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  • MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे

    MP: इंदौर में लोगों की जान से खिलवाड़…. नगर निगम ने स्पीड ब्रेकर की जगह लगाए रंबल स्ट्रिप, रोज रहे हादसे


    इंदौर।
    नगर निगम (Municipal council) द्वारा शहर के विभिन्न हिस्सों में लगाए जा रहे फोर लेयर रंबल स्ट्रिप (Four-layer rumble strip) वाहन चालकों के लिए हादसों का सबब बन रहे हैं। स्पीड ब्रेकर (Speed ​​breaker) के स्थान पर लगाई जाने वाली यह प्लास्टिक व रबर की रंबल स्ट्रिप लगने के कुछ ही दिनों बाद टूट रही हैं। शहर में अधिकांश स्थानों पर जहां इन्हें स्थापित किया गया था, वहां से ये स्ट्रिप पूरी तरह उखड़ चुकी हैं। इन स्ट्रिप को मजबूत पकड़ देने के लिए लोहे की कीलों से सड़क पर ठोका गया था। अब स्ट्रिप के टूटने और उखड़ने के बाद सड़क पर उभरी हुई नुकीली कीलें राहगीरों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं। इन उभरी कीलों के कारण आए दिन वाहनों के टायर पंक्चर हो रहे हैं। अचानक सामने दिखने वाली कीलों से बचने की कोशिश में वाहन चालक अनियंत्रित होकर एक-दूसरे से टकरा जाते हैं, जिससे गंभीर दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं।


    प्रमुख मार्गों पर उखड़े स्पीड ब्रेकर और फैली कीलें

    एलआईजी चौराहा से लेकर कलश चौराहा तक 4 से ज्यादा स्पीड ब्रेकर बनाए गए हैं, जिनकी ऊंचाई सामान्य मानकों से काफी अधिक है। इन रबर के स्पीड ब्रेकरों को लगाते समय लोहे की कीलें ठोकी गई थीं। समय के साथ रबर के पल्ले उखड़ गए और अब केवल खतरनाक कीलें ही सड़क पर शेष बची हैं। उल्लेखनीय है कि एक पल्ले को कसने के लिए 4 से 6 कीलें ठोकी गई थीं, जो अब बाहर निकल आई हैं। इसी प्रकार पोलो ग्राउंड स्थित सांदिपनी स्कूल के सामने लगाया गया डबल स्पीड ब्रेकर भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और उसके बीच के बॉक्स पूरी तरह उखड़ गए हैं। एमआर 4 तथा मरीमाता लिंक रोड पर 2 स्थानों पर लगाए गए रंबल स्ट्रिप लगभग पूरी तरह उखड़ चुके हैं। बाणगंगा क्षेत्र में मनोचिकित्सालय से लेकर ओवरब्रिज के बीच 2 स्थानों पर लगे रंबल स्ट्रिप का बड़ा हिस्सा टूट गया है। इसके अलावा एमटीएच कंपाउंड स्थित यातायात थाना के पास और मालवा ब्रिज से लेकर परदेशीपुरा तक 2 स्थानों पर लगाए गए स्पीड ब्रेकर भी उखड़कर जर्जर हो चुके हैं।


    आईडीए चौराहे पर रंबल स्ट्रिप टूटी और वाहन चालक परेशान

    रेसकोर्स रोड पर स्थित इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) चौराहे पर नगर निगम द्वारा फोर लेयर रंबल स्ट्रिप लगाई गई थी, जो घटिया निर्माण के कारण कुछ ही दिनों में टूटने लगी। वर्तमान में यहां की अधिकांश स्ट्रिप टूट चुकी हैं और केवल नुकीली कीलें सड़क पर बाहर निकली हुई हैं। स्थानीय वाहन चालक मुकेश बरोले ने बताया कि रंबल स्ट्रिप की इन उभरी कीलों के कारण उनकी गाड़ी का टायर 3 बार पंक्चर हो चुका है। क्षेत्रीय रहवासियों का कहना है कि इस मार्ग पर फोर लेयर रंबल स्ट्रिप की आवश्यकता ही नहीं थी। लैंटर्न चौराहे और जंजीरावाला चौराहे से आने-जाने वाले यातायात की गति को सामान्य स्पीड ब्रेकर के माध्यम से भी आसानी से नियंत्रित किया जा सकता था। रंबल स्ट्रिप पर वाहन अत्यंत धीमी गति से गुजरते हैं, फिर भी इनका इतनी जल्दी टूट जाना घटिया निर्माण गुणवत्ता की ओर सीधा इशारा करता है।


    नियमों की अनदेखी और सड़क सुरक्षा समिति के निर्णयों पर अमल नहीं

    आर्किटेक्ट अतुल शेठ के अनुसार शहर में स्पीड ब्रेकर का निर्माण करते समय किसी भी निर्धारित तकनीकी नियम व मानक का पालन नहीं किया जाता है। इसके परिणामस्वरूप न केवल आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं, बल्कि वाहनों के झटकों से लोगों को कमर दर्द व अन्य शारीरिक परेशानियां भी झेलनी पड़ रही हैं। अगस्त 2025 में आयोजित सड़क सुरक्षा समिति की आधिकारिक बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया था कि शहर की कॉलोनियों और मुख्य सड़कों से सभी अवैध स्पीड ब्रेकर तत्काल हटाए जाएंगे, परंतु इस निर्णय पर आज तक अमल नहीं हो सका। समिति ने यह प्रावधान भी किया था कि सड़क सुरक्षा समिति की पूर्व मंजूरी के बिना कहीं भी नया स्पीड ब्रेकर नहीं बनाया जा सकेगा और यदि कोई निर्माण होता है तो उसकी संपूर्ण राशि संबंधित निर्माण एजेंसी से वसूल की जाएगी। इस आदेश को पारित हुए 1 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

  • US के नए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में चीन का बड़ा कदम…6 अमेरिकी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट

    US के नए व्यापारिक प्रतिबंधों के जवाब में चीन का बड़ा कदम…6 अमेरिकी कंपनियों को किया ब्लैकलिस्ट


    बैंकॉक।
    अमेरिका (America) की ओर से लगाए गए नए व्यापारिक प्रतिबंधों (New trade restrictions) के जवाब में चीन (China) ने कई कड़े आर्थिक कदम उठाए हैं। चीन ने छह अमेरिकी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट में डाल दिया है और अमेरिका को ड्रोन, उनके प्रमुख पुर्जों तथा संबंधित तकनीक के निर्यात पर कड़े नियंत्रण लागू कर दिए हैं। साथ ही आयातित प्रिंटर सॉफ्टवेयर और कार्यालय उपकरणों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से जांच शुरू कर दी है।

    चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, कार्रवाई अमेरिका की ओर से चीनी ड्रोन के आयात पर रोक लगाने, 43 चीनी कंपनियों को उइगर जबरन श्रम रोकथाम कानून की सूची में शामिल करने और नए टैरिफ लगाने के जवाब में की गई है। अमेरिका के कदम दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति के खिलाफ हैं और चीन के वैध हितों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए जवाबी कार्रवाई करना जरूरी हो गया।

    तीन माह में ही रिश्तों में फिर आई तल्खी
    चीन ने ड्रोन, उनके प्रमुख पुर्जों और दोहरे उपयोग (नागरिक और सैन्य) वाली तकनीक के निर्यात को मामला-दर-मामला (केस बाई केस) मंजूरी के दायरे में ला दिया है। अब चीन की कोई भी संस्था या व्यक्ति इन कंपनियों के साथ व्यापार, सहयोग या अन्य गतिविधियों में हिस्सा नहीं ले सकेगा। मई में जिनपिंग-ट्रंप की मुलाकात के बाद रिश्तों में सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन तीन माह बाद ही फिर से तनाव फिर बढ़ गया है।


    सेना से लेकर पुलिस तक चीनी ड्रोन पर निर्भर अमेरिका

    – अमेरिका का ड्रोन उद्योग, चीनी ड्रोन और उनके कलपुर्जों पर 70 से 90 फीसदी तक निर्भर है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले लगभग 80 से 90 फीसदी व्यावसायिक ड्रोन चीनी कंपनियों (मुख्य रूप से डीजेआई-दा जियांग इनोवेशंस) द्वारा बनाए जाते हैं।
    – अमेरिकी पुलिस, फायर ब्रिगेड और स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों के 90% से 92% ड्रोन चीनी निर्मित हैं। चीन एयरफ्रेम, मोटर, कैमरा, स्क्रीन और रेडियो सिस्टम सरीखे दुनिया के 90 फीसदी ड्रोन पार्ट्स नियंत्रित करता है।
    – ड्रोन में इस्तेमाल होने वाली बैटरियों के लिए आवश्यक रिफाइंड ग्रेफाइट का 70% और ड्रोन मोटर के चुंबकों का 90% हिस्सा अकेले चीन से आता है
    – अमेरिका में खेती (सटीक छिड़काव और फसल निगरानी), रियल एस्टेट मैपिंग, और कमर्शियल फोटोग्राफी के लिए चीनी ड्रोनों का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है।
    – अमेरिका को अब हांगकांग या अन्य तीसरे देशों से पुर्जे मंगाने पड़ रहे हैं। इससे ड्रोन उत्पादन और पुर्जों की लागत में 25%-35% तक बढ़ेगी।

  • TRP के लिए नहीं था अलगाव का फैसला, आकांक्षा चमोला ने गौरव खन्ना संग रिश्ते पर रखी अपनी बात

    TRP के लिए नहीं था अलगाव का फैसला, आकांक्षा चमोला ने गौरव खन्ना संग रिश्ते पर रखी अपनी बात


    नई दिल्ली। टीवी अभिनेता गौरव खन्ना और उनकी पत्नी आकांक्षा चमोला के रिश्ते को लेकर पिछले कुछ समय से लगातार चर्चाएं हो रही हैं। रियलिटी शो लॉक अप में आकांक्षा द्वारा अपने वैवाहिक जीवन को लेकर किए गए खुलासों के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि कहीं यह सब शो की लोकप्रियता और टीआरपी बढ़ाने की रणनीति तो नहीं है। अब शो से बाहर आने के बाद आकांक्षा चमोला ने इन सभी अटकलों पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है और साफ कर दिया है कि उनके और गौरव खन्ना के बीच तलाक की प्रक्रिया पहले से चल रही थी और इसका शो की टीआरपी से कोई संबंध नहीं है।

    आकांक्षा ने कहा कि उन्होंने अपने निजी जीवन के बारे में जो बातें शो में साझा कीं वे किसी प्रचार का हिस्सा नहीं थीं। उनके मुताबिक दोनों का रिश्ता काफी समय पहले ही टूट चुका था और अब केवल कानूनी औपचारिकताएं पूरी होना बाकी हैं। उन्होंने कहा कि लोग इसे टीआरपी से जोड़ रहे हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि तलाक का फैसला पहले ही लिया जा चुका था और अब सिर्फ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने बाकी हैं।

    अभिनेत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी तरह की सहानुभूति या लोकप्रियता हासिल करने के लिए अपनी निजी जिंदगी का इस्तेमाल नहीं करना चाहतीं। उनका कहना है कि उन्होंने केवल सच बताया क्योंकि वह अपनी जिंदगी को लेकर अब किसी भ्रम में नहीं रहना चाहती थीं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हर रिश्ते की अपनी परिस्थितियां होती हैं और बाहर से लोग पूरी कहानी जाने बिना राय बना लेते हैं।

    गौरव खन्ना और आकांक्षा चमोला की शादी वर्ष 2016 में हुई थी। लंबे समय तक दोनों टीवी इंडस्ट्री के चर्चित कपल माने जाते रहे। हालांकि पिछले कुछ समय से दोनों के अलग रहने की खबरें सामने आने लगी थीं। लॉक अप के दौरान आकांक्षा ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपने अलगाव का जिक्र किया जिसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोगों ने इसे शो का हिस्सा बताया तो कुछ ने इसे निजी फैसला माना।

    शो के दौरान गौरव खन्ना भी एक एपिसोड में नजर आए थे। उस समय दोनों के बीच हुई बातचीत ने दर्शकों का ध्यान खींचा था। इसके बाद भी उनके रिश्ते को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाते रहे लेकिन अब आकांक्षा के ताजा बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तलाक का फैसला किसी रियलिटी शो या प्रचार अभियान का हिस्सा नहीं बल्कि उनकी निजी जिंदगी का निर्णय है।

    आकांक्षा ने अपने बयान में यह भी कहा कि वह जीवन में आगे बढ़ना चाहती हैं और इस विषय पर बार बार सफाई देने की जरूरत नहीं समझतीं। उनके अनुसार निजी फैसलों का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी के व्यक्तिगत रिश्तों को मनोरंजन का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। फिलहाल दोनों की ओर से यही संकेत मिले हैं कि अलगाव आपसी सहमति से हो रहा है और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस अध्याय का औपचारिक अंत हो जाएगा।

  • परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड

    परिसीमन बिल पर सरकार को एक विपक्षी दल का मिल सकता है साथ, द्रमुक का बदल रहा मूड


    नई दिल्ली।
    तमिलनाडु (Tamil Nadu) में बदली राजनीतिक परिस्थितियों के बाद केंद्र के परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर द्रमुक के रुख में भी बदलाव दिख रहा है। राज्य में चुनाव से पहले इस बिल का खुला विरोध कर रही द्रमुक अब कह रही है कि विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद इसके समर्थन करने या नहीं करने का फैसला लिया जाएगा।

    सूत्रों का कहना है उसके इस रुख का मतलब है कि यदि बिल में यह प्रावधान होता है कि राज्यों में विधानसभा की मौजूदा सीटों की संख्या में समान रूप से 50% की वृद्धि होगी तो द्रमुक समर्थन देने के लिए तैयार हो सकती है। अप्रैल में जो बिल सरकार ने पेश किया था, तब ऐसी बात कही गई थी लेकिन यह विधेयक में नहीं थी। वह विधेयक पारित नहीं हो पाया था।


    पहले विरोध में थी DMK

    सरकार पिछले सत्र में जब यह बिल लाई थी तो द्रमुक ने इसका खुलकर विरोध किया था और इसे तमिलनाडु के हितों के खिलाफ बताया था। तब विधेयक के प्रावधानों की बात पर कोई चर्चा नहीं हुई थी। सूत्रों का कहना है कि द्रमुक के दबाव में ही तब इंडिया गठबंधन ने इस विधेयक का विरोध किया था। तब सरकार को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी कि स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने वाली कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करेगी। द्रमुक के वरिष्ठ नेता त्रिरुचि शिवा ने कहा कि जो रुख पहले था, वह अब नहीं है। अब हम कह रहे हैं कि पहले विधेयक का प्रारूप सामने हो, उसके बाद निर्णय करेंगे।

    द्रमुक के लोकसभा में 22 सदस्य हैं जो सरकार को दो तिहाई बहुमत से इस विधेयक को पारित कराने में अहम साबित हो सकते हैं। इस बिल को पारित करने के लिए सरकार को लोकसभा में 360 सांसदों का समर्थन चाहिए। अभी तक एनडीए के पास 326 तक की संख्या हुई है। बता दें कि इससे पूर्व कांग्रेस के टीवीके सरकार को समर्थन देने के मुद्दे पर नाराज द्रमुक इंडिया गठबंधन से अलग हो चुका है। ऐसे में सत्ता पक्ष की उम्मीदें उससे बढ़ी हैं।


    विशेष सत्र बुलाने का प्रस्ताव नहीं

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने बुधवार रात कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर 16 से 18 अगस्त के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार मौजूदा मॉनसून सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने की नए सिरे से कोशिश कर रही है। इस विधेयक का मकसद 2029 में लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 816 करना है।

    कुछ राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण संशोधन विधेयक फिर से पेश किए जा सकते हैं। इस बारे में पूछे जाने पर रीजीजू ने विशेष सत्र के किसी भी प्रस्ताव से इनकार किया।

  • US: ट्रंप प्रशासन का भारतीयों पर एक और प्रहार…. F-1 छात्र वीजा में की भारी कटौती

    US: ट्रंप प्रशासन का भारतीयों पर एक और प्रहार…. F-1 छात्र वीजा में की भारी कटौती


    वाशिंगटन।
    ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) ने बीते साल भारतीय और चीनी छात्रों को जारी किए जाने वाले एफ-1 छात्र वीजा (F-1 Student Visa) में भारी कटौती की है। सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (Center for Immigration Studies) की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में 2025 में भारतीय और चीनी नागरिकों को जारी किए छात्र वीजा की संख्या में पिछले वर्षों की तुलना में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

    2024-25 शैक्षणिक सत्र में अमेरिका के उच्च शिक्षण संस्थानों में 11,77,766 विदेशी छात्र पढ़ रहे थे। इनमें भारत के 3,63,019 और चीन के 2,65,919 छात्र शामिल थे। दोनों देशों के छात्र मिलाकर कुल विदेशी छात्रों का 53 प्रतिशत हिस्सा थे।


    अमेरिका में ओपीटी योजना भी प्रभावित

    डिग्री पूरी करने के बाद ओपीटी कार्यक्रम के तहत विदेशी छात्रों को अमेरिका में काम करने की अनुमति मिलती है। वीजा कटौती से ये योजना भी प्रभावित हुई। आईआईई के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में 2,94,253 विदेशी छात्र ओपीटी के तहत काम कर रहे थे। इनमें भारत के 1,43,740 और चीन के 61,981 छात्र शामिल थे। 2024 में ओपीटी के तहत काम करने वाले 1,65,524 विदेशी छात्रों में से 68 प्रतिशत भारत और चीन के नागरिक थे। इनमें 79,331 भारतीय और 33,807 चीनी छात्र शामिल थे।

    सीआईएस का कहना है कि यदि भारत और चीन से आने वाले छात्रों की संख्या घटती है तो ओपीटी के माध्यम से अमेरिकी श्रम बाजार में आने वाले विदेशी पेशेवरों की संख्या भी प्रभावित हो सकती है।


    22 हजार भारतीयों को बीते वर्ष जारी हुआ वीजा

    रिपोर्ट की मानें तो बीते साल मई से अगस्त के बीच 22149 भारतीयों को एफ-1 छात्र वीजा जारी किए गए। साल 2024 में इसी अवधि के दौरान अमेरिकी प्रशासन द्वारा 58,694 वीजा जारी किए गए थे, यानी 62 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। चीनी छात्रों की बात करें तो मई-अगस्त 2025 के दौरान चीनी छात्रों को 40,034 वीजा जारी किए गए। 2024 में ये संख्या 61,075 वीजा जारी हुए थे। इसमें 34 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।


    OPT पर बड़े प्रस्ताव की तैयारी

    खबर है कि अगर अब अगर कोई छात्र ग्रेजुएशन के बाद अमेरिका में ही रहकर काम करना चाहता है, तो उसे 1 लाख डॉलर की मोटी फीस सरकार को देनी होगी। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। वॉल स्ट्रीट जनरल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा के बाद काम की फीस के अलावा नए वीजा नियम भी जारी किए गए हैं। इसके तहत अंतरराष्ट्रीय छात्र पढ़ाई के बाद लंबे समय तक अमेरिका में नहीं रह सकेंगे। हालांकि, इस पर अब तक अंतिम मुहर नहीं लगाई गई है।

    OPT का मतलब एक अस्थायी नौकरी से है, जो F-1 वीजा पर अमेरिका पहुंचे छात्र के पढ़ाई के क्षेत्र से जुड़ी होती है। पात्र छात्र 12 महीने का ओपीटी काम हासिल कर सकते हैं।

    मौजूदा व्यवस्था है कि जब तक पढ़ाई चल रही है और वीजा के नियमों का पालन किया जा रहा है, तब तक छात्र अमेरिका में रह सकता है। अगर उसकी पढ़ाई लंबी चलती है, तो समय को नियमों का पालन कर बढ़ाया जाता है। अब यह व्यवस्था खत्म होने जा रही है।

  • PoK: विधानसभा चुनाव में विरोध के बीच नवाज शरीफ की पार्टी को बढ़त… सरकार बनाना लगभग तय

    PoK: विधानसभा चुनाव में विरोध के बीच नवाज शरीफ की पार्टी को बढ़त… सरकार बनाना लगभग तय


    इस्लामाबाद।
    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) (Pakistan-occupied Kashmir – PoK) की विधानसभा के चुनाव (Legislative Assembly elections) में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ (Former Prime Minister Nawaz Sharif) की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) ने बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। चुनाव आयोग के मुताबिक, अब तक दो चरणों की मतगणना पूरी हो चुकी है, जिसमें पार्टी ने 34 में से 24 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके साथ ही पीएमएल-एन का अगली क्षेत्रीय सरकार बनाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि चुनाव से पहले कई सप्ताह तक विरोध प्रदर्शन हुए और प्रतिबंधित संगठन ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने लोगों से मतदान का बहिष्कार करने की अपील की थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाला।


    तीन चरणों में हो रहे हैं चुनाव

    क्षेत्रीय चुनाव आयोग के प्रवक्ता राजा शकील ने बताया कि सुरक्षा कारणों और भारी मानसूनी बारिश की वजह से चुनाव तीन चरणों में कराए जा रहे हैं। पहले दो चरणों में 34 सीटों पर मतदान और मतगणना पूरी हो चुकी है। बाकी 11 सीटों के लिए मतदान 10 अगस्त को होगा। राजा शकील के अनुसार, कई इलाकों में 50 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जबकि क्षेत्रीय राजधानी मुजफ्फराबाद में मतदान 56 प्रतिशत से ज्यादा रहा।


    10 साल बाद सत्ता में वापसी

    अब तक के नतीजों से साफ है कि पीएमएल-एन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में करीब 10 साल बाद सत्ता में वापसी करने जा रही है। जीत के बाद नवाज शरीफ ने विजयी उम्मीदवारों को बधाई दी और इसे लोकतंत्र की जीत बताया।


    विरोध और झड़पों के बीच हुआ मतदान

    चुनाव प्रचार के दौरान जेएएसी ने लगातार प्रदर्शन किए और लोगों से मतदान न करने की अपील की। हाल ही में क्षेत्रीय सरकार ने इस संगठन पर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए प्रतिबंध लगा दिया था। मतदान से पहले संगठन के समर्थकों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें भी हुईं। इसके बावजूद स्थानीय लोगों ने हिंसा की आशंका के बीच मतदान किया। विश्लेषकों का कहना है कि विरोध और हिंसा के बावजूद बड़ी संख्या में लोगों का मतदान करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर जनता के भरोसे को दर्शाता है।


    आरक्षित सीटों को लेकर विवाद

    चुनाव के दौरान सबसे बड़ा विवाद 12 आरक्षित सीटों को लेकर रहा। ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो 1947 के बाद भारत प्रशासित कश्मीर से विस्थापित होकर पाकिस्तान में बस गए थे। जेएएसी का आरोप है कि इन सीटों की वजह से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के बाहर रहने वाले लोगों को जरूरत से ज्यादा राजनीतिक प्रभाव मिलता है। संगठन इन सीटों को खत्म करने की मांग कर रहा है। हालांकि जून में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि ये सीटें संविधान से संरक्षित हैं और इन्हें खत्म करने के लिए संवैधानिक संशोधन जरूरी होगा।


    सरकार का क्या कहना है?

    पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की सरकार का कहना है कि उसने जेएएसी की 38 में से 36 मांगें मान ली हैं। केवल आरक्षित सीटों का मुद्दा विधानसभा और संवैधानिक प्रक्रिया के जरिए ही हल किया जा सकता है। सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने चुनाव में बाधा डालने की कोशिश की और विरोध प्रदर्शनों में पाकिस्तान तालिबान के सदस्यों की घुसपैठ की आशंका भी जताई। हालांकि जेएएसी ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

  • राइस स्किन केयर का बढ़ता ट्रेंड जानिए चावल से कैसे बनाएं बेदाग दमकती और मुलायम त्वचा

    राइस स्किन केयर का बढ़ता ट्रेंड जानिए चावल से कैसे बनाएं बेदाग दमकती और मुलायम त्वचा


    नई दिल्ली। चावल लगभग हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह त्वचा की देखभाल के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। एशियाई देशों में सदियों से चावल और चावल के पानी का उपयोग प्राकृतिक ब्यूटी ट्रीटमेंट के रूप में किया जाता रहा है। आज भी कई लोग महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की जगह राइस स्किन केयर को अपनाकर अपनी त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाए रखते हैं। चावल में मौजूद विटामिन बी अमीनो एसिड एंटीऑक्सीडेंट और मिनरल्स त्वचा को पोषण देने में मदद करते हैं जिससे चेहरा साफ मुलायम और आकर्षक दिखाई देता है।

    राइस वॉटर यानी चावल का पानी त्वचा के लिए सबसे ज्यादा लोकप्रिय घरेलू उपायों में से एक है। चावल धोने या भिगोने के बाद बचा हुआ पानी कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसे चेहरे पर लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और त्वचा की नमी लंबे समय तक बनी रहती है। नियमित उपयोग से त्वचा की बनावट में सुधार हो सकता है और चेहरा पहले से ज्यादा फ्रेश दिखाई देने लगता है।

    चावल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। बढ़ती उम्र के साथ चेहरे पर झुर्रियां और फाइन लाइन्स दिखाई देने लगती हैं लेकिन सही स्किन केयर के साथ राइस वॉटर का उपयोग त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक माना जाता है। इससे त्वचा अधिक टाइट और चमकदार महसूस होती है।

    अगर चेहरे पर टैनिंग या दाग धब्बों की समस्या है तो चावल का फेस पैक भी उपयोगी साबित हो सकता है। इसके लिए चावल को पीसकर उसका महीन पाउडर तैयार करें और उसमें दही शहद या गुलाब जल मिलाकर पेस्ट बना लें। इस मिश्रण को चेहरे पर पंद्रह से बीस मिनट तक लगाकर रखें और फिर साफ पानी से धो लें। इससे त्वचा की गहराई से सफाई होती है और चेहरे पर प्राकृतिक निखार दिखाई देने लगता है।

    राइस वॉटर का इस्तेमाल प्राकृतिक फेस टोनर के रूप में भी किया जा सकता है। एक कॉटन की मदद से इसे चेहरे पर लगाएं और सूखने दें। इससे त्वचा ताजगी महसूस करती है और अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है। गर्मियों के मौसम में ठंडा राइस वॉटर चेहरे को आराम देने का भी काम करता है।

    हालांकि हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले त्वचा के एक छोटे हिस्से पर परीक्षण करना बेहतर रहता है। यदि किसी तरह की एलर्जी या जलन महसूस हो तो इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए। साथ ही केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार पर्याप्त पानी अच्छी नींद और नियमित स्किन केयर रूटीन भी जरूरी है।

    अगर आप बिना ज्यादा खर्च किए अपनी त्वचा की देखभाल करना चाहते हैं तो चावल और राइस वॉटर आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन सकते हैं। सही तरीके से और नियमित उपयोग करने पर यह त्वचा को स्वस्थ मुलायम और प्राकृतिक चमक देने में मदद कर सकता है। प्राकृतिक उपायों की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वे धीरे धीरे लेकिन लंबे समय तक असर दिखाते हैं और त्वचा को अंदर से पोषण देने का काम करते हैं।

  • प्रीति जिंटा संग रिश्ते की चर्चाओं पर ब्रेट ली ने तोड़ी चुप्पी, अफेयर की अफवाहों का बताया सच

    प्रीति जिंटा संग रिश्ते की चर्चाओं पर ब्रेट ली ने तोड़ी चुप्पी, अफेयर की अफवाहों का बताया सच


    नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने आखिरकार उन चर्चाओं पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है जो वर्षों तक उनके और बॉलीवुड अभिनेत्री तथा पंजाब किंग्स की सह मालकिन प्रीति जिंटा के रिश्ते को लेकर होती रहीं। आईपीएल के शुरुआती सीजन से दोनों के नाम को जोड़कर कई तरह की अफवाहें सामने आती रहीं लेकिन अब ब्रेट ली ने साफ शब्दों में कहा है कि उनके और प्रीति जिंटा के बीच कभी भी प्रेम संबंध नहीं था। दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त थे और आज भी उनकी दोस्ती बरकरार है।

    एक इंटरव्यू में ब्रेट ली ने कहा कि उन्होंने कभी किसी बॉलीवुड अभिनेत्री को डेट नहीं किया। उन्होंने बताया कि प्रीति जिंटा उस समय पंजाब टीम की मालिक थीं और उनके साथ हमेशा एक सम्मानजनक और दोस्ताना रिश्ता रहा। ली ने कहा कि प्रीति बेहद समझदार और सम्मानित महिला हैं और वह उनका बहुत आदर करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि लोगों की अटकलों और अफवाहों ने उन्हें कभी परेशान नहीं किया क्योंकि उन्हें हमेशा सच पता था। उनके अनुसार लोग अपनी तरफ से कहानियां बनाते रहे लेकिन उन्होंने कभी इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

    दरअसल साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत के साथ ब्रेट ली किंग्स इलेवन पंजाब टीम से जुड़े थे। वह 2010 तक इस फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहे। इसी दौरान मैदान पर और टीम के कार्यक्रमों में प्रीति जिंटा और ब्रेट ली कई बार साथ दिखाई दिए। दोनों की अच्छी बॉन्डिंग को देखकर अफेयर की चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि उस समय दोनों में से किसी ने भी इन अफवाहों पर विस्तार से प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

    दिलचस्प बात यह है कि वर्ष 2010 में प्रीति जिंटा ने भी इन चर्चाओं को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि हर साल उनका नाम ब्रेट ली के साथ जोड़ दिया जाता है लेकिन इसमें कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि दोनों सिर्फ अच्छे दोस्त हैं और इससे ज्यादा कुछ नहीं।

    ब्रेट ली की निजी जिंदगी भी हमेशा चर्चा में रही है। उन्होंने वर्ष 2006 में एलिजाबेथ केम्प से शादी की थी और दोनों का एक बेटा है। बाद में दोनों का रिश्ता टूट गया और 2009 में उनका तलाक हो गया। इसके बाद वर्ष 2014 में ब्रेट ली ने लाना एंडरसन से दूसरी शादी की और अब उनके दो बच्चे हैं। क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वह कमेंट्री और विभिन्न खेल आयोजनों से जुड़े रहते हैं।

    वहीं प्रीति जिंटा फिल्मों के साथ साथ क्रिकेट की दुनिया में भी सक्रिय हैं। वह आईपीएल में पंजाब किंग्स की सह मालकिन के रूप में लगातार अपनी टीम का उत्साह बढ़ाती नजर आती हैं। हाल के दिनों में वह अपनी आगामी फिल्म बंटवारा 1947 को लेकर भी चर्चा में हैं जिसमें उनके साथ सनी देओल मुख्य भूमिका में दिखाई देंगे। यह फिल्म जल्द सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

    ब्रेट ली के इस बयान के बाद वर्षों से चली आ रही अफवाहों पर लगभग विराम लग गया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनके और प्रीति जिंटा के बीच सिर्फ दोस्ती का रिश्ता था और दोनों ने हमेशा एक दूसरे का सम्मान किया है। यह बयान उन तमाम अटकलों का जवाब है जो लंबे समय तक क्रिकेट और फिल्म जगत में चर्चा का विषय बनी रहीं।

  • मासूमों पर कहर बन रहा Chandipura Virus समय रहते पहचान और बचाव ही है सबसे बड़ा हथियार

    मासूमों पर कहर बन रहा Chandipura Virus समय रहते पहचान और बचाव ही है सबसे बड़ा हथियार


    नई दिल्ली। बरसात के मौसम में वायरल संक्रमण और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। ऐसे समय में Chandipura Virus ने एक बार फिर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। देश के कुछ राज्यों में इस वायरस के मामले सामने आने के बाद खासतौर पर छोटे बच्चों को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि यह वायरस सामान्य संक्रमण की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है क्योंकि यह सीधे दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर डालता है।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार Chandipura Virus किसी खास उम्र के बच्चों को चुनकर हमला नहीं करता लेकिन पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों का शरीर और उनका नर्वस सिस्टम पूरी तरह विकसित नहीं होता। यही वजह है कि उनका शरीर इस संक्रमण से होने वाले नुकसान का प्रभावी ढंग से मुकाबला नहीं कर पाता। इस उम्र में दिमाग की सुरक्षा करने वाली ब्लड ब्रेन बैरियर नामक परत भी पूरी तरह मजबूत नहीं होती। ऐसे में वायरस आसानी से दिमाग तक पहुंच सकता है और वहां सूजन पैदा कर गंभीर स्थिति उत्पन्न कर सकता है।

    डॉक्टर बताते हैं कि बचपन के शुरुआती वर्षों में मस्तिष्क का विकास बहुत तेजी से होता है। यदि इसी दौरान कोई गंभीर संक्रमण दिमाग को प्रभावित कर दे तो बच्चे के बोलने चलने सीखने और मानसिक विकास पर स्थायी असर पड़ सकता है। यही कारण है कि Chandipura Virus को बच्चों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है और इसके लक्षण दिखते ही तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी होता है।

    इस वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे दिखाई देते हैं। तेज बुखार सिरदर्द उल्टी शरीर में कमजोरी और बेचैनी इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। कई मामलों में कुछ ही घंटों के भीतर बच्चे को दौरे पड़ना बेहोशी आना या मानसिक भ्रम जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले तो स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार Chandipura Virus मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई और कुछ अन्य कीटों के काटने से फैलता है। बरसात के मौसम में इन कीटों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी अधिक हो जाता है। इसलिए बच्चों को साफ और सुरक्षित वातावरण में रखना बेहद जरूरी है।

    बचाव के लिए घर और आसपास साफ सफाई बनाए रखना सबसे जरूरी कदम माना जाता है। बच्चों को पूरे बाजू के कपड़े पहनाना मच्छरदानी का उपयोग करना और कीटों से बचाव के लिए आवश्यक उपाय अपनाना संक्रमण के खतरे को कम कर सकता है। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना और स्वच्छ वातावरण बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है।

    फिलहाल इस वायरस का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। ऐसे में समय पर पहचान और अस्पताल में उचित उपचार ही मरीज की जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि किसी बच्चे को तेज बुखार के साथ उल्टी बेहोशी दौरे या असामान्य व्यवहार जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और समय पर उपचार से इस वायरस से होने वाले गंभीर नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसलिए बरसात के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर विशेष सतर्कता बरतना बेहद आवश्यक है।

  • Bigg Boss 20 में नया गेम प्लान, पुराने कंटेस्टेंट्स के 'रीबर्थ' कॉन्सेप्ट से बढ़ेगा रोमांच!

    Bigg Boss 20 में नया गेम प्लान, पुराने कंटेस्टेंट्स के 'रीबर्थ' कॉन्सेप्ट से बढ़ेगा रोमांच!


    नई दिल्ली। सलमान खान का लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस अपने 20वें सीजन के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच आने के लिए तैयार है। शो का प्रीमियर 6 सितंबर को प्रस्तावित है और हाल ही में जारी हुए टीजर ने दर्शकों की उत्सुकता कई गुना बढ़ा दी है। टीजर में सलमान खान का करण अर्जुन फिल्म से जुड़ा डायलॉग सुनते ही सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। अब शो से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस बार बिग बॉस 20 का पूरा कॉन्सेप्ट पुनर्जन्म यानी रीबर्थ की थीम पर आधारित हो सकता है। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस सीजन में पुराने और चर्चित कंटेस्टेंट्स को दोबारा मौका दिया जा सकता है। ऐसे प्रतियोगी जिन्होंने अपने सीजन में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन ट्रॉफी जीतने से चूक गए थे उन्हें एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाने का अवसर मिल सकता है। मेकर्स इस सीजन को पुराने यादगार पलों और नए ट्विस्ट के मेल के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दर्शकों को एक अलग अनुभव मिल सके।

    सूत्रों के मुताबिक मेकर्स एक स्पेशल एपिसोड की भी योजना बना रहे हैं जिसमें बॉलीवुड के दो सुपरस्टार शाहरुख खान और सलमान खान एक साथ बिग बॉस के मंच पर नजर आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो करीब दस साल बाद दोनों सितारे इस मंच को फिर साझा करेंगे। चर्चा यह भी है कि इसी दौरान शाहरुख खान की फिल्म किंग से जुड़ा कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है लेकिन फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    कंटेस्टेंट्स की संभावित सूची को लेकर भी कई नाम चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सिंगर नेहा कक्कड़ और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान से बातचीत होने की खबरें हैं। माना जा रहा है कि दोनों के लिए यह एक नई शुरुआत का मंच बन सकता है। हालांकि इन नामों की पुष्टि भी अभी तक नहीं हुई है और अंतिम सूची प्रीमियर से ठीक पहले सामने आएगी।

    इस बार शो की शुरुआत से ही घर को दो बड़े गुटों में बांटने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इससे पहले ही सप्ताह से रणनीति गठबंधन और टकराव देखने को मिल सकते हैं। मेकर्स चाहते हैं कि प्रतियोगियों के बीच मुकाबला शुरुआत से ही रोचक और तीखा बने ताकि दर्शकों की दिलचस्पी लगातार बनी रहे।

    इसके अलावा पुराने सीजनों के लोकप्रिय टास्क और यादगार मोमेंट्स को भी नए अंदाज में दोबारा पेश करने की तैयारी है। बिग बॉस के इतिहास में सबसे चर्चित चुनौतियों को नए नियमों और नए कंटेस्टेंट्स के साथ दोहराया जा सकता है जिससे दर्शकों को नॉस्टैल्जिया के साथ ताजगी का अनुभव मिले।

    रियलिटी शो की दुनिया में पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है। लॉक अप द ट्रेटर्स और अन्य नए शोज ने गेम प्लानिंग रणनीति और विवादों के जरिए दर्शकों का ध्यान खींचा है। ऐसे में बिग बॉस 20 के मेकर्स इस बार केवल सेलिब्रिटी कंटेस्टेंट्स पर नहीं बल्कि कॉन्सेप्ट और प्रस्तुति को भी ज्यादा मजबूत बनाने पर फोकस कर रहे हैं।

    करीब 100 दिनों तक चलने वाले इस सीजन का फिनाले दिसंबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित किए जाने की संभावना है। कंटेस्टेंट्स के नाम आखिरी समय तक गोपनीय रखे जाएंगे और अंतिम अनुबंध प्रीमियर से कुछ दिन पहले ही पूरे किए जाएंगे। ऐसे में दर्शकों को इस बार भी कई बड़े सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं।