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  • 16 किलो वजन घटाकर नए अंदाज में लौटे सलमान खान, हेल्थ पर पहली बार किया बड़ा खुलासा

    16 किलो वजन घटाकर नए अंदाज में लौटे सलमान खान, हेल्थ पर पहली बार किया बड़ा खुलासा


    नई दिल्ली । कुछ दिनों से बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की सेहत को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही थीं। हाल ही में जब अभिनेता सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहले की तुलना में काफी दुबले नजर आए तो सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य को लेकर तरह तरह के कयास लगाए जाने लगे। कई प्रशंसकों ने उनकी फिटनेस को लेकर चिंता भी जताई। अब इन सभी अटकलों पर खुद सलमान खान ने विराम लगा दिया है। अभिनेता ने पहली बार खुलासा किया कि उन्होंने किसी बीमारी के कारण नहीं बल्कि अपनी फिटनेस पर काम करते हुए करीब 16 किलो वजन कम किया है।

    सलमान खान यह खुलासा अपने भाई सोहेल खान से मुलाकात के दौरान रियलिटी शो अलायंस में करते नजर आए। बातचीत के दौरान सोहेल खान ने बताया कि उन्होंने 12 किलो वजन कम किया है और अपने सिक्स पैक एब्स भी दिखाए। इस पर सलमान मुस्कुराते हुए बोले कि उन्होंने तो 16 किलो वजन कम कर लिया है। अभिनेता की यह बात सुनकर वहां मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। इसी के साथ यह भी साफ हो गया कि उनका बदला हुआ लुक किसी स्वास्थ्य समस्या का नहीं बल्कि कड़ी मेहनत और फिटनेस रूटीन का नतीजा है।

    दरअसल कुछ समय पहले जब सलमान खान की नई तस्वीरें सामने आई थीं तो उनके वजन में आई कमी को देखकर फैंस काफी परेशान हो गए थे। सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। इसके बाद सलमान ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक तस्वीर साझा करते हुए मजाकिया अंदाज में लिखा था कि आप लोगों की तबीयत कैसी है। इस पोस्ट को फैंस ने उनकी ओर से चिंता कम करने की कोशिश के रूप में देखा था।

    इन दिनों सलमान खान सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय हैं। हाल ही में उन्होंने जिम में वर्कआउट के बाद अपनी शर्टलेस तस्वीर साझा की थी। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा कि सलमान खान डर गया हम्म जो डर गया वो मर गया। उनका यह अंदाज फैंस को काफी पसंद आया और लोगों ने उनकी फिटनेस की जमकर तारीफ की। अब 16 किलो वजन कम करने का खुलासा होने के बाद उनके इस ट्रांसफॉर्मेशन की और भी ज्यादा चर्चा हो रही है।

    अगर प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो सलमान खान पिछली बार फिल्म सिकंदर में नजर आए थे। इसके बाद उन्होंने राजा शिवाजी में कैमियो किया। अब उनकी अगली फिल्म मातृभूमि रिलीज के लिए तैयार है। इस फिल्म में पहली बार वह अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह के साथ स्क्रीन शेयर करेंगे। दिलचस्प बात यह है कि इस फिल्म का नाम पहले बैटल ऑफ गलवान रखा गया था लेकिन बाद में इसे बदलकर मातृभूमि कर दिया गया। फिल्म के कई गाने पहले ही रिलीज हो चुके हैं जबकि इसकी रिलीज डेट का इंतजार अभी भी बना हुआ है।

    फिल्मों के अलावा सलमान खान जल्द ही लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस 20 में एक बार फिर होस्ट की भूमिका निभाते नजर आएंगे। पिछले कई सीजन की तरह इस बार भी दर्शकों को उनसे काफी उम्मीदें हैं। फैंस अब नए सीजन के कंटेस्टेंट्स और सलमान के खास अंदाज का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। फिटनेस पर फोकस और नए प्रोजेक्ट्स के साथ सलमान खान एक बार फिर दमदार वापसी के लिए पूरी तरह तैयार दिखाई दे रहे हैं।

  • EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी

    EPFO: 25 हजार रुपये वेतन वालों को भी PF और पेंशन का लाभ…. प्रस्ताव को मिली हरी झंडी


    नई दिल्ली।
    संगठित क्षेत्र में काम करने वाले उन लाखों कर्मचारियों को भी पीएफ (PF) और पेंशन (Pension) का लाभ मिल सकता है, जिनका मासिक बेसिक वेतन (Monthly Basic Salary) 25,000 रुपये है। वित्त मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) (Employees’ Provident Fund – EPF) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) (Employees’ Pension Scheme -EPS) के तहत अनिवार्य कवरेज की वेतन सीमा 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। अब इसे केंद्रीय कैबिनेट के पास भेजा जाएगा। नया नियम 20 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली सभी पंजीकृत कंपनियों पर लागू होगा। आखिरी बार इसमें सितंबर, 2014 में संशोधन किया गया था।


    पहले 30,000 रुपये करने का था प्रस्ताव

    सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय श्रम मंत्रालय और ईपीएफओ ने पहले वेतन सीमा को बढ़ाकर 30,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, वित्त मंत्रालय के साथ गहन समीक्षा के बाद 25,000 रुपये प्रति माह (बेसिक पे और डीए) पर अंतिम मुहर लगाई गई। 


    मौजूदा नियम

    वर्तमान नियमों के अनुसार, 15,000 तक बेसिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए ही ईपीएफओ में योगदान अनिवार्य था। इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों के पास ईपीएफ से बाहर रहने का विकल्प था।


    कंपनियों और सरकारी खजाने पर पड़ेगा असर

    वेतन सीमा बढ़ने से कंपनियों और सरकार दोनों का वित्तीय बोझ बढ़ेगा। कंपनियों को अधिक कर्मचारियों के लिए पीएफ और पेंशन में 12 फीसदी का योगदान देना होगा, जिससे उनकी पेरोल लागत बढ़ जाएगी। पेंशन फंड में सरकार भी बेसिक वेतन का 1.16 फीसदी योगदान देती है। वेतन सीमा बढ़ने से सरकार का पेंशन सब्सिडी बजट भी बढ़ जाएगा।

  • फेस्टिवल सीजन में महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट… 5% से ज्यादा बढ़े चीनी-चावल के दाम

    फेस्टिवल सीजन में महंगाई ने बिगाड़ा रसोई का बजट… 5% से ज्यादा बढ़े चीनी-चावल के दाम


    नई दिल्ली।
    कमजोर मानसून (Weak Monsoon), वैश्विक संकट (Global Crisis) और जमाखोरी (Hoarding) ने देश में त्योहारी सीजन (Festive Season) की शुरुआत के साथ ही महंगाई (Inflation) बढ़ा दी है। एक माह में चीनी और चावल (Sugar and Rice) के दाम पांच फीसदी तक बढ़ गए हैं। उपभोक्ता मामलों के विभाग के मुताबिक, देशभर के बाजारों में चीनी की थोक कीमतें बीते एक महीने में 5 फीसदी से ज्यादा बढ़कर औसतन 4,593 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गई हैं। एक साल में दाम 7.64 फीसदी बढ़े हैं। वहीं, खुदरा बाजार में कीमत एक महीने पहले के 47.11 रुपये से बढ़कर 3 अगस्त, 2026 को 49.53 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई।

    उधर, चावल की अखिल भारतीय औसत दैनिक खुदरा कीमत मासिक आधार पर 2.27 फीसदी बढ़कर 3 अगस्त को 45.13 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंच गई। एक महीने पहले चावल की खुदरा कीमत 44.13 रुपये प्रति किलोग्राम थी। दक्षिण भारत के राज्यों, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में चावल की कीमत में प्रति किलोग्राम 10 से 15 फीसदी तक की वृद्धि हुई है। इससे न सिर्फ घरेलू बजट बिगड़ रहा है, बल्कि मासिक राशन का बिल भी बढ़ गया है।


    चेतावनी…50 फीसदी तक महंगा हो सकता है चावल

    प्रोफेसर जयशंकर तेलंगाना कृषि विश्वविद्यालय के एक नीति पत्र ने चेतावनी दी है कि अगर अल-नीनो के कारण चावल उत्पादन में होने वाले नुकसान के साथ देश एहतियातन स्टॉक जमा करने लगे तो वैश्विक बाजार में दाम 30-50 फीसदी तक बढ़ेंगे। वैश्विक अनिश्चितताओं, उर्वरक-ऊर्जा की बढ़ती लागत और एशिया के प्रमुख चावल उत्पादक क्षेत्रों पर अल-नीनो के खतरे ने मिलकर कीमतों में भारी उछाल का जोखिम पैदा कर दिया है।


    क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

    – चीनी की कीमतों में तेजी की वजह उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में पुराने स्टॉक का खत्म होना और इथेनॉल डायवर्जन है।
    – क्षेत्रीय स्तर पर आपूर्ति के इस असंतुलन का फायदा उठाकर सट्टेबाजों ने कीमतें बढ़ा दी हैं। इसका असर आगामी त्योहारी सीजन में मिठाइयों, बेकरी और प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री पर पड़ेगा।
    – चावल की मूल्य वृद्धि का मुख्य कारण अल-नीनो से जुड़ी गंभीर मौसमी स्थितियां, बारिश की कमी और जमाखोरी है। जमाखोरी से खुले बाजार में आपूर्ति कृत्रिम रूप से कम हो गई है एवं दाम और अधिक बढ़ गए हैं।


    तांबा…वैश्विक बाजार में रिकॉर्ड ऊंचाई पर

    लंदन मेटल एक्सचेंज पर तांबे का तीन महीने का वायदा अनुबंध चढ़कर 13,842 डॉलर प्रति टन की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है। वैशि्वक उत्पादन में 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी वाले देश चिली में अचानक बाढ़, शीतकालीन तूफानों और भारी बर्फबारी के कारण प्रमुख खदानों में कामकाज ठप हो गया है। इसके अलावा, डाटा सेंटरों और पावर ग्रिड इन्फ्रा से भारी मांग ने दाम और बढ़ाने का काम किया है। इससे आने वाले दिनों में इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, वाहन और घरेलू उपकरण महंगे हो सकते हैं।

  • FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक

    FSSAI की बड़ी कार्रवाई… डाबर के कई उत्पादों की बिक्री पर 100% प्योर वाले दावों के साथ रोक


    नई दिल्ली।
    भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (Food Safety and Standards Authority of India- FSSAI) ने डाबर इंडिया लिमिटेड (Dabur India Limited) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है. FSSAI ने डाबर के कई प्रोडक्ट्स पर ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों (Misleading claims) के साथ बिक्री करने पर रोक लगा दी है.

    FSSAI ने जांच में पाया कि वेबसाइट पर प्रोडक्ट्स के लिए ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% प्योरिटी गारंटेड’, ‘100% ऑर्गेनिक’ और ‘100% टेंडर कोकोनट वॉटर’ जैसे दावों का खुलकर इस्तेमाल किया जा रहा था।

    ऑथोरिटी ने बताया कि इस तरह के दावे फूड सिक्योरिटी लॉ का उल्लंघन करते हैं. ऐसे दावे ‘खाद्य सुरक्षा एवं मानक (विज्ञापन और दावे) विनियम, 2018’ के खिलाफ हैं. ये दावे अस्पष्ट और असत्यापित हैं, जो सीधे तौर पर ग्राहकों को गुमराह करते हैं।
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    किन प्रोडक्ट्स पर लगा ये बैन?

    FSSAI ने सोशल मीडिया पर बताया कि ‘100 प्रतिशत’ वाले भ्रामक दावों के साथ बिक्री करने वाले इस रोक के दायरे में डाबर का शहद, गाय का घी, सेब का सिरका, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, नारियल पानी और नारियल दूध जैसे प्रोडक्ट्स शामिल हैं. इसके अलावा, ‘डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर’ और ‘डाबर ऑर्गेनिक हनी’ पर बिना वैध अनुमति के ‘जैविक भारत’ लोगो लगाया गया था।

    वहीं ‘डाबर होममेड कोकोनट मिल्क’ पर ‘100% शुद्धता’ का दावा किया गया था, जो कंपाउंड फूड्स के लिए नियम के मुताबिक पूरी तरह बैन है.


    15 दिनों के भीतर मांगी रिपोर्ट

    FSSAI ने बताया कि उसने डाबर को पहले भी नोटिस जारी कर इन भ्रामक दावों को हटाने का निर्देश दिया था. लेकिन कंपनी की ओर से कोई ठोस सुधार नहीं किया गया. अब FSSAI ने डाबर इंडिया को इन सभी प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत रोकने के आदेश दिए हैं. साथ ही, कंपनी को 15 दिनों के भीतर अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा है।

    बता दें कि FSSAI फूड सिक्योरिटी को लेकर काफी सख्ती बरत रहा है. ऐसे में कई बड़ी कंपनियां उसके रडार पर हैं।

  • US : ट्रंप का शवोन के CEO पर तीखा हमला….. तेल कंपनी से की पेट्रोल-डीजल के रेट घटाने की मांग

    US : ट्रंप का शवोन के CEO पर तीखा हमला….. तेल कंपनी से की पेट्रोल-डीजल के रेट घटाने की मांग


    वॉशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने तेल कंपनी शवोन (Oil company Chevron) के चेयरमैन और सीईओ माइक वर्थ (Mike Wirth) पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने आरोप लगाया कि वर्थ ने कंपनी की सफलता का श्रेय अपनी नीतियों को दिया, लेकिन यह भूल गए कि उनकी सरकार की नीतियों के बिना अमेरिकी तेल उद्योग और देश दोनों मुश्किल में पड़ जाते। साथ ही उन्होंने तेल कंपनियों से उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें तुरंत कम करने की मांग भी की।


    ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर क्या कहा?

    ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि माइक वर्थ ने एक इंटरव्यू में शवोन की सफलता के कई कारण गिनाए, लेकिन उन्होंने ट्रंप प्रशासन की भूमिका का जिक्र नहीं किया। ट्रंप ने दावा किया कि उनकी सरकार की दूरदर्शिता, मजबूती और स्थिर नीतियों की वजह से ही अमेरिकी तेल उद्योग आज मजबूत स्थिति में है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी सरकार नहीं होती, तो तेल उद्योग लगभग खत्म हो चुका होता।


    वेनेजुएला का भी किया जिक्र

    ट्रंप ने कहा कि उनके कार्यकाल में वेनेजुएला पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों ने अमेरिकी रणनीति को मजबूती दी। उनके मुताबिक, शवोन को पहले वेनेजुएला से बाहर होना पड़ा था, लेकिन अब कंपनी पहले से ज्यादा मजबूत स्थिति में वहां लौट रही है और बड़ा मुनाफा कमाने की उम्मीद कर रही है।


    तेल कंपनियों को दी सीधी चेतावनी

    ट्रंप ने सिर्फ शवोन ही नहीं, बल्कि अन्य तेल कंपनियों को भी खुदरा ईंधन कीमतें तुरंत कम करने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आम उपभोक्ताओं को राहत मिलनी चाहिए और कंपनियों को पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने चाहिए।


    शवोन CEO ने क्या कहा था?

    इससे पहले शवोन के सीईओ माइक वर्थ ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा था कि ईरान से जुड़े युद्ध और पश्चिम एशिया के तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार अब भी अस्थिर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर में जारी संकट के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरता है, जबकि लाल सागर में जारी व्यवधान के कारण भी वैश्विक आपूर्ति पर असर पड़ा है।


    ईंधन कीमतों पर बढ़ा दबाव

    रिपोर्टों के अनुसार, ईरान से जुड़े संघर्ष के बाद अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में पेट्रोल की औसत कीमत 4.10 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो संघर्ष शुरू होने के समय की तुलना में एक डॉलर से अधिक ज्यादा है।


    ट्रंप पर भी बढ़ रहा राजनीतिक दबाव

    ईंधन की बढ़ती कीमतों और महंगाई को लेकर ट्रंप विपक्ष के निशाने पर हैं। अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ती लागत उनके लिए राजनीतिक चुनौती बनती दिख रही है। हालांकि ट्रंप का दावा है कि यदि ईरान के साथ संघर्ष समाप्त हो जाता है, तो ईंधन की कीमतें तेजी से नीचे आएंगी। वहीं, कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि युद्ध के आर्थिक प्रभाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं और कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट की संभावना सीमित है।

  • BLF का दावा…. बलूचिस्तान में 48 अभियानों में मार गिराए पाकिस्तान के 97 सैनिक….

    BLF का दावा…. बलूचिस्तान में 48 अभियानों में मार गिराए पाकिस्तान के 97 सैनिक….


    क्वेटा।
    बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) (Balochistan Liberation Front – BLF) ने दावा किया है कि उसने पिछले महीने बलूचिस्तान (Balochistan) में 48 अभियानों के दौरान 97 पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों ( Pakistani Army 97 Soldiers) और पांच कथित मुखबिरों को मार गिराया, जबकि 15 अन्य सैनिक घायल हुए। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।


    क्या बीएलएफ ने किन ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया?

    द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन की मासिक ऑपरेशनल रिपोर्ट में बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वहराम बलूच ने कहा कि अभियानों के दौरान पाकिस्तानी सेना, अन्य सरकारी सुरक्षा बलों, सैन्य और आर्थिक ठिकानों, संचार नेटवर्क तथा निगरानी ढांचे को निशाना बनाया गया।

    बीएलएफ के अनुसार, ये अभियान काहान, चागई, खारन, कलात, मस्तुंग, खुजदार, बासिमा, मांड, टुम्प, गोमाजी, झाओ, क्वेटा, जमुरान, सुराब, मशकेल, बुलेदा, कराची, पासनी, राखनी, नाल, खुदान, बालनेगवार और मशके में चलाए गए। संगठन का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य बलूचिस्तान में पाकिस्तानी राज्य की उस व्यवस्था को कमजोर करना है, जिसे वह औपनिवेशिक ढांचा बताता है। साथ ही उसने दावा किया कि उसका मकसद संसाधनों के दोहन को रोकना और क्षेत्र पर सेना के नियंत्रण को कमजोर करना है।


    क्या मस्तुंग हमला सबसे घातक कार्रवाई थी?

    ग्वहराम बलूच ने 22 जुलाई को मस्तुंग के खादकोचा इलाके में मैक्रो स्टॉप के पास पाकिस्तानी सैन्य काफिले पर हुए हमले को महीने की सबसे बड़ी और सबसे घातक कार्रवाई बताया।संगठन ने दावा किया कि इस हमले में 17 सैनिक मारे गए, 10 अन्य घायल हुए और सैन्य काफिले को भी भारी नुकसान पहुंचा।

    क्या बीएलएफ ने सप्लाई लाइन बाधित करने का दावा किया?
    बीएलएफ का कहना है कि उसके लड़ाकों ने जुलाई के दौरान प्रमुख राजमार्गों पर नौ स्थानों पर नाकेबंदी कर नियंत्रण स्थापित किया, ताकि सेना की सप्लाई लाइनों को बाधित किया जा सके और इलाके में अपनी पकड़ मजबूत की जा सके। संगठन के बयान के अनुसार, सात पाकिस्तानी सैन्य काफिलों पर घात लगाकर हमले किए गए, जिससे सैनिकों और सैन्य सामग्री को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा छह बड़े सैन्य शिविरों और सात चेकपोस्टों पर समन्वित हमले करने का भी दावा किया गया।

    क्या ड्रोन और निगरानी उपकरण भी नष्ट किए गए?
    बीएलएफ ने दावा किया कि उसने हवाई निगरानी में इस्तेमाल होने वाले दो ड्रोन और जमीन पर लगे तीन निगरानी कैमरे नष्ट कर दिए। संगठन के मुताबिक, उसकी कार्रवाइयों और विस्फोटों में 15 सैन्य वाहन तबाह हुए और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों से पांच आधुनिक हथियार भी कब्जे में लिए गए।


    क्या अलग-अलग गुरिल्ला रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया?

    संगठन के बयान में कहा गया कि जुलाई के दौरान किए गए अभियानों में अलग-अलग गुरिल्ला रणनीतियों का इस्तेमाल किया गया। इनमें भारी हथियारों से 16 हमले, आठ घात लगाकर हमले, पांच खुफिया जानकारी आधारित गुप्त अभियान, चार स्नाइपर हमले, दो ग्रेनेड लॉन्चर हमले, दो आईईडी हमले और एक हैंड ग्रेनेड हमला शामिल था। बीएलएफ का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पाकिस्तान में सुरक्षा बलों को निशाना बनाने वाले हमलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है, खासकर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे सीमावर्ती प्रांतों में।

  • जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से….. जाति के साथ देनी होगी ये जानकारियां

    जनगणना 2027 का दूसरा चरण 17 अगस्त से….. जाति के साथ देनी होगी ये जानकारियां


    नई दिल्ली।
    साल 2027 की जनगणना (Census) का दूसरा चरण (Second phase) 17 अगस्त (August 17) से शुरू होगा। इस जनगणना (Census) में 1931 के बाद पहली बार लोगों की जाति भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा, इसकी भी संभावना है कि लोगों के माता-पिता की जन्म तिथि (Parents’ date of birth) और जन्म स्थान की जानकारी भी दर्ज की जाए। जनगणना के दौरान जिन लोगों के पास पासपोर्ट होगा, उनका पासपोर्ट नंबर भी लिया जा सकता है। आधार नंबर केवल स्वेच्छा से दिया जा जा सकेगा।


    कहां और कब से शुरू होगा दूसरा चरण?

    गृह मंत्रालय ने सोमवार को एक अधिसूचना जारी की। इसमें मंत्रालय ने बताया कि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले इलाके में जनगणना का दूसरा चरण 1 सितंबर से 30 सितंबर तक चलेगा। इससे पहले 17 अगस्त से 30 अगस्त तक लोग खुद भी अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकेंगे। इसका मतलब है कि जनगणना के दूसरे चरण की प्रश्नावली भी जल्द जारी की जाएगी।


    जाति कैसे दर्ज की जाएगी?

    सूत्रों के अनुसार, जाति वही दर्ज की जाएगी जो व्यक्ति खुद बताएगा। अनुसूचित जाति (एसटी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सूची (ड्रॉप-डाउन मेन्यू) होगी, जबकि ‘जाति’ वाला अलग कॉलम केवल उन लोगों के लिए होगा जो एससी या एसटी श्रेणी में नहीं आते।


    क्या जाति का प्रमाण पत्र दिखाना होगा?

    ड्रॉप-डाउन मेन्यू में केवल उसी राज्य की एससी और एसटी की सूची दिखाई जाएगी, जहां व्यक्ति को जनगणना हो रही होगी। व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, उसे उसी तरह लिखा जाएगा। अपनी एससी, एसटी या अन्य जाति साबित करने के लिए किसी भी तरह का दस्तावेज या जाति प्रमाण पत्र दिखाने की जरूरत नहीं होगी।


    45 हजार जातियों का डाटा कैसे संभाला जाएगा?

    एक अधिकारी ने बताया कि 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना में लोगों ने खुद अपनी जाति बताई थी। इससे 45 हजार से अधिक अलग-अलग जातियों के नाम सामने आए थे। इतने बड़े आंकड़ों का सही उपयोग करना मुश्किल हो गया था। लेकिन इस बार डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से इन आंकड़ों को व्यवस्थित करना और अलग-अलग श्रेणियों में बांटना आसान होगा।


    माता-पिता के जन्म की जानकारी क्यों ली जाएगी?

    दूसरे चरण में पहली बार लोगों के माता-पिता की जन्म तिथि और जन्म स्थान की जानकारी भी ली जाएगी। ये दोनों बातें नागरिकता तय करने में अहम मानी जाती हैं। 2011 की जनगणना के साथ राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का काम भी किया गया था। इसे 2021 की जनगणना के साथ फिर से किया जाना था, लेकिन बाद में इसे टाल दिया गया। अब इसे 2027 की जनगणना से अलग कर दिया गया है। वर्ष 2010 में एनपीआर के दौरान लोगों से उनकी राष्ट्रीयता के बारे में भी जानकारी ली गई थी। लेकिन यह भी साफ कहा गया था कि इससे किसी को नागरिकता का अधिकार नहीं मिलेगा।


    क्या कोई दस्तावेज देना होगा?

    सूत्रों के अनुसार, लोगों से उनके माता-पिता की जन्म तिथि या जन्म स्थान का कोई प्रमाण नहीं मांगा जाएगा। जो जानकारी व्यक्ति को जितनी सही पता होगी, उसी के आधार पर दर्ज की जाएगी। अगर किसी को अपने माता-पिता की पूरी जन्म तिथि नहीं पता है और केवल जन्म का साल पता है, तो उस साल की 1 जनवरी को जन्म तिथि मानकर दर्ज किया जाएगा।

  • अफ्रीकन देश Ethiopia में भूस्खलन से 14 मौतें…. कई लोग मलबे में दबे, कई लापता

    अफ्रीकन देश Ethiopia में भूस्खलन से 14 मौतें…. कई लोग मलबे में दबे, कई लापता


    अदीस अबाबा।
    पूर्वी अफ्रीका (East Africa) के देश इथियोपिया (Ethiopia) के अमहारा क्षेत्र (Amahara region) में सोमवार सुबह भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन (Landslide) में 14 लोगों की मौत हो गई, जबकि सात लोग घायल हो गए। कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है और राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है।


    क्या धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुआ हादसा?

    यह हादसा त्सादकाने देब्रे मिटमाक सेंट मैरी मठ में हुआ, जहां सैकड़ों श्रद्धालु पवित्र जल से शुद्धिकरण के धार्मिक अनुष्ठान में शामिल होने पहुंचे थे। यह अनुष्ठान लंबे समय से बीमारियों से राहत और आध्यात्मिक उपचार की मान्यता से जुड़ा माना जाता है।


    कई लोग अब भी मलबे में फंसे

    डायोसीज के महाप्रबंधक मेगाबे हादिस नेका तिबेब अबाबू के अनुसार, हादसा सुबह करीब सात बजे हुआ। उन्होंने बताया कि मृतकों में से 11 का अंतिम संस्कार मठ परिसर में कर दिया गया है, जबकि अन्य के शव उनके गृह नगर भेजे गए हैं। कुछ शवों की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है।


    राहत-बचाव अभियान जारी

    गंभीर रूप से घायल लोगों को नॉर्थ शेवा प्रशासनिक क्षेत्र की राजधानी देब्रे बिरहान के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि आपदा प्रबंधन विभाग की विशेषज्ञ टीम मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव अभियान में जुटी हुई है।


    लगातार बढ़ रही हैं ऐसी प्राकृतिक आपदाएं?

    इथियोपिया में जून से सितंबर तक चलने वाले बारिश के मौसम के दौरान भूस्खलन और बाढ़ की घटनाएं आम हो गई हैं। जुलाई 2024 में दक्षिणी इथियोपिया में हुए भूस्खलन में कम से कम 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि इसी वर्ष की शुरुआत में गामो क्षेत्र में भी ऐसे ही हादसे में 100 से अधिक लोगों की जान गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और कमजोर बुनियादी ढांचे के कारण देश में ऐसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

  • LPG उपभोक्ता 16 अगस्त से पहले जरूर करा लें ये काम… वरना, सिलेंडर पाने में होगी दिक्कत

    LPG उपभोक्ता 16 अगस्त से पहले जरूर करा लें ये काम… वरना, सिलेंडर पाने में होगी दिक्कत


    नई दिल्ली।
    आप एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) यूज करते हैं, तो फिर आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (Registered Mobile Number) पर भी एक मैसेज आया होगा, जिसमें e-KYC पूरा करने का अलर्ट (LPG e-KYC Alert) दिया गया है. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भेजे गए इस एसएमएस में एलपीजी यूजर्स को ये जरूरी काम जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कहा गया है. इसके लिए डेडलाइन 16 अगस्त तय की गई है, ऐसे में अगर ये लास्ट डेट चूक जाती है, तो फिर एलपीजी सिलेंडर पाने में मुश्किल हो सकती है, इसके साथ ही प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को भी सरकारी सब्सिडी में रुकावट पेश आ सकती है।


    राहत के साथ अगस्त की शुरुआत

    अगस्त महीने की शुरुआत एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी हुई. ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 1 अगस्त 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में बड़ी कटौती कर राहत दी. हालांकि, घरेलू गैस सिलेंडर (14 Kg LPG Cylinder) का दाम जस का तस रखा गया. इसके साथ ही कंपनियों ने अलर्ट भी जारी किया है कि सिलेंडर की सप्लाई सुचारू पाने के लिए फटाफट ई-केवाईसी करा लें।

    घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों पर नजर डालें, तो दिल्ली में सिलेंडर की कीमत (Delhi LPG Cylinder Price) 942 रुपये, कोलकाता में दाम (Kolkata LPG Cylinder Price) 968 रुपये, मुंबई में कीमत 941.50 रुपये और चेन्नई में ये 957.50 रुपये है।


    SMS अलर्ट के जरिए चेतावनी

    घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को 16 अगस्त तक ये आधार बेस्ड ई-केवाईसी सत्यापन प्रोसेस पूरा करना है और इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने उन्हें एसएमएस अलर्ट भेजना भी शुरू कर दिया है, जिसमें चेतावनी दी गई है कि जो लोग डेडलाइन तक ये काम पूरा नहीं करते हैं, तो फिर अधिसूचित घरेलू दर पर LP Cylinder खरीदने में दिक्कत पेश आ सकती है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के लाभार्थियों को भी तय की गई लास्ट डेट तक LPG e-KYC पूरा करना जरूरी है।

    बता दें 2016 में शुरू की गई प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के देश में अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लाभार्थी हैं और इसके तहत उन्हें हर साल चार एलपीजी सिलेंडर की रिफिल पर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलता है. इससे पहले 9 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते हैं, जिसका नियम बीते जून महीने में ही बदला गया है।


    घर बैठे कर सकते हैं काम पूरा

    ऑयल मार्केटिंग कंपनियों की ओर से भी लगातार एसएमएस के जरिए अलर्ट भेजा जा रहा है. इनमें कहा गया है, ‘प्रिय ग्राहक, घरेलू दरों पर एलपीजी सिलेंडर पाने के लिए आपको e-KYC करना जरूरी है, पहले भी कई बार रिमाइंडर भेजे जाने के बावजूद आपने अभी तक ई-केवाईसी नहीं किया है।

    IOCL की ओर से इस जरूरी काम के लिए अलर्ट भेजने के साथ ही घर बैठे इसे पूरा करने का प्रोसेस भी शेयर किया गया है. मैसेज में आगे कहा गया है कि आप इंडियनऑयल वन ऐप (Indian Oil One App) के माध्यम से घर बैठे, अपने डिस्ट्रिब्यूटर के पास जाकर या डिलीवरी कर्मी के जरिए ई-केवाईसी प्रोसेस को पूरा कर सकते हैं. इसमें साफ कहा गया है कि, ’16 अगस्त 2026 तक ये काम पूरा न करने पर, इसके पूरा होने तक आप घरेलू दरों पर सिलेंडर प्राप्त करने के पात्र नहीं रहेंगे. कृपया जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूरा करें।

  • सर्दियों में बच्चों की सुरक्षा है सबसे जरूरी सही खानपान गर्म कपड़े और देखभाल से रहें फिट और हेल्दी

    सर्दियों में बच्चों की सुरक्षा है सबसे जरूरी सही खानपान गर्म कपड़े और देखभाल से रहें फिट और हेल्दी


    नई दिल्ली। सर्दियों का मौसम जहां एक ओर सुकून और खुशियां लेकर आता है वहीं छोटे बच्चों के लिए यह मौसम कई स्वास्थ्य चुनौतियां भी साथ लाता है। ठंडी हवा तापमान में गिरावट और संक्रमण का खतरा बच्चों को जल्दी बीमार बना सकता है। इस मौसम में सर्दी जुकाम खांसी बुखार निमोनिया और वायरल संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए माता पिता को बच्चों की देखभाल में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है ताकि उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहे।

    सर्दियों में सबसे पहले बच्चों को मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनाना जरूरी है। बच्चों को कई हल्की परतों वाले कपड़े पहनाना एक मोटे कपड़े से ज्यादा प्रभावी माना जाता है। सिर कान हाथ और पैरों को अच्छी तरह ढककर रखें क्योंकि शरीर की सबसे ज्यादा गर्मी इन्हीं हिस्सों से बाहर निकलती है। अगर बच्चा बाहर खेलने जा रहा है तो उसे टोपी मोजे और गर्म जूते जरूर पहनाएं।

    ठंड के मौसम में बच्चों का खानपान भी बेहद महत्वपूर्ण होता है। उन्हें ताजा और पौष्टिक भोजन दें जिसमें हरी सब्जियां मौसमी फल दाल दूध अंडा और सूखे मेवे शामिल हों। विटामिन सी और प्रोटीन से भरपूर आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करता है। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिलाते रहें क्योंकि सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण शरीर में पानी की कमी हो सकती है।

    बच्चों को साफ सफाई की आदत भी जरूर सिखाएं। बाहर से आने के बाद हाथ साबुन से धोने की आदत संक्रमण के खतरे को काफी हद तक कम कर देती है। यदि घर में किसी सदस्य को सर्दी या खांसी है तो बच्चे को उसके सीधे संपर्क से बचाने की कोशिश करें। कमरे में पर्याप्त धूप और ताजी हवा आने दें ताकि वातावरण स्वच्छ बना रहे।

    सर्दियों में धूप बच्चों के लिए प्राकृतिक विटामिन डी का अच्छा स्रोत होती है। सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बच्चों को खेलने या बैठने दें। इससे उनकी हड्डियां मजबूत होती हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर होती है। हालांकि बहुत ज्यादा ठंडी हवा या कोहरे में बच्चों को लंबे समय तक बाहर न रखें।

    रात में बच्चों को पर्याप्त और आरामदायक नींद दिलाना भी जरूरी है। अच्छी नींद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है। सोते समय कमरे का तापमान संतुलित रखें और बच्चे को जरूरत के अनुसार गर्म कंबल ओढ़ाएं लेकिन अत्यधिक गर्म कपड़ों से भी बचें ताकि उन्हें असहजता न हो।

    यदि बच्चे को लगातार तेज बुखार सांस लेने में तकलीफ लगातार खांसी या कमजोरी महसूस हो रही हो तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर इलाज गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका है।

    सर्दियों में थोड़ी सी सावधानी और नियमित देखभाल बच्चों को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभाती है। सही खानपान पर्याप्त गर्माहट साफ सफाई और समय पर चिकित्सकीय सलाह अपनाकर माता पिता अपने बच्चों को ठंड के मौसम में भी सुरक्षित और ऊर्जावान रख सकते हैं।