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  • पीएम मोदी का वीडियो हटने के विवाद पर महुआ मोइत्रा का बयान, मेटा और सरकार के बीच बढ़ा सियासी टकराव

    पीएम मोदी का वीडियो हटने के विवाद पर महुआ मोइत्रा का बयान, मेटा और सरकार के बीच बढ़ा सियासी टकराव

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फेसबुक वीडियो कुछ समय के लिए हटाए जाने के बाद शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और तकनीकी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। इस पूरे मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क जुकरबर्ग के समर्थन में बयान देते हुए कहा है कि उन्हें किसी भी प्रकार के सरकारी दबाव में नहीं आना चाहिए और न ही इस मुद्दे पर माफी मांगनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर और तेज हो गया है।

    महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में आरोप लगाया कि भारत सरकार अक्सर अपनी आलोचना से जुड़े कंटेंट को हटवाने का प्रयास करती है। उन्होंने कहा कि किसी तकनीकी कारण से कुछ घंटों के लिए वीडियो हट जाना कोई ऐसा मामला नहीं है, जिससे बड़ा संकट पैदा हो जाए। उनका कहना था कि किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म को स्वतंत्र रूप से अपने नियमों के अनुसार काम करना चाहिए और दबाव में निर्णय नहीं लेने चाहिए।

    यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो फेसबुक से अस्थायी रूप से हट गया था। वीडियो में उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। बाद में मेटा ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद व्यक्त किया और वीडियो को दोबारा बहाल कर दिया। हालांकि केंद्र सरकार ने इस स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संसदीय समिति की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान सदस्यों ने सवाल उठाया कि यदि देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक वीडियो भी सुरक्षित नहीं रह सकता, तो आम नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर क्या भरोसा किया जा सकता है। समिति में डीपफेक तकनीक की रोकथाम और एल्गोरिदम की प्रभावशीलता पर भी चर्चा की गई।

    बैठक में उपस्थित मेटा अधिकारियों ने घटना पर खेद व्यक्त करते हुए समिति के सामने माफी मांगने की बात कही। कई सदस्यों ने केवल माफी को पर्याप्त नहीं बताते हुए जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग भी रखी। उनका कहना था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को अपनी तकनीकी और निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना होगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एआई तकनीक से तैयार किए गए कथित मॉर्फ्ड फोटो और वीडियो प्रसारित किए जाने के मामले में भी जांच तेज हो गई है। इस संबंध में हैदराबाद पुलिस ने फेसबुक, इंस्टाग्राम और मेटा इंडिया से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आवश्यक जानकारी मांगी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कथित रूप से भ्रामक सामग्री तैयार करने और प्रसारित करने में किन लोगों की भूमिका रही। केंद्र सरकार ने भी इस पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत जवाब मांगा है। ऐसे में तकनीकी प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सुरक्षा को लेकर बहस एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर तेज होती दिखाई दे रही है।

  • दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन

    दतिया की हार से भाजपा सतर्क, कैलाश विजयवर्गीय बोले- भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, करेंगे मंथन


    इंदौर  मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिली हार के बाद पार्टी के भीतर आत्ममंथन का दौर शुरू हो गया है। प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने चुनाव परिणाम पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट कहा कि उपचुनाव का महत्व भले ही आम चुनाव जितना न हो, लेकिन हार को कभी हल्के में नहीं लिया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी इस परिणाम की गंभीर समीक्षा करेगी और यह पता लगाएगी कि किन कारणों से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा।

    इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि चुनावी हार हमेशा सीख देने वाली होती है। उन्होंने कहा कि पार्टी का संगठन हर चुनाव के बाद उसकी समीक्षा करता है और दतिया उपचुनाव के परिणामों का भी गहराई से विश्लेषण किया जाएगा। उनका कहना था कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन इस हार पर गंभीरता से विचार करेगा और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    विजयवर्गीय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर चुनाव महत्वपूर्ण होता है। जीत से कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, जबकि हार संगठन को आत्मविश्लेषण का अवसर देती है। इसलिए पार्टी इस परिणाम को नजरअंदाज नहीं करेगी, बल्कि सभी पहलुओं पर विचार करते हुए संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर सुधार की दिशा में काम करेगी।

    मीडिया ने जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के प्रभाव वाले क्षेत्र में आए चुनाव परिणाम को लेकर सवाल किया तो विजयवर्गीय ने कहा कि वे स्वयं चुनाव प्रचार के लिए वहां गए थे। उन्होंने माना कि यह काफी हद तक व्यक्ति आधारित सीट थी और जिस नेता का उस क्षेत्र में व्यक्तिगत प्रभाव था, उनके चुनाव नहीं लड़ने का असर भी परिणामों पर देखने को मिला। उन्होंने कहा कि कई बार स्थानीय समीकरण और उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता चुनाव परिणामों को प्रभावित करती है। ऐसे मामलों में राजनीतिक परिस्थितियां सामान्य चुनावों से अलग होती हैं।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी केवल संगठनात्मक समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका, जनसंपर्क अभियान, चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय समीकरणों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। भाजपा का प्रयास रहेगा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों और संगठन पहले से अधिक मजबूती के साथ चुनावी मैदान में उतरे।

    दतिया उपचुनाव के परिणाम ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। कांग्रेस इस जीत को जनता का भाजपा सरकार के खिलाफ संदेश बता रही है, जबकि भाजपा इसे स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवार आधारित चुनाव मानते हुए आगे की रणनीति बनाने में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व लगातार यह संदेश देने का प्रयास कर रहा है कि एक उपचुनाव का परिणाम उसके व्यापक जनाधार को प्रभावित नहीं करता, लेकिन इससे मिलने वाले संकेतों को गंभीरता से लेना आवश्यक है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए भाजपा संगठन अब जमीनी स्तर पर अपनी रणनीति को और मजबूत करने की दिशा में काम करेगा। वहीं कैलाश विजयवर्गीय के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि पार्टी इस हार को केवल औपचारिक घटना मानकर नहीं छोड़ेगी, बल्कि इसके कारणों की विस्तृत समीक्षा कर संगठन को और अधिक प्रभावी बनाने की कोशिश करेगी।

  • सरकार ने LIC में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री शुरू की, शेयर 8 प्रतिशत तक टूटने से बाजार में हलचल

    सरकार ने LIC में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री शुरू की, शेयर 8 प्रतिशत तक टूटने से बाजार में हलचल

    नई दिल्ली । देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के शेयर मंगलवार को तेज दबाव में दिखाई दिए। केंद्र सरकार द्वारा ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) के माध्यम से अपनी हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद कंपनी के शेयर में कारोबार के दौरान लगभग 8 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि बाद में शेयर में कुछ सुधार देखने को मिला, लेकिन दिनभर निवेशकों के बीच इस फैसले को लेकर चर्चा बनी रही।

    सरकार ने एलआईसी में अपनी 2.5 प्रतिशत मूल हिस्सेदारी बिक्री के साथ 4 प्रतिशत तक का ग्रीनशू विकल्प भी रखा है। इस तरह कुल 6.5 प्रतिशत हिस्सेदारी बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई है। इस हिस्सेदारी बिक्री से केंद्र सरकार को 31 हजार करोड़ रुपये से अधिक जुटाने की उम्मीद है। यह सार्वजनिक क्षेत्र की किसी प्रमुख वित्तीय संस्था में सरकार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी बिक्री में शामिल माना जा रहा है।

    ऑफर फॉर सेल के लिए प्रति शेयर 382 रुपये का फ्लोर प्राइस तय किया गया है, जो बाजार मूल्य से लगभग 10 प्रतिशत कम है। इसी वजह से बाजार खुलते ही एलआईसी के शेयर पर दबाव बढ़ गया और निवेशकों ने बिकवाली शुरू कर दी। कारोबार के दौरान शेयर लगभग 390.70 रुपये तक फिसल गया। बाद में कुछ खरीदारी लौटने से गिरावट सीमित हुई, लेकिन शेयर दिनभर दबाव में ही कारोबार करता रहा।

    शेयर में आई गिरावट का असर कंपनी के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी दिखाई दिया। एलआईसी का मार्केट कैप घटकर लगभग 5.03 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ओएफएस के दौरान फ्लोर प्राइस कम तय होने के कारण अल्पकालिक दबाव बनना सामान्य स्थिति है। हालांकि दीर्घकाल में कंपनी के प्रदर्शन और निवेशकों की भागीदारी पर बाजार की नजर बनी रहेगी।

    सरकार की ओर से यह ऑफर दो दिनों के लिए खोला गया है। पहले दिन गैर-खुदरा यानी संस्थागत निवेशकों को आवेदन का अवसर दिया गया है, जबकि दूसरे दिन खुदरा निवेशक भी इसमें भाग ले सकेंगे। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार अपनी हिस्सेदारी घटाने के साथ-साथ सार्वजनिक शेयरधारिता बढ़ाने के लक्ष्य को भी पूरा करना चाहती है।

    वर्तमान में एलआईसी में केंद्र सरकार की लगभग 96.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। नियामकीय प्रावधानों के अनुसार सूचीबद्ध कंपनियों में न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता बनाए रखना आवश्यक होता है। ऐसे में इस हिस्सेदारी बिक्री को उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य बाजार में अधिक सार्वजनिक भागीदारी सुनिश्चित करने के साथ पूंजी जुटाना भी है।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की प्रतिक्रिया, ओएफएस को मिलने वाला प्रतिसाद और एलआईसी के शेयर का प्रदर्शन इस प्रक्रिया की सफलता तय करेगा। फिलहाल निवेशकों की नजर इस हिस्सेदारी बिक्री और इसके बाजार पर पड़ने वाले प्रभाव पर बनी हुई है।

  • ईरान से बातचीत पर अमेरिका ने गिनाए प्रमुख साझेदार, पाकिस्तान का नाम गायब रहने से बढ़ी राजनीतिक चर्चा

    ईरान से बातचीत पर अमेरिका ने गिनाए प्रमुख साझेदार, पाकिस्तान का नाम गायब रहने से बढ़ी राजनीतिक चर्चा


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया जारी है और इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात तथा कतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान में पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं किया, जिससे क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों को लेकर नई अटकलें शुरू हो गई हैं।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान की ओर से बातचीत की पहल हुई है और कई क्षेत्रीय देशों के सहयोग से संवाद आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब, यूएई और कतर इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। ट्रंप के बयान में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं होने को कई विश्लेषक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

    पिछले कुछ समय से पाकिस्तान स्वयं को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश करता रहा है। इस दौरान उसने दोनों देशों के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखने की रणनीति अपनाई। लेकिन ट्रंप के ताजा बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि मौजूदा वार्ता प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका सीमित या नगण्य मानी जा रही है।

    विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही पाकिस्तान की संभावित भूमिका को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं रहे हैं। ईरान पहले भी पाकिस्तान की विदेश नीति और अमेरिका के साथ उसके संबंधों को लेकर सवाल उठाता रहा है। वहीं अमेरिका के कुछ नेताओं ने भी समय-समय पर पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर चिंता जताई है। ऐसे माहौल में ट्रंप का बयान क्षेत्रीय कूटनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत माना जा रहा है।

    हाल के महीनों में पाकिस्तान को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों और दावों ने भी चर्चा को प्रभावित किया है। कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान, चीन और ईरान के बीच रक्षा सहयोग तथा हथियारों की आपूर्ति से जुड़े दावे किए गए थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाक्रमों के बीच पाकिस्तान की संभावित भूमिका पर भी बहस जारी है।

    इसी दौरान ट्रंप ने ईरान को परमाणु समझौते के मुद्दे पर भी कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि ईरान समझौते का अवसर नहीं अपनाता है तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ट्रंप के अनुसार मौजूदा समय किसी सकारात्मक समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण अवसर है और सभी पक्षों को इसका लाभ उठाना चाहिए।

    हालांकि दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के साथ किसी औपचारिक वार्ता की बात से इनकार किया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि ऐसी किसी प्रत्यक्ष बातचीत की पुष्टि नहीं की जा सकती। इससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों देशों के बीच संवाद को लेकर अभी भी अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं और स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों में क्षेत्रीय सहयोगी देशों की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या किसी नए समझौते का रास्ता निकलता है, इस पर वैश्विक समुदाय की नजर बनी रहेगी। साथ ही पाकिस्तान की संभावित भूमिका को लेकर भी आगे के घटनाक्रम महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • आएशा जफर की ऑलराउंड चमक, पाकिस्तान ने आखिरी मैच जीता, सीरीज श्रीलंका के कब्जे में

    आएशा जफर की ऑलराउंड चमक, पाकिस्तान ने आखिरी मैच जीता, सीरीज श्रीलंका के कब्जे में


    नई दिल्ली । श्रीलंका और पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीमों के बीच खेली गई तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का समापन रोमांचक मुकाबले के साथ हुआ। दांबुला के रंगिरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में खेले गए तीसरे और अंतिम मैच में पाकिस्तान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए श्रीलंका को 4 विकेट से हरा दिया। हालांकि यह जीत पाकिस्तान के लिए केवल सांत्वना साबित हुई क्योंकि शुरुआती दोनों मुकाबले जीतकर श्रीलंका पहले ही सीरीज अपने नाम कर चुकी थी। इसके साथ ही मेजबान टीम ने 2-1 से सीरीज जीतकर घरेलू मैदान पर अपनी श्रेष्ठता कायम रखी।

    मैच में पाकिस्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया और उसके गेंदबाजों ने कप्तान के इस निर्णय को सही साबित किया। श्रीलंका की बल्लेबाजी शुरुआत से ही संघर्ष करती नजर आई और नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे। कप्तान चमारी अथापथु ने जिम्मेदारी संभालते हुए सबसे अधिक 34 रन बनाए। उन्होंने 33 गेंदों की अपनी पारी में पांच चौकों की मदद से टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश की। उनके अलावा संजाना काविंदी ने 20 और इमेशा दुलानी ने 17 रन का योगदान दिया। निर्धारित 20 ओवर में श्रीलंका की टीम 6 विकेट खोकर 113 रन ही बना सकी।

    पाकिस्तान की गेंदबाजी काफी अनुशासित रही। मोमिमा रियासत ने दो विकेट हासिल किए, जबकि उमे हानी, नशरा संधू, तुबा हसन और आएशा जफर ने एक-एक सफलता अर्जित की। गेंदबाजों ने श्रीलंका को बड़े शॉट खेलने का मौका नहीं दिया और पूरे मैच में दबाव बनाए रखा।

    114 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तान की टीम ने संयमित बल्लेबाजी की। कप्तान मुनीबा अली ने 19 रन बनाकर अच्छी शुरुआत दिलाई, जबकि शावल जुल्फिकार ने 21 रन का उपयोगी योगदान दिया। मैच की सबसे महत्वपूर्ण पारी चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने आईं आएशा जफर ने खेली। उन्होंने 31 गेंदों पर 39 रन बनाए, जिसमें छह चौके शामिल रहे। दबाव के बीच उनकी यह पारी पाकिस्तान की जीत की नींव साबित हुई। अंत में सायरा जबीन ने नाबाद 12 रन बनाकर टीम को 18.2 ओवर में 6 विकेट खोकर लक्ष्य तक पहुंचा दिया।

    श्रीलंका की ओर से कप्तान चमारी अथापथु ने गेंद से भी शानदार प्रदर्शन किया और चार ओवर में 20 रन देकर दो विकेट झटके। कविशा दिल्हाड़ी ने भी दो विकेट हासिल किए, जबकि निमाशा मीपागे को एक सफलता मिली। बावजूद इसके श्रीलंकाई गेंदबाज पाकिस्तान की जीत नहीं रोक सके।

    शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए आएशा जफर को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। उन्होंने बल्ले से 39 रन बनाने के साथ गेंदबाजी में भी एक विकेट लेकर अपनी टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। वहीं पूरी सीरीज में लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन करने वाली श्रीलंका की इमेशा दुलानी को प्लेयर ऑफ द सीरीज का पुरस्कार मिला। उन्होंने तीन मैचों में कुल 123 रन बनाकर टीम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    हालांकि पाकिस्तान ने अंतिम मुकाबला जीतकर आत्मविश्वास हासिल किया, लेकिन शुरुआती दोनों मैचों में छह-छह विकेट से मिली जीत के दम पर श्रीलंका ने 2-1 से सीरीज अपने नाम कर यह साबित कर दिया कि घरेलू परिस्थितियों में उसकी टीम कितनी मजबूत है। दूसरी ओर पाकिस्तान इस जीत से सकारात्मक संकेत लेकर आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की तैयारी करेगा।

  • दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    दतिया उपचुनाव में हार के कारण तलाशेगी भाजपा, प्रदेश नेतृत्व ने गठित की दो सदस्यीय समीक्षा समिति

    मध्य प्रदेश । दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर समीक्षा प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रदेश नेतृत्व ने चुनाव परिणामों का विस्तृत विश्लेषण करने और हार के कारणों का पता लगाने के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने समीक्षा समिति के गठन की घोषणा की है। समिति में प्रदेश महामंत्री गौरव रणदीवे और वरिष्ठ नेता अंबाराम कराड़ा को शामिल किया गया है। पार्टी का कहना है कि समिति उपचुनाव के दौरान संगठन की भूमिका, चुनावी प्रबंधन, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और मतदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं का गहन अध्ययन करेगी। इसके बाद तैयार रिपोर्ट प्रदेश नेतृत्व को सौंपी जाएगी।

    भाजपा के अनुसार समिति यह भी आकलन करेगी कि चुनाव में अपेक्षित प्रदर्शन क्यों नहीं हो सका और किन कारणों से पार्टी सीट जीतने में असफल रही। समीक्षा रिपोर्ट में संगठनात्मक सुधार, चुनावी रणनीति और भविष्य की तैयारियों से जुड़े सुझाव भी शामिल किए जा सकते हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर पार्टी आगामी चुनावों के लिए अपनी कार्ययोजना में आवश्यक बदलाव कर सकती है।

    दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया था। इसके बाद रिक्त हुई सीट पर 30 जुलाई को मतदान हुआ। कांग्रेस ने एक बार फिर घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया, जबकि भाजपा ने इस बार पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा। पार्टी को नए चेहरे से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन परिणाम उसके पक्ष में नहीं आया।

    चुनाव प्रचार के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा ने भी पार्टी उम्मीदवार के समर्थन में व्यापक प्रचार किया था। इसके बावजूद भाजपा सीट अपने नाम नहीं कर सकी। इस नतीजे के बाद पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और संगठनात्मक समन्वय को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा उम्मीदवार बदलने के फैसले को लेकर हो रही है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। उपचुनाव में भाजपा ने नया उम्मीदवार उतारकर चुनावी समीकरण बदलने की कोशिश की, लेकिन यह रणनीति सफल नहीं हो सकी। अब इस निर्णय को भी समीक्षा के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल माना जा रहा है।

    उपचुनाव के नतीजों के बाद बूथवार मतदान के आंकड़ों ने भी राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है। नरोत्तम मिश्रा के बूथ नंबर 121 पर भी भाजपा कांग्रेस से पीछे रही। इस बूथ पर कांग्रेस को भाजपा से अधिक मत मिले, जिससे स्थानीय संगठन की सक्रियता और परंपरागत वोट बैंक को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। इसके बाद पार्टी के भीतर समन्वय और संभावित भीतरघात को लेकर भी चर्चाएं सामने आई हैं।

    भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनावी हार की निष्पक्ष समीक्षा से भविष्य में संगठन को मजबूत बनाने और चुनावी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। अब सभी की नजर समिति की रिपोर्ट पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि दतिया उपचुनाव में हार के पीछे कौन-कौन से प्रमुख कारण रहे और पार्टी आगे किन सुधारों पर जोर देगी।

  • यूपी कैबिनेट में 21 बड़े फैसलों पर मुहर: जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी, किसानों के लिए गए कई अहम निर्णय

    यूपी कैबिनेट में 21 बड़े फैसलों पर मुहर: जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी, किसानों के लिए गए कई अहम निर्णय

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई उत्तर प्रदेश मंत्रिपरिषद (कैबिनेट) की बैठक में राज्य के विकास, बुनियादी ढांचे, किसानों, श्रमिकों और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े 21 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने कनेक्टिविटी बढ़ाने, कृषि सुरक्षा, सामाजिक कल्याण और प्रशासनिक सुधारों पर विशेष जोर देते हुए कई बड़े फैसले लिए।

    74 किमी के जेवर लिंक एक्सप्रेसवे को हरी झंडी
    कैबिनेट ने जेवर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले 74.467 किलोमीटर लंबे छह लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी। बुलंदशहर होते हुए बनने वाला यह एक्सप्रेसवे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इसके अलावा प्रयागराज-चित्रकूट क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण के गठन को भी स्वीकृति दी गई। प्रदेश के सात प्रमुख स्थानों पर बहुउद्देशीय हब विकसित करने के लिए लोक निर्माण विभाग की भूमि आवास एवं शहरी नियोजन विभाग को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया। लखनऊ और नोएडा में अत्याधुनिक ‘यू-हब’ स्थापित किए जाएंगे।

    किसानों के लिए फसल बीमा योजना लागू
    किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम संबंधी नुकसान से राहत देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरे प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    घुमंतू विकास बोर्ड और विश्वकर्मा योजना को बढ़ावा
    विमुक्त, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड के गठन को स्वीकृति दी गई। वहीं विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0 के दिशा-निर्देशों में संशोधन और नए बजटीय प्रावधान को भी मंजूरी मिली। इसके साथ ही ग्राम्य विकास विभाग और एचसीएल फाउंडेशन के बीच समुदाय परियोजना से जुड़े समझौते को अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया।

    शिक्षा, श्रम और प्रशासनिक सुधारों पर भी फैसले
    कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुरूप उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004 में संशोधन को मंजूरी दी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026, राज्य संपत्ति विभाग सेवा नियमावली और भूतत्त्व एवं खनिकर्म सेवा नियमावली में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई।

    साथ ही उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक-2026 को विधानसभा में पेश करने तथा इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण नीति-2017 के तहत एक निजी कंपनी को व्यावसायिक परिचालन तिथि में छूट देने का निर्णय लिया गया।

    अनुपूरक बजट और सीएजी रिपोर्ट को भी मंजूरी
    कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक अनुदान और विनियोग विधेयक को मंजूरी दी। साथ ही भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की राज्य वित्त, मनरेगा, जल जीवन मिशन, सिविल और राजस्व ऑडिट से संबंधित रिपोर्टों को विधानमंडल में पेश करने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति प्रदान की।

  • यूपी विधानसभा में अनुपूरक बजट पर हंगामा, पांच मिनट ही बोल पाए CM योगी, सपा विधायक पर भड़के विस अध्‍यक्ष

    यूपी विधानसभा में अनुपूरक बजट पर हंगामा, पांच मिनट ही बोल पाए CM योगी, सपा विधायक पर भड़के विस अध्‍यक्ष


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान जोरदार हंगामा हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बोलना शुरू करते ही समाजवादी पार्टी के विधायकों ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर पहले चर्चा कराने की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के कारण मुख्यमंत्री करीब पांच मिनट ही अपनी बात रख सके और सदन की कार्यवाही बाधित हो गई।

    मुख्यमंत्री ने विपक्ष के हंगामे पर कहा कि अनुपूरक बजट पर चर्चा का एजेंडा पहले से तय था और यह प्रदेश की 25 करोड़ जनता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के लिए निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने चर्चा में भाग लेने के बजाय व्यवधान पैदा करना उचित समझा।

    ‘विपक्ष का आचरण शर्मनाक’
    सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया लोकतांत्रिक और संवैधानिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष न तो सार्थक चर्चा में विश्वास रखता है और न ही सदन की कार्यवाही को सुचारु रूप से चलने देना चाहता है। उनके अनुसार विपक्ष लगातार सदन की कार्यवाही बाधित करने का प्रयास कर रहा है।

    तस्वीर दिखाने पर भड़के सतीश महाना
    मुख्यमंत्री के संबोधन के दौरान विपक्ष के एक विधायक ने उनसे जुड़ी तस्वीर सदन में दिखाई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कड़ी आपत्ति जताते हुए संबंधित विधायक को पूरे सत्र के लिए सदन से बाहर करने के निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति होने पर विशेषाधिकार प्रस्ताव लाकर सदस्यता समाप्त करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है। लगातार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित रही और विधानसभा का माहौल काफी देर तक गरमाया रहा।

  • यूपी सरकार ने ₹59 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट किया पेश, उद्योग-इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सबसे अधिक फोकस

    यूपी सरकार ने ₹59 हजार करोड़ का अनुपूरक बजट किया पेश, उद्योग-इन्फ्रास्ट्रक्चर पर सबसे अधिक फोकस


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधानसभा में ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी ₹11,240.97 करोड़ होगी, जबकि शेष ₹47,778.57 करोड़ का भार राज्य सरकार वहन करेगी। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस अतिरिक्त व्यय की व्यवस्था कर एवं गैर-कर राजस्व में वृद्धि तथा अनुत्पादक खर्चों में कटौती के जरिए की जाएगी।

    उद्योग और आधारभूत ढांचे पर सबसे अधिक जोर
    अनुपूरक बजट में औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। भारी एवं मध्यम उद्योग विभाग के लिए लगभग ₹20,905.88 करोड़ का पूंजीगत और ₹130.30 करोड़ का राजस्व प्रावधान किया गया है। वहीं ग्राम्य विकास विभाग को करीब ₹14,184.72 करोड़ का पूंजीगत और ₹81.03 करोड़ का राजस्व आवंटन मिला है। ऊर्जा क्षेत्र के लिए ₹7,022.27 करोड़ राजस्व मद तथा ₹400 करोड़ पूंजीगत मद में रखे गए हैं। पंचायती राज विभाग को ₹156.33 करोड़ राजस्व और ₹139.98 करोड़ पूंजीगत मद में दिए गए हैं।

    कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती
    कृषि विभाग के लिए ₹132.38 करोड़ राजस्व और ₹159 करोड़ पूंजीगत बजट का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, दुग्ध विकास, मत्स्य और भूमि विकास एवं जल संसाधन विभागों के लिए भी अतिरिक्त धनराशि स्वीकृत की गई है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि आधारित गतिविधियों को गति मिल सके।

    स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर फोकस
    स्वास्थ्य क्षेत्र में एलोपैथी चिकित्सा को सबसे अधिक आवंटन मिला है। इसके तहत ₹1,100 करोड़ राजस्व और ₹96 करोड़ पूंजीगत मद में दिए गए हैं। परिवार कल्याण विभाग को ₹704.25 करोड़, सार्वजनिक स्वास्थ्य को ₹60.65 करोड़ तथा आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा के लिए भी अलग बजट का प्रावधान किया गया है।
    स्वास्थ्य क्षेत्र में एलोपैथी चिकित्सा को सबसे अधिक आवंटन मिला है। इसके तहत ₹1,100 करोड़ राजस्व और ₹96 करोड़ पूंजीगत मद में दिए गए हैं। परिवार कल्याण विभाग को ₹704.25 करोड़, सार्वजनिक स्वास्थ्य को ₹60.65 करोड़ तथा आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा के लिए भी अलग बजट का प्रावधान किया गया है।

    शिक्षा और संस्कृति को ₹955 करोड़ से अधिक
    शिक्षा एवं संस्कृति क्षेत्र के लिए कुल ₹955.32 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसमें तकनीकी शिक्षा को ₹521.14 करोड़, प्राथमिक शिक्षा को ₹351.25 करोड़, माध्यमिक शिक्षा को ₹74.50 करोड़, उच्च शिक्षा को ₹5 करोड़, व्यावसायिक शिक्षा को ₹1.98 करोड़ और संस्कृति विभाग को ₹2.43 करोड़ आवंटित किए गए हैं। सरकार का कहना है कि अनुपूरक बजट का उद्देश्य प्रदेश में औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं को गति देना है।

  • राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी

    राम मंदिर चढ़ावा मामले पर CM योगी का पलटवार, बोले- दोषी साधु-संत नहीं, विपक्ष का रवैया सनातन विरोधी


    लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी की पड़ताल में अब तक कोई साधु-संत दोषी नहीं पाया गया है। ऐसे में पूरे संत समाज और मंदिर से जुड़े कर्मचारियों पर आरोप लगाना अनुचित है।

    मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान न्यायालय के निर्देश पर एसआईटी का पुनर्गठन भी किया गया, लेकिन अब तक की जांच में किसी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई।

    ‘सनातन और रामजन्मभूमि का हमेशा विरोध किया’
    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सपा और कांग्रेस लगातार रामजन्मभूमि, भगवान राम और सनातन परंपरा के प्रति विरोध का रुख अपनाती रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद और सदन के भीतर विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोप सनातन आस्था का अपमान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों पर कार्रवाई हो रही है, उनका भाजपा या संत समाज से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण मिलने के बावजूद विपक्ष के कई नेताओं ने उसमें भाग नहीं लिया, जबकि अब वही लोग आस्था की बात कर रहे हैं।

    ‘यूपी की छवि खराब करने की कोशिश’
    मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष उत्तर प्रदेश की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य अब बीमारू प्रदेश की छवि से बाहर निकलकर देश की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बना रहा है, लेकिन विपक्ष इसे स्वीकार नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सदन में हुए हंगामे और मार्शलों के साथ धक्कामुक्की की भी निंदा करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों के विपरीत है। उनके अनुसार, इस तरह का व्यवहार प्रदेश में धार्मिक पर्यटन और विकास की गति को प्रभावित करने का प्रयास है।

    विधानसभा में हंगामे पर भी जताई नाराजगी
    मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में अनुपूरक बजट पर चर्चा का एजेंडा पहले से तय था, लेकिन विपक्ष ने बजट पर चर्चा करने के बजाय दूसरे मुद्दों को लेकर व्यवधान उत्पन्न किया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रति गैर-जिम्मेदाराना रवैया बताते हुए विपक्ष के आचरण को “शर्मनाक” करार दिया।