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  • कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार: OPEC+ के 7 देशों ने नवंबर में उत्पादन न बढ़ाने का फैसला किया

    कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार: OPEC+ के 7 देशों ने नवंबर में उत्पादन न बढ़ाने का फैसला किया


    नई दिल्ली। ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। बढ़ती कीमतों और सप्लाई पर दबाव के बावजूद OPEC+ के सात प्रमुख तेल उत्पादक देशों ने नवंबर में उत्पादन मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखने का फैसला किया है।

    रविवार को हुई बैठक में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने उत्पादन में न तो बढ़ोतरी करने और न ही कटौती करने पर सहमति जताई। यानी नवंबर में इन देशों से बाजार में तेल की सप्लाई फिलहाल मौजूदा स्तर के आसपास ही रहेगी। अब समूह की अगली बैठक 1 नवंबर को होगी, जिसमें बाजार की स्थिति की समीक्षा की जाएगी।

    100 डॉलर के पार क्यों पहुंचा कच्चा तेल?

    कच्चे तेल की कीमतों में मौजूदा तेजी को ईरान से जुड़े संघर्ष और उससे पैदा हुए सप्लाई जोखिम से जोड़ा जा रहा है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद शुरू हुए संघर्ष ने तेल की वैश्विक आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है।

    ब्रेंट क्रूड को अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों का प्रमुख बेंचमार्क माना जाता है। ऐसे में इसका 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर जाना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। सप्लाई में संभावित रुकावट की आशंका बढ़ने पर बाजार में कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

    OPEC+ के 7 देशों का फैसला क्या है?

    रविवार की बैठक में OPEC+ के इस उपसमूह ने नवंबर के लिए उत्पादन नीति में कोई बदलाव नहीं करने का निर्णय लिया। इसका मतलब है कि फिलहाल इन सात देशों की ओर से बाजार में अतिरिक्त कच्चा तेल लाने की योजना नहीं है।

    सऊदी अरब और रूस जैसे प्रमुख उत्पादकों के साथ इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान भी इस समूह में शामिल हैं। अगली बैठक 1 नवंबर को होगी। तब तेल की कीमतों, वैश्विक मांग और सप्लाई की स्थिति को देखते हुए आगे का फैसला लिया जाएगा।

    G7 बाजार में उतारेगा 100 मिलियन बैरल तेल-ईंधन

    दूसरी ओर, बढ़ती कीमतों के बीच G7 देशों ने बाजार में अतिरिक्त तेल और ईंधन उपलब्ध कराने की तैयारी की है। शुक्रवार को G7 ने आने वाले हफ्तों में करीब 100 मिलियन बैरल तेल और ईंधन उत्पाद जारी करने की योजना की घोषणा की।

    इसकी शुरुआत बड़ी मात्रा में डीजल की सप्लाई से होगी। योजना के मुताबिक अगले 20 दिनों के भीतर डीजल की शुरुआती बड़ी खेप बाजार में उतारी जाएगी। इसके बाद शेष मात्रा को करीब चार महीनों में बाजार में लाने की तैयारी है।

    अमेरिका में डीजल की कीमतें भी बढ़ीं

    कच्चे तेल की तेजी का असर पेट्रोलियम उत्पादों पर भी दिखाई दे रहा है। अमेरिका में डीजल की कीमतें हाल में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर किसानों, ट्रक ऑपरेटरों और उन उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जो परिवहन और दूसरे कामों के लिए डीजल पर निर्भर हैं।

    डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी से माल ढुलाई और कृषि क्षेत्र की लागत बढ़ने की आशंका भी रहती है, जिसका असर आगे चलकर अन्य वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।

    अब 1 नवंबर की बैठक पर नजर

    फिलहाल वैश्विक तेल बाजार में दो अलग-अलग कदम दिखाई दे रहे हैं। एक ओर OPEC+ के सात प्रमुख देश नवंबर में उत्पादन बढ़ाकर अतिरिक्त सप्लाई देने के पक्ष में नहीं हैं, वहीं दूसरी ओर G7 बाजार में 100 मिलियन बैरल तेल और ईंधन उत्पाद लाने की तैयारी कर रहा है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में ईरान से जुड़े संघर्ष, वैश्विक सप्लाई और तेल की मांग के साथ-साथ 1 नवंबर की OPEC+ बैठक पर बाजार की नजर रहेगी। इस बैठक में उत्पादन नीति में किसी बदलाव को लेकर फैसला हो सकता है।

  • बुध-शनि 9 अक्टूबर से बनाएंगे षडाष्टक योग, 4 राशियों को रहना होगा सावधान

    बुध-शनि 9 अक्टूबर से बनाएंगे षडाष्टक योग, 4 राशियों को रहना होगा सावधान


    नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में ग्रहों की चाल और उनके बीच बनने वाले कोण को विशेष महत्व दिया जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 9 अक्टूबर से बुध और शनि की स्थिति से षडाष्टक योग बनने जा रहा है। ज्योतिष में इस योग को अनुकूल नहीं माना जाता और मान्यता है कि इसके प्रभाव से कुछ राशियों को मानसिक तनाव, काम में रुकावट, आर्थिक उलझनों और रिश्तों से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

    ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब दो ग्रह एक-दूसरे से छठे और आठवें भाव की स्थिति में होते हैं, तब षडाष्टक योग बनता है। इसे ग्रहों के बीच करीब 150 डिग्री के कोण से भी जोड़ा जाता है। हालांकि, इसके प्रभाव को लेकर ज्योतिषीय मान्यताएं व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रहों की स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।

    क्या होता है षडाष्टक योग?

    ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, षडाष्टक योग के दौरान ग्रहों की स्थिति को चुनौतीपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में मानसिक दबाव बढ़ सकता है, कामकाज में अड़चनें आ सकती हैं और आर्थिक मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए।

    इस दौरान निवेश, बड़े आर्थिक लेन-देन, करियर से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों और पारिवारिक रिश्तों में जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, ये ज्योतिषीय मान्यताएं हैं और इनके वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    मेष राशि

    मेष राशि के जातकों के लिए 9 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह अवधि कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है। कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की स्थिति बन सकती है।

    ज्योतिषीय सलाह के अनुसार, इस दौरान गुस्से और जल्दबाजी पर नियंत्रण रखना बेहतर रहेगा। किसी भी कागजी प्रक्रिया पर हस्ताक्षर करने या निवेश का फैसला लेने से पहले दस्तावेजों को अच्छी तरह जांच लेना चाहिए।

    कर्क राशि

    कर्क राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक और मानसिक स्तर पर सावधानी बरतने वाला बताया जा रहा है। अनावश्यक खर्च बढ़ने से बजट प्रभावित हो सकता है। ऐसे में खर्चों की प्राथमिकता तय करना जरूरी होगा।

    पारिवारिक जीवन में भी छोटी बातों को लेकर विवाद बढ़ाने से बचने की सलाह दी जाती है। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, शांत रहकर परिस्थितियों को संभालने से तनाव कम किया जा सकता है।

    तुला राशि

    तुला राशि के जातकों को इस अवधि में स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम में बदलाव के कारण होने वाली परेशानियां या पहले से चली आ रही कोई समस्या दोबारा परेशान कर सकती है।

    नौकरीपेशा लोगों को अधूरे काम पूरे करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है। कार्यस्थल पर किसी तरह के विवाद या अनावश्यक बहस से दूरी बनाए रखना बेहतर माना जा रहा है।

    मकर राशि

    मकर राशि के जातकों के लिए यह अवधि धैर्य की परीक्षा लेने वाली हो सकती है। कारोबार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने और योजनाओं के मुताबिक काम समय पर पूरा नहीं होने से तनाव हो सकता है।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, इस दौरान उधार के लेन-देन में सावधानी बरतनी चाहिए। साथ ही किसी भी कारोबारी फैसले में जल्दबाजी करने से बचना बेहतर रहेगा। निजी और पेशेवर मामलों में गोपनीय जानकारी साझा करते समय भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

  • रूस के साइबेरिया की लैब में बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटी! शोधकर्ता की मौत, करीब 200 लोग क्वारंटाइन

    रूस के साइबेरिया की लैब में बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूटी! शोधकर्ता की मौत, करीब 200 लोग क्वारंटाइन


    नई दिल्ली। रूस के साइबेरिया में एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट की 28 वर्षीय महिला कर्मचारी की गंभीर निमोनिया से मौत के बाद करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। रिपोर्टों में दावा है कि महिला ने अस्पताल में बताया था कि काम के दौरान जीवित बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब टूट गई थी, हालांकि रूसी अधिकारियों ने अभी यह पुष्टि नहीं की है कि मौत प्लेग संक्रमण से हुई।

    मामला इरकुत्स्क के शेलेखोव स्थित इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़ा है। मृतका की पहचान रिपोर्टों में दार्या शिपिलोवा के तौर पर हुई है। उन्हें 29 सितंबर को गंभीर निमोनिया के लक्षणों के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन दो दिन बाद उनकी मौत हो गई।

    टेस्ट ट्यूब टूटने की बात सामने आई

    स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिपिलोवा ने चिकित्सकों को बताया था कि एक टेस्ट ट्यूब दुर्घटनावश टूट गई थी, जिसमें जीवित बैक्टीरिया मौजूद थे। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि यह घटना 25 सितंबर के आसपास हुई थी। हालांकि, इस घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    रिपोर्टों के मुताबिक, वह मंगोलिया की सीमा के पास बुर्यातिया में काम से जुड़ी यात्रा पर भी गई थीं। वहीं उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें शेलेखोव अस्पताल लाया गया था। इसलिए उनके संक्रमण के संभावित स्रोत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

    करीब 200 लोग मेडिकल निगरानी में

    शोधकर्ता की मौत के बाद उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान शुरू की गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 200 लोगों को मेडिकल निगरानी या आइसोलेशन में रखा गया है। इनमें शेलेखोव अस्पताल से जुड़े लोग भी शामिल हैं। कुछ अस्पतालों में एहतियाती क्वारंटीन उपाय लागू किए गए हैं।

    इरकुत्स्क के गवर्नर इगोर कोबजेव ने कहा कि पहचाने गए सभी संपर्कों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। उनके मुताबिक, अब तक संपर्क में आए लोगों में बीमारी के लक्षण नहीं मिले हैं और उनके टेस्ट भी निगेटिव आए हैं। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

    शेलेखोव के पास स्थित एक एल्युमिनियम प्लांट ने भी कर्मचारियों के लिए मास्क पहनने जैसे एहतियाती कदम उठाए हैं। प्लांट प्रबंधन ने क्षेत्र में फैल रही अफवाहों और अपुष्ट खबरों से बचने की अपील की है।

    बुर्यातिया के प्रमुख ने कहा- मौत प्लेग से हो सकती है

    बुर्यातिया के प्रमुख अलेक्सेई सिदेनोव ने महिला की मौत को प्लेग से जोड़ा, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि बुर्यातिया में प्लेग का कोई प्रकोप नहीं है। वहीं रूस की स्वास्थ्य निगरानी एजेंसी रोस्पोट्रेबनादजोर ने क्षेत्र में प्लेग के प्रकोप की पुष्टि नहीं की है।

    रूस के पूर्व स्वास्थ्य अधिकारी गेन्नादी ओनिश्चेंको ने भी कहा कि संक्रमण के प्लेग होने की संभावना कम है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर प्लेग की पुष्टि होती भी है, तो ठंडे मौसम में इसके फैलने की संभावना कम हो सकती है।

    रूस की शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी साइबेरिया पहुंचीं

    मामले की गंभीरता को देखते हुए रूस की चीफ स्टेट सैनिटरी डॉक्टर अन्ना पोपोवा मॉस्को से साइबेरिया पहुंचीं। गवर्नर कोबजेव के मुताबिक, उन्होंने क्षेत्रीय आपात बैठक में हिस्सा लिया। यह बैठक एक बेहद खतरनाक संक्रामक बीमारी के संदिग्ध मामले की सूचना के बाद बुलाई गई थी।

    रूसी अधिकारियों ने फिलहाल क्षेत्र की सैनिटरी और महामारी संबंधी स्थिति को स्थिर बताया है। वहीं, शेलेखोव प्रशासन ने लोगों से अंतिम निष्कर्ष निकलने तक आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने को कहा है।

    टेस्ट ट्यूब टूटने के दावे पर भी सवाल

    मामला इसलिए ज्यादा संवेदनशील है क्योंकि संबंधित संस्थान खतरनाक संक्रामक रोगों के अध्ययन और निगरानी से जुड़ा है। कुछ विशेषज्ञों ने टेस्ट ट्यूब टूटने की घटना के दावे पर सवाल उठाए हैं। रूसी महामारी विशेषज्ञ मिखाइल फावोरोव ने इसे असामान्य बताया और कहा कि इस तरह की प्रयोगशालाओं में खतरनाक बैक्टीरिया के साथ काम करते समय कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाए जाते हैं।

    इसी वजह से सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में घटना को लेकर कई तरह के दावे सामने आए हैं। कुछ गुमनाम टेलीग्राम चैनलों ने इसे कोविड-19 की उत्पत्ति से जुड़े शुरुआती विवादों से भी जोड़ने की कोशिश की है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें फिलहाल अटकलों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अमेरिका भी रख रहा नजर

    अमेरिकी प्रशासन भी रूस में सामने आए इस मामले पर नजर रख रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग स्थिति से अवगत है और CDC समेत संबंधित एजेंसियों के साथ घटनाक्रम की निगरानी कर रहा है। हालांकि, अमेरिका की ओर से भी अभी यह पुष्टि नहीं की गई है कि रूस में प्लेग का प्रकोप हुआ है।

    फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि 28 वर्षीय शोधकर्ता की मौत का वास्तविक कारण क्या था और क्या उसका संबंध प्रयोगशाला में कथित तौर पर टूटी टेस्ट ट्यूब से था। रूसी स्वास्थ्य एजेंसियों की जांच और संपर्क में आए लोगों की निगरानी के बाद ही स्थिति की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • MP में रातें ठंडी, दिन में गर्मी, 7-8 अक्टूबर को 14 जिलों में बारिश की संभावना

    MP में रातें ठंडी, दिन में गर्मी, 7-8 अक्टूबर को 14 जिलों में बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद मौसम ने करवट लेना शुरू कर दिया है। दिन में तेज धूप से गर्मी और उमस बनी हुई है, जबकि रात के तापमान में लगातार गिरावट आ रही है। अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री और इंदौर में 18 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग ने 7 और 8 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से के 14 शहरों में गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की बारिश का अनुमान जताया है।

    पिछली तीन रातों में प्रदेश के कई शहरों के न्यूनतम तापमान में करीब 4 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। अनूपपुर के अमरकंटक में पारा 16 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इंदौर में भी न्यूनतम तापमान 18 डिग्री से नीचे रहा। भोपाल, उज्जैन और पचमढ़ी में भी रात के तापमान में गिरावट आई है। हालांकि, दिन में तेज धूप निकलने से गर्मी और उमस का असर बना हुआ है।

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 साल के अक्टूबर के आंकड़ों में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता रहा है। इस बार भी अक्टूबर में इसी तरह मौसम में बदलाव का ट्रेंड रहने का अनुमान है। महीने की शुरुआत में मौसम साफ हो गया है और दिन में धूप निकल रही है, जबकि रात के समय ठंडक बढ़ने लगी है।

    7-8 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश का अलर्ट

    मौसम विभाग ने 7 और 8 अक्टूबर को प्रदेश के पूर्वी हिस्से में मौसम बदलने का अनुमान जताया है। इस दौरान गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

    छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    5 और 6 अक्टूबर को मौसम रहेगा साफ

    मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिन यानी 5 और 6 अक्टूबर को प्रदेश में कहीं भी बारिश होने की संभावना नहीं है। इन दोनों दिनों में ज्यादातर इलाकों में मौसम साफ रहेगा और दिन में धूप खिली रहेगी। इसके बाद 7 अक्टूबर से पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर शुरू हो सकता है।

    100 दिन सक्रिय रहा मानसून

    मध्य प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। मानसून ने 24 जून को प्रदेश में दस्तक दी थी और 3 अक्टूबर को पूरे मध्य प्रदेश से विदा हो गया।

    मानसून सीजन में प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच की तुलना में 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

    बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच भी अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4 प्रतिशत ज्यादा, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा बारिश, फिर भी 9 जिलों में कमी

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत के मुकाबले 4 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है। हालांकि, इन क्षेत्रों के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश दर्ज हुई।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में 9 से 51% तक कमी

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी ज्यादा रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य के मुकाबले 9% से 51% तक कम बारिश हुई है।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

    30 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    इस बार प्रदेश के 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।

  • एआई कंपनियों के वैल्यूएशन में गिरावट से भारत में बढ़ सकता है पूंजी प्रवाह, आरबीआई गवर्नर ने वैश्विक जोखिमों पर जताई चिंता

    एआई कंपनियों के वैल्यूएशन में गिरावट से भारत में बढ़ सकता है पूंजी प्रवाह, आरबीआई गवर्नर ने वैश्विक जोखिमों पर जताई चिंता

    नई दिल्ली ।भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन में कमी आने से वैश्विक निवेश चक्र में धीमापन होने के बावजूद भारत में पूंजी प्रवाह बढ़ सकता है। उन्होंने शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में यह बात कही। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में एआई निवेश में तेजी वैश्विक वित्तीय बाजार के लिए प्रमुख प्रेरक कारकों में रही है। हालांकि, एआई से जुड़े निवेश या कमाई में कमी आने पर इस क्षेत्र से जुड़ी वित्तीय परिसंपत्तियों की कीमतों में बड़ा बदलाव हो सकता है।

    मल्होत्रा ने कहा कि एआई क्षेत्र में ऐसी गिरावट वैश्विक बाजारों के लिए जोखिम पैदा कर सकती है, लेकिन इसका भारत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। उन्होंने कहा कि अगर विकसित देशों में एआई से जुड़े वैल्यूएशन में सुधार होता है, तो इससे भारत की ओर पूंजी प्रवाह पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, हाल के महीनों में भारतीय इक्विटी बाजार में भी ऊंचे वैल्यूएशन से सुधार हुआ है और इसे बाजार की प्रक्रिया का हिस्सा माना जाना चाहिए।

    आरबीआई गवर्नर ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली के सामने मौजूद कई अन्य जोखिमों का भी उल्लेख किया। इनमें वैश्विक स्तर पर बढ़ा हुआ कर्ज, नॉन-बैंक फाइनेंशियल सेक्टर में लीवरेज, प्राइवेट क्रेडिट एक्सपोजर में वृद्धि और साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे शामिल हैं। उन्होंने हालांकि स्पष्ट किया कि इन कमजोरियों का होना तत्काल किसी वित्तीय संकट की शुरुआत का संकेत नहीं है। उनके अनुसार, इन जोखिमों को लेकर सतर्क रहना जरूरी है, भले ही फिलहाल संकट के तत्काल संकेत दिखाई नहीं दे रहे हों।

    मल्होत्रा ने कहा कि भारत मजबूत व्यापक आर्थिक आधार और बैंकों तथा नॉन-बैंक फाइनेंशियल संस्थानों की मजबूत बैलेंस शीट के सहारे चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल का सामना कर रहा है। उन्होंने यह भी माना कि कमोडिटी की कीमतों, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों और पूंजी प्रवाह में बदलाव के कारण भारत बाहरी झटकों के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। इसके बावजूद उन्होंने घरेलू वित्तीय प्रणाली की मजबूती को रेखांकित किया और कहा कि वित्तीय क्षेत्र में मजबूती बनी हुई है।

    आरबीआई गवर्नर के बयान में एआई निवेश से जुड़े वैश्विक घटनाक्रम और भारत में संभावित पूंजी प्रवाह के बीच संबंध पर जोर दिया गया। उनके मुताबिक, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में एआई से जुड़े वैल्यूएशन में सुधार भारत के लिए पूंजी आकर्षित करने का अवसर बन सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक कर्ज, वित्तीय संस्थानों में बढ़ता लीवरेज, निजी ऋण का बढ़ता एक्सपोजर और साइबर सुरक्षा जैसे जोखिमों पर नजर रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की घरेलू वित्तीय प्रणाली मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के कारण सतर्कता आवश्यक है।

  • जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों से बदसलूकी का आरोप, दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी

    नई दिल्ली ।दिल्ली के जंतर-मंतर पर तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर बदसलूकी का आरोप लगाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। क्राइम ब्रांच अब संबंधित महिला पत्रकारों के बयान दर्ज करेगी और पूरे मामले की जांच करेगी। आरोप उस समय से जुड़ा है, जब प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की जा रही थी। महिला पत्रकारों में से एक ने दावा किया है कि मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी।

    एक महिला पत्रकार के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को पकड़ा जा रहा था। इसी दौरान उसने ACP विवेक भगत पर उसके सीने पर हाथ मारने और धक्का देकर वहां से चले जाने का आरोप लगाया। महिला पत्रकार का दावा है कि घटना के समय वहां महिला पुलिसकर्मी नहीं थी। आरोप सामने आने के बाद मामले को जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंपा गया है, जो अब संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी और घटना से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।

    मामले को लेकर CJP की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। CJP ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न की शिकायत पर FIR दर्ज करने से इनकार किया। संगठन के अनुसार, पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज करने से पहले CCTV फुटेज की जांच की जाएगी। CJP ने सवाल उठाया कि क्या पुलिस गंभीर शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय संबंधित ACP को बचाने की कोशिश कर रही है। इसी मुद्दे को लेकर CJP प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन भी किया।

    इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि जंतर-मंतर पर लगातार दो दिनों तक हुए प्रदर्शनों से जुड़ी है। 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी लगातार दूसरे दिन जंतर-मंतर पहुंचे थे। इनमें AISA समेत छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग शामिल थे। इस दौरान करीब 200 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इससे एक दिन पहले 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास हुए प्रदर्शन के दौरान करीब 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया था। बाद में इनमें से कई लोगों को छोड़ दिया गया। दिल्ली पुलिस ने 2 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर कम से कम तीन FIR भी दर्ज की थीं।

    इन प्रदर्शनों के पीछे चुनाव आयोग से जुड़ा विवाद भी बताया गया है। SIR को लेकर सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। इसके बाद SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए गए। आयोग ने कहा कि किसी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य हैं। आयोग के अनुसार उसके सभी आदेशों को कानूनी आधार हासिल है और वे तय कानूनी प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।

  • पेरिस में जान्हवी कपूर ने पहनी मलमल खादी साड़ी, रिया कपूर ने इसे भारतीय धरोहर के सम्मान से जोड़ा

    पेरिस में जान्हवी कपूर ने पहनी मलमल खादी साड़ी, रिया कपूर ने इसे भारतीय धरोहर के सम्मान से जोड़ा


    नई दिल्ली ।
    बॉलीवुड अभिनेत्री जान्हवी कपूर अपने फैशन अंदाज के लिए जानी जाती हैं और इस बार पेरिस में उनका पारंपरिक भारतीय लुक चर्चा में रहा। बीओएफ 500 गाला में जान्हवी कपूर ने आधुनिक फैशन के बीच भारतीय परिधान और पारंपरिक कारीगरी को खास अंदाज में पेश किया। इस अवसर के लिए उन्होंने पंकज एस हेरिटेज का कस्टम आउटफिट पहना, जिसे फैशन स्टाइलिस्ट रिया कपूर ने तैयार और स्टाइल किया था। जान्हवी ऑफ-व्हाइट साड़ी में नजर आईं, जिसमें भारतीय टेक्सटाइल की खासियत साफ दिखाई दी।

    रिया कपूर ने सोशल मीडिया पर जान्हवी के इस लुक से जुड़ी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि अभिनेत्री की साड़ी 460 काउंट बंगाल मलमल से तैयार की गई थी। इस खास मलमल को बाफ्त-ए-हवा, शबनमी और चांदनी जैसे नामों से भी जाना जाता है। रिया के अनुसार, यह मलमल पूरी तरह भारत में ही बुनी गई है। उन्होंने इस साड़ी को भारत की धरोहर के सम्मान से जोड़ा। इस तरह जान्हवी के पहनावे में फैशन के साथ भारतीय कपड़ा परंपरा को भी प्रमुखता मिली।

    जान्हवी की छह गज लंबी ऑफ-व्हाइट साड़ी में पारंपरिक भारतीय टेक्सटाइल और कारीगरी के साथ आधुनिक डिजाइन का मेल देखने को मिला। साड़ी की फ्लोइंग ड्रेपिंग को गोल्ड डिटेलिंग से सजाया गया था। इसके अलावा मोती, शेल्स और टैसल्स का इस्तेमाल किया गया, जिससे परिधान को अलग रूप मिला। साड़ी की बनावट और सजावट ने पूरे पहनावे को आकर्षक और पारंपरिक स्वरूप के साथ आधुनिक प्रस्तुति दी।

    इस खास आउटफिट के साथ जान्हवी ने मैचिंग बस्टियर स्टाइल ब्लाउज पहना। ब्लाउज में पतली स्ट्रैप्स और स्वीटहार्ट नेकलाइन दी गई थी। साड़ी के साथ इसे इस तरह रखा गया कि पारंपरिक परिधान और आधुनिक फैशन का संतुलन बना रहे। जान्हवी के पूरे लुक में सादगी के साथ बारीक कारीगरी और सजावटी विवरणों पर विशेष ध्यान दिखाई दिया। ऑफ-व्हाइट रंग ने भी पूरे परिधान को एक अलग और सौम्य रूप दिया।

    लुक को और खास बनाने के लिए साड़ी के साथ ऑर्नेट स्लीव्स जोड़ी गई थीं। इन स्लीव्स में पोल्की, गार्नेट और एमराल्ड जैसे कीमती पत्थरों का इस्तेमाल किया गया था। इसके साथ सराफा टैसल्स, किरण और रेशम की फ्रिंजिंग शामिल की गई। इन बारीक सजावटी तत्वों ने परिधान में रॉयल टच जोड़ा और पारंपरिक भारतीय शिल्प की खूबसूरती को उभारा। जान्हवी का यह पहनावा भारतीय कारीगरी और समकालीन फैशन के संयोजन के तौर पर सामने आया।

    पेरिस के इस आयोजन में जान्हवी कपूर का लुक इसलिए भी खास रहा क्योंकि इसमें भारतीय परिधान को अंतरराष्ट्रीय फैशन मंच के अनुरूप प्रस्तुत किया गया। बंगाल मलमल से तैयार साड़ी, पारंपरिक कारीगरी, कीमती पत्थरों से सजी स्लीव्स और आधुनिक ब्लाउज डिजाइन ने उनके पूरे लुक को अलग पहचान दी। रिया कपूर द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस परिधान का उद्देश्य भारतीय विरासत और टेक्सटाइल की खूबसूरती को सामने लाना था। जान्हवी का यह अंदाज आधुनिक फैशन और पारंपरिक भारतीय क्राफ्ट के मेल को दर्शाता नजर आया।

  • वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की विकास क्षमता पर जताया भरोसा, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार संभावनाएं निवेशकों को कर रहीं आकर्षित

    वैश्विक विशेषज्ञों ने भारत की विकास क्षमता पर जताया भरोसा, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बाजार संभावनाएं निवेशकों को कर रहीं आकर्षित


    नई दिल्ली ।
    कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव 2026 में दुनियाभर से आए अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की जरूरत पर जोर दिया। सम्मेलन में भारत की विकास संभावनाओं, वैश्विक व्यापार व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु जोखिम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारत की आर्थिक वृद्धि, बाजार क्षमता और निवेश की संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया।

    स्वीडिश अर्थशास्त्री एरिक बर्गलोफ ने कहा कि वह इस सम्मेलन से इसकी शुरुआत से जुड़े हुए हैं और समय के साथ इसकी गुणवत्ता तथा अंतरराष्ट्रीय भागीदारी में सुधार हुआ है। उन्होंने बताया कि इस बार पहले की तुलना में अधिक देशों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है। उनके अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां काफी अनिश्चित हैं और ऐसे समय में ऊर्जा, व्यापार तथा आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े जोखिमों के बीच अर्थव्यवस्थाओं को अधिक लचीला बनाने पर चर्चा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि भारत की विकास संभावनाएं मजबूत हैं और कोविड-19 के बाद देश ने प्रभावशाली आर्थिक गति हासिल की है।

    बर्गलोफ ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि की क्षमता बनी हुई है। हालांकि, ईरान से जुड़े संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत सहित कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आम लोगों और कारोबारों को राहत देने के प्रयास किए हैं, लेकिन इससे राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, वैश्विक संकटों के बीच विकास की गति बनाए रखना नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है।

    ब्राजील स्थित क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के कार्यकारी निदेशक जुलियानो असुन्साओ ने जलवायु परिवर्तन को दुनिया के सबसे बड़े साझा जोखिमों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। उनके अनुसार, भारत और ब्राजील जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने के साथ-साथ समाधान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं। उन्होंने बताया कि ब्रिक्स जैसे मंचों के माध्यम से दोनों देशों के बीच संस्थागत संबंध हैं और भारतीय कंपनियों का ब्राजील में निवेश भी बढ़ रहा है। विकास, जलवायु, कृषि और सतत आर्थिक वृद्धि जैसी समान चुनौतियां दोनों देशों के सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करती हैं।

    न्यूजीलैंड के अर्थशास्त्री प्रो. जॉन गिब्सन ने सम्मेलन को शोधकर्ताओं और नीति निर्माताओं के बीच संवाद का महत्वपूर्ण मंच बताया। उन्होंने कहा कि यहां भारत के साथ एशिया-प्रशांत और वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा हो रही है। बढ़ती अनिश्चितता और नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था पर दबाव के बीच उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों को स्थिरता देने वाला माध्यम बताया और भारत-न्यूजीलैंड के हालिया मुक्त व्यापार समझौते का उल्लेख किया।

    जापान के इंस्टीट्यूट ऑफ जियोइकॉनॉमिक्स के निदेशक काजुतो सुजुकी ने कहा कि अर्थव्यवस्था, भू-राजनीति और जियोइकॉनॉमिक्स एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने बताया कि चीन के साथ जटिल संबंधों के कारण जापानी उद्योग लंबे समय से भारत को महत्वपूर्ण बाजार मानते हैं। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में जापानी कंपनियां भारत में निवेश के अवसर तलाश रही हैं और देश को दीर्घकालिक विकास तथा विनिर्माण केंद्र के रूप में देख रही हैं। भारत की बाजार क्षमता, जनसांख्यिकीय ताकत और आर्थिक विस्तार की संभावनाएं विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं।

  • गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    गुजरात में 5-6 अक्टूबर को हाईवे विकास पर चिंतन शिविर, परियोजनाओं की चुनौतियों और समाधान पर होगा व्यापक मंथन

    नई दिल्ली । सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय देशभर में राजमार्ग अवसंरचना के विकास और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए गुजरात के नर्मदा जिले के एकता नगर में दो दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित करेगा। यह कार्यक्रम 5 और 6 अक्टूबर को होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित हितधारक शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी इस अवसर पर मौजूद रहेंगे।

    मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर का प्रमुख उद्देश्य राजमार्ग परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सामने आने वाली चुनौतियों की पहचान करना और उनके व्यावहारिक समाधान तलाशना है। इसके साथ विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जाएगा। यह आयोजन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा जमीनी स्तर पर सामने आए अनुभवों और बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने का अवसर प्रदान करेगा। इसमें विभिन्न राज्यों के सड़क परिवहन और लोक निर्माण विभागों के मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

    मंत्रालय के मुताबिक, कार्यक्रम में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं की पहचान के साथ नए और दोहराए जा सकने वाले समाधानों पर विचार किया जाएगा। नीति और संस्थागत सुधारों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा हाईवे परियोजनाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और परिचालन दक्षता को बेहतर बनाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। मंत्रालय का मानना है कि अलग-अलग राज्यों और संबंधित एजेंसियों के अनुभवों को एक मंच पर लाने से सड़क अवसंरचना विकास से जुड़े मुद्दों पर साझा समझ विकसित करने में मदद मिलेगी और परियोजनाओं की गति बढ़ाई जा सकेगी।

    दो दिवसीय चिंतन शिविर में पांच प्रमुख विषयगत सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें पीएम गतिशक्ति और एकीकृत अवसंरचना योजना, भूमि अधिग्रहण और भूमि राशि प्लेटफॉर्म, मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स, हाईवे सुरक्षा तथा गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी शामिल हैं। पीएम गतिशक्ति से जुड़े सत्र में विभिन्न अवसंरचना क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकृत योजना निर्माण पर चर्चा होगी। भूमि अधिग्रहण से संबंधित सत्र में परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं और उन्हें दूर करने के संभावित उपायों पर विचार किया जाएगा।

    मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और रेटिंग्स से जुड़े सत्र में अनुबंध संबंधी मुद्दों तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। हाईवे सुरक्षा के सत्र में सुरक्षित सड़क डिजाइन और सुरक्षा उपायों को परियोजना की योजना तथा निर्माण प्रक्रिया में अधिक प्रभावी ढंग से शामिल करने पर चर्चा होगी। वहीं गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना निगरानी सत्र में निर्माण की गुणवत्ता सुधारने, परियोजनाओं की निगरानी मजबूत करने और बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, चिंतन शिविर से सड़क और राजमार्ग अवसंरचना विकास को अधिक प्रभावी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्र तथा राज्यों के बीच सहयोग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले 45,536 करोड़ रुपये, लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अब आकर्षक

    सितंबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से निकाले 45,536 करोड़ रुपये, लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन अब आकर्षक


    नई दिल्ली ।
    सितंबर 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली की। महीने के दौरान उन्होंने कुल 45,536 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर बेचे। हालांकि, प्राथमिक बाजार में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और उन्होंने सितंबर में 9,676 करोड़ रुपये का निवेश किया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की बढ़ती बिकवाली के पीछे अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.2 प्रतिशत से ऊपर पहुंचना और कच्चे तेल की कीमतों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की आशंका प्रमुख कारण रही।

    विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार विदेशी बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया है। इसी दबाव के बीच बाजार लगातार आठ सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। इस दौरान 13 प्रतिशत कम बारिश वाले कमजोर मानसून ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, बाजार में हालिया करेक्शन के बाद बड़ी कंपनियों यानी लार्ज-कैप शेयरों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक आकर्षक दिखाई देने लगे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता वाली बड़ी कंपनियों के शेयरों में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए अवसर बन सकते हैं।

    विदेशी निवेशकों की बिकवाली में ठहराव या उनके दोबारा खरीदारी की ओर लौटने के लिए कुछ सकारात्मक संकेतों की जरूरत होगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जुलाई और अगस्त में कच्चे तेल की कीमतों में संभावित गिरावट की उम्मीद के कारण एफपीआई का रुख कुछ सकारात्मक हुआ था, लेकिन यह बदलाव ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सका। 28 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच केवल चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने करीब 34,965 करोड़ रुपये की अस्थायी इक्विटी बिकवाली की, जबकि इसी अवधि के लिए निर्धारित इक्विटी बिकवाली 27,962 करोड़ रुपये रही। इससे महीने के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में विदेशी निकासी तेज होने का संकेत मिला।

    बाजार रणनीतिकारों के अनुसार, द्वितीयक बाजार में बिकवाली और प्राथमिक बाजार में निवेश का अंतर यह दर्शाता है कि विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे हैं। वे निवेश के अवसरों का चयन पहले की तुलना में अधिक सावधानी से कर रहे हैं। यह रुझान अक्टूबर में भी जारी रहने की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने बाजार को मजबूत सहारा दिया। सितंबर 2026 में डीआईआई ने नकद इक्विटी बाजार में 76,030 करोड़ रुपये की खरीदारी की। घरेलू संस्थागत और खुदरा निवेशकों की लगातार खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के दबाव को काफी हद तक संतुलित किया।

    आगे बाजार की दिशा वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों से भी प्रभावित होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जिन कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर रहेंगे और जिनका प्रबंधन भविष्य को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण पेश करेगा, उनके शेयरों में निवेशकों की खरीदारी बढ़ सकती है। ऐसे में विदेशी निवेशकों की गतिविधि, घरेलू संस्थागत निवेश, कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के दूसरी तिमाही के प्रदर्शन पर बाजार की नजर बनी रहेगी।