Blog

  • जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    जनता दर्शन में सख्त दिखे सीएम योगी, बोले- जनसमस्याओं के समाधान में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

    लखनऊ। सावन के पहले सोमवार को धार्मिक कार्यक्रमों और विधानसभा के मानसून सत्र की व्यस्तताओं के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता दर्शन में लोगों की समस्याएं सुनीं। विभिन्न जिलों से पहुंचे लोगों से उन्होंने व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनके प्रार्थना पत्र संबंधित अधिकारियों को सौंपे और समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए।

    पुलिस मामलों पर दिखाई सख्ती

    जनता दर्शन के दौरान पुलिस से जुड़ी कई शिकायतें सामने आने पर मुख्यमंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई और आरोपियों की गिरफ्तारी में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने मुकदमों में दबाव बनाने और आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी जैसी शिकायतों पर नाराजगी जताते हुए शासन स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन जिलों से इस तरह की शिकायतें लगातार आ रही हैं, वहां संबंधित पुलिस अधीक्षकों की जवाबदेही तय की जाए।

    पीड़ितों के साथ संवेदनशील व्यवहार के निर्देश

    सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। प्रत्येक पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए तथा समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए।

    राजस्व और पुलिस मामलों पर विशेष फोकस
    मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस से जुड़े मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवादों में पहले आपसी संवाद और समझौते का प्रयास किया जाए, उसके बाद आवश्यकता होने पर विधिक कार्रवाई की जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जनसमस्याओं का समाधान पारदर्शिता, संवेदनशीलता और गुणवत्ता के साथ किया जाए, ताकि लोगों को संतोषजनक न्याय और राहत मिल सके।

  • ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    ग्यूपी में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भाजपा में हलचल, सर्वे रिपोर्ट से कई विधायकों की बढ़ी चिंता

    मुरादाबाद। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के आंतरिक सर्वे ने मुरादाबाद मंडल के कई विधायकों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी के लिए कराए गए सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति जनता की नाराजगी सामने आने की चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए सर्वे एजेंसी ने करीब 35 प्रतिशत विधायकों के टिकट बदलने का सुझाव दिया है।

    तीन सर्वे पूरे, चौथा अगस्त-सितंबर में संभव
    भाजपा प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया के तहत अब तक तीन चरणों में सर्वे करा चुकी है। बताया जा रहा है कि तीनों सर्वे में कई क्षेत्रों में विधायकों के प्रति असंतोष एक समान रूप से सामने आया है। अगस्त-सितंबर में चौथे चरण का सर्वे भी कराए जाने की संभावना है, जिसके बाद पार्टी आगे की रणनीति तय कर सकती है।

    मुरादाबाद मंडल में बढ़ी बेचैनी
    मुरादाबाद मंडल को समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। यहां की 27 विधानसभा सीटों में से फिलहाल भाजपा के पास 12 सीटें हैं, जबकि 14 सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है। रामपुर की स्वार सीट भाजपा के सहयोगी दल अपना दल (एस) के खाते में है।

    मंडल के 12 भाजपा विधायकों में से 10 लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। केवल रामवीर सिंह (कुंदरकी) और आकाश सक्सेना (रामपुर) उपचुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचे हैं।

    35% टिकट बदलने की चर्चा
    पार्टी सूत्रों के अनुसार, सर्वे एजेंसी ने जिन क्षेत्रों में जन असंतोष अधिक पाया है, वहां नए उम्मीदवार उतारने की सिफारिश की है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किन विधायकों के नाम इस सूची में हैं, लेकिन यह चर्चा तेज है कि मुरादाबाद मंडल के कुछ विधायक भी इस दायरे में आ सकते हैं। इससे संगठन और जनप्रतिनिधियों के बीच हलचल बढ़ गई है।

    भाजपा का आधिकारिक रुख
    भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर ने कहा कि पार्टी समय-समय पर सर्वे कराती रहती है। फिलहाल विधानसभा चुनाव के लिए टिकट आवेदन की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है और पार्टी का मुख्य फोकस एमएलसी चुनाव पर है।

    मंडल के लगातार दूसरी बार चुने गए भाजपा विधायक

    बलदेव सिंह औलख (बिलासपुर)
    राजबाला (मिलक)
    गुलाब देवी (चंदौसी)
    रितेश गुप्ता (मुरादाबाद नगर)
    राजीव तरारा (मंडी धनौरा)
    महेंद्र खड़गवंशी (हसनपुर)
    सुचि चौधरी (बिजनौर)
    सुशांत सिंह (बढ़ापुर)
    अशोक राणा (धामपुर)
    ओम कुमार (नहटौर)

    मंडल में भाजपा की स्थिति

    जिला भाजपा विधायक
    बिजनौर 4
    रामपुर 3
    मुरादाबाद 2
    अमरोहा 2
    संभल 1

    हालांकि टिकटों को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है, लेकिन आंतरिक सर्वे की चर्चाओं ने चुनाव से करीब एक साल पहले ही भाजपा के भीतर राजनीतिक हलचल तेज कर दी है।

  • राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विधान परिषद में बवाल, सपा का हंगामा, केशव मौर्य ने किया पलटवार

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के मानसून सत्र के पहले दिन श्रीराम मंदिर के दानपात्र से कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। समाजवादी पार्टी ने नियम-105 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर मामले पर चर्चा की मांग की। जैसे ही नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य जवाब देने के लिए खड़े हुए, सपा सदस्य वेल में पहुंचकर नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के चलते सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

    कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी विपक्ष का विरोध जारी रहा। शोर-शराबे के बीच केशव प्रसाद मौर्य ने अपना पक्ष रखा। दोपहर 1:52 बजे सभापति ने कार्यस्थगन प्रस्ताव अस्वीकार करते हुए मामले को अग्रिम कार्रवाई के लिए सरकार को भेजने की घोषणा की। इसके बाद विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर लौटे और सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकी।

    केशव मौर्य का विपक्ष पर पलटवार
    नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए एक रुपये का भी योगदान नहीं दिया, वे अब चढ़ावे की चोरी पर राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाबरी मस्जिद के नाम पर जुटाए गए चंदे का हिसाब भी सार्वजनिक होना चाहिए। उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर मंदिरों के प्रति नकारात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भविष्य में जनता इसका जवाब देगी।

    सपा ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
    समाजवादी पार्टी ने अपने कार्यस्थगन प्रस्ताव में आरोप लगाया कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट के दानपात्र से हुई कथित चोरी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का गंभीर मामला है। विपक्ष का कहना था कि पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं रही और केवल निचले स्तर के लोगों पर कार्रवाई की गई। विपक्ष के नेता लाल बिहारी यादव और सदस्य किरण पाल कश्यप ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़ी दान सामग्री की चोरी गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रभावी कार्रवाई न होने से लोगों में नाराजगी है।

    अन्य मुद्दे भी उठे
    सदन में सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल ने शिक्षकों, कर्मचारियों और सेवानिवृत्त शिक्षकों को निशुल्क एवं कैशलेस चिकित्सा योजना में शामिल करने की मांग उठाई। इस पर नेता सदन ने कहा कि सरकार इस प्रस्ताव पर सकारात्मक विचार करेगी। राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर हुए इस विवाद ने मानसून सत्र के पहले ही दिन सदन का माहौल गर्मा दिया और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली।

  • अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    अदालत से बरी होने के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण शरण सिंह, यूपी की राजनीति में वापसी को लेकर बढ़ी अटकलें

    गोंडा। महिला पहलवानों से जुड़े कथित यौन शोषण मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से बरी होने के बाद कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर उत्तर प्रदेश की सियासत के केंद्र में आ गए हैं। अदालत के फैसले के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा तेज है कि क्या भाजपा उन्हें फिर सक्रिय भूमिका देगी या उनकी राजनीतिक विरासत फिलहाल परिवार के जरिए ही आगे बढ़ेगी।

    टिकट कटा, लेकिन क्षेत्र में बनी रही सक्रियता
    महिला पहलवानों के आरोप सामने आने के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कैसरगंज सीट से बृजभूषण की जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया था। पार्टी के इस फैसले को कानूनी विवाद से दूरी बनाने की रणनीति माना गया। हालांकि, करण भूषण सिंह की जीत ने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में बृजभूषण का जनाधार और संगठनात्मक प्रभाव कायम है।

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि टिकट कटने के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह ने खुद को सक्रिय राजनीति से अलग नहीं किया। देवीपाटन मंडल के विभिन्न जिलों में उनके लगातार कार्यक्रम होते रहे और समर्थकों से संपर्क बना रहा। अदालत से राहत मिलने के बाद उनके आवास पर जुटी समर्थकों की भीड़ को राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।

    समर्थकों ने फैसले को बताया न्याय की जीत
    कैसरगंज सांसद करण भूषण सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह केवल उनके पिता की नहीं, बल्कि न्याय की जीत है। उन्होंने आरोप लगाने वालों और विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अदालत का फैसला सच्चाई की पुष्टि करता है।

    ‘एक बार फिर संसद जाऊंगा’ बयान फिर चर्चा में

    बृजभूषण शरण सिंह पहले भी सार्वजनिक मंचों से यह कह चुके हैं कि वे एक बार फिर संसद पहुंचेंगे। अदालत से बरी होने के बाद उनके इस बयान को नई राजनीतिक संभावनाओं से जोड़कर देखा जा रहा है। समर्थकों का मानना है कि कानूनी बाधाएं समाप्त होने के बाद उनके लिए सक्रिय राजनीति के रास्ते फिर खुल सकते हैं।

    भाजपा के सामने राजनीतिक संतुलन की चुनौती
    हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अदालत से राहत मिलने के बावजूद भाजपा का फैसला केवल कानूनी आधार पर नहीं होगा। पार्टी संगठन, सामाजिक संदेश, राष्ट्रीय छवि और चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखकर ही आगे की रणनीति तय करेगी।

    फिलहाल दो संभावनाओं पर सबसे अधिक चर्चा है
    2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारी दी जा सकती है।
    यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी सक्रिय चुनावी वापसी भी संभव मानी जा रही है।
    हालांकि इन संभावनाओं पर भाजपा की ओर से अभी कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।

    मजबूत क्षेत्रीय नेटवर्क बना बड़ी ताकत
    गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती में बृजभूषण शरण सिंह का मजबूत संगठनात्मक आधार माना जाता है। परिवार की राजनीतिक मौजूदगी भी बरकरार है। उनके बेटे करण भूषण सिंह कैसरगंज से सांसद हैं, जबकि प्रतीक भूषण सिंह गोंडा जिले से विधायक हैं। ऐसे में अदालत के फैसले के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    मामले की पृष्ठभूमि
    जनवरी 2023 में महिला पहलवानों की शिकायतों के बाद यह मामला सामने आया था। लगभग तीन वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया में 127 सुनवाई हुईं और 32 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। 2 जुलाई 2026 को अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को आरोपों से बरी कर दिया है।

  • सावन के पहले सोमवार काशी शिवमय: बाबा विश्वनाथ धाम में चार लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

    सावन के पहले सोमवार काशी शिवमय: बाबा विश्वनाथ धाम में चार लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन


    वाराणसी। सावन के पहले सोमवार पर काशी पूरी तरह शिवमय नजर आई। श्रीकाशी विश्वनाथ धाम सहित जिले के सभी प्रमुख शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। बाबा विश्वनाथ के जलाभिषेक और दर्शन के लिए श्रद्धालु रविवार रात से ही कतारों में डटे रहे। सोमवार दोपहर तक करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन कर नया रिकॉर्ड बनाया।

    भोर चार बजे से शुरू हुआ जलाभिषेक
    विश्वनाथ धाम में सुबह चार बजे मंगला आरती के बाद जलाभिषेक शुरू हुआ। मंदिर प्रशासन ने कांवड़ियों का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पूरी काशी में “हर-हर महादेव” और “बम-बम भोले” के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालु रातभर बैरिकेडिंग में अपनी बारी का इंतजार करते हुए भजन-कीर्तन और शिव आराधना में लीन रहे।

    प्रमुख शिवालयों में भी उमड़ी आस्था
    काशी विश्वनाथ धाम के अलावा मार्कंडेय महादेव, महामृत्युंजय महादेव, तिलभांडेश्वर महादेव, शूलटंकेश्वर और रामेश्वर महादेव सहित अन्य शिवालयों में भी सुबह से जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। पूर्वांचल के कई जिलों से पहुंचे कांवड़ियों ने गंगा और गोमती संगम में स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।

    40 हजार यादव बंधुओं की ऐतिहासिक जलाभिषेक यात्रा
    चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के बैनर तले करीब 40 हजार यादव बंधुओं ने अपनी पारंपरिक जलाभिषेक यात्रा निकाली। 94वें वर्ष आयोजित इस यात्रा की शुरुआत गौरी केदारेश्वर महादेव मंदिर से हुई। श्रद्धालुओं ने लगभग 17 किलोमीटर की यात्रा के दौरान श्रीकाशी विश्वनाथ समेत नौ प्रमुख शिवालयों में जलाभिषेक किया। परंपरा के अनुसार इस बार भी केवल 21 यादव बंधुओं को गर्भगृह में जलाभिषेक की अनुमति मिली।

    कांवड़ शिविरों में गूंजे भजन-कीर्तन
    शहर के चितरंजन पार्क, लक्सा, मंडुवाडीह, मैदागिन समेत विभिन्न स्थानों पर बने कांवड़ शिविरों में रविवार रात से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु रुके। यहां भजन-कीर्तन, शिव आराधना और विश्राम का सिलसिला चलता रहा। सोमवार सुबह गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए विभिन्न मंदिरों की ओर रवाना हुए। सावन के पहले सोमवार पर काशी में उमड़ी यह आस्था और श्रद्धा एक बार फिर भगवान शिव के प्रति भक्तों की अटूट आस्था का सजीव प्रमाण बनी।

  • नेपाल की भारत से नई अपील, सीमा पार यात्रा के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र को मान्यता देने का अनुरोध

    नेपाल की भारत से नई अपील, सीमा पार यात्रा के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र को मान्यता देने का अनुरोध

    नई दिल्ली । नेपाल ने भारत सरकार से औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि वह नेपाली नागरिकों के राष्ट्रीय पहचान पत्र (नेशनल आइडेंटिटी कार्ड) को सीमा पार यात्रा और हवाई सफर के लिए वैध यात्रा दस्तावेज के रूप में मान्यता दे। नेपाल का कहना है कि इस कदम से दोनों देशों के बीच लोगों की आवाजाही अधिक सुरक्षित, आसान और आधुनिक पहचान प्रणाली के अनुरूप हो सकेगी।

    नेपाल और भारत के बीच लंबे समय से खुली सीमा व्यवस्था लागू है, जिसके तहत दोनों देशों के नागरिकों को सामान्य परिस्थितियों में बिना पासपोर्ट और वीजा के एक-दूसरे के देश में आने-जाने की अनुमति है। हालांकि, वर्तमान व्यवस्था में भारत मुख्य रूप से नेपाली नागरिकों के पासपोर्ट और नागरिकता प्रमाण पत्र को आधिकारिक पहचान दस्तावेज के रूप में स्वीकार करता है। अब नेपाल चाहता है कि उसके राष्ट्रीय पहचान पत्र को भी इसी श्रेणी में शामिल किया जाए।

    नेपाल के आव्रजन विभाग के अनुसार, इस संबंध में जून के अंतिम सप्ताह में भारत सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा गया था। प्रस्ताव में अनुरोध किया गया है कि नेपाली नागरिकों के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र को सीमा पार आवागमन और हवाई यात्रा के दौरान वैध पहचान दस्तावेज के रूप में मान्यता दी जाए।

    नेपाल सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय पहचान पत्र आधुनिक बायोमेट्रिक तकनीक पर आधारित है। इसमें फिंगरप्रिंट, चेहरे की पहचान और आईरिस स्कैन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सुरक्षित रहती हैं। इसके कारण यह पारंपरिक नागरिकता प्रमाण पत्र की तुलना में अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय माना जाता है।

    नेपाल में सरकार विभिन्न सरकारी सेवाओं के लिए राष्ट्रीय पहचान पत्र के उपयोग को लगातार बढ़ावा दे रही है। पासपोर्ट आवेदन, बैंक खाता खोलने, भूमि पंजीकरण और अन्य कई सरकारी कार्यों में इस पहचान पत्र को अनिवार्य बनाया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य धीरे-धीरे पुराने नागरिकता प्रमाण पत्रों की जगह डिजिटल रूप से सत्यापित किए जा सकने वाले पहचान पत्रों को लागू करना है।

    नेपाल की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने राष्ट्रीय पहचान पत्र से जुड़े तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं के बारे में जानकारी भी प्राप्त की है। बताया गया कि यह औपचारिक वार्ता नहीं थी, बल्कि कार्ड की विशेषताओं और सुरक्षा व्यवस्था को समझने के उद्देश्य से जानकारी का आदान-प्रदान किया गया।

    नेपाल के अधिकारियों का मानना है कि यदि राष्ट्रीय पहचान पत्र को भारत में भी वैध यात्रा दस्तावेज का दर्जा मिल जाता है तो दोनों देशों की सुरक्षा व्यवस्था और पहचान सत्यापन प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो जाएगी। इससे सीमा पार आवाजाही के दौरान पहचान संबंधी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

    वर्तमान व्यवस्था के तहत भारत आने वाले नेपाली नागरिकों के लिए पासपोर्ट और नागरिकता प्रमाण पत्र स्वीकार किए जाते हैं। वहीं नेपाल जाने वाले भारतीय नागरिक पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र अथवा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा जारी कुछ अन्य मान्य पहचान पत्रों का उपयोग कर सकते हैं।

    नेपाल के राष्ट्रीय पहचान एवं नागरिक पंजीकरण विभाग के अनुसार अब तक 45 लाख से अधिक नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं, जबकि लगभग दो करोड़ लोगों ने इसके लिए पंजीकरण कराया है। नेपाल को उम्मीद है कि भविष्य में इस डिजिटल पहचान प्रणाली को भारत की मान्यता मिलने से दोनों देशों के बीच आवागमन और अधिक सुरक्षित तथा सुविधाजनक हो सकेगा।

  • उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    उत्तर प्रदेश की वैश्विक उड़ान तेज, पीयूष गोयल बोले- व्यापार समझौतों से चमड़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि उत्पादों को मिलेगा नया बाजार

    नई दिल्ली । केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल स्थानीय आर्थिक शक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से वैश्विक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में उद्योग, निर्यात और रोजगार के नए अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। भारत द्वारा किए गए मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उत्तर प्रदेश के उद्योगों, किसानों, कारीगरों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों को मिल रहा है।

    पीयूष गोयल ने कहा कि भारत के व्यापार समझौते देश के विभिन्न राज्यों के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख उद्योग अब वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इससे राज्य के निर्यातकों को नए बाजार मिल रहे हैं और स्थानीय उत्पादों की मांग विदेशों में बढ़ने की संभावना मजबूत हो रही है।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कानपुर का प्रसिद्ध चमड़ा उद्योग उत्तर प्रदेश की औद्योगिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। अब व्यापार समझौतों और बेहतर वैश्विक पहुंच के कारण इस क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी स्थिति और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि चमड़ा उद्योग से जुड़े हजारों कारीगरों और कारोबारियों को इसका सीधा फायदा पहुंच सकता है।

    उन्होंने नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र का भी उल्लेख किया और कहा कि यह क्षेत्र देश के प्रमुख उत्पादन केंद्रों में तेजी से विकसित हो रहा है। वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने से नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं और निर्यातकों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और तकनीकी उत्पादों के निर्माण में उत्तर प्रदेश की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

    पीयूष गोयल ने सहारनपुर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की विदेशों में मांग बढ़ रही है और व्यापारिक बाधाएं कम होने से छोटे कारीगरों और लघु उद्योगों को नए अवसर मिल सकते हैं। इससे स्थानीय कला और परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने में मदद मिलेगी।

    उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि क्षेत्र का भी जिक्र करते हुए कहा कि किसानों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजारों में संभावनाएं बढ़ रही हैं। बेहतर व्यापार व्यवस्था और निर्यात के नए रास्ते खुलने से कृषि उत्पादकों को अधिक अवसर मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    गोयल ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का काम तेज हुआ है। कानपुर का चमड़ा उद्योग, नोएडा का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र, सहारनपुर का हस्तशिल्प और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कृषि उत्पाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम कर रही हैं। औद्योगिक विकास, निर्यात वृद्धि और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों के चलते आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

  • बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

    बैंकिंग सेक्टर में बड़ा बदलाव, आरबीआई के नए फैसले से जमा दरों और फंडिंग रणनीति पर पड़ेगा असर

     
    नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए बल्क डिपॉजिट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिससे उन्हें जमा दरें तय करने में पहले की तुलना में अधिक लचीलापन मिलेगा। नए नियमों के तहत बैंक अब बल्क डिपॉजिट की कीमत तय करते समय लिक्विडिटी कवरेज रेश्यो यानी एलसीआर के रन-ऑफ रेट्स को ध्यान में रख सकेंगे। माना जा रहा है कि यह बदलाव बैंकों की फंडिंग लागत, तरलता प्रबंधन और एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

    रेटिंग एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे बैंक अपनी जरूरतों और जमा की तरलता विशेषताओं के आधार पर बल्क डिपॉजिट की ब्याज दरों को अधिक प्रभावी तरीके से तय कर सकेंगे। पहले जमा की लिक्विडिटी विशेषताओं के आधार पर ब्याज दरों में अंतर करने की गुंजाइश सीमित थी।

    नए ढांचे के तहत बैंक अलग-अलग प्रकार के डिपॉजिट और उनसे जुड़े तरलता जोखिम को ध्यान में रखते हुए कीमत तय कर पाएंगे। इससे बैंकों को यह आकलन करने में सुविधा होगी कि किसी जमा राशि के अचानक निकलने की स्थिति में उन्हें कितनी नकदी की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए बैंकों को पर्याप्त हाई-क्वालिटी लिक्विड एसेट्स रखने की आवश्यकता होगी, ताकि किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में नकदी की जरूरत पूरी की जा सके।

    विशेषज्ञों के अनुसार, इस बदलाव से बैंकों के बीच जमा आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। जिन बैंकों का जमा आधार मजबूत है और जिनके पास करंट अकाउंट तथा सेविंग्स अकाउंट की अच्छी हिस्सेदारी है, उन्हें इसका फायदा मिल सकता है। वहीं, कमजोर जमा आधार वाले बैंकों को फंड जुटाने के लिए अधिक लागत का सामना करना पड़ सकता है।

    आरबीआई ने नए नियमों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए डिस्क्लोजर से जुड़ी शर्तों को भी मजबूत किया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक जैसी डिपॉजिट कैटेगरी के लिए ब्याज दर तय करने में किसी तरह का भेदभाव न हो। यानी समान परिस्थितियों वाले ग्राहकों के लिए दरों में मनमाना अंतर नहीं किया जा सकेगा।

    संशोधित निर्देशों के अनुसार, सभी बैंक शाखाओं में जमा पर लागू ब्याज दरों को समान रखना जरूरी होगा। हालांकि, बल्क डिपॉजिट के मामले में लिक्विडिटी रिस्क और उससे जुड़ी लागत के आधार पर कीमत तय करने की अनुमति दी गई है। यह व्यवस्था बैंकों को जोखिम और लागत के अनुसार बेहतर रणनीति बनाने में मदद करेगी।

    आरबीआई के नए निर्देश 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे। इसके तहत बैंक द्वारा ग्राहकों को दिया जाने वाला वास्तविक ब्याज उनकी वेबसाइट पर पहले से घोषित ब्याज दरों के शेड्यूल के अनुसार ही होना चाहिए। इससे ग्राहकों को भी जमा दरों की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

    नए नियमों के तहत बैंकों को प्रत्येक कार्य दिवस की सुबह 10 बजे तक अपनी वेबसाइट पर बल्क डिपॉजिट के लिए लागू ब्याज दरें प्रकाशित करनी होंगी। इसके लिए उन्हें 10 मिनट का अतिरिक्त समय यानी ग्रेस पीरियड भी दिया जाएगा। इससे बैंकिंग व्यवस्था में स्पष्टता बढ़ेगी और ग्राहक भी बेहतर जानकारी के आधार पर अपने निवेश संबंधी फैसले ले सकेंगे।

    कुल मिलाकर, आरबीआई का यह कदम बैंकिंग क्षेत्र में तरलता प्रबंधन को मजबूत करने और जमा बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे बैंकों को अपनी वित्तीय रणनीति तैयार करने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी, जबकि नियामकीय निगरानी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

  • निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    निवेश और तकनीक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार, वैश्विक बाजारों में भारत की स्थिति होगी मजबूत

    नई दिल्ली ।भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। देश के प्रमुख उद्योग संगठन एसोचैम ने अंतरराष्ट्रीय कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए बिजनेस फ्रांस और भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के साथ रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का उद्देश्य व्यापार विस्तार, निवेश को प्रोत्साहन, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक बाजारों में भारतीय कंपनियों की पहुंच को मजबूत करना है।

    एसोचैम के अनुसार, इन समझौतों के माध्यम से विभिन्न देशों के उद्योगों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाएगा। इसके तहत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के आदान-प्रदान, निवेश के अवसरों की पहचान, नई तकनीकों के उपयोग और संयुक्त कारोबारी परियोजनाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

    बिजनेस फ्रांस के साथ हुए समझौते में भारत और फ्रांस की कंपनियों के बीच व्यापार एवं निवेश के नए अवसर विकसित करने की योजना बनाई गई है। दोनों संस्थाएं तकनीकी सहयोग, संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने, बाजार से जुड़ी जानकारियों के आदान-प्रदान और व्यापारिक आयोजनों के संयुक्त संचालन में सहयोग करेंगी।

    समझौते के तहत व्यापार मेलों, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और अन्य कारोबारी गतिविधियों के जरिए दोनों देशों के उद्यमों को एक-दूसरे के करीब लाने का प्रयास किया जाएगा। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।

    एसोचैम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती भागीदारी उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। उन्होंने कहा कि फ्रांस और अरब देशों के साथ हुई ये साझेदारियां मजबूत संस्थागत संबंध बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे कंपनियों को नए बाजार तलाशने, निवेश बढ़ाने और लंबे समय तक टिकाऊ आर्थिक विकास को गति देने में मदद मिलेगी।

    बिजनेस फ्रांस के कृषि निर्यात प्रभाग के प्रमुख वियानी मेनिएर ने इस साझेदारी को भारत और फ्रांस के कारोबारी संबंधों को मजबूत करने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे दोनों देशों की कंपनियों, संस्थानों और निवेशकों के बीच सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे।

    भारत एवं अरब देशों के वाणिज्य, उद्योग एवं कृषि मंडल के कार्यवाहक महासचिव डॉ. वाइल एस. एच. अव्वाद ने कहा कि यह समझौता भारत और अरब क्षेत्र के बीच व्यापारिक संवाद को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके जरिए निवेश साझेदारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

    इस समझौते के तहत व्यापारिक सूचनाओं का साझा उपयोग, निवेश संबंधी अवसरों की पहचान, संयुक्त परियोजनाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी हस्तांतरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा।

    भारत, फ्रांस और अरब देशों के बीच यह पहल ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर व्यापारिक साझेदारियां तेजी से बदल रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के समझौते भारतीय उद्योगों को विदेशी बाजारों से जोड़ने, निवेश आकर्षित करने और नई तकनीकों तक पहुंच बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

  • भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती, कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयला उत्पादन 14.78 मिलियन टन पहुंचा

    भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूती, कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयला उत्पादन 14.78 मिलियन टन पहुंचा


    नई दिल्ली ।
    भारत के कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खदानों से उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। जुलाई 2026 में इन खदानों से कोयला उत्पादन सालाना आधार पर 9.6 प्रतिशत बढ़कर 14.78 मिलियन टन (एमटी) तक पहुंच गया है। कोयला मंत्रालय ने सोमवार को जारी जानकारी में बताया कि यह वृद्धि देश के कोयला क्षेत्र में बेहतर परिचालन क्षमता, उत्पादन दक्षता और खनन संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल को दर्शाती है।

    मंत्रालय के अनुसार जुलाई के दौरान कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कोयले की आपूर्ति भी बढ़कर 17.49 मिलियन टन हो गई। उत्पादन और आपूर्ति में यह वृद्धि ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब देश लगातार ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने पर जोर दे रहा है। सरकार का लक्ष्य कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाकर आयात पर निर्भरता को कम करना है।

    कोयला मंत्रालय ने बताया कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत से जुलाई तक कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से कुल उत्पादन 63.16 मिलियन टन दर्ज किया गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में हुए 59.42 मिलियन टन उत्पादन की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में कोयले की संचयी आपूर्ति भी बढ़कर 70.14 मिलियन टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 66.02 मिलियन टन था। इस तरह आपूर्ति में करीब 5.8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है।

    मंत्रालय ने कहा कि कैप्टिव और वाणिज्यिक खदानों से उत्पादन में लगातार सुधार होने से देश में आयातित कोयले की आवश्यकता कम होगी। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को भी मजबूती मिलेगी। कोयला देश के बिजली उत्पादन और कई औद्योगिक क्षेत्रों के लिए एक प्रमुख कच्चा माल है, इसलिए घरेलू उत्पादन में वृद्धि को आर्थिक विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    सरकार की आत्मनिर्भर भारत पहल के तहत कोयला क्षेत्र में उत्पादन क्षमता बढ़ाने, नई खदानों को सक्रिय करने और निजी भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला खनन क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग करने के लिए नीतिगत सुधारों, बेहतर निगरानी व्यवस्था और हितधारकों के सहयोग के माध्यम से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

    मंत्रालय के मुताबिक आने वाले समय में कोयला उत्पादन और आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए कई स्तरों पर काम जारी रहेगा। इसका उद्देश्य देश की बढ़ती ऊर्जा और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयला उपलब्ध कराना है। उत्पादन में यह वृद्धि भारत को ऊर्जा क्षेत्र में अधिक मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।