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  • धान परिवहन में 43.03 करोड़ की कथित गड़बड़ी 28 जिलों तक पहुंचा मामला हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट

    धान परिवहन में 43.03 करोड़ की कथित गड़बड़ी 28 जिलों तक पहुंचा मामला हाईकोर्ट ने मांगी जांच रिपोर्ट


    जबलपुर । मध्य प्रदेश में धान के परिवहन और आपूर्ति में कथित अनियमितताओं को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। जबलपुर में सामने आई कार्रवाई के बाद यह मामला प्रदेश के कई जिलों तक पहुंचने का दावा किया गया है। याचिका में करीब 43.03 करोड़ रुपए की कथित गड़बड़ी का उल्लेख किया गया है। हाईकोर्ट ने सरकार को प्रदेश के 28 जिलों से संबंधित जांच की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि रिपोर्ट की एक प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए ताकि वह उसमें सामने आए तथ्यों का अध्ययन कर अपना पक्ष रख सकें। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।

    यह जनहित याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि धान के परिवहन और आपूर्ति की निगरानी के लिए पहले से GPS व्यवस्था के दिशा निर्देश मौजूद हैं। इसके बावजूद परिवहन प्रक्रिया में बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ियां होने का आरोप लगाया गया है। याचिका में पूरे प्रदेश में मामले की जांच कराने की मांग की गई है।

    मामले की शुरुआत जबलपुर में जिला प्रशासन की कार्रवाई से हुई बताई गई है। उपलब्ध अदालती रिपोर्ट के अनुसार जबलपुर प्रशासन की जांच में 43.03 करोड़ रुपए से अधिक की कथित वित्तीय अनियमितता सामने आने का दावा किया गया था। इसके बाद FIR दर्ज होने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी अदालत के सामने रखी गई। याचिका में यह भी कहा गया कि गड़बड़ी केवल जबलपुर तक सीमित नहीं हो सकती है और दूसरे जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताओं की जांच जरूरी है।

    याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि जिन वाहनों के जरिए धान को निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जाना था उनकी निगरानी व्यवस्था का प्रभावी इस्तेमाल नहीं हुआ। याचिका में दावा किया गया कि कुछ मामलों में धान निर्धारित स्थान तक पहुंचने के बजाय रास्ते में ही बेच दिए जाने की आशंका है। इन आरोपों की वास्तविकता जांच रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों से स्पष्ट होगी।

    याचिका में एथनोल के लिए आवंटित धान के परिवहन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता पक्ष का दावा है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत भेजे जाने वाले धान को रास्ते में ही दूसरी जगह बेचने की कथित अनियमितता सामने आई। इसी आधार पर पूरे प्रदेश में जांच की मांग की गई है। पहले की सुनवाई में राज्य की ओर से कार्रवाई शुरू होने और FIR दर्ज होने की जानकारी भी अदालत को दी गई थी।

    धान की खरीद से लेकर मिलिंग और आपूर्ति तक की प्रक्रिया में कई स्तरों पर निगरानी व्यवस्था होती है। इसमें रिलीज ऑर्डर परिवहन से जुड़े दस्तावेज और परिवहन वाहनों की जानकारी दर्ज करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। याचिका में आरोप है कि इन व्यवस्थाओं के बावजूद कथित गड़बड़ियां हुईं। अब हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार को अलग अलग जिलों में हुई जांच और कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को विस्तृत रिपोर्ट के रूप में अदालत के सामने रखना होगा।

    अदालत ने जांच रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है। इससे याचिकाकर्ता पक्ष रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों का अध्ययन कर अगली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकेगा। अब 16 नवंबर को होने वाली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट और उसमें सामने आए तथ्यों पर आगे की न्यायिक कार्रवाई की दिशा स्पष्ट हो सकती है।

  • 110 की उम्र में भी बचपन जिंदा, बिस्मिल्लाह बी आज भी खेलती हैं छुपन-छुपाई, परिवार का प्यार बना सहारा

    110 की उम्र में भी बचपन जिंदा, बिस्मिल्लाह बी आज भी खेलती हैं छुपन-छुपाई, परिवार का प्यार बना सहारा


    इंदौर। इंदौर में अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद कम्युनिटी हॉल में नगर निगम और सामाजिक न्याय विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुए कार्यक्रम में 100 से अधिक वरिष्ठ नागरिक शामिल हुए। इस दौरान बुजुर्गों को शॉल श्रीफल और माला पहनाकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के अनुभवों और समाज में उनके योगदान को याद करने के साथ नई पीढ़ी के साथ उनके रिश्तों को भी सामने रखा गया।
    इस आयोजन में सबसे अधिक उम्र की वरिष्ठ नागरिक 110 वर्षीय बिस्मिल्लाह बी रहीं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उन्होंने अपने बचपन की यादों को बेहद सहज अंदाज में साझा किया। उन्होंने बताया कि बचपन का समय काफी अच्छा था और उन्हें छुपन-छुपाई खेलना पसंद था। उनकी पसंद आज भी सादगी से जुड़ी हुई है। खाने में उन्हें दाल-चावल पसंद हैं जबकि मिठाई में खोपरा पाक उनका पसंदीदा है। बिस्मिल्लाह बी ने देश की आजादी की लड़ाई का दौर भी देखा है। घूमने की बात पूछे जाने पर उन्होंने बाग और बगीचों को पसंद बताया और नेहरू पार्क की बगिया में घूमना अच्छा लगने की बात कही। बातचीत के दौरान वे अपनी पोती सना को भी याद करती नजर आईं।

    कार्यक्रम में बच्चों की मौजूदगी ने पीढ़ियों के बीच रिश्तों की खूबसूरत तस्वीर पेश की। 10 वर्षीय अनाइजा नूर ने अपनी पसंद में इटली घूमना पिज्जा खाना नानी के साथ रहना चिड़ियाघर जाना और रोब्लॉक्स खेलना बताया। वहीं 7 वर्षीय उरेन फातिमा ने खाला बर्गर वॉटर पार्क और लूडो को अपनी पसंद बताया। इन बच्चों की पसंद आज की बदलती दुनिया को दिखाती है लेकिन परिवार से जुड़ाव की भावना यहां भी उतनी ही मजबूत दिखाई दी।

    बिस्मिल्लाह बी की छुपन-छुपाई से लेकर बच्चों के रोब्लॉक्स और लूडो तक खेलों का अंदाज जरूर बदल गया है लेकिन अपनों के साथ समय बिताने की खुशी आज भी कायम है। एक तरफ 110 साल की बिस्मिल्लाह बी अपनी पोती को याद करती हैं तो दूसरी तरफ अनाइजा के लिए नानी और उरेन के लिए खाला खास हैं। यही रिश्ता पीढ़ियों के अंतर को कम करता है।

    खाने और घूमने की पसंद में भी यही समानता नजर आई। बिस्मिल्लाह बी को दाल-चावल और खोपरा पाक पसंद है जबकि नई पीढ़ी के बच्चों की पसंद पिज्जा और बर्गर है। बुजुर्गों के लिए बाग-बगीचे सुकून का जरिया हैं तो बच्चों के लिए चिड़ियाघर और वॉटर पार्क आकर्षण का केंद्र हैं। पसंद बदलती रही लेकिन बाहर की दुनिया से जुड़ने और आनंद लेने की इच्छा बरकरार रही।

    कार्यक्रम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए गीत और अन्य गतिविधियां भी आयोजित की गईं। गीतों की प्रस्तुति से माहौल खुशनुमा बना रहा। आयोजन के जरिए यह संदेश दिया गया कि बढ़ती उम्र व्यक्ति को सामाजिक जीवन से अलग नहीं करती। परिवार और समाज से जुड़े रहना लोगों से मिलना जुलना और अपनी रुचियों के अनुसार गतिविधियों में शामिल होना वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    हालांकि इसी कार्यक्रम को लेकर जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए विवाद भी सामने आया। वार्ड 59 में आयोजित समारोह में स्थानीय पार्षद डॉ. रुपाली पेंढ़ारकर और क्षेत्रीय विधायक गोलू शुक्ला को आमंत्रित नहीं किए जाने पर पार्षद ने नगर निगम अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में कार्यक्रम आयोजित हुआ लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा होने पर कड़ी नाराजगी जताई। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने अधिकारियों की गलती मानी और कहा कि जनप्रतिनिधियों से समन्वय रखा जाना चाहिए था। उन्होंने पार्षद और विधायक से चर्चा कर अलग कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही।

  • GBS से जंग जीतकर लौटी थीं पार्वती, डॉक्टरों ने दी थी 3 से 4 फीसदी उम्मीद, 7 महीने बाद जिंदगी ने साथ छोड़ा

    GBS से जंग जीतकर लौटी थीं पार्वती, डॉक्टरों ने दी थी 3 से 4 फीसदी उम्मीद, 7 महीने बाद जिंदगी ने साथ छोड़ा


    इंदौर। इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के दौरान गंभीर रूप से बीमार हुईं 67 वर्षीय पार्वती कोंडला की बुधवार रात मौत हो गई। पार्वती करीब 72 दिन तक गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती रही थीं। उन्हें गिलियन बैरे सिंड्रोम यानी GBS की पुष्टि हुई थी। इलाज के दौरान उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि डॉक्टरों ने उनके बचने की संभावना महज 3 से 4 फीसदी बताई थी। इसके बावजूद लंबे इलाज के बाद उनकी स्थिति में सुधार आया और मार्च में उन्हें अस्पताल से घर भेज दिया गया था। हालांकि अब उनकी मौत किस चिकित्सकीय कारण से हुई और इसका भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना से सीधा संबंध है या नहीं इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    पार्वती के बेटे नीलेश के मुताबिक उनकी मां की तबीयत अगस्त में दोबारा बिगड़ने लगी थी। इसके बाद 17 अगस्त से उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। परिवार लगातार उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद कर रहा था लेकिन बुधवार रात उनकी मौत हो गई। इससे परिवार को बड़ा झटका लगा है क्योंकि कुछ महीने पहले ही पार्वती ने बेहद गंभीर स्थिति से बाहर निकलकर जिंदगी की जंग जीती थी।

    पार्वती की तबीयत दिसंबर 2025 में उल्टी और दस्त की शिकायत के बाद बिगड़ी थी। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन हालत गंभीर होने पर अलग अलग अस्पतालों में इलाज के बाद बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। जांच में GBS की पुष्टि हुई। इस बीमारी में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली नसों पर हमला करने लगती है। इसके कारण शरीर में कमजोरी बढ़ सकती है और गंभीर मामलों में मरीज के लिए चलना फिरना और सांस लेना भी मुश्किल हो सकता है।

    पार्वती की हालत बेहद गंभीर होने के कारण उन्हें 16 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया था जबकि 22 दिन ICU में इलाज चला। फेफड़ों की स्थिति खराब होने पर ट्रेकोस्टोमी भी की गई थी। वे करीब 18 दिन तक बेहोश रहीं। लंबे इलाज के बाद मार्च में उनकी स्थिति में धीरे धीरे सुधार शुरू हुआ। वे परिजनों को पहचानने लगी थीं और जवाब देने का प्रयास भी करने लगी थीं। 9 मार्च को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था।

    घर लौटने के बाद भी पार्वती की पूरी तरह रिकवरी के लिए लगातार देखभाल की जरूरत थी। परिवार उन्हें नली के जरिए दिन में कई बार लिक्विड डाइट और प्रोटीन देता था। फिजियोथेरेपी और दवाओं के साथ उनकी देखभाल जारी थी। परिजनों के अनुसार घर पर इलाज और देखभाल में हर महीने करीब 60 से 70 हजार रुपए खर्च हो रहे थे।

    भागीरथपुरा दूषित पानी मामले के दौरान पार्वती के इलाज पर शासन स्तर से भी नजर रखी गई थी। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अस्पताल पहुंचकर उनकी तबीयत की जानकारी ली थी। परिवार के अनुसार उस समय करीब 19.50 लाख रुपए के इलाज का खर्च शासन की ओर से उठाने का आश्वासन दिया गया था। अब पार्वती की मौत के बाद उनके परिवार के सामने एक बार फिर इलाज और देखभाल से जुड़े सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि उनकी मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसका पहले हुई बीमारी या भागीरथपुरा की दूषित पानी की घटना से कोई प्रत्यक्ष संबंध था या नहीं।

  • इंदौर में दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, एक युवक ने फांसी लगाई, दूसरे की सड़क हादसे में मौत

    इंदौर में दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़, एक युवक ने फांसी लगाई, दूसरे की सड़क हादसे में मौत


    इंदौर। शहर में बीती रात हुई दो अलग अलग घटनाओं में दो युवकों की मौत हो गई। आजाद नगर इलाके में 35 वर्षीय युवक घर के बाहर बने कमरे में फंदे पर मिला। वहीं तेजाजी नगर क्षेत्र में तेज रफ्तार कार की टक्कर से बाइक सवार युवक की जान चली गई। दोनों घटनाओं के बाद संबंधित थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। एक मामले में पुलिस युवक के इस कदम के पीछे की वजह पता कर रही है जबकि दूसरे मामले में दुर्घटना के बाद मौके से भागे कार सवारों की तलाश की जा रही है।

    आजाद नगर थाना पुलिस के मुताबिक मृतक की पहचान मनोज 35 वर्ष पिता मोहर सिंह ठाकुर निवासी मूसाखेड़ी के रूप में हुई है। वह गैस सिलेंडर की डिलीवरी और रिपेयरिंग का काम करता था। पुलिस के अनुसार रात करीब साढ़े 12 बजे उसने घर के बाहर वाले कमरे में फांसी लगा ली। घटना का पता उस समय चला जब उसकी पत्नी देर रात उसे देखने के लिए बाहर गई। वहां मनोज को फंदे पर लटका देखकर उसने परिजनों और पड़ोसियों को जानकारी दी।

    मनोज के भाई विनोद के अनुसार वह रात करीब 11 बजे घर से कुछ रुपए लेकर निकला था। उसने अपनी पत्नी से कुछ देर में लौटने की बात कही थी। इसके बाद वह वापस घर पहुंचा लेकिन तब तक पत्नी और बच्चे सो चुके थे। कुछ समय बाद जब पत्नी बाहर के कमरे में पहुंची तो घटना का पता चला। परिवार के मुताबिक घटना से पहले मनोज ने विदिशा में रहने वाले अपने साले से फोन पर बातचीत भी की थी। हालांकि उसके भाई ने किसी तरह के कर्ज की जानकारी होने से इनकार किया है। पुलिस फिलहाल घटना के कारणों और उससे पहले की परिस्थितियों की जांच कर रही है।

    दूसरी घटना तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में हुई जहां सड़क दुर्घटना में युवक दीपक मनासिया की मौत हो गई। वह कुशलगढ़ महू का रहने वाला था और खेती किसानी से जुड़ा था। पुलिस के अनुसार रात करीब 12 बजे डी मार्ट के पास तेज रफ्तार कार ने दीपक की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर के बाद दीपक सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया।

    बताया गया कि हादसे के बाद कार में सवार युवक वाहन को मौके पर छोड़कर दूसरी कार से वहां से चले गए। इसी दौरान पीछे से आ रहे दीपक के दोस्तों ने उसे सड़क पर घायल हालत में देखा। दोस्तों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल कार को कब्जे में ले लिया है और उसके चालक तथा अन्य लोगों की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

    परिजनों के मुताबिक दीपक काम के सिलसिले में चापड़ा गया था। उसके साथ कुछ दोस्त भी अलग अलग बाइक से गए थे। वह खेती का काम करता था। परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद परिवार में मातम का माहौल है।

    दोनों मामलों में पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है। आजाद नगर मामले में युवक के इस कदम के पीछे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है जबकि तेजाजी नगर हादसे में पुलिस वाहन और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। दोनों मामलों में पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही घटनाओं की परिस्थितियों को लेकर तस्वीर साफ हो सकेगी।

  • भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें

    भागीरथपुरा त्रासदी पर फिर गरमाई सियासत 36 मौतों की जांच में सामने आईं पाइपलाइन और प्रशासनिक लापरवाही की परतें


    इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शुक्रवार को इंदौर के रेसीडेंसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने प्रभावित परिवारों को राहत देने के साथ प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की। न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा में हुई 36 मौतों की परिस्थितियों की जांच की है। रिपोर्ट में दूषित पानी से जुड़ी मौतों को लेकर अलग अलग निष्कर्ष सामने आए हैं। सार्वजनिक हुई रिपोर्ट के अनुसार कई प्रशासनिक और तकनीकी कमियों को भी गंभीरता से दर्ज किया गया है।

    जांच रिपोर्ट में पुराने पेयजल और सीवरेज नेटवर्क की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आयोग के सामने पुराने जल और सीवर नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण तकनीकी रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इनमें नक्शे अलाइनमेंट प्लान इंजीनियरिंग डिजाइन वर्क ऑर्डर और निरीक्षण से जुड़े दस्तावेज शामिल बताए गए हैं। आयोग ने इन रिकॉर्ड के गायब होने के कारणों की अलग से जांच की जरूरत भी बताई है। रिपोर्ट के मुताबिक पुराने नेटवर्क की निगरानी और रखरखाव में कमियां थीं और संवेदनशील पाइपलाइन को समय पर बदलने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी।

    सिंघार ने फाइल मूवमेंट का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पाइपलाइन बदलने से जुड़ी फाइल लंबे समय तक लंबित रही। उन्होंने सवाल किया कि जरूरी काम से जुड़ी फाइल इतनी लंबी अवधि तक क्यों रुकी रही। हालांकि न्यायिक जांच की रिपोर्ट में जिम्मेदारी तय करने का आधार केवल किसी फाइल के मेयर के पास लंबित रहने को नहीं बनाया गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि टेंडर प्रक्रिया में एक चरण पर 10 दिन की अस्पष्ट देरी हुई थी और इस देरी के लिए कुछ अधिकारियों की भूमिका पर जिम्मेदारी तय की गई।

    आयोग ने पूर्व नगर निगम आयुक्तों में से कुछ अधिकारियों को जिम्मेदारी से मुक्त किया है जबकि तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्तों और कार्यपालन यंत्री से जुड़े स्तर पर प्रशासनिक चूक को लेकर टिप्पणियां की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार टेंडर की अंतिम स्वीकृति से जुड़े अधिकार संबंधित अतिरिक्त आयुक्त के स्तर पर थे। इसी आधार पर तत्कालीन नगर निगम आयुक्त को उस देरी के लिए जिम्मेदार नहीं माना गया। यह निष्कर्ष उन राजनीतिक आरोपों से अलग है जिनमें जनप्रतिनिधियों या शीर्ष प्रशासनिक पदों की जवाबदेही का सवाल उठाया गया है।

    भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या सामने आने के बाद पुराने पाइप नेटवर्क को बदलने का काम शुरू किया गया था। शुरुआती दौर में प्रशासन और स्थानीय लोगों की ओर से मौतों की संख्या को लेकर अलग अलग आंकड़े सामने आए थे। फरवरी में विधानसभा में सरकार की ओर से भी मौतों के आंकड़े को लेकर आधिकारिक जानकारी दी गई थी जबकि विपक्ष और स्थानीय लोगों ने इससे अधिक मौतों का दावा किया था। बाद में न्यायिक जांच ने 36 मौतों के मामलों की परिस्थितियों की समीक्षा की।

    जांच रिपोर्ट का व्यापक संकेत यह है कि त्रासदी को किसी एक दिन की घटना के बजाय लंबे समय से चली आ रही तकनीकी कमियों पाइपलाइन की स्थिति रखरखाव निगरानी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में देखा गया है। रिपोर्ट में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और प्रभावित परिवारों को राहत देने से जुड़े सुझाव भी महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में अब मुख्य सवाल यह है कि सरकार आयोग की सिफारिशों पर किस तरह आगे बढ़ती है और प्रभावित परिवारों को राहत कब तक मिलती है।

    सिंघार ने सरकार से इसी आधार पर जवाबदेही तय करने की मांग की है। वहीं उपलब्ध न्यायिक जांच रिपोर्ट में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को घटना के लिए जिम्मेदार ठहराने के बजाय मुख्य टिप्पणियां अधिकारियों तकनीकी व्यवस्था पाइपलाइन रखरखाव और प्रक्रिया में हुई देरी से संबंधित हैं।

  • बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान

    बैंक लोन से जुड़ा 66 करोड़ का मामला फर्जी बिल और LC के इस्तेमाल का आरोप ED ने कोर्ट में पेश किया चालान


    इंदौर। रुचि ग्लोबल लिमिटेड से जुड़े करीब 66 करोड़ रुपए के बैंक लोन मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने 1 अक्टूबर 2026 को इंदौर की विशेष PMLA कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट यानी चालान दाखिल किया है। इसके बाद कोर्ट ने मामले से जुड़े 21 आरोपियों और संस्थाओं को नोटिस जारी करते हुए प्री कॉग्निजेंस सुनवाई के लिए तलब किया है। कंपनी का मौजूदा नाम एग्रोट्रेड एंटरप्राइजेज लिमिटेड बताया गया है। मामले में ED की जांच अभी जारी है।

    इस पूरे मामले की शुरुआत CBI भोपाल की FIR से हुई थी। इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। CBI की FIR में रुचि ग्लोबल लिमिटेड के साथ उमेश शाहरा साकेत बरोडिया आशुतोष मिश्रा और कुछ अज्ञात लोक सेवकों के नाम दर्ज किए गए थे। इसके बाद ED ने बैंकिंग लेनदेन और कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू की।

    ED की जांच के अनुसार रुचि ग्लोबल ने पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा और जम्मू कश्मीर बैंक के कंसोर्टियम से करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाएं हासिल की थीं। इनमें लेटर ऑफ क्रेडिट यानी LC भी शामिल थे। एजेंसी का आरोप है कि इन बैंकिंग सुविधाओं का इस्तेमाल संबंधित सहयोगी संस्थाओं के पक्ष में कृषि उत्पाद खरीदने के नाम पर किया गया।

    जांच एजेंसी के मुताबिक इस प्रक्रिया में कथित तौर पर फर्जी बिल ऑफ एक्सचेंज और नकली लॉरी रिसीट का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंकों से बिल डिस्काउंट कराए गए और रकम संबंधित संस्थाओं के खातों में पहुंची। ED का दावा है कि इसके बाद रकम को कई खातों के जरिए घुमाया गया और महज एक से तीन दिन के भीतर फिर रुचि ग्लोबल के खातों में वापस पहुंचा दिया गया। एजेंसी ने इसे बैंक से हासिल क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग और रकम को लेयर करने की प्रक्रिया बताया है।

    मामले में ED ने दिसंबर 2025 में भी कार्रवाई की थी। एजेंसी ने 23 दिसंबर को PMLA की धारा 17 के तहत तलाशी ली थी। इस दौरान 23.50 लाख रुपए की कथित बेहिसाब नकदी जब्त की गई थी। कुछ बैंक खातों को भी फ्रीज किया गया था। इसके बाद फरवरी 2026 में ED ने करीब 5.13 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों के संबंध में प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया।

    ED के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में रुचि ग्लोबल से जुड़े उमेश शाहरा की पत्नी नीता शाहरा के नाम की जमीन भी शामिल है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक से प्राप्त कथित रकम का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने में किया गया। हालांकि संपत्ति कुर्की और आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होंगे।

    CBI की FIR में बैंक समूह की शिकायत के आधार पर कुल 188.35 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया था। वहीं ED की मौजूदा जांच में करीब 66 करोड़ रुपए की नॉन फंड बेस्ड क्रेडिट सुविधाओं के कथित दुरुपयोग पर फोकस है। चालान दाखिल होने के बाद अब 21 आरोपियों और संस्थाओं को जारी नोटिस के आधार पर कोर्ट में आगे की कार्यवाही होगी। ED ने स्पष्ट किया है कि मामले में जांच जारी है और लेनदेन से जुड़ी अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है।

  • सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके

    सेहतमंद जिंदगी के लिए जरूरी आदतें, दिनचर्या में शामिल करें ये आसान तरीके


    नई दिल्ली। आज की तेज रफ्तार जिंदगी में अपनी सेहत का ध्यान रखना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है। काम का दबाव अनियमित खानपान कम नींद और शारीरिक गतिविधियों की कमी धीरे धीरे शरीर पर असर डाल सकती है। ऐसे में Health Care को केवल बीमारी होने के बाद इलाज तक सीमित रखने के बजाय रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बनाना जरूरी है। अच्छी सेहत के लिए सबसे पहले संतुलित खानपान पर ध्यान देना चाहिए। भोजन में हरी सब्जियां मौसमी फल दालें साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। बहुत ज्यादा तला हुआ भोजन अत्यधिक मीठा और जरूरत से ज्यादा नमक लेने से बचना भी जरूरी है।

    शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पीना भी महत्वपूर्ण है। पानी की जरूरत उम्र मौसम शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग अलग हो सकती है। इसलिए पूरे दिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। इसके साथ ही रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए निकालना चाहिए। तेज चलना योग हल्की एक्सरसाइज साइकिलिंग या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य गतिविधि शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है। लंबे समय तक लगातार बैठकर काम करने वालों को बीच बीच में उठकर चलना भी चाहिए।

    अच्छी सेहत के लिए नींद को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्याप्त और नियमित नींद शरीर तथा दिमाग दोनों के लिए जरूरी है। सोने और जागने का समय लगभग निश्चित रखने की कोशिश करें। रात में सोने से पहले मोबाइल या अन्य स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल कम करना भी नींद की गुणवत्ता के लिए मददगार हो सकता है।

    मानसिक स्वास्थ्य भी Health Care का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लगातार तनाव महसूस होने पर अपनी दिनचर्या में आराम मनोरंजन परिवार के साथ समय और पसंदीदा गतिविधियों के लिए जगह बनाएं। जरूरत महसूस होने पर किसी भरोसेमंद व्यक्ति या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना उचित कदम हो सकता है।

    इसके अलावा समय समय पर स्वास्थ्य जांच कराना भी उपयोगी है। खासकर यदि किसी व्यक्ति को पहले से कोई बीमारी है या परिवार में किसी बीमारी का इतिहास रहा है तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच करानी चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो खुद से दवा लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से सलाह लेना बेहतर है।

    कुल मिलाकर अच्छी सेहत किसी एक दिन की कोशिश से नहीं बल्कि रोजाना अपनाई गई छोटी छोटी आदतों से बनती है। संतुलित भोजन पर्याप्त नींद नियमित शारीरिक गतिविधि तनाव को नियंत्रित रखने की कोशिश और समय पर स्वास्थ्य सलाह लेने जैसी आदतें स्वस्थ जीवनशैली का आधार बन सकती हैं।

  • एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा

    एफिल टावर में महिला स्टाफ हटाने के विवाद में BAPS को क्लीन चिट, संचालन कंपनी के प्रमुख देंगे इस्तीफा


    पेरिस।
    एफिल टावर में महिला कर्मचारियों को हटाने से जुड़े विवाद में हिंदू संगठन बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) को जांच में क्लीन चिट मिल गई है। जांच में सामने आया है कि संगठन ने एफिल टावर प्रशासन से महिला कर्मचारियों को हटाने की कोई मांग नहीं की थी। पिछले महीने करीब 100 संतों के एफिल टावर दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ समय के लिए वहां से हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हुआ था। इसके विरोध में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था और एफिल टावर एक दिन के लिए बंद रहा था।

    जांच रिपोर्ट के मुताबिक BAPS प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने से पहले ही महिला कर्मचारियों को कुछ देर के लिए अपने स्थान से हटने को कहा गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि आपसी सूचना के आदान-प्रदान के दौरान मूल संदेश का अर्थ बदल गया। कर्मचारियों को स्थायी रूप से स्थान छोड़ने के लिए नहीं कहा गया था, बल्कि कुछ मिनटों के लिए एक-दूसरे से अलग रहने को कहा गया था।

    संचालन कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो छोड़ेंगे पद

    एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी के प्रमुख पैट्रिक ब्रांको रुइवो इस साल के अंत में अपने पद से इस्तीफा देंगे। वह 2018 से एफिल टावर के महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

    रुइवो के कार्यकाल में हुई आंतरिक जांच में इस दौरे के आयोजन में ‘परिचालन संबंधी खामियों और कमियों’ की बात सामने आई। कंपनी के बोर्ड ने कहा कि इन खामियों के कारण महिला कर्मचारियों को हटाया जाना ‘अस्वीकार्य’ था।

    क्या था पूरा विवाद?

    5 सितंबर को BAPS से जुड़े करीब 100 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टावर का निजी दौरा किया था। आरोप था कि संगठन की ओर से दौरे के दौरान महिलाओं के साथ बातचीत सीमित रखने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद महिला कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल से हटाकर उनकी जगह पुरुष कर्मचारियों को तैनात किए जाने की बात सामने आई थी।

    घटना के बाद यूनियन प्रतिनिधि डायने दावोइन ने महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की घटना दोबारा न होने की मांग की थी। कर्मचारियों के प्रदर्शन के बाद पेरिस शहर के अधिकारियों ने भी मामले की जांच शुरू की।

    एफिल टावर की संचालन कंपनी के बोर्ड अध्यक्ष एरियल वेइल ने कहा कि यहां एक विशेष प्रोटोकॉल विभाग बनाया जाएगा। इसके अलावा लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए नए उपाय और प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू किए जाएंगे।

    एफिल टावर का स्वामित्व पेरिस नगर प्रशासन के पास है। यहां हर साल करीब 70 लाख पर्यटक पहुंचते हैं।

    100 साल से अधिक पुरानी है BAPS

    BAPS की स्थापना गुजरात में 100 से अधिक वर्ष पहले हुई थी। यह एक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संस्था है। संगठन के साधु ब्रह्मचर्य के कड़े नियमों का पालन करते हैं और अनुयायियों से भी निर्धारित नैतिक नियमों का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।

  • पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झरनों पहाड़ों और मंदिरों के बीच यादगार होगा सफर

    पचमढ़ी घूमने का बना रहे हैं प्लान तो ये जगहें जरूर देखें झरनों पहाड़ों और मंदिरों के बीच यादगार होगा सफर


    नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में अगर आप ऐसी जगह घूमने का प्लान बना रहे हैं जहां पहाड़ों की खूबसूरती के साथ हरियाली झरने और शांत वातावरण का आनंद लिया जा सके तो पचमढ़ी आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है। सतपुड़ा की पहाड़ियों के बीच बसा पचमढ़ी प्रदेश का प्रसिद्ध हिल स्टेशन है। यहां का प्राकृतिक वातावरण शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय सुकून के साथ बिताने का मौका देता है। परिवार दोस्तों या पार्टनर के साथ घूमने के लिए भी पचमढ़ी की यात्रा यादगार हो सकती है।

    पचमढ़ी की सबसे खास बात यहां का प्राकृतिक सौंदर्य है। चारों तरफ फैली हरियाली ऊंची पहाड़ियां और जंगल इस जगह को अलग पहचान देते हैं। बारिश के मौसम में यहां का नजारा और भी आकर्षक हो जाता है। पहाड़ियों से गिरते झरने और बादलों से ढके रास्ते पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं। सर्दियों में मौसम सुहावना रहता है और सुबह तथा शाम के समय हल्की ठंड के बीच घूमने का अलग आनंद मिलता है।

    पचमढ़ी में घूमने के लिए कई प्रसिद्ध स्थान हैं। बी फॉल यहां के लोकप्रिय झरनों में शामिल है जहां ऊंचाई से गिरता पानी और आसपास का हराभरा वातावरण पर्यटकों को आकर्षित करता है। झरने तक पहुंचने का रास्ता भी यात्रा को रोमांचक बनाता है। इसके अलावा अप्सरा विहार भी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां पानी और चट्टानों के बीच कुछ समय बिताकर प्रकृति को करीब से महसूस किया जा सकता है।

    धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाले स्थानों में पांडव गुफाएं भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। इन गुफाओं से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं इन्हें खास बनाती हैं। यहां आने वाले लोग प्राकृतिक वातावरण के साथ इस स्थान से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को भी करीब से देखते हैं। चौरागढ़ और जटाशंकर जैसे स्थान भी पचमढ़ी यात्रा को खास बना सकते हैं। जटाशंकर मंदिर प्राकृतिक चट्टानों के बीच स्थित है और भगवान शिव से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अगर आपको सूर्योदय और सूर्यास्त के खूबसूरत नजारे पसंद हैं तो पचमढ़ी में सनसेट प्वाइंट और अन्य ऊंचे स्थानों का रुख किया जा सकता है। ऊंचाई से आसपास की पहाड़ियों और जंगलों का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है। शाम के समय आसमान के बदलते रंगों के बीच पहाड़ियों का नजारा पर्यटकों को काफी पसंद आता है।

    पचमढ़ी जाने से पहले मौसम की जानकारी लेना जरूरी है। मानसून के दौरान बारिश के कारण कुछ रास्तों और प्राकृतिक स्थानों पर सावधानी की जरूरत पड़ सकती है। आरामदायक जूते पहनना और जरूरी सामान साथ रखना बेहतर रहता है। झरनों या पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा नियमों का पालन करना भी जरूरी है। प्रकृति के बीच घूमते समय प्लास्टिक या कचरा फैलाने से बचना चाहिए ताकि इस खूबसूरत पर्यटन स्थल की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहे।

    रुकने के लिए पचमढ़ी में अलग अलग बजट के अनुसार होटल और अन्य ठहरने के विकल्प मिल जाते हैं। स्थानीय भोजन का स्वाद लेने के साथ आसपास के बाजारों में खरीदारी भी की जा सकती है। यहां की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए कम से कम दो दिन का समय रखा जा सकता है ताकि प्रमुख पर्यटन स्थलों को जल्दबाजी के बिना देखा जा सके।

    कुल मिलाकर पचमढ़ी उन लोगों के लिए खास जगह है जो पहाड़ों और प्रकृति के बीच कुछ समय बिताना चाहते हैं। यहां झरनों की आवाज हरियाली से घिरी पहाड़ियां धार्मिक स्थल और शांत वातावरण एक साथ देखने को मिलता है। यही वजह है कि पचमढ़ी मध्यप्रदेश में घूमने के लिए लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में अपनी अलग पहचान रखता है।

  • जवाई बांध में 24 फीट से भी कम पानी, 500 से ज्यादा मगरमच्छ और लाखों मछलियों पर संकट

    जवाई बांध में 24 फीट से भी कम पानी, 500 से ज्यादा मगरमच्छ और लाखों मछलियों पर संकट


    पाली।
    पश्चिमी राजस्थान की जीवनरेखा और पाली जिले की पहचान माने जाने वाले जवाई बांध में जल संकट गहराता जा रहा है। 61.25 फीट की भराव क्षमता वाले बांध में पानी का स्तर घटकर 24 फीट से भी नीचे पहुंच गया है। कम होते जलस्तर का असर अब इंसानों के साथ-साथ बांध के जलीय जीवों पर भी दिखाई देने लगा है। जवाई में रहने वाले 500 से ज्यादा मगरमच्छों और लाखों मछलियों के सामने पानी और भोजन का संकट खड़ा हो गया है।

    जलस्तर लगातार घटने से मगरमच्छों के लिए तैरने और सुरक्षित स्थानों की उपलब्धता कम होती जा रही है। वहीं, पानी का तापमान बढ़ने से मछलियों के जीवन पर भी असर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में मछलियों के मरने की स्थिति में बांध का पानी दूषित होने का खतरा भी बढ़ सकता है। इससे मगरमच्छों के लिए भोजन की उपलब्धता पर भी असर पड़ेगा।

    तीन महीने का पानी बचने का दावा

    विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा स्थिति में जवाई बांध में करीब तीन महीने का पानी ही बचा है। इसके बाद बांध के डेड स्टोरेज में पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। ऐसी स्थिति में जल संकट का असर केवल मानव आबादी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बांध के पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है।

    500 से अधिक मगरमच्छ और बड़ी संख्या में मछलियां जवाई के पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में जलस्तर में और गिरावट आने पर इनके संरक्षण के लिए प्रशासन और वन्यजीव विभाग के सामने चुनौती बढ़ सकती है। समय रहते जल प्रबंधन और वन्यजीवों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई तो आने वाले समय में जलीय जीवों के सामने गंभीर संकट पैदा हो सकता है।

    मगरमच्छों के लिए मशहूर है जवाई

    जवाई बांध और इसके आसपास का क्षेत्र अपनी अनूठी जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां के तेंदुओं के साथ-साथ विशालकाय मगरमच्छ भी पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण हैं। पहाड़ियों से घिरे बांध के पानी और चट्टानी किनारों पर धूप सेंकते मगरमच्छों को देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर पहुंचते हैं।

    जवाई क्षेत्र में तेंदुओं और मगरमच्छों का प्राकृतिक सह-अस्तित्व इसकी खास पहचान है। जवाई सफारी के दौरान पर्यटक बांध के उथले पानी और चट्टानों पर मगरमच्छों की गतिविधियों को करीब से देखते हैं। वन्यजीव पर्यटन यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    ऐसे में जवाई बांध का लगातार घटता जलस्तर केवल जल संकट नहीं, बल्कि यहां के वन्यजीव और पूरे जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।