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  • CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    CEC विवाद पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च, राहुल-प्रियंका ने पेड़ के नीचे दिया धरना, अखिलेश यादव समेत कई नेता हिरासत में

    नई दिल्ली ।लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग तक विरोध मार्च निकाला। मार्च के दौरान विपक्षी सांसदों ने “वोट चोर, गद्दी छोड़” के नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर विपक्षी नेताओं ने कई आरोप लगाए। मार्च शुरू होने से पहले विपक्षी सांसद संसद के मकर द्वार पर एकत्र हुए थे।

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने मार्च के दौरान कहा कि विपक्ष का यह प्रदर्शन अन्याय के खिलाफ लड़ाई है। उन्होंने सरकार, चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आजादी के बाद मिले वयस्क मताधिकार को खत्म करने की कोशिश कर रही है। खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सरकार की कठपुतली बताया और आरोप लगाया कि वह वही करते हैं जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी लड़ाई जारी रखेगा।

    मार्च के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी, NCP-SP सांसद सुप्रिया सुले और INDIA ब्लॉक के कई अन्य सांसद भी मौजूद रहे। विपक्षी सांसद चुनाव आयोग तक पहुंचकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराना चाहते थे। हालांकि पुलिस ने मार्च को रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सड़क पर एक पेड़ के नीचे ही धरना शुरू कर दिया।

    प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2017, 2019, 2022 और 2024 में बेईमानी की गई और पश्चिम बंगाल में “पूरा का पूरा खुला खेल” हुआ। उन्होंने चंडीगढ़ की घटना का भी जिक्र करते हुए कहा कि उसे कौन भूल सकता है। उनके इस बयान में चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को दोहराया गया।

    इस बीच पुलिस ने अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया। समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी प्रदर्शन के दौरान भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 150 सांसदों को निलंबित किया जाता है और कई कानून पारित किए जाते हैं, तो भाजपा संविधान की बात कैसे कर सकती है। उन्होंने चुनाव आयोग का बचाव करने को लेकर भी सवाल उठाया।

    कांग्रेस सांसद राजीव राय ने कहा कि भाजपा के खिलाफ लोगों में सड़कों पर आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं और लोकतंत्र का गला घोंटा गया है तथा लोकतंत्र को बचाने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भरोसे के लायक नहीं बताया।

    कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने कहा कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लिया जाना तय है और चुनाव आयोग से लोगों का भरोसा खत्म हो गया है। कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देंगे, तब तक विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।

    कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि यदि लोगों का मताधिकार छीना जाएगा तो विपक्ष मूकदर्शक बनकर नहीं रहेगा। इस तरह चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों और विरोध के बीच चुनाव आयोग तक मार्च करने की कोशिश की गई, जिसे पुलिस ने रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।

  • ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले दे सकते हैं इस्तीफा? सौरभ भारद्वाज के दावे से चुनाव आयोग और SIR विवाद पर बढ़ी सियासी हलचल

    ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले दे सकते हैं इस्तीफा? सौरभ भारद्वाज के दावे से चुनाव आयोग और SIR विवाद पर बढ़ी सियासी हलचल


    नई दिल्ली ।
    मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि उनके पास मौजूद जानकारी के अनुसार ज्ञानेश कुमार 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, यह अभी केवल भारद्वाज का दावा है और इस संबंध में चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    सौरभ भारद्वाज ने अपने सूत्रों के हवाले से यह दावा किया है। उनके मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली है कि मुख्य चुनाव आयुक्त 10 अक्टूबर से पहले अपने पद से हट सकते हैं। इस दावे के बाद चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर चल रही राजनीतिक चर्चा और तेज हो गई है। भारद्वाज की ओर से अपने दावे के समर्थन में इससे अधिक जानकारी नहीं दी गई है।

    जिस 10 अक्टूबर की तारीख का जिक्र सौरभ भारद्वाज ने किया है, उसी दिन कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी लंबे समय से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सवाल उठाती रही है। सीजेपी की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR पर रोक की मांग की जा रही है। पार्टी का कहना है कि इन मुद्दों के समाधान के बिना चुनाव व्यवस्था को लेकर सवाल बने रहेंगे।

    मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवाद में SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का मुद्दा भी प्रमुख है। बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के दौरान गड़बड़ी की आशंका है। वहीं, आयोग अपनी तय प्रक्रिया का हवाला देता रहा है।

    इसी विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद को लेकर भी सवाल उठे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि पिछले 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की राय ज्ञानेश कुमार से अलग रही। इस दावे को लेकर चुनाव आयोग के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर चर्चा तेज हुई है।

    सीजेपी ने चुनाव आयुक्तों के बीच कथित मतभेद के मुद्दे को भी गंभीर बताया है। पार्टी ने इस मामले में जांच की मांग की है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई है। वहीं, SIR को लेकर विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं और मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ी को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच सौरभ भारद्वाज का 10 अक्टूबर से पहले ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे का दावा सामने आया है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्य चुनाव आयुक्त वास्तव में अपने पद से इस्तीफा देंगे या नहीं। चुनाव आयोग की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में फिलहाल इस्तीफे की बात सौरभ भारद्वाज के दावे तक ही सीमित है।

    10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन और SIR को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे से जुड़ा यह दावा राजनीतिक चर्चा का नया मुद्दा बन गया है। इस मामले में आगे की स्थिति ज्ञानेश कुमार के किसी आधिकारिक निर्णय या चुनाव आयोग की ओर से सामने आने वाली जानकारी से स्पष्ट होगी।

  • यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    यूपी राज्यसभा चुनाव में सपा का तीसरा दांव, 10 सीटों पर मुकाबला रोचक; बीजेपी की आठवीं सीट और क्रॉस वोटिंग पर नजर

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन का मंगलवार को आखिरी दिन है। दोपहर तीन बजे तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकते हैं। इसी वजह से राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। भारतीय जनता पार्टी ने आठ और समाजवादी पार्टी ने दो प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। सात सीटों पर बीजेपी की जीत संख्या बल के आधार पर लगभग तय मानी जा रही है, जबकि सपा के दो उम्मीदवारों के लिए भी स्थिति मजबूत है। हालांकि बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के कारण चुनाव का गणित दिलचस्प हो गया है।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर लगातार चर्चा चल रही है। राज्यसभा उम्मीदवार रामगोपाल यादव से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी तीन बजे तक नामांकन का समय है और फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव चाहेंगे तो तीसरा उम्मीदवार उतरेगा, नहीं तो नहीं उतरेगा। अखिलेश यादव मंगलवार को विपक्षी गठबंधन के विरोध मार्च में शामिल हुए। विपक्षी सांसद संसद भवन के मकर द्वार से निर्वाचन आयोग मुख्यालय की ओर मार्च कर रहे थे। ऐसे में नामांकन की समयसीमा खत्म होने तक यह स्पष्ट होना था कि सपा तीसरा प्रत्याशी उतारती है या नहीं।

    सपा के तीसरे उम्मीदवार के नामांकन को लेकर यह भी दावा किया गया कि पार्टी ने जरूरी 10 विधायकों के हस्ताक्षर बतौर प्रस्तावक जुटा लिए हैं। तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की स्थिति में 16 अक्टूबर को मतदान होना है और मुकाबला अतिरिक्त वोटों पर निर्भर हो सकता है। सपा पहले ही अपने वरिष्ठ राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप के सीईओ धनराज परिमल नथवानी को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। दोनों उम्मीदवार अखिलेश यादव की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल कर चुके हैं। रामगोपाल यादव छठी बार राज्यसभा जाने की तैयारी में हैं।

    उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर मौजूदा सांसदों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। विधानसभा में विधायकों की प्रभावी संख्या 397 बताई गई है। इस हिसाब से प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 37 मतों की जरूरत होगी। बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के पास करीब 285 से 290 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर बीजेपी के सात उम्मीदवारों की जीत आसान मानी जा रही है, लेकिन आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। दूसरी ओर सपा के पास 101 विधायक बताए गए हैं, जिससे उसके दो उम्मीदवारों की जीत संभव है। तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी।

    वोटों के इसी गणित के कारण क्रॉस वोटिंग को लेकर भी चर्चा है। बीजेपी के आठवें उम्मीदवार और सपा के संभावित तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता होगी। कांग्रेस के दो विधायक सपा के खाते में बताए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त समर्थन जुटाना जरूरी होगा। ऐसे में दोनों दलों के सामने अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती होगी। अंतिम दिन नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सपा तीसरा उम्मीदवार मैदान में उतारती है या नहीं। यदि तीसरा उम्मीदवार उतरता है तो 10 सीटों के लिए उम्मीदवारों की संख्या बढ़ जाएगी और 16 अक्टूबर को मतदान की स्थिति बनेगी।

    राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार को लेकर सपा की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है। पार्टी के पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है, जबकि तीसरे उम्मीदवार के लिए उसे अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी ने आठ उम्मीदवार उतारकर आठवीं सीट के लिए भी दावा पेश किया है। ऐसे में नामांकन की अंतिम समयसीमा तक दोनों दलों की रणनीति और विधायकों के समर्थन का गणित महत्वपूर्ण बना हुआ है। मतदान की स्थिति बनने पर क्रॉस वोटिंग भी चुनाव के परिणाम को प्रभावित करने वाला अहम पहलू हो सकती है।

  • जुबिन की परफॉर्मेंस से पहले भोपाल में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस से झड़प, छात्रा भीड़ में दबी

    जुबिन की परफॉर्मेंस से पहले भोपाल में छात्रों का हंगामा, बैरिकेडिंग को लेकर पुलिस से झड़प, छात्रा भीड़ में दबी


    भोपाल । भोपाल के लाल परेड मैदान में मंगलवार को आयोजित सीएम यूथ कॉन्क्लेव 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से सीधा संवाद किया। कार्यक्रम में अलग अलग कॉलेजों से पहुंचे विद्यार्थियों ने रोजगार शिक्षा तकनीक खेल कृषि और नशामुक्ति जैसे मुद्दों पर मुख्यमंत्री से सवाल किए। मुख्यमंत्री ने युवाओं को लेकर कई घोषणाएं भी कीं लेकिन संवाद कार्यक्रम खत्म होने के बाद सिंगर जुबिन नौटियाल की परफॉर्मेंस के दौरान अचानक माहौल गर्म हो गया। बैरिकेडिंग को लेकर छात्रों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति बन गई।

    जुबिन नौटियाल के कार्यक्रम में अंदर जाने की कोशिश कर रहे कुछ स्टूडेंट्स बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मौके पर हंगामा बढ़ गया। छात्रों की ओर से कुर्सियां और धूल फेंकने की बात सामने आई। इसी दौरान भीड़ में एक छात्रा दब गई और उसके साथ धक्का मुक्की की स्थिति बनी। स्थिति संभालने के दौरान पुलिसकर्मियों ने कुछ छात्रों को थप्पड़ मारे और हल्का बल प्रयोग कर उन्हें पीछे हटाया।

    हंगामा बढ़ने के बाद कुछ बीजेपी नेता मौके पर पहुंचे और पुलिसकर्मियों को पीछे हटने के लिए कहा। इसके बाद पुलिस बल को वहां से वापस बुला लिया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया। इसी बीच कार्यक्रम में जुबिन के साथ रोबोट की परफॉर्मेंस भी आकर्षण का केंद्र रही। लाइव प्रस्तुति के दौरान रोबोट के डांस मूव्स देखकर मुख्यमंत्री के चेहरे पर मुस्कान भी नजर आई।

    यूथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री ने वर्ष 2027 को युवा वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों के लिए जिलास्तर पर सरकारी कॉलेजों में निशुल्क कोचिंग शुरू की जाएगी। एमपीपीएससी की परीक्षा अगले साल दो बार कराने की घोषणा भी की गई। इनमें से एक विशेष परीक्षा होगी। रिसर्च के लिए मिलने वाली राशि को 16 हजार रुपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए किया गया है।

    युवाओं को तकनीक और स्टार्टअप से जोड़ने के लिए सभी सरकारी कॉलेजों में एआई लैब खोलने की बात कही गई। स्टार्टअप से जुड़े नए विचारों को बढ़ावा देने के लिए पांच करोड़ रुपए का आइडिया फंड बनाने की घोषणा हुई। सरकार एक लाख युवाओं को कौशल विकास से जोड़ने की दिशा में काम करेगी। वर्ष 2027 में रोजगारपरक उद्योगों पर आधारित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट आयोजित करने की भी बात कही गई। इसके अलावा 12 नए मेडिकल कॉलेज और 12 नई यूनिवर्सिटीज खोलने की घोषणा की गई।

    एआई और स्टार्टअप को लेकर सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में एआई सिटी नॉलेज सिटी और साइंस सिटी विकसित की जा रही है। उन्होंने बताया कि स्टार्टअप के लिए युवाओं को पांच लाख रुपए तक का अनुदान देने की व्यवस्था है। सरकार युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में काम कर रही है। इंदौर रीवा और उज्जैन में आईटी पार्क तथा ग्वालियर में टेलीकॉम हब विकसित करने की योजना का भी उल्लेख किया गया।

    खेलों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल में अंतरराष्ट्रीय स्तर का बड़ा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है। प्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों पर खेल मैदान विकसित करने की योजना है। कृषि के क्षेत्र में खेत से फूड प्रोसेसिंग तक पूरी वैल्यू चेन विकसित करने के साथ ड्रैगन फ्रूट और मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही गई। ऑर्गेनिक फार्मिंग कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और डेयरी क्षेत्र पर भी सरकार के फोकस का उल्लेख किया गया।

    नशे के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार वर्ष 2029 तक प्रदेश और देश को नशामुक्त करने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि नशे के कारण परिवार और युवा पीढ़ी प्रभावित होती है और सरकार इस दिशा में कठोर कार्रवाई करेगी।

  • राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    राहुल गांधी का ज्ञानेश कुमार पर हमला, बोले- हो गया भाई, अब इस्तीफा देने का समय; चुनाव आयोग के बाहर विपक्ष का धरना

    नई दिल्ली। विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत अन्य मांगों को लेकर संसद भवन परिसर से चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च किया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी समेत इंडिया ब्लॉक के सांसद चुनाव आयोग मुख्यालय, निर्वाचन सदन की तरफ बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें पार्लियामेंट स्ट्रीट पर रोक दिया। इसके बाद सांसद वहीं सड़क पर बैठ गए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना शुरू कर दिया। सांसदों को नीति आयोग कार्यालय के सामने रोका गया, जो नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर जाने वाले रास्ते पर स्थित है।

    प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के आरएसएस यूनिफॉर्म वाले कटआउट लिए और नारे लगाए। इनमें ‘बीजेपी है सीईसी है’, ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘डेमोक्रेसी बिकाऊ नहीं है’ जैसे नारे शामिल थे। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए लिखा, ‘ज्ञानेश, यह हो गया भाई। इस्तीफा देने का समय आ गया है।’ मार्च में तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और सीपीआई (एम) नेता जॉन ब्रिटास समेत कई सांसद शामिल हुए। सांसदों के पहुंचने से काफी पहले संसद और चुनाव आयोग मुख्यालय के अंदर तथा आसपास भारी सुरक्षा तैनात कर दी गई थी और बैरिकेडिंग की गई थी।

    मार्च से पहले विपक्षी सांसदों ने सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठाए और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज की। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के प्रति लोगों का भरोसा कम हुआ है। उन्होंने कहा कि जिस संस्था पर पूरा देश भरोसा करता है और गर्व महसूस करता है, उसकी निष्पक्षता पर पहले कभी सवाल नहीं उठाए गए, लेकिन एक व्यक्ति ने उस भरोसे को तोड़ दिया है। उन्होंने एक पूरे नेक्सस के साथ काम करने का भी आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार से सवाल करेगा और बीजेपी के मुख्यमंत्री जवाब देना शुरू करेंगे।

    सीपीआई सांसद पी संदोष कुमार ने कहा कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों से वोटर रोल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के दौरान फॉर्म 6 से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा को लेकर विपक्ष की आपत्तियां मजबूत हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि 26 सितंबर को चुनाव आयोग की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि फॉर्म 6 से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूरी दी है, जबकि उनके मुताबिक यह बयान गुमराह करने वाला साबित हुआ है। सीपीआई नेता ने सीईसी को ‘धोखेबाज चुनाव कमिश्नर’ कहा और दावा किया कि विपक्षी पार्टियां 2025 से इन नियमों के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं तथा अपना आंदोलन और तेज करेंगी।

    शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने भी मार्च से पहले बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सांसद शांतिपूर्वक आगे बढ़ना चाहते थे और वे देश के नागरिक होने के साथ संसद के सदस्य भी हैं। राउत ने सवाल किया कि उन्हें रोकने के लिए इतनी बड़ी फोर्स की क्या जरूरत है और कहा कि उनके पास हथियार नहीं हैं। उन्होंने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स और सीआईएसएफ के जवानों की तैनाती तथा मंत्रियों के घरों के बाहर सुरक्षा बढ़ाए जाने का दावा किया। राउत ने फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की स्थिति को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सीईसी को पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि उसने फॉर्म 6 के किसी भी बदले हुए वर्जन को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने यह पता लगाने के लिए चुनाव आयोग के रिकॉर्ड की जांच करने की बात कही कि क्या बदलाव किए गए थे और उन्हें किसने मंजूरी दी थी। यह टिप्पणी ज्ञानेश कुमार के कथित एकतरफा फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई। 26 सितंबर के बयान में आयोग ने कहा था कि एसआईआर के लिए फॉर्म 6 के साथ जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है। यह विरोध एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और तीन सदस्यों वाले आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों को लेकर विपक्ष के अभियान के बीच हुआ। चुनाव आयोग ने आयोग में बंटवारे के सुझावों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से जुड़े फैसले एकमत से लिए गए थे।

  • गरबा में रील, लाइक और व्यूज के लिए शामिल न हों मुस्लिम युवा, मुस्लिम त्योहार कमेटी ने की संयम बरतने की अपील

    गरबा में रील, लाइक और व्यूज के लिए शामिल न हों मुस्लिम युवा, मुस्लिम त्योहार कमेटी ने की संयम बरतने की अपील

    मध्य प्रदेश।  में शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर से शुरू होने जा रही है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के दौरान माता की आराधना-पूजा, व्रत और गरबा समेत कई धार्मिक आयोजन होते हैं। इसी को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने मुस्लिम विद्यार्थियों और युवाओं से जिम्मेदार और संयमित व्यवहार करने की अपील की है। कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शमशुल हसन ने युवाओं से कहा है कि वे केवल सोशल मीडिया पर रील, लाइक और व्यूज हासिल करने के लिए किसी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल होने से बचें। कमेटी का कहना है कि किसी व्यक्ति का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार कई बार सिर्फ उसकी व्यक्तिगत गलती तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उसका असर परिवार और समाज पर भी पड़ सकता है।

    कमेटी ने मुस्लिम युवाओं से गरबा आयोजनों से दूरी बनाए रखने की अपील की है। साथ ही युवाओं से शांति, संयम, धार्मिक मर्यादा और कानून का पालन करने को कहा गया है। इस संबंध में मुस्लिम त्योहार कमेटी ने शासन-प्रशासन को पत्र भेजकर आवश्यक कदम उठाने का अनुरोध भी किया है। कमेटी ने मांग की है कि 11 अक्टूबर से पहले यह संदेश विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, तकनीकी एवं चिकित्सा संस्थानों और छात्रावासों तक पहुंचाया जाए, ताकि विद्यार्थियों और युवाओं को समय रहते जागरूक किया जा सके। कमेटी ने कहा है कि युवा सभी धर्मों की आस्था और परंपराओं का सम्मान करें तथा स्थानीय नियमों और कानूनों का पालन करें।

    कमेटी ने युवाओं को ऐसे किसी विवाद, टकराव, उकसावे या अनुचित प्रतिक्रिया से दूर रहने की सलाह दी है, जिससे सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए खास तौर पर रील बनाने, लाइक और व्यूज हासिल करने या सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए किसी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल नहीं होने की अपील की गई है। कमेटी का कहना है कि सोशल मीडिया पर कुछ मिनटों की लोकप्रियता के लिए ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए, जिससे बाद में विवाद पैदा हो या परिवार और समाज को परेशानी का सामना करना पड़े।

    शमशुल हसन ने कहा कि जब एक समुदाय की ओर से यह संकेत दिया जा रहा है कि मुस्लिम समाज के लोग उनके धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाएं, तो इसे विवाद का विषय नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने मध्य प्रदेश के सामाजिक संगठनों, उलेमाओं और काजियों से आगे आने और मुस्लिम समाज के नौजवानों, बच्चों और बच्चियों से गरबा सहित दूसरे धार्मिक आयोजनों से दूरी बनाए रखने की अपील करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कमेटी का उद्देश्य किसी धार्मिक आयोजन का विरोध करना नहीं है। उनका कहना है कि किसी धार्मिक आयोजन में अनावश्यक रूप से शामिल होकर ऐसा कोई काम नहीं किया जाना चाहिए, जिससे विवाद की स्थिति बने या समाज में तनाव पैदा हो।

    उन्होंने देश और प्रदेश के युवाओं, बच्चों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से भी अपील की कि वे सिर्फ रील, लाइक और व्यूज के लिए किसी धार्मिक आयोजन में शामिल न हों। साथ ही ऐसी कोई रील या वीडियो वायरल न करने को कहा, जिससे किसी की धार्मिक भावनाएं आहत हों या विवाद की स्थिति पैदा हो। कमेटी की ओर से प्रदेश, जिला और स्थानीय स्तर के पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्रों में उलेमाओं और सामाजिक संगठनों से संपर्क करने तथा मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जागरूक करने को कहा जाएगा। कमेटी जिला प्रशासन से भी संपर्क करेगी और अमन व शांति बनाए रखने का संदेश देगी। कमेटी ने कहा कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए वह उलेमाओं, सामाजिक संगठनों और प्रशासन के साथ मिलकर सकारात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

    कमेटी ने स्पष्ट किया है कि उसकी अपील किसी धर्म, धार्मिक आयोजन या गरबा कार्यक्रम के विरोध में नहीं है। इसका उद्देश्य मुस्लिम युवाओं को जिम्मेदार व्यवहार, धार्मिक मर्यादा, कानून के पालन और सामाजिक सद्भाव के प्रति जागरूक करना है। कमेटी ने कहा है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान सभी समुदायों को एक-दूसरे की आस्था और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए और किसी भी तरह के विवाद से बचना चाहिए।

  • मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम

    मेट्रो काम को लेकर विधायक का विरोध, शाही कब्रिस्तान के नीचे रूट पर बोले बिना अनुमति नहीं चलेगा काम


    भोपाल । भोपाल में मेट्रो के फेज 2 के रूट को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार देर रात भोपाल टॉकीज के पास स्थित शाही कब्रिस्तान में मेट्रो की टीम पहुंची और बैरिकेड्स लगाने का काम शुरू किया तो उत्तर से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील मौके पर पहुंच गए। कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो का अंडरग्राउंड रूट निकाले जाने को लेकर विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई और मेट्रो तथा पुलिस अधिकारियों से काम रोकने को कहा। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से सख्त लहजे में कहा कि बाहर निकलो वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा। विधायक के इस तेवर के बाद मौके पर मौजूद लोगों के बीच भी हलचल देखने को मिली।

    बताया गया कि देर रात विधायक को जानकारी मिली कि मेट्रो कॉरपोरेशन की टीम कब्रिस्तान के पास बैरिकेड्स लगाने के लिए मशीनें और अन्य सामान लेकर पहुंची है। इसके बाद वह समाज के लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। विधायक ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब यह शाही कब्रिस्तान की संपत्ति है तो यहां काम शुरू करने से पहले अनुमति ली गई या नहीं। उन्होंने कहा कि पहले शाही औकाफ से अनुमति ली जानी चाहिए और उसके बाद ही किसी तरह का निर्माण कार्य किया जाना चाहिए।

    विधायक आतिफ अकील ने स्पष्ट कहा कि बिना वैधानिक अनुमति के कब्रिस्तान में किसी भी तरह का काम नहीं होना चाहिए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से मशीनें और सामान हटाने की मांग की। विधायक का कहना है कि इस कब्रिस्तान में उनके पूर्वजों की कब्रें हैं और यहां बड़ी संख्या में कब्रें मौजूद हैं। ऐसे में वह कब्रिस्तान के नीचे से मेट्रो लाइन निकाले जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस स्थान से मेट्रो रूट को हटाकर कोई दूसरा विकल्प तलाशा जाना चाहिए।

    दरअसल भोपाल में मेट्रो के ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर सुभाषनगर से एम्स के बीच मेट्रो सेवा शुरू हो चुकी है। अब फेज 2 में सुभाषनगर से करोंद तक मेट्रो रूट का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस पूरे कॉरिडोर की लंबाई करीब 16.74 किलोमीटर बताई गई है। इसमें कुछ हिस्सा एलिवेटेड होगा जबकि पुराने शहर के महत्वपूर्ण हिस्से में मेट्रो को अंडरग्राउंड ले जाने की योजना है।

    फेज 2 के तहत करीब 5.38 किलोमीटर हिस्से में छह एलिवेटेड स्टेशन बनाए जाने हैं। इनमें पुल बोगदा ऐशबाग सिंधी कॉलोनी डीआईजी बंगला कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस हिस्से के निर्माण पर करीब 650 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई है। वहीं लगभग 3.39 किलोमीटर का हिस्सा अंडरग्राउंड रखा गया है। इस हिस्से में भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड जैसे महत्वपूर्ण स्टेशन शामिल होंगे। अंडरग्राउंड हिस्से के निर्माण पर करीब 890 करोड़ रुपये खर्च होने की योजना है।

    शाही कब्रिस्तान से जुड़े मेट्रो रूट को लेकर मामला पहले से ही विवाद में है। मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में भी इस मुद्दे पर सुनवाई चल रही है और दोनों पक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं। ऐसे में विधायक की ताजा आपत्ति ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। विधायक का कहना है कि जब तक संबंधित संस्था से आवश्यक अनुमति नहीं मिलती तब तक कब्रिस्तान में कोई काम नहीं होना चाहिए।

    अब देखना होगा कि मेट्रो परियोजना और कब्रिस्तान से जुड़े पक्ष के बीच यह विवाद किस तरह सुलझता है। एक तरफ भोपाल में मेट्रो के फेज 2 को तेजी से पूरा करने की कोशिश चल रही है तो दूसरी तरफ शाही कब्रिस्तान से जुड़े रूट को लेकर आपत्ति लगातार सामने आ रही है। ऐसे में इस हिस्से में निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से पहले अनुमति और रूट को लेकर स्थिति स्पष्ट होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2026 में छह टीमें आमने-सामने, भारत समेत सभी स्क्वॉड और पूरा शेड्यूल यहां जानिए हेडलाइन 2:

    वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2026 में छह टीमें आमने-सामने, भारत समेत सभी स्क्वॉड और पूरा शेड्यूल यहां जानिए हेडलाइन 2:

    नई दिल्ली ।वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स 2026 में इस बार छह टीमें हिस्सा ले रही हैं। पाकिस्तान के टूर्नामेंट से हटने के बाद अब भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज और बांग्लादेश की टीमें खेल रही हैं। टूर्नामेंट शारजाह क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित हो रहा है। भारत की टीम में युवराज सिंह, हरभजन सिंह, यूसुफ पठान, इरफान पठान, अंबाती रायुडू और रॉबिन उथप्पा जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

    भारत चैंपियंस के स्क्वॉड में अंबाती रायुडू, युवराज सिंह, यूसुफ पठान, स्टुअर्ट बिन्नी, इरफान पठान, पवन नेगी, ऋषि धवन, रॉबिन उथप्पा, मोहित शर्मा, धवल कुलकर्णी, वरुण एरॉन, हरभजन सिंह, पीयूष चावला और अभिमन्यु मिथुन हैं। भारत ने टूर्नामेंट की शुरुआत ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 46 रन की जीत से की, जबकि इंग्लैंड से उसे 21 रन से हार मिली।

    ऑस्ट्रेलिया चैंपियंस में क्रिस लिन, डेविड वॉर्नर, उस्मान ख्वाजा, डी’आर्सी शॉर्ट, रॉब क्विनी, नाथन रियरडन, बेन डंक, केन रिचर्डसन, बेन हिल्फेनहॉस, जेम्स पैटिनसन, फवाद अहमद, बेन लॉफलिन और एंड्रयू टाय शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीका के स्क्वॉड में फाफ डुप्लेसिस, रिचर्ड लेवी, सरेल एरवी, कॉलिन इंग्राम, अल्बी मॉर्केल, जेपी डुमिनी, एबी डिविलियर्स, डेन विलास, मोर्ने वान विक, हार्डस विलजोन, वेन पार्नेल, इमरान ताहिर, डुआने ओलिवियर और आरोन फांगिसो हैं।

    इंग्लैंड चैंपियंस की टीम में जेसन रॉय, डेविड मलान, मोईन अली, रवि बोपारा, समित पटेल, जो डेनली, फिल मस्टर्ड, टिम एंब्रोस, लियाम प्लंकेट, अजमल शहजाद, रयान साइडबॉटम, मोंटी पनेसर, स्टुअर्ट मीकर और सर जेम्स एंडरसन हैं। वेस्टइंडीज चैंपियंस में क्रिस गेल, लेंडल सिमंस, शिवनारायण चंद्रपॉल, ड्वेन ब्रावो, डेव मोहम्मद, कार्लोस ब्रेथवेट, आंद्रे रसेल, रेयाड एमरिट, चैडविक वॉल्टन, आंद्रे फ्लेचर, शेल्डन कॉटरेल, फिडेल एडवर्ड्स, सुलेमान बेन और निकिता मिलर शामिल हैं।

    बांग्लादेश चैंपियंस के प्रमुख खिलाड़ियों में इमरुल कायेस, जहुरुल इस्लाम, मोहम्मद अशरफुल, महमूदुल्लाह, शाकिब अल हसन, रोनी तालुकदार, नासिर हुसैन, शुभागता होम, जियाउर रहमान, फजले महमूद, अराफात सनी, कमरुल इस्लाम और एनामुल हक जूनियर हैं। पाकिस्तान ने जरूरी एनओसी नहीं मिलने के बाद टूर्नामेंट से नाम वापस लिया है। उसकी टीम में शाहिद अफरीदी और मोहम्मद हफीज समेत कई खिलाड़ी थे।

    टूर्नामेंट में भारत ने तीन अक्तूबर को ऑस्ट्रेलिया को 46 रन से हराया। चार अक्तूबर को दक्षिण अफ्रीका ने वेस्टइंडीज को 97 रन से मात दी और इंग्लैंड ने भारत को 21 रन से हराया। छह अक्तूबर को भारत का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका से है। इसके बाद भारत 11 अक्तूबर को बांग्लादेश और 13 अक्तूबर को वेस्टइंडीज से खेलेगा। पाकिस्तान के हटने से भारत-पाकिस्तान का 10 अक्तूबर का मुकाबला अब नहीं होगा।

    लीग चरण के अन्य मुकाबलों में ऑस्ट्रेलिया-बांग्लादेश और इंग्लैंड-वेस्टइंडीज सात अक्तूबर को, ऑस्ट्रेलिया-दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश-वेस्टइंडीज नौ अक्तूबर को, इंग्लैंड-दक्षिण अफ्रीका 10 अक्तूबर को, ऑस्ट्रेलिया-वेस्टइंडीज 11 अक्तूबर को, ऑस्ट्रेलिया-इंग्लैंड 13 अक्तूबर को और बांग्लादेश-दक्षिण अफ्रीका 14 अक्तूबर को होंगे। दोनों सेमीफाइनल 16 अक्तूबर और फाइनल 18 अक्तूबर को शारजाह में खेला जाएगा।

  • रूस में प्लेग की आशंका से बढ़ी चिंता, लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद 200 लोग निगरानी में, अमेरिका ने मांगी जानकारी

    रूस में प्लेग की आशंका से बढ़ी चिंता, लैब टेक्नीशियन की मौत के बाद 200 लोग निगरानी में, अमेरिका ने मांगी जानकारी


    नई दिल्ली:
    रूस के साइबेरिया स्थित इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की महिला लैब टेक्नीशियन दर्या शिपिलोवा की संदिग्ध मौत के बाद प्लेग को लेकर चिंता बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लैब में जांच के दौरान जिंदा बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटने से वह संक्रमित हुई थीं। हालांकि, रूस की स्वास्थ्य निगरानी संस्था रोस्पोट्रेबनादजोर ने इस दावे को खारिज किया है। संस्था के मुताबिक महिला की मौत प्लेग से नहीं, बल्कि अज्ञात निमोनिया से हुई है। जांच किए गए नमूनों में कोई घातक रोगाणु भी नहीं मिला। इसके बावजूद पड़ोसी राज्य बुरियाटिया के प्रमुख एलेक्सी त्सिदेनोव ने मौत की वजह प्लेग होने की आशंका जताई है। वहीं, रोस्पोट्रेबनादजोर के पूर्व प्रमुख गेनेडी ओनिश्चेंको ने कहा कि यह प्लेग नहीं है और ठंड के कारण संक्रमण का प्रसार संभव नहीं है।

    मंगोलिया की सीमा के पास शेलेखोव कस्बे के जिस अस्पताल में महिला को भर्ती कराया गया था, वहां के पूरे स्टाफ को क्वारंटीन कर दिया गया है। स्वतंत्र मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार करीब 200 लोग निगरानी में हैं। अस्पतालों में नए मरीजों की भर्ती रोक दी गई है और कुछ अन्य अस्पताल भी बंद किए गए हैं। लॉकडाउन की चर्चाओं के बीच गवर्नर इगोर कोब्जेव ने लोगों से शांत रहने की अपील की है। एहतियात के तौर पर सार्वजनिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं। नजदीकी एल्युमिनियम प्लांट में मास्क पहनना अनिवार्य किया गया है। मेयर मैक्सिम मोदिन के अनुसार, पिछले 10 दिनों में संस्थान के किसी अन्य कर्मचारी में संक्रमण नहीं मिला है। हालांकि, संपर्क में आए लोगों में कोविड-19 और राइनोवायरस के दो-दो मामले मिले हैं।

    मामले पर अमेरिका भी नजर बनाए हुए है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि वह संभावित निमोनिक प्लेग से हुई मौत की स्थिति की सीडीसी के साथ निगरानी कर रहा है। अमेरिका ने रूस से मामले की सटीक जानकारी साझा करने की अपील की है। करीब 95 शोधकर्ताओं वाला यह संस्थान साइबेरिया और सुदूर-पूर्वी क्षेत्रों में अति-जोखिम वाले संक्रमणों की रोकथाम से जुड़ा प्रमुख केंद्र है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि वह इरकुत्स्क क्षेत्र में एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की लैब वर्कर की मौत के मामले पर करीबी नजर रख रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चिंता की कोई बात है।

    रूस में प्लेग फैलने की आशंका के बीच कजाकिस्तान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान ने अपनी सीमाओं पर स्वास्थ्य नियंत्रण कड़े कर दिए हैं। किर्गिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी सीमा चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा है। सीमा पार करने वाले यात्रियों, वाहनों और सामान की कड़ाई से निगरानी की जा रही है। उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य प्राधिकरण ने रूस और विश्व स्वास्थ्य संगठन के डेटा के आधार पर निगरानी बढ़ाई है, ताकि संभावित संक्रमण को देश में आने से रोका जा सके। कजाकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी स्थिति पर लगातार नजर रखने की बात कही है। अधिकारियों के अनुसार संक्रमण फैलने का जोखिम बेहद कम है, लेकिन सीमा पर थर्मल स्क्रीनिंग और जांच की जा रही है।

    इस घटना ने अतीत में प्रयोगशालाओं से संक्रमण फैलने की घटनाओं की याद भी ताजा कर दी है। 1967 में जर्मनी में मारबर्ग वायरस पर शोध के दौरान वैज्ञानिक संक्रमित हुए थे और 31 लोग इसकी चपेट में आए थे, जिनमें सात की मौत हुई थी। 1977 में रूस और चीन में इन्फ्लूएंजा के प्रसार को लेकर भी लैब से जुड़े संक्रमण की चर्चा हुई थी। 1978 में ब्रिटेन में बर्मिंघम यूनिवर्सिटी की लैब से एयर डक्ट के जरिए चेचक फैलने की घटना में जेनेट पार्कर की मौत हुई थी। 2019 में वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से कोरोना वायरस के संभावित लीक का दावा भी सामने आया था, जिस पर वैश्विक स्तर पर मतभेद जारी हैं।

  • स्मित मच्छार पर हमले के बाद फ्लाईदुबई विमान को गिराने की तैयारी में था इजरायल, 150 यात्रियों की थी जान

    स्मित मच्छार पर हमले के बाद फ्लाईदुबई विमान को गिराने की तैयारी में था इजरायल, 150 यात्रियों की थी जान


    नई दिल्ली: दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर सह-पायलट के हमले और विमान को कथित तौर पर अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश के बाद एक बड़ा खुलासा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉकपिट में हुए हमले की जानकारी मिलने के बाद इजरायल ने विमान को निशाना बनाने की तैयारी कर ली थी। इजरायल को आशंका थी कि यदि विमान को हाइजैक कर लिया जाता है तो उसका इस्तेमाल 11 सितंबर 2001 जैसी घटना को अंजाम देने के लिए किया जा सकता है। विमान में करीब 150 इजरायली यात्री सवार थे। ऐसे में इजरायल के सामने विमान को गिराने और संभावित रूप से किसी बड़े हादसे को रोकने के बीच फैसला लेने की स्थिति बन गई थी।

    घटना के दौरान ओमानी सह-पायलट ने कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी से हमला किया। हमले में मच्छार गंभीर रूप से घायल हो गए। शुरुआत में विमान में मौजूद अन्य लोगों को कॉकपिट के भीतर हुई घटना की जानकारी नहीं हो सकी। इसके बाद कैप्टन मच्छार ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे कुछ क्रू सदस्य और यात्री अंदर पहुंच सके और उन्होंने सह-पायलट को काबू में कर लिया। घटना के बाद विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने नियंत्रण संभाला और विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया।

    विमान के सुरक्षित उतरने से उसमें सवार करीब 180 लोगों की जान बच गई। रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की चिंता इस बात को लेकर थी कि अगर विमान अपना रास्ता बदलकर किसी बड़े शहर या ऊंची इमारत की ओर जाता है तो इससे बड़ी संख्या में लोगों की जान जा सकती है। इसी आशंका के कारण विमान के रास्ते में बदलाव नहीं होने की स्थिति में उसे निशाना बनाने की तैयारी की गई थी। हालांकि विमान को सुरक्षित उतार लिया गया और इजरायल को उस योजना को लागू करने की जरूरत नहीं पड़ी। घटना के बाद मामले की जांच कई स्तरों पर की जा रही है।

    इस मामले में ओमानी सह-पायलट की पुरानी गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां करीब एक दशक पहले उसके ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान की गतिविधियों की जांच कर रही हैं। ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस के मुताबिक, संघीय और राज्य पुलिस तथा देश की घरेलू खुफिया एजेंसी की संयुक्त आतंकवाद रोधी टीम उसके ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है। सह-पायलट फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात में हिरासत में है। उस पर इजरायल जा रहे विमान को अपने नियंत्रण में लेने की कथित कोशिश का आरोप है।

    न्यूजीलैंड की पुलिस ने भी कहा है कि सह-पायलट कुछ समय न्यूजीलैंड में रहा था और अधिकारी वहां उसके रहने से जुड़े पहलुओं की जांच करेंगे। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उसे 2014 में ऑस्ट्रेलिया का छात्र वीजा मिला था और वह 2015 में एक विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंचा था। बताया गया है कि वह 2017 में ऑस्ट्रेलिया से चला गया। इसके बाद अधिकारियों ने पुष्टि की कि वह संबंधित पाठ्यक्रम में पंजीकृत नहीं था, जिसके बाद 2019 में उसका वीजा रद्द कर दिया गया था। इस पूरे घटनाक्रम में विमान पर हमला, उसके सुरक्षित उतरने और सह-पायलट की पृष्ठभूमि की जांच प्रमुख पहलू बने हुए हैं।