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  • Bigg Boss 20 में नया गेम प्लान, पुराने कंटेस्टेंट्स के 'रीबर्थ' कॉन्सेप्ट से बढ़ेगा रोमांच!

    Bigg Boss 20 में नया गेम प्लान, पुराने कंटेस्टेंट्स के 'रीबर्थ' कॉन्सेप्ट से बढ़ेगा रोमांच!


    नई दिल्ली। सलमान खान का लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस अपने 20वें सीजन के साथ एक बार फिर दर्शकों के बीच आने के लिए तैयार है। शो का प्रीमियर 6 सितंबर को प्रस्तावित है और हाल ही में जारी हुए टीजर ने दर्शकों की उत्सुकता कई गुना बढ़ा दी है। टीजर में सलमान खान का करण अर्जुन फिल्म से जुड़ा डायलॉग सुनते ही सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। अब शो से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि इस बार बिग बॉस 20 का पूरा कॉन्सेप्ट पुनर्जन्म यानी रीबर्थ की थीम पर आधारित हो सकता है। हालांकि मेकर्स की ओर से अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

    बताया जा रहा है कि इस सीजन में पुराने और चर्चित कंटेस्टेंट्स को दोबारा मौका दिया जा सकता है। ऐसे प्रतियोगी जिन्होंने अपने सीजन में शानदार प्रदर्शन किया लेकिन ट्रॉफी जीतने से चूक गए थे उन्हें एक बार फिर अपनी किस्मत आजमाने का अवसर मिल सकता है। मेकर्स इस सीजन को पुराने यादगार पलों और नए ट्विस्ट के मेल के रूप में पेश करने की तैयारी कर रहे हैं ताकि दर्शकों को एक अलग अनुभव मिल सके।

    सूत्रों के मुताबिक मेकर्स एक स्पेशल एपिसोड की भी योजना बना रहे हैं जिसमें बॉलीवुड के दो सुपरस्टार शाहरुख खान और सलमान खान एक साथ बिग बॉस के मंच पर नजर आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो करीब दस साल बाद दोनों सितारे इस मंच को फिर साझा करेंगे। चर्चा यह भी है कि इसी दौरान शाहरुख खान की फिल्म किंग से जुड़ा कोई बड़ा ऐलान किया जा सकता है लेकिन फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    कंटेस्टेंट्स की संभावित सूची को लेकर भी कई नाम चर्चा में हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सिंगर नेहा कक्कड़ और पूर्व भारतीय क्रिकेटर यूसुफ पठान से बातचीत होने की खबरें हैं। माना जा रहा है कि दोनों के लिए यह एक नई शुरुआत का मंच बन सकता है। हालांकि इन नामों की पुष्टि भी अभी तक नहीं हुई है और अंतिम सूची प्रीमियर से ठीक पहले सामने आएगी।

    इस बार शो की शुरुआत से ही घर को दो बड़े गुटों में बांटने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इससे पहले ही सप्ताह से रणनीति गठबंधन और टकराव देखने को मिल सकते हैं। मेकर्स चाहते हैं कि प्रतियोगियों के बीच मुकाबला शुरुआत से ही रोचक और तीखा बने ताकि दर्शकों की दिलचस्पी लगातार बनी रहे।

    इसके अलावा पुराने सीजनों के लोकप्रिय टास्क और यादगार मोमेंट्स को भी नए अंदाज में दोबारा पेश करने की तैयारी है। बिग बॉस के इतिहास में सबसे चर्चित चुनौतियों को नए नियमों और नए कंटेस्टेंट्स के साथ दोहराया जा सकता है जिससे दर्शकों को नॉस्टैल्जिया के साथ ताजगी का अनुभव मिले।

    रियलिटी शो की दुनिया में पिछले कुछ वर्षों में काफी बदलाव आया है। लॉक अप द ट्रेटर्स और अन्य नए शोज ने गेम प्लानिंग रणनीति और विवादों के जरिए दर्शकों का ध्यान खींचा है। ऐसे में बिग बॉस 20 के मेकर्स इस बार केवल सेलिब्रिटी कंटेस्टेंट्स पर नहीं बल्कि कॉन्सेप्ट और प्रस्तुति को भी ज्यादा मजबूत बनाने पर फोकस कर रहे हैं।

    करीब 100 दिनों तक चलने वाले इस सीजन का फिनाले दिसंबर के अंतिम सप्ताह में आयोजित किए जाने की संभावना है। कंटेस्टेंट्स के नाम आखिरी समय तक गोपनीय रखे जाएंगे और अंतिम अनुबंध प्रीमियर से कुछ दिन पहले ही पूरे किए जाएंगे। ऐसे में दर्शकों को इस बार भी कई बड़े सरप्राइज देखने को मिल सकते हैं।

  • अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें, कर्ज वसूली के लिए प्लॉट पर चिपकाया गया नीलामी नोटिस

    अभिनेता राजपाल यादव की बढ़ीं मुश्किलें, कर्ज वसूली के लिए प्लॉट पर चिपकाया गया नीलामी नोटिस


    नई दिल्ली। फिल्म अभिनेता राजपाल यादव एक बार फिर आर्थिक विवाद को लेकर चर्चा में हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने ऋण की बकाया राशि जमा नहीं होने पर उनकी संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंक ने शाहजहांपुर में स्थित अभिनेता के प्लॉट के बाहर नोटिस चस्पा कर स्पष्ट कर दिया है कि तय समय सीमा तक भुगतान नहीं होने पर संपत्ति की नीलामी की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद अभिनेता और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के बंडा स्थित शाखा से लिए गए ऋण का भुगतान लंबे समय से नहीं किया गया है। बैंक का दावा है कि अभिनेता राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव और उनकी मां गोदावरी यादव पर कुल 16.61 करोड़ रुपये का बकाया है। लगातार नोटिस और कानूनी प्रक्रिया के बावजूद जब राशि जमा नहीं की गई तो बैंक ने ऋण वसूली की दिशा में अगला कदम उठाते हुए संपत्ति कुर्क करने और नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी।

    बैंक की ओर से जिस संपत्ति को नीलामी के लिए चिन्हित किया गया है उसकी अनुमानित कीमत करीब 3.10 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा ऋण वसूली की कार्रवाई के तहत शाहजहांपुर कचहरी के पास स्थित अभिनेता के एक अन्य प्लॉट के बाहर भी आधिकारिक नोटिस चस्पा किया गया है ताकि कानूनी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज हो सके।

    बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले में मुंबई स्थित ऋण वसूली न्यायाधिकरण ने भी बैंक के पक्ष में कार्रवाई की अनुमति दी है। न्यायाधिकरण के आदेश के बाद बैंक ने नीलामी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की औपचारिक तैयारी शुरू कर दी है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया जाता है तो बैंक नियमों के तहत संपत्ति की सार्वजनिक नीलामी करेगा और उससे प्राप्त राशि से ऋण की वसूली की जाएगी।

    बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी वित्तीय संस्था द्वारा ऋण वसूली की प्रक्रिया निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत की जाती है। पहले उधारकर्ता को नोटिस दिया जाता है फिर भुगतान का अवसर प्रदान किया जाता है और उसके बाद भी राशि जमा नहीं होने पर संपत्ति कुर्क कर नीलामी की कार्रवाई की जाती है। यह प्रक्रिया सभी उधारकर्ताओं पर समान रूप से लागू होती है चाहे वह आम नागरिक हो या कोई चर्चित हस्ती।

    राजपाल यादव हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते हैं और उन्होंने अपने लंबे फिल्मी करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाई हैं। हालांकि इस समय उनका नाम फिल्मों से ज्यादा आर्थिक विवाद और बैंक की कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या अभिनेता और उनका परिवार समय रहते बकाया राशि का भुगतान कर नीलामी की कार्रवाई को रोक पाएगा या फिर बैंक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए संपत्ति की नीलामी करेगा।

  • गुरुवार बृहस्पति व्रत की संपूर्ण पूजा विधि जानिए नियम महत्व और वे उपाय जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत

    गुरुवार बृहस्पति व्रत की संपूर्ण पूजा विधि जानिए नियम महत्व और वे उपाय जो बदल सकते हैं आपकी किस्मत


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन रखा जाने वाला बृहस्पति व्रत ज्ञान समृद्धि वैवाहिक सुख संतान सुख और आर्थिक उन्नति प्रदान करने वाला माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जो श्रद्धालु पूरी आस्था और नियम के साथ इस व्रत का पालन करते हैं उनके जीवन से कई प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं और घर परिवार में सुख शांति तथा खुशहाली का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र में भी बृहस्पति ग्रह को शुभता ज्ञान और सौभाग्य का कारक माना गया है। इसलिए जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह कमजोर होता है उन्हें गुरुवार का व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने की सलाह दी जाती है।

    गुरुवार के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले या हल्के पीले रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति का चित्र या प्रतिमा स्थापित करें। पूजा में हल्दी चंदन पीले पुष्प तुलसी दल केले चने की दाल बेसन के लड्डू और पीले फलों का विशेष महत्व माना गया है। घी का दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और विष्णु सहस्रनाम श्री विष्णु चालीसा अथवा बृहस्पति मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें। पूजा के अंत में भगवान से परिवार की सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सफलता की प्रार्थना करें।

    बृहस्पति व्रत के दौरान सात्विक जीवन शैली अपनाना अत्यंत आवश्यक माना गया है। इस दिन एक समय सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई श्रद्धालु नमक का सेवन नहीं करते और केवल फलाहार या पीले रंग के भोजन का सेवन करते हैं। केले बेसन चने की दाल और केसर युक्त प्रसाद ग्रहण करना भी शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान मन में किसी के प्रति द्वेष ईर्ष्या या क्रोध नहीं रखना चाहिए क्योंकि पूजा का वास्तविक फल तभी मिलता है जब मन और व्यवहार दोनों पवित्र हों।

    गुरुवार के दिन कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है। इस दिन बाल नाखून या दाढ़ी नहीं कटवानी चाहिए। महिलाओं को भी बाल धोने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। किसी का अपमान करना झूठ बोलना या जरूरतमंद व्यक्ति को खाली हाथ लौटाना भी अशुभ माना गया है। इसके विपरीत गरीबों और जरूरतमंदों को पीले वस्त्र हल्दी चने की दाल केले या पीली मिठाई का दान करना अत्यंत पुण्यदायक माना जाता है। इससे भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

    धार्मिक मान्यता है कि लगातार श्रद्धा और नियम के साथ गुरुवार बृहस्पति व्रत करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं। आर्थिक परेशानियां धीरे धीरे समाप्त होती हैं। विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। शिक्षा करियर और व्यवसाय में सफलता के नए अवसर प्राप्त होते हैं। परिवार में प्रेम विश्वास और खुशहाली बनी रहती है। सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से किया गया बृहस्पति व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख समृद्धि और सौभाग्य का मार्ग प्रशस्त करता है।

  • MP के सरकारी स्कूल में पढ़ाई छोड़ छात्रों को दिखाई गई 'धुरंधर' फिल्म, वीडियो वायरल, प्रिंसिपल को नोटिस

    MP के सरकारी स्कूल में पढ़ाई छोड़ छात्रों को दिखाई गई 'धुरंधर' फिल्म, वीडियो वायरल, प्रिंसिपल को नोटिस


    मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले के कठहा शासकीय विद्यालय में पढ़ाई के समय छात्रों को फिल्म दिखाने का मामला सामने आया है। कक्षा 11वीं के विज्ञान संकाय के छात्र-छात्राओं को एलईडी टीवी पर ‘धुरंधर’ फिल्म दिखाई गई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, फिल्म प्रदर्शन के दौरान विद्यालय में अतिथि शिक्षक हंसराज पटेल भी मौजूद थे। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि अध्ययन-अध्यापन के समय छात्रों को फिल्म क्यों दिखाई गई और शैक्षणिक गतिविधियां क्यों बाधित की गईं।

    मामले को लेकर सीएम हेल्पलाइन 181 पर भी शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    घटना ने सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि कक्षा के समय फिल्म प्रदर्शन जैसे मामलों पर स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए।

    वीडियो वायरल होने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) सलोनी शर्मा ने मामले का संज्ञान लेते हुए विद्यालय की प्राचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) से विस्तृत प्रतिवेदन भी तलब किया गया है।

    डीईओ सलोनी शर्मा ने कहा, “कठहा स्थित स्कूल का वीडियो हमारे संज्ञान में आया है, जिसमें छात्र ‘धुरंधर’ फिल्म देखते दिखाई दे रहे हैं। मामले की तत्काल जांच कराई जा रही है। संबंधित बीईओ से रिपोर्ट मांगी गई है और विद्यालय की प्राचार्य से स्पष्टीकरण भी तलब किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

  • विदेशी फंडिंग पर दुनिया भर में सख्ती, जानिए भारत के FCRA और अमेरिका-यूरोप के कानूनों में क्या है अंतर

    विदेशी फंडिंग पर दुनिया भर में सख्ती, जानिए भारत के FCRA और अमेरिका-यूरोप के कानूनों में क्या है अंतर


    नई दिल्ली। देश में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम 2026 यानी एफसीआरए को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है। संसद में पेश किए गए इस विधेयक पर चर्चा जारी है और माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर विस्तार से विचार किया जाएगा। हालांकि विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाला ऐसा कानून केवल भारत तक सीमित नहीं है। दुनिया के कई विकसित देशों में भी विदेशी धन के प्रवाह पर कड़ी निगरानी रखने के लिए सख्त कानूनी व्यवस्थाएं पहले से लागू हैं। इनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना और विदेशी प्रभाव को सीमित करना है।

    भारत के प्रस्तावित एफसीआरए कानून का मकसद विदेशी स्रोतों से मिलने वाले आर्थिक सहयोग की पूरी जानकारी सरकार के पास उपलब्ध कराना है ताकि किसी भी संस्था या संगठन की वित्तीय गतिविधियों की पारदर्शी निगरानी की जा सके। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी धन के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और राष्ट्रीय हितों की बेहतर सुरक्षा हो सकेगी।

    अमेरिका में विदेशी फंडिंग को फॉरेन एजेंट्स रजिस्ट्रेशन एक्ट यानी एफएआरए के तहत नियंत्रित किया जाता है। इस कानून के अनुसार जो भी व्यक्ति या संस्था विदेशी सरकार या संगठन की ओर से अमेरिका में गतिविधियां संचालित करती है उसे न्याय विभाग के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। इसके साथ वित्तीय लेनदेन गतिविधियों और विदेशी सहयोग से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। अमेरिकी व्यवस्था में भी पारदर्शिता और नियमित निगरानी को सबसे अधिक महत्व दिया जाता है।

    यूरोप के कई देशों ने भी विदेशी फंडिंग को लेकर सख्त नियम बनाए हैं। उदाहरण के तौर पर स्लोवाकिया में उन गैर सरकारी संगठनों के लिए वार्षिक डोनर रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य है जिन्हें तय सीमा से अधिक विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त होती है। सरकारी एजेंसियां ऐसे संगठनों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर सकती हैं और नियमों का पालन नहीं करने पर जुर्माना लगाने का अधिकार भी रखती हैं। इसका उद्देश्य विदेशी धन के स्रोत और उसके उपयोग को पूरी तरह पारदर्शी बनाए रखना है।

    जॉर्जिया ने भी विदेशी प्रभाव पारदर्शिता कानून लागू किया है। इसके तहत जिन गैर सरकारी संगठनों या मीडिया संस्थानों की 20 प्रतिशत से अधिक फंडिंग विदेश से आती है उन्हें विदेशी वित्त पोषित संस्था के रूप में पंजीकरण कराना पड़ता है। साथ ही उनकी वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करना नियमित ऑडिट कराना और सरकारी जांच में सहयोग देना भी अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड का प्रावधान भी रखा गया है।

    रूस में भी विदेशी फंडिंग पर बेहद सख्त नियंत्रण है। वहां विदेशी आर्थिक सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होता है और उनकी वित्तीय गतिविधियों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रखनी पड़ती है। सरकारी एजेंसियों को बिना पूर्व सूचना के ऑडिट करने लाइसेंस निलंबित करने या रद्द करने तथा विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर नियामकीय नियंत्रण स्थापित करने का अधिकार प्राप्त है। समय समय पर लाइसेंस का नवीनीकरण भी आवश्यक होता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का प्रस्तावित एफसीआरए कानून वैश्विक व्यवस्था से अलग नहीं बल्कि उसी दिशा में उठाया गया कदम है जहां विदेशी धन के स्रोत उपयोग और प्रभाव की पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि अलग अलग देशों में कानूनों की प्रकृति और दायरा अलग हो सकता है लेकिन अधिकांश लोकतांत्रिक देशों का साझा उद्देश्य यही है कि विदेशी वित्तीय सहायता का उपयोग राष्ट्रीय हितों और कानूनी मानकों के अनुरूप हो तथा किसी भी प्रकार के छिपे हुए विदेशी प्रभाव को रोका जा सके।

    English Tags:
    FCRA Bill, Foreign Funding, FARA, NGOs, Global Laws

  • पाकिस्तान की शानदार वापसी, स्पिन आक्रमण के दम पर विदेशी धरती पर टेस्ट जीत दर्ज

    पाकिस्तान की शानदार वापसी, स्पिन आक्रमण के दम पर विदेशी धरती पर टेस्ट जीत दर्ज


    नई दिल्ली। पाकिस्तान क्रिकेट टीम ने आखिरकार विदेशी धरती पर जीत का लंबा इंतजार खत्म कर दिया है। त्रिनिदाद के पोर्ट ऑफ स्पेन स्थित क्वींस पार्क ओवल मैदान पर खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में पाकिस्तान ने वेस्टइंडीज को आठ विकेट से हराकर न सिर्फ शानदार जीत दर्ज की बल्कि लगभग तीन साल से चले आ रहे विदेशी सरजमीं पर हार के सिलसिले को भी समाप्त कर दिया। इस जीत के साथ पाकिस्तान ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज 1 1 से बराबर कर सम्मानजनक वापसी की।

    बाबर आजम को दोबारा टेस्ट टीम की कमान मिलने के बाद यह उनकी पहली विदेशी सीरीज थी और उन्होंने शुरुआत ही यादगार जीत के साथ की। इससे पहले पाकिस्तान ने घर से बाहर आखिरी टेस्ट जीत जुलाई 2023 में श्रीलंका के खिलाफ हासिल की थी। इसके बाद टीम लगातार आठ विदेशी टेस्ट मुकाबले हार चुकी थी। ऐसे में वेस्टइंडीज के खिलाफ मिली यह जीत टीम के आत्मविश्वास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

    मैच की शुरुआत में वेस्टइंडीज ने पहली पारी में 344 रन बनाए और पाकिस्तान के सामने मजबूत चुनौती पेश की। जवाब में पाकिस्तान ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 387 रन बनाए और 43 रन की महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली। पहली पारी में मिली यही बढ़त बाद में मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुई।

    दूसरी पारी में वेस्टइंडीज की बल्लेबाजी पाकिस्तान के स्पिन आक्रमण के सामने पूरी तरह बिखर गई। अली उस्मान और साजिद खान ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार चार विकेट अपने नाम किए। दोनों स्पिनरों ने वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और पूरी टीम महज 117 रन पर सिमट गई। पाकिस्तान के गेंदबाजों ने अनुशासित लाइन और लेंथ के साथ लगातार दबाव बनाए रखा जिससे मेजबान टीम वापसी नहीं कर सकी।

    जीत के लिए मिले 75 रन के आसान लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की शुरुआत हालांकि अच्छी नहीं रही। इमाम उल हक केवल 9 रन बनाकर पवेलियन लौट गए जबकि अजान अवैस भी 9 रन ही बना सके। शुरुआती दो विकेट जल्दी गिरने के बाद कप्तान बाबर आजम और अब्दुल्ला शफीक ने जिम्मेदारी संभाली और किसी भी तरह का जोखिम उठाए बिना टीम को लक्ष्य तक पहुंचा दिया।

    अब्दुल्ला शफीक ने 51 गेंदों में नाबाद 24 रन बनाए जबकि कप्तान बाबर आजम भी 24 रन बनाकर अंत तक टिके रहे। दोनों बल्लेबाजों ने संयमित खेल दिखाते हुए पाकिस्तान को आठ विकेट से यादगार जीत दिलाई। यह जीत सिर्फ एक टेस्ट मैच की सफलता नहीं बल्कि विदेशी परिस्थितियों में टीम के आत्मविश्वास की वापसी का संकेत भी मानी जा रही है।

    पहले टेस्ट में 90 रन से मिली हार के बाद पाकिस्तान पर सीरीज गंवाने का खतरा मंडरा रहा था लेकिन दूसरे मुकाबले में टीम ने हर विभाग में शानदार प्रदर्शन करते हुए जोरदार वापसी की। बल्लेबाजों ने पहली पारी में मजबूत स्कोर खड़ा किया तो गेंदबाजों ने दूसरी पारी में मैच पूरी तरह अपने नाम कर लिया।

    इस जीत से बाबर आजम की कप्तानी को भी मजबूती मिली है और आने वाले विदेशी दौरों के लिए पाकिस्तान टीम का मनोबल काफी बढ़ा है। लंबे समय बाद विदेशी धरती पर मिली यह सफलता टीम के लिए नई शुरुआत का संकेत मानी जा रही है।

  • UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड, जानिए कौन-सा पेमेंट विकल्प सबसे सस्ता, सुरक्षित और सबसे ज्यादा फायदेमंद

    UPI, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड, जानिए कौन-सा पेमेंट विकल्प सबसे सस्ता, सुरक्षित और सबसे ज्यादा फायदेमंद

    नई दिल्ली । भारत में डिजिटल भुगतान तेजी से आम लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बाजार, ऑनलाइन शॉपिंग, बिल भुगतान या यात्रा टिकट बुकिंग जैसे अधिकांश काम अब UPI, डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आसानी से किए जा रहे हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर भुगतान का सबसे सस्ता और फायदेमंद तरीका कौन-सा है। इसका जवाब उपयोग के उद्देश्य, खर्च की आदत और मिलने वाले लाभों पर निर्भर करता है।

    सामान्य तौर पर बैंक खाते से किए जाने वाले UPI भुगतान पर ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता। अधिकांश लेनदेन बिना किसी अतिरिक्त लागत के पूरे हो जाते हैं और भुगतान की पूरी राशि सीधे सामने वाले के खाते में पहुंचती है। यही कारण है कि रोजमर्रा की खरीदारी, छोटे भुगतान और तत्काल लेनदेन के लिए UPI को सबसे सुविधाजनक और किफायती विकल्प माना जाता है। इसकी तेज प्रक्रिया और व्यापक स्वीकार्यता ने इसे देश का सबसे लोकप्रिय डिजिटल भुगतान माध्यम बना दिया है।

    वहीं डेबिट और क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले भुगतान में कुछ परिस्थितियों में अतिरिक्त शुल्क जुड़ सकता है। कई मामलों में बैंक और पेमेंट नेटवर्क व्यापारियों से मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR वसूलते हैं। हालांकि यह शुल्क आमतौर पर ग्राहक से सीधे नहीं लिया जाता, लेकिन कुछ व्यापारी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सुविधा शुल्क के रूप में इसकी भरपाई ग्राहकों से कर सकते हैं। विशेष रूप से ऑनलाइन टिकट बुकिंग या कुछ सेवाओं में अतिरिक्त शुल्क देखने को मिल सकता है।

    क्रेडिट कार्ड का सबसे बड़ा लाभ इसके साथ मिलने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स, कैशबैक, विशेष छूट और अन्य प्रीमियम सुविधाएं हैं। कई कार्डधारकों को एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस, यात्रा बीमा, शॉपिंग ऑफर और ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं। यदि उपभोक्ता समय पर पूरा बिल चुका देता है तो इन सुविधाओं का लाभ बिना अतिरिक्त ब्याज के उठाया जा सकता है। लेकिन निर्धारित समय तक भुगतान नहीं करने पर ब्याज और लेट फीस का बोझ काफी बढ़ सकता है।

    डेबिट कार्ड उन लोगों के लिए बेहतर माना जाता है जो सीधे अपने बैंक खाते से भुगतान करना चाहते हैं और कर्ज से बचना चाहते हैं। इसमें खर्च उसी राशि तक सीमित रहता है जो खाते में उपलब्ध होती है। दूसरी ओर क्रेडिट कार्ड जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने पर अधिक लाभ दे सकता है, लेकिन लापरवाही की स्थिति में यह अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बन सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि छोटे और नियमित भुगतान के लिए UPI सबसे सस्ता और आसान विकल्प है, जबकि बड़े खर्च, ऑनलाइन खरीदारी और रिवॉर्ड्स का लाभ लेने के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए क्रेडिट कार्ड अधिक उपयोगी हो सकता है। वहीं डेबिट कार्ड उन लोगों के लिए संतुलित विकल्प है जो सीधे बैंक खाते से सुरक्षित भुगतान करना पसंद करते हैं। इसलिए किसी एक माध्यम को सभी परिस्थितियों में सर्वोत्तम नहीं कहा जा सकता, बल्कि आवश्यकता और भुगतान की प्रकृति के अनुसार सही विकल्प चुनना अधिक लाभदायक होता है।

  • मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना

    मिशिगन में अब्दुल अल-सईद बने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार, ट्रंप ने इजरायल और यहूदियों पर रुख को लेकर साधा निशाना


    नई दिल्ली। अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले मिशिगन सीनेट सीट की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में अब्दुल अल-सईद की जीत के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। रिपब्लिकन नेता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-सईद पर तीखा हमला करते हुए उनके इजरायल संबंधी रुख की आलोचना की, जबकि अल-सईद ने अपने ऊपर लगाए गए यहूदी-विरोधी आरोपों को सिरे से खारिज किया।

    लास वेगास में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अल-सईद इजरायल और यहूदियों के प्रति नकारात्मक सोच रखते हैं। उन्होंने उन पर तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें “नफरत से भरा व्यक्ति” बताया और दावा किया कि नवंबर में होने वाले चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स उन्हें पराजित करेंगे।

    डेमोक्रेटिक उम्मीदवार बने अब्दुल अल-सईद
    अब्दुल अल-सईद ने मिशिगन की डेमोक्रेटिक प्राइमरी में हेली स्टीवंस को करीबी मुकाबले में हराकर सीनेट उम्मीदवार बनने का अधिकार हासिल किया। अब नवंबर में उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से होगा।

    क्या हैं अल-सईद के प्रमुख मुद्दे?
    अब्दुल अल-सईद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, ‘मेडिकेयर फॉर ऑल’, महंगाई पर नियंत्रण और राजनीति में कॉरपोरेट प्रभाव कम करने जैसे मुद्दों के समर्थक रहे हैं। विदेश नीति के मोर्चे पर वह अमेरिका द्वारा इजरायल को बिना शर्त दी जाने वाली सैन्य सहायता की आलोचना करते रहे हैं और इसमें बदलाव की मांग कर चुके हैं। अल-सईद मिस्र से अमेरिका आए प्रवासी परिवार से हैं। उनके पिता मोहम्मद मिस्र से अमेरिका आकर बसे थे।

    यहूदी-विरोध के आरोपों का दिया जवाब
    प्राइमरी जीत के बाद अल-सईद ने कहा कि वह यहूदी समुदाय की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे हर प्रकार के यहूदी-विरोध (Anti-Semitism) और इस्लामोफोबिया का विरोध करते हैं तथा सभी समुदायों की सुरक्षा और समानता के पक्षधर हैं।

    जोहरान ममदानी ने दी बधाई
    न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने अल-सईद की जीत का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने स्वास्थ्य सेवा, महंगाई और आम कामकाजी लोगों के मुद्दों पर चुनाव लड़ा। ममदानी ने उन्हें “मिनी ममदानी” कहे जाने से असहमति जताई और कहा कि अल-सईद ने अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है।

    मिशिगन का आगामी सीनेट चुनाव डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के लिए अहम माना जा रहा है। अल-सईद की जीत को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है, जबकि रिपब्लिकन खेमा उनके इजरायल संबंधी विचारों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है।

  • 7 अगस्त को बनेगा सूर्य-शनि का नवपंचम योग, इन 4 राशियों की चमकेगी बरसेगी, जाने शुभ फल के उपाय

    7 अगस्त को बनेगा सूर्य-शनि का नवपंचम योग, इन 4 राशियों की चमकेगी बरसेगी, जाने शुभ फल के उपाय


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष के अनुसार 7 अगस्त 2026 को सूर्य और शनि के बीच बनने वाला नवपंचम योग (लगभग 120 डिग्री का शुभ कोण) कई राशियों के लिए शुभ फलदायी माना जा रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस योग के प्रभाव से कुछ जातकों को करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। हालांकि, ये सभी फल पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    मेष राशि
    मेष राशि के जातकों के लिए यह योग करियर में प्रगति के संकेत देता है। नौकरीपेशा लोगों को पदोन्नति या मनचाहे स्थान पर तबादले के अवसर मिल सकते हैं। सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होने की संभावना है। मान-सम्मान बढ़ेगा और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी।

    सिंह राशि
    सिंह राशि के लिए यह योग विशेष रूप से शुभ माना गया है। व्यापार में नई संभावनाएं बन सकती हैं और कोई बड़ा सौदा आर्थिक लाभ दिला सकता है। रुका हुआ धन मिलने, पैतृक संपत्ति से लाभ या कानूनी मामलों में अनुकूल परिणाम मिलने के योग बताए गए हैं।

    तुला राशि
    तुला राशि के जातकों की आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। निवेश, विशेषकर शेयर बाजार या संपत्ति से जुड़े मामलों में अनुकूल अवसर मिल सकते हैं। परिवार में चल रहे मतभेद कम होंगे और रिश्तों में मधुरता आने की संभावना है।

    धनु राशि
    धनु राशि के लोगों के लिए यह योग करियर और शिक्षा के क्षेत्र में लाभकारी माना गया है। नई नौकरी या बेहतर पैकेज का अवसर मिल सकता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को सफलता मिलने की संभावना है। विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा से जुड़े प्रयास भी सफल हो सकते हैं।

    शुभ फल के लिए पारंपरिक उपाय
    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार नवपंचम योग के दौरान कुछ उपाय शुभ माने जाते हैं—
    – प्रतिदिन सुबह तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल अर्पित करें और “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।
    – शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
    – जरूरतमंद लोगों को काले चने या उड़द की दाल का दान करें।

  • उत्तराखंड की रहस्यमयी पाताल भुवनेश्वर गुफा, जहां कलयुग के अंत से जुड़ी है अनोखी मान्यता

    उत्तराखंड की रहस्यमयी पाताल भुवनेश्वर गुफा, जहां कलयुग के अंत से जुड़ी है अनोखी मान्यता


    नई दिल्ली। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित पाताल भुवनेश्वर गुफा अपनी रहस्यमयी संरचना और पौराणिक मान्यताओं के कारण सदियों से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रही है। स्कंद पुराण में वर्णित इस गुफा को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है। लोक मान्यताओं के अनुसार, यहां मौजूद कुछ प्राकृतिक शिलाएं और आकृतियां कलयुग के अंत और महाप्रलय से भी जुड़ी मानी जाती हैं। हालांकि, इन मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक आस्था के रूप में देखा जाता है।

    करीब 90 फीट गहराई में स्थित इस गुफा तक पहुंचने के लिए संकरी और फिसलन भरी लगभग 80 सीढ़ियां उतरनी पड़ती हैं। अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए लगभग 160 किलोमीटर की यात्रा के बाद गंगोलीहाट पहुंचकर इस गुफा के दर्शन किए जा सकते हैं।

    गुफा में दिखती हैं कई पौराणिक आकृतियां
    गुफा के भीतर प्राकृतिक चट्टानों से बनी कई आकृतियां दिखाई देती हैं, जिन्हें श्रद्धालु शेषनाग, विभिन्न देवी-देवताओं और धार्मिक प्रतीकों के रूप में देखते हैं। प्रवेश द्वार के पास शेषनाग के फन जैसी आकृति भी मौजूद है, जिसके बारे में धार्मिक मान्यता है कि पृथ्वी उसी पर टिकी हुई है।

    कलयुग के स्तंभ से जुड़ी मान्यता
    गुफा में मौजूद छह प्राकृतिक स्तंभों को चारों युगों का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इनमें से एक स्तंभ कलयुग का प्रतिनिधित्व करता है, जो धीरे-धीरे बढ़ रहा है। इसके ठीक ऊपर छत से लटकी एक प्राकृतिक शिला (पिंड) भी समय के साथ बढ़ती मानी जाती है। धार्मिक विश्वास है कि जिस दिन यह शिला कलयुग के स्तंभ से मिल जाएगी, उसी दिन कलयुग का अंत और महाप्रलय होगी। यह एक पौराणिक मान्यता है, जिसका वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    पौराणिक कथाओं में विशेष महत्व
    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेतायुग में राजा ऋतुपर्ण ने सबसे पहले इस गुफा के दर्शन किए थे। द्वापर युग में पांडव यहां पहुंचे थे, जबकि कलयुग में लगभग 833 ईस्वी में आदि शंकराचार्य ने इस स्थान का पुनः दर्शन कर यहां तांबे का शिवलिंग स्थापित किया था।

    चार धाम के दर्शन का भी है विश्वास
    श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस गुफा में चारों धामों का प्रतीकात्मक दर्शन होता है। यहां भगवान शिव की जटाओं से बहती गंगा जैसी प्राकृतिक आकृति, अमृत कुंड और कई अन्य धार्मिक प्रतीक दिखाई देते हैं। कुछ पौराणिक मान्यताओं में इसे स्वर्ग के मार्ग का प्रवेश द्वार भी माना गया है।

    आज पाताल भुवनेश्वर गुफा अपनी प्राकृतिक बनावट, आध्यात्मिक महत्व और रहस्यमयी वातावरण के कारण देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बनी हुई है।