Blog

  • सनी देओल के गुस्से से डरते थे करण? बेटे ने बताया पिता की सख्ती का सच, सुनकर नहीं रुकेगी हंसी

    सनी देओल के गुस्से से डरते थे करण? बेटे ने बताया पिता की सख्ती का सच, सुनकर नहीं रुकेगी हंसी


    नई दिल्ली। सनी देओल इन दिनों अपनी आने वाली फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर लगातार चर्चा में हैं। फिल्म में उनके साथ प्रीति जिंटा और उनके बेटे करण देओल भी नजर आएंगे। सनी और करण की यह साथ में दूसरी फिल्म है और तीनों कलाकार फिल्म के प्रमोशन में व्यस्त हैं। इसी दौरान एक प्रमोशनल इवेंट में करण देओल से उनके पिता सनी देओल को लेकर ऐसा सवाल पूछ लिया गया जिसका जवाब सुनकर वहां मौजूद लोग जोर से हंस पड़े। करण से पूछा गया कि क्या बचपन में कभी घर पर सनी देओल ने उनकी पिटाई की थी।

    सवाल का जवाब करण ने बेहद सहज और मजेदार अंदाज में दिया। उन्होंने कहा कि पिटाई तो कभी नहीं हुई लेकिन सनी देओल का इशारा ही काफी होता था। करण के इस जवाब के बाद वहां मौजूद दर्शक हंसने लगे। खुद सनी देओल और प्रीति जिंटा भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए। करण के छोटे से जवाब ने यह जरूर बता दिया कि घर में पिता की मौजूदगी और उनका सख्त अंदाज बच्चों के लिए कितना प्रभावशाली रहा होगा।

    देओल परिवार में पिता धर्मेंद्र को लेकर सनी और बॉबी देओल पहले भी कई बार बता चुके हैं कि वह अपने बच्चों के लिए काफी सख्त थे। दोनों भाइयों ने अलग अलग मौकों पर बताया है कि बचपन में वे अपने पिता से काफी डरते थे। हालांकि समय के साथ सनी और बॉबी ने अपने बच्चों के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखने की कोशिश की। करण का जवाब भी इसी पारिवारिक माहौल की एक मजेदार झलक देता है।

    अब बात सनी देओल की नई फिल्म बंटवारा 1947 की करें तो इसका निर्देशन राजकुमार संतोषी कर रहे हैं। फिल्म का निर्माण आमिर खान अपने प्रोडक्शन हाउस आमिर खान प्रोडक्शन्स के तहत कर रहे हैं। फिल्म को लेकर शुरुआत से ही दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है क्योंकि इसमें सनी देओल और प्रीति जिंटा की जोड़ी लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर नजर आने वाली है। इसके साथ ही करण देओल भी फिल्म का अहम हिस्सा हैं।

    फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों की तरफ से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने की बात सामने आई है। कहानी भारत विभाजन के दौर की पृष्ठभूमि में बुनी गई है। ट्रेलर में एक मुस्लिम परिवार के नए घर में पहुंचने और वहां पहले से मौजूद एक हिंदू महिला के बीच बने हालात को दिखाया गया है। कहानी में सनी देओल का किरदार उस महिला की रक्षा के लिए अपने ही समुदाय के लोगों के सामने खड़ा होता दिखाई देता है। फिल्म में शबाना आजमी अली फजल और अभिमन्यु सिंह जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।

    बंटवारा 1947 प्रीति जिंटा के लिए भी खास फिल्म है क्योंकि इसके जरिए वह लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रही हैं। वह इससे पहले भैयाजी सुपरहिट में नजर आई थीं। सनी देओल के साथ प्रीति जिंटा ने द हीरो अ लव स्टोरी ऑफ ए स्पाई हीरोज और भैयाजी सुपरहिट जैसी फिल्मों में काम किया है। ऐसे में दोनों की जोड़ी को दोबारा पर्दे पर देखने के लिए फैंस काफी उत्साहित हैं।

    वहीं करण देओल की बात करें तो उन्होंने 2019 में फिल्म पल पल दिल के पास से बॉलीवुड में कदम रखा था। इसके बाद वह वेल्ले में नजर आए। अब बंटवारा 1947 के जरिए वह लंबे अंतराल के बाद बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। फिल्म के प्रमोशन के दौरान पिता और बेटे की केमिस्ट्री भी दर्शकों का ध्यान खींच रही है और करण का पिटाई वाला मजेदार जवाब इसी की एक दिलचस्प झलक बन गया है।

  • ADHD vs Anxiety: ध्यान नहीं लगता या हर समय रहती है चिंता, जानिए दोनों मानसिक स्थितियों में क्या है बड़ा अंतर

    ADHD vs Anxiety: ध्यान नहीं लगता या हर समय रहती है चिंता, जानिए दोनों मानसिक स्थितियों में क्या है बड़ा अंतर


    नई दिल्ली ।
    आज की तेज रफ्तार जीवनशैली में ध्यान न लगना, बार-बार बेचैनी महसूस होना, किसी काम पर फोकस न कर पाना और लगातार चिंता में रहना जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। कई लोग इन लक्षणों को सामान्य तनाव या एंग्जायटी समझ लेते हैं, जबकि कई मामलों में यह अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर यानी ADHD का संकेत भी हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों स्थितियों के कई लक्षण एक जैसे दिखाई देते हैं, लेकिन इनके कारण, पहचान और इलाज पूरी तरह अलग होते हैं। इसलिए सही समय पर सही निदान कराना बेहद जरूरी है।

    विशेषज्ञ बताते हैं कि ADHD एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क का वह हिस्सा प्रभावित होता है जो ध्यान, व्यवहार नियंत्रण और कार्यों की योजना बनाने से जुड़ा होता है। इसके लक्षण अक्सर बचपन में शुरू होते हैं और कई लोगों में वयस्क होने तक बने रह सकते हैं। दूसरी ओर एंग्जायटी एक मानसिक स्वास्थ्य विकार है, जिसमें व्यक्ति लगातार चिंता, डर और तनाव महसूस करता है। यही अत्यधिक चिंता उसकी एकाग्रता और दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।

    दोनों स्थितियों में ध्यान भटकना, काम अधूरा छोड़ देना, बेचैनी महसूस होना और रोजमर्रा के कार्यों में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही समानता लोगों को भ्रमित कर देती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का ध्यान मीटिंग के दौरान बार-बार भटकता है, तो ADHD में इसका कारण मस्तिष्क की कार्यप्रणाली से जुड़ी समस्या हो सकती है, जबकि एंग्जायटी में व्यक्ति का ध्यान लगातार चल रही चिंताओं और नकारात्मक विचारों के कारण भटकता है।

    ADHD के प्रमुख लक्षणों में बार-बार चीजें भूल जाना, एक जगह लंबे समय तक बैठने में कठिनाई, हाथ-पैर लगातार हिलाना, बिना सोचे तुरंत प्रतिक्रिया देना, दूसरों की बात बीच में काट देना और समय प्रबंधन में परेशानी शामिल हो सकती है। इसके विपरीत एंग्जायटी डिसऑर्डर में हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहना, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना, सांस लेने में कठिनाई, मांसपेशियों में तनाव और अत्यधिक चिंता प्रमुख संकेत माने जाते हैं।

    मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ADHD और एंग्जायटी में सबसे बड़ा अंतर उनके मूल कारण में होता है। ADHD में ध्यान स्वाभाविक रूप से भटकता है और व्यक्ति आवेगपूर्ण व्यवहार कर सकता है, जबकि एंग्जायटी में चिंता और भय के कारण निर्णय लेने में देरी होती है तथा व्यक्ति हर स्थिति को लेकर जरूरत से ज्यादा सोचता है। इसके अलावा ADHD की शुरुआत सामान्यतः बचपन में होती है, जबकि एंग्जायटी किसी भी उम्र में विकसित हो सकती है।

    विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि कई लोगों में ADHD और एंग्जायटी दोनों एक साथ मौजूद हो सकते हैं। ऐसी स्थिति को कॉमॉर्बिडिटी कहा जाता है। इसलिए केवल इंटरनेट पर लक्षण पढ़कर स्वयं बीमारी का अनुमान लगाना उचित नहीं है। सही पहचान के लिए विस्तृत मेडिकल हिस्ट्री, व्यवहार का मूल्यांकन और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा जांच आवश्यक होती है।

    डॉक्टरों का कहना है कि यदि ध्यान की कमी, अत्यधिक चिंता, बेचैनी या आवेगपूर्ण व्यवहार लंबे समय तक बना रहे और पढ़ाई, नौकरी या पारिवारिक जीवन को प्रभावित करने लगे, तो बिना देर किए मनोचिकित्सक या क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। समय पर सही निदान और उचित उपचार से दोनों स्थितियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है और व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है।

  • शादी के लिए नहीं किया था धर्म परिवर्तन? दीपिका कक्कड़ को लेकर जयति भाटिया के बयान से मची चर्चा

    शादी के लिए नहीं किया था धर्म परिवर्तन? दीपिका कक्कड़ को लेकर जयति भाटिया के बयान से मची चर्चा


    नई दिल्ली। टीवी की लोकप्रिय अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ की निजी जिंदगी हमेशा से प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय रही है। खासतौर पर अभिनेता शोएब इब्राहिम के साथ उनकी शादी और धर्म परिवर्तन को लेकर लंबे समय से अलग अलग तरह की बातें सामने आती रही हैं। अब उनकी को स्टार और करीबी दोस्त जयति भाटिया ने दीपिका के धर्म परिवर्तन को लेकर एक अहम बात बताई है। उनके मुताबिक दीपिका ने शोएब से निकाह करने के लिए धर्म परिवर्तन नहीं किया था बल्कि यह उनका निजी फैसला था जो उनके जीवन के एक मुश्किल दौर के दौरान सामने आया।

    सिद्धार्थ कनन के साथ बातचीत में जयति भाटिया ने दीपिका के बारे में बात करते हुए कहा कि दीपिका अपने जीवन में जिस भी चीज को अपनाती हैं उसमें पूरी तरह समर्पित रहती हैं। उनके मुताबिक जब दीपिका शोएब इब्राहिम के साथ रिश्ते में आईं तो उन्होंने उस रिश्ते को भी पूरी गंभीरता और ईमानदारी से निभाने की कोशिश की। इसी संदर्भ में जब जयति ने खुद दीपिका से पूछा था कि क्या उन्होंने शादी की वजह से अपना धर्म बदला है तो दीपिका ने इससे इनकार किया था।

    जयति के अनुसार दीपिका उस समय अपनी जिंदगी के एक कठिन दौर से गुजर रही थीं। इसी दौरान वह अजमेर शरीफ गई थीं। वहां धार्मिक और आध्यात्मिक अनुभव के बाद उनके मन में इस्लाम को अपनाने का विचार आया। जयति ने बताया कि दीपिका का यह फैसला किसी दबाव या केवल शादी की वजह से नहीं था बल्कि उन्होंने इसे अपनी व्यक्तिगत इच्छा के तौर पर लिया था। हालांकि यह दीपिका की निजी आस्था और उनके अपने अनुभव से जुड़ा विषय है।

    जयति ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को प्रार्थना और आस्था से मानसिक मजबूती मिलती है तो उसके लिए वह रास्ता अपनाना उसका व्यक्तिगत निर्णय है। उनके मुताबिक दीपिका को भी इस्लाम से जुड़ने के बाद एक तरह की ताकत महसूस हुई और उन्होंने अपनी इच्छा से इसे स्वीकार किया।

    दीपिका और शोएब की प्रेम कहानी की शुरुआत टीवी शो ससुराल सिमर का के सेट से हुई थी। दोनों की मुलाकात 2011 में इस शो के दौरान हुई थी। शुरुआत में उनके बीच दोस्ती हुई और समय के साथ यह रिश्ता प्यार में बदल गया। दोनों ने लंबे समय तक एक दूसरे को डेट किया और इसके बाद 2018 में शादी कर ली। उनकी शादी में परिवार और करीबी लोग ही शामिल हुए थे।

    शादी के बाद दोनों ने अपनी निजी जिंदगी को लेकर कई बार सोशल मीडिया पर झलकियां साझा की हैं। समय के साथ उनकी जिंदगी में परिवार भी बढ़ा और दोनों अब अपने बेटे के साथ पैरेंटहुड का आनंद ले रहे हैं। दीपिका और शोएब की जोड़ी को उनके प्रशंसक सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद करते हैं।

    हाल ही में दीपिका के जन्मदिन के मौके पर शोएब ने उनके लिए एक भावुक पोस्ट शेयर किया था। उन्होंने दीपिका को फाइटर बताते हुए उनकी हिम्मत की तारीफ की और उनके स्वस्थ एवं लंबे जीवन की दुआ की। शोएब ने यह भी लिखा कि दीपिका को खुश रखने की जिम्मेदारी उनकी है। इस पोस्ट के बाद दोनों के प्रशंसकों ने भी सोशल मीडिया पर जमकर प्यार बरसाया।

    दीपिका के धर्म परिवर्तन को लेकर अब जयति भाटिया का बयान एक बार फिर इस पुराने विषय को चर्चा में ले आया है। हालांकि धर्म और आस्था किसी भी व्यक्ति का बेहद निजी विषय है और दीपिका के बारे में सामने आई यह जानकारी उनकी करीबी दोस्त के बयान पर आधारित है। इससे इतना जरूर स्पष्ट होता है कि इस फैसले को लेकर दीपिका की अपनी व्यक्तिगत सोच और आध्यात्मिक अनुभव को महत्वपूर्ण बताया गया है।

  • माफिया के दबाव में खतरे में थी ‘द गॉडफादर’ की शूटिंग, एक डील ने बदल दी फिल्म की पूरी कहानी

    माफिया के दबाव में खतरे में थी ‘द गॉडफादर’ की शूटिंग, एक डील ने बदल दी फिल्म की पूरी कहानी


    नई दिल्ली। हॉलीवुड की सबसे चर्चित और प्रभावशाली फिल्मों की बात हो तो द गॉडफादर का नाम सबसे ऊपर आता है। 1972 में रिलीज हुई इस फिल्म ने न केवल सिनेमा की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई बल्कि माफिया और संगठित अपराध की दुनिया को पर्दे पर दिखाने का तरीका भी बदल दिया। लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इस फिल्म की कहानी जितनी पर्दे पर दिलचस्प थी उससे कहीं ज्यादा फिल्म के निर्माण के दौरान वास्तविक दुनिया में घट रही थी। फिल्म को लेकर असली माफिया के बीच नाराजगी पैदा हो गई थी और इसके चलते निर्माताओं को शूटिंग रोकने की धमकियों से लेकर गंभीर दबाव तक का सामना करना पड़ा था।

    द गॉडफादर में इटैलियन अमेरिकन माफिया परिवार की कहानी दिखाई गई थी। फिल्म में अपराध की दुनिया के तौर तरीकों और उसके भीतर चलने वाली सत्ता की राजनीति को प्रमुखता से पेश किया गया था। यही बात न्यूयॉर्क के कुख्यात कोलंबो क्राइम फैमिली के प्रमुख जोसेफ कोलंबो को पसंद नहीं आई। उनका मानना था कि फिल्म इटैलियन अमेरिकन्स और वास्तविक माफिया गतिविधियों को लेकर पुलिस और आम लोगों का ध्यान जरूरत से ज्यादा आकर्षित कर सकती है। ऐसे में फिल्म के निर्माण को लेकर विरोध शुरू हो गया।

    फिल्म के निर्माता अल रूडी के सामने मुश्किलें तब बढ़ गईं जब प्रोडक्शन से जुड़े लोगों पर दबाव बनाया जाने लगा। रिपोर्टों के मुताबिक शूटिंग से जुड़े महंगे उपकरणों से भरा एक ट्रक भी चोरी हो गया था। इसके अलावा रूडी की गतिविधियों पर नजर रखे जाने और उनकी कार का पीछा किए जाने जैसी घटनाओं ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया। कुछ रिपोर्टों में उनकी कार पर गोली चलाए जाने का भी उल्लेख मिलता है। ऐसे हालात में फिल्म का निर्माण जारी रखना आसान नहीं था।

    लेकिन निर्माता अल रूडी ने इस समस्या का सामना अलग तरीके से करने का फैसला किया। टकराव बढ़ाने के बजाय उन्होंने माफिया पक्ष से बातचीत का रास्ता अपनाया। बातचीत के दौरान फिल्म में माफिया शब्द और वास्तविक अपराध संगठनों से जुड़े संदर्भों को लेकर समझौते की कोशिश की गई। इस समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि फिल्म के निर्माण में बाधा न आए और कहानी को भी बड़े पैमाने पर बदला न जाए।

    इसी दौर में फिल्म के निर्माण से जुड़े लोगों और वास्तविक माफिया समुदाय के बीच एक असामान्य तरह का संपर्क भी देखने को मिला। कहा जाता है कि कुछ वास्तविक गैंगस्टर और उनके परिवार से जुड़े लोग फिल्म के आसपास नजर आए और फिल्म के कुछ दृश्यों में वास्तविक माफिया पृष्ठभूमि वाले लोगों की मौजूदगी भी बताई जाती है। इस वजह से फिल्म की वास्तविकता और भी ज्यादा चर्चा में आई।

    हालांकि द गॉडफादर को केवल उसके विवादों की वजह से याद नहीं किया जाता। फिल्म में मार्लन ब्रांडो और अल पचीनो जैसे कलाकारों के अभिनय ने इसे सिनेमाई इतिहास की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में शामिल कर दिया। कोपोला के निर्देशन और मारियो पूजो की कहानी ने अपराध और पारिवारिक रिश्तों के बीच के जटिल संबंधों को बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया।

    इस तरह जिस फिल्म के निर्माण के दौरान असली माफिया का दबाव एक बड़ी समस्या बन गया था वही फिल्म आगे चलकर हॉलीवुड की सबसे प्रतिष्ठित फिल्मों में शामिल हुई। द गॉडफादर की कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि इसमें पर्दे पर दिखाई गई अपराध की दुनिया और फिल्म के बाहर मौजूद वास्तविक दुनिया के बीच एक असामान्य कड़ी बन गई थी।

  • भारतवंशी अनिल मेनन की बड़ी उपलब्धि, पहला स्पेसवॉक सफल, ISS को मिलेगी ज्यादा ताकत

    भारतवंशी अनिल मेनन की बड़ी उपलब्धि, पहला स्पेसवॉक सफल, ISS को मिलेगी ज्यादा ताकत


    नई दिल्ली। भारतवंशी नासा अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन ने अपने करियर का पहला स्पेसवॉक सफलतापूर्वक पूरा कर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के पावर सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में अहम काम किया। उनके साथ अंतरिक्ष यात्री जेसिका मेयर भी स्पेसवॉक पर थीं। दोनों ने स्टेशन के 3B पावर चैनल में मॉडिफिकेशन किट स्थापित की, जिससे भविष्य में नए रोल-आउट सोलर एरे (IROSA) लगाए जा सकेंगे।

    यह ISS के इतिहास का 281वां स्पेसवॉक था। जेसिका मेयर के लिए यह छठा स्पेसवॉक रहा, जबकि अनिल मेनन ने पहली बार स्टेशन के बाहर निकलकर यह उपलब्धि हासिल की।

    6 घंटे 27 मिनट तक चला स्पेसवॉक
    यह स्पेसवॉक गुरुवार सुबह 8:33 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शाम 6:03 बजे) शुरू हुआ और करीब 6 घंटे 27 मिनट बाद 3:00 बजे EDT (भारतीय समयानुसार शुक्रवार तड़के 12:30 बजे) समाप्त हुआ। दोनों अंतरिक्ष यात्री क्वेस्ट एयरलॉक से बाहर निकले और ISS के बाहरी हिस्से में कई तकनीकी कार्य पूरे किए। मिशन का सबसे अहम हिस्सा स्टारबोर्ड-6 ट्रस पर मौजूद 3B पावर चैनल में माउंटिंग हार्डवेयर लगाना था।

    ISS को मिलेगी अतिरिक्त बिजली
    नासा के मुताबिक, इस काम के बाद स्टेशन पर भविष्य में नए IROSA सोलर एरे लगाए जा सकेंगे। ये सोलर एरे ISS को अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराएंगे, जिससे उसके महत्वपूर्ण सिस्टम बेहतर तरीके से काम कर सकेंगे। इन अतिरिक्त सोलर एरे की मदद से स्टेशन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य में उसके सुरक्षित और नियंत्रित डीऑर्बिट मिशन में भी सहायता मिलेगी।

    IROSA के छह एरे पहले ही लगाए जा चुके
    नासा के अनुसार, 2021 से अब तक अंतरिक्ष यात्रियों ने अलग-अलग स्पेसवॉक के जरिए IROSA की छह असेंबली सफलतापूर्वक स्थापित की हैं। अब दो और सोलर एरे लगाए जाने बाकी हैं, जिन्हें इसी साल के अंत तक ISS तक पहुंचाने की योजना है।

    अनिल मेनन ने किए कई तकनीकी काम
    स्पेसवॉक के दौरान अनिल मेनन को आर्टिकुलेटिंग पोर्टेबल फुट रेस्ट्रेंट की मदद से ट्रस पर स्थिर स्थिति में रखा गया। इसके बाद दोनों अंतरिक्ष यात्रियों ने भविष्य में लगाए जाने वाले IROSA और 3B पावर चैनल के बीच बिजली पहुंचाने के लिए जरूरी केबलें बिछाईं। इसके अलावा ट्रस के एक हिस्से को मल्टी-लेयर इंसुलेशन से कवर किया गया। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष के अत्यधिक तापमान से स्टेशन की संरचना को सुरक्षित रखना है।

    चांद को देखकर हुई दिलचस्प बातचीत
    स्पेसवॉक के दौरान जेसिका मेयर ने अनिल मेनन को चांद दिखाई देने की बात कही। मेयर ने उनसे कहा कि वे चांद देख सकते हैं। इस पर मेनन ने जवाब दिया कि चांद उनकी दाईं ओर है और वह उसे देख रहे हैं। मेनन ने मजाकिया अंदाज में वहां भविष्य के चंद्र आधार (मून बेस) की कल्पना भी की। इस बातचीत ने मिशन के तकनीकी काम के बीच एक दिलचस्प पल जोड़ दिया।

    13 और 25 अगस्त को भी होंगे स्पेसवॉक
    यह एक्सपीडिशन-75 के तहत अगस्त में होने वाले तीन स्पेसवॉक में पहला था। अगला स्पेसवॉक 13 अगस्त को होगा। इसमें अंतरिक्ष यात्री ISS के स्पेस-टू-ग्राउंड एंटीना को बदलेंगे। यह एंटीना स्टेशन और ह्यूस्टन स्थित मिशन कंट्रोल सेंटर के बीच तेज डेटा ट्रांसफर और संचार के लिए महत्वपूर्ण है।

    वहीं 25 अगस्त के स्पेसवॉक में पावर चैनल की केबलों और डेटा रिले सिस्टम को जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही हार्मनी मॉड्यूल के फॉरवर्ड पोर्ट पर मौजूद डॉकिंग से जुड़े नेविगेशन उपकरण को भी बदला जाएगा। इन सभी कामों का उद्देश्य ISS के नियमित रखरखाव के साथ-साथ उसके भविष्य के डीऑर्बिट मिशन के लिए तैयारी करना है।

  • मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर

    मार्केट आउटलुक: अगस्त में सेंसेक्स-निफ्टी की दिशा क्या होगी? इन अहम संकेतों पर रहेगी नजर


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में 7 अगस्त का कारोबारी सत्र निवेशकों के लिए काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशकों की नजर अब घरेलू और वैश्विक दोनों संकेतों पर टिकी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार की दिशा विदेशी बाजारों के रुख विदेशी निवेशकों की खरीद बिक्री कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम से तय हो सकती है।

    यदि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं और विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो सेंसेक्स और निफ्टी में मजबूती देखने को मिल सकती है। दूसरी ओर यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दबाव बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है तो इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचना चाहिए।

    बैंकिंग आईटी ऑटो फार्मा और एफएमसीजी सेक्टर पर इस कारोबारी सत्र में खास नजर रहने की संभावना है। यदि इन प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल बना रहता है तो बाजार को मजबूती मिल सकती है। वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी चुनिंदा स्टॉक्स निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही निवेश करना बेहतर रहेगा।

    कॉरपोरेट कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार की चाल तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जिन कंपनियों के वित्तीय परिणाम उम्मीद से बेहतर आएंगे उनके शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है जबकि कमजोर नतीजों वाली कंपनियों के शेयर दबाव में रह सकते हैं। इसलिए निवेशकों को परिणाम घोषित करने वाली कंपनियों पर विशेष नजर रखनी चाहिए।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों और घरेलू संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगी। यदि विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार को मजबूत समर्थन मिल सकता है। इसके विपरीत लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है। इसके अलावा रुपये की चाल और डॉलर इंडेक्स पर भी निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है इसलिए जोखिम को ध्यान में रखते हुए निवेश करना जरूरी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को तकनीकी स्तरों पर नजर रखते हुए ट्रेडिंग करनी चाहिए। बिना शोध और जानकारी के किसी भी शेयर में निवेश करना नुकसान का कारण बन सकता है।

    बाजार में सफलता पाने के लिए धैर्य और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। केवल अफवाहों या सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए। निवेश से पहले कंपनी के कारोबार वित्तीय स्थिति और भविष्य की संभावनाओं का आकलन करना आवश्यक है। यदि निवेशक सही रणनीति के साथ आगे बढ़ते हैं तो बाजार की अस्थिरता के बीच भी बेहतर अवसर तलाश सकते हैं।

    कुल मिलाकर 7 अगस्त का कारोबारी सत्र कई महत्वपूर्ण आर्थिक और वैश्विक संकेतों के बीच शुरू होगा। बाजार में उतार चढ़ाव की संभावना बनी रहेगी लेकिन मजबूत सेक्टरों और गुणवत्तापूर्ण शेयरों में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अवसर भी मौजूद रहेंगे। समझदारी से लिया गया निर्णय भविष्य में बेहतर रिटर्न देने में मददगार साबित हो सकता है।

  • माला सिन्हा के प्लेन हाईजैक की कहानी, आसमान में हुआ था बड़ा ड्रामा; नेपाल की राजनीति से जुड़ा था मामला

    माला सिन्हा के प्लेन हाईजैक की कहानी, आसमान में हुआ था बड़ा ड्रामा; नेपाल की राजनीति से जुड़ा था मामला


    नई दिल्ली। बॉलीवुड के सुनहरे दौर की मशहूर अभिनेत्री माला सिन्हा ने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार किरदार निभाए लेकिन उनकी जिंदगी से जुड़ा एक ऐसा किस्सा भी है जो फिल्मी कहानी से कम नहीं लगता। साल 1973 में माला सिन्हा उस विमान में सवार थीं जिसे नेपाल में हाईजैक कर लिया गया था। हैरानी की बात यह थी कि विमान को हाईजैक करने वालों में दुर्गा प्रसाद सुबेदी भी शामिल थे जो आगे चलकर नेपाल की पूर्व प्रधानमंत्री और देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के पति बने। इस घटना को नेपाल के पहले विमान अपहरण के तौर पर दर्ज किया जाता है।

    10 जून 1973 को रॉयल नेपाल एयरलाइंस का एक विमान बिराटनगर से काठमांडू के लिए रवाना हुआ था। विमान में यात्रियों के साथ अभिनेत्री माला सिन्हा भी मौजूद थीं। उड़ान के दौरान नेपाली कांग्रेस से जुड़े तीन लोगों ने विमान पर कब्जा कर लिया। इनमें दुर्गा प्रसाद सुबेदी के अलावा नागेंद्र धुंगेल और बसंत भट्टराई शामिल थे। अपहरणकर्ताओं ने विमान के पायलट को रास्ता बदलने के लिए मजबूर किया और विमान को भारत के बिहार स्थित फोर्ब्सगंज क्षेत्र में उतार दिया गया।

    इस पूरी घटना के पीछे वजह किसी यात्री को नुकसान पहुंचाना नहीं बल्कि विमान में ले जाए जा रहे सरकारी धन को हासिल करना बताई जाती है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार विमान में करीब 30 लाख नेपाली रुपये की रकम थी। इस धन को हासिल करने की योजना नेपाल के तत्कालीन राजा महेंद्र की राजशाही के खिलाफ चल रहे सशस्त्र संघर्ष के लिए फंड जुटाने से जुड़ी थी। इस ऑपरेशन के पीछे गिरिजा प्रसाद कोइराला का नाम भी सामने आया था जो बाद में नेपाल के प्रधानमंत्री बने।

    विमान को फोर्ब्सगंज में उतारने के बाद अपहरणकर्ताओं ने रकम अपने कब्जे में ली और इसके बाद विमान को यात्रियों के साथ आगे जाने दिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक इस घटना में यात्रियों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया था। घटना के बाद यह मामला नेपाल के राजनीतिक इतिहास का बेहद चर्चित अध्याय बन गया।

    दुर्गा प्रसाद सुबेदी बाद में नेपाल की राजनीति से जुड़े रहे और उनका नाम इसी ऐतिहासिक विमान अपहरण के कारण लंबे समय तक चर्चा में रहा। उनकी मुलाकात सुशीला कार्की से भारत में पढ़ाई के दौरान हुई थी। कार्की ने आगे चलकर न्यायपालिका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं। बाद में वह देश की अंतरिम प्रधानमंत्री भी बनीं।

    वहीं माला सिन्हा का फिल्मी सफर बेहद शानदार रहा। उन्होंने हिंदी के साथ बंगाली और नेपाली फिल्मों में भी काम किया और प्यासा धूल का फूल गुमराह अनपढ़ हिमालय की गोद में दिल तेरा दीवाना और आंखें जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई। एक तरफ माला सिन्हा का नाम बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर से जुड़ा रहा तो दूसरी तरफ 1973 का यह विमान अपहरण उनके जीवन का ऐसा अनोखा प्रसंग बन गया जिसमें बॉलीवुड और नेपाल की राजनीतिक उथल पुथल एक साथ जुड़ गई।

  • मां लक्ष्मी को कैसे करें प्रसन्न: जानिए संपूर्ण पूजा विधि शुभ मुहूर्त और वे आसान नियम जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत

    मां लक्ष्मी को कैसे करें प्रसन्न: जानिए संपूर्ण पूजा विधि शुभ मुहूर्त और वे आसान नियम जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत


    नई दिल्ली। माता लक्ष्मी को धन समृद्धि ऐश्वर्य और सुख शांति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति सच्ची श्रद्धा और पूर्ण विधि विधान से माता लक्ष्मी की पूजा करता है उसके जीवन से आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे समाप्त होने लगती हैं और घर में सुख समृद्धि का वास होता है। केवल धन की प्राप्ति ही नहीं बल्कि मानसिक शांति पारिवारिक खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा के लिए भी मां लक्ष्मी की आराधना अत्यंत फलदायी मानी गई है। हालांकि पूजा का पूरा फल तभी प्राप्त होता है जब उसे नियमों का पालन करते हुए श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाए।

    पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करना अत्यंत आवश्यक माना गया है क्योंकि मां लक्ष्मी स्वच्छता और पवित्रता को सबसे अधिक पसंद करती हैं। स्नान करने के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर लाल या पीले रंग का स्वच्छ वस्त्र बिछाकर उस पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद कलश स्थापित करें और उसमें स्वच्छ जल आम के पत्ते तथा नारियल रखें। कलश स्थापना को शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

    पूजा के दौरान सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें क्योंकि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत विघ्नहर्ता गणपति की पूजा से ही होती है। इसके बाद माता लक्ष्मी को कुमकुम हल्दी अक्षत पुष्प कमल का फूल यदि उपलब्ध हो तो अर्पित करें। मां को लाल वस्त्र श्रृंगार सामग्री और सुगंधित पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। भोग में खीर बताशे मिश्री फल नारियल और मिठाई चढ़ाई जा सकती है। घी का दीपक जलाकर धूप अर्पित करें और पूरे मन से श्री लक्ष्मी मंत्र तथा श्रीसूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।

    पूजा के समय मन में किसी प्रकार का क्रोध अहंकार या नकारात्मक विचार नहीं होना चाहिए। मान्यता है कि मां लक्ष्मी केवल उसी घर में स्थायी रूप से निवास करती हैं जहां प्रेम सद्भाव ईमानदारी और परिश्रम का सम्मान होता है। इसलिए पूजा के साथ अच्छे कर्म और सत्यनिष्ठ जीवन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना गया है। परिवार के सभी सदस्य यदि एक साथ आरती करें तो घर का वातावरण और अधिक सकारात्मक बनता है।

    पूजन के बाद माता लक्ष्मी की आरती करें और सभी सदस्यों में प्रसाद वितरित करें। यदि संभव हो तो जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या धन का दान भी करें। धर्मग्रंथों के अनुसार दान और सेवा से माता लक्ष्मी विशेष रूप से प्रसन्न होती हैं। साथ ही घर में तुलसी का पौधा लगाना प्रतिदिन दीपक जलाना और शाम के समय मुख्य द्वार पर दीप प्रज्ज्वलित करना भी शुभ माना जाता है।

    ध्यान रहे कि केवल पूजा करने से ही जीवन में सफलता नहीं मिलती बल्कि ईमानदारी मेहनत संयम और सकारात्मक सोच भी उतनी ही आवश्यक है। मां लक्ष्मी की कृपा उसी व्यक्ति पर बनी रहती है जो धर्म के मार्ग पर चलकर अपने कर्तव्यों का पालन करता है। इसलिए पूजा के साथ सदाचार और परिश्रम को भी जीवन का हिस्सा बनाएं। ऐसा करने से धन समृद्धि के साथ सुख शांति और सम्मान भी प्राप्त होता है तथा परिवार में हमेशा खुशहाली बनी रहती है।

  • दिन में ग्रहण और रात में जगमगाएगा आसमान, स्पेन के 10 आबादी वाले गांवों में दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा

    दिन में ग्रहण और रात में जगमगाएगा आसमान, स्पेन के 10 आबादी वाले गांवों में दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा


    नई दिल्ली।  12 अगस्त 2026 की शाम खगोल प्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाली है। स्पेन के बुर्गोस प्रांत में स्थित छोटे से गांव अवेलानेसा दे मुन्यो में एक ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना देखने को मिलेगी जो लंबे समय तक लोगों की यादों में बनी रह सकती है। महज करीब 10 स्थायी निवासियों वाले इस गांव में सूर्य ग्रहण और पर्सीड्स उल्का वर्षा का अनोखा संयोग देखने के लिए दुनिया भर से लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। सामान्य दिनों में शांत और लगभग अनजान रहने वाला यह गांव इस खास दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खगोल प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचने वाला है।

    इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात सूर्य ग्रहण का समय है। 12 अगस्त को स्पेन में पूर्ण सूर्य ग्रहण सूर्यास्त के ठीक पहले दिखाई देगा। जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढक लेगा तो कुछ समय के लिए दिन का उजाला अचानक कम होकर रात जैसा अंधेरा दिखाई देने लगेगा। इसके बाद ग्रहण समाप्त होने पर सूर्य की रोशनी वापस आएगी और कुछ ही देर बाद सूर्य सामान्य रूप से क्षितिज के नीचे चला जाएगा। इस कारण वहां मौजूद लोगों को एक ही शाम में दो अलग-अलग मौकों पर अंधेरा छाने का अनुभव हो सकता है। इसी प्रभाव को लोकप्रिय तौर पर डबल डार्कनेस कहा जा रहा है।

    यह खगोलीय रोमांच सूर्य ग्रहण तक सीमित नहीं रहेगा। रात होते ही आसमान में पर्सीड्स उल्का वर्षा का नजारा भी दिखाई दे सकता है। पर्सीड्स हर साल होने वाली प्रमुख उल्का वर्षाओं में शामिल है और अगस्त के दौरान इसकी गतिविधि अपने चरम के आसपास रहती है। जब अंतरिक्ष से आने वाले छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं तो घर्षण के कारण वे चमकदार लकीरों के रूप में दिखाई देते हैं। इन्हें आम बोलचाल में टूटते तारे कहा जाता है। एक ही दिन सूर्य ग्रहण और रात में उल्का वर्षा का नजारा इस आयोजन को और खास बना रहा है।

    अवेलानेसा दे मुन्यो की भौगोलिक स्थिति भी इसे इस घटना के लिए महत्वपूर्ण बनाती है। गांव के आसपास खुले गेहूं के खेत और पहाड़ी क्षेत्र हैं जहां पश्चिमी क्षितिज का विस्तृत दृश्य देखा जा सकता है। यहां शहरों जैसी तेज कृत्रिम रोशनी भी नहीं है। यही वजह है कि रात के समय आसमान में दिखाई देने वाले तारों और उल्काओं को देखने के लिए यह जगह अनुकूल मानी जा रही है।

    इस दुर्लभ नजारे ने स्थानीय लोगों में भी उत्साह पैदा कर दिया है। गांव छोड़कर वर्षों पहले शहरों में बस चुके कई पुराने निवासी भी इस खास अवसर पर वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर पर्यटकों के लिए देखने की जगहों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। गांव में बड़े होटल और रेस्टोरेंट सीमित हैं लेकिन आसपास के कई ठहरने वाले स्थान पहले से ही बुक बताए जा रहे हैं। ऐसे में 12 अगस्त को यह छोटा सा गांव खगोल विज्ञान के प्रति उत्साही लोगों और पर्यटकों की बड़ी भीड़ का गवाह बन सकता है।

    यह आयोजन एक बार फिर दिखाता है कि ब्रह्मांड से जुड़ी घटनाएं किस तरह किसी छोटे और शांत स्थान को भी अचानक दुनिया के आकर्षण का केंद्र बना सकती हैं। सूर्य ग्रहण का अंधेरा और उसके बाद तारों से भरा आसमान इस गांव के लिए प्रकृति की ऐसी अनोखी प्रस्तुति बनने जा रहा है जिसे देखने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

  • माता लक्ष्मी की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग जानिए वे नियम और उपाय जो भर देंगे जीवन में धन वैभव और खुशहाली

    माता लक्ष्मी की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग जानिए वे नियम और उपाय जो भर देंगे जीवन में धन वैभव और खुशहाली


    नई दिल्ली। सनातन धर्म में माता लक्ष्मी को धन समृद्धि ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जिन लोगों पर माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है उनके जीवन में आर्थिक स्थिरता सुख शांति और खुशहाली का वास होता है। हालांकि केवल पूजा करने से ही मां लक्ष्मी प्रसन्न नहीं होतीं बल्कि जीवन में अच्छे आचरण स्वच्छता ईमानदारी और परिश्रम का भी विशेष महत्व माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के कई नियम और उपाय बताए गए हैं जिन्हें श्रद्धा और विश्वास के साथ अपनाने से सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।

    माता लक्ष्मी को स्वच्छता अत्यंत प्रिय मानी जाती है इसलिए घर और विशेष रूप से पूजा स्थल को हमेशा साफ सुथरा रखना चाहिए। सुबह और शाम घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सुख समृद्धि का प्रवेश होता है। घर में अनावश्यक गंदगी टूटे हुए सामान और अव्यवस्था रखने से बचना चाहिए क्योंकि ऐसी स्थिति को लक्ष्मी आगमन में बाधक माना गया है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी की पूजा के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए। उन्हें कमल का फूल लाल पुष्प खीर मिश्री नारियल और सुगंधित प्रसाद अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा के दौरान श्रीसूक्त लक्ष्मी चालीसा या श्री महालक्ष्मी मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मानसिक शांति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।

    दान और सेवा को भी माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। जरूरतमंद लोगों को अन्न वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहायता देने से पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी आय का एक हिस्सा परोपकार में लगाता है उसके जीवन में कभी धन की कमी नहीं रहती। इसके साथ ही माता पिता और बुजुर्गों का सम्मान करना तथा अतिथि का आदर करना भी लक्ष्मी कृपा का कारण माना गया है।

    जीवन में सत्य ईमानदारी और परिश्रम का पालन करना भी अत्यंत आवश्यक है। गलत तरीके से कमाया गया धन कभी स्थायी सुख नहीं देता जबकि मेहनत और ईमानदारी से अर्जित धन में बरकत बनी रहती है। इसलिए व्यापार नौकरी या किसी भी कार्य में नैतिकता का पालन करना चाहिए। क्रोध अहंकार लालच और छल कपट जैसी बुरी आदतों से दूर रहने की सलाह भी शास्त्रों में दी गई है क्योंकि ये गुण लक्ष्मी कृपा को कम कर सकते हैं।

    तुलसी का पौधा घर में लगाना और प्रतिदिन उसकी पूजा करना भी शुभ माना जाता है। इसी प्रकार शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाने की परंपरा आज भी कई घरों में निभाई जाती है। मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम और सौहार्द बना रहता है।

    ध्यान रखने योग्य बात यह है कि माता लक्ष्मी की कृपा केवल धन तक सीमित नहीं होती बल्कि वह सुख शांति संतोष और सम्मान का भी आशीर्वाद देती हैं। इसलिए केवल धन प्राप्ति की इच्छा से नहीं बल्कि सच्चे मन और पवित्र भाव से उनकी आराधना करनी चाहिए। जब पूजा के साथ अच्छे कर्म अनुशासित जीवन और दूसरों के प्रति सम्मान जुड़ जाता है तब व्यक्ति के जीवन में वास्तविक समृद्धि का मार्ग खुलता है और परिवार में खुशहाली का वातावरण बना रहता है।