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  • GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    नई दिल्ली : GST कानून लागू होने के करीब नौ साल बाद सरकार टैक्स व्यवस्था में एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत GST अधिकारियों को मिली सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति हटाई जा सकती है। इस मुद्दे पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारी मौजूदा व्यवस्था के तहत सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए GST कानून में संशोधन करना होगा और सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने ला सकती है।

    GST कानून 2016 में संविधान के 101वें संशोधन के साथ अस्तित्व में आया था और 2017 में इसे लागू किया गया। मौजूदा कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों में गिरफ्तारी का प्रावधान है। इनमें फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामले शामिल हैं। CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है। इसके लिए संबंधित अधिकारी के पास यह मानने का पर्याप्त आधार होना जरूरी है कि व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है।

    सरकार ने वर्ष 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि केवल कानून में गिरफ्तारी की अनुमति होने के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। कार्रवाई से पहले मामले की गंभीरता, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। अब प्रस्तावित बदलाव को लेकर चर्चा का एक प्रमुख कारण टैक्स अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतें बताई जा रही हैं।

    पिछले करीब आठ से नौ महीनों से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा चलने की बात कही गई है। कारोबारियों और कंपनियों की ओर से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई जाती रही है। विशेष रूप से कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं। सरकार ऐसा बदलाव चाहती है जिससे गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई जारी रहे, लेकिन कारोबारियों के बीच अनावश्यक डर की स्थिति न बने।

    GST कानून के तहत गिरफ्तारी के इस्तेमाल के आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच GST अपराधों के 72,393 मामले दर्ज हुए और केंद्रीय GST अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़ा केवल केंद्रीय GST फॉर्मेशन से संबंधित है। इसमें राज्य GST अधिकारियों की ओर से की गई गिरफ्तारियां शामिल नहीं हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई जारी रखने की बात है, लेकिन GST अधिकारी स्वयं गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगे। ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है। गंभीर और जानबूझकर किए गए फ्रॉड के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    अब 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर नजर है। बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो GST कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी और सरकार इसे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। फिलहाल GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त नहीं हुई है। यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम स्थिति GST काउंसिल की चर्चा, सरकार के फैसले तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

  • स्मित मछार की बहादुरी पर कांग्रेस की चुप्पी को लेकर BJP ने राहुल-प्रियंका और गांधी परिवार से जवाब मांगा

    स्मित मछार की बहादुरी पर कांग्रेस की चुप्पी को लेकर BJP ने राहुल-प्रियंका और गांधी परिवार से जवाब मांगा

    नई दिल्ली ।भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस और उसके नेतृत्व पर स्मित मछार की बहादुरी के मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाते हुए सवाल उठाए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की चारों ओर प्रशंसा हो रही है, लेकिन कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी इस मुद्दे पर मौन क्यों हैं। उन्होंने गांधी परिवार और कांग्रेस पर आतंकवादी हमलावर के धर्म के आधार पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया।

    सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि स्मित मछार की बहादुरी को लेकर गांधी परिवार की कथित खामोशी कांग्रेस के रुख पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने जाकिर नाइक और अफजल गुरु का जिक्र करते हुए कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि ऐसे मामलों पर टिप्पणी करने वाले नेता स्मित मछार के मामले में चुप क्यों हैं। उन्होंने दावा किया कि जाकिर नाइक को शांति का मसीहा बताने और अफजल गुरु को परिस्थितियों का मारा बताने वाले लोगों ने स्मित मछार के मामले में कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी।

    भाजपा प्रवक्ता ने स्मित मछार की बहादुरी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना कई लोगों की जान बचाने का काम किया। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके बावजूद उनके बारे में कोई कुछ क्यों नहीं बोल रहा है। त्रिवेदी ने अपने आरोपों के समर्थन में बुरहान वानी और याकूब मेमन से जुड़े पुराने राजनीतिक बयानों तथा बाटला हाउस एनकाउंटर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर मुखर रहने वाले लोगों की ओर से स्मित मछार के मामले में अब तक चुप्पी क्यों है।

    इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजनेताओं से लेकर फिल्मी जगत से जुड़े लोगों तक कई लोग भारतीय पायलट स्मित मछार की बहादुरी की प्रशंसा कर रहे हैं। इसी को आधार बनाकर सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि कांग्रेस को स्मित मछार की बहादुरी को लेकर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

    सुधांशु त्रिवेदी ने आगे सवाल किया कि बुरहान वानी और याकूब मेमन जैसे मामलों में तुरंत अपनी बात रखने वाले गांधी परिवार की ओर से स्मित मछार पर एक शब्द भी क्यों नहीं कहा गया। उन्होंने कहा कि भाजपा कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस मामले में सीधा जवाब चाहती है। त्रिवेदी के मुताबिक, स्मित मछार की बहादुरी पर कांग्रेस की कथित चुप्पी को लेकर पार्टी के रुख को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

    भाजपा ने इस पूरे मामले को कांग्रेस और गांधी परिवार के कथित दोहरे मापदंड से जोड़ते हुए सवाल खड़े किए हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि स्मित मछार की बहादुरी के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व की ओर से प्रतिक्रिया नहीं आना सवाल पैदा करता है। उन्होंने कांग्रेस पर तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति करने का आरोप दोहराते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से इस मुद्दे पर जवाब मांगा। खबर में कांग्रेस या उसके संबंधित नेताओं की ओर से इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है।

  • फ्लाईदुबई फ्लाइट घटना पर अल कायदा की यमन शाखा का समर्थन, 9/11 का जिक्र कर को-पायलट की कथित कोशिश को सराहा

    फ्लाईदुबई फ्लाइट घटना पर अल कायदा की यमन शाखा का समर्थन, 9/11 का जिक्र कर को-पायलट की कथित कोशिश को सराहा


    नई दिल्ली ।
    फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 से जुड़ी कथित हाईजैकिंग कोशिश के मामले में अल कायदा की यमन शाखा AQAP से जुड़े एक अनौपचारिक मुखपत्र ने घटना पर संपादकीय प्रकाशित किया है। इसमें फ्लाइट के ओमानी को-पायलट की कथित कार्रवाई का समर्थन किया गया और 9/11 हमले का भी उल्लेख किया गया। हालांकि, AQAP ने इस घटना की सीधे तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात पर ध्यान दे रही हैं कि संगठन ने जिम्मेदारी लेने के बजाय घटना को वैचारिक समर्थन देने का रास्ता अपनाया है।

    संपादकीय में फ्लाईदुबई की फ्लाइट की घटना को 9/11 से जोड़कर पेश किया गया है। इसका शीर्षक ‘Between September 11 and September 30’ रखा गया है। लेख में फ्लाइट को ‘यहूदी-यूएई विमान’ के रूप में संबोधित किया गया और ओमानी को-पायलट की कथित कोशिश की प्रशंसा की गई। संपादकीय में यह दावा भी किया गया कि अगर हाईजैकिंग की कोशिश सफल हो जाती तो क्षेत्र में ताकत का संतुलन बदल सकता था। इसके साथ फ्लाईदुबई के विमान की तस्वीरें भी प्रकाशित की गईं।

    घटना के बाद फ्लाइट में सवार को-पायलट से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट भी जांच के दायरे में आए हैं। बताया गया है कि घटना के कुछ घंटे बाद उसके एक सोशल मीडिया अकाउंट से दो पोस्ट साझा की गई थीं। इस घटनाक्रम के बीच जांच एजेंसियां आरोपी को-पायलट से संबंधित उपलब्ध जानकारियों और उसके कथित ऑनलाइन गतिविधियों की जांच कर रही हैं।

    मुखपत्र में यह भी कहा गया कि अमेरिका और इजराइल को गैर-मुस्लिम लोग भी निशाना बना सकते हैं और ऐसे हमलों को मुसलमानों के फायदे के रूप में पेश किया गया। संपादकीय में फ्लाइट 1073 का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि विमान सऊदी अरब में उतरा था। साथ ही ओमानी को-पायलट की कथित कार्रवाई को समर्थन देने के लिए 9/11 हमले का संदर्भ इस्तेमाल किया गया। संगठन की ओर से घटना की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं ली गई है।

    जांच से जुड़ी जानकारी के अनुसार, फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 इजराइल जा रही थी। आरोप है कि विमान के कॉकपिट में ओमान के को-पायलट ने क्रैश एक्स से कप्तान पर हमला किया था। घटना के बाद इस मामले में को-पायलट की पृष्ठभूमि भी जांच का विषय बनी। बताया गया है कि हमाम अल-हमामी को पहले ही कट्टरपंथी विचारों के कारण ओमान में उड़ान भरने से प्रतिबंधित किया गया था।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच AQAP से जुड़े मुखपत्र का संपादकीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कथित विमान घटना को वैचारिक समर्थन दिया गया है। हालांकि संगठन ने हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की। जांच में फ्लाइट की घटना, को-पायलट की कथित गतिविधियों, उसके सोशल मीडिया अकाउंट और AQAP की प्रतिक्रिया से जुड़े पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

  • नर्सिंग नौकरी का झांसा देकर दुबई ले जाई गई झारखंड की मोनिका कच्छप बंधक, परिवार ने सुरक्षित वापसी की लगाई गुहार

    नर्सिंग नौकरी का झांसा देकर दुबई ले जाई गई झारखंड की मोनिका कच्छप बंधक, परिवार ने सुरक्षित वापसी की लगाई गुहार

    नई दिल्ली ।झारखंड के रांची स्थित छोटा घाघरा इलाके की 37 वर्षीय आदिवासी महिला मोनिका कच्छप को नर्सिंग की नौकरी का झांसा देकर विदेश ले जाने और वहां बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। परिवार का आरोप है कि मोनिका को अच्छी नौकरी, रहने, खाने और आवास की सुविधा का भरोसा देकर शारजाह ले जाया गया, लेकिन वहां पहुंचते ही उसका मूल पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिया गया। परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए उसकी सुरक्षित वापसी के लिए राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है।

    मोनिका ने रांची के बुंडू से साढ़े तीन साल का नर्सिंग कोर्स पूरा किया था। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है और घर का खर्च खेती-किसानी से चलता है। इसी वजह से मोनिका नौकरी करना चाहती थी। इसी दौरान वह ऑनलाइन माध्यम से एक एजेंसी और उसकी एजेंट प्रियंका के संपर्क में आई। परिवार के मुताबिक, प्रियंका ने उसे दुबई में अच्छी नौकरी मिलने और विदेश में रहने, खाने तथा आवास की सुविधा उपलब्ध होने का भरोसा दिया। इस पर विश्वास करते हुए मोनिका ने 22 अप्रैल 2026 को प्रियंका द्वारा बताए गए बैंक खाते में फोनपे के जरिए 5 हजार रुपये भेजे। आगे की यात्रा और विमान टिकट की व्यवस्था एजेंसी ने की और 5 मई को मोनिका दिल्ली एयरपोर्ट से शारजाह के लिए रवाना हुई।

    परिवार की शिकायत के अनुसार, 6 मई को शारजाह पहुंचने के बाद एजेंसी की ओर से भेजी गई गाड़ी के चालक ने मोनिका का मूल पासपोर्ट अपने पास रख लिया। अगले दिन उसे अजमान स्थित एजेंसी के कार्यालय ले जाया गया। वहां रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नाम के लोगों ने अरबी भाषा में लिखे कुछ दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए। मोनिका अरबी भाषा नहीं जानती थी। आरोप है कि उसका मोबाइल फोन भी ले लिया गया और प्रियंका के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत मिटा दी गई। इसके बाद वीडियो कॉल के जरिए उसे बताया गया कि उसने एजेंसी से 2600 दिरहम का कर्ज लिया है और 25 मई तक रकम नहीं चुकाने पर जेल भेजने की धमकी दी गई।

    परिवार का आरोप है कि इसके बाद मोनिका को मोहम्मद मेराज अंसारी के घर ले जाया गया, जहां करीब एक महीने तक उसे बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उससे झाड़ू-पोछा लगाने, बर्तन साफ करने और बाथरूम की सफाई जैसे काम कराए गए। इसके बाद 22 जून को उसे बिना वैध वर्क परमिट के दूसरे घर में घरेलू देखभाल के काम के लिए भेजे जाने की बात सामने आई। वहां की भाषा समझने में परेशानी होने के कारण वह काम नहीं कर सकी और अगले ही दिन उसे वापस कार्यालय छोड़ दिया गया।

    मोनिका के पिता रतना कच्छप की शिकायत के आधार पर 29 सितंबर 2026 को रांची के एयरपोर्ट थाने में मामला दर्ज किया गया। शिकायत में दुबई और अजमान में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी, मानव तस्करी, बंधक बनाने, जबरन मजदूरी कराने और रंगदारी मांगने जैसे आरोप लगाए गए हैं। परिवार ने अब राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप कर मोनिका को सुरक्षित घर वापस लाने की मांग की है। परिवार और स्थानीय ग्रामीणों की अपील है कि उसे जल्द सुरक्षित वापस लाया जाए।

  • दिल्ली घूमने का बना रहे हैं प्लान, तो नेशनल जूलॉजिकल पार्क की सैर जरूर करें, जानिए क्या देखें और कैसे पहुंचें

    दिल्ली घूमने का बना रहे हैं प्लान, तो नेशनल जूलॉजिकल पार्क की सैर जरूर करें, जानिए क्या देखें और कैसे पहुंचें


    नई दिल्ली। दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच अगर आप कुछ समय प्रकृति और वन्यजीवों के बीच बिताना चाहते हैं तो नेशनल जूलॉजिकल पार्क की सैर आपके लिए यादगार अनुभव बन सकती है। राजधानी के मथुरा रोड पर पुराने किले के पास स्थित यह चिड़ियाघर परिवार और बच्चों के साथ घूमने के लिए लोकप्रिय जगहों में शामिल है। यहां हरियाली के बीच अलग-अलग प्रजातियों के वन्यजीवों और पक्षियों को देखने का अवसर मिलता है। यह जगह मनोरंजन के साथ वन्यजीव संरक्षण के बारे में जानने का मौका भी देती है।

    दिल्ली चिड़ियाघर में घूमने के दौरान आपको कई तरह के जानवर और पक्षी देखने को मिल सकते हैं। बाघ और तेंदुए जैसे बड़े मांसाहारी जीवों से लेकर हिरण और बंदरों तक यहां वन्यजीवों की विविधता देखने को मिलती है। रंग-बिरंगे पक्षियों को देखना भी बच्चों के लिए खास अनुभव हो सकता है। जानवरों को उनके निर्धारित बाड़ों में देखकर बच्चे किताबों में पढ़ी जानकारी को वास्तविक जीवन से जोड़ सकते हैं। यही वजह है कि स्कूल के विद्यार्थियों और प्रकृति में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के लिए भी यह जगह आकर्षण का केंद्र है।

    चिड़ियाघर घूमने की योजना बनाते समय समय का ध्यान रखना जरूरी है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार एक अप्रैल से 15 अक्टूबर तक यहां सुबह 8:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक घूमने की व्यवस्था है। इस दौरान टिकट बुकिंग शाम 5 बजे बंद हो जाती है। 16 अक्टूबर से 31 मार्च तक सर्दियों में समय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक रहता है और टिकट बुकिंग शाम 4:30 बजे बंद होती है। चिड़ियाघर प्रत्येक शुक्रवार को बंद रहता है। इसलिए यात्रा पर निकलने से पहले आधिकारिक वेबसाइट पर समय और टिकट की ताजा जानकारी जरूर देख लें।

    भारतीय पर्यटकों के लिए सामान्य प्रवेश टिकट की दर वयस्कों के लिए 80 रुपये है। पांच साल तक के बच्चों का प्रवेश निशुल्क है जबकि पांच से 12 साल तक के बच्चों और 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों के लिए टिकट 40 रुपये है। टिकट ऑनलाइन बुक करने की सुविधा भी उपलब्ध है। दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर की सुविधा निशुल्क दी जाती है। परिसर में बैटरी से चलने वाले वाहन भी उपलब्ध हैं जिनसे पैदल चलने में परेशानी महसूस करने वाले पर्यटकों को मदद मिल सकती है। टिकट की दरों और सुविधाओं में बदलाव संभव है इसलिए जाने से पहले आधिकारिक जानकारी देखना बेहतर रहेगा।

    अगर आप परिवार के साथ जा रहे हैं तो आरामदायक जूते पहनकर निकलें क्योंकि परिसर में घूमने के लिए काफी पैदल चलना पड़ सकता है। पीने के पानी की व्यवस्था रखें और मौसम के अनुसार कपड़े पहनें। चिड़ियाघर के नियमों का पालन करना भी जरूरी है। जानवरों को खाना न खिलाएं और उन्हें परेशान करने से बचें। बाड़ों की सुरक्षा सीमा पार न करें तथा कचरा केवल निर्धारित डस्टबिन में डालें। परिसर में खाने की चीजों और अन्य प्रतिबंधित सामान को लेकर नियम लागू हैं इसलिए प्रवेश से पहले आधिकारिक निर्देश पढ़ लें।

    दिल्ली चिड़ियाघर की सैर को केवल घूमने की गतिविधि न मानें बल्कि इसे प्रकृति और जीव-जंतुओं को समझने का अवसर बनाएं। बच्चों को जानवरों की आदतों और उनके प्राकृतिक आवास के बारे में बताएं। अगर आप दिल्ली में परिवार के साथ एक दिन बिताने के लिए ऐसी जगह तलाश रहे हैं जहां मनोरंजन के साथ सीखने का अनुभव भी मिले तो नेशनल जूलॉजिकल पार्क आपकी यात्रा की योजना में शामिल किया जा सकता है।

  • लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का संकट, स्कूली बच्चों ने गुल्लक तोड़कर जुटाए 2 लाख रुपये

    लातूर में सूखे की मार: पशुओं के चारे का संकट, स्कूली बच्चों ने गुल्लक तोड़कर जुटाए 2 लाख रुपये


    लातूर।
    महाराष्ट्र के लातूर जिले में सूखे ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में फसल बचाना चुनौती बन गया है, वहीं पशुओं के लिए हरे चारे की कमी भी गंभीर संकट का रूप ले रही है। ऐसे मुश्किल समय में अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। डॉ. हरिवंशराय बच्चन विद्यालय के प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चों ने अपनी गुल्लक तोड़कर दो लाख रुपये जुटाए और मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिए। बच्चों की इस पहल ने सूखा प्रभावित किसानों के लिए उम्मीद की किरण जगाई है।

    गुल्लक तोड़कर जुटाई रकम, मुख्यमंत्री को सौंपा चेक

    अहमदपुर के स्कूली बच्चों ने अपनी छोटी-छोटी बचत को सूखा पीड़ितों की मदद के लिए समर्पित कर दिया। बच्चों ने गुल्लकों में जमा रकम इकट्ठा कर कुल दो लाख रुपये जुटाए। इसके बाद मुंबई में चेक के माध्यम से यह राशि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सौंपी गई।

    बच्चों की इस पहल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि सूखे से जूझ रहे किसान अब अपनी फसलों को अनाज के लिए बचाने के बजाय पशुओं का पेट भरने के लिए काटने को मजबूर हैं।

    पशुओं को बचाने के लिए गन्ने की फसल काट रहे किसान

    लातूर के काव्हा गांव के किसान नारायण गुडे के पास सात भैंसें, दो गायें और बछड़े हैं। बारिश नहीं होने के कारण खेतों में हरा चारा खत्म हो गया है। पशुओं को भूख से बचाने के लिए उन्हें अब गन्ने की खड़ी फसल काटनी पड़ रही है।

    यह स्थिति बताती है कि सूखे का असर केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पशुपालन पर निर्भर किसानों की आजीविका भी संकट में है। चारे की कमी के कारण किसानों के सामने अपने पशुओं को बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

    लोअर तेरणा परियोजना में महज 21 प्रतिशत पानी बचा

    लातूर जिले में जल संकट की गंभीरता का अंदाजा लोअर तेरणा परियोजना में घटते जलस्तर से लगाया जा सकता है। परियोजना में पानी घटकर कुल क्षमता का महज 21 प्रतिशत रह गया है। प्रशासन ने जलाशय के पानी को पेयजल के लिए सुरक्षित रखने का निर्णय लिया है। खेती के लिए अवैध रूप से पानी उठाने पर निगरानी भी बढ़ाई गई है।

    लातूर के जिलाधिकारी ने स्थिति की समीक्षा की है। पानी की सीमित उपलब्धता के बीच प्रशासन के सामने पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के साथ सूखा प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने की चुनौती है।

    महाराष्ट्र के 265 तालुके सूखा प्रभावित घोषित

    महाराष्ट्र सरकार ने सितंबर के अंत में राज्य के कुल 358 तालुकों में से 265 को सूखा प्रभावित घोषित किया था। यह संख्या राज्य के लगभग 74 प्रतिशत तालुकों के बराबर है। ये तालुके 32 जिलों में फैले हुए हैं।

    सरकार की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन और राहत संबंधी कदम शुरू किए गए हैं। इनमें फसल ऋण के पुनर्गठन, कृषि ऋण की वसूली स्थगित करने, भूमि राजस्व में रियायत देने और कृषि पंपों के बिजली बिल में राहत जैसे उपाय शामिल हैं।

    सूखे की इस व्यापक मार के बीच अहमदपुर के बच्चों का दो लाख रुपये का योगदान केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि संकट से जूझ रहे किसानों और पशुपालकों के प्रति संवेदनशीलता का संदेश भी है।

  • CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 2006 के आत्महत्या मामले में विजिलेंस जांच के आदेश, बाहरी दबाव के आरोपों की होगी पड़ताल

    CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े 2006 के आत्महत्या मामले में विजिलेंस जांच के आदेश, बाहरी दबाव के आरोपों की होगी पड़ताल


    नई दिल्ली।
    मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से जुड़े वर्ष 2006 के एक मामले में केरलम सरकार ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए हैं। यह मामला उनके राज्य के लोक निर्माण विभाग (PWD) के सचिव के रूप में कार्यकाल के दौरान कथित अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है। केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने विजिलेंस निदेशक को मामले में बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों की गहन जांच करने और निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

    मलेशियाई इंजीनियर की आत्महत्या से जुड़ा मामला

    यह मामला मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन की आत्महत्या से संबंधित है। वह केरल राज्य परिवहन परियोजना के तहत एमसी रोड के उन्नयन कार्य में शामिल PATI-BEL कंसोर्टियम से जुड़े थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, बीन के सुसाइड नोट में ज्ञानेश कुमार का नाम दर्ज था।

    अब जांच के केंद्र में वे आरोप हैं, जिनमें कहा गया है कि मामले में बाहरी दबाव डाला गया और शुरुआती जांच को प्रभावित किया गया था। गृह मंत्री के कार्यालय के अनुसार, चेन्निथला ने विजिलेंस निदेशक को निर्देश दिया है कि पूरे मामले और कथित बाहरी प्रभाव की जांच की जाए तथा सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाए।

    विजिलेंस और एंटी-करप्शन ब्यूरो करेगा जांच

    समाचार एजेंसी के मुताबिक, आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) इन आरोपों की पड़ताल करेगा। जांच का उद्देश्य कथित अनियमितताओं और शुरुआती जांच में हस्तक्षेप के आरोपों की सच्चाई का पता लगाना है।

    फिलहाल, जांच के आदेश दिए जाने का अर्थ आरोपों की पुष्टि होना नहीं है। मामले में आरोपों की वास्तविकता जांच के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।

    SIR को लेकर भी बढ़ा है विवाद

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है। शुक्रवार को दिल्ली और मुंबई में विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और युवा समूहों ने प्रदर्शन कर उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप लगाए।

    विवाद उस समय और बढ़ गया, जब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े अन्य मामलों के फैसलों तथा प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।

    इस तरह, ज्ञानेश कुमार से जुड़े पुराने मामले में विजिलेंस जांच के आदेश और SIR को लेकर जारी राजनीतिक विरोध ने चुनाव आयोग के कामकाज तथा उससे जुड़े विवादों को फिर चर्चा में ला दिया है।

  • रियाद में अरामको की सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला, हूतियों ने सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया

    रियाद में अरामको की सुविधा पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला, हूतियों ने सऊदी कार्रवाई का जवाब बताया


    नई दिल्ली ।सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच जारी तनाव के बीच शनिवार को राजधानी रियाद में सऊदी अरामको की एक सुविधा को निशाना बनाकर हमला किए जाने का दावा किया गया। यमन के हूती विद्रोहियों के मुताबिक, इस कार्रवाई में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। हमले के बाद अरामको की सुविधा से आग की लपटें और काले धुएं का गुबार उठता दिखाई दिया। हूतियों ने इस हमले को यमन में सऊदी अरब की ओर से किए गए हमलों की जवाबी कार्रवाई बताया है।

    हूती विद्रोहियों का कहना है कि रियाद स्थित अरामको की सुविधा पर किया गया हमला यमन की राजधानी सना और देश के दूसरे प्रांतों में हुई सऊदी कार्रवाई के जवाब में किया गया। उनके अनुसार, इस हमले में मिसाइलों और ड्रोन दोनों का इस्तेमाल किया गया। हूतियों ने इसे बदले की कार्रवाई के तौर पर पेश किया है। हालांकि, इस हमले से अरामको की संबंधित सुविधा को कितना नुकसान हुआ, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।

    हमले के बाद रियाद में अरामको की सुविधा के आसपास आग और धुएं का असर दिखाई देने की बात सामने आई। एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, शनिवार को सुविधा के पास धुएं और आग का गुबार उठता हुआ देखा गया। घटना के बाद इलाके में हलचल भी देखी गई। हालांकि, सऊदी अधिकारियों की ओर से अरामको की सुविधा को निशाना बनाए जाने की तत्काल पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में हमले से हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

    यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इससे पहले पिछले सप्ताह हूतियों ने यानबू में भी अरामको की सुविधाओं पर हमले का दावा किया था। उस घटना के संबंध में सऊदी अरब की ओर से छह मिसाइलों को रोकने की बात कही गई थी। दोनों पक्षों के बीच जारी टकराव के बीच अरामको की सुविधाओं को लेकर सामने आ रहे हमलों के दावों ने तनाव की स्थिति को और सामने ला दिया है।

    रियाद में हुए ताजा हमले को लेकर हूतियों ने स्पष्ट रूप से इसे यमन में सऊदी हमलों की प्रतिक्रिया बताया है। विद्रोहियों के दावे के अनुसार, बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के जरिए अरामको की सुविधा को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, सऊदी अधिकारियों की ओर से तत्काल हमले की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल घटना के बाद सुविधा को हुए नुकसान का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। प्रत्यक्षदर्शी द्वारा आग और धुएं के गुबार देखे जाने की जानकारी सामने आई है, जबकि हमले की पूरी स्थिति और उसके प्रभाव को लेकर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।

  • डायबिटीज के मरीज जरूर जान लें खाने के बाद 5 से 20 मिनट टहलने का क्या होता है असर रिसर्च में सामने आई जरूरी बातें

    डायबिटीज के मरीज जरूर जान लें खाने के बाद 5 से 20 मिनट टहलने का क्या होता है असर रिसर्च में सामने आई जरूरी बातें


    नई दिल्ली। आजकल की व्यस्त जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या तेजी से चिंता का विषय बन रही है। खासकर डायबिटीज से जूझ रहे लोगों के लिए भोजन के बाद ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी होता है। ऐसे में रोजमर्रा की दिनचर्या में एक छोटी सी आदत शामिल करके सेहत को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। यह आदत है खाना खाने के बाद कुछ देर टहलना। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार भोजन के बाद हल्की शारीरिक गतिविधि करने से शरीर को ग्लूकोज का इस्तेमाल करने में मदद मिलती है। हालांकि सवाल यह है कि आखिर 5 मिनट 10 मिनट या 20 मिनट में से कितनी देर चलना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है।

    भोजन करने के बाद शरीर खाने में मौजूद कार्बोहाइड्रेट को तोड़कर ग्लूकोज में बदलता है। इससे ब्लड शुगर का स्तर बढ़ सकता है। इस दौरान जब व्यक्ति लगातार बैठा रहता है तो मांसपेशियों की गतिविधि कम होती है। वहीं टहलने से मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और वे ऊर्जा के लिए ग्लूकोज का इस्तेमाल करने लगती हैं। इस प्रक्रिया से भोजन के बाद ब्लड शुगर में होने वाली बढ़ोतरी को सीमित करने में मदद मिल सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ लंबे समय तक लगातार बैठे रहने के बजाय बीच बीच में उठकर चलने की सलाह देते हैं।

    अगर आपके पास समय कम है तो भोजन के बाद 5 मिनट की हल्की वॉक से शुरुआत की जा सकती है। यह उन लोगों के लिए आसान विकल्प हो सकता है जो ऑफिस में काम करते हैं या जिनकी दिनचर्या काफी व्यस्त रहती है। कुछ मिनट चलने से भी शरीर को निष्क्रिय रहने के मुकाबले गतिविधि मिलती है। हालांकि इसका असर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति भोजन की मात्रा और ग्लूकोज नियंत्रण पर निर्भर कर सकता है।

    वहीं 10 मिनट की वॉक उन लोगों के लिए उपयोगी दिनचर्या बन सकती है जो भोजन के बाद थोड़ा अधिक समय निकाल सकते हैं। सामान्य गति से टहलने से मांसपेशियां सक्रिय रहती हैं और भोजन के बाद ग्लूकोज के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। इसके लिए जरूरी नहीं कि तेज गति से चला जाए। आरामदायक चाल से नियमित रूप से चलना भी शुरुआत के लिए अच्छा विकल्प है।

    यदि आप आराम से 20 मिनट तक टहल सकते हैं तो यह आपकी दैनिक शारीरिक गतिविधि बढ़ाने में योगदान दे सकता है। नियमित वॉक से ब्लड शुगर नियंत्रण के साथ हृदय स्वास्थ्य और फिटनेस को भी लाभ मिल सकता है। हालांकि केवल 20 मिनट चलने से हर व्यक्ति का ब्लड शुगर निश्चित रूप से सामान्य हो जाएगा ऐसा नहीं कहा जा सकता। वॉक की अवधि और गति का चुनाव अपनी क्षमता और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार करना चाहिए।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी एक दिन लंबी वॉक करने के बजाय नियमित रूप से चलने की आदत विकसित की जाए। भोजन के बाद हल्की वॉक करना आसान शुरुआत हो सकती है। इसके साथ संतुलित आहार पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का सेवन भी जरूरी है। डायबिटीज के मरीज अपनी दवा या इंसुलिन की मात्रा केवल वॉक शुरू करने के आधार पर खुद से न बदलें। यदि चलने के दौरान चक्कर कमजोरी या पसीना आने जैसे लक्षण महसूस हों तो रुककर ब्लड शुगर की जांच और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। इस तरह अपनी दिनचर्या में छोटी लेकिन नियमित गतिविधि शामिल करके ब्लड शुगर नियंत्रण की दिशा में कदम बढ़ाया जा सकता है।

  • JPSC पेपर लीक मामले में SIT का एक्शन, दो सफल सगे भाई गिरफ्तार, 20 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी

    JPSC पेपर लीक मामले में SIT का एक्शन, दो सफल सगे भाई गिरफ्तार, 20 सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ जारी

    नई दिल्ली ।झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितता के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने शनिवार को दो सफल सगे भाइयों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार किए गए अभ्यर्थियों की पहचान दिलीप राणा और ओमप्रकाश राणा के रूप में हुई है। दोनों ने 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में सफलता हासिल की थी। दोनों की गिरफ्तारी केस संख्या 16/2026 में की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, दोनों पर परीक्षा में अनुचित तरीके से सफलता हासिल करने के लिए सेटिंग कराने का आरोप है।

    जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, दोनों भाइयों ने अभय तिवारी के लिए एजेंट के तौर पर काम करने वाले बुद्धेश्वर भगत के माध्यम से परीक्षा में सेटिंग कराई थी। आरोप है कि ओएमआर शीट में हेरफेर के जरिए उन्हें 14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा में उत्तीर्ण कराया गया। बुद्धेश्वर भगत की गिरफ्तारी के बाद उससे 11 अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी मिली थी। इसके बाद इन सभी अभ्यर्थियों को जांच के दायरे में रखा गया। इनमें कपिल कुमार महतो, संतोष कुमार, वंदना कुमारी, दिलीप कुमार राणा, ओमप्रकाश राणा, शिवम सिंह, पवन कुमार मुंडा, राकी सचिन लकड़ा, रोशन केरकेट्टा और उमांकांत उरांव के नाम शामिल हैं।

    इस मामले में रोशन केरकेट्टा और उमाकांत उरांव की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है और उनसे पूछताछ भी की जा चुकी है। शनिवार की कार्रवाई के बाद हजारीबाग से गिरफ्तार किए गए सफल अभ्यर्थियों की संख्या तीन हो गई है। जेपीएससी मेधा घोटाले की जांच में अब तक कुल 27 आरोपितों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। इनमें नौ ऐसे अभ्यर्थी शामिल हैं, जिन्होंने विभिन्न परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। गिरफ्तार सफल अभ्यर्थियों में हजारीबाग के सुमन सौरभ, दीपक राणा और ओमप्रकाश राणा, लोहरदगा के उमाकांत उरांव, रांची के रोशन केरकेट्टा और मनोज कुमार, उत्तर प्रदेश के रक्षक सिंह तथा एफआरओ और एसीएफ परीक्षा में सफल ऋतिक रौशन और पंकज प्रसून्न शामिल हैं।

    इसी जांच से जुड़े सीजीएल पेपर लीक मामले में पहले गिरफ्तार किए जा चुके एजेंट दिलीप पासवान को तीन दिनों की रिमांड पर लिया गया है। उसे 14 सितंबर को पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले से गिरफ्तार किया गया था। जांच में यह बात सामने आई है कि सीजीएल परीक्षा से पहले दिलीप पासवान ने अभ्यर्थियों को आसनसोल के एक होटल में ठहराया था और उन्हें प्रश्नोत्तर रटवाए थे। शनिवार को जांच टीम ने 20 सफल अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की। इसके अलावा जेपीएससी भर्ती परीक्षा में कथित धांधली के मामले में जेल में बंद आयोग के पूर्व अध्यक्ष और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव एल ख्यांग्ते ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है।

    एल ख्यांग्ते को इस मामले में तीन दिनों तक पूछताछ के बाद 10 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था और गिरफ्तारी के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। उन्होंने इससे पहले रांची सिविल कोर्ट स्थित सीआईडी कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज कर दिया था। इसके बाद अब उन्होंने हाईकोर्ट में जमानत की मांग की है। जेपीएससी परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच में गिरफ्तारियों और पूछताछ का सिलसिला जारी है।