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  • UN महासभा के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके दो ईरानी राजनयिकों को अमेरिका ने देश छोड़ने के आदेश की अनदेखी पर निकाला

    UN महासभा के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके दो ईरानी राजनयिकों को अमेरिका ने देश छोड़ने के आदेश की अनदेखी पर निकाला


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर कर दिया है। दोनों राजनयिक महासभा का सत्र समाप्त होने के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उन्हें पहले ही अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन दोनों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद उनके खिलाफ देश से निष्कासन की कार्रवाई की गई।

    बताया गया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका आए थे। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को निर्देश दिया था कि महासभा में शामिल होने आए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अमेरिका से रवाना हो जाएं। इसके बावजूद प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य महासभा समाप्त होने के काफी समय बाद तक न्यूयॉर्क में मौजूद रहे। इसी वजह से उन्हें अमेरिका से बाहर भेजने की कार्रवाई की गई।

    अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, दोनों राजनयिकों में से एक शुक्रवार रात न्यूयॉर्क से रवाना हुआ, जबकि दूसरा शनिवार सुबह वहां से गया। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका की ओर से दिए गए रवाना होने के आदेश की अनदेखी के कारण दोनों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस मामले में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री अपने फैसले पर कायम हैं और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्यों को अब अमेरिका से निकाल दिया गया है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव का खतरा बढ़ने की बात सामने आ रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की ओर से ईरानी राजनयिकों को देश से बाहर करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई का तत्काल कारण महासभा समाप्त होने के बाद भी दोनों राजनयिकों का न्यूयॉर्क में मौजूद रहना और अमेरिका छोड़ने के निर्देश का पालन नहीं करना था।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम के बीच ईरान को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया है। उन्होंने ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर बताया और संघर्ष जल्द खत्म होने का दावा किया। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के लिए सख्त चेतावनी भी दी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्यों को पहले ही देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उनके न्यूयॉर्क में बने रहने के कारण उन्हें अब अमेरिका से बाहर कर दिया गया है।

    अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा ईरानी मिशन को दिए गए निर्देश और उसके बाद हुई निष्कासन की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। महासभा में भाग लेने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की अमेरिका में मौजूदगी को लेकर दिए गए निर्देशों के पालन पर कार्रवाई की गई। दोनों राजनयिकों के अमेरिका से रवाना होने के साथ यह घटनाक्रम समाप्त हुआ, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

  • शेख हसीना प्रत्यर्पण मामले में भारत का जवाब, बांग्लादेश को कहा- वापसी की समयसीमा अभी तय नहीं की जा सकती

    शेख हसीना प्रत्यर्पण मामले में भारत का जवाब, बांग्लादेश को कहा- वापसी की समयसीमा अभी तय नहीं की जा सकती

    नई दिल्ली ।शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भारत ने स्पष्ट किया है कि उनकी बांग्लादेश वापसी के लिए फिलहाल कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई जा सकती। बांग्लादेश की ओर से हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध भारत को प्राप्त हुआ है और इस अनुरोध की कानूनी जांच की जा रही है। भारत के अनुसार, प्रत्यर्पण से जुड़ा मामला तय कानूनी, न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी वजह से उनकी वापसी की कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं की गई है।

    ढाका में आयोजित एक निजी चर्चा के दौरान भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी से शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही मांगों के बारे में सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि हसीना की वापसी की समयसीमा के बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि बांग्लादेश से मिले प्रत्यर्पण अनुरोध पर फिलहाल कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है और भारत इस मामले को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है।

    भारत को बांग्लादेश की ओर से शेख हसीना को वापस भेजने का औपचारिक अनुरोध मिल चुका है। इस अनुरोध की कानूनी समीक्षा वर्तमान में जारी है। भारत की ओर से यह संकेत दिया गया है कि मामले में किसी तरह की समयसीमा पहले से तय नहीं की जा सकती। प्रत्यर्पण से संबंधित निर्णय कानूनी प्रक्रिया और उपलब्ध प्रावधानों के आधार पर लिया जाएगा। इस दौरान भारत की ओर से मामले को न्यायिक और कूटनीतिक प्रक्रिया के दायरे में रखा गया है।

    शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में पैदा हुए राजनीतिक संकट के बीच अचानक देश छोड़कर भारत आई थीं। उस समय बांग्लादेश में परिस्थितियां तेजी से बिगड़ रही थीं। हसीना उस समय देश की प्रधानमंत्री थीं और उनकी सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन चल रहे थे। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच उनकी सरकार गिर गई और वह भारत आ गईं। भारत की ओर से उस समय कहा गया था कि तेजी से बिगड़ते हालात के बीच हसीना को भारत में आने की अनुमति देने के अलावा बहुत कम विकल्प मौजूद थे।

    भारत का कहना है कि उस समय हसीना को भारत आने की अनुमति देना सीमा पार बढ़ते संकट के बीच स्थिरता बनाए रखने के लिहाज से जरूरी था। इसके बाद बांग्लादेश में राजनीतिक स्थिति बदली और अब वहां तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार है। इस बदले राजनीतिक परिदृश्य के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग बांग्लादेश की ओर से लगातार की जा रही है।

    ढाका में बंगाल की खाड़ी संवाद 2026 के दौरान भी भारतीय उच्चायुक्त से इसी मुद्दे पर सवाल किया गया। उन्होंने दोहराया कि भारत फिलहाल हसीना की वापसी के लिए कोई निश्चित समयसीमा नहीं बता सकता। उनका कहना था कि प्रत्यर्पण अनुरोध कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है। ऐसे में आगे की कार्रवाई तय प्रक्रिया के अनुसार ही होगी और फिलहाल उनकी वापसी की कोई डेडलाइन निर्धारित नहीं है।

  • आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    आरबीआई नीति, तिमाही नतीजे और पश्चिम एशिया तनाव से अगले सप्ताह शेयर बाजार की दिशा पर निवेशकों की नजर रहेगी

    नई दिल्ली । छोटे कारोबारी सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार पर वैश्विक दबाव हावी रहा और प्रमुख सूचकांक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तरों से नीचे फिसल गए। अब अगले सप्ताह बाजार की दिशा पर आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजे और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव देखने को मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत मिलने पर भारतीय बाजार में राहतभरी तेजी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत आरबीआई की नीति, महंगाई को लेकर उसका रुख और आर्थिक वृद्धि के अनुमान घरेलू ब्याज दरों तथा वित्तीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।

    पिछले सप्ताह बाजार में कमजोरी की शुरुआत पहले कारोबारी दिन से ही हो गई थी। सोमवार को सेंसेक्स में 1.52 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और अगले दो कारोबारी सत्रों में भी कमजोरी बनी रही। गुरुवार को सेंसेक्स 0.79 प्रतिशत और गिर गया। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 1,670.84 अंक टूटकर 71,909.70 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 3 प्रतिशत से अधिक गिरकर 22,421.95 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार, बाजार में यह गिरावट जारी करेक्शन के दौर को दर्शाती है।

    तकनीकी संकेतकों के स्तर पर भी बाजार में कमजोरी बनी हुई है। निफ्टी लगातार आठवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ है। इसका साप्ताहिक आरएसआई करीब 31.06 पर है, जो 50 के तटस्थ स्तर से काफी नीचे है और कमजोर मोमेंटम का संकेत देता है। हालांकि आरएसआई अब ओवरसोल्ड जोन के करीब पहुंच रहा है, जिससे निचले स्तरों पर बीच-बीच में तकनीकी रिकवरी की संभावना बन सकती है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, 22,800 और 23,000 के स्तर निफ्टी के लिए निकट अवधि में प्रमुख प्रतिरोध रहेंगे। इन स्तरों के ऊपर टिकाऊ बढ़त मिलने पर बिकवाली का दबाव कम हो सकता है। दूसरी ओर 22,350 और 22,180 के स्तर प्रमुख सपोर्ट माने जा रहे हैं।

    बाजार की धारणा पर फिलहाल वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव अधिक है। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड्स में बढ़ोतरी, महंगाई को लेकर चिंता और ऊंची ऊर्जा कीमतों ने निवेशकों को सतर्क रखा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स बढ़ने से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण भी प्रभावित हो रहा है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं। अगस्त में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि बढ़कर 8 प्रतिशत हो गई, जबकि जुलाई में संशोधित आंकड़ा 7.4 प्रतिशत था। विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत तथा बिजली और गैस आपूर्ति में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    ऊर्जा बाजार का रुख भी अगले सप्ताह महत्वपूर्ण रहेगा। हाल के दिनों में ब्रेंट क्रूड अपने ऊंचे स्तरों से नीचे आया है, क्योंकि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आपूर्ति युद्ध-पूर्व स्तरों के करीब पहुंचने लगी है। इससे ऊर्जा कीमतों को कुछ राहत मिली है। इसके साथ ही अमेरिका से आने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। नॉन-फार्म पेरोल्स और आईएसएम मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जैसे आंकड़े वैश्विक बाजारों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं और इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर आरबीआई नीति समीक्षा, दूसरी तिमाही के नतीजे, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी आर्थिक आंकड़े अगले सप्ताह बाजार के प्रमुख ट्रिगर रहेंगे।

  • सिर्फ सीने में दर्द ही नहीं, हार्ट अटैक से पहले हाथ, गर्दन, जबड़े और पेट के ऊपरी हिस्से में भी हो सकता है दर्द

    सिर्फ सीने में दर्द ही नहीं, हार्ट अटैक से पहले हाथ, गर्दन, जबड़े और पेट के ऊपरी हिस्से में भी हो सकता है दर्द


    नई दिल्ली:
    हार्ट अटैक को आमतौर पर सीने में दर्द या भारीपन से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके संकेत केवल सीने तक सीमित नहीं होते। हार्ट अटैक के दौरान शरीर के कुछ दूसरे हिस्सों में भी दर्द या असहजता महसूस हो सकती है। कई बार लोग इसे सामान्य बॉडी पेन, गैस या पाचन संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। हार्ट अटैक का खतरा केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं माना जाता और कम उम्र के लोगों में भी यह समस्या देखी जा रही है। ऐसे में शरीर में होने वाले असामान्य दर्द और अन्य संकेतों को समय रहते पहचानना जरूरी है।

    हार्ट अटैक के दौरान सीने के बीचोंबीच दर्द या किसी तरह का दबाव महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को सीने में भारीपन या जकड़न की शिकायत होती है। यह असहजता कुछ मिनटों से ज्यादा समय तक रह सकती है या थोड़ी देर ठीक होने के बाद दोबारा शुरू हो सकती है। इसके अलावा दर्द बाएं या दाएं हाथ में भी महसूस हो सकता है। यह कंधे से शुरू होकर हाथ और उंगलियों तक फैल सकता है। दर्द कुछ समय बाद कम होकर फिर दोबारा भी हो सकता है। ऐसे दर्द को हमेशा सामान्य मानकर छोड़ना सही नहीं माना जाता।

    गर्दन, जबड़े और पीठ में तेज दर्द भी हार्ट अटैक से जुड़े संकेतों में शामिल हो सकता है। यह दर्द अचानक शुरू होकर लगातार बना रह सकता है या सीने में होने वाली असहजता के साथ दिखाई दे सकता है। खासतौर पर महिलाओं में इस तरह के लक्षण अधिक देखने को मिल सकते हैं। इसी तरह पेट के ऊपरी हिस्से में होने वाला दर्द भी ध्यान देने योग्य है। पेट में दर्द होने पर कई लोग इसे गैस, ऐंठन, कब्ज या पाचन संबंधी समस्या समझ लेते हैं, लेकिन हर बार इसका कारण सामान्य नहीं होता। हार्ट अटैक से पहले ऊपरी पेट में दर्द महसूस हो सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक के लक्षणों में कुछ अंतर हो सकते हैं। महिलाओं में भी सीने में दर्द या असहजता सबसे आम लक्षणों में शामिल है, लेकिन इसके साथ ऐसे संकेत भी दिखाई दे सकते हैं जिन्हें आमतौर पर हार्ट अटैक से नहीं जोड़ा जाता। इनमें घबराहट या बेचैनी, सांस लेने में परेशानी या सांस फूलना, जी मिचलाना या उल्टी, पेट खराब या अपच जैसी समस्या शामिल हो सकती है। महिलाओं को बिना ज्यादा मेहनत के असामान्य थकान और कमजोरी भी महसूस हो सकती है।

    हार्ट अटैक से जुड़े संकेतों को पहचानना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दर्द या असहजता शरीर के अलग-अलग हिस्सों में महसूस हो सकती है। सीने में दबाव या भारीपन के साथ हाथ, गर्दन, जबड़े, पीठ या पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द हो तो इसे सामान्य दर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर जब दर्द अचानक शुरू हो, बना रहे या दोबारा हो, तब इन संकेतों को गंभीरता से लेना जरूरी है। महिलाओं में सांस फूलना, मतली, उल्टी, बेचैनी और असामान्य थकान जैसे लक्षण भी ध्यान देने योग्य हो सकते हैं।

  • बार-बार चिड़चिड़ापन और गुस्सा आता है तो सिर्फ मूड खराब होना नहीं, थायरॉइड और ब्लड शुगर भी हो सकते हैं कारण

    बार-बार चिड़चिड़ापन और गुस्सा आता है तो सिर्फ मूड खराब होना नहीं, थायरॉइड और ब्लड शुगर भी हो सकते हैं कारण

    नई दिल्ली: किसी बात पर नाराजगी या परिस्थितियां उम्मीद के मुताबिक न होने पर गुस्सा और चिड़चिड़ापन होना स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। आम तौर पर ऐसी भावनाएं कुछ समय बाद खुद शांत हो जाती हैं और व्यक्ति सामान्य महसूस करने लगता है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के छोटी-छोटी बातों पर बार-बार गुस्सा आता है या चिड़चिड़ापन लगातार बना रहता है, तो इसके पीछे के कारणों को समझना जरूरी हो जाता है। हर बार इसका संबंध केवल खराब मूड या मानसिक तनाव से नहीं होता, शरीर में होने वाली कुछ गड़बड़ियां भी मूड और व्यवहार में बदलाव ला सकती हैं।

    तनाव और चिंता के अलावा नींद की कमी, ब्लड शुगर का ठीक से नियंत्रित न रहना, थायरॉइड की समस्या और पोषक तत्वों की कमी भी लगातार चिड़चिड़ापन पैदा कर सकती है। पर्याप्त नींद न मिलने से केवल थकान ही नहीं होती, बल्कि ध्यान, याददाश्त और भावनाओं पर नियंत्रण भी प्रभावित हो सकता है। लगातार कम या खराब नींद व्यक्ति को अधिक चिड़चिड़ा और तनावग्रस्त महसूस करा सकती है। देर रात तक मोबाइल देखना, सोने का समय लगातार बदलना और अधिक कैफीन वाली चीजों का सेवन नींद की गुणवत्ता बिगाड़ सकता है, जिससे तनाव, चिड़चिड़ापन और गुस्सा बढ़ सकता है।

    थायरॉइड की समस्या भी लगातार चिड़चिड़ापन बने रहने का एक कारण हो सकती है। थायरॉइड हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल को नियंत्रित करते हैं। जब थायरॉइड हार्मोन का स्तर अधिक हो जाता है और हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति बनती है, तो कई लोगों में बेचैनी, घबराहट, नींद की परेशानी और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं। इसके साथ धड़कनों का तेज होना, वजन कम होना और ज्यादा पसीना आने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय समय पर जांच और इलाज जरूरी हो जाता है।

    ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव भी मूड और व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। ब्लड शुगर कम होने पर कमजोरी, कंपकंपी, पसीना आने के साथ घबराहट और चिड़चिड़ापन हो सकता है। डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेने वाले लोगों में ऐसी समस्या अधिक देखी जा सकती है। यदि चिड़चिड़ापन खास समय पर बार-बार होता है और उसके साथ इस तरह के लक्षण भी दिखाई देते हैं, तो ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी हो सकता है। इसके अलावा पोषक तत्वों की कमी भी भावनात्मक समस्याओं को बढ़ा सकती है।

    आयरन, विटामिन बी12 और फोलेट की कमी से थकान, कमजोरी और ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है, जिसका असर मूड पर भी पड़ सकता है। लगातार चिड़चिड़ापन व्यक्ति के सामाजिक संबंधों और रोजमर्रा के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। इसलिए यदि यह समस्या बार-बार हो रही है या लंबे समय तक बनी रहती है, तो केवल इसे स्वभाव या खराब मूड मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नींद, तनाव, ब्लड शुगर, थायरॉइड और पोषण से जुड़े संभावित कारणों को समझना जरूरी है, ताकि आवश्यकता होने पर सही जांच और उपचार कराया जा सके।

  • तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    तेजी से झड़ रहे हैं बाल तो कैल्शियम की कमी भी हो सकती है वजह, जानिए किन संकेतों पर जांच जरूरी

    नई दिल्ली: बाल झड़ने की समस्या आम होती जा रही है और कम उम्र में भी कई लोग बालों के पतले होने या गंजेपन की परेशानी का सामना कर रहे हैं। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के अलावा बढ़ते प्रदूषण को भी बालों की सेहत प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल किया जाता है। बाल झड़ने की शुरुआत होते ही लोग अक्सर अलग-अलग शैंपू, तेल और हेयर केयर उत्पादों का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं, लेकिन बार-बार उत्पाद बदलना भी समस्या बढ़ा सकता है। कई बार बालों की दिक्कत के पीछे शरीर के अंदर चल रही स्वास्थ्य संबंधी गड़बड़ियां भी जिम्मेदार होती हैं।

    बालों के झड़ने की वजह हर व्यक्ति में एक जैसी नहीं होती। पोषक तत्वों की कमी, लगातार तनाव, नींद की कमी, थायरॉइड की समस्या और आनुवंशिक कारण बालों की ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं। आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन की कमी भी बालों के झड़ने को बढ़ावा दे सकती है। ऐसे में कम उम्र में अचानक या लगातार बाल झड़ने लगें तो केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय इसकी असली वजह समझना जरूरी है। बिना जांच किसी पोषक तत्व की कमी मानकर सप्लीमेंट लेना सही तरीका नहीं माना जाता।

    कैल्शियम को आम तौर पर हड्डियों की सेहत से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसकी कमी बालों की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। गंभीर या लंबे समय तक रहने वाली कैल्शियम की कमी यानी हाइपोकैल्सीमिया के कारण बालों में बदलाव अधिक देखे जा सकते हैं। कैल्शियम की कमी से बालों की जड़ें कमजोर हो सकती हैं और केराटिन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है, जिससे बाल रूखे और कमजोर होने के साथ पतले या टूटने वाले हो सकते हैं। इसके अलावा कैल्शियम की कमी के साथ नाखून भी कमजोर होने लग सकते हैं। हालांकि, केवल कैल्शियम की कमी से बाल झड़ने की समस्या होना बहुत आम नहीं माना जाता।

    पोषक तत्वों की कमी के मामले में विशेषज्ञों के अनुसार आयरन, प्रोटीन, जिंक और बायोटिन जैसे तत्वों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को इनके सप्लीमेंट लेने की जरूरत है। जरूरत से ज्यादा सप्लीमेंट लेना भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए यदि शरीर में किसी विटामिन या पोषक तत्व की कमी की आशंका हो तो डॉक्टर की सलाह पर ही दवा या सप्लीमेंट लेना चाहिए। बालों की समस्या का कारण पता किए बिना केवल किसी एक पोषक तत्व को जिम्मेदार मानकर उपचार शुरू करना उचित नहीं है।

    रोज कुछ बाल गिरना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है और आम तौर पर रोज 30 से 50 बाल गिर सकते हैं। चिंता तब होती है जब बाल लगातार अधिक मात्रा में गिरने लगें, हेयरलाइन पीछे जाने लगे या बालों की घनत्व कम होने लगे। किसी बीमारी या तनाव के बाद होने वाला अत्यधिक हेयर शेडिंग कई बार कुछ महीनों बाद शुरू हो सकता है और कारण खत्म होने के बाद धीरे-धीरे सुधार भी हो सकता है। यदि बाल अचानक गुच्छों में गिर रहे हों, गोल-गोल पैच बन रहे हों या सिर की त्वचा पर लालिमा और सूजन दिखाई दे रही हो, तो सही कारण का पता लगाने के लिए समय रहते जांच और इलाज जरूरी है।

  • शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से, जानें घटस्थापना, अष्टमी-नवमी और दशहरा की पूरी तारीख

    शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर से, जानें घटस्थापना, अष्टमी-नवमी और दशहरा की पूरी तारीख

    नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। इसी दिन घटस्थापना के साथ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा का सिलसिला शुरू होगा। नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा के साथ होगा। इस बार अष्टमी और नवमी की तिथियों के संयोग के कारण दोनों से जुड़े पूजा-अनुष्ठान 19 अक्टूबर को किए जाएंगे। नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास भी रखते हैं।

    11 अक्टूबर को नवरात्रि के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना और मां शैलपुत्री की पूजा होगी। घटस्थापना को कलश स्थापना भी कहा जाता है। इस दौरान कलश स्थापित करने के साथ जौ बोने की परंपरा भी है। दिए गए पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक बताया गया है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा। घटस्थापना का समय अलग-अलग शहरों में स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना के कारण कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना उचित माना गया है।

    नवरात्रि की प्रमुख तिथियों के अनुसार 12 अक्टूबर को द्वितीया पर मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को तृतीया पर मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को चतुर्थी पर मां कूष्मांडा और 15 अक्टूबर को पंचमी पर मां स्कंदमाता की पूजा होगी। 16 अक्टूबर को षष्ठी पर मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को सप्तमी पर मां कालरात्रि की आराधना की जाएगी। 19 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान होंगे, जबकि 20 अक्टूबर को विजयादशमी और दशहरा मनाया जाएगा। नवरात्रि में मां के नौ स्वरूपों में पहले दिन शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन चंद्रघंटा, चौथे दिन कूष्मांडा, पांचवें दिन स्कंदमाता, छठे दिन कात्यायनी, सातवें दिन कालरात्रि, आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।

    धार्मिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि के दौरान शक्ति की आराधना करने से साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार उपवास रखते हैं और मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं। नवरात्रि के बाद दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। रामायण की मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध किया था। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाने की परंपरा है।

    घटस्थापना को नवरात्रि का महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ मुहूर्त में किया जाना चाहिए। कलश स्थापना के लिए साफ स्थान का चयन किया जाता है और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद कलश में जल भरकर उसके ऊपर आम या अशोक के पत्ते और नारियल रखने की परंपरा है। घटस्थापना के मुहूर्त पर स्थानीय सूर्योदय और पंचांग की गणना का प्रभाव पड़ता है, इसलिए अलग-अलग शहरों में समय में अंतर हो सकता है। उदाहरण के तौर पर मुंबई और दिल्ली के लिए बताए गए घटस्थापना मुहूर्त अलग हो सकते हैं।

  • माता वैष्णो देवी से जुड़े रहस्यों की पूरी कथा, जानें पंडित श्रीधर, बाणगंगा और भैरवनाथ से जुड़ी मान्यताएं

    माता वैष्णो देवी से जुड़े रहस्यों की पूरी कथा, जानें पंडित श्रीधर, बाणगंगा और भैरवनाथ से जुड़ी मान्यताएं

    नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित त्रिकुटा पर्वत पर माता वैष्णो देवी का पवित्र धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां एक पवित्र गुफा में तीन प्राकृतिक पिंडियों के रूप में देवी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि ये तीनों पिंडियां महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी का स्वरूप हैं और इन्हीं तीन शक्तियों के संयुक्त रूप को माता वैष्णो देवी कहा जाता है। इस धाम से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें पंडित श्रीधर, वैष्णवी और भैरवनाथ से जुड़ी कथा प्रमुख मानी जाती है।

    मान्यता के अनुसार, पंडित श्रीधर कटरा के पास हंसली गांव में रहते थे और धार्मिक तथा सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उनकी कोई संतान नहीं थी, जिससे वह अक्सर दुखी रहते थे। एक बार उन्होंने गांव के लोगों के लिए भंडारे का आयोजन करने का निर्णय लिया। भंडारे से एक रात पहले उन्हें चिंता थी कि उपलब्ध सामग्री से इतने लोगों का भोजन कैसे कराया जाएगा। अगले दिन जब वह पूजा कर रहे थे और गांव के लोग पहुंचने लगे, तब एक तेजस्वी कन्या वहां आई। उसका नाम वैष्णवी बताया जाता है। उसने भंडारे की पूरी व्यवस्था संभाली और सभी लोगों को भोजन कराया। भंडारा पूरा होने के बाद वह अचानक वहां से गायब हो गई।

    कहा जाता है कि कुछ समय बाद वही कन्या पंडित श्रीधर के सपने में आई और उन्हें एक पवित्र गुफा के बारे में बताया। मान्यता है कि उसने पंडित श्रीधर को संतान प्राप्ति का आशीर्वाद भी दिया। इसके बाद श्रीधर समझ गए कि भंडारे में आई कन्या साधारण बालिका नहीं, बल्कि स्वयं माता वैष्णो देवी थीं। उन्होंने उस पवित्र गुफा की खोज की और इसी के बाद इस स्थान पर माता की भक्ति और दर्शन की परंपरा आगे बढ़ती गई। इसी कथा में भैरवनाथ का प्रसंग भी आता है। मान्यता है कि भंडारे में पहुंचे भैरवनाथ ने वैष्णवी से मांसाहारी भोजन की मांग की, जबकि वहां केवल सात्विक और शाकाहारी भोजन उपलब्ध था। इसके बाद उन्होंने वैष्णवी का पीछा करना शुरू कर दिया।

    मान्यता के अनुसार, वैष्णवी त्रिकुटा पर्वत की ओर चली गईं और भैरवनाथ भी उनके पीछे पहुंचे। यात्रा के दौरान हनुमान जी भी माता की रक्षा के लिए उनके साथ थे। जब हनुमान जी को प्यास लगी तो माता ने धनुष से धरती पर बाण चलाया, जिससे जलधारा निकली। कहा जाता है कि माता ने इसी जलधारा में अपने केश धोए थे और इसी कारण इसे बाणगंगा कहा गया। इसके बाद माता एक गुफा में चली गईं और वहां तपस्या करने लगीं। मान्यता है कि हनुमान जी गुफा के बाहर उनकी रक्षा करते रहे। भैरवनाथ वहां भी पहुंच गए। एक साधु ने उन्हें बताया कि जिस कन्या का वह पीछा कर रहे हैं, वह देवी का स्वरूप हैं, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी। माता गुफा से दूसरे रास्ते से बाहर निकलीं और इस स्थान को अर्धकुंवारी या अर्धकुमारी कहा जाता है।

    इसके बाद मान्यता है कि माता वैष्णो देवी ने अपना दिव्य स्वरूप धारण कर भैरवनाथ को लौट जाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने पीछा जारी रखा। इस दौरान हनुमान जी और भैरवनाथ के बीच युद्ध हुआ। जब युद्ध लंबा खिंचने लगा तो माता ने स्वयं बाहर आकर भैरवनाथ का वध कर दिया। कहा जाता है कि भैरवनाथ का सिर जिस स्थान पर गिरा, वह आज भैरव घाटी के नाम से जाना जाता है और वहीं भैरवनाथ का मंदिर भी स्थित है। भैरवनाथ ने अपनी गलती स्वीकार कर माता से क्षमा मांगी। मान्यता है कि माता ने उन्हें वरदान दिया कि उनके दर्शन के बिना माता की यात्रा पूरी नहीं मानी जाएगी। इसी वजह से श्रद्धालु माता के भवन में दर्शन के बाद भैरवनाथ मंदिर भी जाते हैं। इस तरह बाणगंगा, अर्धकुंवारी, भवन और भैरव घाटी माता वैष्णो देवी की यात्रा से जुड़े प्रमुख पवित्र पड़ाव माने जाते हैं।

  • बेटियों की सुरक्षा पर शिवराज का बड़ा बयान, पुरुषों और माता-पिता से आत्ममंथन की अपील, बोले ये नारा कभी सफल न हो

    बेटियों की सुरक्षा पर शिवराज का बड़ा बयान, पुरुषों और माता-पिता से आत्ममंथन की अपील, बोले ये नारा कभी सफल न हो


    भोपाल। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बेटियों की सुरक्षा और समाज में महिलाओं के प्रति बदलते नजरिए को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर चर्चित हो रहे एक कचौड़ी दो समोसा इन मर्दों का क्या भरोसा वाले नारे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि बेटियों को इस तरह की बात लिखने और कहने की जरूरत महसूस हुई। शिवराज ने कहा कि अगर बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं कर पाएंगी तो समाज और देश आगे कैसे बढ़ेगा। उन्होंने पुरुषों बेटों और उनके माता पिता से इस विषय पर आत्ममंथन करने की अपील की।
    भोपाल में नवगति एजुकेशन स्कॉलरशिप कार्यक्रम में पहुंचे शिवराज ने कहा कि बेटियों का सम्मान और उनकी सुरक्षा सिर्फ उनके परिवार की जिम्मेदारी नहीं हो सकती। इसके लिए पूरे समाज को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों के साथ गलत व्यवहार करने वाले कई बार कोई अनजान व्यक्ति नहीं होते बल्कि परिचित या आसपास के लोग भी हो सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि परिवार अपने बच्चों के संस्कार और व्यवहार को लेकर गंभीरता से सोचें।
    शिवराज ने कहा कि ऐसा माहौल बनना चाहिए जिसमें बेटियां बिना डर के आगे बढ़ सकें और पुरुषों पर भरोसा कर सकें। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिस नारे का आज जिक्र हो रहा है वह कभी सार्थक और सफल नहीं होना चाहिए। उन्होंने महिलाओं को मां और बेटियों को देवी के समान बताते हुए उनके सम्मान और सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करने की बात कही।
    कार्यक्रम में शिवराज ने ड्राइवरों के बच्चों के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि ड्राइवर केवल वाहन चलाने वाला व्यक्ति नहीं है बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ड्राइवर कई दिनों तक अपने परिवार से दूर रहकर देश के अलग अलग हिस्सों तक सामान पहुंचाते हैं। किसान की उपज को बाजार तक पहुंचाने से लेकर निर्माण सामग्री और जरूरी वस्तुओं की ढुलाई तक उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ड्राइवर देश और लोगों की जिंदगी को चलाने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
    शिवराज ने छात्रवृत्ति योजना के तहत मिलने वाली सहायता की जानकारी देते हुए बताया कि कक्षा आठवीं से दसवीं तक 60 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को सालाना चार हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाएगी। 11वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए यह राशि 4500 रुपए होगी। वहीं 90 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल करने वाले विद्यार्थियों को पांच हजार रुपए दिए जाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि मेहनत से पढ़ाई कर अच्छे अंक हासिल करने वाले बच्चों की आगे भी मदद की जाएगी।
    उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल छात्रवृत्ति देना ही उद्देश्य नहीं है बल्कि उन्हें आगे की पढ़ाई कौशल विकास प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है। शिवराज ने अपने संसदीय क्षेत्र में चल रही मामा कोचिंग क्लास का उल्लेख करते हुए कहा कि बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में निशुल्क सहयोग देने का प्रयास किया जा रहा है। ऑनलाइन शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण के जरिए युवाओं को रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने पर भी काम किया जा रहा है।
    कार्यक्रम के दौरान शिवराज ने भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। उन्होंने क्रिकेट में पाकिस्तान के खिलाफ भारतीय टीम की जीत और एशियन गेम्स में खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के बेटे और बेटियां अलग अलग क्षेत्रों में भारत का गौरव बढ़ा रहे हैं।
    इसके बाद शिवराज सिंह चौहान विदिशा के सांची पहुंचे जहां उन्होंने मधुमेह पर आयोजित वार्षिक सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि मधुमेह तेजी से बढ़ती चुनौती है और इससे निपटने के लिए उपचार के साथ रोकथाम जागरूकता और लगातार शोध पर जोर देना जरूरी है। उन्होंने चिकित्सा विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई। इस तरह एक ही दिन में शिवराज ने बेटियों की सुरक्षा से लेकर शिक्षा रोजगार खेल और स्वास्थ्य जैसे कई अहम मुद्दों पर अपनी बात रखी।

  • ब्राजील ने भारत को 4-0 से हराया, एस्तेवाओ और सैमुअल लीनो के गोल से ऐतिहासिक मुकाबले में दर्ज की बड़ी जीत

    ब्राजील ने भारत को 4-0 से हराया, एस्तेवाओ और सैमुअल लीनो के गोल से ऐतिहासिक मुकाबले में दर्ज की बड़ी जीत

    नई दिल्ली: कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में शनिवार को खेले गए ऐतिहासिक फ्रेंडली मुकाबले में ब्राजील की सीनियर पुरुष राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने भारत को 4-0 से हरा दिया। भारतीय सरजमीं पर ब्राजील का यह पहला सीनियर अंतरराष्ट्रीय मुकाबला था। शुरुआत में भारतीय टीम ने ब्राजील को कुछ समय तक बराबरी की चुनौती दी, लेकिन मुकाबला आगे बढ़ने के साथ ब्राजील ने नियंत्रण हासिल कर लिया। हाफ-टाइम से पहले ही ब्राजील ने दो गोल कर अपनी स्थिति मजबूत कर ली थी। मैच में एस्तेवाओ, पेड्रो और सैमुअल लीनो ने ब्राजील के लिए गोल किए।

    मुकाबले के 28वें मिनट में एस्तेवाओ ने भारतीय रक्षापंक्ति को छकाते हुए नियर-पोस्ट की ओर तेज शॉट लगाया। गेंद भारतीय कप्तान और गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू के हाथ से छूकर नेट में चली गई और ब्राजील को बढ़त मिल गई। इसके बाद 42वें मिनट में एस्तेवाओ ने पेनल्टी एरिया में पेड्रो को पास दिया, जिसे पेड्रो ने गोल में बदलकर ब्राजील की बढ़त 2-0 कर दी। हाफ-टाइम के दौरान ब्राजील के मुख्य कोच कार्लो एंसेलोटी ने पांच बदलाव किए। ब्रूनो गुइमारेस, गैब्रिएल मैगालहेस, वांडरसन, सैमुअल लीनो और डगलस लुइज को मैदान पर उतारा गया।

    दूसरे हाफ में सैमुअल लीनो ने ब्राजील की बढ़त को और मजबूत किया। 58वें मिनट में भारतीय टीम डिफेंस से गेंद आगे बढ़ाने के प्रयास में उसे गंवा बैठी। इसका फायदा उठाकर लीनो बाईं ओर जगह बनाने में सफल रहे और उन्होंने दूर के कोने में नीचा कर्लिंग शॉट लगाकर स्कोर 3-0 कर दिया। इसके कुछ समय बाद भारत के पास गोल करने का मौका आया। रयान विलियम्स ब्राजील के पेनल्टी बॉक्स में पहुंचे, लेकिन उनके प्रयास को रोक दिया गया। इंजरी टाइम के 94वें मिनट में लीनो ने बॉक्स के किनारे से कट-इन करते हुए अपना दूसरा गोल दागा और ब्राजील की 4-0 की जीत पक्की कर दी।

    भारत और ब्राजील की सीनियर पुरुष टीमों के बीच यह इतिहास की पहली अंतरराष्ट्रीय भिड़ंत थी। भारतीय जमीन पर ब्राजील का यह पहला सीनियर मैच भी रहा। ब्राजीलियाई फुटबॉल कन्फेडरेशन के अनुसार, भारत ब्राजील का सामना करने वाली 92वीं अलग राष्ट्रीय टीम बना। रैंकिंग के लिहाज से भी मुकाबला खास रहा। ब्राजील ने पिछले 28 वर्षों में भारत जितनी कम रैंकिंग वाली टीम के खिलाफ मैच नहीं खेला था, जबकि भारत ने 1993 में फीफा रैंकिंग शुरू होने के बाद ब्राजील जितनी ऊंची रैंकिंग वाली टीम का सामना नहीं किया था। कोलकाता पहुंचने से पहले ब्राजील ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 1-1 से ड्रॉ और 4-2 की जीत दर्ज कर चुका था। ब्राजील के कोच के तौर पर कार्लो एंसेलोटी का यह 20वां मैच था।

    मुकाबले के लिए सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए थे। साल्ट लेक स्टेडियम में करीब 2,000 पुलिसकर्मी और 400 से ज्यादा वॉलंटियर्स तैनात किए गए थे। अतिरिक्त केंद्रीय बल भी लगाए गए और स्टेडियम में मौजूद सीसीटीवी के अलावा 100 से अधिक अस्थायी कैमरे लगाए गए। इसके बावजूद करीब 85,000 दर्शकों की क्षमता वाले स्टेडियम का बड़ा हिस्सा खाली नजर आया।

    कम भीड़ के पीछे दुर्गा पूजा से ठीक पहले मैच का आयोजन, टिकटों की ऊंची कीमत और ब्राजील के स्टार खिलाड़ी नेमार की गैरमौजूदगी को प्रमुख कारण माना गया। आयोजन से जुड़ी लागत कम करने के लिए टिकटों की कीमतें ऊंची रखी गई थीं। बाद में स्थानीय क्लबों के प्रशंसकों के लिए छूट दी गई और मैच के दिन एक टिकट पर एक मुफ्त टिकट का ऑफर भी शुरू किया गया, लेकिन इसके बावजूद स्टेडियम पूरी तरह नहीं भर सका।