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  • टाटा ट्रस्ट्स में नोएल परिवार का दबदबा…. क्या चंद्रशेखरन को मिलेगा तीसरा कार्यकाल?

    टाटा ट्रस्ट्स में नोएल परिवार का दबदबा…. क्या चंद्रशेखरन को मिलेगा तीसरा कार्यकाल?


    नई दिल्ली।
    टाटा समूह (Tata Group) की होल्डिंग कंपनी टाटा संस (Tata Sons Holding company) की संभावित वार्षिक आम बैठक से पहले शेयरधारक ट्रस्टों (Shareholder trusts) के भीतर वोटिंग का अंकगणित चर्चा में है। इस बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन (Chairman N. Chandrasekaran) को एक और कार्यकाल दिए जाने पर फैसला होना है।

    चंद्रशेखरन का कार्यकाल सामान्य रूप से 20 फरवरी, 2027 को समाप्त होगा। हालांकि, कंपनी बोर्ड ने 17 सितंबर की एक हंगामेदार बैठक में उन्हें तीसरा कार्यकाल देने का प्रस्ताव पारित कर दिया था, लेकिन अब इसका अंतिम फैसला शेयरधारक ट्रस्टों के हाथ में है। सूत्रों के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के अधीन आने वाले 7 ट्रस्टों की संरचना बताती है कि नोएल टाटा और उनके परिवार का प्रभाव बेहद मजबूत हो चुका है। इन ट्रस्टों में कुल 36 ट्रस्टी पद हैं। इनमें से 17 पदों पर अकेले नोएल टाटा और उनके परिवार (बेटे नेविल, बेटियां लीया और माया) का कब्जा है। रतन टाटा के निधन से कुछ महीने पहले मई 2024 में लीया और माया को तीन-तीन ट्रस्टों में शामिल किया गया था।

    किस ट्रस्ट में क्या है नोएल परिवार की ताकत
    सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (एसडीटीटी) : टाटा संस में 27.98% हिस्सेदारी वाले इस सबसे बड़े ट्रस्ट में कुल 6 में से 2 ट्रस्टी (33%) नोएल और उनके बेटे नेविल हैं।
    सर रतन टाटा ट्रस्ट (एसआरटीटी) : टाटा संस में 23.56% हिस्सेदारी। यह ट्रस्ट फिलहाल महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा कथित उल्लंघनों के कारण फ्रीज है।
    जेआरडी टाटा ट्रस्ट : टाटा संस में 4.01% हिस्सेदारी। नोएल और नेविल 50% हिस्सेदारी रखते हैं।
    टाटा एजुकेशन ट्रस्ट : टाटा संस में 3.73% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और माया मिलकर कुल 60% ताकत रखते हैं।
    टाटा सोशल वेलफेयर ट्रस्ट : टाटा संस में 3.73% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और नेविल का 60% दबदबा है।
    आरडी टाटा ट्रस्ट : नोएल, माया और नेविल की 50% हिस्सेदारी। अन्य ट्रस्टी विजय सिंह, श्रीनिवासन, तुषाद बी दुबाश हैं।
    सार्वजनिक सेवा ट्रस्ट : टाटा संस में 0.1% हिस्सेदारी। नोएल, लीया और माया 60% के मालिक हैं। अन्य ट्रस्टी जिमी टाटा और जेएन मिस्त्री हैं।

    शापूरजी पालोनजी ग्रुप और अन्य कंपनियों के 30% वोट भी अहम…
    एजीएम में केवल ट्रस्टों के वोट ही नहीं, बल्कि 18% से अधिक हिस्सेदारी रखने वाले शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप का रुख भी देखा जाएगा। नोएल टाटा का विवाह एसपी ग्रुप के परिवार में हुआ है। इसके अलावा टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा केमिकल्स और टाटा पावर के पास टाटा संस की करीब 12% हिस्सेदारी है।

  • Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर

    Share Market 6 October, बाजार ने बदला रुख लेकिन चुनौतियां बरकरार, निवेशकों की नजर अब इन बड़े संकेतों पर


    नई दिल्ली। 6 अक्टूबर को भारतीय शेयर बाजार की चाल पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। पिछले कारोबारी सत्र में बाजार ने लगातार चार दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ते हुए राहत की सांस ली। 5 अक्टूबर को सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 72 382.47 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 प्रतिशत चढ़कर 22 555.75 पर पहुंच गया। बाजार में इस सुधार को कई अहम संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

    इससे पहले भारतीय शेयर बाजार लगातार आठ सप्ताह की गिरावट झेल चुका था। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ऊंची बॉन्ड यील्ड महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये जैसे कारणों ने बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बनाया था। पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 3.10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी और यह लगातार आठवीं साप्ताहिक गिरावट थी। यह सिलसिला करीब 25 वर्षों में सबसे लंबा साप्ताहिक गिरावट का दौर बताया गया है।

    5 अक्टूबर की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अलग अलग सेक्टर में खरीदारी ने अहम भूमिका निभाई। बाजार खुलते समय वैश्विक संकेतों का भी असर देखने को मिला। निफ्टी शुरुआती कारोबार में 22 621.80 के स्तर तक पहुंचा लेकिन बाद में मुनाफावसूली के कारण इसमें दबाव आया। इसके बावजूद दूसरे कारोबारी सत्र में बाजार ने रिकवरी की और निफ्टी 22 500 के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

    निवेशकों के लिए 6 अक्टूबर को सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि बाजार पिछले सत्र की तेजी को आगे बढ़ा पाता है या नहीं। विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। सितंबर के अंतिम कारोबारी दिन विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में 10 148.41 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 11 271.73 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

    इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकते हैं। अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता को लेकर सामने आए संकेत भी निवेशकों के लिए अहम हैं। 5 अक्टूबर को शुरुआती तेजी के बाद बाजार में उस समय दबाव बढ़ा जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत अमेरिका व्यापार समझौते की बातचीत के फिलहाल एक ठहराव पर पहुंचने की बात कही। इसके बाद सेंसेक्स और निफ्टी ने अपनी शुरुआती बढ़त का एक हिस्सा गंवा दिया था।

    5 अक्टूबर के कारोबार में Tata Motors Passenger Vehicles ITC Bajaj Finance Shriram Finance और NTPC जैसे शेयर निफ्टी के प्रमुख बढ़ने वाले शेयरों में रहे। वहीं HCL Technologies Max Healthcare HDFC Bank Asian Paints और Apollo Hospitals जैसे शेयरों में दबाव देखा गया। व्यापक बाजार में भी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में करीब 0.5 प्रतिशत की बढ़त रही।

    ऐसे माहौल में 6 अक्टूबर को निवेशकों के लिए बाजार में तेजी देखकर जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय कंपनियों के नतीजे कारोबार की स्थिति वैश्विक संकेत और शेयर की वैल्यूएशन पर ध्यान देना जरूरी होगा। बाजार में उतार चढ़ाव अभी बना हुआ है इसलिए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखना बेहतर रहेगा। यह लेख निवेश सलाह नहीं है।

  • सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल

    सूर्यकुमार यादव को रणजी टीम में भी नहीं मिली जगह, उपलब्धता बताने के बाद चयन से बाहर होने पर उठे बड़े सवाल


    नई दिल्ली। सूर्यकुमार यादव के क्रिकेट करियर को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। टीम इंडिया से बाहर होने के बाद अब उन्हें मुंबई की रणजी ट्रॉफी टीम में भी जगह नहीं मिली है। खास बात यह है कि मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन की चयन बैठक से पहले सूर्यकुमार यादव से पूछा गया था कि क्या वह रणजी ट्रॉफी का मुकाबला खेलना चाहते हैं। बताया गया कि सूर्या ने इसके लिए अपनी सहमति भी जताई थी। इसके बावजूद जब मुंबई की टीम का ऐलान हुआ तो उनका नाम स्क्वॉड में नहीं था। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में नई चर्चा छेड़ दी है।

    मुंबई को रणजी ट्रॉफी 2026-27 सीजन का अपना पहला मुकाबला 11 अक्टूबर से वानखेड़े स्टेडियम में चंडीगढ़ के खिलाफ खेलना है। इस मुकाबले के लिए घोषित टीम की कप्तानी अनुभवी सिद्धेश लाड को सौंपी गई है जबकि युवा बल्लेबाज आयुष म्हात्रे को उपकप्तान बनाया गया है। टीम में यशस्वी जायसवाल मुशीर खान सरफराज खान सुवेद पारकर शम्स मुलानी तनुष कोटियन और तुषार देशपांडे जैसे खिलाड़ी शामिल हैं लेकिन सूर्यकुमार यादव का नाम नदारद है।

    मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के चयन प्रमुख राजेश पवार ने सूर्यकुमार यादव के चयन को लेकर वजह भी बताई है। उनके मुताबिक सूर्या ने पिछले करीब 18 महीनों से कोई रेड बॉल मुकाबला नहीं खेला है। चयनकर्ताओं का मानना है कि उन्हें पहले कुछ मैचों में खेलकर लंबे फॉर्मेट की लय हासिल करनी चाहिए। इसके बाद उन्हें टीम में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब चयनकर्ताओं ने खुद सूर्यकुमार से उनकी उपलब्धता को लेकर संपर्क किया था तो फिर उन्हें शुरुआती मुकाबले के लिए टीम में क्यों नहीं चुना गया।

    सूर्यकुमार यादव ने टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन किया है। वह टीम इंडिया की कप्तानी भी कर चुके हैं और टी20 विश्व कप में भारत की सफलता के दौरान उनकी भूमिका काफी अहम रही थी। ऐसे में रणजी टीम से बाहर होना उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा है। खासकर तब जब वह खुद रेड बॉल क्रिकेट में वापसी की इच्छा जाहिर कर चुके हैं।

    मुंबई की टीम के सामने इस सीजन की शुरुआत में एक और चुनौती भी है। पिछले सीजन में टीम की कप्तानी करने वाले शार्दुल ठाकुर शुरुआती मुकाबलों में उपलब्ध नहीं रहेंगे। ट्रेनिंग के दौरान उनकी दाहिने हाथ की बीच वाली उंगली में मामूली फ्रैक्चर हुआ है। माना जा रहा है कि वह कम से कम शुरुआती दो मैचों से बाहर रह सकते हैं।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सूर्यकुमार यादव रणजी क्रिकेट में वापसी के लिए किस तरह की तैयारी करते हैं और मुंबई के चयनकर्ता उन्हें अगले मुकाबलों में मौका देते हैं या नहीं। फिलहाल उनकी गैरमौजूदगी ने भारतीय क्रिकेट में उनके भविष्य को लेकर चर्चा जरूर तेज कर दी है।

  • घर में पैसा टिकाने के लिए जानिए वास्तु के खास नियम, तिजोरी से लेकर मुख्य द्वार तक इन बातों का रखें ध्यान

    घर में पैसा टिकाने के लिए जानिए वास्तु के खास नियम, तिजोरी से लेकर मुख्य द्वार तक इन बातों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में घर की दिशाओं और वहां रखी वस्तुओं का संबंध सकारात्मक ऊर्जा से बताया गया है। धार्मिक और वास्तु मान्यताओं के अनुसार घर में कुछ बातों का ध्यान रखने से सकारात्मक वातावरण बनाने में मदद मिल सकती है और आर्थिक समृद्धि के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो सकता है। अगर घर में बार बार धन की कमी बनी रहती है या पैसा आने के बाद जल्दी खर्च हो जाता है तो वास्तु से जुड़े कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। हालांकि इन्हें आस्था और पारंपरिक मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए।

    वास्तु के अनुसार घर की उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़ा जाता है। इस दिशा को साफ सुथरा और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। यहां अनावश्यक सामान कचरा या ऐसी चीजें नहीं रखनी चाहिए जिनका लंबे समय से इस्तेमाल नहीं हो रहा है। मान्यता है कि घर की उत्तर दिशा में सकारात्मक और खुला वातावरण आर्थिक प्रगति के लिए शुभ माना जाता है।

    घर की तिजोरी या धन रखने की जगह को लेकर भी वास्तु में विशेष नियम बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार तिजोरी का मुंह उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे धन की वृद्धि के लिए सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। तिजोरी के आसपास अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए और उसे हमेशा व्यवस्थित रखना चाहिए। घर में पैसे और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित तथा साफ जगह पर रखना भी व्यावहारिक रूप से जरूरी है।

    मुख्य द्वार को वास्तु में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। घर का प्रवेश द्वार साफ और रोशनी वाला होना चाहिए। दरवाजे के आसपास कचरा या बेकार सामान जमा नहीं करना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में स्वच्छ मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश से जोड़ा जाता है। शाम के समय घर के प्रवेश स्थान पर पर्याप्त रोशनी रखना भी अच्छा माना जाता है।

    रसोई और पानी से जुड़ी जगहों को लेकर भी वास्तु में कई मान्यताएं हैं। घर में नल से पानी लगातार टपकता रहता है तो उसे तुरंत ठीक कराना चाहिए। व्यावहारिक तौर पर भी पानी की बर्बादी रोकना जरूरी है जबकि वास्तु मान्यताओं में इसे आर्थिक नुकसान से जोड़कर देखा जाता है। घर में टूटे हुए सामान और खराब उपकरण लंबे समय तक पड़े रहने से बचना चाहिए।

    धन से जुड़े वास्तु उपायों में घर की साफ सफाई को भी महत्वपूर्ण माना गया है। नियमित रूप से सफाई करने से घर व्यवस्थित रहता है और अनावश्यक वस्तुओं को हटाने से जगह भी खुली रहती है। पूजा स्थान को साफ रखना और नियमित रूप से दीपक जलाना भी धार्मिक परंपराओं में शुभ माना जाता है। मां लक्ष्मी की पूजा करने वाले लोग शुक्रवार को विशेष आराधना कर सकते हैं।

    इसके साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केवल वास्तु उपायों पर निर्भर रहना उचित नहीं है। आय और खर्च का सही हिसाब रखना बचत करना अनावश्यक कर्ज से बचना और भविष्य के लिए वित्तीय योजना बनाना भी बेहद जरूरी है। वास्तु से जुड़े उपाय यदि कोई व्यक्ति अपनी आस्था के अनुसार अपनाता है तो उन्हें सकारात्मक सोच और व्यवस्थित जीवनशैली के साथ जोड़कर देखना बेहतर है। इस तरह घर का वातावरण बेहतर बनाने के साथ आर्थिक अनुशासन पर भी ध्यान दिया जा सकता है।

  • सीमित सैलरी में घर चलाना है आसान तो अपनाएं ये बजट टिप्स, खर्च संभालने के साथ हर महीने बढ़ेगी आपकी बचत

    सीमित सैलरी में घर चलाना है आसान तो अपनाएं ये बजट टिप्स, खर्च संभालने के साथ हर महीने बढ़ेगी आपकी बचत


    नई दिल्ली । बढ़ती महंगाई के दौर में सीमित सैलरी में घर का खर्च चलाने के साथ बचत करना कई लोगों के लिए चुनौती बन गया है। कई बार महीने के अंत तक पैसे खत्म हो जाते हैं और यह समझना मुश्किल हो जाता है कि रकम कहां खर्च हुई। ऐसी स्थिति में बेहतर वित्तीय योजना और खर्च का सही प्रबंधन जरूरी हो जाता है। सैलरी कितनी भी हो, यदि आय और खर्च का पहले से हिसाब रखा जाए तो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य के लिए भी रकम बचाई जा सकती है। इसके लिए बजट बनाने और खर्च को प्राथमिकता देने की आदत अपनाना जरूरी है।

    सैलरी को व्यवस्थित करने के लिए 50-30-20 का नियम अपनाया जा सकता है। इसके तहत आय का 50 प्रतिशत हिस्सा जरूरी खर्चों के लिए रखा जाता है। इसमें घर का किराया, राशन, बिजली-पानी के बिल, बच्चों की स्कूल फीस और ईएमआई जैसे खर्च शामिल किए जा सकते हैं। आय का 30 प्रतिशत हिस्सा इच्छाओं और जीवनशैली से जुड़े खर्चों के लिए रखा जा सकता है, जिसमें बाहर खाना, खरीदारी, घूमना-फिरना और मनोरंजन शामिल हैं। बाकी 20 प्रतिशत रकम भविष्य के लिए बचत या निवेश में लगाई जा सकती है। इस राशि को सेविंग्स अकाउंट, एफडी, म्यूचुअल फंड या अन्य निर्धारित विकल्पों में रखा जा सकता है।

    महीने की शुरुआत में ही पूरा बजट तैयार करना भी जरूरी है। सैलरी मिलते ही किराना, दूध, सब्जियों और दूसरी जरूरी चीजों पर होने वाले अनुमानित खर्च को तय कर लें। इससे पूरे महीने के दौरान पैसों के इस्तेमाल पर नजर बनी रहती है और गैर-जरूरी खर्च को नियंत्रित करना आसान होता है। साथ ही ‘पहले बचत, फिर खर्च’ का सिद्धांत अपनाना उपयोगी हो सकता है। आमतौर पर लोग महीने भर खर्च करने के बाद बची रकम को बचाने की सोचते हैं, लेकिन ऐसा हमेशा संभव नहीं हो पाता। इसलिए सैलरी आते ही बचत और निवेश के लिए निर्धारित राशि अलग कर लेना बेहतर तरीका माना जाता है।

    घरेलू खर्च में छोटी-छोटी बचत भी महीने के बजट पर असर डाल सकती है। बाजार या सुपरमार्केट जाने से पहले जरूरी सामान की सूची तैयार करने से अनावश्यक खरीदारी से बचा जा सकता है। बिजली और पानी की खपत को नियंत्रित करने से भी नियमित खर्च कम किया जा सकता है। इसके अलावा बाहर खाने और ऑनलाइन खाना मंगाने की संख्या सीमित करना भी बजट को संभालने में मदद कर सकता है। घर में बने भोजन को प्राथमिकता देने से खर्च को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इस तरह रोजमर्रा की आदतों में थोड़े बदलाव करके महीने के कुल खर्च को व्यवस्थित किया जा सकता है।

    अचानक आने वाले खर्चों के लिए इमरजेंसी फंड बनाना भी जरूरी है। मेडिकल खर्च या दूसरी आकस्मिक जरूरत के समय यह रकम आर्थिक दबाव कम कर सकती है। इसके लिए धीरे-धीरे बचत करके कम से कम तीन से छह महीने के घरेलू खर्च के बराबर आपातकालीन कोष तैयार करने की सलाह दी जाती है। इससे अचानक जरूरत पड़ने पर उधार लेने की स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है। सही बजट, नियमित बचत, नियंत्रित खर्च और आपातकालीन फंड के जरिए सीमित सैलरी में भी घर का वित्तीय प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सकता है।

  • मंगलवार व्रत से दूर हो सकती हैं जीवन की बाधाएं, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा और रखें इन नियमों का ध्यान

    मंगलवार व्रत से दूर हो सकती हैं जीवन की बाधाएं, सुबह से शाम तक ऐसे करें पूजा और रखें इन नियमों का ध्यान


    नई दिल्ली। मंगलवार का दिन भगवान हनुमान को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से भक्तों को साहस शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि नियमित रूप से मंगलवार का व्रत करने और श्रद्धा के साथ बजरंगबली की आराधना करने से जीवन में आने वाली परेशानियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। कई लोग मनोकामना पूर्ति और नकारात्मक प्रभावों से बचने के लिए भी मंगलवार का व्रत रखते हैं।

    मंगलवार व्रत रखने वाले व्यक्ति को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद पूजा स्थान की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद भगवान हनुमान का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा के लिए हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं। इसके बाद उन्हें सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है। लाल फूल और गुड़ चने का भोग भी लगाया जा सकता है। हनुमान जी की पूजा में लाल रंग का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार लाल फूल या लाल वस्त्र भी अर्पित कर सकते हैं।

    पूजा के दौरान हनुमान चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुंदरकांड का पाठ भी किया जा सकता है। भक्त अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार राम नाम का जाप कर सकते हैं क्योंकि धार्मिक मान्यताओं में भगवान हनुमान को श्रीराम का परम भक्त बताया गया है। पूजा के समय मन को शांत रखते हुए भगवान का ध्यान करना चाहिए और अपनी मनोकामना उनके सामने रखनी चाहिए।

    मंगलवार के व्रत में खानपान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। कई भक्त पूरे दिन फलाहार करते हैं जबकि कुछ लोग एक समय सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं। व्रत के दौरान अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार नियम अपनाना उचित माना जाता है। फल दूध सूखे मेवे और व्रत में खाए जाने वाले अन्य सात्विक पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। तामसिक भोजन और नशे से दूर रहने की धार्मिक परंपरा है।

    शाम के समय दोबारा हनुमान जी की पूजा करने के बाद हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ किया जा सकता है। इसके बाद भगवान को भोग लगाकर आरती करें। व्रत का पारण अपनी परंपरा और संकल्प के अनुसार किया जाता है। कुछ लोग सूर्यास्त के बाद भोजन करते हैं जबकि कुछ लोग अगले दिन व्रत खोलते हैं। इसलिए परिवार की परंपरा या अपने धार्मिक गुरु की सलाह के अनुसार नियम अपनाना बेहतर माना जाता है।

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मंगलवार के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना या अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। इस दिन क्रोध से बचना और किसी के साथ गलत व्यवहार न करना भी व्रत की भावना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हनुमान जी की पूजा केवल बाहरी विधियों तक सीमित न रखकर सेवा संयम और सदाचार को जीवन में अपनाना भी इस व्रत का उद्देश्य माना जाता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया मंगलवार व्रत भक्त को मानसिक मजबूती और सकारात्मक सोच देने वाला माना जाता है।

  • Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    Jio Platforms का 3.8 अरब डॉलर का IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है, भारत के सबसे बड़े IPO का बन सकता है रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । मुकेश अंबानी की Jio Platforms करीब 3.8 अरब डॉलर का IPO लॉन्च करने की तैयारी में है। प्रस्तावित IPO 21 अक्टूबर को खुल सकता है और इसके बाद कंपनी के शेयर 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है। यदि IPO इसी आकार के साथ आता है तो यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा IPO बन सकता है। इससे पहले यह रिकॉर्ड Hyundai Motor India के पास है, जिसने 2024 में करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO पेश किया था। Jio Platforms के प्रस्तावित IPO से जुटाई जाने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम कारोबार से जुड़े कर्ज को चुकाने में इस्तेमाल किए जाने की योजना है।

    प्रस्तावित IPO के जरिए कंपनी करीब 3.8 अरब डॉलर की रकम जुटाने की योजना बना रही है। हालांकि, इस संबंध में कंपनी की ओर से अभी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। IPO के बाद 28 अक्टूबर को Jio Platforms के शेयरों की शेयर बाजार में लिस्टिंग होने की उम्मीद जताई जा रही है। IPO का अंतिम आकार और अन्य महत्वपूर्ण जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल प्रस्तावित तारीख और रकम के आधार पर यह भारतीय शेयर बाजार में एक बड़ा सार्वजनिक निर्गम माना जा रहा है।

    यदि Jio Platforms का IPO करीब 3.8 अरब डॉलर के आकार में आता है तो यह देश के अब तक के सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है। वर्तमान में Hyundai Motor India का करीब 2.9 अरब डॉलर का IPO इस मामले में सबसे आगे है। इसके बाद NSE का करीब 2.3 अरब डॉलर का IPO रहा है। NSE ने पिछले महीने शेयर बाजार में अपनी शुरुआत की थी। प्रस्तावित आकार के साथ Jio Platforms का IPO इन दोनों बड़े IPO से आगे निकल सकता है और भारतीय IPO बाजार में नया रिकॉर्ड बना सकता है।

    IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा कंपनी के टेलीकॉम डिविजन का कर्ज चुकाने में इस्तेमाल किया जाएगा। Jio Platforms का कारोबार केवल टेलीकॉम तक सीमित नहीं है। कंपनी AI क्लाउड और एंटरप्राइज नेटवर्क जैसे क्षेत्रों में भी काम करती है। इन क्षेत्रों में विस्तार के साथ कंपनी का कारोबार टेलीकॉम से आगे बढ़ा है। IPO के जरिए जुटाई जाने वाली रकम से कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है। कंपनी में Meta और Google जैसे बड़े विदेशी निवेशकों की भी हिस्सेदारी है, जो इसके प्रमुख विदेशी निवेशकों में शामिल हैं।

    भारतीय IPO बाजार में आने वाले समय में कई बड़े निर्गम देखने को मिल सकते हैं। इनमें डेनमार्क की बीयर कंपनी Carlsberg का भारत कारोबार और होटल एग्रीगेटर Oyo की पैरेंट कंपनी Prism भी शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक करीब 250 कंपनियां कुल 4.65 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं। ऐसे में Jio Platforms का प्रस्तावित IPO भारतीय IPO बाजार के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, 21 अक्टूबर को IPO खुलने, 28 अक्टूबर को लिस्टिंग और करीब 3.8 अरब डॉलर जुटाने से जुड़ी अंतिम जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • बची हुई चाय को बार-बार गर्म करके पीना पड़ सकता है भारी, स्वाद के साथ सेहत पर भी पड़ सकता है असर

    बची हुई चाय को बार-बार गर्म करके पीना पड़ सकता है भारी, स्वाद के साथ सेहत पर भी पड़ सकता है असर

    नई दिल्ली ।भारत में बड़ी संख्या में लोग चाय पीना पसंद करते हैं और ज्यादातर लोग इसे गर्मागर्म पीना पसंद करते हैं। कई बार सुबह बनाई गई चाय बच जाती है, जिसे लोग चाय बर्बाद होने से बचाने या समय बचाने के लिए दोपहर या शाम को दोबारा गर्म करके पी लेते हैं। हालांकि, दी गई जानकारी के मुताबिक ठंडी हो चुकी चाय को बार-बार गर्म करना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दोबारा गर्म करने से चाय का स्वाद प्रभावित होने के साथ उसमें मौजूद कुछ लाभकारी रासायनिक तत्वों पर भी असर पड़ सकता है।

    स्टडी के अनुसार ताजी चाय में कैटेचिन और पॉलीफेनोल्स जैसे एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं। इन्हें हृदय स्वास्थ्य और शरीर में सूजन कम करने के लिए उपयोगी माना जाता है। चाय को दोबारा गर्म करने की प्रक्रिया में इन लाभकारी तत्वों के कम होने की बात कही गई है। इसके अलावा, चाय को बार-बार उबालने से उसमें टैनिन की मात्रा बढ़ सकती है। इसकी वजह से चाय का स्वाद कसैला और कड़वा हो सकता है। यानी दोबारा गर्म करने का असर केवल चाय के स्वाद तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि इसके कुछ घटकों में भी बदलाव हो सकता है।

    दूध वाली चाय को लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखना भी चिंता का विषय बताया गया है। ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है। दी गई जानकारी के अनुसार दूध वाली चाय को कमरे के तापमान पर दो घंटे से अधिक समय तक रखने पर उसमें तेजी से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं। बाद में ऐसी चाय को दोबारा गर्म करने के बावजूद फूड पॉइजनिंग या पेट खराब होने का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं होता। वहीं, टैनिन की मात्रा बढ़ने से कुछ लोगों को एसिडिटी, सीने में जलन और बदहजमी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

    चाय में टैनिन की मात्रा बढ़ने का असर शरीर में आयरन के अवशोषण पर भी पड़ सकता है। बढ़ा हुआ टैनिन शरीर द्वारा आयरन को ठीक से अवशोषित करने की प्रक्रिया में रुकावट डाल सकता है। यह खास तौर पर ऐसे लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है जिनमें पहले से आयरन की कमी है। दी गई जानकारी में भारत में एनीमिया की समस्या को देखते हुए बासी चाय के सेवन को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है। इसलिए बची हुई चाय को लंबे समय बाद दोबारा गर्म करके पीने के बजाय ताजी चाय बनाना बेहतर विकल्प बताया गया है।

    स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए विशेषज्ञों की सलाह है कि एक बार में उतनी ही चाय बनाई जाए, जितनी पीनी हो। यदि चाय को कुछ समय तक गर्म रखना जरूरी हो तो उसे बार-बार गैस पर उबालने के बजाय थर्मस का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे चाय को गर्म रखने में मदद मिल सकती है और बार-बार गर्म करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खासकर दूध वाली चाय को कमरे के तापमान पर लंबे समय तक रखने से बचना चाहिए। इस तरह ताजी बनी चाय का सेवन करना और बची हुई चाय को लंबे समय बाद दोबारा गर्म करके पीने से बचना स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर माना गया है।

  • कौशांबी में CEC का पुतला फूंकना सपाइयों को पड़ा भारी, जिलाध्यक्ष समेत 9 नामजद, अज्ञात पर भी FIR

    कौशांबी में CEC का पुतला फूंकना सपाइयों को पड़ा भारी, जिलाध्यक्ष समेत 9 नामजद, अज्ञात पर भी FIR


    कौशांबी। SIR के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का सांकेतिक पुतला फूंकना समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को भारी पड़ गया। मंझनपुर चौराहे पर प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम करने, नारेबाजी और पुतला दहन के आरोप में पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव समेत 9 नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

    पुलिस के मुताबिक, 5 अक्टूबर को सपा के सैकड़ों कार्यकर्ता पार्टी कार्यालय से नारेबाजी करते हुए मंझनपुर चौराहे पहुंचे थे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना मुख्य मार्ग पर बैठकर और खड़े होकर यातायात बाधित किया। इसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सांकेतिक पुतले को आग लगा दी गई।

    पुलिस ने बुझाई आग, हटाकर खुलवाया रास्ता
    उप निरीक्षक अभिषेक कुमार यादव की तहरीर के आधार पर दर्ज मुकदमे में कहा गया है कि प्रदर्शन के कारण चौराहे पर यातायात प्रभावित हुआ। पुतला जलाए जाने के बाद धुआं फैलने से मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाई और प्रदर्शनकारियों को हटाकर यातायात व्यवस्था सामान्य कराई।

    घटना के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच नोकझोंक की भी जानकारी सामने आई है। स्थानीय रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने जलते हुए पुतले को अपने कब्जे में लेने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

    इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
    पुलिस ने सपा जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव, शहनवाज, चंद्रजीत यादव, राजू सिंह पटेल, भरत सिंह लोधी, आनंद मोहन पटेल, विभा यादव, सुमित पांडे और आफताब शेख को नामजद किया है। इनके अलावा अन्य अज्ञात लोगों को भी मुकदमे में आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन और पुतला दहन की घटना की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी भी कराई गई थी। इन्हें जांच में साक्ष्य के तौर पर शामिल किया जा रहा है।

    SIR के विरोध में प्रदर्शन कर रही सपा
    समाजवादी पार्टी SIR को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही है। कौशांबी में भी इसी मुद्दे को लेकर 5 अक्टूबर को पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी की गई और उनका सांकेतिक पुतला जलाया गया।

    अब पुलिस दर्ज मुकदमे के आधार पर मामले की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और फोटो समेत अन्य साक्ष्यों की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे

    SIR के खिलाफ INDIA के प्रदर्शन से AAP ने बनाई दूरी, संजय सिंह बोले- हम अपनी लड़ाई अलग तरीके से लड़ रहे


    नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन के 6 अक्टूबर के प्रदर्शन से आम आदमी पार्टी ने दूरी बना ली है। AAP ने कहा है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन अलग तरीके से जारी रखेगी और इसे किसी एक पार्टी का नहीं, बल्कि जनता से जुड़ा मुद्दा मानती है।

    संसद भवन परिसर में सोमवार को मीडिया से बातचीत में AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि SIR में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ देश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि 6 अक्टूबर का प्रदर्शन INDIA गठबंधन का है, इसलिए आम आदमी पार्टी इसमें शामिल नहीं होगी।

    संजय सिंह ने कहा, “जहां तक कल के प्रदर्शन की बात है, तो ये INDIA गठबंधन का प्रोटेस्ट है। इसलिए आम आदमी पार्टी इसका हिस्सा नहीं है। हम इस लड़ाई को अपने तरीके से लगातार लड़ रहे हैं।”

    पार्टी बैनर के बिना आंदोलन की बात

    AAP नेता ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को व्यापक जन आंदोलन के रूप में देख रही है। उन्होंने बताया कि AAP अपने प्रदर्शन में पार्टी का बैनर तक इस्तेमाल नहीं कर रही है, क्योंकि उसका मानना है कि यह देश के नागरिकों से जुड़ा मुद्दा है और इसमें हर व्यक्ति की भागीदारी होनी चाहिए।

    संजय सिंह ने यह भी कहा कि CJP और वाम दल समेत कई संगठन अलग-अलग स्थानों पर SIR के खिलाफ अपने स्तर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी भी अपनी रणनीति के तहत इस मुद्दे को उठा रही है।

    30 सितंबर की विपक्षी बैठक में भी नहीं पहुंची थी AAP

    AAP ने 30 सितंबर को हुई विपक्षी दलों की बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था। उस बैठक में 19 विपक्षी दलों के नेताओं ने SIR और मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की थी। बैठक के बाद INDIA गठबंधन ने 6 अक्टूबर को अपने सांसदों के साथ चुनाव आयोग तक मार्च करने और राष्ट्रपति से मुलाकात करने का फैसला किया था।

    इस बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, RJD नेता तेजस्वी यादव, NCP (SP) सांसद सुप्रिया सुले, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती और वाम दलों के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए थे।

    शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैठक में वर्चुअली हिस्सा लिया था। AAP के साथ DMK भी इस बैठक में शामिल नहीं हुई थी।

    SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग आमने-सामने

    SIR को लेकर विपक्षी दल चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बदलावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। INDIA गठबंधन ने इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों में तीन सदस्यीय आयोग के भीतर किसी विभाजन के दावों को खारिज किया है और कहा है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।

    AAP की ओर से हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि पार्टी SIR के मुद्दे से पीछे नहीं हट रही है। उसका कहना है कि वह इस मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी, लेकिन 6 अक्टूबर को होने वाले INDIA गठबंधन के संयुक्त प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनेगी।