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  • जोस बटलर का ऐतिहासिक कारनामा, टी20 क्रिकेट के सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बने

    जोस बटलर का ऐतिहासिक कारनामा, टी20 क्रिकेट के सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज बने


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में नया इतिहास रचते हुए खुद को इस फॉर्मेट का सबसे सफल रन बनाने वाला बल्लेबाज बना दिया है। द हंड्रेड 2026 टूर्नामेंट में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स और वेल्श फायर के बीच खेले गए मुकाबले में बटलर ने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से न केवल टीम को शानदार जीत दिलाई बल्कि वेस्टइंडीज के दिग्गज कीरोन पोलार्ड का वर्षों पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। इस उपलब्धि के साथ बटलर ने टी20 क्रिकेट के इतिहास में अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया।

    मुकाबले में वेल्श फायर ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 155 रन का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की टीम को कप्तान जोस बटलर ने तेज शुरुआत दिलाई। उन्होंने केवल 20 गेंदों में 51 रन की विस्फोटक पारी खेली जिसमें 2 चौके और 6 लंबे छक्के शामिल रहे। बटलर की आक्रामक बल्लेबाजी के सामने विपक्षी गेंदबाज पूरी तरह बेबस नजर आए। उनकी पारी की बदौलत टीम ने केवल एक विकेट खोकर 156 रन का लक्ष्य आसानी से हासिल कर लिया और 9 विकेट से शानदार जीत दर्ज की।

    इस अर्धशतकीय पारी के दौरान ही जोस बटलर ने टी20 क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। अब उनके नाम इस फॉर्मेट में कुल 14833 रन दर्ज हो चुके हैं। उन्होंने इस मामले में कीरोन पोलार्ड को पीछे छोड़ दिया जिनके नाम 14803 रन थे। इस सूची में तीसरे स्थान पर वेस्टइंडीज के विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल हैं जिन्होंने टी20 क्रिकेट में 14562 रन बनाए हैं। यह उपलब्धि बटलर की निरंतरता और लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन का प्रमाण मानी जा रही है।

    इस मुकाबले में बटलर ने केवल बल्लेबाजी ही नहीं बल्कि कप्तानी में भी अपनी छाप छोड़ी। नियमित कप्तान एडम मार्करम के निजी कारणों से उपलब्ध नहीं होने पर टीम की कमान बटलर को सौंपी गई थी। उनकी कप्तानी में मैनचेस्टर सुपर जायंट्स के गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया और वेल्श फायर को 155 रन पर रोक दिया। टीम ने हर विभाग में संतुलित प्रदर्शन करते हुए मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा।

    वेल्श फायर की ओर से फिल साल्ट ने 37 गेंदों में 48 रन की उपयोगी पारी खेली जबकि मैथ्यू शॉर्ट ने 47 गेंदों में 71 रन बनाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने अपनी पारी में 8 चौके और 2 छक्के लगाए लेकिन अन्य बल्लेबाज उनका साथ नहीं दे सके जिसके कारण टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही।

    मैनचेस्टर सुपर जायंट्स की जीत में टिम सीफर्ट का योगदान भी बेहद अहम रहा। उन्होंने 36 गेंदों में नाबाद 62 रन की शानदार पारी खेली जिसमें 10 चौके शामिल थे। उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। वहीं पॉल वाल्टर ने भी 18 गेंदों में 37 रन बनाकर जीत को आसान बना दिया।

    जोस बटलर की यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत रिकॉर्ड नहीं बल्कि आधुनिक टी20 क्रिकेट में उनकी महानता का भी प्रमाण है। लगातार आक्रामक बल्लेबाजी शानदार नेतृत्व और हर परिस्थिति में मैच जिताने की क्षमता ने उन्हें इस दौर के सबसे सफल टी20 बल्लेबाजों में शामिल कर दिया है। अब दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों की नजर इस बात पर रहेगी कि बटलर इस रिकॉर्ड को आने वाले वर्षों में कितनी ऊंचाई तक पहुंचाते हैं।

  • सुजल सिंह का दमदार प्रदर्शन भी नहीं बचा सका टीम को, सार्थक रंजन ने दिलाई नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स को जीत

    सुजल सिंह का दमदार प्रदर्शन भी नहीं बचा सका टीम को, सार्थक रंजन ने दिलाई नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स को जीत


    नई दिल्ली। दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 के 11वें मुकाबले में नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए ईस्ट दिल्ली राइडर्स को 6 विकेट से हराकर टूर्नामेंट में दमदार जीत हासिल की। इस मुकाबले में ईस्ट दिल्ली के बल्लेबाज सुजल सिंह ने नाबाद 82 रन की बेहतरीन पारी खेलकर अपनी टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाया लेकिन नॉर्थ दिल्ली के कप्तान सार्थक रंजन की विस्फोटक बल्लेबाजी ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। सार्थक ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए मुकाबले का रुख पूरी तरह बदल दिया और अपनी टीम को आसान जीत दिला दी।

    171 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही। टीम ने शुरुआती ओवरों में ही दो अहम विकेट गंवा दिए। वैभव कांडपाल केवल 5 रन बनाकर आउट हो गए जबकि अर्नव बग्गा भी 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। 39 रन के स्कोर पर दो विकेट गिरने के बाद ऐसा लग रहा था कि मुकाबला ईस्ट दिल्ली की पकड़ में जा सकता है लेकिन इसके बाद कप्तान सार्थक रंजन और यश भाटिया ने पारी को शानदार तरीके से संभाल लिया।

    दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए केवल 61 गेंदों में 113 रन की विस्फोटक साझेदारी कर मैच पूरी तरह नॉर्थ दिल्ली के पक्ष में कर दिया। कप्तान सार्थक रंजन ने अपनी कप्तानी पारी में केवल 50 गेंदों का सामना करते हुए 95 रन बनाए। उनकी इस धमाकेदार पारी में 7 चौके और 8 लंबे छक्के शामिल रहे। वह शतक से केवल 5 रन दूर रह गए लेकिन तब तक टीम को जीत की दहलीज पर पहुंचा चुके थे। दूसरी ओर यश भाटिया ने भी शानदार जिम्मेदारी निभाई और 34 गेंदों में नाबाद 53 रन बनाकर अंत तक क्रीज पर डटे रहे। नॉर्थ दिल्ली ने लक्ष्य को केवल 16 ओवर में 4 विकेट खोकर हासिल कर लिया और बड़ी जीत अपने नाम कर ली।

    इससे पहले टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करते हुए ईस्ट दिल्ली राइडर्स ने 20 ओवर में 6 विकेट खोकर 171 रन बनाए। टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और शुरुआती बल्लेबाज बड़ी पारी खेलने में नाकाम रहे। अर्पित राणा 18 रन बनाकर आउट हुए जबकि ध्रुव कौशिक ने 14 रन बनाए। कप्तान मयंक रावत भी केवल 16 रन ही जोड़ सके। काव्या गुप्ता 2 रन पर आउट हो गए जबकि सूर्यांश रैना ने 16 रन का योगदान दिया।

    एक छोर पर लगातार विकेट गिरने के बावजूद सुजल सिंह ने शानदार धैर्य और आक्रामकता का परिचय दिया। उन्होंने 50 गेंदों में नाबाद 82 रन बनाए और अपनी टीम को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया। अपनी पारी के दौरान उन्होंने 6 चौके और 4 छक्के लगाए तथा अंत तक आउट नहीं हुए। हालांकि उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल सका जिसके कारण टीम 171 रन तक ही पहुंच पाई।

    गेंदबाजी में नॉर्थ दिल्ली की ओर से मयंक डागर सबसे सफल गेंदबाज रहे। उन्होंने किफायती गेंदबाजी करते हुए 16 रन देकर 2 विकेट अपने नाम किए। अन्य गेंदबाजों ने भी नियमित अंतराल पर विकेट लेकर ईस्ट दिल्ली को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोक दिया।

    इस जीत के साथ नॉर्थ दिल्ली स्ट्राइकर्स ने डीपीएल 2026 में अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी है। कप्तान सार्थक रंजन की विस्फोटक बल्लेबाजी और टीम के संतुलित प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि नॉर्थ दिल्ली इस सीजन खिताब की मजबूत दावेदार टीमों में शामिल है।

  • महात्मा विदुर की सीख आज भी है प्रासंगिक, सफलता पाने के लिए छोड़नी होंगी ये बुरी आदतें

    महात्मा विदुर की सीख आज भी है प्रासंगिक, सफलता पाने के लिए छोड़नी होंगी ये बुरी आदतें


    नई दिल्ली। महाभारत काल के महान नीति ज्ञाता महात्मा विदुर ने अपने जीवन अनुभवों और गहन ज्ञान के आधार पर ऐसी शिक्षाएं दीं जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी हजारों वर्ष पहले थीं। विदुर नीति केवल राजधर्म या शासन की बात नहीं करती बल्कि यह हर व्यक्ति को सफल संतुलित और सुखी जीवन जीने का मार्ग भी दिखाती है। महात्मा विदुर का मानना था कि इंसान की सफलता या असफलता का सबसे बड़ा कारण उसके अपने कर्म और आदतें होती हैं। यदि व्यक्ति अपने भीतर मौजूद दोषों पर नियंत्रण कर ले तो वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकता है।

    विदुर नीति के अनुसार मनुष्य के भीतर ऐसे छह अवगुण होते हैं जो उसकी उन्नति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। इनमें अत्यधिक नींद सुस्ती भय क्रोध आलस्य और हर काम को टालने की आदत शामिल है। ये सभी दोष धीरे धीरे व्यक्ति की कार्यक्षमता को कमजोर कर देते हैं और उसे अपने लक्ष्य से दूर ले जाते हैं। जरूरत से ज्यादा सोने वाला व्यक्ति अपने समय का सही उपयोग नहीं कर पाता जबकि सुस्ती और आलस्य उसे मेहनत करने से रोकते हैं। ऐसे लोग अक्सर अच्छे अवसर भी गंवा देते हैं।

    महात्मा विदुर ने भय को भी मनुष्य का बड़ा शत्रु बताया है। डर व्यक्ति के आत्मविश्वास को खत्म कर देता है और वह जीवन में बड़े फैसले लेने से बचता रहता है। दूसरी ओर क्रोध विवेक को नष्ट कर देता है। गुस्से में लिया गया एक गलत निर्णय वर्षों की मेहनत को बर्बाद कर सकता है। इसलिए विदुर नीति संयम और धैर्य को सफलता की सबसे बड़ी कुंजी मानती है।

    काम टालने की आदत को भी विदुर ने अत्यंत हानिकारक बताया है। उनका कहना था कि जो कार्य आज किया जा सकता है उसे कल पर छोड़ना व्यक्ति की सबसे बड़ी भूल होती है। समय पर काम पूरा करने वाला व्यक्ति ही आगे बढ़ता है जबकि टालमटोल करने वाला हमेशा अवसर खो देता है। आलस्य और टालमटोल मिलकर इंसान को धीरे धीरे असफलता की ओर धकेल देते हैं।

    विदुर नीति केवल इन छह दोषों से सावधान रहने की सलाह नहीं देती बल्कि आत्मा के पतन के तीन सबसे बड़े कारणों का भी उल्लेख करती है। महात्मा विदुर ने काम यानी अनियंत्रित वासना क्रोध और लोभ को नरक का द्वार बताया है। उनका मानना था कि जब मनुष्य इन तीनों अवगुणों के वश में आ जाता है तब वह सही और गलत का अंतर भूलने लगता है। अत्यधिक इच्छाएं व्यक्ति को भटकाती हैं क्रोध उसे विनाश की ओर ले जाता है और लोभ उसे कभी संतुष्ट नहीं होने देता।

    लोभ के बारे में विदुर का कहना था कि लालची व्यक्ति चाहे जितना धन या सफलता हासिल कर ले उसे कभी संतोष नहीं मिलता। यही असंतोष उसे गलत रास्ते अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इसी प्रकार अनियंत्रित इच्छाएं और क्रोध भी व्यक्ति के चरित्र और सम्मान दोनों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए उन्होंने इन तीनों पर नियंत्रण रखने की सलाह दी।

    आज के आधुनिक जीवन में भी विदुर नीति की ये शिक्षाएं बेहद उपयोगी हैं। प्रतिस्पर्धा से भरी दुनिया में यदि व्यक्ति समय का सम्मान करे आलस्य और भय को त्याग दे क्रोध पर नियंत्रण रखे तथा लोभ और अनियंत्रित इच्छाओं से दूर रहे तो वह न केवल सफलता प्राप्त कर सकता है बल्कि मानसिक शांति और संतुलित जीवन भी जी सकता है। महात्मा विदुर की यही सीख आज भी हर व्यक्ति को आत्मविकास और सही जीवन मार्ग की प्रेरणा देती है।

  • कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी, गोल्ड-सिल्वर मार्केट ने बनाया नया रिकॉर्ड; क्या है वजह?

    कीमती धातुओं में जबरदस्त तेजी, गोल्ड-सिल्वर मार्केट ने बनाया नया रिकॉर्ड; क्या है वजह?


    नई दिल्ली। पिछले 48 घंटों में सोना और चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है जिसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स से लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजार तक कीमती धातुओं में तेज खरीदारी देखने को मिली है। महज दो दिनों के भीतर सोने की कीमत में 5750 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई जबकि चांदी ने 11000 रुपये से अधिक की छलांग लगाकर बाजार में नई हलचल पैदा कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और भू राजनीतिक घटनाक्रमों ने निवेशकों का रुख एक बार फिर सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ दिया है।

    एमसीएक्स के ताजा आंकड़ों के अनुसार बुधवार रात सोना लगभग 148650 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ जबकि सोमवार को यह 142900 रुपये के स्तर पर था। यानी केवल 48 घंटे में सोने की कीमत 5750 रुपये बढ़ गई। इसी अवधि में चांदी 216506 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर करीब 227590 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। इस तरह चांदी में भी 11084 रुपये की तेज बढ़त दर्ज की गई।

    हालांकि इतनी तेज रिकवरी के बावजूद दोनों कीमती धातुएं अभी भी अपने ऑल टाइम हाई से नीचे कारोबार कर रही हैं। सोना जनवरी में बने अपने रिकॉर्ड स्तर 193096 रुपये प्रति 10 ग्राम से अभी भी लगभग 44446 रुपये सस्ता है। वहीं चांदी भी अपने रिकॉर्ड स्तर 420048 रुपये प्रति किलोग्राम से करीब 192458 रुपये नीचे बनी हुई है। इसका मतलब है कि हालिया तेजी के बावजूद लंबी अवधि के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने में अभी काफी दूरी बाकी है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। सोना 4300 डॉलर प्रति औंस के स्तर को पार कर गया जो पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है। चांदी में भी लगातार मजबूती दर्ज की गई और निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के तौर पर इन दोनों धातुओं में दिलचस्पी दिखाई। वैश्विक बाजार में आई इस तेजी का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।

    विशेषज्ञों के अनुसार इस उछाल की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया से आई सकारात्मक खबरें हैं। ईरान और ओमान के बीच संभावित समझौते तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुचारु रूप से खोलने की उम्मीद ने वैश्विक बाजार की धारणा बदल दी है। इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ और महंगाई को लेकर निवेशकों की चिंता भी कुछ हद तक घटी। इसी कारण वित्तीय बाजारों में स्थिरता लौटने लगी और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में निवेश बढ़ गया।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के साथ बातचीत को लेकर दिए गए सकारात्मक बयान ने भी बाजार को मजबूती दी है। निवेशकों को उम्मीद है कि तनाव कम होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी। इसके साथ ही अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों को लेकर भी बाजार की उम्मीदें बदली हैं। अब माना जा रहा है कि इस वर्ष ब्याज दरों में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी होगी। कम ब्याज दरों का माहौल आमतौर पर सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के लिए सकारात्मक माना जाता है क्योंकि इन पर ब्याज नहीं मिलता और निवेशक इन्हें सुरक्षित विकल्प के रूप में चुनते हैं।

    बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में सोने और चांदी की चाल पूरी तरह वैश्विक घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति पर निर्भर करेगी। यदि भू राजनीतिक तनाव कम होता है और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहती है तो कीमतों में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय बाजार की दिशा पर नजर रखते हुए सोच समझकर निवेश करना चाहिए।

  • सबसे वैल्यूबल सेलेब्रिटी की नई रैंकिंग जारी, रणवीर सिंह आगे निकले; विराट कोहली पीछे, रणबीर कपूर फिसले

    सबसे वैल्यूबल सेलेब्रिटी की नई रैंकिंग जारी, रणवीर सिंह आगे निकले; विराट कोहली पीछे, रणबीर कपूर फिसले


    नई दिल्ली। भारत के सबसे वैल्यूबल सेलेब्रिटी ब्रांड्स की नई रैंकिंग सामने आने के बाद मनोरंजन और खेल जगत में नई चर्चा शुरू हो गई है। इस बार बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान ने एक बार फिर अपनी बादशाहत कायम रखते हुए देश के सबसे वैल्यूबल सेलेब्रिटी का खिताब अपने नाम किया है। वहीं रणवीर सिंह ने शानदार छलांग लगाते हुए क्रिकेट स्टार विराट कोहली को पीछे छोड़ दिया है। इस नई सूची ने यह साफ कर दिया है कि मनोरंजन और विज्ञापन जगत में सितारों की लोकप्रियता लगातार बदल रही है और ब्रांड वैल्यू के मामले में कड़ी प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।

    रिपोर्ट के अनुसार शाहरुख खान की अनुमानित ब्रांड वैल्यू 177.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। इसी के साथ वह देश के सबसे मूल्यवान सेलेब्रिटी ब्रांड बन गए हैं। दूसरे स्थान पर रणवीर सिंह ने कब्जा जमाया है जिनकी ब्रांड वैल्यू 162.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताई गई है। यह उपलब्धि उनके करियर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि पिछले साल तक इस स्थान पर विराट कोहली थे। इस बार विराट कोहली 158.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ब्रांड वैल्यू के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।

    रैंकिंग में क्रिकेट और बॉलीवुड दोनों का दबदबा देखने को मिला। महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर 125.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर की ब्रांड वैल्यू के साथ चौथे स्थान पर रहे जबकि पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 115.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर के साथ पांचवें नंबर पर हैं। इससे साफ है कि खेल जगत के दिग्गज आज भी विज्ञापन बाजार में सबसे भरोसेमंद चेहरों में शामिल हैं।

    महिला सितारों में आलिया भट्ट ने शानदार प्रदर्शन करते हुए छठा स्थान हासिल किया है। उनकी ब्रांड वैल्यू 93.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर बताई गई है। इसके बाद दीपिका पादुकोण सातवें स्थान पर हैं जिनकी ब्रांड वैल्यू 89.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। इसके अलावा ऋतिक रोशन आठवें स्थान पर जबकि महानायक अमिताभ बच्चन नौवें स्थान पर मौजूद हैं।

    सूची में रणबीर कपूर और अक्षय कुमार संयुक्त रूप से दसवें स्थान पर रहे। हालांकि टॉप 10 में रणबीर कपूर सबसे निचले पायदान पर दिखाई दिए। इसके बावजूद वह देश के सबसे प्रभावशाली ब्रांड चेहरों में अपनी जगह बनाए रखने में सफल रहे हैं। यह सूची बताती है कि फिल्मों की सफलता के साथ साथ विज्ञापन जगत में विश्वसनीयता और लोकप्रियता भी किसी स्टार की ब्रांड वैल्यू तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है।

    रणवीर सिंह के लिए यह उपलब्धि कई मायनों में खास मानी जा रही है। हाल के समय में उनकी फिल्मों की सफलता और लगातार बढ़ती लोकप्रियता ने उन्हें विज्ञापन कंपनियों की पहली पसंद बना दिया है। आने वाले समय में उनकी नई फिल्म प्रलय को लेकर भी दर्शकों में काफी उत्साह है। रिपोर्ट के अनुसार फिल्म की शूटिंग पूरी करने के बाद वह परिवार के साथ समय बिताने के लिए कुछ समय का ब्रेक भी ले सकते हैं।

    नई रैंकिंग यह संकेत देती है कि भारतीय मनोरंजन और खेल जगत के सितारे केवल पर्दे या मैदान तक सीमित नहीं हैं बल्कि वैश्विक ब्रांड्स के लिए भी सबसे बड़े आकर्षण बने हुए हैं। आने वाले वर्षों में यह प्रतिस्पर्धा और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।

  • FCRA बिल पर घिरी सरकार… परिसीमन विधेयक की राह में खतरा बनेगी सहयोगी दलों की नाराजगी!

    FCRA बिल पर घिरी सरकार… परिसीमन विधेयक की राह में खतरा बनेगी सहयोगी दलों की नाराजगी!


    नई दिल्ली।
    संसद (Parliament) के मौजूदा सत्र में केंद्र सरकार के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। चर्चा इस बात को लेकर तेज है कि क्या भाजपा (BJP) के नेतृत्व वाली सरकार विदेशी अंशदान विनियमन कानून (FCRA) में संशोधन से जुड़े विधेयक को इसी सप्ताह सदन में पेश करेगी या फिर इसे आगे के लिए टाल दिया जाएगा। इसके पीछे एक बड़ा राजनीतिक समीकरण बताया जा रहा है, जिसका सीधा संबंध प्रस्तावित परिसीमन विधेयक (Proposed Delimitation Bill) से जुड़ा हुआ है।

    FCRA संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार को संसद में साधारण बहुमत की जरूरत होगी, लेकिन परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को मंजूरी दिलाने के लिए व्यापक समर्थन जुटाना आवश्यक होगा। यही वजह है कि दोनों विधेयकों को लेकर सरकार की रणनीति को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं बढ़ गई हैं।

    सूत्रों के अनुसार, भाजपा अपने महत्वाकांक्षी परिसीमन विधेयक, जिसे 131वें संविधान संशोधन विधेयक के रूप में पेश किए जाने की संभावना है, को पारित कराने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से बाहर मौजूद दलों से भी संपर्क साध रही है। हालांकि दूसरी ओर विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक 2026 को लेकर कई विपक्षी और क्षेत्रीय दलों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। तमिलनाडु की डीएमके और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) जैसे दल इसका विरोध करने के संकेत दे चुके हैं, जबकि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी जैसे दल अभी अपने रुख को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।

    एक समाचार चैनल द्वारा विभिन्न राजनीतिक दलों के शीर्ष नेताओं और सूत्रों से बातचीत में यह सामने आया कि FCRA विधेयक को लेकर दलों के बीच मतभेद गहरे हैं। इसमें भाजपा के सहयोगी दलों की राय भी शामिल है। दक्षिण भारत की एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी ने मौजूदा स्वरूप में FCRA विधेयक को लेकर चिंता जताई है। पार्टी को आशंका है कि प्रस्तावित बदलावों का असर उन संस्थानों पर पड़ सकता है, जो उसके परंपरागत मतदाता वर्ग से जुड़े हुए हैं।

    पार्टी के एक वरिष्ठ सूत्र ने कहा, “सरकार के साथ बातचीत अभी जारी है। यदि हमारे सुझावों को स्वीकार किया जाता है तो हम सहयोग करने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो हमें विरोध करना पड़ेगा।” मतदान से दूरी बनाने के विकल्प पर उन्होंने कहा कि यह उनके लिए संभव नहीं है। पार्टी या तो विधेयक के समर्थन में मतदान करेगी या फिर विरोध में। उनका कहना था कि यह विषय उनके मुख्य मतदाता वर्ग से सीधे जुड़ा हुआ है और इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    सूत्रों के अनुसार, इस क्षेत्रीय दल का बड़ा समर्थन आधार ईसाई और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों में है। पार्टी को डर है कि FCRA विधेयक का वर्तमान स्वरूप इन समुदायों के बीच असंतोष पैदा कर सकता है। राजनीतिक स्थिति यह है कि परिसीमन विधेयक पर यह दल सरकार के साथ खड़ा हो सकता है, लेकिन इसके लिए उसकी अपनी शर्तें हैं। वहीं FCRA संशोधन विधेयक पर समर्थन मिलने की संभावना काफी कम नजर आ रही है।

    इधर, एनसीपी (शरद पवार गुट) और डीएमके ने भी स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वे FCRA विधेयक के मौजूदा स्वरूप के पक्ष में नहीं हैं। दोनों दल चाहते हैं कि इस विधेयक को आगे विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए। एनसीपी (शरद पवार गुट) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस विधेयक पर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि हर दानदाता और हर संस्था को संदेह की नजर से क्यों देखा जाए।

    एनसीपी सांसद ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं और धर्मार्थ संगठनों के माध्यम से मिलने वाली सहायता का उपयोग बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण के कार्यों में होता है। उनका कहना था कि कुछ संस्थाओं की गलतियों के आधार पर सभी संस्थानों और दानदाताओं पर संदेह करना उचित नहीं है।

    उन्होंने कहा कि मौजूदा स्वरूप में उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन नहीं कर सकती और इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की मांग करेगी। वहीं परिसीमन विधेयक पर समर्थन के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब तक राजनीतिक दलों को विधेयक का प्रारूप उपलब्ध नहीं कराया जाता, तब तक कोई अंतिम निर्णय लेना संभव नहीं है।

    डीएमके भी FCRA विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने की मांग कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, तमिलनाडु में कांग्रेस से दूरी बढ़ने के बाद डीएमके इस मुद्दे पर अपनी अलग राजनीतिक लाइन तैयार कर रही है। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा स्वरूप में यह विधेयक अल्पसंख्यक संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों और गैर सरकारी संगठनों पर दबाव बढ़ाने का माध्यम बन सकता है। उनका कहना था कि विधेयक में ऐसे प्रावधान हैं, जिनसे सरकार को FCRA के तहत धन प्राप्त करने वाले संस्थानों की संपत्तियों पर कार्रवाई करने का अधिकार मिल सकता है, जिसमें पहले से खरीदी गई संपत्तियां भी शामिल हो सकती हैं।

    डीएमके नेता ने सवाल उठाया कि वर्षों पहले खरीदी गई संपत्तियों पर बाद में कार्रवाई करने का अधिकार देना कितना उचित होगा। उन्होंने कहा कि गैर सरकारी संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यदि सुधार की जरूरत है तो नियमों में बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा प्रावधान नहीं होना चाहिए जिससे सभी संस्थानों को संदेह के घेरे में खड़ा कर दिया जाए।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि डीएमके और वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियां FCRA विधेयक का विरोध करती हैं और दूसरी ओर परिसीमन विधेयक पर भाजपा का समर्थन करती हैं तो उनके सामने राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी। सूत्रों के अनुसार, इन दलों में इस मुद्दे पर गंभीर मंथन चल रहा है। वहीं विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने संसद में FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि कांग्रेस कई कारणों से इस विधेयक का विरोध करेगी।

    केरल से जुड़े कांग्रेस नेताओं ने भी आशंका जताई है कि प्रस्तावित संशोधनों का असर राज्य के गैर सरकारी संगठनों और धार्मिक संस्थाओं पर पड़ सकता है। विपक्ष का कहना है कि पिछली तारीख से संपत्तियों पर कार्रवाई करने की संभावित शक्ति और अधिकारियों को व्यापक अधिकार देना चिंता का विषय है। एक वरिष्ठ सीपीएम नेता ने दावा किया कि प्रस्तावित FCRA संशोधन के तहत अधिकारियों को मिलने वाली शक्तियां वक्फ संशोधन कानून में दिए गए अधिकारों से भी अधिक व्यापक हो सकती हैं।

    गौरतलब है कि इससे पहले महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को विपक्षी एकजुटता के कारण संसद में चुनौती का सामना करना पड़ा था। हालांकि पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। वहीं एनसीपी के नए राजनीतिक समीकरण और ‘ऑपरेशन टाइगर’ की सफलता के बाद NDA का संख्या बल मजबूत हुआ है।

    ऐसे में भाजपा आने वाले छह महीने से कम समय में परिसीमन विधेयक को आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है। राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए अब इस विधेयक के पारित होने की संभावना पहले की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है, लेकिन FCRA संशोधन विधेयक पर सहयोगी दलों और विपक्ष की नाराजगी सरकार के लिए नई चुनौती बन सकती है।

  • MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे

    MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे


    इंदौर।
    नगर निगम (Municipal council) द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए जा रहे फोर लेयर रंबल स्ट्रिप (Four-layer rumble strip) वाहन चालकों के लिए हादसों का सबब बन रहे हैं। स्पीड ब्रेकर (Speed ​​breaker) के स्थान पर लगाई जाने वाली यह प्लास्टिक व रबर की रंबल स्ट्रिप लगने के कुछ ही दिनों बाद टूट रही हैं। शहर में अधिकांश स्थानों पर जहां इन्हें स्थापित किया गया था, वहां से ये स्ट्रिप पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। इन स्ट्रिप को मजबूत पकड़ देने के लिए लोहे की कीलों से सड़क पर ठोका गया था। अब स्ट्रिप के टूटने और उखड़ने के बाद सड़क पर उभरी हुई नुकीली कीलें राहगीरों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। इन उभरी कीलों के कारण आए दिन वाहनों के टायर पंक्चर हो रहे हैं। अचानक सामने दिखने वाली कीलों से बचने की कोशिश में वाहन चालक अनियंत्रित होकर एक-दूसरे से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।


    प्रमुख मार्गों पर उखड़े स्पीड ब्रेकर और फैली कीलें

    एलआईजी चौराहा से लेकर कलश चौराहा तक 4 से ज्यादा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिनकी ऊंचाई सामान्य मानकों से काफी अधिक है। इन रबर के स्पीड ब्रेकरों को लगाते समय लोहे की कीलें ठोकी गई थीं। समय के साथ रबर के पल्ले उखड़ गए और अब केवल खतरनाक कीलें ही सड़क पर शेष बची हैं। उल्लेखनीय है कि एक पल्ले को कसने के लिए 4 से 6 कीलें ठोकी गई थीं, जो अब बाहर निकल आई हैं। इसी प्रकार पोलो ग्राउंड स्थित सांदिपनी स्कूल के सामने लगाया गया डबल स्पीड ब्रेकर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और उसके बीच के बॉक्स पूरी तरह उखड़ गए हैं। एमआर 4 तथा मरीमाता लिंक रोड पर 2 स्थानों पर लगाए गए रंबल स्ट्रिप लगभग पूरी तरह उखड़ चुके हैं। बाणगंगा क्षेत्र में मनोचिकित्सालय से लेकर ओवरब्रिज के बीच 2 स्थानों पर लगे रंबल स्ट्रिप का बड़ा हिस्सा टूट गया है। इसके अलावा एमटीएच कंपाउंड स्थित यातायात थाना के पास और मालवा ब्रिज से लेकर परदेशीपुरा तक 2 स्थानों पर लगाए गए स्पीड ब्रेकर भी उखड़कर जर्जर हो चुके हैं।


    आईडीए चौराहे पर रंबल स्ट्रिप टूटी और वाहन चालक परेशान

    रेसकोर्स रोड पर स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) चौराहे पर नगर निगम द्वारा फोर लेयर रंबल स्ट्रिप लगाई गई थी, जो घटिया निर्माण के कारण कुछ ही दिनों में टूटने लगी। वर्तमान में यहां की अधिकांश स्ट्रिप टूट चुकी हैं और केवल नुकीली कीलें सड़क पर बाहर निकली हुई हैं। स्थानीय वाहन चालक मुकेश बरोले ने बताया कि रंबल स्ट्रिप की इन उभरी कीलों के कारण उनकी गाड़ी का टायर 3 बार पंक्चर हो चुका है। क्षेत्रीय रहवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर फोर लेयर रंबल स्ट्रिप की आवश्यकता ही नहीं थी। लैंटर्न चौराहे और जंजीरावाला चौराहे से आने-जाने वाले यातायात की गति को सामान्य स्पीड ब्रेकर के माध्यम से भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता था। रंबल स्ट्रिप पर वाहन अत्यंत धीमी गति से गुजरते हैं, फिर भी इनका इतनी जल्दी टूट जाना घटिया निर्माण गुणवत्ता की ओर सीधा इशारा करता है।


    नियमों की अनदेखी और सड़क सुरक्षा समिति के निर्णयों पर अमल नहीं

    आर्किटेक्ट अतुल शेठ के अनुसार शहर में स्पीड ब्रेकर का निर्माण करते समय किसी भी निर्धारित तकनीकी नियम व मानक का पालन नहीं किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप न केवल आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, बल्कि वाहनों के झटकों से लोगों को कमर दर्द व अन्य शारीरिक परेशानियां भी झेलनी पड़ रही हैं। अगस्त 2025 में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की आधिकारिक बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि शहर की कॉलोनियों और मुख्य सड़कों से सभी अवैध स्पीड ब्रेकर तत्काल हटाए जाएंगे, परंतु इस निर्णय पर आज तक अमल नहीं हो सका। समिति ने यह प्रावधान भी किया था कि सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व मंजूरी के बिना कहीं भी नया स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया जा सकेगा और यदि कोई निर्माण होता है तो उसकी संपूर्ण राशि संबंधित निर्माण एजेंसी से वसूल की जाएगी। इस आदेश को पारित हुए 1 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

  • US के नए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में चीन का बड़ा कदम…6 अमेरिकी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट

    US के नए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में चीन का बड़ा कदम…6 अमेरिकी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट


    बैंकॉक।
    अमेरिका (America) की ओर से लगाए गए नए व्यापारिक प्रतिबंधों (New trade restrictions) के जवाब में चीन (China) ने कई कड़े आर्थिक कदम उठाए हैं। चीन ने छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है और अमेरिका को ड्रोन, उनके प्रमुख पुर्जों तथा संबंधित तकनीक के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू कर दिए हैं। साथ ही आयातित प्रिंटर सॉफ्टवेयर और कार्यालय उपकरणों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जांच शुरू कर दी है।

    चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, कार्रवाई अमेरिका की ओर से चीनी ड्रोन के आयात पर रोक लगाने, 43 चीनी कंपनियों को उइगर जबरन श्रम रोकथाम कानून की सूची में शामिल करने और नए टैरिफ लगाने के जवाब में की गई है। अमेरिका के कदम दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के खिलाफ हैं और चीन के वैध हितों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए जवाबी कार्रवाई करना जरूरी हो गया।

    तीन माह में ही रिश्तों में फिर आई तल्खी
    चीन ने ड्रोन, उनके प्रमुख पुर्जों और दोहरे उपयोग (नागरिक और सैन्य) वाली तकनीक के निर्यात को मामला-दर-मामला (केस बाई केस) मंजूरी के दायरे में ला दिया है। अब चीन की कोई भी संस्था या व्यक्ति इन कंपनियों के साथ व्यापार, सहयोग या अन्य गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकेगा। मई में जिनपिंग-ट्रंप की मुलाकात के बाद रिश्तों में सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन तीन माह बाद ही फिर से तनाव फिर बढ़ गया है।


    सेना से लेकर पुलिस तक चीनी ड्रोन पर निर्भर अमेरिका

    – अमेरिका का ड्रोन उद्योग, चीनी ड्रोन और उनके कलपुर्जों पर 70 से 90 फीसदी तक निर्भर है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले लगभग 80 से 90 फीसदी व्यावसायिक ड्रोन चीनी कंपनियों (मुख्य रूप से डीजेआई-दा जियांग इनोवेशंस) द्वारा बनाए जाते हैं।
    – अमेरिकी पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के 90% से 92% ड्रोन चीनी निर्मित हैं। चीन एयरफ्रेम, मोटर, कैमरा, स्क्रीन और रेडियो सिस्टम सरीखे दुनिया के 90 फीसदी ड्रोन पार्ट्स नियंत्रित करता है।
    – ड्रोन में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के लिए आवश्यक रिफाइंड ग्रेफाइट का 70% और ड्रोन मोटर के चुंबकों का 90% हिस्सा अकेले चीन से आता है
    – अमेरिका में खेती (सटीक छिड़काव और फसल निगरानी), रियल एस्टेट मैपिंग, और कमर्शियल फोटोग्राफी के लिए चीनी ड्रोनों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
    – अमेरिका को अब हांगकांग या अन्य तीसरे देशों से पुर्जे मंगाने पड़ रहे हैं। इससे ड्रोन उत्पादन और पुर्जों की लागत में 25%-35% तक बढ़ेगी।

  • TRP के लिए नहीं था अलगाव का फैसला, आकांक्षा चमोला ने गौरव खन्ना संग रिश्ते पर रखी अपनी बात

    TRP के लिए नहीं था अलगाव का फैसला, आकांक्षा चमोला ने गौरव खन्ना संग रिश्ते पर रखी अपनी बात


    नई दिल्ली। टीवी अभिनेता गौरव खन्ना और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चाएं हो रही हैं। रियलिटी शो लॉक अप में आकांक्षा द्वारा अपने वैवाहिक जीवन को लेकर किए गए खुलासों के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि कहीं यह सब शो की लोकप्रियता और टीआरपी बढ़ाने की रणनीति तो नहीं है। अब शो से बाहर आने के बाद आकांक्षा चमोला ने इन सभी अटकलों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है और साफ कर दिया है कि उनके और गौरव खन्ना के बीच तलाक की प्रक्रिया पहले से चल रही थी और इसका शो की टीआरपी से कोई संबंध नहीं है।

    आकांक्षा ने कहा कि उन्होंने अपने निजी जीवन के बारे में जो बातें शो में साझा कीं वे किसी प्रचार का हिस्सा नहीं थीं। उनके मुताबिक दोनों का रिश्ता काफी समय पहले ही टूट चुका था और अब केवल कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं। उन्होंने कहा कि लोग इसे टीआरपी से जोड़ रहे हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि तलाक का फैसला पहले ही लिया जा चुका था और अब सिर्फ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने बाकी हैं।

    अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी तरह की सहानुभूति या लोकप्रियता हासिल करने के लिए अपनी निजी जिंदगी का इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं। उनका कहना है कि उन्होंने केवल सच बताया क्योंकि वह अपनी जिंदगी को लेकर अब किसी भ्रम में नहीं रहना चाहती थीं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हर रिश्ते की अपनी परिस्थितियां होती हैं और बाहर से लोग पूरी कहानी जाने बिना राय बना लेते हैं।

    गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी वर्ष 2016 में हुई थी। लंबे समय तक दोनों टीवी इंडस्ट्री के चर्चित कपल माने जाते रहे। हालांकि पिछले कुछ समय से दोनों के अलग रहने की खबरें सामने आने लगी थीं। लॉक अप के दौरान आकांक्षा ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपने अलगाव का जिक्र किया जिसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे शो का हिस्सा बताया तो कुछ ने इसे निजी फैसला माना।

    शो के दौरान गौरव खन्ना भी एक एपिसोड में नजर आए थे। उस समय दोनों के बीच हुई बातचीत ने दर्शकों का ध्यान खींचा था। इसके बाद भी उनके रिश्ते को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाते रहे लेकिन अब आकांक्षा के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तलाक का फैसला किसी रियलिटी शो या प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं बल्कि उनकी निजी जिंदगी का निर्णय है।

    आकांक्षा ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं और इस विषय पर बार बार सफाई देने की जरूरत नहीं समझतीं। उनके अनुसार निजी फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी के व्यक्तिगत रिश्तों को मनोरंजन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। फिलहाल दोनों की ओर से यही संकेत मिले हैं कि अलगाव आपसी सहमति से हो रहा है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस अध्याय का औपचारिक अंत हो जाएगा।

  • परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड

    परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद केंद्र के परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर द्रमुक के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। राज्य में चुनाव से पहले इस बिल का खुला विरोध कर रही द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद इसके समर्थन करने या नहीं करने का फैसला लिया जाएगा।

    सूत्रों का कहना है उसके इस रुख का मतलब है कि यदि बिल में यह प्रावधान होता है कि राज्यों में विधानसभा की मौजूदा सीटों की संख्या में समान रूप से 50% की वृद्धि होगी तो द्रमुक समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। अप्रैल में जो बिल सरकार ने पेश किया था, तब ऐसी बात कही गई थी लेकिन यह विधेयक में नहीं थी। वह विधेयक पारित नहीं हो पाया था।


    पहले विरोध में थी DMK

    सरकार पिछले सत्र में जब यह बिल लाई थी तो द्रमुक ने इसका खुलकर विरोध किया था और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया था। तब विधेयक के प्रावधानों की बात पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। सूत्रों का कहना है कि द्रमुक के दबाव में ही तब इंडिया गठबंधन ने इस विधेयक का विरोध किया था। तब सरकार को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाली कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी। द्रमुक के वरिष्ठ नेता त्रिरुचि शिवा ने कहा कि जो रुख पहले था, वह अब नहीं है। अब हम कह रहे हैं कि पहले विधेयक का प्रारूप सामने हो, उसके बाद निर्णय करेंगे।

    द्रमुक के लोकसभा में 22 सदस्य हैं जो सरकार को दो तिहाई बहुमत से इस विधेयक को पारित कराने में अहम साबित हो सकते हैं। इस बिल को पारित करने के लिए सरकार को लोकसभा में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। अभी तक एनडीए के पास 326 तक की संख्या हुई है। बता दें कि इससे पूर्व कांग्रेस के टीवीके सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर नाराज द्रमुक इंडिया गठबंधन से अलग हो चुका है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें उससे बढ़ी हैं।


    विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार रात कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार मौजूदा मॉनसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की नए सिरे से कोशिश कर रही है। इस विधेयक का मकसद 2029 में लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है।

    कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक फिर से पेश किए जा सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर रीजीजू ने विशेष सत्र के किसी भी प्रस्ताव से इनकार किया।