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  • मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह

    मां ने लगाया मौत को गले पास बैठी बिलखती रही 2 साल की मासूम मंजर देख कांप उठी रूह


    कानपुर । उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। शहर के रावतपुर थाना क्षेत्र के आनंद नगर इलाके में एक महिला ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। यह घटना उस वक्त और भी दर्दनाक हो गई जब मृतका की दो साल की मासूम बेटी अपनी मां को फंदे पर लटका देख वहीं बैठकर बिलखती रही। जिस मां की गोद में वह सुकून पाती थी उसी मां को बेजान हालत में देख बच्ची की चीखें पूरे घर में गूंजती रहीं।

    शोर सुनकर जब कमरे में पहुंचे परिजन जानकारी के मुताबिक आनंद नगर निवासी प्रॉपर्टी डीलर राकेश तिवारी की पत्नी संध्या तिवारी 38 ने बुधवार देर शाम अज्ञात कारणों के चलते कमरे में पंखे के कुंडे से दुपट्टे के सहारे फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के वक्त घर के अन्य सदस्य अपने कामों में व्यस्त थे। काफी देर तक जब संध्या कमरे से बाहर नहीं निकली और अंदर से छोटी बेटी नायरा के रोने की लगातार आवाजें आने लगीं तो परिवार को अनहोनी की आशंका हुई। संध्या की 14 वर्षीय बड़ी बेटी भूमि जैसे ही कमरे के भीतर पहुंची वहां का खौफनाक मंजर देख उसकी चीख निकल गई। उसकी आंखों के सामने उसकी मां का शव फंदे से लटक रहा था और पास ही उसकी दो साल की छोटी बहन नायरा अपनी मां के शव के पास बैठी रो रही थी।

    पुलिस जांच और परिजनों का हाल भूमि की चीख पुकार सुनकर घर के अन्य सदस्य और आस-पड़ोस के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए। आनन-फानन में पुलिस को सूचना दी गई जिसके बाद रावतपुर थाना पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने शव को फंदे से नीचे उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घर में मचे इस कोहराम से हर किसी की आंखें नम हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं कि संध्या ने आखिर इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।

    अनसुलझे सवाल और मासूम की सिसकियां इस घटना ने कई सवाल भी पीछे छोड़ दिए हैं। पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है कि आखिर सुसाइड के पीछे की मुख्य वजह क्या थी? क्या यह घरेलू कलह का मामला है या फिर कोई और मानसिक तनाव। हालांकि सबसे ज्यादा विचलित करने वाली बात वह दृश्य था जिसमें एक दो साल की मासूम को यह भी समझ नहीं आ रहा था कि उसकी मां उसे हमेशा के लिए छोड़कर जा चुकी है। वह बस अपनी मां को उठने की उम्मीद में निहारती रही। फिलहाल पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सही कारणों और समय की पुष्टि हो सके। इस घटना ने पूरे आनंद नगर इलाके में मातम पसरा दिया है।

  • अभी भी दूषित पानी पीने को मजबूर शहरवासी, जबलपुर की 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालों में डूबी

    अभी भी दूषित पानी पीने को मजबूर शहरवासी, जबलपुर की 80 प्रतिशत पाइपलाइन नालों में डूबी


    जबलपुर। प्रदेश के पहले नगर निगम होने का गौरव रखने वाला जबलपुर नगर निगम आज भी अपने नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में विफल साबित हो रहा है। नर्मदा तट पर बसा यह शहर जो कभी अपनी स्वच्छता और सुंदरता के लिए जाना जाता था आज अपने नागरिकों को दूषित और बदबूदार पानी पीने के लिए मजबूर है।

    वर्षों से नगर निगम द्वारा शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं लेकिन शहर की करीब 80 प्रतिशत पाइपलाइनें नालों में डूबी हैं जिससे पानी में गंदगी और अशुद्धता बढ़ रही है। नर्मदा का पानी भले ही शहर तक पहुंचता है लेकिन पाइपलाइन की खराब स्थिति के कारण वह पानी जैसे ही घरों तक पहुंचता है वह दूषित हो जाता है।

    वर्ष 1950 में जबलपुर नगर निगम की स्थापना के बाद नगर निगम ने कई बार पेयजल व्यवस्था में सुधार के दावे किए। लेकिन अब तक किसी भी सरकार या प्रशासक द्वारा यह समस्या पूरी तरह से हल नहीं हो पाई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक  और अमृत योजना जैसी  परियोजनाओं के तहत नगर निगम को करोड़ों रुपये मिले लेकिन शहर के पानी की गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं हुआ है।शहर की बढ़ती आबादी के साथ पानी की खपत भी बढ़ी है लेकिन पाइपलाइन की पुरानी और जर्जर अवस्था के कारण पानी में कई तरह की गंदगी समाहित हो जाती है। साथ ही नालों और सीवेज सिस्टम के पास से गुजरने वाली पाइपलाइनें शहरवासियों के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन चुकी हैं।

    नागरिकों का कहना है कि उन्हें कभी-कभी पानी की गंध और रंग देखकर यह डर लगता है कि क्या उनका स्वास्थ्य इससे प्रभावित होगा। शुद्ध पेयजल की समस्या न केवल शहरवासियों के जीवन में परेशानी का कारण बन रही है बल्कि इससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं।
    शहरवासी लगातार नगर निगम से शुद्ध पानी की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार और प्रशासन की तरफ से इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। अब यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इस समस्या का समाधान कर पाएगी ताकि जबलपुर के नागरिकों को शुद्ध और सुरक्षित पेयजल मिल सके।

  • नकल करते पकड़े गए तो रद्द होगा पूरा रिजल्ट, बोर्ड परीक्षा को लेकर मंडल के कड़े निर्देश

    नकल करते पकड़े गए तो रद्द होगा पूरा रिजल्ट, बोर्ड परीक्षा को लेकर मंडल के कड़े निर्देश


    जबलपुर । मध्य प्रदेश बोर्ड की आगामी बोर्ड परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल ने नकल के मामलों को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने परीक्षा के दौरान नकल करने और परीक्षा केंद्र पर अनुशासनहीनता दिखाने वाले परीक्षार्थियों के लिए सख्त सजा का प्रावधान किया है।

    मंडल के आदेशों के अनुसार यदि कोई परीक्षार्थी परीक्षा के दौरान नकल करते हुए पकड़ा जाता है या फिर शिक्षक केंद्राध्यक्ष या अन्य परीक्षा ड्यूटी में लगे कर्मचारियों से बदतमीजी या उद्दंड व्यवहार करता है तो उसका संपूर्ण परीक्षाफल रद्द कर दिया जाएगा। इस आदेश से नकल करने और कराने वालों में हड़कंप मच गया है क्योंकि परीक्षा में इस तरह की सख्त कार्रवाई से उनके भविष्य पर गंभीर असर हो सकता है।

    परीक्षा के दौरान नकल के मामलों में कड़ी कार्रवाई का यह निर्णय बोर्ड द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों में स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है। मंडल ने सभी प्राचार्यों मूल्यांकन अधिकारियों और परीक्षा केंद्राध्यक्षों को बताया है कि आगामी 2026 की बोर्ड परीक्षा में नकल मामलों के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी परीक्षार्थी से एक विषय में नकल सामग्री बरामद होती है वह चिट निगलता है उत्तर पुस्तिका बदलता है या फाड़ देता है या उत्तर पुस्तिका लेकर भाग जाता है और उस विषय में नकल प्रमाणित होती है तो उस विषय की परीक्षा रद्द कर दी जाएगी और परीक्षाफल में ‘कैंसिल’ दर्ज किया जाएगा।

    इस नए निर्देश से शिक्षा मंडल का उद्देश्य नकल पर पूरी तरह से काबू पाना और परीक्षाओं को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। बोर्ड ने सभी परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखने और नकल के प्रयासों को रोकने के लिए अतिरिक्त उपायों को लागू करने की बात कही है। इसके अलावा यदि किसी परीक्षार्थी के खिलाफ नकल करने के मामले में कार्रवाई की जाती है तो उसे भविष्य में भी बोर्ड की परीक्षाओं से संबंधित गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। मंडल ने सभी छात्रों से अपील की है कि वे नकल से बचें और अपनी मेहनत से परीक्षा में सफलता प्राप्त करें ताकि उनकी मेहनत और ईमानदारी से कड़ी मेहनत को सही तरीके से सम्मान मिल सके।

  • इंदौर में दूषित पानी से मौतों का खुलासा: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना

    इंदौर में दूषित पानी से मौतों का खुलासा: कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर साधा निशाना


    नई दिल्ली। इंदौर में दूषित पेयजल के कारण कम से कम 18 लोगों की मौत हुई है। कांग्रेस मीडिया एंड कम्युनिकेशन प्रमुख पवन खेड़ा ने इस घटना को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है और कहा कि यह केवल स्थानीय प्रशासन की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री और मेयर तक की जवाबदेही है।
    “हर घर जल” की बजाय “हर घर मल” योजना
    खेड़ा ने बताया कि इंदौर को स्वच्छ भारत अभियान में कई बार “नंबर-वन शहर” का दर्जा मिला, लेकिन आज वही शहर गंदे पानी और दूषित स्वास्थ्य सेवाओं की वजह से मौतों का सामना कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि “हर घर जल योजना” के लिए मंजूर पाइपलाइन का काम जुलाई 2022 में शुरू होना था, लेकिन केवल ठेके की फाइनलाइजेशन का इंतजार किया गया।लोगों की जान दांव पर लगाई गई, जबकि अधिकारियों और सरकार ने काम रोक रखा था।
    प्रशासन और राजनीतिक जिम्मेदारी पर सवाल
    खेड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव गाने गा रहे हैं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पत्रकारों से बदसलूकी कर रहे हैं, और मेयर अलग ही बयान दे रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी अराजकता का खामियाजा छोटे बच्चे और आम लोग भुगत रहे हैं।

    स्वास्थ्य संकट और राष्ट्रीय पैमाना
    पानी, हवा और दवाइयों में मिलावट एक व्यापक समस्या बन गई है।
    गुजरात के गांधीनगर और दिल्ली में भी टाइफाइड और दूषित पानी के मामले सामने आए हैं।
    लगभग 70% पानी देश में दूषित हो चुका है।

    हैजा की पुष्टि और नोटिफिकेशन का सवाल
    खेड़ा ने सीधे सवाल किया, क्या पानी और प्रभावित नागरिकों के स्टूल सैंपल की कल्चर जांच हुई?
    अगर हैजा का बैक्टीरिया मिला, तो क्या इसे आईडीएसपी के तहत नोटिफाई किया गया?
    क्या इस मामले की जानकारी केंद्र सरकार, स्वास्थ्य मंत्रालय और WHO को दी गई?

    वित्तीय अनियमितताएं
    वर्ष 2003 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) से 200 मिलियन डॉलर का लोन भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर के लिए आया।सवाल उठाया गया कि यह पैसा कहाँ गया और क्या योजनाओं को पूरा करने में इसका सही इस्तेमाल हुआ।
    खेड़ा ने कहा, 18 मौतें किसी हादसे का नतीजा नहीं हैं, यह शासन की विफलता और भ्रष्टाचार का परिणाम हैं। जनता जानना चाहती है कि क्या कोई जिम्मेदारी लेगा या यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा।
  • बड़वानी में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 98 नकली नोट व प्रिंटर जब्त

    बड़वानी में नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 98 नकली नोट व प्रिंटर जब्त


    बड़वानी । जिले में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नकली नोट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस गिरोह के पास से 98 नकली 500 रुपये के नोट और प्रिंटर बरामद किए गए हैं। पुलिस ने इस गिरोह के दो मुख्य आरोपियों, भागीराम और गोविंद को गिरफ्तार किया है।यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक जगदीश डावर के मार्गदर्शन में की गई। पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अपराधियों के खिलाफ निरंतर अभियान के तहत थाना प्रभारी पलसूद सुखलाल भंवर ने मुखबिर तंत्र से मिली सूचना पर कार्रवाई की।
    पलसूद पुलिस ने मटली की ओर से आ रही एक सफेद स्कॉर्पियो वाहन को घेराबंदी कर रोका और उसमें सवार दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।गिरफ्तारी के बाद विधिवत तलाशी में भागीराम कनोजे की पेंट से 48 नकली 500 रुपये के नोट बरामद हुए, जबकि गोविंद बांडोड से 50 नकली नोट मिले। इन नोटों की विशेषता यह थी कि ये बिल्कुल असली 500 रुपये के नोटों की नकल करके बनाए गए थे।
    पूछताछ में भागीराम ने खुलासा किया कि उसका सिलावद में एक कियोस्क सेंटर है, जहां वह एक रंगीन प्रिंटर और स्कैनर के माध्यम से असली नोटों की फोटो कॉपी कर नकली नोटों का निर्माण करता था। भागीराम और गोविंद के निशानदेही पर पुलिस ने सिलावद स्थित कियोस्क सेंटर पर भी छापा मारा, जहां असली 500 रुपये के नोटों की फोटो कॉपी करने का काम चल रहा था।

    पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिले में अवैध गतिविधियों और अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने इस गिरोह के पकड़ने को एक बड़ी सफलता करार देते हुए कहा कि नकली नोटों के प्रचलन को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।नकली नोटों के इस गोरखधंधे में गिरफ्तार दोनों आरोपियों से आगे की पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं, जिससे नकली नोटों के नेटवर्क को और भी उजागर किया जा सकेगा।

  • मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान

    मौनी अमावस्या 2026 18 जनवरी को चमकेगी इन 3 राशियों की किस्मत महादेव होंगे मेहरबान


    नई दिल्ली । सनातन धर्म में माघ मास की अमावस्या जिसे मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है का आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यधिक महत्व है। यह दिन विशेष रूप से तप ध्यान और आत्म-चिंतन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस वर्ष मौनी अमावस्या 18 जनवरी रविवार को मनाई जाएगी। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन ग्रहों की स्थिति कुछ राशियों के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगी। खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए यह दिन एक वरदान साबित हो सकता है क्योंकि इस दिन भगवान शिव की विशेष कृपा उन पर बरसने वाली है।

    कर्क राशि

    कर्क राशि के जातकों के लिए मौनी अमावस्या का दिन बेहद शुभ और लाभकारी रहेगा। भगवान शिव की कृपा से आपके रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होंगे और जो कार्य पहले कठिन लग रहे थे वे अब सुगमता से पूरे होंगे। इस दिन के दौरान खासकर बिजनेस और वित्तीय मामलों में सकारात्मक बदलाव आएगा।

    लाभ

    व्यापार में लाभ के प्रबल योग हैं। निवेश के लिए यह समय उत्तम रहेगा और आपको अच्छा रिटर्न मिल सकता है।जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी सफलता और समृद्धि की संभावनाएं बन रही हैं।

    उपाय

    मानसिक शांति और मनोकामना पूर्ति के लिए गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। यह उपाय आपके जीवन में शांति और समृद्धि लाएगा।

    मकर राशि

    मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं और इनके आराध्य भगवान शिव हैं। मौनी अमावस्या पर यह दिन मकर राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से शुभ होगा। इस दिन आपको बड़ी उपलब्धियों की प्राप्ति हो सकती है जिनकी आप लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे थे। इसके अलावा पार्टनर का सहयोग और समर्थन भी प्राप्त होगा जिससे आपके व्यक्तिगत और व्यावसायिक कार्यों में गति आएगी।

    लाभ

    लंबे समय से अटके हुए काम अब गति पकड़ेंगे। मानसिक तनाव में कमी आएगी जिससे जीवन में शांति और संतुलन स्थापित होगा। पार्टनर और सहयोगियों से पूरी मदद मिलेगी।

    उपाय

    इस दिन काले तिल का दान करना आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। इससे भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होगा और कार्यों में सफलता मिलेगी।

    कुंभ राशि

    कुंभ राशि के जातकों के लिए भी यह मौनी अमावस्या बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। ग्रहों की स्थिति कुंभ राशि के लिए शुभ संकेत दे रही है। इस दिन महादेव की विशेष कृपा से आपके जीवन में आने वाली चुनौतियों से मुक्ति मिल सकती है और जो भी कष्ट चल रहे थे वे दूर हो सकते हैं। आप मानसिक शांति और संतुलन महसूस करेंगे जो आपके व्यक्तिगत जीवन में सुधार लाएगा।

    लाभ

    किसी भी पुराने या लंबित कार्य में सफलता मिलने की संभावना है। इस दिन आपको मानसिक शांति प्राप्त होगी और घर-परिवार में सुख-शांति का माहौल बनेगा कोई नई शुरुआत करने के लिए यह समय अत्यंत अनुकूल रहेगा।

    उपाय

    इस दिन शिवलिंग पर जल अर्पित करने और धूप-दीप से पूजा करने से विशेष लाभ मिलेगा। इससे आपके कार्यों में आ रही अड़चनें दूर होंगी और आपकी जिंदगी में सुख-समृद्धि आएगी। 18 जनवरी 2026 को होने वाली मौनी अमावस्या आपके जीवन में नए बदलाव ला सकती है खासकर कर्क मकर और कुंभ राशियों के जातकों के लिए। इस दिन भगवान शिव की कृपा से आपकी मेहनत का फल मिलेगा रुके हुए कार्य पूरे होंगे और जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा। इन तिथियों पर शिव पूजा और दान का महत्व अधिक बढ़ जाता है और ये उपाय आपके जीवन में शांति समृद्धि और सफलता लाने में सहायक होंगे।

  • मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग

    मोक्ष के द्वार खोलेंगी ये 5 डुबकियां नोट करें साल 2026 में गंगा स्नान के महायोग


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में पवित्र नदियों में स्नान करना न केवल शरीर के शुद्धिकरण का तरीका है बल्कि यह आत्मा के उद्धार का मार्ग भी माना जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि विशेष तिथियों पर इन नदियों के जल में अमृत’ तत्व का संचार होता है और उस समय स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है। साल 2026 में भी कुछ ऐसे खास अवसर आ रहे हैं जब गंगा यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से अधिक पुण्य प्राप्त होता है। आइए जानते हैं उन पांच प्रमुख तिथियों के बारे में जब गंगा स्नान से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो सकते हैं और मोक्ष के द्वार खुल सकते हैं।

    मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026

    साल का पहला बड़ा स्नान सूर्य के उत्तरायण होने पर होता है। इस दिन विशेष रूप से प्रयागराज और हरिद्वार में गंगा स्नान का महत्व है। मान्यता है कि मकर संक्रांति पर तिल का दान और गंगा स्नान करने से अक्षय पुण्य मिलता है और व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं। इस दिन विशेष रूप से गंगा में स्नान करके दान-पुण्य करने से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

    मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026

    माघ महीने की यह अमावस्या वर्ष की सबसे बड़ी अमावस्या मानी जाती है। इस दिन खासकर मौन रहकर जप और गंगा स्नान करने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस तिथि को पितृ दोष से मुक्ति और आत्म-चिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह दिन आपके जीवन की समस्याओं को हल करने और आत्मा के शुद्धिकरण के लिए बेहद शुभ है।

    माघी पूर्णिमा 1 फरवरी 2026

    माघी पूर्णिमा पर गंगा में स्नान करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन स्नान करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा प्राप्त होती है और माघ स्नान के संकल्प से भक्त अपने व्रत का समापन करते हैं। यह समय स्वर्ग लोक की प्राप्ति के लिए अनुकूल होता है। माघी पूर्णिमा के दिन किए गए दान और पुण्य का फल लंबी अवधि तक मिलता है।
    गंगा दशहरा 25 मई 2026 गंगा दशहरा वह पर्व है जब मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण की कथा सुनाई जाती है। इस दिन विशेष रूप से गंगा स्नान करने से व्यक्ति के दस प्रकार के पाप कायिक वाचिक और मानसिक का नाश होता है।

    गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से न केवल शारीरिक शुद्धता मिलती है बल्कि यह पवित्रता भी प्रदान करता है जिससे जीवन में एक नवीनीकरण और आंतरिक शांति का अहसास होता है।कार्तिक पूर्णिमा 24 नवंबर 2026 कार्तिक पूर्णिमा को ‘देव दीपावली’ और ‘त्रिपुरी पूर्णिमा’ भी कहा जाता है। इस दिन पवित्र गंगा में स्नान और दीपदान करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की कृपा से घर में लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। साथ ही इस दिन का स्नान व्यक्ति के पापों को नष्ट करता है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    दान का महत्व

    इन विशेष तिथियों पर गंगा स्नान के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार अनाज वस्त्र तिल या अन्य सामग्री का दान जरूर करें। शास्त्रों के अनुसार बिना दान के स्नान का पुण्य फल स्थिर नहीं माना जाता है। दान से स्नान के पुण्य में वृद्धि होती है और यह आपके जीवन में समृद्धि और शांति का कारण बनता है।इन प्रमुख तिथियों पर गंगा स्नान के साथ-साथ दान-पुण्य करने से न केवल आत्मा का शुद्धिकरण होता है बल्कि जीवन की सारी बाधाएं दूर होती हैं। इन अवसरों का सही लाभ उठाकर आप अपने जीवन को पुण्य और मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर कर सकते हैं।

  • जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर

    जिम जाने से डर लगता है? इन 5 टिप्स के साथ शुरू करें अपना वेट लॉस सफर


    नई दिल्ली । वजन कम करने की प्रक्रिया अक्सर कठिन और उबाऊ लगती है। कई बार हम सोचते हैं कि हमें जिम में घंटों पसीना बहाना होगा और अपनी पसंदीदा चीज़ों को छोड़ना पड़ेगा। लेकिन असल में वजन घटाने की सफलता का सबसे बड़ा राज आपकी मानसिक सोच और मोटिवेशन में छिपा है। सही आदतें और सकारात्मक नजरिया ही इस सफर को आसान और मजेदार बना सकते हैं।अगर आप भी वजन घटाने के सफर की शुरुआत करना चाहते हैं तो इन 5 टिप्स को अपनाकर आप इसे सिर्फ प्रभावी नहीं बल्कि मजेदार भी बना सकते हैं।

    छोटे टारगेट से शुरुआत करें

    अगर आपने एक साथ 10 किलो वजन घटाने का सोच लिया तो यह आपको जल्दी ही हतोत्साहित कर सकता है। इसके बजाय छोटे और साप्ताहिक लक्ष्य तय करें जैसे कि हर हफ्ते 500 ग्राम वजन घटाना। शुरुआत में केवल 15-20 मिनट की एक्सरसाइज से शुरू करें। छोटे टारगेट पूरे होने पर मिलने वाली संतुष्टि आपको आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी।

    फिजिकल एक्टिविटी को मजेदार बनाएं

    कभी-कभी वर्कआउट को बोझ जैसा महसूस करना स्वाभाविक है लेकिन इसे मजेदार बनाने की कोशिश करें। अपने पसंदीदा गानों की प्लेलिस्ट सुनते हुए वर्कआउट करें। म्यूजिक न केवल आपको ऊर्जा देगा बल्कि यह आपके मूड को भी बेहतर बनाएगा। इससे वर्कआउट की समय सीमा का पता भी नहीं चलेगा और आप आसानी से लंबे समय तक एक्टिव रहेंगे।

    वर्कआउट पार्टनर ढूंढें

    अकेले जिम जाने की सोच ही आलस को जन्म देती है। ऐसे में एक वर्कआउट पार्टनर का होना बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। किसी दोस्त या परिवार के सदस्य को अपने साथ वर्कआउट करने के लिए प्रेरित करें। इससे न केवल आपको प्रेरणा मिलेगी बल्कि आप एक-दूसरे को उत्साहित और प्रोत्साहित भी करेंगे। इसके अलावा वर्कआउट पार्टनर के साथ करने से यह और भी मजेदार हो सकता है।

    आहार में बदलाव करें पर प्रतिबंध नहीं

    वजन घटाने के सफर में आहार को भी बदलना महत्वपूर्ण है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आपको अपनी पसंदीदा चीजें छोड़नी पड़ें। अगर आप बहुत सख्त आहार योजना का पालन करेंगे तो जल्दी ही वह आपके लिए बोरिंग और मुश्किल हो जाएगा। इसके बजाय छोटे-छोटे बदलाव करें जैसे कि अधिक प्रोटीन और फाइबर का सेवन शक्कर और जंक फूड की मात्रा कम करना।

    अपने छोटे-छोटे प्रगति को सेलिब्रेट करें

    वजन घटाने का सफर लंबा हो सकता है और इसके दौरान किसी छोटे बदलाव को नजरअंदाज करना आसान होता है। लेकिन छोटी-छोटी प्रगति को सेलिब्रेट करना आपके मोटिवेशन को बढ़ा सकता है। जैसे ही आप कोई छोटा लक्ष्य हासिल करें अपने आप को सराहें या खुद को कोई छोटा इनाम दें। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे। वजन घटाने का सफर मानसिक दृष्टिकोण से कहीं अधिक जुड़ा हुआ है। अगर आप इसे एक सकारात्मक और मजेदार अनुभव के रूप में देखेंगे तो यह सफर बेहद सफल और प्रेरणादायक बन सकता है। शुरुआत में छोटी शुरुआत करें इसे मजेदार बनाएं और साथ ही अपने आहार और आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करें। जब आप इसे एक आदत के रूप में अपनाएंगे तो यह आसानी से आपका जीवन का हिस्सा बन जाएगा।

  • मटर छिलने की 'मैजिक ट्रिक': 5 मिनट में 2 किलो मटर छीलें बिना थके और बिना दर्द के

    मटर छिलने की 'मैजिक ट्रिक': 5 मिनट में 2 किलो मटर छीलें बिना थके और बिना दर्द के


    नई दिल्ली ।सर्दियों के मौसम में ताजी हरी मटर की बहार आना किसी खुशखबरी से कम नहीं होता। चाहे मटर का निमोना हो गरमागरम मटर पनीर या मटर पराठे सर्दियों का स्वाद इनसे ही पूरा होता है। लेकिन मटर छीलना खासकर जब ज्यादा मात्रा में हो एक थकाऊ काम बन जाता है। नाखूनों से छिलके निकालते वक्त उंगलियों में दर्द और मटर की फलियों से एक-एक दाना निकालने में लगने वाला समय अक्सर हमें इस काम से बचने का कारण बन जाता है।
    लेकिन अब सोशल मीडिया पर एक ऐसी स्मार्ट ट्रिक’ वायरल हो रही है जिससे आप मात्र 5 से 10 मिनट में 2 किलो तक मटर आसानी से छील सकते हैं। जी हां यह तरीका न सिर्फ आपके समय की बचत करेगा बल्कि मटर छीलने का वह थका देने वाला काम भी अब बिना दर्द और आलस्य के खत्म हो जाएगा।

    मटर छीलने में क्यों आती है नानी याद

    मटर के छिलके काफी सख्त होते हैं और नाखूनों से इन्हें छीलते वक्त उंगलियों में दर्द हो सकता है। खासकर जब घर में मेहमान हों या बड़े आयोजन की तैयारी हो तो मटर छीलने का काम एक पहाड़ जैसा लगता है। लेकिन अब यह नई मैजिक ट्रिक’ इस समस्या का हल लेकर आई है।

    क्या है वह मैजिक ट्रिक स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

    यह तरीका बहुत आसान है और इसके लिए आपको केवल गर्म पानी का सही इस्तेमाल करना है। आइए जानते हैं कैसे गर्म पानी तैयार करें सबसे पहले एक बड़े भगौने में पर्याप्त पानी गर्म करें। ध्यान रखें कि पानी उबालने तक न जाए बस उसे अच्छे से गर्म करें। मटर डालें जब पानी अच्छे से गर्म हो जाए तो गैस बंद कर दें और इसमें साबुत मटर की फलियों को डालें। दो से तीन मिनट के लिए ढकें बर्तन को ढक्कन से ढक कर 2 से 3 मिनट के लिए छोड़ दें।

    गर्म पानी और भाप के संपर्क में आने से मटर के छिलके मुलायम हो जाएंगे। ठंडे पानी में डालें अब मटर को गर्म पानी से निकाल कर तुरंत ठंडे पानी में डालें। इससे मटर के दाने का हरा रंग बरकरार रहेगा और मटर ज्यादा पकेंगे नहीं।मटर छीलना अब जैसे ही आप मटर की फली को हल्का सा दबाएंगे सारे दाने एक झटके में बाहर आ जाएंगे। इस ट्रिक से न केवल आपको नाखूनों में दर्द नहीं होगा बल्कि आपका समय भी बच जाएगा।

    फायदे

    मटर छीलने में लगने वाला समय अब मात्र 5-10 मिनट में खत्म हो जाएगा।इस ट्रिक से मटर के दाने पूरी तरह से intact रहते हैं और उनका हरा रंग भी बरकरार रहता है।मटर छीलने का काम अब बिना दर्द और आलस्य के आसानी से किया जा सकता है। आप मटर छीलने के बाद उन्हें सुखाकर जिप-लॉक बैग में स्टोर भी कर सकते हैं जिससे भविष्य में जल्दी कुकिंग हो सके। मटर छीलना अब पहले से कहीं आसान और तेज़ हो गया है। तो अगली बार जब आपको मटर छीलने का मन हो इस स्मार्ट ट्रिक को अपनाकर आप इस थकाऊ काम को मिनटों में कर सकते हैं। अब से मटर की हर रेसिपी को बनाना और उसका स्वाद लेना और भी मजेदार होगा!

  • सर्दियों में 'फौलादी ताकत' देने वाले मूंग दाल के लड्डू: कमजोरी दूर करें, स्वाद भी बढ़ाएं

    सर्दियों में 'फौलादी ताकत' देने वाले मूंग दाल के लड्डू: कमजोरी दूर करें, स्वाद भी बढ़ाएं


    नई दिल्ली । सर्दी का मौसम आते ही शरीर को अतिरिक्त ऊर्जा और गर्माहट की जरूरत महसूस होती है। ऐसे में बाजार की मिलावटी मिठाइयों की जगह यदि घर पर बने स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन खाएं जाएं तो यह न केवल स्वाद में चार चांद लगाते हैं बल्कि शरीर के लिए भी फायदेमंद साबित होते हैं। मूंग दाल के लड्डू ऐसे ही एक बेहतरीन विकल्प हैं जो सर्दियों में शरीर को ‘फौलादी ताकत’ देने में मदद करते हैं। मूंग दाल न केवल प्रोटीन का उत्कृष्ट स्रोत है बल्कि यह इम्यूनिटी बूस्टर भी है जो शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है।
    मूंग दाल के लड्डू का स्वाद और पोषण दोनों का संयोजन होता है और यह खासकर सर्दियों के मौसम के लिए उपयुक्त है। जब इसे देसी घी और सूखे मेवों के साथ तैयार किया जाता है तो इसका न्यूट्रिशनल वैल्यू कई गुना बढ़ जाता है। इस व्यंजन में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन होता है जो मांसपेशियों को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ शरीर को ऊर्जा भी प्रदान करता है।

    मूंग दाल के लड्डू बनाने की विधि

    मूंग दाल के लड्डू के विभिन्न तरीके होते हैं लेकिन भिगोई हुई धुली मूंग दाल से बने लड्डू काफी दानेदार और स्वादिष्ट होते हैं। इस व्यंजन को बनाने की विधि निम्नलिखित है

    आवश्यक सामग्री

    200 ग्राम धुली मूंग दाल,1.5 कप बूरा या कच्ची खांड मिठास के लिए ,1 कप शुद्ध देसी घी फैट के लिए ,50-60 ग्राम बादाम,1/4 कप काजू,पिस्ता सजावट के लिए ,8-10 हरी इलायची

    बनाने की विधि

    सबसे पहले मूंग दाल को अच्छी तरह से धोकर 3-4 घंटे के लिए भिगोने के लिए रख दें।दाल का पानी अच्छे से छानकर उसे मिक्सी में दरदरा पीस लें। बादाम का भी पाउडर बना लें और काजू को छोटे टुकड़ों में काट लें।अब एक कढ़ाई में शुद्ध देसी घी गरम करें और उसमें भिगोई हुई मूंग दाल को डालकर अच्छे से भूनें।जब दाल हल्की सुनहरी हो जाए तब उसमें बूरा या खांड डालकर अच्छे से मिला लें।फिर काजू और बादाम के पाउडर को डालकर सभी सामग्री को एकसाथ भूनते रहें।अंत में हरी इलायची का पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।जब मिश्रण थोड़ा ठंडा हो जाए तो लड्डू बना लें और पिस्ता से सजाकर सर्व करें।

    इन लड्डू को बनाना बेहद आसान है और यह सर्दियों में शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करते हैं। मूंग दाल के लड्डू न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए फायदेमंद हैं। हालांकि मिठास के कारण इन्हें सीमित मात्रा में खाना चाहिए ताकि कैलोरी का अधिक सेवन न हो।

    फायदे और विशेषताएं
    मूंग दाल के लड्डू में प्रोटीन फाइबर और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं। यह इम्यूनिटी को बूस्ट करने में मदद करते हैं और शरीर को सर्दियों में आवश्यक गर्मी और ऊर्जा प्रदान करते हैं। साथ ही यह शरीर की कमजोरी को दूर करने में भी सहायक होते हैं। सर्दी के मौसम में इस प्रकार के पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक व्यंजन न केवल शरीर को ताकत देते हैं बल्कि इनका स्वाद भी अविस्मरणीय होता है। इसलिए अगली बार जब आपको मीठे खाने का मन हो तो बाजार की मिठाइयों के बजाय घर पर बने मूंग दाल के लड्डू जरूर ट्राई करें।