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  • UP में MP के पूर्व सीएम की पुश्तैनी जमीन को हड़पने का प्रयास… मां का नाम बदला, नकली वसीयत बनवाई

    UP में MP के पूर्व सीएम की पुश्तैनी जमीन को हड़पने का प्रयास… मां का नाम बदला, नकली वसीयत बनवाई


    भोपाल।
    फर्जी कब्जे और जाली दस्तावेजों को लेकर लोगों ने पूर्व मुख्यमंत्री को भी नहीं छोड़ा। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh ) के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Former Chief Minister Kamal Nath) की पुश्तैनी जमीन उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के बिजनौर में है। इसपर कब्जा करने के लिए आरोपियों ने कमलनाथ के पिता का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र और वसीयत तक बनवा डाली। कमलनाथ को जब पता चला कि कुछ लोग उनकी जमीन हथियाने में लगे हैं और उनका उनके परिवार से कोई संबंध नहीं है तो वह भी हैरान रह गए। पुलिस ने तीन आरोपियों के खिलाफ फर्जीवाड़े का केस दर्ज किया है। इनमें से दो की गिरफ्तारी हो गई है जबकि एक अब भी फरार है। पुलिस पता लगाने में जुटी है कि ये लोग इसी तरह की अन्य संपत्तियों को हड़पने की कोशिश में तो नहीं लगे थे।


    लेखपाल भी आरोपी

    मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव अमीखानपुर स्थित करीब 26 बीघा बेशकीमती जमीन को हड़पने के लिए गुपचुप तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला सामने आया। जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार होने की जानकारी मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि लेखपाल समेत एक अन्य आरोपी की तलाश की जा रही है।


    26 बीघे जमीन बटाई पर

    पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की नजीबाबाद तहसील क्षेत्र के गांव अमीखानपुर में करीब 90 बीघा जमीन है। जमीन के वारिस उनके बेटे हैं। 26 बीघा जमीन बटाई पर दी गई है और बटाईदार ही खेती करने के साथ उसकी देखरेख करता है। पूर्व मुख्यमंत्री के परिवार की ओर से नियमित रूप से जमीन की देखभाल के लिए कोई नहीं आता था। बटाईदार ही समय-समय पर जमीन के संबंध में परिजनों को जानकारी देता रहता था।

    वसीयत दर्ज कराने पहुंचे तो खुला खेल
    पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे ने जब जमीन की वसीयत दर्ज कराने के लिए नजीबाबाद तहसील में प्रार्थना पत्र दिया, तब फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। अभिलेखों में पिता की जमीन को हड़पने को फर्जी दस्तावेज तैयार करने की जानकारी सामने आई। इसके बाद परिजनों को पूरे मामले का पता चला।


    बदल दिया कमलनाथ की मां का भी नाम

    एफआईआर के मुताबिक रतन सिंह नाम के शख्स के बेटे धर्मपाल सिंह ने नजीबाबाद में तहसीलदार के सामने फर्जी वसीयत पेश की थी। आरोपियों ने कमलनाथ के पिता महेंद्र नाथ का मृत्यु प्रमाणपत्र भी बनवा लिया था। इसमें उनके निधन की तारीख 10 अप्रैल 2003 बताई गई जबकि महेंद्र नाथ का निधन 7 सितंबर 2004 को हुआ था। महेंद्र नाथ की पत्नी का नाम इसमें प्रेमलता लिखा गया था। कमलनाथ ने बताया कि यह भी गलत है। इस मामले में धर्मपाल सिंह के साथ ही जसबिंदर सिंह ढिल्लों, विजय शंकर पांडे और लेखपाल डेविड कुमार को आरोपी बनाया गया है।

  • मौसम की मार…. 40 फीसदी तक घटी सेब की पैदावार….. आसमान पर कीमतें

    मौसम की मार…. 40 फीसदी तक घटी सेब की पैदावार….. आसमान पर कीमतें


    श्रीनगर।
    सेब (Apples) इस बार महंगा बिकेगा। देश के दो शीर्ष उत्पादक राज्यों जम्मू-कश्मीर (Jammu & Kashmir) और हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में सेब की पैदावार तेजी से घटी है। हिमाचल में पिछले साल के 4.07 लाख टन के मुकाबले इस साल सिर्फ 3.87 लाख टन सेब बाजार में पहुंचा है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में हालत और खराब है, जहां उत्पादन 40 फीसदी तक घटा है।

    दोनों राज्यों में सेब उत्पादन पर प्रतिकूल मौसम की मार पड़ी है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से सर्वाधिक प्रभावित कुछ क्षेत्रों में उत्पादन 50 फीसदी तक कम हुआ है। सामान्य वर्षों में 20 से 22 लाख टन उत्पादन होता था, मगर इस बार इसके 14 से 15 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन घटने से मंडियों में आपूर्ति घटी है और बेहतर गुणवत्ता वाले सेब के भाव चढ़ गए हैं। दोनों ही राज्यों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी नहीं होने से ठंड के घंटे कम हुए। हिमाचल में इस बार ड्रॉपिंग भी अधिक रही और सेब सीजन 15 दिन देरी से शुरू हुआ। पिछले साल प्रदेश में सात लाख टन सेब उत्पादन हुआ था। इस साल उत्पादन इससे बहुत कम रह सकता है। 


    शोपियां व ऊपरी इलाकों में फसल को 55% तक नुकसान

    जम्मू-कश्मीर उद्यान विभाग के अनुसार दक्षिण कश्मीर के शोपियां के ऊपरी इलाके हीरपोरा, केलर, जैनपोरा और कुलगाम के डीएच पोरा व फ्रिसल में मई-जून की बेमौसम ओलावृष्टि और तेज हवा से फसल को 45 से 55 प्रतिशत तक का नुकसान हुआ।

    बडगाम के खानसाहिब, चरार-ए-शरीफ और पुलवामा के त्राल व राजपोरा के पारंपरिक बागानों में परागण के समय लगातार बारिश और कम धूप के कारण फल तेजी से गिरे। इससे पैदावार आधी रह गई।


    जलवायु परिवर्तन का असर

    सेब उत्पादन बढ़ाने के लिए हाई डेंसिटी पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है। बदलते मौसम में आधुनिक तकनीक व नए रूट स्टॉक अपनाना जरूरी है। जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है, जो उत्पादन घटने का बड़ा कारण है।
    -जगत सिंह नेगी, बागवानी मंत्री, हिमाचल प्रदेश

    आपूर्ति में भारी कमी
    सोपोर फ्रूट मंडी के फल व्यापारी हाजी मुश्ताक अहमद ने कहा, मंडियों में रोजाना आने वाली गाड़ियों की संख्या कम है। खासकर शोपियां और कुलगाम की ओर से ए ग्रेड माल की भारी कमी है।

  • अब प्रथम श्रेणी क्रिकेट नहीं खेलेंगे युजवेंद्र चहल…. संन्यास का किया ऐलान

    अब प्रथम श्रेणी क्रिकेट नहीं खेलेंगे युजवेंद्र चहल…. संन्यास का किया ऐलान


    नई दिल्ली।
    भारतीय स्पिनर (Indian spinner) युजवेंद्र चहल (Yuzvendra Chahal) ने शुक्रवार को प्रथम श्रेणी क्रिकेट (First-class cricket) से संन्यास (Retirement Announced) का एलान कर दिया है। चहल ने इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिये प्रथम श्रेणी क्रिकेट को अलविदा कहने की घोषणा की। हालांकि, उन्होंने भारत के लिए खेलने की इच्छा जाहिर की है। चहल पिछले कुछ समय से भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं, लेकिन उन्होंने राष्ट्रीय टीम में वापसी की उम्मीद नहीं छोड़ी है।


    चहल ने लाल गेंद क्रिकेट को कहा अलविदा

    चहल ने लिखा, मैंने जो पहली क्रिकेट बॉल पकड़ी थी, वह लाल रंग की थी। मैं 10 साल का था और मुझे तब अंदाजा भी नहीं था कि मुझे इस खेल से कितना गहरा लगाव हो जाएगा। मेरे लिए रेड-बॉल क्रिकेट कभी भी सिर्फ एक और प्रारूप नहीं था। इसी फार्मेट में मैंने सब्र, मुश्किलों का सामना करने की हिम्मत और घंटों तक मैदान पर डटे रहकर हर रन और हर विकेट के लिए संघर्ष करने की असली खुशी को समझा।


    भारत के लिए कभी नहीं खेला टेस्ट

    लेग-स्पिनर चहल को भारत के लिए टेस्ट खेलने का कभी मौका नहीं मिला। उन्होंने लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर नॉर्थम्प्टनशायर के लिए रेड बॉल प्रारूप में अपना आखिरी मैच खेला। चहल ने अपने करियर में 49 प्रथम श्रेणी मैच खेले, जिसमें उन्होंने 32.27 की औसत से 148 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/25 रहा। हाल ही में उन्होंने नॉर्थम्प्टनशायर के लिए काउंटी क्रिकेट खेला और लॉर्ड्स में मिडलसेक्स के खिलाफ अपने आखिरी मैच में दो विकेट लिए। 2026-27 सीजन में 36 वर्षीय खिलाड़ी ने काउंटी चैंपियनशिप में पांच मैच खेले और 21 विकेट लिए। उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन डरहम के खिलाफ रहा, जहां उन्होंने कुल नौ विकेट लिए जिसमें पहली पारी में पांच विकेट लेना भी शामिल था।


    चहल बोले- मेरा सफर खत्म नहीं हुआ

    उन्होंने आगे लिखा, मैंने अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच लॉर्ड्स में खेला। यह कहते हुए भावुकता महसूस होती है क्योंकि टेस्ट कैप पाना हमेशा से मेरा सपना रहा था, जिसे मैंने कई वर्षों तक संजोकर रखा था। भले ही वह सपना पूरा न हो सका, लेकिन मैं अपने इस सफर से सचमुच संतुष्ट हूं और इस प्रारूप में मिले हर मौके के लिए बेहद शुक्रगुजार हूं। रेड बॉल ने मुझे मेरी जिंदगी की कुछ सबसे खूबसूरत यादें दी हैं और कोई भी मुझसे वे यादें कभी नहीं छीन सकता। लेकिन मेरा सफर अभी खत्म नहीं हुआ है।

    चहल ने कहा, अपने देश के लिए खेलने की भूख अभी भी मुझमें जबरदस्त है। मुझे यकीन है कि मुझमें अभी भी क्रिकेट बाकी है और वनडे और टी20 प्रारूप में एक और मौका पाने के लिए मैं अपनी पूरी जान लगा दूंगा। हरियाणा क्रिकेट संघ, रणबीर सिंह महिंद्रा सर और श्री अनिरुद्ध सिंह चौधरी सर का खास शुक्रिया, जिन्होंने मेरे पूरे सफर में लगातार मेरा साथ दिया और मुझ पर भरोसा जताया। पहली बार रेड बॉल पकड़ने वाले 10 साल के बच्चे से लेकर अपना आखिरी प्रथम श्रेणी मैच खेलने तक, यह सफर वाकई जबरदस्त रहा है।


    टेस्ट क्रिकेट में नहीं मिले ज्यादा मौके

    चहल भारत के लिए लाल गेंद प्रारूप में नहीं खेले और इस फॉर्मेट में उन्हें ज्यादा मौके भी नहीं मिले। चहल भारत की टेस्ट टीम रणनीति का कभी हिस्सा नहीं रहे। उन्होंने काउंटी क्रिकेट में जरूर अपना दम दिखाया, लेकिन अब वह इस प्रारूप में खेलते नजर नहीं आएंगे।

  • एक कुर्ता ढाई साल पहनते थे बाबा बागेश्वर लुधियाना में सुनाई संघर्ष की कहानी तो भावुक होकर रो पड़े

    एक कुर्ता ढाई साल पहनते थे बाबा बागेश्वर लुधियाना में सुनाई संघर्ष की कहानी तो भावुक होकर रो पड़े


    नई दिल्ली। बाबा बागेश्वर के नाम से प्रसिद्ध धीरेंद्र शास्त्री का एक वीडियो इन दिनों चर्चा में है जिसमें वह मंच पर श्रद्धालुओं के सामने भावुक होकर रोते हुए नजर आ रहे हैं। लुधियाना में कथा के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए दुनिया की हकीकत और अपने जीवन के संघर्षों का जिक्र किया। बातचीत के दौरान उनका गला भर आया और आंखों से आंसू छलक पड़े। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि दुनिया पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए क्योंकि यह जगत बड़ा अजीब है। यहां कई बार मुर्दों को उठाया जाता है और जिंदा लोगों को गिराया जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई बार जाने वाले व्यक्ति की पूजा होती है लेकिन जो सामने मौजूद है उसकी कोई परवाह नहीं करता।

    धीरेंद्र शास्त्री ने लुधियाना के लोगों से कहा कि वह वहां से जा रहे हैं और जाते समय उन्हें एक बात जरूर कहना चाहते हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिति को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि जिसके पास पैसा नहीं होता उसे समाज में अक्सर वह सम्मान नहीं मिलता जो संपन्न व्यक्ति को मिलता है। उन्होंने मंच से मौजूद लोगों का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े और अमीर लोग आसानी से मंच तक पहुंच जाते हैं जबकि गरीब व्यक्ति भीड़ में खड़ा रहकर सिर्फ ताली बजाता रह जाता है। इसी दौरान उन्होंने अपने जीवन के उन दिनों को याद किया जब उनके परिवार ने बेहद कठिन परिस्थितियों में समय बिताया था।

    अपने संघर्ष को याद करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने बताया कि उन्होंने गरीबी के दिन देखे हैं और भगवान से प्रार्थना की कि किसी को ऐसे दिन न देखने पड़ें। उन्होंने अपने बचपन के बारे में बताते हुए कहा कि वह करीब 15 साल तक भीख मांगने की स्थिति में रहे। उनका परिवार एक छोटी सी झोपड़ी में रहता था जहां माता पिता भाई बहन सभी साथ रहते थे। घर में उजाले के लिए बल्ब तक नहीं था। कभी कोई मिट्टी का तेल दे देता तो उसी से दीपक जलाकर रात गुजरती थी।

    उन्होंने बताया कि आज भले ही उनके पहनावे में बदलाव दिखाई देता हो लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनके पास पहनने के लिए सीमित कपड़े होते थे। एक कुर्ता लंबे समय तक पहनना पड़ता था। रक्षाबंधन की याद साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी बहन के पास मिठाई खरीदने के पैसे नहीं होते थे इसलिए वह चीनी से उनका मुंह मीठा कराती थी। इन पुरानी यादों को बताते हुए वह मंच पर भावुक हो गए।

    धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि गरीबी से बड़ी परेशानी शायद ही कोई हो। उन्होंने लोगों को अपनी मां की सीख भी बताई कि इस दुनिया से कुछ मांगने के बजाय उस ईश्वर से मांगना चाहिए जिसने पूरी दुनिया बनाई है। उनकी यह बात सुनकर कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालु भी भावुक नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए इस वीडियो में उनके संघर्ष की कहानी और मंच पर छलके आंसुओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।

  • MP: पन्ना की धरती ने फिर उगले हीरे…. चमकी महिला की किस्मत, 2 दिन में मिले चार डायमंड

    MP: पन्ना की धरती ने फिर उगले हीरे…. चमकी महिला की किस्मत, 2 दिन में मिले चार डायमंड


    पन्ना।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पन्ना जिले (Panna district) में छह महीने से पति के साथ हीरा खदान (Diamond Mine) में मेहनत कर रही झांसी की रहने वाली गुड्डी देवी (Guddi Devi) की किस्मत दो दिन में चार हीरे मिलने के बाद चमक गई। इस मामले की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने बताया कि सरकोहा क्षेत्र स्थित पट्टा खदान से मिले 5.16 कैरेट के इन हीरों की अनुमानित बाजार कीमत करीब 12 लाख रुपये है।


    सोशल मीडिया से सुनकर शुरू किया था काम

    गुड्डी देवी और उनके पति राजकुमार श्रीवास ने बताया कि झांसी में आर्थिक तंगी और काम ठीक नहीं चलने के कारण उन्होंने सोशल मीडिया पर पन्ना के हीरों से जुड़ी खबरें देखीं और यहां किस्मत आजमाने का फैसला किया। दोनों अपने बच्चों के साथ गुड्डी के मायके पन्ना आए और खदान पट्टे पर लेकर खुदाई शुरू की। अब उनकी किस्मत खुल गई है। 6 महीने की मेहनत के बाद अब पति-पत्नी खुश हैं।


    6 की मेहनत के बाद मिले हीरे

    सोशल मीडिया पर सुनने के बाद काम शुरू किया और करीब छह महीने की लगातार मेहनत के बाद उन्हें दो दिन में चार हीरे मिले, जिनमें 1.62 और 1.29 कैरेट के दो अच्छी गुणवत्ता के हीरे तथा 1.44 और 0.81 कैरेट के दो मध्यम गुणवत्ता के हीरे शामिल हैं। सूचना मिलने पर हीरा पारखी अनुपम सिंह गांधी जयंती के अवकाश के बावजूद कार्यालय पहुंचे और हीरों को आधिकारिक रूप से जमा कराया। सिंह ने बताया कि जमा किए गए हीरों को आगामी शासकीय नीलामी में रखा जाएगा। नीलामी से प्राप्त राशि में से शासकीय रॉयल्टी और कर की कटौती के बाद शेष रकम संबंधित खदान पट्टाधारक को सौंप दी जाएगी।


    क्या करेंगे इतनी बड़ी राशि का?

    दंपति ने इस सफलता को अपनी मेहनत और ईश्वर की कृपा का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि नीलामी से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल बच्चों की बेहतर शिक्षा, परिवार का भविष्य सुरक्षित करने और अपना व्यवसाय बढ़ाने में करेंगे।

  • ल्हुआन-ड्रे प्रीटोरियस ने T20 में बनाए नाबाद 188 रन…. रचा इतिहास, क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ा

    ल्हुआन-ड्रे प्रीटोरियस ने T20 में बनाए नाबाद 188 रन…. रचा इतिहास, क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ा


    नई दिल्ली।
    ल्हुआन-ड्रे प्रीटोरियस (Luan-Dre Pretorius) ने उस समय इतिहास रचा जब उन्होंने साउथ अफ्रीका (South Africa) की डोमेस्टिक टी20 लीग (Domestic T20 League) में 188 रनों की नाबाद पारी खेली। इस पारी के दम पर उन्होंने टी20 क्रिकेट (T20 Cricket) में सबसे बड़ी पारी खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड (World Record) अपने नाम किया। पिछले 13 सालों से यह रिकॉर्ड यूनिवर्स बॉस क्रिस गेल के नाम था, जिन्होंने आईपीएल 2013 में पुणे सुपर जाएंट्स के खिलाफ नाबाद 175 रन बनाए थे, अब प्रीटोरियस ने गेल का यह रिकॉर्ड तोड़ टी20 क्रिकेट में सबसे बड़ी पारी खेलने का वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है।

    लुआन-ड्रे प्रीटोरियस ने शुक्रवार को घरेलू CSA T20 चैलेंज मैच में नाइट्स के खिलाफ साउथ अफ्रीका टाइटन्स फ्रेंचाइजी के लिए 79 गेंदों पर नाबाद 188 रन बनाए। प्रीटोरियस ने अपनी इस पारी में 13 छक्के और 15 चौके लगाए। प्रीटोरियस को डबल सेंचुरी पूरी ना कर पाने का गम जरूर रहेगा, अगर उनके पास एक ओवर भी और होता तो शायद वह नया इतिहास लिख सकते थे।

    प्रीटोरियस की इस पारी के दम पर टाइटन्स ने 267 रन बोर्ड पर लगाए। 20 साल का यह खब्बू बल्लेबाज इस समय जबरदस्त फॉर्म में है। हाल ही में नामीबिया, जिम्बाब्वे और साउथ अफ्रीका के बीच हुई ट्राई सीरीज में उन्होंने 53 गेंदों पर 101 रनों की शानदार पारी खेली थी।


    प्रीटोरियस ने 24 गेंदों में ठोकी फिफ्टी, 40 गेंदों में पूरा किया शतक

    प्रीटोरियस ने अपनी इस पारी की शुरुआत तेज तर्रा की और 24 गेंदों में अपना पचास रन पूरे किए। उन्हें अपना शतक बनाने में सिर्फ 16 और गेंदें लगीं। वहीं 150 का आंकड़ा 58 गेंदों में छुआ। प्रीटोरियस ने पुरुषों के T20 में सबसे लंबी पारियों के मामले में एरॉन फिंच और मार्कस स्टोइनिस की बराबरी भी की।

    प्रीटोरियस के दम पर टाइटन्स ने 3 विकेट पर 267 रन बनाए, जो कॉम्पिटिशन के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा स्कोर है। इससे पहले उन्होंने 2022 में इसी टीम के खिलाफ 3 विकेट पर 271 रन बनाए थे उस मैच में डेवाल्ड ब्रेविस ने 162 रनों की पारी खेली थी, जो CSA T20 चैलेंज का सबसे बड़ा इंडिविजुअल स्कोर भी था। हालांकि अब यह रिकॉर्ड प्रीटोरियस के नाम हो गया है। वहीं टाइटन्स के पास अब CSA T20 चैलेंज के इतिहास के पांच सबसे बड़े टीम टोटल हैं।

    यह 2026-27 सीजन में प्रिटोरियस का पहला गेम था, और वह कुछ जबरदस्त फॉर्म के साथ कॉम्पिटिशन में आए थे। अपने पिछले दो मैचों में, उन्होंने सितंबर में ट्राई-सीरीज में ज़िम्बाब्वे और नामीबिया के ख़िलाफ़ क्रमशः 94 और 101 रन बनाए थे। उन्होंने सभी फॉर्मेट में सिर्फ 22 इंटरनेशनल मैच खेले हैं, लेकिन यह प्रिटोरियस का 91वां T20 था, एक ऐसा फॉर्मेट जिसमें वह 150.44 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग करते हैं।

  • देर रात भोपाल पहुंचे अमित शाह… आज गोपालक सम्मेलन में होंगे शामिल, देंगे कई सौगातें

    देर रात भोपाल पहुंचे अमित शाह… आज गोपालक सम्मेलन में होंगे शामिल, देंगे कई सौगातें


    भोपाल।
    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) शुक्रवार देररात भोपाल पहुंचे। यहां सीएम मोहन यादव (CM Mohan Yadav) और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल (Hemant Khandelwal) ने स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री अमित शाह शनिवार को राजधानी में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल होंगे। इसमें प्रदेश के अलग-अलग जिलों से 35 हजार से अधिक गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य जुटेंगे। इसके अलावा वे नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे और मध्य प्रदेश सरकार व केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक करेंगे।

    राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित होगा। इसमें भोपाल के अलावा सीहोर, बैतूल, राजगढ़, हरदा, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन और नर्मदापुरम समेत कई जिलों से गोपालक और दुग्ध सहकारी समितियों के सदस्य पहुंचेंगे। सम्मेलन में कृषक कल्याण वर्ष के तहत किए गए कार्यों और बलराम कृषि महोत्सव की जानकारी अमित शाह को दी जाएगी। गृह, पशुपालन, सहकारिता, लोक निर्माण और परिवहन विभाग की ओर से अपने-अपने कार्यों और योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। सम्मेलन में दुग्ध उत्पादन और सहकारिता को बढ़ावा देने से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी।


    उज्जैन में डेयरी प्लांट का वर्चुअल भूमि-पूजन करेंगे

    अमित शाह उज्जैन में तीन लाख लीटर प्रसंस्करण क्षमता वाले अत्याधुनिक डेयरी प्लांट का वर्चुअल तरीके से भूमि-पूजन करेंगे। वे भोपाल में तैयार 40 हजार लीटर उत्पादन क्षमता वाले फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल के परिसर में बनाई गई सहकारी क्षेत्र की पहली अत्याधुनिक राज्य स्तरीय डेयरी परीक्षण प्रयोगशाला और मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ भी करेंगे।


    नए आपराधिक कानूनों पर प्रदर्शनी का उद्घाटन

    अमित शाह भेल दशहरा मैदान में नए आपराधिक कानूनों को लेकर आयोजित राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद होटल ताज लेक फ्रंट में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक होगी। नारकोटिक्स को लेकर प्रेस वार्ता भी उनके कार्यक्रम में शामिल है। शाह IISER के विस्तारित परिसर भौरी का शिलान्यास भी करेंगे। इसके बाद IISER के मुख्य परिसर में स्वामी विवेकानंद की नवनिर्मित प्रतिमा के अनावरण एवं शिलान्यास समारोह में शामिल होंगे।


    शनिवार का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम

    सुबह 11 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट से सड़क मार्ग से भेल दशहरा मैदान के लिए रवाना होंगे।
    सुबह 11:25 बजे: भेल दशहरा मैदान पहुंचेंगे।
    सुबह 11:30 से दोपहर 12:00 बजे तक: नए आपराधिक कानूनों पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
    दोपहर 12:05 से 1:05 बजे तक: भेल दशहरा मैदान में राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में शामिल होंगे।
    दोपहर 1:05 बजे: भेल दशहरा मैदान से होटल ताज के लिए रवाना होंगे।
    दोपहर 1:30 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट पहुंचेंगे।
    दोपहर 1:30 से 2:15 बजे तक: लंच के लिए समय आरक्षित रहेगा।
    दोपहर 2:15 से शाम 4:15 बजे तक: होटल ताज में मध्य प्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के बीच लंबित विषयों पर बैठक करेंगे।
    शाम 4:15 से 5:15 बजे तक: समय आरक्षित रहेगा। इस दौरान नारकोटिक्स पर प्रेस वार्ता निर्धारित है।
    शाम 5:15 बजे: होटल ताज लेक फ्रंट से सड़क मार्ग से IISER के विस्तारित परिसर, भौरी के लिए रवाना होंगे।
    शाम 5:40 बजे: IISER के विस्तारित परिसर, भोपाल बायपास रोड, भौरी पहुंचेंगे।
    शाम 5:45 से 6:00 बजे तक: IISER के विस्तारित परिसर के शिलान्यास कार्यक्रम में शामिल होंगे।
    शाम 6 बजे: IISER के विस्तारित परिसर से IISER मुख्य परिसर, भौरी के लिए रवाना होंगे।
    शाम 6:05 बजे: IISER मुख्य परिसर, भौरी पहुंचेंगे।
    शाम 6:10 से 7:25 बजे तक: स्वामी विवेकानंद की नवनिर्मित प्रतिमा के अनावरण एवं शिलान्यास समारोह में शामिल होंगे।
    शाम 7:30 बजे: IISER मुख्य परिसर, भौरी से सड़क मार्ग से भोपाल स्टेट हैंगर के लिए रवाना होंगे।
    शाम 7:45 बजे: भोपाल स्टेट हैंगर पहुंचेंगे।
    शाम 7:50 बजे: विशेष विमान से भोपाल से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

  • Navratri 2026 Date: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना का मिलेगा विशेष अवसर

    Navratri 2026 Date: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे शारदीय नवरात्र चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना का मिलेगा विशेष अवसर


    नई दिल्ली। शारदीय नवरात्र 2026 इस बार एक विशेष ज्योतिषीय संयोग के कारण चर्चा में हैं। मां दुर्गा की आराधना का यह पावन पर्व इस वर्ष 11 अक्टूबर से शुरू होगा और पूरे 10 कैलेंडर दिनों तक चलेगा। पंचांग की गणना के अनुसार करीब 50 वर्षों में छठी बार ऐसा संयोग बन रहा है जब तिथि के विस्तार के कारण नवरात्र की अवधि सामान्य से अधिक होगी। इस दौरान अष्टमी तिथि दो दिन पड़ने के कारण पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों का कार्यक्रम भी खास रहेगा। श्रद्धालु घरों और मंदिरों में मां भगवती की उपासना करेंगे और पूरे विधि-विधान से घटस्थापना कर नवरात्र की शुरुआत करेंगे।

    काशी के विद्वान ज्योतिषियों के अनुसार जब किसी तिथि की अवधि एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बाद तक बनी रहती है तो पंचांग की गणना में उसका प्रभाव लगातार दो दिनों तक माना जा सकता है। इसी तरह तिथि के विस्तार से इस बार नवरात्र की अवधि 10 कैलेंडर दिनों की हो रही है। बीएचयू के ज्योतिष विभाग के ज्योतिषाचार्य प्रोफेसर सुभाष पांडेय के अनुसार नवरात्र के पहले दिन चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का संयोग बन रहा है। इस वजह से घटस्थापना के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व रहेगा।

    पंचांग के अनुसार 11 अक्टूबर को घटस्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह नहीं बल्कि दोपहर में निर्धारित किया गया है। कलश स्थापना का शुभ समय सुबह 11 बजकर 37 मिनट से दोपहर 12 बजकर 23 मिनट तक रहेगा। श्रद्धालुओं को पूजा संकल्प और घटस्थापना के लिए कुल 48 मिनट का समय मिलेगा। जो भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं वे इस अवधि में विधि-विधान से कलश स्थापित कर पूजा आरंभ कर सकते हैं। हालांकि स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है इसलिए श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग से भी जानकारी लेनी चाहिए।

    तिथियों की गणना के मुताबिक 18 अक्टूबर को पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी जबकि 19 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 53 मिनट तक अष्टमी का प्रभाव बना रहेगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी जो 20 अक्टूबर की सुबह 9 बजकर 29 मिनट तक रहेगी। इसी कारण इस बार नवरात्र का कैलेंडर दस दिनों का होगा। पंचांग के अनुसार 20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। इस दिन नवरात्र के समापन के साथ दशहरा पर्व का धार्मिक महत्व भी रहेगा। कन्या पूजन और व्रत पारण करने वाले श्रद्धालुओं को तिथि और स्थानीय परंपरा के अनुसार समय का ध्यान रखना होगा।

    इस बार मां दुर्गा के आगमन और प्रस्थान को लेकर भी ज्योतिषीय मान्यताओं में विशेष चर्चा है। शास्त्रीय गणना के अनुसार रविवार से नवरात्र शुरू होने के कारण मां दुर्गा का आगमन हाथी पर माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी पर देवी के आगमन को अच्छी वर्षा और अतिवृष्टि के संकेत से जोड़ा जाता है। वहीं देवी का प्रस्थान मुर्गे पर होने की मान्यता है जिसे कुछ परंपराओं में जनमानस की व्याकुलता और अशांति से जोड़कर देखा जाता है। ये ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं हैं इन्हें निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

    नवरात्र के दौरान भक्त मां शैलपुत्री से लेकर मां सिद्धिदात्री तक नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं। घरों में अखंड ज्योति प्रज्वलित की जाती है और मंदिरों में विशेष श्रृंगार भजन कीर्तन तथा धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं। श्रद्धालु मानते हैं कि सच्ची श्रद्धा और विधि-विधान से की गई आराधना से जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। इस तरह 2026 का शारदीय नवरात्र तिथि विस्तार शुभ मुहूर्त और विशेष धार्मिक मान्यताओं के कारण भक्तों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है।

  • एशियन गेम्स 2026: भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल मुकाबला आज…. मैच से दूर रहेंगे नकवी

    एशियन गेम्स 2026: भारत-पाकिस्तान के बीच फाइनल मुकाबला आज…. मैच से दूर रहेंगे नकवी


    नई दिल्ली।
    एशियन गेम्स 2026 (Asian Games 2026 ) में भारत और पाकिस्तान (India vs Pakistan) के बीच मेन्स क्रिकेट प्रतियोगिता (Men’s cricket tournament) का फाइनल 3 अक्टूबर (शनिवार) को होना है. यह गोल्ड मेडल मुकाबला निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में सुबह 10 से निर्धारित है. इस मुकाबले की शुरुआत से सभी की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) के अध्यक्ष के तौर पर मोहसिन नकवी (Mohsin Naqvi) फाइनल में मौजूद रहेंगे या नहीं. इसकी एक वजह हाल के भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मुकाबलों में ट्रॉफी प्रेजेंटेशन को लेकर हुई घटनाएं हैं. हालांकि इसे लेकर सस्पेंस खत्म हो चुका है. फाइनल में एसीसी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के प्रमुख नकवी का साया नहीं होगा।

    एसीसी ने बताया कि मोहसिन नकवी पहले से तय प्रतिबद्धताओं के कारण एशियन गेम्स के फाइनल डे में शामिल नहीं हो पाएंगे. उन्होंने गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में उतरने वाली चारों टीमों को शुभकामनाएं दी हैं. नकवी ने भी कहा है कि उनकी पूर्व निर्धारित व्यस्तताएं उन्हें नागोया से दूर रखेंगी, हालांकि वह मुकाबलों के एक्शन का इंतजार कर रहे हैं।

    मेन्स एशिया कप 2025 और विमेंस एशिया कप 2026 में भारतीय टीम्स की खिताबी जीत के बाद ट्रॉफी प्रेजेंशन को लेकर विवाद हुआ था. भारतीय टीम्स ने मोहसिन नकवी के हाथों ट्रॉफी लेना स्वीकार नहीं किया था. उन दोनों टूर्नामेंट में भारतीय टीम ने बगैर ट्रॉफी के ही जश्न मनाया. ऐसे में एशियन गेम्स के फाइनल में उनकी संभावित मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठ रहे थे. अब एसीसी की ओर से उनकी गैरमौजूदगी की पुष्टि हो चुकी है. यानी आज भारत-पाकिस्तान के गोल्ड मेडल मैच में नकवी स्टेडियम में मौजूद नहीं होंगे।


    सेमीफाइनल में पस्त हो गया था श्रीलंका

    भारत और पाकिस्तान दोनों को टूर्नामेंट में आईसीसी रैंकिंग के आधार पर सीधे क्वार्टर फाइनल में जगह मिली थी. बारिश के कारण दोनों के क्वार्टर फाइनल मुकाबले रद्द हो गए और बेहतर सीडिंग के कारण दोनों टीमें सेमीफाइनल में पहुंच गईं. भारत का सेमीफाइनल श्रीलंका के खिलाफ हुआ. भारतीय टीम ने टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 169/7 का स्कोर बनाया. ईशान किशन ने 4 चौके और पांच छक्के की मदद से नाबाद 80 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि वैभव सूर्यवंशी ने 21 गेंदों में 38 रन बनाकर तेज शुरुआत दी. इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने श्रीलंका की पारी को सिर्फ 45 रनों पर समेट दिया और भारत ने 124 रन से मुकाबला जीत लिया।

    उधर पहले सेमीफाइनल में पाकिस्तानी टीम का सामना बांग्लादेश से हुआ था. बारिश के कारण मुकाबला वो 13-13 ओवर्स का कर दिया गया. बांग्लादेश ने 111/7 रन बनाए, जिसके जवाब में पाकिस्तान ने 11.3 ओवर में 6 विकेट से लक्ष्य हासिल कर लिया. अब दोनों टीमें गोल्ड मेडल के लिए आमने-सामने हैं।

    भारत एशियन गेम्स में मेन्स क्रिकेट का डिफेंडिंग चैंपियन है. टीम ने 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था. अब श्रेयस अय्यर की कप्तानी वाली भारतीय टीम के पास लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतने का मौका है. यह मुकाबला इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्समें पहली बार मेन्स क्रिकेट में भारत और पाकिस्तान आमने-सामने हैं. इससे पहले एशियन गेम्स में दोनों की भिड़ंत नहीं हुई थी. भारतीय टीम में श्रेयस अय्यर, अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन, अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुंदर, जसप्रीत बुमराह और वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी शामिल हैं. उधर पाकिस्तान की कमान साहिबजादा फरहान के हाथों में है।

  • आज जितिया व्रत पर बन रहा है खास संयोग जानें पूजा का सही समय व्रत कथा और पारण से जुड़े जरूरी नियम

    आज जितिया व्रत पर बन रहा है खास संयोग जानें पूजा का सही समय व्रत कथा और पारण से जुड़े जरूरी नियम


    नई दिल्ली। जितिया व्रत 2026 का पर्व आज 3 अक्टूबर शनिवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इसे जीवित्पुत्रिका व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत विशेष रूप से संतान की लंबी उम्र अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से किया जाता है। बिहार झारखंड उत्तर प्रदेश और आसपास के कई क्षेत्रों में इस पर्व का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन माताएं निर्जला उपवास रखती हैं और भगवान जीमूतवाहन की पूजा करके संतान की सुख समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। व्रत के दौरान पूजा के शुभ मुहूर्त सामग्री और पारण के समय का विशेष ध्यान रखा जाता है।

    आज 3 अक्टूबर को रखा जा रहा है जितिया व्रत

    हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 59 मिनट पर शुरू हुई है और 4 अक्टूबर की सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि और प्रदोष काल की परंपरा को ध्यान में रखते हुए आज ही मुख्य व्रत रखा जा रहा है। इससे पहले 2 अक्टूबर को नहाय-खाय की परंपरा निभाई गई थी। आज महिलाएं निर्जला उपवास रखकर भगवान जीमूतवाहन की पूजा करेंगी और व्रत कथा सुनेंगी।

    जितिया व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त

    जितिया व्रत में प्रदोष काल के दौरान भगवान जीमूतवाहन की पूजा करना विशेष महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार 3 अक्टूबर को शाम 6 बजकर 5 मिनट से रात 8 बजकर 29 मिनट तक पूजा का समय बताया गया है। इस दौरान महिलाएं विधि विधान से पूजा कर सकती हैं। व्रत का संकल्प लेने के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक बताया गया है। ध्यान रखें कि शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त में कुछ अंतर हो सकता है।

    जितिया व्रत की पूजा सामग्री

    भगवान जीमूतवाहन की पूजा के लिए उनकी प्रतिमा या चित्र कुश गोबर धूप दीप रोली सिंदूर अक्षत फूल फल और प्रसाद जैसी सामग्री रखी जाती है। इसके अलावा पूजा के दौरान व्रत कथा सुनने और आरती करने की परंपरा है। कई क्षेत्रों में महिलाएं घर के आंगन में छोटा पोखर बनाकर भी पूजा करती हैं। हालांकि पूजा की विधि और सामग्री परिवार तथा क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

    क्यों की जाती है भगवान जीमूतवाहन की पूजा

    जितिया व्रत की परंपरा राजा जीमूतवाहन की कथा से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार जीमूतवाहन ने नागवंश की रक्षा के लिए अपने प्राणों का त्याग करने का संकल्प लिया था। उनकी करुणा और त्याग की कथा इस व्रत में विशेष रूप से सुनी जाती है। महिलाएं पूजा के दौरान भगवान जीमूतवाहन का स्मरण कर संतान की लंबी उम्र और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं।

    4 अक्टूबर को होगा व्रत का पारण

    जितिया व्रत का पारण रविवार 4 अक्टूबर को किया जाएगा। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार सुबह 7 बजकर 28 मिनट के बाद पारण का समय बताया गया है। व्रत समाप्त करने के बाद महिलाएं पूजा अर्चना करके भोजन ग्रहण करती हैं। पारण से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा। धार्मिक मान्यताओं में जितिया व्रत को मातृत्व प्रेम त्याग और संतान के कल्याण का प्रतीक माना जाता है।