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  • ट्रेडिशनल लुक में लगाएं ग्लैमर का तड़का हरी चूड़ियों के ट्रेंडी डिजाइन्स से पाएं परफेक्ट फेस्टिव स्टाइल

    ट्रेडिशनल लुक में लगाएं ग्लैमर का तड़का हरी चूड़ियों के ट्रेंडी डिजाइन्स से पाएं परफेक्ट फेस्टिव स्टाइल


    नई दिल्ली । नवरात्रि का पावन पर्व शुरू होते ही हर ओर भक्ति और उत्साह का माहौल बन जाता है और इस खास मौके पर हर कोई अपने लुक को सबसे अलग और आकर्षक बनाना चाहता है पारंपरिक परिधानों के साथ सही एक्सेसरीज का चुनाव ही पूरे लुक को निखारता है और जब बात नवरात्रि की हो तो हरी चूड़ियों का महत्व और भी बढ़ जाता है हरा रंग समृद्धि सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है यही कारण है कि इस त्योहार में हरी चूड़ियां पहनना शुभ भी माना जाता है और स्टाइलिश भी

    इस साल बाजार में हरी चूड़ियों के कई नए और यूनिक डिजाइन्स देखने को मिल रहे हैं जो आपके ट्रेडिशनल लुक को एक नया ट्विस्ट दे सकते हैं अब सिर्फ सादी कांच की चूड़ियों का जमाना नहीं रहा बल्कि फैंसी और डिजाइनर चूड़ियां ट्रेंड में हैं जो हर उम्र की महिलाओं को आकर्षित कर रही हैं

    इन दिनों कश्मीरी घुंघरू डिजाइन वाली हरी चूड़ियां काफी लोकप्रिय हो रही हैं इन चूड़ियों के किनारों पर लगे छोटे छोटे घुंघरू हाथों की हर हलचल के साथ मधुर ध्वनि पैदा करते हैं जो आपके लुक में एक अलग ही आकर्षण जोड़ते हैं यह डिजाइन खासतौर पर सिल्क साड़ी और भारी लहंगे के साथ बेहद खूबसूरत लगता है और आपको एक रॉयल और एलिगेंट लुक देता है

    अगर आप कुछ मॉडर्न और स्टाइलिश ट्राई करना चाहती हैं तो पोल्का डॉट डिजाइन वाली हरी चूड़ियां आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती हैं हरे रंग के बेस पर सफेद या गोल्डन डॉट्स वाली ये चूड़ियां सिंपल सूट या इंडो वेस्टर्न आउटफिट्स के साथ बहुत ही ग्रेसफुल लगती हैं खासकर युवा लड़कियों के बीच यह स्टाइल तेजी से ट्रेंड कर रहा है क्योंकि यह ट्रेडिशनल और मॉडर्न का परफेक्ट कॉम्बिनेशन है

    इसके अलावा स्टोन और थ्रेड वर्क वाली चूड़ियां भी इस सीजन में काफी पसंद की जा रही हैं कांच की हरी चूड़ियों के बीच में स्टोन जड़े कड़े या रेशमी धागों से सजी चूड़ियां आपके हाथों की खूबसूरती को और निखार देती हैं आप इन्हें अपने आउटफिट के अनुसार मिक्स एंड मैच करके भी पहन सकती हैं जिससे आपका लुक और ज्यादा आकर्षक बनता है

    हरी चूड़ियों को स्टाइल करने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उनका चयन अगर आप सिर्फ हरी चूड़ियां पहनने के बजाय उनके बीच में सुनहरे कड़े या डिजाइनर कंगन जोड़ती हैं तो आपका लुक और ज्यादा फेस्टिव और रिच दिखाई देता है अगर आपका आउटफिट प्लेन है तो आप घुंघरू वाली भारी चूड़ियां पहन सकती हैं वहीं अगर आपने पहले से ही हैवी वर्क वाला लहंगा या साड़ी पहनी है तो पतली कांच की चूड़ियां या पोल्का डॉट डिजाइन ज्यादा बेहतर लगेगा

    इसके साथ ही हरी चूड़ियों के साथ ऑक्सीडाइज्ड ज्वेलरी या गोल्डन झुमके पहनने से आपका पूरा लुक संतुलित और स्टाइलिश नजर आता है सही कॉम्बिनेशन और थोड़ी सी क्रिएटिविटी के साथ आप इस नवरात्रि अपने पारंपरिक अंदाज में भी एक नया और आकर्षक ट्विस्ट जोड़ सकती हैं और हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच सकती हैं

  • घी के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान

    घी के नाम पर जहर तो नहीं खा रहे आप? ऐसे करें असली और नकली घी की पहचान


    नई दिल्ली:भारतीय रसोई में Ghee का महत्व बेहद खास होता है, चाहे पूजा पाठ हो या रोजमर्रा का खाना, घी हर घर में इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन आजकल बाजार में मिलावटी घी की बढ़ती समस्या लोगों की सेहत के लिए चिंता का विषय बन गई है, ऐसे में जरूरी है कि हम असली और नकली घी की पहचान करना सीखें ताकि अपने परिवार को सुरक्षित और शुद्ध भोजन दे सकें

    घी की शुद्धता जांचने का सबसे आसान तरीका हथेली टेस्ट माना जाता है, इसके लिए थोड़ा सा घी हथेली पर रखें, असली घी शरीर की गर्माहट से धीरे धीरे पिघलता है, जबकि नकली घी या तो तुरंत पिघल जाता है या फिर बिल्कुल नहीं पिघलता, यह तरीका तुरंत परिणाम देने वाला और बेहद सरल है

    खुशबू के जरिए भी घी की पहचान की जा सकती है, शुद्ध घी में हल्की मीठी और दूध जैसी सुगंध होती है, जबकि मिलावटी घी में केमिकल जैसी गंध आ सकती है या फिर उसमें कोई खास खुशबू नहीं होती, अगर घी को हल्का गर्म किया जाए तो असली घी की खुशबू और ज्यादा उभरकर सामने आती है

    स्वाद भी घी की गुणवत्ता का एक महत्वपूर्ण संकेत देता है, असली घी का स्वाद हल्का मीठा और मुंह में घुल जाने वाला होता है, वहीं नकली घी जीभ पर चिपचिपा लग सकता है या उसका स्वाद अजीब सा महसूस हो सकता है, ऐसे संकेत मिलते ही सतर्क हो जाना चाहिए

    फ्रिज टेस्ट भी काफी प्रभावी माना जाता है, इसके लिए घी को एक कटोरी में डालकर कुछ समय के लिए फ्रिज में रख दें, शुद्ध घी जमने पर एक समान और दानेदार टेक्सचर दिखाता है, जबकि मिलावटी घी अलग अलग परतों में जम सकता है या असमान दिखाई देता है

    पानी में घी डालकर भी उसकी शुद्धता जांची जा सकती है, एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा सा घी डालें, असली घी नीचे बैठ जाता है, जबकि नकली घी पानी में घुल सकता है या ऊपर तैरने लगता है, यह तरीका भी घर पर आसानी से किया जा सकता है

    एक और तरीका है घी को जलाकर देखना, एक चम्मच में थोड़ा घी लेकर जलाएं, शुद्ध घी साफ लौ के साथ जलता है और उसमें अच्छी खुशबू आती है, जबकि नकली घी जलने पर धुआं देता है या बदबू पैदा करता है

    घी खरीदते समय भी कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है, बहुत सस्ता घी खरीदने से बचें, खुले में बिकने वाले घी पर भरोसा न करें और हमेशा विश्वसनीय ब्रांड या डेयरी से ही खरीदारी करें, इसके अलावा घी का रंग बहुत ज्यादा सफेद या अत्यधिक पीला होना भी संदेह का संकेत हो सकता है

     थोड़ी सी जागरूकता और ये आसान घरेलू तरीके अपनाकर आप मिलावटी घी से बच सकते हैं और अपने परिवार को शुद्ध, स्वादिष्ट और सेहतमंद भोजन दे सकते हैं

  • Travel Tips: दोस्तों के साथ घूमने का बनाएं परफेक्ट प्लान, बैग पैक करें और निकल पड़ें

    Travel Tips: दोस्तों के साथ घूमने का बनाएं परफेक्ट प्लान, बैग पैक करें और निकल पड़ें


    नई दिल्ली।मार्च और अप्रैल का महीना घूमने-फिरने के लिए सबसे बेहतरीन माना जाता है। अगर आपके मन में भी इस समय ऐसा ही कुछ चल रहा हैं तो ये खबर आपके काफी काम की है। मार्च का समय ऐसा है इस समय न तो ज्यादा ठंड होती है और न ही तेज गर्मी, जिससे ट्रैवल का मजा दोगुना हो जाता है। अगर आप दोस्तों के साथ कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ये समय बिल्कुल परफेक्ट है।

    इन जगहों पर जा सकते हैं
    आप अकेले को या दोस्तों के साथ आपके लिए ये ट्रिप और ये जगह काफी खास होने वाली है। ट्रिप का असली मजा तभी आता हैअपने दोस्त साथ हो और सुहाना मौसम और अच्छा नजारा।आप पहाड़ों की ठंडी वादियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो मनाली और ऋषिकेश जैसे डेस्टिनेशन बेस्ट हैं। यहां आप एडवेंचर एक्टिविटीज जैसे रिवर राफ्टिंग, ट्रेकिंग और कैंपिंग का भी अच्छे से आनंद उठा सकते है।

    मुन्नार और ऊटी भी अच्छा ऑप्शन है
    अगर आपको हरियाली और शांति पसंद है, तो मुन्नार और ऊटी जैसी जगहें आपके लिए परफेक्ट हैं। यहां की खूबसूरत वादियां, चाय के बागान और ठंडी हवाएं आपके ट्रिप को यादगार बना देंगी।जहां आपको काफी अच्छे नजारे देखने को मिलेंगे। आप यहां कई यादें अपने कैमरे में भी कैद कर सकते है।

    बीच और पार्टी
    अगर आपको बीच और पार्टी का मजा लेना हो तो गोवा काफी अच्छा ऑप्शन हो सकता है। यहां दोस्तों के साथ बीच पर मस्ती, वाटर स्पोर्ट्स और नाइटलाइफ का अलग ही एक्सपीरियंस मिलता है।गोवा में सबसे पहले आपको बागा बीच और कैलंगुट बीच जरूर जाना चाहिए। ये बीच अपनी साफ रेत, वाटर स्पोर्ट्स और मस्ती भरे माहौल के लिए मशहूर हैं।इसके अलावा, दूधसागर झरना भी देखने लायक है, जहां की प्राकृतिक खूबसूरती आपका मन मोह लेगी।

    इन जगहों पर जा कर आप अपने परिवार या दोस्तों के साथ काफी अच्छा समय बिता सकते हैं। तो देर किस बात की अभी टिकट बुक करें और अपने पसंद की जगहों पर जाएं।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़

    मिडिल ईस्ट तनाव से बाजार में हाहाकार! सेंसेक्स 1836 अंक टूटा, निवेशकों के डूबे लाखों करोड़


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू राजनीतिक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। हफ्ते के पहले कारोबारी दिन बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक BSE Sensex और Nifty 50 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1836.57 अंक यानी 2.46 प्रतिशत टूटकर 72696.39 पर आ गया, जबकि निफ्टी 601.85 अंक यानी 2.60 प्रतिशत गिरकर 22512.65 पर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव और युद्ध जैसे हालात ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा है।

    निवेशकों को भारी नुकसान, 13.65 लाख करोड़ डूबे

    इस बड़ी गिरावट से निवेशकों की संपत्ति में भारी कमी आई है। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब 14 लाख करोड़ रुपए घट गया और यह 428.76 लाख करोड़ रुपए से गिरकर 415.11 लाख करोड़ रुपए रह गया। इंट्रा डे में बाजार और भी ज्यादा दबाव में दिखा, जहां सेंसेक्स एक समय करीब 1974 अंक तक लुढ़क गया था। वहीं, निफ्टी भी 643 अंकों तक गिर गया था। बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि India VIX में 19 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आई, जो निवेशकों के बीच बढ़ती चिंता को दर्शाता है।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा मार, सभी सेक्टर दबाव में

    बाजार में गिरावट सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में और ज्यादा कमजोरी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 3.90 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 3.94 प्रतिशत गिरा। सेक्टरवार देखें तो कंस्ट्रक्शन, रियल्टी और मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। बैंकिंग, ऑटो और एफएमसीजी सेक्टर में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि आईटी सेक्टर में अपेक्षाकृत कम कमजोरी देखने को मिली। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक स्तर पर बिकवाली हुई है और निवेशकों ने जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

    तेल कीमतें और होर्मुज संकट बने बड़ी वजह

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल है। Strait of Hormuz में संभावित बाधा से सप्लाई प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते बयानबाजी और संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों ने बाजार का माहौल और नकारात्मक कर दिया है।

    आगे का रुख अनिश्चित, निवेशकों में बढ़ी चिंता

    मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता लौटना मुश्किल है। वैश्विक बाजारों के साथ तालमेल के चलते भारत भी इस दबाव से बच नहीं पा रहा है। फिलहाल बाजार का रुख कमजोर बना हुआ है और निवेशकों के लिए सतर्क रहने की जरूरत है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है।

  • अरुंधति रेड्डी बनीं ICC प्लेयर ऑफ द मंथ, ऑस्ट्रेलिया में दमदार प्रदर्शन

    अरुंधति रेड्डी बनीं ICC प्लेयर ऑफ द मंथ, ऑस्ट्रेलिया में दमदार प्रदर्शन


    नई दिल्ली। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की तेज गेंदबाज Arundhati Reddy ने शानदार प्रदर्शन के दम पर फरवरी 2026 के लिए International Cricket Council का ‘विमेंस प्लेयर ऑफ द मंथ’ अवॉर्ड अपने नाम किया है। उनके करियर में यह पहला मौका है जब उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान से नवाजा गया है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीम को उसके घर में हराने में अहम भूमिका निभाई। भारत की इस ऐतिहासिक टी20 सीरीज जीत में उनकी गेंदबाजी निर्णायक साबित हुई।

    ऑस्ट्रेलिया दौरे पर शानदार प्रदर्शन, टीम की जीत में अहम योगदान

    ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन मैचों की टी20 सीरीज में अरुंधति रेड्डी ने कमाल की गेंदबाजी करते हुए कुल 8 विकेट झटके। उन्होंने 10.87 की बेहतरीन औसत और 7.25 की इकॉनमी रेट से गेंदबाजी की, जो टी20 फॉर्मेट में बेहद प्रभावी मानी जाती है। उनके प्रदर्शन की बदौलत भारत ने यह सीरीज 2-1 से अपने नाम की। खास बात यह रही कि साल 2016 के बाद यह पहली बार था जब भारतीय महिला टीम ने ऑस्ट्रेलिया में टी20 सीरीज जीती।

    सिडनी में करियर बेस्ट, हर मैच में दिखाया दम

    दाएं हाथ की इस तेज गेंदबाज ने सिडनी में खेले गए पहले मुकाबले से ही अपने इरादे साफ कर दिए थे। इस मैच में उन्होंने 22 रन देकर 4 विकेट झटके, जो उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इस शानदार गेंदबाजी के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया। इसके बाद भी उन्होंने अपनी लय बरकरार रखी। कैनबरा में खेले गए दूसरे मैच में 30 रन देकर 2 विकेट हासिल किए, जबकि एडिलेड में निर्णायक मुकाबले में 35 रन देकर 2 विकेट लेकर टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई।

    विश्व कप से पहले बढ़ा आत्मविश्वास

    अवॉर्ड मिलने के बाद अरुंधति रेड्डी ने इसे अपने करियर का बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में जीत हासिल करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है और इस जीत से टीम का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। उन्होंने आगामी ICC Women’s T20 World Cup को लेकर भी भरोसा जताया और कहा कि टीम संतुलित है और इस बार मजबूत दावेदार के रूप में उतरेगी। यह प्रदर्शन न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के लिए भी एक बड़ा संकेत है कि टीम अब बड़े मंच पर दमदार प्रदर्शन के लिए तैयार है।

  • Chaitra Ashtami Special: ऐसे बनाएं काला चना का प्रसाद, जानें आसान रेसिपी

    Chaitra Ashtami Special: ऐसे बनाएं काला चना का प्रसाद, जानें आसान रेसिपी


    नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) की अष्टमी के दिन अगर आप प्रसाद बना रहे हैं लेकिन इसकी रेसिपी को लेकर कुछ कन्फूशन हैं तब आपके के लिए ये खबरबहुत जरूरी हैं। नवरात्रि के दौरान अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इस दिन मां दुर्गा को भोग लगाने के लिए काले चने का प्रसाद बनाया जाता है।यह प्रसाद न केवल भक्तिभाव से भरपूर होता बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है। तो चलिए इसकी खास रेसिपी जानते हैं।

    कन्या पूजन भोग
    कन्या पूजन भोग में देवी के पसंदीदा और पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। इसमें खीर, बेसन का हलवा, शकरपारा, लड्डू, फल, मिठाई और काले चने का प्रसाद शामिल किए गए है।

    नवरात्रि में काले चने का प्रसाद रेसिपी
    सामग्री:
    काले चने – 1 कप
    पानी – 3 कप (भिगोने और उबालने के लिए)
    गुड़ – 1/2 कप (कद्दूकस किया हुआ)
    घी – 1–2 चम्मच
    केसर – 2–3 धागे (वैकल्पिक)
    छोटी इलायची – 2–3 (पिसी हुई)

    काला चना उबालने की विधि
    इसे बनाने के लिए आपको सबसे पहले काले चनों को रात भर पानी में भिगो दें। उसके बाद कुकर में भिगोया हुआ काला चना, पानी, अदरक, तेज पत्ता, जीरा, नमक और घी डालें। तेज आंच पर 2 सीटी लगाएं और फिर धीमी आंच पर 5-6 सीटी आने तक पकाएं।

    बनाने की विधि
    कढ़ाई में घी गर्म करें. अब उसमें जीरा और हींग डालकर भूनें।उबले हुए चने को इसके साथ डालें और साथ ही बचा हुआ नमक डालकर ढककर पकाएं।जब पानी सूखने लगे तो इसमें गरम मसाला, अमचूर पाउडर, कसूरी मेथी और 1 चम्मच घी डालकर अच्छे से मिलाएं. इसे धनिया पत्ती से गार्निश करें और प्रसाद के रूप में मां दुर्गा को अर्पित करें। इस नवरात्रि, आप इस प्रकार काला चना प्रसाद बनाकर मां दुर्गा को भोग लगाएं इससे माता प्रसन्न होंगी और आपको और आपके घर परिवार पर अपनी कृपा बनाएं रहेंगी।

  • चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा और कथा का महत्व

    चैत्र नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा और कथा का महत्व

    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्रि के पावन पर्व का पांचवां दिन मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप, मां स्कंदमाता की पूजा के लिए समर्पित है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की आराधना की जाती है और प्रत्येक दिन का विशेष आध्यात्मिक महत्व और फल माना जाता है। पांचवे दिन मां स्कंदमाता की पूजा का विशेष महत्व है, जो मातृत्व, करुणा और शक्ति का प्रतीक हैं।

    धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की पूजा के समय व्रत कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा करने से माता प्रसन्न होती हैं और जीवन को सुख-समृद्धि और आनंद से भर देती हैं। मान्यता है कि निःसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति भी होती है। इसी लिए आज मां की पूजा करते समय इस पौराणिक कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    पौराणिक कथा के अनुसार, तारकासुर नामक एक शक्तिशाली असुर था। उसने कठोर तपस्या कर भगवान ब्रह्मा को प्रसन्न किया और वरदान स्वरूप प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही संभव होगी। उस समय भगवान शिव गहन तपस्या में लीन थे और माता सती का पुनर्जन्म नहीं हुआ था। इस कारण तारकासुर को विश्वास हो गया कि वह लगभग अमर है।

    वरदान के अहंकार में आकर तारकासुर ने देवताओं और मनुष्यों पर अत्याचार शुरू कर दिया। उसके अत्याचार से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव के पास पहुंचे और उन्हें तपस्या से जगाने का प्रयास किया। इसी बीच माता सती का पुनर्जन्म हुआ और उन्होंने हिमालयराज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया।

    देवताओं के प्रयास और माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनसे विवाह किया। इसके बाद माता पार्वती ने स्वयं अपने पुत्र भगवान कार्तिकेय (स्कंद) को जन्म दिया और उन्हें युद्ध कौशल और ज्ञान की शिक्षा दी। भगवान कार्तिकेय ने बाद में तारकासुर का वध कर देवताओं को उसके आतंक से मुक्त कराया।

    धार्मिक मान्यता है कि मां स्कंदमाता की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर संतान से जुड़ी समस्याएं दूर होती हैं। मां का आशीर्वाद प्राप्त करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और संतुलन भी आता है। इसलिए पांचवे दिन माता की पूजा करते समय कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    आज मां स्कंदमाता की पूजा करते समय भक्त कमल पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित करते हैं। घर और मंदिरों में भजन-कीर्तन और कथा का आयोजन किया जाता है। यह दिन केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक शक्ति का प्रतीक भी है। व्रत कथा पढ़ने और ध्यानपूर्वक पूजा करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का संचार होता है।

    इसलिए आज के दिन माता स्कंदमाता की पूजा और कथा का पाठ अवश्य करें। इससे न केवल संतान सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में समृद्धि, आनंद और संतुलन भी आता है। भक्तों के लिए यह अवसर अपने परिवार के लिए सुख और समृद्धि सुनिश्चित करने का भी संदेश है।

  • मिनटों में तैयार हों फेस्टिव लुक के लिए, ये फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स हैं वर्किंग वुमन की पहली पसंद

    मिनटों में तैयार हों फेस्टिव लुक के लिए, ये फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स हैं वर्किंग वुमन की पहली पसंद


    नई दिल्ली:नवरात्रि के फेस्टिव सीजन में हर महिला अपने लुक को खास बनाना चाहती है और मेहंदी इस खूबसूरती को बढ़ाने का सबसे आसान और पारंपरिक तरीका है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास घंटों बैठकर मेहंदी लगवाने का समय नहीं होता, ऐसे में फिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स एक बेहतरीन और ट्रेंडी विकल्प बनकर उभरे हैं

    आजकल वर्किंग वुमन और कॉलेज जाने वाली लड़कियों के बीच मिनिमल मेहंदी का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें पूरे हाथ की बजाय सिर्फ उंगलियों के पोरों को सजाया जाता है, यह स्टाइल न केवल समय की बचत करता है बल्कि हाथों को एक एलिगेंट और मॉडर्न लुक भी देता है

    फिंगर टिप मेहंदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे लगाने में बहुत कम समय लगता है, जहां पारंपरिक मेहंदी में कई घंटे लग जाते हैं वहीं ये डिजाइन्स महज 10 से 15 मिनट में तैयार हो जाते हैं, यही वजह है कि यह बिगिनर्स के लिए भी एक आसान और शानदार विकल्प बन चुका है

    इन डिजाइन्स में रिंग स्टाइल काफी लोकप्रिय है, जिसमें उंगलियों के बीच मेहंदी इस तरह लगाई जाती है कि वह अंगूठी जैसा लुक देती है, इससे बिना किसी ज्वेलरी के भी हाथ बेहद आकर्षक और सजे हुए नजर आते हैं, यह स्टाइल सोशल मीडिया पर भी काफी ट्रेंड कर रहा है

    इसके अलावा मिक्स एंड मैच पैटर्न भी युवाओं के बीच पसंद किया जा रहा है, जिसमें हर उंगली पर अलग-अलग डिजाइन बनाया जाता है, यह न केवल यूनिक लुक देता है बल्कि आपके हाथों को एक स्टाइलिश और फैशनेबल टच भी देता है

    अगर आप थोड़ा हैवी लुक चाहती हैं तो एंकलेट स्टाइल फिंगर मेहंदी ट्राई कर सकती हैं, इसमें उंगलियों के साथ कलाई तक डिजाइन बनाया जाता है जो पारंपरिक और मॉडर्न दोनों का बेहतरीन मेल होता है, यह स्टाइल आपके हाथों को रॉयल लुक देता है

    सिंपल और सोबर लुक पसंद करने वालों के लिए छोटे-छोटे फ्लोरल मोटिफ्स और बारीक बूटी वर्क वाले डिजाइन्स भी एक शानदार विकल्प हैं, ये देखने में बेहद डेलिकेट और आकर्षक लगते हैं और हर तरह के आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाते हैं

    नवरात्रि के दौरान जब महिलाएं व्रत और पूजा में व्यस्त रहती हैं, तब फिंगर टिप मेहंदी और भी ज्यादा सुविधाजनक साबित होती है, क्योंकि इसमें हथेलियां खाली रहती हैं और रोजमर्रा के काम करने में कोई परेशानी नहीं होतीफिंगर टिप मेहंदी डिजाइन्स उन लोगों के लिए परफेक्ट हैं जो कम समय में स्टाइलिश और एलिगेंट लुक पाना चाहते हैं, यह ट्रेंड न केवल फैशन को आसान बना रहा है बल्कि हर महिला को अपने तरीके से खूबसूरत दिखने का मौका भी दे रहा है

  • ऊर्जा सुरक्षा मजबूत! देश के रणनीतिक तेल भंडार पर सरकार का बड़ा खुलासा

    ऊर्जा सुरक्षा मजबूत! देश के रणनीतिक तेल भंडार पर सरकार का बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच केंद्र सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा भरोसा जताया है। संसद में जानकारी देते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने बताया कि भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारों में इस समय 3.37 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा कच्चा तेल मौजूद है। यह कुल भंडारण क्षमता का लगभग 64 प्रतिशत है, जो किसी भी अल्पकालिक आपूर्ति संकट से निपटने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, यह भंडार देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखने और वैश्विक बाजार में अस्थिरता के असर को कम करने में अहम भूमिका निभाता है।

    आईएसपीआरएल के तहत मजबूत भंडारण व्यवस्था

    सरकार ने Indian Strategic Petroleum Reserves Limited के माध्यम से आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में तीन प्रमुख स्थानों पर रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित किए हैं। इनकी कुल क्षमता 5.3 मिलियन मीट्रिक टन है। तटीय क्षेत्रों में स्थित ये भंडार आपातकालीन स्थिति में बफर के रूप में काम करते हैं। मंत्री ने बताया कि इन भंडारों में मौजूद कच्चे तेल की मात्रा स्थिर नहीं रहती, बल्कि बाजार की स्थिति, खपत और आपूर्ति के अनुसार बदलती रहती है। फिलहाल इनमें लगभग 3.372 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल उपलब्ध है, जो देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच प्रदान करता है।

    भविष्य की तैयारी, नए भंडारों को मिली मंजूरी

    ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। जुलाई 2021 में ओडिशा और कर्नाटक में 6.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाले दो अतिरिक्त रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार स्थापित करने को मंजूरी दी गई थी। इन नए प्रोजेक्ट्स के पूरा होने के बाद भारत की कुल भंडारण क्षमता और बढ़ेगी, जिससे किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश की निर्भरता कम होगी। यह कदम भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    आयात में विविधता, 41 देशों से तेल की खरीद

    सरकार ने कच्चे तेल के आयात के स्रोतों में भी बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां भारत मुख्य रूप से मध्य पूर्व के देशों पर निर्भर था, वहीं अब आयात को विविध बनाकर जोखिम कम किया गया है। वर्तमान में भारत इराक, सऊदी अरब, यूएई, कुवैत और कतर जैसे पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ साथ अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला, कनाडा, ब्राजील और मैक्सिको सहित कुल 41 देशों से कच्चा तेल आयात कर रहा है। खासतौर पर Strait of Hormuz में व्यवधान के बाद यह रणनीति और महत्वपूर्ण हो गई है। अब देश के लगभग 70 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी देशों के बाहर से हो रहे हैं, जिससे सप्लाई बाधित होने का खतरा काफी हद तक कम हो गया है।

  • लक्ष्मी पंचमी 2026: आज करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर में आएगी धन धान्य और समृद्धि

    लक्ष्मी पंचमी 2026: आज करें लक्ष्मी चालीसा का पाठ, घर में आएगी धन धान्य और समृद्धि


    नई दिल्ली । चैत्र नवरात्र का पावन पर्व देशभर में भक्ति और आस्था के रंग में रंगा हुआ है। इस दौरान आने वाला एक विशेष दिन है लक्ष्मी पंचमी, जिसे इस साल 23 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पूजन और लक्ष्मी चालीसा के पाठ से घर में धन धान्य, सुख समृद्धि और वैभव का वास होता है।

    लक्ष्मी पंचमी का यह पर्व चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को पड़ता है। इस दिन मां स्कंदमाता के साथ साथ मां लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी, जो समृद्धि, धन और सुख समृद्धि की देवी हैं, इस दिन अपने भक्तों पर विशेष कृपा बरसाती हैं। देवी की कृपा से व्यक्ति न केवल भौतिक संपन्नता पाता है, बल्कि ज्ञान, बुद्धि और विवेक की भी प्राप्ति होती है।

    इस अवसर पर व्रतियों और श्रद्धालुओं की परंपरा होती है कि वे सफेद या पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा अर्चना करें। घर में या मंदिर में कमल पुष्प, फल और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। साथ ही, लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लक्ष्मी चालीसा के पाठ से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और घर में धन संपत्ति और सुख समृद्धि बनी रहती है।

    लक्ष्मी चालीसा का पाठ भक्तों के हृदय में विश्वास और भक्ति का संचार करता है। इसमें माता लक्ष्मी के गुणों और उनके दिव्य रूप का वर्णन है। चालीसा के माध्यम से यह विश्वास प्रकट होता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से इसका पाठ करता है, उसे सभी प्रकार की विपत्तियों और दुखों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही पुत्र, धन और संतान संपत्ति की प्राप्ति भी होती है।

    धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि लक्ष्मी चालीसा का पाठ करने वाले को माता लक्ष्मी की विशेष कृपा मिलती है। वे अपने भक्तों के घर में सुख शांति, स्वास्थ्य, वैभव और समृद्धि का वास करती हैं। इसके साथ ही, यह पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता है। भक्त चालीसा का ध्यानपूर्वक पाठ करें और इसे दूसरों को सुनाने की परंपरा अपनाएं, जिससे शुभ प्रभाव और भी बढ़ जाता है।

    लक्ष्मी पंचमी और लक्ष्मी चालीसा का यह पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं है, बल्कि यह भक्ति, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक भी है। इस दिन घर और मंदिरों में भक्तगण एकत्र होते हैं, भजन कीर्तन करते हैं, और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन किए गए उपाय और पाठ से वर्षभर सुख समृद्धि बनी रहती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

    इसलिए आज के दिन लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना न केवल धन वैभव और सुख की प्राप्ति का साधन है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ भी प्रदान करता है। भक्तगण इस दिन माता लक्ष्मी का स्मरण करते हुए पूरे श्रद्धा भाव से पाठ करें और अपने परिवार के लिए समृद्धि और सुख की कामना करें।