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  • आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना

    आश्रमों की सुरक्षा को लेकर साध्वी हर्षानंद ने उठाए सवाल, बोलीं घर पर रहकर पूजा करो, क्यों आश्रम की राजनीति में पड़ना


    नई दिल्ली। महिलाओं से अकेले बागेश्वर धाम नहीं आने की अपील के बाद अब साध्वी हर्षानंद गिरि का बयान सामने आया है। उन्होंने आश्रमों में महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। साध्वी ने अपने बयान में किसी विशेष संत या आश्रम का नाम नहीं लिया है लेकिन उनकी टिप्पणी को हाल ही में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की ओर से श्रद्धालुओं को दी गई सुरक्षा संबंधी सलाह से जोड़कर देखा जा रहा है।

    साध्वी हर्षानंद ने कहा कि यदि किसी आश्रम में रहने वाले सेवादारों पर ही भरोसा नहीं किया जा सकता तो ऐसे स्थान पर अपने बच्चों और परिवार को भेजने को लेकर लोगों को खुद सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर आश्रम को गलत नहीं कहा जा सकता लेकिन जब किसी जगह की सुरक्षा को लेकर मन में दुविधा हो तो ऐसी स्थिति में वहां जाने से बचना भी एक विकल्प हो सकता है।

    उन्होंने लोगों को सलाह देते हुए कहा कि यदि उन्हें सुरक्षित रहना है तो अपने घर पर रहकर मंत्र जाप और पूजा पाठ कर सकते हैं। उनके मुताबिक धार्मिक आस्था के लिए किसी आश्रम में लंबे समय तक रुकना जरूरी नहीं है। लोग मंदिर में दर्शन करें और इसके बाद अपने घर लौट सकते हैं।

    साध्वी ने आश्रमों की व्यवस्था और वहां होने वाली गतिविधियों को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोगों को आश्रम की राजनीति और विवादों में पड़ने के बजाय अपनी धार्मिक साधना पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि जिन लोगों ने आश्रम बनाए हैं अगर वे ही वहां की पूरी व्यवस्था को संभालने में सक्षम नहीं हैं तो आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने 3 अक्टूबर की रात श्रद्धालुओं खासकर महिलाओं को सतर्क रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि महिलाएं अकेली धाम पर न आएं। अगर किसी महिला को अकेले आना पड़े तो उसे किसी अनजान व्यक्ति या धाम के सेवादार पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।

    धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं से यह भी कहा था कि मंदिर परिसर और निर्धारित हॉल के अलावा दूसरी जगहों पर जाने से बचें। उन्होंने बताया था कि बागेश्वर धाम के करीब पांच किलोमीटर के पूरे क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। उनके मुताबिक वह मंदिर और हॉल की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी ले सकते हैं लेकिन पूरे क्षेत्र को लेकर ऐसी गारंटी नहीं दी जा सकती।

    उन्होंने श्रद्धालुओं से धाम में लंबे समय तक रुकने से बचने और अपने सामान तथा सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद लेने की अपील भी की थी। शास्त्री ने धार्मिक स्थलों पर सामने आने वाली कुछ घटनाओं का संदर्भ देते हुए कहा था कि वह नहीं चाहते कि किसी अप्रिय घटना के कारण बागेश्वर धाम या श्री बालाजी महाराज की बदनामी हो।

    धीरेंद्र शास्त्री की अपील और साध्वी हर्षानंद की प्रतिक्रिया के बीच मुख्य मुद्दा धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर सामने आया है। दोनों बयानों में श्रद्धालुओं को सावधानी बरतने की बात कही गई है हालांकि साध्वी हर्षानंद ने आश्रमों में जाने को लेकर व्यापक सवाल उठाए हैं।

    ऐसे मामलों में किसी भी घटना या आरोप को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। फिलहाल दोनों संतों की ओर से सामने आए बयानों ने धार्मिक स्थलों पर महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। श्रद्धालुओं के लिए भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सतर्क रहना और किसी अनजान व्यक्ति पर तुरंत भरोसा नहीं करना महत्वपूर्ण सावधानी मानी जा सकती है।

  • भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन

    भोपाल के सरकारी स्कूल में छात्रों का हंगामा, टीचर पर पैसे मांगने और मारपीट के आरोप, कार्रवाई के बाद खत्म हुआ प्रदर्शन


    नई दिल्ली। भोपाल के मिसरोद इलाके में सरकारी स्कूल की एक टीचर के खिलाफ छात्र छात्राओं का विरोध प्रदर्शन चर्चा में है। विद्यार्थियों ने टीचर पर गंभीर आरोप लगाते हुए करीब चार घंटे तक सड़क पर बैठकर प्रदर्शन किया। छात्रों का कहना था कि उनसे पढ़ाई कराने के बजाय घर के काम कराए जाते हैं और ऐसा नहीं करने पर फेल करने की धमकी दी जाती है। विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने और विरोध करने पर मारपीट करने जैसे आरोप भी लगाए हैं। मामला बढ़ने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित टीचर का ट्रांसफर कर दिया है और विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

    यह मामला मिसरोद स्थित नवीन हायर सेकंडरी स्कूल का है। सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र छात्राएं स्कूल के बाहर सड़क पर बैठ गए। प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों ने हाथों में पोस्टर लेकर टीचर के खिलाफ नारे लगाए। सूचना मिलने पर मिसरोद थाने के प्रभारी विमलेश कुमार राय मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्कूल के प्राचार्य के साथ मिलकर विद्यार्थियों को समझाने की कोशिश की लेकिन छात्र अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका कहना था कि आरोपी टीचर को स्कूल से हटाए जाने के बाद ही प्रदर्शन समाप्त किया जाएगा।

    बताया गया कि 11वीं कक्षा के गणित और जीव विज्ञान विषय के विद्यार्थियों ने इससे पहले 3 अक्टूबर को प्राचार्य को लिखित शिकायत दी थी। छात्रों ने आरोप लगाया कि यूपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं के दौरान उनसे बेंच लगाने सफाई करने और रोल नंबर लिखने जैसे काम कराए जाते हैं। विद्यार्थियों का यह भी कहना था कि कई बार उन्हें रविवार को भी स्कूल बुलाया जाता है। छात्रों ने कहा कि वे पढ़ाई करने के लिए स्कूल आते हैं और उनसे कर्मचारियों की तरह काम नहीं कराया जाना चाहिए।

    विद्यार्थियों ने प्रोजेक्ट के नाम पर पैसे मांगने का आरोप भी लगाया। शिकायत में दावा किया गया कि हर महीने प्रोजेक्ट के नाम पर 2500 रुपये मांगे जाते हैं। छात्रों के अनुसार पैसे नहीं देने पर पढ़ाई को लेकर दबाव बनाया जाता है। उनका आरोप है कि इसी तरह की स्थिति के कारण कुछ विद्यार्थियों ने विज्ञान विषय तक छोड़ दिया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि टीचर क्लास में पढ़ाने के बजाय मोबाइल में व्यस्त रहती हैं और सीनियर छात्रों के साथ मारपीट की जाती है।

    इस मामले में छात्रों ने टीचर से एक विद्यार्थी की कथित बातचीत का ऑडियो भी सुनाया। इसमें पास या फेल कराने अभिभावकों से बातचीत और पैसे खर्च होने जैसी बातें सुनाई देने का दावा किया गया। हालांकि ऑडियो में आवाज किसकी है और बातचीत किस वास्तविक संदर्भ में हुई थी इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन आरोपों की जांच के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

    दूसरी ओर टीचर बबीता कुशवाह ने छात्रों के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि वह वर्ष 1999 से अध्यापन कर रही हैं और उनके पास लंबे समय का शिक्षण अनुभव है। उन्होंने कहा कि अच्छे परिणाम के लिए वह विद्यार्थियों के साथ सख्ती करती हैं लेकिन पैसे लेकर पास कराने या फेल करने का आरोप पूरी तरह गलत है।

    टीचर ने छात्रों से सफाई कराने के आरोप से भी इनकार किया। उनका कहना है कि विद्यार्थियों को केवल अपना बैग साफ रखने के लिए कपड़ा रखने के लिए कहा जाता है। प्रैक्टिकल के दौरान इंस्ट्रूमेंट को व्यवस्थित करना और उनकी सफाई करना पढ़ाई की प्रक्रिया का हिस्सा है।

    मामले में जिला शिक्षा अधिकारी अभिनव आर्य ने कहा कि विद्यार्थियों की शिकायत के आधार पर बबीता कुशवाह का ट्रांसफर बागरोदा हायर सेकेंडरी स्कूल कर दिया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की जा रही है। जांच के बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल की स्थापना वर्ष 1962 में हुई थी और यहां करीब 37 लोगों का स्टाफ बताया गया है। बबीता कुशवाह वर्ष 2010 से इस स्कूल में पढ़ा रही थीं। फिलहाल ट्रांसफर और जांच की कार्रवाई के बाद छात्रों का प्रदर्शन खत्म हो गया है। अब पूरे मामले में विभागीय जांच की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी क्योंकि छात्रों और टीचर की ओर से आरोपों को लेकर अलग अलग दावे सामने आए हैं।

  • को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने जुलाई में ही इजरायल में विमान क्रैश करने की योजना बनाई थी, आखिरी वक्त पर किया रद्द

    को-पायलट हमाम अल-हम्मामी ने जुलाई में ही इजरायल में विमान क्रैश करने की योजना बनाई थी, आखिरी वक्त पर किया रद्द

    नई दिल्ली ।फ्लाईदुबई से इजरायल जा रहे विमान में हमला करने के आरोपी को-पायलट हमाम अल-हम्मामी को लेकर जांच में एक और अहम जानकारी सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, हम्मामी ने जुलाई में ही इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर एक विमान को क्रैश करने की योजना बनाई थी। हालांकि, उसने आखिरी समय में अपनी इस योजना को रद्द कर दिया था। मौजूदा मामले में पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारी के अनुसार, हम्मामी पहले से ही इजरायल में विमान के जरिए हमला करने की योजना पर काम कर रहा था।

    बताया गया है कि हम्मामी ने जून में ही बेन गुरियन एयरपोर्ट से जुड़ी जानकारी जुटाना शुरू कर दी थी। इसके बाद जुलाई में उसने विमान को क्रैश करने की पूरी योजना तैयार की। हालांकि, जिस विमान को वह निशाना बनाने की योजना बना रहा था, उसके क्रू में उसका एक दोस्त भी शामिल था। इसी वजह से उसने कथित तौर पर आखिरी वक्त पर अपनी योजना बदल दी और हमले को रद्द कर दिया। इस जानकारी से पता चलता है कि जुलाई में ही उसने इजरायल में विमान के जरिए हमला करने की तैयारी शुरू कर दी थी।

    इसके बाद फ्लाईदुबई की इजरायल जाने वाली उड़ान को लेकर भी हम्मामी की कथित योजना सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, उसने जानबूझकर तेल अवीव जाने वाली उड़ान को चुना था। उसकी योजना कॉकपिट का नियंत्रण अपने हाथ में लेने की थी। इसके बाद वह विमान को सामान्य तरीके से उड़ाता रहता और लैंडिंग के समय आखिरी पल में विमान को किसी इमारत या दूसरे विमान से टकराने की कोशिश करता। इस तरह विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की योजना बनाई गई थी।

    उड़ान के दौरान हम्मामी ने को-पायलट स्मित मछार पर हमला किया और विमान में आपात स्थिति के लिए रखी गई कुल्हाड़ी से उन पर वार किया। इसके बाद विमान के कैप्टन कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे। विमान में मौजूद कई यात्रियों ने हम्मामी को काबू में कर लिया। इसके बाद विमान में मौजूद ड्यूटी से बाहर के पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला और उसे सुरक्षित रूप से उतार लिया। इस घटना के बाद हम्मामी से पूछताछ की जा रही है और उसके पहले से तैयार किए गए कथित हमले के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

    जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, इजरायली जांचकर्ताओं ने अब तक हम्मामी से सीधे पूछताछ नहीं की है। उसके बारे में सामने आई जानकारी संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में हुई जांच के दौरान सामने आने की बात कही गई है। मामले में अब यह भी जांच की जा रही है कि हम्मामी ने इजरायल जाने वाली उड़ान को क्यों चुना और उसके हमले की योजना कितनी पहले से तैयार थी। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात में उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है। उसे मौत की सजा दिए जाने की संभावना की बात सामने आई है, लेकिन अभी तक उसके खिलाफ कोई औपचारिक सजा सुनाई नहीं गई है। मामले की जांच जारी है।

  • भारत में शांति नहीं वाले बयान पर घिरे संजय दत्त, ट्रोलिंग के बाद दी सफाई, मुन्नाभाई और गांधीगिरी से जोड़ा कनेक्शन

    भारत में शांति नहीं वाले बयान पर घिरे संजय दत्त, ट्रोलिंग के बाद दी सफाई, मुन्नाभाई और गांधीगिरी से जोड़ा कनेक्शन


    नई दिल्ली। अभिनेता संजय दत्त इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में वह शेखर सुमन के टॉक शो में पहुंचे थे जहां बातचीत के दौरान उन्होंने भारत में शांति और भाईचारे को लेकर अपनी बात रखी। उनकी टिप्पणी का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आया और इसके बाद कुछ यूजर्स ने अभिनेता की आलोचना शुरू कर दी। विवाद बढ़ने के बाद अब संजय दत्त ने सोशल मीडिया के जरिए अपने बयान पर सफाई पेश की है।

    संजय दत्त ने अपनी सफाई में कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति समुदाय या संस्था की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि शो में हुई बातचीत एक तय स्क्रिप्ट के संदर्भ में थी और इसका मकसद हल्का फुल्का तथा हास्यपूर्ण संवाद करना था। अभिनेता के मुताबिक उनकी बात को जिस संदर्भ में समझा गया वह उनके मूल इरादे से अलग था।

    संजय दत्त ने अपनी सफाई में अपनी चर्चित फिल्म मुन्नाभाई का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उनके बयान के पीछे वही हास्य और व्यंग्य वाली शैली थी जो मुन्नाभाई जैसी फिल्मों में दिखाई गई है। उन्होंने विशेष तौर पर गांधीगिरी की सोच का उल्लेख किया। उनके अनुसार गांधीगिरी का संदेश प्रेम एकजुटता और सद्भावना से जुड़ा हुआ है और उनकी बातचीत को भी इसी भावना के साथ समझा जाना चाहिए था।

    दरअसल शेखर सुमन के शो में संजय दत्त से देश के मौजूदा माहौल को लेकर बातचीत हुई थी। इसी दौरान अभिनेता ने कहा था कि भारत के लोग बहुत प्यारे हैं और देश में शांति होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा था कि उन्हें अब देश में पहले जैसी शांति महसूस नहीं होती। इसके साथ ही उन्होंने भारतीयों को बड़े दिल वाला और मेहमाननवाज बताया था।

    संजय दत्त ने बातचीत के दौरान यह भी कहा था कि भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है और भारतीयों को आगे भी अपनी इसी भावना को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने भगवान शिव से प्रार्थना करते हुए उम्मीद जताई थी कि देश में शांति और भाईचारे का माहौल फिर से लौटेगा। हालांकि उनके बयान के एक हिस्से को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    विवाद के बाद अभिनेता ने अपनी बात का संदर्भ समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी का उद्देश्य किसी का अपमान करना या किसी समुदाय के प्रति अनादर दिखाना नहीं था। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बातचीत के हास्यपूर्ण संदर्भ को अलग करके देखने की वजह से उनकी बात का अर्थ बदल गया।

    संजय दत्त के लिए मुन्नाभाई फ्रेंचाइजी से जुड़ा गांधीगिरी वाला किरदार और संदेश काफी महत्वपूर्ण रहा है। फिल्मों में उनके किरदार के जरिए हिंसा और टकराव के बजाय प्रेम और शांति से समस्याओं का सामना करने की बात दिखाई गई थी। यही वजह है कि अभिनेता ने अपने हालिया बयान की सफाई देते समय इसी फिल्म और उसके संदेश का उदाहरण दिया।

    इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखाया है कि सार्वजनिक मंच पर कही गई किसी बात का छोटा सा हिस्सा भी सोशल मीडिया पर अलग संदर्भ में तेजी से फैल सकता है। संजय दत्त ने विवाद बढ़ने के बाद अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी मंशा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की नहीं थी। अब उनकी सफाई के बाद इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा किस दिशा में जाती है यह देखने वाली बात होगी।

  • सिवनी में 22 वर्षीय मुस्कान की हत्या का खुलासा, मां-मामा पर गला दबाने और हादसा दिखाने के लिए करंट लगाने का आरोप

    सिवनी में 22 वर्षीय मुस्कान की हत्या का खुलासा, मां-मामा पर गला दबाने और हादसा दिखाने के लिए करंट लगाने का आरोप


    मध्य प्रदेश: के सिवनी जिले में 22 वर्षीय युवती मुस्कान उईके की हत्या का मामला सामने आया है। कुरई थाना क्षेत्र के सतोसा गांव में 30 सितंबर को मक्के के खेत से एक अज्ञात युवती का शव मिला था। पुलिस जांच में शव की पहचान मुस्कान उईके के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, मुस्कान आवरघनी स्थित एक रिजॉर्ट में काम करती थी और 28 सितंबर की शाम काम से लौटने के बाद घर वापस आई थी। इसके बाद वह मोबाइल पर काफी देर तक किसी से बात कर रही थी। इसी बात को लेकर उसकी मां सुनीता उईके से विवाद हुआ था। पुलिस का आरोप है कि विवाद के दौरान मां और मामा अनिल धुर्वे ने उसके साथ मारपीट की और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी।

    पुलिस के अनुसार, 30 सितंबर को खेत में मिले शव पर चोटों के साथ बिजली के करंट से झुलसने के निशान भी थे। शव की पहचान शुरू में नहीं हो सकी थी। इसके बाद पुलिस ने आसपास के गांवों और रिजॉर्ट में पूछताछ शुरू की तथा वहां आने-जाने वाले लोगों की जानकारी और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। जांच के दौरान पता चला कि मुस्कान 28 सितंबर की शाम से घर नहीं लौटी थी। कपड़ों, हुलिए और अन्य जानकारी के आधार पर शव की पहचान मुस्कान के रूप में की गई। इसके बाद पुलिस ने उसके परिजनों से पूछताछ शुरू की और मामले की जांच आगे बढ़ाई।

    जांच के दौरान पुलिस ने मुस्कान की मां सुनीता उईके और मामा अनिल धुर्वे को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने हत्या की बात स्वीकार की। आरोप है कि 28 सितंबर की रात मोबाइल पर किसी से बात करने को लेकर मुस्कान को टोका गया था। विवाद बढ़ने के बाद दोनों ने उसके साथ मारपीट की और फिर गला दबाकर उसकी जान ले ली। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने घटना को छिपाने के लिए शव पर बिजली का करंट लगाया। इसके बाद शव को पास के मक्के के खेत में ले जाकर फेंक दिया गया।

    पुलिस का कहना है कि शव पर करंट के निशान इस तरह बनाए गए थे कि मौत को दुर्घटना का रूप दिया जा सके। जांच के दौरान घटनास्थल, सीसीटीवी फुटेज और अन्य वैज्ञानिक एवं तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला गया। पुलिस के मुताबिक, शुरुआत में मुस्कान की मां ने शव को पहचानने से इनकार किया था, लेकिन पूछताछ और सामने आए साक्ष्यों के बाद उसने हत्या से जुड़ी जानकारी स्वीकार की। मामले की जांच में पुलिस ने मृतका के रिजॉर्ट में काम करने की जानकारी और उसके घर से गायब होने की समय-सीमा को भी महत्वपूर्ण माना।

    पुलिस ने इस मामले में सुनीता उईके और अनिल धुर्वे को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य छिपाने से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच में कुरई और बरघाट पुलिस के साथ साइबर सेल की टीम ने भी काम किया। 30 सितंबर को अज्ञात युवती के शव से शुरू हुई जांच में पुलिस ने उसकी पहचान मुस्कान के रूप में की और इसके बाद पूछताछ तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उसकी मां और मामा को आरोपी बनाया। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों और घटनाक्रम की जांच कर रही है।

  • 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे थे जावेद अख्तर, तीन दिन तक नहीं मिला खाना, फुटपाथ और स्टूडियो में गुजारे मुश्किल दिन

    27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे थे जावेद अख्तर, तीन दिन तक नहीं मिला खाना, फुटपाथ और स्टूडियो में गुजारे मुश्किल दिन

    नई दिल्ली: मशहूर लेखक, गीतकार और शायर जावेद अख्तर ने भारतीय सिनेमा में अपनी खास पहचान बनाने से पहले बेहद संघर्षपूर्ण दौर देखा था। 4 अक्टूबर 1964 को 19 साल की उम्र में वह मुंबई के बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचे थे। उस समय उनकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन आंखों में बड़े सपने थे। मुंबई में अपनी पहचान बनाने की कोशिश के दौरान उनके सामने रहने और खाने तक की मुश्किलें खड़ी हो गईं। शुरुआती दिनों में उनके पास कोई तय ठिकाना नहीं था और उन्हें कई बार फुटपाथ, रेलवे स्टेशन तथा अलग-अलग स्टूडियो परिसरों में रात बितानी पड़ी।

    जावेद अख्तर के संघर्ष के उन दिनों को उनकी पत्नी और अभिनेत्री शबाना आजमी ने हाल ही में याद किया। उन्होंने बताया कि मुंबई पहुंचने के बाद जावेद के लिए हालात काफी मुश्किल थे। कई दिनों तक उन्हें फुटपाथ पर रातें गुजारनी पड़ीं। कभी रेलवे स्टेशन तो कभी स्टूडियो परिसर में सोकर उन्होंने समय बिताया। रहने की परेशानी के साथ खाने का संकट भी सामने आया। हालात इतने खराब हो गए थे कि एक समय ऐसा भी आया जब जावेद लगातार तीन दिनों तक कुछ खा नहीं पाए। उनके पास पहनने के लिए भी ज्यादा कपड़े नहीं थे और जो कपड़े थे, उनकी हालत भी अच्छी नहीं थी।

    इन मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद जावेद अख्तर ने हार नहीं मानी। जब वह पूरी तरह निराशा के करीब पहुंच गए थे और उनके सामने संघर्ष छोड़ देने का विकल्प था, तब उन्होंने खुद को यह समझाया कि वह इस तरह मरने के लिए पैदा नहीं हुए हैं और एक दिन यह मुश्किल वक्त जरूर बदल जाएगा। समय के साथ उनकी यह सोच सच साबित हुई। शबाना आजमी ने जावेद के संघर्ष को याद करते हुए कहा कि कुछ सफर लगभग कुछ भी न होने से शुरू होते हैं और उनके पास सिर्फ एक सपना होता है। उन्होंने लोगों से कभी हार न मानने की अपील करते हुए जावेद के सफर को उदाहरण के तौर पर सामने रखा।

    जावेद अख्तर ने आगे चलकर भारतीय सिनेमा में अपनी अलग और खास पहचान बनाई। सलीम खान के साथ उनकी जोड़ी सलीम-जावेद के नाम से मशहूर हुई। 1970 और 1980 के दशक में इस जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई चर्चित फिल्में दीं। जंजीर, दीवार, शोले और डॉन जैसी फिल्मों की सफलता में उनकी लेखनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इन फिल्मों के जरिए सलीम-जावेद की जोड़ी ने कहानी कहने के तरीके पर अपनी अलग छाप छोड़ी। बाद में जावेद अख्तर ने गीतकार और शायर के तौर पर भी अपनी पहचान बनाई और हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए।

    जावेद अख्तर और शबाना आजमी ने 9 दिसंबर 1984 को शादी की थी। जावेद के शुरुआती संघर्ष से लेकर फिल्म जगत में उनकी पहचान बनने तक का सफर बेहद कठिन परिस्थितियों से होकर गुजरा। 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचने वाले जावेद अख्तर ने शुरुआती दिनों में खाने, रहने और कपड़ों तक की कमी का सामना किया, लेकिन उन्होंने अपने सपनों को छोड़ा नहीं। बाद में सलीम-जावेद की सफल जोड़ी और गीतकार-शायर के रूप में उनकी पहचान ने उन्हें भारतीय सिनेमा की प्रमुख हस्तियों में शामिल कर दिया।

  • 10 साल में कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹838 से ₹2810 तक पहुंचा, जानें अक्टूबर में कैसे बदलती रही 19 किलो सिलेंडर की कीमत

    10 साल में कमर्शियल LPG सिलेंडर ₹838 से ₹2810 तक पहुंचा, जानें अक्टूबर में कैसे बदलती रही 19 किलो सिलेंडर की कीमत

    नई दिल्ली: कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में पिछले एक दशक के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत सितंबर 2016 में ₹838 थी, जो अक्टूबर 2026 में बढ़कर ₹2810 हो गई। यानी करीब 10 साल की अवधि में इसकी कीमत में बड़ा अंतर आया है। अक्टूबर के महीने में कई वर्षों के दौरान कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में बढ़ोतरी देखने को मिली। 2026 में अक्टूबर की शुरुआत में दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 62.50 रुपये से 71.50 रुपये तक बढ़ी और दिल्ली में इसका दाम ₹2810 पहुंच गया।

    2014 से कीमतों में बदलाव का सिलसिला देखा जाए तो सितंबर 2014 में दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1503 थी। 1 अक्टूबर को कीमत अपडेट होने के बाद यह ₹30.50 घटकर ₹1472.50 हो गई। 2015 में भी अक्टूबर में कीमत में कमी आई। सितंबर 2015 तक सिलेंडर की कीमत ₹1005.50 थी, जो अक्टूबर में ₹42.50 घटकर ₹963 रह गई। इसके बाद 2016 से 2021 के बीच अक्टूबर के दौरान कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का दौर देखने को मिला। सितंबर 2016 में ₹838 वाला सिलेंडर अक्टूबर में ₹57 महंगा होकर ₹895 हो गया।

    2021 तक यह बढ़ोतरी काफी आगे पहुंच चुकी थी। अक्टूबर 2021 में दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹1736.50 हो गई। इसके बाद अक्टूबर 2022 में सितंबर की ₹1885 कीमत के मुकाबले सिलेंडर ₹25.50 सस्ता होकर ₹1859.50 पर आ गया। 2023 में सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹209 बढ़ी और यह ₹1522.50 से बढ़कर ₹1731.50 हो गई। इस तरह अलग-अलग वर्षों में कीमतों में बढ़ोतरी और कमी दोनों देखने को मिली।

    2024 में भी अक्टूबर के दौरान कमर्शियल सिलेंडर महंगा हुआ। सितंबर की ₹1691.50 कीमत के मुकाबले अक्टूबर में इसमें ₹48.50 की बढ़ोतरी हुई और दाम ₹1740 हो गया। 2025 में भी अक्टूबर में कीमत ₹15.50 बढ़ी। सितंबर 2025 में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत ₹1580 थी, जो अक्टूबर में बढ़कर ₹1595.50 हो गई। हालांकि सालाना आधार पर उस समय कीमत कम रही। इस तरह पिछले वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान कई बार कीमत बढ़ने का रुझान दिखाई देता है।

    कमर्शियल LPG की कीमत तय होने में अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों की भी भूमिका होती है। LPG की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के लिए अरब गल्फ बेंचमार्क महत्वपूर्ण माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय LPG रेट में बदलाव का असर भारत में इसकी लागत पर पड़ता है। कीमत तय करने में पिछले महीने के औसत अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क और विदेशी मुद्रा की दर जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाता है। इसी आधार पर तेल विपणन कंपनियां LPG की कीमतों में बदलाव करती हैं। पिछले एक दशक के आंकड़े बताते हैं कि 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में समय के साथ काफी उतार-चढ़ाव आया है और सितंबर 2016 के ₹838 से अक्टूबर 2026 के ₹2810 तक पहुंचने के बीच कई चरणों में बड़े बदलाव हुए।

  • गांव का घर साधारण लेकिन सरकारी स्कूल हाईटेक, चीन पहुंचकर भारतीय PhD स्कॉलर ने दिखाया हैरान करने वाला VIDEO

    गांव का घर साधारण लेकिन सरकारी स्कूल हाईटेक, चीन पहुंचकर भारतीय PhD स्कॉलर ने दिखाया हैरान करने वाला VIDEO


    नई दिल्ली। चीन का नाम सुनते ही आमतौर पर लोगों के जेहन में आधुनिक इमारतें हाईटेक तकनीक तेज रफ्तार ट्रेनें और चमचमाते शहरों की तस्वीर सामने आती है। लेकिन चीन की एक अलग तस्वीर उसके गांवों में भी दिखाई देती है। चीन में PhD की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्र सैयद शेन आलम ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव से जुड़े कुछ वीडियो शेयर किए हैं। इन वीडियो में उन्होंने चीन के एक गांव के घर से लेकर वहां के सरकारी स्कूल तक की झलक दिखाई है। उनके अनुभव ने सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींचा है।

    सैयद शेन आलम चीन में PhD कर रहे हैं और पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम इंग्लिश टीचर के तौर पर भी काम करते हैं। वह सोशल मीडिया पर चीन की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो साझा करते रहते हैं। इस बार वह अपने एक दोस्त के गांव पहुंचे। दोस्त के परिवार को उनके आने की जानकारी पहले से थी इसलिए उनके लिए भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। शेन ने परिवार की मेहमाननवाजी की तारीफ करते हुए घर के अलग-अलग हिस्सों को वीडियो में दिखाया।

    गांव का यह घर बाहर से भले ही सामान्य नजर आता हो लेकिन अंदर कई जरूरी सुविधाएं मौजूद थीं। घर में अलग-अलग कमरे थे और उनमें बेड सोफा अलमारी तथा रोजमर्रा की जरूरत का सामान रखा हुआ था। एक कमरे के बारे में शेन ने बताया कि उनकी दोस्त शादी के बाद इसी कमरे में रहने लगी थीं। हालांकि घर में एक ऐसी चीज भी थी जिसने उन्हें हैरान किया। उनका कहना था कि घर काफी बड़ा होने के बावजूद वहां सिर्फ एक वॉशरूम था। यह वॉशरूम घर के आखिरी हिस्से में बना था और उसका डिजाइन भी कुछ पुराना दिखाई दे रहा था।

    शेन ने घर का गेस्ट रूम भी दिखाया जहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी की तस्वीर लगी हुई थी। इसके अलावा घर में एक अलग स्थान ऐसा था जहां परिवार के बुजुर्ग अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा करते थे। शेन ने चीन की नई और पुरानी पीढ़ी के बीच परंपराओं को लेकर अंतर की बात भी कही। उनके मुताबिक गांवों में कई बुजुर्ग आज भी अपनी पुरानी मान्यताओं और परंपराओं को बनाए हुए हैं।

    इसके बाद शेन चीन के इसी ग्रामीण क्षेत्र के एक सरकारी स्कूल पहुंचे। यहां का नजारा उनके लिए काफी अलग था। उन्होंने वीडियो में स्कूल की कक्षाएं और बच्चों के लिए मौजूद सुविधाएं दिखाईं। उनके मुताबिक स्कूल में बच्चों से पढ़ाई की फीस नहीं ली जाती है। क्लासरूम में AC की सुविधा के साथ पानी का डिस्पेंसर भी लगा हुआ था। बच्चों की पढ़ाई के लिए स्मार्ट बोर्ड और Wi-Fi जैसी सुविधाएं भी दिखाई गईं।

    शेन ने बताया कि स्कूल में डिजिटल सुविधाओं के साथ सामान्य बोर्ड का भी इस्तेमाल किया जाता है। यानी शिक्षक जरूरत के अनुसार स्मार्ट बोर्ड के साथ चॉक और सामान्य बोर्ड की मदद से भी बच्चों को पढ़ा सकते हैं। स्कूल में बच्चों के लिए सरकार की तरफ से मिड डे मील की व्यवस्था होने की बात भी उन्होंने बताई।

    शेन के मुताबिक विदेशी छात्रों और लोगों के लिए वॉलंटरी वर्क के अवसर भी मिलते हैं। इसी तरह के एक कार्यक्रम के तहत वह गांव के बच्चों से बातचीत करने और उन्हें कुछ सिखाने के लिए स्कूल पहुंचे थे। उनका अनुभव सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने चीन के ग्रामीण इलाकों और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी।

    वीडियो ने यह सवाल भी खड़ा किया कि किसी देश की तस्वीर केवल उसके बड़े शहरों और आधुनिक इमारतों से नहीं समझी जा सकती। गांवों की जिंदगी और वहां की शिक्षा व्यवस्था भी देश के विकास की कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। शेन आलम के वीडियो में एक तरफ पारंपरिक ग्रामीण घर और पुरानी मान्यताएं दिखाई देती हैं तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूल में आधुनिक शिक्षा सुविधाएं नजर आती हैं। यही विरोधाभास चीन के गांवों की एक अलग तस्वीर सामने लाता है।

  • कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग पर सौरभ दास का दावा, बोले- जनता से मिलती है मदद, BJP समर्थक भी देते हैं योगदान

    कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग पर सौरभ दास का दावा, बोले- जनता से मिलती है मदद, BJP समर्थक भी देते हैं योगदान

    नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग को लेकर उठ रहे सवालों पर उसके प्रवक्ता सौरभ दास ने संगठन को मिलने वाली आर्थिक मदद के बारे में जानकारी दी है। एक बहस के दौरान उनसे पूछा गया कि देश के अलग-अलग शहरों में संगठन के सदस्यों के आने-जाने और कार्यक्रमों के आयोजन में होने वाले खर्च का इंतजाम कहां से होता है। इसके जवाब में सौरभ दास ने कहा कि संगठन की सारी फंडिंग जनता से होती है। उन्होंने बताया कि जब उन्हें एक शहर से दूसरे शहर जाना होता है, तो कोई उनकी फ्लाइट टिकट कर देता है और कोई दूसरी फ्लाइट की टिकट की व्यवस्था करता है।

    कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत देश के कुछ युवाओं को कॉकरोच कहे जाने के मुद्दे से जुड़े अभियान के तौर पर हुई थी। शुरुआत में इसे एक मीम पेज के रूप में शुरू किया गया था। बाद में यह संगठन आंदोलन से जुड़ गया और इसके सदस्यों ने अलग-अलग शहरों में जाकर युवाओं से समर्थन की अपील की। संगठन की गतिविधियां बढ़ने के साथ ही यह सवाल भी उठता रहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में होने वाले कार्यक्रमों, यात्राओं और अन्य व्यवस्थाओं के लिए आर्थिक संसाधन कहां से जुटाए जाते हैं।

    सौरभ दास ने फंडिंग के तरीके के बारे में बताते हुए कहा कि संगठन को अलग-अलग लोगों से अलग-अलग तरह की मदद मिलती है। उनके मुताबिक, कोई यात्रा के लिए टिकट की व्यवस्था करता है तो किसी स्थान पर कार्यक्रम के लिए हॉल की बुकिंग कोई अन्य व्यक्ति करा देता है। उन्होंने कहा कि इस तरह जनता की ओर से मिलने वाले अलग-अलग सहयोग के जरिए संगठन की गतिविधियों से जुड़े खर्च पूरे किए जाते हैं। उनके बयान के अनुसार, फंडिंग किसी एक व्यक्ति या एक ही माध्यम पर निर्भर नहीं है, बल्कि अलग-अलग लोगों के सहयोग से होती है।

    सौरभ दास ने यह भी दावा किया कि संगठन को कुछ भाजपा समर्थकों से भी आर्थिक मदद मिलती है। उनके मुताबिक, कुछ ऐसे भाजपा समर्थक हैं जो अपनी पार्टी के कामकाज से नाराज हैं। उन्होंने बताया कि जब संगठन के सदस्य किसी शहर में जाते हैं, तो वहां ऐसे कुछ समर्थक उनसे कहते हैं कि पार्टी ठीक काम नहीं कर रही है और उसे हटाना चाहते हैं। सौरभ दास के अनुसार, ऐसे लोग कॉकरोच जनता पार्टी के लिए भी आर्थिक सहयोग करते हैं।

    फंडिंग को लेकर सौरभ दास का बयान सामने आने के बाद संगठन के आर्थिक स्रोतों पर चल रही चर्चा में जनता और अलग-अलग समर्थकों के योगदान की बात सामने आई है। उन्होंने अपने बयान में यात्रा, कार्यक्रमों के लिए हॉल की व्यवस्था और अन्य जरूरतों में लोगों की ओर से मिलने वाले सहयोग का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने दावा किया कि भाजपा से जुड़े कुछ नाराज समर्थक भी संगठन की गतिविधियों के लिए आर्थिक मदद करते हैं। इस तरह उनके मुताबिक कॉकरोच जनता पार्टी को मिलने वाला सहयोग अलग-अलग लोगों की मदद से जुटाया जाता है।

  • पैकेट वाली चीजें शरीर के लिए कितनी नुकसानदायक? ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा

    पैकेट वाली चीजें शरीर के लिए कितनी नुकसानदायक? ज्यादा सेवन से बढ़ सकता है मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा

    नई दिल्ली: आजकल बच्चों से लेकर वयस्कों तक पैकेट में मिलने वाली चीजों का सेवन बढ़ता जा रहा है। चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स और कुछ रेडी-टू-ईट खाद्य पदार्थ रोजमर्रा की डाइट का हिस्सा बन गए हैं। इन्हें तैयार करना और खाना आसान होता है, साथ ही स्वाद भी लोगों को पसंद आता है। हालांकि, इन चीजों का लगातार और अधिक सेवन सेहत के लिए परेशानी बढ़ा सकता है। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का ज्यादा सेवन केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है।

    अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ऐसे औद्योगिक तरीके से तैयार खाद्य पदार्थ होते हैं, जिनमें कई तरह के एडिटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें अक्सर कैलोरी, नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक हो सकती है, जबकि फाइबर और जरूरी पोषक तत्व अपेक्षाकृत कम होते हैं। कम उम्र में ही ऐसी चीजें खाने की आदत पड़ने से समय से पहले वजन बढ़ने और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। नियमित रूप से अधिक मात्रा में इन खाद्य पदार्थों का सेवन शरीर में जरूरत से ज्यादा कैलोरी पहुंचा सकता है, जिससे मोटापे की समस्या बढ़ सकती है।

    इन खाद्य पदार्थों में मौजूद अधिक चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट भी चिंता का विषय हो सकते हैं। इन्हें बार-बार खाने से ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऐसी डाइट लेने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इसी तरह ज्यादा नमक, संतृप्त वसा और कैलोरी का सेवन ब्लड प्रेशर, वजन और कोलेस्ट्रॉल से जुड़े जोखिमों को बढ़ा सकता है। इन कारणों से अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

    फाइबर की कमी भी इन खाद्य पदार्थों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण समस्या है। शरीर और आंतों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए फाइबर जरूरी माना जाता है। लंबे समय तक फाइबर वाली चीजों का सेवन कम रहने पर पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। अध्ययनों में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन को मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोग सहित कई क्रॉनिक बीमारियों के बढ़ते खतरे से जोड़ा गया है। कुछ अध्ययनों में इसके सेवन और कैंसर के खतरे के बीच भी संबंध पाया गया है।

    ऐसे में पैकेट वाली चीजें खरीदते समय उनके लेबल को ध्यान से देखना जरूरी है। नमक, चीनी, संतृप्त वसा और फाइबर की मात्रा की जांच करके बेहतर विकल्प चुना जा सकता है। रोजमर्रा की डाइट में फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और नट्स जैसी पौष्टिक चीजों की मात्रा बढ़ाना भी उपयोगी हो सकता है। पैकेट वाले खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कम करके और संतुलित आहार को प्राथमिकता देकर डाइट को अधिक पौष्टिक बनाया जा सकता है।