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  • स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद

    स्पिन की तैयारी करने पहुंची टीम इंडिया के सामने बिछी घास वाली पिच, श्रीलंका में अभ्यास मैच से पहले खड़ा हुआ विवाद


    नई दिल्ली। श्रीलंका दौरे पर पहुंची भारतीय क्रिकेट टीम के लिए दो मैचों की टेस्ट सीरीज शुरू होने से पहले ही एक नया विवाद सामने आ गया है। भारत को 7 अगस्त से कोलंबो के नॉनडिस्क्रिप्ट क्रिकेट क्लब यानी एनसीसी मैदान पर तीन दिवसीय अभ्यास मैच खेलना है लेकिन मुकाबले से पहले तैयार की गई पिच को देखकर भारतीय टीम मैनेजमेंट पूरी तरह संतुष्ट नजर नहीं आया। टीम इंडिया को उम्मीद थी कि अभ्यास मैच के लिए ऐसी विकेट तैयार की जाएगी जो श्रीलंका की पारंपरिक स्पिन परिस्थितियों जैसी हो ताकि बल्लेबाजों और स्पिन गेंदबाजों को टेस्ट सीरीज से पहले बेहतर तैयारी का मौका मिल सके लेकिन मैदान पर घास वाली विकेट देखकर टीम की चिंता बढ़ गई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय टीम ने पिच पर मौजूद घास को लेकर सवाल उठाए हैं। एनसीसी से जुड़े अधिकारी ने भी बताया कि पिच पर घास रखने का फैसला श्रीलंका क्रिकेट के निर्देश के बाद किया गया है।

    दरअसल भारत और श्रीलंका के बीच पहला टेस्ट मुकाबला 15 अगस्त से गॉल में खेला जाना है। गॉल की परिस्थितियां आमतौर पर स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं। ऐसे में भारतीय टीम चाहती थी कि अभ्यास मैच में भी उसे ऐसी ही परिस्थितियों का अनुभव मिले ताकि बल्लेबाज श्रीलंकाई स्पिनरों का सामना करने से पहले अपनी कमियों को सुधार सकें। खासतौर पर भारतीय बल्लेबाजों के स्पिन के खिलाफ प्रदर्शन को देखते हुए यह अभ्यास मैच टीम के लिए काफी अहम माना जा रहा है। लेकिन एनसीसी की पिच पर छोड़ी गई घास ने टीम इंडिया की योजना को कुछ हद तक बदल दिया है।

    घास वाली पिच का फायदा शुरुआती दौर में तेज गेंदबाजों को मिल सकता है। गेंद नई होने पर सतह से अतिरिक्त सीम और मूवमेंट मिलने की संभावना रहती है जिससे बल्लेबाजों के लिए शुरुआती समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है। दूसरी तरफ स्पिन गेंदबाजों को इस विकेट से तुरंत वैसी मदद मिलने की उम्मीद कम है जैसी भारतीय टीम चाहती थी। हालांकि एनसीसी प्रबंधन का कहना है कि मुकाबले के आगे बढ़ने के साथ पिच का मिजाज बदल सकता है और तीसरे दिन स्पिनरों को कुछ सहायता मिलने की संभावना है। क्लब का यह भी मानना है कि पिच पर बल्लेबाजों को रन बनाने का अच्छा मौका मिल सकता है।

    एनसीसी मैदान श्रीलंका के पुराने क्रिकेट क्लबों में शामिल है और भारतीय टीम यहां टेस्ट सीरीज से पहले अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने की कोशिश करेगी। पहले यह अभ्यास मुकाबला चार दिन का प्रस्तावित था लेकिन बाद में इसे घटाकर तीन दिन कर दिया गया। ऐसे में भारतीय टीम के पास परिस्थितियों को समझने और खिलाड़ियों को पर्याप्त मैच अभ्यास देने के लिए सीमित समय है। यही वजह है कि अभ्यास मैच की पिच को लेकर उठे सवालों ने टीम मैनेजमेंट की चिंता बढ़ा दी है।

    भारत के लिए यह टेस्ट सीरीज कई मायनों में महत्वपूर्ण है। टीम को श्रीलंका की परिस्थितियों में खुद को ढालने के साथ साथ स्पिन और तेज गेंदबाजी दोनों के खिलाफ अपनी रणनीति को मजबूत करना होगा। वहीं श्रीलंका भी घरेलू परिस्थितियों का फायदा उठाकर भारतीय टीम को कड़ी चुनौती देने की कोशिश करेगा। अभ्यास मैच में कैसी पिच मिलती है और भारतीय खिलाड़ी उस पर किस तरह प्रदर्शन करते हैं इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

    हालांकि पिच को लेकर उठे विवाद के बावजूद टीम इंडिया के पास परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने का मौका है। घास वाली विकेट भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों के लिए एक अलग तरह की परीक्षा साबित हो सकती है। अगर भारतीय खिलाड़ी इस चुनौती का फायदा उठाते हैं तो गॉल टेस्ट से पहले उन्हें जरूरी आत्मविश्वास मिल सकता है। अब देखना यही होगा कि अभ्यास मैच में घास वाली पिच टीम इंडिया के लिए परेशानी बनती है या टेस्ट सीरीज की तैयारी का एक उपयोगी हिस्सा साबित होती है।

  • भारत का सबसे महान क्रिकेटर कौन? अजिंक्य रहाणे ने लिया सचिन तेंदुलकर का नाम, बताया क्यों हैं सभी युगों के महान खिलाड़ी

    भारत का सबसे महान क्रिकेटर कौन? अजिंक्य रहाणे ने लिया सचिन तेंदुलकर का नाम, बताया क्यों हैं सभी युगों के महान खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारत में क्रिकेट को लेकर जब भी महान खिलाड़ियों की चर्चा होती है तो सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली जैसे नाम सबसे पहले सामने आते हैं। दोनों ने अलग अलग दौर में भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयां दी हैं और दुनियाभर में अपनी पहचान बनाई है। ऐसे में जब पूर्व भारतीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे से भारत के सबसे महान क्रिकेटर का नाम पूछा गया तो उनके सामने आसान सवाल नहीं था। हालांकि काफी सोचने के बाद रहाणे ने जिस खिलाड़ी का नाम लिया वह क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर हैं।

    हाल ही में क्रिकेट से संन्यास लेने वाले अजिंक्य रहाणे ने स्टिक टू क्रिकेट के एक एपिसोड में भारत के ऑल टाइम महान क्रिकेटर को लेकर अपनी पसंद बताई। उनसे जब पूछा गया कि भारत का अब तक का सबसे महान क्रिकेटर कौन है तो उन्होंने कहा कि एक नाम चुनना काफी मुश्किल है लेकिन शायद सचिन तेंदुलकर। रहाणे ने सचिन को सभी युगों का महान खिलाड़ी बताया। उनके इस जवाब ने एक बार फिर सचिन तेंदुलकर की महानता और भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

    रहाणे की सचिन से मुलाकात केवल एक प्रशंसक और महान खिलाड़ी के तौर पर नहीं रही है। उन्हें कई बार सचिन के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने का मौका भी मिला। रहाणे ने 2011 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा था और इसके बाद भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने भारत के मजबूत मध्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और विराट कोहली तथा चेतेश्वर पुजारा जैसे खिलाड़ियों के साथ लंबे समय तक टीम का हिस्सा रहे।

    सचिन के साथ रहाणे का जुड़ाव घरेलू क्रिकेट और आईपीएल तक भी रहा। 2009 के आईपीएल सीजन में दोनों मुंबई इंडियंस की टीम में साथ थे। इसके अलावा घरेलू क्रिकेट में भी दोनों ने मुंबई के लिए साथ खेला। रहाणे को भारत की ओर से सचिन के साथ टेस्ट मैच खेलने का अवसर भी मिला। ऐसे में सचिन के खेल को करीब से देखने वाले रहाणे के लिए उन्हें भारत का महानतम क्रिकेटर चुनना काफी खास माना जा रहा है।

    सचिन तेंदुलकर का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 24 वर्षों तक चला। उन्होंने 1989 में महज 16 वर्ष की उम्र में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने भारतीय क्रिकेट को कई ऐतिहासिक उपलब्धियां दिलाईं। सचिन ने कुल 664 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले जिनमें 200 टेस्ट 463 वनडे और एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला शामिल है।

    टेस्ट क्रिकेट में सचिन के नाम 15,921 रन हैं जबकि वनडे क्रिकेट में उन्होंने 18,426 रन बनाए। वह टेस्ट और वनडे दोनों प्रारूपों में लंबे समय तक सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे। उनका नाम क्रिकेट इतिहास में कई ऐसे रिकॉर्ड के साथ दर्ज है जिन्हें हासिल करना किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद कठिन माना जाता है। वह दुनिया के इकलौते खिलाड़ी हैं जिन्होंने 200 टेस्ट मैच खेले हैं।

    सचिन के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में 2011 वनडे विश्व कप जीत भी शामिल है। भारतीय टीम ने घरेलू मैदान पर विश्व कप अपने नाम किया और सचिन के लिए यह ट्रॉफी उनके लंबे करियर की सबसे भावुक उपलब्धियों में से एक रही। उन्होंने वर्षों तक विश्व कप जीतने का सपना देखा था और आखिरकार 2011 में यह सपना पूरा हुआ।

    विराट कोहली भी आधुनिक क्रिकेट के सबसे बड़े बल्लेबाजों में शामिल हैं और उनकी उपलब्धियों की तुलना अक्सर सचिन से की जाती है। इसके बावजूद रहाणे ने अपने ऑल टाइम महान क्रिकेटर के रूप में सचिन का नाम चुना है। उनका यह चयन इस बात को दर्शाता है कि सचिन तेंदुलकर का प्रभाव केवल उनके आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उन्होंने कई पीढ़ियों के क्रिकेटरों को प्रेरित किया है।

  • शादी से पहले प्यार और फिर विवाह! प्राचीन भारत के ‘गंधर्व विवाह’ में क्या थे नियम? जानें दिलचस्प कहानी

    शादी से पहले प्यार और फिर विवाह! प्राचीन भारत के ‘गंधर्व विवाह’ में क्या थे नियम? जानें दिलचस्प कहानी



    नई दिल्ली। आज के दौर में लव मैरिज को युवाओं की पसंद और आधुनिक सोच से जोड़कर देखा जाता है लेकिन भारतीय परंपरा और प्राचीन ग्रंथों की बात करें तो अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की अवधारणा बिल्कुल नई नहीं थी। प्राचीन भारतीय धार्मिक साहित्य में विवाह के अलग अलग प्रकारों का उल्लेख मिलता है जिनमें गंधर्व विवाह को प्रेम और आपसी सहमति पर आधारित विवाह के रूप में बताया गया है। यही वजह है कि कई लोग इसे आधुनिक लव मैरिज का प्राचीन स्वरूप भी मानते हैं। हालांकि प्राचीन ग्रंथों में विवाह की अवधारणाएं आज की कानूनी और सामाजिक व्यवस्था से अलग थीं इसलिए दोनों को पूरी तरह समान मानने के बजाय ऐतिहासिक संदर्भ में समझना ज्यादा उचित है।

    गंधर्व विवाह का उल्लेख प्राचीन भारतीय साहित्य में मिलता है। इसमें मुख्य आधार युवक और युवती की आपसी इच्छा और एक दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करना माना गया है। इस विवाह की खासियत यह थी कि इसमें बड़े स्तर पर कर्मकांड या परिवार की औपचारिक भूमिका आवश्यक नहीं मानी जाती थी। प्रेम और पारस्परिक सहमति को इस प्रकार के विवाह का प्रमुख आधार बताया गया है।

    प्राचीन भारतीय परंपरा में विवाह केवल एक ही तरीके से नहीं होता था। मनुस्मृति में विवाह के आठ प्रकारों का उल्लेख मिलता है। इनमें ब्रह्म विवाह देव विवाह आर्ष विवाह प्राजापत्य विवाह आसुर विवाह गंधर्व विवाह राक्षस विवाह और पैशाच विवाह शामिल हैं। इन सभी विवाह प्रकारों की प्रकृति और सामाजिक स्थिति अलग अलग बताई गई थी। गंधर्व विवाह की पहचान मुख्य रूप से आपसी आकर्षण प्रेम और स्वेच्छा से जुड़े संबंध के तौर पर की जाती है।

    गंधर्व विवाह की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसमें दोनों पक्षों की इच्छा को माना जाना था। यानी युवक और युवती अपनी पसंद से एक दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार करते थे। कई प्राचीन कथाओं में ऐसे संबंधों का वर्णन मिलता है। राजा दुष्यंत और शकुंतला की प्रसिद्ध कथा को भी अक्सर गंधर्व विवाह के उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत किया जाता है। हालांकि अलग अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस कथा के विवरण अलग रूप में मिल सकते हैं।

    इस प्रकार के विवाह में परिवार और समाज की भूमिका सीमित रहने की बात कही जाती है। आज की तरह विवाह समारोह के लिए बड़ी संख्या में रिश्तेदारों का एकत्र होना या लंबे धार्मिक अनुष्ठान करना इसकी अनिवार्य शर्त नहीं थी। मुख्य बात दोनों की सहमति और एक दूसरे को पति पत्नी के रूप में स्वीकार करना थी। इसी कारण आधुनिक समय में अपनी पसंद से विवाह करने की परंपरा से इसकी तुलना की जाती है।

    हालांकि यह समझना भी जरूरी है कि प्राचीन भारतीय समाज में गंधर्व विवाह को सभी परिस्थितियों में सर्वोच्च या आदर्श विवाह नहीं माना गया था। मनुस्मृति में विवाह के अलग अलग प्रकारों का वर्गीकरण किया गया है और उनकी सामाजिक तथा धार्मिक स्थिति भी अलग बताई गई है। इसलिए गंधर्व विवाह को केवल आज की लव मैरिज के बराबर रखकर देखना पूरी तस्वीर नहीं देता।

    समय के साथ विवाह की सामाजिक व्यवस्था भी बदलती गई। परिवार की भूमिका मजबूत हुई और विवाह में सामाजिक तथा धार्मिक परंपराओं का महत्व बढ़ा। आधुनिक भारत में विवाह व्यक्तिगत पसंद के साथ साथ कानून परिवार और सामाजिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ विषय है। आज दो वयस्क अपनी इच्छा से विवाह कर सकते हैं लेकिन उनके विवाह को कानूनी मान्यता संबंधित कानूनों और आवश्यक प्रक्रियाओं के अनुसार मिलती है।

    गंधर्व विवाह का उल्लेख इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इससे पता चलता है कि प्राचीन भारतीय समाज में भी प्रेम और व्यक्तिगत पसंद पर आधारित वैवाहिक संबंधों की अवधारणा मौजूद थी। इसे भारतीय इतिहास और धार्मिक साहित्य में विवाह की विविध परंपराओं के एक रूप के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि इससे जुड़े विवरण धार्मिक ग्रंथों और प्राचीन मान्यताओं पर आधारित हैं इसलिए इन्हें आधुनिक विवाह व्यवस्था के साथ सीधे समान मानने के बजाय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भ में समझना चाहिए।

  • Women T-20 Asia Cup 2026 का शेड्यूल जारी…. 5 सितंबर को होगी भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत

    Women T-20 Asia Cup 2026 का शेड्यूल जारी…. 5 सितंबर को होगी भारत-पाकिस्तान की भिड़ंत


    दुबई।
    महिला टी20 एशिया कप 2026 (Women Asia Cup 2026) का आयोजन 28 अगस्त से 13 सितंबर तक दुबई में होगा। भारतीय महिला टीम (Indian Women’s Team) अपने अभियान की सबसे बड़ी चुनौती 5 सितंबर को पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ खेलेगी. टूर्नामेंट में आठ टीमें हिस्सा लेंगी. ग्रुप राउंड के बाद शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी, जबकि फाइनल मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा।

    एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) ने गुरुवार (6 अगस्त) को टूर्नामेंट का शेड्यूल जारी किया. इस बार क्रिकेट प्रेमियों की सबसे ज्यादा नजर 5 सितंबर पर रहेगी, जब भारत और पाकिस्तान की महिला टीमें दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आमने-सामने होंगी।

    आठ टीमों वाला यह टूर्नामेंट 28 अगस्त से शुरू होगा और 13 सितंबर तक चलेगा. उद्घाटन मुकाबला ग्रुप-A में हॉन्गकॉन्ग और थाईलैंड के बीच खेला जाएगा।

    भारत को ग्रुप-A में पाकिस्तान, थाईलैंड, हॉन्गकॉन्ग और चीन के साथ रखा गया है. दूसरी ओर ग्रुप-B में मौजूदा चैम्प‍ियन श्रीलंका के साथ बांग्लादेश, मेजबान यूएई और इंडोनेशिया शामिल हैं।

    टूर्नामेंट टी20 फॉर्मेट में खेला जाएगा. दोनों ग्रुप की सभी टीमें एक-दूसरे के खिलाफ एक-एक मैच खेलेंगी. इसके बाद दोनों ग्रुप की टॉप दो-दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी।

    पहला सेमीफाइनल 10 सितंबर को ग्रुप-A की शीर्ष टीम और ग्रुप-B की दूसरे स्थान की टीम के बीच होगा. दूसरा सेमीफाइनल 11 सितंबर को ग्रुप-A की दूसरे स्थान की टीम और ग्रुप-B की शीर्ष टीम के बीच खेला जाएगा. फाइनल मुकाबला 13 सितंबर को आयोजित होगा।

    ग्रुप-B का सबसे बड़ा मुकाबला 6 सितंबर को श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच खेला जाएगा. वहीं यूएई और इंडोनेशिया भी इसी ग्रुप का हिस्सा हैं. श्रीलंका इस टूर्नामेंट में डिफेंडिंग चैंपियन के तौर पर उतरेगा, जबकि बांग्लादेश ने 2018 में महिला एशिया कप का खिताब जीता था।

    भारत महिला एशिया कप के इतिहास की सबसे सफल टीम है. भारतीय टीम अब तक सात बार चैम्प‍ियन बन चुकी है. इनमें 2004, 2005, 2006 और 2008 में वनडे फॉर्मेट में जीते गए चार खिताब शामिल हैं, जबकि 2012, 2016 और 2022 में भारत ने टी20 फॉर्मेट में ट्रॉफी अपने नाम की थी।

  • युद्ध के बीच रूस में चल रहा गजब खेल… मुआवजे के लिए सैनिकों से शादी कर रहीं महिलाएं!

    युद्ध के बीच रूस में चल रहा गजब खेल… मुआवजे के लिए सैनिकों से शादी कर रहीं महिलाएं!


    मॉस्को।
    यूक्रेन से युद्ध (Ukraine War) के बीच रूस (Russia) में एक नया घोटाला (New Scam) सामने आया है। सीएनएन की रिपोर्ट के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां महिलाएं (Women) युद्ध पर जा रहे सैनिकों (soldiers) से जल्दबाजी में शादी (Fake Marriage) कर रही हैं और उनकी मौत के बाद मिलने वाला सरकारी मुआवजा (Compensation) हड़प जा रही है। रूस में हाल के महीनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें सैनिकों ने मोर्चे पर जाने से ठीक पहले या अस्पताल में मौत से पहले शादी की।

    इस पूरे घोटाले में सिर्फ महिलाएं व युवतियां ही नहीं, अस्पताल से लेकर सेना तक पर मिलीभगत के आरोप हैं। सबसे चर्चित मामला एक सैन्य अस्पताल में कार्यरत नर्स का है, जिस पर आरोप है कि उसने इलाज करा रहे पांच घायल सैनिकों से अलग-अलग समय पर शादी की। वह सैनिकों की मौत के बाद उनका मुआवजा लेना चाहती थी।

    पिता की मौत के बाद बेटी को पता चला-दो दिन पहले हुई थी शादी
    सेंट पीटर्सबर्ग की रहने वाली 37 वर्षीय मारिया ने सीएनएन को बताया कि जब उनके 59 वर्षीय पिता यूरी की यूक्रेन युद्ध में मौत हुई, तब मिलिट्री अधिकारियों से उन्हें पता चला कि उनके पिता ने मोर्चे पर जाने से ठीक दो दिन पहले अपने से 22 साल छोटी एक अनजान महिला से गुपचुप शादी कर ली थी। इस फर्जी शादी के कारण सरकार से मिलने वाला सारा मुआवजा (डेथ पेआउट) उस अनजान महिला को मिल गया। मारिया का आरोप है कि उनके पिता के साथ धोखा हुआ।

    सैनिक की मौत पर रूस में मिलती है 62 लाख रुपये की मदद
    रूस में युद्ध में मारे गए सैनिक के परिवार को सरकार की ओर से कम से कम 50 लाख रूबल (करीब 62 लाख भारतीय रुपये) की एकमुश्त मदद मिलती है। कई अन्य भुगतान और बीमा जोड़ दिए जाएं तो यह रकम और भी ज्यादा हो जाती है। इसी के लालच में महिलाएं अकेले, बुजुर्ग या कमजोर सैनिकों को शादी के लिए फंसाती हैं।

    युद्ध शुरू होने के बाद शादी के नियम हुए आसान
    2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद रूस ने सेना में भर्ती होने वाले लोगों के लिए शादी के नियम आसान कर दिए। आमतौर पर रूस में शादी के लिए आवेदन देने के बाद कुछ समय इंतजार करना पड़ता है, लेकिन युद्ध के दौरान इस प्रक्रिया में छूट दे दी गई। नए सैनिक चाहें तो भर्ती के तुरंत बाद शादी कर सकते थे। सरकार का मानना था कि इससे सैनिकों को परिवार का सहारा मिलेगा।

  • स्किन केयर में चुकंदर का जादू जानिए कैसे यह सुपरफूड दूर करेगा दाग धब्बे और बढ़ाएगा चेहरे की प्राकृतिक सुंदरता

    स्किन केयर में चुकंदर का जादू जानिए कैसे यह सुपरफूड दूर करेगा दाग धब्बे और बढ़ाएगा चेहरे की प्राकृतिक सुंदरता


    नई दिल्ली। आज के समय में हर कोई स्वस्थ और चमकदार त्वचा चाहता है। इसके लिए लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक ट्रीटमेंट का सहारा लेते हैं लेकिन कई बार घरेलू और प्राकृतिक उपाय अधिक प्रभावी साबित होते हैं। चुकंदर ऐसा ही एक सुपरफूड है जो केवल सेहत ही नहीं बल्कि त्वचा की सुंदरता बढ़ाने में भी बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी आयरन फोलेट पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को अंदर से पोषण देकर प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद करते हैं।

    चुकंदर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में सहायक माना जाता है। जब शरीर में रक्त का प्रवाह सही रहता है तब त्वचा तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं जिससे चेहरा अधिक ताजा और दमकता हुआ दिखाई देता है। नियमित रूप से चुकंदर का सेवन करने से त्वचा की प्राकृतिक रंगत में भी सुधार देखा जा सकता है।

    अगर चेहरे पर दाग धब्बे या पिगमेंटेशन की समस्या है तो चुकंदर का उपयोग फायदेमंद माना जाता है। इसमें मौजूद विटामिन सी त्वचा की रंगत को समान बनाने में मदद करता है और धीरे धीरे दाग धब्बों की तीव्रता कम हो सकती है। इसके लिए चुकंदर का रस निकालकर उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाया जा सकता है। लगभग पंद्रह मिनट बाद साफ पानी से चेहरा धो लेने से त्वचा को ताजगी महसूस होती है।

    रूखी और बेजान त्वचा वाले लोगों के लिए भी चुकंदर लाभकारी माना जाता है। चुकंदर के रस में दही या एलोवेरा जेल मिलाकर फेस पैक तैयार किया जा सकता है। यह मिश्रण त्वचा को नमी देने के साथ उसे मुलायम बनाने में मदद करता है। सप्ताह में एक या दो बार इसका उपयोग करने से त्वचा अधिक स्वस्थ और कोमल महसूस हो सकती है।

    चुकंदर का एक और लोकप्रिय उपयोग होंठों के लिए किया जाता है। कई लोग प्राकृतिक गुलाबी होंठ पाने के लिए चुकंदर के रस का इस्तेमाल करते हैं। रात में सोने से पहले होंठों पर हल्का चुकंदर का रस लगाने से होंठों की रंगत में धीरे धीरे प्राकृतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। यह तरीका रासायनिक लिप प्रोडक्ट्स की तुलना में अधिक सुरक्षित माना जाता है।

    मुंहासों से परेशान लोगों के लिए भी चुकंदर उपयोगी हो सकता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन त्वचा को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हालांकि यदि त्वचा बहुत संवेदनशील है तो किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना जरूरी है ताकि किसी प्रकार की एलर्जी या जलन से बचा जा सके।

    केवल बाहरी उपयोग ही नहीं बल्कि चुकंदर का नियमित सेवन भी त्वचा के लिए फायदेमंद माना जाता है। सलाद जूस या सूप के रूप में इसे अपनी डाइट में शामिल करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं जो त्वचा की सेहत को बेहतर बनाने में सहायता करते हैं। पर्याप्त पानी पीना संतुलित आहार लेना और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है क्योंकि स्वस्थ त्वचा केवल बाहरी देखभाल से नहीं बल्कि अच्छी जीवनशैली से भी मिलती है।

    ध्यान रखें कि चुकंदर कोई चमत्कारी इलाज नहीं है लेकिन संतुलित आहार और सही स्किन केयर रूटीन के साथ इसका नियमित उपयोग त्वचा की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखने में मदद कर सकता है। यदि किसी को गंभीर त्वचा संबंधी समस्या है तो घरेलू उपायों के साथ त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे उचित विकल्प माना जाता है।

  • कर्क राशि में बना शक्तिशाली त्रिग्रही योग, 17 अगस्त तक 3 राशियों को मिल सकता है बड़ा आर्थिक फायदा; नौकरी-कारोबार में खुलेंगे नए रास्ते

    कर्क राशि में बना शक्तिशाली त्रिग्रही योग, 17 अगस्त तक 3 राशियों को मिल सकता है बड़ा आर्थिक फायदा; नौकरी-कारोबार में खुलेंगे नए रास्ते


    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की युति को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। जब तीन ग्रह एक ही राशि में एक साथ मौजूद होते हैं तो इसे त्रिग्रही योग कहा जाता है। अगस्त 2026 में कर्क राशि में सूर्य देवगुरु बृहस्पति और बुध की युति से ऐसा ही एक विशेष संयोग बना है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार यह त्रिग्रही योग 17 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग बनने की बात भी कही जा रही है। वहीं कर्क राशि में बृहस्पति को उच्च का माना जाता है। ऐसे में ग्रहों का यह संयोग कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से बेहद शुभ माना जा रहा है।

    बताया जाता है कि 5 अगस्त को बुध ने कर्क राशि में प्रवेश किया था। यहां पहले से सूर्य और बृहस्पति मौजूद थे। बुध के पहुंचते ही तीनों ग्रह एक ही राशि में आ गए और त्रिग्रही योग का निर्माण हुआ। ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस योग का सबसे ज्यादा सकारात्मक प्रभाव वृषभ कर्क और कन्या राशि के जातकों पर पड़ सकता है। इन राशियों के लिए आय बढ़ने से लेकर नौकरी में तरक्की और कारोबार में नए अवसर मिलने तक की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

    वृषभ राशि के जातकों के लिए यह समय साहस और आत्मविश्वास बढ़ाने वाला माना जा रहा है। कार्यक्षेत्र में लिए गए फैसलों की सराहना हो सकती है और नई जिम्मेदारियां या अवसर सामने आ सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार आय के नए स्रोत बनने के साथ लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की संभावना भी बन सकती है। छोटे भाई बहनों का सहयोग मिल सकता है और सामाजिक स्तर पर प्रतिष्ठा बढ़ने के योग बन सकते हैं। कारोबार से जुड़े लोगों को भी नए प्रोजेक्ट या लाभकारी अवसर मिलने की उम्मीद बताई जा रही है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए यह त्रिग्रही योग इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह उनकी राशि में ही बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार इससे व्यक्तित्व में निखार आ सकता है और आत्मविश्वास मजबूत हो सकता है। नौकरी करने वालों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिलने के अवसर बन सकते हैं। कारोबार से जुड़े लोगों के लिए भी यह अवधि लाभकारी बताई जा रही है। व्यापार में कोई बड़ा सौदा या आर्थिक लाभ मिलने की संभावना बन सकती है। समाज और कार्यस्थल पर प्रभाव बढ़ने के साथ मान सम्मान में भी वृद्धि हो सकती है।

    कन्या राशि के जातकों के लिए यह योग लाभ भाव में बनने की बात कही जा रही है। ऐसे में आर्थिक लाभ के लिहाज से यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार आय के नए रास्ते खुल सकते हैं और निवेश से अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना बन सकती है। लंबे समय से अटकी योजनाओं में तेजी आ सकती है और कामयाबी हासिल होने के अवसर बढ़ सकते हैं। विद्यार्थियों के लिए भी समय सकारात्मक बताया जा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों को सफलता मिलने की संभावना जताई गई है। संतान पक्ष से भी कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

    इन तीन राशियों के अलावा मेष तुला और धनु राशि के जातकों के लिए भी त्रिग्रही योग को सकारात्मक माना जा रहा है। इन राशियों के लोगों को नौकरी और आर्थिक मामलों में स्थिरता मिलने के संकेत बताए जा रहे हैं। वहीं मकर और कुंभ राशि के जातकों को इस अवधि में खर्चों पर नियंत्रण रखने और आर्थिक लेनदेन में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    17 अगस्त को सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ कर्क राशि में बनी तीन ग्रहों की यह युति समाप्त हो जाएगी। इसलिए ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार 17 अगस्त तक का समय इन राशियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि ग्रहों से जुड़े ये फलादेश पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं और इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

  • सनी देओल के गुस्से से डरते थे करण? बेटे ने बताया पिता की सख्ती का सच, सुनकर नहीं रुकेगी हंसी

    सनी देओल के गुस्से से डरते थे करण? बेटे ने बताया पिता की सख्ती का सच, सुनकर नहीं रुकेगी हंसी


    नई दिल्ली। सनी देओल इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर लगातार चर्चा में हैं। फिल्म में उनके साथ प्रीति जिंटा और उनके बेटे करण देओल भी नजर आएंगे। सनी और करण की यह साथ में दूसरी फिल्म है और तीनों कलाकार फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इसी दौरान एक प्रमोशनल इवेंट में करण देओल से उनके पिता सनी देओल को लेकर ऐसा सवाल पूछ लिया गया जिसका जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग जोर से हंस पड़े। करण से पूछा गया कि क्या बचपन में कभी घर पर सनी देओल ने उनकी पिटाई की थी।

    सवाल का जवाब करण ने बेहद सहज और मजेदार अंदाज में दिया। उन्होंने कहा कि पिटाई तो कभी नहीं हुई लेकिन सनी देओल का इशारा ही काफी होता था। करण के इस जवाब के बाद वहां मौजूद दर्शक हंसने लगे। खुद सनी देओल और प्रीति जिंटा भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। करण के छोटे से जवाब ने यह जरूर बता दिया कि घर में पिता की मौजूदगी और उनका सख्त अंदाज बच्चों के लिए कितना प्रभावशाली रहा होगा।

    देओल परिवार में पिता धर्मेंद्र को लेकर सनी और बॉबी देओल पहले भी कई बार बता चुके हैं कि वह अपने बच्चों के लिए काफी सख्त थे। दोनों भाइयों ने अलग अलग मौकों पर बताया है कि बचपन में वे अपने पिता से काफी डरते थे। हालांकि समय के साथ सनी और बॉबी ने अपने बच्चों के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखने की कोशिश की। करण का जवाब भी इसी पारिवारिक माहौल की एक मजेदार झलक देता है।

    अब बात सनी देओल की नई फिल्म बंटवारा 1947 की करें तो इसका निर्देशन राजकुमार संतोषी कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण आमिर खान अपने प्रोडक्शन हाउस आमिर खान प्रोडक्शन्स के तहत कर रहे हैं। फिल्म को लेकर शुरुआत से ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है क्योंकि इसमें सनी देओल और प्रीति जिंटा की जोड़ी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर नजर आने वाली है। इसके साथ ही करण देओल भी फिल्म का अहम हिस्सा हैं।

    फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की बात सामने आई है। कहानी भारत विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। ट्रेलर में एक मुस्लिम परिवार के नए घर में पहुंचने और वहां पहले से मौजूद एक हिंदू महिला के बीच बने हालात को दिखाया गया है। कहानी में सनी देओल का किरदार उस महिला की रक्षा के लिए अपने ही समुदाय के लोगों के सामने खड़ा होता दिखाई देता है। फिल्म में शबाना आजमी अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

    बंटवारा 1947 प्रीति जिंटा के लिए भी खास फिल्म है क्योंकि इसके जरिए वह लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। वह इससे पहले भैयाजी सुपरहिट में नजर आई थीं। सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा ने द हीरो अ लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई हीरोज और भैयाजी सुपरहिट जैसी फिल्मों में काम किया है। ऐसे में दोनों की जोड़ी को दोबारा पर्दे पर देखने के लिए फैंस काफी उत्साहित हैं।

    वहीं करण देओल की बात करें तो उन्होंने 2019 में फिल्म पल पल दिल के पास से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद वह वेल्ले में नजर आए। अब बंटवारा 1947 के जरिए वह लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान पिता और बेटे की केमिस्ट्री भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है और करण का पिटाई वाला मजेदार जवाब इसी की एक दिलचस्प झलक बन गया है।

  • ADHD vs Anxiety: ध्यान नहीं लगता या हर समय रहती है चिंता, जानिए दोनों मानसिक स्थितियों में क्या है बड़ा अंतर

    ADHD vs Anxiety: ध्यान नहीं लगता या हर समय रहती है चिंता, जानिए दोनों मानसिक स्थितियों में क्या है बड़ा अंतर


    नई दिल्ली ।
    आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में ध्यान न लगना, बार-बार बेचैनी महसूस होना, किसी काम पर फोकस न कर पाना और लगातार चिंता में रहना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य तनाव या एंग्जायटी समझ लेते हैं, जबकि कई मामलों में यह अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानी ADHD का संकेत भी हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों स्थितियों के कई लक्षण एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनके कारण, पहचान और इलाज पूरी तरह अलग होते हैं। इसलिए सही समय पर सही निदान कराना बेहद जरूरी है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ADHD एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो ध्यान, व्यवहार नियंत्रण और कार्यों की योजना बनाने से जुड़ा होता है। इसके लक्षण अक्सर बचपन में शुरू होते हैं और कई लोगों में वयस्क होने तक बने रह सकते हैं। दूसरी ओर एंग्जायटी एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जिसमें व्यक्ति लगातार चिंता, डर और तनाव महसूस करता है। यही अत्यधिक चिंता उसकी एकाग्रता और दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।

    दोनों स्थितियों में ध्यान भटकना, काम अधूरा छोड़ देना, बेचैनी महसूस होना और रोजमर्रा के कार्यों में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही समानता लोगों को भ्रमित कर देती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का ध्यान मीटिंग के दौरान बार-बार भटकता है, तो ADHD में इसका कारण मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्या हो सकती है, जबकि एंग्जायटी में व्यक्ति का ध्यान लगातार चल रही चिंताओं और नकारात्मक विचारों के कारण भटकता है।

    ADHD के प्रमुख लक्षणों में बार-बार चीजें भूल जाना, एक जगह लंबे समय तक बैठने में कठिनाई, हाथ-पैर लगातार हिलाना, बिना सोचे तुरंत प्रतिक्रिया देना, दूसरों की बात बीच में काट देना और समय प्रबंधन में परेशानी शामिल हो सकती है। इसके विपरीत एंग्जायटी डिसऑर्डर में हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहना, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में तनाव और अत्यधिक चिंता प्रमुख संकेत माने जाते हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ADHD और एंग्जायटी में सबसे बड़ा अंतर उनके मूल कारण में होता है। ADHD में ध्यान स्वाभाविक रूप से भटकता है और व्यक्ति आवेगपूर्ण व्यवहार कर सकता है, जबकि एंग्जायटी में चिंता और भय के कारण निर्णय लेने में देरी होती है तथा व्यक्ति हर स्थिति को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचता है। इसके अलावा ADHD की शुरुआत सामान्यतः बचपन में होती है, जबकि एंग्जायटी किसी भी उम्र में विकसित हो सकती है।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कई लोगों में ADHD और एंग्जायटी दोनों एक साथ मौजूद हो सकते हैं। ऐसी स्थिति को कॉमॉर्बिडिटी कहा जाता है। इसलिए केवल इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर स्वयं बीमारी का अनुमान लगाना उचित नहीं है। सही पहचान के लिए विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री, व्यवहार का मूल्यांकन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा जांच आवश्यक होती है।

    डॉक्टरों का कहना है कि यदि ध्यान की कमी, अत्यधिक चिंता, बेचैनी या आवेगपूर्ण व्यवहार लंबे समय तक बना रहे और पढ़ाई, नौकरी या पारिवारिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो बिना देर किए मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। समय पर सही निदान और उचित उपचार से दोनों स्थितियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

  • शादी के लिए नहीं किया था धर्म परिवर्तन? दीपिका कक्कड़ को लेकर जयति भाटिया के बयान से मची चर्चा

    शादी के लिए नहीं किया था धर्म परिवर्तन? दीपिका कक्कड़ को लेकर जयति भाटिया के बयान से मची चर्चा


    नई दिल्ली। टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ की निजी जिंदगी हमेशा से प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय रही है। खासतौर पर अभिनेता शोएब इब्राहिम के साथ उनकी शादी और धर्म परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अलग अलग तरह की बातें सामने आती रही हैं। अब उनकी को स्टार और करीबी दोस्त जयति भाटिया ने दीपिका के धर्म परिवर्तन को लेकर एक अहम बात बताई है। उनके मुताबिक दीपिका ने शोएब से निकाह करने के लिए धर्म परिवर्तन नहीं किया था बल्कि यह उनका निजी फैसला था जो उनके जीवन के एक मुश्किल दौर के दौरान सामने आया।

    सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में जयति भाटिया ने दीपिका के बारे में बात करते हुए कहा कि दीपिका अपने जीवन में जिस भी चीज को अपनाती हैं उसमें पूरी तरह समर्पित रहती हैं। उनके मुताबिक जब दीपिका शोएब इब्राहिम के साथ रिश्ते में आईं तो उन्होंने उस रिश्ते को भी पूरी गंभीरता और ईमानदारी से निभाने की कोशिश की। इसी संदर्भ में जब जयति ने खुद दीपिका से पूछा था कि क्या उन्होंने शादी की वजह से अपना धर्म बदला है तो दीपिका ने इससे इनकार किया था।

    जयति के अनुसार दीपिका उस समय अपनी जिंदगी के एक कठिन दौर से गुजर रही थीं। इसी दौरान वह अजमेर शरीफ गई थीं। वहां धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव के बाद उनके मन में इस्लाम को अपनाने का विचार आया। जयति ने बताया कि दीपिका का यह फैसला किसी दबाव या केवल शादी की वजह से नहीं था बल्कि उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत इच्छा के तौर पर लिया था। हालांकि यह दीपिका की निजी आस्था और उनके अपने अनुभव से जुड़ा विषय है।

    जयति ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को प्रार्थना और आस्था से मानसिक मजबूती मिलती है तो उसके लिए वह रास्ता अपनाना उसका व्यक्तिगत निर्णय है। उनके मुताबिक दीपिका को भी इस्लाम से जुड़ने के बाद एक तरह की ताकत महसूस हुई और उन्होंने अपनी इच्छा से इसे स्वीकार किया।

    दीपिका और शोएब की प्रेम कहानी की शुरुआत टीवी शो ससुराल सिमर का के सेट से हुई थी। दोनों की मुलाकात 2011 में इस शो के दौरान हुई थी। शुरुआत में उनके बीच दोस्ती हुई और समय के साथ यह रिश्ता प्यार में बदल गया। दोनों ने लंबे समय तक एक दूसरे को डेट किया और इसके बाद 2018 में शादी कर ली। उनकी शादी में परिवार और करीबी लोग ही शामिल हुए थे।

    शादी के बाद दोनों ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर कई बार सोशल मीडिया पर झलकियां साझा की हैं। समय के साथ उनकी जिंदगी में परिवार भी बढ़ा और दोनों अब अपने बेटे के साथ पैरेंटहुड का आनंद ले रहे हैं। दीपिका और शोएब की जोड़ी को उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद करते हैं।

    हाल ही में दीपिका के जन्मदिन के मौके पर शोएब ने उनके लिए एक भावुक पोस्ट शेयर किया था। उन्होंने दीपिका को फाइटर बताते हुए उनकी हिम्मत की तारीफ की और उनके स्वस्थ एवं लंबे जीवन की दुआ की। शोएब ने यह भी लिखा कि दीपिका को खुश रखने की जिम्मेदारी उनकी है। इस पोस्ट के बाद दोनों के प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर जमकर प्यार बरसाया।

    दीपिका के धर्म परिवर्तन को लेकर अब जयति भाटिया का बयान एक बार फिर इस पुराने विषय को चर्चा में ले आया है। हालांकि धर्म और आस्था किसी भी व्यक्ति का बेहद निजी विषय है और दीपिका के बारे में सामने आई यह जानकारी उनकी करीबी दोस्त के बयान पर आधारित है। इससे इतना जरूर स्पष्ट होता है कि इस फैसले को लेकर दीपिका की अपनी व्यक्तिगत सोच और आध्यात्मिक अनुभव को महत्वपूर्ण बताया गया है।