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  • साकेत कोर्ट में दर्दनाक हादसा: काम के दबाव और मानसिक तनाव से परेशान कर्मचारी ने इमारत से कूदकर की आत्महत्या

    साकेत कोर्ट में दर्दनाक हादसा: काम के दबाव और मानसिक तनाव से परेशान कर्मचारी ने इमारत से कूदकर की आत्महत्या




    नई दिल्ली।
    दिल्ली के साकेत कोर्ट परिसर से एक बेहद दर्दनाक और चिंताजनक घटना सामने आई है, जहां कोर्ट में कार्यरत कर्मचारी हरीश सिंह महार ने इमारत से कूदकर आत्महत्या कर ली। घटना से पूरे कोर्ट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें हरीश ने इस कठोर कदम के पीछे की वजह विस्तार से बताई है।
    डीसीपी साउथ के अनुसार मृतक 60 प्रतिशत दिव्यांग थे और लंबे समय से दफ्तर के काम के अत्यधिक दबाव और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। सुसाइड नोट में हरीश ने लिखा है कि अहलमद पद पर जिम्मेदारी बढ़ने के बाद उन्हें नींद आनी बंद हो गई थी और तनाव लगातार बढ़ता जा रहा था। उन्होंने यह भी बताया कि मानसिक स्थिति के चलते उन्होंने समय से पहले रिटायरमेंट लेने पर विचार किया था, लेकिन नियमों के कारण पेंशन 60 वर्ष की आयु के बाद ही मिलने की बाध्यता थी, जिससे वह और टूट गए।
    मरने से पहले हरीश ने कोर्ट प्रशासन से अपील की कि दिव्यांग कर्मचारियों के लिए नियमों में मानवीय बदलाव किए जाएं, ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी मानसिक पीड़ा न सहनी पड़े। उन्होंने अपनी मौत के लिए किसी भी अधिकारी या सहकर्मी को जिम्मेदार नहीं ठहराया और पूरा दोष खुद पर लिया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और मृतक के परिवार, दोस्तों व सहकर्मियों से पूछताछ की जा रही है। फिलहाल किसी आपराधिक साजिश के संकेत नहीं मिले हैं और इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा है। यह घटना एक बार फिर काम के दबाव और मानसिक तनाव जैसे गंभीर मुद्दों की ओर ध्यान खींचती है, जिन्हें समय रहते समझना और समाधान निकालना बेहद जरूरी है।
  • Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    Jana Nayagan को मिला UA सर्टिफिकेट, मद्रास हाई कोर्ट ने विजय की फिल्म पर सुनाया बड़ा फैसला

    नई दिल्ली। थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जना नायकन’ को लेकर चल रहा सेंसर सर्टिफिकेट विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। मद्रास हाई कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को तुरंत फिल्म को UA सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही फिल्म की रिलीज का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
    फिल्म के निर्माताओं ने CBFC द्वारा सर्टिफिकेशन में हो रही देरी को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिका में कहा गया था कि बिना किसी ठोस वजह के सर्टिफिकेट रोका जा रहा है, जिससे प्रोड्यूसर्स को भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए 6 जनवरी को CBFC द्वारा जारी उस पत्र को भी रद्द कर दिया, जिसमें फिल्म को रिव्यू कमेटी के पास भेजने की बात कही गई थी।
    CBFC चेयरपर्सन पर भी कोर्ट की टिप्पणी
    मद्रास हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि CBFC चेयरपर्सन के पास फिल्म को दोबारा रिव्यू कमेटी के पास भेजने का अधिकार नहीं था। कोर्ट के मुताबिक, फिल्म के खिलाफ की गई शिकायतें बाद में सोची-समझी प्रतीत होती हैं और यदि ऐसी शिकायतों को महत्व दिया गया, तो यह एक खतरनाक परंपरा को जन्म दे सकता है।
    UA सर्टिफिकेट के साथ रिलीज का रास्ता साफ
    कोर्ट के आदेश के बाद ‘जना नायकन’ को बिना किसी और देरी के UA सर्टिफिकेट देने का फैसला लिया गया। UA सर्टिफिकेट का मतलब है कि यह फिल्म बच्चों सहित सभी दर्शकों के लिए उपयुक्त है, हालांकि छोटे बच्चों को अभिभावकों की निगरानी में फिल्म देखने की सलाह दी जाती है।

    सुनवाई में शामिल रहे दिग्गज वकील
    इस मामले में फिल्म प्रोडक्शन हाउस की ओर से सीनियर एडवोकेट सतीश पारासरन और CBFC की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरसन ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने निर्माताओं के हक में फैसला सुनाया।

    गौरतलब है कि थलपति विजय की यह फिल्म 9 जनवरी को रिलीज होने वाली थी, लेकिन सेंसर सर्टिफिकेट न मिलने के कारण रिलीज टल गई थी। अब हाई कोर्ट के फैसले के बाद ‘जना नायकन’ के आसपास बना सारा विवाद खत्म हो चुका है और दर्शक जल्द ही इस फिल्म को बड़े पर्दे पर देख सकेंगे।

  • गणतंत्र दिवस परेड 2026 टिकट , कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए कैसे बुक करें टिकट? जानिए पूरा प्रोसेस

    गणतंत्र दिवस परेड 2026 टिकट , कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड देखने के लिए कैसे बुक करें टिकट? जानिए पूरा प्रोसेस


    नई दिल्ली । गणतंत्र दिवस परेड 2026 भारत के नागरिकों के लिए गर्व का प्रतीक होती है जिसमें भारतीय सेना सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। इस साल गणतंत्र दिवस परेड की मुख्य थीम वंदे मातरम् रखी गई है। 26 जनवरी को मुख्य परेड का आयोजन होगा, जबकि बीटिंग द रिट्रीट समारोह 28 और 29 जनवरी को आयोजित किया जाएगा। यदि आप इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनना चाहते हैं और कर्तव्य पथ पर बैठकर परेड देखना चाहते हैं, तो इसके लिए टिकट बुक करना अनिवार्य है।

    कहां से खरीद सकते हैं 26 जनवरी की परेड के टिकट

    गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए टिकट अब आधिकारिक वेबसाइट aamantran.mod.gov.in से खरीदी जा सकती हैं। यहां से आप 26 जनवरी की मुख्य परेड, 28 जनवरी को होने वाली फुल ड्रेस रिहर्सल, और 29 जनवरी के बीटिंग द रिट्रीट समारोह के टिकट ऑनलाइन बुक कर सकते हैं।

    कब तक खरीद सकते हैं टिकट

    गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए टिकट की बिक्री 5 जनवरी 2026 से शुरू हो चुकी है। टिकट खरीदने की अंतिम तारीख 14 जनवरी 2026 है। ध्यान रखें कि टिकट की बिक्री हर दिन सुबह 9 बजे से शुरू होगी और सीटें समाप्त होने तक जारी रहेगी, इसलिए जल्दी से टिकट बुक करना बेहतर रहेगा।

    टिकट की कीमत क्या है

    26 जनवरी 2026 की गणतंत्र दिवस परेड के टिकट की कीमत ₹20 और ₹100 है, जो सीट की पोज़िशन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। 28 जनवरी 2026 को होने वाली बीटिंग द रिट्रीट फुल ड्रेस रिहर्सल के टिकट की कीमत ₹20 है। 29 जनवरी 2026 को होने वाले बीटिंग द रिट्रीट मुख्य समारोह के टिकट ₹100 में उपलब्ध हैं। घर बैठे गणतंत्र दिवस परेड 2026 के लिए ऑनलाइन टिकट कैसे बुक करें ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करें सबसे पहले aamantran.mod.gov.in पोर्टल पर जाएं।

    पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन करें। रजिस्ट्रेशन के लिए आपको अपना नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, पता और ईमेल आईडी भरना होगा। एक वैध आईडी प्रूफ जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, आदि अपलोड करें। सभी विवरण भरने और सत्यापित करने के बाद बुकिंग पूरी होगी, और आपको एक डिजिटल टिकट प्राप्त होगा।

    ऑफलाइन टिकट काउंटर पर टिकट कैसे खरीदें

    यदि आप ऑनलाइन बुकिंग से बचना चाहते हैं, तो दिल्ली में कई जगहों पर ऑफलाइन टिकट काउंटर भी खोले गए हैं, जहां से आप गणतंत्र दिवस परेड के टिकट खरीद सकते हैं।

    टिकट काउंटर का समय

    सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक, दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक

    टिकट उपलब्ध स्थान

    सेना भवन गेट नंबर 5,शास्त्री भवन गेट नंबर 3,जंतर-मंतर मुख्य द्वार,संसद भवन रिसेप्शन,राजीव चौक मेट्रो स्टेशन डी ब्लॉक कश्मीरी गेट मेट्रो स्टेशन क्या डॉक्यूमेंट्स जरूरी हैं?चाहे आप ऑनलाइन टिकट बुक करें या ऑफलाइन काउंटर से, फोटो पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, पासपोर्ट का होना अनिवार्य है।

    परेड की खासियत

    गणतंत्र दिवस परेड के दौरान दर्शक भारतीय सेना के आधुनिक टैंक, तोपें, और लड़ाकू विमानों का हैरतअंगेज प्रदर्शन देख सकेंगे। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सांस्कृतिक झांकियां भारत की विविधता में एकता को प्रदर्शित करेंगी। बीटिंग द रिट्रीट समारोह में सेना के तीनों अंगों थल जल और नभ के बैंड्स स्कूल के बच्चों और लोक कलाकारों के प्रदर्शन और ऐतिहासिक इमारतों पर शानदार लाइट शो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देगा।

    मुख्य आकर्षण

    आर्मी नेवी और एयर फोर्स बैंड का भव्य प्रदर्शन शास्त्रीय और पारंपरिक संगीत के साथ प्रिसिजन ड्रिल ऐतिहासिक स्थलों पर रोशन होने वाला लाइट शो गणतंत्र दिवस परेड 2026 भारतीय इतिहास का एक अहम हिस्सा होने जा रहा है और इसे देखने का अनुभव देशवासियों के लिए बेहद खास होगा। इस ऐतिहासिक परेड को कर्तव्य पथ पर बैठकर देखने के लिए जल्दी से टिकट बुक करें और इस अद्भुत मौके का हिस्सा बनें

  • कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में फोन से नहीं बना पाएंगे वीडियो, जंगल सफारी के दौरान मोबाइल बैन

    कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में फोन से नहीं बना पाएंगे वीडियो, जंगल सफारी के दौरान मोबाइल बैन

    नई दिल्‍ली ।  उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अब पर्यटक सफारी के दौरान मोबाइल फोन नहीं ले जा पाएंगे. वन्यजीवों की सुरक्षा और मानवीय हस्तक्षेप कम करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह फैसला लिया गया है. पर्यटकों, गाइडों और कर्मचारियों को गेट पर फोन जमा करने होंगे. नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई होगी. इससे जानवरों को होने वाली परेशानी कम होगी.
    उत्तराखंड के नैनीताल में स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (CTR) में हर साल लाखों की संख्या में पर्यटक जाते हैं और जंगल सफारी के जरिए जंगल के अंदर मौजूद हिरण, हाथी, अलग-अलग पक्षियों और बाघ देखने का अनुभव करते हैं. इस दौरान लोग अपने इस जबरदस्त एक्सपीरियंस को अपने मोबाइल के कैमरे में कैद करते हैं और वीडियो बनाते हैं, लेकिन अब पर्यटक सफारी के दौरान मोबाइल अपने साथ नहीं ले जा पाएंगे.
    हालांकि, प्रकृति और वन्यजीवों की फोटोग्राफी करने वाले पर्यटकों को DSLR जैसे प्रोफेशनल कैमरे ले जाने की इजाजत रहेगी, ताकि वह बिना शोर-शराबे के अपने अनुभव को कैमरे में कैद कर सकें. दरअसल, प्रशासन की ओर से ये फैसला सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद लिया गया है, जिसमें वन्यजीवों के प्राकृतिक घर में इंसानों की दखलअंदाजी कम करने के निर्देश दिए गए हैं.
    नई गाइडलाइन की जा रही तैयार
    पार्क के डिप्टी डायरेक्टर राहुल मिश्रा ने बताया कि कोर्ट के आदेशों को जमीन पर उतारने के लिए नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है. इस नई व्यवस्था के चलते जंगल में एंट्री से पहले ही पर्यटकों को अपने मोबाइल फोन गेट पर जमा करने होंगे. यह नियम सिर्फ सैलानियों पर नहीं, बल्कि रजिस्टर्ड टूर गाइड, जिप्सी ड्राइवर, नेचरलिस्ट और यहां तक कि कोर जोन में मौजूद होटल और लॉज के कर्मचारियों पर भी लागू होगा. यानी कोई भी अपना फोन अपने साथ नहीं ले जा पाएगा. इसके साथ ही नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
    जीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी वजह
    इस सख्त फैसले के पीछे वन्यजीवों की सुरक्षा सबसे बड़ी वजह है. वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट और एक्सपीरियंस नेचर राइड्स का कहना है कि मोबाइल फोन जंगल में कई तरह की परेशानियां पैदा कर रहे थे. फोटो और वीडियो लेने की होड़ में लोग जानवरों के बहुत करीब पहुंच जाते थे, जिससे वह घबरा जाते हैं और कई बार आक्रामक भी हो जाते हैं.

    इसके अलावा, मोबाइल नेटवर्क के जरिए जानवरों की लोकेशन एक-दूसरे को बताई जाती थी. नतीजा यह होता था कि एक ही जगह पर कई जिप्सियां जमा हो जाती थीं. वहीं, रील और सेल्फी बनाने की सनक में लोग अपनी जान के साथ-साथ वन्यजीवों की सुरक्षा को भी खतरे में डाल रहे थे. यह नया आदेश कॉर्बेट के सभी प्रमुख क्षेत्रों में लागू होगा. इनमें ढिकाला, बिजरानी, झिरना, गर्जिया, सर्पदुली, गैरल, सुल्तान, सोनानदी, पाखरो और सितावनी जैसे डे-सफारी और नाइट-स्टे वाले इलाके शामिल हैं.

  • PM मोदी ने ट्रंप को नहीं किया फोन, अमेरिकी राष्ट्रपति का अहंकार हुआ आहत, अब नहीं होगी पुरानी डील

    PM मोदी ने ट्रंप को नहीं किया फोन, अमेरिकी राष्ट्रपति का अहंकार हुआ आहत, अब नहीं होगी पुरानी डील


    नई दिल्ली । अमेरिका के वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के अटके होने की एक चौंकाने वाली वजह का खुलासा किया है। उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच यह व्यापार डील किसी नीतिगत मतभेद की वजह से नहीं रुकी बल्कि इसका कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन न करना था। लटनिक ने कहा कि पूरी डील तैयार थी, लेकिन यह सिर्फ एक फोन कॉल की वजह से रुक गई। अब अमेरिका उस पुराने समझौते पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला कर चुका है।

    क्या हुआ था

    लटनिक के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता लगभग तैयार था लेकिन भारत ने तय समय पर ट्रंप को फोन नहीं किया। यह फोन कॉल प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से ट्रंप को किया जाना था, जो अंततः नहीं हुआ । ट्रंप का अहंकार इस बात से आहत हुआ और उन्होंने इस समझौते को आगे बढ़ाने का विचार बदल दिया। लटनिक ने साफ कहा कि अब वह समझौता लागू नहीं होगा और भारत को मिलने वाला लाभ अब नहीं मिलेगा।

    अमेरिका का निर्णय

    लटनिक ने आगे कहा कि अमेरिका ने उस व्यापार समझौते से खुद को पीछे खींच लिया है, जिस पर पहले सहमति बन चुकी थी। अमेरिका ने अब इंडोनेशिया, फिलीपींस, और वियतनाम के साथ डील कर ली है, जबकि भारत से उस समझौते पर उम्मीद थी कि वह पहले होगा। अब ट्रंप प्रशासन मान चुका है कि भारत से डील पहले होती, लेकिन देरी के कारण अमेरिका ने अन्य देशों से समझौते कर लिए।

    भारत को भुगतनी पड़ी कीमत

    लटनिक ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को 50 प्रतिशत तक टैरिफ की भारी-भरकम कीमत चुकानी पड़ी क्योंकि डील नहीं हो पाई। ट्रंप अब भारत के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने की बात भी कह चुके हैं। इससे यह साफ हो जाता है कि यह मामला अब सिर्फ व्यापार का नहीं बल्कि ट्रंप के अहंकार और विदेशी नीति से जुड़ा हुआ है।

    क्या था मामला

    ट्रंप और मोदी के बीच व्यापार समझौते को लेकर कई बार बातचीत हुई थी। दोनों देशों के बीच यह डील कई मामलों में लगभग तय हो चुकी थी लेकिन मोदी सरकार ने उस निर्णायक पल में ट्रंप को फोन नहीं किया। लटनिक ने कहा यह ट्रंप की डील थी, और उसे पूरी तरह से ट्रंप ही अंजाम तक पहुँचाते। बस मोदी को ट्रंप को कॉल करना था। वे इसके लिए असहज थे और कॉल नहीं किया।

    अमेरिकी नीति में बदलाव

    भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अब ठंडे बस्ते में चला गया है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब वह इस पर आगे विचार नहीं करेगा। इसके साथ ही ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वे भारत के खिलाफ अपने टैरिफ बढ़ा सकते हैं और भारत को इस मामले में नुकसान उठाना पड़ेगा।

    भारत की प्रतिक्रिया

    इस मामले पर भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंध हमेशा ही रणनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहे हैं, और यह कदम निश्चित रूप से दोनों देशों के बीच रिश्तों में एक नया मोड़ ला सकता है।

  • दिल्ली में लुटेरी बस का आतंक कम किराये का लालच देकर यात्रियों को बनाते थे शिकार, पुलिस ने 3 बदमाशों को किया गिरफ्तार

    दिल्ली में लुटेरी बस का आतंक कम किराये का लालच देकर यात्रियों को बनाते थे शिकार, पुलिस ने 3 बदमाशों को किया गिरफ्तार


    नई दिल्ली । दिल्ली में एक लुटेरी बस गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो यात्रियों को कम किराये का लालच देकर उन्हें अपनी प्राइवेट बसों में बिठाकर लूटपाट करता था। दिल्ली पुलिस ने इस गिरोह के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पिछले दो महीनों से इस प्रकार की वारदातों को अंजाम दे रहा था।

    गिरफ्तार आरोपी

    पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान योगेश 41 साल, अरशद 46 साल, और प्रेम शंकर उर्फ अजय 28 साल के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि योगेश इस गिरोह का सरगना था और बस ड्राइवर के रूप में काम करता था। जबकि अरशद और प्रेम शंकर कंडक्टर और हेल्पर के तौर पर यात्रियों को लूटने के लिए उनका सहयोग करते थे। पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 1,850 रुपये नकद और लूट में इस्तेमाल की गई बस भी बरामद की है।

    कैसे काम करता था गिरोह

    गिरोह के सदस्य यात्रियों को आनंद विहार रेलवे स्टेशन और आईएसबीटी के पास आकर्षक ऑफर देकर अपनी बस में बिठाते थे। वे सिर्फ 30 रुपये में सेंट्रल या नॉर्थ दिल्ली तक पहुँचाने का वादा करते थे। जैसे ही यात्री बस में बैठते उनका सफर और लूट का खेल शुरू हो जाता था।बस जैसे ही दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर पहुंचती, ये बदमाश यात्रियों को धमकाते, मारते और उनकी जेबें साफ कर देते थे। इसके बाद, यात्रियों को सुनसान जगहों पर उतारकर गिरोह के सदस्य फरार हो जाते थे। पुलिस के मुताबिक ये बदमाश जानबूझकर रात या सुबह जल्दी बस चलाते थे ताकि निगरानी कम हो और वे दिन में दो से तीन बार वारदातों को अंजाम दे सकें।

    कैसे पकड़ा गया गिरोह

    पुलिस को पीड़ितों की कई शिकायतें मिली थीं जिसके बाद डिप्टी कमिश्नर निधिन वल्सन की टीम ने लोकल जानकारी और पेट्रोलिंग के जरिए इस गिरोह को ट्रैक किया। जब ये बस राजघाट के पास रेड लाइट पर रुकी पुलिस ने मौके पर छापा मारा और तीनों आरोपियों को रंगे हाथ पकड़ लिया। उस समय बदमाश यात्रियों को लूट रहे थे। पुलिस ने बस जब्त की और कुछ लूटी हुई रकम भी बरामद की।

    गिरोह की कमाई और पुराना रिकॉर्ड

    पुलिस ने बताया कि ये बदमाश अपनी बस किराए पर लेकर चलाते थे और रोजाना 1,500 रुपये किराया देते थे। इसके अतिरिक्त लूटपाट से उन्हें रोज़ 1,000 से 2,000 रुपये की कमाई होती थी। दो महीने में इस गिरोह की कमाई एक लाख रुपये से ज्यादा हो चुकी थी। पुलिस ने यह भी बताया कि योगेश जो इस गिरोह का सरगना था, का पहले से ही क्रिमिनल रिकॉर्ड था और उसके खिलाफ लूट, मारपीट और हथियारों से संबंधित मामले दर्ज थे।

  • सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी कौन हैं? देवी-देवताओं पर विवादित टिप्पणी के बाद हुईं गिरफ्तार

    सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी कौन हैं? देवी-देवताओं पर विवादित टिप्पणी के बाद हुईं गिरफ्तार

    उत्तराखंड ।  उत्तराखंड के हल्द्वानी में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ज्योति अधिकारी के खिलाफ पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया है. बुधवार को मुखानी थाने में दिनभर चली पूछताछ के बाद देर रात ज्योति अधिकारी को सामाजिक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में हिरासत में लिया गया.

    पुलिस ने उन्हें रात करीब 11 बजे रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया, जहां से अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया.

    धार्मिक भावनाएं आहत करने और आर्म्स एक्ट में हुआ मुकदमा दर्ज
    पुलिस के अनुसार, ज्योति अधिकारी पर आरोप है कि उन्होंने हाल ही में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक बयान दिए थे. बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान उन्होंने हाथ में दरांती लहराई और कुमाऊं व पहाड़ी क्षेत्र की महिलाओं को लेकर अभद्र टिप्पणी की. इसके अलावा उन्होंने कुमाऊं के लोक देवताओं के अस्तित्व और परंपराओं पर भी सवाल खड़े किए, जिसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला माना गया.

    इन बयानों के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों में नाराजगी फैल गई. जिसके बाद शिकायत के आधार पर पुलिस ने ज्योति अधिकारी के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने, सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और आर्म्स एक्ट से जुड़े प्रावधानों में मुकदमा दर्ज किया. इसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए थाने भी बुलाया गया.

    साल 2021 से फेसबुक और यूट्यूब पर बनाती थी वीडियो
    पूछताछ के दौरान थाने के बाहर ज्योति अधिकारी के समर्थक भी जमा हो गए और हंगामा करते रहे, जिसके बाद पुलिस को दिनभर स्थिति संभालनी पड़ी. शाम होते-होते पुलिस ने ज्योति अधिकारी की गिरफ्तारी की पुष्टि की. पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक मंच पर हथियार लहराना और उत्तेजक बयान देना कानून व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है. ज्योति अधिकारी सोशल मीडिया पर एक चर्चित चेहरा रही हैं. उन्होंने साल 2021 में फेसबुक और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रूप से वीडियो बनाना शुरू किया था.

    वह मुख्य रूप से डांस वीडियो अपलोड करती थीं, लेकिन समय-समय पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी टिप्पणी करती नजर आती थीं. बीते कुछ समय से अंकिता भंडारी मामले को लेकर बनाए गए उनके एक वीडियो खास विवादों में रहा. पुलिस सूत्रों का कहना है कि ज्योति अधिकारी पहले भी अपने विवादित बयानों के कारण चर्चा में रह चुकी हैं. इस बार सार्वजनिक सभा में दरांती लहराना और समुदाय विशेष, महिलाओं तथा धार्मिक मान्यताओं पर की गई टिप्पणी उनके लिए भारी पड़ गई. पुलिस ने साफ किया है कि मामले की जांच जारी है और कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी.

  • OTT पर रिलीज हुई 'दे दे प्यार दे 2' जानिए कहां देख सकते हैं आप

    OTT पर रिलीज हुई 'दे दे प्यार दे 2' जानिए कहां देख सकते हैं आप


    नई दिल्ली । अजय देवगन की फिल्म ‘दे दे प्यार दे 2’ अब नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है। 14 नवंबर 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई इस रोमांटिक कॉमेडी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक परफॉर्मेंस दी थी। फिल्म में एज गैप रोमांस और फैमिली ड्रामा के दिलचस्प मिश्रण को दिखाया गया है। अब यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के लिए उपलब्ध हो चुकी है,जिससे आप इसे अपने घर बैठे आराम से देख सकते हैं।

    फिल्म के थिएट्रिकल वर्जन में शुरुआती क्रेडिट्स में यह साफ तौर पर बताया गया था कि नेटफ्लिक्स इसके स्ट्रीमिंग पार्टनर के रूप में जुड़ा है। इसी के साथ, नेटफ्लिक्स ने इस फिल्म के पोस्टर को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया और कैप्शन में लिखा मुझे परिवार से मिलना है क्योंकि अब है लड़कीवालों की बारी! 9 जनवरी को नेटफ्लिक्स पर ‘दे दे प्यार दे 2’ देखें।

    फिल्म की कहानी

    दे दे प्यार दे 2 में अजय देवगन ने आशीष का किरदार निभाया है, जो अब अपनी गर्लफ्रेंड आयशा रकुल प्रीत सिंह के माता-पिता, राज्जी आर माधवन और अंजू गौतमी कपूर से शादी के लिए मंजूरी चाहता है। उम्र के भारी अंतर को लेकर राज्जी और अंजू हैरान होते हैं और उन्हें अलग करने की साजिश रचते हैं। वे अपने फैमिली फ्रेंड के बेटे आदित्य मीज़ान जाफरी को आयशा को बहकाने के लिए भेजते हैं और जब दोनों के बीच प्यार पनपता है तो आशीष और आयशा के रिश्ते में दरार आ जाती है। फिल्म की सबसे बड़ी पहेली यह है कि आयशा किससे शादी करेगी आशीष से या आदित्य से?

    फिल्म में अन्य कलाकार

    जावेद जाफरी,इशिता दत्ता,तरुण गहलोत यदि आप इस फिल्म को देखना चाहते हैं तो आप इसे अब नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं। फिल्म का हल्का-फुल्का रोमांस और परिवार के मुद्दे दर्शकों को आनंदित करेंगे खासकर अगर आप रोमांटिक कॉमेडी के शौक़ीन हैं।

  • निपटने की तैयारी में भारत, इजराइल से मिसाइल डिफेंस डील

    निपटने की तैयारी में भारत, इजराइल से मिसाइल डिफेंस डील


    नई दिल्‍ली। भारत का डिफेंस सेक्‍टर अभी भी मुख्‍य रूप से विदेशी खरीद पर निर्भर है. पिछले कुछ सालों में इसमें काफी बदलाव आया है. ‘आत्‍मनिर्भर भारत’ के सूत्र के साथ देश आगे बढ़ रहा है. यही वजह है कि अब भारत भी एक महत्‍वपूर्ण हथियार विक्रेता देश बनता जा रहा है. आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं.
    भारत के पश्चिमी बॉर्डर पर पाकिस्‍तान तो पूर्वी सीमा पर चीन स्थित है. इन दोनों देशों का रुख भारत के प्रति शत्रुतापूर्ण रहा है. अतीत में हुए युद्ध इसकी गवाही देते हैं. ऐसे में भारत के लिए एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध जैसी स्थिति से निपटने की तैयारी करना अनिवार्य है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोस्‍त और दुश्‍मन की पहचान और भी स्‍पष्‍ट हो चुकी है. बदले सामरिक माहौल को देखते हुए भारत अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत और अपडेट करना शुरू कर दिया है.
    आर्मी, एयरफोर्स और नेवी को महाबली बनाने की प्रक्रिया लगातार जारी है. नेवी में अब हर 6 सप्‍ताह के बाद एक युद्धपोत को शामिल करने की प्‍लानिंग है तो वहीं आर्मी ड्रोन फ्लीट बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है. एयरफोर्स के लिए भी हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं. फाइटर जेट से लेकर एयर टू एयर और एयर टू सर्फेस मिसाइल को बेड़े में शामिल किया जा रहा है. प्रिसीजन गाइडेड बम की खरीद भी चल रही है. इसके अलावा एयर डिफेंस सिस्‍टम प्रोजेक्‍ट के तहत देश को किसी भी तरह के एरियल थ्रेट से सुरक्षित करने पर लगातार काम चल रहा है. इन सबके बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है. भारत मित्र देश इजरायल से कटिंग एज वेपन, मिसाइल और बम खरीदने के लिए बड़ी डील करने की तैयारी में है. इनमें से कुछ मिसाइल की रेंज 300 से 400 किलोमीटर तक है. मतलब घर बैठे बटन दबाते ही लाहौर में तबाही लाई जा सकती है. लाहौर भारतीय सीमा के करीब स्थित बड़ा शहर है.

    जानकारी के अनुसार, भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग एक नए और अहम दौर में प्रवेश कर रहा है. ‘एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय वायुसेना (IAF) को और अधिक ताकतवर बनाने के लिए भारत इजरायल से लगभग 8.7 अरब डॉलर (₹78217 करोड़) की डिफेंस डील करने की तैयारी में है. इस पैकेज में अत्याधुनिक SPICE-1000 प्रिसिजन गाइडेड बम, रैम्पेज मिसाइल, एयर लोरा (Air LORA) और आइस ब्रेकर (Ice Breaker) जैसी आधुनिक मिसाइलें शामिल हैं. इस प्रस्ताव को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विज़िशन काउंसिल (DAC) से मंजूरी मिल चुकी है. यह सौदा ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत को अपनी सीमाओं पर कई तरह की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. एक ओर वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीन की उन्नत एयर डिफेंस तैनाती है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की ओर से GPS जैमिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल देखा गया है, खासकर मई 2025 में हुए ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के दौरान.

    ऐसे में भारत की यह खरीद उसकी रणनीतिक जरूरतों को दर्शाती है. आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच इजरायल के कुल रक्षा निर्यात का 34 प्रतिशत भारत को गया, जिससे भारत इजरायल का सबसे बड़ा रक्षा खरीदार बन गया है. इस नए पैकेज में सिर्फ मिसाइलें ही नहीं, बल्कि एयर-टू-एयर मिसाइलें, लोइटरिंग म्यूनिशन, आधुनिक रडार, सिमुलेटर और नेटवर्क आधारित कमांड सिस्टम भी शामिल हैं.
    रैम्पेज मिसाइल: भरोसेमंद वेपन
    रैम्पेज मिसाइल, जिसे इज़राइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने विकसित किया है, पहले से ही भारतीय वायुसेना और नौसेना के पास मौजूद है. यह मिसाइल Su-30MKI, MiG-29, Jaguar और MiG-29K जैसे विमानों से दागी जा सकती है. करीब 570 किलो वजनी यह मिसाइल GPS/INS गाइडेंस से लैस है और इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी है. रैम्पेज का इस्तेमाल दुश्मन के एयरबेस, बंकर, कंट्रोल टावर और लॉजिस्टिक ठिकानों पर दूर से हमला करने के लिए किया जा सकता है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर इसकी प्रभावशीलता देखी गई थी.
  • स्पेस स्टेशन में खराब हुई एस्ट्रोनॉट की तबीयत, जानिए NASA ने क्‍या लिया फैसला

    स्पेस स्टेशन में खराब हुई एस्ट्रोनॉट की तबीयत, जानिए NASA ने क्‍या लिया फैसला

    न्यूयॉर्क। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने एक दुर्लभ फैसला लेते हुए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी कि ISS पर चल रहे एक मिशन को जल्दी खत्म करने का ऐलान किया है। NASA ने कहा कि एक अंतरिक्ष यात्री की स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण यह फैसला लेना पड़ा है। स्पेस एजेंसी ने गुरुवार को बताया कि अमेरिका-जापान-रूस के 4 अंतरिक्ष यात्रियों की टीम अब तय किए गए प्लान से पहले ही अगले कुछ दिनों में पृथ्वी पर लौट आएगी। इस स्वास्थ्य समस्या की वजह से NASA ने नए साल की पहली स्पेसवॉक को भी रद्द कर दिया।

    NASA के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ने क्या कहा?
    NASA ने मरीज की निजता का हवाला देते हुए प्रभावित अंतरिक्ष यात्री का नाम या बीमारी का विवरण नहीं बताया। हालांकि, NASA ने साफ किया कि अंतरिक्ष यात्री अब स्थिर स्थिति में है। एजेंसी के मुख्य स्वास्थ्य और चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेम्स पोल्क ने कहा कि यह कोई आपात स्थिति नहीं है, लेकिन हम अंतरिक्ष यात्री की सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रहे हैं।

    उन्होंने बताया कि अंतरिक्ष स्टेशन से यह NASA का यह पहला मेडिकल एग्जिट होगा, हालांकि पहले दांत दर्द या कान के दर्द जैसी छोटी समस्याओं का इलाज स्टेशन पर ही किया गया है।
    कम से कम 6 महीने रहने की योजना थी

    पृथ्वी पर लौट रही 4 सदस्यीय टीम SpaceX के यान से अगस्त में अंतरिक्ष स्टेशन पहुंची थी और उसकी वहां कम से कम 6 महीने रहने की योजना थी। टीम में NASA के जीना कार्डमैन और माइक फिंके, जापान के किमिया युई तथा रूस के ओलेग प्लातोनोव शामिल हैं। फिंके और कार्डमैन को स्पेसवॉक करके अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक्स्ट्रा बिजली प्रदान करने वाले नए सोलर पैनल की तैयारी करनी थी।

    यह फिंके का अंतरिक्ष स्टेशन का चौथा दौरा जबकि युई का दूसरा दौरा था। कार्डमैन और प्लातोनोव पहली बार अंतरिक्ष यात्रा पर गए हैं।
    स्पेस स्टेशन पर 3 अन्य अंतरिक्ष यात्री भी मौजूद

    बता दें कि इस समय अंतरिक्ष स्टेशन पर 3 अन्य अंतरिक्ष यात्री भी हैं। इनमें NASA के क्रिस विलियम्स तथा रूस के सर्गेई मिकाएव और सर्गेई कुद-सेवर्चकोव शामिल हैं। ये नवंबर में सोयुज रॉकेट से 8 महीने के लिए स्पेस स्टेशन पर रहने के लिए आए थे। अब ये तीनों अंतरिक्ष यात्री गर्मियों में लौटेंगे। NASA ने SpaceX को अंतरिक्ष स्टेशन को 2030 के अंत या 2031 की शुरुआत में समुद्र के ऊपर सुरक्षित तरीके से कक्षा से बाहर करने की जिम्मेदारी सौंपी है।