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  • कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

    कृषि बजट में 90 हजार करोड़ का प्रावधान, किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है सरकार : उप मुख्यमंत्री देवड़ा


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो किसानों के कल्याण और कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा मंगलवार को नीमच जिले के जावद में मंडी प्रांगण में आयोजित चार दिवसीय जहर मुक्त जीरो बजट कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे वर्ष कृषि और किसानों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों और नई पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।उपमुख्यमंत्रीदेवड़ा ने किसानों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने जो भी नई तकनीकें और अनुभव प्राप्त किए हैं, उन्हें अपनी खेती में लागू करें ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और कम लागत वाली खेती की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।

    उपमुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि आयुष्मान भारत के माध्यम से गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक के नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है, वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है।

    देवड़ा ने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना अवश्य साकार होगा। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना करते हुए किसानों को आधुनिक तकनीक और ज्ञान के साथ खेती को और अधिक समृद्ध बनाने का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस अवसर पर विधायक ओमप्रकाश सखलेचा, दिलीप सिंह परिहार, अनिरूद्ध मारू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

  • मप्र विस अध्यक्ष ने 2047 के विकसित भारत के लिए युवा विधायकों को दिलाए पांच संकल्प

    मप्र विस अध्यक्ष ने 2047 के विकसित भारत के लिए युवा विधायकों को दिलाए पांच संकल्प


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार हो सकता है, जब हमारे युवा विधायक अपने कर्तव्यों का निष्ठा और दूरदर्शिता के साथ पालन करें। इस तथ्य को रेखांकित करते हुए मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के दो दिवसीय युवा विधायक सम्मेलन (राष्ट्रकुल संसदीय संघ भारत क्षेत्र जोन-6) के अंतिम सत्र में मंगलवार को विस अध्यक्ष ने युवा विधायकों को पांच संकल्प दिलाए।

    विधान सभा अध्यक्ष तोमर ने युवा विधायकों को संकल्प दिलाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकसित भारत 2047 का विजन केवल सरकार का नहीं बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का संकल्प है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए नागरिकों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। सम्मेलन में लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी एवं विकसित भारत 2047 में विधायकों की भूमिका पर विचार व्यक्त किये गये। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने के लिए युवा विधायकों को समसामयिक परिस्थितियों में देश के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना होगा। नेतृत्व विकास के लिए सकारात्मक सोच और अनुशासन से कार्य करना होगा।

    उन्होंने कहा कि युवा विधायक चुनौतियों का समाधान कर अपनी नेतृत्व क्षमता का नवाचार में उपयोग करें। युवा नेतृत्व समाज की सोच में परिवर्तन ला सकता है। सुशासन के क्षेत्र में प्रयास हों और विकास को जनआंदोलन बनाया जाये। लोकतंत्र की मजबूती के लिए नागरिकों का जागरूक होना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि युवा विधायकों ने टेक्नोलॉजी, स्वच्छता, सोलर एनर्जी, शिक्षा गुणवत्ता, अधोसंरचना, जनसंवाद और जनकल्याण पर विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने युवा विधायकों को सीख दी कि अध्ययन का विशेष महत्व होता है और विद्यार्थी भाव सदैव बना रहना चाहिए।


    युवा विधायकों के पांच संकल्प

    संकल्प–1: हम, युवा विधायक सम्मेलन में यह दृढ संकल्प लेते है कि लोकतंत्र की सशक्तता का मूल आधार नागरिकों की सक्रिय भागीदारी है। अत: एक मजबूत और समावेशी लोकतंत्र के निर्माण में हम युवा विधायक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेंगे।

    संकल्प–2: हम, युवा विधायक समाज की नई ऊर्जा, नवाचार और परिवर्तन की सोच का प्रतिनिधित्व करते हुये नागरिकों और शासन के बीच सेतु का कार्य करेगे, हम जनसरोकारों को समझकर आम जनता की समस्याओं को विधानसभा तक पहुँचायेंगे तथा पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी नीतियों के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभायेंगे ताकि लोकतांत्रिक संस्थायें जनता के प्रति उत्तरदायी हो सके।

    संकल्प–3: हम, नागरिकों को जागरूक और सशक्त बनाने हेतु सतत्/सार्थक प्रयास करेंगे ताकि वे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लें. तकनीक और नवाचार का उपयोग कर शासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दीर्घकालिक नीतियाँ बनाने एवं युवाओं, महिलाओं और वंचित वर्गों की आवाज़ को सशक्त बनाने हेतु सक्रिय भूमिका निभायेंगे जिससे जनता और उनकी विधायिकाओं के बीच प्रभावी संपर्क स्थापित हो सके तथा सार्थक सहभागी शासन सुनिश्चित किया जा सके।

    संकल्प–4: हम युवा विधायक, राजनीतिक दबाव, संसाधनों की कमी, सामाजिक असमानताएँ और बदलती वैश्विक परिस्थितियों का सामना करते हुये ईमानदारी, प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता के साथ कार्य करने के लिये दृढ संकल्पित रहेंगे, ताकि हमारे राष्ट्र की लोकतांत्रिक परम्परायें और मूल्य और अधिक गहरे तथा सशक्त बन सके।

    संकल्प–5: हम यह भी संकल्प लेते हैं कि हम स्वयं भी एक जागरूक नागरिक बनेंगे, विधायिकाओं में होने वाली बहसों और चर्चाओं में जनप्रतिनिधियों की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु शोध एवं अनुसंधान सहायता को सुदृढ करेंगे. लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय भागीदारी निभाएँगे और ऐसे नेतृत्व का समर्थन करेंगे जो देश को विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ाए।

  • हनुमान जयंती 2026: कौन हैं 7 चिरंजीवी? क्या आज भी धरती पर मौजूद हैं ये अमर योद्धा

    हनुमान जयंती 2026: कौन हैं 7 चिरंजीवी? क्या आज भी धरती पर मौजूद हैं ये अमर योद्धा

    नई दिल्ली । हनुमान जयंती का पावन पर्व 2026 में 2 अप्रैल को मनाया जाएगा। यह दिन केवल भगवान हनुमान की भक्ति का ही नहीं, बल्कि उनकी अमरता और चिरंजीवी होने की मान्यता को भी स्मरण करने का अवसर होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों में ऐसे सात महापुरुषों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें चिरंजीवी यानी अमर माना गया है और जिनके बारे में विश्वास है कि वे आज भी किसी न किसी रूप में धरती पर मौजूद हैं।

    कौन हैं 7 चिरंजीवी

    धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण, महाभारत और विष्णु पुराण में जिन सात चिरंजीवियों का उल्लेख मिलता है, वे हैं हनुमान, अश्वत्थामा, विभीषण, कृपाचार्य, राजा महाबली, वेद व्यास और परशुराम। इन सभी को अलग-अलग कारणों से अमरत्व का वरदान मिला और माना जाता है कि ये धर्म की रक्षा और संतुलन बनाए रखने के लिए आज भी सक्रिय हैं।

    हनुमान जी: भक्ति और शक्ति का प्रतीक

    हनुमान को भगवान राम का परम भक्त माना जाता है। उनकी निष्ठा, शक्ति और सेवा भाव से प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद मिला। मान्यता है कि वे आज भी अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और संकट में उनकी मदद करते हैं।

    अश्वत्थामा: अमरता जो बन गई श्राप

    अश्वत्थामा महाभारत के एक शक्तिशाली योद्धा थे, लेकिन उन्हें मिला अमरत्व एक श्राप बन गया। भगवान कृष्ण के श्राप के अनुसार वे कलियुग के अंत तक पृथ्वी पर भटकते रहेंगे।

    राजा महाबली: दान और भक्ति का प्रतीक

    राजा महाबली को उनकी दानशीलता के लिए जाना जाता है। भगवान विष्णु के वामन अवतार ने उनकी परीक्षा ली और प्रसन्न होकर उन्हें अमरत्व का वरदान दिया। केरल का ओणम पर्व उन्हीं की स्मृति में मनाया जाता है।

    वेद व्यास: ज्ञान के अमर स्रोत
    वेद व्यास को महाभारत का रचयिता माना जाता है। उन्होंने वेदों को व्यवस्थित किया और उन्हें अमर ज्ञान का प्रतीक माना जाता है।

    विभीषण: धर्म का साथ चुनने वाला

    विभीषण ने अपने भाई रावण के खिलाफ जाकर धर्म का साथ दिया। भगवान राम ने उन्हें लंका का राजा बनाकर अमरत्व का आशीर्वाद दिया।

    कृपाचार्य: ज्ञान और निष्ठा के प्रतीक

    कृपाचार्य महाभारत काल के महान गुरु थे, जिन्हें उनकी विद्वता और निष्ठा के कारण चिरंजीवी माना जाता है।

    परशुराम: विष्णु के अवतार

    परशुराम भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं। कहा जाता है कि वे कलियुग में कल्कि के गुरु बनेंगे और धर्म की स्थापना में मदद करेंगे।

    क्या आज भी मौजूद हैं ये चिरंजीवी?

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये सभी चिरंजीवी आज भी किसी न किसी रूप में धरती पर मौजूद हैं। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन आस्था के स्तर पर लोग इन्हें धर्म और सत्य की रक्षा करने वाला मानते हैं।

    कहा जाता है कि कलियुग के अंत में ये सभी एक साथ प्रकट होंगे और भगवान विष्णु के अंतिम अवतार कल्कि के साथ मिलकर अधर्म का नाश करेंगे।

    कुल मिलाकर, 7 चिरंजीवियों की ये कथाएं केवल रहस्य ही नहीं, बल्कि भक्ति, सत्य, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने का गहरा संदेश भी देती हैं।

  • वैशाख मास 2026: पुण्य कमाने का सुनहरा अवसर, क्या करें और क्या न करें

    वैशाख मास 2026: पुण्य कमाने का सुनहरा अवसर, क्या करें और क्या न करें


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में वैशाख का महीना अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। यह महीना धार्मिक, आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वैशाख मास की शुरुआत 3 अप्रैल से हो रही है और यह 1 मई तक रहेगा। वैशाख मास का प्रारंभ चैत्र पूर्णिमा के अगले दिन यानी प्रतिपदा तिथि से होता है।

    मान्यता है कि इस पूरे महीने में किए गए स्नान, दान और पूजा-पाठ से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि वैशाख में प्रातःकाल स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दौरान सूर्य का मेष राशि में प्रवेश भी होता है, जिससे मौसम में गर्मी बढ़ती है और इसी कारण इस माह के नियम स्वास्थ्य से भी जुड़े हुए हैं।

    वैशाख माह में क्या करें

    वैशाख मास में जल दान का विशेष महत्व है। इस दौरान घड़े में पानी भरकर दान करना या सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगवाना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इसके साथ ही अन्न दान भी श्रेष्ठ माना गया है, जिसमें सत्तू, खरबूजा और अन्य खाद्य सामग्री का दान किया जाता है। गर्मी को ध्यान में रखते हुए पंखा, छाता और चप्पल दान करने की भी परंपरा है।

    इस महीने भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। प्रतिदिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। साथ ही माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

    वैशाख में तुलसी की पूजा करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है, क्योंकि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। इसके अलावा रोजाना सूर्य देव को जल अर्पित करना और संभव हो तो गंगा नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो घर पर स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है।

    वैशाख माह में क्या न करें

    इस पवित्र महीने में तामसिक भोजन से परहेज करना चाहिए। मांस, मदिरा और भारी भोजन से दूरी बनाना बेहतर माना जाता है। इसके साथ ही दिन में सोने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे स्वास्थ्य और भाग्य दोनों के लिए अशुभ माना गया है।

    जल की बर्बादी से भी विशेष रूप से बचना चाहिए, क्योंकि वैशाख में जल का महत्व और बढ़ जाता है। इसके अलावा इस महीने तेल की मालिश करना भी वर्जित माना गया है।

    कुल मिलाकर, वैशाख मास आध्यात्मिक उन्नति, पुण्य अर्जन और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दौरान किए गए छोटे-छोटे धार्मिक कार्य भी जीवन में बड़े सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

  • बिहार: नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ हादसे में 9 की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

    बिहार: नालंदा के शीतला माता मंदिर में हुई भगदड़ हादसे में 9 की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल


    नालंदा । बिहार के नालंदा जिले में मंगलवार सुबह शीतला माता मंदिर में भगदड़ मचने से बड़ा हादसा हो गया। इस घटना में 9 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 8 महिलाएं शामिल हैं। महिलाओं की मौके पर ही भीड़ में दबने से मौत हो गई, जबकि एक पुरुष ने अस्पताल में दम तोड़ा।

    चैत्र के आखिरी मंगलवार पर उमड़ी भारी भीड़

    चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार के अवसर पर मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। मंदिर परिसर में मेला भी लगा हुआ था, जिससे भीड़ और अधिक बढ़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भीड़ को संभालने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। दर्शन की जल्दी में लोगों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई, जिससे अफरातफरी मच गई और कई लोग भीड़ में दब गए। हादसे में कई लोग घायल भी हुए हैं।

    सुरक्षा इंतजामों की भारी कमी

    हादसे के समय मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर थी। बताया गया कि लगभग 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद वहां पुलिस की पर्याप्त तैनाती नहीं थी। इसी दिन नालंदा यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के दौरे को लेकर 8 जिलों के करीब 2500 जवान तैनात किए गए थे, जबकि मंदिर परिसर में सुरक्षा के इंतजाम बेहद कमजोर रहे।

    हादसे के बाद प्रशासनिक कार्रवाई

    घटना के बाद मंदिर और मेले को बंद करा दिया गया है। पटना कमिश्नर को बिहार शरीफ भेजा गया है और मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को जांच के निर्देश दिए हैं। दीपनगर थाने के SHO राजमणि को निलंबित कर दिया गया है।

    मुआवजे की घोषणा
    राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 6 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं केंद्र सरकार ने भी 2 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया है।

    DGP ने मानी व्यवस्था में कमी

    नालंदा पहुंचे DGP विनय कुमार ने स्वीकार किया कि मंदिर परिसर में कई कमियां थीं। उन्होंने कहा कि वहां पुलिस बल की तैनाती जरूरी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। भीड़ अधिक होने, मंदिर परिसर छोटा होने और लोगों में पहले दर्शन करने की होड़ के कारण हालात बिगड़ गए। लोग कतार में लगने के बजाय आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिससे भगदड़ मच गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई पूरी घटना
    महिला श्रद्धालुओं के अनुसार, चैत्र के आखिरी मंगलवार के कारण भीड़ काफी अधिक थी। मंदिर का गर्भगृह छोटा होने के चलते लोग जल्दी दर्शन के लिए एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश कर रहे थे। एक अन्य श्रद्धालु ने बताया कि मंदिर में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न तो पुलिस मौजूद थी और न ही कोई उचित व्यवस्था की गई थी। इसी दौरान एक महिला को चक्कर आया और वह गिर पड़ी, जिसके बाद भगदड़ की स्थिति बन गई।

    हादसे के पीछे तीन बड़ी लापरवाहियां

    1. प्रबंधन की तैयारी नहीं
    हर साल इस दिन भारी भीड़ उमड़ती है, इसके बावजूद मंदिर प्रबंधन ने भीड़ नियंत्रण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। बैरिकेडिंग तक नहीं की गई थी।

    2. पीछे के रास्ते से दर्शन

    कुछ लोगों को पैसे लेकर पीछे के दरवाजे से दर्शन कराए जा रहे थे, जिससे अव्यवस्था और नाराजगी बढ़ी।

    3. पुलिस-प्रशासन की गैरमौजूदगी

    करीब 25 हजार श्रद्धालुओं की भीड़ के बावजूद पुलिस या प्रशासन की पर्याप्त मौजूदगी नहीं थी। मेले की पूर्व जानकारी के बावजूद कोई मजिस्ट्रेट तैनात नहीं किया गया था।

  • OTT से लेकर सिनेमाघर तक, इस हफ्ते रिलीज होगी कई फिल्में और सीरीज

    OTT से लेकर सिनेमाघर तक, इस हफ्ते रिलीज होगी कई फिल्में और सीरीज


    नई दिल्ली साल की शुरुआत से ही सिनेमाघर और OTT पर कई फ़िल्में और सीरीज दस्तक दे चुकी है, जिन्होंने दर्शकों के बीच अपनी एक अलग पहचान बना ली है। वहीं अब अप्रैल की शुरुआत में भी कई फ़िल्में और सीरीज आने को तैयार हैं। तो चलिए उनके बारे में बात करते हैं कि इस हफ्ते क्या-क्या देखने को मिलेगा उसकी लिस्ट जानते हैं।

    ईट प्रे बार्क
    हॉलीवुड सिनेमा का प्रतिनिधित्व करते हुए, फ़िल्म ईट प्रे बार्क इस हफ़्ते OTT प्लेटफ़ॉर्म पर एक नई पेशकश के तौर पर रिलीज़ होने वाली है। इस डार्क कॉमेडी को आप 1 अप्रैल से OTT प्लेटफ़ॉर्म Netflix पर अपने घर बैठे आराम से देख सकते हैं।

    चिरंजीवी हनुमान
    पिछले साल की एनिमेटेड फ़िल्म नरसिम्हा ने सिनेमाघरों में काफी अच्छा खासा कलेक्शन किया था। उसकी सफलता के बाद, फ़िल्म इंडस्ट्री में इस जॉनर की फ़िल्मों का चलन काफ़ी बढ़ गया है। अब, AI टेक्नोलॉजी की मदद से, चिरंजीववी हनुमान नाम की एक एनिमेटेड फ़िल्म बनाई गई है; यह इस हफ़्ते सिनेमाघरों में रिलीज़ होने वाली एकमात्र फ़िल्म है, जो 2 अप्रैल, 2026 को आ रही है।

    भाबीजी घर पर हैं: फ़न ऑन द रन
    TV सीरियल के तौर पर चलने के बाद, भाबीजी घर पर हैं हाल ही में सिनेमाघरों में फ़ीचर-फ़िल्म के रूप में रिलीज़ हुई थी। हालाँकि, यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर ज़्यादा सफल नहीं रही। अब ये फिल्म OTT पर दस्तक देने को तैयार हैं।फ़िल्म 3 अप्रैल, 2026 को OTT प्लेटफ़ॉर्म ZEE5 पर स्ट्रीम होने के लिए तैयार है।

    वध 2
    अपराध थ्रिलर फ़िल्म वध-जिसमें अभिनेता संजय मिश्रा और नीना गुप्ता ने अभिनय किया था-की सफलता के बाद, इसका सीक्वल, वध 2, पिछले फ़रवरी में बड़े पर्दे पर रिलीज़ हुआ था। अब, यह फ़िल्म OTT प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी शुरुआत करने के लिए तैयार है। यह फ़िल्म 3 अप्रैल को Netflix पर स्ट्रीम होगी।

  • जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई: कलेक्टर बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता की समस्याओं पर त्वरित कार्रवाई: कलेक्टर बोले- लापरवाही बर्दाश्त नहीं


    बैतूल । मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि आम जनता से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि शिकायतों के निराकरण में ढिलाई पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, जिसमें निलंबन जैसे कदम भी शामिल हैं।

    मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में नागरिक अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कलेक्टर ने स्वयं सभी आवेदनों को गंभीरता से सुना और कई मामलों का मौके पर ही समाधान कराया। जिन प्रकरणों का तत्काल निराकरण संभव नहीं था, उनके लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई, ताकि शिकायतों का जल्द निपटारा हो सके।

    इस जनसुनवाई में कुल 83 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें सबसे अधिक मामले राजस्व, अतिक्रमण, रास्ते के विवाद और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े थे। कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्राथमिकता के आधार पर इन मामलों का समाधान सुनिश्चित करें और लंबित प्रकरणों की नियमित समीक्षा करें।

    जनसुनवाई के दौरान कुछ मामलों में लापरवाही सामने आने पर कलेक्टर ने नाराजगी जाहिर की और संबंधित पटवारी के निलंबन के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करना गंभीर लापरवाही है और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

    कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि वे क्षेत्र में सक्रिय रहकर समस्याओं का समाधान करें, ताकि लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम है। कुल मिलाकर, बैतूल में आयोजित इस जनसुनवाई ने प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने का संदेश दिया है, जहां लापरवाही पर सख्ती और त्वरित समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है।

  • बालों में डैंड्रफ? जानें कारण और बचाव के आसान तरीके

    बालों में डैंड्रफ? जानें कारण और बचाव के आसान तरीके

    नई दिल्ली। अगर आपको बार-बार डैंड्रफ का सामना करना पड़ रहा है। इसके कारण काफी आप परेशान हो गई हैं तब हम आपके लिए कुछ खास टिप्स लेकर आए हैं जिसे अपनाकर आप इसे ठीक कर सकती हैं। इसके साथ ही आपको कुछ बातों पर विशेष ध्यान रखना होगा उसे बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं करना होगा वरना यह काफी बढ़ सकता है।कई लोग इससे छुटकारा पाने के लिए महंगे शैंपू, हेयर प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं जबकि आपको इससे जुड़ी सारी बातों पर विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    क्यों बढ़ता है डैंड्रफ
    बार-बार होने वाला डैंड्रफ शरीर या स्कैल्प में किसी अंदरूनी गड़बड़ी का संकेत भी हो सकता है। अगर आपको ऐसी बार-बार समस्या हो रही है तब आपको इस पर बहुत अच्छे से विचार करना चाहिए इसे बिल्कुल भी नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। वरना आगे जाकर यह समस्या काफी ज्यादा आपको परेशान कर सकती है।

    स्कैल्प का ड्राई होना
    डैंड्रफ का सबसे कॉमन कारण होता है जब आपका स्कैल्प सूखा होता है। जब सिर की स्किन में नमी की कमी हो जाती है, तो ऊपरी परत सूखकर झड़ने लगती है और सफेद परत के रूप में दिखाई देती है।

    स्कैल्प में ऑयल और गंदगी का जमा होना
    अगर बालों की रेगुलर सफाई नहीं की जाती, तो स्कैल्प पर तेल, धूल और गंदगी जमा होने लगती है। यह स्थिति बैक्टीरिया और फंगस के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बनाती है, जिससे डैंड्रफ तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए आपको इन सब चीजों पर ध्यान रखना चाहिए।

    गलत हेयर प्रोडक्ट्स
    ऐसे शैंपू या हेयर प्रोडक्ट्स जो आपके स्कैल्प के अनुकूल नहीं होते, वे समस्या को और बढ़ा सकते हैं। ज्यादा केमिकल वाले प्रोडक्ट्स स्कैल्प को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए आपको बार-बार अपने शैंपू को नहीं बदलना चाहिए। इन सबका अगर आप अच्छे से ध्यान रखेंगी तो आपको काफी फायदा होगा।

  • घर पर ही पार्लर जैसा Pedicure, पैर होंगे मुलायम और चमकदार

    घर पर ही पार्लर जैसा Pedicure, पैर होंगे मुलायम और चमकदार


    नई दिल्ली  आज के समय में पार्लर जाना सबसे बड़ा खर्च समझ में आता है। पार्लर जाने का मतलब आप घर से बाहर निकलो फिर धूप हो या ठंड। फिर पार्लर में बैठकर काफी टाइम बिताओ और ऊपर से पार्लर के इतने सारे खर्चे होते हैं कि आपको काफी ज्यादा सेविंग करना पड़ता है तब जाकर वह सारी चीजें हो पाती है। लेकिन अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। अगर आप अपने पैरों को खूबसूरत बनाना चाहती हैं और टैनिंग को दूर करना चाहती हैं। तो किसी भी वीकेंड पर आप घर पर पार्लर जैसा पेडिक्योर कर सकती हैं।

    बस करें ये काम
    महिलाएं अपने पैरों को खूबसूरत बनाने के लिए पार्लर में जाकर पेडिक्योर करवाती हैं। इसका जेब खर्च पर भी असर दिखने लगता है। अगर आप भी घर पर पेडिक्योर करने की सोच रही हैं। तो चलिए इसके बारे में सारी जानकारी आपको देते हैं।

    इस प्रकार पैरों को बनाए खूबसूरत
    घर पर पेडिक्योर करने के लिए एक टब में हल्का गर्म पानी लें।जब तक पानी गर्म हो, तब तक अगर आपके पैरों में नेलपेंट लगी है, तो इसको रिमूव कर दें।फिर हल्के गुनगुने पानी में थोड़ा बेकिंग सोडा, शैंपू, आधा चम्मच नमक और थोड़ा सा नींबू का रस मिक्स करें।इसमें एप्पल साइडर विनेगर भी मिला लें।फिर पैरों को 30 मिनट तक पानी में रखें।अब हल्के हाथों से पैरों की मसाज करें।स्क्रब का इस्तेमाल करके पैरों की मसाज कर सकती हैं। मसाज के दौरान नाखून, एड़ी और तलवों की सफाई करें।अच्छे से सफाई के बाद अपने पैरों को दूसरे टब में रखें औऱ साफ पानी से पैरों को धो लें।

    पैरों को साफ पानी से धो लें और इनको साफ कपड़े से पोंछकर सुखा लें।आप चाहें तो किसी खास तेल की मदद से पैरों की मसाज भी कर सकती हैं।इसके बाद नाखूनों को शेप में काटकर नेलपेंट लगाएं।नेलपेंट लगने के बाद आप पैरों पर अच्छी फुट क्रीम या लोशन लगा सकती हैं।

  • युवा विधायक सम्मेलन में गरजे हेमंत कटारे: खाते में पैसे डालना नहीं, रोजगार देना ही सशक्तिकरण

    युवा विधायक सम्मेलन में गरजे हेमंत कटारे: खाते में पैसे डालना नहीं, रोजगार देना ही सशक्तिकरण


    भोपाल । भोपाल में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने फ्रीबीज यानी मुफ्त योजनाओं को लेकर बड़ा और विवादित बयान दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि महिलाओं के खातों में सीधे पैसे डालना सशक्तिकरण नहीं है बल्कि यह विकसित भारत के लक्ष्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

    कटारे ने मंच से कहा कि आज जनप्रतिनिधि सच बोलने से डरते हैं। वे इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि उनके बयान से कोई वर्ग नाराज न हो जाए लेकिन इस डर के कारण देशहित के मुद्दों पर खुलकर चर्चा नहीं हो पाती। उन्होंने कहा कि अगर हम नाराजगी के डर से ही घबराते रहेंगे तो देश की सेवा कैसे करेंगे।

    महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल खातों में 10 हजार रुपये डाल देने से महिलाएं सशक्त नहीं हो जातीं। हर महिला में अपनी क्षमता और कौशल होता है जिसे विकसित कर उसे आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यदि युवाओं को सशक्त बनाना है तो उन्हें रोजगार देना होगा न कि मुफ्त पैसा।

    कटारे ने अपने तर्क को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जब लोगों की जरूरतें बिना काम किए ही पूरी होने लगती हैं तो उनके अंदर काम करने की प्रेरणा कम हो जाती है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है लेकिन यदि आवश्यकताएं ही समाप्त कर दी जाएं तो नवाचार और कौशल विकास कैसे होगा।

    सरकारों को सुझाव देते हुए उन्होंने कहा कि यदि आर्थिक सहायता देनी ही है तो उसे शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में दिया जाना चाहिए। गरीबों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा और जरूरतमंदों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराना ज्यादा प्रभावी कदम होगा बजाय इसके कि सीधे नकद राशि बांटी जाए।

    इस दौरान हेमंत कटारे ने अफसरशाही और न्यायपालिका की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि देश में ब्यूरोक्रेसी की जवाबदेही तय नहीं है जबकि जनप्रतिनिधियों को हर पांच साल में जनता के सामने जवाब देना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि अधिकारियों और न्यायपालिका की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

    अपने संबोधन के अंत में उन्होंने युवा विधायकों को नसीहत देते हुए कहा कि कोई भी बयान देने से पहले यह जरूर सोचें कि वह देश और जनता के हित में है या नहीं। उन्होंने कहा कि जनता ने जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी है इसलिए उनके हर फैसले और बयान में जनहित सर्वोपरि होना चाहिए।

    कुल मिलाकर हेमंत कटारे का यह बयान फ्रीबीज और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर चल रही राष्ट्रीय बहस को और तेज कर सकता है जिसमें विकास और सामाजिक सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं।