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  • सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव

    सुकमा में ग्राम सभा का फैसला, धर्म बदल चुके लोगों को शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव


    नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुनपल्ली गांव में ग्राम सभा ने धार्मिक गतिविधियों और धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों को लेकर कई फैसले लिए हैं। कोंटा जनपद पंचायत के तहत आने वाले इस गांव में 2 अक्टूबर को विशेष ग्राम सभा की बैठक हुई थी। बैठक में गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, सामुदायिक हितों और स्थानीय स्तर पर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई। ग्राम सभा ने कुल 12 प्रस्ताव पारित किए। इनमें ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों को चर्च बनाने, प्रार्थना सभा या अन्य धार्मिक आयोजन करने तथा शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन नहीं देने का प्रस्ताव भी शामिल है।

    ग्राम सभा की ओर से बाहरी पादरियों और ईसाई प्रचारकों के गांव में प्रवेश पर भी रोक लगाने की बात कही गई है। इसके लिए पुनपल्ली गांव में एक सूचना-पट्ट लगाया गया है, जिसमें धर्म परिवर्तन, प्रार्थना सभाओं और अन्य गतिविधियों के लिए पादरियों और ईसाई प्रचारकों के प्रवेश को प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी दी गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, ग्राम पंचायत की सीमा के भीतर धर्म बदल चुके परिवारों के सदस्यों के शव दफनाने के लिए भी ग्राम सभा की जमीन नहीं दी जाएगी। ग्राम सभा ने तय किया है कि चर्च, प्रार्थना सभा, धार्मिक सभा और शव दफनाने के लिए सामुदायिक जमीन उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।

    ग्राम सभा के फैसलों की जानकारी जनपद पंचायत सदस्य और भारतीय जनता युवा मोर्चा के नेता मड़कम भीमा ने दी। उन्होंने बताया कि विशेष ग्राम सभा में स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। बैठक में ‘शांति और न्याय समिति’ के गठन का प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसके तहत यदि कोई बाहरी व्यक्ति धार्मिक प्रचार या ऐसी गतिविधियों के लिए गांव में आता है तो उसे सबसे पहले समिति को इसकी सूचना देनी होगी। ग्राम सभा ने स्थानीय स्तर पर विवादों से निपटने के लिए भी इस समिति की व्यवस्था की है।

    इन फैसलों में पेसा कानून का भी उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा में पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996 के तहत पांचवीं अनुसूची वाले अनुसूचित क्षेत्रों के पंजीकृत मतदाता शामिल होते हैं। प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 और छत्तीसगढ़ पेसा कानून 2022 के संशोधित प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। ग्राम सभा का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य गांव की पारंपरिक सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और स्थानीय विरासत की रक्षा करना है।

    ग्राम सभा ने यह भी तय किया है कि उसके फैसलों से जुड़े किसी विवाद की स्थिति में संबंधित प्रशासनिक और कानूनी अधिकारियों को सूचित किया जाएगा और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। ग्रामीणों से ग्राम सभा के फैसलों और स्थानीय नियमों का सम्मान करने की अपील की गई है। इस फैसले के तहत विशेष रूप से ईसाइयों और धर्म बदल चुके लोगों के लिए सामुदायिक जमीन के इस्तेमाल को लेकर प्रावधान किए गए हैं। सूचना-पट्ट के जरिए धार्मिक गतिविधियों और बाहरी प्रचारकों के प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंध की जानकारी भी सार्वजनिक की गई है।

  • कांग्रेस और हरीश रावत के बीच बढ़ा टकराव, खरगे-राहुल भी अलर्ट; हाईकमान के आदेश के बावजूद जारी रही यात्रा

    कांग्रेस और हरीश रावत के बीच बढ़ा टकराव, खरगे-राहुल भी अलर्ट; हाईकमान के आदेश के बावजूद जारी रही यात्रा


    नई दिल्ली:
    उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को लेकर टकराव बढ़ता नजर आ रहा है। उत्तराखंड प्रभारी कुमारी सैलजा के आग्रह पत्र के बावजूद हरीश रावत ने सोमवार को भी अपनी यात्रा जारी रखी। इस बीच उन्होंने पार्टी हाईकमान से अपना पक्ष रखने के लिए समय मांगा है। रावत ने कहा कि उनकी यात्रा को गलत समझा जा रहा है और उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल को पहले ही पूरी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। यात्रा पहले से तय होने के कारण उन्होंने उनसे माफी भी मांगी थी। कुमारी सैलजा ने कहा है कि रावत अपनी बात रखना चाहते हैं और वह 7 या 8 अक्टूबर को उनसे बात करेंगी।

    हरीश रावत की यात्रा को लेकर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने स्पष्ट कहा था कि राज्य में कोई भी व्यक्तिगत कार्यक्रम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद सोमवार को रावत ने जसपुर से हल्द्वानी तक धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान कई कांग्रेस नेता और जनप्रतिनिधि उनके साथ दिखाई दिए। कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और चकराता विधायक प्रीतम सिंह के रावत की यात्रा के समर्थन में आने से पार्टी के भीतर गुटबाजी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में यात्रा के दौरान जसपुर विधायक आदेश सिंह चौहान, अल्मोड़ा विधायक मनोज तिवारी, धारचूला विधायक हरीश धामी और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल भी शामिल हुए।

    हालांकि काशीपुर में महानगर अध्यक्ष अलका पाल, प्रदेश उपाध्यक्ष अनुपम शर्मा समेत कुछ नेताओं ने यात्रा से दूरी बनाए रखी। इससे पार्टी के भीतर अलग-अलग धड़ों के सक्रिय होने की चर्चा तेज हुई है। रावत ने सोशल मीडिया पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि दिल्ली में उनकी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा को गलत समझा जा रहा है। उन्होंने कहा कि संभव है कि वह अपनी बात सही तरीके से नहीं समझा पाए हों। प्रदेश प्रभारी ने उन्हें मिलने का समय दिया है और वह वहां अपना स्पष्टीकरण देंगे।

    हरीश रावत के मुद्दे को कांग्रेस हाईकमान भी गंभीरता से ले रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार यह मामला राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संज्ञान में भी लाया गया है। उत्तराखंड चुनाव को गंभीरता से ले रही कांग्रेस इस बार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती। पार्टी के भीतर यह भी आशंका है कि रावत के समर्थन में और नेता सामने आ सकते हैं, जिससे चुनाव से पहले गुटबाजी बढ़ सकती है। इसी वजह से हाईकमान उनके पक्ष को सुनकर ही आगे कोई फैसला लेने के संकेत दे रहा है।

    कुमारी सैलजा ने कहा कि हरीश रावत अपनी बात रखना चाहते हैं और पार्टी पहले उनका पक्ष सुनना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। यह पूछे जाने पर कि यदि रावत यात्रा जारी रखते हैं और पार्टी उनकी दलीलों से सहमत नहीं होती तो क्या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है, सैलजा ने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। वहीं, सोमवार रात करीब आठ बजे यात्रा के हल्द्वानी पहुंचने पर हरीश रावत ने कहा कि उत्तराखंड की धरती पर उन्हें बदलाव की आवाज सुनाई दे रही है। उन्होंने कहा कि 2027 में उत्तराखंड और 2029 में केंद्र में बदलाव होगा और यह बदलाव कांग्रेस लाएगी। स्वराज आश्रम में विधायक सुमित हृदयेश, द्वाराहाट विधायक मदन बिष्ट समेत कई पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

  • प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार

    प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचा मेरठ का परिवार, बेटे प्रिंस की फोटो लेकर मां ने लगाई वापसी की गुहार


    नई दिल्ली: मेरठ का एक परिवार सोमवार को लापता बेटे प्रिंस की तलाश में वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के राधा केलि कुंज आश्रम के बाहर पहुंचा। नेत्रपाल अपनी पत्नी पूनम के साथ बेटे की फोटो हाथ में लेकर उसकी वापसी की गुहार लगाते नजर आए। परिजनों के मुताबिक, प्रिंस नीट परीक्षा देने के बाद 8 मई 2024 को अपने माता-पिता के साथ वृंदावन आया था। अगले दिन लाइन में लगने के बाद 10 मई को उसे एकांतिक वार्ता के लिए पास मिला। वार्ता के लिए प्रिंस अकेला आश्रम के अंदर गया, लेकिन इसके बाद वह बाहर नहीं आया। परिवार का कहना है कि उन्होंने आश्रम के साधकों से इसकी जानकारी मांगी, लेकिन प्रिंस का पता नहीं चल सका।

    पूनम ने बताया कि प्रिंस के वापस नहीं आने के बाद परिवार ने मामले की शिकायत मथुरा पुलिस से भी की थी। इसके बावजूद अब तक बेटे का पता नहीं चला है। परिजन लगातार मेरठ और वृंदावन के बीच आ-जा रहे हैं और उसकी तलाश कर रहे हैं। परिवार को उम्मीद है कि जिस तरह अनुज और मयंक की सकुशल बरामदगी हुई, उसी तरह उनका बेटा प्रिंस भी उन्हें मिल सकता है। इसी उम्मीद के साथ परिवार आश्रम के बाहर पहुंचा और लोगों से बेटे की वापसी में मदद की गुहार लगाई।

    वहीं, झारखंड से 17 वर्षीय एक किशोर भी बिना बताए वृंदावन पहुंच गया और प्रेमानंद महाराज के केलि कुंज आश्रम में जाकर संत से दीक्षा लेने की इच्छा जताई। किशोर की उम्र और परिस्थितियों को देखते हुए आश्रम प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस उसे सुरक्षित रमणरेती पुलिस चौकी ले गई और उसके परिजनों से संपर्क किया। आश्रम के बाहर पिछले कुछ दिनों से लापता बच्चों के परिजनों के पहुंचने का सिलसिला भी जारी है।

    सोमवार को प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचे मेरठ के परिवार को बाहर मौजूद भक्तों की भीड़ से नोकझोंक का सामना भी करना पड़ा। मौके पर मौजूद पुलिस ने अभद्रता करने के आरोप में एक युवक को हिरासत में लिया। पिछले दो दिनों से आश्रम के बाहर इसी तरह का माहौल बना हुआ है। इस बीच संत प्रेमानंद महाराज के भक्तों ने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चैनल चलाने वाले एक पत्रकार का पुतला भी फूंका। भक्तों का आरोप है कि पत्रकार संत की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। संत के दीक्षित साधक रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद सामने आ रही खबरों को लेकर भक्तों में आक्रोश बताया गया है।

    आश्रम से जुड़े विवाद के बीच श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि दो गुटों में बंटे आश्रम के शिष्य परिकर की ओर से प्रचार के लिए पैसे देकर एक मशहूर हस्ती को आश्रम बुलाया गया था। उन्होंने आश्रम से जुड़े लोगों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बीच मेरठ का परिवार अपने बेटे प्रिंस की तलाश में आश्रम पहुंचा और उसकी सकुशल वापसी की उम्मीद जताई।

  • दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे पर भाजपा का हमला, नितेश राणे ने विदेश जाने की तैयारी का लगाया आरोप

    दिशा सालियान मामले में आदित्य ठाकरे पर भाजपा का हमला, नितेश राणे ने विदेश जाने की तैयारी का लगाया आरोप

    नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने सोमवार को दिशा सालियान मामले को लेकर शिवसेना यूबीटी विधायक आदित्य ठाकरे पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मामले में आरोपों के बीच आदित्य ठाकरे विदेश जा चुके हो सकते हैं या विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं। राणे ने कहा कि आदित्य ठाकरे ने रविवार को मुंबई में आयोजित विरोध मार्च में हिस्सा नहीं लिया। यह मार्च सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शिवसेना यूबीटी प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना अध्यक्ष राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाला गया था। राणे ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे गिरफ्तारी के डर से इस प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।

    दिशा सालियान की मौत 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक आवासीय इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी। वह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व प्रबंधक थीं। इसके करीब एक सप्ताह बाद सुशांत सिंह राजपूत भी अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे। दोनों घटनाओं के बीच संभावित संबंध को लेकर उस समय कई तरह की अटकलें सामने आई थीं। मुंबई पुलिस ने दिशा सालियान की मौत के मामले में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में जांच के आधार पर पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने आत्महत्या की थी।

    दिशा सालियान के पिता ने उनकी मौत के मामले में आदित्य ठाकरे के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की थी। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने हाल में मामले में प्राथमिकी दर्ज की है। हालांकि प्राथमिकी में किसी व्यक्ति को आरोपी के रूप में नामजद नहीं किया गया है। आदित्य ठाकरे ने अपने बचाव में कहा है कि कुछ लोग राजनीतिक कारणों से उनकी छवि खराब करने के लिए जानबूझकर उनका नाम दिशा सालियान मामले से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

    नितेश राणे ने कहा कि रविवार को आदित्य ठाकरे मंच पर मौजूद नहीं थे और उनकी गैरमौजूदगी की वजह बीमारी बताई गई। उन्होंने कहा कि केवल गैरमौजूदगी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आदित्य ठाकरे विदेश चले गए हैं या जाने की तैयारी कर रहे हैं। राणे ने यह भी कहा कि यह संभावना हो सकती है कि वह विदेश गए हों और उनके आवास पर जाकर उनकी मौजूदगी की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि दिशा सालियान की मौत से संबंधित प्राथमिकी और बयानों में आदित्य ठाकरे का नाम बार-बार सामने आया है और जांच एजेंसियों से उनसे पूछताछ कर तथ्यों का पता लगाने की मांग की।

    राणे ने कहा कि यदि जांच एजेंसियों के पास यह संदेह करने का कानूनी आधार है कि आदित्य ठाकरे देश छोड़ सकते हैं, तो कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने लुकआउट नोटिस जारी करने और पासपोर्ट जब्त करने जैसे कदमों का उल्लेख किया, लेकिन साथ ही कहा कि ऐसी कार्रवाई केवल आरोपों के आधार पर नहीं होनी चाहिए। उनके मुताबिक इसके लिए ठोस सबूत और कानूनी प्रक्रिया जरूरी है। भाजपा नेता ने एक निकाय ठेके से जुड़े मामले में जांच का सामना कर रहे अभिनेता डिनो मोरिया को महज एक ‘मुखौटा’ बताते हुए आदित्य ठाकरे को उनका ‘गॉडफादर’ होने का आरोप भी लगाया। राणे ने कहा कि उनकी मांग निष्पक्ष जांच की है और कानून व्यक्ति के पद या हैसियत की परवाह किए बिना सभी के लिए समान होना चाहिए।

  • 14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार लगा जाम, आदि कैलाश में घंटों फंसे पर्यटक; वाहनों की बढ़ती संख्या बनी वजह

    14,500 फीट की ऊंचाई पर पहली बार लगा जाम, आदि कैलाश में घंटों फंसे पर्यटक; वाहनों की बढ़ती संख्या बनी वजह

    नई दिल्ली: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में करीब 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश में पहली बार जाम की स्थिति सामने आई। सोमवार को देशभर से बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यात्रियों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा। बीते दिनों क्षेत्र में भारी बर्फबारी हुई थी, जिसके बाद सड़क पर तीन से चार फीट तक बर्फ जमा हो गई थी। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने जेसीबी की मदद से सड़क से बर्फ हटाकर यातायात सुचारु कराया, लेकिन सड़क के दोनों किनारों पर जमा बर्फ पूरी तरह नहीं हट सकी। इससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो गई और वाहनों के एक-दूसरे को रास्ता देने में परेशानी होने लगी।

    आदि कैलाश में जाम के पीछे हालिया बर्फबारी के साथ वाहनों की बढ़ती संख्या भी प्रमुख कारण मानी जा रही है। सड़क से बर्फ हटाने के बाद भी दोनों किनारों पर तीन से चार फीट तक बर्फ के ढेर बने हुए हैं। इससे मार्ग संकरा हो गया है। यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ निजी वाहनों का दबाव भी बढ़ा है। ऐलागाड़, कुलागाड़, एस बैंड और मलघाट जैसे संवेदनशील हिस्सों में सड़क पहले से ही अपेक्षाकृत संकरी है। इन स्थानों पर एक साथ अधिक वाहन पहुंचने पर आमने-सामने से वाहनों को निकालना मुश्किल हो जाता है। बर्फबारी के कारण सड़क की स्थिति खराब होने से समस्या और बढ़ जाती है। एक जगह वाहन रुकने पर पीछे आने वाले वाहनों पर भी इसका असर पड़ता है और धीरे-धीरे लंबी कतार बन जाती है।

    आदि कैलाश करीब 4,420 मीटर यानी 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कुछ वर्ष पहले तक यहां दुर्गम पहाड़ी रास्ते और मौसम की कठिन परिस्थितियां यात्रा में सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती थीं। अब वाहनों का बढ़ता दबाव भी नई परेशानी बन गया है। आदि कैलाश मार्ग चीन सीमा तक पहुंच का प्रमुख रास्ता होने के साथ सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। बीआरओ की ओर से सड़क को बेहतर बनाने और कई हिस्सों में डामरीकरण किए जाने के बाद यहां वाहनों की आवाजाही पहले की तुलना में आसान हुई है। इसका असर श्रद्धालुओं की यात्रा पर भी पड़ा है और देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों से आदि कैलाश पहुंच रहे हैं।

    पर्यटकों और श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर वाहनों की संख्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2023 में आदि कैलाश क्षेत्र में 10,079 पर्यटक पहुंचे थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 29,423 हो गई और 2025 में 31,558 पर्यटक यहां पहुंचे। 2026 में अब तक यह आंकड़ा 61,950 तक पहुंच चुका है। यानी कुछ ही वर्षों में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में तीन गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। बढ़ती आवाजाही के बीच उच्च हिमालयी क्षेत्र की सीमित सड़क चौड़ाई और मौसम की परिस्थितियां यातायात व्यवस्था के लिए चुनौती बन रही हैं।

    आदि कैलाश क्षेत्र में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और पुलिसकर्मी यातायात व्यवस्था को सुचारु करने में जुटे हैं। फिलहाल जाम की समस्या के पीछे मुख्य वजह हालिया बर्फबारी बताई जा रही है। सड़क से बर्फ हटाए जाने के बावजूद किनारों पर जमा बर्फ के कारण मार्ग की चौड़ाई कम बनी हुई है। इसके साथ बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होने से संकरी जगहों पर यातायात प्रभावित हो रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र में मौसम में अचानक बदलाव और भारी बर्फबारी जैसी परिस्थितियों के बीच वाहनों की बढ़ती संख्या ने यात्रा और यातायात प्रबंधन की चुनौती बढ़ा दी है।

  • ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने कार्गो शिप पर किया हमला, कैप्टन की मौत; एक भारतीय घायल, 11 क्रू सदस्य बचाए गए

    ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने कार्गो शिप पर किया हमला, कैप्टन की मौत; एक भारतीय घायल, 11 क्रू सदस्य बचाए गए


    नई दिल्ली: ब्लैक सी में रूसी ड्रोन ने एक कार्गो शिप को निशाना बनाया, जिसमें शिप के कैप्टन की मौत हो गई और कई क्रू सदस्य घायल हो गए। घायलों में एक भारतीय नागरिक भी शामिल है। हमले के बाद कार्गो शिप एमवी रोयाद ममादोव में भीषण आग लग गई और बाद में यह डूब गया। शिप पर कुल तीन भारतीय नागरिक मौजूद थे। भारतीय दूतावास के मुताबिक तीनों भारतीय सुरक्षित हैं। इनमें से एक घायल हुआ है और उसका रोमानिया के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। रोमानिया के गृह मंत्रालय ने बताया कि जहाज के 11 क्रू सदस्यों को बचा लिया गया है।

    यह हमला रोमानिया की समुद्री सीमा के बाहर हुआ। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि दो रूसी ड्रोन ने तुर्की के एक नागरिक जहाज को निशाना बनाया। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और क्रू सदस्यों को बचाने के लिए अभियान चलाया गया। रोमानिया की नौसेना प्राधिकरण ने जहाज की पहचान एमवी रोयाद ममादोव के रूप में की है। घटना के बाद जहाज पर मौजूद लोगों को सुरक्षित निकालने की कार्रवाई की गई।

    जहाज पर तीन भारतीय नागरिकों के मौजूद होने की जानकारी सामने आने के बाद भारतीय दूतावास ने उनकी स्थिति पर नजर रखी। दूतावास ने तीनों भारतीय नागरिकों से बात की और उनकी सुरक्षा की पुष्टि की। इनमें एक भारतीय क्रू सदस्य घायल हुआ है, जिसे इलाज के लिए रोमानिया के अस्पताल ले जाया गया। दूतावास ने अस्पताल के अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने और घायल भारतीय नागरिक को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की बात कही है। अन्य दोनों भारतीय नागरिकों की स्थिति सुरक्षित बताई गई है।

    जानकारी के मुताबिक, एमवी रोयाद ममादोव मक्का यानी कॉर्न लेकर इटली के रेवेना जा रहा था। जहाज सेंट किट्स एंड नेविस के झंडे के साथ चल रहा था और आखिरी बार यूक्रेन के इजमेल बंदरगाह पर रुका था। हमले के दौरान जहाज ब्लैक सी में था। घटना के बाद जहाज में लगी आग और उसके डूबने से क्रू सदस्यों को बचाने की चुनौती बढ़ गई। रोमानिया के अधिकारियों ने अभियान चलाकर 11 क्रू सदस्यों को बचाया।

    यह घटना रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर एक और चिंता के रूप में सामने आई है। जहाज पर सवार भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहा। फिलहाल तीनों भारतीय नागरिकों के सुरक्षित होने की पुष्टि की गई है, जबकि घायल क्रू सदस्य का रोमानिया के अस्पताल में इलाज जारी है।

  • काशी के पिशाचमोचन में अकाल मौत का तर्पण, घोड़े का कान और गाय की पूंछ छूने की अनोखी परंपरा

    काशी के पिशाचमोचन में अकाल मौत का तर्पण, घोड़े का कान और गाय की पूंछ छूने की अनोखी परंपरा


    नई दिल्ली: पितृपक्ष के दौरान वाराणसी के पिशाचमोचन में हर दिन 20 हजार से ज्यादा लोग पूर्वजों और अकाल मौत से जुड़े श्राद्ध कर्म कराने पहुंच रहे हैं। आदि गंगा विमलोदत्त कुंड के किनारे इन दिनों 10 से 12 तरह के श्राद्ध कर्म कराए जा रहे हैं। नारायण बलि, त्रिपिंडी श्राद्ध और तर्पण के बाद यहां दो विशेष प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इनमें संजाब नस्ल के शक्ति घोड़े का कान छूना और अकाल मौत वाले व्यक्ति की फोटो पीपल के सूखे पेड़ पर लगाना शामिल है। मान्यता के अनुसार, इन्हें पितरों और आत्माओं की शांति की कामना से जुड़ी अंतिम प्रक्रिया माना जाता है। पिशाचमोचन पर पितृपक्ष शुरू होने से एक दिन पहले से संजाब नस्ल के दो घोड़े खड़े हैं। इनका इस्तेमाल साल में केवल श्राद्ध के 15 दिनों के दौरान होता है। बाकी समय इनकी बुकिंग विवाह समारोहों के लिए की जाती है।

    पिशाचमोचन क्षेत्र में 10 से 15 पीपल के पेड़ हैं, जिन पर करीब 500 फोटो फ्रेम लगे हुए हैं। वहां मौजूद पंडित अमित मिश्रा के अनुसार, इन पेड़ों पर उन आत्माओं की तस्वीरें लगाई जाती हैं, जिनकी अचानक मौत हुई और जिन्हें शांतिपूर्वक विदा नहीं माना गया। उन्होंने बताया कि लोग ऐसी आत्माओं की शांति के लिए यहां श्राद्ध कराने आते हैं। इसी तरह गाजीपुर के मुख्तार की पत्नी और बेटी भी करीब 30 साल पहले हुई उनकी मौत के बाद श्राद्ध कराने यहां पहुंची थीं। परिवार का कहना था कि उनके पति सपने में आते थे और इससे उन्हें डर लगता था। पिशाचमोचन में अकाल मौत से मुक्ति के लिए पीपल के पेड़ पर फोटो फ्रेम लगाने के साथ कील ठोकने की प्रक्रिया भी श्राद्ध पूजा के पैकेज में शामिल है।

    यहां घोड़े का कान, भैंस का सींग और गाय की पूंछ छूकर पितरों के नाम पर दान करने की भी परंपरा है। जिस संजाब नस्ल के घोड़े का कान लोग छूते हैं, उसका नाम शक्ति है। एक व्यक्ति को घोड़े का कान छूने के लिए कम से कम 10 रुपये देने होते हैं। बताया गया है कि यह घोड़ा रोजाना कम से कम 50 हजार रुपये तक कमा लेता है। पिशाचमोचन में श्राद्ध कर्म कराने वालों में गरीब और संपन्न परिवार दोनों शामिल होते हैं। यहां नेता, जज, फिल्म स्टार और अन्य सम्पन्न परिवार भी तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। एक मृतक के तर्पण की सामान्य लागत 15 से 20 हजार रुपये बताई गई है, जबकि कई बार यह खर्च 30 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। भीड़ अधिक होने के कारण कुंड के किनारों के अलावा आसपास के पांच-छह भवनों में भी श्राद्ध कर्म कराए जाते हैं।

    अकाल मौत के लिए यहां सबसे महंगा श्राद्ध नारायण बलि बताया गया है। पांच ब्राह्मणों से नारायण बलि कराने की लागत 15 हजार रुपये है, जबकि त्रिपिंडी श्राद्ध के लिए आठ हजार रुपये और पार्वण श्राद्ध के लिए 2500 रुपये लिए जाते हैं। गयातीर्थ और गया श्राद्ध की कीमत निश्चित नहीं है और यह 1100 से 2500 रुपये या उससे अधिक हो सकती है। यदि एक ही परिवार में कई लोगों की अकाल मौत हुई हो तो प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग श्राद्ध कराया जाता है। पांच लोगों की अकाल मौत होने पर सभी के लिए अलग-अलग नारायण बलि करानी होती है और प्रत्येक के लिए कम से कम 15 हजार रुपये का खर्च बताया गया है।

    पिशाचमोचन में श्राद्ध कर्म की व्यवस्था बड़े स्तर पर होती है। मुन्ना पंडा के परिवार के लोग यहां प्रमुख महंत होते हैं, जबकि पितृपक्ष के 15 दिनों के लिए करीब 400 पंडे श्राद्ध कराने में जुटते हैं। तर्पण के लिए बैठने की जगह का किराया 500 रुपये लिया जाता है। एक तर्पण में करीब डेढ़ से दो घंटे लगते हैं। काम सूर्योदय के साथ शुरू होकर आधी रात तक चलता है। यहां व्यवस्था के लिए पंडे वॉकी-टॉकी का इस्तेमाल करते हैं। पानी, गोबर, दूध और सफाई जैसी जरूरतों के लिए इसी माध्यम से कर्मचारियों को बुलाया जाता है। यहां आने वाले यजमानों को केवल दक्षिणा लेकर आने की जरूरत होती है, जबकि श्राद्ध और तर्पण में इस्तेमाल होने वाली अन्य सामग्री पैकेज के साथ यहीं उपलब्ध कराई जाती है।

  • रूखी और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो आजमाएं एलोवेरा, चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां जानिए

    रूखी और बेजान त्वचा से परेशान हैं तो आजमाएं एलोवेरा, चेहरे पर लगाने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां जानिए


    नई दिल्ली। एलोवेरा को लंबे समय से त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसकी पत्तियों के अंदर मौजूद जेल त्वचा को ठंडक देने और नमी बनाए रखने में मदद कर सकता है। बदलते मौसम धूप और प्रदूषण की वजह से अक्सर चेहरा रूखा और बेजान नजर आने लगता है। ऐसे में एलोवेरा को अपने स्किन केयर रूटीन में शामिल करना एक आसान घरेलू विकल्प हो सकता है। हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपनी स्किन टाइप को समझना जरूरी है।

    एलोवेरा जेल का सबसे सामान्य इस्तेमाल चेहरे पर मॉइस्चराइजिंग के लिए किया जाता है। साफ चेहरे पर थोड़ी मात्रा में एलोवेरा जेल लगाकर हल्के हाथों से मसाज की जा सकती है। कुछ समय बाद चेहरे को सामान्य पानी से धो लें। अगर त्वचा को एलोवेरा सूट करता है तो नियमित स्किन केयर रूटीन में इसे शामिल किया जा सकता है। एलोवेरा त्वचा को हाइड्रेट रखने में मदद कर सकता है जिससे चेहरा मुलायम महसूस हो सकता है।

    धूप के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर गर्माहट या हल्की जलन महसूस हो तो एलोवेरा जेल ठंडक देने में मदद कर सकता है। इसे त्वचा पर रगड़ने के बजाय हल्के हाथों से लगाया जाना चाहिए। बहुत ज्यादा धूप से हुई जलन या त्वचा पर गंभीर परेशानी होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    अगर आपकी त्वचा बहुत रूखी है तो एलोवेरा जेल के साथ उपयुक्त मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। वहीं तैलीय त्वचा वाले लोग हल्की मात्रा में जेल का प्रयोग कर सकते हैं। एलोवेरा को चेहरे पर लगाने से पहले त्वचा को अच्छी तरह साफ करना जरूरी है। गंदगी और पसीने के ऊपर जेल लगाने से स्किन केयर का फायदा कम हो सकता है।

    एलोवेरा को नींबू या बेकिंग सोडा जैसी चीजों के साथ मिलाकर लगाने से बचना चाहिए। ऐसी चीजें कुछ लोगों की त्वचा में जलन या संवेदनशीलता बढ़ा सकती हैं। इसी तरह बाजार से खरीदे गए एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करते समय उसके ingredients को देखना उपयोगी रहता है। खुशबू या अन्य मिलाए गए पदार्थों से संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।

    सबसे जरूरी बात यह है कि एलोवेरा हर तरह की त्वचा की समस्या का इलाज नहीं है। पिंपल्स दाग धब्बे या किसी अन्य समस्या में इसका असर व्यक्ति की त्वचा के अनुसार अलग हो सकता है। किसी नए प्रोडक्ट या जेल को पूरे चेहरे पर लगाने से पहले हाथ या त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है। अगर लालिमा खुजली या जलन महसूस हो तो इस्तेमाल बंद कर देना चाहिए।

    स्किन केयर में एलोवेरा के साथ पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना नींद पूरी करना और रोजाना सनस्क्रीन का इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है। केवल किसी एक घरेलू नुस्खे से त्वचा में स्थायी बदलाव की उम्मीद करने के बजाय नियमित और संतुलित स्किन केयर रूटीन अपनाना ज्यादा उपयोगी हो सकता है। सही तरीके और सावधानी के साथ एलोवेरा त्वचा को मुलायम और हाइड्रेटेड बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है।

  • संजय दत्त के विवादित बयानों पर फिर बवाल, जेल से लेकर शांति और राजनीति तक इन मौकों पर घिरे अभिनेता

    संजय दत्त के विवादित बयानों पर फिर बवाल, जेल से लेकर शांति और राजनीति तक इन मौकों पर घिरे अभिनेता


    नई दिल्ली: बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में शेखर सुमन के शो में गांधी जयंती विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भारत में शांति को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि देश के लोग बेहद अच्छे और बड़े दिल वाले हैं, लेकिन उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई और आलोचकों ने अभिनेता को घेर लिया। इसके बाद संजय दत्त ने पोस्ट कर सफाई दी कि उनकी बात एक स्क्रिप्टेड, हल्की-फुल्की और हास्यपूर्ण बातचीत के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति, समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।

    यह पहली बार नहीं है जब संजय दत्त अपने शब्दों को लेकर विवादों में आए हों। सितंबर 2026 में महाराष्ट्र के एक कार्यक्रम के दौरान परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने उनसे मराठी में बोलने को कहा था। इस पर संजय दत्त ने मजाकिया अंदाज में अपनी येरवडा जेल की सजा का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने जेल में भी मराठी नहीं सीखी। वीडियो सामने आने के बाद उनकी टिप्पणी चर्चा में आ गई। मामला बढ़ने पर प्रताप सरनाईक ने बताया कि अभिनेता ने फोन करके स्पष्टीकरण दिया और कहा कि अगर उनके मजाक से कोई गलत संदेश गया हो तो वह माफी मांगते हैं। इससे पहले 2017 में फिल्म ‘भूमि’ के प्रमोशन के दौरान बेटी त्रिशाला दत्त को लेकर भी उन्होंने ऐसी टिप्पणी की थी, जिस पर चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा था कि अगर त्रिशाला फिल्म इंडस्ट्री में आना चाहती हैं तो उन्हें हिंदी भी सीखनी होगी। इसी बातचीत में उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि त्रिशाला अभिनेत्री बनना चाहती थीं और वह उनकी टांगें तोड़ देना चाहते थे।

    साल 2012 में अमीषा पटेल से जुड़ा एक मामला भी चर्चा में रहा। एक समारोह में संजय दत्त ने उनके पहनावे को बहुत रिवीलिंग माना और उनसे कपड़े ढकने के लिए कहा। बाद में उनके दुपट्टे से उनका शरीर ढक दिया। इस पर सफाई देते हुए दत्त की तरफ से कहा गया कि वह अमीषा को बहन की तरह मानते हैं और इसी भावना से उन्होंने ऐसा किया था। 2007 में ‘कॉफी विद करण’ के दौरान महिलाओं के साथ संबंधों की संख्या को लेकर दिया गया उनका जवाब भी काफी चर्चित हुआ था। जब उनसे 50, 100, 150, 200 या उससे ज्यादा का विकल्प पूछा गया तो उन्होंने ‘ज्यादा’ कहा था। इसके बाद तीन इच्छाओं के सवाल पर उन्होंने पैसा, आजादी और महिलाएं बताई थीं। 2018 में फिल्म ‘संजू’ में भी उनकी जिंदगी से जुड़ी महिलाओं की संख्या का संदर्भ आया, जिसके बाद उनकी निजी जिंदगी को लेकर बहस हुई।

    साल 2009 में प्रतापगढ़ में समाजवादी पार्टी के स्टार प्रचारक के रूप में दी गई संजय दत्त की स्पीच भी विवादों में रही थी। तत्कालीन बसपा सरकार के दौर में सपा उम्मीदवार अक्षय प्रताप के समर्थन में सभा के दौरान उन्होंने जनता को ‘जादू की झप्पी’ देने की बात कही थी और कहा था कि मौका मिलने पर वह मायावती को भी ऐसा उपहार देना चाहेंगे। इस बयान पर बवाल हुआ और अभिनेता पर महिला को लेकर आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल का आरोप लगा। इसके अलावा 1993 के मुंबई बम धमाका मामले के दौरान उनके पिता सुनील दत्त से हुई बातचीत का भी जिक्र मिलता है। संजय दत्त के मुताबिक, पुलिस के सामने हथियार रखने की बात स्वीकार करने के बाद उन्होंने पिता से कहा था कि उनकी रगों में मुस्लिम खून है और वह शहर में हो रही घटनाओं को बर्दाश्त नहीं कर सके। यह सुनकर सुनील दत्त बेहद परेशान हुए थे।

    विवादित बयानों के मामले में संजय दत्त अकेले बॉलीवुड अभिनेता नहीं हैं। आमिर खान ने 2015 में देश में बढ़ती असहिष्णुता को लेकर अपनी पत्नी किरण राव की चिंता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि किरण ने भारत छोड़ने की बात तक पूछी थी और उन्हें अपने बच्चे की सुरक्षा को लेकर डर लगता था। इसके बाद आमिर की काफी आलोचना हुई और उन्हें देशद्रोही तक कहा गया। इसी साल शाहरुख खान ने भी असहिष्णुता पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि देश में असहिष्णुता बढ़ रही है और धार्मिक असहिष्णुता सबसे बड़ा अपराध है। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर बवाल हुआ और उन्हें पाकिस्तान चले जाने जैसी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। बाद में शाहरुख ने कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था। 2018 में नसीरुद्दीन शाह ने अपने बच्चों को लेकर चिंता जताते हुए धर्म और भीड़ हिंसा से जुड़ी टिप्पणी की थी, जिसके बाद उनकी भी आलोचना हुई थी।

  • शून्य पर आउट हुए विराट कोहली ने फील्डिंग में जीता दिल, नन्ही फैन की आवाज पर दिया ऐसा प्यारा रिएक्शन

    शून्य पर आउट हुए विराट कोहली ने फील्डिंग में जीता दिल, नन्ही फैन की आवाज पर दिया ऐसा प्यारा रिएक्शन


    नई दिल्ली। विराट कोहली भले ही वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में बल्ले से खास कमाल नहीं कर सके लेकिन मैदान पर उनका एक छोटा सा रिएक्शन फैंस का दिल जीत गया। मुकाबले के दौरान विराट कोहली शून्य पर आउट होकर पवेलियन लौट गए थे। हालांकि जब वह दूसरी पारी में भारतीय टीम के लिए फील्डिंग करने मैदान पर उतरे तो स्टेडियम में मौजूद फैंस का उत्साह एक बार फिर देखने लायक था। इसी दौरान विराट और एक नन्ही फैन के बीच हुआ प्यारा सा पल कैमरे में कैद हो गया जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    विराट कोहली को देखने और उनकी बल्लेबाजी का लुत्फ उठाने के लिए बड़ी संख्या में फैंस स्टेडियम पहुंचे थे। विराट की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मैदान पर वह जहां भी दिखाई देते हैं वहां दर्शकों का जोश अचानक बढ़ जाता है। वेस्टइंडीज के खिलाफ इस सीरीज के पहले मुकाबले में विराट ने शानदार शतक लगाकर अपनी फॉर्म का संकेत दिया था। ऐसे में तीसरे वनडे में भी फैंस को उनसे बड़ी पारी की उम्मीद थी लेकिन वह खाता खोले बिना ही आउट हो गए।

    बल्लेबाजी में निराशा के बावजूद फील्डिंग के दौरान विराट कोहली को देखकर फैंस का उत्साह कम नहीं हुआ। इसी बीच स्टैंड में बैठी एक छोटी बच्ची अपने पसंदीदा क्रिकेटर का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश करने लगी। बच्ची ने मासूम अंदाज में विराट को आवाज लगाई और कहा कि विराट मेरी तरफ तो देख लो। उसकी यह गुहार कुछ ही देर में विराट तक पहुंच गई।

    मैदान पर फील्डिंग कर रहे विराट कोहली की नजर जब उस नन्ही फैन पर पड़ी तो उन्होंने उसकी ओर देखकर हाथ हिला दिया। विराट का यह छोटा सा रिएक्शन बच्ची के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं था। अपने पसंदीदा क्रिकेटर को अपनी ओर देखते और हाथ हिलाते देखकर बच्ची खुशी से झूम उठी। उसके चेहरे की खुशी देखकर आसपास मौजूद लोगों के चेहरे पर भी मुस्कान आ गई।

    विराट कोहली और उनकी इस नन्ही फैन का यह पल अब सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। फैंस विराट के इस सादगी भरे अंदाज की तारीफ कर रहे हैं। क्रिकेट के मैदान पर आक्रामक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले विराट का अपने फैंस के प्रति यह प्यारा व्यवहार लोगों को काफी पसंद आया है। खासकर उस बच्ची के लिए यह पल शायद हमेशा यादगार रहने वाला है।

    विराट कोहली के लिए वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरा वनडे बल्लेबाजी के लिहाज से भले ही अच्छा नहीं रहा लेकिन फील्डिंग के दौरान उनका यह अंदाज चर्चा में आ गया। विराट की लोकप्रियता सिर्फ उनके प्रदर्शन तक सीमित नहीं है बल्कि फैंस के साथ उनका जुड़ाव भी उन्हें खास बनाता है। स्टेडियम में मौजूद उस बच्ची की एक छोटी सी गुहार और विराट का हाथ हिलाकर जवाब देना इसका खूबसूरत उदाहरण है।

    अब विराट कोहली अगली बार न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज में नीली जर्सी में नजर आ सकते हैं। वनडे वर्ल्ड कप 2027 को देखते हुए विराट के प्रदर्शन पर सभी की नजरें रहेंगी। फैंस उम्मीद कर रहे होंगे कि मैदान पर अगली बार विराट बल्ले से भी ऐसा ही जवाब दें जैसा उन्होंने अपनी नन्ही फैन को दिया और एक बड़ी पारी खेलकर फिर सुर्खियां बटोरें।