Blog

  • डार्क सर्कल हटाने के लिए अपनाएं सही स्किन केयर रूटीन जानिए किन आदतों से मिलेगा तेजी से फायदा

    डार्क सर्कल हटाने के लिए अपनाएं सही स्किन केयर रूटीन जानिए किन आदतों से मिलेगा तेजी से फायदा


    नई दिल्ली। आंखों के नीचे डार्क सर्कल आज के समय की सबसे आम ब्यूटी समस्याओं में से एक बन चुके हैं। लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल कम नींद तनाव गलत खानपान पानी की कमी और बढ़ती उम्र इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। कई लोग इन्हें छिपाने के लिए मेकअप का सहारा लेते हैं लेकिन यदि सही स्किन केयर और स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जाए तो इनकी समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

    डार्क सर्कल कम करने का सबसे पहला नियम है पर्याप्त नींद लेना। हर दिन सात से आठ घंटे की अच्छी नींद शरीर और त्वचा दोनों के लिए जरूरी मानी जाती है। जब शरीर को पूरा आराम मिलता है तो आंखों के आसपास की त्वचा भी स्वस्थ रहती है और काले घेरे धीरे धीरे कम होने लगते हैं। लगातार देर रात तक जागने की आदत डार्क सर्कल को और गहरा बना सकती है।

    शरीर में पानी की कमी भी डार्क सर्कल की एक बड़ी वजह हो सकती है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है। पानी त्वचा को हाइड्रेट रखता है और चेहरे की ताजगी बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही मौसमी फल हरी सब्जियां और विटामिन सी आयरन तथा एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। संतुलित आहार त्वचा को अंदर से पोषण देता है।

    घरेलू उपायों में ठंडी ग्रीन टी बैग्स का इस्तेमाल काफी लोकप्रिय है। इस्तेमाल के बाद ठंडे किए गए टी बैग्स को दस से पंद्रह मिनट तक आंखों पर रखने से सूजन कम हो सकती है और आंखों को ठंडक मिलती है। खीरे के पतले टुकड़े या आलू का रस भी कई लोग आंखों के आसपास लगाते हैं। इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व त्वचा को ताजगी देने में मदद कर सकते हैं।

    एलोवेरा जेल भी आंखों के आसपास की नाजुक त्वचा के लिए लाभकारी माना जाता है। रात में सोने से पहले थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल लगाकर हल्के हाथों से मालिश करने से त्वचा को नमी मिलती है। बादाम के तेल से हल्की मसाज भी रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक मानी जाती है। हालांकि किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा पर पैच टेस्ट करना जरूरी है।

    आंखों के आसपास की त्वचा बहुत पतली और संवेदनशील होती है इसलिए उसे जोर से रगड़ने से बचना चाहिए। मेकअप हटाने के लिए हमेशा हल्के और त्वचा के अनुकूल प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें। बाहर निकलते समय सनस्क्रीन और धूप का चश्मा पहनना भी जरूरी है क्योंकि तेज धूप त्वचा में पिगमेंटेशन बढ़ा सकती है जिससे डार्क सर्कल अधिक गहरे दिखाई दे सकते हैं।

    अगर लंबे समय तक डार्क सर्कल बने रहें या इनके साथ सूजन दर्द या अन्य परेशानी भी हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है। कई बार यह समस्या केवल थकान नहीं बल्कि एनीमिया एलर्जी हार्मोनल बदलाव या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल घरेलू उपाय पर्याप्त नहीं होते।

    डार्क सर्कल रातोंरात खत्म नहीं होते लेकिन नियमित स्किन केयर संतुलित आहार पर्याप्त नींद तनाव से दूरी और सही घरेलू उपाय अपनाकर आंखों के नीचे की त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाया जा सकता है। धैर्य और नियमित देखभाल ही इस समस्या से राहत पाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति

    ब्रिक्स सम्मेलन में दिखेगा मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक वैभव: 125 कलाकार देंगे ‘अमृतस्य मध्य प्रदेश’ की भव्य प्रस्तुति


    भोपाल भोपाल में चल रहा ब्रिक्स सांस्कृतिक सम्मेलन 2026 अब अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है और शुक्रवार को राजधानी में संस्कृति और कला का अंतरराष्ट्रीय संगम देखने को मिलेगा। ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के संस्कृति मंत्री भोपाल पहुंच रहे हैं जहां उनका पारंपरिक अंदाज में स्वागत किया जा रहा है। सम्मेलन के तीसरे दिन का सबसे बड़ा आकर्षण शाम को आयोजित होने वाला ब्रिक्स सांस्कृतिक महोत्सव 2026 होगा। इस विशेष आयोजन में भारत के साथ ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के प्रख्यात संगीतकार और कलाकार एक मंच पर नजर आएंगे। कार्यक्रम की शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः के मंगल आह्वान से होगी जिसके बाद कलर्स ऑफ इंडियन म्यूजिक के जरिए हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद ब्रिक्स पीस सॉन्ग पीस इज द लैंग्वेज ऑफ द लैंड के जरिए अलग अलग देशों की संगीत परंपराओं को एक सूत्र में पिरोया जाएगा।

    इस सांस्कृतिक महोत्सव में बेलारूस ब्राजील चीन मिस्र इथियोपिया इंडोनेशिया ईरान रूस सऊदी अरब दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात की संगीत विरासत की झलक देखने को मिलेगी। आर्केस्ट्रा की प्रस्तुतियों में पीस टू ऑल हार्मनी टू ऑल और क्रेस्केंडो ऑफ यूनिटी जैसे कार्यक्रम विशेष आकर्षण होंगे। इन प्रस्तुतियों का उद्देश्य अलग अलग संस्कृतियों को संगीत के माध्यम से एक दूसरे से जोड़ना और शांति तथा आपसी सहयोग का संदेश देना है। कार्यक्रम कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के साथ कला प्रेमियों को भी भारतीय और वैश्विक सांस्कृतिक विविधता का अनुभव मिलेगा।

    शाम के कार्यक्रम का एक और बड़ा आकर्षण मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग की विशेष प्रस्तुति अमृतस्य मध्य प्रदेश एक अलौकिक सांस्कृतिक महायात्रा होगी। प्रसिद्ध कोरियोग्राफर मैत्रेयी पहाड़ी के निर्देशन में 125 से अधिक कलाकार मध्य प्रदेश की ऐतिहासिक आध्यात्मिक और लोक परंपराओं को नृत्य और संगीत के माध्यम से मंच पर जीवंत करेंगे। प्रस्तुति की शुरुआत ॐ की अनादि ध्वनि से होगी और इसके जरिए भीमबेटका सांची और खजुराहो जैसे विश्व धरोहर स्थलों से लेकर चित्रकूट के राम पथ गमन और उज्जैन के संदीपनि आश्रम की कृष्ण लीला तक की सांस्कृतिक यात्रा कराई जाएगी। ग्वालियर ओरछा और मांडू के ऐतिहासिक किलों की गाथा के साथ महेश्वरी और चंदेरी के वस्त्र शिल्प तथा बैगा मटकी और बधाई जैसे लोक नृत्यों को भी प्रस्तुति में शामिल किया गया है।

    भोपाल की झीलों उज्जैन के बाबा महाकाल ओंकारेश्वर के अध्यात्म और मां नर्मदा की महाआरती के जरिए मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसी प्रस्तुति के माध्यम से अतिथियों को सिंहस्थ कुंभ 2028 का आध्यात्मिक निमंत्रण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के बाद मध्य प्रदेश सरकार की ओर से रात्रिभोज का आयोजन होगा जिसमें मेहमानों को प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी चखाया जाएगा। लंच और डिनर के मेन्यू में दाल बाफले निमोना रिकमच गुइया की सब्जी चंबल का थोपा चंदिया बड़ा तथा कोदो और कुटकी जैसे मिलेट आधारित व्यंजन शामिल किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की पसंद को ध्यान में रखते हुए पश्चिमी और ओरिएंटल व्यंजन भी परोसे जाएंगे।

    8 अगस्त को भारत की अध्यक्षता में तीसरी ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक होगी जिसमें सांस्कृतिक विरासत संग्रहालय रचनात्मक अर्थव्यवस्था सांस्कृतिक आदान प्रदान क्षमता निर्माण और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की घोषणा को अपनाया जाएगा जो भविष्य में सांस्कृतिक सहयोग के लिए साझा रोडमैप तैयार करेगी। इसके बाद विदेशी प्रतिनिधिमंडल सांची जाएगा जहां वे सांची स्तूप और बौद्ध विरासत का अवलोकन करेंगे। चेतियागिरी मंदिर में दर्शन के साथ योग और ध्यान सत्र भी होगा तथा शाम को 3D प्रोजेक्शन मैपिंग और लाइट एंड साउंड शो के जरिए बौद्ध इतिहास और कला को प्रदर्शित किया जाएगा। 9 अगस्त को इच्छुक विदेशी प्रतिनिधियों के लिए भीमबेटका शैलाश्रय के भ्रमण की व्यवस्था की गई है। इस तरह भोपाल में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन केवल कूटनीतिक संवाद का मंच नहीं बल्कि भारत और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की समृद्ध संस्कृति को दुनिया के सामने रखने का बड़ा अवसर बन गया है।

  • प्रेग्नेंसी के दौरान हाई बीपी से बचना है तो आज से शुरू करें ये 6 हेल्दी फूड्स स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु की मजबूत नींव

    प्रेग्नेंसी के दौरान हाई बीपी से बचना है तो आज से शुरू करें ये 6 हेल्दी फूड्स स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु की मजबूत नींव


    नई दिल्ली। गर्भावस्था हर महिला के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील दौर होता है। इस दौरान शरीर में कई हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं जिनका असर स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। इन्हीं बदलावों के बीच हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप एक ऐसी समस्या है जिसे हल्के में लेना मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए जोखिम भरा साबित हो सकता है। यदि समय रहते इसे नियंत्रित न किया जाए तो प्री-एक्लेम्पसिया समय से पहले प्रसव और अन्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाकर ब्लड प्रेशर को काफी हद तक नियंत्रित रखा जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार गर्भावस्था के दौरान ऐसी चीजों का सेवन करना चाहिए जो शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने के साथ रक्तचाप को भी संतुलित रखने में मदद करें। पोटैशियम से भरपूर फल जैसे केला संतरा और तरबूज इस दौरान बेहद लाभकारी माने जाते हैं। पोटैशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को कम करता है जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। इन फलों का नियमित सेवन शरीर को ऊर्जा देने के साथ हाइड्रेट भी रखता है।

    हरी पत्तेदार सब्जियां भी गर्भवती महिलाओं की डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा होनी चाहिए। पालक मेथी सरसों और अन्य हरी सब्जियों में मैग्नीशियम आयरन और फोलेट जैसे पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। ये रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। साथ ही शिशु के विकास के लिए भी ये पोषक तत्व बेहद जरूरी होते हैं।

    दूध दही और पनीर जैसे कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थ भी गर्भावस्था में बहुत फायदेमंद माने जाते हैं। पर्याप्त कैल्शियम शरीर की हड्डियों को मजबूत रखने के साथ रक्तचाप को संतुलित रखने में भी मदद करता है। यदि डॉक्टर की सलाह हो तो कैल्शियम सप्लीमेंट भी लिया जा सकता है लेकिन बिना सलाह के किसी भी सप्लीमेंट का सेवन नहीं करना चाहिए।

    प्रोटीन से भरपूर आहार भी इस समय बेहद जरूरी है। दालें राजमा चना सोयाबीन अंडा और यदि डॉक्टर अनुमति दें तो मछली जैसे प्रोटीन स्रोत शरीर को ताकत देने के साथ ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करते हैं। प्रोटीन शिशु के स्वस्थ विकास के लिए भी आवश्यक पोषक तत्वों में शामिल है।

    साबुत अनाज जैसे ओट्स ब्राउन राइस जौ और मल्टीग्रेन आटा भी गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छे विकल्प हैं। इनमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को स्वस्थ रखते हैं और रक्त शर्करा तथा रक्तचाप दोनों को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। इससे शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा भी मिलती है।

    नट्स और बीज जैसे बादाम अखरोट अलसी और चिया सीड्स में हेल्दी फैट्स ओमेगा थ्री फैटी एसिड और मैग्नीशियम पाया जाता है। इनका सीमित मात्रा में सेवन हृदय को स्वस्थ रखने और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद करता है। हालांकि इनका सेवन भी संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।

    इसके अलावा गर्भावस्था में ज्यादा नमक तली हुई चीजें पैकेज्ड फूड और अत्यधिक मीठे खाद्य पदार्थों से दूरी बनानी चाहिए। पर्याप्त पानी पीना नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि करना और समय-समय पर डॉक्टर से ब्लड प्रेशर की जांच कराना भी बेहद जरूरी है।

    ध्यान रखें कि केवल खानपान के भरोसे हाई ब्लड प्रेशर का इलाज नहीं किया जा सकता। यदि डॉक्टर दवा लेने की सलाह दें तो उसे नियमित रूप से लेना चाहिए। सही डाइट स्वस्थ जीवनशैली और चिकित्सकीय निगरानी के साथ गर्भावस्था को सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।

  • पटवारियों की मांगों पर सरकार झुकी, आंदोलन स्थगित; 2026 में विभागीय परीक्षा, FIR से पहले होगी जांच

    पटवारियों की मांगों पर सरकार झुकी, आंदोलन स्थगित; 2026 में विभागीय परीक्षा, FIR से पहले होगी जांच

    भोपाल। मध्यप्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे पटवारियों ने शासन की ओर से मिले आश्वासन के बाद फिलहाल अपनी हड़ताल स्थगित कर दी है। राजस्व विभाग की ओर से पटवारियों की प्रमुख मांगों पर कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद मध्यप्रदेश पटवारी संघ ने राज्य स्तरीय बैठक में आंदोलन को रोकने का फैसला लिया। शासन ने पटवारियों की पदोन्नति से जुड़ी विभागीय नायब तहसीलदार परीक्षा कराने के साथ ही लंबित भुगतान जल्द जारी करने और शिकायतों के मामलों में सीधे कार्रवाई के बजाय पहले प्रारंभिक जांच करने के निर्देश दिए हैं। इससे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे पटवारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

    पटवारियों की पदोन्नति से जुड़ी विभागीय परीक्षा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट हो गई है। कर्मचारी चयन मंडल ESB की ओर से वर्ष 2026 में होने वाली विभागीय नायब तहसीलदार परीक्षा की प्रक्रिया तय की गई है। इससे विभाग में काम कर रहे पात्र पटवारियों के लिए पदोन्नति का रास्ता खुल सकेगा। संघ की ओर से लंबे समय से विभागीय परीक्षा कराने की मांग उठाई जा रही थी। शासन की ओर से इस दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने को आंदोलन स्थगित करने के प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।

    पटवारियों के खिलाफ शिकायतों और FIR को लेकर भी राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अब किसी पटवारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर सीधे कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पहले प्रारंभिक जांच की जाएगी। जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के तथ्य सही पाए जाते हैं तभी आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी कर्मचारी के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इस फैसले को पटवारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों में एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।
    पटवारियों के खिलाफ शिकायतों और FIR को लेकर भी राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अब किसी पटवारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर सीधे कानूनी कार्रवाई करने के बजाय पहले प्रारंभिक जांच की जाएगी। जांच में यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों के तथ्य सही पाए जाते हैं तभी आगे की कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी कर्मचारी के खिलाफ सीधे कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। इस फैसले को पटवारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों में एक महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है।

    इसके अलावा पटवारियों और राजस्व विभाग के मैदानी कर्मचारियों के लंबित भुगतान को लेकर भी सरकार ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं। प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई. रमेश कुमार ने सभी जिला कलेक्टरों को संबंधित विभागों से समन्वय कर लंबित भुगतान जल्द कराने को कहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग से समन्वय कर अलग अलग योजनाओं में किए गए कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    लंबित भुगतान में स्वामित्व योजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य भी शामिल हैं। आबादी भूमि के सर्वे से लेकर अधिकार अभिलेख तैयार करने प्रारंभिक और अंतिम प्रकाशन दावा आपत्ति प्रक्रिया प्रिंटिंग और स्टेशनरी जैसे कामों के लिए लंबित राशि का भुगतान कराया जाना है। इसके अलावा 11वीं कृषि संगणना 2020-21 और छठी लघु सिंचाई गणना 2017-18 से जुड़े कार्यों के लिए भारत सरकार द्वारा निर्धारित मानदेय का भुगतान भी संबंधित गाइडलाइन के अनुसार कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    पटवारियों के स्थानांतरण से जुड़े लंबित मामलों का भी प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने का आश्वासन दिया गया है। शासन ने अन्य मांगों पर भी निर्धारित समय सीमा में निर्णय लेने की बात कही है। सरकार की ओर से मांगों पर कार्रवाई शुरू होने के बाद पटवारी संघ ने आंदोलन को फिलहाल स्थगित कर दिया है। अब पटवारियों की नजर शासन की ओर से किए गए आश्वासनों को जमीन पर लागू किए जाने पर रहेगी। यदि तय समय सीमा में मांगों पर कार्रवाई होती है तो इससे प्रदेश के हजारों पटवारियों को राहत मिल सकती है और राजस्व विभाग से जुड़ी सेवाओं पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

  • MP में रजिस्ट्री सिस्टम में बड़ा बदलाव, अधिकारी खाली नहीं तो दूसरे जिले में जाएगी फाइल; घर बैठे दस्तावेज पंजीयन से घटेगा इंतजार

    MP में रजिस्ट्री सिस्टम में बड़ा बदलाव, अधिकारी खाली नहीं तो दूसरे जिले में जाएगी फाइल; घर बैठे दस्तावेज पंजीयन से घटेगा इंतजार


    मध्य प्रदेश  मध्य प्रदेश में प्रॉपर्टी और अन्य दस्तावेजों की रजिस्ट्री कराने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। सरकार ने फेसलेस रजिस्ट्री व्यवस्था को अधिक तेज और प्रभावी बनाने के लिए नियमों में बदलाव किया है। अब प्रदेश का कोई भी सब रजिस्ट्रार किसी भी जिले की फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों का पंजीयन कर सकेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी एक जिले में अधिकारी पर काम का दबाव अधिक होने के कारण रजिस्ट्री अटकने की स्थिति कम होगी। सिस्टम जरूरत के अनुसार दस्तावेज को ऐसे सब रजिस्ट्रार के पास भेज सकेगा जहां काम का भार अपेक्षाकृत कम हो। इससे लंबित मामलों का निपटारा तेजी से होने और आम लोगों का इंतजार कम होने की उम्मीद है।

    रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 की धारा 6 के तहत किए गए संशोधन के बाद पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र प्रदेश के सभी उपजिलों तक बढ़ा दिया गया है। हालांकि यह सुविधा केवल फेसलेस रजिस्ट्री और अन्य फेसलेस दस्तावेजों के पंजीयन के लिए लागू होगी। फरवरी 2026 में शुरू किए गए साइबर सब रजिस्ट्रार कार्यालय के माध्यम से अब तक प्रदेश में 10 हजार से अधिक दस्तावेजों का फेसलेस पंजीयन किया जा चुका है। नई व्यवस्था के बाद इस प्रक्रिया को और गति मिलने की उम्मीद है।

    इस व्यवस्था में लोगों को सबसे बड़ा फायदा यह मिलेगा कि रजिस्ट्री के लिए बार बार कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी। किसी जिले में काम अधिक होने पर संबंधित दस्तावेज दूसरे उपलब्ध सब रजिस्ट्रार को भेजा जा सकेगा। यानी अधिकारी की अनुपलब्धता या अधिक कार्यभार के कारण फाइल के लंबे समय तक अटके रहने की समस्या कम होगी। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज होने के साथ सरकारी संसाधनों का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा।

    फेसलेस व्यवस्था के तहत रजिस्टर्ड लीज पट्टा विलेख प्रॉपर्टी एग्रीमेंट प्रशासन बंध पत्र शपथ पत्र दत्तक ग्रहण से जुड़े दस्तावेज बैंक गारंटी का नवीनीकरण विक्रय प्रमाण पत्र वसीयत से जुड़े दस्तावेज तलाक विलेख क्षतिपूर्ति बंध पत्र और शेयर आवंटन पत्र सहित करीब 75 प्रकार के दस्तावेजों का पंजीयन किया जा सकेगा। खास बात यह है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से देश के किसी दूसरे जिले में बैठकर और विदेश से भी दस्तावेज पंजीकृत कराने की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

    फेसलेस रजिस्ट्री के लिए सुरक्षा और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भी अनिवार्य रखी गई है। पक्षकारों को आधार नंबर देना होगा और वर्चुअल प्रक्रिया के दौरान एआई सिस्टम के जरिए वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी। इसमें व्यक्ति को सिर दाएं बाएं और ऊपर नीचे घुमाने के निर्देश दिए जाएंगे। इसके बाद वोटर आईडी पासपोर्ट पैन कार्ड या ड्राइविंग लाइसेंस जैसे पहचान पत्रों में से किसी एक की जानकारी ली जाएगी। एआई सिस्टम वीडियो आधार फोटो और पहचान पत्र की तस्वीर का मिलान करेगा। सभी जानकारी सही पाए जाने के बाद ही साइबर रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

    इसके अलावा पक्षकार को यह घोषणा भी करनी होगी कि वह किसी दबाव में नहीं है और अपनी इच्छा से इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों के जरिए पंजीयन करा रहा है। इसके लिए ई केवाईसी और ई साइन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से रजिस्ट्री कार्यालयों में भीड़ घटेगी और आम नागरिकों को ज्यादा तेज पारदर्शी और सुविधाजनक सेवा मिल सकेगी। प्रॉपर्टी लेनदेन बढ़ने के बीच संपदा 2.0 पोर्टल में किए गए बदलावों से रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में भी इसे अहम कदम माना जा रहा है।

  • 50 हजार स्क्रीन पर रिलीज होगी ‘रामायण’! CM का बड़ा बयान- ऑस्कर नहीं मिला तो होगी निराशा

    50 हजार स्क्रीन पर रिलीज होगी ‘रामायण’! CM का बड़ा बयान- ऑस्कर नहीं मिला तो होगी निराशा


    नई दिल्ली।  रणबीर कपूर स्टारर फिल्म रामायण रिलीज से पहले ही लगातार सुर्खियां बटोर रही है। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है और अब इसके ग्लोबल रिलीज प्लान ने इसकी चर्चा को और तेज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक रामायण को दुनियाभर में करीब 50 हजार स्क्रीन पर रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। अगर यह योजना तय रूप में अमल में आती है तो यह किसी भारतीय फिल्म के लिए सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय रिलीज प्लान में से एक होगी। फिल्म के निर्माताओं की कोशिश साफ तौर पर रामायण की कहानी को भारतीय दर्शकों के साथ साथ दुनियाभर के सिनेमा प्रेमियों तक पहुंचाने की है।

    फिल्म के अंतरराष्ट्रीय वितरण की जिम्मेदारी सोनी पिक्चर्स के पास होने की जानकारी सामने आई है। दुनिया के अलग अलग बाजारों में फिल्म को बड़े स्तर पर रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। मेकर्स ने विदेशी दर्शकों को ध्यान में रखते हुए फिल्म का अंग्रेजी लिप सिंक्ड ट्रेलर भी जारी किया है। इससे संकेत मिलता है कि फिल्म को केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित रखने के बजाय वैश्विक स्तर पर पेश करने की व्यापक योजना बनाई गई है।

    रामायण को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का बयान भी काफी चर्चा में है। मुंबई के फिल्म सिटी में नमित मल्होत्रा की प्राइम फोकस फैसिलिटी के उद्घाटन के दौरान उन्होंने फिल्म की तारीफ करते हुए इसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने की उम्मीद जताई। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर रामायण को ऑस्कर नहीं मिला तो उन्हें निराशा होगी। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा और तेज हो गई है।

    रामायण की सबसे बड़ी खासियत इसकी विशाल स्टारकास्ट और भव्य प्रस्तुति है। फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आएंगे जबकि साई पल्लवी माता सीता का किरदार निभा रही हैं। यश को रावण के रूप में पेश किया गया है वहीं सनी देओल भगवान हनुमान की भूमिका में दिखाई देंगे। रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है जबकि नमित मल्होत्रा इसके निर्माण से जुड़े हैं।

    फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद इसके विजुअल इफेक्ट्स और बड़े स्तर पर तैयार किए गए सेट और किरदारों की खूब चर्चा हुई है। खास तौर पर रणबीर कपूर के राम और यश के रावण वाले लुक ने दर्शकों का ध्यान खींचा है। मेकर्स ने फिल्म के निर्माण में बड़े पैमाने पर तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया है ताकि रामायण की पौराणिक दुनिया को बड़े पर्दे पर भव्य रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

    रामायण का पहला भाग दिवाली 2026 के मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होने की तैयारी में है। फिल्म की रिलीज डेट 6 नवंबर बताई गई है। ऐसे में अब दर्शकों की नजर इसके अगले अपडेट पर बनी हुई है। 50 हजार स्क्रीन का ग्लोबल प्लान और ऑस्कर को लेकर मुख्यमंत्री का बयान फिल्म की महत्वाकांक्षा को दिखाता है। अगर फिल्म उम्मीद के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंच बनाने में सफल होती है तो यह भारतीय सिनेमा के लिए भी एक बड़ा वैश्विक पड़ाव साबित हो सकती है।

  • WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित

    WTC फाइनल की रेस में भारत की अग्निपरीक्षा, अब हर मैच जीतना जरूरी; एक गलती बिगाड़ देगी पूरा गणित


    नई दिल्ली। वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप 2025-27 में भारतीय क्रिकेट टीम की मुश्किलें लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। शुरुआती मुकाबलों के बाद टीम इंडिया अंक प्रतिशत के मामले में पांचवें स्थान पर पहुंच गई है और अब उसके सामने फाइनल की दौड़ में बने रहने के लिए बेहद कठिन चुनौती है। भारत ने अब तक 9 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उसे 4 मुकाबलों में जीत मिली है और उसका पॉइंट्स परसेंटेज यानी पीसीटी 48.15 है। मौजूदा स्थिति में भारत बांग्लादेश से भी पीछे है। ऐसे में अब टीम इंडिया के लिए WTC का हर मुकाबला लगभग करो या मरो जैसा हो गया है।

    भारतीय टीम के पास इस चक्र में अभी 9 टेस्ट मैच बाकी हैं। अगर टीम अपने सभी बचे हुए मुकाबले जीतने में सफल रहती है तो उसका पीसीटी करीब 74.07 तक पहुंच सकता है। यह आंकड़ा उसे फाइनल की दौड़ में बेहद मजबूत स्थिति में पहुंचा सकता है। लेकिन समस्या यह है कि आने वाले सभी मुकाबले आसान नहीं होने वाले हैं। भारत को पहले श्रीलंका का दौरा करना है जहां दो टेस्ट मैच खेले जाएंगे। श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है और गॉल की पिच पर भारतीय बल्लेबाजों की परीक्षा होना तय माना जा रहा है।

    श्रीलंका के बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड का दौरा करेगी। वहां उसे दो टेस्ट मैच खेलने हैं। न्यूजीलैंड की परिस्थितियां भी भारतीय टीम के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती हैं। तेज गेंदबाजी के अनुकूल परिस्थितियों में भारतीय बल्लेबाजों को नई गेंद का सामना करना होगा। इसके बाद भारत में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी। ऑस्ट्रेलिया मौजूदा WTC चक्र में मजबूत टीमों में शामिल है और उसके खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज भारत के लिए सबसे बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

    भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि अब एक भी हार उसके अंक प्रतिशत को काफी नीचे ला सकती है। अगर टीम अपने बचे हुए नौ मैचों में से एक मुकाबला हार जाती है तो उसका पीसीटी करीब 68.5 तक गिर सकता है। दो हार होने पर यह आंकड़ा करीब 62.9 और तीन हार की स्थिति में लगभग 57.41 तक पहुंच सकता है। ऐसे में सिर्फ एक मुकाबले का नतीजा भी फाइनल की रेस में भारत की स्थिति को काफी प्रभावित कर सकता है।

    मौजूदा अंक तालिका पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलिया 87.50 पीसीटी के साथ शीर्ष पर है। दक्षिण अफ्रीका 75 पीसीटी के साथ दूसरे जबकि न्यूजीलैंड 72.22 के साथ तीसरे स्थान पर है। बांग्लादेश 58.33 पीसीटी के साथ भारत से आगे है। इसका मतलब साफ है कि भारत को अपने बचे हुए मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करने के साथ साथ दूसरी टीमों के नतीजों पर भी नजर रखनी होगी। अगर शीर्ष टीमों में से कोई लगातार अंक गंवाती है तो भारत को उसका फायदा मिल सकता है।

    WTC में जीत के लिए 12 अंक मिलते हैं जबकि ड्रॉ होने पर दोनों टीमों को 4-4 अंक दिए जाते हैं और हारने वाली टीम को कोई अंक नहीं मिलता। अंक प्रतिशत की यही व्यवस्था टीमों की अंतिम स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए भारत के लिए अब ड्रॉ भी उतना फायदेमंद नहीं होगा जितनी लगातार जीत होगी।

    शुभमन गिल की अगुआई वाली भारतीय टीम के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती जीत की लय कायम रखने की है। श्रीलंका में दो टेस्ट से लेकर न्यूजीलैंड और फिर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच मुकाबलों तक टीम को लगातार दबाव में खेलना होगा। भारतीय बल्लेबाजों को स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहना होगा जबकि गेंदबाजों को भी हर मैच में निर्णायक प्रदर्शन करना होगा।

    कुल मिलाकर WTC 2025-27 में भारत के लिए तस्वीर बिल्कुल साफ है। फाइनल में पहुंचने का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है लेकिन गलती की गुंजाइश बेहद कम बची है। भारत अगर अपने बचे हुए नौ टेस्ट में लगातार जीत दर्ज करता है तो फाइनल की उम्मीद मजबूत रहेगी लेकिन हार की संख्या बढ़ते ही समीकरण मुश्किल होता जाएगा। अब टीम इंडिया के सामने हर टेस्ट सिर्फ एक मुकाबला नहीं बल्कि WTC फाइनल की ओर बढ़ने का एक बड़ा कदम होगा।

  • ‘काश PM तानाशाह होते’, नाबालिग के वायरल वीडियो पर रुपाली गांगुली का फूटा गुस्सा, कमेंट पर मचा घमासान

    ‘काश PM तानाशाह होते’, नाबालिग के वायरल वीडियो पर रुपाली गांगुली का फूटा गुस्सा, कमेंट पर मचा घमासान


    नई दिल्ली। अनुपमा फेम अभिनेत्री और बीजेपी की सदस्य रुपाली गांगुली एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर वायरल हुए एक वीडियो पर प्रतिक्रिया दी है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करती नजर आ रही है। वीडियो को लेकर एक यूजर ने बच्ची के माता पिता के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इसी पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए रुपाली गांगुली ने प्रधानमंत्री के अपमान पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और ऐसी टिप्पणी कर दी जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई।

    रुपाली गांगुली ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि प्रधानमंत्री का इस तरह अपमान करने के नतीजे होने चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने लिखा कि कभी कभी उन्हें लगता है कि काश प्रधानमंत्री तानाशाह होते। अभिनेत्री की यह टिप्पणी सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स के बीच अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलने लगीं। कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल की आलोचना करते हुए रुपाली का समर्थन किया तो कई यूजर्स ने उनके तानाशाह वाले बयान को लेकर सवाल खड़े किए।

    इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई जिसमें एक नाबालिग लड़की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करती दिखाई दी। वीडियो को साझा करने वाले यूजर ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और उनके आसपास के माहौल को लेकर भी सवाल उठाए। साथ ही बच्ची के माता पिता की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई। इसी मुद्दे पर अपनी राय रखते हुए रुपाली ने प्रधानमंत्री के सम्मान और सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।

    रुपाली गांगुली की टिप्पणी पर कई यूजर्स ने उनका समर्थन किया लेकिन बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें ट्रोल भी किया। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने उनके चर्चित टीवी किरदारों का जिक्र करते हुए तंज कसा। कुछ ने उन्हें अनुपमा के किरदार से जोड़कर प्रतिक्रिया दी तो कुछ ने उनके बयान को लोकतांत्रिक व्यवस्था के संदर्भ में गलत बताया। इस तरह एक सोशल मीडिया कमेंट देखते ही देखते अभिनेत्री के लिए विवाद का कारण बन गया।

    हालांकि यह पहली बार नहीं है जब रुपाली गांगुली ने राजनीतिक या सामाजिक मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी हो। इससे पहले भी वह छात्रों के विरोध प्रदर्शन और आंदोलन को लेकर अपनी बात सामने रख चुकी हैं। उन्होंने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने को जरूरी बताया था। उनका कहना था कि छात्रों की जायज मांगों को उठाना जरूरी है लेकिन हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से किसी आंदोलन की गंभीरता कम हो जाती है।

    रुपाली ने पहले यह भी कहा था कि पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है लेकिन विरोध का रास्ता शांतिपूर्ण होना चाहिए। इसी वजह से उनके ताजा बयान को उनके पहले के सार्वजनिक बयानों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि इस बार उनकी टिप्पणी का एक खास हिस्सा सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बन गया है।

    विवाद के बीच अभिनेत्री के वर्कफ्रंट की बात करें तो रुपाली गांगुली लंबे समय से टीवी के लोकप्रिय शो अनुपमा में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। इस शो ने उन्हें घर घर में पहचान दिलाई है और उनके किरदार को दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता मिली है। अभिनय के साथ सोशल मीडिया पर अपनी बेबाक राय रखने के कारण भी रुपाली अक्सर सुर्खियों में रहती हैं।

    फिलहाल प्रधानमंत्री के अपमान से जुड़े वायरल वीडियो पर रुपाली गांगुली की टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ लोग सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के सम्मान और भाषा की मर्यादा की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ अभिनेत्री के तानाशाह वाले बयान को लेकर लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यही वजह है कि उनका यह पोस्ट सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद

    स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद


    नई दिल्ली। श्रीलंका दौरे पर पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम के लिए दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले ही एक नया विवाद सामने आ गया है। भारत को 7 अगस्त से कोलंबो के नॉनडिस्क्रिप्ट क्रिकेट क्लब यानी एनसीसी मैदान पर तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलना है लेकिन मुकाबले से पहले तैयार की गई पिच को देखकर भारतीय टीम मैनेजमेंट पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। टीम इंडिया को उम्मीद थी कि अभ्यास मैच के लिए ऐसी विकेट तैयार की जाएगी जो श्रीलंका की पारंपरिक स्पिन परिस्थितियों जैसी हो ताकि बल्लेबाजों और स्पिन गेंदबाजों को टेस्ट सीरीज से पहले बेहतर तैयारी का मौका मिल सके लेकिन मैदान पर घास वाली विकेट देखकर टीम की चिंता बढ़ गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय टीम ने पिच पर मौजूद घास को लेकर सवाल उठाए हैं। एनसीसी से जुड़े अधिकारी ने भी बताया कि पिच पर घास रखने का फैसला श्रीलंका क्रिकेट के निर्देश के बाद किया गया है।

    दरअसल भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाना है। गॉल की परिस्थितियां आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं। ऐसे में भारतीय टीम चाहती थी कि अभ्यास मैच में भी उसे ऐसी ही परिस्थितियों का अनुभव मिले ताकि बल्लेबाज श्रीलंकाई स्पिनरों का सामना करने से पहले अपनी कमियों को सुधार सकें। खासतौर पर भारतीय बल्लेबाजों के स्पिन के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए यह अभ्यास मैच टीम के लिए काफी अहम माना जा रहा है। लेकिन एनसीसी की पिच पर छोड़ी गई घास ने टीम इंडिया की योजना को कुछ हद तक बदल दिया है।

    घास वाली पिच का फायदा शुरुआती दौर में तेज गेंदबाजों को मिल सकता है। गेंद नई होने पर सतह से अतिरिक्त सीम और मूवमेंट मिलने की संभावना रहती है जिससे बल्लेबाजों के लिए शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दूसरी तरफ स्पिन गेंदबाजों को इस विकेट से तुरंत वैसी मदद मिलने की उम्मीद कम है जैसी भारतीय टीम चाहती थी। हालांकि एनसीसी प्रबंधन का कहना है कि मुकाबले के आगे बढ़ने के साथ पिच का मिजाज बदल सकता है और तीसरे दिन स्पिनरों को कुछ सहायता मिलने की संभावना है। क्लब का यह भी मानना है कि पिच पर बल्लेबाजों को रन बनाने का अच्छा मौका मिल सकता है।

    एनसीसी मैदान श्रीलंका के पुराने क्रिकेट क्लबों में शामिल है और भारतीय टीम यहां टेस्ट सीरीज से पहले अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेगी। पहले यह अभ्यास मुकाबला चार दिन का प्रस्तावित था लेकिन बाद में इसे घटाकर तीन दिन कर दिया गया। ऐसे में भारतीय टीम के पास परिस्थितियों को समझने और खिलाड़ियों को पर्याप्त मैच अभ्यास देने के लिए सीमित समय है। यही वजह है कि अभ्यास मैच की पिच को लेकर उठे सवालों ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है।

    भारत के लिए यह टेस्ट सीरीज कई मायनों में महत्वपूर्ण है। टीम को श्रीलंका की परिस्थितियों में खुद को ढालने के साथ साथ स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ अपनी रणनीति को मजबूत करना होगा। वहीं श्रीलंका भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर भारतीय टीम को कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेगा। अभ्यास मैच में कैसी पिच मिलती है और भारतीय खिलाड़ी उस पर किस तरह प्रदर्शन करते हैं इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

    हालांकि पिच को लेकर उठे विवाद के बावजूद टीम इंडिया के पास परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने का मौका है। घास वाली विकेट भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों के लिए एक अलग तरह की परीक्षा साबित हो सकती है। अगर भारतीय खिलाड़ी इस चुनौती का फायदा उठाते हैं तो गॉल टेस्ट से पहले उन्हें जरूरी आत्मविश्वास मिल सकता है। अब देखना यही होगा कि अभ्यास मैच में घास वाली पिच टीम इंडिया के लिए परेशानी बनती है या टेस्ट सीरीज की तैयारी का एक उपयोगी हिस्सा साबित होती है।

  • भारत का सबसे महान क्रिकेटर कौन? अजिंक्य रहाणे ने लिया सचिन तेंदुलकर का नाम, बताया क्यों हैं सभी युगों के महान खिलाड़ी

    भारत का सबसे महान क्रिकेटर कौन? अजिंक्य रहाणे ने लिया सचिन तेंदुलकर का नाम, बताया क्यों हैं सभी युगों के महान खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारत में क्रिकेट को लेकर जब भी महान खिलाड़ियों की चर्चा होती है तो सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे नाम सबसे पहले सामने आते हैं। दोनों ने अलग अलग दौर में भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दी हैं और दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में जब पूर्व भारतीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे से भारत के सबसे महान क्रिकेटर का नाम पूछा गया तो उनके सामने आसान सवाल नहीं था। हालांकि काफी सोचने के बाद रहाणे ने जिस खिलाड़ी का नाम लिया वह क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर हैं।

    हाल ही में क्रिकेट से संन्यास लेने वाले अजिंक्य रहाणे ने स्टिक टू क्रिकेट के एक एपिसोड में भारत के ऑल टाइम महान क्रिकेटर को लेकर अपनी पसंद बताई। उनसे जब पूछा गया कि भारत का अब तक का सबसे महान क्रिकेटर कौन है तो उन्होंने कहा कि एक नाम चुनना काफी मुश्किल है लेकिन शायद सचिन तेंदुलकर। रहाणे ने सचिन को सभी युगों का महान खिलाड़ी बताया। उनके इस जवाब ने एक बार फिर सचिन तेंदुलकर की महानता और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

    रहाणे की सचिन से मुलाकात केवल एक प्रशंसक और महान खिलाड़ी के तौर पर नहीं रही है। उन्हें कई बार सचिन के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका भी मिला। रहाणे ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और इसके बाद भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने भारत के मजबूत मध्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विराट कोहली तथा चेतेश्वर पुजारा जैसे खिलाड़ियों के साथ लंबे समय तक टीम का हिस्सा रहे।

    सचिन के साथ रहाणे का जुड़ाव घरेलू क्रिकेट और आईपीएल तक भी रहा। 2009 के आईपीएल सीजन में दोनों मुंबई इंडियंस की टीम में साथ थे। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में भी दोनों ने मुंबई के लिए साथ खेला। रहाणे को भारत की ओर से सचिन के साथ टेस्ट मैच खेलने का अवसर भी मिला। ऐसे में सचिन के खेल को करीब से देखने वाले रहाणे के लिए उन्हें भारत का महानतम क्रिकेटर चुनना काफी खास माना जा रहा है।

    सचिन तेंदुलकर का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 24 वर्षों तक चला। उन्होंने 1989 में महज 16 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट को कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दिलाईं। सचिन ने कुल 664 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले जिनमें 200 टेस्ट 463 वनडे और एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला शामिल है।

    टेस्ट क्रिकेट में सचिन के नाम 15,921 रन हैं जबकि वनडे क्रिकेट में उन्होंने 18,426 रन बनाए। वह टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में लंबे समय तक सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उनका नाम क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे रिकॉर्ड के साथ दर्ज है जिन्हें हासिल करना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद कठिन माना जाता है। वह दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने 200 टेस्ट मैच खेले हैं।

    सचिन के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2011 वनडे विश्व कप जीत भी शामिल है। भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर विश्व कप अपने नाम किया और सचिन के लिए यह ट्रॉफी उनके लंबे करियर की सबसे भावुक उपलब्धियों में से एक रही। उन्होंने वर्षों तक विश्व कप जीतने का सपना देखा था और आखिरकार 2011 में यह सपना पूरा हुआ।

    विराट कोहली भी आधुनिक क्रिकेट के सबसे बड़े बल्लेबाजों में शामिल हैं और उनकी उपलब्धियों की तुलना अक्सर सचिन से की जाती है। इसके बावजूद रहाणे ने अपने ऑल टाइम महान क्रिकेटर के रूप में सचिन का नाम चुना है। उनका यह चयन इस बात को दर्शाता है कि सचिन तेंदुलकर का प्रभाव केवल उनके आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने कई पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित किया है।