरब पहले भी लंबी लड़ाई में उलझ चुका है
    सऊदी नेतृत्व वाला गठबंधन 2015 से यमन में सैन्य अभियान चलाता रहा है, लेकिन वह हूतियों को पूरी तरह खत्म नहीं कर सका। बाद के वर्षों में अमेरिका और ब्रिटेन ने भी हूती ठिकानों पर हमले किए, लेकिन संगठन की मिसाइल और ड्रोन क्षमता बनी रही।

    मौजूदा संघर्ष में भी हूतियों ने सऊदी क्षेत्र और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता दिखाई है। 7 अक्टूबर को भी हूतियों ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जबकि सऊदी नेतृत्व वाली सेनाएं यमन में अपने अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।

    पाकिस्तान और तुर्किये की भूमिका निर्णायक हो सकती है, लेकिन…
    विश्लेषण के मुताबिक, पाकिस्तान और तुर्किये सऊदी अरब की एयर डिफेंस, खुफिया जानकारी, निगरानी और सैन्य तकनीकी क्षमताओं को मजबूत कर सकते हैं। तुर्किये ने पहले ही कहा है कि वह सऊदी अरब की जरूरत के मुताबिक सैन्य तकनीकी सहायता देने के लिए तैयार है।

    हालांकि, मौजूदा समझौते का सार्वजनिक स्वरूप मुख्य रूप से सऊदी अरब की रक्षा और सामूहिक प्रतिरोध क्षमता मजबूत करने पर केंद्रित है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान और तुर्किये यमन के अंदर सीधे जमीनी युद्ध या हूती ठिकानों के खिलाफ संयुक्त हमलों में किस स्तर तक शामिल होंगे। सितंबर में हुई सैन्य बैठकों के बाद भी उपलब्ध बयानों में संयुक्त जमीनी अभियान या सीधे हमलों की घोषणा नहीं हुई थी।

    हूतियों को पूरी तरह हराना अब भी बड़ी चुनौती
    सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्किये का सैन्य सहयोग मिलने से उसकी रक्षा क्षमता और यमन में उसके समर्थित बलों को बढ़त मिल सकती है। तीनों देशों की संयुक्त ताकत हूतियों पर भारी दबाव डाल सकती है और उनके मिसाइल-ड्रोन हमलों से निपटने में मदद कर सकती है।

    लेकिन सना और उत्तरी यमन के पहाड़ी इलाकों पर कब्जा कर हूतियों के संगठनात्मक और सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना अलग चुनौती है। यमन की लंबी लड़ाई का अनुभव भी यही बताता है कि हवाई शक्ति और आधुनिक हथियारों के बावजूद हूतियों को निर्णायक रूप से समाप्त करना आसान नहीं रहा है। इसलिए पाकिस्तान और तुर्किये की भागीदारी सऊदी अरब की स्थिति मजबूत कर सकती है, लेकिन इससे हूतियों का पूरी तरह सफाया तय नहीं माना जा सकता।

  • सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ

    सुबह मार्च, दोपहर में आकाशवाणी भवन में धरना, रात में हिरासत, राहुल-प्रियंका के प्रदर्शन में दिनभर क्या-क्या हुआ


    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ INDIA ब्लॉक के प्रदर्शन ने मंगलवार को कई घंटे तक दिल्ली की सड़कों पर राजनीतिक हलचल बनाए रखी। सुबह चुनाव आयोग की ओर मार्च से शुरू हुआ विरोध दोपहर में आकाशवाणी भवन परिसर में धरने में बदल गया और करीब नौ घंटे बाद रात में दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। दोनों को बाद में रिहा कर दिया गया।

    INDIA ब्लॉक के नेता SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग से मिलने और ज्ञापन सौंपने की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत बैठक का समय नहीं मांगा था।

    सुबह 11 बजे शुरू हुआ मार्च
    मंगलवार सुबह INDIA ब्लॉक के सांसद संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च के लिए निकले। राहुल गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के अभिषेक बनर्जी, जया बच्चन, महुआ मोइत्रा समेत कई विपक्षी नेता मौजूद थे।

    मार्च को संसद मार्ग पर बैरिकेड लगाकर रोक दिया गया। इसके बाद कई नेता सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन के कारण पार्लियामेंट स्ट्रीट पर काफी देर तक यातायात प्रभावित रहा। राहुल गांधी के हाथ में एक तख्ती भी थी, जिस पर लिखा था- “Gyanesh, it’s done bro.” प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि उन्हें CEC से मिलने दिया जाए।

    बैरिकेड पर चढ़े राहुल, लहराया तिरंगा
    मार्च रोके जाने के दौरान राहुल गांधी एक बैरिकेड पर चढ़ गए और हाथ में तिरंगा लेकर उसे लहराया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को हिरासत में लेना शुरू किया। हालांकि, उस समय राहुल गांधी को हिरासत में नहीं लिया गया था। इसके बाद घटनाक्रम ने अचानक नया मोड़ लिया।

    प्रियंका से बात की और आकाशवाणी भवन पहुंचे
    राहुल गांधी ने आकाशवाणी भवन के परिसर में मौजूद अपनी बहन प्रियंका गांधी से बातचीत की और फिर रिसेप्शन गेट की ओर बढ़ गए। वहां कर्मचारियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, जिससे कुछ देर तनाव की स्थिति बनी। इसके बाद राहुल गांधी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ अंदर चले गए।

    कुछ देर बाद प्रियंका गांधी भी पुलिस की बस से बाहर आईं और अपने भाई के साथ प्रदर्शन में शामिल हो गईं। दोनों आकाशवाणी भवन के गेट नंबर-4 के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए। देखते ही देखते कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए।

    पेड़ के नीचे शुरू हुआ धरना
    राहुल और प्रियंका के धरने की जानकारी फैलते ही आकाशवाणी भवन के आसपास भीड़ बढ़ने लगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, दीपेंद्र हुड्डा, चरणजीत सिंह चन्नी और अन्य नेता भी वहां पहुंचे। धरने की तैयारी के लिए बरगद के पेड़ के नीचे मैट और बाद में गद्दे बिछाए गए। राहुल गांधी ज्यादातर समय बैठे रहे, जबकि प्रियंका गांधी पुलिस अधिकारियों से बातचीत करती रहीं।

    कुछ समय बाद प्रदर्शनकारियों के लिए पानी और खाने-पीने का सामान भी पहुंचा। रिपोर्टों के मुताबिक, चिप्स, भुजिया, चॉकलेट, पानी और सॉफ्ट ड्रिंक के पैकेट मंगाए गए। शाम होने के बाद मच्छर भगाने वाली क्रीम भी धरना स्थल तक पहुंचाई गई।

    राहुल ने कहा- जब तक EC नहीं मिलेगा, धरना जारी रहेगा
    दोपहर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वह लोकतंत्र की रक्षा के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जब तक चुनाव आयोग INDIA ब्लॉक के सांसदों से मिलने का भरोसा नहीं देता, तब तक वह वहां से नहीं हटेंगे।

    राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि देश के साथ जो किया गया है, वह “देशद्रोह” है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग ने विपक्ष के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है।

    चुनाव आयोग ने क्या कहा?
    प्रदर्शन के बीच चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर स्थिति स्पष्ट की। आयोग ने कहा कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अधिकृत प्रतिनिधियों के माध्यम से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था।

    आयोग के मुताबिक, शाम करीब 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना और ज्ञापन सौंपना चाहता है। आयोग ने कहा कि राजनीतिक दलों के साथ बैठक के लिए 2025 में तय प्रक्रिया मौजूद है और उसी के तहत आपसी सहमति से समय तय किया जाना चाहिए।

    बाद की रिपोर्टों के मुताबिक, विपक्षी सांसदों की ओर से करीब 240 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल मिलने की बात सामने आई थी। चुनाव आयोग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार अपने परिसर में मिलने की बात कही, जबकि विपक्ष की ओर से अलग स्थान पर मिलने का प्रस्ताव रखा गया था।

    शाम ढली, पुलिस ने बढ़ाई कार्रवाई
    शाम तक राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेता आकाशवाणी भवन परिसर में धरने पर बैठे रहे। पुलिस प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाने की कोशिश करती रही, लेकिन कई घंटे तक गतिरोध बना रहा। रात करीब 8 बजे दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। पहले कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बसों में बैठाया गया। इसके बाद TMC सांसद महुआ मोइत्रा और डेरेक ओ’ब्रायन समेत अन्य विपक्षी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया।

    आखिर में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। राहुल गांधी को पुलिसकर्मी बस तक ले जाते नजर आए। इसके बाद दोनों को किंग्सवे कैंप ले जाया गया, जहां कुछ समय बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग में टकराव
    यह पूरा प्रदर्शन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद का हिस्सा है। INDIA ब्लॉक के नेताओं का आरोप है कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों से नाम हटाने और अन्य प्रक्रियाओं में गड़बड़ी हुई है। विपक्ष इसी आधार पर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

    मंगलवार का घटनाक्रम इस विवाद को लेकर दिल्ली में विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच टकराव का अब तक का बड़ा प्रदर्शन रहा। सुबह का मार्च, बैरिकेड पर राहुल गांधी का तिरंगा लहराना, आकाशवाणी भवन में अचानक धरना और करीब नौ घंटे बाद नेताओं की हिरासत ने पूरे घटनाक्रम को दिनभर सुर्खियों में बनाए रखा।