Blog

  • माइक्रोवेव में इन बर्तनों का इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, खाना गर्म करने से पहले जरूर जान लें ये जरूरी बातें

    माइक्रोवेव में इन बर्तनों का इस्तेमाल पड़ सकता है भारी, खाना गर्म करने से पहले जरूर जान लें ये जरूरी बातें

    नई दिल्ली: आज के समय में कई घरों में खाना गर्म करने और पकाने के लिए माइक्रोवेव का इस्तेमाल किया जाता है। सुविधा और समय की बचत के कारण इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन माइक्रोवेव में खाना गर्म करते समय बर्तन का सही चुनाव करना बेहद जरूरी है। कई लोग जल्दबाजी में किसी भी बर्तन में खाना रखकर उसे माइक्रोवेव में चला देते हैं। गलत बर्तनों का इस्तेमाल परेशानी का कारण बन सकता है और कुछ मामलों में आग लगने या अन्य हादसों का जोखिम भी रहता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि माइक्रोवेव में किन बर्तनों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

    सामान्य प्लास्टिक के डिब्बे और पॉलीथिन को माइक्रोवेव में इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। तेज गर्मी के संपर्क में आने पर प्लास्टिक पिघल सकता है और उसमें मौजूद कुछ रसायन भोजन में मिल सकते हैं। खासतौर पर ऐसे प्लास्टिक कंटेनर, जो माइक्रोवेव इस्तेमाल के लिए बनाए नहीं गए हैं, उनमें खाना गर्म करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए प्लास्टिक के किसी भी डिब्बे को माइक्रोवेव में रखने से पहले यह जरूर जांच लें कि वह माइक्रोवेव के लिए सुरक्षित है या नहीं।

    स्टील, तांबा, एल्युमिनियम फॉयल और अन्य धातु के बर्तनों का इस्तेमाल भी माइक्रोवेव में सावधानी के बिना नहीं करना चाहिए। धातु माइक्रोवेव की तरंगों को प्रतिबिंबित कर सकती है, जिससे चिंगारी निकलने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे माइक्रोवेव के अंदर आग लगने या उसके सर्किट को नुकसान पहुंचने की स्थिति बन सकती है। इसलिए माइक्रोवेव में धातु से बनी चीजें रखने से पहले उसके इस्तेमाल से जुड़ी स्पष्ट जानकारी जरूर देखनी चाहिए।

    कांच और मिट्टी के बर्तनों को लेकर भी सावधानी जरूरी है। हर तरह का कांच माइक्रोवेव के लिए सुरक्षित नहीं होता। सामान्य कांच तेज गर्मी के कारण चटक सकता है, इसलिए माइक्रोवेव सेफ चिह्न वाले बोरोसिलिकेट कांच के बर्तनों का ही इस्तेमाल करना बेहतर है। इसी तरह बिना पॉलिश वाले पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों को भी माइक्रोवेव में रखने से बचना चाहिए, क्योंकि वे नमी सोख सकते हैं और गर्म होने पर टूटने का खतरा रहता है।

    माइक्रोवेव के लिए सही बर्तन पहचानने का आसान तरीका यह है कि इस्तेमाल से पहले उसके तल पर बने माइक्रोवेव सेफ निशान या सिंबल को जरूर देखें। कांच, सिरेमिक और BPA-फ्री ग्रेड-5 प्लास्टिक को माइक्रोवेव के लिए सही माना जाता है, लेकिन इनके मामले में भी उत्पाद पर दिए गए निर्देशों को देखना जरूरी है। सही बर्तन का इस्तेमाल न केवल माइक्रोवेव को सुरक्षित रखने में मदद करता है, बल्कि खाना गर्म करते समय होने वाली संभावित परेशानी और हादसों के जोखिम को भी कम कर सकता है।

  • एशियन गेम्स के बाद टीम इंडिया का बड़ा मिशन, 26 दिनों में 10 टी20 मैच, वेस्टइंडीज से न्यूजीलैंड तक होगा जबरदस्त एक्शन

    एशियन गेम्स के बाद टीम इंडिया का बड़ा मिशन, 26 दिनों में 10 टी20 मैच, वेस्टइंडीज से न्यूजीलैंड तक होगा जबरदस्त एक्शन


    नई दिल्ली। एशियन गेम्स में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय क्रिकेट टीम अब एक और बड़े और व्यस्त क्रिकेट मिशन के लिए तैयार है। टीम इंडिया को आने वाले 26 दिनों के दौरान लगातार 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेलने हैं। इस लंबे और व्यस्त कार्यक्रम की शुरुआत वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू टी20 सीरीज से होगी। इसके बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर जाएगी जहां पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। लगातार मुकाबलों और लंबे सफर के कारण खिलाड़ियों के सामने फिटनेस बनाए रखना बड़ी चुनौती रहने वाली है।

    भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का पहला मुकाबला 6 अक्टूबर को लखनऊ में खेला जाएगा। यह मैच भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना स्टेडियम में होगा। इसके बाद 9 अक्टूबर को दूसरा मुकाबला रांची के जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेला जाएगा। तीसरा टी20 मैच 11 अक्टूबर को इंदौर के होलकर स्टेडियम में होगा। इसके बाद 14 अक्टूबर को हैदराबाद में चौथा मुकाबला खेला जाएगा जबकि सीरीज का पांचवां और आखिरी मैच 17 अक्टूबर को बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में होगा।

    वेस्टइंडीज सीरीज खत्म होने के तुरंत बाद भारतीय टीम न्यूजीलैंड के दौरे पर रवाना होगी। यहां भी दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज खेली जाएगी। न्यूजीलैंड के खिलाफ पहला मुकाबला 22 अक्टूबर को क्राइस्टचर्च के हैगली ओवल में होगा। दूसरा मैच भी इसी मैदान पर 24 अक्टूबर को खेला जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को तीसरा टी20 वेलिंगटन के स्काई स्टेडियम में होगा। चौथा मुकाबला 30 अक्टूबर को ऑकलैंड के ईडन पार्क में खेला जाएगा। दौरे का पांचवां और आखिरी टी20 मुकाबला 1 नवंबर को हैमिल्टन के सेडन पार्क में होगा।

    इस तरह भारतीय टीम को बेहद कम समय में 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से गुजरना होगा। घरेलू सीरीज में लगातार पांच मैच खेलने के बाद खिलाड़ियों को न्यूजीलैंड की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना होगा। अलग मौसम और पिच के साथ लगातार यात्रा भी खिलाड़ियों की परीक्षा लेगी। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के सामने खिलाड़ियों के वर्कलोड को संतुलित रखना अहम होगा।

    लगातार क्रिकेट के इस दौर में भारतीय टीम रोटेशन पॉलिसी का सहारा ले सकती है। इससे प्रमुख खिलाड़ियों को जरूरी आराम दिया जा सकता है और युवा खिलाड़ियों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। खासकर लंबे टूर्नामेंट और लगातार सीरीज को देखते हुए फिटनेस और रिकवरी पर टीम मैनेजमेंट का विशेष ध्यान रह सकता है।

    भारतीय टीम का लक्ष्य दोनों सीरीज में बेहतर प्रदर्शन करते हुए जीत की लय को बनाए रखना होगा। हालांकि वेस्टइंडीज और न्यूजीलैंड दोनों टीमों को हल्के में लेना भारत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। आने वाले 26 दिन भारतीय खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं और इस दौरान अनुभव के साथ फिटनेस तथा टीम संयोजन की भी बड़ी परीक्षा होगी।

  • OTT पर इस हफ्ते मनोरंजन का बड़ा धमाका, परिणीति की ‘रिपोर्टिंग लाइव’ से ‘आवारापन 2’ तक ये फिल्में और सीरीज होंगी रिलीज

    OTT पर इस हफ्ते मनोरंजन का बड़ा धमाका, परिणीति की ‘रिपोर्टिंग लाइव’ से ‘आवारापन 2’ तक ये फिल्में और सीरीज होंगी रिलीज

    नई दिल्ली: अक्तूबर के दूसरे हफ्ते में OTT दर्शकों के लिए मनोरंजन के कई विकल्प उपलब्ध होने वाले हैं। इस सप्ताह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अलग-अलग जॉनर की फिल्में और सीरीज रिलीज होंगी। इनमें परिणीति चोपड़ा की इन्वेस्टिगेशन थ्रिलर ‘रिपोर्टिंग लाइव’ से लेकर तमिल भाषा की स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा फिल्म ‘मंदादि’ और कनाडाई थ्रिलर सीरीज ‘बिलो’ शामिल हैं। इसके अलावा इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ भी अब मासिक सब्सक्रिप्शन वाले दर्शकों के लिए उपलब्ध होगी। के-ड्रामा पसंद करने वाले दर्शकों के लिए ‘टेक चार्ज ऑफ माय हार्ट’ भी इस सप्ताह की सूची में शामिल है।

    ‘सुपर बूमी’ 5 अक्तूबर 2026 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। यह एक एनिमेटेड पारिवारिक मनोरंजन सीरीज है, जिसमें बूमी और उसके दोस्त अपनी एक वर्चुअल गेमिंग दुनिया बनाते हैं। इस दुनिया में उन्हें अलग-अलग चुनौतियों और रोमांचक एडवेंचर्स का सामना करना पड़ता है। इसके बाद 8 अक्तूबर को तमिल भाषा की फिल्म ‘मंदादि’ OTT पर दस्तक देगी। सूरी और सुहास अभिनीत यह स्पोर्ट्स एक्शन ड्रामा फिल्म 10 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और अब नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी।

    8 अक्तूबर को ही कनाडाई थ्रिलर वेब सीरीज ‘बिलो’ भी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। जोश हार्टनेट, मैकेंजी डेविस और चार्ली हीटन अभिनीत यह कहानी समुद्र किनारे बसे एक छोटे शहर की पृष्ठभूमि पर आधारित है। शहर में अचानक एक रहस्यमयी समुद्री जीव का आतंक शुरू हो जाता है। इसके बाद एक मछुआरा अपने परिवार और समुदाय की सुरक्षा के लिए उस खतरनाक जीव का सामना करता है। इस तरह सीरीज में रहस्य, खतरे और संघर्ष से जुड़ी कहानी देखने को मिलेगी।

    9 अक्तूबर को परिणीति चोपड़ा की ‘रिपोर्टिंग लाइव’ OTT पर आएगी। फिल्म में परिणीति एक पत्रकार की भूमिका निभा रही हैं, जो अवैध रेत खनन का पर्दाफाश करने की कोशिश करती हैं। फिल्म में उनके साथ देवेन भोजानी, अमोल पालेकर, आदिल हुसैन और शेखर सुमन भी नजर आएंगे। इसी दिन इमरान हाशमी की ‘आवारापन 2’ भी मासिक सब्सक्रिप्शन वाले यूजर्स के लिए उपलब्ध होगी। फिल्म पहले OTT पर रिलीज हो चुकी थी, लेकिन अब तक इसे केवल रेंट पर देखा जा सकता था। 9 अक्तूबर से इसे प्राइम वीडियो के मासिक सब्सक्रिप्शन के जरिए देखा जा सकेगा।

    के-ड्रामा पसंद करने वालों के लिए ‘टेक चार्ज ऑफ माय हार्ट’ भी 9 अक्तूबर से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी। इसकी कहानी एक बड़े कारोबारी घराने के वारिस के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके शरीर में आर्टिफिशियल हार्ट लगा है। उसकी जिंदगी में एक लड़की के आने के बाद कहानी आगे बढ़ती है। इस सप्ताह OTT पर रिलीज होने वाली इन फिल्मों और सीरीज में एनिमेशन, एक्शन, थ्रिलर, खोजी कहानी और रोमांस जैसे अलग-अलग जॉनर शामिल हैं, जिससे दर्शकों के पास अपनी पसंद के अनुसार मनोरंजन चुनने के कई विकल्प रहेंगे।

  • सोना फिर चमका तो चांदी ने भी पकड़ी रफ्तार, 5 अक्टूबर को क्या है Gold Silver का भाव, खरीदारी से पहले जानें ताजा कीमत

    सोना फिर चमका तो चांदी ने भी पकड़ी रफ्तार, 5 अक्टूबर को क्या है Gold Silver का भाव, खरीदारी से पहले जानें ताजा कीमत


    नई दिल्ली। सोने और चांदी की कीमतों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए 5 अक्टूबर 2026 का दिन अहम रहने वाला है। शुरुआती बाजार आंकड़ों में दोनों कीमती धातुओं में हलचल दिखाई दे रही है। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार MCX पर 5 अक्टूबर 2026 वाला गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट करीब 1 लाख 47 हजार 724 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दे रहा था और इसमें करीब 1607 रुपये की तेजी दर्ज की गई। वहीं गोल्ड मिनी का भाव करीब 1 लाख 47 हजार 877 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा।

    चांदी की बात करें तो MCX पर दिसंबर 2026 का सिल्वर कॉन्ट्रैक्ट करीब 2 लाख 25 हजार 700 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर नजर आया। इसमें करीब 1994 रुपये की बढ़त दर्ज की गई। सिल्वर मिनी का भाव करीब 2 लाख 27 हजार 695 रुपये प्रति किलोग्राम रहा। इससे संकेत मिलता है कि घरेलू कमोडिटी बाजार में कीमती धातुओं में खरीदारी की दिलचस्पी बनी हुई है।

    हालांकि सोने और चांदी के भाव केवल घरेलू मांग से तय नहीं होते। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों की दिशा डॉलर की चाल ब्याज दरों की उम्मीदें वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग जैसे कई कारकों से प्रभावित होती है। अक्टूबर की शुरुआत में भी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों को लेकर उतार चढ़ाव देखने को मिला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने की कीमत में कमजोरी के बावजूद घरेलू बाजार में MCX गोल्ड मजबूत दिखाई दिया।

    अगर आप आभूषण खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो केवल MCX का भाव देखकर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए। बाजार में 24 कैरेट 22 कैरेट और दूसरी शुद्धता के सोने के अलग अलग भाव होते हैं। 24 कैरेट सोना अधिक शुद्ध माना जाता है जबकि आभूषण बनाने के लिए 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल ज्यादा होता है। इसके अलावा अंतिम बिल में GST और मेकिंग चार्ज का असर भी पड़ता है। इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर के स्थानीय ज्वेलर से ताजा रिटेल रेट जरूर जांचना चाहिए।

    चांदी खरीदने वालों के लिए भी यही बात लागू होती है। चांदी का भाव आमतौर पर प्रति किलोग्राम बताया जाता है लेकिन ग्राहक जरूरत के हिसाब से ग्राम या छोटी मात्रा में भी खरीद सकते हैं। 5 अक्टूबर के आसपास चांदी के बाजार में तेजी और कमजोरी दोनों के संकेत दिखाई दे रहे हैं इसलिए निवेशकों को अचानक कीमत बढ़ने या घटने पर जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।

    कुल मिलाकर 5 अक्टूबर 2026 को सोना और चांदी दोनों बाजार में चर्चा के केंद्र में हैं। सोने में MCX स्तर पर मजबूती जबकि चांदी में भी बढ़त देखने को मिल रही है। हालांकि कीमती धातुओं में निवेश बाजार जोखिम के अधीन होता है। खरीदारी या निवेश से पहले ताजा भाव शुद्धता टैक्स मेकिंग चार्ज और अपनी वित्तीय जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • चेहरे की देखभाल में नींबू कितना फायदेमंद, जलन और रूखेपन से बचने के लिए जानें सही तरीका और जरूरी स्किन केयर टिप्स

    चेहरे की देखभाल में नींबू कितना फायदेमंद, जलन और रूखेपन से बचने के लिए जानें सही तरीका और जरूरी स्किन केयर टिप्स


    नई दिल्ली। चेहरे की चमक और त्वचा की देखभाल के लिए लोग अक्सर घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। नींबू भी ऐसा ही एक घरेलू विकल्प है जिसमें विटामिन सी और साइट्रिक एसिड पाया जाता है। इसी वजह से इसे त्वचा की सफाई और ऑयली स्किन की देखभाल से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि नींबू को सीधे चेहरे पर लगाना हर किसी की त्वचा के लिए सही नहीं होता। इसमें मौजूद अम्लीय तत्व संवेदनशील त्वचा पर जलन लालिमा और रूखापन पैदा कर सकते हैं। इसलिए नींबू का इस्तेमाल करते समय सावधानी रखना जरूरी है।

    अगर आपकी त्वचा बहुत संवेदनशील नहीं है तो नींबू का इस्तेमाल करने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर माना जाता है। इसके लिए तैयार मिश्रण की थोड़ी मात्रा हाथ या बांह के छोटे हिस्से पर लगाकर देखें। अगर जलन खुजली या लालिमा दिखाई दे तो चेहरे पर इसका इस्तेमाल न करें। चेहरे पर नींबू का रस सीधे लगाने से विशेष रूप से बचना चाहिए क्योंकि इससे त्वचा की प्राकृतिक नमी प्रभावित हो सकती है।

    नींबू को त्वचा की देखभाल में इस्तेमाल करने का एक तरीका इसे किसी मॉइस्चराइजिंग सामग्री के साथ मिलाना है। उदाहरण के लिए दही या एलोवेरा जेल के साथ बहुत थोड़ी मात्रा में नींबू का इस्तेमाल करने की घरेलू परंपरा है। लेकिन संवेदनशील या पहले से irritated त्वचा पर ऐसे प्रयोग भी परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए त्वचा के प्रकार को समझना सबसे जरूरी है। किसी भी घरेलू नुस्खे को रोजाना लगाने के बजाय सीमित मात्रा में और सावधानी से इस्तेमाल करना चाहिए।

    नींबू के इस्तेमाल के बाद धूप से बचाव भी बेहद जरूरी है। नींबू या दूसरे citrus पदार्थ त्वचा को सूर्य की रोशनी के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। इसलिए चेहरे पर नींबू आधारित मिश्रण लगाने के बाद धूप में निकलने से बचना चाहिए। दिन के समय बाहर जाते हुए पर्याप्त SPF वाला sunscreen इस्तेमाल करना त्वचा की सुरक्षा के लिए ज्यादा भरोसेमंद उपाय है। नींबू को धूप से झुलसी त्वचा पर लगाने की कोशिश भी नहीं करनी चाहिए।

    अगर चेहरे पर मुंहासे दाग धब्बे या pigmentation की समस्या है तो केवल नींबू पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। लगातार बनी रहने वाली त्वचा संबंधी समस्या के लिए त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है। घरेलू नुस्खों से हर व्यक्ति को एक जैसा परिणाम मिले यह जरूरी नहीं है। खासकर जिन लोगों की त्वचा पहले से संवेदनशील है उन्हें बिना सलाह के acidic ingredients चेहरे पर लगाने से बचना चाहिए।

    स्किन केयर के लिए नींबू से ज्यादा जरूरी नियमित और सरल routine है। चेहरे को हल्के cleanser से साफ करना पर्याप्त मात्रा में moisturizer लगाना और दिन में sunscreen का इस्तेमाल करना त्वचा की देखभाल का बेहतर आधार बन सकता है। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन लेना और नींद पूरी करना भी त्वचा की सामान्य सेहत के लिए उपयोगी है। नींबू का सेवन भोजन और पेय के रूप में विटामिन सी का स्रोत हो सकता है लेकिन इसे त्वचा पर लगाने को लेकर सावधानी जरूरी है।

    इसलिए अगर आप नींबू से स्किन केयर करना चाहते हैं तो सीधे नींबू का रस चेहरे पर लगाने के बजाय पहले अपनी त्वचा की संवेदनशीलता समझें। पैच टेस्ट करें और जलन होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें। सुंदर और स्वस्थ त्वचा के लिए किसी भी घरेलू उपाय से ज्यादा जरूरी सुरक्षित और नियमित स्किन केयर routine है।

  • क्या जोखिम भरे काम महिलाओं के लिए नहीं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद फिर छिड़ी लैंगिक समानता पर बहस

    क्या जोखिम भरे काम महिलाओं के लिए नहीं? सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद फिर छिड़ी लैंगिक समानता पर बहस


    नई दिल्ली।
    रोजगार के क्षेत्र में महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी ने एक पुरानी लेकिन महत्वपूर्ण बहस को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह है कि क्या किसी काम में जोखिम होने मात्र से महिलाओं को उससे दूर रखा जा सकता है? अदालत के सामने करीब चार दशक पुराना मामला आया, जिसमें एक महिला को केवल इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि काम में गैस सिलेंडर उठाना शामिल था।

    मामला हरियाणा की सुमित्रा का है। उन्होंने 1988 में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के करनाल स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में हेल्पर के पद के लिए आवेदन किया था। वह निर्धारित योग्यता पूरी करती थीं और 49 उम्मीदवारों की सूची में शामिल थीं। इनमें से 43 उम्मीदवारों को नियुक्ति दे दी गई, लेकिन सुमित्रा को नौकरी नहीं मिली। बाद में सामने आया कि महिला होने के कारण उन्हें सिलेंडर उठाने जैसे काम के लिए अनुपयुक्त माना गया था।

    घर में सिलेंडर उठाने वाली महिला नौकरी के लिए अयोग्य कैसे?

    सुप्रीम कोर्ट ने इसी सोच पर सवाल उठाया। अदालत ने कहा कि जब घरों में महिलाएं खुद गैस सिलेंडर उठाती और बदलती हैं, तो केवल महिला होने के आधार पर किसी उम्मीदवार को ऐसे काम के लिए अयोग्य मानना उचित नहीं कहा जा सकता।

    लंबी कानूनी लड़ाई के कारण अब सुमित्रा की नियुक्ति की उम्र निकल चुकी थी। ऐसे में अदालत ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन को उन्हें 12 लाख रुपये का एकमुश्त मुआवजा देने का निर्देश दिया।

    यह फैसला सिर्फ एक महिला को मुआवजा देने तक सीमित नहीं है। इसके जरिए उस मानसिकता पर भी सवाल खड़ा हुआ है, जिसमें किसी व्यक्ति की क्षमता का आकलन उसके कौशल, प्रशिक्षण और वास्तविक शारीरिक योग्यता के बजाय उसके महिला या पुरुष होने के आधार पर किया जाता है।

    जोखिम से बचाना और अवसर से वंचित करना अलग बात

    आज महिलाएं उन क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता साबित कर रही हैं, जिन्हें लंबे समय तक पुरुषों के लिए आरक्षित माना जाता था। वे लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं और सेना में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रही हैं। ऐसे में किसी महिला को सिर्फ इसलिए किसी काम के लिए अनुपयुक्त मान लेना कि उसमें जोखिम है, पुराने लैंगिक पूर्वाग्रह को मजबूत करता है।

    हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि जोखिम वाले कामों में सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जाए। किसी भी खतरनाक काम के लिए जरूरी सुरक्षा व्यवस्था, प्रशिक्षण और स्वास्थ्य मानकों का पालन कर्मचारी की लैंगिक पहचान से अलग होना चाहिए।

    दरअसल, महिलाओं को जोखिम से बचाने और जोखिम का हवाला देकर महिलाओं को अवसर से वंचित करने में बड़ा अंतर है। सुरक्षा के नाम पर महिलाओं को किसी पूरे कार्यक्षेत्र से बाहर कर देना समान अवसर की भावना के अनुरूप नहीं कहा जा सकता।

    योग्यता हो कसौटी, लिंग नहीं

    सही तरीका यह है कि किसी काम की वास्तविक जरूरतों और उससे जुड़े जोखिमों का वैज्ञानिक आकलन किया जाए। उसके बाद कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण और सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाएं तथा चयन योग्यता के आधार पर हो।

    इस संदर्भ में रिव्यू ऑफ इकनॉमिक स्टडीज में प्रकाशित डेनमार्क के एक अध्ययन का भी उल्लेख किया जा सकता है। अध्ययन में पाया गया कि छोटे व्यवसायों में पुरुष प्रबंधक की पहली संतान बेटी होने के बाद महिलाओं की सापेक्ष रोजगार स्थिति और कमाई में वृद्धि हुई। महिलाओं की सापेक्ष कमाई में 4.4 प्रतिशत और रोजगार में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    हालांकि डेनमार्क के इस अध्ययन के निष्कर्षों को सीधे भारत पर लागू करना उचित नहीं होगा, क्योंकि दोनों देशों की सामाजिक परिस्थितियां और श्रम बाजार की संरचना अलग हैं। फिर भी यह शोध इस ओर संकेत करता है कि कार्यस्थल पर महिलाओं को लेकर बनी धारणाएं स्थायी नहीं होतीं और व्यक्तिगत व सामाजिक अनुभवों के साथ उनमें बदलाव संभव है।

    सुरक्षा जरूरी, लेकिन अवसर की कीमत पर नहीं

    भारत में चुनौती यह होनी चाहिए कि हर काम के लिए समान अवसर और समान मूल्यांकन सुनिश्चित किया जाए। गर्भावस्था, मातृत्व और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भेदभाव रहित व्यवस्था बनाना जरूरी है। संरक्षण का उद्देश्य महिलाओं से अवसर छीनना नहीं, बल्कि उनके लिए सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार करना होना चाहिए।

    इसलिए महिलाओं को जोखिम वाले काम से दूर रखने का सवाल उठाने से पहले यह देखना जरूरी है कि क्या उस काम को सुरक्षित बनाया जा सकता है और क्या संबंधित महिला उसके लिए आवश्यक योग्यता रखती है। अगर दोनों सवालों का जवाब हां है, तो केवल महिला होने के कारण उसके लिए अवसर का दरवाजा बंद करने का तार्किक आधार नहीं बचता।

    सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का व्यापक संदेश भी यही है कि रोजगार में समानता केवल नियुक्ति पत्र हासिल करने का अधिकार नहीं है। यह उस सोच को बदलने का सवाल भी है, जो पहले ही तय कर लेती है कि कौन व्यक्ति कौन-सा काम कर सकता है और कौन नहीं।

    समाज को महिलाओं के लिए न तो कृत्रिम विशेषाधिकार चाहिए और न ही कृत्रिम सीमाएं। जरूरत समान अवसर, समान कसौटी और सुरक्षित कार्यस्थल की है। आखिर किसी काम की कठिनाई या जोखिम के आधार पर यह तय नहीं होना चाहिए कि उसे महिला कर सकती है या पुरुष। काम की जरूरतें यह तय करें कि कर्मचारी में कौन-सी योग्यता होनी चाहिए और उस कसौटी पर हर व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए।

  • चुट्टामल्ले गाने के डीपफेक वीडियो पर जाह्नवी का फूटा गुस्सा, NTR समेत इन सितारों को कहा शुक्रिया

    चुट्टामल्ले गाने के डीपफेक वीडियो पर जाह्नवी का फूटा गुस्सा, NTR समेत इन सितारों को कहा शुक्रिया


    नई दिल्ली। जाह्नवी कपूर इन दिनों अपने एक वायरल डीपफेक वीडियो को लेकर चर्चा में हैं। अभिनेत्री और जूनियर एनटीआर की फिल्म देवरा के चर्चित गाने चुट्टामल्ले से जुड़ा एक फर्जी AI वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो को लेकर जूनियर एनटीआर पहले ही नाराजगी जाहिर कर चुके हैं और कानूनी कार्रवाई की बात कह चुके हैं। अब जाह्नवी कपूर ने भी इस मामले पर खुलकर अपनी बात रखी है। अभिनेत्री ने सोशल मीडिया पर एक लंबा नोट साझा करते हुए AI तकनीक के गलत इस्तेमाल और महिलाओं की सहमति को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

    देवरा में जाह्नवी कपूर और जूनियर एनटीआर की जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया था। फिल्म का चुट्टामल्ले गाना भी काफी लोकप्रिय हुआ था। इसी गाने से जुड़े एक AI से तैयार किए गए वीडियो में दोनों कलाकारों को गलत तरीके से दिखाया गया। वीडियो के वायरल होने के बाद जूनियर एनटीआर ने इस तरह की हरकत पर कड़ी आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि वह इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की कोशिश करेंगे। इसके बाद इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने भी डीपफेक और महिलाओं को गलत तरीके से पेश करने के खिलाफ आवाज उठाई।

    जाह्नवी ने अपने बयान में AI तकनीक के दुरुपयोग को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि किसी महिला को उसकी अनुमति के बिना गलत तरीके से दिखाना या उसका फर्जी यौन कंटेंट तैयार करना उसकी सहमति और सम्मान का उल्लंघन है। अभिनेत्री ने इस पूरे मामले को केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं माना बल्कि इसे महिलाओं के सामने मौजूद बड़ी सामाजिक समस्या से जोड़कर देखा।

    अभिनेत्री ने कंसेंट यानी सहमति को लेकर भी अपनी बात स्पष्ट की। उनका कहना है कि अगर कोई महिला किसी एक चीज के लिए अपनी सहमति देती है तो इसका अर्थ यह नहीं होता कि वह हर चीज के लिए सहमत है। किसी महिला का पहनावा भी किसी दूसरे व्यक्ति को उसकी तस्वीर लेने या उसके शरीर को अपनी मर्जी से देखने का अधिकार नहीं देता। जाह्नवी ने कहा कि महिला जहां सहज महसूस करती है और जहां अपनी सीमा तय करती है उस पर फैसला लेने का अधिकार उसी का होना चाहिए।

    अभिनेत्री ने यह भी कहा कि महिलाओं को परेशान करना उनका पीछा करना या उन्हें केवल एक वस्तु की तरह देखना कभी सही नहीं हो सकता। उन्होंने इस सोच में बदलाव की जरूरत बताई और कहा कि गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना सभी की जिम्मेदारी है। जाह्नवी ने जूनियर एनटीआर को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने इस मामले में मजबूती से अपनी आवाज उठाई।

    इसके साथ ही उन्होंने चिरंजीवी विजय देवरकोंडा और कृति सेनन समेत उन सितारों का भी आभार जताया जिन्होंने इस तरह के व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई। जाह्नवी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब AI तकनीक से तैयार किए जाने वाले डीपफेक कंटेंट को लेकर फिल्म इंडस्ट्री में चिंता बढ़ रही है। उनका कहना है कि महिलाओं की सहमति सम्मान और व्यक्तिगत सीमाओं को किसी भी तकनीक या मनोरंजन से ऊपर रखा जाना जरूरी है।

  • भारत की मदद से कंबोडिया का गांव हुआ बारूदी सुरंगों से मुक्त, 134 परिवारों को मिली सुरक्षित जमीन

    भारत की मदद से कंबोडिया का गांव हुआ बारूदी सुरंगों से मुक्त, 134 परिवारों को मिली सुरक्षित जमीन

    नोम पेन्ह। भारत ने कंबोडिया में मानवीय सहायता और पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। भारत सरकार की क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट (क्यूआईपी) योजना के तहत बारूदी सुरंगों और बिना फटे गोला-बारूद से मुक्त कराई गई जमीन को कंबोडिया के कोह कोंग प्रांत के काओ पाओ गांव के लोगों को सौंप दिया गया है। सुरक्षित की गई इस जमीन से करीब 134 परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा।

    जमीन समुदाय को सौंपने के लिए आयोजित विशेष कार्यक्रम में कंबोडिया में भारतीय दूतावास की डिप्टी चीफ ऑफ मिशन तनु प्रिया, कोह कोंग प्रांत के डिप्टी गवर्नर वाई. नियरिनेट और कंबोडिया माइन एक्शन एंड विक्टिम असिस्टेंस अथॉरिटी (सीएमएए) के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल टेप कल्याण मौजूद रहे।

    भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि डिप्टी चीफ ऑफ मिशन डॉ. तनु प्रिया ने सीएमएए के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल टेप कल्याण और कोह कोंग प्रांत के डिप्टी गवर्नर के साथ मेकांग-गंगा सहयोग की क्विक इम्पैक्ट प्रोजेक्ट योजना के तहत साफ की गई जमीन को समुदाय को सौंपने के कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

    करीब 1.98 लाख वर्ग मीटर जमीन सुरक्षित

    कंबोडिया के अखबार द नोम पेन्ह पोस्ट के मुताबिक, कार्यक्रम के दौरान गांववालों को करीब 1,97,810 वर्ग मीटर जमीन सौंपी गई। बारूदी सुरंगों और बिना फटे गोला-बारूद से मुक्त कराई गई इस जमीन का अब ग्रामीण खेती, आवास निर्माण और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे।

    भारतीय दूतावास ने कहा कि जमीन को समुदाय को वापस सौंपे जाने से स्थानीय लोगों को आजीविका, कृषि, आवास और अन्य सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों के लिए सुरक्षित पहुंच उपलब्ध होगी।

    1990 के दशक से कंबोडिया की मदद कर रहा भारत

    भारत का कंबोडिया के मानवीय बारूदी सुरंग हटाने के प्रयासों में लंबे समय से सहयोग रहा है। भारतीय दूतावास के अनुसार, 1990 के दशक की शुरुआत से भारत कंबोडिया को क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के साथ-साथ तकनीकी सहायता, बारूदी सुरंग हटाने के उपकरण और माइन डिटेक्शन डॉग उपलब्ध कराता रहा है। इसके अलावा भारत बारूदी सुरंगों से प्रभावित लोगों को भी सहायता देता रहा है।

    भारत की यह मदद ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब कंबोडिया में लंबे समय से मौजूद बारूदी सुरंगों की समस्या ग्रामीण आबादी की जमीन, खेती और आजीविका के लिए चुनौती बनी हुई है। जमीन को साफ कर स्थानीय समुदाय को लौटाने से न केवल सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि लोगों के लिए आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते भी खुले हैं।

    व्यापार बढ़ाने पर भी दोनों देशों में सहमति

    भारत और कंबोडिया के बीच सहयोग का दायरा केवल मानवीय सहायता तक सीमित नहीं है। इससे पहले 24 अगस्त को दोनों देशों ने आपसी व्यापार बढ़ाने पर भी सहमति जताई थी।

    नोम पेन्ह में ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट पर जॉइंट वर्किंग ग्रुप की तीसरी बैठक के दौरान दोनों देशों ने पारंपरिक चिकित्सा, ई-गवर्नेंस, भारतीय फार्माकोपिया को मान्यता देने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की थी।

    दोनों देशों के बीच व्यापार में भी 36 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 406.78 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया।

  • पाकिस्तान से बातचीत पर मणिशंकर अय्यर का सवाल, बोले- सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो आमने-सामने बैठने का साहस क्यों नहीं?

    पाकिस्तान से बातचीत पर मणिशंकर अय्यर का सवाल, बोले- सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो आमने-सामने बैठने का साहस क्यों नहीं?

    नई दिल्ली। पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने केंद्र की एनडीए सरकार पर सवाल उठाए हैं। रविवार को पांचवें ‘हल्ला बोल कॉन्क्लेव’ में बोलते हुए अय्यर ने कहा कि सरकार के पास पाकिस्तान के खिलाफ ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ करने का साहस है, लेकिन दोनों देशों के बीच विवादों के समाधान के लिए आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की इच्छाशक्ति नहीं है।

    अय्यर ने भारत-पाकिस्तान के बीच संवाद दोबारा शुरू करने की वकालत करते हुए अटारी-वाघा सीमा पर बातचीत का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अतीत के मुद्दों को लेकर लगातार बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उनके मुताबिक, बातचीत के जरिए यह तय किया जाना चाहिए कि किन मुद्दों का समाधान संभव है और किनका फिलहाल नहीं।

    ‘सर्जिकल स्ट्राइक कर सकते हैं तो बात क्यों नहीं?’

    अय्यर ने कहा कि भारत के पास पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करने का साहस है, तो फिर उसके साथ आमने-सामने बैठकर बातचीत करने का साहस क्यों नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि भारत पाकिस्तान से बात क्यों नहीं कर सकता और दोनों देशों के बीच दोस्ती की कोशिश क्यों नहीं हो सकती।

    उन्होंने यह भी पूछा कि दुनिया में क्या कोई ऐसा देश है, जिसके साथ भारत पाकिस्तान की तुलना में ज्यादा सहज हो सकता है? साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान के लिए भी भारत से ज्यादा आसानी से बातचीत करने वाला कोई दूसरा देश है?

    अटारी-वाघा सीमा पर टेबल लगाने का सुझाव

    भारत-पाकिस्तान के बीच पहले हुई बातचीत की प्रक्रियाओं का उल्लेख करते हुए अय्यर ने कहा कि दोनों देशों को फिर से बातचीत की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अटारी-वाघा सीमा पर ही बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया।

    अय्यर ने कहा कि सीमा पर एक टेबल रखी जा सकती है, ताकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए पाकिस्तान से बाहर आने की जरूरत न पड़े और भारतीय प्रतिनिधियों को भी बातचीत के लिए भारत से बाहर न जाना पड़े। उनके मुताबिक, इसी जगह से संवाद को लगातार आगे बढ़ाया जा सकता है।

    उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान जिन मुद्दों पर समाधान निकलता है, उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। जिन मुद्दों पर सहमति नहीं बनती, उन्हें फिलहाल लंबित रखा जा सकता है और माहौल बदलने के बाद उन पर दोबारा चर्चा की जा सकती है।

    ‘अतीत पर बहस करना विदेश नीति नहीं’

    अय्यर ने कहा कि अतीत की घटनाओं को लेकर बहस करते रहना विदेश नीति नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी रचनात्मक निष्कर्ष तक पहुंचने का रास्ता बातचीत से ही निकल सकता है, भले ही इसमें कितना भी समय क्यों न लगे।

    उन्होंने अमेरिका और रूस के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने रूस के साथ अपने मतभेदों के बावजूद राजनयिक संबंध नहीं तोड़े और बातचीत का रास्ता खुला रखा। अय्यर ने कहा कि समझदार देश एक-दूसरे से बात करते हैं, जबकि बातचीत बंद करने से समस्याओं का समाधान नहीं होता।

    महबूबा मुफ्ती की सलाह का किया जिक्र

    देश के राजनीतिक हालात से जुड़े सवाल पर अय्यर ने पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती की उस सलाह का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कश्मीर के नेताओं से एकजुट होने की बात कही थी।

    अय्यर ने कहा कि जिस तरह कश्मीर के मुद्दे पर अलग-अलग नेताओं के बजाय एकजुट होकर अपनी बात रखने की जरूरत है, उसी तरह राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में भी गैर-हिंदुत्व राजनीतिक समूहों को एकजुट होना होगा।

    उन्होंने दावा किया कि यदि वे दिल्ली में सत्ता में होते तो जम्मू-कश्मीर को दोबारा राज्य का दर्जा मिल गया होता और संभवतः अनुच्छेद 370 तथा 35ए भी किसी बदले हुए स्वरूप में वापस आ सकते थे। उन्होंने कहा कि अगर प्रगति चाहिए तो असहमत लोगों को एकजुट होना होगा और ऐसी एकजुटता से पाकिस्तान के साथ भी नई पहल की जा सकती है।

    भारत-पाक संबंधों पर अय्यर का पुराना रुख

    पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत मणिशंकर अय्यर पहले भी करते रहे हैं। 2024 में उन्होंने भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री एस. जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा को लेकर भी लिखा था कि दोनों देशों के बीच मतभेदों के बावजूद संवाद ही संबंध सुधारने का रास्ता है। हालांकि उन्होंने उस समय भी स्पष्ट किया था कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं और कांग्रेस का आधिकारिक रुख नहीं हैं।

    वहीं, भारत सरकार का हालिया रुख यह रहा है कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बातचीत के लिए आतंकवाद से मुक्त अनुकूल माहौल जरूरी है। इसके बावजूद भारत ने सितंबर 2026 में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में हिस्सा लेने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को इस्लामाबाद भेजा था।

  • इंग्लैंड के लिए नहीं खेल सके फिर भी करियर में मचाया धमाल, 32 की उम्र में 512 विकेट लेकर लिया संन्यास

    इंग्लैंड के लिए नहीं खेल सके फिर भी करियर में मचाया धमाल, 32 की उम्र में 512 विकेट लेकर लिया संन्यास


    नई दिल्ली। इंग्लैंड के घरेलू क्रिकेट के अनुभवी तेज गेंदबाज क्रेग माइल्स ने महज 32 साल की उम्र में प्रोफेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया है। करीब 15 साल लंबे करियर में 500 से ज्यादा विकेट लेने वाले माइल्स ने यह फैसला अपनी मानसिक सेहत को प्राथमिकता देते हुए लिया। उनके संन्यास की खबर सामने आने के बाद क्रिकेट जगत में उनकी उपलब्धियों के साथ उनके इस फैसले की भी चर्चा हो रही है। माइल्स ने ग्लूस्टरशायर काउंटी क्लब की वेबसाइट पर एक भावुक खुले पत्र के जरिए अपने फैसले की जानकारी दी।

    क्रेग माइल्स ने जून 2026 में विटैलिटी ब्लास्ट के दौरान ग्लूस्टरशायर के लिए अपना आखिरी मुकाबला खेला था। इसके बाद वह क्रिकेट से दूर हो गए। इस दौरान उन्होंने अपने करियर और मानसिक स्थिति को लेकर काफी विचार किया। लगातार क्रिकेट खेलने के दबाव और खुद से रखी गई ऊंची उम्मीदों ने उनके लिए मुश्किलें बढ़ा दी थीं। आखिरकार उन्होंने महसूस किया कि अब अपनी मानसिक सेहत को नजरअंदाज करके खेल को जारी रखना सही नहीं होगा।

    माइल्स ने बताया कि क्रिकेट छोड़ने का निर्णय उनके लिए आसान नहीं था। करियर के शुरुआती दौर में भी उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा था लेकिन तब वह खराब फॉर्म या मुश्किल दौर को खेल का हिस्सा मानकर आगे बढ़ जाते थे। इस बार परिस्थितियां अलग थीं। उन्हें महसूस होने लगा था कि वह उस मानसिक स्थिति में नहीं हैं जहां अपने तय किए हुए स्तर के मुताबिक ट्रेनिंग और प्रदर्शन कर सकें।

    तेज गेंदबाज ने अपने करियर में खुद से काफी ऊंचे मानक तय किए थे। जब प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं होता था तो वह अपनी क्षमता पर सवाल उठाने लगते थे। लगातार आत्मसंदेह और मानसिक दबाव ने उनके लिए खेल को पहले जैसा सहज नहीं रहने दिया। ऐसे में उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनाने के बजाय पूरी तरह संन्यास लेने का फैसला किया ताकि अपनी सेहत और जिंदगी के दूसरे पहलुओं पर ध्यान दे सकें।

    क्रेग माइल्स का घरेलू क्रिकेट करियर शानदार रहा है। उन्होंने महज 16 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने ग्लूस्टरशायर के लिए लंबे समय तक बेहतरीन प्रदर्शन किया। 15 साल के करियर में उन्होंने 111 फर्स्ट क्लास मुकाबले 57 लिस्ट ए मैच और 71 टी20 मुकाबले खेले। इन सभी प्रारूपों को मिलाकर उनके नाम कुल 512 विकेट दर्ज हैं। इतनी बड़ी उपलब्धि के बावजूद उन्हें इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला।

    माइल्स के करियर में वनडे कप और काउंटी चैंपियनशिप जैसे खिताब भी शामिल रहे। संन्यास के समय उन्होंने अपने करियर की उपलब्धियों पर गर्व जताया और कहा कि अब वह इन सफलताओं को पहले से बेहतर नजरिए से देख पा रहे हैं। ग्लूस्टरशायर के क्रिकेट निदेशक जॉन लुईस ने भी उनके फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात करना कमजोरी नहीं बल्कि साहस और मजबूत चरित्र की निशानी है।

    क्रेग माइल्स का फैसला यह संदेश भी देता है कि खेल में उपलब्धियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों लेकिन मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 512 विकेट और लंबा घरेलू करियर उनके प्रदर्शन की गवाही देते हैं। अब वह क्रिकेट के मैदान से बाहर एक नई जिंदगी की शुरुआत करेंगे।