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  • वास्तु दोष से जुड़ी ये गलतियां घर की सकारात्मकता को कर सकती हैं प्रभावित जानिए किन बातों का रखें खास ध्यान

    वास्तु दोष से जुड़ी ये गलतियां घर की सकारात्मकता को कर सकती हैं प्रभावित जानिए किन बातों का रखें खास ध्यान


    नई दिल्ली। भारतीय परंपरा में वास्तु शास्त्र को घर और आसपास के वातावरण के बीच संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि घर की दिशा और उसमें रखी वस्तुओं की स्थिति का सकारात्मक ऊर्जा पर प्रभाव पड़ सकता है। इसी वजह से घर बनाते समय या नए घर में प्रवेश करते समय वास्तु से जुड़े कई नियमों का ध्यान रखने की परंपरा रही है। यदि घर में बार बार तनाव बना रहता है या वातावरण असहज महसूस होता है तो लोग वास्तु दोष के संभावित कारणों पर भी विचार करते हैं। हालांकि वास्तु से जुड़े दावे धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं।

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मुख्य प्रवेश स्थान साफ सुथरा और पर्याप्त रोशनी वाला रखना शुभ माना जाता है। दरवाजे के आसपास अनावश्यक सामान या कूड़ा जमा करने से बचना चाहिए। मान्यता के अनुसार मुख्य द्वार से घर में ऊर्जा का प्रवेश होता है इसलिए इस स्थान को व्यवस्थित रखना जरूरी माना जाता है। दरवाजे का खुलना बंद होना भी सहज होना चाहिए और उसमें किसी तरह की टूट फूट हो तो उसे ठीक कराना बेहतर माना जाता है।

    रसोई की दिशा को लेकर भी वास्तु शास्त्र में विशेष नियम बताए गए हैं। पारंपरिक मान्यता के अनुसार आग से जुड़े काम के लिए दक्षिण पूर्व दिशा को उपयुक्त माना जाता है। गैस चूल्हे और पानी से जुड़े स्थानों के बीच उचित दूरी रखने की सलाह दी जाती है। रसोई में साफ सफाई बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। गंदे बर्तन लंबे समय तक जमा रखने से बचना चाहिए क्योंकि स्वच्छ वातावरण घर के लिए सामान्य रूप से भी बेहतर माना जाता है।

    बेडरूम को लेकर भी कुछ वास्तु नियम प्रचलित हैं। मान्यता के अनुसार सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखना अच्छा माना जाता है। कमरे में बहुत ज्यादा सामान रखने के बजाय उसे व्यवस्थित रखना बेहतर होता है। बिस्तर के आसपास अनावश्यक वस्तुओं का ढेर लगाने से बचना चाहिए। शीशे की स्थिति को लेकर भी अलग अलग वास्तु परंपराओं में नियम बताए गए हैं। यदि कमरे में दर्पण लगा है तो उसे इस तरह रखना चाहिए कि सोते समय उसमें सीधे शरीर का प्रतिबिंब न दिखाई दे।

    घर के पूजा स्थान को भी वास्तु में विशेष महत्व दिया जाता है। पूजा स्थल को साफ और शांत स्थान पर रखना चाहिए। वहां अनावश्यक सामान जमा करने से बचें और नियमित रूप से सफाई करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा स्थान में सकारात्मक और शांत वातावरण बनाए रखना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल के पास टूटे हुए दीपक या खराब हो चुकी धार्मिक सामग्री रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    वास्तु दोष से जुड़े उपायों में घर की सफाई सबसे सरल उपायों में शामिल है। घर में पर्याप्त रोशनी और हवा का प्रवेश बना रहना चाहिए। खराब नल या पानी का रिसाव हो तो उसे जल्द ठीक कराना चाहिए। दीवारों में सीलन और टूट फूट को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। घर में अनुपयोगी वस्तुओं को जमा करने के बजाय समय समय पर उन्हें हटाना बेहतर होता है।

    ध्यान रखें कि वास्तु दोष से जुड़े नियम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार नहीं हैं बल्कि धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं का हिस्सा हैं। घर में किसी समस्या का कारण केवल वास्तु दोष मानने के बजाय उसके व्यावहारिक कारणों पर भी ध्यान देना जरूरी है। सही रोशनी स्वच्छता पर्याप्त वेंटिलेशन और घर की सुरक्षित संरचना हर स्थिति में महत्वपूर्ण हैं। वास्तु के नियमों को यदि अपनाना चाहें तो उन्हें घर के व्यावहारिक उपयोग और सुरक्षा के साथ संतुलित तरीके से अपनाना बेहतर रहेगा।

  • देश में तेजी से बढ़ रहीं डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं…. हर 10 में से 4 इससे पीड़ित

    देश में तेजी से बढ़ रहीं डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं…. हर 10 में से 4 इससे पीड़ित


    नई दिल्ली।
    देश में डायबिटीज (Diabetes) और मानसिक तनाव (Mental stress) जैसी स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़़ रही हैं, इसका अंदाजा हाल के हेल्थ डेटा (Health data) से लगाया जा सकता है. डाटा के मुताबिक, देश में बड़ी संख्या में लोगों की ब्लड शुगर (Blood sugar) सामान्य से अधिक पाई गई है. वहीं करीब 40 फीसदी लोगों ने अपने शरीर में मानसिक तनाव का लेवल काफी ज्यादा बताया. आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि स्वास्थ्य जांच कराने के मामले में लोगों की आर्थिक स्थिति का बड़ा असर पड़ता है.

    Workforce Health Index 2026 के डाटा के मुताबिक, 10 में से लगभग 4 रिपोर्ट में बढ़ी शुगर आई है. कुल 7,088 लोगों के HbA1c टेस्ट रिपोर्ट में 38.7 फीसदी रिपोर्ट ऐसी थीं, जिनमें ब्लड शुगर का लेवल प्री-डायबिटीज या डायबिटीज पर था. HbA1c एक तरह का ब्लड टेस्ट है, जिससे पिछले करीब 2-3 महीनों के दौरान शरीर में ब्लड शुगर के औसत स्तर का अंदाजा लगाया जाता है. इसलिए इस टेस्ट की रिपोर्ट व्यक्ति के लंबे समय के ब्लड शुगर कंट्रोल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।


    10 में 4 लोगों ने बताया ज्यादा मानसिक तनाव

    ब्लड शुगर के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक और आंकड़ा सामने आया. कुल 7,346 लोगों में से 40.4 फीसदी लोगों ने पिछले एक सप्ताह में अपने शरीर में मानसिक तनाव लेवल बहुत ज्यादा बताया है. यानी बड़ी संख्या में लोगों ने खुद को काफी ज्यादा मानसिक तनाव महसूस किया है।

    आंकड़ों में यह भी सामने आया कि हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े दावों में कर्मचारियों की तुलना में उनके परिवार की हिस्सेदारी ज्यादा रही. कुल दावों में 66.5 फीसदी परिवार के सदस्यों से जुड़े थे, जबकि कर्मचारियों से जुड़े दावों की हिस्सेदारी 33.5 फीसदी रही. यह आंकड़ा बताता है कि स्वास्थ्य बीमा का इस्तेमाल केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य भी बड़ी संख्या में कर रहे हैं.


    आय बढ़ी तो फुल-बॉडी हेल्थ टेस्ट भी बढ़ा

    स्वास्थ्य जांच को लेकर आर्थिक स्थिति का बड़ा अंतर भी देखने को मिला. सालाना 3 लाख रुपये से कम आय वाले लोगों में केवल 15.6 फीसदी ने फुल-बॉडी डायग्नोस्टिक टेस्ट कराने की जानकारी दी. इसग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला, OBC क्रीमी लेयर तय करने में सिर्फ वेतन नहीं, अन्य पहलू भी जरूरीके मुकाबले 40 लाख रुपये या उससे अधिक सालाना आय वाले लोगों में यह आंकड़ा बढ़कर 54.3 फीसदी हो गया है।

  • 5 एपिसोड की इस हॉरर सीरीज में हर मोड़ पर बढ़ेगा खौफ अपार्टमेंट में बेटी के गायब होने के बाद खुलता है बड़ा रहस्य

    5 एपिसोड की इस हॉरर सीरीज में हर मोड़ पर बढ़ेगा खौफ अपार्टमेंट में बेटी के गायब होने के बाद खुलता है बड़ा रहस्य


    नई दिल्ली। अगर आपको हॉरर के साथ साइकोलॉजिकल थ्रिलर और सस्पेंस से भरपूर कहानियां देखना पसंद है तो ओटीटी पर मौजूद कन्नामूची आपके लिए अलग तरह का अनुभव लेकर आती है। यह महज डराने वाली कहानी नहीं है बल्कि इसमें रहस्य मनोवैज्ञानिक उलझन और एक पुरानी मर्डर मिस्ट्री को इस तरह जोड़ा गया है कि कहानी आगे बढ़ने के साथ दर्शकों की उत्सुकता भी बढ़ती जाती है। पांच एपिसोड की यह सीरीज खासतौर पर उन लोगों को पसंद आ सकती है जिन्हें हॉरर के साथ कहानी में लगातार ट्विस्ट देखना अच्छा लगता है।

    कन्नामूची की कहानी प्रिया नाम की एक सिंगल मदर के इर्द गिर्द घूमती है। पति की मौत के बाद प्रिया अपनी बेटी के साथ चेन्नई के एक नए अपार्टमेंट में रहने आती है। वह अपनी बेटी के साथ जिंदगी को नए सिरे से शुरू करना चाहती है। प्रिया की बेटी बोल और सुन नहीं सकती। मां बेटी का यह नया ठिकाना शुरुआत में सामान्य नजर आता है लेकिन जल्द ही उनके सामने ऐसी घटनाएं आने लगती हैं जिनका कोई आसान जवाब नहीं मिलता।

    अपार्टमेंट में अजीब घटनाओं का सिलसिला धीरे धीरे बढ़ता जाता है। इसके बाद कहानी में एक ऐसा मोड़ आता है जब पता चलता है कि इस अपार्टमेंट से अतीत का एक बेहद डरावना राज जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि कई साल पहले यहां एक व्यक्ति ने आत्महत्या की थी। यह जानकारी कहानी के रहस्य को और गहरा कर देती है।

    सबसे बड़ा मोड़ तब आता है जब प्रिया की बेटी घर में हाइड एंड सीक खेलते हुए अचानक गायब हो जाती है। अपनी बेटी को तलाशने के दौरान प्रिया को ऐसी जानकारी मिलती है जो करीब 20 साल पुरानी मर्डर मिस्ट्री की तरफ इशारा करती है। अब बेटी कहां गई और उसके गायब होने का इस पुराने मामले से क्या संबंध है यही सवाल पूरी कहानी को आगे लेकर जाता है।

    सीरीज में सुपरनैचुरल घटनाओं के साथ साइकोलॉजिकल ट्विस्ट और सस्पेंस को प्रमुखता दी गई है। कहानी में कुछ वास्तविक जीवन से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा साउंड इफेक्ट्स का इस्तेमाल डर और तनाव को बढ़ाने के लिए किया गया है। यही वजह है कि छोटे एपिसोड होने के बावजूद कहानी दर्शकों को लगातार बांधे रखने की कोशिश करती है।

    कन्नामूची का निर्देशन अविनाश हरिहरन ने किया है। इसका निर्माण यूनिकॉर्न और ट्रेंड लाउड प्रोडक्शन ने किया है। सीरीज में आराध्या शम्मा कासिम और विवेक प्रसन्ना अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं। यह तमिल भाषा की सीरीज है लेकिन इसे तेलुगु मलयालम और हिंदी में भी देखा जा सकता है।

    यह सीरीज 13 मार्च 2020 को रिलीज हुई थी और इसमें कुल पांच एपिसोड हैं। प्रत्येक एपिसोड करीब 20 से 30 मिनट का है। आईएमडीबी पर इसे 6.3 की रेटिंग मिली हुई है। अगर आपको छोटी अवधि में हॉरर सस्पेंस और साइकोलॉजिकल ट्विस्ट से भरपूर कहानी देखनी है तो कन्नामूची को अपनी ओटीटी वॉचलिस्ट में शामिल किया जा सकता है। यह सीरीज जी5 पर उपलब्ध है।

  • होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला

    होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला


    तेहरान।
    लाल सागर (Red Sea) की तरफ से हूती (Houthis) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से लेकर ओमान की खाड़ी तक ईरान (Iran) गदर मचाए हुए हैं. ताबड़तोड़ हमले से अमेरिका (America) और उसके सहयोगियों के माथे से पसीना निकल रहा है. ईरान ने खासकर होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को श्‍मशान बना रखा है. दुनिया का एनर्जी कॉरिडोर कहे जाने वाला होर्मुज अमेरिका और ईरान की पंजे में फंसकर फड़फड़ा है. अब ईरान की तरफ से होर्मुज स्‍ट्रेट में एक बार फिर से हमला करने की खबर है।

    बताया जा रहा है कि ईरानी हमले का शिकार बने जहाज में आग लग गई है. पिछले 72 घंटे में 5 जहाजों पर अटैक किया गया है. पहले से ही वीरान हो चुके होर्मुज से अब हर कोई गुजरने से डर रहा है. अमेरिका ने इस समुद्री गलियारे में पूर्ण सुरक्षा देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन तेल, गैस और अन्‍य जरूरी सामानों से लदे टैंकर्स को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही न के बराबर रह गई है।

    ओमान के पास रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और टैंकर पर हमला किए जाने की खबर है, जिसके बाद जहाज में आग लग गई. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चालक दल सुरक्षित है, जबकि जहाज को हुए नुकसान का तत्काल पता नहीं चल सका है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि करीब 25 लाख बैरल क्षमता वाला सुपरटैंकर ओमान के तट से लगभग 8 किलोमीटर दूर प्रभावित हुआ है. हालांकि, हमले के लिए जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब 29 सितंबर को तीन टैंकरों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इससे क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।


    ईरान में एंटी टेररिस्‍ट ऑपरेशन

    ईरान के दक्षिण-पूर्वी शहर जाहेदान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अभियान चलाकर 6 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है. अभियान के दौरान कई विस्फोटक उपकरण भी बरामद किए गए. ईरानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में हाल के हफ्तों में सुरक्षा बलों पर हमलों में वृद्धि हुई है, जिसके बाद आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है. IRGC के करीबी एक ईरानी सूत्र ने अभियान की जानकारी साझा की. हालांकि, मारे गए लोगों की पहचान और उनके किसी संगठन से जुड़े होने के संबंध में तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. जाहेदान और ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के कुछ हिस्सों में सुरक्षा स्थिति लंबे समय से संवेदनशील रही है. अधिकारियों ने क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों और निगरानी को बढ़ाया है।

    अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाते हुए मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करनी शुरू कर दी है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यूएसएस मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप करीब 2,000 मरीन के साथ क्षेत्र की ओर रवाना हुआ है. इस बल में उभयचर अभियानों के लिए प्रशिक्षित 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट शामिल है. इसके अलावा यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इससे क्षेत्र में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या तीन तक पहुंच सकती है. कुल अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में करीब 9,000 अतिरिक्त सैनिक शामिल हो सकते हैं. इसी बीच सऊदी अरब और कतर में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की गई हैं. यह कदम ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच उठाया गया है।

  • Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले

    Stock Market News, निफ्टी रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे, 80% शेयर 50 दिन के औसत से फिसले


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है और अब इसका असर बाजार के बड़े हिस्से में दिखाई देने लगा है। गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी दिन बिकवाली के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में रहे। सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71909.70 अंक पर बंद हुआ जबकि कारोबार के दौरान यह 1187 अंक तक टूट गया और एक साल के निचले स्तर 71292.88 तक पहुंच गया। निफ्टी भी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत गिरकर 22421.95 अंक पर बंद हुआ।

    निफ्टी में जारी कमजोरी की एक बड़ी तस्वीर लगातार आठवें हफ्ते की गिरावट से सामने आती है। पिछले नौ हफ्तों में निफ्टी करीब 2156 अंक यानी 8.7 प्रतिशत नीचे आ चुका है। सितंबर महीने में भी निफ्टी में करीब 6.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इस साल जनवरी में बनाए गए 26373 अंक के रिकॉर्ड स्तर की तुलना में मौजूदा स्तर करीब 15 प्रतिशत नीचे है। बाजार में लगातार गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है। हालांकि किसी बाजार को मंदी या बियर मार्केट में प्रवेश करने के लिए सामान्य तौर पर रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 20 प्रतिशत गिरावट का तकनीकी पैमाना इस्तेमाल किया जाता है।

    इस गिरावट के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई है। बीएसई के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार को विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 9484.22 करोड़ रुपये की निकासी की। इससे पहले बुधवार को उन्होंने करीब 10148 करोड़ रुपये और मंगलवार को 10743 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे। इस तरह सिर्फ तीन कारोबारी दिनों में एफआईआई की बिकवाली 29 हजार करोड़ रुपये से अधिक रही। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से बाजार में खरीदारी का भरोसा प्रभावित हुआ है।

    बाजार की कमजोरी केवल कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों तक सीमित नहीं दिखाई दे रही है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के आंकड़ों के अनुसार निफ्टी 500 में करीब 80 प्रतिशत शेयर अपने 50 दिन के औसत भाव से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इसका मतलब है कि बाजार में दबाव व्यापक है और कई कंपनियों के शेयरों में निवेशकों को लगातार बिकवाली का सामना करना पड़ रहा है।

    तकनीकी स्तर पर भी अब निफ्टी के कुछ महत्वपूर्ण स्तरों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। सेबी रजिस्टर्ड शोध विश्लेषक विपिन डिक्सेना के मुताबिक निफ्टी फिलहाल 22400 के आसपास के समर्थन स्तर पर है। यदि यह स्तर टूटता है तो 22200 से 22000 तक दबाव बढ़ने की संभावना बताई गई है। वहीं ऊपर की तरफ 22600 से 22800 के बीच तत्काल प्रतिरोध का क्षेत्र बताया गया है। ये स्तर बाजार की आगे की दिशा समझने के लिए तकनीकी विश्लेषण का हिस्सा हैं और वास्तविक बाजार चाल इससे अलग भी हो सकती है।

    बाजार में जारी गिरावट के पीछे विदेशी निकासी के अलावा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कई कारक भी निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे माहौल में बाजार की दिशा केवल एक कारण से तय नहीं होती। आने वाले कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेश का रुख वैश्विक संकेतक और कंपनियों से जुड़े कारोबारी आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। निवेशकों के लिए मौजूदा उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी फैसले से पहले अपने जोखिम और निवेश अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    गांधी जयंती पर शेयर बाजार में नहीं होगा कारोबार निवेशकों को अगले ट्रेडिंग सेशन का करना होगा इंतजार

    नई दिल्ली। 2 अक्टूबर 2026 को शेयर बाजार के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। शुक्रवार को गांधी जयंती के अवसर पर भारतीय शेयर बाजार में नियमित कारोबार नहीं होगा। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर इस दिन ट्रेडिंग बंद रहेगी। ऐसे में शेयर खरीदने और बेचने वाले निवेशकों को शुक्रवार के बाजार अवकाश को ध्यान में रखकर अपनी ट्रेडिंग योजना बनानी होगी। बाजार में अगला सामान्य कारोबारी सत्र छुट्टी के बाद खुलेगा।
    शेयर बाजार में छुट्टियां पहले से तय कैलेंडर के अनुसार होती हैं। राष्ट्रीय अवकाश और अन्य निर्धारित छुट्टियों के दौरान इक्विटी मार्केट में कारोबार बंद रहता है। 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के कारण भी बाजार बंद रहेगा। इसका मतलब यह है कि निवेशक इस दिन सामान्य इक्विटी कारोबार के जरिए शेयरों की खरीद या बिक्री नहीं कर सकेंगे। बाजार बंद रहने के कारण दिनभर सेंसेक्स और निफ्टी में नियमित उतार चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा।

    निवेशकों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि शेयर बाजार बंद होने का अर्थ सभी वित्तीय सेवाओं का पूरी तरह बंद होना नहीं है। अलग अलग बैंकिंग और निवेश प्लेटफॉर्म की सेवाओं के कामकाज का समय और उपलब्धता अलग हो सकती है। इसके अलावा बाजार से जुड़े कुछ सेटलमेंट और अन्य कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ सकते हैं। इसलिए किसी लेनदेन की योजना बनाने से पहले अपने ब्रोकर या संबंधित वित्तीय संस्थान की सूचना देखना उपयोगी रहेगा।

    2 अक्टूबर की छुट्टी के कारण निवेशकों के लिए पिछले कारोबारी सत्र के प्रदर्शन का विश्लेषण करना भी महत्वपूर्ण हो सकता है। बाजार बंद रहने के दौरान वैश्विक बाजारों से आने वाले संकेतों और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर रखी जा सकती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाली हलचल का असर भारतीय बाजार के अगले कारोबारी सत्र पर दिखाई दे सकता है। इसके अलावा कंपनियों से जुड़ी खबरें और आर्थिक आंकड़े भी बाजार की दिशा को प्रभावित करने वाले कारकों में शामिल होते हैं।

    छुट्टी के दिन कई निवेशक अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करने के लिए समय निकालते हैं। ऐसे में अलग अलग कंपनियों के प्रदर्शन और अपनी निवेश रणनीति पर विचार किया जा सकता है। हालांकि केवल एक दिन के बाजार उतार चढ़ाव को देखकर जल्दबाजी में कोई बड़ा निवेश निर्णय लेना उचित नहीं माना जाता। शेयर बाजार में जोखिम बना रहता है और किसी भी कंपनी के शेयर की कीमत कई अलग अलग परिस्थितियों से प्रभावित हो सकती है।

    नए निवेशकों के लिए बाजार की छुट्टियों की जानकारी रखना खास तौर पर जरूरी है। इससे ऑर्डर प्लेस करने और ट्रेडिंग की योजना बनाते समय भ्रम की स्थिति नहीं रहती। यदि किसी निवेशक ने छुट्टी से पहले कोई ऑर्डर लगाया है तो उसके निष्पादन की स्थिति बाजार के नियमों और ऑर्डर के प्रकार पर निर्भर करेगी। इसलिए अपने ट्रेडिंग अकाउंट में ऑर्डर की स्थिति जांचना बेहतर रहेगा।

    कुल मिलाकर 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के कारण NSE और BSE पर नियमित शेयर बाजार कारोबार नहीं होगा। निवेशकों को इस दिन बाजार खुलने की उम्मीद में ट्रेडिंग करने के बजाय अगले कारोबारी सत्र की तैयारी करनी चाहिए। बाजार की छुट्टी को पोर्टफोलियो की समीक्षा और आने वाले कारोबारी सत्र के लिए रणनीति बनाने के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। निवेश संबंधी कोई भी फैसला अपनी जोखिम क्षमता और वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर लेना बेहतर रहेगा।

  • 30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब

    30 हजार के जूते और फंडिंग का सवाल, कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन से पहले अभिजीत दीपके का बेबाक जवाब


    नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके एक बार फिर चर्चा में हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर से मुंबई में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले उनसे पार्टी की फंडिंग को लेकर सवाल किया गया। जवाब में दीपके ने कहा कि उनकी फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों का आपस में क्या संबंध है। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ फंडिंग का स्रोत बताने से चुनाव व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं आ जाएगा। उनके बयान में उन्होंने अपने महंगे जूतों और विदेश यात्रा का भी जिक्र किया।

    दीपके की पार्टी ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। पार्टी की ओर से इसे जेल भरो आंदोलन बताया गया है। हालांकि मुंबई पुलिस की अनुमति को लेकर विवाद सामने आया है। पुलिस के अनुसार शिवाजी पार्क में आयोजन को लेकर 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश और क्षेत्र के साइलेंस जोन होने की स्थिति लागू होती है। इसके बावजूद दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि जिस तरह वह चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं उसी तरह क्या वह अपनी पार्टी की फंडिंग का स्रोत भी सार्वजनिक कर सकते हैं तो दीपके ने सवाल को ही गैरजरूरी बताया। उन्होंने कहा कि अगर वह अपनी सार्वजनिक रूप से आने वाली फंडिंग की जानकारी बता भी दें तो इससे चुनाव कैसे ठीक हो जाएंगे। उन्होंने फंडिंग और चुनाव आयोग से जुड़े उनके आरोपों के बीच संबंध पर सवाल उठाया।

    इसी बातचीत में उनसे यह भी पूछा गया कि इतना बड़ा विरोध प्रदर्शन आयोजित करने के लिए संसाधन कहां से आ रहे हैं। इस पर दीपके ने अपने जूतों की कीमत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह 30000 रुपये के जूते पहनते हैं और उन्हें यह बताने में कोई शर्म नहीं है। उन्होंने बताया कि वह अमेरिका भी जा चुके हैं और वहां से भारत लौटकर अलग-अलग राज्यों में यात्रा करने की क्षमता रखते हैं। उनका कहना था कि अगर वह अमेरिका जाने वाली फ्लाइट ले सकते हैं तो मुंबई से दिल्ली तक भी यात्रा कर सकते हैं।

    फंडिंग के सवाल पर उनका यह जवाब ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देशव्यापी आंदोलन का ऐलान किया है। रिपोर्टों के अनुसार पार्टी की प्रमुख मांगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े कुछ मुद्दों पर बदलाव शामिल हैं।

    इससे पहले 1 अक्टूबर को दीपके को मुंबई के मरीन ड्राइव इलाके में समर्थकों के साथ तख्तियां लेकर मौजूद रहने के बाद पुलिस ने कुछ समय के लिए हिरासत में लिया था। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक उन्हें मरीन ड्राइव थाने ले जाया गया और कुछ देर बाद छोड़ दिया गया। 2 अक्टूबर को भी मुंबई और दिल्ली में चुनाव आयोग से जुड़े विरोध प्रदर्शनों को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने की खबर है।

    दीपके ने कहा है कि मुंबई के बाद आंदोलन को दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। रिपोर्टों में गोवा बेंगलुरु और कोलकाता समेत अन्य शहरों में प्रदर्शन की योजना का भी उल्लेख है। उन्होंने यह भी कहा है कि अक्टूबर के अंत में दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।

    इस तरह फंडिंग और आंदोलन के खर्च को लेकर पूछे गए सवाल पर दीपके का जवाब अब चर्चा में है। उन्होंने अपनी आर्थिक क्षमता का हवाला देते हुए कहा कि महंगे जूते पहनना या विदेश यात्रा करना अपने आप में पार्टी की फंडिंग के स्रोत का जवाब नहीं है। वहीं पार्टी के आंदोलन और उसकी वित्तीय पारदर्शिता से जुड़े सवाल आगे भी चर्चा का विषय बने रह सकते हैं।

  • Petrol Diesel Price: कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई चिंता

    Petrol Diesel Price: कच्चा तेल फिर 100 डॉलर के पार पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा बढ़ा मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई चिंता


    नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तीसरे दिन तेजी देखने को मिली है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। 2 अक्टूबर 2026 को ब्रेंट क्रूड की कीमत 102.61 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 93.12 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। मध्य पूर्व में जारी सैन्य तनाव और तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका ने कच्चे तेल के बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। इसका सीधा असर आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है हालांकि घरेलू स्तर पर कीमतों में बदलाव कई दूसरे कारकों पर भी निर्भर करता है।

    फिलहाल भारतीय वाहन चालकों के लिए राहत की बात यह है कि 2 अक्टूबर को देश की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया है। दिल्ली में पेट्रोल 112.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में आखिरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में मई 2026 में बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की मौजूदा तेजी पर घरेलू बाजार की नजर बनी हुई है।

    दरअसल मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव तेल बाजार के लिए बड़ी चिंता बन गया है। अमेरिका की ओर से क्षेत्र में एक और एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप भेजने पर विचार किए जाने की खबरों के बीच बाजार में सप्लाई को लेकर आशंकाएं बढ़ी हैं। अगर सैन्य तनाव और बढ़ता है और प्रमुख तेल मार्गों से कच्चे तेल की आवाजाही प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर और दबाव आ सकता है।

    सबसे ज्यादा चिंता होर्मुज स्ट्रेट को लेकर है। यह दुनिया के महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से गुजर रहे एक टैंकर को अज्ञात प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाए जाने की सूचना के बाद तनाव और बढ़ गया है। फिलहाल घटना से हुए नुकसान की पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है लेकिन इस तरह की घटनाएं वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा सकती हैं। यदि इस मार्ग से तेल की सप्लाई में बड़ा व्यवधान आता है तो इसका असर सिर्फ अमेरिका या यूरोप ही नहीं बल्कि भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है।

    ईरान से होने वाले तेल निर्यात को लेकर भी बाजार में चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर में ईरान ने टैंकरों पर लगभग कोई कच्चा तेल लोड नहीं किया। इसे अमेरिकी दबाव और क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच ईरान की वैश्विक ऊर्जा बाजार तक पहुंच प्रभावित होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि हाल में मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई में कुछ सुधार के संकेत मिले थे लेकिन सैन्य तनाव बढ़ने से बाजार में दोबारा अस्थिरता पैदा हो गई है।

    अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो भारत में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों का प्रभाव सिर्फ वाहन चलाने की लागत तक सीमित नहीं रहता बल्कि माल ढुलाई परिवहन और कई वस्तुओं की लागत पर भी असर पड़ सकता है। इससे महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। हालांकि घरेलू ईंधन कीमतों में वास्तविक बदलाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कच्चे तेल की कीमतें कितने समय तक ऊंची रहती हैं और भारतीय तेल कंपनियां आगे क्या फैसला करती हैं।

  • California Child Marriage Ban: नाबालिगों की शादी पर पूरी तरह लगा ब्रेक 1 जनवरी 2027 से बदल जाएगा कैलिफोर्निया का कानून

    California Child Marriage Ban: नाबालिगों की शादी पर पूरी तरह लगा ब्रेक 1 जनवरी 2027 से बदल जाएगा कैलिफोर्निया का कानून


    नई दिल्ली। कैलिफोर्निया में बाल विवाह को लेकर बड़ा कानूनी बदलाव किया गया है। राज्य में अब 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति की शादी पर पूरी तरह रोक लग जाएगी। गवर्नर गेविन न्यूसम ने 30 सितंबर 2026 को असेंबली बिल 1267 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया। यह नया कानून 1 जनवरी 2027 से प्रभावी होगा। इसके बाद शादी या डोमेस्टिक पार्टनरशिप के लिए दोनों पक्षों की उम्र कम से कम 18 साल होना जरूरी होगा और इस नियम में किसी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।

    इस कानून के लागू होने के बाद कैलिफोर्निया उन राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा जहां नाबालिगों की शादी पर बिना किसी अपवाद के रोक है। बिल को सांता क्रूज की असेंबली सदस्य गेल पेलरिन ने पेश किया था। बाल विवाह के खिलाफ काम करने वाली संस्था अनचेन्ड एट लास्ट और कैलिफोर्निया कमीशन ऑन द स्टेटस ऑफ वुमन एंड गर्ल्स ने भी इसका समर्थन किया। कानून पर हस्ताक्षर के दौरान मॉडल और बाल विवाह से बची कोर्टनी स्टोडेन भी मौजूद थीं।

    स्टोडेन का अनुभव भी इस कानून की चर्चा का अहम हिस्सा रहा है। उनकी शादी 16 साल की उम्र में अभिनेता डग हचिंसन से हुई थी जो उस समय उनसे काफी बड़े थे। उनके माता-पिता ने इस शादी की अनुमति दी थी। बाद में स्टोडेन ने इस रिश्ते को गलत और शोषणकारी बताया। कानून बनने के बाद उन्होंने बाल विवाह के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों का आभार जताया और कहा कि देश के अन्य राज्यों में भी बच्चों की सुरक्षा के लिए ऐसे प्रयास जारी रहने चाहिए।

    नए कानून से पहले कैलिफोर्निया में नाबालिगों की शादी कुछ परिस्थितियों में संभव थी। माता-पिता की मंजूरी और सुपीरियर कोर्ट के जज के आदेश के बाद कम उम्र में शादी की अनुमति मिल सकती थी। कैलिफोर्निया उन तीन राज्यों में शामिल था जहां विवाह के लिए स्पष्ट न्यूनतम उम्र निर्धारित नहीं थी। अन्य दो राज्य न्यू मैक्सिको और मिसिसिपी बताए गए हैं। बाल विवाह के विरोध में काम करने वाले संगठनों का तर्क रहा है कि नाबालिगों के लिए विवाह की स्वतंत्र और पूरी सहमति का सवाल जटिल होता है।

    कैलिफोर्निया में इस बदलाव की कोशिश पहले भी हो चुकी है। करीब एक दशक पहले भी बाल विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया गया था लेकिन उस समय प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। 2018 के बाद अमेरिका में बाल विवाह के खिलाफ अभियान तेज हुआ। गवर्नर कार्यालय के अनुसार कैलिफोर्निया से पहले 17 राज्यों में बिना किसी अपवाद के बाल विवाह पर रोक लागू थी। अब कैलिफोर्निया 18वां राज्य बन जाएगा जबकि अमेरिका के 32 राज्यों में अभी भी कुछ शर्तों के तहत नाबालिगों की शादी कानूनी हो सकती है।

    आंकड़ों के मुताबिक 2000 से 2021 के बीच कैलिफोर्निया में करीब 35 हजार ऐसी शादियां दर्ज हुईं जिनमें कम से कम एक पक्ष नाबालिग था। बाल विवाह विरोधी संगठनों के अनुसार इसी अवधि में पूरे अमेरिका में करीब 3 लाख 14 हजार नाबालिगों की कानूनी शादी हुई। इन आंकड़ों को लेकर अलग-अलग संस्थाओं के अध्ययन और कानूनी परिभाषाओं में अंतर हो सकता है। नए कानून के बाद कैलिफोर्निया में 18 साल से कम उम्र के लोगों के विवाह को लेकर कानूनी स्थिति पहले की तुलना में पूरी तरह बदल जाएगी।

  • Shani Vakri 2026, पूरे अक्टूबर शनि की उल्टी चाल का असर, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है टेंशन

    Shani Vakri 2026, पूरे अक्टूबर शनि की उल्टी चाल का असर, इन 3 राशियों की बढ़ सकती है टेंशन


    नई दिल्ली। Shani Vakri 2026: वैदिक ज्योतिष में शनि देव को कर्मफलदाता और न्याय का देवता माना जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि की चाल में होने वाला परिवर्तन सभी राशियों के जीवन को किसी न किसी रूप में प्रभावित कर सकता है। साल 2026 में शनि 26 जुलाई को वक्री हुए हैं और 11 दिसंबर को मार्गी होंगे। ऐसे में अक्टूबर का पूरा महीना शनि की वक्री अवस्था के प्रभाव में रहेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दौरान कुछ राशियों को धन से जुड़े मामलों से लेकर करियर और पारिवारिक जीवन तक अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

    कर्क राशि के जातकों के लिए अक्टूबर का महीना करियर और निजी रिश्तों के लिहाज से उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है। इस दौरान अचानक कोई आर्थिक अवसर सामने आए तो उस पर तुरंत निर्णय लेने के बजाय अच्छी तरह सोच-विचार करना जरूरी होगा। जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में परेशानी का कारण बन सकता है। परिवार या दोस्तों के साथ किसी छोटी बात को लेकर गलतफहमी या नाराजगी पैदा होने की संभावना भी बताई गई है। ऐसे में बातचीत के दौरान गुस्से पर नियंत्रण रखना और सामने वाले की बात समझने का प्रयास करना आपके लिए बेहतर रहेगा। आत्मविश्वास बनाए रखना भी इस अवधि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    सिंह राशि वालों के लिए अक्टूबर में स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। बड़े निवेश या किसी महत्वपूर्ण वित्तीय फैसले में जल्दबाजी से बचना बेहतर रहेगा। बिना पूरी जानकारी के पैसा लगाने से परेशानी हो सकती है। पारिवारिक जीवन में भी किसी मुद्दे को लेकर मतभेद की स्थिति बन सकती है। ऐसे समय में बहस को बढ़ाने के बजाय धैर्य और नरमी से बात करना उपयोगी रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर छोटी-मोटी बाधाओं या अतिरिक्त जिम्मेदारियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि निरंतर प्रयास और संयम के साथ इन परिस्थितियों से निपटने की सलाह दी जाती है।

    मकर राशि के जातकों के लिए शनि की वक्री चाल को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि शनि मकर राशि के स्वामी हैं। इस अवधि में धन से जुड़े मामलों में अतिरिक्त सतर्कता रखने की जरूरत बताई गई है। पुराने कर्ज उधारी या निवेश से संबंधित मामलों में कोई भी फैसला सोच-समझकर लेना चाहिए। अनावश्यक खर्च बढ़ने से मासिक बजट प्रभावित हो सकता है इसलिए खर्चों पर नियंत्रण रखना फायदेमंद रहेगा। कार्यक्षेत्र में मेहनत करने के बावजूद परिणाम मिलने में देरी हो सकती है। ऐसे में निराश होने के बजाय अपने प्रयास जारी रखना जरूरी होगा।

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार शनि के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए शनिवार और मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी जाती है। शनिवार के दिन काले वस्त्र तिल का तेल काली उड़द और जौ का दान करना भी शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों की सेवा करने और नियमित रूप से शनिदेव के मंत्र या शनि स्तोत्र का पाठ करने की परंपरा भी बताई गई है। हालांकि ज्योतिषीय उपाय धार्मिक मान्यताओं पर आधारित होते हैं और इन्हें उसी रूप में देखा जाना चाहिए।