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  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पारिवारिक अदालत का फैसला बदला, बच्चे से मुलाकात पर शुल्क लगाना बताया पूरी तरह अनुचित

    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पारिवारिक अदालत का फैसला बदला, बच्चे से मुलाकात पर शुल्क लगाना बताया पूरी तरह अनुचित


    नई दिल्ली ।
    कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक पारिवारिक विवाद से जुड़ी याचिका पर फैसला सुनाते हुए बड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है कि पिता को अपने ही बच्चे से मिलने का अधिकार बिना किसी आर्थिक शर्त के मिलना चाहिए। अदालत ने निचली पारिवारिक अदालत के उस फैसले में संशोधन किया जिसमें अलग रह रहे पिता को बच्चे से हर बार मिलने के बदले पांच हजार रुपये देने का निर्देश दिया गया था। उच्च न्यायालय ने साफ तौर पर कहा कि जब यह मुलाकात न्यायालय परिसर के अंदर स्थित विजिटेशन रूम में आयोजित की जानी है, तब किसी भी तरह का शुल्क वसूलना तर्कसंगत नहीं है।

    यह मामला एक ऐसे पति-पत्नी से संबंधित है जिनके बीच तलाक का मुकदमा अदालत में लंबित है। वर्तमान में चार साल के बच्चे की देखरेख और अंतरिम कस्टडी मां के पास है, जबकि पिता ने बच्चे की स्थायी अभिरक्षा पाने के लिए न्यायालय में अर्जी दाखिल की हुई है। इससे पहले पारिवारिक अदालत ने पिता को महीने के तय दिनों में बच्चे से मिलने की अनुमति तो दी थी, लेकिन साथ ही हर मुलाकात के लिए पांच हजार रुपये जमा करने की शर्त भी लागू कर दी थी।

    उच्च न्यायालय में जब पिता ने इस शर्त को चुनौती दी, तो अदालत ने स्थिति का निष्पक्षता से मूल्यांकन किया। अदालत ने पाया कि जब मां ने स्वयं विजिटेशन रूम को मुलाकात के लिए सुरक्षित और उपयुक्त स्थान माना है, तो पिता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालने का कोई औचित्य नहीं बनता। उच्च न्यायालय ने माना कि इस तरह का आर्थिक दबाव न्याय के सिद्धांतों के अनुकूल नहीं है और इसलिए फीस से जुड़ी शर्त को तुरंत प्रभाव से हटा दिया गया।

    मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी ध्यान दिया कि दोनों पक्षों के घर के बीच कोई बहुत अधिक दूरी नहीं है। इसके बावजूद दस्तावेजों और रिकॉर्ड से संकेत मिला कि मां कई अवसरों पर बच्चे को तय समय पर मुलाकात के लिए लेकर नहीं आती थी। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि भविष्य में भी मुलाकात के समय में इस प्रकार की अड़चनें पैदा की जाती हैं, तो इसका प्रभाव अंतिम कस्टडी के निर्णय पर पड़ सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि बच्चे का सर्वांगीण विकास और उसका सर्वोत्तम हित ही न्याय का सबसे प्रमुख आधार है।

    पिता ने अदालत के सामने यह बात भी रखी थी कि उन्हें बच्चे के साथ अकेले और सहज माहौल में समय बिताने का मौका नहीं दिया जाता, जिससे बच्चे के साथ भावनात्मक जुड़ाव प्रभावित हो रहा है। दूसरी ओर मां का कहना था कि बच्चा पिता के पास जाने में हिचकिचाता है और पिता भरण पोषण की जिम्मेदारी सही तरीके से नहीं संभाल रहे हैं। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को ध्यान से सुनते हुए एक व्यावहारिक व्यवस्था बनाई ताकि बच्चे और पिता के बीच संवाद बेहतर हो सके।

    उच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था के तहत निर्देश दिया कि मुलाकात के दौरान बच्चे के दादा-दादी वहां उपस्थित नहीं रहेंगे। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पिता और पुत्र बिना किसी दबाव के आपस में गुणवत्तापूर्ण समय बिता सकें। अदालत ने अंत में दोहराया कि स्थायी कस्टडी का मुख्य फैसला अभी लंबित है और वह सभी साक्ष्यों एवं बच्चे के हितों को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।

  • पंकजा मुंडे के राजनीतिक भविष्य पर बढ़ी चर्चा, कांग्रेस नेता बोले- भाजपा छोड़ें, पहली ओबीसी महिला सीएम बनाने में करेंगे सहयोग

    पंकजा मुंडे के राजनीतिक भविष्य पर बढ़ी चर्चा, कांग्रेस नेता बोले- भाजपा छोड़ें, पहली ओबीसी महिला सीएम बनाने में करेंगे सहयोग


    नई दिल्ली ।
    महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में उस समय एक नया मोड़ देखने को मिला, जब राज्य सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता पंकजा मुंडे को विपक्षी खेमे से एक बड़ा राजनीतिक प्रस्ताव मिला। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि यदि पंकजा मुंडे भाजपा का साथ छोड़ने का मन बनाती हैं, तो कांग्रेस और उसके सहयोगी दल उन्हें महाराष्ट्र की पहली ओबीसी महिला मुख्यमंत्री के रूप में समर्थन देने पर विचार कर सकते हैं। यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में सामने आई है, जब पंकजा मुंडे ने हाल ही में सार्वजनिक मंच से अपने संन्यास के संकेत दिए थे।

    विजय वडेट्टीवार ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि पंकजा मुंडे राज्य की एक कद्दावर ओबीसी नेता हैं और उन्हें इतनी जल्दी सार्वजनिक जीवन से पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि वे भाजपा त्यागती हैं, तो वे व्यक्तिगत रूप से पार्टी के शीर्ष कमान से सिफारिश करेंगे कि उन्हें कांग्रेस में ससम्मान शामिल किया जाए। हालांकि, उन्होंने यह साफ किया कि यह उनका अपना निजी दृष्टिकोण है और इसे पार्टी का औपचारिक अधिकारिक निमंत्रण नहीं समझा जाना चाहिए, क्योंकि इस विषय पर अंतिम मोहर केंद्रीय नेतृत्व ही लगाएगा।

    कांग्रेस नेता ने इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल में पिछड़ा वर्ग के प्रमुख चेहरों को हाशिये पर धकेला जा रहा है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर कई वरिष्ठ नेताओं में उपेक्षा को लेकर भारी असंतोष व्याप्त है, क्योंकि उनकी निष्ठा और जनाधार को उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है। वडेट्टीवार के अनुसार, पंकजा मुंडे की हालिया भावुक टिप्पणी इसी अंदरूनी घुटन और उपेक्षा का परिणाम मानी जा सकती है।

    उल्लेखनीय है कि पंकजा मुंडे ने बीते दिनों अपने गृहांचल पारली में बुनियादी विकास और सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं। उन्होंने कहा था कि निरंतर प्रयासों के बावजूद क्षेत्र की स्थिति में अपेक्षित सुधार न होना उनके लिए निराशाजनक है। इसी क्रम में उन्होंने यह टिप्पणी की थी कि वे मौजूदा राजनीतिक ढर्रे से थक चुकी हैं और राजनीति को अलविदा कहने पर विचार कर रही हैं, यद्यपि उन्होंने यह भी जोड़ा था कि उन्होंने इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

    पंकजा मुंडे के इस बयान के बाद राज्य के सियासी गलियारों में कयासों का दौर बेहद तेज हो गया। मध्य प्रदेश समेत देशभर के राजनीतिक विश्लेषक महाराष्ट्र में बन रहे इस नए घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विपक्ष के कई अन्य नेताओं ने भी उनकी स्थिति पर सहानुभूति प्रकट करते हुए अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं।

    इस बीच, कांग्रेस नेता के इस लुभावने ऑफर पर पंकजा मुंडे या उनके करीबी सूत्रों की तरफ से कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। दूसरी ओर, भाजपा संगठन ने भी इस सियासी बयानबाज़ी पर फिलहाल अपनी चुप्पी बरकरार रखी है। जानकारों का मानना है कि आगामी चुनाव से ठीक पहले इस प्रकार की हलचल महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरणों को नया आकार दे सकती है। अब सभी की निगाहें पंकजा मुंडे के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

  • उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं को लगाई फटकार, अभिजीत दीपके का उदाहरण देकर गुटबाजी पर जताई नाराजगी

    उद्धव ठाकरे ने पार्टी नेताओं को लगाई फटकार, अभिजीत दीपके का उदाहरण देकर गुटबाजी पर जताई नाराजगी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) की एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बैठक के दौरान पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का बेहद सख्त रुख चर्चा का विषय बना हुआ है। ठाणे-कल्याण क्षेत्र के प्रमुख पदाधिकारियों की समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्थानीय नेताओं के बीच जारी आपसी खींचतान और पद-प्रतिष्ठा को लेकर चल रहे विवादों पर खुलकर अपनी तीव्र नाराजगी व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के हालिया आंदोलन का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए पार्टी पदाधिकारियों से बड़े राजनीतिक लक्ष्यों और संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह समीक्षा बैठक कल्याण लोकसभा क्षेत्र में कई निष्ठावान और पुराने कार्यकर्ताओं को सांगठनिक जिम्मेदारियों से अलग किए जाने के बाद पनपे असंतोष की पृष्ठभूमि में बुलाई गई थी। बैठक के दौरान वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और नए मनोनीत पदाधिकारियों के बीच वर्चस्व की जंग और नेतृत्व के मसले को लेकर तीखी नोकझोंक देखने को मिली। वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में संगठनात्मक स्थिति की गहन समीक्षा की जा रही थी, जहां आंतरिक गुटबाजी स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आई।

    अपने आक्रामक संबोधन में उद्धव ठाकरे ने पदाधिकारियों को स्पष्ट ताकीद दी कि राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में सभी को निजी महत्वाकांक्षाओं का त्याग कर बड़े जनहित के मुद्दों के लिए एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि एक तरफ जब देश और राज्य में जनसमस्याओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर संघर्ष किए जा रहे हैं, तब दल के भीतर आंतरिक पदों के लिए खींचतान होना संगठन की नींव को कमजोर करता है। इसी परिपेक्ष्य में उन्होंने अभिजीत दीपके द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए नेताओं से राजनीतिक सक्रियता और अनुशासन की सीख लेने को कहा।

    सूत्रों का कहना है कि पार्टी प्रमुख का यह कड़ा रुख केवल मौखिक चेतावनी तक सीमित नहीं रहने वाला है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठन में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। नेतृत्व का मानना है कि यदि इस गुटबाजी को समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो इसका सीधा नकारात्मक असर धरातल पर कार्यकर्ताओं के मनोबल पर पड़ेगा। मध्य प्रदेश समेत कई अन्य राज्यों के राजनीतिक विश्लेषक भी महाराष्ट्र के इस तेजी से बदलते सियासी घटनाक्रम और शिवसेना (यूबीटी) की अंदरूनी हलचलों पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

    इसके अतिरिक्त, हालिया खबरों में यह बात भी सामने आई है कि उद्धव ठाकरे और अभिजीत दीपके के मध्य टेलीफोन के माध्यम से सीधी बातचीत हुई थी। इस संवाद के दौरान ठाकरे ने उनके द्वारा चलाए जा रहे अभियानों की प्रगति जानी और उन्हें मुंबई स्थित अपने निजी निवास मातोश्री आने का न्योता भी दिया। यद्यपि, इस मुलाकात और बातचीत के विस्तृत एजेंडे को लेकर दोनों ही खेमों की ओर से कोई आधिकारिक विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

    ठाणे और उसके समीपवर्ती इलाके ऐतिहासिक रूप से शिवसेना के सबसे मजबूत गढ़ माने जाते रहे हैं। ऐसे में आगामी स्थानीय निकायों और अन्य चुनावों को ध्यान में रखते हुए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की दरार पार्टी के लिए बड़ा नुकसान साबित हो सकती है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, उद्धव ठाकरे की यह सख्त नसीहत पार्टी के भीतर अनुशासन, एकजुटता और कैडर को पुनः सक्रिय करने का एक रणनीतिक प्रयास है। अब देखना यह होगा कि शीर्ष नेतृत्व की इस चेतावनी के बाद संगठन में क्या जमीनी बदलाव आते हैं।

  • बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का किया ऐलान, अंतरराष्ट्रीय समर्थन की भी अपील

    बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का किया ऐलान, अंतरराष्ट्रीय समर्थन की भी अपील


    नई दिल्ली ।
    बलूचिस्तान के राष्ट्रवादी संगठनों ने 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस आयोजित करने की औपचारिक घोषणा की है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से समर्थन की अपील की है। इस रणनीतिक घोषणा के सामने आने के बाद बलूचिस्तान का संवेदनशील मुद्दा एक बार फिर वैश्विक कूटनीतिक मंचों पर सुर्खियों में आ गया है। बलोच नेतृत्व का तर्क है कि 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान को संप्रभु घोषित किया गया था, इसलिए उसी ऐतिहासिक संदर्भ में हर साल इस तिथि को स्वाधीनता दिवस के रूप में याद किया जाएगा।

    राष्ट्रवादी गुटों की ओर से जारी सार्वजनिक बयान में नागरिकों से अपने आवासों, व्यावसायिक केंद्रों और प्रमुख स्थलों पर प्रस्तावित रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान का ध्वज फहराने का आह्वान किया गया है। इसके अतिरिक्त, दुनिया भर के अलग-अलग मुल्कों में निवास करने वाले बलोच प्रवासियों से भी इस दिन विशेष जागरूकता कार्यक्रम और रैलियां आयोजित करने का आग्रह किया गया है। बलोच प्रतिनिधियों का मानना है कि यह आयोजन उनकी ऐतिहासिक अस्मिता और दीर्घकालिक राजनीतिक आकांक्षाओं को मजबूती से रेखांकित करेगा।

    अपने आधिकारिक वक्तव्य में बलोच नेताओं ने इस्लामाबाद की शासन नीतियों की सख्त आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह क्षेत्र दशकों से मानवाधिकारों के उल्लंघन और गंभीर सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। उनका तर्क है कि केंद्रीय नीतियों के चलते बलूचिस्तान का बुनियादी ढांचागत और सामाजिक विकास पूरी तरह बाधित रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य ध्येय संयुक्त राष्ट्र संघ और विश्व के प्रमुख देशों का ध्यान इस मानवीय व राजनीतिक संकट की ओर आकर्षित करना है।

    इस वैश्विक रणनीति के तहत प्रवासी बलोच समुदाय 11 अगस्त को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय राजधानियों में विशेष सभाओं का आयोजन करेगा। बलोच रणनीतिकारों का मानना है कि अपने अधिकारों की आवाज को अधिक सशक्त बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन हासिल करना बेहद अनिवार्य हो गया है। मध्य प्रदेश समेत भारत और वैश्विक मीडिया में भी इस भू-राजनीतिक घटनाक्रम और इसके भावी प्रभावों पर गहन समीक्षा शुरू हो गई है।

    ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य का हवाला देते हुए राष्ट्रवादी नेताओं ने कहा कि 1947 में विभाजन काल के दौरान 11 अगस्त को बलूचिस्तान की स्वायत्त स्थिति को स्वीकार किया गया था। यद्यपि इस ऐतिहासिक दावे पर विभिन्न इतिहासकारों और विशेषज्ञों के अलग-अलग मत रहे हैं। पाकिस्तान सरकार बलूचिस्तान को अपना अखंड और अभिन्न अंग मानती है तथा किसी भी प्रकार की अलगाववादी गतिविधियों को पूरी तरह खारिज करती रही है।

    दक्षिण एशिया में बलूचिस्तान का मामला अत्यंत संवेदनशील सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा हुआ है। वहां सक्रिय स्वाधीनता समर्थक समूहों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच अक्सर गतिरोध की स्थिति उत्पन्न होती रही है। ताजा घोषणा के पश्चात क्षेत्र में राजनीतिक और कूटनीतिक सुगबुगाहट का तेज होना स्वाभाविक माना जा रहा है। फिलहाल 11 अगस्त को होने वाले कार्यक्रमों और उस पर आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रियाओं पर वैश्विक पर्यवेक्षकों की नजरें टिकी हुई हैं।

  • लोकसभा में बढ़ा सियासी घमासान, शीर्ष नेतृत्व से जवाबदेही और ज्वलंत मुद्दों पर नियमबद्ध बहस की लगातार मांग

    लोकसभा में बढ़ा सियासी घमासान, शीर्ष नेतृत्व से जवाबदेही और ज्वलंत मुद्दों पर नियमबद्ध बहस की लगातार मांग

    नई दिल्ली । संसद के जारी मॉनसून सत्र के दौरान सत्तापक्ष और विपक्षी दलों के मध्य तल्खी लगातार बढ़ती जा रही है। मंगलवार को भी संसद के दोनों सदनों में जोरदार हंगामे और नारेबाजी की पूरी संभावना बनी हुई है। विपक्षी दल विभिन्न ज्वलंत जनमुद्दों पर सरकार को घेरने की अपनी रणनीति पर पूरी मजबूती के साथ कायम हैं। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि जब तक इन अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत और नियमबद्ध विचार-विमर्श की अनुमति प्रदान नहीं की जाती तथा संबंधित मंत्रालयों की ओर से आधिकारिक जवाब प्रस्तुत नहीं किया जाता, तब तक विधायी कामकाज का सुचारू रूप से संचालन हो पाना बेहद कठिन रहेगा। इसके कारण संसदीय कार्यप्रणाली पर अनिश्चितता के बादल गहरा गए हैं।

    विपक्षी गठबंधन ने अपनी रणनीतिक रूपरेखा को और अधिक धार देते हुए हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलित छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई तथा अयोध्या में राम मंदिर दान प्रक्रिया से जुड़े विवादों को प्राथमिक मुद्दे के रूप में उभारा है। विरोध प्रदर्शन में शामिल प्रतिनिधियों की प्रमुख मांग है कि देश के केंद्रीय गृह मंत्री स्वयं सदन के पटल पर उपस्थित होकर इस समूचे घटनाक्रम पर सरकार का स्पष्ट पक्ष रखें। इसके अतिरिक्त, मंदिर में अर्पित चढ़ावे तथा वित्तीय लेनदेन से जुड़ी प्रक्रियाओं पर भी बिना किसी विलंब के स्वतंत्र और पारदर्शी चर्चा कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि जनसंशय दूर हो सके।

    संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व की सदन में निरंतर अनुपस्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की इस सर्वोच्च संस्था में जनता से सीधे जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री का प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहना अत्यंत आवश्यक है। कांग्रेस समेत अन्य सहयोगी दलों का कहना है कि सरकार को विपक्ष के तर्कसंगत प्रश्नों का उत्तर देने से बचने के बजाय सकारात्मक रुख अपनाते हुए खुले संवाद की पहल करनी चाहिए, जिससे जारी गतिरोध को समाप्त किया जा सके।

    दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ दल का मानना है कि निरंतर व्यवधान और विरोध के कारण देश से जुड़े कई अति आवश्यक विधायी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि, इस भारी राजनीतिक खींचातान के मध्य भी लोकसभा में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी से संबंधित महत्वपूर्ण कानून को पारित करा लिया गया। इसके साथ ही देश की बैंकिंग प्रणाली में आधुनिक डिजिटल तकनीक एवं क्लाउड आधारित रिकॉर्ड को कानूनी मान्यता प्रदान करने वाले एक नए बैंकिंग संशोधन विधेयक को भी पटल पर प्रस्तुत किया गया। सत्तापक्ष का दावा है कि विपक्ष जनकल्याणकारी कानूनों पर बहस करने के बजाय केवल व्यवधान पैदा कर रहा है।

    संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी रणनीति की तीखी आलोचना करते हुए दोहराया है कि सरकार नियमानुसार सभी जनहितकारी विषयों पर सार्थक और स्वस्थ बहस के लिए पूरी तरह तत्पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल वास्तव में गंभीर चर्चा से भाग रहे हैं और केवल राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से नारेबाजी का सहारा ले रहे हैं। उनका तर्क था कि संसद को राजनीतिक पैंतरेबाज़ी का केंद्र बनाने के स्थान पर जनहित में विधेयकों को विचार-विमर्श के पश्चात पारित कराने में रचनात्मक योगदान दिया जाना चाहिए।

    इसी बीच, संसद भवन परिसर स्थित मकर द्वार के निकट विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों ने एकजुट होकर जोरदार प्रदर्शन किया और तख्तियां दिखाकर नारेबाजी की। मध्य प्रदेश समेत देशभर के राजनीतिक विश्लेषक और आम नागरिक भी इस निरंतर जारी संसदीय गतिरोध पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठकों में भी दोनों पक्षों के बीच न्यूनतम सहमति न बन पाने के कारण यह स्पष्ट है कि मॉनसून सत्र के आगामी दिनों में भी सामान्य कामकाज बहाल होना काफी मुश्किल दिखाई दे रहा है।

  • अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में शिकायत, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ने एफआईआर और गिरफ्तारी की मांग की

    नई दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक आवेदन प्रस्तुत किया गया है। सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर फैजान अंसारी ने राष्ट्रीय राजधानी पहुंचकर अभिजीत दीपके के विरुद्ध प्राथमिक दर्ज करने और उन्हें हिरासत में लेने की मांग उठाई है। शिकायत आवेदन में कई संगीन आरोप लगाए गए हैं, यद्यपि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस प्रशासन की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी नहीं हुआ है।

    शिकायतकर्ता फैजान अंसारी ने दिल्ली पुलिस के उच्च अधिकारियों को सौंपे पत्र में कहा कि उन पर अभिजीत दीपके के समर्थकों द्वारा दो अलग-अलग मौकों पर हमला किया गया। उनके अनुसार पहली घटना पुणे में और दूसरी औरंगाबाद में घटित हुई, जिनके संदर्भ में स्थानीय थानों में पूर्व में ही सूचना दी जा चुकी है। उन्होंने इन घटनाओं से जुड़े साक्ष्य होने का दावा करते हुए दिल्ली पुलिस से त्वरित वैधानिक कदम उठाने का अनुरोध किया है।

    आवेदन में अभिजीत दीपके पर कई अन्य गंभीर आक्षेप भी मढ़े गए हैं। इसमें उन्हें पाकिस्तान का एजेंट बताने के साथ-साथ उमर खालिद का समर्थन करने का आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त यह दावा भी किया गया है कि विगत आंदोलनों में कुछ नामचीन हस्तियों को धनराशि देकर आमंत्रित किया गया था। हालांकि, किसी भी प्रशासनिक या न्यायिक संस्था ने इन आरोपों का समर्थन नहीं किया है और न ही अभिजीत दीपके की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान आया है।

    फैजान अंसारी ने संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे विशेष रूप से मुंबई से दिल्ली केवल इस आवेदन को सौंपने आए हैं। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए चेतावनी दी कि समय पर उचित कार्रवाई न होने से स्थिति बिगड़ सकती है। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस पूरे घटनाक्रम की चर्चाएं तेज हो गई हैं, लेकिन यह पूरी तरह से एकपक्षीय आरोपों पर आधारित मामला है।

    यह विवाद ऐसे वक्त सामने आया है जब सीजेपी और अभिजीत दीपके पूर्व में आयोजित आंदोलनों के कारण सार्वजनिक रूप से चर्चा का केंद्र रहे हैं। जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों के दौरान भी उनके संगठन की भूमिका पर बात हुई थी। फिलहाल दिल्ली पुलिस को प्राप्त शिकायत की समीक्षा की जा रही है और प्राथमिक जांच के पश्चात ही अगली विधिक प्रक्रिया तय होगी। जांच पूर्ण होने तक इन दावों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता।

  • सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने टीएमसी छोड़ी, भाजपा और तृणमूल दोनों पर साधा निशाना

    सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने टीएमसी छोड़ी, भाजपा और तृणमूल दोनों पर साधा निशाना

    नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रपौत्र चंद्र कुमार बोस ने तृणमूल कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यधारा के राजनीतिक दलों से उनका मोहभंग हो चुका है। अब वे नेताजी के आदर्शों और सिद्धांतों पर आधारित एक स्वतंत्र राजनीतिक मंच स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। उनके इस निर्णय ने राज्य के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

    तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के महज चार माह के भीतर ही उन्होंने पार्टी से अलग होने का मन बना लिया। उन्होंने अप्रैल 2026 में तृणमूल का दामन थामा था। अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा की कार्यशैली में कोई मौलिक अंतर नजर नहीं आता। दोनों ही दल जनहित के बुनियादी मुद्दों को किनारे कर केवल सत्ता केंद्रित राजनीति में लगे हुए हैं, जिससे आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।

    अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभवों का जिक्र करते हुए चंद्र कुमार बोस ने कहा कि वे ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर चुके हैं। इन सभी राजनीतिक यात्राओं के बाद उन्हें अहसास हुआ कि वर्तमान राजनीतिक ढांचा उनके जनसेवा के उद्देश्यों और सोच से मेल नहीं खाता। देश को इस समय समावेशी राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और वास्तविक सामाजिक न्याय को प्राथमिकता देने वाली राजनीति की सख्त जरूरत है।

    उन्होंने आगे कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के विचार ही उनकी राजनीति का मुख्य आधार रहे हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए वे एक नई राजनीतिक पहल की नींव रखेंगे। इस नए मंच का मुख्य उद्देश्य युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की गतिविधियों से जोड़ना और राजनीति में नैतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना होगा। मध्य प्रदेश समेत देशभर के राजनीतिक हलकों में भी इस नए विचार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं, जहां समान विचारधारा वाले लोगों को एकजुट करने की तैयारी है।

    उल्लेखनीय है कि चंद्र कुमार बोस ने वर्ष 2016 में भाजपा की सदस्यता ली थी। वे पार्टी के राज्य उपाध्यक्ष रहने के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी भी रहे। हालांकि, नीतियों से असहमति के चलते उन्होंने 2023 में भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद अप्रैल 2026 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए थे, लेकिन यह साथ भी महज चार महीने ही चल सका। तृणमूल कांग्रेस की ओर से फिलहाल इस इस्तीफे और बयानों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।

  • सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    सप्ताह की शुरुआत में चमके सोना-चांदी के भाव, गिरावट के बाद लौटी तेजी, जानें 24 कैरेट गोल्ड और सिल्वर का नया रेट

    नई दिल्ली । कारोबारी सप्ताह के पहले दिन घरेलू वायदा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में शानदार तेजी दर्ज की गई है। पिछले कारोबारी सत्रों में लगातार दर्ज की जा रही गिरावट के बाद दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में सोमवार को सुधार देखने को मिला। बाजार में आई इस नई तेजी से निवेशकों और कारोबारियों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि ताजा रिकवरी के बावजूद चांदी अभी भी अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से काफी निचले स्तर पर बनी हुई है, जबकि सोने में भी सकारात्मक गति दर्ज की गई है।

    मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में सितंबर एक्सपायरी वाले चांदी के अनुबंध ने सोमवार को बढ़त के साथ व्यापार की शुरुआत की। पिछले सत्र में चांदी का भाव 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था, जो नए सत्र की शुरुआत में उछलकर 2,18,709 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गया। इस प्रकार चांदी की कीमत में प्रति किलोग्राम 1,511 रुपये की सीधी बढ़ोतरी दर्ज की गई। बाजार में आई इस उछाल ने पिछले सप्ताह की सुस्ती को दूर करते हुए कारोबारियों में नया उत्साह भरा है।

    बीते कारोबारी सप्ताह के दौरान चांदी की दरों में काफी दबाव देखा गया था। 24 जुलाई को चांदी का भाव 2,22,138 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया था, जो सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन तक गिरकर 2,17,198 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया था। महज पांच कारोबारी दिनों के भीतर चांदी करीब 4,940 रुपये प्रति किलोग्राम तक सस्ती हो गई थी। सोमवार को दर्ज की गई तेजी से इस बड़ी गिरावट की आंशिक भरपाई संभव हो सकी है, लेकिन बाजार को पूरी तरह उबरने में अभी समय लग सकता है।

    यदि चांदी के लंबे समय के आंकड़ों और ऐतिहासिक प्रदर्शन का आकलन किया जाए तो इस धातु ने चालू वर्ष के जनवरी महीने में एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया था। उस दौरान चांदी की कीमत इतिहास में पहली बार 4 लाख रुपये के आंकड़े को पार करते हुए 4,20,048 रुपये प्रति किलोग्राम के उच्चतम स्तर तक जा पहुंची थी। वर्तमान बाजार मूल्य की तुलना करें तो चांदी अभी भी अपने उस रिकॉर्ड स्तर से लगभग 2,01,339 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती बिक रही है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में रिकवरी की बड़ी संभावना मौजूद है।

    सोने के बाजार में भी सप्ताह के पहले दिन मजबूती का रुख देखा गया। अगस्त एक्सपायरी वाले 24 कैरेट सोने का वायदा भाव पिछले कारोबारी दिन 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। सोमवार को बाजार खुलते ही यह बढ़त के साथ 1,41,820 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इस तरह सोने में प्रति 10 ग्राम 309 रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के सकारात्मक संकेतों और स्थानीय मांग के कारण सोने को यह समर्थन प्राप्त हुआ है।

    पिछला हफ्ता सोने के लिए भी सुस्ती भरा साबित हुआ था। 24 जुलाई को सोने की कीमत 1,43,106 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थी, जो सप्ताहांत तक घटकर 1,41,511 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गई थी। इस अवधि में सोने के दाम में करीब 1,595 रुपये प्रति 10 ग्राम की नरमी दर्ज की गई थी। मध्य प्रदेश समेत देशभर के सर्राफा बाजारों में कारोबारी अब वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और मुद्रास्फीति के संकेतों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं, जिससे आने वाले दिनों में सराफा बाजार की आगे की दिशा तय होगी।

  • दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग

    दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग


    भोपाल । दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया सियासी संदेश सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को खुला पत्र लिखकर सरकार से नई राजनीतिक परंपरा शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दतिया का जनादेश केवल एक सीट का चुनाव परिणाम नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता की सोच और अपेक्षाओं का संकेत है। जनता अब केवल घोषणाएं और वादे नहीं बल्कि पारदर्शी शासन जवाबदेही और ठोस परिणाम चाहती है। यही समय है जब सत्ता और विपक्ष दोनों मिलकर लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएं।

    जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है और यह विश्वास तभी कायम रह सकता है जब सरकार अपने कामकाज का पूरा ब्यौरा जनता के सामने रखे। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में श्वेत पत्र जारी करने की नई परंपरा शुरू की जाए ताकि सरकार की उपलब्धियां चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ जनता तक पहुंच सकें। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और जनता को सही जानकारी भी मिलेगी।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार बिजली और पेयजल व्यवस्था शिक्षा स्वास्थ्य किसानों की स्थिति कृषि क्षेत्र युवाओं के रोजगार कानून व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा आदिवासी समाज और दलित पिछड़ा वर्ग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर क्रमवार श्वेत पत्र जारी करे। इन दस्तावेजों में वर्तमान स्थिति अब तक हुए कार्य भविष्य की योजनाएं और चुनौतियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए ताकि जनता वास्तविक तस्वीर देख सके और सरकार की जवाबदेही भी तय हो सके।

    पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि दतिया का परिणाम इस बात का संकेत है कि लोग अब राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप से आगे बढ़कर विकास और परिणाम आधारित राजनीति देखना चाहते हैं। प्रदेश की जनता चाहती है कि राजनीतिक दल केवल एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय समस्याओं के समाधान पर चर्चा करें। ऐसे में सरकार यदि श्वेत पत्र जारी करती है तो इससे जनता के बीच पारदर्शिता का संदेश जाएगा और लोकतांत्रिक संवाद को भी मजबूती मिलेगी।

    जीतू पटवारी ने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस भी इस पहल में पूरी जिम्मेदारी के साथ भागीदारी निभाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के तौर पर कांग्रेस सरकार के सामने तथ्य आधारित सुझाव और अपने विचार रखेगी। लोकतंत्र में स्वस्थ बहस का आधार आंकड़े और तथ्य होने चाहिए न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी। यदि सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नई और सकारात्मक शुरुआत होगी।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दतिया के जनादेश को केवल चुनावी जीत या हार के नजरिए से न देखा जाए बल्कि इसे प्रदेश की जनता की उम्मीदों और बदलते राजनीतिक संदेश के रूप में स्वीकार किया जाए। यदि सरकार और विपक्ष दोनों जनहित के मुद्दों पर खुलकर संवाद करेंगे तो इससे शासन व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी और प्रदेश के विकास को भी नई दिशा मिलेगी। कांग्रेस का मानना है कि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और अब मध्य प्रदेश की राजनीति को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

  • भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था

    भोपाल में पानी का संकट, बड़ा तालाब की सप्लाई प्रभावित; प्रभावित क्षेत्रों के लिए टैंकर की व्यवस्था


    भोपाल  भोपाल के हजारों परिवारों के लिए मंगलवार का दिन पानी की परेशानी लेकर आया है। शहर के प्रमुख जल स्रोत बड़ा तालाब से होने वाली जलापूर्ति आज पूरी तरह प्रभावित रहेगी। नगर निगम ने करबला पंप हाउस और मनुआभान टेकरी स्थित जलशोधन संयंत्र पर आवश्यक मरम्मत और तकनीकी सुधार कार्य के चलते कई इलाकों में पानी की सप्लाई बंद रखने का निर्णय लिया है। अधिकारियों के अनुसार यह कार्य सुबह 9 बजे से शुरू होकर शाम 7 बजे तक चलेगा जिसके कारण दोपहर और शाम के समय होने वाला जलप्रदाय पूरी तरह प्रभावित रहेगा। निगम ने भरोसा दिलाया है कि मरम्मत कार्य पूरा होते ही बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में नियमित रूप से जलापूर्ति बहाल कर दी जाएगी।

    नगर निगम के मुताबिक करबला पंप हाउस पर 800 एमएम व्यास की रॉ वॉटर पाइपलाइन में लीकेज को ठीक किया जाएगा जबकि मनुआभान टेकरी जलशोधन संयंत्र में जरूरी तकनीकी सुधार किए जाएंगे। इन दोनों कार्यों के कारण बड़ा तालाब से जुड़े जल वितरण नेटवर्क को कुछ समय के लिए बंद रखना जरूरी है ताकि मरम्मत सुरक्षित और प्रभावी तरीके से पूरी की जा सके। निगम का कहना है कि यह काम भविष्य में जलापूर्ति को बेहतर और बाधारहित बनाए रखने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    इस शटडाउन का असर करोंद सहित करीब 40 इलाकों पर पड़ेगा। जिन क्षेत्रों में आज पानी की सप्लाई नहीं होगी उनमें ब्लू मून कॉलोनी नवाब कॉलोनी प्रेम नगर सुंदर नगर प्रीत नगर शिवशक्ति नगर शिव नगर फेज 1 2 और 3 कल्याण नगर प्रताप नगर चंदन नगर रासलाखेड़ी बिहारी कॉलोनी पटेल नगर मालीखेड़ी भानपुर रोड हाउसिंग बोर्ड करोंद देवकी नगर अमन कॉलोनी कमल नगर सईद कॉलोनी पंचवटी कॉलोनी रतन कॉलोनी कृषक नगर रिंग गार्डन बृज कॉलोनी गोया कॉलोनी पूजा कॉलोनी शिवानी होम्स नवजीवन कॉलोनी छोला मंदिर सत्यज्ञान नगर शंकर नगर उड़िया बस्ती टिम्बर मार्केट नगर निगम कॉलोनी और चांदबाड़ी सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों के लोगों को पानी का उपयोग बेहद सोच-समझकर करने और आवश्यक जरूरतों के लिए पहले से पानी संग्रहित रखने की सलाह दी गई है।

    नगर निगम ने नागरिकों की परेशानी कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था भी तैयार की है। अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों से पानी की मांग प्राप्त होगी वहां निगम के टैंकर भेजे जाएंगे ताकि किसी भी इलाके में पेयजल संकट गहराने न पाए। नागरिक जरूरत पड़ने पर नगर निगम के संबंधित जोन कार्यालय या कंट्रोल रूम से संपर्क कर टैंकर की मांग दर्ज करा सकते हैं। निगम ने स्पष्ट किया है कि मरम्मत कार्य निर्धारित समय पर पूरा होने के बाद बुधवार से सभी प्रभावित क्षेत्रों में पहले की तरह नियमित जलापूर्ति शुरू कर दी जाएगी।

    नगर निगम ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह अस्थायी असुविधा भविष्य में बेहतर जलापूर्ति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है। इसलिए लोग धैर्य रखें और पानी का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए करें ताकि किसी भी परिवार को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।