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  • जितिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने से 51 बीमार, अस्पताल में भर्ती मां के लिए भूख से बिलखता रहा छह माह का बच्चा

    जितिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने से 51 बीमार, अस्पताल में भर्ती मां के लिए भूख से बिलखता रहा छह माह का बच्चा

    नई दिल्ली: बलिया। बांसडीह क्षेत्र के आसचौरा और चौकन गांव में जीवित्पुत्रिका व्रत से एक दिन पहले मड़ुआ के आटे से बनी रोटी और लिट्टी खाने के बाद 51 लोगों की तबीयत बिगड़ गई। बीमार लोगों में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हैं। रोटी-लिट्टी खाने के कुछ देर बाद ही पेट में दर्द, उल्टी, कंपकंपी और चक्कर की शिकायत शुरू हो गई। इसके बाद गांव में अफरातफरी मच गई। परिजनों और आसपास के लोगों ने बीमारों को बांसडीह सीएचसी, निजी अस्पतालों और जिला अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने फूड प्वाइजनिंग के लक्षणों के आधार पर इलाज शुरू किया। देर शाम स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मड़ुआ के बीज का आटा बेचने वाली दुकान को सीज कर दिया।

    जिउतिया व्रत से पहले मड़ुआ की रोटी खाने की दोनों गांवों में पुरानी परंपरा बताई गई है। संतान की मंगलकामना के लिए माताएं चौबीस घंटे का निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन इस बार व्रत से एक दिन पहले रोटी खाने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं बीमार पड़ गईं। एक साथ 50 से अधिक मरीजों के अस्पताल पहुंचने से वहां भी अफरातफरी की स्थिति बन गई। एक बेड पर दो मरीजों को लेटाकर उपचार किया गया। स्ट्रेचर कम पड़ने पर कुछ मरीजों को गोद में उठाकर ले जाया गया। देर शाम तक अस्पताल में मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। प्रशासन के निर्देश पर दोनों गांवों में दो एम्बुलेंस के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम तैनात की गई।

    चौकन निवासी 35 वर्षीय सुनीता भी मड़ुआ की रोटी खाने के बाद जिला अस्पताल में भर्ती हैं। दूसरी ओर उनका छह माह का बेटा भूख से बिलखता रहा। जिस बेटे के स्वास्थ्य के लिए मां जिउतिया का निर्जला व्रत रखने वाली थीं, वह अपनी तबीयत खराब होने के कारण उसे दूध पिलाने की स्थिति में नहीं थीं। बच्चा अपने पिता राजकुमार की गोद से मां को देखकर रो रहा था। डॉक्टरों की टीम के पूछने पर पिता ने बताया कि बच्चा अब तक केवल मां का दूध ही पीता है। उधर, देर शाम जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि दोनों गांवों के 49 लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 43 जिला अस्पताल, तीन बांसडीह सीएचसी और तीन निजी अस्पताल में भर्ती हैं। इनमें 37 महिलाएं, 12 पुरुष और 10 बच्चे शामिल बताए गए। सभी की हालत खतरे से बाहर है।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सभी लोगों को मड़ुआ का आटा एक ही दुकान से मिला था। चौकन गांव के किसान रिंकू सिंह ने पिछले वर्ष बांसडीह कचहरी स्थित सरकारी बीज भंडार से खेत में बोने के लिए मिले मड़ुआ के बीज को घर में रखा था। जीवित्पुत्रिका व्रत के लिए मड़ुआ का आटा नहीं मिलने की बात सामने आने पर उन्होंने करीब दो किलो बीज को आसचौरा में छितेश्वर वर्मा की चक्की पर पिसवा दिया। गुरुवार रात आटा तैयार हुआ। उसमें से कुछ आटा चक्की संचालक ने भी रख लिया। चक्की से लौटते समय सोनू की मां ने रिंकू से व्रत के लिए आटा मांग लिया। बाद में वही आटा दुकान पर रखा गया और गांव की कुछ महिलाओं को बांटा गया।

    घटना की सूचना मिलने पर जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह, एसपी ओमवीर सिंह और सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय समेत प्रशासनिक टीम जिला अस्पताल पहुंची और इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों ने प्रभावित गांवों का निरीक्षण किया। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के सहायक आयुक्त (द्वितीय) जेपी सिंह के नेतृत्व में टीम ने दुकानदार सोनू वर्मा और किसान रिंकू सिंह से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में आटा मड़ुआ के बीज से तैयार होने की बात सामने आई है। खाद्य विभाग ने आटा और उससे बनी रोटी के नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आटे में मौजूद पदार्थ और बीमारी के कारण की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • भारत चीन टकराव पर बनी सलमान की मातृभूमि में हुआ बड़ा बदलाव सरकार की मंजूरी के बाद रिलीज की उम्मीद बढ़ी

    भारत चीन टकराव पर बनी सलमान की मातृभूमि में हुआ बड़ा बदलाव सरकार की मंजूरी के बाद रिलीज की उम्मीद बढ़ी


    नई दिल्ली। सलमान खान की मचअवेटेड फिल्म मातृभूमि को लेकर लंबे समय से इंतजार कर रहे फैंस के लिए बड़ी खबर सामने आई है। 2020 में भारत और चीन के बीच हुए गलवान टकराव की पृष्ठभूमि पर तैयार की गई इस वॉर ड्रामा फिल्म की रिलीज का रास्ता अब काफी हद तक साफ हो गया है। फिल्म के नए संशोधित वर्जन को सरकार की ओर से हरी झंडी मिल गई है और इसके बाद मेकर्स ने रिलीज की तैयारियां तेज कर दी हैं। हालांकि सिनेमाघरों तक पहुंचने से पहले फिल्म को सेंसर बोर्ड की मंजूरी मिलना अभी बाकी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म को लेकर रक्षा मंत्रालय और सूचना प्रसारण मंत्रालय की ओर से कुछ आपत्तियां सामने आई थीं। खासतौर पर फिल्म में भारत और चीन से जुड़े संदर्भों तथा कंटेंट को लेकर बदलाव की जरूरत महसूस की गई थी। इसी वजह से फिल्म की रिलीज में देरी होती रही। अब मेकर्स की ओर से संशोधित वर्जन जमा किए जाने के बाद अधिकारियों की ओर से इसे मंजूरी मिल गई है। फिल्म को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी NOC जारी किए जाने के बाद इसकी रिलीज को लेकर तस्वीर पहले के मुकाबले काफी स्पष्ट हो गई है।

    सरकारी निर्देशों के बाद फिल्म के मूल ड्राफ्ट में कई बदलाव किए गए हैं। बताया जा रहा है कि नए वर्जन में भारत और चीन के संबंधों से जुड़े सकारात्मक पहलुओं को भी जगह दी गई है। ऐसे में फिल्म की कहानी और प्रस्तुति पहले तैयार किए गए वर्जन से अलग नजर आ सकती है। अब मेकर्स जल्द ही फिल्म को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC के पास भेजने की तैयारी में हैं।

    मातृभूमि की संभावित रिलीज डेट को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार सलमान खान और फिल्म की टीम 13 नवंबर की तारीख पर विचार कर रही है। यह तारीख दिवाली के बाद के त्योहारों वाले माहौल को देखते हुए चुनी जा सकती है। अगर सेंसर बोर्ड से समय पर मंजूरी मिल जाती है तो फिल्म 13 नवंबर को सिनेमाघरों में दस्तक दे सकती है। हालांकि अभी इस तारीख की आधिकारिक घोषणा होना बाकी है।

    फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है। इसमें सलमान खान के साथ चित्रांगदा सिंह मुख्य भूमिका में नजर आएंगी। फिल्म की कहानी 2020 के गलवान टकराव से जुड़े घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित बताई जा रही है। यही वजह है कि फिल्म की घोषणा के बाद से ही इसे लेकर दर्शकों के बीच काफी उत्सुकता बनी हुई है।

    अब सरकार से NOC मिलने के बाद फिल्म की अगली बड़ी परीक्षा सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया होगी। अगर यहां से भी मंजूरी मिल जाती है तो लंबे समय से अटकी यह फिल्म आखिरकार बड़े पर्दे पर पहुंच सकती है। ऐसे में सलमान खान के फैंस की नजरें अब मेकर्स की आधिकारिक घोषणा और रिलीज डेट पर टिकी हैं।

  • भूषण कुमार निकले बॉलीवुड के सबसे अमीर शख्स, 36,300 करोड़ की नेटवर्थ ने शाहरुख-सलमान को छोड़ा पीछे

    भूषण कुमार निकले बॉलीवुड के सबसे अमीर शख्स, 36,300 करोड़ की नेटवर्थ ने शाहरुख-सलमान को छोड़ा पीछे

    नई दिल्ली: बॉलीवुड के सबसे अमीर शख्स के तौर पर भूषण कुमार का नाम सामने आया है। टी-सीरीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भूषण कुमार की अनुमानित नेटवर्थ 36,300 करोड़ रुपये बताई गई है। वह रिच लिस्ट में 87वें नंबर पर हैं और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री से टॉप 100 में जगह बनाने वाले इकलौते शख्स हैं। उनकी अनुमानित संपत्ति शाहरुख खान, अमिताभ बच्चन, सलमान खान और ऋतिक रोशन समेत लिस्ट में शामिल अन्य बॉलीवुड हस्तियों की कुल अनुमानित नेटवर्थ से भी ज्यादा बताई गई है। भूषण कुमार की संपत्ति ने बॉलीवुड के कई बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया है।

    शाहरुख खान की अनुमानित नेटवर्थ में पिछले साल के मुकाबले 2,490 करोड़ रुपये की कमी आई है और इस साल उनकी संपत्ति करीब 10 हजार करोड़ रुपये आंकी गई है। अमिताभ बच्चन की नेटवर्थ में पिछले साल के मुकाबले काफी बढ़ोतरी हुई है। इस साल उनकी अनुमानित नेटवर्थ 4,000 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि पिछले साल यह 1,630 करोड़ रुपये थी। अमिताभ बच्चन ने पिछले कुछ वर्षों में रियल एस्टेट में काफी निवेश किया है। वहीं, सलमान खान की अनुमानित नेटवर्थ 3,000 करोड़ रुपये और ऋतिक रोशन की नेटवर्थ 2,500 करोड़ रुपये बताई गई है। ऋतिक रोशन की संपत्ति में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    इस रिच लिस्ट में पिछले साल जूही चावला और करण जौहर के नाम भी शामिल थे, लेकिन इस साल दोनों का नाम लिस्ट में नहीं है। बॉलीवुड के लोगों के अलावा इस सूची में रामायण के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा के पिता नरेश मल्होत्रा का नाम भी शामिल है। उनकी नेटवर्थ 16,000 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। इस तरह मनोरंजन जगत से जुड़े कई बड़े नाम इस सूची में अलग-अलग संपत्ति के साथ शामिल हैं, लेकिन भूषण कुमार की अनुमानित नेटवर्थ सबसे अधिक बताई गई है।

    भूषण कुमार भारत की सबसे बड़ी संगीत और फिल्म निर्माण कंपनियों में से एक टी-सीरीज के अध्यक्ष और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। वह टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार के बेटे हैं। पिता के निधन के बाद भूषण कुमार ने महज 19 साल की उम्र में कंपनी की कमान संभाली थी। गुलशन कुमार ने 11 जुलाई, 1983 को टी-सीरीज की स्थापना की थी। कंपनी को साल 1988 में बड़ा ब्रेक मिला, जब आमिर खान और जूही चावला की फिल्म कयामत से कयामत तक रिलीज हुई। फिल्म के गानों के 80 लाख कैसेट बिके थे। इसके बाद 1990 में रिलीज हुई फिल्म आशिकी के म्यूजिक एल्बम ने भी रिकॉर्ड बनाए।

    गुलशन कुमार का निधन 12 अगस्त, 1997 को हुआ था। उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के समय टी-सीरीज अपने चरम पर था। गुलशन कुमार रोज की तरह मंदिर में दर्शन करने के बाद बाहर निकले थे, तभी हमलावरों ने उन पर गोलियां चला दीं। उनकी हत्या के मामले में शूटर अब्दुल रऊफ मर्चेंट को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। जनवरी 2026 में जेल में ही उसकी मौत हो गई थी। इस घटना ने बॉलीवुड को बड़ा झटका दिया था।

  • जेल में तोड़ने की कोशिश पर संजय दत्त ने सुनाया किस्सा, बोले- पिता की आंखों में आंसू थे, फिर भी खुद को रखा मजबूत

    जेल में तोड़ने की कोशिश पर संजय दत्त ने सुनाया किस्सा, बोले- पिता की आंखों में आंसू थे, फिर भी खुद को रखा मजबूत

    नई दिल्ली: संजय दत्त ने जेल में बिताए अपने समय को याद करते हुए बताया कि वहां उन्हें तोड़ने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह परिस्थितियों के सामने नहीं टूटे। एक बातचीत के दौरान उन्होंने अपने करियर में आए उतार-चढ़ाव के साथ जेल के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि अधिकारियों को लगता था कि उनके सेलिब्रिटी स्टेटस से जुड़ी सुविधाएं छीन लेने से वह परेशान होकर टूट जाएंगे। हालांकि, संजय दत्त के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ और उन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभाले रखा। उन्होंने यह भी बताया कि जेल में उनके साथ व्यवहार और सुविधाओं में हुए बदलावों का उन पर वैसा असर नहीं पड़ा, जैसा अधिकारियों ने सोचा था।

    बातचीत के दौरान संजय दत्त से यह भी पूछा गया कि क्या जेल की कठिन परिस्थितियों में कभी उन्होंने अपना जीवन समाप्त करने के बारे में सोचा था। उन्होंने इस सवाल का जवाब साफ तौर पर ‘नहीं, कभी नहीं’ में दिया। इससे पहले बातचीत में उनके जेल में रहने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का जिक्र किया गया था। संजय दत्त ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि वहां मौजूद अधिकारियों को लगता था कि उनके लिए उपलब्ध सुविधाएं छीन लेने से वह टूट जाएंगे। उन्होंने बताया कि जब उन्हें सिगरेट नहीं मिलने की बात कही गई, तब उन्होंने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या बीड़ी मिल सकती है। उनके मुताबिक इस तरह के बदलावों से उन्हें कोई खास फर्क नहीं पड़ा।

    संजय दत्त ने जेल जाने से पहले का एक भावुक पल भी याद किया। उन्होंने बताया कि जब पुलिस ने पहली बार उन्हें हथकड़ी पहनाई, तब उनके पिता सुनील दत्त को गहरा झटका लगा था। उनकी आंखों में आंसू थे और उन्होंने पूछा था कि उनके बेटे के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है। संजय दत्त के मुताबिक उन्होंने उस समय अपने पिता को गले लगाया और उन्हें समझाने की कोशिश की कि हथकड़ी लगना प्रक्रिया का हिस्सा है और उन्हें परेशान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह थी कि वह खुद भी अंदर से इस स्थिति से प्रभावित थे, लेकिन उस समय उनके लिए अपने पिता के सामने मजबूत बने रहना जरूरी था।

    संजय दत्त को साल 1993 में मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मामले से जुड़े अवैध हथियार रखने के आरोप में टेररिस्ट एंड डिसरप्टिव एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट यानी TADA और आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी। उन्होंने अलग-अलग समय में कुल मिलाकर करीब 18 महीने अंडरट्रायल के तौर पर जेल में बिताए। साल 2007 में विशेष TADA अदालत ने उन्हें आतंकवाद से जुड़े आरोपों से बरी कर दिया, लेकिन आर्म्स एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए छह साल की सजा सुनाई। इसके बाद साल 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सजा की अवधि छह साल से घटाकर पांच साल कर दी। जेल के अपने अनुभव को याद करते हुए संजय दत्त ने बताया कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खुद को संभाले रखा।

  • ‘गांधी एंड माय मदर’ की पहली झलक सामने, मनोज बाजपेयी और वहीदा रहमान की जोड़ी ने खींचा ध्यान

    ‘गांधी एंड माय मदर’ की पहली झलक सामने, मनोज बाजपेयी और वहीदा रहमान की जोड़ी ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली: गांधी जयंती के खास मौके पर फिल्म ‘गांधी एंड माय मदर’ की पहली झलक सामने आई है। फिल्म की नई तस्वीरों में उस दौर और माहौल की झलक देखने को मिल रही है, जिसमें इसकी कहानी आधारित है। फिल्म का निर्देशन सुधीर मिश्रा ने किया है। सामने आई तस्वीरों के जरिए दर्शकों को फिल्म की दुनिया और उसके वातावरण की शुरुआती झलक मिली है। यह फिल्म महात्मा गांधी के जीवन और उनकी विरासत से जुड़ी हुई है। हालांकि, फिल्म की कहानी से जुड़ी ज्यादा जानकारी अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में तस्वीरों के जरिए दर्शकों को फिलहाल फिल्म के दौर, माहौल और इसके विषय की एक शुरुआती झलक ही देखने को मिली है।

    ‘गांधी एंड माय मदर’ में महात्मा गांधी के जीवन को केवल इतिहास और राजनीति के नजरिए से दिखाने के बजाय उनके जीवन के निजी और मानवीय पहलुओं पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। फिल्म में उस समय के माहौल और रिश्तों को कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। सामने आई तस्वीरों में भी इसी पृष्ठभूमि की झलक दिखाई देती है। फिल्म की कहानी और घटनाक्रम को लेकर अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है। इसलिए तस्वीरों से फिल्म की पूरी कहानी का अंदाजा लगाना संभव नहीं है। फिलहाल सामने आई झलक से इतना स्पष्ट है कि फिल्म गांधी के जीवन से जुड़े कम चर्चित और मानवीय पहलुओं को पर्दे पर प्रस्तुत करने की कोशिश करेगी।

    फिल्म की स्टारकास्ट में मनोज बाजपेयी और दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इनके अलावा दिव्या दत्ता और सौरभ शुक्ला भी फिल्म का हिस्सा हैं। सुधीर मिश्रा के निर्देशन में बनी इस फिल्म में गहराई वाले किरदारों और जटिल रिश्तों को कहानी का हिस्सा बनाया गया है। सामने आई तस्वीरों में कलाकारों के साथ फिल्म के दौर से जुड़ा वातावरण भी दिखाई दे रहा है। गांधी जयंती के मौके पर पहली झलक सामने आने से फिल्म की कहानी और कलाकारों को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    फिलहाल फिल्म की रिलीज डेट की घोषणा नहीं की गई है। फिल्म की कहानी, बाकी किरदारों और घटनाक्रम को लेकर भी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। उपलब्ध तस्वीरों में फिल्म के कालखंड और उसके माहौल को प्रमुखता से दिखाया गया है। मनोज बाजपेयी और वहीदा रहमान जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी फिल्म की स्टारकास्ट को खास बनाती है। दिव्या दत्ता और सौरभ शुक्ला भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। अब फिल्म की कहानी से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी और रिलीज डेट की घोषणा का इंतजार है।

  • नींद में भी एक्टिव रहता है दिमाग, शरीर की मरम्मत से लेकर याददाश्त और हार्मोन तक होते हैं कई जरूरी काम

    नींद में भी एक्टिव रहता है दिमाग, शरीर की मरम्मत से लेकर याददाश्त और हार्मोन तक होते हैं कई जरूरी काम


    नई दिल्ली: सोने का मतलब केवल शरीर को आराम देना नहीं है। जब हम नींद में होते हैं, तब भी शरीर के भीतर कई जरूरी प्रक्रियाएं लगातार चलती रहती हैं। दिमाग दिनभर मिली जानकारी को व्यवस्थित करने और याददाश्त से जुड़े काम करता रहता है, जबकि शरीर की कोशिकाएं खुद को दुरुस्त करने में जुटी रहती हैं। हार्मोन और इम्यून सिस्टम से जुड़ी गतिविधियां भी इस दौरान जारी रहती हैं। यही वजह है कि पर्याप्त और अच्छी नींद को शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए जरूरी माना जाता है। रात में शरीर अलग-अलग नींद के चरणों से गुजरता है और हर चरण का अपना महत्व होता है। कभी दिमाग दिनभर की जानकारी को व्यवस्थित करता है, तो कभी शरीर की मरम्मत और ऊर्जा बहाली से जुड़े काम तेज होते हैं।

    वयस्कों के लिए रात में 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है। गहरी नींद के दौरान दिमाग, हार्मोन, इम्यून सिस्टम और शरीर के कई दूसरे हिस्से अपना काम जारी रखते हैं। रात में नींद नॉन-आरईएम और आरईएम चरणों से होकर गुजरती है। ये चरण रात में कई बार आते हैं और आम तौर पर एक नींद चक्र करीब 80 से 100 मिनट का होता है। नॉन-आरईएम नींद के तीसरे चरण को गहरी नींद कहा जाता है। इस दौरान शरीर की धड़कन और सांस की गति धीमी हो जाती है और शरीर मरम्मत तथा ऊर्जा बहाली से जुड़े काम करता है। वहीं आरईएम नींद के दौरान दिमाग काफी सक्रिय रहता है और सपने अधिक स्पष्ट हो सकते हैं।

    नींद के दौरान दिमाग का काम केवल सपने देखने तक सीमित नहीं रहता। यह दिनभर हासिल की गई जानकारियों को व्यवस्थित करने और याददाश्त बनाने की प्रक्रिया में भी शामिल रहता है। नींद की कमी या खराब नींद का असर ध्यान केंद्रित करने, नई जानकारी समझने और चीजों को याद रखने की क्षमता पर पड़ सकता है। आरईएम और नॉन-आरईएम नींद के अलग-अलग चरण सीखने और याददाश्त से जुड़े विभिन्न कामों में भूमिका निभाते हैं। इस दौरान शरीर भी अपने स्तर पर जरूरी बदलावों से गुजरता रहता है, इसलिए पूरी और अच्छी नींद अगले दिन शरीर और दिमाग को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

    गहरी नींद में शरीर के ऊतकों की वृद्धि और मरम्मत से जुड़े काम होते हैं। इसी दौरान कुछ हार्मोन भी रिलीज होते हैं। ग्रोथ हार्मोन शरीर के विकास के साथ मांसपेशियों और ऊतकों की मरम्मत में भूमिका निभाता है। इसके अलावा वैज्ञानिकों ने ग्लिम्फैटिक सिस्टम नाम की एक व्यवस्था का भी अध्ययन किया है, जो दिमाग से कुछ मेटाबॉलिज्म संबंधी अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का काम करती है। इस तरह रात की नींद को केवल आराम का समय समझना सही नहीं है। नींद के दौरान शरीर में मरम्मत, याददाश्त, हार्मोन और दिमागी गतिविधियों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं चलती रहती हैं। यही कारण है कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त और अच्छी नींद को जरूरी माना जाता है।

  • सागर के गर्ल्स हॉस्टल में खौफनाक नजारा बाथरूम में मिला 10 फीट लंबा अजगर छात्राओं में मची अफरा तफरी

    सागर के गर्ल्स हॉस्टल में खौफनाक नजारा बाथरूम में मिला 10 फीट लंबा अजगर छात्राओं में मची अफरा तफरी


    सागर । मध्य प्रदेश के सागर में गर्ल्स हॉस्टल में उस समय हड़कंप मच गया जब छात्राओं को बाथरूम के अंदर करीब 10 फीट लंबा अजगर दिखाई दिया। तिली इलाके में स्थित हॉस्टल में छात्राएं सामान्य तरीके से बाथरूम की ओर गई थीं लेकिन अंदर पहुंचते ही उनकी नजर विशाल अजगर पर पड़ गई। इतना बड़ा सांप सामने देखकर छात्राएं घबरा गईं और तत्काल हॉस्टल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी गई। कुछ ही देर में पूरे हॉस्टल में यह खबर फैल गई और छात्राओं के बीच डर का माहौल बन गया।

    मामले की सूचना मिलने के बाद स्नेक कैचर अकील बाबा को मौके पर बुलाया गया। जानकारी मिलते ही वह हॉस्टल पहुंचे और बाथरूम का निरीक्षण किया। अजगर अभी भी वहीं मौजूद था। इसके बाद उन्होंने बेहद सावधानी के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद करीब 10 फीट लंबे अजगर को सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया गया। अजगर के बाहर निकलते ही छात्राओं और हॉस्टल स्टाफ ने राहत की सांस ली। रेस्क्यू के दौरान आसपास के लोग भी मौके पर पहुंच गए और इतने बड़े अजगर को देखकर हैरान रह गए।

    स्नेक कैचर अकील बाबा के मुताबिक छात्राओं की नजर समय रहते अजगर पर पड़ गई थी जिसके बाद तत्काल सूचना दी गई। इसी वजह से उसे बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाला जा सका। अब अजगर को सुरक्षित प्राकृतिक स्थान पर छोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि तिली क्षेत्र पहाड़ी इलाके से लगा हुआ है। आसपास प्राकृतिक क्षेत्र होने के कारण यहां अक्सर सांप और अजगर निकलते रहते हैं। बारिश के दौरान सांप सुरक्षित जगह की तलाश में कई बार रिहायशी इलाकों और इमारतों तक पहुंच जाते हैं।

    अकील बाबा ने बताया कि तिली इलाके में अजगर मिलने की यह पहली घटना नहीं है। आवास योजना के तहत बनी कई इमारतों के आसपास पहले भी बड़े अजगर देखे जा चुके हैं। उनके मुताबिक वह अब तक इस इलाके से करीब 70 से 75 अजगरों का रेस्क्यू कर चुके हैं। इन अजगरों को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के बाद संबंधित विभाग की मौजूदगी में प्राकृतिक क्षेत्र में छोड़ा गया है। ऐसे में इस घटना ने एक बार फिर इलाके में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

    गर्ल्स हॉस्टल के बाथरूम में अजगर मिलने की घटना छात्राओं के लिए निश्चित तौर पर डराने वाली थी। जिस जगह पर वे रोजमर्रा के काम के लिए जाती थीं वहीं अचानक विशाल अजगर दिखाई देने से कुछ समय के लिए अफरा तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि समय पर सूचना मिलने के कारण स्थिति गंभीर होने से पहले ही संभाल ली गई।

    स्नेक कैचर ने लोगों से अपील की है कि घर हॉस्टल या किसी भी रिहायशी परिसर में सांप अथवा अजगर दिखाई देने पर खुद उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत प्रशिक्षित स्नेक कैचर या संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए। इससे लोगों की सुरक्षा के साथ वन्यजीव को भी सुरक्षित रखा जा सकता है। सागर की इस घटना में भी समय पर सूचना और सावधानी से करीब 10 फीट लंबे अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू संभव हो सका।

  • फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर बढ़ी जिज्ञासा, 24 घंटे में इंटरनेट सर्च में 5000% से ज्यादा उछाल

    फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार को लेकर बढ़ी जिज्ञासा, 24 घंटे में इंटरनेट सर्च में 5000% से ज्यादा उछाल

    नई दिल्ली: फ्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा घटना के बाद दुनिया भर में हो रही है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान में दूसरे पायलट ने कथित तौर पर उन पर हमला कर विमान को क्रैश करने की कोशिश की। इस दौरान कैप्टन स्मित मच्छार घायल हो गए, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और आरोपी पायलट से संघर्ष किया। इस कार्रवाई के चलते विमान में सवार 174 यात्रियों की जान बच सकी। घटना के बाद लोग उनकी बहादुरी के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत परिचय के बारे में भी जानकारी हासिल करने में जुट गए हैं। इसका असर इंटरनेट पर होने वाली खोजों में भी दिखाई दिया।

    भारत में स्मित मच्छार का नाम तेजी से ट्रेंड करने लगा। उपलब्ध गूगल ट्रेंड्स के आंकड़ों के अनुसार, 24 घंटे के भीतर मच्छार के नाम से जुड़े सर्च शब्दों में 5000 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विदेशों में लोगों की रुचि उनके धर्म से जुड़ी जानकारी जानने में दिखाई दी, जहां इससे संबंधित इंटरनेट सर्च में 3000 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि बताई गई। वहीं भारत में उनके नाम के साथ जाति से जुड़ी जानकारी जानने की कोशिश ज्यादा दिखाई दी। इस तरह विमान में हुई घटना के बाद कैप्टन की बहादुरी के साथ उनकी व्यक्तिगत पहचान को लेकर भी इंटरनेट पर लोगों की उत्सुकता बढ़ गई।

    स्मित मच्छार शादीशुदा हैं या सिंगल, इसे लेकर भी इंटरनेट पर काफी खोज की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह मूल रूप से गुजरात के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया पर किए गए दावों के अनुसार उनका जन्म गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले के वधवान में हुआ बताया गया है। उनके परिवार का संबंध राजकोट और कच्छ-सौराष्ट्र क्षेत्र से भी बताया जाता है। इसी तरह उनके सरनेम को लेकर भी जानकारी सामने आती रही है। गुजरात में मच्छार सरनेम के लोहाना और नागर ब्राह्मण समुदायों में इस्तेमाल किए जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस तरह की व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी को लेकर इंटरनेट पर मौजूद दावों को उसी रूप में देखा जा रहा है।

    घटना के बाद कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी को लेकर सम्मान भी सामने आया है। मुंबई में इस्राइल के महावाणिज्य दूतावास ने उनके सम्मान में एक विशेष बिलबोर्ड लगाया। मुंबई स्थित इस्राइल के महावाणिज्य दूत यानिब रेवाच ने सोशल मीडिया पर बिलबोर्ड की तस्वीर साझा की और कैप्टन की बहादुरी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत को एक नया हीरो मिला है और इस्राइल कैप्टन स्मित मच्छार का नाम कभी नहीं भूलेगा। इस घटना के बाद स्मित मच्छार की पहचान और उनके साहस से जुड़ी जानकारी को लेकर इंटरनेट पर लगातार बढ़ती दिलचस्पी दिखाई दे रही है।

  • फ्लाईदुबई हमला… 6 वर्षीय बच्ची की वजह से टला विमान हादसा, टॉयलेट जाने की जिद ने बचाईं 180 जानें!

    फ्लाईदुबई हमला… 6 वर्षीय बच्ची की वजह से टला विमान हादसा, टॉयलेट जाने की जिद ने बचाईं 180 जानें!


    दुबई।
    दुबई (Dubai) से तेल अवीव (तेल अवीव) जा रही फ्लाईदुबाई (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर ओमानी को-पायलट (Omani co-pilot) के खौफनाक हमले और विमान को क्रैश करने की साजिश के मामले में कई बेहद हैरान कर देने वाले और साहसिक खुलासे हुए हैं। हवा में 30,000 फीट की ऊंचाई पर एक 6 साल की मासूम बच्ची की छोटी सी जिद ने पूरे विमान को एक भीषण तबाही से बचा लिया।

    इस बीच, चाकूबाजी में गंभीर रूप से घायल हुए विमान के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार (Capt Smit Machchhar) की जान बचाने और हमलावर आतंकी को दबोचने वाले इजरायली नागरिकों को राष्ट्रपति पदक दिए जाने का ऐलान किया गया है।


    ‘मम्मी टॉयलेट जाना है’- 6 साल की नीना की जिद ने बचाई 180 जानें

    इजरायली न्यूज चैनल से बातचीत करते हुए ताली मानेस (Tali Manes) ने उस खौफनाक मंजर को याद किया। ताली ने बताया कि उनकी 6 साल की बेटी नीना मानेस ने अचानक टॉयलेट जाने की जिद की। जैसे ही ताली अपनी बेटी को लेकर कॉकपिट के पास बने टॉयलेट की ओर बढ़ीं, उसी वक्त कॉकपिट का दरवाजा थोड़ा सा खुला और अंदर ओमानी को-पायलट ने भारतीय कैप्टन स्मित मछार पर चाकू से दनादन वार करने शुरू कर दिए।

    ताली ने कॉकपिट के भीतर खून से लथपथ कैप्टन को देखा और चीखना शुरू कर दिया, “वह पायलट को गोद रहा है! वह पायलट को चाकू मार रहा है! बचाओ!” चीख-पुकार और विमान के अचानक नीचे गिरने के बीच ताली के पति ज्विका मानेस और अन्य यात्री कॉकपिट की तरफ भागे। ज्विका ने बताया, “मेरी बेटियों की चीखें आज भी मेरे कानों में गूंज रही हैं जब विमान तेजी से नीचे गिर रहा था और वे कह रही थीं ‘पापा, हम मरना नहीं चाहते।’ इसी ने मुझे कॉकपिट के भीतर कूदने पर मजबूर किया।”


    खून से लथपथ भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने खोला कॉकपिट के गेट

    हमले में गंभीर रूप से घायल और फर्श पर पड़े भारतीय कैप्टन स्मित मछार ने अदम्य साहस का परिचय दिया। चाकू के वार से लहूलुहान होने के बावजूद उन्होंने किसी तरह कॉकपिट डोर का ‘इमर्जेंसी रिलीज लॉक’ दबा दिया, जिससे बाहर मौजूद यात्री और क्रू मेंबर्स अंदर दाखिल हो सके।

    विमान में सफर कर रहे प्लंबर यानिव हयून ने हमलावर ओमानी पायलट को गर्दन से दबोचकर ‘चोकहोल्ड’ में ले लिया, जबकि एक डेंटिस्ट यात्री ने कैप्टन स्मित मछार का बहता खून रोककर उनकी जान बचाई। इस अफरा-तफरी के दौरान चेहरे पर खून से सने एक यात्री का वीडियो भी सामने आया, जिसने सोशल मीडिया पर मदद मांगते हुए कहा, “हम हाईजैक के बीच में हैं, हमने आतंकियों को काबू कर लिया है और लैंडिंग के करीब हैं। जो भी सुन रहा है, मदद भेजो!”


    नेतन्याहू ने कहा- ‘जिहादी कट्टरपंथ’ का मामला

    इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने अदम्य साहस दिखाने वाले नागरिकों- यानिव हयून, ज्विका मानेस और असाफ राजुआन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड फॉर सिविलियन हिरोइज्म’ से सम्मानित करने की सिफारिश की है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बयान जारी कर कहा है कि शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि ओमानी को-पायलट ‘जिहादी कट्टरपंथ’ का शिकार था और उसने एक सोची-समझी साजिश के तहत विमान को क्रैश करने की कोशिश की थी। सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग के बाद घायल भारतीय कैप्टन का इलाज जारी है और सभी 180 यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया गया है।

  • UP में MP के पूर्व सीएम की पुश्तैनी जमीन को हड़पने का प्रयास… मां का नाम बदला, नकली वसीयत बनवाई

    UP में MP के पूर्व सीएम की पुश्तैनी जमीन को हड़पने का प्रयास… मां का नाम बदला, नकली वसीयत बनवाई


    भोपाल।
    फर्जी कब्जे और जाली दस्तावेजों को लेकर लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री को भी नहीं छोड़ा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh ) के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Former Chief Minister Kamal Nath) की पुश्तैनी जमीन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर में है। इसपर कब्जा करने के लिए आरोपियों ने कमलनाथ के पिता का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और वसीयत तक बनवा डाली। कमलनाथ को जब पता चला कि कुछ लोग उनकी जमीन हथियाने में लगे हैं और उनका उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है तो वह भी हैरान रह गए। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया है। इनमें से दो की गिरफ्तारी हो गई है जबकि एक अब भी फरार है। पुलिस पता लगाने में जुटी है कि ये लोग इसी तरह की अन्य संपत्तियों को हड़पने की कोशिश में तो नहीं लगे थे।


    लेखपाल भी आरोपी

    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव अमीखानपुर स्थित करीब 26 बीघा बेशकीमती जमीन को हड़पने के लिए गुपचुप तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आया। जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार होने की जानकारी मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लेखपाल समेत एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है।


    26 बीघे जमीन बटाई पर

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव अमीखानपुर में करीब 90 बीघा जमीन है। जमीन के वारिस उनके बेटे हैं। 26 बीघा जमीन बटाई पर दी गई है और बटाईदार ही खेती करने के साथ उसकी देखरेख करता है। पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार की ओर से नियमित रूप से जमीन की देखभाल के लिए कोई नहीं आता था। बटाईदार ही समय-समय पर जमीन के संबंध में परिजनों को जानकारी देता रहता था।

    वसीयत दर्ज कराने पहुंचे तो खुला खेल
    पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे ने जब जमीन की वसीयत दर्ज कराने के लिए नजीबाबाद तहसील में प्रार्थना पत्र दिया, तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। अभिलेखों में पिता की जमीन को हड़पने को फर्जी दस्तावेज तैयार करने की जानकारी सामने आई। इसके बाद परिजनों को पूरे मामले का पता चला।


    बदल दिया कमलनाथ की मां का भी नाम

    एफआईआर के मुताबिक रतन सिंह नाम के शख्स के बेटे धर्मपाल सिंह ने नजीबाबाद में तहसीलदार के सामने फर्जी वसीयत पेश की थी। आरोपियों ने कमलनाथ के पिता महेंद्र नाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवा लिया था। इसमें उनके निधन की तारीख 10 अप्रैल 2003 बताई गई जबकि महेंद्र नाथ का निधन 7 सितंबर 2004 को हुआ था। महेंद्र नाथ की पत्नी का नाम इसमें प्रेमलता लिखा गया था। कमलनाथ ने बताया कि यह भी गलत है। इस मामले में धर्मपाल सिंह के साथ ही जसबिंदर सिंह ढिल्लों, विजय शंकर पांडे और लेखपाल डेविड कुमार को आरोपी बनाया गया है।