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  • सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    सिंगापुर दौरे पर सीएम नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में निवेश, उद्योग और इनोवेशन बढ़ाने की प्राथमिकताएं सामने रखीं

    नई दिल्ली ।हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सिंगापुर दौरे के दूसरे दिन सिंगापुर इंडिया नेटवर्क फॉर ग्रोथ फोरम के तहत आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में सिंगापुर के प्रमुख उद्योगपति, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधि और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य हरियाणा में भविष्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के साथ-साथ हरियाणा और सिंगापुर के बीच आपसी सहयोग के नए अवसर तलाशना रहा।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार का लक्ष्य हरियाणा को केवल एक औद्योगिक शक्ति तक सीमित नहीं रखना, बल्कि इसे भारत की इनोवेशन कैपिटल के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के जरिए दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग और साझेदारी को नई दिशा देने के अवसर मिल रहे हैं। सैनी ने उन्हें अपने विचार रखने का अवसर देने के लिए सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन का आभार भी व्यक्त किया।

    सैनी ने कहा कि यह मंच दो ऐसी अर्थव्यवस्थाओं के बीच संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है, जिनके बीच विश्वास, मित्रता और सहयोग का संबंध लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में हरियाणा ने सिंगापुर की कंपनियों और संस्थाओं के साथ पांच बड़े समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे। मुख्यमंत्री ने हरियाणा की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य उत्तर भारत के बड़े उपभोक्ता और विनिर्माण बाजार के बीच स्थित है।

    मुख्यमंत्री के मुताबिक, हरियाणा में प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और बेहतर फ्रेट कनेक्टिविटी उपलब्ध है। उनके अनुसार, ये सुविधाएं राज्य में उद्योगों और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराती हैं। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम और उसके आसपास इंटीग्रेटेड टाउनशिप, कमर्शियल डेवलपमेंट और आधुनिक शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सिंगापुर की कंपनियों के साथ साझेदारी की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने सिंगापुर की कंपनियों से हरियाणा में अपने टेक्नोलॉजी और प्रोफेशनल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने का भी आह्वान किया।

    सैनी ने बताया कि हाल ही में हरियाणा ने सिंगापुर स्थित एक ग्लोबल स्कूल ग्रुप के साथ साझेदारी की है। इसके तहत राज्य में विश्वस्तरीय के-12 शिक्षा का बुनियादी ढांचा विकसित करने की योजना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ऐसा मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना चाहती है, जिसमें कारोबार तेजी से आगे बढ़े और उसके साथ रोजगार, निवेश तथा इनोवेशन के नए अवसर भी पैदा हों। उन्होंने कहा कि सिंगापुर के साथ सहयोग हरियाणा के औद्योगिक और आर्थिक विकास को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में गतिरोध, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बोलीं- आगे बढ़ना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल

    नई दिल्ली ।भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देश फिलहाल ऐसे पड़ाव पर पहुंच गए हैं, जहां आगे बढ़ना मुश्किल दिखाई दे रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि समझौते पर बेहद कठिन और गहन बातचीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है, जबकि अमेरिका अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।

    राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच वार्ता अभी खत्म नहीं हुई है। दोनों पक्ष यह देखने की कोशिश कर सकते हैं कि क्या आगे बातचीत की कोई गुंजाइश बाकी है। हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा स्थिति में दोनों देशों के लिए कुछ और देना या लेना आसान नहीं होगा। प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत काफी कठिन और व्यापक स्तर पर हुई है।

    सीतारमण ने कहा कि व्यापार संतुलन इस समय भारत के पक्ष में है और अमेरिका की प्रमुख चिंता अपने व्यापार घाटे को कम करना है। उनके अनुसार, अमेरिका की यह चिंता कई वर्षों से भारत के साथ होने वाले व्यापार में उसके नुकसान से जुड़ी हुई है। दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत फरवरी 2026 में घोषित अंतरिम व्यापार समझौते के लिए तय रूपरेखा के तहत हो रही है। भारत और अमेरिका ने उस समय व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत जारी रखते हुए अंतरिम समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करने की बात कही थी।

    वित्त मंत्री ने इस दौरान भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे व्यापार समझौतों को लेकर भारत के दृष्टिकोण के उदाहरण के रूप में पेश किया। सीतारमण के अनुसार, यह समझौता करीब दो अरब लोगों और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करेगा। उन्होंने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के इस्तेमाल किए गए वाक्यांश का उल्लेख करते हुए इसे “सभी समझौतों की मां” कहना उचित बताया।

    सीतारमण ने बताया कि भारत-यूरोपीय संघ समझौते के तहत भारत ने अपनी 92.5 प्रतिशत टैरिफ लाइनों और व्यापार मूल्य के करीब 97 प्रतिशत हिस्से को खोल दिया है। वहीं, यूरोपीय संघ ने व्यापार मूल्य के करीब 99 प्रतिशत और लगभग 97 प्रतिशत टैरिफ लाइनों को खोला है। उन्होंने कहा कि बाजार पहुंच से जुड़ी प्रतिबद्धताओं का चयन दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता को ध्यान में रखकर किया गया। साथ ही यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई कि इन प्रतिबद्धताओं का भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। अमेरिका के साथ बातचीत में भी आगे की संभावनाओं को लेकर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है।

  • ट्रंप ने ब्राजील चुनाव पर पोस्ट में भारत का नाम लिखा, 125 मिलियन वोट का दावा कर अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर साधा निशाना

    ट्रंप ने ब्राजील चुनाव पर पोस्ट में भारत का नाम लिखा, 125 मिलियन वोट का दावा कर अमेरिकी चुनाव प्रणाली पर साधा निशाना

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक पोस्ट में ब्राजील की जगह भारत का नाम लिख दिया। ट्रंप ने दावा किया कि भारत के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में 125 मिलियन लोगों ने मतदान किया और मतदान खत्म होने के उसी दिन परिणाम भी सामने आ गए। हालांकि, उनकी पोस्ट में जिस चुनाव का जिक्र किया गया, वह वास्तव में ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव का पहला दौर था। इस गलती के बाद उनकी पोस्ट चर्चा में आ गई और सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर प्रतिक्रिया दी।

    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में ब्राजील के चुनाव में मतदान और नतीजों की तेजी की तुलना अमेरिका की चुनाव प्रक्रिया से की। उन्होंने कहा कि डेट्रॉयट, फिलाडेल्फिया, कैलिफोर्निया और अमेरिका के कई अन्य शहरों तथा राज्यों में कम संख्या में वोटों की गिनती में भी अक्सर हफ्तों लग जाते हैं। उन्होंने इसी संदर्भ में अमेरिकी वोटिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्ट बताया। पोस्ट के अंत में उन्होंने अपने नाम के साथ इसे प्रकाशित किया।

    ट्रंप की पोस्ट में 125 मिलियन लोगों के मतदान का आंकड़ा भी ब्राजील के चुनाव से जुड़ा हुआ था। ब्राजील में 4 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर की वोटिंग हुई थी। भारत में उस दिन इस तरह का कोई प्रत्यक्ष राष्ट्रपति चुनाव नहीं हुआ था। भारत में राष्ट्रपति का चुनाव देशभर में सीधे मतदाताओं के मतदान से नहीं होता है। ट्रंप की पोस्ट में भारत का उल्लेख होने के कारण ब्राजील और भारत के चुनावी सिस्टम को लेकर उनका यह बयान विशेष रूप से चर्चा में रहा।

    ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर में फ्लावियो बोल्सोनारो और मौजूदा राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा सबसे आगे रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 98.81 प्रतिशत वोटों की गिनती पूरी होने तक बोल्सोनारो को 47.24 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि लूला को 44.91 प्रतिशत वोट हासिल हुए। हालांकि, पहले दौर में किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले, इसलिए सीधे तौर पर चुनाव का फैसला नहीं हो सका।

    अब दोनों उम्मीदवारों के बीच 25 अक्टूबर को राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में मुकाबला होगा। पहले दौर में जीत के लिए 50 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल करना जरूरी था, लेकिन दोनों उम्मीदवार इस आंकड़े तक नहीं पहुंच सके। इसी वजह से चुनाव दूसरे दौर में पहुंच गया। ट्रंप की पोस्ट ब्राजील के पहले दौर के चुनाव परिणाम आने के बाद सामने आई, जिसमें उन्होंने तेजी से नतीजे आने का उल्लेख करते हुए अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। उनकी पोस्ट में ब्राजील की जगह भारत का नाम लिखे जाने को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई।

  • चंद्रशेखरन बोले- भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर, विकसित भारत 2047 के लिए बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी में निवेश जरूरी

    चंद्रशेखरन बोले- भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर, विकसित भारत 2047 के लिए बुनियादी ढांचे और मानव पूंजी में निवेश जरूरी

    नई दिल्ली ।टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने सोमवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चित माहौल के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत और स्थिर बनी हुई है। उन्होंने इसके पीछे मजबूत घरेलू मांग, सेवा निर्यात और अनुकूल नीतिगत माहौल को प्रमुख कारण बताया। चंद्रशेखरन ने कहा कि भारत ने हाल के वर्षों में लगातार उम्मीदों से बेहतर प्रदर्शन किया है और मजबूत विकास के रास्ते पर बना हुआ है।

    इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट सिम्पोजियम 2026 में बोलते हुए चंद्रशेखरन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को अच्छा बताया। उन्होंने कहा कि कई आर्थिक संकेतक देश की स्थिर और मजबूत स्थिति की ओर इशारा करते हैं। उनके अनुसार, ऑटोमोबाइल बिक्री, क्रेडिट ग्रोथ, बिजली और सीमेंट जैसे क्षेत्रों में बनी मजबूत मांग अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत है।

    चंद्रशेखरन ने चालू खाते की स्थिति को भी सकारात्मक आर्थिक संकेतकों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि चालू खाता घाटा लगातार जीडीपी के एक प्रतिशत से नीचे बना हुआ है। इसके अलावा सेवा निर्यात जीडीपी के करीब 11 प्रतिशत के बराबर है। मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों यानी एनपीए की बेहतर स्थिति भी देश के आर्थिक परिदृश्य को समर्थन देने वाले महत्वपूर्ण संकेतक हैं।

    उन्होंने कहा कि भारत के विकसित भारत 2047 के विजन को हासिल करने के लिए समावेशी और टिकाऊ विकास पर ध्यान देना होगा। इसके लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे, मजबूत संस्थानों और बौद्धिक संपदा का समर्थन जरूरी होगा। चंद्रशेखरन ने लंबे समय तक आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत और सटीक विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार तथा मानव पूंजी में निवेश को महत्वपूर्ण बताया।

    चंद्रशेखरन ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में बदलाव की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने गुणवत्ता, नवाचार, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता पर अधिक ध्यान देने की बात कही। उनके अनुसार, भारत जर्मनी जैसे देशों से सीख सकता है, जहां इंजीनियरिंग, मानकों और सटीकता के साथ मजबूत आपूर्तिकर्ता तथा छोटे एवं मध्यम उद्यमों के इकोसिस्टम ने प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को मजबूत करने में भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत में भी इसी तरह के बदलाव की जरूरत है।

    उन्होंने भारत की व्यापक विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं में टिकाऊ विनिर्माण को शामिल करने की आवश्यकता भी बताई। चंद्रशेखरन के मुताबिक, ऐसा बदलाव केवल बड़ी कंपनियों के स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मध्यम स्तर के कारोबारी इकोसिस्टम में भी मजबूत नेतृत्व विकसित करने में मदद करनी चाहिए। इससे ऐसे विशेषज्ञ तैयार करने में भी सहायता मिलेगी, जो वैश्विक विनिर्माण मानकों और प्रथाओं में योगदान देने में सक्षम हों। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को भारत के दीर्घकालिक आर्थिक विकास और विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता से जोड़ा।

  • हूतियों के खिलाफ सक्रिय होगा मक्का डिफेंस पैक्ट? सऊदी में पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य अधिकारियों की अहम बैठक आज

    हूतियों के खिलाफ सक्रिय होगा मक्का डिफेंस पैक्ट? सऊदी में पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य अधिकारियों की अहम बैठक आज

    नई दिल्ली ।सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के सैन्य गठबंधन की अहम बैठक सोमवार को रियाद में हो रही है। तीनों देशों की स्ट्रैटेजिक पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमेटी की इस बैठक में मक्का रक्षा समझौते के भविष्य पर चर्चा होगी। बैठक ऐसे समय हो रही है जब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या मौजूदा परिस्थितियों में मक्का रक्षा समझौते को सक्रिय किया जाएगा और क्या पाकिस्तान तथा तुर्की सऊदी अरब के समर्थन में हूतियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में शामिल होंगे।

    रियाद में होने वाली बैठक में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री तथा सेना प्रमुख शामिल होंगे। बैठक के दौरान सऊदी अरब पर हूतियों की ओर से किए जा रहे हमलों से निपटने के तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है। इसके अलावा तीनों देशों के बीच हुए सैन्य समझौते के काम करने के तरीके और गठबंधन को भविष्य में अधिक संस्थागत रूप देने के लिए उठाए जाने वाले अगले कदमों पर भी विचार किया जाएगा। बैठक को इस समझौते की आगे की दिशा तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मक्का रक्षा समझौते पर 7 अगस्त को तीनों देशों के नेताओं ने हस्ताक्षर किए थे। समझौते में सामूहिक रक्षा से जुड़ा एक प्रावधान शामिल है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर होने वाले सशस्त्र हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। समझौते के बाद से पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब इसके संस्थागत और सैन्य ढांचे को विकसित करने पर काम कर रहे हैं। हाल के दिनों में हूतियों की ओर से सऊदी अरब को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाए जाने के कारण इस समझौते की भूमिका को लेकर चर्चा बढ़ गई है।

    सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है। दूसरी ओर, ईरान समर्थित हूती विद्रोही राजधानी सना सहित उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण रखते हैं। हूतियों और सऊदी अरब के बीच जारी टकराव ने मक्का रक्षा समझौते के सामूहिक रक्षा प्रावधान को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब रियाद में होने वाली बैठक में यह देखा जाएगा कि मौजूदा स्थिति में तीनों देशों के बीच हुआ सैन्य समझौता किस तरह आगे बढ़ता है और सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े मामलों में इसकी भूमिका क्या होगी।

    पाकिस्तान ने सऊदी अरब पर हूतियों के हमलों की निंदा की है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि उनका देश समझौते के तहत सऊदी अरब की रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करेगा। तुर्की के नेताओं ने भी सऊदी अरब पर हुए हूती हमलों की कई मंचों पर आलोचना की है। हालांकि, पाकिस्तान और तुर्की की ओर से हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब के सैन्य अभियानों में सीधे तौर पर शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है। इसी वजह से यह सवाल बना हुआ है कि मक्का रक्षा समझौते के तहत किए गए वादे को व्यवहार में किस तरह लागू किया जाएगा और क्या दोनों देश सऊदी अरब के लिए चल रही सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होंगे।

  • शिवपुरी में राशन विक्रेताओं का प्रदर्शन तेज, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर CM के नाम ज्ञापन, मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल

    शिवपुरी में राशन विक्रेताओं का प्रदर्शन तेज, 5 सूत्रीय मांगों को लेकर CM के नाम ज्ञापन, मांगें नहीं मानीं तो हड़ताल


    शिवपुरी । शिवपुरी में सोमवार को मध्यप्रदेश राशन विक्रेता संघ के बैनर तले जिलेभर के राशन विक्रेता कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां विक्रेताओं ने अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम ज्ञापन सौंपा। राशन विक्रेताओं ने सरकार से अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए कमीशन बढ़ाने और न्यूनतम मासिक आय की गारंटी देने की मांग की है। संघ ने साफ किया है कि अगर तय समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर राशन दुकानों की हड़ताल भी की जा सकती है।

    राशन विक्रेताओं का कहना है कि मध्यप्रदेश में करीब 28 हजार शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है। इस व्यवस्था में राशन दुकानदारों की महत्वपूर्ण भूमिका है लेकिन बढ़ती महंगाई और दुकान संचालन से जुड़े खर्च के मुकाबले उन्हें मिलने वाला कमीशन पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि कम आमदनी में दुकान का संचालन करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है।

    संघ की सबसे प्रमुख मांग खाद्यान्न वितरण पर मिलने वाले कमीशन को बढ़ाकर कम से कम 200 रुपये प्रति क्विंटल करना है। इसके साथ ही प्रत्येक राशन विक्रेता के लिए 40 हजार रुपये प्रतिमाह की न्यूनतम गारंटीड आय तय करने की मांग रखी गई है। विक्रेताओं का कहना है कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में इतनी आय के बिना राशन दुकान चलाना कठिन हो रहा है।

    राशन विक्रेताओं ने खाद्यान्न में होने वाली शॉर्टेज को लेकर भी राहत की मांग की है। संघ ने प्रति क्विंटल एक किलो तक की शॉर्टेज की क्षतिपूर्ति देने की मांग की है। इसके अलावा हर महीने मिलने वाले कमीशन का भुगतान अधिकतम महीने की पांच तारीख तक अनिवार्य रूप से किए जाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है। विक्रेताओं का कहना है कि कमीशन मिलने में देरी होने से रोजमर्रा के खर्च और दुकान संचालन की व्यवस्था प्रभावित होती है।

    संघ ने सेवा सहकारी समितियों और वन समितियों के अधीन काम करने वाले राशन विक्रेताओं के कमीशन भुगतान को लेकर भी स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की है। विक्रेताओं का कहना है कि अलग-अलग स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया होने के कारण कई बार कमीशन समय पर नहीं मिल पाता। ऐसे में शासन को भुगतान व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था बनानी चाहिए।

    राशन विक्रेताओं ने अपनी मांगों के समर्थन में दूसरे राज्यों का उदाहरण भी दिया। संघ के सुनील कुमार मिश्रा के अनुसार बिहार में 258 रुपये प्रति क्विंटल केरल में 270 रुपये हरियाणा और दिल्ली में 200 रुपये तथा महाराष्ट्र में 170 रुपये तक कमीशन दिए जाने की बात कही गई है। संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में मिलने वाला कमीशन इन राज्यों की तुलना में कम है। ऐसे में यहां भी कमीशन को बढ़ाकर दुकानदारों को आर्थिक राहत दी जानी चाहिए।

    संघ ने शासन को सात दिवसीय आंदोलन की चेतावनी दी है। संगठन की ओर से एक अक्टूबर 2026 से आंदोलन और हड़ताल की सूचना दी गई है। हालांकि राशन विक्रेताओं को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री खाद्य विभाग और प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समय रहते समाधान निकालेंगे। विक्रेताओं का कहना है कि वे लंबे समय से सार्वजनिक वितरण प्रणाली में अपनी सेवाएं दे रहे हैं इसलिए उनकी आर्थिक मांगों पर सरकार को सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। अब सभी की नजर शासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है।

  • ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने स्वीकार किया, हमीद बोवार्ड को मिली कार्यवाहक जिम्मेदारी

    ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने स्वीकार किया, हमीद बोवार्ड को मिली कार्यवाहक जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। पाकनेजाद अगस्त 2024 से ईरान के तेल मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के प्रमुख हमीद बोवार्ड को कार्यवाहक तेल मंत्री नियुक्त किया गया है। इस बदलाव की जानकारी सरकारी मीडिया के माध्यम से सामने आई है। हालांकि, शुरुआत में इस्तीफे के पीछे किसी विशेष वजह की जानकारी नहीं दी गई थी।

    बाद में राष्ट्रपति कार्यालय के संचार उप प्रमुख मेहदी तबताबाई ने सरकारी टेलीविजन को बताया कि पाकनेजाद ने व्यक्तिगत कारणों से काफी पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था। उनके अनुसार, यह इस्तीफा हाल में लिया गया अचानक फैसला नहीं था। हालांकि, पाकनेजाद के पद छोड़ने के बारे में आधिकारिक तौर पर किसी अन्य विशेष कारण का खुलासा नहीं किया गया है। इस तरह फिलहाल सामने आई जानकारी में उनके इस्तीफे को व्यक्तिगत कारणों से जोड़ा गया है और किसी दूसरे कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    मोहसिन पाकनेजाद ने अगस्त 2024 में ईरान के तेल मंत्री का पद संभाला था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के तेल राजस्व को लेकर भी बयान दिए थे। इस्तीफा देने से पहले उन्होंने कहा था कि ईरान की ओर से बेचे जा रहे तेल से प्राप्त होने वाली आय देश को मिल रही है और भविष्य में भी इसके जारी रहने की उम्मीद है। ईरान तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक का सदस्य है और उसकी अर्थव्यवस्था में तेल से होने वाली आय का महत्वपूर्ण स्थान है। पाकनेजाद के इस्तीफे के बाद अब मंत्रालय की जिम्मेदारी फिलहाल हमीद बोवार्ड संभालेंगे।

    हमीद बोवार्ड इससे पहले सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के प्रमुख के रूप में काम कर रहे थे। उन्हें अब कार्यवाहक तेल मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। इस नियुक्ति के साथ वह फिलहाल तेल मंत्रालय का कामकाज संभालेंगे। पाकनेजाद के इस्तीफे को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह प्रशासनिक बदलाव हुआ है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कार्यवाहक व्यवस्था कितने समय तक जारी रहेगी या आगे तेल मंत्री के पद पर स्थायी नियुक्ति को लेकर क्या फैसला लिया जाएगा।

    पाकनेजाद का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका के साथ सात महीने से जारी युद्ध और उससे जुड़े दबावों का असर बताया जा रहा है। देश की आर्थिक स्थिति पर इन परिस्थितियों के प्रभाव के बीच तेल मंत्रालय में यह बदलाव हुआ है। हालांकि, इस्तीफे और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से पाकनेजाद के पद छोड़ने की वजह के तौर पर व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया गया है। फिलहाल हमीद बोवार्ड कार्यवाहक तेल मंत्री के रूप में मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

  • जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील

    जेट खरीदने पर 350 करोड़ खर्च, फिर रनवे और संचालन पर भी करोड़ों, जानिए MP सरकार के लिए कितनी महंगी है पूरी डील


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार का नया बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 कनाडा से भारत पहुंचने की तैयारी में है। सरकार ने इसे मुख्यमंत्री राज्यपाल और दूसरे वीआईपी के इस्तेमाल के लिए खरीदा है। लेकिन करीब 350 करोड़ रुपये की कीमत वाला यह विमान आने के बाद तुरंत नियमित उड़ान भरने की स्थिति में नहीं होगा। इसे भारत में जरूरी औपचारिकताओं से गुजरना होगा और इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित पायलटों से लेकर हैंगर और रखरखाव तक की व्यवस्था करनी होगी। सबसे अहम बात यह है कि यह जेट प्रदेश के हर एयरपोर्ट या हवाई पट्टी पर उतर भी नहीं सकेगा।

    सरकार के अपने विमान की जरूरत उस समय ज्यादा महसूस हुई जब 6 मई 2021 को राज्य का बीचक्राफ्ट किंग एयर बी-200जीटी ग्वालियर एयरबेस पर क्रैश लैंडिंग का शिकार हो गया था। यह विमान करीब 65 करोड़ रुपये में खरीदा गया था लेकिन बीमा नहीं होने के कारण सरकार को नुकसान की भरपाई नहीं मिल सकी। अब इसे करीब 7 करोड़ रुपये की रिजर्व कीमत पर बेचने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद से मुख्यमंत्री और दूसरे वीआईपी के लिए सरकार को निजी विमान किराए पर लेने पड़ रहे हैं।

    विधानसभा में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच विमान और हेलिकॉप्टर किराए पर करीब 290 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2025 में नवंबर तक ही यह खर्च 90 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया था। विमानन विभाग का तर्क है कि लगातार बढ़ रहे किराये के खर्च को कम करने के लिए अपना जेट खरीदना जरूरी है। हालांकि जेट खरीदने के बाद भी सरकार को इसके संचालन पर हर साल बड़ी रकम खर्च करनी होगी।

    चैलेंजर 3500 की खरीद को लेकर अलग अलग समय पर अलग कीमतें सामने आई हैं। वर्ष 2022 में सरकार करीब 120 करोड़ रुपये के जेट पर विचार कर रही थी। बाद में कीमत और डिलीवरी से जुड़े कारणों से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। मार्च 2024 में नए टेंडर में बॉम्बार्डियर और एम्ब्रेयर ने हिस्सा लिया। जुलाई 2024 में कैबिनेट ने बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 खरीदने की मंजूरी दी और उस समय कीमत करीब 233 करोड़ रुपये बताई गई। अब टैक्स ट्रांसपोर्ट और अन्य खर्च जोड़ने के बाद कुल अनुमान करीब 350 करोड़ रुपये बताया जा रहा है।

    सिर्फ खरीद कीमत ही पूरी तस्वीर नहीं है। विमान को चलाने में क्रू हैंगर बीमा मेंटेनेंस और ईंधन समेत कई खर्च होते हैं। अनुमान के मुताबिक 450 घंटे सालाना उड़ान पर इसका कुल खर्च करीब 30 से 33 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यानी प्रति उड़ान घंटे लागत किराए के विमान की तुलना में ज्यादा भी हो सकती है। हालांकि यदि किराए के विमान पर लगने वाला स्टैंडिंग चार्ज पूरी तरह समाप्त हो जाता है तो सरकार के कुल खर्च में कुछ राहत मिल सकती है।

    जेट के साथ सरकार ने एयरबस ACH160 हेलिकॉप्टर भी खरीदा है। हेलिकॉप्टर की कीमत करीब 150 करोड़ रुपये बताई गई थी जबकि टैक्स और अन्य शुल्क जोड़ने पर खर्च करीब 225 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस तरह जेट और हेलिकॉप्टर के बाद हवाई ढांचे को तैयार करने का खर्च भी सरकार के सामने है।

    चैलेंजर 3500 को चलाने के लिए सरकार को पायलटों की ट्रेनिंग और जरूरी प्रमाणन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विदेश में प्रशिक्षण लेने गए प्रदेश के दो पायलट पहली कोशिश में टेस्ट पास नहीं कर सके। फिलहाल उन्हें को पायलट का प्रमाणपत्र मिला है। इसलिए शुरुआत में बॉम्बार्डियर का एक प्रशिक्षित पायलट विमान उड़ाएगा। सरकारी पायलटों को उसके साथ निर्धारित उड़ान अनुभव पूरा करने के बाद स्वतंत्र रूप से जेट उड़ाने की अनुमति मिल सकेगी।

    सबसे बड़ी चुनौती रनवे को लेकर है। विभाग के आकलन के अनुसार जेट के लिए कम से कम करीब 1800 मीटर और बेहतर संचालन के लिए लगभग 2100 मीटर लंबा रनवे जरूरी माना जा रहा है। प्रदेश के सभी एयरपोर्ट और हवाई पट्टियां इस जरूरत को पूरा नहीं करतीं। मौजूदा आकलन के अनुसार करीब 10 स्थानों पर यह जेट उतर सकता है। इनमें भोपाल इंदौर ग्वालियर जबलपुर खजुराहो रीवा और दतिया के एयरपोर्ट के अलावा मंदसौर सिवनी और मंडला की हवाई पट्टियां शामिल हैं।

    सरकार कई अन्य हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी भी कर रही है। इसके लिए जिलों से जमीन की जानकारी मांगी गई है। सरकारी जमीन मिलने पर एक पट्टी के विस्तार में करीब 10 से 15 करोड़ रुपये जबकि निजी जमीन अधिग्रहण की स्थिति में 30 से 40 करोड़ रुपये तक खर्च होने का अनुमान है। कुल मिलाकर हवाई पट्टियों के विस्तार पर करीब 300 से 400 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

    ऐसे में जेट हेलिकॉप्टर और रनवे विस्तार को जोड़कर पूरी योजना का अनुमानित खर्च करीब 875 से 975 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इसमें हेलिपैड नेटवर्क का खर्च शामिल नहीं है। इसलिए सरकार के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि अपना जेट खरीदने से किराए का खर्च कितना बचेगा बल्कि यह भी है कि विमान को प्रभावी तरीके से चलाने के लिए अगले कई वर्षों में कितना अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। अंतिम फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार जेट का कितना नियमित इस्तेमाल करती है और मौजूदा किराये तथा स्टैंडिंग चार्ज में वास्तविक रूप से कितनी कमी आती है।

  • राकेश अग्रवाल हत्याकांड में फरार वरुण की तलाश तेज, आगरा से वृंदावन पहुंचा आरोपी, 50 हजार का इनाम और 12 टीमें पीछे

    राकेश अग्रवाल हत्याकांड में फरार वरुण की तलाश तेज, आगरा से वृंदावन पहुंचा आरोपी, 50 हजार का इनाम और 12 टीमें पीछे


    भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में फरार केयरटेकर वरुण कुमार की तलाश लगातार तेज होती जा रही है। पुलिस की जांच में वरुण की ताजा लोकेशन उत्तर प्रदेश के वृंदावन में मिली है। यह जगह भोपाल से करीब 612 किलोमीटर दूर है। इससे पहले उसकी लोकेशन आगरा और आगरा से वृंदावन जाने वाले रास्ते पर ट्रेस हुई थी। पुलिस अब CCTV फुटेज और तकनीकी लोकेशन के आधार पर उसके पूरे रूट को जोड़ने की कोशिश कर रही है।

    जांच में सामने आए नए CCTV फुटेज में वरुण बाइक से स्टेशन के आसपास जाता दिखाई दे रहा है। पुलिस के मुताबिक स्टेशन तक पहुंचने के लिए उसने दो अलग-अलग वाहनों का इस्तेमाल किया था। इससे पहले सामने आए फुटेज में वह पैदल जाता हुआ भी दिखाई दिया था। पुलिस को शक है कि वारदात के बाद वरुण लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है ताकि पुलिस की पकड़ से बच सके।

    पुलिस के अनुसार पिछले 24 घंटे में वरुण की गतिविधियां आगरा वृंदावन रोड और आसपास के इलाकों में सामने आई हैं। टीमों ने उसके संभावित ठिकानों पर दबिश दी लेकिन वह पुलिस के पहुंचने से पहले ही वहां से निकल गया। वह किसी एक स्थान पर ज्यादा देर नहीं रुक रहा है और यात्री वाहनों का इस्तेमाल कर लगातार जगह बदल रहा है। यही वजह है कि उसकी सटीक लोकेशन तक पहुंचना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है।

    वरुण की तलाश के लिए मध्यप्रदेश समेत पांच राज्यों में पुलिस की 12 टीमें लगाई गई हैं। उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया है। पुलिस उसके पुराने संपर्कों और संभावित मददगारों की जानकारी भी जुटा रही है। इसी सिलसिले में भोपाल पुलिस की एक टीम पटियाला पहुंची थी। वहां वरुण की बहन से पूछताछ कर उसके संपर्क और संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई गई। पुलिस के मुताबिक परिवार से भी लंबे समय से उसका संपर्क नहीं था।

    जांच में एक अहम जानकारी यह भी सामने आई है कि हत्या के बाद वरुण राकेश अग्रवाल का मोबाइल अपने साथ लेकर गया था। आगरा पहुंचने के बाद उसने यह मोबाइल एक परिचित को दे दिया था। इसके बाद पुलिस ने मोबाइल की गतिविधियों और वरुण से जुड़ी तकनीकी जानकारी खंगाली। इसी आधार पर उसकी गतिविधियों का ट्रेल आगरा और मथुरा क्षेत्र तक पहुंचा।

    राकेश अग्रवाल की 30 सितंबर की रात भोपाल के सूरज नगर स्थित घर में गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की जांच में सामने आया था कि हत्या धारदार सर्जिकल ब्लेड से की गई। वारदात के बाद से ही उनका केयरटेकर वरुण फरार है। अब पुलिस CCTV फुटेज तकनीकी लोकेशन और उसके संपर्कों को जोड़कर यह पता लगाने में जुटी है कि वृंदावन से आगे वह किस दिशा में गया है। पुलिस का फोकस उसे जल्द पकड़ने के साथ हत्या के पीछे की पूरी वजह सामने लाने पर भी है।

  • लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी

    लाड़ली बहना के सवाल पर ठहाकों से गूंजा बुंदेली समागम, CM मोहन यादव बोले मुझे क्या पता था इतनी भारी मार पड़ेगी


    भोपाल । भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का अलग अंदाज देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान बुंदेली कंटेंट क्रिएटर्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने मुख्यमंत्री से कई सवाल पूछे। इसी दौरान छतरपुर की बुंदेली कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से महिलाओं और बेटियों को लेकर सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया और लाड़ली बहना योजना का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें पता चला कि इस योजना की कितनी बड़ी जिम्मेदारी है।

    बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्होंने अपनी जिज्जियों यानी बहनों के लिए तो काफी कुछ किया है लेकिन उनकी बिन्नुओं यानी बेटियों के लिए वह क्या करना चाहते हैं। सवाल सुनकर मुख्यमंत्री ने हल्के फुल्के अंदाज में कहा कि उन्हें क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच ठहाके गूंजने लगे।

    मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि उनकी बहनों के लिए किसी तरह की परेशानी नहीं है। उन्होंने लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में मिलने वाली एक हजार रुपए की राशि का जिक्र किया। साथ ही बताया कि अब यह सहायता बढ़कर डेढ़ हजार रुपए तक पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री ने बिन्नू रानी से मजाकिया अंदाज में कहा कि अभी वह लाड़ली बहना योजना के लिए छोटी हैं और जब बड़ी हो जाएंगी तो उन्हें भी इसका लाभ दिया जाएगा।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री से बुंदेलखंड के विकास और युवाओं से जुड़े सवाल भी किए गए। एक युवा ने उनसे पूछा कि अगर बुंदेलखंड के युवाओं की कोई एक समस्या 24 घंटे में हल करनी हो तो वह क्या करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड जैसी बड़ी समस्या को 24 घंटे में हल करना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों में क्षमता योग्यता और बुद्धिमत्ता की कमी नहीं है। सरकार का काम उन्हें आगे बढ़ने के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड से होने वाले पलायन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले रोजगार और पानी से जुड़ी समस्याओं के कारण क्षेत्र से पलायन की स्थिति बनती थी। अब सरकार सिंचाई का रकबा बढ़ाने पर काम कर रही है। इसी क्रम में केन बेतवा जैसी बड़ी परियोजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी की उपलब्धता बढ़ने से क्षेत्र के कई सेक्टर में बदलाव आने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में फिल्म अभिनेता मुकेश तिवारी के साथ बड़ी संख्या में बुंदेली सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स मौजूद रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने उनसे संवाद किया और उनके सवालों के जवाब भी दिए। कार्यक्रम में बुंदेली संस्कृति और क्षेत्र की समस्याओं के साथ सरकार की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।

    लाड़ली बहना योजना की बात करें तो इसकी घोषणा 28 जनवरी 2023 को तत्कालीन शिवराज सरकार ने की थी। योजना का औपचारिक शुभारंभ 5 मार्च 2023 को हुआ था। शुरुआत में पात्र महिलाओं को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने का प्रावधान था। जून 2023 में योजना की पहली किस्त जारी की गई थी।

    शुरुआती चरण में करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाएं योजना के लिए पात्र थीं। पहली किस्त के दौरान एक करोड़ से ज्यादा महिलाओं को भुगतान किया गया था। इसके बाद समय के साथ योजना की मासिक सहायता राशि बढ़ाई गई। सितंबर 2026 में जारी 40वीं किस्त के दौरान करीब एक करोड़ 25 लाख महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई। मौजूदा समय में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए की सहायता राशि मिल रही है।

    बुंदेली समागम में मुख्यमंत्री की लाड़ली बहना पर की गई टिप्पणी भले ही मजाकिया अंदाज में रही हो लेकिन इसके जरिए उन्होंने योजना की जिम्मेदारी और महिलाओं के लिए सरकार की आर्थिक सहायता का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की प्रतिक्रियाओं और सवाल जवाब के बीच मुख्यमंत्री का यह अंदाज चर्चा का विषय बना रहा।