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  • विदिशा के आदिवासी छात्रावास निरीक्षण में कलेक्टर का गुस्सा विवाद का कारणदेर रात जताया खेद

    विदिशा के आदिवासी छात्रावास निरीक्षण में कलेक्टर का गुस्सा विवाद का कारणदेर रात जताया खेद


    विदिशा । विदिशा जिले के गंजबासौदा तहसील स्थित उदयपुर आदिवासी छात्रावास में बुधवार को हुए औचक निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक मर्यादा और व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कलेक्टर अंशुल गुप्ता द्वारा छात्रावास अधीक्षक से अभद्र भाषा में बातचीत का वीडियो सामने आने के बाद मामला सुर्खियों में है। छात्रावास में कक्षा पहली से पांचवीं तक के छात्र अनुपस्थित पाए गएजिससे कलेक्टर का गुस्सा भड़क गया।

    घटना के अनुसारकलेक्टर अंशुल गुप्ता छात्रावास का निरीक्षण करने पहुंचे और जब बच्चों की अनुपस्थिति पर कारण पूछा तो अधीक्षक चैन सिंह चिढ़ार ने बताया कि दो दिन की छुट्टी घोषित की गई थी। इस पर कलेक्टर ने कहा कि छुट्टी स्कूलों के लिए थीछात्रावास के लिए नहीं। अधीक्षक ने जवाब में बताया कि आवासीय विद्यालयों में स्कूल और छात्रावास के अवकाश नियम समान हैं। इसी बहस के दौरान कलेक्टर ने मर्यादा लांघते हुए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया।

    मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि फटकार के बाद अधीक्षक असहज होकर अन्य कर्मचारियों के पीछे खड़े हो गए। इस पूरी वार्ता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक व्यवहार और मर्यादा पर चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने कलेक्टर के गुस्से को अनुचित बताया और कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की मांग उठाई।

    विवाद बढ़ने के बाद देर रात कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि निरीक्षण के दौरान वे भावनात्मक रूप से आहत थे और उसी स्थिति में उनके शब्दों की मर्यादा नहीं रह सकी। उन्होंने अपने बयान पर खेद व्यक्त करते हुए स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य व्यवस्था में सुधार करना थान कि किसी कर्मचारी को अपमानित करना।

    प्रशासनिक हलकों में इस घटना को लेकर बहस जारी है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण के दौरान सख्ती आवश्यक हैलेकिन भाषा और मर्यादा बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। वहीं सामाजिक और कर्मचारी संगठनों ने आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

    फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में किसी विभागीय जांच या कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन यह घटना प्रशासनिक मर्यादाअधिकारियों के व्यवहार और आदिवासी छात्रावासों में कर्मचारियों के अधिकारों पर सवाल खड़ा करती है। उच्च अधिकारियों की निगाह अब इस मामले पर टिक गई है और जनता तथा मीडिया में इस विवाद की गूंज जारी है।

  • नर्मदा में सीवेज से पेयजल पर संकट: दिग्विजय सिंह की चेतावनी से मचा हड़कंपजबलपुर में जनता भयभीत

    नर्मदा में सीवेज से पेयजल पर संकट: दिग्विजय सिंह की चेतावनी से मचा हड़कंपजबलपुर में जनता भयभीत


    जबलपुर । जबलपुर में नर्मदा नदी में सीवेज मिलने और उससे जुड़े पेयजल संकट को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस गंभीर मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गएतो शहर एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की ओर बढ़ सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस स्थिति पर चिंता जताते हुए सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवकेंद्रीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और जबलपुर के महापौर जगत बहादुर सिंह से हस्तक्षेप की मांग की है।

    दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा कि ग्वारीघाट क्षेत्र में बने सीवेज टैंक से बिना पूरी तरह फिल्टर किया गया गंदा पानी सीधे नर्मदा नदी में छोड़ा जा रहा है। यही नर्मदा नदी लगभग 500 मीटर दूर स्थित ललपुर पेयजल सप्लाई प्लांट के माध्यम से जबलपुर शहर को पानी उपलब्ध कराती है। ऐसे में सीवेज मिश्रित पानी के जरिए हजारों लोगों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने इस पूरे तंत्र को लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत बताई।

    इस बीचगंदे पानी की सप्लाई का मामला न्यायिक दहलीज तक भी पहुंच चुका है। जबलपुर निवासी अधिवक्ता ओपी यादव ने इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में कलेक्टरनगर निगम आयुक्तमहापौर और प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि वर्ष 2019 से शहर के कई इलाकों में लगातार गंदे और बदबूदार पानी की आपूर्ति की जा रही है। बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

    याचिका में हाईलेवल कमेटी गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जबलपुर की जनता को सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है और स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

    यह मामला इसलिए भी ज्यादा संवेदनशील हो गया है क्योंकि हाल ही में इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 18 लोगों की मौत हो चुकी हैजबकि कई अन्य लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इस घटना के बाद प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की सहायता और प्रभावितों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है। ऐसे में जबलपुर में भी इसी तरह की स्थिति बनने की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि नर्मदा जैसी पवित्र और जीवनदायिनी नदी में सीवेज मिलने की घटनाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक शहर का मुद्दा नहींबल्कि पर्यावरणजल सुरक्षा और जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।

  • सारा अर्जुन बनीं IMDB की सबसे लोकप्रिय भारतीय हस्तीप्रभास और विजय को छोड़ा पीछे

    सारा अर्जुन बनीं IMDB की सबसे लोकप्रिय भारतीय हस्तीप्रभास और विजय को छोड़ा पीछे


    नई दिल्ली । सारा अर्जुन के लिए यह एक शानदार हफ्ता साबित हुआ है! भारतीय अभिनेत्री सारा अर्जुन ने IMDB की साप्ताहिक लोकप्रिय भारतीय हस्तियों की सूची में पहले स्थान पर अपनी जगह बना ली है। पिछली बार वह दूसरे स्थान पर थींलेकिन इस बारधुरंधर फिल्म के सफल प्रदर्शन ने उन्हें टॉप पर पहुंचा दिया है। इस सूची में सारा ने प्रभासथलापति विजय जैसे बड़े सितारों को पीछे छोड़ दिया हैजो इस सफलता की खास बात है।

    धुरंधर फिल्म को रिलीज हुए एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका हैलेकिन इसका प्रभाव अब भी जारी है। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैऔर इसके मुख्य कलाकारों को इसका फायदा मिला है। खासकर सारा अर्जुन को। फिल्म में सारा ने यालिना जमाली का किरदार निभाया थाजो दर्शकों को बहुत पसंद आया।

    IMDB ने अपने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए इस सफलता का जिक्र किया। उन्होंने लिखा“इस सप्ताह की लोकप्रिय भारतीय हस्तियों की सूची में अपने पसंदीदा सितारों को पहचानें। यह सूची‘पॉपुलर इंडियन सेलेब्रिटीज’ द्वारा प्रस्तुत की गई हैजो IMDB का एक साप्ताहिक फीचर है और इसमें विश्व स्तर पर ट्रेंड कर रहे भारतीय सितारों को दिखाया जाता है। अभिनेतानिर्देशकसिनेमैटोग्राफरलेखक और अन्य को शामिल किया जाता है। हमेशा की तरहयह सूची दुनिया भर के 2 करोड़ से अधिक फैंस द्वारा तय की जाती है।

    सारा अर्जुन का यह प्रदर्शन उनकी कड़ी मेहनत और फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ते हुए प्रभाव को दर्शाता है। वह अब एक प्रमुख सितारे के रूप में स्थापित हो गई हैंऔर आने वाले समय में वह कई और शानदार परियोजनाओं का हिस्सा बन सकती हैं। उनकी यह सफलता निश्चित रूप से उनके करियर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद करेगी।

  • अक्षय कुमार की भूत बांग्ला 15 मई 2026 को होगी रिलीजप्रियदर्शन के साथ 14 साल बाद वापसी

    अक्षय कुमार की भूत बांग्ला 15 मई 2026 को होगी रिलीजप्रियदर्शन के साथ 14 साल बाद वापसी


    नई दिल्ली । अक्षय कुमार की आगामी फिल्मभूत बंगला की रिलीज डेट का खुलासा कर दिया गया है। प्रियदर्शन के निर्देशन में बन रही इस हॉरर-कॉमेडी फिल्म में अक्षय कुमार14 साल बाद प्रियदर्शन के साथ काम कर रहे हैं। फिल्म की रिलीज डेट 15 मई 2026 तय की गई है। बालाजी मोशन पिक्चर्स ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट के माध्यम से यह जानकारी दीजिसमें उन्होंने फिल्म के पोस्टर के साथ कैप्शन लिखा“बंगले से एक खबर आई है! 15 मई 2026 को खुलेगा दरवाजासिनेमाघरों में मिलते हैं।” यह फिल्म दर्शकों के बीच पहले ही काफी चर्चा में आ चुकी है और इसकी रिलीज को लेकर फैंस का उत्साह काफी बढ़ चुका है।

    फिल्म की स्टारकास्ट

    भूत बंगला में अक्षय कुमार के अलावा कई अन्य दिग्गज कलाकार भी नजर आएंगे। फिल्म में तब्बूपरेश रावलराजपाल यादवजिशु सेनगुप्ताअसरानी और वामिका गब्बी जैसे स्टार्स प्रमुख भूमिका में हैं। इस फिल्म के कुछ हिस्सों की शूटिंग राजस्थानजयपुर और हैदराबाद में भी की गई हैजो फिल्म की स्पेशल फील को और बढ़ाएंगे।

    प्रियदर्शन के निर्देशन में

    प्रियदर्शनजो कि अक्षय कुमार के साथ पहलेहेरा फेरी औरहंगामा जैसी शानदार कॉमेडी फिल्में बना चुके हैंइस बार हॉरर और कॉमेडी का शानदार मिश्रण लेकर आ रहे हैं।भूत बंगला उनके लिए एक अहम फिल्म साबित हो सकती हैक्योंकि यह जोड़ी एक लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर नजर आएगी। फिल्म का निर्माण शोभा कपूरएकता आर कपूर और अक्षय कुमार के प्रोडक्शन हाउसकेप ऑफ़ गुड फ़िल्म्स के द्वारा किया जा रहा हैजबकि फारा शेख और वेदांत बाली इस फिल्म को को-प्रोड्यूस कर रहे हैं।

    क्या उम्मीदें हैं फिल्म से

    इस फिल्म से दर्शकों को कुछ अलग और मजेदार देखने को मिल सकता हैक्योंकि प्रियदर्शन की फिल्में हमेशा कुछ नया और दिलचस्प लेकर आती हैं। अक्षय कुमार की टाइमिंगतब्बू का अभिनय और बाकी कलाकारों का कॉमेडी टच इस फिल्म को एक बड़ा हिट बना सकते हैं। वहींहॉरर एलिमेंट भी फिल्म को आकर्षक बना सकता है। अबयह देखना होगा कि 15 मई 2026 को सिनेमाघरों मेंभूत बंगला कितना धमाल मचाती है और प्रियदर्शन-अक्षय की जोड़ी दर्शकों को कितना हंसा और डराती है!

  • Tilak Varma Injury Update अचानक अस्पताल में भर्ती, 3-4 हफ्ते लग सकते हैं वापसी में, टी20 वर्ल्ड कप 2026 पर असर

    Tilak Varma Injury Update अचानक अस्पताल में भर्ती, 3-4 हफ्ते लग सकते हैं वापसी में, टी20 वर्ल्ड कप 2026 पर असर


    नई दिल्ली । भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज तिलक वर्मा हाल ही में एक स्वास्थ्य संकट का शिकार हो गए हैंजिसके चलते उनका नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है। उनकी चोट इतनी गंभीर थी कि उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा और सर्जरी करनी पड़ी। तिलक वर्मा इस समय विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में खेल रहे थेजहां वह हैदराबाद के कप्तान थे।

    क्या हुआ था तिलक को

    घटना 8 जनवरी को उस समय घटी जब तिलक वर्मा की टीम जम्मू-कश्मीर के खिलाफ मैच खेलने के लिए राजकोट पहुंची थी। सुबह नाश्ते के बाद उन्हें पेट में तेज दर्द उठाजिसके बाद उन्हें तुरंत राजकोट के गोकुल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में किए गए स्कैन से यह साफ हुआ कि तिलक वर्मा को टेस्टिकुलर टॉर्शन हो गया थाजो एक गंभीर स्थिति है। इस समस्या में अंडकोष अपनी नसों के इर्द-गिर्द मुड़ जाता हैजिससे रक्त प्रवाह रुक जाता है और तेज दर्द व सूजन होती है। यदि इसे समय पर इलाज न मिलेतो यह काफी खतरनाक हो सकता है।

    इस स्थिति को देखकर डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी की सलाह दी और सर्जरी सफल रही। बीसीसीआई की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया हैलेकिन सौराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष जयदेव शाह ने पुष्टि की है कि तिलक की सर्जरी सफल रही है और उनकी हालत स्थिर है। रिपोर्ट्स के अनुसारतिलक वर्मा को आज 8 जनवरी को अस्पताल से छुट्टी मिल सकती हैहालांकि उनकी पूरी रिकवरी में 3 से 4 हफ्ते का वक्त लगेगा।

    टी20 वर्ल्ड कप 2026 पर असर

    इस चोट के कारण तिलक वर्मा न सिर्फ विजय हजारे ट्रॉफी के आखिरी मैच को मिस कर चुके हैंबल्कि न्यूजीलैंड के खिलाफ 5 मैचों की टी20I सीरीज में भी उनका खेलना मुश्किल हो गया है। इससे टीम इंडिया की टेंशन बढ़ गई हैखासकर आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर। अगर तिलक की रिकवरी में ज्यादा समय लगता हैतो टीम इंडिया को उनके रिप्लेसमेंट पर विचार करना पड़ सकता है।

    तिलक वर्मा की खासियत
    तिलक वर्मा को भारतीय क्रिकेट में एक तेजआक्रामक और भरोसेमंद बल्लेबाज के रूप में जाना जाता है। वह आईपीएल 2022 से मुंबई इंडियंस के लिए शानदार प्रदर्शन कर रहे हैंऔर इसके बाद टीम इंडिया में भी अपनी जगह बना चुके हैं। उनके बल्ले से तेजी से रन बनाना और मुश्किल परिस्थितियों में मैच फिनिश करने की काबिलियत ने उन्हें एक प्रमुख खिलाड़ी बना दिया है। पिछले सालएशिया कप 2025 के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ 53 गेंदों पर नाबाद 69 रन बनाकर उन्होंने यह साबित किया कि वह दबाव में भी शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं। उनके आंकड़े भी शानदार रहे हैं टी20 क्रिकेट में अब तक 40 मैचों में 1183 रन बनाकर वह भारतीय टीम के मिडिल ऑर्डर का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।

    आगे क्या होगा
    अब यह देखना दिलचस्प होगा कि तिलक वर्मा की रिकवरी में कितना समय लगता हैऔर क्या टीम इंडिया न्यूजीलैंड सीरीज के लिए उनका रिप्लेसमेंट तलाशेगी। तिलक वर्मा की गैरमौजूदगी निश्चित रूप से टीम इंडिया के लिए एक बड़ा झटका हैलेकिन उम्मीद है कि वह जल्द ही फिट होकर टीम में वापसी करेंगे और टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम के लिए अपनी सेवाएं देंगे।

  • हार्दिक पांड्या का तूफानी प्रदर्शन, विजय हजारे ट्रॉफी में 208 रन ठोक मचाई तबाही

    हार्दिक पांड्या का तूफानी प्रदर्शन, विजय हजारे ट्रॉफी में 208 रन ठोक मचाई तबाही


    नई दिल्ली । भारत के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या इन दिनों विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में बल्ले से गदर मचाते हुए नजर आ रहे हैं। उनका तूफानी फॉर्म एकदम जबरदस्त है, और उन्होंने दो मैचों में कुल 208 रन बनाकर सभी को हैरान कर दिया है। इन दोनों मैचों में हार्दिक ने गेंदबाजों पर पूरी तरह से हावी होते हुए छक्कों और चौकों की बरसात की, जिससे साफ जाहिर हो गया कि वह आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भी उसी आक्रामक अंदाज में खेलेंगे।

    3 जनवरी को उन्होंने विदर्भ के खिलाफ जो किया वह किसी की भी कल्पना से परे था। महज 68 गेंदों पर शतक जड़ते हुए हार्दिक ने 11 छक्के और 8 चौके लगाए। उनका स्ट्राइक रेट 144.56 था जो उनकी बल्लेबाजी की आक्रामकता को साबित करता है। इस पारी के दौरान उन्होंने विदर्भ के गेंदबाजों पर हावी होते हुए टीम को 200 रन के आंकड़े तक पहुंचाने में अहम भूमिका अदा की।

    इसके बाद 8 जनवरी को जब वह चंडीगढ़ के खिलाफ मैदान में उतरे, तो उन्होंने फिर से अपनी धाक जमाई। इस बार उन्होंने 19 गेंदों में 50 रन बनाकर खेल में तेजी लाई। हार्दिक ने 31 गेंदों पर 9 छक्के और 2 चौके लगाए, और कुल मिलाकर 75 रन की विस्फोटक पारी खेली। हालांकि वह इस बार शतक पूरा नहीं कर पाए, लेकिन उनके द्वारा लगाए गए छक्कों और चौकों ने दर्शकों को पूरी तरह से मंत्रमुग्ध कर दिया।

    हार्दिक पांड्या ने विजय हजारे ट्रॉफी 2025-26 में अपने इन दो मैचों में कुल 208 रन बनाए हैं। उनका औसत 104 और स्ट्राइक रेट 169.10 का रहा है। इन दो मैचों में उन्होंने कुल 20 छक्के और 10 चौके लगाए हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि हार्दिक इस समय अपने खेल के शिखर पर हैं और आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में उनका लक्ष्य गेंदबाजों पर दहशत बनाना है। उनका यह शानदार फॉर्म एक तरह से संकेत दे रहा है कि वह इस बार पूरी तरह से आक्रामक बल्लेबाजी के साथ मैदान पर उतरने वाले हैं। हार्दिक का ये तूफानी प्रदर्शन न सिर्फ उनके लिए बल्कि भारतीय क्रिकेट के लिए भी शानदार संकेत है। आगामी वर्ल्ड कप के लिए उनका आत्मविश्वास और बल्लेबाजी का यह रूप निश्चित ही भारत के लिए फायदेमंद साबित होगा।

  • वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर

    वंदे मातरम् के 150 वर्ष: देशभर में भारतीय सेना के विशेष बैंड कार्यक्रम, देशभक्ति की धुनों से गूंजेंगे शहर



    नई दिल्ली
    । राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ को ऐतिहासिक और यादगार बनाने के लिए भारतीय सेना ने देशभर में विशेष बैंड परफॉर्मेंस आयोजित करने की व्यापक योजना बनाई है। यह आयोजन केवल एक सांगीतिक प्रस्तुति नहीं होगा बल्कि राष्ट्र की एकता सांस्कृतिक विरासत और देशभक्ति की भावना को सशक्त करने का प्रयास भी होगा। सेना के ये विशेष कार्यक्रम 19 से 26 जनवरी 2026 तक देश के प्रमुख शहरों में आयोजित किए जाएंगे।भारतीय सेना के अनुसार प्रत्येक बैंड परफॉर्मेंस लगभग 45 मिनट की होगी और इन्हें दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में मिलिट्री बैंड और आर्मी सिम्फनी बैंड द्वारा वंदे मातरम् सहित कई देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी। संगीत के माध्यम से आम जनता को राष्ट्र के इतिहास बलिदान और एकता की भावना से जोड़ना इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य है।

    इन विशेष प्रस्तुतियों के लिए देश के लगभग हर क्षेत्र को शामिल किया गया है। बिहार में पटना और गया उत्तर प्रदेश में लखनऊ और प्रयागराज उत्तराखंड में देहरादून छत्तीसगढ़ में रायपुर ओडिशा में गोपालपुर और कर्नाटक में बेंगलुरु में सेना के बैंड कार्यक्रम होंगे। मध्य प्रदेश में जबलपुर महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे तेलंगाना में हैदराबाद हिमाचल प्रदेश में शिमला राजस्थान में जयपुर और लद्दाख के कारगिल जैसे सामरिक और ऐतिहासिक महत्व वाले स्थानों को भी इस आयोजन में शामिल किया गया है।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट पर 18 जनवरी 2026 को आर्मी सिम्फनी बैंड की विशेष प्रस्तुति होगी जिसे इस श्रृंखला का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। वहीं पश्चिम बंगाल के नैहाटी में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जो वंदे मातरम् के रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जन्मस्थली है। इस आयोजन को सांस्कृतिक और भावनात्मक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारतीय सेना का कहना है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य नई पीढ़ी को राष्ट्रीय गीतों और स्वतंत्रता संग्राम के सांस्कृतिक पक्ष से जोड़ना है। सेना के अधिकारियों के अनुसार संगीत एक ऐसा माध्यम है जो बिना शब्दों के भी देशप्रेम और एकता का संदेश देता है। यही कारण है कि इन प्रस्तुतियों को सार्वजनिक और निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक लोग इसमें भाग ले सकें।विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि ऐसे आयोजन युवाओं में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करते हैं और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं। सेना के इन कार्यक्रमों में विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक संस्थानों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है जिससे यह आयोजन केवल सैन्य नहीं बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय उत्सव का रूप ले सके।

  • घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका

    घर में गंगाजल रखते समय न करें ये गलतियां जानें सही तरीका


    नई दिल्ली । गंगाजल को हिंदू धर्म में अत्यधिक पवित्र और शुद्ध माना जाता है। इसे देवी गंगा का स्वरूप माना जाता है, और यह घर में शुद्धता और आशीर्वाद लाने के लिए रखा जाता है। मगर गंगाजल को सही विधि से रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि अगर इसे गलत तरीके से रखा जाए तो इसके आध्यात्मिक प्रभाव में कमी आ सकती है। आइए जानते हैं कि घर में गंगाजल रखने का सही तरीका क्या है और कौन सी गलतियां नहीं करनी चाहिए।

    सही पात्र का चयन करें

    गंगाजल को हमेशा तांबे, पीतल, चांदी या कांच के बर्तन में ही रखें। ये सामग्री पवित्रता को बनाए रखने में मदद करती हैं। प्लास्टिक और लोहे के बर्तनों में गंगाजल रखना अशुद्ध माना जाता है। साथ ही, बर्तन को हमेशा साफ और गंगाजल के लिए ही इस्तेमाल करें, ताकि उसमें कोई और अशुद्धता न घुले।

    गंगाजल रखने की सही जगह

    गंगाजल को घर के मंदिर या पूजा स्थल में ही रखना चाहिए। इसे कभी भी जमीन पर नहीं रखें। गंगाजल रखने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान पूजा का स्थान है, जहां नियमित रूप से श्रद्धा भाव से पूजा होती हो। बाथरूम, रसोई या शयनकक्ष में गंगाजल रखना गलत माना जाता है, क्योंकि इन स्थानों को पवित्र नहीं माना जाता।

    ढककर रखें

    गंगाजल के पात्र को हमेशा ढककर रखें ताकि उसमें धूल या कोई भी अशुद्धता न जाए। ढक्कन साफ होना चाहिए और उसे नियमित रूप से धोकर रखना चाहिए। गंगाजल का शुद्धता बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे बिना ढके रखने से बचें।

    गंगाजल का उपयोग केवल पवित्र कार्यों के लिए करें

    गंगाजल का इस्तेमाल केवल पूजा, हवन, व्रत, संस्कार और शुद्धिकरण के लिए ही करना चाहिए। इसे किसी आम कार्य के लिए इस्तेमाल करना अनुचित होता है। साथ ही अशुद्ध अवस्था में या बिना स्नान किए गंगाजल को छूने से बचें। यह गंगाजल की पवित्रता को प्रभावित कर सकता है।

    बचा हुआ गंगाजल कैसे निपटान करें

    गंगाजल का नाली में बहाना कभी भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह गंगाजल की पवित्रता के खिलाफ है। यदि गंगाजल बच जाए तो इसे पौधों की जड़ों में डाल सकते हैं, जो कि शुभ माना जाता है। इससे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पौधों की वृद्धि में भी मदद मिलती है। गंगाजल को घर में रखना एक पवित्र कार्य है और इसे सही तरीके से रखने से इसके आध्यात्मिक प्रभाव और शुद्धता में वृद्धि होती है। गंगाजल को सही पात्र में सही स्थान पर और सही तरीके से रखने से न केवल घर में शांति और सौभाग्य का वास होता है बल्कि इससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है। इन सरल नियमों का पालन करके आप गंगाजल की महिमा और शक्ति का सही तरीके से अनुभव कर सकते हैं।

  • प्रदूषण से जूझते मध्य प्रदेश में विकास की भारी कीमत, 15 लाख पेड़ों की कटाई पर उठे गंभीर सवाल

    प्रदूषण से जूझते मध्य प्रदेश में विकास की भारी कीमत, 15 लाख पेड़ों की कटाई पर उठे गंभीर सवाल


    मध्य प्रदेश में एक ओर वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर पहुंच रहा है, वहीं दूसरी ओर विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एनजीटीद्वारा राज्य के आठ शहरों को गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट की श्रेणी में रखे जाने के बावजूद इन्हीं क्षेत्रों में लाखों पेड़ों को काटने की तैयारी ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार केवल इन आठ शहरों में ही करीब 6.50 लाख पेड़ों के कटने का प्रस्ताव है, जबकि पूरे प्रदेश में विभिन्न परियोजनाओं के चलते लगभग 15 लाख पेड़ संकट में हैं।

    जिन शहरों को एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियों ने सबसे अधिक प्रदूषित माना है, उनमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सिंगरौली, सागर और देवास शामिल हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सीपीसीबीके अनुसार इन शहरों में पीएम-10 का औसत स्तर 130 से 190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम-2.5 का स्तर 80 से 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक दर्ज किया गया है, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना अधिक है। इसके बावजूद इन्हीं इलाकों में सड़क, मेट्रो, कोयला, ऊर्जा और परिवहन से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पुराने और परिपक्व पेड़ों को हटाने की योजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं।

    सबसे बड़ा पर्यावरणीय खतरा सिंगरौली जिले में प्रस्तावित धिरौली कोल ब्लॉक परियोजना से जुड़ा माना जा रहा है। इस परियोजना के लिए करीब 1,397 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित की गई है, जिसमें अधिकांश हिस्सा घने जंगल का है। जानकारी के अनुसार अब तक लगभग 35 हजार पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि करीब 5.70 लाख और पेड़ों के कटने की आशंका जताई जा रही है। सिंगरौली पहले से ही कोयला खनन और ताप विद्युत संयंत्रों के कारण गंभीर प्रदूषण झेल रहा है।राजधानी भोपाल में अयोध्या बायपास को फोरलेन से 10 लेन में तब्दील करने की योजना के तहत लगभग 7,800 पेड़ों को हटाने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा कोलार बायपास और बंगरसिया से भोजपुर तक सड़क निर्माण कार्यों में भी बड़ी संख्या में पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं। इंदौर में रीगल चौराहे पर मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए 1,200 से अधिक पेड़ों पर संकट है, जबकि इंदौर-उज्जैन मार्ग के चौड़ीकरण में करीब 3,000 पेड़ प्रभावित होंगे।

    ग्वालियर में थाटीपुर रीडेंसिफिकेशन योजना और अन्य सड़क परियोजनाओं के चलते हजारों पुराने पेड़ हटाए जा चुके हैं या हटाने की प्रक्रिया में हैं। मंडला जिले में बसनिया डेम और उससे जुड़ी नहर व पावर परियोजनाओं से लगभग 2,100 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होगा, जहां करीब 5 लाख पेड़ों के कटने का अनुमान है। डिंडोरी में नर्मदा पर प्रस्तावित राघवपुर बांध और महू-खंडवा रेलवे लाइन परियोजना भी बड़े पैमाने पर वन कटाई का कारण बन रही हैं।पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण से जूझ रहे शहरों में हरित आवरण का इस तरह कम होना सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को और गहरा सकता है। वहीं सरकार का तर्क है कि इन परियोजनाओं के बदले बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जाएगा, लेकिन विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या नए पौधे दशकों पुराने पेड़ों की भरपाई कर पाएंगे।

  • वेश्यावृत्ति व तस्करी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, IG से कहा– सोच बदलिए, 11 साल का डेटा पेश करें

    वेश्यावृत्ति व तस्करी के आरोपों पर हाईकोर्ट सख्त, IG से कहा– सोच बदलिए, 11 साल का डेटा पेश करें


    ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लड़कियों की कथित तस्करी और जबरन वेश्यावृत्ति से जुड़े एक गंभीर मामले में पुलिस प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े अपराधों को हल्के में लेना अस्वीकार्य है। अदालत ने ग्वालियर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश देते हुए वर्ष 2014 से अब तक के 11 वर्षों में ग्वालियर संभाग से लापता हुई लड़कियों और उनकी बरामदगी से जुड़ा विस्तृत रिकॉर्ड तलब किया है।

    यह सख्त आदेश पायल नामक महिला द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शिवपुरी जिले में कुछ संगठित गिरोह युवतियों को बंधक बनाकर उनसे जबरन देह व्यापार करवा रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऋषिकेश बोहरे ने अदालत को बताया कि इस संबंध में पुलिस और प्रशासन को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश जवाब पर अदालत ने तीखी आपत्ति जताई। शासन ने अपने जवाब में इस पूरे मामले को आपसी पारिवारिक विवाद बताया था। हाईकोर्ट ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि आरोपों में जरा भी सच्चाई है, तो यह केवल निजी विवाद नहीं बल्कि संगठित अपराध, मानव तस्करी और गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन का मामला बनता है।

    खंडपीठ ने टिप्पणी की कि पुलिस का दृष्टिकोण बेहद चिंताजनक है। अदालत ने कहा कि महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी सबसे अहम है। इसी क्रम में कोर्ट ने आईजी को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि केवल फाइलों और कागजी जवाबों से काम नहीं चलेगा, बल्कि सोच और कार्यशैली में बदलाव जरूरी है।हाईकोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि वर्ष 2014 से अब तक ग्वालियर संभाग में दर्ज सभी गुमशुदगी मामलों का विस्तृत ब्योरा पेश किया जाए। इसमें यह जानकारी भी शामिल करनी होगी कि कितनी लड़कियां लापता घोषित की गईं, कितनी को बरामद किया गया और कितने मामलों की जांच अब तक लंबित है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि इन आंकड़ों के विश्लेषण के बाद पुलिस प्रशासन पर और भी सख्त निर्देश जारी किए जा सकते हैं।

    गौरतलब है कि इससे पहले शिवपुरी जिले के पुलिस अधीक्षक को भी इस मामले में तलब किया जा चुका है। हाईकोर्ट ने दो टूक कहा कि गंभीर आरोपों को नजरअंदाज करना या उन्हें घरेलू विवाद बताकर दबाना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।अदालत के इस सख्त रुख के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। अधिकारियों के अनुसार, पुराने रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और आंकड़ों को संकलित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। वहीं महिला अधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप को अहम बताते हुए कहा है कि इससे लड़कियों की सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही तय करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकेंगे।