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  • हाई-प्रोटीन चीला नाश्ते में करें शामिल, पनीर, सोया और दाल से बने ये विकल्प लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार

    हाई-प्रोटीन चीला नाश्ते में करें शामिल, पनीर, सोया और दाल से बने ये विकल्प लंबे समय तक पेट भरा रखने में मददगार

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। सुबह के नाश्ते में ऐसा भोजन लेना बेहतर विकल्प हो सकता है जो स्वादिष्ट होने के साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में मदद करे। प्रोटीन से भरपूर चीला इस लिहाज से एक आसान विकल्प हो सकता है। दाल, बेसन, पनीर और सोया जैसी सामग्री से तैयार किए जाने वाले चीले कम तेल में बनाए जा सकते हैं। नाश्ते में प्रोटीन शामिल करने से लंबे समय तक पेट भरा महसूस हो सकता है और बार-बार कुछ खाने की इच्छा कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वजन कम करने या वजन मैनेज करने के लिए केवल एक भोजन पर निर्भर रहने के बजाय पूरे दिन की डाइट, कैलोरी और शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण होती है।

    पनीर और सोया से तैयार किया जाने वाला चीला नाश्ते में प्रोटीन बढ़ाने का एक विकल्प है। इसे बनाने के लिए सोया चंक्स को उबालकर पीस लें और उसमें पनीर, बेसन, प्याज, शिमला मिर्च और पसंद के मसाले मिलाएं। तैयार मिश्रण को तवे पर छोटे चीले के रूप में डालकर सेंक सकते हैं। पनीर और सोया के मिश्रण से तैयार यह चीला स्वाद के साथ नाश्ते को अधिक भरपेट बनाने का विकल्प हो सकता है। इसे तैयार करते समय तेल की मात्रा को जरूरत के अनुसार सीमित रखा जा सकता है।

    पनीर वाला मूंग दाल चीला भी नाश्ते में शामिल किया जा सकता है। इसके लिए मूंग दाल का चीला तैयार करने के बाद उसमें पनीर की स्टफिंग की जा सकती है। पनीर को कद्दूकस करके उसमें प्याज, टमाटर, धनिया और हल्के मसाले मिलाएं। इसके बाद तैयार मिश्रण को चीले के अंदर भरकर कुछ देर तवे पर सेंक लें। मूंग दाल और पनीर का यह संयोजन नाश्ते में प्रोटीन बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है। वहीं, बेसन से बनने वाला चीला भी सुबह के समय जल्दी तैयार किया जा सकता है। बेसन में प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, धनिया और पसंद के मसाले मिलाकर बैटर तैयार करें और इसे तवे पर सेंक लें। इसे दही के साथ लिया जा सकता है।

    मिक्स दाल चीला भी नाश्ते का एक विकल्प है। इसमें केवल एक दाल का इस्तेमाल करने के बजाय मूंग, मसूर या दूसरी दालों को मिलाकर बैटर तैयार किया जा सकता है। इस बैटर में बारीक कटी गाजर, पालक, शिमला मिर्च और प्याज जैसी सब्जियां मिलाई जा सकती हैं। इससे चीले में सब्जियों की मात्रा बढ़ाने के साथ स्वाद में भी बदलाव किया जा सकता है। इस तरह अलग-अलग दालों और सब्जियों को मिलाकर नाश्ते में विविधता लाई जा सकती है। अपनी पसंद के अनुसार इसमें हल्के मसाले भी शामिल किए जा सकते हैं।

    चीला बनाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। अगर लक्ष्य वजन मैनेज करना है तो इसे बहुत ज्यादा तेल या घी में पकाने से बचना चाहिए। बैटर में सब्जियां शामिल की जा सकती हैं और चीले के साथ दही या हरी चटनी ली जा सकती है। केवल चीला खाने के बजाय पूरे दिन की डाइट में प्रोटीन, फाइबर, सब्जियों और अन्य जरूरी पोषक तत्वों का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इस तरह पनीर, सोया, दाल और बेसन से बने अलग-अलग चीले नाश्ते में स्वाद और प्रोटीन दोनों शामिल करने का आसान विकल्प हो सकते हैं।

  • सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की ‘तू है मेरी किरण’ का फर्स्ट लुक जारी, रोमांस के साथ दिखेगा रहस्य और सस्पेंस

    सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की ‘तू है मेरी किरण’ का फर्स्ट लुक जारी, रोमांस के साथ दिखेगा रहस्य और सस्पेंस

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल एक बार फिर बड़े पर्दे पर साथ नजर आने वाले हैं। दोनों की आगामी फिल्म ‘तू है मेरी किरण’ का फर्स्ट लुक जारी कर दिया गया है। फिल्म को रोमांटिक थ्रिलर बताया गया है, जिसमें प्रेम कहानी के साथ रहस्य और सस्पेंस का भी मेल देखने को मिलेगा। फर्स्ट लुक सामने आने के साथ ही फिल्म की कहानी को लेकर दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है। इसके साथ ही फिल्म की रिलीज डेट का भी ऐलान कर दिया गया है। यह फिल्म 23 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

    फिल्म की पहली झलक में सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल को कहानी के मुख्य किरदारों के तौर पर पेश किया गया है। हालांकि, जारी किए गए फर्स्ट लुक में फिल्म की कहानी या दोनों किरदारों से जुड़ी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। पोस्टर से कहानी की पूरी दिशा स्पष्ट नहीं होती, लेकिन इसकी प्रस्तुति से यह संकेत मिलता है कि फिल्म केवल एक सामान्य प्रेम कहानी तक सीमित नहीं होगी। रोमांस के साथ कहानी में रहस्य और सस्पेंस का पहलू भी महत्वपूर्ण रहने वाला है। इसी वजह से फर्स्ट लुक ने फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ाई है।

    ‘तू है मेरी किरण’ में सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। दोनों कलाकार इससे पहले भी साथ काम कर चुके हैं और अब इस फिल्म में एक अलग तरह की कहानी के साथ पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। फिल्म की पहली झलक में दोनों को कहानी के केंद्रीय किरदारों के रूप में दिखाया गया है। हालांकि, उनके किरदारों के बीच संबंध और कहानी में आने वाले रहस्य को लेकर अभी ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है। ऐसे में फिल्म की कहानी के कई पहलू रिलीज के करीब आने के साथ सामने आने की उम्मीद है।

    फिल्म की कहानी करण रावल ने लिखी है और वही इसका निर्देशन भी कर रहे हैं। ‘तू है मेरी किरण’ को रोमांटिक थ्रिलर के तौर पर पेश किया जा रहा है, इसलिए फिल्म में प्रेम, रहस्य और सस्पेंस तीनों पहलुओं को कहानी का हिस्सा बनाया गया है। फर्स्ट लुक में भी फिल्म की इसी शैली की झलक दिखाई गई है। हालांकि, पोस्टर के जरिए कहानी के महत्वपूर्ण घटनाक्रम या किरदारों से जुड़े रहस्यों का खुलासा नहीं किया गया है, जिससे फिल्म की कहानी को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

    मेकर्स ने फिल्म की रिलीज डेट 23 अक्टूबर 2026 तय की है और यह सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म के फर्स्ट लुक के सामने आने के बाद अब सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की जोड़ी को एक रोमांटिक थ्रिलर में देखने का इंतजार बढ़ गया है। फिल्म की कहानी को लेकर फिलहाल सीमित जानकारी सामने आई है, लेकिन पहली झलक से यह साफ है कि इसमें प्रेम कहानी के साथ रहस्य और सस्पेंस को भी प्रमुखता दी गई है। 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली यह फिल्म इसी मिश्रण के साथ दर्शकों के सामने आएगी।

  • त्योहारी सीजन से पहले कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा, दिल्ली में 62.50 और मुंबई में 63 रुपये बढ़े दाम

    त्योहारी सीजन से पहले कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा, दिल्ली में 62.50 और मुंबई में 63 रुपये बढ़े दाम

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले कमर्शियल LPG सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। 1 अक्टूबर से 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़ा दिए गए हैं। दिल्ली में इसकी कीमत 62.50 रुपये बढ़कर 2,810 रुपये हो गई है। सितंबर में दिल्ली में 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमत 2,747.50 रुपये थी। मुंबई में भी कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। यहां 63 रुपये की बढ़ोतरी के बाद नया रेट 2,764 रुपये हो गया है, जबकि सितंबर में इसकी कीमत 2,701 रुपये थी।

    चेन्नई में भी 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत बढ़कर 2,983 रुपये हो गई है। सितंबर में यहां सिलेंडर का रेट 2,916.50 रुपये था। यानी चेन्नई में भी कारोबारियों को पिछले महीने की तुलना में अधिक कीमत चुकानी होगी। कोलकाता में सितंबर के दौरान 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत 2,884 रुपये थी। 1 अक्टूबर से यहां भी कीमत में बढ़ोतरी लागू की गई है। कमर्शियल LPG का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जाता है।

    कमर्शियल LPG के दाम बढ़ने के बावजूद घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलो LPG सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये, चेन्नई में 957.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये पर बना हुआ है। इस तरह 1 अक्टूबर से लागू बदलाव का सीधा असर कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों पर पड़ा है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 14.2 किलो वाले सिलेंडर के मौजूदा दाम बरकरार रखे गए हैं।

    19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर का इस्तेमाल व्यावसायिक रसोई में बड़े स्तर पर किया जाता है। ऐसे में कीमत बढ़ने से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग और अन्य कमर्शियल किचन की परिचालन लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, किसी कारोबार पर इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि LPG की लागत उसके कुल खर्च में कितनी हिस्सेदारी रखती है और बढ़ी हुई लागत का कितना हिस्सा ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है। कीमतों में यह बदलाव त्योहारी सीजन की शुरुआत से पहले हुआ है, जब कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में गतिविधियां बढ़ती हैं।

    कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में सितंबर की शुरुआत में भी बढ़ोतरी की गई थी। उस समय दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर 9.50 रुपये महंगा होकर 2,747.50 रुपये हुआ था। मुंबई में इसका रेट 2,701 रुपये, चेन्नई में 2,916.50 रुपये और कोलकाता में 2,884 रुपये पहुंचा था। कमर्शियल LPG की कीमतों की समीक्षा आम तौर पर हर महीने की जाती है। कीमतों में बदलाव अंतरराष्ट्रीय LPG बेंचमार्क, विदेशी मुद्रा दर और अन्य लागत कारकों से प्रभावित हो सकता है। 1 अक्टूबर की बढ़ोतरी के बाद चारों प्रमुख शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर के नए दाम लागू हो गए हैं।

  • अक्टूबर से पैसों से जुड़े कई नियम बदले, SBI ATM, LPG सब्सिडी, UPI, NPS और FD पर नए अपडेट लागू

    अक्टूबर से पैसों से जुड़े कई नियम बदले, SBI ATM, LPG सब्सिडी, UPI, NPS और FD पर नए अपडेट लागू


    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर
    । अक्टूबर 2026 की शुरुआत के साथ पैसों और वित्तीय सेवाओं से जुड़े कई नियमों में बदलाव हुआ है। बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, रसोई गैस, पेंशन योजना, बड़ी रकम वाली एफडी और टैक्स से संबंधित नियमों में किए गए इन बदलावों का असर अलग-अलग श्रेणी के ग्राहकों पर पड़ सकता है। SBI के सैलरी पैकेज अकाउंट से लेकर LPG सब्सिडी, UPI भुगतान और NPS तक कुछ व्यवस्थाओं में नए प्रावधान लागू हुए हैं। वहीं, छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है।

    SBI के सैलरी पैकेज अकाउंट वाले ग्राहकों के लिए दूसरे बैंकों के ATM से मिलने वाले मुफ्त लेनदेन की मासिक सीमा घटाई गई है। पहले हर महीने 10 मुफ्त लेनदेन की सुविधा थी, जिसे अब 5 कर दिया गया है। इस सीमा में केवल नकद निकासी ही नहीं, बल्कि बैलेंस चेक जैसी गैर-वित्तीय ATM सेवाएं भी शामिल हैं।

    हालांकि, SBI के अपने ATM पर सैलरी पैकेज ग्राहकों के लिए मुफ्त लेनदेन की सुविधा जारी रहेगी। LPG सब्सिडी लेने वाले ग्राहकों के लिए भी 1 अक्टूबर से आधार से जुड़ा बायोमेट्रिक सत्यापन महत्वपूर्ण हो गया है। सब्सिडी वाले LPG रिफिल के लिए यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। सत्यापन गैस एजेंसी के माध्यम से कराया जा सकता है और कुछ मामलों में डिलीवरी के समय भी बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

    UPI को लेकर 15 अक्टूबर से कुछ खास मर्चेंट लेनदेन पर नया MDR ढांचा लागू होगा। यह व्यवस्था 2,000 रुपये से अधिक के कुछ मर्चेंट UPI लेनदेन से संबंधित है। इसका शुल्क सीधे ग्राहक से नहीं लिया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P UPI लेनदेन मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के कई मर्चेंट भुगतान और जीरो-MDR के दायरे में आने वाले लेनदेन भी इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, बड़ी रकम वाली FD यानी बल्क डिपॉजिट के मामले में 1 अक्टूबर से बैंकों को अधिक पारदर्शिता रखनी होगी। बैंकों को ऐसी जमा पर लागू ब्याज दरें अपनी वेबसाइट पर तय समय के अनुसार प्रकाशित करनी होंगी। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर सामान्य FD की ब्याज दर अक्टूबर से अपने आप बदल जाएगी।

    NPS में भी 1 अक्टूबर से शुल्क ढांचे में बदलाव हुआ है। Point of Presence यानी PoP के माध्यम से NPS या NPS Lite में पंजीकरण कराने वाले ग्राहकों के लिए प्रति PRAN 200 रुपये का एकमुश्त ऑनबोर्डिंग चार्ज लागू होगा। टैक्स से जुड़े मामलों में भी कुछ महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। टैक्स ऑडिट वाले मामलों में रिपोर्ट जमा करने की समयसीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 21 अक्टूबर 2026 कर दी गई है।

    ऐसे मामलों में ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख भी 31 अक्टूबर से बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। इसके अलावा, भारत में रहने वाले व्यक्ति या HUF द्वारा किसी NRI से संपत्ति खरीदने पर लागू TDS प्रक्रिया में अलग TAN की जरूरत नहीं होगी और PAN का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, लागू TDS काटने और जमा करने की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

    अक्टूबर-दिसंबर 2026 की तिमाही के लिए PPF, NSC, सुकन्या समृद्धि, SCSS और अन्य छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। ये दरें पिछली तिमाही के स्तर पर ही बनी रहेंगी। ऐसे में SBI सैलरी अकाउंट, LPG सब्सिडी, NPS या बड़ी FD से जुड़े ग्राहकों के लिए संबंधित बदलावों की जानकारी रखना जरूरी है। सामान्य UPI उपयोगकर्ताओं के लिए यह महत्वपूर्ण है कि नए MDR ढांचे का अर्थ हर UPI भुगतान पर ग्राहक से अलग शुल्क लिया जाना नहीं है।

  • 1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    1 अक्टूबर को सोना महंगा, 24 कैरेट ₹1.48 लाख के पार; चांदी ₹2,21,954 प्रति किलो हुई सस्ती

    नई दिल्ली। 1 अक्टूबर 2026 को सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई, जबकि चांदी के भाव में गिरावट आई। 24 कैरेट सोने का भाव 308 रुपये बढ़कर 1,48,687 रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच गया। इससे पहले बुधवार को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,48,379 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी महंगा हुआ। इसका भाव 282 रुपये बढ़कर 1,36,197 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गया, जबकि बुधवार को यह 1,35,915 रुपये प्रति 10 ग्राम था। दूसरी ओर, चांदी की कीमत में 319 रुपये प्रति किलो की गिरावट दर्ज की गई। 1 अक्टूबर को एक किलो चांदी 2,21,954 रुपये पर आ गई, जबकि बुधवार को इसका भाव 2,22,273 रुपये प्रति किलो था।

    देश के प्रमुख शहरों में 22 कैरेट सोने के भाव में भी मामूली अंतर देखने को मिला। दिल्ली और लखनऊ में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,950 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और रायपुर में यह भाव 1,36,800 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया। भोपाल और अहमदाबाद में 22 कैरेट सोने की कीमत 1,36,850 रुपये प्रति 10 ग्राम रही। इन शहरों में आभूषणों की वास्तविक कीमत स्थानीय कर, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। 24 कैरेट सोने के मानक बुलियन भाव और आभूषणों के खुदरा भाव में भी अंतर हो सकता है।

    सोना खरीदते समय उसकी शुद्धता और कीमत की जांच करना जरूरी है। खरीदारी के दौरान बीआईएस हॉलमार्क वाला सोना लेने पर ध्यान देना चाहिए। हॉलमार्क से सोने की शुद्धता और कैरेट की जानकारी मिलती है। सोने की कीमत 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होती है, इसलिए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के भाव की जांच करना जरूरी है। आभूषण खरीदते समय केवल सोने की मूल कीमत ही नहीं, बल्कि उस पर लागू अन्य शुल्कों को भी ध्यान में रखना होता है।

    चांदी खरीदने वालों के लिए भी उसकी शुद्धता की जांच महत्वपूर्ण है। चांदी की वस्तु को चुंबक के पास ले जाकर शुरुआती तौर पर जांच की जा सकती है, क्योंकि शुद्ध चांदी चुंबक की ओर आकर्षित नहीं होती। हालांकि, केवल इस परीक्षण से शुद्धता की पक्की पुष्टि नहीं की जा सकती। बर्फ के जरिए भी एक शुरुआती जांच की जा सकती है, क्योंकि चांदी गर्मी को तेजी से स्थानांतरित करती है और उसकी सतह पर रखी बर्फ सामान्य धातुओं की तुलना में तेजी से पिघल सकती है। चांदी में तेज या असामान्य धातु जैसी गंध होना भी दूसरी धातु की मौजूदगी का संकेत हो सकता है।

    चांदी की सतह को साफ सफेद कपड़े से रगड़ने पर कभी-कभी कपड़े पर काला या गहरा निशान दिखाई दे सकता है। यह चांदी की सतह पर होने वाली ऑक्सीकरण प्रक्रिया के कारण हो सकता है, लेकिन इस तरीके से भी शुद्धता की अंतिम पुष्टि नहीं की जा सकती। घरेलू परीक्षण केवल शुरुआती अंदाजा लगाने में मदद करते हैं। चांदी की शुद्धता की सही पुष्टि के लिए हॉलमार्क, 925 स्टैम्प या पेशेवर शुद्धता जांच अधिक भरोसेमंद तरीका है। सोने और चांदी की कीमतों में बदलाव को देखते हुए खरीदारी से पहले संबंधित दिन के ताजा भाव और आभूषण की शुद्धता की जानकारी जांचना जरूरी है।

  • सितंबर में GST कलेक्शन 14.7% बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार, पहली छमाही में भी 11.6% की बढ़त

    सितंबर में GST कलेक्शन 14.7% बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार, पहली छमाही में भी 11.6% की बढ़त


    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2026। त्योहारों के मौसम से पहले देश के कर संग्रह से जुड़े आंकड़ों में मजबूत बढ़त दर्ज की गई है। सितंबर 2026 में कुल सकल वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी कलेक्शन 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2,03,521 करोड़ रुपये के नए स्तर पर पहुंच गया। पिछले साल सितंबर की तुलना में यह उल्लेखनीय वृद्धि है। चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर के दौरान भी जीएसटी संग्रह में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई है। इस छह महीने की अवधि में कुल कलेक्शन 12,46,278 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 11.6 प्रतिशत अधिक है।

    सितंबर के दौरान घरेलू आर्थिक गतिविधियों से होने वाले जीएसटी कलेक्शन में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। घरेलू स्तर पर प्राप्त जीएसटी राजस्व 10.1 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.38 लाख करोड़ रुपये रहा। इसके साथ ही आयात से मिलने वाले राजस्व में इससे भी अधिक तेजी देखी गई। आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व 26 प्रतिशत बढ़कर 65,525 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इस तरह सितंबर में कुल जीएसटी कलेक्शन बढ़ाने में घरेलू गतिविधियों के साथ आयात से प्राप्त राजस्व की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

    सितंबर के आंकड़ों के साथ चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही का प्रदर्शन भी सामने आया है। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच कुल जीएसटी कलेक्शन 12,46,278 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। यह पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में दर्ज संग्रह से 11.6 प्रतिशत अधिक है। छह महीने के संचयी आंकड़ों में दर्ज यह वृद्धि कर संग्रह में लगातार बने सुधार को दर्शाती है। सितंबर में दर्ज 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक का मासिक कलेक्शन भी इस अवधि के दौरान कर संग्रह में आई तेजी को रेखांकित करता है।

    त्योहारी सीजन से ठीक पहले जीएसटी कलेक्शन में यह वृद्धि कारोबारी और घरेलू आर्थिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बेहतर कर अनुपालन और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी ने संग्रह बढ़ाने में योगदान दिया है। सितंबर में घरेलू गतिविधियों से प्राप्त राजस्व में 10.1 प्रतिशत और आयात से मिलने वाले राजस्व में 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इससे संकेत मिलता है कि कर संग्रह में बढ़ोतरी केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों और आयात दोनों से राजस्व में वृद्धि हुई है।

    चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में 12,46,278 करोड़ रुपये का कुल जीएसटी कलेक्शन और सितंबर में 2,03,521 करोड़ रुपये का मासिक संग्रह सरकार के राजस्व आंकड़ों में दर्ज महत्वपूर्ण बढ़ोतरी को दिखाता है। त्योहारी खरीदारी का दौर शुरू होने से पहले आए इन आंकड़ों में बाजार की गतिविधियों और कर संग्रह में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सितंबर के दौरान कुल संग्रह में 14.7 प्रतिशत की वृद्धि और अप्रैल से सितंबर की अवधि में 11.6 प्रतिशत की संचयी बढ़त रही। इससे चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीएसटी राजस्व संग्रह की स्थिति मजबूत बनी हुई है।

  • यूपी के 586 पीएम श्री स्कूलों में लर्निंग बाय डूइंग को मिलेगी नई गति, 2.34 करोड़ रुपये से खरीदी जाएगी सामग्री

    यूपी के 586 पीएम श्री स्कूलों में लर्निंग बाय डूइंग को मिलेगी नई गति, 2.34 करोड़ रुपये से खरीदी जाएगी सामग्री

    लखनऊ, 1 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के वर्ष 2024-25 के लिए चयनित 586 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट पीएम श्री विद्यालयों में पढ़ाई को किताबों की सीमाओं से आगे ले जाकर प्रयोग, गतिविधि और अनुभव से जोड़ने की दिशा में कदम उठाया गया है। इन विद्यालयों में लर्निंग बाय डूइंग को और प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए 2.34 करोड़ रुपये की धनराशि से कंज्यूमेबल्स और रॉ मैटेरियल खरीदा जाएगा। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए 40 हजार रुपये की धनराशि की सीमा निर्धारित की गई है। इससे गतिविधि आधारित शिक्षण के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध होंगे और बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ प्रयोग तथा प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से सीखने के अधिक अवसर मिलेंगे।

    लर्निंग बाय डूइंग के तहत विद्यार्थियों को विषयवस्तु को केवल पढ़ने के बजाय गतिविधियों, प्रयोगों और प्रत्यक्ष अनुभवों के जरिए समझने का अवसर मिलेगा। विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाने वाली कंज्यूमेबल्स और रॉ मैटेरियल सामग्री का इस्तेमाल गतिविधि आधारित शिक्षण को प्रभावी बनाने के लिए किया जाएगा। इसके माध्यम से बच्चे सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बन सकेंगे। कक्षा में विषयों को देखकर, प्रयोग करके और गतिविधियों में शामिल होकर समझने से पुस्तकीय ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ने में मदद मिलेगी। इस पहल का उद्देश्य सीखने की प्रक्रिया को अधिक सक्रिय, अनुभवपूर्ण, सहज और रोचक बनाना है।

    बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि लर्निंग बाय डूइंग के माध्यम से बच्चों को प्रयोग और अनुभव से सीखने के अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि प्रयास यह है कि सीखने की प्रक्रिया रोचक, सहभागितापूर्ण और बच्चों की जिज्ञासा के अनुरूप बने। इस व्यवस्था के तहत विद्यालयों में उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री का उपयोग निर्धारित गतिविधियों के संचालन के लिए किया जाएगा, ताकि विद्यार्थी विषयवस्तु को केवल पढ़ने तक सीमित न रहें और गतिविधियों तथा प्रयोगों के माध्यम से उसे समझने का अवसर प्राप्त कर सकें।

    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी के निर्देशानुसार चयनित 586 विद्यालयों में लर्निंग बाय डूइंग के लिए आवश्यक कंज्यूमेबल्स और रॉ मैटेरियल की खरीद की जाएगी। इसके लिए कुल 2,34,40,000 रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए 40 हजार रुपये की सीमा के तहत गतिविधियों के संचालन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। इस सामग्री के माध्यम से विद्यालयों में गतिविधि आधारित शिक्षण को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर रहेगा।

    विद्यालयों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री का उचित और उद्देश्यपरक उपयोग सुनिश्चित करने के साथ गतिविधियों के संचालन और उनके अभिलेखीकरण का अनुश्रवण भी किया जाएगा। पूर्व में संचालित लर्निंग बाय डूइंग गतिविधियों के अनुभवों को आगे की गतिविधियों से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। इस पहल के तहत विद्यार्थियों को विषयवस्तु को देखकर, प्रयोग करके और गतिविधियों में भाग लेकर समझने के अवसर मिलेंगे। इससे कक्षा-कक्ष में सीखने की प्रक्रिया को अनुभव से जोड़ने और बच्चों की सहभागिता बढ़ाने के लिए उपलब्ध संसाधनों का उद्देश्यपरक इस्तेमाल सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाएगा।

  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत, दूसरी तिमाही में 7.3 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि का अनुमान

    नई दिल्ली, 1 अक्टूबर। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत मजबूत आधार के साथ की है। वित्त मंत्रालय की सितंबर माह की मासिक आर्थिक समीक्षा के अनुसार, पहली तिमाही में दर्ज विकास की रफ्तार दूसरी तिमाही में भी जारी रहने की संभावना है, हालांकि इसकी गति कुछ संतुलित रह सकती है। आर्थिक सर्वेक्षण में पेश किए गए नाउकास्टिंग मॉडल के आधार पर वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है। वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत बढ़ी थी, जो मौजूदा शृंखला में किसी भी वित्त वर्ष की पहली तिमाही का सबसे ऊंचा स्तर है।

    वित्त मंत्रालय के मुताबिक, पहली तिमाही की आर्थिक वृद्धि व्यापक आधार वाली रही और इसमें विनिर्माण, निर्माण तथा सेवा क्षेत्रों का मजबूत प्रदर्शन शामिल रहा। घरेलू मांग ने आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया, जबकि निवेश वृद्धि का महत्वपूर्ण आधार बनकर सामने आया। समीक्षा के अनुसार, निवेश दर मौजूदा शृंखला के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। मंत्रालय ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समय पर उठाए गए कदमों ने बाहरी झटकों से अर्थव्यवस्था को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में सीमित बढ़ोतरी का घरेलू ईंधन कीमतों पर असर रहने से भी आर्थिक गतिविधियों पर बड़ा दबाव नहीं पड़ा।

    हालांकि कुछ उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक संकेतकों में पहले की तुलना में वृद्धि की गति थोड़ी धीमी हुई है। ई-वे बिल जनरेशन और मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई की वृद्धि दर में कुछ नरमी दर्ज की गई। इसके विपरीत, अगस्त में सेवा क्षेत्र की गतिविधियों में मजबूती आई और इसे नए कारोबार तथा रोजगार में बढ़ोतरी का समर्थन मिला। बिजली और ईंधन की खपत लगातार स्वस्थ वृद्धि दर्ज कर रही है, जबकि बैंक ऋण वितरण भी मजबूत बना हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र ने भी पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया। वास्तविक औद्योगिक सकल मूल्य वर्धन यानी जीवीए में 7.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र ने 9.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे बड़ा योगदान दिया।

    हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी आईआईपी में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी अवधि में कोर सेक्टर इंडेक्स 4.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 52.8 पर रहा, जो औद्योगिक गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। जुलाई में उद्योग क्षेत्र को दिए गए बैंक ऋण में भी तेजी देखी गई और यह वृद्धि सभी आकार की कंपनियों में व्यापक रही। इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के लिए हालिया नीतिगत कदमों का भी सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। महंगाई के मोर्चे पर वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि और मौसम संबंधी अस्थिरता के कारण खुदरा, थोक तथा उत्पादक स्तर पर मूल्य दबाव बढ़ा है, लेकिन समग्र महंगाई परिदृश्य नियंत्रित बना हुआ है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की टोकरी में शामिल करीब 69 प्रतिशत वस्तुओं की महंगाई दर अब भी 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे है।

    निर्यात के मोर्चे पर भी समीक्षा में सकारात्मक स्थिति सामने आई है। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों में भारत का कुल निर्यात मूल्य करीब 400 अरब डॉलर की रफ्तार से बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यदि यह गति बनी रहती है तो पूरे वित्त वर्ष में भारत का कुल निर्यात करीब एक ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। मंत्रालय ने कहा कि भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौते निर्यात वृद्धि को गति दे रहे हैं और भारतीय उत्पादों के लिए नए वैश्विक अवसर पैदा कर रहे हैं। इस तरह, वैश्विक ऊर्जा बाजारों और व्यापारिक मार्गों पर दबाव के बावजूद घरेलू मांग, निवेश, औद्योगिक गतिविधियों, सेवा क्षेत्र, बैंक ऋण और निर्यात में बनी मजबूती भारतीय अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को समर्थन दे रही है।

  • महिंद्रा की सितंबर बिक्री 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने 77,916 वाहनों की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज की

    महिंद्रा की सितंबर बिक्री 15 प्रतिशत बढ़ी, हुंडई मोटर ने 77,916 वाहनों की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज की

    नई दिल्ली। देश की प्रमुख वाहन कंपनियों ने सितंबर की बिक्री के आंकड़े जारी किए हैं। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने निर्यात समेत कुल 1,14,874 वाहनों की बिक्री की, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की घरेलू बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर में घरेलू बाजार में यूटिलिटी वाहनों की बिक्री सालाना आधार पर 14 प्रतिशत बढ़कर 64,092 यूनिट्स हो गई। वहीं, कमर्शियल वाहनों की बिक्री भी 14 प्रतिशत बढ़कर 30,420 यूनिट्स रही।

    महिंद्रा एंड महिंद्रा के ऑटोमोटिव बिजनेस के अध्यक्ष डॉ. वेलुसामी आर ने कहा कि कंपनी की इलेक्ट्रिक ओरिजिन एसयूवी की लॉन्चिंग के बाद से 1 लाख की बिलिंग का माइलस्टोन पार हो गया है। कमर्शियल वाहन खंड में भी सितंबर के दौरान अलग-अलग श्रेणियों में बिक्री बढ़ी। 2 टन से कम वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री 19 प्रतिशत बढ़कर 4,044 यूनिट्स हो गई। वहीं, 2 से 3.5 टन वजन वाले हल्के कमर्शियल वाहनों की बिक्री 13 प्रतिशत बढ़कर 26,376 यूनिट्स रही। इलेक्ट्रिक मॉडल समेत थ्री-व्हीलर की बिक्री में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 16,343 यूनिट्स तक पहुंच गई।

    दूसरी ओर, हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड ने सितंबर में अब तक की सबसे ज्यादा मासिक बिक्री दर्ज की। कंपनी ने महीने के दौरान कुल 77,916 यूनिट्स की बिक्री की, जो पिछले साल की तुलना में 10.8 प्रतिशत अधिक है। घरेलू बाजार में कंपनी की मासिक बिक्री सालाना आधार पर 10.9 प्रतिशत बढ़कर 57,166 यूनिट्स हो गई। वहीं, निर्यात में भी 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 20,750 यूनिट्स तक पहुंच गया। इस तरह घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में बिक्री बढ़ने से कंपनी ने सितंबर में नया मासिक रिकॉर्ड बनाया।

    हुंडई मोटर इंडिया के एमडी और सीईओ तरुण गर्ग ने कहा कि सितंबर की बिक्री का आंकड़ा जुलाई 2026 में बने कंपनी के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है। उनके अनुसार, घरेलू और निर्यात बाजारों में दर्ज हुई बढ़ोतरी कंपनी के उत्पाद पोर्टफोलियो की मजबूत अपील और भारत तथा वैश्विक बाजारों में मोबिलिटी समाधान उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। कंपनी की ओर से सितंबर के आंकड़ों में घरेलू बाजार और निर्यात दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की गई है।

    तरुण गर्ग ने कहा कि कंपनी को उम्मीद है कि त्योहारी सीजन के दौरान ग्राहकों का उत्साह बना रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि हुंडई बेयोन की बुकिंग शुरू होने से बिक्री को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। सितंबर के बिक्री आंकड़ों में महिंद्रा एंड महिंद्रा की कुल बिक्री में 15 प्रतिशत की सालाना वृद्धि और हुंडई मोटर इंडिया की रिकॉर्ड मासिक बिक्री दर्ज हुई है। दोनों कंपनियों के आंकड़ों में घरेलू बाजार के साथ निर्यात और विभिन्न वाहन श्रेणियों में बिक्री की स्थिति भी सामने आई है।

  • लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    लगातार चौथे दिन शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 571 अंक टूटा; निफ्टी 0.88 प्रतिशत नीचे, ऑटो सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

    मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र गिरावट जारी रही। ऊर्जा की स्थिर कीमतों, बॉन्ड यील्ड में अस्थिरता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच निवेशकों में सतर्कता बढ़ी, जिससे बाजार लाल निशान में बंद हुआ। कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट रही और यह 22,421.95 के स्तर पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में प्रमुख सूचकांकों में उतार-चढ़ाव के साथ भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स दिन के उच्चतम स्तर 72,573 से फिसलकर 71,293 के निचले स्तर तक पहुंच गया। इस दौरान इसमें करीब 1,280 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और सूचकांक 2 अप्रैल 2026 को बने 71,545 के पिछले कैलेंडर वर्ष के न्यूनतम स्तर से भी नीचे चला गया। निफ्टी 50 में भी दिन के दौरान 1.7 प्रतिशत यानी 394 अंकों की गिरावट दर्ज हुई। सूचकांक 22,611 के उच्च स्तर से गिरकर 22,217 के निचले स्तर तक पहुंचा। अप्रैल में निफ्टी ने कैलेंडर वर्ष का 22,183 का न्यूनतम स्तर छुआ था।

    निफ्टी 50 में बजाज ऑटो, मारुति सुजुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट रही। इसके विपरीत इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ, मैक्स हेल्थ और टीसीएस के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.01 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार समाप्त हुआ। क्षेत्रवार कारोबार में निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी में सबसे ज्यादा कमजोरी रही, जबकि निफ्टी आईटी में सबसे अधिक बढ़त दर्ज की गई।

    एक बाजार विशेषज्ञ के अनुसार, बाजार में गिरावट के पीछे मुख्य रूप से बाहरी कारण रहे। बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बने रहने से 2026-27 के आर्थिक परिदृश्य को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। घरेलू स्तर पर निवेशक दूसरी तिमाही यानी क्यू2 के नतीजों और अगले सप्ताह आने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति को लेकर भी सतर्क हैं। विशेषज्ञ ने कहा कि क्यू2 की कमाई क्यू1 की तुलना में कमजोर रह सकती है, क्योंकि क्यू1 में परिचालन लागत के प्रभाव का लाभ मिला था, जो इस बार उसी स्तर पर नहीं मिल सकता।

    विशेषज्ञ के मुताबिक, पिछली मौद्रिक नीति में आरबीआई का रुख अपेक्षाकृत खुला था, लेकिन वैश्विक महंगाई के दबाव और रुपये को समर्थन देने की जरूरत को देखते हुए उसके रुख में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और मौजूदा चुनौतियों से निपटने की स्थिति में है। लंबे समय के निवेशकों के लिए बाजार की कमजोरी में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाने की बात कही गई है, जबकि कम अवधि के निवेशकों के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकार के कदमों से वैश्विक वित्तीय बाजारों में स्थिरता आने तक इंतजार और निगरानी की रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।